विद्युत और चुंबकत्व — ओम का नियम, श्रेणी-समांतर, kWh, फ्यूज़, मोटर, ट्रांसफॉर्मर — SSC/रेलवे/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, अग्निवीर व RSSB CET पाठ्यक्रम की सामान्य विज्ञान इकाई; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10) और SI मात्रक प्रणाली। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है, I = Q/t, मात्रक ऐम्पियर (A); विभवांतर का मात्रक वोल्ट (V) और प्रतिरोध का ओम (Ω) है। स्थिर ताप पर ओम का नियम V = IR लागू होता है; धातुओं का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है जबकि अर्धचालकों का घटता है। श्रेणी क्रम में R = R₁ + R₂ + … और समांतर क्रम में 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + …; घरेलू उपकरण समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं ताकि हर उपकरण को पूरी वोल्टता मिले। विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R (वाट) और व्यावसायिक मात्रक 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6×10⁶ J। फ्यूज़ कम गलनांक वाली मिश्रधातु का, हीटर का तत्व नाइक्रोम का और बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है। भारत में घरों को AC 220 V, 50 Hz (NCERT मान) की आपूर्ति मिलती है। ओर्स्टेड ने धारा का चुंबकीय प्रभाव और फैराडे ने विद्युतचुंबकीय प्रेरण खोजा; मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक में और जनित्र (डायनेमो) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत में बदलता है। ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर काम करता है। अमीटर परिपथ में श्रेणी में और वोल्टमीटर समांतर में लगाया जाता है।
संक्षिप्त उत्तर
| राशि | सूत्र | SI मात्रक | मापक यंत्र |
|---|---|---|---|
| आवेश (Q) | Q = I × t | कूलॉम (C) | — |
| विद्युत धारा (I) | I = Q/t | ऐम्पियर (A) | अमीटर (श्रेणी में) |
| विभवांतर (V) | V = W/Q | वोल्ट (V) = J/C | वोल्टमीटर (समांतर में) |
| प्रतिरोध (R) | R = V/I | ओम (Ω) | ओममीटर |
| प्रतिरोधकता (ρ) | ρ = RA/L | ओम-मीटर (Ω·m) | — |
| विद्युत शक्ति (P) | P = VI = I²R = V²/R | वाट (W) | वाटमीटर |
| विद्युत ऊर्जा (E) | E = P × t | जूल (J); व्यावसायिक: kWh | विद्युत मीटर |
| चुंबकीय क्षेत्र (B) | — | टेस्ला (T) | — |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| इलेक्ट्रॉन का आवेश | लगभग 1.6×10⁻¹⁹ C (ऋणात्मक) |
| 1 kWh | 1 यूनिट = 3.6×10⁶ J |
| भारत में घरेलू आपूर्ति | AC, 220 V (NCERT), आवृत्ति 50 Hz |
| फ्यूज़ तार | कम गलनांक मिश्रधातु (जैसे टिन-सीसा), श्रेणी में, लाइव तार पर |
| हीटर / इस्त्री का तत्व | नाइक्रोम (उच्च प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक) |
| बल्ब का तंतु | टंगस्टन (बहुत उच्च गलनांक) |
| घरेलू वायरिंग | समांतर क्रम |
| धारा का चुंबकीय प्रभाव | ओर्स्टेड |
| विद्युतचुंबकीय प्रेरण | फैराडे |
| मोटर / जनित्र | विद्युत → यांत्रिक / यांत्रिक → विद्युत |
| ट्रांसफॉर्मर | केवल AC; अन्योन्य प्रेरण |
| सबसे अच्छा विद्युत चालक (धातु) | चाँदी; उसके बाद ताँबा |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
विद्युत और चुंबकत्व सामान्य विज्ञान के भौतिकी भाग का वह अध्याय है जिसमें तथ्य, उपकरण और सरल गणना — तीनों एक साथ आते हैं। SSC CGL/CHSL/MTS/GD में प्रायः मात्रक, उपकरण-सिद्धांत और ऊर्जा-रूपांतरण (मोटर/जनित्र) पूछे जाते हैं। RRB NTPC और अग्निवीर में ओम के नियम, श्रेणी-समांतर प्रतिरोध और बिजली बिल जैसी छोटी गणनाएँ भी मिलती हैं। राजस्थान CET और पटवारी में दैनिक जीवन (फ्यूज़, अर्थिंग, MCB, घरेलू वायरिंग) और कथन-आधारित प्रश्न आम हैं। अमीटर-वोल्टमीटर का संयोजन, kWh का जूल में मान और फ्यूज़-हीटर-बल्ब के पदार्थ — ये सबसे ज़्यादा दोहराए जाने वाले तथ्य हैं।
मात्रकों और ऊर्जा-शक्ति की मूल परिभाषाओं के लिए मात्रक, गति, बल, गुरुत्वाकर्षण और ऊर्जा नोट साथ में पढ़ें।
3. स्थिर विद्युत (Static Electricity)
आवेश पदार्थ का मूल गुण है। आवेश दो प्रकार के होते हैं — धनात्मक और ऋणात्मक। सजातीय आवेश प्रतिकर्षित और विजातीय आवेश आकर्षित करते हैं। रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी में जाते हैं — इलेक्ट्रॉन खोने वाली वस्तु धनावेशित और पाने वाली ऋणावेशित होती है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| काँच की छड़ को रेशम से रगड़ना | काँच धनावेशित, रेशम ऋणावेशित |
| एबोनाइट छड़ को ऊन/फर से रगड़ना | एबोनाइट ऋणावेशित, ऊन धनावेशित |
| आवेश का क्वांटीकरण | किसी वस्तु पर आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश (e) का पूर्ण गुणज होता है |
| आवेश संरक्षण | आवेश न बनाया जा सकता है, न नष्ट — केवल स्थानांतरित होता है |
| कूलॉम का नियम (गुणात्मक) | दो बिंदु आवेशों के बीच बल आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनकी दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती |
| स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी | वस्तु पर आवेश की उपस्थिति का पता लगाना |
| तड़ित (आकाशीय बिजली) | बादलों में एकत्र आवेश का विसर्जन |
| तड़ित-चालक | भवन के ऊपर धातु की नुकीली छड़, मोटे तार से ज़मीन (अर्थ) से जुड़ी — आवेश को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में भेजती है; इसकी खोज बेंजामिन फ्रैंकलिन से जोड़ी जाती है |
दूरी का प्रभाव: कूलॉम के नियम के अनुसार दूरी दुगुनी करने पर बल एक-चौथाई रह जाता है; दोनों आवेश दुगुने करने पर बल चार गुना हो जाता है।
चालक, कुचालक और अर्धचालक
| प्रकार | गुण | उदाहरण |
|---|---|---|
| चालक (Conductor) | मुक्त इलेक्ट्रॉन अधिक; धारा आसानी से बहती है; प्रतिरोध कम | चाँदी, ताँबा, ऐलुमिनियम, लोहा, ग्रेफ़ाइट (अधातु होकर भी चालक), लवणीय जल, मानव शरीर |
| कुचालक / विद्युतरोधी (Insulator) | मुक्त इलेक्ट्रॉन लगभग नहीं; धारा नहीं बहती | रबर, प्लास्टिक, काँच, सूखी लकड़ी, अभ्रक (माइका), चीनी मिट्टी, आसुत जल (बहुत कम चालक) |
| अर्धचालक (Semiconductor) | चालकता चालक और कुचालक के बीच; ताप बढ़ने पर चालकता बढ़ती (प्रतिरोध घटता); अपमिश्रण (डोपिंग) से चालकता नियंत्रित | सिलिकॉन, जर्मेनियम — डायोड, ट्रांजिस्टर, सौर सेल, कंप्यूटर चिप |
क्यों ताँबा, चाँदी क्यों नहीं? चाँदी सबसे अच्छी धातु-चालक है, पर बहुत महँगी है; इसलिए घरेलू तार ताँबे के और लंबी दूरी की संचरण लाइनें प्रायः ऐलुमिनियम की बनती हैं (हल्का और सस्ता)। धातुओं के गुणों के लिए धातु, अधातु और दैनिक जीवन में रसायन नोट देखें।
4. विद्युत धारा, विभवांतर और प्रतिरोध
| अवधारणा | परिभाषा व मुख्य बातें |
|---|---|
| विद्युत धारा | एकांक समय में प्रवाहित आवेश; I = Q/t। 1 A = 1 C/s। |
| धारा की दिशा | परंपरागत धारा धनात्मक से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर (बाहरी परिपथ में); इलेक्ट्रॉन इसकी उल्टी दिशा में बहते हैं |
| विभवांतर | एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया गया कार्य; V = W/Q। 1 V = 1 J/C। |
| धारा बहने की शर्त | चालक के दोनों सिरों पर विभवांतर होना चाहिए और परिपथ बंद होना चाहिए |
| प्रतिरोध | चालक द्वारा धारा के प्रवाह का विरोध; R = V/I |
| प्रतिरोध किन पर निर्भर | R = ρL/A — लंबाई (L) के समानुपाती, अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती, पदार्थ और ताप पर निर्भर |
| प्रतिरोधकता (ρ) | पदार्थ का गुण; लंबाई या मोटाई बदलने से नहीं बदलती, ताप और पदार्थ बदलने से बदलती है |
| चालकता | प्रतिरोध का व्युत्क्रम; मात्रक सीमेंस (S) / mho |
ओम का नियम
स्थिर ताप (और अन्य भौतिक अवस्थाएँ समान) पर किसी चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है: V ∝ I, अर्थात V = IR। V–I ग्राफ़ मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा होता है।
ताप का प्रभाव
| पदार्थ | ताप बढ़ने पर प्रतिरोध |
|---|---|
| शुद्ध धातुएँ (ताँबा, टंगस्टन) | बढ़ता है |
| अर्धचालक (सिलिकॉन, जर्मेनियम) | घटता है |
| मिश्रधातुएँ (मैंगनिन, कॉन्स्टैंटन, नाइक्रोम) | बहुत कम बदलता है — इसलिए मानक प्रतिरोध बनाने में उपयोग |
हल किए हुए उदाहरण
| प्रश्न | हल |
|---|---|
| किसी तार में 2 मिनट तक 0.5 A धारा बहती है। प्रवाहित आवेश? | Q = I × t = 0.5 × 120 = 60 C |
| 12 V बैटरी से 4 Ω प्रतिरोध जोड़ा गया। धारा? | I = V/R = 12/4 = 3 A |
| किसी बल्ब में 220 V पर 0.5 A धारा बहती है। प्रतिरोध? | R = V/I = 220/0.5 = 440 Ω |
| तार की लंबाई दुगुनी कर दी जाए (मोटाई वही)। प्रतिरोध? | दुगुना (R ∝ L) |
| उसी तार को खींचकर लंबाई दुगुनी की गई (आयतन वही)। प्रतिरोध? | चार गुना — लंबाई 2 गुनी और क्षेत्रफल आधा होता है |
5. प्रतिरोधों का श्रेणी और समांतर संयोजन
| बिंदु | श्रेणी क्रम (Series) | समांतर क्रम (Parallel) |
|---|---|---|
| तुल्य प्रतिरोध | R = R₁ + R₂ + R₃ | 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ |
| परिणाम | तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोध से भी अधिक | तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम |
| धारा | सभी में समान | अलग-अलग शाखाओं में बँटती है |
| विभवांतर | प्रतिरोधों में बँटता है | सभी पर समान |
| एक उपकरण खराब हो तो | पूरा परिपथ टूट जाता है | बाकी उपकरण चलते रहते हैं |
| उदाहरण | सजावटी झालर की पुरानी लड़ियाँ, फ्यूज़ (उपकरण के साथ श्रेणी में), अमीटर | घरेलू वायरिंग, वोल्टमीटर |
घरेलू वायरिंग समांतर क्रम में क्यों?
