राष्ट्रीय आंदोलन 1885–1919 — कांग्रेस स्थापना, बंग-भंग, होमरूल से 1919 अधिनियम तक — UPSC/RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई; संस्थापक सेवानिवृत्त अंग्रेज़ अधिकारी ए.ओ. ह्यूम, प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र (डब्ल्यू.सी.) बनर्जी और प्रतिनिधि 72 थे; उस समय वायसराय लॉर्ड डफरिन थे। 1885–1905 का दौर उदारवादियों (दादाभाई नौरोजी, फ़िरोज़शाह मेहता, गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का था, जिनकी पद्धति प्रार्थना-याचिका-विरोध थी और जिनकी सबसे बड़ी बौद्धिक देन धन-निष्कासन सिद्धांत (दादाभाई — Poverty and Un-British Rule in India) है। लॉर्ड कर्ज़न का बंग-भंग (प्रभावी 16 अक्टूबर 1905) स्वदेशी-बहिष्कार आंदोलन और उग्रवादी धारा (लाल-बाल-पाल, अरविंद घोष) के उभार का कारण बना; 1906 में ढाका में मुस्लिम लीग बनी और 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस विभाजित हुई। मार्ले-मिंटो सुधार 1909 ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन दिया; बंग-भंग 1911 के दिल्ली दरबार में रद्द हुआ और राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली ले जाने की घोषणा हुई। 1916 में होमरूल लीग (तिलक — अप्रैल, बेलगाँव; एनी बेसेंट — सितंबर, मद्रास) और लखनऊ समझौता (कांग्रेस-लीग एकता, उदारवादी-उग्रवादी पुनर्मिलन) हुए। मोंटेग्यू घोषणा (20 अगस्त 1917) के बाद भारत शासन अधिनियम 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन लागू किया, और उसी वर्ष का रौलट एक्ट गांधी युग के जन-आंदोलनों की भूमिका बना।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| INC स्थापना तिथि व स्थान | 28 दिसंबर 1885, बंबई (गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज) |
| संस्थापक / प्रथम अध्यक्ष | ए.ओ. ह्यूम / डब्ल्यू.सी. बनर्जी |
| प्रथम अधिवेशन के प्रतिनिधि | 72 |
| स्थापना के समय वायसराय | लॉर्ड डफरिन |
| 'कांग्रेस' नाम का सुझाव | दादाभाई नौरोजी (प्रारंभिक प्रस्तावित नाम — इंडियन नेशनल यूनियन) |
| धन-निष्कासन सिद्धांत | दादाभाई नौरोजी — Poverty and Un-British Rule in India |
| बंग-भंग | लॉर्ड कर्ज़न; प्रभावी 16 अक्टूबर 1905; रद्द 1911 |
| मुस्लिम लीग | 30 दिसंबर 1906, ढाका (आगा ख़ाँ, नवाब सलीमुल्लाह) |
| कांग्रेस का विभाजन | सूरत अधिवेशन 1907 (अध्यक्ष रासबिहारी घोष) |
| मार्ले-मिंटो सुधार | भारतीय परिषद अधिनियम 1909 — मुसलमानों को पृथक निर्वाचन |
| दिल्ली दरबार | दिसंबर 1911 — बंग-भंग रद्द, राजधानी दिल्ली ले जाने की घोषणा |
| ग़दर पार्टी | 1913, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) — लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना |
| होमरूल लीग | तिलक — अप्रैल 1916, बेलगाँव; एनी बेसेंट — सितंबर 1916, मद्रास |
| लखनऊ समझौता | 1916 — कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच |
| मोंटेग्यू घोषणा | 20 अगस्त 1917 — उत्तरदायी शासन का क्रमिक लक्ष्य |
| भारत शासन अधिनियम 1919 | प्रांतों में द्वैध शासन (आरक्षित व हस्तांतरित विषय) |
| रौलट एक्ट | मार्च 1919 — बिना मुक़दमे के बंदी बनाने का अधिकार |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
आधुनिक भारत के इतिहास में राष्ट्रीय आंदोलन सबसे अधिक पूछा जाने वाला खंड है, और 1885–1919 का चरण उसकी नींव है। यह नोट सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन के बाद और गांधी युग से स्वतंत्रता तक से पहले की कड़ी है। अधिवेशन-अध्यक्ष, संस्थाएँ-संस्थापक, अधिनियमों के प्रावधान और घटनाओं का कालक्रम — ये चारों प्रकार के प्रश्न इसी अवधि से सबसे अधिक बनते हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — कथन-आधारित प्रश्न (अधिनियमों के प्रावधान, उदारवादियों की विचारधारा, होमरूल)
- RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — तथ्यात्मक व वर्णनात्मक दोनों
- SSC CGL / CHSL — संस्थापक, वर्ष, अध्यक्ष जैसे सीधे तथ्य
- राजस्थान CET (स्नातक स्तर) — सामान्य ज्ञान खंड में आधुनिक भारत
- RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक — सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र
प्रश्न कैसे आते हैं?
- अधिवेशन — स्थान — अध्यक्ष का सुमेलन
- संस्था — संस्थापक — वर्ष का सुमेलन (कांग्रेस-पूर्व संस्थाएँ, क्रांतिकारी संगठन)
- घटनाओं का कालानुक्रम (बंग-भंग → लीग → सूरत → मार्ले-मिंटो → दिल्ली दरबार)
- अधिनियमों के प्रावधान — 1909 बनाम 1919 (पृथक निर्वाचन, द्वैध शासन)
- उदारवादी बनाम उग्रवादी — नेता, पद्धति, लक्ष्य
- कथन-आधारित — "निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?"
3. कांग्रेस-पूर्व राजनीतिक संस्थाएँ
कांग्रेस अचानक नहीं बनी। 1830 के दशक से बंगाल, बंबई और मद्रास में शिक्षित भारतीयों ने प्रांतीय संस्थाएँ बनाकर ज्ञापन, याचिका और सार्वजनिक सभाओं की परंपरा शुरू कर दी थी। आरंभिक संस्थाएँ ज़मींदारों के हितों तक सीमित थीं; 1870 के बाद की संस्थाएँ मध्यवर्गीय और अखिल भारतीय दृष्टि वाली थीं।
| संस्था | वर्ष | स्थान | प्रमुख व्यक्ति / विशेषता |
|---|---|---|---|
| लैंडहोल्डर्स सोसाइटी (ज़मींदार सभा) | 1838 | कलकत्ता | द्वारकानाथ टैगोर आदि; ज़मींदारों के हित — संगठित राजनीतिक गतिविधि की शुरुआत मानी जाती है |
| ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन | 1851 | कलकत्ता | ज़मींदार सभा और बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी के विलय से; मुख्यतः ज़मींदार वर्ग |
| ईस्ट इंडिया एसोसिएशन | 1866 | लंदन | दादाभाई नौरोजी — ब्रिटिश जनमत को भारतीय प्रश्नों से परिचित कराना |
| पूना सार्वजनिक सभा | 1870 | पूना | महादेव गोविंद रानाडे आदि |
| इंडियन एसोसिएशन | 1876 | कलकत्ता | सुरेंद्रनाथ बनर्जी व आनंद मोहन बोस; मध्यवर्गीय, अखिल भारतीय दृष्टि |
| मद्रास महाजन सभा | 1884 | मद्रास | मद्रास के शिक्षित वर्ग की संस्था |
| बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन | 1885 | बंबई | फ़िरोज़शाह मेहता, के.टी. तेलंग, बदरुद्दीन तैयबजी |
इंडियन एसोसिएशन का महत्व: इसने सिविल सेवा परीक्षा की अधिकतम आयु घटाए जाने के विरोध में देशव्यापी अभियान चलाया और 1883 में कलकत्ता में अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference) आयोजित किया, जिसका 1886 में कांग्रेस में विलय हो गया। इसलिए सुरेंद्रनाथ बनर्जी को कांग्रेस के अग्रदूतों में गिना जाता है।
4. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 28 दिसंबर 1885 (28–31 दिसंबर तक अधिवेशन) |
| स्थान | गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई |
| मूल प्रस्तावित स्थान | पूना — वहाँ हैज़ा फैलने के कारण बंबई स्थानांतरित |
| संस्थापक | एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (सेवानिवृत्त ICS अधिकारी) |
| प्रथम अध्यक्ष | व्योमेश चंद्र बनर्जी |
| प्रतिनिधि | 72 |
| वायसराय | लॉर्ड डफरिन |
| नाम | प्रारंभ में "इंडियन नेशनल यूनियन"; दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर "इंडियन नेशनल कांग्रेस" |
4.1 "सेफ्टी वाल्व" सिद्धांत — एक विवादित मत
एक मत यह रहा है कि ह्यूम ने कांग्रेस को ब्रिटिश शासन के लिए "सुरक्षा कपाट" (Safety Valve) के रूप में बनाया, ताकि शिक्षित भारतीयों का बढ़ता असंतोष हिंसक विद्रोह में न बदले। इस मत को लाला लाजपत राय ने अपने लेखन में उठाया और बाद में कुछ वामपंथी लेखकों ने भी दोहराया। दूसरी ओर बिपन चंद्र जैसे इतिहासकार इसे "मिथक" मानते हैं — उनके अनुसार भारतीय नेताओं ने ह्यूम को एक "तड़ित-चालक" (Lightning Conductor) के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि एक अंग्रेज़ के नेतृत्व के कारण सरकार शुरुआत में ही संगठन को कुचल न दे। परीक्षा-दृष्टि: इसे "सिद्धांत / मत" के रूप में याद रखें, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
4.2 प्रारंभिक व प्रमुख अधिवेशन
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1885 | बंबई | डब्ल्यू.सी. बनर्जी | प्रथम अधिवेशन, 72 प्रतिनिधि |
| 1886 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | राष्ट्रीय सम्मेलन का कांग्रेस में विलय |
| 1887 | मद्रास | बदरुद्दीन तैयबजी | प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष |
| 1888 | इलाहाबाद | जॉर्ज यूल | प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष |
| 1889 | बंबई | विलियम वेडरबर्न | — |
| 1896 | कलकत्ता | रहीमतुल्ला सयानी | "वंदे मातरम्" पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया (रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा) |
| 1905 | बनारस | गोपाल कृष्ण गोखले | बंग-भंग का विरोध, स्वदेशी का समर्थन |
| 1906 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | "स्वराज" लक्ष्य घोषित; स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्ताव |
| 1907 | सूरत | रासबिहारी घोष | उदारवादी-उग्रवादी विभाजन (सूरत फूट) |
| 1911 | कलकत्ता | बिशन नारायण दर | "जन गण मन" पहली बार गाया गया |
| 1916 | लखनऊ | अंबिका चरण मजूमदार | लखनऊ समझौता; उदारवादी-उग्रवादी पुनर्मिलन |
| 1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट | प्रथम महिला अध्यक्ष |
| 1918 | दिल्ली | मदन मोहन मालवीय | — |
| 1919 | अमृतसर | मोतीलाल नेहरू | जलियाँवाला बाग़ कांड के बाद |
ध्यान दें: 1886 और 1906 — दोनों बार अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी और स्थान कलकत्ता। (उन्होंने 1893 के लाहौर अधिवेशन की भी अध्यक्षता की — कुल तीन बार।) प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू (1925, कानपुर) थीं — इसका विवरण गांधी युग वाले नोट में है।
5. उदारवादी चरण (1885–1905)
प्रथम बीस वर्षों में कांग्रेस का नेतृत्व उन नेताओं के हाथ में था जिन्हें उदारवादी (नरमपंथी / Moderates) कहा जाता है। वे ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे और मानते थे कि तर्क व तथ्यों के आधार पर अंग्रेज़ों को सुधारों के लिए राज़ी किया जा सकता है।
5.1 उदारवादियों की प्रमुख माँगें
- विधान परिषदों का विस्तार और उनमें निर्वाचित भारतीयों की संख्या बढ़ाना
- ICS परीक्षा भारत और इंग्लैंड में एक साथ आयोजित करना; अधिकतम आयु बढ़ाना
- सैन्य व्यय में कटौती, भू-राजस्व में कमी, नमक कर घटाना
- न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना
- भारतीय उद्योगों का संरक्षण, शिक्षा का प्रसार
5.2 धन-निष्कासन सिद्धांत (Drain Theory)
दादाभाई नौरोजी ने सिद्ध किया कि भारत की संपत्ति का एक बड़ा भाग बिना किसी प्रतिफल के इंग्लैंड जा रहा है — वेतन, पेंशन, "होम चार्जेज़", ब्याज और लाभ के रूप में — और यही भारत की ग़रीबी का मूल कारण है। उनकी पुस्तक Poverty and Un-British Rule in India (1901 में प्रकाशित) इसका प्रमुख स्रोत है। आर.सी. दत्त ने Economic History of India में और एम.जी. रानाडे ने भी आर्थिक आलोचना को आगे बढ़ाया। उदारवादियों की यह आर्थिक आलोचना उनकी सबसे स्थायी देन मानी जाती है, क्योंकि इसने ब्रिटिश शासन के "कल्याणकारी" होने के दावे को तोड़ दिया।
| दादाभाई नौरोजी — एक नज़र | तथ्य |
|---|---|
| उपनाम | "ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया" (भारत के वयोवृद्ध पुरुष) |
| ब्रिटिश संसद | 1892 में हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने गए (लिबरल पार्टी, सेंट्रल फिंसबरी) — प्रथम भारतीय |
| संस्था | ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (1866, लंदन) |
| कांग्रेस अध्यक्ष | 1886, 1893, 1906 |
| 1906 अधिवेशन | पहली बार "स्वराज" को कांग्रेस का लक्ष्य बताया |
6. उदारवादी बनाम उग्रवादी
1890 के दशक के अकाल व प्लेग, सरकार की उपेक्षा, कर्ज़न की नीतियाँ और उदारवादी पद्धति की सीमित सफलता से असंतुष्ट एक नई पीढ़ी उभरी, जिसे उग्रवादी (गरमपंथी / Extremists) या राष्ट्रवादी कहा गया। बंगाल विभाजन ने इस धारा को निर्णायक रूप से मज़बूत किया।
| बिंदु | उदारवादी | उग्रवादी |
|---|---|---|
| प्रमुख नेता | दादाभाई नौरोजी, फ़िरोज़शाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, डब्ल्यू.सी. बनर्जी, एम.जी. रानाडे | बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल), अरविंद घोष |
| कालखंड | 1885–1905 (प्रभुत्व) | 1905–1918 (प्रभाव) |
| लक्ष्य | ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन, क्रमिक सुधार | स्वराज — "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा" (तिलक) |
| पद्धति | प्रार्थना, याचिका, विरोध (संवैधानिक तरीके) | स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा, निष्क्रिय प्रतिरोध |
| ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टि | ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास | ब्रिटिश न्यायप्रियता में अविश्वास |
| जनाधार | मुख्यतः शिक्षित शहरी मध्यवर्ग | निम्न-मध्यवर्ग, छात्र, युवा — जनसामान्य तक पहुँच का प्रयास |
| प्रेरणा | पश्चिमी उदार राजनीतिक विचार | भारतीय परंपरा व इतिहास (गणपति व शिवाजी उत्सव) |
6.1 लाल-बाल-पाल
| नेता | क्षेत्र | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| लाला लाजपत राय | पंजाब | "पंजाब केसरी"; 1928 में साइमन कमीशन विरोध में लाठीचार्ज के बाद मृत्यु |
| बाल गंगाधर तिलक | महाराष्ट्र | "लोकमान्य"; पत्र — केसरी (मराठी), मराठा (अंग्रेज़ी); गणपति व शिवाजी उत्सव; 1908 में राजद्रोह के लिए मांडले (बर्मा) में कारावास |
| बिपिन चंद्र पाल | बंगाल | स्वदेशी आंदोलन के प्रखर वक्ता |
7. बंग-भंग और स्वदेशी आंदोलन (1905–1911)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वायसराय | लॉर्ड कर्ज़न |
| घोषणा | जुलाई 1905 |
| प्रभावी | 16 अक्टूबर 1905 — "शोक दिवस"; टैगोर के आह्वान पर रक्षाबंधन मनाया गया |
| सरकारी तर्क | बंगाल प्रांत बहुत बड़ा है, प्रशासनिक सुविधा |
| वास्तविक उद्देश्य (राष्ट्रवादी दृष्टि) | बंगाल के राष्ट्रवाद को कमज़ोर करना; धर्म और भाषा के आधार पर विभाजन ("फूट डालो और राज करो") |
| नए प्रांत | पूर्वी बंगाल व असम (राजधानी ढाका) तथा पश्चिमी बंगाल (बिहार-उड़ीसा सहित) |
| स्वदेशी की औपचारिक घोषणा | 7 अगस्त 1905, कलकत्ता टाउन हॉल — बहिष्कार प्रस्ताव |
| गीत | "आमार सोनार बांग्ला" (टैगोर) |
| रद्द | दिसंबर 1911, दिल्ली दरबार (सम्राट जॉर्ज पंचम); वायसराय लॉर्ड हार्डिंग |
| राजधानी | 1911 में कलकत्ता से दिल्ली ले जाने की घोषणा (नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन बाद में 1931 में) |
7.1 स्वदेशी आंदोलन के रूप
