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भारत का इतिहास

मुगल साम्राज्य: बाबर से औरंगज़ेब तक — युद्ध, मनसबदारी, स्थापत्य व ग्रंथ तालिकाएँ — UPSC/RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
25 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: मुगल साम्राज्य की नींव बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में इब्राहिम लोदी को हराकर रखी; खानवा (1527) में राणा साँगा, चंदेरी (1528) में मेदिनी राय और घाघरा (1529) में अफ़गानों को हराकर उसने उत्तर भारत में सत्ता पक्की की। हुमायूँ को शेर खाँ ने चौसा (1539) और कन्नौज/बिलग्राम (1540) में हराया; शेरशाह सूरी (1540–45) ने चाँदी का रुपया, सड़क-ए-आज़म (ग्रैंड ट्रंक रोड) और भूमि-माप पर आधारित लगान जैसे सुधार किए। अकबर (1556–1605) ने पानीपत द्वितीय (1556) में हेमू को हराया, मनसबदारी, टोडरमल की ज़ब्ती/दहसाला (1580), सुलह-ए-कुल, इबादतखाना (1575) और दीन-ए-इलाही (1582) उसकी नीतियों के मुख्य स्तंभ हैं; हल्दीघाटी (1576) में मानसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना का महाराणा प्रताप से युद्ध हुआ। जहाँगीर ने न्याय की ज़ंजीर लगवाई और उसके दरबार में सर टॉमस रो (1615) आया; शाहजहाँ स्थापत्य का स्वर्णकाल है — ताजमहल, दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद। औरंगज़ेब ने 1679 में जज़िया पुनः लगाया, बीजापुर (1686) व गोलकुंडा (1687) जीते और पुरंदर की संधि (1665) में जयसिंह के माध्यम से शिवाजी को झुकाया। आइन-ए-अकबरी और अकबरनामा के लेखक अबुल फ़ज़ल हैं; बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी) बाबर की आत्मकथा है जो तुर्की भाषा में लिखी गई।


संक्षिप्त उत्तर

शासकशासनकालसबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य
बाबर1526–1530पानीपत I (1526), खानवा (1527); आत्मकथा बाबरनामा (तुर्की)
हुमायूँ1530–1540, 1555–1556चौसा (1539), कन्नौज (1540) में शेर खाँ से हार; 1555 में वापसी
शेरशाह सूरी (सूर वंश)1540–1545रुपया, सड़क-ए-आज़म, पट्टा-कबूलियत; कालिंजर में मृत्यु
अकबर1556–1605मनसबदारी, दहसाला, सुलह-ए-कुल, दीन-ए-इलाही (1582)
जहाँगीर1605–1627न्याय की ज़ंजीर, नूरजहाँ, सर टॉमस रो
शाहजहाँ1628–1658ताजमहल, लाल किला (दिल्ली), मयूर सिंहासन
औरंगज़ेब (आलमगीर)1658–1707जज़िया पुनः (1679), दक्कन नीति, पुरंदर संधि (1665)
तथ्यउत्तर
मुगल वंश का संस्थापकज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर
बाबर का वंश-संबंधपिता की ओर से तैमूर, माता की ओर से चंगेज़ खाँ से
पानीपत का प्रथम युद्ध1526 — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी
पानीपत का द्वितीय युद्ध1556 — अकबर (बैरम खाँ) बनाम हेमू
दहसाला / ज़ब्ती व्यवस्था1580 — राजा टोडरमल
दीन-ए-इलाही (तौहीद-ए-इलाही)1582 — अकबर
जज़िया की पुनः स्थापना1679 — औरंगज़ेब (अकबर ने 1564 में हटाया था)
आइन-ए-अकबरी, अकबरनामाअबुल फ़ज़ल
अंतिम "महान मुगल"औरंगज़ेब (मृत्यु 1707)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

मुगल काल मध्यकालीन भारत का सबसे बड़ा और सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अध्याय है। UPSC CSE प्रारंभिक में यहाँ से प्रायः प्रशासन (मनसबदारी, भू-राजस्व), धार्मिक नीति, कला-स्थापत्य और यूरोपीय यात्रियों पर कथन-आधारित प्रश्न बनते हैं। RPSC RAS में मुगल-राजपूत संबंध — आमेर का गठबंधन, हल्दीघाटी, मेवाड़ संधि (1615), मारवाड़ का संघर्ष — राजस्थान इतिहास से जुड़कर विशेष महत्व रखते हैं। SSC CGL/CHSL और राजस्थान CET (स्नातक) में सीधे तथ्य — युद्ध-वर्ष, किसने क्या बनवाया, कौन-सा ग्रंथ किसने लिखा — अधिक पूछे जाते हैं। इससे पहले का संदर्भ दिल्ली सल्तनत से आता है (इब्राहिम लोदी अंतिम सुल्तान था) और उसी काल की धार्मिक हलचल के लिए भक्ति एवं सूफी आंदोलन साथ में पढ़ें।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — प्रशासन, संस्कृति, यात्री, कथन-आधारित प्रश्न
  • RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — मुगल-राजपूत संबंध, अकबर की नीतियाँ
  • SSC CGL / CHSL — युद्ध, वर्ष, स्मारक, ग्रंथ
  • राजस्थान CET (स्नातक), पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी
  • RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक (सामाजिक विज्ञान)

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. युद्ध और वर्ष / युद्ध और प्रतिद्वंद्वी का मिलान
  2. कालक्रम — घटनाओं को सही क्रम में लगाना
  3. स्मारक और निर्माता का मिलान
  4. ग्रंथ और लेखक का मिलान
  5. मनसबदारी, ज़ब्ती, सुलह-ए-कुल जैसी अवधारणाओं पर कथन
  6. यूरोपीय यात्री / राजदूत और मुगल शासक का मिलान

3. बाबर (1526–1530)

