मुगल साम्राज्य: बाबर से औरंगज़ेब तक — युद्ध, मनसबदारी, स्थापत्य व ग्रंथ तालिकाएँ — UPSC/RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
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संक्षिप्त उत्तर: मुगल साम्राज्य की नींव बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में इब्राहिम लोदी को हराकर रखी; खानवा (1527) में राणा साँगा, चंदेरी (1528) में मेदिनी राय और घाघरा (1529) में अफ़गानों को हराकर उसने उत्तर भारत में सत्ता पक्की की। हुमायूँ को शेर खाँ ने चौसा (1539) और कन्नौज/बिलग्राम (1540) में हराया; शेरशाह सूरी (1540–45) ने चाँदी का रुपया, सड़क-ए-आज़म (ग्रैंड ट्रंक रोड) और भूमि-माप पर आधारित लगान जैसे सुधार किए। अकबर (1556–1605) ने पानीपत द्वितीय (1556) में हेमू को हराया, मनसबदारी, टोडरमल की ज़ब्ती/दहसाला (1580), सुलह-ए-कुल, इबादतखाना (1575) और दीन-ए-इलाही (1582) उसकी नीतियों के मुख्य स्तंभ हैं; हल्दीघाटी (1576) में मानसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना का महाराणा प्रताप से युद्ध हुआ। जहाँगीर ने न्याय की ज़ंजीर लगवाई और उसके दरबार में सर टॉमस रो (1615) आया; शाहजहाँ स्थापत्य का स्वर्णकाल है — ताजमहल, दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद। औरंगज़ेब ने 1679 में जज़िया पुनः लगाया, बीजापुर (1686) व गोलकुंडा (1687) जीते और पुरंदर की संधि (1665) में जयसिंह के माध्यम से शिवाजी को झुकाया। आइन-ए-अकबरी और अकबरनामा के लेखक अबुल फ़ज़ल हैं; बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी) बाबर की आत्मकथा है जो तुर्की भाषा में लिखी गई।
संक्षिप्त उत्तर
| शासक | शासनकाल | सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य |
|---|---|---|
| बाबर | 1526–1530 | पानीपत I (1526), खानवा (1527); आत्मकथा बाबरनामा (तुर्की) |
| हुमायूँ | 1530–1540, 1555–1556 | चौसा (1539), कन्नौज (1540) में शेर खाँ से हार; 1555 में वापसी |
| शेरशाह सूरी (सूर वंश) | 1540–1545 | रुपया, सड़क-ए-आज़म, पट्टा-कबूलियत; कालिंजर में मृत्यु |
| अकबर | 1556–1605 | मनसबदारी, दहसाला, सुलह-ए-कुल, दीन-ए-इलाही (1582) |
| जहाँगीर | 1605–1627 | न्याय की ज़ंजीर, नूरजहाँ, सर टॉमस रो |
| शाहजहाँ | 1628–1658 | ताजमहल, लाल किला (दिल्ली), मयूर सिंहासन |
| औरंगज़ेब (आलमगीर) | 1658–1707 | जज़िया पुनः (1679), दक्कन नीति, पुरंदर संधि (1665) |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| मुगल वंश का संस्थापक | ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर |
| बाबर का वंश-संबंध | पिता की ओर से तैमूर, माता की ओर से चंगेज़ खाँ से |
| पानीपत का प्रथम युद्ध | 1526 — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी |
| पानीपत का द्वितीय युद्ध | 1556 — अकबर (बैरम खाँ) बनाम हेमू |
| दहसाला / ज़ब्ती व्यवस्था | 1580 — राजा टोडरमल |
| दीन-ए-इलाही (तौहीद-ए-इलाही) | 1582 — अकबर |
| जज़िया की पुनः स्थापना | 1679 — औरंगज़ेब (अकबर ने 1564 में हटाया था) |
| आइन-ए-अकबरी, अकबरनामा | अबुल फ़ज़ल |
| अंतिम "महान मुगल" | औरंगज़ेब (मृत्यु 1707) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
मुगल काल मध्यकालीन भारत का सबसे बड़ा और सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अध्याय है। UPSC CSE प्रारंभिक में यहाँ से प्रायः प्रशासन (मनसबदारी, भू-राजस्व), धार्मिक नीति, कला-स्थापत्य और यूरोपीय यात्रियों पर कथन-आधारित प्रश्न बनते हैं। RPSC RAS में मुगल-राजपूत संबंध — आमेर का गठबंधन, हल्दीघाटी, मेवाड़ संधि (1615), मारवाड़ का संघर्ष — राजस्थान इतिहास से जुड़कर विशेष महत्व रखते हैं। SSC CGL/CHSL और राजस्थान CET (स्नातक) में सीधे तथ्य — युद्ध-वर्ष, किसने क्या बनवाया, कौन-सा ग्रंथ किसने लिखा — अधिक पूछे जाते हैं। इससे पहले का संदर्भ दिल्ली सल्तनत से आता है (इब्राहिम लोदी अंतिम सुल्तान था) और उसी काल की धार्मिक हलचल के लिए भक्ति एवं सूफी आंदोलन साथ में पढ़ें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — प्रशासन, संस्कृति, यात्री, कथन-आधारित प्रश्न
- RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — मुगल-राजपूत संबंध, अकबर की नीतियाँ
- SSC CGL / CHSL — युद्ध, वर्ष, स्मारक, ग्रंथ
- राजस्थान CET (स्नातक), पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी
- RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक (सामाजिक विज्ञान)
प्रश्न कैसे आते हैं?
- युद्ध और वर्ष / युद्ध और प्रतिद्वंद्वी का मिलान
- कालक्रम — घटनाओं को सही क्रम में लगाना
- स्मारक और निर्माता का मिलान
- ग्रंथ और लेखक का मिलान
- मनसबदारी, ज़ब्ती, सुलह-ए-कुल जैसी अवधारणाओं पर कथन
- यूरोपीय यात्री / राजदूत और मुगल शासक का मिलान
3. बाबर (1526–1530)
बाबर का जन्म 1483 में फ़रग़ना (मध्य एशिया) में हुआ। पिता की ओर से वह तैमूर का और माता की ओर से चंगेज़ खाँ का वंशज था। समरकंद पर बार-बार अधिकार खोने के बाद उसने 1504 में काबुल जीता और वहाँ से भारत की ओर बढ़ा। उसके आक्रमण में तुलुगमा युद्ध-पद्धति (सेना को टुकड़ियों में बाँटकर शत्रु को पार्श्व और पीछे से घेरना) और तोपखाने (उस्ताद अली और मुस्तफ़ा) की निर्णायक भूमिका रही।
3.1 बाबर के प्रमुख युद्ध
| युद्ध | वर्ष | प्रतिद्वंद्वी | महत्व |
|---|---|---|---|
| पानीपत का प्रथम युद्ध | 1526 | इब्राहिम लोदी (दिल्ली सल्तनत) | लोदी वंश और दिल्ली सल्तनत का अंत, मुगल वंश की स्थापना |
| खानवा का युद्ध | 1527 | राणा साँगा (मेवाड़) व राजपूत संघ | उत्तर भारत में राजपूत शक्ति निर्णायक रूप से पराजित; बाबर ने "ग़ाज़ी" उपाधि ली |
| चंदेरी का युद्ध | 1528 | मेदिनी राय | मालवा क्षेत्र में राजपूत प्रतिरोध समाप्त |
| घाघरा का युद्ध | 1529 | अफ़गान सरदार (महमूद लोदी के समर्थक) व बंगाल का शासक | पूर्वी भारत के अफ़गानों पर विजय |
खानवा से पहले बाबर ने युद्ध को "जिहाद" घोषित किया और मुसलमानों से तमगा (एक व्यापारिक कर) हटाने की घोषणा की। बाबर की मृत्यु 1530 में आगरा में हुई; बाद में उसे काबुल में दफ़नाया गया।
3.2 बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी)
- बाबर की आत्मकथा, जो उसने तुर्की (चग़ताई तुर्की) में लिखी।
- अकबर के समय अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना ने इसका फ़ारसी अनुवाद किया।
- इसमें भारत की वनस्पति, जीव-जंतु, लोगों और तत्कालीन पाँच मुस्लिम व दो हिंदू राज्यों (विजयनगर, मेवाड़) का वर्णन है।
4. हुमायूँ और शेरशाह सूरी
4.1 हुमायूँ (1530–1540 व 1555–1556)
हुमायूँ को साम्राज्य के साथ भाइयों (कामरान, अस्करी, हिंदाल) की प्रतिस्पर्धा भी विरासत में मिली। बिहार के अफ़गान सरदार शेर खाँ ने उसे दो निर्णायक युद्धों में हराया।
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| चौसा का युद्ध | 1539 | शेर खाँ विजयी; उसने "शेरशाह" उपाधि धारण की |
| कन्नौज (बिलग्राम) का युद्ध | 1540 | हुमायूँ की निर्णायक हार; भारत छोड़कर ईरान (सफ़वी शाह तहमास्प) की शरण |
| मच्छीवाड़ा व सरहिंद के युद्ध | 1555 | सूर वंश (सिकंदर सूर) को हराकर हुमायूँ ने दिल्ली पुनः प्राप्त की |
निर्वासन काल में ही 1542 में अमरकोट (सिंध) में अकबर का जन्म हुआ। 1556 में दिल्ली में अपने पुस्तकालय (शेर मंडल) की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हुई। उसकी सौतेली बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा लिखा। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा उसकी विधवा हाजी बेगम (बेगा बेगम) ने बनवाया — इसे मुगल उद्यान-मकबरा शैली का प्रारंभिक बड़ा उदाहरण माना जाता है।
4.2 शेरशाह सूरी (1540–1545)
शेरशाह (बचपन का नाम फ़रीद) ने केवल पाँच वर्ष शासन किया, पर उसके प्रशासनिक सुधार इतने प्रभावी थे कि अकबर की व्यवस्था का बड़ा भाग उन्हीं पर टिका।
| क्षेत्र | सुधार |
|---|---|
| मुद्रा | चाँदी का रुपया (लगभग 178 ग्रेन) और ताँबे का दाम — रुपया आगे मुगल काल की मानक मुद्रा बना |
| सड़कें | सड़क-ए-आज़म — सोनारगाँव (बंगाल) से पंजाब/पेशावर तक; बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड कहलाई |
| सराय | सड़कों पर निश्चित दूरी पर सराय — यात्रियों के विश्राम और डाक-व्यवस्था के केंद्र |
| भू-राजस्व | भूमि की माप के आधार पर लगान; उपज का लगभग एक-तिहाई राज्य का भाग |
| किसान से अनुबंध | पट्टा (राज्य द्वारा किसान को) और कबूलियत (किसान द्वारा स्वीकृति) |
| प्रशासन | सरकार और परगना की इकाइयाँ; परगने में शिकदार, मुंसिफ़ जैसे अधिकारी |
शेरशाह की मृत्यु 1545 में कालिंजर के घेरे के दौरान बारूद विस्फोट से हुई। उसका मकबरा सासाराम (बिहार) में है। मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत (1540 के आसपास) इसी काल में रचा।
5. अकबर (1556–1605)
हुमायूँ की मृत्यु के बाद 1556 में 13 वर्षीय अकबर का राज्याभिषेक कलानौर (पंजाब) में हुआ। संरक्षक बैरम खाँ के नेतृत्व में पानीपत के द्वितीय युद्ध (1556) में हेमू (हेमचंद्र विक्रमादित्य, आदिलशाह सूर का सेनापति) पराजित हुआ। 1560 में अकबर ने बैरम खाँ को हटाकर स्वयं सत्ता सँभाली; 1560–62 का काल उसकी धाय माहम अनगा के प्रभाव के कारण कई पुस्तकों में "पर्दा शासन" (पेटीकोट सरकार) कहा जाता है।
5.1 अकबर के प्रमुख कदम (कालक्रम)
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1556 | पानीपत का द्वितीय युद्ध — हेमू पराजित |
| 1562 | आमेर के राजा भारमल से वैवाहिक संबंध; युद्धबंदियों को दास बनाने पर रोक |
| 1563 | तीर्थयात्रा कर समाप्त |
| 1564 | जज़िया समाप्त |
| 1568 | चित्तौड़ विजय |
| 1570 का दशक | फ़तेहपुर सीकरी का निर्माण; मनसबदारी का व्यवस्थित रूप |
| 1572–73 | गुजरात विजय |
| 1575 | फ़तेहपुर सीकरी में इबादतखाना की स्थापना |
| 1576 | हल्दीघाटी का युद्ध — मुगल सेना (मानसिंह) बनाम महाराणा प्रताप |
| 1579 | महज़र — धार्मिक विवादों में अकबर को निर्णायक अधिकार |
| 1580 | दहसाला (ज़ब्ती) व्यवस्था — राजा टोडरमल |
| 1582 | दीन-ए-इलाही (तौहीद-ए-इलाही) |
| 1605 | अकबर की मृत्यु; मकबरा सिकंदरा (आगरा) — जहाँगीर के समय पूर्ण |
5.2 मनसबदारी व्यवस्था
मनसब का अर्थ है पद या श्रेणी। अकबर ने सभी अधिकारियों — सैनिक और असैनिक — को एक संख्यात्मक श्रेणी में रखा। प्रत्येक मनसबदार की दो रैंक होती थीं:
| रैंक | अर्थ |
|---|---|
| ज़ात | व्यक्तिगत पद और वेतन का सूचक |
| सवार | मनसबदार को कितने घुड़सवार रखने हैं — इसका सूचक |
- मनसबदारों को वेतन नकद या जागीर (भूमि का राजस्व-अधिकार, भूमि का स्वामित्व नहीं) के रूप में मिलता था।
- जागीरें प्रायः स्थानांतरित होती रहती थीं, ताकि कोई मनसबदार स्थानीय शक्ति न बना ले।
- मनसब वंशानुगत नहीं था; नियुक्ति, पदोन्नति और पदच्युति बादशाह के हाथ में थी।
- औरंगज़ेब के काल में मनसबदारों की संख्या बढ़ने और जागीरों की कमी से जागीरदारी संकट पैदा हुआ।
5.3 ज़ब्ती / दहसाला व्यवस्था (1580)
राजा टोडरमल (जो शेरशाह के अधीन भी काम कर चुके थे) ने पिछले दस वर्षों की उपज और कीमतों के औसत के आधार पर नकद लगान तय करने की व्यवस्था बनाई — इसीलिए इसे दहसाला (दस साल) कहा गया। भूमि की माप होती थी और राज्य का भाग सामान्यतः उपज का एक-तिहाई माना गया। यह व्यवस्था मुख्यतः उत्तर भारत के केंद्रीय प्रांतों (जैसे आगरा, इलाहाबाद, दिल्ली, लाहौर, मालवा) में लागू हुई; अन्य क्षेत्रों में बटाई (ग़ल्ला-बख़्शी) और नसक जैसी पद्धतियाँ भी चलती रहीं।
| भूमि का वर्ग (आइन-ए-अकबरी के अनुसार) | अर्थ |
|---|---|
| पोलज | हर वर्ष खेती होने वाली भूमि |
| परौती | कुछ समय परती छोड़ी जाने वाली भूमि |
| चचर | तीन-चार वर्ष परती रहने वाली भूमि |
| बंजर | पाँच वर्ष या अधिक समय से बिना खेती की भूमि |
5.4 धार्मिक नीति — सुलह-ए-कुल, इबादतखाना, दीन-ए-इलाही
- सुलह-ए-कुल ("सबके साथ शांति") — अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति, जिसका वैचारिक प्रतिपादन अबुल फ़ज़ल ने किया।
- इबादतखाना (1575) — फ़तेहपुर सीकरी में धार्मिक चर्चाओं का भवन। आरंभ में केवल मुस्लिम विद्वान आते थे; बाद में हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई (जेसुइट) विद्वान भी आमंत्रित हुए।
- महज़र (1579) — इस घोषणा से धार्मिक मतभेद की स्थिति में अकबर को अंतिम निर्णय का अधिकार मिला।
- दीन-ए-इलाही (1582) — इसे इतिहासकार प्रायः एक अलग "धर्म" के बजाय अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित एक आध्यात्मिक-नैतिक मार्ग / शिष्य-परंपरा मानते हैं। इसके अनुयायी बहुत कम थे; प्रमुख हिंदू अनुयायियों में बीरबल का नाम लिया जाता है।
5.5 हल्दीघाटी (1576) और मुगल-राजपूत संबंध
अकबर ने राजपूतों के साथ वैवाहिक और राजनीतिक गठबंधन (आमेर — 1562) की नीति अपनाई और राजपूतों को ऊँचे मनसब दिए। मेवाड़ ने अधीनता स्वीकार नहीं की। हल्दीघाटी का युद्ध (1576) मुगल सेना — जिसका नेतृत्व आमेर के मानसिंह ने किया — और महाराणा प्रताप के बीच हुआ। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने संघर्ष जारी रखा और मेवाड़ के बड़े भाग पर पुनः अधिकार किया। मेवाड़ और मुगलों के बीच समझौता बाद में 1615 में जहाँगीर के समय (अमर सिंह और शहज़ादा खुर्रम के बीच) हुआ। राजस्थान के संदर्भ के लिए RPSC RAS प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ में इस अध्याय के प्रश्न अवश्य हल करें।
5.6 अकबर का दरबार और "नवरत्न"
अकबर के दरबार के नौ विशिष्ट व्यक्तियों को "नवरत्न" कहने की परंपरा बाद की लोकप्रिय परंपरा है; समकालीन आधिकारिक स्रोतों में ऐसी कोई औपचारिक संस्था नहीं मिलती। फिर भी दरबार से जुड़े प्रमुख व्यक्ति ऐतिहासिक हैं:
| व्यक्ति | पहचान |
|---|---|
| अबुल फ़ज़ल | इतिहासकार — अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी |
| फ़ैज़ी | कवि, अबुल फ़ज़ल का भाई; संस्कृत ग्रंथ लीलावती का फ़ारसी अनुवाद |
| राजा टोडरमल | राजस्व सुधार (दहसाला) |
| राजा मानसिंह | आमेर के शासक, प्रमुख सेनापति |
| बीरबल | दरबारी, दीन-ए-इलाही के अनुयायी |
| तानसेन | संगीतज्ञ |
| अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना | बैरम खाँ का पुत्र; बाबरनामा का फ़ारसी अनुवाद; हिंदी में दोहे |
अकबर के मकतबख़ाना (अनुवाद विभाग) में महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज़्मनामा नाम से हुआ। चित्रकला में मीर सैयद अली और अब्दुस्समद के नेतृत्व में हम्ज़ानामा का चित्रण हुआ।
6. जहाँगीर (1605–1627)
- मूल नाम सलीम; 1606 में शहज़ादा खुसरो का विद्रोह; खुसरो की सहायता के आरोप में सिख गुरु अर्जन देव को 1606 में मृत्युदंड।
- आगरा किले में न्याय की ज़ंजीर (ज़ंजीर-ए-अदल) लगवाई, जिसे खींचकर कोई भी फ़रियादी बादशाह तक पहुँच सकता था।
- 1611 में मेहरुन्निसा से विवाह, जिन्हें नूरजहाँ उपाधि मिली; उनके पिता एतमादुद्दौला, भाई आसफ़ ख़ाँ — इस प्रभावशाली समूह को कई इतिहासकार "नूरजहाँ गुट" कहते हैं।
- 1615 — मेवाड़ (अमर सिंह) के साथ संधि।
- आत्मकथा तुज़ुक-ए-जहाँगीरी (फ़ारसी)।
- चित्रकला का चरम — उस्ताद मंसूर (पशु-पक्षियों के चित्र), अबुल हसन।
- आगरा में एतमादुद्दौला का मकबरा नूरजहाँ ने बनवाया — संगमरमर में पित्रादुरा (रंगीन पत्थरों की जड़ाई) के प्रारंभिक बड़े प्रयोग के लिए प्रसिद्ध।
- अंग्रेज़ कैप्टन विलियम हॉकिन्स (1608) और राजदूत सर टॉमस रो (1615–1619, इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत) जहाँगीर के दरबार में आए।
- मृत्यु 1627 — मकबरा शाहदरा (लाहौर)।
7. शाहजहाँ (1628–1658)
मूल नाम खुर्रम। शाहजहाँ का शासन मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल माना जाता है। उसने राजधानी आगरा से दिल्ली में नए नगर शाहजहाँनाबाद में स्थानांतरित की।
- ताजमहल (आगरा) — पत्नी मुमताज़ महल की स्मृति में; मुख्य वास्तुकार के रूप में उस्ताद अहमद लाहौरी का नाम लिया जाता है।
- लाल किला (दिल्ली) — दीवान-ए-आम, दीवान-ए-ख़ास; जामा मस्जिद (दिल्ली); आगरा किले में मोती मस्जिद।
- तख़्त-ए-ताऊस (मयूर सिंहासन) — शाहजहाँ के लिए बना; 1739 में नादिरशाह इसे ईरान ले गया।
- दक्कन — अहमदनगर का अंत (1633); बीजापुर और गोलकुंडा से अधीनता की संधियाँ (1636)।
- शहज़ादा दारा शिकोह ने उपनिषदों का फ़ारसी अनुवाद सिर्र-ए-अकबर नाम से कराया और मजमा-उल-बहरैन (दो समुद्रों का संगम) लिखी।
7.1 उत्तराधिकार युद्ध (1657–1659)
1657 में शाहजहाँ के बीमार पड़ने पर उसके चार पुत्रों — दारा शिकोह, शाह शुजा, औरंगज़ेब और मुराद बख़्श — में संघर्ष हुआ।
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| बहादुरपुर | 1658 | शाह शुजा, दारा के पुत्र सुलेमान शिकोह की सेना से पराजित |
| धरमत | 1658 | औरंगज़ेब और मुराद ने शाही सेना (जसवंत सिंह) को हराया |
| सामूगढ़ | 1658 | औरंगज़ेब ने दारा को निर्णायक रूप से हराया |
| खजुआ | 1659 | औरंगज़ेब ने शाह शुजा को हराया |
| देवराई | 1659 | दारा की अंतिम हार; बाद में उसे मृत्युदंड |
औरंगज़ेब ने शाहजहाँ को आगरा किले में नज़रबंद कर दिया, जहाँ 1666 में उसकी मृत्यु हुई।
8. औरंगज़ेब (1658–1707)
औरंगज़ेब ने "आलमगीर" उपाधि धारण की। उसका लगभग 50 वर्ष का शासन साम्राज्य के सबसे बड़े विस्तार का काल भी है और उन तनावों का भी, जो उसकी मृत्यु के बाद विघटन का कारण बने।
8.1 धार्मिक नीति
- 1679 — गैर-मुस्लिमों पर जज़िया पुनः लगाया (अकबर ने 1564 में हटाया था)।
- दरबार में कई पुरानी परंपराएँ (जैसे झरोखा दर्शन, तुलादान) बंद कीं।
- धर्मशास्त्रीय संकलन फ़तवा-ए-आलमगीरी उसके संरक्षण में तैयार हुआ।
- 1675 — सिख गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड।
8.2 विद्रोह और प्रतिरोध
| समूह / क्षेत्र | नेता / संदर्भ |
|---|---|
| जाट (मथुरा क्षेत्र) | गोकुल; बाद में राजाराम, चूड़ामन |
| सतनामी (नारनौल क्षेत्र) | 1672 का विद्रोह |
| सिख | गुरु तेग बहादुर (1675), गुरु गोविंद सिंह — खालसा की स्थापना (1699) |
| राजपूत (मारवाड़) | जसवंत सिंह की मृत्यु (1678) के बाद उत्तराधिकार विवाद; दुर्गादास राठौड़ |
| मराठा | शिवाजी, शंभाजी, राजाराम, ताराबाई |
8.3 दक्कन नीति और शिवाजी
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1665 | पुरंदर की संधि — मुगल सेनापति राजा जयसिंह (आमेर) और शिवाजी के बीच; शिवाजी ने अनेक किले मुगलों को सौंपे |
| 1666 | शिवाजी आगरा दरबार गए, नज़रबंद हुए और वहाँ से निकल भागे |
| 1674 | रायगढ़ में शिवाजी का राज्याभिषेक; "छत्रपति" उपाधि |
| 1681 के बाद | औरंगज़ेब स्वयं दक्कन में; शेष जीवन वहीं बीता |
| 1686 | बीजापुर (आदिलशाही) का विलय |
| 1687 | गोलकुंडा (कुतुबशाही) का विलय |
| 1689 | शंभाजी को बंदी बनाकर मृत्युदंड |
| 1707 | अहमदनगर में औरंगज़ेब की मृत्यु; मकबरा ख़ुल्दाबाद (औरंगाबाद के पास) |
औरंगज़ेब के काल की इमारतों में दिल्ली के लाल किले की मोती मस्जिद और लाहौर की बादशाही मस्जिद प्रमुख हैं। औरंगाबाद का बीबी का मकबरा (औरंगज़ेब की पत्नी रबिया-उद-दौरानी का मकबरा) ताजमहल की शैली पर बना है।
9. मुगल शासक-तालिका (एक नज़र में)
| शासक | मूल नाम / उपाधि | आत्मकथा / संबंधित ग्रंथ | मकबरा |
|---|---|---|---|
| बाबर | ज़हीरुद्दीन मुहम्मद | बाबरनामा (तुर्की) | काबुल |
| हुमायूँ | नसीरुद्दीन मुहम्मद | हुमायूँनामा (गुलबदन बेगम) | दिल्ली |
| शेरशाह | फ़रीद | तारीख़-ए-शेरशाही (अब्बास ख़ाँ सरवानी) | सासाराम |
| अकबर | जलालुद्दीन मुहम्मद | अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी (अबुल फ़ज़ल) | सिकंदरा (आगरा) |
| जहाँगीर | सलीम / नूरुद्दीन | तुज़ुक-ए-जहाँगीरी | शाहदरा (लाहौर) |
| शाहजहाँ | खुर्रम | पादशाहनामा (अब्दुल हमीद लाहौरी) | ताजमहल (आगरा) |
| औरंगज़ेब | मुहीउद्दीन / आलमगीर | फ़तवा-ए-आलमगीरी (संकलन) | ख़ुल्दाबाद |
10. युद्ध-तालिका
| युद्ध | वर्ष | पक्ष | विजेता |
|---|---|---|---|
| पानीपत I | 1526 | बाबर बनाम इब्राहिम लोदी | बाबर |
| खानवा | 1527 | बाबर बनाम राणा साँगा | बाबर |
| चंदेरी | 1528 | बाबर बनाम मेदिनी राय | बाबर |
| घाघरा | 1529 | बाबर बनाम अफ़गान | बाबर |
| चौसा | 1539 | हुमायूँ बनाम शेर खाँ | शेर खाँ |
| कन्नौज / बिलग्राम | 1540 | हुमायूँ बनाम शेर खाँ | शेर खाँ |
| सरहिंद | 1555 | हुमायूँ बनाम सिकंदर सूर | हुमायूँ |
| पानीपत II | 1556 | अकबर (बैरम खाँ) बनाम हेमू | अकबर |
| हल्दीघाटी | 1576 | मुगल सेना (मानसिंह) बनाम महाराणा प्रताप | युद्ध में मुगल पक्ष भारी; प्रताप का संघर्ष जारी रहा |
| सामूगढ़ | 1658 | औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह | औरंगज़ेब |
11. स्थापत्य-तालिका
| इमारत | स्थान | निर्माता / काल |
|---|---|---|
| हुमायूँ का मकबरा | दिल्ली | हाजी बेगम (अकबर का प्रारंभिक काल) |
| शेरशाह का मकबरा | सासाराम | सूर काल |
| आगरा का किला (लाल बलुआ पत्थर में पुनर्निर्माण) | आगरा | अकबर |
| फ़तेहपुर सीकरी — बुलंद दरवाज़ा, जामा मस्जिद, पंचमहल, सलीम चिश्ती की दरगाह | आगरा के पास | अकबर; बुलंद दरवाज़ा गुजरात विजय की स्मृति में |
| अकबर का मकबरा | सिकंदरा | अकबर ने आरंभ, जहाँगीर ने पूर्ण किया |
| एतमादुद्दौला का मकबरा | आगरा | नूरजहाँ (जहाँगीर काल) |
| शालीमार बाग | श्रीनगर | जहाँगीर |
| ताजमहल | आगरा | शाहजहाँ |
| लाल किला, जामा मस्जिद | दिल्ली | शाहजहाँ |
| मोती मस्जिद (आगरा किला) | आगरा | शाहजहाँ |
| मोती मस्जिद (लाल किला) | दिल्ली | औरंगज़ेब |
| बादशाही मस्जिद | लाहौर | औरंगज़ेब |
| बीबी का मकबरा | औरंगाबाद | औरंगज़ेब काल |
12. यूरोपीय यात्री और प्रतिनिधि
| व्यक्ति | देश | किस शासक के समय | विशेष |
|---|---|---|---|
| जेसुइट मिशन (फ़ादर रुडोल्फ़ एक्वाविवा, एंटोनियो मॉन्सेरेट) | पुर्तगाली क्षेत्र (गोवा) से | अकबर | इबादतखाना की चर्चाओं में भाग |
| राल्फ़ फ़िच | इंग्लैंड | अकबर | भारत आने वाले प्रारंभिक अंग्रेज़ यात्रियों में |
| कैप्टन विलियम हॉकिन्स | इंग्लैंड | जहाँगीर | 1608 में आगरा पहुँचा; व्यापारिक अनुमति का प्रयास |
| सर टॉमस रो | इंग्लैंड | जहाँगीर | जेम्स प्रथम का राजदूत (1615–1619); अंग्रेज़ों को व्यापारिक सुविधाएँ |
| पीटर मुंडी | इंग्लैंड | शाहजहाँ | आगरा व सूरत क्षेत्र का वर्णन |
| फ़्रांस्वा बर्नियर | फ़्रांस | शाहजहाँ–औरंगज़ेब | चिकित्सक; "Travels in the Mogul Empire"; दारा शिकोह से जुड़ा रहा |
| ज्यां-बैप्टिस्ट टैवर्नियर | फ़्रांस | शाहजहाँ–औरंगज़ेब | जौहरी; हीरों और व्यापार का वर्णन |
| निकोलाओ मनूची | इटली (वेनिस) | शाहजहाँ–औरंगज़ेब | "Storia do Mogor"; दारा की सेना में तोपची |
यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगे का इतिहास कंपनी शासन का विस्तार और गवर्नर-जनरल नोट में है।
13. ग्रंथ और लेखक
| ग्रंथ | लेखक | विषय / काल |
|---|---|---|
| बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी) | बाबर | आत्मकथा, तुर्की भाषा |
| हुमायूँनामा | गुलबदन बेगम | हुमायूँ का जीवन |
| तारीख़-ए-शेरशाही | अब्बास ख़ाँ सरवानी | शेरशाह का इतिहास |
| अकबरनामा | अबुल फ़ज़ल | अकबर के शासन का इतिहास |
| आइन-ए-अकबरी | अबुल फ़ज़ल | अकबरनामा का तीसरा खंड — प्रशासन, राजस्व, आँकड़े |
| मुंतख़ब-उत-तवारीख़ | अब्दुल क़ादिर बदायूँनी | अकबर की धार्मिक नीति की आलोचनात्मक दृष्टि |
| तबक़ात-ए-अकबरी | निज़ामुद्दीन अहमद | अकबरकालीन इतिहास |
| तुज़ुक-ए-जहाँगीरी | जहाँगीर | आत्मकथा, फ़ारसी |
| पादशाहनामा | अब्दुल हमीद लाहौरी | शाहजहाँ का शासन |
| सिर्र-ए-अकबर, मजमा-उल-बहरैन | दारा शिकोह | उपनिषद अनुवाद; हिंदू-इस्लामी दर्शन की तुलना |
| रज़्मनामा | अकबर का अनुवाद विभाग | महाभारत का फ़ारसी अनुवाद |
| पद्मावत | मलिक मुहम्मद जायसी | अवधी काव्य, शेरशाह का काल |
14. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: पानीपत I बनाम पानीपत II
पानीपत I (1526) — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी। पानीपत II (1556) — अकबर/बैरम खाँ बनाम हेमू। हेमू सूर शासक आदिलशाह का सेनापति था, लोदी नहीं। (पानीपत III 1761 में मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच हुआ — मुगल शासक इसमें पक्ष नहीं थे।)
Trap 2: चौसा पहले, कन्नौज बाद में
चौसा 1539, कन्नौज (बिलग्राम) 1540। चौसा के बाद शेर खाँ ने "शेरशाह" उपाधि ली; कन्नौज के बाद हुमायूँ भारत से बाहर गया।
Trap 3: रुपया अकबर का नहीं, शेरशाह का
चाँदी का "रुपया" शेरशाह सूरी ने चलाया; मुगलों ने इसे जारी रखा। इसी प्रकार भूमि-माप और पट्टा-कबूलियत की नींव शेरशाह के काल में पड़ी, जिसे टोडरमल ने अकबर के समय विकसित किया।
Trap 4: जज़िया — हटाना और लगाना
अकबर ने 1564 में जज़िया हटाया; औरंगज़ेब ने 1679 में पुनः लगाया। तीर्थयात्रा कर अकबर ने 1563 में हटाया — दोनों वर्षों को आपस में न मिलाएँ।
Trap 5: इबादतखाना (1575) बनाम दीन-ए-इलाही (1582)
इबादतखाना धार्मिक चर्चा का भवन था (फ़तेहपुर सीकरी, 1575); दीन-ए-इलाही (1582) अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित शिष्य-परंपरा थी। बीच में 1579 का महज़र आता है। क्रम: इबादतखाना → महज़र → दीन-ए-इलाही।
Trap 6: हॉकिन्स बनाम टॉमस रो
दोनों जहाँगीर के समय आए। हॉकिन्स (1608) कंपनी का प्रतिनिधि/कप्तान था; सर टॉमस रो (1615) इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत था। "राजदूत" शब्द आए तो उत्तर टॉमस रो।
Trap 7: आइन-ए-अकबरी अलग ग्रंथ नहीं, अकबरनामा का भाग
आइन-ए-अकबरी को अकबरनामा का तीसरा खंड माना जाता है; दोनों के लेखक अबुल फ़ज़ल हैं। अकबर की आलोचनात्मक दृष्टि वाला ग्रंथ बदायूँनी का मुंतख़ब-उत-तवारीख़ है।
Trap 8: जागीर = राजस्व वसूलने का अधिकार, भूमि का स्वामित्व नहीं
मनसबदार को जागीर में भूमि का मालिकाना हक़ नहीं, केवल उस क्षेत्र का निर्धारित राजस्व वसूलने का अधिकार मिलता था, और जागीरें स्थानांतरित होती थीं।
Trap 9: पुरंदर की संधि — औरंगज़ेब स्वयं नहीं
1665 की पुरंदर संधि शिवाजी और मुगल सेनापति राजा जयसिंह (आमेर) के बीच हुई; औरंगज़ेब उस समय दक्कन में स्वयं उपस्थित नहीं था।
Trap 10: बाबरनामा की भाषा
बाबरनामा तुर्की में लिखा गया; फ़ारसी अनुवाद अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना ने किया। तुज़ुक-ए-जहाँगीरी फ़ारसी में है।
15. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न-बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | मुगल वंश का संस्थापक | बाबर |
| 2 | बाबर का जन्म-स्थान | फ़रग़ना (मध्य एशिया) |
| 3 | पानीपत I का वर्ष | 1526 |
| 4 | पानीपत I में बाबर का प्रतिद्वंद्वी | इब्राहिम लोदी |
| 5 | खानवा का युद्ध | 1527 — राणा साँगा |
| 6 | चंदेरी का युद्ध | 1528 — मेदिनी राय |
| 7 | घाघरा का युद्ध | 1529 — अफ़गान |
| 8 | बाबर की युद्ध-पद्धति | तुलुगमा व तोपखाना |
| 9 | बाबरनामा की भाषा | तुर्की |
| 10 | बाबरनामा का फ़ारसी अनुवादक | अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना |
| 11 | बाबर का मकबरा | काबुल |
| 12 | चौसा का युद्ध | 1539 — हुमायूँ बनाम शेर खाँ |
| 13 | कन्नौज / बिलग्राम का युद्ध | 1540 |
| 14 | हुमायूँनामा की लेखिका | गुलबदन बेगम |
| 15 | अकबर का जन्म-स्थान | अमरकोट (1542) |
| 16 | शेरशाह का बचपन का नाम | फ़रीद |
| 17 | चाँदी का रुपया चलाने वाला | शेरशाह सूरी |
| 18 | सड़क-ए-आज़म | शेरशाह — आगे ग्रैंड ट्रंक रोड |
| 19 | शेरशाह की मृत्यु | 1545, कालिंजर |
| 20 | शेरशाह का मकबरा | सासाराम |
| 21 | अकबर का राज्याभिषेक | 1556, कलानौर |
| 22 | अकबर का संरक्षक | बैरम खाँ |
| 23 | पानीपत II | 1556 — हेमू पराजित |
| 24 | तीर्थयात्रा कर की समाप्ति | 1563 |
| 25 | जज़िया की समाप्ति | 1564 — अकबर |
| 26 | इबादतखाना | 1575, फ़तेहपुर सीकरी |
| 27 | महज़र | 1579 |
| 28 | दहसाला व्यवस्था | 1580 — टोडरमल |
| 29 | दीन-ए-इलाही | 1582 |
| 30 | हल्दीघाटी | 1576 — मानसिंह बनाम महाराणा प्रताप |
| 31 | मनसब की दो रैंक | ज़ात और सवार |
| 32 | बुलंद दरवाज़ा | फ़तेहपुर सीकरी — गुजरात विजय की स्मृति |
| 33 | अकबरनामा व आइन-ए-अकबरी | अबुल फ़ज़ल |
| 34 | मुंतख़ब-उत-तवारीख़ | बदायूँनी |
| 35 | महाभारत का फ़ारसी अनुवाद | रज़्मनामा |
| 36 | अकबर का मकबरा | सिकंदरा |
| 37 | न्याय की ज़ंजीर | जहाँगीर (आगरा किला) |
| 38 | गुरु अर्जन देव को मृत्युदंड | 1606 — जहाँगीर |
| 39 | सर टॉमस रो | जहाँगीर — 1615 |
| 40 | मेवाड़-मुगल संधि | 1615 — अमर सिंह व खुर्रम |
| 41 | एतमादुद्दौला का मकबरा | नूरजहाँ |
| 42 | शाहजहाँ का मूल नाम | खुर्रम |
| 43 | ताजमहल के वास्तुकार (प्रचलित) | उस्ताद अहमद लाहौरी |
| 44 | मयूर सिंहासन ले जाने वाला | नादिरशाह (1739) |
| 45 | सिर्र-ए-अकबर | दारा शिकोह — उपनिषद अनुवाद |
| 46 | सामूगढ़ का युद्ध | 1658 — औरंगज़ेब बनाम दारा |
| 47 | गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड | 1675 — औरंगज़ेब |
| 48 | जज़िया पुनः | 1679 — औरंगज़ेब |
| 49 | पुरंदर की संधि | 1665 — जयसिंह व शिवाजी |
| 50 | बीजापुर / गोलकुंडा का विलय | 1686 / 1687 |
| 51 | औरंगज़ेब की मृत्यु | 1707, अहमदनगर |
| 52 | बादशाही मस्जिद, लाहौर | औरंगज़ेब |
16. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
मुगल अध्याय के प्रश्न कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया अभ्यास-प्रश्न) दिया है:
- सुमेलन (Match the following): सूची-I (युद्ध) — पानीपत I, खानवा, चौसा, सामूगढ़; सूची-II — इब्राहिम लोदी, राणा साँगा, शेर खाँ, दारा शिकोह। कुंजी: सीधे क्रम में।
- कालक्रम: "निम्नलिखित को सही क्रम में लगाइए — (a) दहसाला (b) इबादतखाना (c) दीन-ए-इलाही (d) महज़र।" सही क्रम: b → d → a → c (1575, 1579, 1580, 1582)।
- कथन-आधारित: "1. मनसबदार की जागीर वंशानुगत होती थी। 2. ज़ात रैंक व्यक्तिगत पद का सूचक थी। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?" उत्तर: केवल 2।
- अभिकथन-कारण: "अभिकथन (A): शेरशाह का रुपया मुगल काल में भी चलता रहा। कारण (R): शेरशाह ने चाँदी की मानक मुद्रा चलाई थी।" — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है।
- युग्म-जाँच: "कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है — (a) तुज़ुक-ए-जहाँगीरी — जहाँगीर (b) हुमायूँनामा — गुलबदन बेगम (c) पादशाहनामा — अबुल फ़ज़ल (d) मुंतख़ब-उत-तवारीख़ — बदायूँनी।" उत्तर: (c) — पादशाहनामा अब्दुल हमीद लाहौरी का है।
- राजस्थान-संबंधित (RAS): हल्दीघाटी के मुगल सेनापति, 1615 की संधि, पुरंदर संधि में जयसिंह की भूमिका, दुर्गादास राठौड़।
17. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. बाबर के चार युद्ध — "पा-ख-चं-घा" (26-27-28-29): पानीपत 1526, खानवा 1527, चंदेरी 1528, घाघरा 1529 — हर साल एक युद्ध।
2. हुमायूँ — "चौसा में चौंका, कन्नौज में खोया": 1539 चौसा, 1540 कन्नौज।
3. अकबर की धार्मिक सीढ़ी — "63-64-75-79-82": तीर्थकर हटाया (63), जज़िया हटाया (64), इबादतखाना (75), महज़र (79), दीन-ए-इलाही (82)।
4. "ज़ात = जात (स्वयं), सवार = घोड़े": ज़ात व्यक्तिगत पद, सवार घुड़सवारों की संख्या।
5. शेरशाह के "तीन स" — सिक्का, सड़क, सराय।
6. शासक-क्रम — "बा-हु-अ-ज-शा-औ": बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब (बीच में सूर वंश)।
7. जज़िया — "64 में हटा, 79 में लौटा" (1564 अकबर, 1679 औरंगज़ेब)।
18. कथन अभ्यास
पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच 1526 में हुआ। — सही।
खानवा के युद्ध में बाबर का प्रतिद्वंद्वी मेदिनी राय था। — गलत (राणा साँगा; मेदिनी राय चंदेरी, 1528)।
बाबरनामा फ़ारसी में लिखा गया। — गलत (तुर्की में; फ़ारसी अनुवाद बाद में हुआ)।
चौसा का युद्ध कन्नौज के युद्ध से पहले हुआ। — सही (1539 बनाम 1540)।
चाँदी का रुपया अकबर ने शुरू किया। — गलत (शेरशाह सूरी ने)।
पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर की ओर से सेना का संचालन बैरम खाँ ने किया। — सही।
दहसाला व्यवस्था का संबंध राजा टोडरमल से है। — सही।
मनसबदार को जागीर में भूमि का स्थायी स्वामित्व मिलता था। — गलत (केवल राजस्व वसूलने का अधिकार, और जागीर स्थानांतरित होती थी)।
इबादतखाना की स्थापना दीन-ए-इलाही के बाद हुई। — गलत (इबादतखाना 1575, दीन-ए-इलाही 1582)।
सर टॉमस रो शाहजहाँ के दरबार में आया था। — गलत (जहाँगीर के दरबार में)।
औरंगज़ेब ने 1679 में जज़िया पुनः लगाया। — सही।
आइन-ए-अकबरी के लेखक बदायूँनी हैं। — गलत (अबुल फ़ज़ल)।
19. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- बाबर: पानीपत 1526, खानवा 1527, चंदेरी 1528, घाघरा 1529; बाबरनामा तुर्की में
- हुमायूँ: चौसा 1539, कन्नौज 1540 में हार; 1555 में वापसी; 1556 में मृत्यु
- शेरशाह (1540–45): रुपया, सड़क-ए-आज़म, सराय, पट्टा-कबूलियत; कालिंजर में मृत्यु, सासाराम में मकबरा
- अकबर: 1556 कलानौर में राज्याभिषेक; पानीपत II (हेमू); संरक्षक बैरम खाँ
- 1563 तीर्थकर, 1564 जज़िया समाप्त
- इबादतखाना 1575 → महज़र 1579 → दीन-ए-इलाही 1582
- दहसाला 1580 — टोडरमल; भूमि: पोलज, परौती, चचर, बंजर
- मनसबदारी: ज़ात (व्यक्तिगत) + सवार (घुड़सवार); जागीर = राजस्व अधिकार
- हल्दीघाटी 1576 — मानसिंह बनाम महाराणा प्रताप; मेवाड़ संधि 1615
- "नवरत्न" — बाद की लोकप्रिय परंपरा
- जहाँगीर: न्याय की ज़ंजीर, नूरजहाँ, हॉकिन्स 1608, टॉमस रो 1615
- शाहजहाँ: ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद, मयूर सिंहासन
- उत्तराधिकार युद्ध: धरमत, सामूगढ़ (1658), देवराई (1659)
- औरंगज़ेब: जज़िया 1679, पुरंदर संधि 1665 (जयसिंह), बीजापुर 1686, गोलकुंडा 1687
- अबुल फ़ज़ल — अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी; बदायूँनी — मुंतख़ब-उत-तवारीख़
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिस प्रश्न में गलती हो, उसका वर्ष और व्यक्ति इस नोट की युद्ध-तालिका या रिवीज़न तालिका में दोबारा देखें। मध्यकालीन और आधुनिक भारत के मिश्रित प्रश्नों के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक निःशुल्क टेस्ट सीरीज़ हल करें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
मुगल साम्राज्य का अध्याय तीन परतों में पढ़ें — पहली, युद्ध और वर्ष (बाबर से उत्तराधिकार युद्ध तक); दूसरी, प्रशासन (शेरशाह की नींव पर अकबर की मनसबदारी और दहसाला); तीसरी, संस्कृति (सुलह-ए-कुल, अनुवाद, चित्रकला, स्थापत्य और यूरोपीय यात्री)। अकबर की समावेशी नीति और औरंगज़ेब की बदली हुई नीति के बीच का अंतर, तथा दक्कन में लंबे संघर्ष और जागीरदारी संकट, 18वीं सदी में साम्राज्य के कमज़ोर होने की पृष्ठभूमि बनाते हैं — जिसका अगला चरण यूरोपीय कंपनियों का उदय है।
बाबर 26-27-28-29 · हुमायूँ चौसा 39, कन्नौज 40 · शेरशाह = रुपया-सड़क-सराय · अकबर = ज़ात-सवार, दहसाला 80, दीन-ए-इलाही 82 · जहाँगीर = ज़ंजीर, टॉमस रो · शाहजहाँ = ताज · औरंगज़ेब = जज़िया 79, पुरंदर 65
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“मुगल साम्राज्य: बाबर से औरंगज़ेब तक — युद्ध, मनसबदारी, स्थापत्य व ग्रंथ तालिकाएँ — UPSC/RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- मुगल साम्राज्य: बाबर से औरंगज़ेब — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- भक्ति एवं सूफी आंदोलन — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- दिल्ली सल्तनत — वंश, शासक और प्रशासन — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
मुगल वंश की स्थापना बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर की। इसी युद्ध के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ।
बाबर के चार प्रमुख युद्ध हैं — पानीपत (1526, इब्राहिम लोदी), खानवा (1527, राणा साँगा), चंदेरी (1528, मेदिनी राय) और घाघरा (1529, अफ़गान)।
शेरशाह ने चाँदी का रुपया चलाया, सड़क-ए-आज़म (आगे ग्रैंड ट्रंक रोड) व सराएँ बनवाईं और भूमि की माप पर आधारित लगान तथा पट्टा-कबूलियत की व्यवस्था की।
अकबर द्वारा व्यवस्थित की गई इस प्रणाली में हर अधिकारी को एक संख्यात्मक पद (मनसब) मिलता था, जिसकी दो रैंक थीं — ज़ात (व्यक्तिगत पद व वेतन) और सवार (रखे जाने वाले घुड़सवार)। वेतन नकद या जागीर के रूप में मिलता था।
दहसाला (ज़ब्ती) व्यवस्था 1580 में अकबर के समय राजा टोडरमल ने लागू की। इसमें पिछले दस वर्षों की उपज और कीमतों के औसत से नकद लगान तय होता था।
दीन-ए-इलाही (1582) अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित एक आध्यात्मिक-नैतिक मार्ग था, जिसे अधिकांश इतिहासकार अलग धर्म नहीं मानते। इसके अनुयायी बहुत कम थे; बीरबल का नाम प्रमुख अनुयायियों में लिया जाता है।
हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में अकबर की मुगल सेना और मेवाड़ के महाराणा प्रताप के बीच हुआ। मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के राजा मानसिंह ने किया।
आइन-ए-अकबरी अबुल फ़ज़ल ने लिखी। इसे अकबरनामा का तीसरा खंड माना जाता है और इसमें अकबर के प्रशासन, राजस्व और साम्राज्य का विवरण है।
औरंगज़ेब ने 1679 में गैर-मुस्लिमों पर जज़िया पुनः लगाया। अकबर ने इसे 1564 में समाप्त किया था।
पुरंदर की संधि 1665 में शिवाजी और औरंगज़ेब के सेनापति आमेर के राजा जयसिंह के बीच हुई। इसमें शिवाजी को अपने कई किले मुगलों को सौंपने पड़े।
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