ऊष्मा, ताप व तापमान — ताप पैमाने, असंगत प्रसार, विशिष्ट व गुप्त ऊष्मा, ऊष्मा संचरण — SSC/रेलवे/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, अग्निवीर व RSSB CET पाठ्यक्रम की सामान्य विज्ञान इकाई; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10) और SI मात्रक प्रणाली। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो ताप-अंतर के कारण अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर प्रवाहित होती है (SI मात्रक जूल; 1 कैलोरी ≈ 4.186 J), जबकि ताप वस्तु की गर्माहट की मात्रा है जिसका SI मात्रक केल्विन है। ताप के पैमानों का संबंध C/100 = (F − 32)/180 = (K − 273.15)/100 है; −40° पर सेल्सियस और फ़ारेनहाइट पाठ्यांक बराबर होते हैं और मानव शरीर का सामान्य ताप 37 °C = 98.6 °F ≈ 310 K है। जल का असंगत प्रसार 0 °C से 4 °C के बीच होता है — इस परास में गरम करने पर जल सिकुड़ता है और 4 °C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है, इसलिए ठंडे देशों में झीलें ऊपर से जमती हैं और नीचे जलीय जीव जीवित रहते हैं। जल की विशिष्ट ऊष्मा बहुत अधिक (1 cal/g·°C ≈ 4186 J/kg·K) है, इसी कारण समुद्र तटीय जलवायु सम रहती है। बर्फ़ के गलन की गुप्त ऊष्मा 80 cal/g और जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 540 cal/g है — इसीलिए 100 °C की भाप 100 °C के जल से अधिक गंभीर जलन करती है। दाब बढ़ने पर जल का क्वथनांक बढ़ता है (प्रेशर कुकर) और दाब घटने पर घटता है (पहाड़ों पर खाना देर से पकता है)। ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ हैं — चालन (ठोसों में), संवहन (द्रव व गैसों में) और विकिरण (बिना माध्यम, निर्वात में भी); थर्मस फ्लास्क तीनों को रोकता है।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| ऊष्मा का SI मात्रक | जूल (J); प्रचलित मात्रक कैलोरी |
| ताप का SI मात्रक | केल्विन (K) — SI मूल मात्रक |
| 1 कैलोरी | ≈ 4.186 J (लगभग 4.2 J) |
| सेल्सियस ↔ फ़ारेनहाइट | F = (9/5)C + 32 |
| सेल्सियस ↔ केल्विन | K = C + 273.15 (सामान्यतः 273 लेते हैं) |
| C और F पाठ्यांक बराबर | −40° |
| शरीर का सामान्य ताप | 37 °C = 98.6 °F ≈ 310 K |
| परम शून्य | 0 K = −273.15 °C |
| जल का अधिकतम घनत्व | 4 °C पर |
| जल की विशिष्ट ऊष्मा | 1 cal/g·°C ≈ 4186 J/kg·K |
| बर्फ़ के गलन की गुप्त ऊष्मा | 80 cal/g (≈ 3.34×10⁵ J/kg) |
| जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा | 540 cal/g (≈ 2.26×10⁶ J/kg) |
| क्लिनिकल थर्मामीटर का परास | 35 °C से 42 °C |
| बहुत उच्च ताप (भट्ठी) मापक | पाइरोमीटर |
| निर्वात में ऊष्मा संचरण | केवल विकिरण |
| समुद्री समीर / स्थलीय समीर | संवहन — दिन में समुद्र से स्थल की ओर / रात में स्थल से समुद्र की ओर |
| आपेक्षिक आर्द्रता मापक | हाइग्रोमीटर |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
ऊष्मा और ताप सामान्य विज्ञान का वह अध्याय है जिसमें पैमानों का रूपांतरण, दैनिक जीवन के "क्यों" वाले प्रश्न और सीधे तथ्य — तीनों भरपूर मिलते हैं। मात्रक व ऊर्जा की मूल समझ के लिए पहले मात्रक, गति, बल व ऊर्जा वाला नोट देखें; पदार्थ की अवस्थाओं की कणीय व्याख्या पदार्थ, परमाणु व आवर्त सारणी में है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- SSC CGL / CHSL / MTS / GD — ताप पैमाने, थर्मामीटर, ऊष्मा संचरण के उदाहरण, जल का असंगत प्रसार
- RRB NTPC — C–F–K रूपांतरण, गुप्त ऊष्मा, क्वथनांक पर दाब का प्रभाव
- अग्निवीर (थल/नौसेना/वायुसेना) — विशिष्ट ऊष्मा व गुप्त ऊष्मा के सरल संख्यात्मक, ऊष्मागतिकी के मूल कथन
- राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) / पटवारी — एक-पंक्ति तथ्य, मटके का पानी, प्रेशर कुकर, थर्मस जैसे उदाहरण
प्रश्न कैसे आते हैं?
- रूपांतरण — "98.6 °F = ? °C", "किस ताप पर C = F?"
- यंत्र/पदार्थ — "थर्मामीटर में पारा ही क्यों?", "पाइरोमीटर किसलिए?"
- दैनिक जीवन — "मटके का पानी ठंडा क्यों?", "पहाड़ों पर खाना देर से क्यों पकता है?"