- हर उपकरण को पूरी आपूर्ति वोल्टता (220 V) मिलती है।
- हर उपकरण का अपना स्विच होता है — एक को बंद करने से दूसरे पर असर नहीं।
- एक उपकरण खराब हो जाए तो बाकी चलते रहते हैं।
- हर उपकरण अपनी आवश्यकता के अनुसार अलग धारा ले सकता है (श्रेणी में सबमें एक ही धारा बहती)।
हल किए हुए उदाहरण
| प्रश्न | हल |
|---|---|
| 2 Ω और 3 Ω श्रेणी में | R = 2 + 3 = 5 Ω |
| 2 Ω और 3 Ω समांतर में | 1/R = 1/2 + 1/3 = 5/6 → R = 6/5 = 1.2 Ω |
| 6 Ω के तीन प्रतिरोध समांतर में | R = 6/3 = 2 Ω (n समान प्रतिरोध r समांतर में = r/n) |
| 6 Ω के तीन प्रतिरोध श्रेणी में | R = 3 × 6 = 18 Ω |
| 4 Ω और 4 Ω समांतर, फिर 3 Ω श्रेणी में; 10 V बैटरी | समांतर भाग = 2 Ω; कुल = 2 + 3 = 5 Ω; I = 10/5 = 2 A |
6. विद्युत शक्ति, विद्युत ऊर्जा और बिजली बिल
विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R। मात्रक वाट (W); 1 W = 1 J/s; 1 kW = 1000 W। 1 अश्व-शक्ति (HP) ≈ 746 W।
विद्युत ऊर्जा E = P × t। घरों में बिल किलोवाट-घंटा (kWh) में बनता है, जिसे 1 यूनिट कहते हैं: 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3.6×10⁶ J।
| हल किया हुआ उदाहरण | हल |
|---|---|
| 100 W का बल्ब 10 घंटे जले तो कितनी यूनिट? | E = 0.1 kW × 10 h = 1 kWh = 1 यूनिट |
| 1000 W का हीटर रोज़ 2 घंटे, 30 दिन चले; ₹5 प्रति यूनिट। बिल? | E = 1 kW × 2 × 30 = 60 kWh; बिल = 60 × 5 = ₹300 |
| चार 50 W के पंखे रोज़ 5 घंटे, 30 दिन। यूनिट? | E = (4 × 0.05) × 5 × 30 = 30 kWh |
| 1100 W की इस्त्री 220 V पर। धारा और प्रतिरोध? | I = P/V = 1100/220 = 5 A; R = V/I = 220/5 = 44 Ω |
| किसी उपकरण में 2 A धारा, प्रतिरोध 50 Ω। शक्ति? | P = I²R = 4 × 50 = 200 W |
| "220 V, 60 W" बल्ब का प्रतिरोध? | R = V²/P = 48400/60 ≈ 807 Ω |
याद रखें: समान वोल्टता पर अधिक शक्ति वाले बल्ब का प्रतिरोध कम होता है (R = V²/P) — 100 W बल्ब का प्रतिरोध 60 W बल्ब से कम है।
7. धारा का ऊष्मीय प्रभाव
प्रतिरोधक तार में धारा बहने पर विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदलती है — जूल का तापन नियम: H = I²Rt। उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के समानुपाती होती है। ऊष्मा और ताप के बारे में विस्तार से ऊष्मा, ताप और तापमान नोट में पढ़ें।
| उपकरण / भाग | पदार्थ | कारण |
|---|---|---|
| फ्यूज़ तार | कम गलनांक वाली मिश्रधातु (जैसे टिन-सीसा) | अधिक धारा बहते ही पिघलकर परिपथ तोड़ दे |
| हीटर, इस्त्री, टोस्टर, गीज़र का तापन तत्व | नाइक्रोम (निकेल-क्रोमियम मिश्रधातु) | उच्च प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक, उच्च ताप पर भी आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होता |
| बल्ब का तंतु | टंगस्टन | बहुत उच्च गलनांक (लगभग 3400 °C) — तप्त होकर प्रकाश देता है |
| बल्ब में भरी गैस | रासायनिक रूप से निष्क्रिय नाइट्रोजन / आर्गन | तंतु की आयु बढ़ाना |
| संयोजी (कनेक्टिंग) तार | ताँबा / ऐलुमिनियम | कम प्रतिरोधकता — कम ऊष्मा-हानि |
तापदीप्त बल्ब की दक्षता: उपभोग की गई ऊर्जा का अधिकांश भाग ऊष्मा में बदलता है, थोड़ा ही प्रकाश बनता है। इसलिए CFL और LED अधिक ऊर्जा-दक्ष हैं — समान प्रकाश के लिए कम शक्ति लेते हैं।
फ्यूज़ कैसे काम करता है
फ्यूज़ परिपथ में श्रेणी क्रम में, लाइव तार पर लगाया जाता है। अतिभारण (Overloading) — एक साथ बहुत अधिक उपकरण चलाना — या लघुपथन (Short Circuit) — लाइव और न्यूट्रल तार का सीधे संपर्क — होने पर धारा बहुत बढ़ जाती है, फ्यूज़ तार पिघलकर परिपथ तोड़ देता है और उपकरण व वायरिंग बच जाते हैं। NCERT के अनुसार घरों में प्रायः दो परिपथ होते हैं — अधिक शक्ति वाले उपकरणों (गीज़र, AC, हीटर) के लिए 15 A और बल्ब-पंखों के लिए 5 A रेटिंग वाला।
8. AC बनाम DC
| बिंदु | प्रत्यावर्ती धारा (AC) | दिष्ट धारा (DC) |
|---|---|---|
| दिशा | निश्चित समय-अंतराल पर दिशा बदलती है | सदैव एक ही दिशा में |
| स्रोत | AC जनित्र, बिजलीघर | सेल, बैटरी, सौर सेल, DC जनित्र |
| भारत में घरेलू आपूर्ति | 220 V (NCERT मान), 50 Hz | — |
| 50 Hz का अर्थ | एक सेकंड में 50 चक्र; हर 1/100 s पर दिशा बदलती है (एक सेकंड में 100 बार) | — |
| लंबी दूरी तक संचरण | आसान — ट्रांसफॉर्मर से वोल्टता बढ़ाकर ऊर्जा-हानि कम | ट्रांसफॉर्मर से वोल्टता नहीं बदली जा सकती |
| उपयोग | घरेलू व औद्योगिक बिजली | मोबाइल, टॉर्च, विद्युत-लेपन, बैटरी चार्जिंग, इलेक्ट्रॉनिक परिपथ |
नोट: NCERT कक्षा 10 में घरेलू आपूर्ति 220 V लिखी है; भारतीय मानक में नाममात्र वोल्टता 230 V भी लिखी जाती है। परीक्षा में विकल्पों के अनुसार 220 V (NCERT) ही सुरक्षित उत्तर है, और 50 Hz दोनों में समान है।
9. घरेलू विद्युत परिपथ और सुरक्षा
घर में बिजली मुख्य आपूर्ति से तीन तारों द्वारा आती है — लाइव (विद्युन्मय), न्यूट्रल (उदासीन) और अर्थ (भू-संपर्क)। लाइव और न्यूट्रल के बीच विभवांतर 220 V होता है।
| तार | NCERT में बताया गया रंग (पुरानी परंपरा) | नई अंतरराष्ट्रीय/भारतीय परंपरा | कार्य |
|---|---|---|---|
| लाइव (Live / Phase) | लाल | भूरा (Brown) | उच्च विभव पर; धारा लाता है; फ्यूज़ और स्विच इसी पर |
| न्यूट्रल (Neutral) | काला | नीला (Blue) | धारा लौटाता है; लगभग शून्य विभव |
| अर्थ (Earth) | हरा | हरा-पीला (Green-Yellow) | सुरक्षा तार — उपकरण की धातु बॉडी को पृथ्वी से जोड़ता है |
सावधानी: रंग-परंपरा पुरानी और नई वायरिंग में भिन्न है। परीक्षा में सबसे सुरक्षित पक्का तथ्य यह है कि अर्थ तार हरा (या हरा-पीला) होता है; लाइव-न्यूट्रल के रंग के प्रश्न में विकल्पों के अनुसार NCERT वाली परंपरा (लाल-काला) या नई परंपरा (भूरा-नीला) पहचानें।
| सुरक्षा उपाय | कैसे काम करता है |
|---|---|
| अर्थिंग (भू-संपर्कण) | धातु बॉडी वाले उपकरण (इस्त्री, फ्रिज, टोस्टर, कूलर) में लीकेज धारा को पृथ्वी में भेज देता है — उपयोगकर्ता को झटका नहीं लगता |
| फ्यूज़ | अधिक धारा पर पिघलता है; बदलना पड़ता है |
| MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) | अतिभारण या लघुपथन पर स्वतः परिपथ तोड़ देता है; दोबारा स्विच ऑन (रीसेट) किया जा सकता है — फ्यूज़ की तरह बदलना नहीं पड़ता |
| RCCB / ELCB | लाइव और न्यूट्रल की धारा में अंतर (रिसाव) पकड़कर परिपथ तोड़ता है — झटके से सुरक्षा |
| तीन-पिन प्लग | सबसे लंबी और मोटी पिन अर्थ की होती है, जो सबसे पहले जुड़ती है |
दैनिक जीवन: हाई-वोल्टेज तार पर बैठी चिड़िया को झटका नहीं लगता, क्योंकि उसके दोनों पंजे एक ही तार पर (लगभग समान विभव पर) हैं और उसके शरीर से होकर पृथ्वी तक कोई परिपथ पूरा नहीं होता। ज़मीन पर खड़ा व्यक्ति लाइव तार छुए तो परिपथ शरीर से पृथ्वी तक पूरा होता है, इसलिए झटका लगता है।
10. धारा का चुंबकीय प्रभाव और विद्युत चुंबक
ओर्स्टेड ने देखा कि धारावाही तार के पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित हो जाती है — अर्थात विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से ज्ञात होती है: तार को दाएँ हाथ में पकड़ें, अँगूठा धारा की दिशा में हो तो मुड़ी उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र-रेखाओं की दिशा बताती हैं।
| व्यवस्था | चुंबकीय क्षेत्र |
|---|---|
| सीधा धारावाही तार | तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्त; तार से दूर जाने पर कमज़ोर |
| वृत्ताकार कुंडली | केंद्र पर क्षेत्र-रेखाएँ लगभग सीधी |
| परिनालिका (Solenoid) | भीतर क्षेत्र लगभग एकसमान; बाहर से छड़ चुंबक जैसा — एक सिरा N, दूसरा S |
विद्युत चुंबक (Electromagnet)
परिनालिका के भीतर नर्म लोहे की छड़ रखकर धारा प्रवाहित करने से शक्तिशाली विद्युत चुंबक बनता है। धारा बंद होते ही इसका चुंबकत्व लगभग समाप्त हो जाता है। नर्म लोहा इसलिए कि वह आसानी से चुंबकित और विचुंबकित होता है; स्थायी चुंबक बनाने के लिए स्टील (या ऐल्निको जैसी मिश्रधातु) लिया जाता है क्योंकि वह चुंबकत्व देर तक बनाए रखता है।
| विद्युत चुंबक का प्रबल करना | उपयोग |
|---|---|
| फेरों की संख्या बढ़ाना, धारा बढ़ाना, नर्म लोहे का क्रोड | विद्युत घंटी, क्रेन से लोहे का कबाड़ उठाना, रिले, लाउडस्पीकर, MRI मशीन, विद्युत मोटर और जनित्र |
11. विद्युत मोटर, विद्युतचुंबकीय प्रेरण और जनित्र
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। इसकी दिशा फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम से: बाएँ हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा परस्पर लंबवत् — तर्जनी = चुंबकीय क्षेत्र, मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल (गति)। यही विद्युत मोटर का आधार है।
विद्युतचुंबकीय प्रेरण
माइकल फैराडे ने खोजा कि किसी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय क्षेत्र (चुंबकीय फ्लक्स) बदलने पर कुंडली में धारा प्रेरित होती है — इसे विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहते हैं। चुंबक को कुंडली के पास-दूर ले जाने पर गैल्वेनोमीटर विक्षेप दिखाता है; चुंबक स्थिर हो तो धारा नहीं। प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम से ज्ञात होती है।
| बिंदु | विद्युत मोटर | जनित्र (डायनेमो) |
|---|---|---|
| ऊर्जा रूपांतरण | विद्युत → यांत्रिक | यांत्रिक → विद्युत |
| सिद्धांत | चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल (बल-युग्म) | विद्युतचुंबकीय प्रेरण |
| दिशा का नियम | फ्लेमिंग वाम-हस्त नियम | फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त नियम |
| विशेष भाग | DC मोटर में विभक्त वलय (दिक्परिवर्तक / कम्यूटेटर) — हर आधे चक्कर पर धारा की दिशा उलटता है | AC जनित्र में सर्पी वलय (Slip Rings); DC जनित्र में विभक्त वलय |
| उदाहरण | पंखा, मिक्सर, वॉशिंग मशीन, पानी की मोटर, विद्युत वाहन | बिजलीघर का जनित्र, साइकिल डायनेमो, डीज़ल जनरेटर सेट |
दैनिक जीवन में प्रेरण: इंडक्शन कुकटॉप, धातु-संसूचक (मेटल डिटेक्टर), ट्रांसफॉर्मर और बिजलीघर के जनित्र — सभी विद्युतचुंबकीय प्रेरण पर आधारित हैं।
12. ट्रांसफॉर्मर
ट्रांसफॉर्मर प्रत्यावर्ती धारा (AC) की वोल्टता को बढ़ाने या घटाने वाला उपकरण है। यह अन्योन्य प्रेरण (विद्युतचुंबकीय प्रेरण) पर काम करता है — इसलिए DC पर काम नहीं करता (DC से चुंबकीय फ्लक्स नहीं बदलता)। इसमें नर्म लोहे के पटलित (Laminated) क्रोड पर प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियाँ लिपटी होती हैं; पटलित क्रोड भँवर धाराओं (Eddy Currents) से होने वाली ऊर्जा-हानि कम करता है।
सूत्र: Vs/Vp = Ns/Np (आदर्श ट्रांसफॉर्मर में शक्ति लगभग समान रहती है: Vp × Ip ≈ Vs × Is)।
| बिंदु | उच्चायी (Step-up) | अपचायी (Step-down) |
|---|---|---|
| फेरे | Ns > Np | Ns < Np |
| वोल्टता | बढ़ती है | घटती है |
| धारा | घटती है | बढ़ती है |
| उपयोग | बिजलीघर से उच्च वोल्टता पर संचरण | शहर/मोहल्ले में 220 V तक घटाना, मोबाइल चार्जर, डोरबेल |
उच्च वोल्टता पर संचरण क्यों? समान शक्ति (P = VI) के लिए वोल्टता अधिक होने पर धारा कम होती है, और तारों में ऊष्मा-हानि I²R धारा के वर्ग पर निर्भर है — इसलिए हानि बहुत घट जाती है।
उदाहरण: प्राथमिक कुंडली में 1000 फेरे, द्वितीयक में 50 फेरे, प्राथमिक वोल्टता 220 V। Vs = 220 × 50/1000 = 11 V (अपचायी ट्रांसफॉर्मर)।
13. चुंबकत्व
चुंबक के गुण
| गुण | विवरण |
|---|---|
| आकर्षण | लोहा, निकेल, कोबाल्ट जैसे पदार्थों को आकर्षित करता है; आकर्षण ध्रुवों पर सबसे अधिक |
| दिशात्मक गुण | स्वतंत्र रूप से लटकाने पर लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है (कंपास इसी पर) |
| ध्रुव | सजातीय ध्रुव प्रतिकर्षित, विजातीय आकर्षित |
| ध्रुव सदैव जोड़े में | चुंबक को तोड़ने पर हर टुकड़ा N और S वाला पूरा चुंबक बन जाता है; एकल ध्रुव नहीं मिलता |
| प्रतिकर्षण | चुंबकत्व की पक्की पहचान — आकर्षण तो चुंबक और लोहे के बीच भी होता है |
| चुंबकत्व का ह्रास | गर्म करने, पीटने, गिराने से चुंबकत्व घटता है |
चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ
- चुंबक के बाहर N से S की ओर और भीतर S से N की ओर — बंद वक्र बनाती हैं।
- दो क्षेत्र-रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं।
- जहाँ रेखाएँ पास-पास हों, वहाँ क्षेत्र प्रबल (ध्रुवों के पास)।
पृथ्वी का चुंबकत्व
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है। इसका चुंबकीय दक्षिण ध्रुव भौगोलिक उत्तर के पास है — इसीलिए कंपास का उत्तरी ध्रुव (N) भौगोलिक उत्तर की ओर इंगित करता है। पृथ्वी के चुंबकत्व का कारण मुख्यतः उसके बाहरी क्रोड में पिघले लौह-पदार्थ की गति से उत्पन्न धाराएँ माना जाता है।
| पद | अर्थ (गुणात्मक) |
|---|---|
| दिक्पात (Declination) | किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर और चुंबकीय याम्योत्तर के बीच का कोण — "सच्चा उत्तर" और "कंपास का उत्तर" का अंतर |
| नति (Dip / Inclination) | पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का क्षैतिज से कोण; चुंबकीय ध्रुवों पर 90° और चुंबकीय विषुवत् पर 0° |
पदार्थों का चुंबकीय वर्गीकरण
| प्रकार | व्यवहार | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) | चुंबकीय क्षेत्र में दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित | बिस्मथ, ताँबा, चाँदी, सोना, जल, सामान्य नमक |
| अनुचुंबकीय (Paramagnetic) | दुर्बल रूप से आकर्षित | ऐलुमिनियम, प्लैटिनम, ऑक्सीजन, सोडियम |
| लौहचुंबकीय (Ferromagnetic) | प्रबल रूप से आकर्षित; स्थायी चुंबक बन सकते हैं | लोहा, कोबाल्ट, निकेल |
क्यूरी ताप: एक निश्चित ताप से ऊपर गर्म करने पर लौहचुंबकीय पदार्थ अपना प्रबल चुंबकत्व खोकर अनुचुंबकीय की तरह व्यवहार करने लगता है — इस ताप को क्यूरी ताप कहते हैं।
14. सेल और बैटरी
विद्युत सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है और DC देता है। कई सेलों का संयोजन बैटरी कहलाता है। पहला विद्युत सेल (वोल्टीय सेल / वोल्टा का ढेर) एलेसेंड्रो वोल्टा ने बनाया; उन्हीं के नाम पर विभवांतर का मात्रक "वोल्ट" है।
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राथमिक सेल (Primary) | एक बार उपयोग; रिचार्ज नहीं होता | शुष्क सेल (टॉर्च, रिमोट, घड़ी) — लगभग 1.5 V |
| द्वितीयक सेल (Secondary) | रिचार्ज हो सकता है; चार्जिंग में विद्युत ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित | सीसा-अम्ल संचायक (वाहन, इन्वर्टर), लिथियम-आयन (मोबाइल, लैपटॉप), निकेल-कैडमियम |
| सेल | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| शुष्क सेल (लेक्लांशे सेल का शुष्क रूप) | जस्ते का पात्र ऋण इलेक्ट्रोड, बीच में कार्बन (ग्रेफ़ाइट) छड़ धन इलेक्ट्रोड; अमोनियम क्लोराइड का लेप और मैंगनीज़ डाइऑक्साइड; लगभग 1.5 V |
| सीसा-अम्ल संचायक | सीसा और सीसा डाइऑक्साइड प्लेटें, तनु सल्फ्यूरिक अम्ल; प्रति सेल लगभग 2 V — 12 V कार-बैटरी में 6 सेल |
| लिथियम-आयन | हल्की, अधिक ऊर्जा-घनत्व; मोबाइल, लैपटॉप, विद्युत वाहन |
| सौर सेल | प्रकाश ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा; सामान्यतः सिलिकॉन (अर्धचालक) से |
सेलों का संयोजन: 1.5 V के चार सेल श्रेणी में = 6 V। समान सेल समांतर में जोड़ने पर वोल्टता वही रहती है, पर बैटरी अधिक समय तक धारा दे सकती है।
15. प्रमुख उपकरण, सिद्धांत और ऊर्जा रूपांतरण
| उपकरण | कार्य / सिद्धांत | मुख्य बात |
|---|---|---|
| गैल्वेनोमीटर | परिपथ में बहुत कम धारा की उपस्थिति और दिशा का पता लगाना; चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल-युग्म | अमीटर और वोल्टमीटर इसी से बनाए जाते हैं |
| अमीटर | धारा मापना | श्रेणी में; प्रतिरोध बहुत कम (आदर्श = शून्य); गैल्वेनोमीटर + समांतर में कम प्रतिरोध (शंट) |
| वोल्टमीटर | विभवांतर मापना | समांतर में; प्रतिरोध बहुत अधिक (आदर्श = अनंत); गैल्वेनोमीटर + श्रेणी में उच्च प्रतिरोध |
| धारा नियंत्रक (Rheostat) | परिवर्ती प्रतिरोध द्वारा परिपथ की धारा घटाना-बढ़ाना | पंखे का पुराना रेगुलेटर, प्रयोगशाला |
| स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी | आवेश का पता लगाना | स्थिर विद्युत |
| ट्रांसफॉर्मर | AC वोल्टता बदलना; अन्योन्य प्रेरण | DC पर नहीं |
| विद्युत मोटर | चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल | विद्युत → यांत्रिक |
| जनित्र / डायनेमो | विद्युतचुंबकीय प्रेरण | यांत्रिक → विद्युत |
| फ्यूज़ | धारा का ऊष्मीय प्रभाव | कम गलनांक, श्रेणी में |
| MCB | अधिक धारा पर स्वतः ट्रिप (चुंबकीय/ऊष्मीय क्रिया) | रीसेट योग्य |
| विद्युत घंटी | विद्युत चुंबक | धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग |
| इंडक्शन कुकटॉप, मेटल डिटेक्टर | विद्युतचुंबकीय प्रेरण | बदलते चुंबकीय क्षेत्र से धातु में धारा |
| तड़ित-चालक | नुकीली धातु छड़ से आवेश का पृथ्वी में विसर्जन | भवनों की सुरक्षा |
| युक्ति | ऊर्जा रूपांतरण |
|---|---|
| विद्युत सेल / बैटरी (उपयोग के समय) | रासायनिक → विद्युत |
| बैटरी चार्ज करते समय | विद्युत → रासायनिक |
| सौर सेल | प्रकाश (सौर) → विद्युत |
| विद्युत मोटर / पंखा | विद्युत → यांत्रिक |
| जनित्र / डायनेमो | यांत्रिक → विद्युत |
| विद्युत बल्ब | विद्युत → प्रकाश + ऊष्मा |
| हीटर / इस्त्री | विद्युत → ऊष्मा |
| माइक्रोफ़ोन | ध्वनि → विद्युत |
| लाउडस्पीकर | विद्युत → ध्वनि |
16. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: अमीटर श्रेणी में, वोल्टमीटर समांतर में
अमीटर का प्रतिरोध कम — श्रेणी में; वोल्टमीटर का प्रतिरोध अधिक — समांतर में। उल्टा जोड़ा गया विकल्प सबसे आम जाल है। फ्यूज़ भी श्रेणी में लगता है।
Trap 2: मोटर बनाम जनित्र
मोटर = विद्युत से यांत्रिक (वाम-हस्त नियम); जनित्र = यांत्रिक से विद्युत (दक्षिण-हस्त नियम, फैराडे का प्रेरण)। "डायनेमो विद्युत को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है" — गलत।
Trap 3: फ्यूज़ — कम गलनांक, हीटर — उच्च गलनांक
| भाग | चाहिए | पदार्थ |
|---|---|---|
| फ्यूज़ | कम गलनांक | टिन-सीसा जैसी मिश्रधातु |
| हीटर तत्व | उच्च प्रतिरोधकता + उच्च गलनांक | नाइक्रोम |
| बल्ब तंतु | अत्यधिक उच्च गलनांक | टंगस्टन |
| संयोजी तार | कम प्रतिरोधकता | ताँबा / ऐलुमिनियम |
Trap 4: प्रतिरोध बनाम प्रतिरोधकता
तार की लंबाई या मोटाई बदलने से प्रतिरोध बदलता है, प्रतिरोधकता नहीं। प्रतिरोधकता केवल पदार्थ और ताप पर निर्भर है।
Trap 5: ताप बढ़ने पर — धातु बनाम अर्धचालक
धातु: प्रतिरोध बढ़ता है। अर्धचालक: प्रतिरोध घटता है (चालकता बढ़ती है)।
Trap 6: ट्रांसफॉर्मर और DC
ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर काम करता है। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर वोल्टता बढ़ाता है पर धारा घटाता है — ऊर्जा "बनाता" नहीं।
Trap 7: kWh शक्ति का नहीं, ऊर्जा का मात्रक है
kW = शक्ति; kWh = ऊर्जा (1 kWh = 3.6×10⁶ J)। "kWh विद्युत शक्ति का मात्रक है" — गलत।
Trap 8: अधिक वाट वाले बल्ब का प्रतिरोध कम
समान वोल्टता पर R = V²/P; इसलिए 100 W बल्ब का प्रतिरोध 40 W बल्ब से कम होता है। समांतर क्रम में अधिक वाट वाला बल्ब अधिक चमकता है।
Trap 9: पृथ्वी का भौगोलिक उत्तर = चुंबकीय दक्षिण
कंपास की सुई का N सिरा भौगोलिक उत्तर की ओर जाता है क्योंकि वहाँ पृथ्वी के चुंबक का दक्षिण ध्रुव है (विजातीय आकर्षण)।
Trap 10: प्रतिचुंबकीय बनाम अनुचुंबकीय
ताँबा, बिस्मथ, जल = प्रतिचुंबकीय (प्रतिकर्षित); ऐलुमिनियम, ऑक्सीजन = अनुचुंबकीय; लोहा, कोबाल्ट, निकेल = लौहचुंबकीय। "ताँबा चुंबक से प्रबल रूप से आकर्षित होता है" — गलत।
17. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)
| # | प्रश्न / संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | आवेश का SI मात्रक | कूलॉम (C) |
| 2 | इलेक्ट्रॉन का आवेश | लगभग −1.6×10⁻¹⁹ C |
| 3 | काँच को रेशम से रगड़ने पर काँच | धनावेशित |
| 4 | सजातीय आवेश | प्रतिकर्षित करते हैं |
| 5 | कूलॉम बल और दूरी | दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती |
| 6 | आवेश की उपस्थिति जाँचने का यंत्र | स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी |
| 7 | सबसे अच्छा धातु चालक | चाँदी |
| 8 | अधातु जो विद्युत चालक है | ग्रेफ़ाइट |
| 9 | प्रमुख अर्धचालक | सिलिकॉन, जर्मेनियम |
| 10 | धारा का SI मात्रक | ऐम्पियर (1 A = 1 C/s) |
| 11 | विभवांतर का मात्रक | वोल्ट (1 V = 1 J/C) |
| 12 | प्रतिरोध का मात्रक | ओम (Ω) |
| 13 | प्रतिरोधकता का मात्रक | ओम-मीटर (Ω·m) |
| 14 | ओम का नियम | V = IR (स्थिर ताप पर) |
| 15 | परंपरागत धारा की दिशा | इलेक्ट्रॉन-प्रवाह के विपरीत |
| 16 | R और लंबाई | R ∝ L |
| 17 | R और अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल | R ∝ 1/A |
| 18 | ताप बढ़ने पर धातु का प्रतिरोध | बढ़ता है |
| 19 | ताप बढ़ने पर अर्धचालक का प्रतिरोध | घटता है |
| 20 | श्रेणी क्रम का तुल्य प्रतिरोध | R₁ + R₂ + … |
| 21 | समांतर क्रम का तुल्य प्रतिरोध | 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + … |
| 22 | श्रेणी क्रम में क्या समान | धारा |
| 23 | समांतर क्रम में क्या समान | विभवांतर |
| 24 | घरेलू वायरिंग | समांतर क्रम |
| 25 | विद्युत शक्ति के सूत्र | P = VI = I²R = V²/R |
| 26 | 1 kWh | 3.6×10⁶ J = 1 यूनिट |
| 27 | 1 HP | लगभग 746 W |
| 28 | जूल का तापन नियम | H = I²Rt |
| 29 | फ्यूज़ तार | कम गलनांक मिश्रधातु; श्रेणी में |
| 30 | हीटर तत्व | नाइक्रोम |
| 31 | बल्ब का तंतु | टंगस्टन |
| 32 | बल्ब में भरी गैस | नाइट्रोजन / आर्गन |
| 33 | भारत में घरेलू AC आवृत्ति | 50 Hz |
| 34 | भारत में घरेलू वोल्टता (NCERT) | 220 V |
| 35 | अर्थ तार का रंग | हरा (नई परंपरा: हरा-पीला) |
| 36 | MCB का लाभ | स्वतः ट्रिप, रीसेट योग्य |
| 37 | धारा का चुंबकीय प्रभाव | ओर्स्टेड |
| 38 | विद्युतचुंबकीय प्रेरण | फैराडे |
| 39 | विद्युत चुंबक का क्रोड | नर्म लोहा |
| 40 | स्थायी चुंबक | स्टील / ऐल्निको |
| 41 | विद्युत मोटर | विद्युत → यांत्रिक; फ्लेमिंग वाम-हस्त |
| 42 | जनित्र / डायनेमो | यांत्रिक → विद्युत; फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त |
| 43 | DC मोटर में दिशा उलटने वाला भाग | विभक्त वलय (कम्यूटेटर) |
| 44 | ट्रांसफॉर्मर किस पर | केवल AC; अन्योन्य प्रेरण |
| 45 | उच्चायी ट्रांसफॉर्मर | Ns > Np; वोल्टता बढ़े, धारा घटे |
| 46 | भौगोलिक उत्तर के पास | पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिण ध्रुव |
| 47 | चुंबकीय ध्रुव पर नति कोण | 90° |
| 48 | लौहचुंबकीय पदार्थ | लोहा, कोबाल्ट, निकेल |
| 49 | प्राथमिक बनाम द्वितीयक सेल | रिचार्ज नहीं / रिचार्ज योग्य |
| 50 | अमीटर / वोल्टमीटर | श्रेणी में / समांतर में |
18. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
विद्युत-चुंबकत्व के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न है:
- सीधा तथ्य / मात्रक: "प्रतिरोधकता का SI मात्रक क्या है?" (ओम-मीटर) — "1 kWh कितने जूल के बराबर है?" (3.6×10⁶ J)
- उपकरण–सिद्धांत मिलान: "सूची-I: ट्रांसफॉर्मर, विद्युत मोटर, फ्यूज़, विद्युत घंटी — सूची-II: अन्योन्य प्रेरण, धारावाही कुंडली पर बल, धारा का ऊष्मीय प्रभाव, विद्युत चुंबक।"
- दैनिक जीवन का कारण: "बिजली के तार पर बैठी चिड़िया को झटका क्यों नहीं लगता?" — "घरेलू उपकरण समांतर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं?"
- सरल संख्यात्मक: "2000 W का गीज़र रोज़ 1 घंटा, 30 दिन चले, ₹6 प्रति यूनिट — बिल?" (60 kWh × 6 = ₹360) — "3 Ω और 6 Ω समांतर में — तुल्य प्रतिरोध?" (2 Ω)
- कथन-आधारित: "1. ट्रांसफॉर्मर DC पर काम करता है। 2. वोल्टमीटर परिपथ में समांतर क्रम में लगाया जाता है। कौन-सा सही है?" (केवल 2)
- ऊर्जा रूपांतरण: "डायनेमो किस ऊर्जा को किसमें बदलता है?" (यांत्रिक → विद्युत)
रणनीति: संख्यात्मक प्रश्नों में पहले वाट को किलोवाट में बदलें (÷ 1000) और फिर घंटों से गुणा करें। संयोजन वाले प्रश्नों में याद रखें — श्रेणी में "जोड़ो", समांतर में "व्युत्क्रम जोड़ो"; दो प्रतिरोधों के समांतर के लिए शॉर्टकट R = R₁R₂/(R₁ + R₂)।
19. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. मीटर की जगह: "अमीटर अड़कर रास्ते में (श्रेणी) — धारा उसी से होकर जाए; वोल्टमीटर वो दोनों सिरों के बीच (समांतर) — दो बिंदुओं का अंतर नापे।"
2. ओम का त्रिभुज: ऊपर V, नीचे I × R — जिसे ढूँढना हो उसे ढक दें: V = IR, I = V/R, R = V/I।
3. तीन पदार्थ: "फटाफट पिघले फ्यूज़ (कम गलनांक), नाइक्रोम नहीं जले (हीटर), टंगस्टन टिमटिमाए नहीं (बल्ब)।"
4. मोटर-जनित्र और हाथ: "Motor — Left (वाम); Generator — Right (दक्षिण)" — "ML-GR"।
5. खोजकर्ता: "ओर्स्टेड ने ओढ़ा चुंबक (धारा से चुंबक), फैराडे ने फिर धारा बनाई (चुंबक से धारा)।"
6. 1 यूनिट: "36 लाख जूल = एक यूनिट" — 3.6×10⁶ J।
7. चुंबकीय पदार्थ: "लो-को-नि = लौह" (लोहा, कोबाल्ट, निकेल); "बि-ता-ज = प्रति" (बिस्मथ, ताँबा, जल)।
20. कथन अभ्यास
ओम का नियम स्थिर ताप पर लागू होता है। — सही।
अमीटर को परिपथ में समांतर क्रम में जोड़ा जाता है। — गलत (अमीटर श्रेणी में; वोल्टमीटर समांतर में)।
तार की लंबाई दुगुनी करने पर उसकी प्रतिरोधकता दुगुनी हो जाती है। — गलत (प्रतिरोध दुगुना होता है; प्रतिरोधकता पदार्थ का गुण है, नहीं बदलती)।
धातुओं का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है। — सही।
घरेलू विद्युत परिपथ में उपकरण श्रेणी क्रम में जोड़े जाते हैं। — गलत (समांतर क्रम में)।
1 kWh = 3.6×10⁶ J होता है। — सही।
फ्यूज़ तार उच्च गलनांक वाले पदार्थ से बनाया जाता है। — गलत (कम गलनांक वाली मिश्रधातु से)।
विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन का बना होता है। — सही।
ट्रांसफॉर्मर दिष्ट धारा (DC) की वोल्टता बदल सकता है। — गलत (केवल प्रत्यावर्ती धारा पर काम करता है)।
विद्युत जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। — सही।
विद्युतचुंबकीय प्रेरण की खोज ओर्स्टेड ने की थी। — गलत (फैराडे ने; ओर्स्टेड ने धारा का चुंबकीय प्रभाव खोजा)।
पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर ध्रुव के पास उसका चुंबकीय दक्षिण ध्रुव है। — सही।
21. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- सजातीय आवेश प्रतिकर्षित, विजातीय आकर्षित; बल ∝ q₁q₂/r²; e ≈ 1.6×10⁻¹⁹ C
- चालक: चाँदी > ताँबा; ग्रेफ़ाइट अधातु चालक; अर्धचालक: Si, Ge
- I = Q/t (A); V = W/Q (V); R = V/I (Ω); ρ का मात्रक Ω·m
- ओम का नियम V = IR, स्थिर ताप पर
- R = ρL/A; ताप बढ़े — धातु का R बढ़े, अर्धचालक का घटे
- श्रेणी: R = R₁ + R₂, धारा समान; समांतर: 1/R = 1/R₁ + 1/R₂, वोल्टता समान
- घरेलू वायरिंग समांतर — हर उपकरण को 220 V, अलग स्विच
- P = VI = I²R = V²/R; 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6×10⁶ J; 1 HP ≈ 746 W
- H = I²Rt; फ्यूज़ — कम गलनांक, श्रेणी में, लाइव तार पर
- हीटर — नाइक्रोम; बल्ब — टंगस्टन (नाइट्रोजन/आर्गन भरी)
- भारत: AC 220 V (NCERT), 50 Hz; अर्थ तार हरा; MCB रीसेट योग्य
- ओर्स्टेड — धारा से चुंबक; फैराडे — चुंबक से धारा (प्रेरण)
- मोटर: विद्युत → यांत्रिक, वाम-हस्त; जनित्र: यांत्रिक → विद्युत, दक्षिण-हस्त
- ट्रांसफॉर्मर केवल AC; Vs/Vp = Ns/Np; उच्चायी में वोल्टता बढ़े, धारा घटे
- अमीटर श्रेणी (कम R), वोल्टमीटर समांतर (अधिक R); लौहचुंबकीय: Fe, Co, Ni
22. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 5 (श्रेणी-समांतर), खंड 6 (शक्ति व बिल गणना) और खंड 16 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। भौतिकी का पिछला भाग प्रकाश और ध्वनि भी दोहराएँ, और पूरे सामान्य विज्ञान को परीक्षा-स्तर पर परखने के लिए RRB NTPC CBT-1 2026 टेस्ट सीरीज़ या राजस्थान CET स्नातक फ़ाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
23. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
विद्युत और चुंबकत्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं — गतिमान आवेश (धारा) चुंबकीय क्षेत्र बनाता है (ओर्स्टेड) और बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा बनाता है (फैराडे)। इसी संबंध पर मोटर, जनित्र और ट्रांसफॉर्मर चलते हैं। परीक्षा की दृष्टि से मात्रक (A, V, Ω, Ω·m, W, kWh), ओम का नियम, श्रेणी-समांतर के सूत्र, बिल गणना, फ्यूज़-नाइक्रोम-टंगस्टन, AC 50 Hz और अमीटर-वोल्टमीटर का संयोजन पक्का कर लें। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं (तारों के रंग, 220/230 V), वहाँ विकल्पों के अनुसार NCERT वाला उत्तर चुनें।
V = IR | श्रेणी में जोड़ो, समांतर में व्युत्क्रम | P = VI, 1 kWh = 3.6×10⁶ J | फ्यूज़-कम गलनांक, हीटर-नाइक्रोम, बल्ब-टंगस्टन | ओर्स्टेड: धारा → चुंबक, फैराडे: चुंबक → धारा | ट्रांसफॉर्मर = केवल AC | अमीटर श्रेणी, वोल्टमीटर समांतर
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“विद्युत और चुंबकत्व — ओम का नियम, श्रेणी-समांतर, kWh, फ्यूज़, मोटर, ट्रांसफॉर्मर — SSC/रेलवे/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- विद्युत और चुंबकत्व — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- मात्रक, गति, बल, गुरुत्वाकर्षण व ऊर्जा — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- ऊष्मा, ताप व तापमान — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- प्रकाश और ध्वनि — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: SSC CGL 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
SSC CGL 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
स्थिर ताप पर किसी चालक में बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के समानुपाती होती है, अर्थात V = IR। यहाँ R चालक का प्रतिरोध है, जिसका मात्रक ओम (Ω) है।
विद्युत धारा का मात्रक ऐम्पियर (A), विभवांतर का वोल्ट (V) और प्रतिरोध का ओम (Ω) है। प्रतिरोधकता का मात्रक ओम-मीटर (Ω·m) है।
समांतर क्रम में हर उपकरण को पूरी आपूर्ति वोल्टता मिलती है, हर उपकरण का अपना स्विच हो सकता है और एक उपकरण खराब होने पर बाकी चलते रहते हैं। श्रेणी क्रम में एक के बंद होते ही पूरा परिपथ टूट जाता।
1 यूनिट = 1 किलोवाट-घंटा (kWh) = 1000 W × 3600 s = 3.6×10⁶ जूल। उदाहरण के लिए 100 W का बल्ब 10 घंटे जले तो 1 यूनिट खर्च होती है।
फ्यूज़ तार कम गलनांक वाली मिश्रधातु (जैसे टिन-सीसा) का बना होता है, ताकि अधिक धारा बहते ही पिघलकर परिपथ तोड़ दे। इसे लाइव तार पर श्रेणी क्रम में लगाया जाता है।
नाइक्रोम की प्रतिरोधकता और गलनांक उच्च हैं और यह गर्म होने पर आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होता, इसलिए हीटर में लगता है। टंगस्टन का गलनांक बहुत उच्च (लगभग 3400 °C) है, इसलिए बल्ब का तंतु तप्त होकर भी नहीं पिघलता।
NCERT के अनुसार भारत में घरों को 220 V, 50 Hz की प्रत्यावर्ती धारा (AC) मिलती है। भारतीय मानक में नाममात्र वोल्टता 230 V भी लिखी जाती है, पर आवृत्ति दोनों में 50 Hz ही है।
विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है और फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम पर आधारित है। जनित्र (डायनेमो) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है और फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण पर आधारित है।
ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण पर काम करता है, जिसके लिए प्राथमिक कुंडली में धारा और चुंबकीय फ्लक्स का लगातार बदलना आवश्यक है। DC की दिशा और मान स्थिर रहते हैं, इसलिए द्वितीयक कुंडली में वोल्टता प्रेरित नहीं होती।
अमीटर को पूरी धारा मापनी होती है, इसलिए वह धारा के रास्ते में श्रेणी में लगता है और उसका प्रतिरोध बहुत कम होता है। वोल्टमीटर दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापता है, इसलिए समांतर में लगता है और उसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: