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सामान्य विज्ञान

कोशिका, ऊतक और आनुवंशिकता — कोशिकांग, माइटोसिस-मियोसिस, मेंडल, DNA-RNA, गुणसूत्र — SSC/रेलवे/CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
27 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, अग्निवीर व RSSB CET पाठ्यक्रम की सामान्य विज्ञान इकाई; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10) और SI मात्रक प्रणाली। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: कोशिका (Cell) जीवन की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है; इसकी खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की पतली काट में की और ल्यूवेनहॉक (1674) ने पहली बार तालाब के जल में जीवित (स्वतंत्र) कोशिकाएँ देखीं। रॉबर्ट ब्राउन (1831) ने केंद्रक खोजा, श्लाइडेन (1838) व श्वान (1839) ने कोशिका सिद्धांत दिया और रुडोल्फ़ विर्खो (1855) ने बताया कि हर कोशिका पूर्ववर्ती कोशिका से बनती है — "Omnis cellula e cellula"। माइटोकॉन्ड्रिया को "कोशिका का पावरहाउस" कहते हैं (ATP बनता है), लाइसोसोम को "आत्मघाती थैली", राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण करते हैं और हरितलवक प्रकाश संश्लेषण; पादप कोशिका की कोशिका भित्ति सेलुलोज़ की बनी होती है। समसूत्री (माइटोसिस) विभाजन से 2 समान कोशिकाएँ बनती हैं, जबकि अर्धसूत्री (मियोसिस) से 4 कोशिकाएँ बनती हैं जिनमें गुणसूत्र आधे होते हैं। मेंडल ने मटर पर प्रयोग कर एकसंकर अनुपात 3:1 और द्विसंकर अनुपात 9:3:3:1 दिया। DNA का द्विकुंडलित (Double Helix) मॉडल वाटसन-क्रिक (1953) ने दिया; DNA में A-T, G-C जोड़े बनते हैं, जबकि RNA में T के स्थान पर U (यूरैसिल) होता है। मनुष्य में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं; स्त्री XX, पुरुष XY — संतान का लिंग पिता के गुणसूत्र (X या Y) से तय होता है। हीमोफ़ीलिया और वर्णांधता X-लिंक्ड रोग हैं और डाउन सिंड्रोम 21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमी है।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्यउत्तर
कोशिका की खोजरॉबर्ट हुक, 1665 — कॉर्क की काट (पुस्तक: माइक्रोग्राफ़िया)
जीवित कोशिका पहली बार देखीएंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक, 1674 — तालाब के जल में
केंद्रक की खोजरॉबर्ट ब्राउन, 1831
"प्रोटोप्लाज़्म" शब्दपुरकिंजे, 1839
कोशिका सिद्धांतश्लाइडेन (वनस्पतिशास्त्री, 1838) व श्वान (प्राणिशास्त्री, 1839)
"Omnis cellula e cellula"रुडोल्फ़ विर्खो, 1855
कोशिका का पावरहाउसमाइटोकॉन्ड्रिया (ATP निर्माण)
आत्मघाती थैलीलाइसोसोम
प्रोटीन संश्लेषणराइबोसोम
कोशिका का नियंत्रण केंद्रकेंद्रक (Nucleus)
पादप कोशिका भित्तिसेलुलोज़ (कवक में काइटिन)
DNA का द्विकुंडलित मॉडलवाटसन व क्रिक, 1953
आनुवंशिकी के जनकग्रेगर जॉन मेंडल (मटर पर प्रयोग)
मानव गुणसूत्र46 (23 जोड़े) — 22 जोड़े अलिंगसूत्र + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र
डाउन सिंड्रोम21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमी (कुल 47 गुणसूत्र)
पहला क्लोन स्तनधारीडॉली भेड़, 1996 (स्कॉटलैंड)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

सामान्य विज्ञान के जीव विज्ञान भाग में कोशिका, ऊतक और आनुवंशिकता सबसे बुनियादी अध्याय हैं — NCERT कक्षा 8 ("कोशिका — संरचना एवं प्रकार्य"), कक्षा 9 ("जीवन की मौलिक इकाई", "ऊतक") और कक्षा 10 ("आनुवंशिकता") से सीधे तथ्य पूछे जाते हैं। SSC और रेलवे की परीक्षाओं में यहाँ से ज़्यादातर एक-पंक्ति तथ्य आते हैं, जबकि राजस्थान CET और पटवारी में कथन-आधारित प्रश्न भी दिखते हैं। मानव शरीर के अंगों और तंत्रों को समझने के लिए यह अध्याय आधार है — आगे मानव शरीर के तंत्र वाला नोट इसी पर बनता है।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • SSC CGL / CHSL / MTS / GD — कोशिकांग-कार्य, खोजकर्ता, गुणसूत्र संख्या, आनुवंशिक रोग
  • RRB NTPC / Group D स्तर — कोशिका विभाजन, ऊतक के प्रकार, DNA-RNA अंतर
  • अग्निवीर (थल, नौसेना, वायुसेना) — NCERT कक्षा 9–10 स्तर के सीधे प्रश्न
  • राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी — कथन-आधारित और मिलान प्रश्न

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. कोशिकांग ↔ कार्य का मिलान ("आत्मघाती थैली किसे कहते हैं?")
  2. खोज ↔ वैज्ञानिक ↔ वर्ष ("केंद्रक की खोज किसने की?")
  3. पादप बनाम जंतु कोशिका — "कौन-सा केवल पादप कोशिका में होता है?"
  4. माइटोसिस बनाम मियोसिस — संतति कोशिकाओं की संख्या, गुणसूत्र संख्या
  5. ऊतक ↔ स्थान ↔ कार्य (कंडरा बनाम स्नायु, जाइलम बनाम फ्लोएम)
  6. मेंडल के अनुपात, DNA क्षार-युग्म, लिंग निर्धारण, आनुवंशिक रोग

3. कोशिका की खोज और कोशिका सिद्धांत

"Cell" शब्द लैटिन cellula (छोटा कमरा) से आया है। रॉबर्ट हुक ने अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क की पतली काट देखी, जिसमें मधुमक्खी के छत्ते जैसे छोटे-छोटे खाने दिखे। ध्यान दें — हुक ने जो देखा वह मृत कोशिकाओं की भित्तियाँ थीं, क्योंकि कॉर्क मृत ऊतक है।

वर्षवैज्ञानिकयोगदान
1665रॉबर्ट हुककॉर्क में कोशिका देखी, "Cell" नाम दिया (माइक्रोग्राफ़िया)
1674एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉकउन्नत सूक्ष्मदर्शी से तालाब के जल में स्वतंत्र जीवित कोशिकाएँ देखीं
1831रॉबर्ट ब्राउनकोशिका में केंद्रक की खोज
1839जे.ई. पुरकिंजेकोशिका के जीवित तरल पदार्थ को "प्रोटोप्लाज़्म" नाम दिया
1838–1839एम. श्लाइडेन व टी. श्वानकोशिका सिद्धांत — सभी पौधे और जंतु कोशिकाओं से बने हैं
1855रुडोल्फ़ विर्खोसभी कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं
1940 के आसपास—इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से कोशिकांगों की बारीक संरचना दिखी

3.1 कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदु

  • सभी सजीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने हैं।
  • कोशिका जीवन की संरचनात्मक और क्रियात्मक (प्रकार्यात्मक) इकाई है।
  • नई कोशिकाएँ पहले से मौजूद कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं (विर्खो का योगदान)।
  • अपवाद: विषाणु (वायरस) कोशिकीय नहीं हैं; वे केवल परपोषी कोशिका के भीतर ही गुणन करते हैं, इसलिए उन्हें सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कहा जाता है।

3.2 एककोशिकीय बनाम बहुकोशिकीय

प्रकारउदाहरणविशेषता
एककोशिकीयअमीबा, पैरामीशियम, क्लैमाइडोमोनास, जीवाणु, यीस्टएक ही कोशिका सारे जैविक कार्य करती है
बहुकोशिकीयमनुष्य, पौधे, अधिकांश कवककार्यों का विभाजन — अलग-अलग कोशिकाएँ अलग कार्य करती हैं

3.3 कोशिकाओं के आकार — परीक्षा वाले तथ्य

तथ्यउत्तर
सबसे बड़ी कोशिका (एकल कोशिका के रूप में)शुतुरमुर्ग का अंडा
मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिकातंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)
मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिकाअंडाणु (Ovum)
सबसे छोटी ज्ञात कोशिकामाइकोप्लाज़्मा (PPLO)
कोशिका का आकार मापने की इकाईमाइक्रोमीटर (µm) — 1 µm = 10⁻⁶ मीटर

4. प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिका

"प्रो" का अर्थ है आदिम और "कैरियॉन" का अर्थ केंद्रक। जिन कोशिकाओं में केंद्रक झिल्ली नहीं होती और आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य के एक क्षेत्र (केंद्रकाभ / Nucleoid) में पड़ा रहता है, वे प्रोकैरियोटिक कहलाती हैं।

आधारप्रोकैरियोटिकयूकैरियोटिक
केंद्रक झिल्लीअनुपस्थित (केंद्रकाभ)उपस्थित — सुस्पष्ट केंद्रक
झिल्लीयुक्त कोशिकांगअनुपस्थित (माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी, ER नहीं)उपस्थित
राइबोसोम70S80S (कोशिकाद्रव्य में); माइटोकॉन्ड्रिया-हरितलवक में 70S
गुणसूत्रप्रायः एक, वृत्ताकार DNAएक से अधिक, रैखिक DNA, प्रोटीन के साथ
आकारप्रायः छोटी (लगभग 1–10 µm)प्रायः बड़ी (लगभग 5–100 µm)
कोशिका विभाजनसरल (द्विविभाजन)समसूत्री व अर्धसूत्री
उदाहरणजीवाणु, नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया), माइकोप्लाज़्मापादप, जंतु, कवक, प्रोटोज़ोआ

5. पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका

लक्षणपादप कोशिकाजंतु कोशिका
कोशिका भित्तिउपस्थित — सेलुलोज़ कीअनुपस्थित (केवल कोशिका झिल्ली)
लवक (प्लास्टिड) / हरितलवकउपस्थितअनुपस्थित
रिक्तिकाएक बड़ी केंद्रीय रिक्तिकाछोटी, अस्थायी या अनुपस्थित
तारककाय (सेंट्रोसोम)प्रायः अनुपस्थित (उच्च पादपों में)उपस्थित — विभाजन में तर्कु बनाता है
आकारप्रायः निश्चित, आयताकारप्रायः अनियमित, गोलाकार
केंद्रक की स्थितिप्रायः एक ओर (बड़ी रिक्तिका के कारण)प्रायः मध्य में
संचित भोजनमंड (स्टार्च)ग्लाइकोजन

दोनों में समान: कोशिका झिल्ली, केंद्रक, कोशिकाद्रव्य, माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, गॉल्जी काय, अंतःप्रद्रव्यी जालिका।


6. कोशिकांग और उनके कार्य

कोशिकांगउपनाम / पहचानमुख्य कार्य
कोशिका झिल्ली (प्लाज़्मा झिल्ली)वरणात्मक पारगम्य झिल्लीपदार्थों के आवागमन का नियंत्रण; लिपिड व प्रोटीन की बनी
कोशिका भित्तिसेलुलोज़ (पादप)कोशिका को आकार, दृढ़ता और सुरक्षा; पूर्ण पारगम्य
केंद्रकनियंत्रण केंद्रसभी क्रियाओं का नियंत्रण; गुणसूत्र (DNA) रखता है; केंद्रिका (न्यूक्लियोलस) में राइबोसोम के घटक बनते हैं
माइटोकॉन्ड्रियाकोशिका का पावरहाउसकोशिकीय श्वसन, ATP (ऊर्जा मुद्रा) का निर्माण; अपना DNA व राइबोसोम
हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट)पादप की रसोईप्रकाश संश्लेषण; पर्णहरित (क्लोरोफ़िल); अपना DNA व राइबोसोम
वर्णीलवक (क्रोमोप्लास्ट)रंगीन लवकफूलों-फलों को रंग (जैसे टमाटर का लाल रंग)
अवर्णीलवक (ल्यूकोप्लास्ट)रंगहीन लवकमंड, तेल, प्रोटीन का संचय (जैसे आलू)
राइबोसोमप्रोटीन फ़ैक्टरी; झिल्ली-रहितप्रोटीन संश्लेषण
अंतःप्रद्रव्यी जालिका — खुरदरी (RER)राइबोसोम लगे होते हैंप्रोटीन निर्माण व परिवहन
अंतःप्रद्रव्यी जालिका — चिकनी (SER)राइबोसोम नहींवसा (लिपिड) निर्माण; यकृत कोशिकाओं में विष व औषधियों का विषहरण
गॉल्जी काय (गॉल्जी उपकरण)कैमिलो गॉल्जी के नाम परपदार्थों का संचय, रूपांतरण, पैकेजिंग व स्रावण; लाइसोसोम बनाना
लाइसोसोमआत्मघाती थैली (Suicide Bag)पाचक एंजाइमों से बाहरी पदार्थ व पुराने कोशिकांग पचाना; कोशिका क्षतिग्रस्त होने पर फटकर उसी कोशिका को पचा देना
रिक्तिकापादप में बड़ी केंद्रीयजल, कोशिका रस, अपशिष्ट का संचय; पादप कोशिका को स्फीति (दृढ़ता) देना; अमीबा में खाद्य रिक्तिका
तारककाय (सेंट्रोसोम)दो तारकेंद्र (सेंट्रिओल)जंतु कोशिका विभाजन में तर्कु (स्पिंडल) बनाना

6.1 परासरण और विसरण — संक्षेप

प्रक्रियाअर्थउदाहरण
विसरण (Diffusion)अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर अणुओं की गतिCO₂ और O₂ का कोशिका झिल्ली से आवागमन
परासरण (Osmosis)वरणात्मक पारगम्य झिल्ली से जल का अधिक जल-सांद्रता से कम जल-सांद्रता की ओर जानाकिशमिश को पानी में रखने पर फूलना
जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis)अतिपरासरी (गाढ़े) घोल में पादप कोशिका से जल निकलने पर जीवद्रव्य का सिकुड़नानमक डालने पर सब्ज़ी के टुकड़ों से पानी निकलना

7. कोशिका विभाजन — समसूत्री बनाम अर्धसूत्री

कोशिका विभाजन से पहले की तैयारी वाली अवस्था को अंतरावस्था (Interphase) कहते हैं, जिसमें DNA की प्रतिकृति बनती है। समसूत्री विभाजन की चार अवस्थाएँ क्रम से हैं — पूर्वावस्था (Prophase) → मध्यावस्था (Metaphase) → पश्चावस्था (Anaphase) → अंत्यावस्था (Telophase), इसके बाद कोशिकाद्रव्य का विभाजन (Cytokinesis) होता है।

आधारसमसूत्री (माइटोसिस)अर्धसूत्री (मियोसिस)
किन कोशिकाओं मेंकायिक (शरीर की) कोशिकाएँजनन कोशिकाएँ (युग्मक बनाते समय)
विभाजनों की संख्याएकदो (मियोसिस I और II)
संतति कोशिकाएँ24
गुणसूत्र संख्यासमान रहती है (2n → 2n)आधी हो जाती है (2n → n)
संतति कोशिकाएँमातृ कोशिका जैसी (आनुवंशिक रूप से समान)आपस में भिन्न
जीन विनिमय (क्रॉसिंग ओवर)नहीं होताहोता है (मियोसिस I की पूर्वावस्था में)
महत्ववृद्धि, घाव भरना, टूट-फूट की मरम्मत, अलैंगिक जननयुग्मक निर्माण; पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्र संख्या स्थिर रखना; विविधता

उदाहरण: मानव कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र (2n) होते हैं; मियोसिस से बने शुक्राणु और अंडाणु में 23 (n)। निषेचन से युग्मनज (ज़ाइगोट) में फिर 46 हो जाते हैं।


8. ऊतक (Tissue)

समान उत्पत्ति, संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक कहलाता है। ऊतकों के अध्ययन को ऊतक विज्ञान (Histology) कहते हैं।

8.1 पादप ऊतक

ऊतकप्रकारस्थान / कार्य
विभज्योतक (Meristematic) — शीर्षस्थविभाजन करने वालीजड़ व तने के शीर्ष पर — लंबाई में वृद्धि
विभज्योतक — पार्श्व (कैंबियम)विभाजन करने वालीतने/जड़ की परिधि में — मोटाई (घेरे) में वृद्धि
विभज्योतक — अंतर्वेशीविभाजन करने वालीपत्ती के आधार या पर्व (इंटरनोड) के पास — उस भाग की वृद्धि
मृदूतक (पैरेंकाइमा)सरल स्थायी, जीवितभोजन संचय; हरितलवक होने पर हरित ऊतक (क्लोरेंकाइमा); जलीय पौधों में वायु-कोष्ठ वाला वायूतक (एरेंकाइमा) — तैरने में सहायक
स्थूलकोण ऊतक (कॉलेंकाइमा)सरल स्थायी, जीवितलचीलापन — पत्ती के डंठल, तने में; बिना टूटे मुड़ना
दृढ़ ऊतक (स्क्लेरेंकाइमा)सरल स्थायी, मृत; भित्ति में लिग्निनकठोरता व मज़बूती — नारियल का छिलका, पटसन (जूट) के रेशे, बीजों का कठोर आवरण
जाइलमजटिल स्थायीजल व खनिजों का जड़ से ऊपर संवहन (एकदिशीय); वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ, जाइलम मृदूतक, जाइलम रेशे
फ्लोएमजटिल स्थायीपत्तियों में बने भोजन का संवहन (दोनों दिशाओं में); चालनी नलिकाएँ, साथी कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम रेशे
एपिडर्मिस (बाह्यत्वचा)सुरक्षात्मकसबसे बाहरी परत; मरुस्थलीय पौधों में मोटी क्यूटिकल; पत्ती पर रंध्र (स्टोमेटा)
कॉर्क (छाल)सुरक्षात्मक, मृतपुराने तनों में; भित्ति में सुबेरिन — जल व गैसों के लिए अपारगम्य

ध्यान दें: फ्लोएम के चार घटकों में केवल फ्लोएम रेशे मृत होते हैं; जाइलम में केवल जाइलम मृदूतक जीवित होता है।

8.2 जंतु ऊतक

ऊतकप्रकारस्थान / कार्य
उपकला (Epithelial)शल्की (स्क्वैमस)रक्त वाहिनियों का अस्तर, फेफड़ों की कूपिकाएँ, मुख — पदार्थों का विसरण
उपकलास्तरित शल्कीत्वचा — घिसाव से सुरक्षा
उपकलाघनाकारवृक्क नलिकाएँ, लार ग्रंथि की वाहिनियाँ
उपकलास्तंभाकार / पक्ष्माभीआँत का अस्तर (अवशोषण); श्वासनली में पक्ष्माभ (सिलिया) — श्लेष्मा आगे धकेलना
संयोजी (Connective)रक्ततरल आधात्री (प्लाज़्मा) वाला संयोजी ऊतक; गैसों, भोजन, हार्मोन का परिवहन
संयोजीअस्थि (हड्डी)कठोर आधात्री — कैल्शियम व फ़ॉस्फ़ोरस के लवण; शरीर का ढाँचा
संयोजीउपास्थि (कार्टिलेज)लचीली — नाक, कान, श्वासनली, कंठ; जोड़ों की सतह को चिकना करना
संयोजीकंडरा (Tendon)पेशी को अस्थि से जोड़ती है; बहुत मज़बूत, सीमित लचीलापन
संयोजीस्नायु (Ligament)अस्थि को अस्थि से जोड़ता है; बहुत लचीला व मज़बूत
संयोजीएरिओलरत्वचा और पेशियों के बीच, रक्त नलिकाओं के चारों ओर — रिक्त स्थान भरना, मरम्मत
संयोजीवसामय (एडिपोज़)त्वचा के नीचे, आंतरिक अंगों के बीच — वसा संचय, ऊष्मारोधी
पेशी (Muscular)रेखित / ऐच्छिक / कंकाल पेशीहाथ-पैर — इच्छा से गति; बेलनाकार, बहुकेंद्रकी, अशाखित
पेशीअरेखित / अनैच्छिक / चिकनी पेशीआहारनाल, आँख की परितारिका, मूत्रवाहिनी, श्वसनी — इच्छा के बिना; तर्कुरूप, एककेंद्रकी
पेशीहृदय पेशीकेवल हृदय में; अनैच्छिक, रेखित, शाखित, एककेंद्रकी; जीवनभर लयबद्ध संकुचन
तंत्रिका (Nervous)न्यूरॉनमस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाएँ — संदेशों का संचरण; कोशिकाकाय, द्रुमाश्म (डेंड्राइट), तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन)

9. आनुवंशिकता — मेंडल के नियम

जनकों से संतानों में लक्षणों का पहुँचना आनुवंशिकता (Heredity) और एक ही जाति के सदस्यों में अंतर विभिन्नता (Variation) कहलाता है। ग्रेगर जॉन मेंडल (ऑस्ट्रिया के एक मठ के पादरी) ने उद्यान मटर (Pisum sativum) के 7 जोड़ी विपरीत लक्षणों पर प्रयोग किए और 1866 में परिणाम प्रकाशित किए। उनके कार्य को 1900 में ह्यूगो डी व्रीज़, कॉरेंस और शेरमाक ने पुनः खोजा। मेंडल को आनुवंशिकी का जनक कहते हैं। "जीन" शब्द जोहान्सन (1909) ने दिया; मेंडल ने इसे "कारक (Factor)" कहा था।

9.1 मटर ही क्यों?

  • स्पष्ट विपरीत लक्षण (लंबा-बौना, गोल-झुर्रीदार, पीला-हरा)
  • स्व-परागण होता है, पर कृत्रिम पर-परागण भी आसान
  • जीवन-चक्र छोटा, एक पौधे से बहुत से बीज

9.2 मेंडल द्वारा अध्ययन किए गए 7 लक्षण

लक्षणप्रभावीअप्रभावी
तने की लंबाईलंबाबौना
बीज का आकारगोलझुर्रीदार
बीज का रंगपीलाहरा
फूल का रंगबैंगनीसफ़ेद
फली का आकारफूली हुईसिकुड़ी हुई
फली का रंगहरापीला
फूल की स्थितिअक्षीयशीर्षस्थ

9.3 शब्दावली

शब्दअर्थ
प्रभावी (Dominant)जो लक्षण F1 पीढ़ी में प्रकट होता है (जैसे T — लंबा)
अप्रभावी (Recessive)जो लक्षण F1 में छिप जाता है, F2 में फिर प्रकट होता है (t — बौना)
समयुग्मजी (Homozygous)दोनों विकल्पी समान — TT या tt
विषमयुग्मजी (Heterozygous)दोनों विकल्पी भिन्न — Tt
लक्षणप्ररूप (Phenotype)दिखाई देने वाला लक्षण — लंबा/बौना
जीनप्ररूप (Genotype)जीन संरचना — TT, Tt, tt
परीक्षार्थ संकरण (Test Cross)F1 (Tt) का अप्रभावी जनक (tt) से संकरण — अनुपात 1:1

9.4 एकसंकर और द्विसंकर संकरण

संकरणउदाहरणF1F2 लक्षणप्ररूप अनुपातF2 जीनप्ररूप अनुपात
एकसंकर (Monohybrid)लंबा (TT) × बौना (tt)सभी लंबे (Tt)3 लंबे : 1 बौना (3:1)1 TT : 2 Tt : 1 tt (1:2:1)
द्विसंकर (Dihybrid)गोल-पीला (RRYY) × झुर्रीदार-हरा (rryy)सभी गोल-पीले (RrYy)9 गोल-पीले : 3 गोल-हरे : 3 झुर्रीदार-पीले : 1 झुर्रीदार-हरा (9:3:3:1)9 प्रकार के जीनप्ररूप

9.5 मेंडल के नियम

नियमसारकिस संकरण से
प्रभाविता का नियमविपरीत लक्षणों में से F1 में केवल प्रभावी प्रकट होता हैएकसंकर
पृथक्करण का नियम (युग्मकों की शुद्धता)युग्मक बनते समय दोनों कारक अलग-अलग हो जाते हैं; हर युग्मक में एक ही कारक जाता हैएकसंकर
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियमदो या अधिक लक्षणों के कारक एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैंद्विसंकर

10. DNA और RNA

आनुवंशिक पदार्थ DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) है, जो केंद्रक के गुणसूत्रों में रहता है (थोड़ा DNA माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक में भी)। DNA का वह खंड जो किसी प्रोटीन (लक्षण) का कोड रखता है, जीन कहलाता है। न्यूक्लिक अम्ल की इकाई न्यूक्लियोटाइड है = शर्करा + फ़ॉस्फ़ेट + नाइट्रोजनी क्षार। केंद्रक से "न्यूक्लिन" के रूप में न्यूक्लिक अम्ल को सबसे पहले फ्रेडरिक मीशर (1869) ने अलग किया।

आधारDNARNA
पूरा नामडीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्लराइबोन्यूक्लिक अम्ल
शर्कराडीऑक्सीराइबोज़राइबोज़
क्षारA, T, G, CA, U, G, C (थायमीन के स्थान पर यूरैसिल)
संरचनाप्रायः द्विरज्जुक, द्विकुंडलित (Double Helix)प्रायः एकरज्जुक
स्थानमुख्यतः केंद्रक (गुणसूत्र); माइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवककेंद्रक व कोशिकाद्रव्य, राइबोसोम
कार्यआनुवंशिक सूचना का भंडार व वहनप्रोटीन संश्लेषण में सहायता (mRNA, tRNA, rRNA)

10.1 क्षार-युग्मन

तथ्यविवरण
प्यूरीनएडेनीन (A), ग्वानीन (G)
पिरिमिडीनसाइटोसीन (C), थायमीन (T — केवल DNA), यूरैसिल (U — केवल RNA)
DNA में जोड़ेA = T (2 हाइड्रोजन बंध), G ≡ C (3 हाइड्रोजन बंध)
शार्गफ़ नियमDNA में A की मात्रा = T, G की मात्रा = C
द्विकुंडलित मॉडलजेम्स वाटसन व फ्रांसिस क्रिक, 1953 (रोज़ालिंड फ्रैंकलिन व मॉरिस विल्किंस के X-किरण चित्रों पर आधारित); वाटसन, क्रिक व विल्किंस को 1962 का नोबेल
सूचना प्रवाह (केंद्रीय सिद्धांत)DNA → RNA (अनुलेखन) → प्रोटीन (अनुवादन)

11. गुणसूत्र और लिंग निर्धारण

गुणसूत्र DNA और प्रोटीन से बनी धागे जैसी संरचनाएँ हैं जो कोशिका विभाजन के समय स्पष्ट दिखती हैं। मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं — 22 जोड़े अलिंगसूत्र (ऑटोसोम) और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र। युग्मकों (शुक्राणु, अंडाणु) में 23 गुणसूत्र होते हैं।

व्यक्तिलिंग गुणसूत्रबनने वाले युग्मक
स्त्रीXXसभी अंडाणु 22 + X
पुरुषXYआधे शुक्राणु 22 + X, आधे 22 + Y
X शुक्राणु + अंडाणुXXलड़की
Y शुक्राणु + अंडाणुXYलड़का

निष्कर्ष: संतान का लिंग इस पर निर्भर करता है कि अंडाणु को पिता से X वाला शुक्राणु मिला या Y वाला; माता हर बार X ही देती है। हर गर्भधारण में लड़का या लड़की होने की संभावना लगभग 50-50 होती है। कुछ सरीसृपों (जैसे कछुए) में लिंग का निर्धारण अंडों के निषेचित होने के बाद के तापमान से होता है (NCERT कक्षा 10)।


12. आनुवंशिक रोग

रोगप्रकारमुख्य तथ्य
हीमोफ़ीलियाX-लिंक्ड अप्रभावीरक्त का थक्का नहीं बनता या देर से बनता है; "शाही रोग" (महारानी विक्टोरिया के वंशज); पुरुषों में अधिक
वर्णांधता (Colour Blindness)X-लिंक्ड अप्रभावीप्रायः लाल-हरे रंग में भेद न कर पाना; पुरुषों में अधिक
डाउन सिंड्रोमगुणसूत्रीय — 21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमीकुल 47 गुणसूत्र; मानसिक विकास में कमी, विशिष्ट चेहरा; लैंगडन डाउन ने वर्णन किया
टर्नर सिंड्रोमगुणसूत्रीय — 45, XOस्त्री; एक X कम
क्लाइनफ़ेल्टर सिंड्रोमगुणसूत्रीय — 47, XXYपुरुष; एक X अधिक
सिकल सेल एनीमियाअलिंगसूत्री अप्रभावीहीमोग्लोबिन में दोष; RBC हँसिया (दरांती) के आकार की हो जाती हैं, O₂ वहन घटता है
थैलेसीमियाअलिंगसूत्री अप्रभावीहीमोग्लोबिन कम बनता है; रक्ताल्पता

X-लिंक्ड रोग पुरुषों में अधिक क्यों? पुरुष में केवल एक X होता है, इसलिए उस X पर अप्रभावी जीन होते ही रोग प्रकट हो जाता है; स्त्री में दूसरा सामान्य X उसे ढक सकता है — ऐसी स्त्री वाहक (Carrier) कहलाती है।


13. विकास (Evolution) — संक्षेप

वैज्ञानिक / अवधारणामुख्य विचारयाद रखने योग्य
लैमार्कउपार्जित लक्षणों की वंशागति; अंगों का उपयोग-अनुपयोगजिराफ़ की लंबी गर्दन का उदाहरण; पुस्तक "फ़िलॉसफ़ी ज़ूलॉजिक" (1809)
चार्ल्स डार्विनप्राकृतिक वरण (Natural Selection)"ऑन द ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़" (1859); HMS बीगल यात्रा; गैलापागोस द्वीप की फ़िंच चिड़ियाँ
"योग्यतम की उत्तरजीविता"वाक्यांश हर्बर्ट स्पेंसर का; डार्विन ने बाद में अपनाया—
ह्यूगो डी व्रीज़उत्परिवर्तन (Mutation) सिद्धांतपौधा — ईवनिंग प्रिमरोज़ (ओइनोथेरा)
समजात अंगसंरचना समान, कार्य भिन्नमनुष्य का हाथ, चमगादड़ का पंख, व्हेल का फ़्लिपर — अपसारी विकास
समवृत्ति अंगकार्य समान, संरचना भिन्नपक्षी और कीट के पंख — अभिसारी विकास
जीवाश्मपुराने जीवों के अवशेषआर्कियोप्टेरिक्स — सरीसृप और पक्षियों के बीच की कड़ी
मिलर-यूरे प्रयोग (1953)आदिम वातावरण में सरल अकार्बनिक पदार्थों से अमीनो अम्ल बनेजीवन की रासायनिक उत्पत्ति (ओपेरिन-हाल्डेन विचार) का समर्थन

14. जैव प्रौद्योगिकी — संक्षेप

तकनीक / उत्पादमुख्य तथ्य
क्लोनिंग — डॉली भेड़1996, रोज़लिन इंस्टीट्यूट (स्कॉटलैंड), इयान विल्मुट की टीम; कायिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण से बना पहला क्लोन स्तनधारी
Bt कपासमृदा जीवाणु बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) का जीन डाला गया; यह जीन एक विषैला प्रोटीन बनाता है जो कुछ कीटों (जैसे बॉलवर्म) को मारता है; भारत में व्यावसायिक खेती 2002 से
गोल्डन राइसβ-कैरोटीन (विटामिन A का पूर्ववर्ती) से समृद्ध GM धान
पुनर्योगज DNA तकनीकजीन को एक जीव से दूसरे में डालना; रेस्ट्रिक्शन एंजाइम = "आणविक कैंची", लाइगेज़ = "आणविक गोंद"
मानव इंसुलिनपुनर्योगज DNA तकनीक से जीवाणु (E. coli) में बनाया गया
DNA फ़िंगरप्रिंटिंगएलेक जेफ़्रीज़ ने विकसित की; अपराध जाँच व पितृत्व निर्धारण में उपयोग
मानव जीनोम परियोजनामानव DNA के संपूर्ण क्रम का निर्धारण; 2003 में पूर्ण घोषित

15. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: हुक ने जीवित कोशिका देखी?

नहीं। रॉबर्ट हुक ने कॉर्क की मृत कोशिकाएँ (केवल भित्तियाँ) देखीं। जीवित कोशिका पहली बार ल्यूवेनहॉक ने देखी। प्रश्न में "कोशिका की खोज" = हुक, "जीवित कोशिका" = ल्यूवेनहॉक।

Trap 2: केंद्रक बनाम केंद्रिका बनाम केंद्रकाभ

केंद्रक (Nucleus) — नियंत्रण केंद्र, रॉबर्ट ब्राउन 1831। केंद्रिका (Nucleolus) — केंद्रक के भीतर, राइबोसोम के घटक बनाती है। केंद्रकाभ (Nucleoid) — प्रोकैरियोट में झिल्ली-रहित आनुवंशिक क्षेत्र।

Trap 3: लाइसोसोम बनाम राइबोसोम

नाम मिलते-जुलते हैं, काम बिल्कुल अलग। लाइसोसोम — पाचक एंजाइमों की थैली, "आत्मघाती थैली", झिल्ली से घिरा। राइबोसोम — प्रोटीन संश्लेषण, झिल्ली-रहित, प्रोकैरियोट में भी मिलता है।

Trap 4: कोशिका भित्ति बनाम कोशिका झिल्ली

कोशिका भित्ति पादप व शैवाल (सेलुलोज़), कवक (काइटिन) और जीवाणुओं में होती है, जंतु कोशिका में नहीं; यह पूर्ण पारगम्य है। कोशिका झिल्ली सभी कोशिकाओं में; यह वरणात्मक पारगम्य है। जंतु कोशिका की सबसे बाहरी परत कोशिका झिल्ली होती है।

Trap 5: अपना DNA किनमें?

केंद्रक के अलावा माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक में अपना DNA और राइबोसोम होते हैं — इसलिए इन्हें अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग कहते हैं। गॉल्जी काय या लाइसोसोम में अपना DNA नहीं होता।

Trap 6: माइटोसिस बनाम मियोसिस की संख्याएँ

माइटोसिस: 1 विभाजन → 2 कोशिकाएँ → गुणसूत्र समान। मियोसिस: 2 विभाजन → 4 कोशिकाएँ → गुणसूत्र आधे। "अर्धसूत्री" नाम में ही "अर्ध" (आधा) छिपा है।

Trap 7: कंडरा बनाम स्नायु

कंडरा (Tendon) = पेशी से अस्थि (मज़बूत, कम लचीली)। स्नायु (Ligament) = अस्थि से अस्थि (लचीला)। अंग्रेज़ी याद रखें: Tendon — To muscle; Ligament — Links bones।

Trap 8: जाइलम बनाम फ्लोएम

जाइलम — जल व खनिज, जड़ से ऊपर (एक दिशा)। फ्लोएम — भोजन (शर्करा), पत्तियों से अन्य भागों तक (दोनों दिशाएँ)। "जाइलम = जल"।

Trap 9: एकसंकर 3:1 बनाम 1:2:1

एकसंकर F2 में लक्षणप्ररूप अनुपात 3:1 और जीनप्ररूप अनुपात 1:2:1। द्विसंकर लक्षणप्ररूप 9:3:3:1। परीक्षार्थ संकरण 1:1। प्रश्न में "phenotypic" या "genotypic" शब्द ध्यान से पढ़ें।

Trap 10: लिंग किससे तय होता है?

माता से हमेशा X आता है, इसलिए लिंग पिता के शुक्राणु (X या Y) से तय होता है। "माता के गुणसूत्र से" वाला विकल्प गलत है।

Trap 11: डाउन बनाम टर्नर बनाम क्लाइनफ़ेल्टर

डाउन = 21वें अलिंगसूत्र की ट्राइसोमी (47)। टर्नर = 45, XO (स्त्री)। क्लाइनफ़ेल्टर = 47, XXY (पुरुष)। हीमोफ़ीलिया और वर्णांधता गुणसूत्र-संख्या के रोग नहीं, बल्कि X पर स्थित जीन के रोग हैं।

Trap 12: लैमार्क बनाम डार्विन

लैमार्क = उपयोग-अनुपयोग, उपार्जित लक्षणों की वंशागति (जिराफ़)। डार्विन = प्राकृतिक वरण। "Survival of the fittest" वाक्यांश हर्बर्ट स्पेंसर का है।


16. Most-Asked रिवीज़न तालिका (55 तथ्य)

क्रमप्रश्न / संकेतउत्तर
1कोशिका की खोजरॉबर्ट हुक, 1665
2हुक ने किसमें कोशिका देखीकॉर्क
3हुक की पुस्तकमाइक्रोग्राफ़िया
4जीवित कोशिका पहली बारल्यूवेनहॉक, 1674
5केंद्रक की खोजरॉबर्ट ब्राउन, 1831
6"प्रोटोप्लाज़्म" शब्दपुरकिंजे, 1839
7कोशिका सिद्धांतश्लाइडेन व श्वान
8Omnis cellula e cellulaरुडोल्फ़ विर्खो
9जीवन की संरचनात्मक-क्रियात्मक इकाईकोशिका
10कोशिका का पावरहाउसमाइटोकॉन्ड्रिया
11ऊर्जा मुद्राATP
12आत्मघाती थैलीलाइसोसोम
13प्रोटीन संश्लेषणराइबोसोम
14कोशिका का नियंत्रण केंद्रकेंद्रक
15प्रकाश संश्लेषण का स्थानहरितलवक
16पैकेजिंग व स्रावणगॉल्जी काय
17लाइसोसोम किससे बनते हैंगॉल्जी काय
18वसा निर्माण, विषहरणचिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (SER)
19पादप कोशिका भित्तिसेलुलोज़
20कवक कोशिका भित्तिकाइटिन
21वरणात्मक पारगम्यकोशिका झिल्ली
22टमाटर का लाल रंगवर्णीलवक (क्रोमोप्लास्ट)
23जंतु कोशिका विभाजन में तर्कुतारककाय (सेंट्रोसोम)
24अपना DNA वाले कोशिकांगमाइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवक
25प्रोकैरियोट का उदाहरणजीवाणु, नील-हरित शैवाल
26प्रोकैरियोट का राइबोसोम70S
27सबसे बड़ी एकल कोशिकाशुतुरमुर्ग का अंडा
28मानव की सबसे लंबी कोशिकातंत्रिका कोशिका
29माइटोसिस — संतति कोशिकाएँ2, गुणसूत्र समान
30मियोसिस — संतति कोशिकाएँ4, गुणसूत्र आधे
31क्रॉसिंग ओवरमियोसिस में
32लंबाई में वृद्धिशीर्षस्थ विभज्योतक
33मोटाई में वृद्धिपार्श्व विभज्योतक (कैंबियम)
34जल संवहनजाइलम
35भोजन संवहनफ्लोएम
36जूट/नारियल के रेशेदृढ़ ऊतक (स्क्लेरेंकाइमा)
37जलीय पौधों को तैरने में सहायतावायूतक (एरेंकाइमा)
38पेशी को अस्थि से जोड़ने वालाकंडरा (टेंडन)
39अस्थि को अस्थि से जोड़ने वालास्नायु (लिगामेंट)
40तरल संयोजी ऊतकरक्त
41नाक व कान का ढाँचाउपास्थि
42शाखित, रेखित, अनैच्छिक पेशीहृदय पेशी
43आनुवंशिकी के जनकग्रेगर मेंडल
44मेंडल का पौधामटर (Pisum sativum)
45एकसंकर F2 लक्षणप्ररूप अनुपात3:1
46एकसंकर F2 जीनप्ररूप अनुपात1:2:1
47द्विसंकर F2 अनुपात9:3:3:1
48स्वतंत्र अपव्यूहन का नियमद्विसंकर संकरण से
49"जीन" शब्दजोहान्सन, 1909
50DNA द्विकुंडलित मॉडलवाटसन व क्रिक, 1953
51RNA में T के स्थान परयूरैसिल (U)
52मानव गुणसूत्र46 (23 जोड़े)
53संतान का लिंग निर्धारकपिता का गुणसूत्र (X या Y)
54डाउन सिंड्रोम21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमी
55पहला क्लोन स्तनधारीडॉली भेड़, 1996

17. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस अध्याय के प्रश्न कुछ तय ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न है:

  1. कोशिकांग ↔ कार्य: "कोशिका का पावरहाउस किसे कहा जाता है?" (उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया) — विकल्पों में प्रायः राइबोसोम, गॉल्जी काय, लाइसोसोम रखे जाते हैं।
  2. मिलान: "सूची-I: रॉबर्ट हुक, रॉबर्ट ब्राउन, विर्खो, वाटसन-क्रिक; सूची-II: केंद्रक, कॉर्क कोशिका, DNA मॉडल, Omnis cellula e cellula।" (उत्तर: हुक–कॉर्क, ब्राउन–केंद्रक, विर्खो–Omnis cellula, वाटसन-क्रिक–DNA मॉडल)
  3. "केवल किसमें": "निम्न में से कौन-सा जंतु कोशिका में नहीं पाया जाता?" (उत्तर: कोशिका भित्ति / हरितलवक)
  4. संख्या आधारित: "मियोसिस के बाद कितनी संतति कोशिकाएँ बनती हैं?" (4) — "द्विसंकर संकरण का F2 अनुपात?" (9:3:3:1)
  5. कथन-आधारित: "1. RNA में थायमीन होता है। 2. DNA में डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा होती है। कौन-सा सही है?" (उत्तर: केवल 2)
  6. अभिकथन-कारण: "अभिकथन (A): वर्णांधता पुरुषों में अधिक होती है। कारण (R): पुरुषों में केवल एक X गुणसूत्र होता है।" (दोनों सही, R, A की सही व्याख्या)
  7. ऊतक ↔ स्थान: "आहारनाल की दीवार में कौन-सी पेशी होती है?" (अरेखित / चिकनी पेशी)

रणनीति: कोशिकांग वाले प्रश्नों में "उपनाम" (पावरहाउस, आत्मघाती थैली, प्रोटीन फ़ैक्टरी) पक्के रखें। संख्या वाले प्रश्नों में 2/4, 3:1/1:2:1, 46/23 जैसी जोड़ियों को एक साथ दोहराएँ। ऐसे प्रश्नों का अभ्यास SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ में भी करें।


18. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. खोज का क्रम: "हुक ने ल्यूको ब्राउन श्ला-श्वा विर्खो" — हुक (1665) → ल्यूवेनहॉक (1674) → ब्राउन (1831) → श्लाइडेन-श्वान (1838-39) → विर्खो (1855)।

2. पादप कोशिका की विशेष तीन चीज़ें: "भि-ह-रि" — भित्ति, हरितलवक, बड़ी रिक्तिका।

3. माइटोसिस की अवस्थाएँ: "PMAT" — Prophase, Metaphase, Anaphase, Telophase (पू-म-प-अं)।

4. मियोसिस: "अर्ध = आधा" — गुणसूत्र आधे, और "M-4" — Meiosis में 4 कोशिकाएँ।

5. DNA क्षार: "AT घर, GC पक्का" — A-T (2 बंध), G-C (3 बंध, ज़्यादा मज़बूत)। RNA में "U" = "Unique to RNA"।

6. मेंडल के अनुपात: "एक में तीन-एक, दो में नौ-तीन-तीन-एक।"

7. गुणसूत्रीय सिंड्रोम: "डाउन 21 (इक्कीस का दम), टर्नर XO (एक कम), क्लाइनफ़ेल्टर XXY (एक ज़्यादा)।"

8. X-लिंक्ड: "हीरा वर्ण" — हीमोफ़ीलिया, वर्णांधता।


19. कथन अभ्यास

रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की काट में कोशिका देखी थी। — सही।

केंद्रक की खोज ल्यूवेनहॉक ने की थी। — गलत (रॉबर्ट ब्राउन, 1831)।

लाइसोसोम को "आत्मघाती थैली" कहा जाता है। — सही।

राइबोसोम एक झिल्लीयुक्त कोशिकांग है। — गलत (राइबोसोम झिल्ली-रहित होता है)।

पादप कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है। — गलत (सेलुलोज़; काइटिन कवक में)।

माइटोकॉन्ड्रिया में अपना DNA होता है। — सही।

अर्धसूत्री विभाजन से दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। — गलत (चार कोशिकाएँ, गुणसूत्र आधे)।

कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है। — सही।

फ्लोएम जल और खनिज लवणों का संवहन करता है। — गलत (यह जाइलम का कार्य है; फ्लोएम भोजन का संवहन करता है)।

मेंडल के एकसंकर संकरण में F2 का लक्षणप्ररूप अनुपात 3:1 होता है। — सही।

RNA में थायमीन क्षार होता है। — गलत (RNA में थायमीन के स्थान पर यूरैसिल)।

मनुष्य में संतान का लिंग माता के गुणसूत्र से तय होता है। — गलत (पिता के X या Y गुणसूत्र से)।


20. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. हुक 1665 (कॉर्क, मृत) → ल्यूवेनहॉक 1674 (जीवित) → ब्राउन 1831 (केंद्रक)
  2. कोशिका सिद्धांत — श्लाइडेन व श्वान; Omnis cellula e cellula — विर्खो 1855
  3. प्रोकैरियोट: केंद्रक झिल्ली नहीं, 70S राइबोसोम — जीवाणु, नील-हरित शैवाल
  4. पादप कोशिका में भित्ति (सेलुलोज़), हरितलवक, बड़ी रिक्तिका; जंतु कोशिका में तारककाय
  5. माइटोकॉन्ड्रिया = पावरहाउस (ATP); लाइसोसोम = आत्मघाती थैली; राइबोसोम = प्रोटीन
  6. गॉल्जी = पैकेजिंग व लाइसोसोम निर्माण; SER = वसा व विषहरण; RER = प्रोटीन
  7. अपना DNA: केंद्रक के अलावा माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक
  8. माइटोसिस 2 समान कोशिकाएँ; मियोसिस 4 कोशिकाएँ, गुणसूत्र आधे, क्रॉसिंग ओवर
  9. जाइलम = जल (एकदिशीय); फ्लोएम = भोजन (द्विदिशीय)
  10. कंडरा = पेशी-अस्थि; स्नायु = अस्थि-अस्थि; रक्त = तरल संयोजी ऊतक
  11. मेंडल — मटर, 7 लक्षण; 3:1, 1:2:1, 9:3:3:1; परीक्षार्थ संकरण 1:1
  12. DNA द्विकुंडलित — वाटसन-क्रिक 1953; A-T, G-C; RNA में U
  13. मानव 46 गुणसूत्र (22 जोड़े ऑटोसोम + XX/XY); पिता तय करता है लिंग
  14. हीमोफ़ीलिया, वर्णांधता = X-लिंक्ड; डाउन = ट्राइसोमी 21; सिकल सेल = हीमोग्लोबिन दोष
  15. लैमार्क = उपार्जित लक्षण; डार्विन = प्राकृतिक वरण; डॉली 1996; Bt कपास

21. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 6 (कोशिकांग तालिका), खंड 7 (कोशिका विभाजन) और खंड 15 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। इसके बाद पोषण, विटामिन और रोग वाला नोट पढ़ें, और पूरे सामान्य विज्ञान को परीक्षा-स्तर पर परखने के लिए RRB NTPC CBT-1 2026 टेस्ट सीरीज़ और राजस्थान CET (स्नातक) फ़ाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।


22. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

कोशिका से लेकर आनुवंशिकता तक यह अध्याय एक सीढ़ी की तरह है — कोशिका और उसके कोशिकांग, फिर कोशिकाओं से बने ऊतक, फिर कोशिका विभाजन के दौरान गुणसूत्रों का बँटना, और अंत में मेंडल के नियमों व DNA से समझ आता है कि लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी कैसे पहुँचते हैं। परीक्षा की दृष्टि से कोशिकांगों के उपनाम, खोजकर्ता-वर्ष, माइटोसिस-मियोसिस की संख्याएँ, मेंडल के अनुपात, DNA-RNA अंतर और X-लिंक्ड रोग सबसे अधिक पूछे जाते हैं। इन्हें तालिकाओं से दोहराएँ और Exam Traps वाले जोड़ों पर विशेष ध्यान दें।

हुक (कॉर्क) → ब्राउन (केंद्रक) → विर्खो (Omnis cellula) | माइटोकॉन्ड्रिया = पावरहाउस, लाइसोसोम = आत्मघाती | माइटोसिस 2, मियोसिस 4 | मेंडल 3:1, 9:3:3:1 | DNA = वाटसन-क्रिक 1953 | 46 गुणसूत्र, पिता = लिंग


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की पतली काट में की थी। उन्होंने जो देखा वह मृत कोशिकाओं की भित्तियाँ थीं; जीवित कोशिका सबसे पहले ल्यूवेनहॉक (1674) ने देखी।

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस कहा जाता है, क्योंकि कोशिकीय श्वसन से ऊर्जा यहीं ATP के रूप में बनती है।

लाइसोसोम को आत्मघाती थैली कहते हैं। इसमें शक्तिशाली पाचक एंजाइम होते हैं; कोशिका क्षतिग्रस्त होने पर लाइसोसोम फटकर उसी कोशिका को पचा सकते हैं।

पादप कोशिका में सेलुलोज़ की कोशिका भित्ति, हरितलवक और एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है, जो जंतु कोशिका में नहीं होती। जंतु कोशिका में तारककाय (सेंट्रोसोम) होता है, जो उच्च पादपों में प्रायः नहीं मिलता।

समसूत्री (माइटोसिस) विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है और इससे गुणसूत्रों की समान संख्या वाली 2 कोशिकाएँ बनती हैं। अर्धसूत्री (मियोसिस) विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है और इससे आधे गुणसूत्रों वाली 4 कोशिकाएँ बनती हैं।

कंडरा (टेंडन) पेशी को अस्थि से जोड़ती है और बहुत मज़बूत पर कम लचीली होती है। स्नायु (लिगामेंट) एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ता है और लचीला होता है।

एकसंकर संकरण की F2 पीढ़ी में लक्षणप्ररूप अनुपात 3:1 और जीनप्ररूप अनुपात 1:2:1 होता है। द्विसंकर संकरण की F2 पीढ़ी में लक्षणप्ररूप अनुपात 9:3:3:1 होता है।

DNA में डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा और क्षार A, T, G, C होते हैं तथा यह प्रायः द्विकुंडलित होता है। RNA में राइबोज़ शर्करा होती है, थायमीन के स्थान पर यूरैसिल (U) होता है और यह प्रायः एकरज्जुक होता है।

मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं — 22 जोड़े अलिंगसूत्र और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र। शुक्राणु और अंडाणु में 23 गुणसूत्र होते हैं।

माता हमेशा X गुणसूत्र देती है, जबकि पिता X या Y में से कोई एक देता है। इसलिए संतान का लिंग पिता के शुक्राणु से तय होता है — X मिलने पर लड़की (XX) और Y मिलने पर लड़का (XY)।

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