- सरल संख्यात्मक — Q = mcΔT, Q = mL
- कथन-आधारित — असंगत प्रसार, ऊष्मा संचरण, ऊष्मागतिकी के नियम
3. ऊष्मा बनाम ताप
| आधार | ऊष्मा (Heat) | ताप (Temperature) |
|---|---|---|
| अर्थ | ताप-अंतर के कारण स्थानांतरित होने वाली ऊर्जा | वस्तु की गर्माहट या ठंडक की मात्रा; ऊष्मा प्रवाह की दिशा तय करता है |
| कणीय दृष्टि | अणुओं की कुल आंतरिक ऊर्जा से संबंधित | अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप |
| SI मात्रक | जूल (J) | केल्विन (K) |
| अन्य मात्रक | कैलोरी, किलोकैलोरी | °C, °F |
| मापक | कैलोरीमीटर (ऊष्मामापी) | थर्मामीटर (तापमापी) |
| द्रव्यमान पर निर्भरता | निर्भर — एक बाल्टी गुनगुने पानी में एक कप उबलते पानी से अधिक ऊष्मा हो सकती है | निर्भर नहीं |
- 1 कैलोरी = 1 ग्राम जल का ताप 1 °C (14.5 °C से 15.5 °C) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा ≈ 4.186 J।
- भोजन की ऊर्जा में लिखी "कैलोरी" (Calorie, बड़ा C) वास्तव में किलोकैलोरी = 1000 cal है।
- ऊष्मा सदैव अधिक ताप से कम ताप की ओर बहती है (अधिक ऊष्मा से कम ऊष्मा की ओर नहीं) और ताप बराबर होने पर रुक जाती है — इसे तापीय साम्य कहते हैं।
4. ताप के पैमाने
| पैमाना | हिमांक (जल) | क्वथनांक (जल) | भाग | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| सेल्सियस (°C) | 0 °C | 100 °C | 100 | एंडर्स सेल्सियस; पहले "सेंटीग्रेड" |
| फ़ारेनहाइट (°F) | 32 °F | 212 °F | 180 | डेनियल गेब्रियल फ़ारेनहाइट |
| केल्विन (K) | 273.15 K | 373.15 K | 100 | लॉर्ड केल्विन; परम (Absolute) पैमाना; ऋणात्मक मान नहीं; "डिग्री" नहीं लगाते |
| रोमर (°R / Réaumur) | 0 | 80 | 80 | अब प्रचलन में नहीं |
4.1 रूपांतरण सूत्र
C/100 = (F − 32)/180 = (K − 273.15)/100 = R/80, अर्थात् C/5 = (F − 32)/9।
- F = (9/5) × C + 32
- C = (5/9) × (F − 32)
- K = C + 273.15 (परीक्षा में प्रायः K = C + 273)
- ताप में 1 °C का परिवर्तन = 1 K का परिवर्तन = 1.8 °F का परिवर्तन।
4.2 महत्वपूर्ण ताप एक साथ
| स्थिति | °C | °F | K |
|---|---|---|---|
| परम शून्य | −273.15 | −459.67 | 0 |
| C और F बराबर | −40 | −40 | 233.15 |
| जल का हिमांक | 0 | 32 | 273.15 |
| जल का अधिकतम घनत्व | 4 | 39.2 | 277.15 |
| कमरे का सामान्य ताप (लगभग) | 27 | 80.6 | 300 |
| मानव शरीर का सामान्य ताप | 37 | 98.6 | 310.15 (≈ 310) |
| जल का क्वथनांक (1 atm) | 100 | 212 | 373.15 |
नोट: सेल्सियस और केल्विन के पाठ्यांक कभी बराबर नहीं होते (दोनों में सदा 273.15 का अंतर)। फ़ारेनहाइट और केल्विन लगभग 574.6 पर बराबर होते हैं।
4.3 हल किए गए उदाहरण
- 50 °C = ? °F → F = (9/5) × 50 + 32 = 90 + 32 = 122 °F।
- 104 °F = ? °C → C = (5/9) × (104 − 32) = (5/9) × 72 = 40 °C।
- 300 K = ? °C → 300 − 273 = 27 °C (सटीक 26.85 °C)।
- किसी वस्तु का ताप 10 °C बढ़ा, तो फ़ारेनहाइट में वृद्धि = 10 × 1.8 = 18 °F (यहाँ 32 नहीं जोड़ते, क्योंकि यह ताप का अंतर है)।
5. तापमापी (Thermometer) के प्रकार
| तापमापी | सिद्धांत / विशेषता | उपयोग / परास |
|---|---|---|
| क्लिनिकल (डॉक्टरी) थर्मामीटर | पारे का प्रसार; बल्ब के पास संकुचन (Kink) जो पारे को अपने-आप नीचे लौटने नहीं देता | शरीर का ताप; 35 °C – 42 °C (94 °F – 108 °F) |
| प्रयोगशाला थर्मामीटर | पारे का प्रसार; कोई संकुचन नहीं | सामान्यतः −10 °C – 110 °C |
| एल्कोहॉल थर्मामीटर | एल्कोहॉल बहुत कम ताप पर जमता है | अत्यंत ठंडे क्षेत्रों का निम्न ताप |
| डिजिटल थर्मामीटर | इलेक्ट्रॉनिक संवेदक; पारा नहीं | शरीर का ताप — सुरक्षित विकल्प |
| अधिकतम-न्यूनतम (सिक्स) थर्मामीटर | दिन का अधिकतम व न्यूनतम ताप एक साथ दर्ज करता है | मौसम विज्ञान |
| प्लैटिनम प्रतिरोध थर्मामीटर | ताप के साथ धातु के प्रतिरोध में परिवर्तन | विस्तृत परास में सटीक मापन |
| थर्मोकपल (तापवैद्युत युग्म) | दो भिन्न धातुओं की संधियों के ताप-अंतर से विद्युत वाहक बल (सीबेक प्रभाव) | उच्च ताप; औद्योगिक मापन |
| गैस थर्मामीटर (स्थिर आयतन) | ताप के साथ गैस के दाब में परिवर्तन | मानक / अंशांकन हेतु, बहुत सटीक |
| पाइरोमीटर (Pyrometer) | गरम वस्तु से निकले विकिरण से ताप; वस्तु को छूने की आवश्यकता नहीं | भट्ठी, पिघली धातु, सूर्य जैसे बहुत उच्च ताप |
5.1 थर्मामीटर में पारा ही क्यों?
- पारा चमकीला और अपारदर्शी है — आसानी से दिखाई देता है।
- यह काँच को नहीं भिगोता (काँच से चिपकता नहीं)।
- इसका प्रसार लगभग एकसमान है और यह ऊष्मा का अच्छा चालक है, इसलिए शीघ्र ताप ग्रहण करता है।
- यह विस्तृत परास में द्रव रहता है — लगभग −39 °C पर जमता और लगभग 357 °C पर उबलता है।
- जल क्यों नहीं: जल पारदर्शी है, काँच को भिगोता है, इसका परास छोटा (0–100 °C) है और 0–4 °C में असंगत प्रसार दिखाता है।
- सावधानी: पारा विषैला है; टूटे थर्मामीटर को सावधानी से निपटाना चाहिए, इसलिए अब डिजिटल थर्मामीटर का चलन बढ़ा है।
6. ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion)
गरम करने पर अधिकांश पदार्थ फैलते और ठंडा करने पर सिकुड़ते हैं। समान ताप वृद्धि पर गैसों का प्रसार सबसे अधिक, फिर द्रवों का, और ठोसों का सबसे कम होता है।
| प्रसार | गुणांक | रेखीय गुणांक α से संबंध |
|---|---|---|
| रेखीय (लंबाई में) | α | α |
| क्षेत्रीय (क्षेत्रफल में) | β | β = 2α |
| आयतन (आयतन में) | γ | γ = 3α; अतः α : β : γ = 1 : 2 : 3 |