- बहिष्कार: विदेशी कपड़ा, नमक, चीनी; विदेशी वस्त्रों की होली
- स्वदेशी उद्यम: बंगाल केमिकल्स (पी.सी. रे), स्वदेशी कपड़ा मिलें, बैंक, बीमा कंपनियाँ; वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई की स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी (तूतीकोरिन)
- राष्ट्रीय शिक्षा: बंगाल नेशनल कॉलेज (अरविंद घोष प्राचार्य), राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (1906)
- समितियाँ: स्वदेश बांधव समिति (अश्विनी कुमार दत्त, बारीसाल)
- प्रसार: बंगाल के बाहर — पूना-बंबई (तिलक), पंजाब (लाजपत राय, अजीत सिंह), दिल्ली (सैयद हैदर रज़ा), मद्रास (चिदंबरम पिल्लई)
8. मुस्लिम लीग, सूरत फूट और मार्ले-मिंटो सुधार
8.1 मुस्लिम लीग (1906)
1 अक्टूबर 1906 को आगा ख़ाँ के नेतृत्व में मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल (शिमला प्रतिनिधिमंडल) वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिला और पृथक निर्वाचन व जनसंख्या से अधिक प्रतिनिधित्व की माँग की। इसके बाद 30 दिसंबर 1906 को ढाका में ढाका के नवाब सलीमुल्लाह की पहल पर अखिल भारतीय मुस्लिम लीग बनी। लीग का प्रारंभिक उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठा और मुसलमानों के राजनीतिक हितों की रक्षा था।
8.2 सूरत फूट (1907)
सूरत अधिवेशन (अध्यक्ष रासबिहारी घोष) में अध्यक्ष पद और स्वदेशी-बहिष्कार प्रस्तावों पर विवाद के बाद कांग्रेस दो भागों में बँट गई। उग्रवादी कांग्रेस से बाहर हो गए; 1908 में तिलक को कारावास हुआ। दोनों धड़ों का पुनर्मिलन 1916 के लखनऊ अधिवेशन में हुआ।
8.3 मार्ले-मिंटो सुधार — भारतीय परिषद अधिनियम 1909
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नाम किसके नाम पर | जॉन मार्ले (भारत सचिव) व लॉर्ड मिंटो (वायसराय) |
| सबसे प्रमुख प्रावधान | मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन (Separate Electorate) |
| विधान परिषदें | केंद्रीय व प्रांतीय परिषदों का आकार बढ़ाया; बजट पर चर्चा व पूरक प्रश्न का अधिकार |
| वायसराय की कार्यकारी परिषद | प्रथम भारतीय सदस्य — सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा (विधि सदस्य) |
| परिणाम | लॉर्ड मिंटो को "सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक" कहा जाता है |
9. क्रांतिकारी आंदोलन — प्रथम चरण
स्वदेशी आंदोलन के दमन और उदारवादी-उग्रवादी दोनों पद्धतियों से निराश युवाओं का एक वर्ग व्यक्तिगत वीरता और सशस्त्र कार्रवाई की ओर मुड़ा। इसे क्रांतिकारी आतंकवाद का प्रथम चरण कहा जाता है।
| संगठन / घटना | वर्ष | स्थान | प्रमुख व्यक्ति |
|---|---|---|---|
| रैंड व एयर्स्ट की हत्या | 1897 | पूना | चापेकर बंधु (दामोदर व बालकृष्ण) |
| अनुशीलन समिति | 1902 | कलकत्ता (बाद में ढाका शाखा प्रमुख) | प्रमथनाथ मित्र; बाद में बारींद्र कुमार घोष आदि |
| युगांतर (पत्र / समूह) | 1906 | कलकत्ता | बारींद्र कुमार घोष, भूपेंद्रनाथ दत्त |
| अभिनव भारत | 1904 | नासिक / महाराष्ट्र (पूर्ववर्ती — मित्र मेला) | विनायक दामोदर सावरकर व गणेश सावरकर |
| इंडिया हाउस | 1905 | लंदन | श्यामजी कृष्ण वर्मा |
| मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड | 1908 | मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) | खुदीराम बोस व प्रफुल्ल चाकी — निशाना मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड |
| अलीपुर षड्यंत्र केस | 1908 | अलीपुर (कलकत्ता) | अरविंद घोष (बरी — बचाव सी.आर. दास ने किया), बारींद्र घोष |
| कर्ज़न वायली की हत्या | 1909 | लंदन | मदनलाल ढींगरा |
| दिल्ली षड्यंत्र (हार्डिंग पर बम) | 1912 | दिल्ली | रासबिहारी बोस (योजनाकार) |
| ग़दर पार्टी | 1913 | सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) | लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना; पत्र "ग़दर" |
| कामागाटा मारू प्रकरण | 1914 | वैंकूवर (कनाडा) → बजबज (कलकत्ता) | गुरदित सिंह; कनाडा ने यात्रियों को उतरने नहीं दिया, लौटने पर बजबज में गोलीबारी |
ध्यान दें: खुदीराम बोस को 1908 में फाँसी दी गई; प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ़्तारी से पहले आत्महत्या कर ली। ग़दर आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में सशस्त्र विद्रोह की योजना बना रहा था, जो विफल रही (1915)।
10. होमरूल आंदोलन (1916)
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आयरलैंड के होमरूल आंदोलन की तर्ज़ पर भारत में दो होमरूल लीगें बनीं। दोनों ने समन्वय से काम किया और क्षेत्र बाँट लिए।
| बिंदु | तिलक की लीग | एनी बेसेंट की लीग |
|---|---|---|
| स्थापना | अप्रैल 1916 | सितंबर 1916 |
| स्थान | बेलगाँव (बेलगाम) | मद्रास (अड्यार) |
| कार्यक्षेत्र | महाराष्ट्र (बंबई शहर को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत, बरार | शेष भारत (बंबई शहर सहित) |
| सहयोगी | — | जॉर्ज अरुंडेल (संगठन सचिव) |
| लक्ष्य | ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन (होमरूल) | ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन (होमरूल) |
1917 में एनी बेसेंट की गिरफ़्तारी से आंदोलन और तेज़ हुआ; उसी वर्ष वे कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। होमरूल आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को नए क्षेत्रों और नए लोगों तक पहुँचाया तथा गांधी युग के जन-आंदोलन के लिए ज़मीन तैयार की। एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी से जुड़ी थीं — इसका विवरण सुधार आंदोलन वाले नोट में है।
11. लखनऊ समझौता और मोंटेग्यू घोषणा
11.1 लखनऊ समझौता (1916)
- कांग्रेस (अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार) और मुस्लिम लीग का एक ही समय लखनऊ में अधिवेशन
- कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन स्वीकार किया
- दोनों ने मिलकर संवैधानिक सुधारों की संयुक्त माँगें रखीं
- प्रमुख भूमिका — बाल गंगाधर तिलक और मुहम्मद अली जिन्ना
- इसी अधिवेशन में उदारवादी और उग्रवादी फिर एक हुए
11.2 मोंटेग्यू घोषणा (अगस्त घोषणा) — 20 अगस्त 1917
भारत सचिव एडविन मोंटेग्यू ने ब्रिटिश संसद में घोषणा की कि ब्रिटिश नीति का लक्ष्य प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना और स्वशासी संस्थाओं के क्रमिक विकास द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य के अंग के रूप में भारत में उत्तरदायी शासन की उत्तरोत्तर प्राप्ति है। यही घोषणा 1919 के अधिनियम का आधार बनी।
12. भारत शासन अधिनियम 1919 और रौलट एक्ट
12.1 मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| नाम | एडविन मोंटेग्यू (भारत सचिव) व लॉर्ड चेम्सफोर्ड (वायसराय) |
| द्वैध शासन (Dyarchy) | प्रांतों में — विषय दो भागों में: आरक्षित (गवर्नर व कार्यकारी परिषद; जैसे वित्त, क़ानून-व्यवस्था) और हस्तांतरित (मंत्री, विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी; जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय शासन) |
| विषयों का विभाजन | केंद्रीय व प्रांतीय सूचियाँ अलग |
| केंद्रीय विधानमंडल | द्विसदनीय — केंद्रीय विधान सभा और राज्य परिषद |
| पृथक निर्वाचन का विस्तार | सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपियों तक |
| मताधिकार | सीमित — संपत्ति, कर व शिक्षा के आधार पर |
| लोक सेवा आयोग | केंद्रीय लोक सेवा आयोग का प्रावधान (गठन 1926) |
| लागू | 1921 |
| समीक्षा | 10 वर्ष बाद वैधानिक आयोग का प्रावधान — यही आगे साइमन कमीशन बना |
ध्यान दें: 1919 में द्वैध शासन प्रांतों में था; 1935 के अधिनियम ने प्रांतों से द्वैध शासन हटाकर उसे केंद्र में प्रस्तावित किया (जो कभी लागू नहीं हुआ)।
12.2 रौलट एक्ट (मार्च 1919)
सर सिडनी रौलट की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर बना यह क़ानून (आधिकारिक नाम — अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) सरकार को बिना मुक़दमे के संदिग्धों को बंदी बनाने और विशेष अदालतों में सुनवाई का अधिकार देता था। भारतीय सदस्यों के विरोध के बावजूद पारित होने पर इसे "न वकील, न दलील, न अपील" वाला काला क़ानून कहा गया। इसके विरोध में गांधी ने रौलट सत्याग्रह का आह्वान किया — यहीं से गांधी युग का आरंभ माना जाता है; आगे की कहानी (जलियाँवाला बाग़ से 1947 तक) गांधी युग से स्वतंत्रता तक में है।
13. वायसराय और घटनाएँ (1885–1919)
| वायसराय | कार्यकाल | प्रमुख घटनाएँ |
|---|---|---|
| लॉर्ड डफरिन | 1884–1888 | कांग्रेस की स्थापना (1885) |
| लॉर्ड लैंसडाउन | 1888–1894 | भारतीय परिषद अधिनियम 1892 |
| लॉर्ड कर्ज़न | 1899–1905 | बंग-भंग (1905) |
| लॉर्ड मिंटो (द्वितीय) | 1905–1910 | मुस्लिम लीग (1906), सूरत फूट (1907), मार्ले-मिंटो सुधार (1909) |
| लॉर्ड हार्डिंग (द्वितीय) | 1910–1916 | दिल्ली दरबार व बंग-भंग रद्द (1911), दिल्ली षड्यंत्र (1912), ग़दर (1913), होमरूल (1916) |
| लॉर्ड चेम्सफोर्ड | 1916–1921 | लखनऊ समझौता (1916), मोंटेग्यू घोषणा (1917), रौलट एक्ट व 1919 अधिनियम |
इससे पहले की प्रशासनिक पृष्ठभूमि — कंपनी शासन और गवर्नर-जनरल — कंपनी शासन का विस्तार और 1857 की क्रांति वाले नोट्स में है।
14. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: ईस्ट इंडिया एसोसिएशन बनाम इंडियन एसोसिएशन
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866, लंदन, दादाभाई नौरोजी। इंडियन एसोसिएशन — 1876, कलकत्ता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी व आनंद मोहन बोस। नाम मिलते-जुलते हैं, स्थान और संस्थापक बिल्कुल अलग।
Trap 2: प्रथम मुस्लिम बनाम प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष
1887 मद्रास — बदरुद्दीन तैयबजी (प्रथम मुस्लिम)। 1888 इलाहाबाद — जॉर्ज यूल (प्रथम अंग्रेज़)। ह्यूम संस्थापक थे, अध्यक्ष नहीं।
Trap 3: प्रथम महिला अध्यक्ष
प्रथम महिला अध्यक्ष — एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता)। प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष — सरोजिनी नायडू (1925, कानपुर)।
Trap 4: तिलक बनाम बेसेंट की होमरूल लीग
तिलक — अप्रैल 1916, बेलगाँव। बेसेंट — सितंबर 1916, मद्रास। पहले तिलक, फिर बेसेंट।
Trap 5: 1909 बनाम 1919
1909 (मार्ले-मिंटो) — पृथक निर्वाचन (मुसलमान)। 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड) — प्रांतों में द्वैध शासन, केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल, पृथक निर्वाचन का सिखों आदि तक विस्तार।
Trap 6: बंग-भंग — विभाजन किसने, रद्द किसने
विभाजन — कर्ज़न (1905)। रद्द — हार्डिंग के समय, दिल्ली दरबार 1911 में। मिंटो के समय न विभाजन हुआ न रद्द हुआ।
Trap 7: अनुशीलन समिति बनाम अभिनव भारत
अनुशीलन समिति — बंगाल (प्रमथनाथ मित्र)। अभिनव भारत — महाराष्ट्र (सावरकर बंधु)। ग़दर — अमेरिका (हरदयाल)। इंडिया हाउस — लंदन (श्यामजी कृष्ण वर्मा)।
Trap 8: सूरत फूट के अध्यक्ष
सूरत 1907 के अध्यक्ष रासबिहारी घोष थे — रासबिहारी बोस (दिल्ली षड्यंत्र 1912, बाद में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग) नहीं। नाम का यह भ्रम बहुत आम है।
Trap 9: "स्वराज" शब्द
कांग्रेस मंच से "स्वराज" को लक्ष्य के रूप में पहली बार दादाभाई नौरोजी ने 1906 कलकत्ता में रखा। "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" — तिलक का नारा है। "पूर्ण स्वराज" — 1929 लाहौर।
15. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न-बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | लैंडहोल्डर्स सोसाइटी | 1838, कलकत्ता |
| 2 | ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन | 1851, कलकत्ता |
| 3 | ईस्ट इंडिया एसोसिएशन | 1866, लंदन — दादाभाई नौरोजी |
| 4 | पूना सार्वजनिक सभा | 1870 — एम.जी. रानाडे |
| 5 | इंडियन एसोसिएशन | 1876, कलकत्ता — सुरेंद्रनाथ बनर्जी, आनंद मोहन बोस |
| 6 | मद्रास महाजन सभा | 1884 |
| 7 | बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन | 1885 — फ़िरोज़शाह मेहता, तेलंग, तैयबजी |
| 8 | INC स्थापना | 28 दिसंबर 1885 |
| 9 | प्रथम अधिवेशन स्थल | गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई |
| 10 | INC संस्थापक | ए.ओ. ह्यूम |
| 11 | प्रथम अध्यक्ष | डब्ल्यू.सी. बनर्जी |
| 12 | प्रथम अधिवेशन प्रतिनिधि | 72 |
| 13 | स्थापना के समय वायसराय | लॉर्ड डफरिन |
| 14 | 1886 कलकत्ता अध्यक्ष | दादाभाई नौरोजी |
| 15 | प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष | बदरुद्दीन तैयबजी (1887, मद्रास) |
| 16 | प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष | जॉर्ज यूल (1888, इलाहाबाद) |
| 17 | वंदे मातरम् पहली बार कांग्रेस में | 1896, कलकत्ता |
| 18 | 1905 बनारस अध्यक्ष | गोपाल कृष्ण गोखले |
| 19 | 1906 कलकत्ता — स्वराज | दादाभाई नौरोजी |
| 20 | सूरत फूट | 1907, अध्यक्ष रासबिहारी घोष |
| 21 | जन गण मन पहली बार गाया | 1911, कलकत्ता अधिवेशन |
| 22 | लखनऊ अधिवेशन 1916 अध्यक्ष | अंबिका चरण मजूमदार |
| 23 | प्रथम महिला अध्यक्ष | एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता) |
| 24 | धन-निष्कासन सिद्धांत | दादाभाई नौरोजी |
| 25 | Poverty and Un-British Rule in India | दादाभाई नौरोजी |
| 26 | Economic History of India | आर.सी. दत्त |
| 27 | ब्रिटिश संसद में प्रथम भारतीय | दादाभाई नौरोजी (1892) |
| 28 | उदारवादियों की पद्धति | प्रार्थना, याचिका, विरोध |
| 29 | लाल-बाल-पाल | लाजपत राय, तिलक, बिपिन चंद्र पाल |
| 30 | केसरी व मराठा | तिलक |
| 31 | बंग-भंग | कर्ज़न; प्रभावी 16 अक्टूबर 1905 |
| 32 | स्वदेशी आंदोलन की घोषणा | 7 अगस्त 1905, कलकत्ता टाउन हॉल |
| 33 | बंग-भंग रद्द | 1911, दिल्ली दरबार (हार्डिंग) |
| 34 | राजधानी कलकत्ता से दिल्ली — घोषणा | 1911 |
| 35 | शिमला प्रतिनिधिमंडल | 1 अक्टूबर 1906, आगा ख़ाँ → मिंटो |
| 36 | मुस्लिम लीग | 30 दिसंबर 1906, ढाका |
| 37 | पृथक निर्वाचन (मुसलमान) | मार्ले-मिंटो सुधार 1909 |
| 38 | वायसराय परिषद में प्रथम भारतीय | सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा |
| 39 | अनुशीलन समिति | 1902, बंगाल — प्रमथनाथ मित्र |
| 40 | अभिनव भारत | 1904 — सावरकर बंधु |
| 41 | इंडिया हाउस, लंदन | श्यामजी कृष्ण वर्मा |
| 42 | मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड | 1908 — खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चाकी |
| 43 | अलीपुर षड्यंत्र में अरविंद के वकील | सी.आर. दास |
| 44 | कर्ज़न वायली की हत्या | मदनलाल ढींगरा (1909, लंदन) |
| 45 | ग़दर पार्टी | 1913, सैन फ्रांसिस्को — लाला हरदयाल |
| 46 | कामागाटा मारू | 1914 — गुरदित सिंह |
| 47 | तिलक की होमरूल लीग | अप्रैल 1916, बेलगाँव |
| 48 | बेसेंट की होमरूल लीग | सितंबर 1916, मद्रास |
| 49 | लखनऊ समझौता | 1916 — कांग्रेस + मुस्लिम लीग |
| 50 | मोंटेग्यू घोषणा | 20 अगस्त 1917 |
| 51 | प्रांतों में द्वैध शासन | भारत शासन अधिनियम 1919 |
| 52 | रौलट एक्ट | मार्च 1919 — "न वकील, न दलील, न अपील" |
16. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
नीचे दिए नमूना प्रश्न इस नोट के लिए तैयार किए गए हैं; ये केवल प्रश्नों के ढाँचे समझाने के लिए हैं।
- सुमेलन (Match the following): सूची-I (संस्था) — ईस्ट इंडिया एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन, ग़दर पार्टी, अभिनव भारत; सूची-II (संस्थापक) — दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, लाला हरदयाल, सावरकर। संकेत: स्थान भी याद रखें — लंदन, कलकत्ता, सैन फ्रांसिस्को, महाराष्ट्र।
- कालानुक्रम: "निम्न को सही क्रम में लगाइए — (a) मुस्लिम लीग की स्थापना (b) सूरत फूट (c) मार्ले-मिंटो सुधार (d) दिल्ली दरबार।" उत्तर: a (1906) → b (1907) → c (1909) → d (1911)।
- कथन-आधारित: "1. भारत शासन अधिनियम 1919 ने केंद्र में द्वैध शासन लागू किया। 2. इसने केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल बनाया।" — कथन 1 गलत (द्वैध शासन प्रांतों में), कथन 2 सही।
- अभिकथन-कारण: अभिकथन (A): 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया। कारण (R): सरकार ने प्रशासनिक सुविधा को इसका कारण बताया। — दोनों सही; R सरकारी तर्क है, पर राष्ट्रवादियों के अनुसार वास्तविक उद्देश्य बंगाल के राष्ट्रवाद को कमज़ोर करना था। ऐसे प्रश्नों में "सरकारी तर्क" और "वास्तविक उद्देश्य" का भेद ध्यान से पढ़ें।
- अधिवेशन-अध्यक्ष: "कांग्रेस के किस अधिवेशन में उदारवादी और उग्रवादी फिर एक हुए?" — लखनऊ 1916।
- "प्रथम" वाले प्रश्न: प्रथम मुस्लिम, प्रथम अंग्रेज़, प्रथम महिला अध्यक्ष; ब्रिटिश संसद में प्रथम भारतीय; वायसराय परिषद में प्रथम भारतीय।
17. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. कांग्रेस स्थापना — "28-12-85, 72 लोग, बंबई का संस्कृत कॉलेज": ह्यूम ने बुलाया, बनर्जी ने चलाया, डफरिन ने देखा।
2. पहले चार अध्यक्ष — "ब-दा-ब-यू": बनर्जी (1885) → दादाभाई (1886) → बदरुद्दीन (1887) → यूल (1888)। स्थान — बंबई, कलकत्ता, मद्रास, इलाहाबाद ("BCMA")।
3. 1905–1911 क्रम — "बंग-लीग-सूरत-मिंटो-दरबार": 1905 बंग-भंग → 1906 लीग → 1907 सूरत → 1909 मार्ले-मिंटो → 1911 दरबार।
4. होमरूल — "तिलक पहले, बेसेंट बाद में": अप्रैल में बेलगाँव, सितंबर में मद्रास — वर्णक्रम में भी "ब" (बेलगाँव) "म" (मद्रास) से पहले।
5. अधिनियम — "09 = पृथक, 19 = द्वैध (प्रांत), 35 = द्वैध (केंद्र, अमल नहीं)"।
6. क्रांतिकारी संगठनों का भूगोल — "अनु-बंगाल, अभि-महाराष्ट्र, ग़दर-अमेरिका, इंडिया हाउस-लंदन"।
18. कथन अभ्यास
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन बंबई में हुआ था। — सही।
कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता ए.ओ. ह्यूम ने की थी। — गलत (अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी; ह्यूम संस्थापक)।
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना कलकत्ता में सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने की थी। — गलत (1866, लंदन, दादाभाई नौरोजी; सुरेंद्रनाथ — इंडियन एसोसिएशन 1876)।
बदरुद्दीन तैयबजी कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे। — सही।
बंगाल विभाजन लॉर्ड मिंटो के समय हुआ था। — गलत (लॉर्ड कर्ज़न, 1905)।
बंग-भंग 1911 के दिल्ली दरबार में रद्द किया गया। — सही।
मार्ले-मिंटो सुधार 1909 ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की। — सही।
1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ। — सही।
ग़दर पार्टी की स्थापना लंदन में हुई थी। — गलत (सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका, 1913)।
एनी बेसेंट की होमरूल लीग तिलक की लीग से पहले स्थापित हुई। — गलत (तिलक — अप्रैल 1916; बेसेंट — सितंबर 1916)।
लखनऊ समझौते में कांग्रेस ने पृथक निर्वाचन को स्वीकार किया। — सही।
भारत शासन अधिनियम 1919 ने केंद्र में द्वैध शासन लागू किया। — गलत (प्रांतों में)।
19. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- कांग्रेस-पूर्व: लैंडहोल्डर्स 1838, ब्रिटिश इंडिया एसो. 1851, ईस्ट इंडिया एसो. 1866 (लंदन, दादाभाई), इंडियन एसो. 1876 (सुरेंद्रनाथ)
- INC — 28 दिसंबर 1885, बंबई, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, 72 प्रतिनिधि
- ह्यूम संस्थापक, डब्ल्यू.सी. बनर्जी अध्यक्ष, डफरिन वायसराय
- सेफ्टी वाल्व — विवादित मत; बिपन चंद्र — "तड़ित-चालक"
- 1887 तैयबजी (प्रथम मुस्लिम), 1888 यूल (प्रथम अंग्रेज़), 1917 बेसेंट (प्रथम महिला)
- उदारवादी — प्रार्थना, याचिका, विरोध; धन-निष्कासन — दादाभाई
- उग्रवादी — लाल-बाल-पाल, अरविंद; स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा
- बंग-भंग — कर्ज़न, 16 अक्टूबर 1905; स्वदेशी घोषणा 7 अगस्त 1905
