प्रकाश और ध्वनि — परावर्तन, अपवर्तन, लेंस, दृष्टि दोष, प्रकीर्णन, प्रतिध्वनि — SSC/रेलवे/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, अग्निवीर व RSSB CET पाठ्यक्रम की सामान्य विज्ञान इकाई; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10) और SI मात्रक प्रणाली। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
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संक्षिप्त उत्तर: प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय अनुप्रस्थ तरंग है जिसे चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती; निर्वात में इसकी चाल लगभग 3×10⁸ m/s है और सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश लगभग 8 मिनट 20 सेकंड में पहुँचता है। परावर्तन में आपतन कोण = परावर्तन कोण होता है; अवतल दर्पण शेविंग, दंत-चिकित्सा और टॉर्च/हेडलाइट में तथा उत्तल दर्पण वाहनों के पश्च-दृश्य (रियर-व्यू) दर्पण में लगता है। तारों का टिमटिमाना, पानी में छड़ का मुड़ा दिखना अपवर्तन के कारण है, जबकि हीरे की चमक और ऑप्टिकल फाइबर पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित हैं। लेंस की क्षमता P = 1/f (f मीटर में) होती है, मात्रक डायोप्टर (D); उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक। निकट-दृष्टि दोष अवतल लेंस से, दूर-दृष्टि दोष उत्तल लेंस से, जरा-दूरदर्शिता द्विफोकसी लेंस से और दृष्टिवैषम्य बेलनाकार लेंस से ठीक होता है; स्वस्थ आँख के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 cm है। आकाश का नीला रंग और सूर्योदय-सूर्यास्त की लालिमा प्रकीर्णन से है — लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होने से उसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है, इसलिए खतरे के संकेत लाल होते हैं। ध्वनि एक यांत्रिक अनुदैर्ध्य तरंग है जो निर्वात में नहीं चल सकती; इसकी चाल ठोस > द्रव > गैस (वायु में लगभग 330–343 m/s, ताप पर निर्भर)। मनुष्य की श्रव्य परास 20 Hz – 20 kHz है; 20 Hz से कम अवश्रव्य और 20 kHz से अधिक पराश्रव्य (SONAR, अल्ट्रासाउंड, चमगादड़)। स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए परावर्तक सतह कम से कम लगभग 17 m दूर होनी चाहिए।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य (प्रकाश) | उत्तर |
|---|---|
| प्रकाश की प्रकृति | विद्युतचुंबकीय, अनुप्रस्थ तरंग; कणों (फोटॉन) की तरह भी व्यवहार — द्वैत प्रकृति |
| निर्वात में चाल | लगभग 3×10⁸ m/s (सभी माध्यमों में सबसे अधिक) |
| सूर्य से पृथ्वी तक लगने वाला समय | लगभग 8 मिनट 20 सेकंड (≈ 500 s) |
| परावर्तन का नियम | आपतन कोण = परावर्तन कोण; आपतित किरण, अभिलंब, परावर्तित किरण एक ही तल में |
| रियर-व्यू दर्पण | उत्तल दर्पण (सीधा, छोटा प्रतिबिंब, विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र) |
| शेविंग / दंत-चिकित्सक का दर्पण | अवतल दर्पण (पास रखने पर सीधा, बड़ा प्रतिबिंब) |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f (f मीटर में); मात्रक डायोप्टर (D) |
| स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी | 25 cm (सामान्य वयस्क आँख) |
| निकट-दृष्टि दोष का सुधार | अवतल (अपसारी) लेंस |
| दूर-दृष्टि दोष का सुधार | उत्तल (अभिसारी) लेंस |
| हीरे की चमक / ऑप्टिकल फाइबर | पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
| इंद्रधनुष | वर्ण-विक्षेपण + अपवर्तन + आंतरिक परावर्तन (वर्षा की बूँदों में); सदैव सूर्य की विपरीत दिशा में |
| आकाश नीला | प्रकीर्णन — छोटी तरंगदैर्ध्य (नीला) का अधिक प्रकीर्णन |
| खतरे के संकेत लाल | लाल की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक, प्रकीर्णन सबसे कम, दूर तक दिखता है |
| तथ्य (ध्वनि) | उत्तर |
|---|---|
| ध्वनि की प्रकृति | यांत्रिक तरंग; वायु में अनुदैर्ध्य (संपीडन व विरलन) |
| माध्यम | आवश्यक — निर्वात में ध्वनि नहीं चलती |
| चाल का क्रम | ठोस > द्रव > गैस |
| वायु में चाल | लगभग 330–343 m/s (0 °C पर ≈ 331 m/s, 20 °C पर ≈ 343 m/s) |
| जल / स्टील में चाल | जल में लगभग 1500 m/s; स्टील में लगभग 5000–6000 m/s |
| श्रव्य परास | 20 Hz – 20,000 Hz (20 kHz) |
| अवश्रव्य (Infrasonic) | 20 Hz से कम — भूकंप, हाथी, व्हेल |
| पराश्रव्य (Ultrasonic) | 20 kHz से अधिक — चमगादड़, डॉल्फ़िन, SONAR, अल्ट्रासाउंड |
| स्पष्ट प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी | लगभग 17 m (ध्वनि का प्रभाव मस्तिष्क में लगभग 0.1 s रहता है) |
| तारत्व (Pitch) निर्भर | आवृत्ति पर |
| प्रबलता (Loudness) निर्भर | आयाम पर |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रकाश और ध्वनि सामान्य विज्ञान के भौतिकी भाग का सबसे "दैनिक-जीवन" वाला अध्याय है, इसलिए लगभग हर सामान्य-विज्ञान परीक्षा में इससे प्रश्न आते हैं। SSC CGL/CHSL/MTS/GD में प्रायः सीधे तथ्य पूछे जाते हैं — दृष्टि दोष का सुधार लेंस, रियर-व्यू में कौन-सा दर्पण, श्रव्य परास, ध्वनि की चाल किस माध्यम में अधिक। RRB NTPC और अग्निवीर में कारण-आधारित प्रश्न (आकाश नीला क्यों, तारे क्यों टिमटिमाते हैं) और सरल संख्यात्मक प्रश्न (लेंस की क्षमता, प्रतिध्वनि से दूरी) भी मिलते हैं। राजस्थान CET और पटवारी में कथन-आधारित तथा उपकरण–सिद्धांत मिलान वाले प्रश्न आम हैं।
गति, बल और ऊर्जा की बुनियादी समझ के लिए मात्रक, गति, बल, गुरुत्वाकर्षण और ऊर्जा वाला नोट पहले पढ़ लेना उपयोगी है, क्योंकि तरंग की चाल v = fλ उसी गति की अवधारणा पर टिकी है।
3. प्रकाश की प्रकृति