6.1 दैनिक जीवन में ऊष्मीय प्रसार
| घटना / व्यवस्था | कारण |
|---|---|
| रेल पटरियों के जोड़ों पर अंतराल | गर्मियों में पटरियाँ फैलें तो मुड़ें नहीं |
| पुलों के एक सिरे को रोलरों पर रखना | प्रसार-संकुचन के लिए जगह |
| गर्मियों में बिजली/टेलीफ़ोन के तार ढीले, सर्दियों में तने हुए | गर्मी में प्रसार, सर्दी में संकुचन |
| कसा हुआ धातु का ढक्कन गरम पानी डालने पर खुल जाना | धातु काँच से अधिक फैलती है |
| मोटे काँच के गिलास में गरम पानी डालने पर दरार | भीतरी परत फैलती है, बाहरी नहीं (काँच ऊष्मा का कुचालक) |
| पाइरेक्स काँच के बर्तन | बहुत कम प्रसार — गरम करने पर नहीं टूटते |
| बैलगाड़ी के लकड़ी के पहिए पर लोहे की हाल गरम करके चढ़ाना | ठंडी होकर सिकुड़ने पर कसकर बैठ जाती है |
| प्रबलित कंक्रीट (RCC) में लोहे की छड़ें | लोहे (स्टील) और कंक्रीट का प्रसार गुणांक लगभग समान |
| गर्मियों में लोलक घड़ी का सुस्त (धीमा) होना | लोलक की लंबाई बढ़ती है → आवर्तकाल बढ़ता है; सर्दियों में घड़ी तेज़ |
| लोलक व मापक-पट्टी में इन्वार (Invar) धातु | बहुत कम प्रसार गुणांक |
| द्विधात्विक पट्टी (Bimetallic strip) — थर्मोस्टैट, विद्युत इस्त्री, अग्नि-अलार्म | दो धातुओं के भिन्न प्रसार से पट्टी मुड़ती है; अधिक प्रसार वाली धातु बाहर (उत्तल) की ओर रहती है |
6.2 जल का असंगत प्रसार (Anomalous Expansion of Water)
- सामान्यतः द्रव गरम करने पर फैलते हैं, पर जल को 0 °C से 4 °C तक गरम करने पर उसका आयतन घटता है; 4 °C के बाद सामान्य रूप से बढ़ता है।
- अतः 4 °C पर जल का आयतन न्यूनतम और घनत्व अधिकतम (≈ 1000 kg/m³ = 1 g/cm³) होता है।
- जमने पर जल का आयतन लगभग 9% बढ़ जाता है; बर्फ़ का घनत्व (≈ 0.92 g/cm³) जल से कम है, इसलिए बर्फ़ जल पर तैरती है।
| परिणाम | व्याख्या |
|---|---|
| ठंडे देशों में झीलें ऊपर से जमती हैं | सतह का जल ठंडा होकर 4 °C तक नीचे जाता है; उससे ठंडा जल हल्का होकर ऊपर रहता है और जमता है |
| जलीय जीव जीवित रहते हैं | नीचे लगभग 4 °C का जल बना रहता है; ऊपर की बर्फ़ (कुचालक) ऊष्मा-ह्रास रोकती है |
| सर्दियों में जल के पाइप फट जाना | जमने पर आयतन बढ़ता है |
| चट्टानों का टूटना (अपक्षय) | दरारों में भरा पानी जमकर फैलता है |
| काँच की भरी बोतल फ्रीज़र में फटना | जमने पर जल का आयतन बढ़ना |
7. विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat)
किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान (1 kg या 1 g) का ताप 1 °C (या 1 K) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा उसकी विशिष्ट ऊष्मा (c) है। ऊष्मा का सूत्र: Q = m × c × ΔT। SI मात्रक J/kg·K। पूरी वस्तु का ताप 1 °C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊष्मा धारिता = m × c (मात्रक J/K) कहलाती है।
| पदार्थ | विशिष्ट ऊष्मा (लगभग, J/kg·K) | cal/g·°C (लगभग) |
|---|---|---|
| जल | 4186 (≈ 4200) | 1.0 |
| बर्फ़ | 2100 | 0.5 |
| एल्युमिनियम | 900 | 0.21 |
| लोहा | 450 | 0.11 |
| ताँबा | 385 | 0.09 |
| पारा | 140 | 0.033 |
| सीसा | 130 | 0.031 |
7.1 जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा के प्रभाव
- तटीय क्षेत्रों की सम जलवायु: समुद्र दिन में धीरे गरम और रात में धीरे ठंडा होता है।
- समुद्री व स्थलीय समीर: स्थल जल्दी गरम-ठंडा होता है, समुद्र धीरे — इसी ताप-अंतर से संवहन धाराएँ बनती हैं।
- वाहनों के रेडिएटर में शीतलक के रूप में जल — कम ताप वृद्धि में अधिक ऊष्मा सोख लेता है।
- गरम पानी की बोतल से सिकाई — जल देर तक ऊष्मा देता रहता है।
- पाले से फ़सल की रक्षा: ठंडी रातों में खेतों की सिंचाई की जाती है, क्योंकि जल धीरे ठंडा होता है।
- रेगिस्तान की रेत (कम विशिष्ट ऊष्मा) दिन में बहुत गरम और रात में बहुत ठंडी हो जाती है।
उदाहरण: 2 kg जल का ताप 20 °C से 70 °C करने के लिए (c = 4200 J/kg·°C) — Q = 2 × 4200 × 50 = 4,20,000 J = 420 kJ।
8. गुप्त ऊष्मा (Latent Heat)
अवस्था परिवर्तन के दौरान ताप स्थिर रहता है; इस समय दी गई ऊष्मा अणुओं के बीच के आकर्षण बल को तोड़ने में लगती है और थर्मामीटर में दिखती नहीं — इसलिए इसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं। सूत्र: Q = m × L।
| गुप्त ऊष्मा | परिभाषा | जल/बर्फ़ के लिए मान |
|---|---|---|
| गलन की गुप्त ऊष्मा (Fusion) | गलनांक पर एकांक द्रव्यमान ठोस को उसी ताप के द्रव में बदलने हेतु ऊष्मा | 80 cal/g; ≈ 3.34×10⁵ J/kg (1 cal = 4.2 J लेने पर ≈ 336 J/g) |
| वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Vaporisation) | क्वथनांक पर एकांक द्रव्यमान द्रव को उसी ताप की वाष्प में बदलने हेतु ऊष्मा | 540 cal/g; ≈ 2.26×10⁶ J/kg (≈ 2260 J/g) |
- भाप से अधिक जलन: 100 °C की भाप त्वचा पर संघनित होते समय प्रति ग्राम 540 cal अतिरिक्त ऊष्मा देती है, इसलिए 100 °C के उबलते पानी से अधिक गंभीर जलन करती है।
- 0 °C की बर्फ़ 0 °C के जल से अधिक ठंडक देती है, क्योंकि पिघलने में वह प्रति ग्राम 80 cal ऊष्मा अतिरिक्त सोखती है।
- बर्फ़ पिघलते समय और जल उबलते समय (दाब स्थिर रहने पर) ताप नहीं बदलता।
- संघनन और हिमीकरण में यही गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है; इसके उलट बर्फ़ पिघलते समय परिवेश से ऊष्मा लेती है, इसलिए बर्फ़ पिघलने के दिनों में अधिक ठंड लगती है।
हल किए गए उदाहरण:
- 0 °C की 10 g बर्फ़ को 0 °C के जल में बदलने के लिए ऊष्मा = 10 × 80 = 800 cal।
- 100 °C के 5 g जल को 100 °C की भाप बनाने के लिए = 5 × 540 = 2700 cal।
- 0 °C की 10 g बर्फ़ को 100 °C के जल में बदलने के लिए = 800 (पिघलना) + 10 × 1 × 100 (गरम करना) = 1800 cal।
9. अवस्था परिवर्तन
| प्रक्रम | परिवर्तन | ऊष्मा |
|---|---|---|
| गलन (Melting) | ठोस → द्रव | अवशोषित |
| हिमीकरण / जमना (Freezing) | द्रव → ठोस | मुक्त |
| वाष्पन (Vaporisation) | द्रव → गैस | अवशोषित |
| संघनन (Condensation) | गैस → द्रव | मुक्त |
| ऊर्ध्वपातन (Sublimation) | ठोस → सीधे गैस | अवशोषित |
| निक्षेपण (Deposition) | गैस → सीधे ठोस | मुक्त |
9.1 गलनांक और क्वथनांक पर दाब व अशुद्धि का प्रभाव
| कारक | गलनांक पर प्रभाव | क्वथनांक पर प्रभाव |
|---|---|---|
| दाब बढ़ाना | बर्फ़ (जमने पर फैलने वाले पदार्थ) का गलनांक घटता; मोम जैसे पदार्थों का बढ़ता | बढ़ता है |
| दाब घटाना | बर्फ़ का गलनांक थोड़ा बढ़ता | घटता है |
| अशुद्धि (जैसे नमक) मिलाना | हिमांक घटता है | क्वथनांक बढ़ता है |
- प्रेशर कुकर: भीतर दाब अधिक होने से जल लगभग 120 °C पर उबलता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
- पहाड़ों पर खाना देर से पकना: ऊँचाई पर वायुदाब कम, अतः जल 100 °C से कम ताप पर उबल जाता है (माउंट एवरेस्ट पर लगभग 70 °C); भोजन को पकने के लिए पर्याप्त ताप नहीं मिलता।
- पुनर्हिमायन (Regelation): दाब से बर्फ़ पिघलती है और दाब हटते ही फिर जम जाती है — बर्फ़ पर स्केटिंग, बर्फ़ के गोले बनाना, दो बर्फ़ के टुकड़ों को दबाने पर जुड़ जाना।
- हिम-मिश्रण (Freezing mixture): बर्फ़ में नमक मिलाने से मिश्रण का ताप 0 °C से काफ़ी नीचे (लगभग −20 °C तक) चला जाता है — पुराने ढंग से आइसक्रीम जमाने में उपयोग; ठंडे देशों में सड़कों पर नमक डालकर बर्फ़ पिघलाना।
10. वाष्पीकरण, क्वथन और ऊर्ध्वपातन
| आधार | वाष्पीकरण (Evaporation) | क्वथन (Boiling) |
|---|---|---|
| ताप | प्रत्येक ताप पर (क्वथनांक से नीचे भी) | एक निश्चित ताप (क्वथनांक) पर |
| कहाँ से | केवल सतह से | पूरे द्रव से, बुलबुलों के साथ |
| गति | धीमी, शांत प्रक्रिया | तीव्र |
| प्रभाव | शीतलन उत्पन्न करता है | ताप स्थिर रहता है (बाहर से ऊष्मा देनी पड़ती है) |
10.1 वाष्पीकरण की दर किन बातों पर निर्भर
| कारक | बढ़ने पर वाष्पीकरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| सतह का क्षेत्रफल | बढ़ता है | कपड़े फैलाकर सुखाना; चाय तश्तरी में जल्दी ठंडी |
| ताप | बढ़ता है | धूप में कपड़े जल्दी सूखते हैं |
| आर्द्रता | घटता है | बरसात में कपड़े देर से सूखते हैं |
| पवन की चाल | बढ़ता है | हवा वाले दिन कपड़े जल्दी सूखते हैं |
10.2 वाष्पीकरण से शीतलन — दैनिक उदाहरण
- मिट्टी के घड़े (मटके) का पानी ठंडा रहता है — छिद्रों से रिसता पानी वाष्पित होकर ऊष्मा लेता है।
- पसीना वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करता है; पंखे की हवा से यह वाष्पीकरण तेज़ होता है (पंखा हवा को ठंडा नहीं करता)।
- हथेली पर एसीटोन, स्प्रिट या पेट्रोल डालने पर ठंडक लगती है।
- गर्मियों में सूती कपड़े पहनना — सूती कपड़ा पसीना सोखकर वाष्पन के लिए फैला देता है।
- मरुस्थलीय कूलर शुष्क मौसम में अच्छा काम करता है, पर उमस (अधिक आर्द्रता) में कम।
- तेज़ बुखार में माथे पर गीली पट्टी रखना।
10.3 ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
कुछ ठोस गरम करने पर द्रव बने बिना सीधे वाष्प में बदल जाते हैं। उदाहरण: कपूर, नैफ़्थलीन (गोलियाँ), अमोनियम क्लोराइड, आयोडीन और ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (शुष्क बर्फ़ / Dry ice)। शुष्क बर्फ़ सामान्य वायुमंडलीय दाब पर लगभग −78 °C पर सीधे गैस बन जाती है, इसलिए इसका उपयोग शीतलक के रूप में होता है।
10.4 ओस, कोहरा और पाला
- ओस: रात में ठंडी सतहों (घास, पत्तियाँ) पर वायु की जलवाष्प का संघनन।
- कोहरा: धरातल के निकट वायु में जलवाष्प का सूक्ष्म बूँदों में संघनन।
- पाला (Frost): जब ओसांक 0 °C से नीचे हो, तो जलवाष्प सीधे बर्फ़ के कणों के रूप में जमती है।
11. ऊष्मा संचरण (Transmission of Heat)
| आधार | चालन (Conduction) | संवहन (Convection) | विकिरण (Radiation) |
|---|---|---|---|
| माध्यम | आवश्यक — मुख्यतः ठोस | आवश्यक — द्रव और गैसें | आवश्यक नहीं; निर्वात में भी |
| विधि | कण अपने स्थान पर कंपन करते हुए ऊर्जा आगे देते हैं | गरम कण स्वयं ऊपर उठते हैं, ठंडे नीचे आते हैं (धाराएँ) | विद्युत-चुंबकीय तरंगों (मुख्यतः अवरक्त) द्वारा |
| चाल | धीमी | धीमी | सबसे तेज़ — प्रकाश की चाल से |
| उदाहरण | गरम चाय में रखे चम्मच का हत्था गरम होना; तवे का गरम होना | समुद्री/स्थलीय समीर; कमरे का हीटर; बर्तन में जल का गरम होना | सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक; अलाव के सामने गर्माहट |
11.1 चालक और कुचालक
- अच्छे चालक: धातुएँ — चाँदी (धातुओं में सर्वश्रेष्ठ), ताँबा, एल्युमिनियम, लोहा; पारा (द्रव धातु)।
- कुचालक (ऊष्मारोधी): लकड़ी, प्लास्टिक, काँच, ऊन, वायु, जल, बर्फ़, थर्मोकोल।
- खाना पकाने के बर्तन धातु के, पर हत्थे लकड़ी/प्लास्टिक के होते हैं।
- सर्दियों में एक ही ताप पर धातु की वस्तु लकड़ी से अधिक ठंडी लगती है, क्योंकि धातु हाथ से ऊष्मा जल्दी चालित कर लेती है।
11.2 दैनिक जीवन के उदाहरण — कौन-सी विधि?