- मुस्लिम लीग — 30 दिसंबर 1906, ढाका
- सूरत फूट 1907 — रासबिहारी घोष (बोस नहीं)
- मार्ले-मिंटो 1909 — पृथक निर्वाचन; दिल्ली दरबार 1911 — विभाजन रद्द, राजधानी दिल्ली
- अनुशीलन (बंगाल), अभिनव भारत (सावरकर), ग़दर 1913 (हरदयाल), कामागाटा मारू 1914
- होमरूल — तिलक अप्रैल 1916 बेलगाँव; बेसेंट सितंबर 1916 मद्रास
- लखनऊ समझौता 1916; मोंटेग्यू घोषणा 20 अगस्त 1917
- 1919 अधिनियम — प्रांतों में द्वैध शासन; रौलट एक्ट मार्च 1919
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें — इसमें सुमेलन, कालानुक्रम और कथन-आधारित प्रश्न मिले-जुले हैं। हर गलत उत्तर पर ऊपर की रिवीज़न तालिका और Exam Trap खंड दोबारा देखें। पूर्ण-लंबाई अभ्यास के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ और RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
1885 से 1919 तक का राष्ट्रीय आंदोलन तीन पड़ावों में समझें — उदारवादियों ने संगठन, आर्थिक आलोचना और राजनीतिक चेतना की नींव रखी; बंग-भंग के बाद उग्रवादियों ने स्वदेशी-बहिष्कार से आंदोलन को जनता तक पहुँचाया और क्रांतिकारियों ने बलिदान का मार्ग चुना; प्रथम विश्व युद्ध के दौरान होमरूल और लखनऊ समझौते ने एकता लौटाई। ब्रिटिश सरकार ने हर चरण में सुधार और दमन साथ-साथ चलाए — 1909 में पृथक निर्वाचन, 1919 में द्वैध शासन के साथ रौलट एक्ट। परीक्षा के लिए अधिवेशन-अध्यक्ष, संस्था-संस्थापक, अधिनियम-प्रावधान और 1905–1911 का कालक्रम सबसे ज़रूरी हैं।
1885 ह्यूम-बनर्जी-72 | उदारवादी = 3P + धन-निष्कासन | 1905 कर्ज़न बंग-भंग → 1906 लीग → 1907 सूरत → 1909 पृथक निर्वाचन → 1911 दरबार | 1916 होमरूल + लखनऊ | 1919 द्वैध (प्रांत) + रौलट
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“राष्ट्रीय आंदोलन 1885–1919 — कांग्रेस स्थापना, बंग-भंग, होमरूल से 1919 अधिनियम तक — UPSC/RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- राष्ट्रीय आंदोलन 1885–1919 — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- गांधी युग से स्वतंत्रता तक (1919–1947) — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- कंपनी शासन का विस्तार और गवर्नर-जनरल — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई। संस्थापक ए.ओ. ह्यूम थे, प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी थे और प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधि शामिल हुए।
एक मत के अनुसार ह्यूम ने कांग्रेस को ब्रिटिश शासन के लिए 'सुरक्षा कपाट' के रूप में बनाया ताकि असंतोष हिंसक विद्रोह न बने। यह विवादित मत है; बिपन चंद्र जैसे इतिहासकार इसे मिथक मानते हैं और कहते हैं कि भारतीय नेताओं ने ह्यूम को 'तड़ित-चालक' के रूप में इस्तेमाल किया।
प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी (1887, मद्रास), प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष जॉर्ज यूल (1888, इलाहाबाद) और प्रथम महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता) थीं।
धन-निष्कासन (Drain of Wealth) सिद्धांत दादाभाई नौरोजी ने दिया। उनकी पुस्तक 'Poverty and Un-British Rule in India' में बताया गया कि भारत की संपत्ति बिना प्रतिफल के इंग्लैंड जा रही है और यही भारत की ग़रीबी का मूल कारण है।
उदारवादी (दादाभाई, गोखले, फ़िरोज़शाह मेहता) प्रार्थना, याचिका और विरोध जैसे संवैधानिक तरीकों से क्रमिक सुधार चाहते थे। उग्रवादी (लाल-बाल-पाल, अरविंद) स्वराज को लक्ष्य मानकर स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा का मार्ग अपनाते थे।
लॉर्ड कर्ज़न द्वारा किया गया बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 को प्रभावी हुआ। इसे दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में रद्द किया गया और राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाने की घोषणा भी हुई।
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसंबर 1906 को ढाका में हुई। इससे पहले 1 अक्टूबर 1906 को आगा ख़ाँ के नेतृत्व में शिमला प्रतिनिधिमंडल वायसराय मिंटो से मिला था।
भारतीय परिषद अधिनियम 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार) का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन था। इसी कारण लॉर्ड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है।
दो होमरूल लीगें बनीं — बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में बेलगाँव में और एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में मद्रास में। दोनों का लक्ष्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन था।
1919 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन लागू किया, जिसमें विषय आरक्षित (गवर्नर व कार्यकारी परिषद के अधीन) और हस्तांतरित (विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों के अधीन) में बाँटे गए। यह अधिनियम 1921 में लागू हुआ।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: