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सामान्य विज्ञान

मानव शरीर के तंत्र — पाचन, श्वसन, हृदय-रक्त, वृक्क, मस्तिष्क, हार्मोन व अस्थियाँ — SSC/रेलवे/CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
27 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, अग्निवीर व RSSB CET पाठ्यक्रम की सामान्य विज्ञान इकाई; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10) और SI मात्रक प्रणाली। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: मानव शरीर के पाचन तंत्र में भोजन का पाचन मुख से शुरू होता है, जहाँ लार का एंजाइम टायलिन (लार एमाइलेज़) मंड को शर्करा में बदलता है; आमाशय में HCl और पेप्सिन प्रोटीन पर काम करते हैं और छोटी आँत में पाचन पूरा होकर अधिकतम अवशोषण होता है। यकृत (Liver) शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है और पित्त बनाता है, जिसमें कोई एंजाइम नहीं होता पर यह वसा का इमल्सीकरण करता है; अग्न्याशय ट्रिप्सिन, लाइपेज़ और एमाइलेज़ बनाता है। हृदय में 4 कक्ष होते हैं; धमनियाँ रक्त हृदय से दूर और शिराएँ हृदय की ओर ले जाती हैं — अपवाद फुफ्फुसीय धमनी (अशुद्ध रक्त) और फुफ्फुसीय शिरा (शुद्ध रक्त)। सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg और नाड़ी लगभग 72 प्रति मिनट होती है; RBC की आयु लगभग 120 दिन है और ये लाल अस्थि मज्जा में बनती हैं। ABO रक्त समूह की खोज कार्ल लैंडस्टीनर ने की — O सर्वदाता और AB सर्वग्राही है। नेफ्रॉन वृक्क की इकाई है, अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन बनाता है और प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण मेरुरज्जु करता है। पीयूष ग्रंथि को "मास्टर ग्रंथि" कहते हैं, थायरॉक्सिन के लिए आयोडीन ज़रूरी है (कमी से घेंघा), एड्रेनालिन "लड़ो या भागो" हार्मोन है और इंसुलिन की कमी से मधुमेह होता है। वयस्क में 206 हड्डियाँ होती हैं — सबसे लंबी फीमर (जाँघ) और सबसे छोटी स्टेपीज़ (मध्य कर्ण); शरीर का सबसे बड़ा अंग त्वचा और सबसे कठोर पदार्थ दाँतों का इनैमल है।


संक्षिप्त उत्तर

तंत्रमुख्य अंगसबसे अधिक पूछे जाने वाले तथ्य
पाचन तंत्रमुख, आमाशय, यकृत, अग्न्याशय, छोटी आँतटायलिन, पेप्सिन, HCl, पित्त, ट्रिप्सिन; अधिकतम अवशोषण छोटी आँत में
श्वसन तंत्रनासिका, श्वासनली, फेफड़े, डायाफ्रामगैस विनिमय कूपिकाओं में; O₂ वहन हीमोग्लोबिन से
परिसंचरण तंत्रहृदय, धमनी, शिरा, केशिका, रक्त4 कक्ष; ≈120/80 mmHg; ≈72 नाड़ी; RBC ≈120 दिन
उत्सर्जन तंत्रवृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशयनेफ्रॉन इकाई; मुख्य अपशिष्ट यूरिया; डायलिसिस
तंत्रिका तंत्रमस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाएँप्रमस्तिष्क — बुद्धि; अनुमस्तिष्क — संतुलन; मेडुला — अनैच्छिक क्रियाएँ
अंतःस्रावी तंत्रपीयूष, थायरॉइड, अधिवृक्क, अग्न्याशयमास्टर ग्रंथि — पीयूष; थायरॉक्सिन — आयोडीन; इंसुलिन — मधुमेह
कंकाल तंत्रअस्थियाँ, उपास्थि, जोड़वयस्क में 206 हड्डियाँ; फीमर सबसे लंबी; स्टेपीज़ सबसे छोटी
तथ्यउत्तर
सबसे बड़ी ग्रंथियकृत
सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथिथायरॉइड
सबसे बड़ा अंगत्वचा
रक्त परिसंचरण की खोजविलियम हार्वे (1628)
ABO रक्त समूह की खोजकार्ल लैंडस्टीनर (1900)
इंसुलिन की खोजबैंटिंग व बेस्ट (1921)
सामान्य शरीर तापलगभग 37 °C (98.6 °F)
रक्त का pHलगभग 7.4 (हल्का क्षारीय)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

सामान्य विज्ञान के जीव विज्ञान भाग में मानव शरीर सबसे बड़ा और सबसे नियमित रूप से पूछा जाने वाला अध्याय है। NCERT कक्षा 10 के "जैव प्रक्रम" और "नियंत्रण एवं समन्वय" तथा कक्षा 11 के मानव शरीर-क्रिया विज्ञान वाले अध्यायों से एंजाइम, हार्मोन, रक्त समूह, अस्थियाँ और "सबसे बड़ा/छोटा" जैसे तथ्य बार-बार दिखते हैं। कोशिका और ऊतक का आधार समझने के लिए पहले कोशिका, ऊतक और आनुवंशिकता वाला नोट देख लें।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • SSC CGL / CHSL / MTS / GD — अंग ↔ कार्य, ग्रंथि ↔ हार्मोन, रक्त समूह, अस्थियों की संख्या
  • RRB NTPC — एंजाइम ↔ भोजन घटक, हृदय और रक्त वाहिनियाँ, मस्तिष्क के भाग
  • अग्निवीर (थल, नौसेना, वायुसेना) — NCERT कक्षा 10 स्तर के सीधे प्रश्न
  • राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी — कथन-आधारित, मिलान और "सबसे" वाले प्रश्न

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. एंजाइम ↔ स्रोत ↔ किस पर कार्य ("पेप्सिन किसका पाचन करता है?")
  2. हार्मोन ↔ ग्रंथि ↔ कमी से रोग ("घेंघा किसकी कमी से?")
  3. धमनी बनाम शिरा — अपवाद वाले प्रश्न
  4. रक्त समूह — सर्वदाता/सर्वग्राही, Rh कारक
  5. मस्तिष्क का भाग ↔ कार्य ("संतुलन कौन बनाता है?")
  6. "सबसे बड़ा / सबसे छोटा / सबसे लंबा" वाले एक-पंक्ति तथ्य

3. पाचन तंत्र

आहारनाल का क्रम: मुख → ग्रसनी → ग्रासनली → आमाशय → छोटी आँत (ग्रहणी, मध्यांत्र, क्षुद्रांत्र) → बड़ी आँत → मलाशय → गुदा। भोजन को आगे खिसकाने वाली पेशियों की लहर जैसी गति को क्रमाकुंचन (Peristalsis) कहते हैं। पाचन में सहायक ग्रंथियाँ हैं — लार ग्रंथियाँ, यकृत और अग्न्याशय।

3.1 अंग, स्राव और एंजाइम

अंग / ग्रंथिस्राव / एंजाइमकार्य
मुख (लार ग्रंथियाँ — 3 जोड़ी)लार — टायलिन (लार एमाइलेज़)मंड (स्टार्च) → माल्टोज़ (शर्करा); कार्बोहाइड्रेट का पाचन यहीं से शुरू
आमाशयहाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)माध्यम अम्लीय बनाना (पेप्सिन सक्रिय), भोजन के साथ आए जीवाणुओं को मारना
आमाशयपेप्सिनप्रोटीन → पेप्टोन (छोटे टुकड़े); प्रोटीन का पाचन यहीं से शुरू
आमाशयश्लेष्मा (म्यूकस)आमाशय की भीतरी दीवार को अम्ल से बचाना
आमाशय (शिशुओं में)रेनिनदूध के प्रोटीन का पाचन (NCERT कक्षा 11)
यकृतपित्त (पित्ताशय में संचित)एंजाइम नहीं; वसा का इमल्सीकरण (बड़ी बूँदों को छोटी में तोड़ना), माध्यम क्षारीय बनाना
अग्न्याशयअग्न्याशयी रस — ट्रिप्सिनप्रोटीन का पाचन
अग्न्याशयलाइपेज़इमल्सीकृत वसा → वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल
अग्न्याशयअग्न्याशयी एमाइलेज़मंड का पाचन
छोटी आँतआंत्र रसपाचन पूरा: प्रोटीन → अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट → ग्लूकोज़, वसा → वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल
छोटी आँतदीर्घरोम (विलाई)अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ाना — पचे भोजन का अधिकतम अवशोषण
बड़ी आँत—जल और कुछ लवणों का अवशोषण; अपचित भोजन मल के रूप में बाहर

3.2 पाचन से जुड़े अन्य तथ्य

तथ्यउत्तर
आहारनाल का सबसे लंबा भागछोटी आँत
छोटी आँत का पहला भागग्रहणी (ड्यूओडिनम) — यहाँ पित्त और अग्न्याशयी रस आते हैं
पित्त का संचयपित्ताशय (Gall Bladder)
यकृत में ग्लूकोज़ का संचयग्लाइकोजन के रूप में
यूरिया का निर्माणयकृत में (वृक्क केवल बाहर निकालते हैं)
अग्न्याशय की विशेषतामिश्रित ग्रंथि — बहिःस्रावी (पाचक रस) और अंतःस्रावी (इंसुलिन, ग्लूकागॉन) दोनों
वयस्क के दाँत32 (दूध के दाँत 20); प्रति आधे जबड़े में कृंतक 2, रदनक 1, अग्रचर्वणक 2, चर्वणक 3
अम्लता (एसिडिटी) में राहतप्रतिअम्ल (एंटासिड) — जैसे मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड), क्षारकीय पदार्थ
अवशेषी अंगपरिशेषिका (एपेंडिक्स)

4. श्वसन तंत्र

श्वसन मार्ग: नासाद्वार → नासिका गुहा → ग्रसनी → कंठ (स्वरयंत्र, Larynx) → श्वासनली (उपास्थि के छल्ले, जिससे यह पिचकती नहीं) → श्वसनी → श्वसनिकाएँ → कूपिकाएँ (Alveoli)। कूपिकाओं में रक्त केशिकाओं के साथ O₂ और CO₂ का विनिमय होता है। दायाँ फेफड़ा 3 पालियों और बायाँ 2 पालियों वाला होता है।

4.1 साँस लेना और छोड़ना

क्रियाडायाफ्रामपसलियाँवक्ष गुहा
अंतःश्वसन (साँस लेना)संकुचित होकर चपटा, नीचेऊपर व बाहरआयतन बढ़ता है — वायु अंदर
उच्छ्वसन (साँस छोड़ना)शिथिल होकर गुंबदाकार, ऊपरनीचे व अंदरआयतन घटता है — वायु बाहर

विश्राम की अवस्था में एक स्वस्थ वयस्क लगभग 12–16 बार प्रति मिनट साँस लेता है (NCERT कक्षा 11)। श्वसन (कोशिका में भोजन का ऑक्सीकरण) और साँस लेना (गैसों का आदान-प्रदान) अलग बातें हैं।

4.2 वायवीय बनाम अवायवीय श्वसन

पहला चरण — ग्लूकोज़ (6 कार्बन) का पाइरुवेट (3 कार्बन) में टूटना — कोशिकाद्रव्य में होता है; आगे का मार्ग ऑक्सीजन की उपलब्धता पर निर्भर है।

आधारवायवीय (Aerobic)अवायवीय (Anaerobic)
ऑक्सीजनआवश्यकआवश्यक नहीं
स्थान (पाइरुवेट के बाद)माइटोकॉन्ड्रियाकोशिकाद्रव्य
अंतिम उत्पादCO₂ + H₂O + ऊर्जायीस्ट में — इथेनॉल + CO₂ (किण्वन); पेशियों में — लैक्टिक अम्ल
ऊर्जाबहुत अधिकबहुत कम
उदाहरणमनुष्य व अधिकांश जीवयीस्ट, कुछ जीवाणु; अधिक व्यायाम में पेशियाँ

पेशियों में ऐंठन: तेज़ दौड़ में ऑक्सीजन की कमी से पेशियों में लैक्टिक अम्ल जमा होता है, जिससे क्रैम्प (ऐंठन) होती है।

4.3 गैसों का परिवहन

  • O₂ — मुख्यतः RBC के हीमोग्लोबिन (लौहयुक्त वर्णक) से बँधकर।
  • CO₂ — जल में अधिक घुलनशील होने के कारण अधिकांशतः घुले रूप (मुख्यतः बाइकार्बोनेट) में प्लाज़्मा द्वारा।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हीमोग्लोबिन से O₂ की तुलना में कहीं अधिक मज़बूती से जुड़ती है, इसलिए बंद कमरे में अँगीठी जलाना ख़तरनाक है।

5. परिसंचरण तंत्र

रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे (1628) ने की। मानव हृदय एक पेशीय अंग है, जो वक्ष गुहा में दोनों फेफड़ों के बीच थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है और हृदयावरण (पेरिकार्डियम) से घिरा रहता है।

5.1 हृदय की संरचना

कक्षक्या आता है / कहाँ जाता है
दायाँ आलिंदशरीर से अशुद्ध (विऑक्सीजनित) रक्त महाशिराओं द्वारा आता है
दायाँ निलयअशुद्ध रक्त फुफ्फुसीय धमनी से फेफड़ों को भेजता है
बायाँ आलिंदफेफड़ों से शुद्ध (ऑक्सीजनित) रक्त फुफ्फुसीय शिराओं द्वारा आता है
बायाँ निलयशुद्ध रक्त महाधमनी (एओर्टा) से पूरे शरीर को भेजता है — इसकी दीवार सबसे मोटी
  • दोहरा परिसंचरण: एक चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुज़रता है (फुफ्फुसीय + दैहिक), जिससे शुद्ध और अशुद्ध रक्त मिलते नहीं।
  • कपाट (वाल्व): रक्त को उल्टी दिशा में बहने से रोकते हैं; इनके बंद होने से "लब-डब" ध्वनि आती है।
  • पेसमेकर: SA नोड (शिराअलिंद पर्व) — हृदय की धड़कन शुरू करता है।
  • अन्य जंतुओं में कक्ष: मछली 2, उभयचर 3, अधिकांश सरीसृप 3 (मगरमच्छ 4), पक्षी व स्तनधारी 4।

5.2 धमनी बनाम शिरा बनाम केशिका

आधारधमनी (Artery)शिरा (Vein)
दिशाहृदय से अंगों की ओरअंगों से हृदय की ओर
रक्तप्रायः शुद्ध (ऑक्सीजनित)प्रायः अशुद्ध (विऑक्सीजनित)
अपवादफुफ्फुसीय धमनी — अशुद्ध रक्त (हृदय → फेफड़े)फुफ्फुसीय शिरा — शुद्ध रक्त (फेफड़े → हृदय)
दीवारमोटी, लचीलीपतली
कपाटनहींहोते हैं (रक्त उल्टा न बहे)
रक्त दाबअधिककम
सबसे बड़ीमहाधमनी (एओर्टा)महाशिरा (वेना कावा)

केशिकाएँ (Capillaries) — सबसे पतली नलिकाएँ, दीवार एक कोशिका मोटी; यहीं रक्त और ऊतकों के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।

5.3 रक्तचाप और नाड़ी

तथ्यमान / विवरण
सामान्य रक्तचापलगभग 120/80 mmHg (प्रकुंचन/अनुशिथिलन — Systolic/Diastolic)
मापने का यंत्रस्फिग्मोमैनोमीटर
नाड़ी (विश्राम में, वयस्क)लगभग 72 प्रति मिनट (हृदय स्पंदन के बराबर)
हृदय की ध्वनि सुनने का यंत्रस्टेथोस्कोप
उच्च रक्तचापहाइपरटेंशन — धमनियों में अधिक दबाव

5.4 रक्त के घटक

एक वयस्क में लगभग 5 लीटर रक्त होता है। रक्त के दो भाग हैं — प्लाज़्मा (लगभग 55%), जिसमें लगभग 90% जल होता है, और रुधिराणु (लगभग 45%)।

घटकसंख्या (लगभग, प्रति mm³)मुख्य तथ्य
RBC (लाल रक्त कणिकाएँ / एरिथ्रोसाइट)50–55 लाखहीमोग्लोबिन से O₂ वहन; स्तनधारियों में केंद्रक-रहित; आयु लगभग 120 दिन; निर्माण लाल अस्थि मज्जा में; नष्ट होने का मुख्य स्थान प्लीहा ("RBC का कब्रिस्तान")
WBC (श्वेत रक्त कणिकाएँ / ल्यूकोसाइट)6000–8000रोगों से रक्षा; केंद्रक युक्त; सबसे अधिक न्यूट्रोफ़िल; लिम्फोसाइट एंटीबॉडी से जुड़े
प्लेटलेट्स (बिंबाणु / थ्रोम्बोसाइट)1.5–3.5 लाखरक्त का थक्का बनाना; डेंगू में संख्या घट जाती है
प्लाज़्मा प्रोटीन—फ़ाइब्रिनोजन (थक्का), ग्लोब्युलिन (प्रतिरक्षा), एल्ब्यूमिन (परासरण संतुलन)

थक्का बनना: चोट पर प्लेटलेट्स सक्रिय होते हैं और फ़ाइब्रिनोजन, फ़ाइब्रिन के धागों में बदलता है; इसमें विटामिन K और कैल्शियम आवश्यक हैं। रक्त का थक्का बनने के बाद बचा तरल सीरम कहलाता है। लसीका (Lymph) एक रंगहीन द्रव है जिसमें RBC नहीं होतीं।

5.5 रक्त समूह (ABO) और Rh कारक

कार्ल लैंडस्टीनर ने 1900 में ABO रक्त समूह की खोज की (1930 में नोबेल)। रक्त समूह RBC की सतह पर उपस्थित प्रतिजन (एंटीजन) से तय होता है, और प्लाज़्मा में उल्टी प्रकृति की प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) होती है।

रक्त समूहRBC पर एंटीजनप्लाज़्मा में एंटीबॉडीकिसे दे सकता हैकिससे ले सकता है
AAएंटी-BA, ABA, O
BBएंटी-AB, ABB, O
ABA और Bकोई नहींकेवल ABसभी से — सर्वग्राही
Oकोई नहींएंटी-A और एंटी-Bसभी को — सर्वदाताकेवल O

Rh कारक: लैंडस्टीनर और वीनर (1940) ने रीसस बंदर के रक्त में खोजा। जिनकी RBC पर यह एंटीजन होता है वे Rh+, बाकी Rh−। Rh− माता के गर्भ में Rh+ शिशु होने पर (विशेषकर दूसरी गर्भावस्था में) माता की एंटीबॉडी शिशु की RBC नष्ट कर सकती हैं — इसे एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस कहते हैं। व्यवहार में रक्त चढ़ाने से पहले ABO और Rh दोनों का मिलान (क्रॉस-मैचिंग) किया जाता है; "सर्वदाता/सर्वग्राही" केवल ABO एंटीजन के सिद्धांत पर आधारित परीक्षा-तथ्य है।


6. उत्सर्जन तंत्र

मनुष्य का मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट यूरिया है (मनुष्य यूरियोटेलिक है)। यूरिया यकृत में बनता है और वृक्क उसे रक्त से छानकर मूत्र के रूप में बाहर करते हैं। मार्ग: वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग।

संरचनाकार्य / तथ्य
वृक्क (गुर्दे)एक जोड़ी, सेम के बीज के आकार के; रक्त का निस्यंदन
नेफ्रॉन (वृक्काणु)वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई; प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख
ग्लोमेरुलस + बोमन संपुटरक्त का निस्यंदन (छनना)
वृक्क नलिकाग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और अधिकांश जल का पुनरवशोषण
निस्यंद की मात्रालगभग 180 लीटर प्रतिदिन, पर मूत्र केवल लगभग 1–1.5 लीटर (NCERT कक्षा 11)
मूत्र का पीला रंगयूरोक्रोम वर्णक
ADH (वैसोप्रेसिन)जल का पुनरवशोषण बढ़ाता है; कमी से डायबिटीज़ इंसिपिडस (बहुत अधिक पतला मूत्र)
गुर्दे की पथरीप्रायः कैल्शियम ऑक्सलेट के क्रिस्टल
डायलिसिस (अपोहन)वृक्क काम न करने पर कृत्रिम वृक्क मशीन से रक्त से अपशिष्ट निकालना
अन्य उत्सर्जी अंगत्वचा (पसीना), फेफड़े (CO₂), यकृत

7. तंत्रिका तंत्र

तंत्रिका तंत्र की इकाई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) है — शरीर की सबसे लंबी कोशिका। इसमें द्रुमिका (डेंड्राइट) सूचना ग्रहण करती है, कोशिकाकाय में केंद्रक होता है और तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) सूचना आगे भेजता है। दो न्यूरॉनों के बीच के संधि-स्थल को सिनैप्स कहते हैं, जहाँ संदेश रासायनिक रूप में (जैसे ऐसिटाइलकोलीन) आगे जाता है।

भागघटक
केंद्रीय तंत्रिका तंत्रमस्तिष्क व मेरुरज्जु
परिधीय तंत्रिका तंत्रकपाल तंत्रिकाएँ (12 जोड़ी) व मेरु तंत्रिकाएँ (31 जोड़ी)
स्वायत्त तंत्रिका तंत्रअनुकंपी व परानुकंपी — अनैच्छिक अंगों का नियंत्रण
मस्तिष्क की सुरक्षाखोपड़ी (कपाल), मस्तिष्कावरण (मेनिंजेस), प्रमस्तिष्क-मेरु द्रव (CSF)

7.1 मस्तिष्क के भाग और कार्य

भागउप-भागकार्य
अग्रमस्तिष्कप्रमस्तिष्क (सेरीब्रम)मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग; सोचना, स्मृति, बुद्धि, तर्क, ऐच्छिक क्रियाएँ, देखने-सुनने-सूँघने की संवेदनाएँ
अग्रमस्तिष्कहाइपोथैलेमसभूख, प्यास, शरीर ताप, नींद का नियंत्रण; पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करता है
मध्यमस्तिष्क—कुछ प्रतिवर्ती क्रियाएँ, जैसे प्रकाश के अनुसार पुतली का छोटा-बड़ा होना; दृष्टि व श्रवण संबंधी
पश्चमस्तिष्कअनुमस्तिष्क (सेरीबेलम)शरीर का संतुलन और मुद्रा; ऐच्छिक गतियों में तालमेल (सीधी रेखा में चलना, साइकिल चलाना, पेंसिल उठाना)
पश्चमस्तिष्कमेडुला ऑब्लांगेटाअनैच्छिक क्रियाएँ — हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तचाप, वमन, लार स्रावण
पश्चमस्तिष्कपोंसश्वसन के नियमन में सहायक

7.2 प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

किसी उद्दीपन पर अचानक, बिना सोचे होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया प्रतिवर्ती क्रिया है — जैसे गर्म वस्तु छूते ही हाथ खींच लेना, घुटने पर हल्की चोट से पैर का उछलना। इसका नियंत्रण मुख्यतः मेरुरज्जु करता है, ताकि प्रतिक्रिया तेज़ हो और मस्तिष्क तक संदेश जाने का इंतज़ार न करना पड़े।

प्रतिवर्ती चाप: ग्राही (त्वचा) → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु (प्रसारण न्यूरॉन) → प्रेरक न्यूरॉन → प्रभावक (पेशी)।


8. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और हार्मोन

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ नलिकाविहीन होती हैं और अपने स्राव (हार्मोन) सीधे रक्त में छोड़ती हैं; इसके विपरीत बहिःस्रावी ग्रंथियाँ (जैसे लार ग्रंथि, स्वेद ग्रंथि) नलिकाओं से स्राव करती हैं। हार्मोन को "रासायनिक संदेशवाहक" कहते हैं।

ग्रंथिस्थानप्रमुख हार्मोनकार्य / कमी-अधिकता से विकार
पीयूष (पिट्यूटरी)मस्तिष्क के आधार परवृद्धि हार्मोन (GH), TSH, ACTH, FSH, LH, प्रोलैक्टिन; ADH व ऑक्सीटोसिन (पश्च पीयूष से मुक्त)"मास्टर ग्रंथि" — अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करती है; बचपन में GH की कमी — बौनापन, अधिकता — अतिकायता (भीमकायता)
हाइपोथैलेमसअग्रमस्तिष्कमोचक (रिलीज़िंग) हार्मोनपीयूष ग्रंथि के स्राव को नियंत्रित करता है
थायरॉइड (अवटु)गर्दन में, श्वासनली के पासथायरॉक्सिन (आयोडीन युक्त)उपापचय का नियंत्रण; आयोडीन की कमी से घेंघा (गलगंड); सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि
पैराथायरॉइडथायरॉइड के पीछेपैराथॉर्मोनरक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ाना
अधिवृक्क (एड्रीनल)प्रत्येक वृक्क के ऊपरएड्रेनालिन (मेड्यूला से); कॉर्टिसोल, एल्डोस्टेरोन (कॉर्टेक्स से)एड्रेनालिन — "लड़ो या भागो" (आपातकालीन हार्मोन): हृदय गति, रक्तचाप, रक्त-ग्लूकोज़ बढ़ाना
अग्न्याशय (लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ)आमाशय के नीचेइंसुलिन (β-कोशिकाएँ), ग्लूकागॉन (α-कोशिकाएँ)इंसुलिन रक्त-शर्करा घटाता है; कमी से मधुमेह (डायबिटीज़ मेलिटस); ग्लूकागॉन रक्त-शर्करा बढ़ाता है
वृषणपुरुषटेस्टोस्टेरोनपुरुष के द्वितीयक लैंगिक लक्षण (दाढ़ी-मूँछ, भारी आवाज़)
अंडाशयस्त्रीएस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोनस्त्री के द्वितीयक लैंगिक लक्षण; मासिक चक्र व गर्भावस्था
थाइमसवक्ष में, हृदय के ऊपरथाइमोसिनT-लिम्फोसाइट का विकास (प्रतिरक्षा); आयु के साथ छोटी होती है
पीनियलमस्तिष्क मेंमेलाटोनिननींद-जागरण का दैनिक चक्र

नमक में आयोडीन क्यों? थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन ज़रूरी है; इसलिए घेंघा से बचाव हेतु आयोडीन युक्त नमक की सलाह दी जाती है (NCERT कक्षा 10)। इंसुलिन की खोज बैंटिंग और बेस्ट (1921) ने की।


9. कंकाल तंत्र

वयस्क मानव में 206 हड्डियाँ होती हैं। नवजात शिशु में हड्डियों की संख्या इससे काफ़ी अधिक (लगभग 270–300) होती है, क्योंकि बढ़ने के साथ कई हड्डियाँ आपस में जुड़ जाती हैं। हड्डियों में मुख्यतः कैल्शियम फ़ॉस्फ़ेट होता है। अस्थियों के अध्ययन को ऑस्टियोलॉजी कहते हैं।

तथ्यउत्तर
सबसे लंबी और मज़बूत हड्डीफीमर (जाँघ की हड्डी)
सबसे छोटी हड्डीस्टेपीज़ (मध्य कर्ण में, रकाब के आकार की)
मध्य कर्ण की 3 अस्थियाँमैलियस (हथौड़ा), इनकस (निहाई), स्टेपीज़ (रकाब)
खोपड़ी की हड्डियाँ22 (कपाल 8 + चेहरा 14)
पसलियाँ12 जोड़ी (24); अंतिम 2 जोड़ी "प्लावी (तैरती) पसलियाँ"
वयस्क की कशेरुकाएँ26 (जुड़ने के बाद)
रक्त कोशिकाओं का निर्माणलाल अस्थि मज्जा

9.1 जोड़ (संधियाँ)

जोड़गतिउदाहरण
कंदुक-खल्लिका (Ball and Socket)सभी दिशाओं में घूमनाकंधा, कूल्हा
कब्ज़ा (Hinge)एक ही दिशा में आगे-पीछेकोहनी, घुटना
धुराग्र (Pivot)घूर्णनगर्दन (एटलस और एक्सिस कशेरुका के बीच)
अचल (Fixed)गति नहींखोपड़ी की हड्डियों के बीच

10. इंद्रियाँ — आँख और कान

10.1 मानव नेत्र

भागकार्य
कॉर्निया (स्वच्छ मंडल)पारदर्शी अग्र भाग; प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन इसकी बाहरी सतह पर; नेत्रदान में यही प्रत्यारोपित होता है
परितारिका (आइरिस)आँख का रंग; पुतली का आकार नियंत्रित करती है
पुतली (प्यूपिल)प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करने वाला छिद्र
नेत्र लेंसउत्तल लेंस; प्रतिबिंब को रेटिना पर फ़ोकस करना
पक्ष्माभी पेशियाँलेंस की फ़ोकस दूरी बदलना — समंजन क्षमता
रेटिना (दृष्टिपटल)प्रतिबिंब यहाँ बनता है — वास्तविक और उल्टा
शलाकाएँ (रॉड्स)मंद प्रकाश में देखना
शंकु (कोन्स)तेज़ प्रकाश और रंगों की पहचान
अंध बिंदुदृक् तंत्रिका के निकलने का स्थान — यहाँ शलाका-शंकु नहीं, प्रतिबिंब नहीं दिखता
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरीसामान्य नेत्र के लिए लगभग 25 सेमी
दृष्टि दोषसमस्यासुधार
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया)दूर की वस्तु धुंधलीअवतल लेंस
दूर दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया)पास की वस्तु धुंधलीउत्तल लेंस
जरा-दूरदृष्टिता (प्रेसबायोपिया)आयु के साथ समंजन क्षमता घटनाप्रायः द्विफ़ोकसी लेंस
मोतियाबिंदलेंस का धुंधला/अपारदर्शी होनाशल्य चिकित्सा

लेंस और अपवर्तन की भौतिकी के लिए प्रकाश और ध्वनि वाला नोट देखें।

10.2 मानव कर्ण

भागसंरचनाकार्य
बाह्य कर्णकर्ण पल्लव (पिन्ना), कर्ण नलिकाध्वनि तरंगों को एकत्र कर अंदर भेजना
मध्य कर्णकर्ण पटह (ईयरड्रम), मैलियस-इनकस-स्टेपीज़; यूस्टेकियन नलिका (ग्रसनी से जोड़ती है)कंपनों को बढ़ाकर आंतरिक कर्ण तक पहुँचाना; दोनों ओर का दाब बराबर रखना
आंतरिक कर्णकॉक्लिया (कर्णावर्त); अर्धवृत्ताकार नलिकाएँकॉक्लिया — सुनना; अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ व वेस्टिब्यूल — शरीर का संतुलन

मनुष्य की श्रव्य सीमा लगभग 20 Hz से 20,000 Hz है।


11. मानव शरीर के "सबसे" — तथ्य तालिका

"सबसे"उत्तरटिप्पणी
सबसे बड़ा अंगत्वचापूरे शरीर को ढकती है
सबसे बड़ा आंतरिक अंगयकृत—
सबसे बड़ी ग्रंथियकृतबहिःस्रावी ग्रंथि (पित्त)
सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथिथायरॉइड"सबसे बड़ी ग्रंथि" और "सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि" अलग प्रश्न हैं
सबसे कठोर पदार्थदाँतों का इनैमल—
सबसे लंबी हड्डीफीमरजाँघ
सबसे छोटी हड्डीस्टेपीज़मध्य कर्ण
सबसे लंबी कोशिकातंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)—
सबसे बड़ी धमनीमहाधमनी (एओर्टा)बाएँ निलय से निकलती है
सबसे बड़ी शिरामहाशिरा (वेना कावा)दाएँ आलिंद में खुलती है
मस्तिष्क का सबसे बड़ा भागप्रमस्तिष्क (सेरीब्रम)—
आहारनाल का सबसे लंबा भागछोटी आँत—
सबसे बड़ा लसीका अंगप्लीहा—
सबसे अधिक संख्या वाली WBCन्यूट्रोफ़िल—
हृदय का सबसे मोटी दीवार वाला कक्षबायाँ निलयपूरे शरीर में रक्त भेजता है

12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: धमनी में हमेशा शुद्ध रक्त?

नहीं। धमनी की परिभाषा दिशा से है (हृदय से दूर), रक्त की प्रकृति से नहीं। फुफ्फुसीय धमनी अशुद्ध रक्त फेफड़ों तक ले जाती है और फुफ्फुसीय शिरा शुद्ध रक्त हृदय में लाती है।

Trap 2: पित्त में एंजाइम?

पित्त यकृत बनाता है, पित्ताशय केवल संचय करता है। पित्त में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता; यह वसा का इमल्सीकरण करता है और माध्यम क्षारीय बनाता है। वसा का वास्तविक पाचन लाइपेज़ करता है।

Trap 3: सबसे बड़ी ग्रंथि बनाम सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि

सबसे बड़ी ग्रंथि = यकृत; सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि = थायरॉइड। सबसे बड़ा अंग = त्वचा; सबसे बड़ा आंतरिक अंग = यकृत। प्रश्न का विशेषण ध्यान से पढ़ें।

Trap 4: O सर्वदाता क्यों, AB सर्वग्राही क्यों?

O की RBC पर कोई एंटीजन नहीं — इसलिए इसे सबको दिया जा सकता है। AB के प्लाज़्मा में कोई एंटीबॉडी नहीं — इसलिए यह सबसे ले सकता है। उल्टा याद न करें: O सर्वग्राही नहीं, यह केवल O से ले सकता है।

Trap 5: प्रमस्तिष्क बनाम अनुमस्तिष्क बनाम मेडुला

प्रमस्तिष्क = बुद्धि, स्मृति, ऐच्छिक क्रियाएँ। अनुमस्तिष्क = संतुलन व तालमेल। मेडुला = हृदय गति, श्वसन, वमन जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ। प्रतिवर्ती क्रिया = मुख्यतः मेरुरज्जु।

Trap 6: पीयूष "मास्टर ग्रंथि" — पर उसे कौन नियंत्रित करता है?

पीयूष ग्रंथि अन्य कई ग्रंथियों को नियंत्रित करती है, इसलिए "मास्टर ग्रंथि" कहलाती है; पर स्वयं पीयूष ग्रंथि हाइपोथैलेमस के मोचक हार्मोनों से नियंत्रित होती है। प्रश्न में "मास्टर ग्रंथि" पूछा जाए तो उत्तर पीयूष ही है।

Trap 7: मधुमेह — इंसुलिन बनाम ADH

डायबिटीज़ मेलिटस (आम मधुमेह) = इंसुलिन की कमी या उसका ठीक से काम न करना — रक्त में शर्करा बढ़ती है। डायबिटीज़ इंसिपिडस = ADH की कमी — बहुत अधिक पतला मूत्र, शर्करा से संबंध नहीं।

Trap 8: हड्डियों की संख्या — वयस्क बनाम शिशु

206 वयस्क की संख्या है। नवजात शिशु में हड्डियाँ अधिक होती हैं (लगभग 270–300), जो बढ़ने के साथ जुड़ जाती हैं। "शिशु में 206" वाला विकल्प गलत है।

Trap 9: टायलिन बनाम ट्रिप्सिन बनाम पेप्सिन

टायलिन (लार) = मंड। पेप्सिन (आमाशय) = प्रोटीन, अम्लीय माध्यम में। ट्रिप्सिन (अग्न्याशय) = प्रोटीन, क्षारीय माध्यम में। तीनों के नाम मिलते-जुलते हैं, स्रोत अलग।

Trap 10: यूरिया कहाँ बनता है?

यूरिया यकृत में बनता है; वृक्क उसे केवल रक्त से छानकर बाहर करते हैं। "वृक्क यूरिया बनाते हैं" वाला कथन गलत है।

Trap 11: O₂ और CO₂ का परिवहन

O₂ मुख्यतः हीमोग्लोबिन से; CO₂ अधिकांशतः प्लाज़्मा में घुले रूप (बाइकार्बोनेट) में। "CO₂ भी मुख्यतः हीमोग्लोबिन से" — गलत।


13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (56 तथ्य)

क्रमप्रश्न / संकेतउत्तर
1लार का एंजाइमटायलिन (लार एमाइलेज़)
2टायलिन किस पर कार्य करता हैमंड (स्टार्च)
3आमाशय में प्रोटीन पाचक एंजाइमपेप्सिन
4आमाशय का अम्लहाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
5सबसे बड़ी ग्रंथियकृत
6पित्त बनता हैयकृत में
7पित्त का संचयपित्ताशय
8वसा का इमल्सीकरणपित्त
9अग्न्याशय का प्रोटीन पाचक एंजाइमट्रिप्सिन
10वसा पाचक एंजाइमलाइपेज़
11अधिकतम अवशोषणछोटी आँत
12अवशोषण का क्षेत्र बढ़ाने वाली संरचनादीर्घरोम (विलाई)
13जल का अवशोषणबड़ी आँत
14मिश्रित ग्रंथिअग्न्याशय
15वयस्क के दाँत32
16गैस विनिमय का स्थानकूपिकाएँ (एल्वियोलाई)
17स्वरयंत्रकंठ (लैरिंक्स)
18साँस लेने में सहायक पेशीय पर्दाडायाफ्राम
19O₂ वाहक वर्णकहीमोग्लोबिन
20पेशियों में अवायवीय श्वसन का उत्पादलैक्टिक अम्ल
21यीस्ट में किण्वन का उत्पादइथेनॉल + CO₂
22वायवीय श्वसन का स्थानमाइटोकॉन्ड्रिया
23रक्त परिसंचरण की खोजविलियम हार्वे
24मानव हृदय के कक्ष4
25हृदय का पेसमेकरSA नोड
26अशुद्ध रक्त ले जाने वाली धमनीफुफ्फुसीय धमनी
27शुद्ध रक्त ले जाने वाली शिराफुफ्फुसीय शिरा
28सबसे बड़ी धमनीमहाधमनी
29सामान्य रक्तचापलगभग 120/80 mmHg
30रक्तचाप मापने का यंत्रस्फिग्मोमैनोमीटर
31सामान्य नाड़ी दरलगभग 72 प्रति मिनट
32RBC की आयुलगभग 120 दिन
33RBC का निर्माणलाल अस्थि मज्जा
34RBC का कब्रिस्तानप्लीहा
35रोग प्रतिरोधक रक्त कणिकाWBC
36थक्का बनाने वाली कणिकाप्लेटलेट्स
37ABO रक्त समूह की खोजकार्ल लैंडस्टीनर
38सर्वदाताO
39सर्वग्राहीAB
40Rh कारक का नाम किस जीव पररीसस बंदर
41वृक्क की इकाईनेफ्रॉन
42मनुष्य का मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्टयूरिया
43वृक्क विफलता में उपचार-प्रक्रियाडायलिसिस
44तंत्रिका तंत्र की इकाईन्यूरॉन
45बुद्धि व स्मृति का केंद्रप्रमस्तिष्क
46शरीर का संतुलनअनुमस्तिष्क
47हृदय गति व श्वसन का नियंत्रणमेडुला ऑब्लांगेटा
48प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रणमेरुरज्जु
49मास्टर ग्रंथिपीयूष ग्रंथि
50आयोडीन की कमी सेघेंघा (थायरॉक्सिन कम)
51"लड़ो या भागो" हार्मोनएड्रेनालिन
52इंसुलिन की कमी सेमधुमेह (डायबिटीज़ मेलिटस)
53वयस्क में हड्डियाँ206
54सबसे लंबी हड्डीफीमर
55सबसे छोटी हड्डीस्टेपीज़
56सबसे कठोर पदार्थइनैमल

14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

मानव शरीर के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न है:

  1. अंग ↔ कार्य: "शरीर का संतुलन बनाए रखने का कार्य मस्तिष्क का कौन-सा भाग करता है?" (उत्तर: अनुमस्तिष्क) — विकल्पों में प्रमस्तिष्क, मेडुला, हाइपोथैलेमस।
  2. एंजाइम मिलान: "सूची-I: टायलिन, पेप्सिन, ट्रिप्सिन, लाइपेज़; सूची-II: वसा, मंड, प्रोटीन (आमाशय), प्रोटीन (अग्न्याशय)।" (उत्तर: टायलिन–मंड, पेप्सिन–प्रोटीन (आमाशय), ट्रिप्सिन–प्रोटीन (अग्न्याशय), लाइपेज़–वसा)
  3. ग्रंथि ↔ हार्मोन ↔ विकार: "घेंघा रोग किस ग्रंथि से संबंधित है?" (थायरॉइड)
  4. अपवाद वाले प्रश्न: "निम्न में से कौन-सी रक्त वाहिका शुद्ध रक्त हृदय में लाती है?" (फुफ्फुसीय शिरा)
  5. कथन-आधारित: "1. पित्त में लाइपेज़ एंजाइम होता है। 2. पित्त यकृत में बनता है। कौन-सा सही है?" (उत्तर: केवल 2)
  6. "सबसे" वाले प्रश्न: "मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि?" (थायरॉइड) — ध्यान रहे, विकल्प में यकृत भी होगा।
  7. संख्या वाले प्रश्न: "एक वयस्क में कितनी हड्डियाँ होती हैं?" (206) — "RBC की औसत आयु?" (लगभग 120 दिन)

रणनीति: एंजाइम-हार्मोन की तालिकाएँ स्रोत के साथ याद करें, क्योंकि गलत विकल्प प्रायः "सही नाम, गलत अंग" वाले होते हैं। इन प्रश्नों का समयबद्ध अभ्यास SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ में करें।


15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. एंजाइम-स्रोत: "टायलिन मुख में, पेप्सिन पेट में, ट्रिप्सिन अग्न्याशय में।" (पे-पे = पेप्सिन-पेट)

2. धमनी-शिरा: "धमनी = धकेलती दूर; शिरा = शिर झुकाकर घर (हृदय) लौटती।" अपवाद "फुफ्फुसीय" जोड़ी में।

3. रक्त समूह: "O = Open हाथ (सबको देता), AB = All Box (सबसे लेता)।"

4. मस्तिष्क: "प्रमस्तिष्क प्रज्ञा (बुद्धि), अनुमस्तिष्क अनुपात (संतुलन), मेडुला मेशीन (अपने-आप चलने वाली क्रियाएँ)।"

5. हार्मोन: "पीयूष प्रधान, थायरॉइड आयोडीन, अधिवृक्क आपात, अग्न्याशय इंसुलिन।"

6. संख्याएँ: "206 हड्डी, 120 दिन RBC, 120/80 BP, 72 नाड़ी, 32 दाँत, 4 कक्ष।"

7. कान की अस्थियाँ: "हथौड़ा-निहाई-रकाब" = मैलियस-इनकस-स्टेपीज़ (बाहर से अंदर)।

8. "सबसे" की जोड़ी: "बड़ा अंग त्वचा, बड़ी ग्रंथि यकृत, बड़ी अंतःस्रावी थायरॉइड, कठोर इनैमल।"


16. कथन अभ्यास

लार में पाया जाने वाला टायलिन एंजाइम मंड का पाचन करता है। — सही।

पित्त में वसा को पचाने वाला लाइपेज़ एंजाइम होता है। — गलत (पित्त में कोई एंजाइम नहीं; यह केवल इमल्सीकरण करता है)।

पचे हुए भोजन का अधिकतम अवशोषण छोटी आँत में होता है। — सही।

फुफ्फुसीय शिरा अशुद्ध रक्त ले जाती है। — गलत (फुफ्फुसीय शिरा फेफड़ों से शुद्ध रक्त हृदय में लाती है)।

शिराओं में रक्त को उल्टा बहने से रोकने के लिए कपाट होते हैं। — सही।

AB रक्त समूह वाला व्यक्ति सर्वदाता होता है। — गलत (AB सर्वग्राही है; सर्वदाता O है)।

RBC का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है। — सही।

शरीर का संतुलन प्रमस्तिष्क बनाए रखता है। — गलत (संतुलन अनुमस्तिष्क का कार्य है)।

प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण मुख्यतः मेरुरज्जु करता है। — सही।

थायरॉक्सिन हार्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। — सही।

इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ाता है। — गलत (इंसुलिन घटाता है; ग्लूकागॉन बढ़ाता है)।

मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी स्टेपीज़ मध्य कर्ण में होती है। — सही।


17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. टायलिन (मुख) = मंड; पेप्सिन + HCl (आमाशय) = प्रोटीन; ट्रिप्सिन, लाइपेज़ (अग्न्याशय)
  2. यकृत = सबसे बड़ी ग्रंथि, पित्त (एंजाइम नहीं, इमल्सीकरण), यूरिया निर्माण
  3. छोटी आँत = पाचन पूर्ण + अधिकतम अवशोषण (विलाई); बड़ी आँत = जल अवशोषण
  4. गैस विनिमय — कूपिकाएँ; डायाफ्राम संकुचन = साँस अंदर; O₂ — हीमोग्लोबिन
  5. अवायवीय: यीस्ट → इथेनॉल + CO₂; पेशी → लैक्टिक अम्ल (ऐंठन)
  6. हृदय 4 कक्ष; बायाँ निलय सबसे मोटा; SA नोड पेसमेकर; विलियम हार्वे
  7. धमनी हृदय से दूर, शिरा हृदय की ओर; अपवाद — फुफ्फुसीय धमनी/शिरा
  8. BP ≈ 120/80 mmHg (स्फिग्मोमैनोमीटर); नाड़ी ≈ 72/मिनट
  9. RBC ≈ 120 दिन, अस्थि मज्जा, प्लीहा कब्रिस्तान; WBC रक्षा; प्लेटलेट्स थक्का
  10. लैंडस्टीनर — ABO; O सर्वदाता, AB सर्वग्राही; Rh — रीसस बंदर
  11. नेफ्रॉन = वृक्क इकाई; यूरिया मुख्य अपशिष्ट; डायलिसिस = कृत्रिम वृक्क
  12. प्रमस्तिष्क बुद्धि, अनुमस्तिष्क संतुलन, मेडुला अनैच्छिक; प्रतिवर्ती — मेरुरज्जु
  13. पीयूष = मास्टर; थायरॉक्सिन-आयोडीन-घेंघा; एड्रेनालिन = लड़ो या भागो; इंसुलिन-मधुमेह
  14. वयस्क 206 हड्डियाँ; फीमर सबसे लंबी; स्टेपीज़ सबसे छोटी
  15. त्वचा सबसे बड़ा अंग; इनैमल सबसे कठोर; थायरॉइड सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि

18. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 3 (एंजाइम तालिका), खंड 8 (हार्मोन तालिका) और खंड 12 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। विटामिन, खनिज और रोगों के लिए अगला नोट पोषण, विटामिन और रोग पढ़ें, और पूरी तैयारी परखने के लिए राजस्थान CET (स्नातक) फ़ाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।


19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

मानव शरीर के सभी तंत्र आपस में जुड़े हुए हैं — पाचन तंत्र भोजन को सरल अणुओं में बदलता है, श्वसन तंत्र उससे ऊर्जा निकालने के लिए ऑक्सीजन लाता है, परिसंचरण तंत्र दोनों को हर कोशिका तक पहुँचाता है, उत्सर्जन तंत्र अपशिष्ट बाहर करता है, और तंत्रिका व अंतःस्रावी तंत्र इन सबके बीच तालमेल रखते हैं। परीक्षा की दृष्टि से एंजाइम-स्रोत, ग्रंथि-हार्मोन-विकार, धमनी-शिरा के अपवाद, रक्त समूह, मस्तिष्क के भाग और "सबसे" वाले तथ्य सबसे अधिक पूछे जाते हैं। शारीरिक मानों (रक्तचाप, नाड़ी, RBC आयु) को "लगभग" के साथ याद रखें।

टायलिन-पेप्सिन-ट्रिप्सिन | यकृत = सबसे बड़ी ग्रंथि | 4 कक्ष, ≈120/80, ≈72 | RBC ≈120 दिन | O सर्वदाता, AB सर्वग्राही | अनुमस्तिष्क = संतुलन | पीयूष = मास्टर | 206 हड्डियाँ, फीमर-स्टेपीज़


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“मानव शरीर के तंत्र — पाचन, श्वसन, हृदय-रक्त, वृक्क, मस्तिष्क, हार्मोन व अस्थियाँ — SSC/रेलवे/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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यकृत (Liver) मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो पित्त बनाती है। सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि थायरॉइड है और शरीर का सबसे बड़ा अंग त्वचा है।

लार में टायलिन (लार एमाइलेज़) एंजाइम होता है, जो मंड (स्टार्च) को सरल शर्करा (माल्टोज़) में बदलता है। इसलिए कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुख से ही शुरू हो जाता है।

धमनियाँ रक्त को हृदय से अंगों की ओर ले जाती हैं, इनकी दीवार मोटी होती है और इनमें कपाट नहीं होते। शिराएँ रक्त को हृदय की ओर लाती हैं, इनकी दीवार पतली होती है और इनमें कपाट होते हैं। अपवाद: फुफ्फुसीय धमनी अशुद्ध और फुफ्फुसीय शिरा शुद्ध रक्त ले जाती है।

एक स्वस्थ वयस्क का सामान्य रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg और विश्राम में नाड़ी दर लगभग 72 प्रति मिनट मानी जाती है। रक्तचाप स्फिग्मोमैनोमीटर से मापा जाता है।

O रक्त समूह सर्वदाता है क्योंकि इसकी RBC पर A या B एंटीजन नहीं होता। AB रक्त समूह सर्वग्राही है क्योंकि इसके प्लाज़्मा में एंटी-A या एंटी-B एंटीबॉडी नहीं होती।

RBC लाल अस्थि मज्जा में बनती हैं और इनकी औसत आयु लगभग 120 दिन होती है। पुरानी RBC मुख्यतः प्लीहा में नष्ट होती हैं।

नेफ्रॉन (वृक्काणु) वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। इसमें ग्लोमेरुलस रक्त को छानता है और वृक्क नलिका उपयोगी पदार्थों का पुनरवशोषण करती है।

अनुमस्तिष्क (सेरीबेलम) शरीर का संतुलन, मुद्रा और ऐच्छिक गतियों में तालमेल बनाए रखता है। सोचने और स्मृति का कार्य प्रमस्तिष्क करता है।

पीयूष ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है जो थायरॉइड, अधिवृक्क, वृषण और अंडाशय जैसी अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इसे मास्टर ग्रंथि कहा जाता है। स्वयं पीयूष ग्रंथि हाइपोथैलेमस से नियंत्रित होती है।

एक वयस्क मनुष्य में 206 हड्डियाँ होती हैं। नवजात शिशु में इससे अधिक (लगभग 270–300) होती हैं, जो बढ़ने के साथ आपस में जुड़ जाती हैं।

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