बाबर का जन्म 1483 में फ़रग़ना (मध्य एशिया) में हुआ। पिता की ओर से वह तैमूर का और माता की ओर से चंगेज़ खाँ का वंशज था। समरकंद पर बार-बार अधिकार खोने के बाद उसने 1504 में काबुल जीता और वहाँ से भारत की ओर बढ़ा। उसके आक्रमण में तुलुगमा युद्ध-पद्धति (सेना को टुकड़ियों में बाँटकर शत्रु को पार्श्व और पीछे से घेरना) और तोपखाने (उस्ताद अली और मुस्तफ़ा) की निर्णायक भूमिका रही।

3.1 बाबर के प्रमुख युद्ध

युद्धवर्षप्रतिद्वंद्वीमहत्व
पानीपत का प्रथम युद्ध1526इब्राहिम लोदी (दिल्ली सल्तनत)लोदी वंश और दिल्ली सल्तनत का अंत, मुगल वंश की स्थापना
खानवा का युद्ध1527राणा साँगा (मेवाड़) व राजपूत संघउत्तर भारत में राजपूत शक्ति निर्णायक रूप से पराजित; बाबर ने "ग़ाज़ी" उपाधि ली
चंदेरी का युद्ध1528मेदिनी रायमालवा क्षेत्र में राजपूत प्रतिरोध समाप्त
घाघरा का युद्ध1529अफ़गान सरदार (महमूद लोदी के समर्थक) व बंगाल का शासकपूर्वी भारत के अफ़गानों पर विजय

खानवा से पहले बाबर ने युद्ध को "जिहाद" घोषित किया और मुसलमानों से तमगा (एक व्यापारिक कर) हटाने की घोषणा की। बाबर की मृत्यु 1530 में आगरा में हुई; बाद में उसे काबुल में दफ़नाया गया।

3.2 बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी)

  • बाबर की आत्मकथा, जो उसने तुर्की (चग़ताई तुर्की) में लिखी।
  • अकबर के समय अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना ने इसका फ़ारसी अनुवाद किया।
  • इसमें भारत की वनस्पति, जीव-जंतु, लोगों और तत्कालीन पाँच मुस्लिम व दो हिंदू राज्यों (विजयनगर, मेवाड़) का वर्णन है।

4. हुमायूँ और शेरशाह सूरी

4.1 हुमायूँ (1530–1540 व 1555–1556)

हुमायूँ को साम्राज्य के साथ भाइयों (कामरान, अस्करी, हिंदाल) की प्रतिस्पर्धा भी विरासत में मिली। बिहार के अफ़गान सरदार शेर खाँ ने उसे दो निर्णायक युद्धों में हराया।

युद्धवर्षपरिणाम
चौसा का युद्ध1539शेर खाँ विजयी; उसने "शेरशाह" उपाधि धारण की
कन्नौज (बिलग्राम) का युद्ध1540हुमायूँ की निर्णायक हार; भारत छोड़कर ईरान (सफ़वी शाह तहमास्प) की शरण
मच्छीवाड़ा व सरहिंद के युद्ध1555सूर वंश (सिकंदर सूर) को हराकर हुमायूँ ने दिल्ली पुनः प्राप्त की

निर्वासन काल में ही 1542 में अमरकोट (सिंध) में अकबर का जन्म हुआ। 1556 में दिल्ली में अपने पुस्तकालय (शेर मंडल) की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हुई। उसकी सौतेली बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा लिखा। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा उसकी विधवा हाजी बेगम (बेगा बेगम) ने बनवाया — इसे मुगल उद्यान-मकबरा शैली का प्रारंभिक बड़ा उदाहरण माना जाता है।

4.2 शेरशाह सूरी (1540–1545)

शेरशाह (बचपन का नाम फ़रीद) ने केवल पाँच वर्ष शासन किया, पर उसके प्रशासनिक सुधार इतने प्रभावी थे कि अकबर की व्यवस्था का बड़ा भाग उन्हीं पर टिका।

क्षेत्रसुधार
मुद्राचाँदी का रुपया (लगभग 178 ग्रेन) और ताँबे का दाम — रुपया आगे मुगल काल की मानक मुद्रा बना
सड़केंसड़क-ए-आज़म — सोनारगाँव (बंगाल) से पंजाब/पेशावर तक; बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड कहलाई
सरायसड़कों पर निश्चित दूरी पर सराय — यात्रियों के विश्राम और डाक-व्यवस्था के केंद्र
भू-राजस्वभूमि की माप के आधार पर लगान; उपज का लगभग एक-तिहाई राज्य का भाग
किसान से अनुबंधपट्टा (राज्य द्वारा किसान को) और कबूलियत (किसान द्वारा स्वीकृति)
प्रशासनसरकार और परगना की इकाइयाँ; परगने में शिकदार, मुंसिफ़ जैसे अधिकारी

शेरशाह की मृत्यु 1545 में कालिंजर के घेरे के दौरान बारूद विस्फोट से हुई। उसका मकबरा सासाराम (बिहार) में है। मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत (1540 के आसपास) इसी काल में रचा।


5. अकबर (1556–1605)

हुमायूँ की मृत्यु के बाद 1556 में 13 वर्षीय अकबर का राज्याभिषेक कलानौर (पंजाब) में हुआ। संरक्षक बैरम खाँ के नेतृत्व में पानीपत के द्वितीय युद्ध (1556) में हेमू (हेमचंद्र विक्रमादित्य, आदिलशाह सूर का सेनापति) पराजित हुआ। 1560 में अकबर ने बैरम खाँ को हटाकर स्वयं सत्ता सँभाली; 1560–62 का काल उसकी धाय माहम अनगा के प्रभाव के कारण कई पुस्तकों में "पर्दा शासन" (पेटीकोट सरकार) कहा जाता है।

5.1 अकबर के प्रमुख कदम (कालक्रम)

वर्षघटना
1556पानीपत का द्वितीय युद्ध — हेमू पराजित
1562आमेर के राजा भारमल से वैवाहिक संबंध; युद्धबंदियों को दास बनाने पर रोक
1563तीर्थयात्रा कर समाप्त
1564जज़िया समाप्त
1568चित्तौड़ विजय
1570 का दशकफ़तेहपुर सीकरी का निर्माण; मनसबदारी का व्यवस्थित रूप
1572–73गुजरात विजय
1575फ़तेहपुर सीकरी में इबादतखाना की स्थापना
1576हल्दीघाटी का युद्ध — मुगल सेना (मानसिंह) बनाम महाराणा प्रताप
1579महज़र — धार्मिक विवादों में अकबर को निर्णायक अधिकार
1580दहसाला (ज़ब्ती) व्यवस्था — राजा टोडरमल
1582दीन-ए-इलाही (तौहीद-ए-इलाही)
1605अकबर की मृत्यु; मकबरा सिकंदरा (आगरा) — जहाँगीर के समय पूर्ण

5.2 मनसबदारी व्यवस्था

मनसब का अर्थ है पद या श्रेणी। अकबर ने सभी अधिकारियों — सैनिक और असैनिक — को एक संख्यात्मक श्रेणी में रखा। प्रत्येक मनसबदार की दो रैंक होती थीं:

रैंकअर्थ
ज़ातव्यक्तिगत पद और वेतन का सूचक
सवारमनसबदार को कितने घुड़सवार रखने हैं — इसका सूचक
  • मनसबदारों को वेतन नकद या जागीर (भूमि का राजस्व-अधिकार, भूमि का स्वामित्व नहीं) के रूप में मिलता था।
  • जागीरें प्रायः स्थानांतरित होती रहती थीं, ताकि कोई मनसबदार स्थानीय शक्ति न बना ले।
  • मनसब वंशानुगत नहीं था; नियुक्ति, पदोन्नति और पदच्युति बादशाह के हाथ में थी।
  • औरंगज़ेब के काल में मनसबदारों की संख्या बढ़ने और जागीरों की कमी से जागीरदारी संकट पैदा हुआ।

5.3 ज़ब्ती / दहसाला व्यवस्था (1580)

राजा टोडरमल (जो शेरशाह के अधीन भी काम कर चुके थे) ने पिछले दस वर्षों की उपज और कीमतों के औसत के आधार पर नकद लगान तय करने की व्यवस्था बनाई — इसीलिए इसे दहसाला (दस साल) कहा गया। भूमि की माप होती थी और राज्य का भाग सामान्यतः उपज का एक-तिहाई माना गया। यह व्यवस्था मुख्यतः उत्तर भारत के केंद्रीय प्रांतों (जैसे आगरा, इलाहाबाद, दिल्ली, लाहौर, मालवा) में लागू हुई; अन्य क्षेत्रों में बटाई (ग़ल्ला-बख़्शी) और नसक जैसी पद्धतियाँ भी चलती रहीं।

भूमि का वर्ग (आइन-ए-अकबरी के अनुसार)अर्थ
पोलजहर वर्ष खेती होने वाली भूमि
परौतीकुछ समय परती छोड़ी जाने वाली भूमि
चचरतीन-चार वर्ष परती रहने वाली भूमि
बंजरपाँच वर्ष या अधिक समय से बिना खेती की भूमि

5.4 धार्मिक नीति — सुलह-ए-कुल, इबादतखाना, दीन-ए-इलाही

  • सुलह-ए-कुल ("सबके साथ शांति") — अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति, जिसका वैचारिक प्रतिपादन अबुल फ़ज़ल ने किया।
  • इबादतखाना (1575) — फ़तेहपुर सीकरी में धार्मिक चर्चाओं का भवन। आरंभ में केवल मुस्लिम विद्वान आते थे; बाद में हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई (जेसुइट) विद्वान भी आमंत्रित हुए।
  • महज़र (1579) — इस घोषणा से धार्मिक मतभेद की स्थिति में अकबर को अंतिम निर्णय का अधिकार मिला।
  • दीन-ए-इलाही (1582) — इसे इतिहासकार प्रायः एक अलग "धर्म" के बजाय अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित एक आध्यात्मिक-नैतिक मार्ग / शिष्य-परंपरा मानते हैं। इसके अनुयायी बहुत कम थे; प्रमुख हिंदू अनुयायियों में बीरबल का नाम लिया जाता है।

5.5 हल्दीघाटी (1576) और मुगल-राजपूत संबंध

अकबर ने राजपूतों के साथ वैवाहिक और राजनीतिक गठबंधन (आमेर — 1562) की नीति अपनाई और राजपूतों को ऊँचे मनसब दिए। मेवाड़ ने अधीनता स्वीकार नहीं की। हल्दीघाटी का युद्ध (1576) मुगल सेना — जिसका नेतृत्व आमेर के मानसिंह ने किया — और महाराणा प्रताप के बीच हुआ। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने संघर्ष जारी रखा और मेवाड़ के बड़े भाग पर पुनः अधिकार किया। मेवाड़ और मुगलों के बीच समझौता बाद में 1615 में जहाँगीर के समय (अमर सिंह और शहज़ादा खुर्रम के बीच) हुआ। राजस्थान के संदर्भ के लिए RPSC RAS प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ में इस अध्याय के प्रश्न अवश्य हल करें।

5.6 अकबर का दरबार और "नवरत्न"

अकबर के दरबार के नौ विशिष्ट व्यक्तियों को "नवरत्न" कहने की परंपरा बाद की लोकप्रिय परंपरा है; समकालीन आधिकारिक स्रोतों में ऐसी कोई औपचारिक संस्था नहीं मिलती। फिर भी दरबार से जुड़े प्रमुख व्यक्ति ऐतिहासिक हैं:

व्यक्तिपहचान
अबुल फ़ज़लइतिहासकार — अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी
फ़ैज़ीकवि, अबुल फ़ज़ल का भाई; संस्कृत ग्रंथ लीलावती का फ़ारसी अनुवाद
राजा टोडरमलराजस्व सुधार (दहसाला)
राजा मानसिंहआमेर के शासक, प्रमुख सेनापति
बीरबलदरबारी, दीन-ए-इलाही के अनुयायी
तानसेनसंगीतज्ञ
अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ानाबैरम खाँ का पुत्र; बाबरनामा का फ़ारसी अनुवाद; हिंदी में दोहे

अकबर के मकतबख़ाना (अनुवाद विभाग) में महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज़्मनामा नाम से हुआ। चित्रकला में मीर सैयद अली और अब्दुस्समद के नेतृत्व में हम्ज़ानामा का चित्रण हुआ।


6. जहाँगीर (1605–1627)

  • मूल नाम सलीम; 1606 में शहज़ादा खुसरो का विद्रोह; खुसरो की सहायता के आरोप में सिख गुरु अर्जन देव को 1606 में मृत्युदंड।
  • आगरा किले में न्याय की ज़ंजीर (ज़ंजीर-ए-अदल) लगवाई, जिसे खींचकर कोई भी फ़रियादी बादशाह तक पहुँच सकता था।
  • 1611 में मेहरुन्निसा से विवाह, जिन्हें नूरजहाँ उपाधि मिली; उनके पिता एतमादुद्दौला, भाई आसफ़ ख़ाँ — इस प्रभावशाली समूह को कई इतिहासकार "नूरजहाँ गुट" कहते हैं।
  • 1615 — मेवाड़ (अमर सिंह) के साथ संधि।
  • आत्मकथा तुज़ुक-ए-जहाँगीरी (फ़ारसी)।
  • चित्रकला का चरम — उस्ताद मंसूर (पशु-पक्षियों के चित्र), अबुल हसन।
  • आगरा में एतमादुद्दौला का मकबरा नूरजहाँ ने बनवाया — संगमरमर में पित्रादुरा (रंगीन पत्थरों की जड़ाई) के प्रारंभिक बड़े प्रयोग के लिए प्रसिद्ध।
  • अंग्रेज़ कैप्टन विलियम हॉकिन्स (1608) और राजदूत सर टॉमस रो (1615–1619, इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत) जहाँगीर के दरबार में आए।
  • मृत्यु 1627 — मकबरा शाहदरा (लाहौर)।

7. शाहजहाँ (1628–1658)

मूल नाम खुर्रम। शाहजहाँ का शासन मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल माना जाता है। उसने राजधानी आगरा से दिल्ली में नए नगर शाहजहाँनाबाद में स्थानांतरित की।

  • ताजमहल (आगरा) — पत्नी मुमताज़ महल की स्मृति में; मुख्य वास्तुकार के रूप में उस्ताद अहमद लाहौरी का नाम लिया जाता है।
  • लाल किला (दिल्ली) — दीवान-ए-आम, दीवान-ए-ख़ास; जामा मस्जिद (दिल्ली); आगरा किले में मोती मस्जिद।
  • तख़्त-ए-ताऊस (मयूर सिंहासन) — शाहजहाँ के लिए बना; 1739 में नादिरशाह इसे ईरान ले गया।
  • दक्कन — अहमदनगर का अंत (1633); बीजापुर और गोलकुंडा से अधीनता की संधियाँ (1636)।
  • शहज़ादा दारा शिकोह ने उपनिषदों का फ़ारसी अनुवाद सिर्र-ए-अकबर नाम से कराया और मजमा-उल-बहरैन (दो समुद्रों का संगम) लिखी।

7.1 उत्तराधिकार युद्ध (1657–1659)

1657 में शाहजहाँ के बीमार पड़ने पर उसके चार पुत्रों — दारा शिकोह, शाह शुजा, औरंगज़ेब और मुराद बख़्श — में संघर्ष हुआ।

युद्धवर्षपरिणाम
बहादुरपुर1658शाह शुजा, दारा के पुत्र सुलेमान शिकोह की सेना से पराजित
धरमत1658औरंगज़ेब और मुराद ने शाही सेना (जसवंत सिंह) को हराया
सामूगढ़1658औरंगज़ेब ने दारा को निर्णायक रूप से हराया
खजुआ1659औरंगज़ेब ने शाह शुजा को हराया
देवराई1659दारा की अंतिम हार; बाद में उसे मृत्युदंड

औरंगज़ेब ने शाहजहाँ को आगरा किले में नज़रबंद कर दिया, जहाँ 1666 में उसकी मृत्यु हुई।


8. औरंगज़ेब (1658–1707)

औरंगज़ेब ने "आलमगीर" उपाधि धारण की। उसका लगभग 50 वर्ष का शासन साम्राज्य के सबसे बड़े विस्तार का काल भी है और उन तनावों का भी, जो उसकी मृत्यु के बाद विघटन का कारण बने।

8.1 धार्मिक नीति

  • 1679 — गैर-मुस्लिमों पर जज़िया पुनः लगाया (अकबर ने 1564 में हटाया था)।
  • दरबार में कई पुरानी परंपराएँ (जैसे झरोखा दर्शन, तुलादान) बंद कीं।
  • धर्मशास्त्रीय संकलन फ़तवा-ए-आलमगीरी उसके संरक्षण में तैयार हुआ।
  • 1675 — सिख गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड।

8.2 विद्रोह और प्रतिरोध

समूह / क्षेत्रनेता / संदर्भ
जाट (मथुरा क्षेत्र)गोकुल; बाद में राजाराम, चूड़ामन
सतनामी (नारनौल क्षेत्र)1672 का विद्रोह
सिखगुरु तेग बहादुर (1675), गुरु गोविंद सिंह — खालसा की स्थापना (1699)
राजपूत (मारवाड़)जसवंत सिंह की मृत्यु (1678) के बाद उत्तराधिकार विवाद; दुर्गादास राठौड़
मराठाशिवाजी, शंभाजी, राजाराम, ताराबाई

8.3 दक्कन नीति और शिवाजी

वर्षघटना
1665पुरंदर की संधि — मुगल सेनापति राजा जयसिंह (आमेर) और शिवाजी के बीच; शिवाजी ने अनेक किले मुगलों को सौंपे
1666शिवाजी आगरा दरबार गए, नज़रबंद हुए और वहाँ से निकल भागे
1674रायगढ़ में शिवाजी का राज्याभिषेक; "छत्रपति" उपाधि
1681 के बादऔरंगज़ेब स्वयं दक्कन में; शेष जीवन वहीं बीता
1686बीजापुर (आदिलशाही) का विलय
1687गोलकुंडा (कुतुबशाही) का विलय
1689शंभाजी को बंदी बनाकर मृत्युदंड
1707अहमदनगर में औरंगज़ेब की मृत्यु; मकबरा ख़ुल्दाबाद (औरंगाबाद के पास)

औरंगज़ेब के काल की इमारतों में दिल्ली के लाल किले की मोती मस्जिद और लाहौर की बादशाही मस्जिद प्रमुख हैं। औरंगाबाद का बीबी का मकबरा (औरंगज़ेब की पत्नी रबिया-उद-दौरानी का मकबरा) ताजमहल की शैली पर बना है।


9. मुगल शासक-तालिका (एक नज़र में)

शासकमूल नाम / उपाधिआत्मकथा / संबंधित ग्रंथमकबरा
बाबरज़हीरुद्दीन मुहम्मदबाबरनामा (तुर्की)काबुल
हुमायूँनसीरुद्दीन मुहम्मदहुमायूँनामा (गुलबदन बेगम)दिल्ली
शेरशाहफ़रीदतारीख़-ए-शेरशाही (अब्बास ख़ाँ सरवानी)सासाराम
अकबरजलालुद्दीन मुहम्मदअकबरनामा, आइन-ए-अकबरी (अबुल फ़ज़ल)सिकंदरा (आगरा)
जहाँगीरसलीम / नूरुद्दीनतुज़ुक-ए-जहाँगीरीशाहदरा (लाहौर)
शाहजहाँखुर्रमपादशाहनामा (अब्दुल हमीद लाहौरी)ताजमहल (आगरा)
औरंगज़ेबमुहीउद्दीन / आलमगीरफ़तवा-ए-आलमगीरी (संकलन)ख़ुल्दाबाद

10. युद्ध-तालिका

युद्धवर्षपक्षविजेता
पानीपत I1526बाबर बनाम इब्राहिम लोदीबाबर
खानवा1527बाबर बनाम राणा साँगाबाबर
चंदेरी1528बाबर बनाम मेदिनी रायबाबर
घाघरा1529बाबर बनाम अफ़गानबाबर
चौसा1539हुमायूँ बनाम शेर खाँशेर खाँ
कन्नौज / बिलग्राम1540हुमायूँ बनाम शेर खाँशेर खाँ
सरहिंद1555हुमायूँ बनाम सिकंदर सूरहुमायूँ
पानीपत II1556अकबर (बैरम खाँ) बनाम हेमूअकबर
हल्दीघाटी1576मुगल सेना (मानसिंह) बनाम महाराणा प्रतापयुद्ध में मुगल पक्ष भारी; प्रताप का संघर्ष जारी रहा
सामूगढ़1658औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोहऔरंगज़ेब

11. स्थापत्य-तालिका

इमारतस्थाननिर्माता / काल
हुमायूँ का मकबरादिल्लीहाजी बेगम (अकबर का प्रारंभिक काल)
शेरशाह का मकबरासासारामसूर काल
आगरा का किला (लाल बलुआ पत्थर में पुनर्निर्माण)आगराअकबर
फ़तेहपुर सीकरी — बुलंद दरवाज़ा, जामा मस्जिद, पंचमहल, सलीम चिश्ती की दरगाहआगरा के पासअकबर; बुलंद दरवाज़ा गुजरात विजय की स्मृति में
अकबर का मकबरासिकंदराअकबर ने आरंभ, जहाँगीर ने पूर्ण किया
एतमादुद्दौला का मकबराआगरानूरजहाँ (जहाँगीर काल)
शालीमार बागश्रीनगरजहाँगीर
ताजमहलआगराशाहजहाँ
लाल किला, जामा मस्जिददिल्लीशाहजहाँ
मोती मस्जिद (आगरा किला)आगराशाहजहाँ
मोती मस्जिद (लाल किला)दिल्लीऔरंगज़ेब
बादशाही मस्जिदलाहौरऔरंगज़ेब
बीबी का मकबराऔरंगाबादऔरंगज़ेब काल

12. यूरोपीय यात्री और प्रतिनिधि

व्यक्तिदेशकिस शासक के समयविशेष
जेसुइट मिशन (फ़ादर रुडोल्फ़ एक्वाविवा, एंटोनियो मॉन्सेरेट)पुर्तगाली क्षेत्र (गोवा) सेअकबरइबादतखाना की चर्चाओं में भाग
राल्फ़ फ़िचइंग्लैंडअकबरभारत आने वाले प्रारंभिक अंग्रेज़ यात्रियों में
कैप्टन विलियम हॉकिन्सइंग्लैंडजहाँगीर1608 में आगरा पहुँचा; व्यापारिक अनुमति का प्रयास
सर टॉमस रोइंग्लैंडजहाँगीरजेम्स प्रथम का राजदूत (1615–1619); अंग्रेज़ों को व्यापारिक सुविधाएँ
पीटर मुंडीइंग्लैंडशाहजहाँआगरा व सूरत क्षेत्र का वर्णन
फ़्रांस्वा बर्नियरफ़्रांसशाहजहाँ–औरंगज़ेबचिकित्सक; "Travels in the Mogul Empire"; दारा शिकोह से जुड़ा रहा
ज्यां-बैप्टिस्ट टैवर्नियरफ़्रांसशाहजहाँ–औरंगज़ेबजौहरी; हीरों और व्यापार का वर्णन
निकोलाओ मनूचीइटली (वेनिस)शाहजहाँ–औरंगज़ेब"Storia do Mogor"; दारा की सेना में तोपची

यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगे का इतिहास कंपनी शासन का विस्तार और गवर्नर-जनरल नोट में है।


13. ग्रंथ और लेखक

ग्रंथलेखकविषय / काल
बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी)बाबरआत्मकथा, तुर्की भाषा
हुमायूँनामागुलबदन बेगमहुमायूँ का जीवन
तारीख़-ए-शेरशाहीअब्बास ख़ाँ सरवानीशेरशाह का इतिहास
अकबरनामाअबुल फ़ज़लअकबर के शासन का इतिहास
आइन-ए-अकबरीअबुल फ़ज़लअकबरनामा का तीसरा खंड — प्रशासन, राजस्व, आँकड़े
मुंतख़ब-उत-तवारीख़अब्दुल क़ादिर बदायूँनीअकबर की धार्मिक नीति की आलोचनात्मक दृष्टि
तबक़ात-ए-अकबरीनिज़ामुद्दीन अहमदअकबरकालीन इतिहास
तुज़ुक-ए-जहाँगीरीजहाँगीरआत्मकथा, फ़ारसी
पादशाहनामाअब्दुल हमीद लाहौरीशाहजहाँ का शासन
सिर्र-ए-अकबर, मजमा-उल-बहरैनदारा शिकोहउपनिषद अनुवाद; हिंदू-इस्लामी दर्शन की तुलना
रज़्मनामाअकबर का अनुवाद विभागमहाभारत का फ़ारसी अनुवाद
पद्मावतमलिक मुहम्मद जायसीअवधी काव्य, शेरशाह का काल

14. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: पानीपत I बनाम पानीपत II

पानीपत I (1526) — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी। पानीपत II (1556) — अकबर/बैरम खाँ बनाम हेमू। हेमू सूर शासक आदिलशाह का सेनापति था, लोदी नहीं। (पानीपत III 1761 में मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच हुआ — मुगल शासक इसमें पक्ष नहीं थे।)

Trap 2: चौसा पहले, कन्नौज बाद में

चौसा 1539, कन्नौज (बिलग्राम) 1540। चौसा के बाद शेर खाँ ने "शेरशाह" उपाधि ली; कन्नौज के बाद हुमायूँ भारत से बाहर गया।

Trap 3: रुपया अकबर का नहीं, शेरशाह का

चाँदी का "रुपया" शेरशाह सूरी ने चलाया; मुगलों ने इसे जारी रखा। इसी प्रकार भूमि-माप और पट्टा-कबूलियत की नींव शेरशाह के काल में पड़ी, जिसे टोडरमल ने अकबर के समय विकसित किया।

Trap 4: जज़िया — हटाना और लगाना

अकबर ने 1564 में जज़िया हटाया; औरंगज़ेब ने 1679 में पुनः लगाया। तीर्थयात्रा कर अकबर ने 1563 में हटाया — दोनों वर्षों को आपस में न मिलाएँ।

Trap 5: इबादतखाना (1575) बनाम दीन-ए-इलाही (1582)

इबादतखाना धार्मिक चर्चा का भवन था (फ़तेहपुर सीकरी, 1575); दीन-ए-इलाही (1582) अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित शिष्य-परंपरा थी। बीच में 1579 का महज़र आता है। क्रम: इबादतखाना → महज़र → दीन-ए-इलाही।

Trap 6: हॉकिन्स बनाम टॉमस रो

दोनों जहाँगीर के समय आए। हॉकिन्स (1608) कंपनी का प्रतिनिधि/कप्तान था; सर टॉमस रो (1615) इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का राजदूत था। "राजदूत" शब्द आए तो उत्तर टॉमस रो।

Trap 7: आइन-ए-अकबरी अलग ग्रंथ नहीं, अकबरनामा का भाग

आइन-ए-अकबरी को अकबरनामा का तीसरा खंड माना जाता है; दोनों के लेखक अबुल फ़ज़ल हैं। अकबर की आलोचनात्मक दृष्टि वाला ग्रंथ बदायूँनी का मुंतख़ब-उत-तवारीख़ है।

Trap 8: जागीर = राजस्व वसूलने का अधिकार, भूमि का स्वामित्व नहीं

मनसबदार को जागीर में भूमि का मालिकाना हक़ नहीं, केवल उस क्षेत्र का निर्धारित राजस्व वसूलने का अधिकार मिलता था, और जागीरें स्थानांतरित होती थीं।

Trap 9: पुरंदर की संधि — औरंगज़ेब स्वयं नहीं

1665 की पुरंदर संधि शिवाजी और मुगल सेनापति राजा जयसिंह (आमेर) के बीच हुई; औरंगज़ेब उस समय दक्कन में स्वयं उपस्थित नहीं था।

Trap 10: बाबरनामा की भाषा

बाबरनामा तुर्की में लिखा गया; फ़ारसी अनुवाद अब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना ने किया। तुज़ुक-ए-जहाँगीरी फ़ारसी में है।


15. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)

क्र.प्रश्न-बिंदुउत्तर
1मुगल वंश का संस्थापकबाबर
2बाबर का जन्म-स्थानफ़रग़ना (मध्य एशिया)
3पानीपत I का वर्ष1526
4पानीपत I में बाबर का प्रतिद्वंद्वीइब्राहिम लोदी
5खानवा का युद्ध1527 — राणा साँगा
6चंदेरी का युद्ध1528 — मेदिनी राय
7घाघरा का युद्ध1529 — अफ़गान
8बाबर की युद्ध-पद्धतितुलुगमा व तोपखाना
9बाबरनामा की भाषातुर्की
10बाबरनामा का फ़ारसी अनुवादकअब्दुर रहीम ख़ान-ए-ख़ाना
11बाबर का मकबराकाबुल
12चौसा का युद्ध1539 — हुमायूँ बनाम शेर खाँ
13कन्नौज / बिलग्राम का युद्ध1540
14हुमायूँनामा की लेखिकागुलबदन बेगम
15अकबर का जन्म-स्थानअमरकोट (1542)
16शेरशाह का बचपन का नामफ़रीद
17चाँदी का रुपया चलाने वालाशेरशाह सूरी
18सड़क-ए-आज़मशेरशाह — आगे ग्रैंड ट्रंक रोड
19शेरशाह की मृत्यु1545, कालिंजर
20शेरशाह का मकबरासासाराम
21अकबर का राज्याभिषेक1556, कलानौर
22अकबर का संरक्षकबैरम खाँ
23पानीपत II1556 — हेमू पराजित
24तीर्थयात्रा कर की समाप्ति1563
25जज़िया की समाप्ति1564 — अकबर
26इबादतखाना1575, फ़तेहपुर सीकरी
27महज़र1579
28दहसाला व्यवस्था1580 — टोडरमल
29दीन-ए-इलाही1582
30हल्दीघाटी1576 — मानसिंह बनाम महाराणा प्रताप
31मनसब की दो रैंकज़ात और सवार
32बुलंद दरवाज़ाफ़तेहपुर सीकरी — गुजरात विजय की स्मृति
33अकबरनामा व आइन-ए-अकबरीअबुल फ़ज़ल
34मुंतख़ब-उत-तवारीख़बदायूँनी
35महाभारत का फ़ारसी अनुवादरज़्मनामा
36अकबर का मकबरासिकंदरा
37न्याय की ज़ंजीरजहाँगीर (आगरा किला)
38गुरु अर्जन देव को मृत्युदंड1606 — जहाँगीर
39सर टॉमस रोजहाँगीर — 1615
40मेवाड़-मुगल संधि1615 — अमर सिंह व खुर्रम
41एतमादुद्दौला का मकबरानूरजहाँ
42शाहजहाँ का मूल नामखुर्रम
43ताजमहल के वास्तुकार (प्रचलित)उस्ताद अहमद लाहौरी
44मयूर सिंहासन ले जाने वालानादिरशाह (1739)
45सिर्र-ए-अकबरदारा शिकोह — उपनिषद अनुवाद
46सामूगढ़ का युद्ध1658 — औरंगज़ेब बनाम दारा
47गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड1675 — औरंगज़ेब
48जज़िया पुनः1679 — औरंगज़ेब
49पुरंदर की संधि1665 — जयसिंह व शिवाजी
50बीजापुर / गोलकुंडा का विलय1686 / 1687
51औरंगज़ेब की मृत्यु1707, अहमदनगर
52बादशाही मस्जिद, लाहौरऔरंगज़ेब

16. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

मुगल अध्याय के प्रश्न कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया अभ्यास-प्रश्न) दिया है:

  1. सुमेलन (Match the following): सूची-I (युद्ध) — पानीपत I, खानवा, चौसा, सामूगढ़; सूची-II — इब्राहिम लोदी, राणा साँगा, शेर खाँ, दारा शिकोह। कुंजी: सीधे क्रम में।
  2. कालक्रम: "निम्नलिखित को सही क्रम में लगाइए — (a) दहसाला (b) इबादतखाना (c) दीन-ए-इलाही (d) महज़र।" सही क्रम: b → d → a → c (1575, 1579, 1580, 1582)।
  3. कथन-आधारित: "1. मनसबदार की जागीर वंशानुगत होती थी। 2. ज़ात रैंक व्यक्तिगत पद का सूचक थी। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?" उत्तर: केवल 2।
  4. अभिकथन-कारण: "अभिकथन (A): शेरशाह का रुपया मुगल काल में भी चलता रहा। कारण (R): शेरशाह ने चाँदी की मानक मुद्रा चलाई थी।" — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है।
  5. युग्म-जाँच: "कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है — (a) तुज़ुक-ए-जहाँगीरी — जहाँगीर (b) हुमायूँनामा — गुलबदन बेगम (c) पादशाहनामा — अबुल फ़ज़ल (d) मुंतख़ब-उत-तवारीख़ — बदायूँनी।" उत्तर: (c) — पादशाहनामा अब्दुल हमीद लाहौरी का है।
  6. राजस्थान-संबंधित (RAS): हल्दीघाटी के मुगल सेनापति, 1615 की संधि, पुरंदर संधि में जयसिंह की भूमिका, दुर्गादास राठौड़।

17. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. बाबर के चार युद्ध — "पा-ख-चं-घा" (26-27-28-29): पानीपत 1526, खानवा 1527, चंदेरी 1528, घाघरा 1529 — हर साल एक युद्ध।

2. हुमायूँ — "चौसा में चौंका, कन्नौज में खोया": 1539 चौसा, 1540 कन्नौज।

3. अकबर की धार्मिक सीढ़ी — "63-64-75-79-82": तीर्थकर हटाया (63), जज़िया हटाया (64), इबादतखाना (75), महज़र (79), दीन-ए-इलाही (82)।

4. "ज़ात = जात (स्वयं), सवार = घोड़े": ज़ात व्यक्तिगत पद, सवार घुड़सवारों की संख्या।

5. शेरशाह के "तीन स" — सिक्का, सड़क, सराय।

6. शासक-क्रम — "बा-हु-अ-ज-शा-औ": बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब (बीच में सूर वंश)।

7. जज़िया — "64 में हटा, 79 में लौटा" (1564 अकबर, 1679 औरंगज़ेब)।


18. कथन अभ्यास

पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच 1526 में हुआ। — सही।

खानवा के युद्ध में बाबर का प्रतिद्वंद्वी मेदिनी राय था। — गलत (राणा साँगा; मेदिनी राय चंदेरी, 1528)।

बाबरनामा फ़ारसी में लिखा गया। — गलत (तुर्की में; फ़ारसी अनुवाद बाद में हुआ)।

चौसा का युद्ध कन्नौज के युद्ध से पहले हुआ। — सही (1539 बनाम 1540)।

चाँदी का रुपया अकबर ने शुरू किया। — गलत (शेरशाह सूरी ने)।

पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर की ओर से सेना का संचालन बैरम खाँ ने किया। — सही।

दहसाला व्यवस्था का संबंध राजा टोडरमल से है। — सही।

मनसबदार को जागीर में भूमि का स्थायी स्वामित्व मिलता था। — गलत (केवल राजस्व वसूलने का अधिकार, और जागीर स्थानांतरित होती थी)।

इबादतखाना की स्थापना दीन-ए-इलाही के बाद हुई। — गलत (इबादतखाना 1575, दीन-ए-इलाही 1582)।

सर टॉमस रो शाहजहाँ के दरबार में आया था। — गलत (जहाँगीर के दरबार में)।

औरंगज़ेब ने 1679 में जज़िया पुनः लगाया। — सही।

आइन-ए-अकबरी के लेखक बदायूँनी हैं। — गलत (अबुल फ़ज़ल)।


19. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. बाबर: पानीपत 1526, खानवा 1527, चंदेरी 1528, घाघरा 1529; बाबरनामा तुर्की में
  2. हुमायूँ: चौसा 1539, कन्नौज 1540 में हार; 1555 में वापसी; 1556 में मृत्यु
  3. शेरशाह (1540–45): रुपया, सड़क-ए-आज़म, सराय, पट्टा-कबूलियत; कालिंजर में मृत्यु, सासाराम में मकबरा
  4. अकबर: 1556 कलानौर में राज्याभिषेक; पानीपत II (हेमू); संरक्षक बैरम खाँ
  5. 1563 तीर्थकर, 1564 जज़िया समाप्त
  6. इबादतखाना 1575 → महज़र 1579 → दीन-ए-इलाही 1582
  7. दहसाला 1580 — टोडरमल; भूमि: पोलज, परौती, चचर, बंजर
  8. मनसबदारी: ज़ात (व्यक्तिगत) + सवार (घुड़सवार); जागीर = राजस्व अधिकार
  9. हल्दीघाटी 1576 — मानसिंह बनाम महाराणा प्रताप; मेवाड़ संधि 1615
  10. "नवरत्न" — बाद की लोकप्रिय परंपरा
  11. जहाँगीर: न्याय की ज़ंजीर, नूरजहाँ, हॉकिन्स 1608, टॉमस रो 1615
  12. शाहजहाँ: ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद, मयूर सिंहासन
  13. उत्तराधिकार युद्ध: धरमत, सामूगढ़ (1658), देवराई (1659)
  14. औरंगज़ेब: जज़िया 1679, पुरंदर संधि 1665 (जयसिंह), बीजापुर 1686, गोलकुंडा 1687
  15. अबुल फ़ज़ल — अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी; बदायूँनी — मुंतख़ब-उत-तवारीख़

20. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिस प्रश्न में गलती हो, उसका वर्ष और व्यक्ति इस नोट की युद्ध-तालिका या रिवीज़न तालिका में दोबारा देखें। मध्यकालीन और आधुनिक भारत के मिश्रित प्रश्नों के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक निःशुल्क टेस्ट सीरीज़ हल करें।


21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

मुगल साम्राज्य का अध्याय तीन परतों में पढ़ें — पहली, युद्ध और वर्ष (बाबर से उत्तराधिकार युद्ध तक); दूसरी, प्रशासन (शेरशाह की नींव पर अकबर की मनसबदारी और दहसाला); तीसरी, संस्कृति (सुलह-ए-कुल, अनुवाद, चित्रकला, स्थापत्य और यूरोपीय यात्री)। अकबर की समावेशी नीति और औरंगज़ेब की बदली हुई नीति के बीच का अंतर, तथा दक्कन में लंबे संघर्ष और जागीरदारी संकट, 18वीं सदी में साम्राज्य के कमज़ोर होने की पृष्ठभूमि बनाते हैं — जिसका अगला चरण यूरोपीय कंपनियों का उदय है।

बाबर 26-27-28-29 · हुमायूँ चौसा 39, कन्नौज 40 · शेरशाह = रुपया-सड़क-सराय · अकबर = ज़ात-सवार, दहसाला 80, दीन-ए-इलाही 82 · जहाँगीर = ज़ंजीर, टॉमस रो · शाहजहाँ = ताज · औरंगज़ेब = जज़िया 79, पुरंदर 65


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

मुगल वंश की स्थापना बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर की। इसी युद्ध के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ।

बाबर के चार प्रमुख युद्ध हैं — पानीपत (1526, इब्राहिम लोदी), खानवा (1527, राणा साँगा), चंदेरी (1528, मेदिनी राय) और घाघरा (1529, अफ़गान)।

शेरशाह ने चाँदी का रुपया चलाया, सड़क-ए-आज़म (आगे ग्रैंड ट्रंक रोड) व सराएँ बनवाईं और भूमि की माप पर आधारित लगान तथा पट्टा-कबूलियत की व्यवस्था की।

अकबर द्वारा व्यवस्थित की गई इस प्रणाली में हर अधिकारी को एक संख्यात्मक पद (मनसब) मिलता था, जिसकी दो रैंक थीं — ज़ात (व्यक्तिगत पद व वेतन) और सवार (रखे जाने वाले घुड़सवार)। वेतन नकद या जागीर के रूप में मिलता था।

दहसाला (ज़ब्ती) व्यवस्था 1580 में अकबर के समय राजा टोडरमल ने लागू की। इसमें पिछले दस वर्षों की उपज और कीमतों के औसत से नकद लगान तय होता था।

दीन-ए-इलाही (1582) अकबर के प्रति निष्ठा पर आधारित एक आध्यात्मिक-नैतिक मार्ग था, जिसे अधिकांश इतिहासकार अलग धर्म नहीं मानते। इसके अनुयायी बहुत कम थे; बीरबल का नाम प्रमुख अनुयायियों में लिया जाता है।

हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में अकबर की मुगल सेना और मेवाड़ के महाराणा प्रताप के बीच हुआ। मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के राजा मानसिंह ने किया।

आइन-ए-अकबरी अबुल फ़ज़ल ने लिखी। इसे अकबरनामा का तीसरा खंड माना जाता है और इसमें अकबर के प्रशासन, राजस्व और साम्राज्य का विवरण है।

औरंगज़ेब ने 1679 में गैर-मुस्लिमों पर जज़िया पुनः लगाया। अकबर ने इसे 1564 में समाप्त किया था।

पुरंदर की संधि 1665 में शिवाजी और औरंगज़ेब के सेनापति आमेर के राजा जयसिंह के बीच हुई। इसमें शिवाजी को अपने कई किले मुगलों को सौंपने पड़े।

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