प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जिससे हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं। वस्तुएँ स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करें (सूर्य, तारे, बल्ब) तो दीप्त और दूसरे का प्रकाश परावर्तित करें (चंद्रमा, ग्रह, मेज़) तो अदीप्त कहलाती हैं। प्रकाश सामान्यतः सीधी रेखा में चलता है (ऋजुरेखीय संचरण) — इसी से छाया बनती है और सूचिछिद्र कैमरा (पिनहोल कैमरा) उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| तरंग का प्रकार | विद्युतचुंबकीय, अनुप्रस्थ — इसलिए ध्रुवण (Polarisation) संभव |
| माध्यम | आवश्यक नहीं — निर्वात में भी चलता है (सूर्य का प्रकाश अंतरिक्ष से आता है) |
| निर्वात / वायु में चाल | लगभग 3×10⁸ m/s |
| जल में चाल | लगभग 2.25×10⁸ m/s |
| काँच में चाल | लगभग 2×10⁸ m/s |
| सूर्य से पृथ्वी | दूरी लगभग 1.5×10¹¹ m ÷ 3×10⁸ m/s ≈ 500 s ≈ 8 मिनट 20 सेकंड |
4. प्रकाश का परावर्तन
किसी चिकनी सतह से टकराकर प्रकाश का उसी माध्यम में लौट आना परावर्तन है। परावर्तन के दो नियम: (1) आपतन कोण = परावर्तन कोण; (2) आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं। ये नियम समतल और गोलीय — सभी परावर्तक सतहों पर लागू होते हैं।
समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब
| गुण | विवरण |
|---|---|
| प्रकृति | आभासी (परदे पर नहीं आता) और सीधा |
| आकार | वस्तु के बराबर |
| दूरी | दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर, जितनी वस्तु आगे है |
| पार्श्व उत्क्रमण | दायाँ-बायाँ उलटा दिखता है — इसलिए एम्बुलेंस पर "AMBULANCE" उलटा लिखा जाता है |
| पूरा प्रतिबिंब देखने हेतु दर्पण की न्यूनतम लंबाई | व्यक्ति की ऊँचाई की आधी |
| दो दर्पणों के बीच कोण θ | प्रतिबिंबों की संख्या n = (360/θ) − 1 (जब 360/θ सम हो); 90° पर 3, 60° पर 5 |
गोलीय दर्पण — अवतल और उत्तल
गोलीय दर्पण के लिए फोकस दूरी f = R/2 (R = वक्रता त्रिज्या)। दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f। आवर्धन m = −v/u। अवतल दर्पण को अभिसारी और उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण कहते हैं।
| बिंदु | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|---|
| परावर्तक सतह | भीतर की ओर धँसी | बाहर की ओर उभरी |
| किरणों पर प्रभाव | समांतर किरणों को फोकस पर मिलाता है | समांतर किरणों को फैलाता है (फोकस से आती प्रतीत) |
| प्रतिबिंब | वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक-उल्टा या आभासी-सीधा-बड़ा | सदैव आभासी, सीधा और छोटा |
| प्रमुख उपयोग | शेविंग दर्पण, दंत-चिकित्सक का दर्पण, टॉर्च व वाहन हेडलाइट के परावर्तक, सौर भट्टी/सौर कुकर | वाहनों के पश्च-दृश्य (रियर-व्यू) दर्पण, सड़क के मोड़ पर लगे सुरक्षा दर्पण |
अवतल दर्पण — वस्तु की स्थिति के अनुसार प्रतिबिंब
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति व आकार |
|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F पर | वास्तविक, उल्टा, अत्यधिक छोटा (बिंदु) |
| C से परे | F और C के बीच | वास्तविक, उल्टा, छोटा |
| C पर | C पर | वास्तविक, उल्टा, समान आकार |
| C और F के बीच | C से परे | वास्तविक, उल्टा, बड़ा |
| F पर | अनंत पर | वास्तविक, उल्टा, अत्यधिक बड़ा |
| F और ध्रुव P के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी, सीधा, बड़ा (शेविंग दर्पण यही) |
टॉर्च/हेडलाइट का रहस्य: बल्ब को अवतल परावर्तक के फोकस पर रखा जाता है, ताकि परावर्तित किरणें समांतर किरण-पुंज के रूप में दूर तक जाएँ।
5. प्रकाश का अपवर्तन
प्रकाश जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछा प्रवेश करता है तो उसकी दिशा बदल जाती है — इसे अपवर्तन कहते हैं। इसका कारण है दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल का अंतर। विरल से सघन माध्यम (वायु → जल) में जाने पर किरण अभिलंब की ओर और सघन से विरल में जाने पर अभिलंब से दूर मुड़ती है। अभिलंबवत् आपतन (आपतन कोण 0°) पर किरण बिना मुड़े निकल जाती है।
स्नेल का नियम: sin i / sin r = स्थिरांक (दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक)। निरपेक्ष अपवर्तनांक n = c / v (निर्वात में प्रकाश की चाल ÷ माध्यम में चाल)। अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता। अपवर्तन में प्रकाश की आवृत्ति नहीं बदलती; चाल और तरंगदैर्ध्य बदलते हैं।
| माध्यम | अपवर्तनांक (लगभग) |
|---|---|
| वायु | 1.0003 (व्यवहार में 1) |
| जल | 1.33 |
| साधारण (क्राउन) काँच | 1.52 |
| हीरा | 2.42 (सामान्य पदार्थों में बहुत अधिक) |
नोट: "प्रकाशिक रूप से सघन" का अर्थ अधिक अपवर्तनांक है, अधिक द्रव्यमान-घनत्व नहीं — केरोसिन (n ≈ 1.44) जल से हल्का होकर भी प्रकाशिक रूप से सघन है।
अपवर्तन से होने वाली दैनिक घटनाएँ
| घटना | कारण |
|---|---|
| पानी में डूबी छड़/पेंसिल मुड़ी दिखना | जल से वायु में आती किरणों का अपवर्तन |
| तालाब/बाल्टी की तली ऊपर उठी दिखना (वास्तविक से कम गहरी) | अपवर्तन — आभासी गहराई कम |
| तारों का टिमटिमाना | वायुमंडलीय अपवर्तन — वायु की परतों का घनत्व/ताप बदलता रहता है |
| ग्रह नहीं टिमटिमाते | ग्रह पास हैं, विस्तृत स्रोत की तरह व्यवहार करते हैं; प्रकाश का उतार-चढ़ाव औसत होकर मिट जाता है |
| सूर्य वास्तविक उदय से पहले दिखना और अस्त के बाद तक दिखना | वायुमंडलीय अपवर्तन — दिन लगभग 4 मिनट बड़ा (लगभग 2 मिनट सुबह + 2 मिनट शाम) |
| गर्म सड़क/रेगिस्तान में पानी का भ्रम — मरीचिका | गर्म वायु की परतों में क्रमिक अपवर्तन और अंत में पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
6. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण एक निश्चित कोण — क्रांतिक कोण (Critical Angle) — से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश दूसरे माध्यम में जाने के बजाय पूरा का पूरा पहले माध्यम में ही लौट आता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
| शर्त / तथ्य | विवरण |
|---|---|
| शर्त 1 | प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाए |
| शर्त 2 | आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो |
| क्रांतिक कोण पर | अपवर्तन कोण 90° होता है (किरण सतह के अनुदिश) |
| क्रांतिक कोण और अपवर्तनांक | अपवर्तनांक जितना अधिक, क्रांतिक कोण उतना कम |
| हीरे का क्रांतिक कोण | लगभग 24° (बहुत कम) — भीतर गया प्रकाश बार-बार परावर्तित होकर चमकता है |
| काँच-वायु का क्रांतिक कोण | लगभग 42° |
| उदाहरण / उपयोग | कैसे |
|---|---|
| हीरे की चमक | उच्च अपवर्तनांक, कम क्रांतिक कोण — बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
| ऑप्टिकल फाइबर | पतले काँच/प्लास्टिक तंतु में प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से आगे बढ़ता है — इंटरनेट/दूरसंचार, एंडोस्कोपी |
| मरीचिका | गर्म, विरल वायु की निचली परतों में |
| पानी में हवा का बुलबुला चाँदी-सा चमकना | जल (सघन) से बुलबुले (विरल) की सतह पर |
7. लेंस और लेंस की क्षमता
दो सतहों से घिरा पारदर्शी माध्यम, जिसकी कम से कम एक सतह गोलीय हो, लेंस है। बीच से मोटा लेंस उत्तल (अभिसारी) और बीच से पतला लेंस अवतल (अपसारी) होता है। लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f; आवर्धन m = v/u।
| बिंदु | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|
| आकार | बीच में मोटा, किनारों पर पतला | बीच में पतला, किनारों पर मोटा |
| किरणों पर प्रभाव | अभिसरण (मिलाता है) | अपसरण (फैलाता है) |
| फोकस दूरी / क्षमता का चिह्न | धनात्मक (+) | ऋणात्मक (−) |
| प्रतिबिंब | वास्तविक-उल्टा या (F के भीतर वस्तु पर) आभासी-सीधा-बड़ा | सदैव आभासी, सीधा, छोटा |
| उपयोग | आवर्धक लेंस, कैमरा, सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शी, प्रोजेक्टर, दूर-दृष्टि दोष का चश्मा | निकट-दृष्टि दोष का चश्मा |
लेंस की क्षमता (Power)
P = 1/f, जहाँ f मीटर में हो। मात्रक डायोप्टर (D); 1 D = 1 m⁻¹। क्षमता जितनी अधिक, लेंस उतना अधिक किरणों को मोड़ता है (फोकस दूरी उतनी कम)। सटे हुए लेंसों की कुल क्षमता = P₁ + P₂ + … (बीजगणितीय योग)।
| हल किया हुआ उदाहरण | हल |
|---|---|
| उत्तल लेंस की फोकस दूरी 50 cm है। क्षमता? | f = 0.5 m; P = 1/0.5 = +2 D |
| अवतल लेंस की फोकस दूरी 25 cm है। क्षमता? | f = −0.25 m; P = −4 D |
| चश्मे की क्षमता −2.5 D है। लेंस और फोकस दूरी? | ऋणात्मक = अवतल; f = 1/(−2.5) = −0.4 m = −40 cm |
| +3 D और −1 D के दो लेंस सटाकर रखे। कुल क्षमता? | P = 3 + (−1) = +2 D (उत्तल की तरह व्यवहार, f = 50 cm) |
| उत्तल लेंस (f = 10 cm) से 30 cm पर वस्तु। प्रतिबिंब दूरी? | 1/v = 1/f + 1/u = 1/10 + 1/(−30) = 2/30 → v = +15 cm (वास्तविक, उल्टा, छोटा) |
8. मानव नेत्र और दृष्टि दोष
मानव नेत्र एक प्राकृतिक प्रकाशिक यंत्र है जिसमें उत्तल नेत्र-लेंस रेटिना पर वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है; मस्तिष्क उसे सीधा अनुभव कराता है। आँख की संरचना विस्तार से मानव शरीर तंत्र वाले नोट में भी देखें।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कॉर्निया (स्वच्छ मंडल) | आँख का पारदर्शी अग्र भाग; अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है |
| परितारिका (Iris) | पुतली का आकार नियंत्रित करती है; आँख का रंग इसी से |
| पुतली (Pupil) | आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित; तेज़ प्रकाश में छोटी, मंद प्रकाश में बड़ी |
| नेत्र लेंस | उत्तल लेंस; रेटिना पर प्रतिबिंब फोकस करता है |
| पक्ष्माभी पेशियाँ (Ciliary Muscles) | लेंस की मोटाई/फोकस दूरी बदलती हैं — समंजन क्षमता |
| रेटिना (दृष्टिपटल) | परदे का कार्य; छड़ कोशिकाएँ (मंद प्रकाश) और शंकु कोशिकाएँ (रंग) |
| दृक् तंत्रिका | संकेत मस्तिष्क तक ले जाती है; जहाँ यह रेटिना से निकलती है वह अंध बिंदु |
| तथ्य | मान |
|---|---|
| निकट बिंदु (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी) | 25 cm (सामान्य वयस्क) |
| दूर बिंदु | अनंत |
| समंजन क्षमता | पक्ष्माभी पेशियों द्वारा नेत्र-लेंस की फोकस दूरी बदलने की क्षमता |
| दृष्टि-निर्बंध (Persistence of Vision) | प्रतिबिंब का प्रभाव रेटिना पर लगभग 1/16 सेकंड रहता है — सिनेमा इसी पर आधारित |
| वर्णांधता | शंकु कोशिकाओं की कमी/दोष से कुछ रंगों में भेद न कर पाना |
दृष्टि दोष और सुधार — सबसे अधिक पूछी जाने वाली तालिका
| दोष | लक्षण | कारण | सुधार |
|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि दोष (Myopia) | पास का साफ़, दूर का धुँधला | नेत्र-गोलक लंबा या लेंस की वक्रता अधिक; प्रतिबिंब रेटिना के आगे | अवतल लेंस (ऋणात्मक क्षमता) |
| दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) | दूर का साफ़, पास का धुँधला | नेत्र-गोलक छोटा या फोकस दूरी अधिक; प्रतिबिंब रेटिना के पीछे | उत्तल लेंस (धनात्मक क्षमता) |
| जरा-दूरदर्शिता (Presbyopia) | उम्र के साथ पास का पढ़ना कठिन; कई बार दोनों दोष साथ | पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर, लेंस का लचीलापन घटना | उत्तल लेंस; दोनों दोष हों तो द्विफोकसी (Bifocal) लेंस |
| दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) | क्षैतिज व ऊर्ध्व रेखाएँ एक साथ स्पष्ट न दिखना | कॉर्निया की वक्रता सब दिशाओं में समान न होना | बेलनाकार (Cylindrical) लेंस |
| मोतियाबिंद (Cataract) | धुँधली दृष्टि | नेत्र-लेंस का दूधिया/अपारदर्शी होना | शल्य-चिकित्सा (कृत्रिम लेंस) |
उदाहरण: किसी निकट-दृष्टि दोष वाले व्यक्ति का दूर बिंदु 2 m है। सुधार के लिए अवतल लेंस की फोकस दूरी f = −2 m, अतः क्षमता P = 1/(−2) = −0.5 D।
9. वर्ण-विक्षेपण, इंद्रधनुष और प्रकीर्णन
प्रिज़्म द्वारा वर्ण-विक्षेपण
श्वेत प्रकाश को काँच के प्रिज़्म से गुज़ारने पर वह सात रंगों में बँट जाता है — इसे वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) कहते हैं। यह प्रयोग न्यूटन ने किया था। रंगों का क्रम VIBGYOR — बैंगनी (Violet), जामुनी (Indigo), नीला (Blue), हरा (Green), पीला (Yellow), नारंगी (Orange), लाल (Red)। कारण: काँच में अलग-अलग रंगों की चाल (अपवर्तनांक) भिन्न होती है।
| रंग | तरंगदैर्ध्य | विचलन | काँच में चाल | प्रकीर्णन |
|---|---|---|---|---|
| लाल | सबसे अधिक | सबसे कम | सबसे अधिक | सबसे कम |
| बैंगनी | सबसे कम | सबसे अधिक | सबसे कम | सबसे अधिक |
प्राथमिक रंग (प्रकाश के): लाल, हरा, नीला। लाल + हरा = पीला; हरा + नीला = मोरपंखी (सियान); लाल + नीला = मैजेंटा; तीनों = श्वेत। दूसरा उल्टा प्रिज़्म रखने पर सातों रंग मिलकर फिर श्वेत प्रकाश बना देते हैं।
इंद्रधनुष
इंद्रधनुष वर्षा के बाद वायुमंडल में लटकी जल-बूँदों में अपवर्तन + वर्ण-विक्षेपण + आंतरिक परावर्तन से बनता है। बूँदें छोटे प्रिज़्म की तरह काम करती हैं। इंद्रधनुष देखने के लिए सूर्य प्रेक्षक की पीठ की ओर होना चाहिए — इसलिए सुबह का इंद्रधनुष पश्चिम में और शाम का पूर्व में दिखता है। प्राथमिक इंद्रधनुष में लाल बाहर, बैंगनी भीतर होता है।
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering)
वायु के अणुओं और सूक्ष्म कणों से टकराकर प्रकाश का विभिन्न दिशाओं में फैल जाना प्रकीर्णन है। बहुत छोटे कणों (वायु के अणु) से प्रकीर्णन तरंगदैर्ध्य घटने पर तेज़ी से बढ़ता है — इसलिए नीला/बैंगनी, लाल की तुलना में बहुत अधिक प्रकीर्णित होता है। कोलॉइडी कणों से प्रकाश-पथ दिखना टिंडल प्रभाव है (जैसे घने जंगल में छनकर आती धूप, धूल भरे कमरे में प्रकाश-किरण)।
| घटना | व्याख्या |
|---|---|
| आकाश नीला दिखना | वायु के अणु छोटी तरंगदैर्ध्य (नीला) को अधिक प्रकीर्णित करते हैं; हमारी आँख बैंगनी की अपेक्षा नीले के प्रति अधिक संवेदनशील |
| सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सूर्य लाल | प्रकाश को वायुमंडल की मोटी परत पार करनी पड़ती है; नीला रास्ते में प्रकीर्णित हो जाता है, लाल-नारंगी पहुँचता है |
| खतरे के संकेत (ट्रैफ़िक लाइट, लाल बत्ती) लाल | लाल का प्रकीर्णन सबसे कम — धुंध/कोहरे में भी दूर तक दिखता है |
| अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला | ऊँचाई पर वायुमंडल नहीं, प्रकीर्णन नहीं |
| बादल सफ़ेद | बादल की बूँदें बड़ी होती हैं, सभी रंगों को लगभग समान प्रकीर्णित करती हैं |
10. व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण (संक्षेप)
| घटना | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यतिकरण (Interference) | दो सुसंगत तरंगों के मिलने से कहीं प्रकाश तीव्र, कहीं मंद | साबुन के बुलबुले और पानी पर फैली तेल की परत के रंग; यंग का द्वि-झिरी प्रयोग |
| विवर्तन (Diffraction) | अवरोध या बहुत पतली झिरी के किनारों से प्रकाश का मुड़ना | CD/DVD पर रंगीन धारियाँ; ध्वनि में विवर्तन अधिक, इसलिए दीवार के पीछे की आवाज़ सुनाई देती है |
| ध्रुवण (Polarisation) | तरंग के कंपन को एक तल तक सीमित करना | पोलरॉइड धूप-चश्मे; यह सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है |
महत्वपूर्ण: ध्वनि (वायु में अनुदैर्ध्य) का ध्रुवण नहीं होता, पर व्यतिकरण और विवर्तन ध्वनि में भी होते हैं।
11. प्रकाशिक यंत्र और उनके सिद्धांत
| यंत्र | बनावट / सिद्धांत | मुख्य बात |
|---|---|---|
| सरल सूक्ष्मदर्शी (आवर्धक लेंस) | एक उत्तल लेंस; वस्तु F के भीतर | आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब |
| संयुक्त सूक्ष्मदर्शी | दो उत्तल लेंस — अभिदृश्यक (कम फोकस दूरी) और नेत्रिका | सूक्ष्म वस्तुओं (कोशिका, जीवाणु) को देखना |
| खगोलीय दूरदर्शी (अपवर्तक) | दो उत्तल लेंस — अभिदृश्यक (अधिक फोकस दूरी व बड़ा द्वारक) और नेत्रिका | दूर की वस्तुएँ; अंतिम प्रतिबिंब उल्टा |
| पेरिस्कोप (परिदर्शी) | दो समतल दर्पण (या पूर्ण परावर्ती प्रिज़्म) 45° पर, परावर्तन का सिद्धांत | पनडुब्बी, टैंक, खाई से बाहर देखना |
| द्विनेत्री (Binoculars) | लेंस + पूर्ण परावर्ती प्रिज़्म | प्रतिबिंब सीधा करना, लंबाई कम करना |
| कैमरा | उत्तल लेंस; परदे/सेंसर पर वास्तविक, उल्टा, छोटा प्रतिबिंब | आँख जैसी कार्यप्रणाली |
| ऑप्टिकल फाइबर / एंडोस्कोप | पूर्ण आंतरिक परावर्तन | शरीर के भीतर देखना, तेज़ दूरसंचार |
12. ध्वनि — प्रकृति और संचरण
ध्वनि कंपन से उत्पन्न होती है और माध्यम के कणों के आगे-पीछे दोलन से यांत्रिक तरंग के रूप में फैलती है। वायु में यह अनुदैर्ध्य तरंग है — कणों का कंपन तरंग चलने की दिशा के समांतर होता है, जिससे संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) बनते हैं। माध्यम आगे नहीं बढ़ता, केवल ऊर्जा आगे जाती है।
| बिंदु | प्रकाश | ध्वनि |
|---|---|---|
| तरंग का प्रकार | विद्युतचुंबकीय, अनुप्रस्थ | यांत्रिक; वायु में अनुदैर्ध्य |
| माध्यम | आवश्यक नहीं | आवश्यक — निर्वात में नहीं चलती |
| चाल | लगभग 3×10⁸ m/s (निर्वात) | वायु में लगभग 330–343 m/s |
| किस माध्यम में तेज़ | निर्वात में सबसे तेज़; सघन माध्यम में धीमी | ठोस में सबसे तेज़, गैस में सबसे धीमी |
| ध्रुवण | संभव | वायु में संभव नहीं |
दैनिक जीवन: चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष यात्री सीधे बात नहीं कर सकते — वे रेडियो (विद्युतचुंबकीय तरंगें) का प्रयोग करते हैं। बादल गरजने पर बिजली की चमक पहले दिखती है और गर्जन बाद में सुनाई देता है, क्योंकि प्रकाश की चाल ध्वनि से लगभग लाखों गुना अधिक है।
विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल (NCERT मान, लगभग)
| माध्यम | चाल (m/s) |
|---|---|
| वायु (0 °C) | 331 |
| वायु (20 °C) | 343 |
| जल (आसुत, 25 °C) | 1498 |
| समुद्री जल | 1531 |
| काँच | लगभग 4000 |
| लोहा / स्टील | लगभग 5950 |
| ऐलुमिनियम | लगभग 6420 |
ध्वनि की चाल पर प्रभाव डालने वाले कारक
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| ताप | ताप बढ़ने पर चाल बढ़ती है (वायु में लगभग 0.6 m/s प्रति °C) |
| आर्द्रता | नम वायु में चाल शुष्क वायु से अधिक (नम वायु का घनत्व कम) |
| दाब | स्थिर ताप पर दाब बदलने से गैस में चाल लगभग नहीं बदलती |
| माध्यम | ठोस > द्रव > गैस |
ताप और ऊष्मा के अणुगति वाले पक्ष के लिए ऊष्मा, ताप और तापमान नोट देखें — ताप बढ़ने पर अणु तेज़ चलते हैं, इसलिए ध्वनि भी तेज़ चलती है।
13. तरंग के अभिलक्षण — आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य, आयाम
| राशि | परिभाषा | मात्रक |
|---|---|---|
| तरंगदैर्ध्य (λ) | दो क्रमागत संपीडनों (या विरलनों) के बीच की दूरी | मीटर (m) |
| आवृत्ति (f या ν) | एक सेकंड में होने वाले दोलनों की संख्या | हर्ट्ज़ (Hz) |
| आवर्तकाल (T) | एक दोलन में लगा समय; T = 1/f | सेकंड (s) |
| आयाम (A) | माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन | मीटर (m) |
| तरंग चाल (v) | v = f × λ | m/s |
ध्वनि के तीन अभिलक्षण
| अभिलक्षण | किस पर निर्भर | उदाहरण |
|---|---|---|
| तारत्व (Pitch) | आवृत्ति — अधिक आवृत्ति = तीक्ष्ण (ऊँचा) तारत्व | महिलाओं/बच्चों की आवाज़ का तारत्व सामान्यतः पुरुषों से अधिक; मच्छर की भिनभिनाहट तीक्ष्ण, शेर की दहाड़ भारी |
| प्रबलता (Loudness) | आयाम — अधिक आयाम = प्रबल ध्वनि | ढोल ज़ोर से पीटने पर आवाज़ तेज़; प्रबलता का मात्रक डेसिबल |
| गुणता / ध्वनि-गुण (Quality, Timbre) | तरंग का आकार (मूल स्वर के साथ अधिस्वर) | एक ही स्वर पर सितार और बाँसुरी को अलग पहचानना; आँख बंद कर किसी परिचित की आवाज़ पहचानना |
हल किए हुए उदाहरण
| प्रश्न | हल |
|---|---|
| ध्वनि की आवृत्ति 500 Hz और चाल 340 m/s है। तरंगदैर्ध्य? | λ = v/f = 340/500 = 0.68 m |
| किसी तरंग का आवर्तकाल 0.02 s है। आवृत्ति? | f = 1/T = 1/0.02 = 50 Hz |
| बिजली चमकने के 3 s बाद गर्जन सुनाई दी (v = 340 m/s)। बादल की दूरी? | दूरी = 340 × 3 = 1020 m ≈ 1 km (प्रकाश का समय नगण्य) |
14. श्रव्य, अवश्रव्य और पराश्रव्य ध्वनि
| प्रकार | आवृत्ति | उदाहरण / स्रोत |
|---|---|---|
| अवश्रव्य (Infrasonic) | 20 Hz से कम | भूकंप के झटकों से पहले उत्पन्न तरंगें, हाथी और व्हेल की कुछ ध्वनियाँ, गैंडा भी अवश्रव्य से संचार करता है |
| श्रव्य (Audible) | 20 Hz – 20 kHz | मनुष्य की सामान्य श्रवण-सीमा (बच्चों में ऊपरी सीमा अधिक, उम्र के साथ घटती) |
| पराश्रव्य (Ultrasonic) | 20 kHz से अधिक | चमगादड़, डॉल्फ़िन, पॉरपॉइज़ |
पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग
| उपयोग | कैसे |
|---|---|
| SONAR (Sound Navigation And Ranging) | जहाज़ से पराश्रव्य स्पंद भेजकर समुद्र की गहराई, पनडुब्बी, चट्टान, मछलियों के झुंड का पता लगाना |
| अल्ट्रासोनोग्राफी | गर्भस्थ शिशु, यकृत, पित्ताशय, गुर्दे की जाँच |
| इकोकार्डियोग्राफी (ECHO) | हृदय की गति और संरचना की जाँच |
| गुर्दे की पथरी तोड़ना | पराश्रव्य तरंगों से पथरी के छोटे-छोटे टुकड़े |
| सफ़ाई | सर्पिल नलियों, विषम आकार के पुर्ज़ों, इलेक्ट्रॉनिक भागों की सफ़ाई |
| धातु में दरार पता करना | दरार से पराश्रव्य तरंगें परावर्तित होकर दोष बताती हैं |
| चमगादड़ का मार्ग-ज्ञान | पराश्रव्य चीख भेजकर परावर्तित तरंगों से अवरोध/शिकार पहचानना (प्रतिध्वनि-निर्धारण) |
SONAR का उदाहरण: जहाज़ से भेजा गया पराश्रव्य स्पंद समुद्र-तल से परावर्तित होकर 2 s बाद लौटा। समुद्री जल में चाल 1500 m/s हो तो गहराई = (1500 × 2)/2 = 1500 m (ध्वनि जाती भी है और लौटती भी है, इसलिए 2 से भाग)।
15. प्रतिध्वनि, अनुरणन और ध्वनि का बहुल परावर्तन
ध्वनि का किसी बड़े अवरोध (दीवार, पहाड़, इमारत) से परावर्तित होकर दोबारा सुनाई देना प्रतिध्वनि (Echo) है। मस्तिष्क में ध्वनि का प्रभाव लगभग 0.1 s रहता है, इसलिए परावर्तित ध्वनि कम से कम 0.1 s बाद लौटे तभी अलग सुनाई देगी।
न्यूनतम दूरी: 0.1 s में ध्वनि जाकर लौटती है। वायु में लगभग 344 m/s लें तो कुल पथ = 344 × 0.1 = 34.4 m; दूरी = 34.4/2 ≈ 17.2 m (लगभग 17 m)। ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है, इसलिए यह न्यूनतम दूरी भी थोड़ी बढ़ जाती है।
प्रतिध्वनि से दूरी का सूत्र: d = (v × t) / 2। उदाहरण: पहाड़ के सामने ताली बजाने पर प्रतिध्वनि 2 s बाद सुनाई दी (v = 340 m/s) → d = 340 × 2 / 2 = 340 m।
| अवधारणा | अर्थ / उदाहरण |
|---|---|
| अनुरणन (Reverberation) | बड़े बंद हॉल में बार-बार परावर्तन से ध्वनि का देर तक बने रहना; रोकने के लिए दीवारों पर ध्वनि-अवशोषक (पर्दे, फ़ाइबर बोर्ड, गद्देदार कुर्सियाँ) |
| स्टेथोस्कोप | नली में ध्वनि का बहुल परावर्तन |
| मेगाफ़ोन, लाउडहेलर, शहनाई, तुरही | ध्वनि को एक दिशा में भेजने हेतु बहुल परावर्तन |
16. अनुनाद, डॉप्लर प्रभाव, डेसिबल और ध्वनि बूम
अनुनाद (Resonance)
जब किसी वस्तु पर लगाए गए आवर्ती बल की आवृत्ति उस वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, तो वह बहुत बड़े आयाम से कंपन करने लगती है — यह अनुनाद है।
| उदाहरण | व्याख्या |
|---|---|
| पुल पार करते समय सैनिक कदम-ताल तोड़ देते हैं | कदम-ताल की आवृत्ति पुल की प्राकृतिक आवृत्ति से मिलने पर अनुनाद से पुल को क्षति का खतरा |
| रेडियो को किसी स्टेशन पर ट्यून करना | परिपथ की आवृत्ति को स्टेशन की आवृत्ति के बराबर करना (विद्युत अनुनाद) |
डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)
स्रोत और श्रोता के बीच सापेक्ष गति होने पर सुनाई देने वाली आवृत्ति (तारत्व) बदली हुई प्रतीत होती है। स्रोत पास आए तो आवृत्ति अधिक (तीक्ष्ण), दूर जाए तो कम (भारी) सुनाई देती है। उदाहरण: पास आती रेलगाड़ी या एम्बुलेंस की सीटी तीक्ष्ण और दूर जाती हुई भारी लगती है। उपयोग: पुलिस का स्पीड-गन/रडार (वाहन की चाल), डॉप्लर अल्ट्रासाउंड (रक्त-प्रवाह), मौसम रडार, खगोल में तारों/आकाशगंगाओं की गति का अनुमान (प्रकाश में भी डॉप्लर प्रभाव होता है)।
डेसिबल (dB) और ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि की प्रबलता डेसिबल में मापी जाती है — फुसफुसाहट लगभग 20–30 dB, सामान्य बातचीत लगभग 60 dB।
डेसिबल पैमाना लघुगणकीय है — 10 dB बढ़ने पर तीव्रता 10 गुना हो जाती है। लगभग 80 dB से अधिक शोर में लंबे समय तक रहने से श्रवण-क्षमता को हानि हो सकती है; यह ध्वनि प्रदूषण है।
17. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: रियर-व्यू में अवतल या उत्तल?
वाहन का पश्च-दृश्य दर्पण उत्तल होता है (सीधा, छोटा प्रतिबिंब, बड़ा दृष्टि-क्षेत्र)। हेडलाइट/टॉर्च का परावर्तक अवतल होता है। दोनों को उलटने वाला विकल्प परीक्षा का सबसे आम जाल है।
Trap 2: निकट-दृष्टि = अवतल, दूर-दृष्टि = उत्तल
"निकट-दृष्टि" में व्यक्ति को निकट का दिखता है, दूर का नहीं — सुधार अवतल लेंस। नाम उस चीज़ का है जो दिखती है, दोष का नहीं। दृष्टिवैषम्य = बेलनाकार; जरा-दूरदर्शिता (दोनों दोष) = द्विफोकसी।
Trap 3: प्रकीर्णन बनाम अपवर्तन बनाम पूर्ण आंतरिक परावर्तन
| घटना | सही कारण | आम गलत विकल्प |
|---|---|---|
| आकाश नीला | प्रकीर्णन | परावर्तन / अपवर्तन |
| तारे टिमटिमाना | वायुमंडलीय अपवर्तन | प्रकीर्णन |
| हीरे की चमक | पूर्ण आंतरिक परावर्तन | प्रकीर्णन / वर्ण-विक्षेपण |
| इंद्रधनुष | अपवर्तन + वर्ण-विक्षेपण + आंतरिक परावर्तन | केवल प्रकीर्णन |
| सूर्यास्त में लालिमा | प्रकीर्णन | वर्ण-विक्षेपण |
| ऑप्टिकल फाइबर | पूर्ण आंतरिक परावर्तन | अपवर्तन |
Trap 4: लाल रंग — तरंगदैर्ध्य अधिक, पर प्रकीर्णन और विचलन कम
लाल: तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक, आवृत्ति सबसे कम, विचलन सबसे कम, प्रकीर्णन सबसे कम, काँच में चाल सबसे अधिक। बैंगनी इसका ठीक उल्टा। निर्वात में दोनों की चाल बराबर।
Trap 5: ध्वनि की चाल — प्रकाश से उल्टा क्रम
प्रकाश सघन माध्यम में धीमा होता है (निर्वात > वायु > जल > काँच)। ध्वनि ठोस में तेज़ होती है (स्टील > जल > वायु) और निर्वात में चलती ही नहीं।
Trap 6: तारत्व बनाम प्रबलता
तारत्व = आवृत्ति; प्रबलता = आयाम; गुणता = तरंग-रूप। "प्रबलता आवृत्ति पर निर्भर" वाला कथन गलत है।
Trap 7: अवश्रव्य बनाम पराश्रव्य
अवश्रव्य = 20 Hz से कम (भूकंप, हाथी, व्हेल); पराश्रव्य = 20 kHz से अधिक (चमगादड़, डॉल्फ़िन, SONAR)। "चमगादड़ अवश्रव्य ध्वनि से उड़ान-मार्ग तय करता है" — गलत।
Trap 8: प्रतिध्वनि में 2 से भाग देना
प्रतिध्वनि/SONAR में ध्वनि जाती और लौटती है, इसलिए d = vt/2। बिजली-गर्जन वाले प्रश्न में ध्वनि केवल एक ओर चलती है — वहाँ d = vt (2 से भाग नहीं)।
Trap 9: लेंस की क्षमता में cm को m में बदलना
P = 1/f में f मीटर में ही लें। f = 20 cm → P = 1/0.2 = 5 D, न कि 1/20 = 0.05 D। अवतल लेंस की क्षमता के आगे ऋण चिह्न अवश्य लगाएँ।
Trap 10: अपवर्तन में क्या नहीं बदलता
माध्यम बदलने पर प्रकाश की आवृत्ति (और इसलिए रंग) नहीं बदलती; चाल और तरंगदैर्ध्य बदलते हैं।
18. Most-Asked रिवीज़न तालिका (45 तथ्य)
| # | प्रश्न / संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | प्रकाश किस प्रकार की तरंग है | विद्युतचुंबकीय, अनुप्रस्थ |
| 2 | निर्वात में प्रकाश की चाल | लगभग 3×10⁸ m/s |
| 3 | सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक | लगभग 8 मिनट 20 सेकंड |
| 4 | प्रकाश की अनुप्रस्थ प्रकृति सिद्ध करने वाली घटना | ध्रुवण |
| 5 | परावर्तन का नियम | आपतन कोण = परावर्तन कोण |
| 6 | समतल दर्पण का प्रतिबिंब | आभासी, सीधा, समान आकार, पार्श्व उत्क्रमित |
| 7 | पूरा प्रतिबिंब देखने हेतु समतल दर्पण की न्यूनतम लंबाई | ऊँचाई की आधी |
| 8 | गोलीय दर्पण में f और R का संबंध | f = R/2 |
| 9 | शेविंग दर्पण | अवतल |
| 10 | वाहन का रियर-व्यू दर्पण | उत्तल |
| 11 | हेडलाइट/टॉर्च/सर्चलाइट परावर्तक | अवतल (बल्ब फोकस पर) |
| 12 | उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब | सदैव आभासी, सीधा, छोटा |
| 13 | अपवर्तन का कारण | माध्यमों में प्रकाश की चाल का अंतर |
| 14 | निरपेक्ष अपवर्तनांक | n = c/v (मात्रकहीन) |
| 15 | हीरे का अपवर्तनांक | लगभग 2.42 |
| 16 | तारों का टिमटिमाना | वायुमंडलीय अपवर्तन |
| 17 | पानी में छड़ मुड़ी दिखना | अपवर्तन |
| 18 | मरीचिका | अपवर्तन + पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
| 19 | पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें | सघन → विरल, आपतन कोण > क्रांतिक कोण |
| 20 | हीरे की चमक / ऑप्टिकल फाइबर | पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
| 21 | लेंस की क्षमता का सूत्र और मात्रक | P = 1/f (m); डायोप्टर |
| 22 | −2 D क्षमता का लेंस | अवतल, f = −50 cm |
| 23 | आँख में प्रतिबिंब बनता है | रेटिना पर — वास्तविक, उल्टा |
| 24 | आँख में प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है | परितारिका (पुतली के माध्यम से) |
| 25 | समंजन क्षमता | पक्ष्माभी पेशियाँ (फोकस दूरी बदलना) |
| 26 | स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी | 25 cm |
| 27 | निकट-दृष्टि दोष | अवतल लेंस |
| 28 | दूर-दृष्टि दोष | उत्तल लेंस |
| 29 | जरा-दूरदर्शिता (दोनों दोष) | द्विफोकसी लेंस |
| 30 | दृष्टिवैषम्य | बेलनाकार लेंस |
| 31 | दृष्टि-निर्बंध | लगभग 1/16 s — सिनेमा |
| 32 | प्रिज़्म से श्वेत प्रकाश का बँटना | वर्ण-विक्षेपण (न्यूटन) |
| 33 | सबसे अधिक / सबसे कम विचलन | बैंगनी / लाल |
| 34 | आकाश नीला | प्रकीर्णन |
| 35 | खतरे के संकेत लाल क्यों | लाल का प्रकीर्णन न्यूनतम |
| 36 | पेरिस्कोप का सिद्धांत | परावर्तन (दो समतल दर्पण 45° पर) |
| 37 | ध्वनि किस प्रकार की तरंग (वायु में) | यांत्रिक, अनुदैर्ध्य |
| 38 | ध्वनि की चाल सबसे अधिक | ठोस (जैसे स्टील) में |
| 39 | वायु में ध्वनि की चाल (20 °C) | लगभग 343 m/s |
| 40 | मनुष्य की श्रव्य परास | 20 Hz – 20 kHz |
| 41 | SONAR / चमगादड़ | पराश्रव्य तरंगें |
| 42 | स्पष्ट प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी | लगभग 17 m |
| 43 | स्टेथोस्कोप | ध्वनि का बहुल परावर्तन |
| 44 | पास आती सीटी का तारत्व बढ़ना | डॉप्लर प्रभाव |
| 45 | ध्वनि की प्रबलता का मात्रक | डेसिबल (dB) |
19. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
प्रकाश-ध्वनि के प्रश्न कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न है:
- सीधा तथ्य: "निकट-दृष्टि दोष को किस लेंस से ठीक किया जाता है?" (अवतल लेंस) — "मनुष्य की श्रव्य परास क्या है?" (20 Hz – 20 kHz)
- उपकरण–सिद्धांत मिलान: "सूची-I: ऑप्टिकल फाइबर, पेरिस्कोप, SONAR, स्टेथोस्कोप — सूची-II: पूर्ण आंतरिक परावर्तन, समतल दर्पणों से परावर्तन, पराश्रव्य तरंगों की प्रतिध्वनि, ध्वनि का बहुल परावर्तन।"
- दैनिक जीवन का कारण: "खतरे के संकेत लाल रंग के क्यों होते हैं?" (लाल प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम) — "ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?"
- सरल संख्यात्मक: "−4 D क्षमता वाले लेंस की फोकस दूरी?" (−25 cm, अवतल) — "प्रतिध्वनि 3 s बाद सुनाई दी, v = 340 m/s, दीवार की दूरी?" (510 m)
- कथन-आधारित: "1. ध्वनि निर्वात में चल सकती है। 2. ध्वनि की चाल ठोस में सबसे अधिक होती है। कौन-सा सही है?" (केवल 2)
- "इनमें से कौन भिन्न है": "तारों का टिमटिमाना, पानी में पेंसिल मुड़ी दिखना, आकाश का नीला रंग, सूर्य का समय से पहले दिखना" — (आकाश नीला = प्रकीर्णन; बाकी अपवर्तन)
रणनीति: घटना वाले प्रश्नों में पहले तय करें कि प्रकाश लौटा (परावर्तन), मुड़ा (अपवर्तन), बँटा (वर्ण-विक्षेपण) या बिखरा (प्रकीर्णन)। संख्यात्मक प्रश्नों में पहले मात्रक बदलें (cm → m) और प्रतिध्वनि में 2 से भाग देना न भूलें।
20. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. दर्पण के उपयोग: "अवतल = अपना चेहरा बड़ा (शेविंग), उत्तल = उधर पीछे देखो (रियर-व्यू)।"
2. दृष्टि दोष: "निकट को अवतल, दूर को उत्तल" — "नि-अ, दू-उ"। दृष्टिवैषम्य = बेलनाकार ("वैषम्य में बेलन")।
3. रंग क्रम: VIBGYOR — "बैजानीहपीनाला" (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल)। Red = Raah lamba — लाल की तरंगदैर्ध्य लंबी, इसलिए कम बिखरता है।
4. ध्वनि की चाल: "ठोस द्रव गैस — ठो-द्र-गै, तेज़ से धीमा; निर्वात में शून्य।"
5. ध्वनि के अभिलक्षण: "तारत्व-आवृत्ति, प्रबलता-आयाम" — "ता-आवृ, प्र-आया"।
6. अव/परा: "अव = नीचे (20 Hz से कम) — हाथी भारी, नीचे की आवाज़; परा = पार (20 kHz से ऊपर) — चमगादड़ ऊपर उड़ता है।"
7. प्रतिध्वनि: "सत्रह मीटर, दसवाँ सेकंड" — 17 m, 0.1 s।
21. कथन अभ्यास
प्रकाश को चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। — गलत (प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंग है, निर्वात में भी चलता है)।
वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का प्रयोग होता है। — सही।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होता है। — गलत (आभासी और सीधा)।
तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है। — सही।
हीरे की चमक प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होती है। — गलत (पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण)।
उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। — सही।
निकट-दृष्टि दोष को उत्तल लेंस से ठीक किया जाता है। — गलत (अवतल लेंस से; उत्तल लेंस दूर-दृष्टि दोष के लिए)।
दृष्टिवैषम्य के सुधार के लिए बेलनाकार लेंस का प्रयोग होता है। — सही।
लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है, इसलिए खतरे के संकेत लाल होते हैं। — गलत (लाल का प्रकीर्णन सबसे कम होता है, इसलिए वह दूर तक दिखता है)।
ध्वनि की चाल जल में वायु की अपेक्षा अधिक होती है। — सही।
चमगादड़ अवश्रव्य तरंगों की सहायता से अवरोधों का पता लगाता है। — गलत (पराश्रव्य तरंगों से)।
ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर और प्रबलता उसके आयाम पर निर्भर करती है। — सही।
22. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- प्रकाश: विद्युतचुंबकीय अनुप्रस्थ तरंग; निर्वात में लगभग 3×10⁸ m/s; सूर्य से पृथ्वी ≈ 8 मिनट 20 सेकंड
- परावर्तन: आपतन कोण = परावर्तन कोण; समतल दर्पण — आभासी, सीधा, समान, पार्श्व उत्क्रमित
- अवतल: शेविंग, दंत-चिकित्सक, हेडलाइट, सौर भट्टी; उत्तल: रियर-व्यू
- f = R/2; दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f; लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f
- अपवर्तन: चाल का अंतर; n = c/v; जल 1.33, काँच ≈ 1.5, हीरा 2.42
- टिमटिमाना, मुड़ी छड़, उथला तालाब, जल्दी सूर्योदय — अपवर्तन
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन: सघन → विरल, कोण > क्रांतिक; हीरा, ऑप्टिकल फाइबर, मरीचिका
- P = 1/f (m), डायोप्टर; उत्तल +, अवतल −
- निकट-दृष्टि अवतल; दूर-दृष्टि उत्तल; जरा-दूरदर्शिता द्विफोकसी; दृष्टिवैषम्य बेलनाकार
- स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 cm; दृष्टि-निर्बंध ≈ 1/16 s
- VIBGYOR; लाल — अधिकतम तरंगदैर्ध्य, न्यूनतम विचलन व प्रकीर्णन
- आकाश नीला, लाल सूर्यास्त, लाल खतरा-संकेत — प्रकीर्णन; इंद्रधनुष — सूर्य पीठ पीछे
- ध्वनि: यांत्रिक अनुदैर्ध्य; निर्वात में नहीं; ठोस > द्रव > गैस; वायु ≈ 330–343 m/s
- 20 Hz – 20 kHz श्रव्य; कम = अवश्रव्य (भूकंप, हाथी), अधिक = पराश्रव्य (SONAR, चमगादड़)
- प्रतिध्वनि ≥ 17 m (0.1 s); d = vt/2; अनुनाद — सैनिक कदम-ताल तोड़ते हैं; डॉप्लर — पास आती सीटी तीक्ष्ण
23. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 8 (दृष्टि दोष तालिका), खंड 9 (प्रकीर्णन) और खंड 17 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। इसके बाद अगला भौतिकी नोट विद्युत और चुंबकत्व पढ़ें, और पूरे सामान्य विज्ञान को परीक्षा-स्तर पर परखने के लिए SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ या RRB NTPC CBT-1 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
24. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
प्रकाश और ध्वनि दोनों तरंगें हैं, पर स्वभाव में उलटी — प्रकाश विद्युतचुंबकीय, अनुप्रस्थ और माध्यम से स्वतंत्र है, जबकि ध्वनि यांत्रिक, अनुदैर्ध्य और माध्यम पर निर्भर। परीक्षा में प्रकाश वाले भाग का केंद्र दर्पण-लेंस के उपयोग, दृष्टि दोष-सुधार की जोड़ी, और "परावर्तन-अपवर्तन-पूर्ण आंतरिक परावर्तन-प्रकीर्णन" की घटनाओं में भेद है। ध्वनि वाले भाग में चाल का क्रम, श्रव्य परास, पराश्रव्य के उपयोग, प्रतिध्वनि की 17 m वाली सीमा और तारत्व-प्रबलता का अंतर सबसे ज़्यादा काम आते हैं। संख्यात्मक प्रश्नों के लिए केवल तीन सूत्र — P = 1/f, v = fλ और d = vt/2 — पक्के कर लें।
प्रकाश: 3×10⁸ m/s, माध्यम नहीं चाहिए | उत्तल = रियर-व्यू, अवतल = शेविंग | निकट-अवतल, दूर-उत्तल | नीला आकाश = प्रकीर्णन, हीरा = पूर्ण आंतरिक परावर्तन | ध्वनि: ठोस > द्रव > गैस, 20 Hz–20 kHz, प्रतिध्वनि 17 m
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“प्रकाश और ध्वनि — परावर्तन, अपवर्तन, लेंस, दृष्टि दोष, प्रकीर्णन, प्रतिध्वनि — SSC/रेलवे/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- प्रकाश और ध्वनि — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- मात्रक, गति, बल, गुरुत्वाकर्षण व ऊर्जा — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- ऊष्मा, ताप व तापमान — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- विद्युत और चुंबकत्व — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3×10⁸ m/s होती है, जो किसी भी माध्यम में उसकी चाल से अधिक है। जल में यह लगभग 2.25×10⁸ m/s और काँच में लगभग 2×10⁸ m/s रह जाती है।
लगभग 8 मिनट 20 सेकंड (लगभग 500 सेकंड)। सूर्य-पृथ्वी की औसत दूरी लगभग 1.5×10¹¹ m को प्रकाश की चाल 3×10⁸ m/s से भाग देने पर यह समय मिलता है।
उत्तल दर्पण। यह सदैव सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है और इसका दृष्टि-क्षेत्र बड़ा होता है, इसलिए चालक पीछे का अधिक भाग देख पाता है।
निकट-दृष्टि दोष (दूर का धुँधला) अवतल लेंस से और दूर-दृष्टि दोष (पास का धुँधला) उत्तल लेंस से ठीक होता है। दृष्टिवैषम्य के लिए बेलनाकार और जरा-दूरदर्शिता में दोनों दोष हों तो द्विफोकसी लेंस लगता है।
लेंस की क्षमता उसकी फोकस दूरी (मीटर में) का व्युत्क्रम है, P = 1/f। इसका मात्रक डायोप्टर (D) है; उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक होती है।
वायु के अणु छोटी तरंगदैर्ध्य वाले नीले प्रकाश का लाल की तुलना में बहुत अधिक प्रकीर्णन करते हैं, इसलिए आकाश नीला दिखता है। वायुमंडल न होने से अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला दिखता है।
तारों का प्रकाश वायुमंडल की लगातार बदलती परतों से गुज़रते हुए वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण बार-बार दिशा बदलता है। तारे बिंदु-स्रोत जैसे हैं, इसलिए उनकी चमक घटती-बढ़ती दिखती है; ग्रह पास और विस्तृत स्रोत हैं, इसलिए नहीं टिमटिमाते।
हीरे का अपवर्तनांक लगभग 2.42 और क्रांतिक कोण लगभग 24° है। भीतर गया प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करता है, इसलिए हीरा चमकता है।
ठोस में सबसे अधिक, फिर द्रव में और गैस में सबसे कम। वायु में यह लगभग 330–343 m/s (ताप पर निर्भर), जल में लगभग 1500 m/s और स्टील में लगभग 5000–6000 m/s है; निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
लगभग 17 मीटर। ध्वनि का प्रभाव मस्तिष्क में लगभग 0.1 s रहता है; इतने समय में ध्वनि वायु में लगभग 34 m चलकर जाती और लौटती है, इसलिए परावर्तक सतह कम से कम लगभग 17 m दूर होनी चाहिए।
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