| घटना | संबंधित तथ्य |
|---|---|
| ऊनी कपड़े गरम रखते हैं | रेशों के बीच फँसी वायु (कुचालक) शरीर की ऊष्मा बाहर नहीं जाने देती |
| एक मोटे कंबल की तुलना में दो पतले कंबल अधिक गरम | दोनों के बीच वायु की परत |
| नई भरी रज़ाई पुरानी से अधिक गरम | रुई में अधिक वायु फँसी रहती है |
| सर्दियों में पक्षी पंख फुला लेते हैं | पंखों के बीच वायु की परत |
| बर्फ़ को बुरादे या टाट में लपेटना | बुरादा/टाट ऊष्मा का कुचालक |
| इग्लू के भीतर अपेक्षाकृत गर्माहट | बर्फ़ ऊष्मा की कुचालक है |
| दिन में समुद्री समीर (समुद्र → स्थल) | स्थल जल्दी गरम → उसके ऊपर की वायु ऊपर उठती है → समुद्र की ठंडी वायु स्थल की ओर (संवहन) |
| रात में स्थलीय समीर (स्थल → समुद्र) | स्थल जल्दी ठंडा → समुद्र के ऊपर की वायु अपेक्षाकृत गरम होकर ऊपर उठती है |
| AC कमरे में ऊपर, हीटर नीचे लगाना | ठंडी वायु नीचे आती है, गरम ऊपर उठती है (संवहन) |
| रोशनदान छत के पास | गरम दूषित वायु ऊपर उठकर बाहर निकलती है |
| गर्मियों में सफ़ेद/हल्के रंग के कपड़े | कम विकिरण अवशोषण |
| सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े | अधिक विकिरण अवशोषण |
| बादलों वाली रात अपेक्षाकृत गरम | बादल पृथ्वी से निकलने वाले ऊष्मा-विकिरण को वापस लौटाते हैं |
| ग्रीनहाउस प्रभाव | काँच/गैसें सूर्य का प्रकाश अंदर आने देती हैं, पर पृथ्वी से निकले अवरक्त विकिरण को रोकती हैं |
11.3 थर्मस फ्लास्क (Dewar flask)
| भाग | कौन-सा संचरण रोकता है |
|---|---|
| दोहरी दीवार के बीच निर्वात | चालन और संवहन |
| दीवारों की चाँदी-जैसी चमकीली परत | विकिरण (परावर्तन द्वारा) |
| कुचालक ढक्कन (कॉर्क/प्लास्टिक) | चालन व संवहन (मुँह से) |
| बाहरी खोल और कुचालक आधार | सुरक्षा, आधार से चालन कम |
थर्मस गरम वस्तु को गरम और ठंडी वस्तु को ठंडा — दोनों रखता है। इसका आविष्कार जेम्स ड्यूआर ने किया था, इसलिए इसे ड्यूआर फ्लास्क भी कहते हैं।
12. कृष्णिका और विकिरण के नियम (गुणात्मक)
- आदर्श कृष्णिका (Perfect Black Body): वह वस्तु जो अपने ऊपर पड़ने वाले सभी तरंगदैर्ध्य के विकिरण को पूर्णतः अवशोषित कर ले; गरम करने पर यही सर्वश्रेष्ठ उत्सर्जक भी होती है। व्यवहार में फ़ैरी की कृष्णिका इसका निकटतम उदाहरण है।
- किरखॉफ़ का नियम: अच्छे अवशोषक अच्छे उत्सर्जक होते हैं; चमकीली/सफ़ेद सतहें कमज़ोर अवशोषक और कमज़ोर उत्सर्जक होती हैं।
- स्टीफ़न का नियम: कृष्णिका द्वारा प्रति एकांक क्षेत्रफल उत्सर्जित ऊर्जा उसके परम ताप की चौथी घात (T⁴) के समानुपाती होती है।
- वीन का विस्थापन नियम: ताप बढ़ने पर अधिकतम उत्सर्जन वाली तरंगदैर्ध्य घटती है (λmax × T = नियत) — इसीलिए गरम किया लोहा पहले लाल, फिर पीला और अधिक ताप पर सफ़ेद-सा चमकता है।
- खाना पकाने के बर्तनों का निचला भाग काला रखने से वे अधिक विकिरण अवशोषित करते हैं; सौर कुकर का भीतरी भाग काला होता है।
13. न्यूटन का शीतलन नियम (गुणात्मक)
किसी गरम वस्तु के ठंडे होने की दर, वस्तु और उसके परिवेश के ताप-अंतर के समानुपाती होती है (ताप-अंतर बहुत अधिक न हो तो)।
- गरम चाय शुरू में तेज़ी से ठंडी होती है और परिवेश के ताप के निकट पहुँचने पर धीरे।
- उसी कमरे में जल को 80 °C से 70 °C तक ठंडा होने में, 60 °C से 50 °C तक ठंडा होने की तुलना में कम समय लगता है।
- ठंडा होने की दर वस्तु की सतह के क्षेत्रफल और सतह की प्रकृति पर भी निर्भर करती है — चाय तश्तरी में जल्दी ठंडी होती है।
14. ऊष्मागतिकी के नियम (संक्षेप में)
| नियम | सरल कथन | परीक्षा-बिंदु |
|---|---|---|
| शून्यवाँ नियम | यदि A और B दोनों C के साथ तापीय साम्य में हों, तो A और B भी परस्पर तापीय साम्य में होंगे | ताप की अवधारणा और थर्मामीटर का आधार |
| प्रथम नियम | दी गई ऊष्मा = आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि + किया गया कार्य (ΔQ = ΔU + ΔW) | ऊर्जा संरक्षण का ही रूप; बिना ऊर्जा दिए लगातार कार्य करने वाली मशीन असंभव |
| द्वितीय नियम | कोई ऊष्मा इंजन ली गई पूरी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता; ऊष्मा अपने-आप ठंडी वस्तु से गरम वस्तु की ओर नहीं बहती | 100% दक्षता असंभव; रेफ़्रिजरेटर को बाहरी कार्य (बिजली) चाहिए; एंट्रॉपी की अवधारणा |
| तृतीय नियम | परम शून्य (0 K) ताप को सीमित चरणों में प्राप्त नहीं किया जा सकता | 0 K तक पहुँचना असंभव |
- आदर्श (कार्नो) इंजन की दक्षता = 1 − T₂/T₁ (T₁ स्रोत का, T₂ सिंक का परम ताप, केल्विन में)। T₂ = 0 K संभव न होने से दक्षता कभी 100% नहीं हो सकती।
- समतापीय प्रक्रम: ताप स्थिर रहता है। रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रम: निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं — गैस को अचानक दबाने पर वह गरम होती है (साइकिल पंप का गरम होना), अचानक फैलने पर ठंडी (टायर से निकलती हवा ठंडी लगती है)।
- रेफ़्रिजरेटर: बाहरी कार्य की सहायता से भीतर की ऊष्मा बाहर फेंकता है; इसलिए पीछे की जाली गरम रहती है। बंद कमरे में फ्रिज का दरवाज़ा खुला छोड़ने से कमरा ठंडा नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे थोड़ा गरम होता है।
15. आर्द्रता (Humidity)
| पद | अर्थ |
|---|---|
| निरपेक्ष आर्द्रता | वायु के एकांक आयतन में उपस्थित जलवाष्प का द्रव्यमान (g/m³) |
| आपेक्षिक आर्द्रता (RH) | (वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा ÷ उसी ताप पर वायु को संतृप्त करने के लिए आवश्यक मात्रा) × 100% |
| संतृप्त वायु | RH = 100%; और जलवाष्प नहीं समा सकती |
| ओसांक (Dew point) | वह ताप जिस तक ठंडा करने पर वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है और संघनन शुरू होता है |
| मापक यंत्र | हाइग्रोमीटर (जैसे शुष्क-आर्द्र बल्ब हाइग्रोमीटर) |
- उतनी ही जलवाष्प रहने पर ताप घटने से आपेक्षिक आर्द्रता बढ़ती है; इसलिए सुबह RH अधिक और दोपहर में कम रहती है।
- उमस भरे मौसम (RH अधिक) में पसीना वाष्पित नहीं होता, इसलिए बेचैनी होती है।
- शुष्क-आर्द्र बल्ब हाइग्रोमीटर में दोनों पाठ्यांकों का अंतर जितना अधिक, वायु उतनी शुष्क (RH कम)।
16. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: ऊष्मा बनाम ताप
ऊष्मा ऊर्जा है (जूल), ताप उसकी "तीव्रता" (केल्विन)। ऊष्मा अधिक ताप से कम ताप की ओर बहती है — अधिक "ऊष्मा" से कम "ऊष्मा" की ओर नहीं। ताप का SI मात्रक °C नहीं, K है।
Trap 2: केल्विन के साथ "डिग्री" नहीं
सही लेखन "300 K" है, "300 °K" नहीं। केल्विन पैमाने पर ऋणात्मक ताप नहीं होता। ताप-अंतर में 1 °C = 1 K, पर 1 °C = 1.8 °F।
Trap 3: −40 पर C = F, पर C = K कभी नहीं
C और K में सदा 273.15 का अंतर है। "किस ताप पर C और K बराबर?" — ऐसा कोई ताप नहीं।
Trap 4: जल का अधिकतम घनत्व 4 °C पर, 0 °C पर नहीं
0 °C पर बर्फ़ का घनत्व जल से कम है; जल का घनत्व 4 °C पर अधिकतम है। असंगत प्रसार की परास 0–4 °C है।
Trap 5: भाप बनाम उबलता पानी; बर्फ़ बनाम ठंडा पानी
| तुलना | अधिक प्रभाव | कारण |
|---|---|---|
| 100 °C भाप बनाम 100 °C जल | भाप से अधिक जलन | 540 cal/g वाष्पन की गुप्त ऊष्मा |
| 0 °C बर्फ़ बनाम 0 °C जल | बर्फ़ से अधिक ठंडक | 80 cal/g गलन की गुप्त ऊष्मा |
Trap 6: पहाड़ों पर खाना देर से — क्वथनांक कम, अधिक नहीं
पहाड़ों पर दाब कम → क्वथनांक कम → पानी जल्दी उबलता तो है, पर कम ताप पर, इसलिए खाना देर से पकता है। प्रेशर कुकर में ठीक उलटा — दाब अधिक, क्वथनांक अधिक।
Trap 7: दाब बढ़ाने पर बर्फ़ का गलनांक घटता है
दाब बढ़ाने से जल का क्वथनांक बढ़ता है, पर बर्फ़ का गलनांक घटता है (पुनर्हिमायन)। दोनों को एक जैसा न समझें।
Trap 8: वाष्पीकरण बनाम क्वथन
वाष्पीकरण हर ताप पर, केवल सतह से और शीतलन के साथ; क्वथन निश्चित ताप पर, पूरे द्रव से। आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पीकरण घटता है।
Trap 9: निर्वात में कौन-सा संचरण?
केवल विकिरण। संवहन ठोसों में नहीं होता और चालन-संवहन दोनों को माध्यम चाहिए। सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक विकिरण से आती है।
Trap 10: विशिष्ट ऊष्मा बनाम ऊष्मा धारिता
विशिष्ट ऊष्मा पदार्थ का गुण है (प्रति kg, J/kg·K); ऊष्मा धारिता पूरी वस्तु की (m × c, J/K)। एक बाल्टी और एक गिलास जल की विशिष्ट ऊष्मा समान, पर ऊष्मा धारिता अलग।
17. Most-Asked रिवीज़न तालिका (55 तथ्य)
| क्रम | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | ऊष्मा का SI मात्रक | जूल |
| 2 | ताप का SI मात्रक | केल्विन |
| 3 | 1 कैलोरी | ≈ 4.186 J |
| 4 | भोजन की 1 Calorie | 1 किलोकैलोरी = 1000 cal |
| 5 | ऊष्मा प्रवाह की दिशा | अधिक ताप से कम ताप की ओर |
| 6 | C और F बराबर | −40° |
| 7 | शरीर का सामान्य ताप (°F) | 98.6 °F |
| 8 | शरीर का सामान्य ताप (K) | ≈ 310 K |
| 9 | परम शून्य (°C) | −273.15 °C |
| 10 | जल का क्वथनांक (°F) | 212 °F |
| 11 | जल का हिमांक (K) | 273.15 K |
| 12 | फ़ारेनहाइट पैमाने पर हिमांक से क्वथनांक तक भाग | 180 |
| 13 | F = ? | (9/5)C + 32 |
| 14 | 100 °C = ? °F | 212 °F |
| 15 | 1 °C ताप-अंतर = ? °F | 1.8 °F |
| 16 | क्लिनिकल थर्मामीटर का परास | 35 °C – 42 °C |
| 17 | क्लिनिकल थर्मामीटर में पारा नीचे न लौटने का कारण | संकुचन (Kink) |
| 18 | बहुत उच्च ताप मापने का यंत्र | पाइरोमीटर |
| 19 | अत्यंत कम ताप हेतु द्रव-थर्मामीटर | एल्कोहॉल थर्मामीटर |
| 20 | पारे का हिमांक (लगभग) | −39 °C |
| 21 | थर्मोकपल किस प्रभाव पर | सीबेक प्रभाव |
| 22 | सबसे अधिक प्रसार | गैसों का |
| 23 | α : β : γ | 1 : 2 : 3 |
| 24 | रेल पटरियों में अंतराल | ऊष्मीय प्रसार |
| 25 | गर्मियों में लोलक घड़ी | सुस्त (धीमी) चलती है |
| 26 | थर्मोस्टैट में प्रयुक्त | द्विधात्विक पट्टी |
| 27 | कम प्रसार वाली मिश्रधातु | इन्वार |
| 28 | जल का अधिकतम घनत्व | 4 °C पर |
| 29 | असंगत प्रसार की परास | 0 °C – 4 °C |
| 30 | झीलें ऊपर से क्यों जमती हैं | जल का असंगत प्रसार |
| 31 | बर्फ़ जल पर क्यों तैरती है | बर्फ़ का घनत्व जल से कम |
| 32 | जल की विशिष्ट ऊष्मा | 1 cal/g·°C ≈ 4186 J/kg·K |
| 33 | Q = mcΔT में c | विशिष्ट ऊष्मा |
| 34 | रेडिएटर में जल क्यों | उच्च विशिष्ट ऊष्मा |
| 35 | बर्फ़ की गलन की गुप्त ऊष्मा | 80 cal/g |
| 36 | जल की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा | 540 cal/g |
| 37 | भाप से अधिक जलन का कारण | वाष्पन की गुप्त ऊष्मा |
| 38 | अवस्था परिवर्तन के दौरान ताप | स्थिर रहता है |
| 39 | प्रेशर कुकर में जल का क्वथनांक | लगभग 120 °C (बढ़ जाता है) |
| 40 | पहाड़ों पर खाना देर से पकना | कम दाब → कम क्वथनांक |
| 41 | दाब बढ़ाने पर बर्फ़ का गलनांक | घटता है |
| 42 | बर्फ़ पर स्केटिंग का आधार | पुनर्हिमायन |
| 43 | नमक मिलाने पर जल का क्वथनांक | बढ़ता है |
| 44 | मटके का पानी ठंडा | वाष्पीकरण से शीतलन |
| 45 | आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पीकरण | घटता है |
| 46 | कपूर, नैफ़्थलीन | ऊर्ध्वपातन |
| 47 | शुष्क बर्फ़ | ठोस CO₂ |
| 48 | निर्वात में ऊष्मा संचरण | विकिरण |
| 49 | ऊष्मा का सर्वश्रेष्ठ धात्विक चालक | चाँदी |
| 50 | दिन में समुद्री समीर | संवहन (समुद्र → स्थल) |
| 51 | थर्मस में निर्वात रोकता है | चालन व संवहन |
| 52 | अच्छा अवशोषक = ? | अच्छा उत्सर्जक (किरखॉफ़) |
| 53 | शीतलन दर ∝ ? | ताप-अंतर (न्यूटन का शीतलन नियम) |
| 54 | 100% दक्ष इंजन असंभव | ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम |
| 55 | आपेक्षिक आर्द्रता मापक | हाइग्रोमीटर |
18. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
ऊष्मा के प्रश्न प्रायः पाँच ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:
- सीधा तथ्य: "जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है?" (उत्तर: 4 °C)
- यंत्र/मात्रक मिलान: "पाइरोमीटर — ?, हाइग्रोमीटर — ?, क्लिनिकल थर्मामीटर — ?" (उच्च ताप, आपेक्षिक आर्द्रता, शरीर का ताप)
- दैनिक जीवन तर्क: "दो पतले कंबल एक मोटे कंबल से अधिक गरम क्यों रखते हैं?" (बीच की वायु परत कुचालक)
- सरल संख्यात्मक: "किसी रोगी का ताप 104 °F है; सेल्सियस में?" (40 °C) या "0 °C की 20 g बर्फ़ पिघलाने हेतु ऊष्मा?" (20 × 80 = 1600 cal)
- कथन-आधारित: "1. दाब बढ़ाने पर जल का क्वथनांक बढ़ता है। 2. दाब बढ़ाने पर बर्फ़ का गलनांक बढ़ता है। कौन-सा सही?" (केवल 1)
रणनीति: रूपांतरण में पहले यह देखें कि प्रश्न "ताप" पूछ रहा है या "ताप-अंतर" — अंतर में 32 नहीं जोड़ते। "क्यों" वाले प्रश्नों में कीवर्ड पहचानें: वायु फँसना → कुचालक; बुलबुले/उबलना → दाब-क्वथनांक; ठंडक → वाष्पीकरण या गुप्त ऊष्मा।
19. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. रूपांतरण: "C बटा 5 = F घटा 32 बटा 9" — C/5 = (F − 32)/9; केल्विन के लिए "C में 273 जोड़ो"।
2. −40 का जादू: "चालीस नीचे, दोनों बराबर।"
3. शरीर का ताप: "37 – 98.6 – 310" — "सैंतीस, अट्ठानवे दशमलव छह, तीन सौ दस"।
4. गुप्त ऊष्मा: "बर्फ़ 80 की, भाप 540 की" — पिघलना सस्ता, उबालना महँगा।
5. असंगत प्रसार: "चार पर भारी" — 4 °C पर जल सबसे घना।
6. संचरण की विधियाँ: "चा-ठो, सं-तर, वि-निर्वात" — चालन ठोस में, संवहन तरल (द्रव/गैस) में, विकिरण निर्वात में भी।
7. वाष्पीकरण के कारक: "क्षेत्र-ताप-हवा बढ़ाओ, नमी घटाओ" — तीन से बढ़ता, आर्द्रता से घटता।
8. दाब का प्रभाव: "दाब ऊपर — उबाल ऊपर, बर्फ़ का पिघलना नीचे।"
20. कथन अभ्यास
ताप का SI मात्रक डिग्री सेल्सियस है। — गलत (ताप का SI मात्रक केल्विन है)।
−40° पर सेल्सियस और फ़ारेनहाइट पैमानों के पाठ्यांक बराबर होते हैं। — सही।
मानव शरीर का सामान्य ताप 98.6 °F होता है। — सही।
जल का घनत्व 0 °C पर अधिकतम होता है। — गलत (4 °C पर अधिकतम)।
0 °C से 4 °C तक गरम करने पर जल का आयतन घटता है। — सही।
100 °C की भाप, 100 °C के उबलते पानी से अधिक जलन करती है। — सही।
प्रेशर कुकर में जल का क्वथनांक घट जाता है। — गलत (दाब बढ़ने से क्वथनांक बढ़ता है)।
पहाड़ों पर कम वायुदाब के कारण जल 100 °C से कम ताप पर उबलता है। — सही।
वाष्पीकरण केवल क्वथनांक पर होता है। — गलत (वाष्पीकरण प्रत्येक ताप पर होता है; क्वथन निश्चित ताप पर)।
विकिरण द्वारा ऊष्मा संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है। — गलत (विकिरण निर्वात में भी होता है)।
कपूर और नैफ़्थलीन ऊर्ध्वपातन दर्शाते हैं। — सही।
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के अनुसार कोई भी ऊष्मा इंजन 100% दक्ष नहीं हो सकता। — सही।
21. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- ऊष्मा = ऊर्जा (J); ताप = गर्माहट की माप (K); 1 cal ≈ 4.186 J
- C/5 = (F − 32)/9; K = C + 273.15
- −40° पर C = F; C और K कभी बराबर नहीं
- शरीर: 37 °C = 98.6 °F ≈ 310 K; परम शून्य = −273.15 °C
- क्लिनिकल थर्मामीटर 35–42 °C, संकुचन (Kink); पाइरोमीटर — उच्च ताप
- पारा: चमकीला, काँच को नहीं भिगोता, −39 से 357 °C तक द्रव
- प्रसार: गैस > द्रव > ठोस; α : β : γ = 1 : 2 : 3
- रेल पटरी अंतराल, ढीले तार (गर्मी), द्विधात्विक पट्टी — थर्मोस्टैट
- असंगत प्रसार 0–4 °C; 4 °C पर अधिकतम घनत्व; झीलें ऊपर से जमती हैं
- Q = mcΔT; जल c = 1 cal/g·°C — सम तटीय जलवायु, रेडिएटर
- Q = mL; बर्फ़ 80 cal/g, भाप 540 cal/g; भाप की जलन अधिक
- दाब ↑ → क्वथनांक ↑ (कुकर), बर्फ़ का गलनांक ↓ (पुनर्हिमायन)
- वाष्पीकरण → शीतलन (मटका, पसीना); आर्द्रता ↑ → वाष्पीकरण ↓
- चालन (ठोस), संवहन (द्रव/गैस, समुद्री समीर), विकिरण (निर्वात में भी); थर्मस तीनों रोकता है
- शीतलन दर ∝ ताप-अंतर; द्वितीय नियम — 100% दक्षता असंभव; तृतीय — 0 K अप्राप्य
22. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। गलत प्रश्नों के लिए खंड 4 (ताप के पैमाने), खंड 8 (गुप्त ऊष्मा) और खंड 16 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। प्रकाश के परावर्तन-अपवर्तन और ध्वनि का अध्याय प्रकाश व ध्वनि नोट में है। पूरे सामान्य विज्ञान को परीक्षा-स्तर पर परखने के लिए SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़, RRB NTPC CBT-1 2026 टेस्ट सीरीज़ या राजस्थान CET (स्नातक) मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।
23. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
ऊष्मा और ताप का अध्याय सूत्रों से अधिक समझ और उदाहरणों पर टिका है। ताप के पैमानों का रूपांतरण, जल का असंगत प्रसार, विशिष्ट व गुप्त ऊष्मा के मान, दाब का क्वथनांक व गलनांक पर प्रभाव और ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ — ये पाँच बिंदु पक्के हों तो अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं। दैनिक जीवन के हर उदाहरण (मटका, कुकर, थर्मस, ऊनी कपड़े, समुद्री समीर) को उसके सिद्धांत से जोड़कर याद करें; ऊष्मागतिकी के नियमों को केवल गुणात्मक कथनों के स्तर पर पढ़ें।
ऊष्मा = J, ताप = K | C/5 = (F − 32)/9, −40 पर C = F | 37 °C = 98.6 °F | 4 °C पर जल सबसे घना | जल c = 1 cal/g·°C | बर्फ़ 80, भाप 540 cal/g | दाब ↑ क्वथनांक ↑ | चालन-संवहन-विकिरण
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“ऊष्मा, ताप व तापमान — ताप पैमाने, असंगत प्रसार, विशिष्ट व गुप्त ऊष्मा, ऊष्मा संचरण — SSC/रेलवे/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो ताप-अंतर के कारण एक वस्तु से दूसरी में जाती है, इसका SI मात्रक जूल है। ताप वस्तु की गर्माहट की माप है जो ऊष्मा प्रवाह की दिशा तय करता है, इसका SI मात्रक केल्विन है।
सूत्र F = (9/5) × C + 32 का प्रयोग करें, अर्थात् C/5 = (F − 32)/9। उदाहरण के लिए 50 °C = 90 + 32 = 122 °F।
−40° पर। इस ताप पर −40 °C = −40 °F होता है। सेल्सियस और केल्विन के पाठ्यांक कभी बराबर नहीं होते।
मानव शरीर का सामान्य ताप 37 °C माना जाता है, जो 98.6 °F और लगभग 310 K के बराबर है।
0 °C से 4 °C तक गरम करने पर जल फैलने के बजाय सिकुड़ता है, इसे असंगत प्रसार कहते हैं। इसी कारण 4 °C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है और ठंडे देशों में झीलें ऊपर से जमती हैं।
100 °C की भाप त्वचा पर संघनित होते समय प्रति ग्राम लगभग 540 कैलोरी वाष्पन की गुप्त ऊष्मा अतिरिक्त छोड़ती है। इसलिए वह 100 °C के उबलते पानी की तुलना में अधिक गंभीर जलन करती है।
ऊँचाई पर वायुदाब कम होता है, इसलिए जल 100 °C से कम ताप पर ही उबल जाता है। कम ताप पर भोजन देर से पकता है; प्रेशर कुकर दाब बढ़ाकर क्वथनांक बढ़ा देता है।
घड़े के सूक्ष्म छिद्रों से पानी रिसकर बाहरी सतह पर वाष्पित होता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा घड़े और उसके पानी से ली जाती है, जिससे पानी ठंडा रहता है।
चालन (मुख्यतः ठोसों में, कणों के कंपन से), संवहन (द्रव और गैसों में, कणों की गति से) और विकिरण (विद्युत-चुंबकीय तरंगों द्वारा, बिना माध्यम के)। निर्वात में केवल विकिरण से ऊष्मा संचरण होता है।
दोहरी दीवारों के बीच का निर्वात चालन और संवहन रोकता है, चमकीली परत विकिरण को परावर्तित कर रोकती है और कुचालक ढक्कन मुँह से ऊष्मा का आदान-प्रदान रोकता है। इस प्रकार ऊष्मा न बाहर जाती है, न अंदर आती है।
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