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भारत का इतिहास

कंपनी शासन का विस्तार और गवर्नर-जनरल — प्लासी से डलहौज़ी तक, युद्ध, संधियाँ व अधिनियम — UPSC/RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
22 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: भारत में यूरोपीय व्यापार की शुरुआत पुर्तगालियों से हुई — वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा; इसके बाद डच (1602), अंग्रेज़ (ईस्ट इंडिया कंपनी, 1600) और फ्रांसीसी (1664) कंपनियाँ आईं। अंग्रेज़-फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्विता तीन कर्नाटक युद्धों में निपटी (वांडीवाश 1760 निर्णायक)। प्लासी (1757) में क्लाइव ने सिराजुद्दौला को हराया और बक्सर (1764) में मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला व शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना पराजित हुई; इलाहाबाद की संधि (1765) से कंपनी को बंगाल, बिहार, ओडिशा की दीवानी मिली और द्वैध शासन शुरू हुआ (1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने समाप्त किया)। विस्तार के मुख्य औज़ार थे — चार आंग्ल-मैसूर, तीन आंग्ल-मराठा और दो आंग्ल-सिख युद्ध, वेलेजली की सहायक संधि (1798) और डलहौज़ी का व्यपगत सिद्धांत (सतारा 1848, झाँसी 1853, नागपुर 1854)। भू-राजस्व में स्थायी बंदोबस्त (1793, कॉर्नवालिस), रैयतवाड़ी (रीड-मुनरो) और महालवाड़ी लागू हुए। प्रमुख अधिनियम हैं — रेग्युलेटिंग एक्ट 1773, पिट्स इंडिया एक्ट 1784, चार्टर एक्ट 1813, 1833, 1853; बेंटिक ने 1829 में सती प्रथा समाप्त की और डलहौज़ी के समय 1853 में पहली रेल (बंबई–ठाणे) चली।


संक्षिप्त उत्तर

घटना / अधिनियमवर्षमुख्य व्यक्ति / परिणाम
वास्को द गामा कालीकट पहुँचा1498समुद्री मार्ग की खोज; ज़मोरिन का स्वागत
अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी1600महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम का चार्टर
प्लासी का युद्ध1757क्लाइव बनाम सिराजुद्दौला; मीर जाफ़र नवाब बना
बक्सर का युद्ध1764हेक्टर मुनरो बनाम मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला, शाह आलम II
इलाहाबाद की संधि1765दीवानी अधिकार; द्वैध शासन (क्लाइव)
रेग्युलेटिंग एक्ट1773बंगाल का गवर्नर-जनरल (वारेन हेस्टिंग्स); सुप्रीम कोर्ट (1774)
पिट्स इंडिया एक्ट1784बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल; द्वैध नियंत्रण
स्थायी बंदोबस्त1793कॉर्नवालिस; ज़मींदार भूमि के स्वामी
सहायक संधि1798वेलेजली; पहला राज्य हैदराबाद
सती उन्मूलन1829विलियम बेंटिक
चार्टर एक्ट1833भारत का गवर्नर-जनरल (बेंटिक प्रथम)
व्यपगत सिद्धांत1848–56डलहौज़ी; सतारा पहला राज्य
पहली रेल1853बंबई–ठाणे (डलहौज़ी)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

1498 से 1857 तक का यह अध्याय आधुनिक भारत की नींव है। UPSC CSE प्रारंभिक में अधिनियमों के प्रावधान, भू-राजस्व व्यवस्थाओं की तुलना और सहायक संधि / व्यपगत सिद्धांत पर कथन-आधारित प्रश्न बनते हैं; अधिनियमों का यह भाग भारतीय राजव्यवस्था के "संवैधानिक विकास" से भी जुड़ता है। RPSC RAS में गवर्नर-जनरल और उनके कार्य, संधियाँ और 1818 के आसपास राजपूताना राज्यों की अंग्रेज़ों से संधियाँ पृष्ठभूमि के रूप में आती हैं। SSC CGL/CHSL और राजस्थान CET (स्नातक) में युद्ध-वर्ष, संधि और गवर्नर-जनरल का मिलान सबसे अधिक पूछा जाता है। इस अध्याय का अगला चरण 1857 की क्रांति है, जिसके कारणों में व्यपगत सिद्धांत और अवध का विलय सीधे शामिल हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — अधिनियम, भू-राजस्व, विस्तार की नीतियाँ
  • RPSC RAS — गवर्नर-जनरल, संधियाँ, राजपूताना संदर्भ
  • SSC CGL / CHSL — युद्ध, वर्ष, संधि, "किसके काल में"
  • राजस्थान CET (स्नातक), पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी
  • RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक (इतिहास)

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. युद्ध — संधि — गवर्नर-जनरल का त्रि-मिलान
  2. "किसके काल में" — सती उन्मूलन, रेल, स्थायी बंदोबस्त
  3. कालक्रम — अधिनियम या युद्धों का क्रम
  4. भू-राजस्व व्यवस्थाओं की तुलना (किससे राजस्व लिया गया, कहाँ लागू)
  5. सहायक संधि की शर्तें और व्यपगत सिद्धांत से हड़पे गए राज्य
  6. अधिनियमों के प्रावधानों पर कथन

3. यूरोपीय कंपनियों का आगमन

कंपनी / देशस्थापना / आगमनप्रमुख केंद्रमहत्वपूर्ण तथ्य
पुर्तगाली1498 (वास्को द गामा)गोवा (मुख्यालय), दमन, दीव, कोचीनपहला वायसराय फ्रांसिस्को द अल्मीडा (1505); अल्बुकर्क ने 1510 में बीजापुर से गोवा जीता; भारत आने वाले पहले और जाने वाले अंतिम यूरोपीय
डच (VOC)1602मसूलीपट्टनम (पहली फ़ैक्टरी, 1605), पुलिकट, नागपट्टिनम, चिनसुरामुख्य रुचि इंडोनेशिया के मसाला द्वीप; बेदरा का युद्ध (1759) में अंग्रेज़ों से हार
अंग्रेज़ (EIC)1600सूरत (1613), मद्रास (फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज), बंबई, कलकत्ता (फ़ोर्ट विलियम)बंबई 1661 में पुर्तगाल से दहेज में इंग्लैंड के राजा को मिला, 1668 में कंपनी को; कलकत्ता की नींव जॉब चार्नॉक (1690)
डेनिश1616ट्रांकेबार (तमिलनाडु), सेरामपुर (बंगाल)1845 तक अपनी बस्तियाँ अंग्रेज़ों को बेच दीं
फ्रांसीसी1664 (कोल्बर्ट, लुई XIV के समय)सूरत (पहली फ़ैक्टरी, 1668), पॉन्डिचेरी (मुख्यालय), चंद्रनगर, माहे, कराईकलपॉन्डिचेरी की नींव फ्रांस्वा मार्टिन; गवर्नर डुप्ले के समय सबसे महत्वाकांक्षी

ध्यान दें: कई फ़ैक्टरियों के स्थापना-वर्ष अलग-अलग पुस्तकों में एक-दो वर्ष आगे-पीछे मिलते हैं। परीक्षा के लिए क्रम याद रखें — आगमन: पुर्तगाली → अंग्रेज़ (कंपनी 1600) → डच (1602) → डेनिश (1616) → फ्रांसीसी (1664)। भारत पहुँचने और व्यापार शुरू करने के क्रम में पुर्तगाली के बाद डच, फिर अंग्रेज़ गिने जाते हैं।

3.1 अंग्रेज़ों के प्रारंभिक कदम

वर्षघटना
1600ईस्ट इंडिया कंपनी को एलिज़ाबेथ प्रथम से पूर्व के व्यापार का एकाधिकार-चार्टर
1608कैप्टन हॉकिन्स जहाँगीर के दरबार में
1613सूरत में स्थायी फ़ैक्टरी (जहाँगीर की अनुमति)
1615सर टॉमस रो — जहाँगीर के दरबार में राजदूत
1639मद्रास की भूमि प्राप्त — फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज
1668बंबई कंपनी को हस्तांतरित
1690जॉब चार्नॉक द्वारा सुतानाती में बस्ती — कलकत्ता का आरंभ
1717मुगल बादशाह फ़र्रुख़सियर का फ़रमान — बंगाल में शुल्क-मुक्त व्यापार (इसे कंपनी का "मैग्ना कार्टा" कहा गया)

मुगल काल में यूरोपीय यात्रियों और राजदूतों की भूमिका के लिए मुगल साम्राज्य नोट देखें।


4. कर्नाटक युद्ध (आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष) — संक्षेप

युद्धवर्षपृष्ठभूमि / प्रमुख घटनासंधि / परिणाम
प्रथम1746–48यूरोप में ऑस्ट्रिया का उत्तराधिकार युद्ध; फ्रांसीसियों ने मद्रास जीता; सेंट थोमे (अडयार) में फ्रांसीसी सेना ने कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन की बड़ी सेना को हरायाए-ला-शापेल की संधि (1748) — मद्रास अंग्रेज़ों को वापस
द्वितीय1749–54हैदराबाद और कर्नाटक के उत्तराधिकार विवाद; डुप्ले की सक्रिय नीति; क्लाइव द्वारा अर्काट पर अधिकार (1751)पॉन्डिचेरी की संधि; डुप्ले वापस बुलाया गया
तृतीय1756–63यूरोप में सप्तवर्षीय युद्ध; वांडीवाश (1760) — आयर कूट ने फ्रांसीसी काउंट डी लाली को हरायापेरिस की संधि (1763); भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक शक्ति समाप्त

5. बंगाल: प्लासी से द्वैध शासन तक

5.1 प्लासी का युद्ध (23 जून 1757)

  • कारण: 1717 के फ़रमान (दस्तक) का दुरुपयोग, कलकत्ता की किलेबंदी, नवाब के विरोधियों को शरण। 1756 में सिराजुद्दौला ने कलकत्ता पर अधिकार किया।
  • पक्ष: रॉबर्ट क्लाइव बनाम बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला।
  • षड्यंत्र: नवाब के सेनापति मीर जाफ़र, राय दुर्लभ, जगत सेठ और अमीचंद अंग्रेज़ों से मिले हुए थे; इसलिए इसे सैन्य से अधिक कूटनीतिक विजय कहा जाता है।
  • परिणाम: मीर जाफ़र नवाब बना; कंपनी को 24 परगना की ज़मींदारी और भारी धन मिला। 1760 में मीर जाफ़र की जगह मीर क़ासिम नवाब बना।

5.2 बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764)

  • मीर क़ासिम ने राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानांतरित की, सेना को आधुनिक बनाया और दस्तक के दुरुपयोग का विरोध किया।
  • संयुक्त सेना — मीर क़ासिम (बंगाल), शुजाउद्दौला (अवध का नवाब) और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय।
  • अंग्रेज़ सेनापति — हेक्टर मुनरो।
  • महत्व — प्लासी के विपरीत यह खुली सैन्य विजय थी, जिसने उत्तर भारत की तीन शक्तियों को एक साथ हराया।

5.3 इलाहाबाद की संधि (1765)

किसके साथमुख्य शर्तें
शाह आलम द्वितीयकंपनी को बंगाल, बिहार, ओडिशा की दीवानी (राजस्व वसूली का अधिकार); बदले में बादशाह को प्रतिवर्ष 26 लाख रुपये; कड़ा और इलाहाबाद के ज़िले बादशाह को
शुजाउद्दौला (अवध)युद्ध-हर्जाने के रूप में 50 लाख रुपये; कड़ा व इलाहाबाद छोड़कर अवध उसे लौटाया गया

5.4 द्वैध शासन (1765–1772)

क्लाइव ने बंगाल में दोहरी व्यवस्था बनाई — दीवानी (राजस्व) कंपनी के पास और निज़ामत (प्रशासन, पुलिस, न्याय) नाममात्र के नवाब के पास। परिणाम यह हुआ कि शक्ति कंपनी के पास थी पर उत्तरदायित्व किसी का नहीं। 1770 के भीषण बंगाल अकाल ने इस व्यवस्था की विफलता उजागर की और 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने द्वैध शासन समाप्त कर कंपनी को सीधे राजस्व-प्रशासन सौंपा।


6. विस्तार के युद्ध — तालिकाएँ

6.1 आंग्ल-मैसूर युद्ध (4)

युद्धवर्षमैसूर का शासकसंधिगवर्नर / गवर्नर-जनरल
प्रथम1767–69हैदर अलीमद्रास की संधि (1769) — हैदर के अनुकूल— (गवर्नर-जनरल पद 1774 में बना)
द्वितीय1780–84हैदर अली (मृत्यु 1782), फिर टीपू सुल्तानमंगलौर की संधि (1784)वारेन हेस्टिंग्स
तृतीय1790–92टीपू सुल्तानश्रीरंगपट्टनम की संधि (1792) — टीपू को लगभग आधा राज्य छोड़ना पड़ाकॉर्नवालिस
चतुर्थ1799टीपू सुल्तान (श्रीरंगपट्टनम में मृत्यु)मैसूर में वोडेयार वंश पुनः स्थापित, सहायक संधिवेलेजली

6.2 आंग्ल-मराठा युद्ध (3)

युद्धवर्षप्रमुख घटनाएँसंधिगवर्नर-जनरल
प्रथम1775–82रघुनाथराव (राघोबा) का पक्ष; वडगाँव में अंग्रेज़ों को अपमानजनक समझौता (1779)सालबाई की संधि (1782) — महादजी सिंधिया की मध्यस्थता; यथास्थितिवारेन हेस्टिंग्स
द्वितीय1803–05पेशवा बाजीराव द्वितीय ने बसीन की संधि (1802) से सहायक संधि स्वीकारी; असाई और लासवाड़ी के युद्ध (1803)देवगाँव (भोंसले, 1803), सुर्जी-अर्जनगाँव (सिंधिया, 1803), राजपुरघाट (होल्कर, 1805)वेलेजली
तृतीय1817–18पिंडारियों के विरुद्ध अभियान के साथ; कोरेगाँव, किरकी, सीताबर्डी, महिदपुर के युद्धपेशवा पद समाप्त; बाजीराव द्वितीय को पेंशन देकर बिठूर भेजा गयालॉर्ड हेस्टिंग्स

6.3 आंग्ल-सिख युद्ध (2)

युद्धवर्षप्रमुख युद्ध-स्थलसंधि / परिणामगवर्नर-जनरल
प्रथम1845–46मुदकी, फ़िरोज़शाह, अलीवाल, सोबराँवलाहौर की संधि (1846); बाद में भैरोंवाल की संधि (1846)हार्डिंग
द्वितीय1848–49चिलियाँवाला, गुजरात (पंजाब)पंजाब का विलय (1849)डलहौज़ी

महाराजा रणजीत सिंह और अंग्रेज़ों के बीच अमृतसर की संधि (1809) लॉर्ड मिंटो प्रथम के समय हुई थी, जिससे सतलुज नदी सीमा बनी। रणजीत सिंह की मृत्यु (1839) के बाद पंजाब में अस्थिरता ने युद्धों का मार्ग खोला।


7. वेलेजली की सहायक संधि (1798)

लॉर्ड वेलेजली (1798–1805) ने भारतीय राज्यों को बिना युद्ध के अधीन करने के लिए सहायक संधि (Subsidiary Alliance) का व्यवस्थित प्रयोग किया। कई पुस्तकों में फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले को इस विचार का प्रारंभिक प्रयोगकर्ता बताया जाता है, पर इसे बड़े पैमाने की नीति वेलेजली ने बनाया।

शर्तअर्थ
सेनाराज्य में अंग्रेज़ी सेना तैनात; उसका ख़र्च राज्य देगा (नकद या भू-भाग के रूप में)
रेज़िडेंटराज्य की राजधानी में एक अंग्रेज़ रेज़िडेंट
विदेश नीतिअंग्रेज़ों की अनुमति के बिना किसी अन्य राज्य से युद्ध या संधि नहीं
यूरोपीयअंग्रेज़ों के अतिरिक्त किसी यूरोपीय को सेवा में नहीं रखा जाएगा
बदले मेंकंपनी राज्य की बाहरी आक्रमण और आंतरिक विद्रोह से रक्षा करेगी
सहायक संधि स्वीकार करने वाले प्रमुख राज्यवर्ष
हैदराबाद (निज़ाम) — पहला1798
मैसूर (टीपू के बाद)1799
तंजौर1799
अवध1801
पेशवा (बसीन की संधि)1802
भोंसले (बरार), सिंधिया1803

8. डलहौज़ी का व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse)

डलहौज़ी (1848–56) के अनुसार, कंपनी पर निर्भर (आश्रित) राज्य का शासक यदि बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी के मर जाए, तो वह राज्य कंपनी में मिल जाएगा; कंपनी की अनुमति के बिना गोद लिए पुत्र को राज्य का उत्तराधिकार नहीं मिलेगा।

राज्यवर्ष
सतारा (पहला)1848
जैतपुर, संबलपुर1849
बघाट1850
उदयपुर (छत्तीसगढ़ क्षेत्र का, राजस्थान का नहीं)1852
झाँसी1853
नागपुर1854

ध्यान दें: अवध (1856) का विलय व्यपगत सिद्धांत से नहीं, बल्कि "कुशासन" के आरोप पर हुआ (नवाब वाजिद अली शाह)। डलहौज़ी ने कई पूर्व शासकों की उपाधियाँ और पेंशन भी समाप्त कीं (जैसे नाना साहब की पेंशन)। ये कदम 1857 की क्रांति के राजनीतिक कारणों में गिने जाते हैं।


9. भू-राजस्व व्यवस्थाएँ

बिंदुस्थायी बंदोबस्तरैयतवाड़ीमहालवाड़ी
वर्ष17931792 में बारामहल में प्रयोग; 1820 के आसपास मद्रास में व्यापक1822 (होल्ट मैकेंज़ी); 1833 में संशोधित
संबद्ध व्यक्तिलॉर्ड कॉर्नवालिस (जॉन शोर की भूमिका)अलेक्ज़ेंडर रीड, टॉमस मुनरोहोल्ट मैकेंज़ी; बाद में मार्टिन बर्ड
राजस्व किससेज़मींदार सेसीधे किसान (रैयत) सेगाँव / महाल (समुदाय) से — मुखिया/लंबरदार के माध्यम से
भूमि का स्वामीज़मींदाररैयतगाँव-समुदाय के सदस्य
राजस्व की अवधिस्थायी रूप से निश्चितसमय-समय पर पुनर्निर्धारणसमय-समय पर पुनर्निर्धारण
क्षेत्रबंगाल, बिहार, ओडिशा (और कुछ अन्य भाग)मद्रास, बंबई प्रेसीडेंसी, असम के भागपश्चिमोत्तर प्रांत (आगरा क्षेत्र), पंजाब, मध्य भारत के भाग

स्थायी बंदोबस्त में राजस्व समय पर न देने पर ज़मींदारी नीलाम कर दी जाती थी (सूर्यास्त क़ानून — निश्चित तिथि के सूर्यास्त तक भुगतान)। राज्य को निश्चित आय मिली, पर बढ़ती कृषि आय का लाभ उसे नहीं मिला और किसान ज़मींदारों की दया पर रहे।


10. प्रमुख अधिनियम (1773–1853)

अधिनियममुख्य प्रावधान
रेग्युलेटिंग एक्ट 1773कंपनी के मामलों पर ब्रिटिश संसद का पहला सीधा नियंत्रण; बंगाल का गवर्नर "बंगाल का गवर्नर-जनरल" (प्रथम — वारेन हेस्टिंग्स) और 4 सदस्यों की परिषद; मद्रास और बंबई बंगाल के अधीन; कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774) — मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे
पिट्स इंडिया एक्ट 1784राजनीतिक मामलों के लिए बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल, व्यापारिक मामलों के लिए कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स — द्वैध नियंत्रण; कंपनी के भारतीय क्षेत्रों को "ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र" कहा गया
चार्टर एक्ट 1813कंपनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन के व्यापार को छोड़कर); शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये; ईसाई मिशनरियों को भारत आने की अनुमति
चार्टर एक्ट 1833बंगाल का गवर्नर-जनरल अब "भारत का गवर्नर-जनरल" (प्रथम — विलियम बेंटिक); कंपनी की व्यापारिक गतिविधियाँ समाप्त, केवल प्रशासनिक निकाय; परिषद में विधि सदस्य (मैकाले); सरकारी पदों पर नियुक्ति में धर्म, जन्म, रंग के आधार पर भेदभाव न करने का प्रावधान
चार्टर एक्ट 1853सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता द्वारा भर्ती; गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्य अलग; चार्टर की अवधि निश्चित नहीं की गई (अंतिम चार्टर एक्ट)
भारत सरकार अधिनियम 18581857 के बाद कंपनी का शासन समाप्त, सत्ता ब्रिटिश क्राउन को; गवर्नर-जनरल को "वायसराय" भी कहा गया (प्रथम — कैनिंग); भारत सचिव का पद

11. गवर्नर / गवर्नर-जनरल तालिका (हेस्टिंग्स से कैनिंग तक)

गवर्नर-जनरलकार्यकालप्रमुख कार्य / घटनाएँ
वारेन हेस्टिंग्स1772–1785 (1774 से गवर्नर-जनरल)द्वैध शासन का अंत (1772); रेग्युलेटिंग एक्ट; पिट्स इंडिया एक्ट; प्रथम आंग्ल-मराठा व द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध; रोहिल्ला युद्ध (1774); एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल (1784, विलियम जोन्स); कलकत्ता मदरसा (1781); इंग्लैंड में महाभियोग
लॉर्ड कॉर्नवालिस1786–1793स्थायी बंदोबस्त (1793); कॉर्नवालिस संहिता; सिविल सेवा का संगठन ("भारतीय सिविल सेवा का जनक" कहा जाता है); ज़िलों में पुलिस थाने; तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
सर जॉन शोर1793–1798अहस्तक्षेप की नीति; खर्दा का युद्ध (1795) — मराठों ने निज़ाम को हराया
लॉर्ड वेलेजली1798–1805सहायक संधि; चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799); द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध; फ़ोर्ट विलियम कॉलेज (1800)
सर जॉर्ज बार्लो1805–1807वेल्लोर का सिपाही विद्रोह (1806)
लॉर्ड मिंटो प्रथम1807–1813रणजीत सिंह से अमृतसर की संधि (1809); चार्टर एक्ट 1813
लॉर्ड हेस्टिंग्स (मार्क्विस ऑफ़ हेस्टिंग्स)1813–1823आंग्ल-नेपाल युद्ध — सुगौली की संधि (1816); पिंडारियों का दमन; तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध, पेशवा पद समाप्त; मद्रास में रैयतवाड़ी (मुनरो)
लॉर्ड एमहर्स्ट1823–1828प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध — यांडाबू की संधि (1826)
लॉर्ड विलियम बेंटिक1828–1835सती प्रथा उन्मूलन (1829, रेग्युलेशन XVII); ठगी का दमन (विलियम स्लीमन); चार्टर एक्ट 1833 — भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल; अंग्रेज़ी शिक्षा का प्रस्ताव (1835, मैकाले का विवरण-पत्र); कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (1835)
सर चार्ल्स मेटकाफ़1835–1836प्रेस पर से प्रतिबंध हटाए — "भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता"
लॉर्ड ऑकलैंड1836–1842प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध (1839–42)
लॉर्ड एलेनबरो1842–1844सिंध का विलय (1843) — चार्ल्स नेपियर; दास प्रथा पर रोक का अधिनियम (1843)
लॉर्ड हार्डिंग1844–1848प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध; लाहौर की संधि (1846)
लॉर्ड डलहौज़ी1848–1856व्यपगत सिद्धांत; द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध व पंजाब का विलय (1849); द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1852); पहली रेल (1853, बंबई–ठाणे); तार (टेलीग्राफ) लाइनें; डाकघर अधिनियम (1854); वुड का डिस्पैच (1854); लोक निर्माण विभाग; अवध का विलय (1856)
लॉर्ड कैनिंग1856–1862 (1858 से वायसराय)हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856) — पारित कैनिंग के समय, तैयारी डलहौज़ी काल में; 1857 की क्रांति; कलकत्ता, बंबई, मद्रास विश्वविद्यालय (1857); भारत सरकार अधिनियम 1858; अंतिम गवर्नर-जनरल व प्रथम वायसराय; भारतीय परिषद अधिनियम (1861)

बेंटिक के सुधारों के पीछे राजा राममोहन राय जैसे सुधारकों की भूमिका के लिए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन नोट पढ़ें।


12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: प्लासी बनाम बक्सर

प्लासी (1757) — क्लाइव बनाम सिराजुद्दौला; विश्वासघात से जीता गया युद्ध। बक्सर (1764) — हेक्टर मुनरो बनाम तीन शक्तियाँ (मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला, शाह आलम II); वास्तविक सैन्य विजय। बक्सर में क्लाइव सेनापति नहीं था।

Trap 2: दीवानी बनाम निज़ामत

दीवानी = राजस्व वसूली (कंपनी के पास), निज़ामत = प्रशासन/पुलिस/न्याय (नवाब के पास)। यही द्वैध शासन है — इसे क्लाइव ने शुरू किया और वारेन हेस्टिंग्स ने 1772 में समाप्त किया।

Trap 3: पहला गवर्नर-जनरल — बंगाल का या भारत का?

बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल — वारेन हेस्टिंग्स (रेग्युलेटिंग एक्ट 1773)। भारत का पहला गवर्नर-जनरल — विलियम बेंटिक (चार्टर एक्ट 1833)। पहला वायसराय — कैनिंग (1858)।

Trap 4: सहायक संधि बनाम व्यपगत सिद्धांत

सहायक संधि — वेलेजली (1798), पहला राज्य हैदराबाद। व्यपगत सिद्धांत — डलहौज़ी, पहला राज्य सतारा (1848)। अवध (1856) व्यपगत से नहीं, कुशासन के आधार पर।

Trap 5: स्थायी बंदोबस्त में राजस्व ज़मींदार से, रैयतवाड़ी में किसान से

महालवाड़ी में इकाई गाँव (महाल) है। रैयतवाड़ी को टॉमस मुनरो और अलेक्ज़ेंडर रीड से जोड़ें, कॉर्नवालिस से नहीं।

Trap 6: 1813 बनाम 1833 — व्यापार कब समाप्त?

1813 — भारत के व्यापार पर एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन व्यापार को छोड़कर)। 1833 — कंपनी की सारी व्यापारिक गतिविधियाँ समाप्त, केवल प्रशासनिक भूमिका। शिक्षा के लिए 1 लाख रुपये — 1813।

Trap 7: लॉर्ड हेस्टिंग्स ≠ वारेन हेस्टिंग्स

वारेन हेस्टिंग्स (1772–85) — रेग्युलेटिंग एक्ट, प्रथम मराठा युद्ध। लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813–23) — तृतीय मराठा युद्ध, नेपाल युद्ध, पिंडारी दमन। "पेशवा पद की समाप्ति" आए तो उत्तर लॉर्ड हेस्टिंग्स।

Trap 8: सालबाई बनाम बसीन

सालबाई (1782) — प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का अंत। बसीन (1802) — पेशवा द्वारा सहायक संधि, जिसने द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध को जन्म दिया।

Trap 9: मंगलौर बनाम श्रीरंगपट्टनम

मंगलौर की संधि (1784) — द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध। श्रीरंगपट्टनम की संधि (1792) — तृतीय युद्ध, कॉर्नवालिस। चतुर्थ युद्ध (1799) में कोई संधि नहीं, टीपू की मृत्यु।

Trap 10: विधवा पुनर्विवाह अधिनियम — डलहौज़ी या कैनिंग?

अधिनियम जुलाई 1856 में कैनिंग के समय पारित हुआ; डलहौज़ी फ़रवरी 1856 में जा चुके थे, यद्यपि विधेयक की तैयारी उनके काल में हुई। कई पुस्तकें इसे डलहौज़ी के नाम लिखती हैं, इसलिए विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।


13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (55 तथ्य)

क्र.प्रश्न-बिंदुउत्तर
1वास्को द गामा कालीकट पहुँचा1498
2पहला पुर्तगाली वायसरायफ्रांसिस्को द अल्मीडा
3गोवा पर पुर्तगाली अधिकार1510 — अल्बुकर्क
4अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी1600
5डच VOC1602
6फ्रांसीसी कंपनी1664
7फ्रांसीसी मुख्यालयपॉन्डिचेरी
8अंग्रेज़ों की सूरत फ़ैक्टरी1613
9कलकत्ता की नींवजॉब चार्नॉक (1690)
10कंपनी का "मैग्ना कार्टा"फ़र्रुख़सियर का फ़रमान (1717)
11बेदरा का युद्ध1759 — अंग्रेज़ बनाम डच
12वांडीवाश का युद्ध1760 — आयर कूट बनाम लाली
13तृतीय कर्नाटक युद्ध की संधिपेरिस (1763)
14अर्काट पर अधिकारक्लाइव (1751)
15प्लासी का युद्ध23 जून 1757
16प्लासी में बंगाल का नवाबसिराजुद्दौला
17प्लासी के बाद नवाबमीर जाफ़र
18राजधानी मुंगेर ले जाने वालामीर क़ासिम
19बक्सर का युद्ध22 अक्टूबर 1764
20बक्सर में अंग्रेज़ सेनापतिहेक्टर मुनरो
21इलाहाबाद की संधि1765 — दीवानी अधिकार
22शाह आलम को वार्षिक राशि26 लाख रुपये
23द्वैध शासन का अंत1772 — वारेन हेस्टिंग्स
24बंगाल का भीषण अकाल1770
25मद्रास की संधि1769 — प्रथम आंग्ल-मैसूर
26मंगलौर की संधि1784 — द्वितीय आंग्ल-मैसूर
27श्रीरंगपट्टनम की संधि1792 — कॉर्नवालिस
28टीपू की मृत्यु1799 — वेलेजली
29सालबाई की संधि1782
30बसीन की संधि1802 — बाजीराव द्वितीय
31पेशवा पद की समाप्ति1818 — लॉर्ड हेस्टिंग्स
32अमृतसर की संधि1809 — रणजीत सिंह, मिंटो प्रथम
33लाहौर की संधि1846 — हार्डिंग
34पंजाब का विलय1849 — डलहौज़ी
35सहायक संधि — पहला राज्यहैदराबाद (1798)
36व्यपगत — पहला राज्यसतारा (1848)
37झाँसी का विलय1853
38नागपुर का विलय1854
39अवध का विलय1856 — कुशासन के आधार पर
40स्थायी बंदोबस्त1793 — कॉर्नवालिस
41रैयतवाड़ीरीड व मुनरो
42महालवाड़ीहोल्ट मैकेंज़ी (1822)
43रेग्युलेटिंग एक्ट1773
44कलकत्ता सुप्रीम कोर्ट1774 — एलिजा इम्पे
45बोर्ड ऑफ़ कंट्रोलपिट्स इंडिया एक्ट 1784
46शिक्षा हेतु 1 लाख रुपयेचार्टर एक्ट 1813
47भारत का पहला गवर्नर-जनरलविलियम बेंटिक (1833)
48सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिताचार्टर एक्ट 1853
49एशियाटिक सोसाइटी1784 — विलियम जोन्स (वारेन हेस्टिंग्स काल)
50फ़ोर्ट विलियम कॉलेज1800 — वेलेजली
51सती उन्मूलन1829 — बेंटिक
52"प्रेस का मुक्तिदाता"चार्ल्स मेटकाफ़
53सिंध का विलय1843 — एलेनबरो
54पहली रेल1853, बंबई–ठाणे — डलहौज़ी
55प्रथम वायसरायलॉर्ड कैनिंग (1858)

14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

नीचे हर ढाँचे का एक स्वयं बनाया गया नमूना प्रश्न है:

  1. त्रि-मिलान: सूची-I (युद्ध) — द्वितीय आंग्ल-मैसूर, तृतीय आंग्ल-मैसूर, प्रथम आंग्ल-मराठा, प्रथम आंग्ल-सिख; सूची-II (संधि) — मंगलौर, श्रीरंगपट्टनम, सालबाई, लाहौर। कुंजी: सीधे क्रम में।
  2. कालक्रम: "(a) पिट्स इंडिया एक्ट (b) रेग्युलेटिंग एक्ट (c) स्थायी बंदोबस्त (d) सहायक संधि — सही क्रम?" उत्तर: b → a → c → d (1773, 1784, 1793, 1798)।
  3. कथन-आधारित: "1. स्थायी बंदोबस्त में राजस्व सीधे किसानों से लिया जाता था। 2. महालवाड़ी में राजस्व की इकाई गाँव थी। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?" उत्तर: केवल 2।
  4. अभिकथन-कारण: "अभिकथन (A): बक्सर का युद्ध प्लासी से अधिक निर्णायक माना जाता है। कारण (R): बक्सर में अंग्रेज़ों ने बंगाल, अवध और मुगल बादशाह की संयुक्त सेना को हराया।" — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है।
  5. "किसके काल में": "वुड का डिस्पैच किस गवर्नर-जनरल के काल में आया?" — डलहौज़ी (1854)।
  6. असुमेलित युग्म: "(a) सती उन्मूलन — बेंटिक (b) सहायक संधि — वेलेजली (c) व्यपगत सिद्धांत — कॉर्नवालिस (d) स्थायी बंदोबस्त — कॉर्नवालिस" — उत्तर (c)।

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15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. यूरोपीय कंपनियों का क्रम (स्थापना) — "पु-अं-ड-डे-फ्रां": पुर्तगाली (1498 आगमन), अंग्रेज़ (1600), डच (1602), डेनिश (1616), फ्रांसीसी (1664)।

2. मैसूर की संधियाँ — "म-मं-श्री-मृत्यु": मद्रास (1769), मंगलौर (1784), श्रीरंगपट्टनम (1792), टीपू की मृत्यु (1799)।

3. मराठा — "सा-ब-पे": सालबाई (प्रथम), बसीन से द्वितीय, पेशवा पद समाप्त (तृतीय)।

4. भू-राजस्व — "ज़-र-म = ज़मींदार, रैयत, महाल": स्थायी — ज़मींदार; रैयतवाड़ी — रैयत; महालवाड़ी — महाल (गाँव)।

5. अधिनियम सीढ़ी — "73-84-1813-33-53": रेग्युलेटिंग, पिट्स, चार्टर (शिक्षा 1 लाख), चार्टर (भारत का GG), चार्टर (खुली प्रतियोगिता)।

6. व्यपगत क्रम — "स-जै-सं-ब-उ-झाँ-ना": सतारा 48, जैतपुर-संबलपुर 49, बघाट 50, उदयपुर 52, झाँसी 53, नागपुर 54।

7. तीन "पहले" — "हेस्टिंग्स-बंगाल, बेंटिक-भारत, कैनिंग-वायसराय"।


16. कथन अभ्यास

वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा। — सही।

बक्सर के युद्ध में अंग्रेज़ सेना का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव ने किया। — गलत (हेक्टर मुनरो)।

इलाहाबाद की संधि (1765) से कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी मिली। — सही।

द्वैध शासन को लॉर्ड कॉर्नवालिस ने समाप्त किया। — गलत (वारेन हेस्टिंग्स, 1772)।

सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला राज्य हैदराबाद था। — सही।

अवध का विलय व्यपगत सिद्धांत के अंतर्गत हुआ। — गलत (कुशासन के आरोप पर, 1856)।

रैयतवाड़ी व्यवस्था में राजस्व सीधे किसानों से लिया जाता था। — सही।

स्थायी बंदोबस्त लॉर्ड वेलेजली ने लागू किया। — गलत (कॉर्नवालिस, 1793)।

चार्टर एक्ट 1833 द्वारा बंगाल का गवर्नर-जनरल भारत का गवर्नर-जनरल बना। — सही।

सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता का प्रावधान चार्टर एक्ट 1813 में था। — गलत (चार्टर एक्ट 1853)।

सालबाई की संधि द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद हुई। — गलत (प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध, 1782)।

भारत में पहली रेल 1853 में बंबई और ठाणे के बीच चली। — सही।


17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. वास्को द गामा 1498 कालीकट; अल्मीडा पहला वायसराय; अल्बुकर्क — गोवा 1510
  2. कंपनियाँ: अंग्रेज़ 1600, डच 1602, डेनिश 1616, फ्रांसीसी 1664
  3. सूरत 1613, कलकत्ता 1690 (जॉब चार्नॉक), फ़र्रुख़सियर का फ़रमान 1717
  4. कर्नाटक युद्ध: तीसरा — वांडीवाश 1760, पेरिस संधि 1763
  5. प्लासी 1757 (क्लाइव–सिराज, मीर जाफ़र का विश्वासघात)
  6. बक्सर 1764 (मुनरो बनाम मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला, शाह आलम II)
  7. इलाहाबाद संधि 1765 — दीवानी; द्वैध शासन 1765–72
  8. मैसूर: मद्रास 1769, मंगलौर 1784, श्रीरंगपट्टनम 1792, टीपू की मृत्यु 1799
  9. मराठा: सालबाई 1782, बसीन 1802, पेशवा पद समाप्त 1818
  10. सिख: लाहौर संधि 1846 (हार्डिंग), पंजाब विलय 1849 (डलहौज़ी)
  11. सहायक संधि 1798 — वेलेजली, पहला हैदराबाद; व्यपगत — डलहौज़ी, पहला सतारा
  12. स्थायी बंदोबस्त 1793 (कॉर्नवालिस), रैयतवाड़ी (रीड-मुनरो), महालवाड़ी (होल्ट मैकेंज़ी)
  13. रेग्युलेटिंग 1773, पिट्स 1784, चार्टर 1813 / 1833 / 1853
  14. बेंटिक — सती 1829, भारत का प्रथम GG; मेटकाफ़ — प्रेस मुक्ति
  15. डलहौज़ी — रेल 1853, तार, डाक अधिनियम 1854, वुड डिस्पैच 1854; कैनिंग — प्रथम वायसराय

18. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। युद्ध-संधि-गवर्नर-जनरल वाले प्रश्नों में गलती हो तो खंड 6 की तीनों तालिकाएँ और खंड 11 की गवर्नर-जनरल तालिका साथ रखकर दोहराएँ। राज्य-स्तरीय परीक्षा के अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ हल करें।


19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

1498 से 1856 तक कंपनी की यात्रा तीन चरणों में समझें — व्यापार (फ़ैक्टरियाँ, फ़रमान, यूरोपीय प्रतिद्वंद्विता), राजनीतिक अधिकार (प्लासी, बक्सर, दीवानी) और साम्राज्य-विस्तार व संगठन (युद्ध, सहायक संधि, व्यपगत, भू-राजस्व, अधिनियम)। परीक्षा के लिए तीन तालिकाएँ निर्णायक हैं — युद्ध-संधि-गवर्नर-जनरल, भू-राजस्व व्यवस्थाओं की तुलना, और अधिनियमों के प्रावधान। इसी विस्तार से उपजे असंतोष ने 1857 की क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार की।

1498 गामा · 1757 प्लासी · 1764 बक्सर · 1765 दीवानी · 1773 रेग्युलेटिंग · 1784 पिट्स · 1793 स्थायी बंदोबस्त · 1798 सहायक संधि · 1829 सती · 1833 भारत का GG · 1848 सतारा · 1853 रेल · 1858 वायसराय


अंतिम संशोधन (Last Updated):
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ। मीर जाफ़र के विश्वासघात से अंग्रेज़ जीते और मीर जाफ़र नवाब बना।

1764 के बक्सर युद्ध में अंग्रेज़ों ने मीर क़ासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को खुले युद्ध में हराया। इसके बाद 1765 में कंपनी को दीवानी मिली।

1765 में क्लाइव द्वारा बंगाल में लागू व्यवस्था, जिसमें दीवानी (राजस्व) कंपनी के पास और निज़ामत (प्रशासन, न्याय) नवाब के पास थी। इसे 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने समाप्त किया।

वेलेजली की सहायक संधि (1798) में भारतीय राज्य अपने यहाँ अंग्रेज़ी सेना रखता, उसका ख़र्च देता, अंग्रेज़ रेज़िडेंट स्वीकार करता और विदेश नीति अंग्रेज़ों को सौंपता था। इसे सबसे पहले हैदराबाद के निज़ाम ने 1798 में स्वीकार किया।

डलहौज़ी के व्यपगत सिद्धांत से सतारा (1848), जैतपुर व संबलपुर (1849), बघाट (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853) और नागपुर (1854) कंपनी राज्य में मिलाए गए। अवध (1856) का विलय कुशासन के आरोप पर हुआ था।

स्थायी बंदोबस्त (1793, कॉर्नवालिस) में राजस्व ज़मींदार से स्थायी रूप से तय था, रैयतवाड़ी (रीड-मुनरो) में सीधे किसान से और महालवाड़ी (होल्ट मैकेंज़ी) में गाँव या महाल को इकाई मानकर लिया जाता था।

इस अधिनियम से बंगाल का गवर्नर 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' बना (प्रथम वारेन हेस्टिंग्स), मद्रास व बंबई बंगाल के अधीन हुए और कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774) की स्थापना हुई।

चार्टर एक्ट 1833 के बाद लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स थे और पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग (1858)।

लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में रेग्युलेशन XVII द्वारा सती प्रथा को अवैध घोषित किया। इस सुधार में राजा राममोहन राय के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

भारत में पहली यात्री रेल 1853 में बंबई से ठाणे के बीच चली। उस समय गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी थे।

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