राजस्थान चित्रकला के प्रमुख चित्रकार एवं उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
राजस्थान चित्रकला के प्रमुख चित्रकार एवं उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
⚡ Quick Answer: राजस्थान चित्रकला के सर्वाधिक पूछे जाने वाले चित्रकार — नासिरुद्दीन (रागमाला 1605, चावंड — मेवाड़), साहिबदीन व मनोहर (रामायण, जगतसिंह प्रथम — मेवाड़), वीरजी (रागमाला 1623, पाली — मारवाड़), निहालचंद (बणी-ठणी — किशनगढ़), साहिबराम (आदमकद चित्र — जयपुर), लालचंद (पशु-युद्ध — जयपुर), डालू (रागमाला 1768 — कोटा), बलदेव व गुलाम अली (गुलिस्ताँ — अलवर), मूलचंद (हाथीदाँत चित्र — अलवर), अली रज़ा व रुकनुद्दीन (बीकानेर), बगता व चोखा (देवगढ़), श्रीलाल जोशी (फड़ — शाहपुरा)। आधुनिक चित्रकारों में रामगोपाल विजयवर्गीय, परमानंद चोयल (भैंसों के चितेरे), जगमोहन माथोड़िया (श्वानों के चितेरे), गोवर्धनलाल बाबा (भीलों के चितेरे), सौभाग्यमल गहलोत (नीड़ का चितेरा), देवकीनंदन शर्मा, भूरसिंह शेखावत, कृपाल सिंह शेखावत प्रमुख हैं।
1. चित्रकारों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
राजस्थानी चित्रकला के प्रश्नों में ‘चित्रकार–शैली’ और ‘चित्रकार–कृति’ सुमेलन सबसे अधिक पूछे जाते हैं। चूँकि अधिकांश शैलियाँ राज-दरबारों के संरक्षण में विकसित हुईं, इसलिए चित्रकार को उसके संरक्षक शासक और प्रमुख कृति के साथ जोड़कर पढ़ना सबसे प्रभावी तरीका है। यह नोट सभी शैलियों के चित्रकारों का एक स्थान पर संकलन है; शैली-वार विस्तृत अध्ययन हेतु संबंधित नोट्स के लिंक दिए गए हैं।
2. मेवाड़ शैली के चित्रकार
| चित्रकार | संरक्षक | प्रमुख कृति / योगदान |
|---|---|---|
| नासिरुद्दीन (निसारदीन) | महाराणा अमरसिंह प्रथम | रागमाला (1605 ई., चावंड) — मेवाड़ शैली का प्रारंभिक दिनांकित उदाहरण |
| साहिबदीन | महाराणा जगतसिंह प्रथम | रागमाला (1628), रामायण (युद्ध कांड आदि), भागवत; मेवाड़ शैली के सर्वश्रेष्ठ चित्रकार |
| मनोहर | महाराणा जगतसिंह प्रथम | रामायण (बालकांड) — साहिबदीन के समकालीन |
| कृपाराम, उमरा, जगन्नाथ | 17वीं-18वीं सदी | बिहारी सतसई, धार्मिक व दरबारी चित्र |
| घासीराम, नारायण, चतुर्भुज, उदयराम | नाथद्वारा | श्रीनाथजी व पिछवाई चित्र |
महाराणा जगतसिंह प्रथम ने चित्रकारों के लिए ‘चितेरों की ओवरी’ (तस्वीरां रो कारखानो) स्थापित किया — मेवाड़ का स्वर्ण युग। विस्तार: मेवाड़ चित्रकला शैली।
3. मारवाड़, बीकानेर व किशनगढ़ के चित्रकार
| चित्रकार | शैली/केंद्र | प्रमुख कृति / योगदान |
|---|---|---|
| वीरजी | मारवाड़ (पाली) | रागमाला (1623 ई., पाली) |
| नारायणदास, भाटी अमरदास, किशनदास, शिवदास, देवदास | मारवाड़ (जोधपुर) | दरबारी, ढोला-मारू, नाथ संप्रदाय विषयक चित्र (मानसिंह काल) |
| अली रज़ा (उस्ताद) | बीकानेर | बीकानेर शैली के प्रारंभिक चित्रकार (दिल्ली से आए) |
| रुकनुद्दीन | बीकानेर | महाराजा अनूपसिंह के काल में; रसिकप्रिया व धार्मिक चित्र |
| शाह मोहम्मद, हामिद रुकनुद्दीन, मुन्नालाल, मुकुंद | बीकानेर | मुगल-दक्खिनी प्रभाव वाले चित्र; चित्रों पर नाम-तिथि अंकन की परंपरा |
| निहालचंद | किशनगढ़ | बणी-ठणी (≈1750) — ‘भारत की मोनालिसा’; 1973 में डाक टिकट |
| अमीरचंद, सीताराम, बदनसिंह, नानकराम, सवाईराम | किशनगढ़ | राधा-कृष्ण, नौका-विहार, झील दृश्य |
विस्तार: मारवाड़ | बीकानेर | किशनगढ़
4. ढूंढाड़ (जयपुर, अलवर, उनियारा) के चित्रकार
| चित्रकार | उपशैली | प्रमुख कृति / योगदान |
|---|---|---|
| साहिबराम | जयपुर | आदमकद व्यक्ति-चित्र; सवाई ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र |
| लालचंद | जयपुर | पशु-युद्ध के चित्र |
| रामसेवक, गोपाल, उदय, हुकमा, चिमना, सालिगराम | जयपुर | प्रतापसिंह काल — कृष्ण-लीला, रागमाला, भागवत |
| डालूराम, शिवकुमार | अलवर | अलवर शैली के प्रारंभिक चित्रकार; राजगढ़ शीशमहल के भित्ति चित्र |
| बलदेव, गुलाम अली | अलवर | गुलिस्ताँ (शेख सादी) — विनयसिंह काल |
| मूलचंद | अलवर | हाथीदाँत पर चित्रकारी |
| धीमा, मीरबक्श, काशी, रामलखन, भीम | उनियारा | बूँदी-जयपुर समन्वित चित्र |
विस्तार: ढूंढाड़ | जयपुर | अलवर
5. हाड़ौती (बूँदी-कोटा) व देवगढ़ के चित्रकार
| चित्रकार | शैली | प्रमुख कृति / योगदान |
|---|---|---|
| सुर्जन, अहमद अली, रामलाल, श्रीकिशन, साधुराम | बूँदी | वर्षा, पशु-पक्षी, रागमाला; चित्रशाला (राव उम्मेदसिंह) के भित्ति चित्र |
| डालू | कोटा | रागमाला (1768 ई.) |
| लच्छीराम, नूर मोहम्मद, रघुनाथ, गोविंद | कोटा | शिकार दृश्य — महाराव उम्मेदसिंह प्रथम का काल |
| बगता, कँवला, चोखा, बैजनाथ | देवगढ़ (मेवाड़ ठिकाना) | शिकार, दरबार, भित्ति चित्र — मोती महल, अजारा की ओवरी |
विस्तार: बूँदी | कोटा | देवगढ़
6. लोक चित्रकला के प्रमुख कलाकार
| कलाकार | कला | विशेष |
|---|---|---|
| श्रीलाल जोशी | फड़ (शाहपुरा, भीलवाड़ा) | पद्मश्री (2006); फड़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान |
| कल्याण जोशी, शांतिलाल जोशी, दुर्गेश जोशी | फड़ | जोशी (छीपा) परिवार की परंपरा का विस्तार |
| नाथद्वारा के चितेरे | पिछवाई | श्रीनाथजी के शृंगार व उत्सव-आधारित पिछवाइयाँ |
देखें — फड़ चित्रकला व पिछवाई चित्रकला।
7. आधुनिक राजस्थान के प्रमुख चित्रकार
| चित्रकार | उपनाम/विशेष पहचान | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| रामगोपाल विजयवर्गीय | राजस्थान में एकल चित्र-प्रदर्शनी परंपरा के प्रवर्तक | जयपुर; काव्य व चित्र का समन्वय; पद्मश्री (1984) |
| परमानंद चोयल | ‘भैंसों के चितेरे’ | भैंसों को प्रतीक बनाकर आधुनिक चित्र; उदयपुर |
| जगमोहन माथोड़िया | ‘श्वानों (कुत्तों) के चितेरे’ | श्वान-विषयक चित्र श्रृंखला |
| गोवर्धनलाल जोशी ‘बाबा’ | ‘भीलों के चितेरे’ | काँकरोली (राजसमंद); भील जनजीवन के चित्र |
| सौभाग्यमल गहलोत | ‘नीड़ का चितेरा’ | पक्षियों के घोंसलों (नीड़) पर चित्र |
| देवकीनंदन शर्मा | ‘मास्टर ऑफ़ नेचर एंड लिविंग ऑब्जेक्ट्स’ | प्रकृति व पशु-पक्षी चित्रण; भित्ति चित्र (आराइश) के विशेषज्ञ |
| भूरसिंह शेखावत | ग्रामीण जीवन व स्वतंत्रता सेनानियों के व्यक्ति-चित्र | बीकानेर/शेखावाटी क्षेत्र |
| कृपाल सिंह शेखावत | ब्लू पॉटरी के पुनरुद्धारक | पद्मश्री (1974); चित्रकार व शिल्पी |
| ज्योतिस्वरूप | ‘इनर जंगल’ श्रृंखला | आधुनिक अमूर्त/प्रतीकात्मक चित्रकला |
8. प्रमुख कला संस्थाएँ व कलाकार समूह
| संस्था/समूह | स्थान | विवरण |
|---|---|---|
| राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट (मदरसा-ए-हुनरी) | जयपुर | 1857, सवाई रामसिंह द्वितीय |
| राजस्थान ललित कला अकादमी | जयपुर | 1957 — दृश्य कलाओं का संवर्धन |
| जवाहर कला केंद्र | जयपुर | 1993 — बहु-कला केंद्र |
| टखमण-28 | उदयपुर | कलाकार समूह |
| तूलिका कलाकार परिषद | उदयपुर | कलाकार समूह |
| आयाम, कलावृत्त, पैग (PAG) | जयपुर | कलाकार समूह |
| धोरां, चितेरा | जोधपुर | कलाकार समूह |
9. कालक्रम — दिनांकित कृतियों की समयरेखा
| वर्ष (ई.) | कृति | चित्रकार | शैली/केंद्र |
|---|---|---|---|
| 1260 | श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि | — | मेवाड़ (आहड़) — राजस्थान का प्राचीनतम दिनांकित चित्रित ग्रंथ |
| 1591 | चुनार रागमाला | — | बूँदी |
| 1605 | रागमाला | नासिरुद्दीन | मेवाड़ (चावंड) |
| 1623 | रागमाला | वीरजी | मारवाड़ (पाली) |
| 1628 के आसपास | रागमाला, रामायण | साहिबदीन, मनोहर | मेवाड़ (उदयपुर) |
| ≈1750 | बणी-ठणी | निहालचंद | किशनगढ़ |
| 1768 | रागमाला | डालू | कोटा |
| 1815–1857 | गुलिस्ताँ | बलदेव, गुलाम अली | अलवर |
उपयोग: ‘कालक्रमानुसार सही क्रम चुनिए’ प्रकार के प्रश्नों में यह तालिका सीधे काम आती है — प्राचीनतम से नवीनतम: 1260 → 1591 → 1605 → 1623 → 1750 → 1768।
स्मरण हेतु: रागमालाएँ चार शैलियों में हैं — बूँदी (1591), मेवाड़ (1605), मारवाड़ (1623), कोटा (1768)। इनके वर्ष व चित्रकार अलग-अलग याद रखें, क्योंकि परीक्षक अक्सर इन्हें आपस में बदलकर विकल्प बनाते हैं।
📝 One-Liner Revision — चित्रकार व कृतियाँ (22 प्रश्न)
- प्रश्न: रागमाला (1605, चावंड) के चित्रकार?
उत्तर: नासिरुद्दीन - प्रश्न: मेवाड़ शैली के सर्वश्रेष्ठ चित्रकार?
उत्तर: साहिबदीन - प्रश्न: मेवाड़ में रामायण (बालकांड) के चित्रकार?
उत्तर: मनोहर - प्रश्न: रागमाला (1623, पाली) के चित्रकार?
उत्तर: वीरजी - प्रश्न: बणी-ठणी के चित्रकार?
उत्तर: निहालचंद - प्रश्न: बणी-ठणी पर डाक टिकट?
उत्तर: 1973 - प्रश्न: आदमकद चित्रों के चित्रकार?
उत्तर: साहिबराम (जयपुर) - प्रश्न: पशु-युद्ध चित्रों के चित्रकार?
उत्तर: लालचंद (जयपुर) - प्रश्न: कोटा रागमाला (1768) के चित्रकार?
उत्तर: डालू - प्रश्न: गुलिस्ताँ के चित्रकार?
उत्तर: बलदेव व गुलाम अली (अलवर) - प्रश्न: हाथीदाँत पर चित्रकारी?
उत्तर: मूलचंद (अलवर) - प्रश्न: बीकानेर शैली के प्रारंभिक उस्ताद?
उत्तर: अली रज़ा - प्रश्न: अनूपसिंह काल के बीकानेर चित्रकार?
उत्तर: रुकनुद्दीन - प्रश्न: देवगढ़ शैली के प्रमुख चित्रकार?
उत्तर: बगता, कँवला, चोखा, बैजनाथ - प्रश्न: उनियारा के चित्रकार?
उत्तर: धीमा, मीरबक्श, काशी, रामलखन, भीम - प्रश्न: फड़ के प्रसिद्ध चित्रकार (पद्मश्री)?
उत्तर: श्रीलाल जोशी - प्रश्न: ‘भैंसों के चितेरे’?
उत्तर: परमानंद चोयल - प्रश्न: ‘श्वानों के चितेरे’?
उत्तर: जगमोहन माथोड़िया - प्रश्न: ‘भीलों के चितेरे’?
उत्तर: गोवर्धनलाल बाबा - प्रश्न: ‘नीड़ का चितेरा’?
उत्तर: सौभाग्यमल गहलोत - प्रश्न: एकल चित्र-प्रदर्शनी परंपरा के प्रवर्तक?
उत्तर: रामगोपाल विजयवर्गीय - प्रश्न: ‘चितेरों की ओवरी’ किसने स्थापित की?
उत्तर: महाराणा जगतसिंह प्रथम - प्रश्न: ‘इनर जंगल’ श्रृंखला के चित्रकार?
उत्तर: ज्योतिस्वरूप - प्रश्न: कृपाल सिंह शेखावत को पद्मश्री?
उत्तर: 1974 - प्रश्न: श्रीलाल जोशी को पद्मश्री?
उत्तर: 2006 - प्रश्न: ‘मास्टर ऑफ़ नेचर एंड लिविंग ऑब्जेक्ट्स’?
उत्तर: देवकीनंदन शर्मा - प्रश्न: स्वतंत्रता सेनानियों के व्यक्ति-चित्र बनाने वाले चित्रकार?
उत्तर: भूरसिंह शेखावत
✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में
- मेवाड़ — नासिरुद्दीन (1605), साहिबदीन, मनोहर।
- मारवाड़ — वीरजी (1623); किशनगढ़ — निहालचंद (बणी-ठणी)।
- जयपुर — साहिबराम (आदमकद), लालचंद (पशु-युद्ध)।
- अलवर — बलदेव-गुलाम अली (गुलिस्ताँ), मूलचंद (हाथीदाँत)।
- कोटा — डालू (1768); देवगढ़ — बगता, चोखा; बीकानेर — अली रज़ा, रुकनुद्दीन।
- आधुनिक — चोयल (भैंस), माथोड़िया (श्वान), गोवर्धनलाल (भील), गहलोत (नीड़)।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- साहिबदीन (मेवाड़) व साहिबराम (जयपुर) में भ्रम — साहिबदीन = रागमाला/रामायण; साहिबराम = आदमकद।
- डालू (कोटा) व डालूराम (अलवर) में भ्रम — डालू = कोटा रागमाला 1768; डालूराम = अलवर प्रारंभिक चित्रकार।
- नासिरुद्दीन को किशनगढ़ से जोड़ना — नासिरुद्दीन मेवाड़; किशनगढ़ — निहालचंद।
- ‘भैंसों के चितेरे’ को माथोड़िया बताना — भैंस = चोयल; श्वान = माथोड़िया।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“नासिर-साहिब मेवाड़ के, वीरजी मारवाड़ के, निहाल किशनगढ़ के, साहिबराम-लाल जयपुर के, डालू कोटा का, बलदेव अलवर का”।
आधुनिक: “चोयल की भैंस, माथोड़िया का श्वान, बाबा के भील, गहलोत का नीड़”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
चित्रकारों के प्रश्न सबसे अधिक ‘समान नाम’ वाले जोड़ों से भ्रमित करते हैं — साहिबदीन/साहिबराम, डालू/डालूराम। इन्हें अलग रंग से लिखें। दूसरा, हर चित्रकार को तीन कड़ियों में बाँधें — शैली, संरक्षक, कृति (जैसे वीरजी → मारवाड़ → रागमाला 1623)। आधुनिक चित्रकारों के उपनाम (भैंस, श्वान, भील, नीड़) एक-अंक के प्रश्नों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
- राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- चित्रकला शैलियों में अंतर
- राजस्थान चित्रकला के 100 तथ्य व PYQs
- मेवाड़ चित्रकला
- जयपुर चित्रकला
- फड़ चित्रकला
- जयपुर ब्लू पॉटरी — कृपाल सिंह शेखावत
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- डॉ. जयसिंह नीरज — ‘राजस्थानी चित्रकला’।
- राजस्थान ललित कला अकादमी — कलाकार परिचय प्रकाशन।
- पद्म पुरस्कार सूची — गृह मंत्रालय, भारत सरकार।
- RBSE — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’।

🔥 2026 भर्ती परीक्षा: सिर्फ नोट्स पढ़ना काफी नहीं — वास्तविक परीक्षा में 120+ स्कोर के लिए फुल मॉक टेस्ट हल करें!
राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 – Final Mega Test Series
- 100% नवीनतम 2026 परीक्षा पैटर्न व OMR 5th Option आधारित
- All-Rajasthan रैंक और विस्तृत व्याख्या सहित उत्तर
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. चावंड रागमाला (1605) के चित्रकार थे —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. ‘भीलों के चितेरे’ के रूप में प्रसिद्ध चित्रकार —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. पाली रागमाला (1623) के चित्रकार कौन थे?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. निम्न में से कौन-सा युग्म सही नहीं है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. ‘श्वानों के चितेरे’ किसे कहा जाता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
मेवाड़ की रागमाला (1605 ई., चावंड) नासिरुद्दीन ने महाराणा अमरसिंह प्रथम के समय चित्रित की।
किशनगढ़ शैली के चित्रकार निहालचंद ने बणी-ठणी का चित्र बनाया, जिसे भारत की मोनालिसा कहा जाता है।
आधुनिक चित्रकार परमानंद चोयल को भैंसों के चितेरे कहा जाता है।
जयपुर शैली में साहिबराम ने आदमकद व्यक्ति-चित्र बनाए, जिनमें सवाई ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र प्रसिद्ध है।
कोटा शैली में डालू ने 1768 ई. में रागमाला चित्रित की।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: