सुयोग अकादमी (Suyog Academy)
suyogacademy.com — RPSC & RSMSSB फ्री GK नोट्स
कला एवं संस्कृति

ढूंढाड़ चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ, प्रमुख चित्रकार एवं केंद्र

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

शेयर करें:
🎭कला एवं संस्कृतिSUYOG ACADEMY
🎭

ढूंढाड़ चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ, प्रमुख चित्रकार एवं केंद्र

सुयोग अकादमी • RPSC & RSMSSB100% नि:शुल्क

सुयोग AI गुरु

नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: ढूंढाड़ चित्रकला शैली राजस्थानी चित्रकला की चार प्रमुख शाखाओं (मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती, ढूंढाड़) में से एक है, जो कछवाहा शासकों के क्षेत्र — आमेर-जयपुर — में विकसित हुई। इसकी उपशैलियाँ हैं — आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी (कुछ पुस्तकें करौली को भी जोड़ती हैं)। कछवाहा-मुगल वैवाहिक व राजनीतिक संबंधों (भारमल, 1562; मानसिंह) के कारण इस शैली पर मुगल प्रभाव सर्वाधिक है। विशेष पहचान — आदमकद व्यक्ति-चित्र, दरबारी वैभव, बाग-बगीचे, सोने-चाँदी का प्रयोग और शेखावाटी की हवेलियों के भित्ति चित्र (राजस्थान की ‘खुली कला दीर्घा’)।

1. ढूंढाड़ चित्रकला शैली — परिचय

राजस्थान के पूर्वी-मध्य भाग — वर्तमान जयपुर, दौसा, टोंक का उत्तरी भाग, सीकर-झुंझुनूं (शेखावाटी) और अलवर — को ऐतिहासिक रूप से ‘ढूंढाड़’ कहा जाता है। यह नाम ढूँढ नदी से लिया गया है। इस क्षेत्र पर कछवाहा राजवंश का शासन रहा, जिसकी राजधानी पहले आमेर और 1727 ई. के बाद जयपुर बनी। इसी क्षेत्र में पनपी चित्र-परंपरा को ढूंढाड़ शैली कहा जाता है।

राजस्थानी चित्रकला को आनंद कुमारस्वामी ने सर्वप्रथम ‘राजपूत चित्रकला’ नाम से वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत किया (1916) और इसकी चार प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं — मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती और ढूंढाड़। राजस्थान की सभी शैलियों का संक्षिप्त अवलोकन राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ में है; यह नोट ढूंढाड़ स्कूल की उत्पत्ति, आमेर काल, उपशैलियों और भित्ति-चित्र परंपरा का विस्तृत अध्ययन है। जयपुर उपशैली के विस्तार के लिए जयपुर चित्रकला शैली और अलवर उपशैली के लिए अलवर चित्रकला शैली पढ़ें।

तथ्यविवरण
क्षेत्रआमेर-जयपुर, दौसा, अलवर, टोंक (उनियारा), सीकर-झुंझुनूं (शेखावाटी)
राजवंशकछवाहा (आमेर/जयपुर), नरूका (अलवर, उनियारा), शेखावत (शेखावाटी)
नामकरणढूँढ नदी के नाम पर ‘ढूंढाड़’ क्षेत्र
उपशैलियाँआमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी (करौली — कुछ पुस्तकों में)
सर्वाधिक प्रभावमुगल शैली
विशेष पहचानआदमकद व्यक्ति-चित्र, दरबारी वैभव, भित्ति चित्र (आला-गीला/आराइश)
स्वर्ण युगसवाई प्रतापसिंह (1778–1803) — जयपुर उपशैली में
संग्रहपोथीखाना व सिटी पैलेस संग्रहालय (जयपुर), अल्बर्ट हॉल, विनय विलास (अलवर)

2. आमेर काल — ढूंढाड़ शैली की नींव (16वीं-17वीं शताब्दी)

ढूंढाड़ शैली का प्रारंभिक रूप आमेर शैली है। 1562 ई. में राजा भारमल ने अकबर से वैवाहिक संबंध स्थापित किए और उनके पौत्र राजा मानसिंह अकबर के प्रमुख सेनापति बने। इन संबंधों के कारण मुगल दरबार के चित्रकार, तकनीक और विषय आमेर पहुँचे।

शासक/कालचित्रकला से जुड़ा प्रमुख तथ्य
राजा भारमल (1547–74)मुगल संबंधों की शुरुआत — शैली पर मुगल प्रभाव का आधार
राजा भगवंतदास / मानसिंह (1589–1614)बैराठ (विराटनगर) के मुगल दरवाज़ा/छतरियों के भित्ति चित्र; आमेर महल के प्रारंभिक भित्ति चित्र
आमेर शैली की सचित्र पांडुलिपियाँ‘यशोधर चरित’ (1591 ई.) — आमेर शैली के प्रारंभिक चित्रित ग्रंथों में उल्लेखनीय
मिर्ज़ा राजा जयसिंह (1621–67)रसिकप्रिया व कृष्ण-लीला विषयक चित्र; आमेर महल का विस्तार
सवाई जयसिंह (1700–43)1727 में जयपुर की स्थापना — शैली का केंद्र आमेर से जयपुर; ‘सूरतखाना’ (चित्रशाला) की स्थापना

रज़्मनामा: अकबर के लिए तैयार महाभारत का फ़ारसी अनुवाद ‘रज़्मनामा’ की प्रसिद्ध सचित्र प्रति आज जयपुर के सिटी पैलेस के पोथीखाना में संरक्षित है — यह मुगल-ढूंढाड़ संबंध का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है।

3. ढूंढाड़ शैली की उपशैलियाँ — एक नज़र में

उपशैलीकेंद्र/जिलासंरक्षकप्रमुख चित्रकारविशेष पहचान
आमेरआमेर (जयपुर)मानसिंह, मिर्ज़ा राजा जयसिंह—प्रारंभिक मुगल प्रभाव, भित्ति चित्र, बैराठ छतरियाँ
जयपुरजयपुरसवाई जयसिंह, ईश्वरीसिंह, माधोसिंह, सवाई प्रतापसिंह, रामसिंह द्वितीयसाहिबराम, लालचंद, रामसेवक, गोपाल, उदय, हुकमाआदमकद चित्र, पशु-युद्ध, हरा रंग, स्वर्ण वर्क
अलवरअलवरप्रतापसिंह, बख्तावर सिंह, विनयसिंह, शिवदान सिंहडालूराम, बलदेव, गुलाम अली, सालिगराम, मूलचंदगणिका चित्र, बसली (बॉर्डर), हाथीदाँत पर चित्र, यूरोपीय प्रभाव
उनियाराउनियारा (टोंक)नरूका ठिकानेदारधीमा, मीरबक्श, काशी, रामलखन, भीमबूँदी व जयपुर शैलियों का समन्वय
शेखावाटीसीकर, झुंझुनूं, चूरू के कस्बेधनी मारवाड़ी सेठस्थानीय चितेरे/चेजारेहवेलियों के भित्ति चित्र — ‘खुली कला दीर्घा’

नोट: उनियारा उपशैली के मिश्रित प्रभाव को कुछ पुस्तकें ‘मेवाड़ व जयपुर’ भी लिखती हैं; अधिकांश संदर्भ इसे बूँदी (हाड़ौती) व जयपुर के समन्वय के रूप में बताते हैं, क्योंकि उनियारा भौगोलिक रूप से दोनों के बीच स्थित है।

4. ढूंढाड़ शैली की प्रमुख विशेषताएँ

  1. मुगल प्रभाव सर्वाधिक: वस्त्र-विन्यास (जामा, पगड़ी), दरबारी दृश्य, सूक्ष्म रेखांकन व छायांकन (shading) में मुगल तकनीक।
  2. आदमकद व्यक्ति-चित्र (Life-size Portraits): जयपुर उपशैली की सबसे बड़ी देन — साहिबराम द्वारा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र प्रसिद्ध।
  3. दरबारी वैभव: राजसभा, जुलूस, हाथी-घोड़े, उत्सव (गणगौर, तीज), शिकार।
  4. धार्मिक-साहित्यिक विषय: कृष्ण-लीला, रासलीला, भागवत, गीतगोविंद, रागमाला, बारहमासा, रसिकप्रिया।
  5. रंग: बहुरंगी चित्र; जयपुर उपशैली में हरे रंग की प्रधानता; सोने-चाँदी (वर्क) का प्रचुर प्रयोग।
  6. मानव आकृतियाँ: स्त्रियों के गोल/भरे चेहरे, मीनाकृति (मछली जैसी) आँखें, भारी आभूषण; पुरुष मांसल व सुडौल।
  7. प्रकृति: पीपल व वट वृक्ष, उद्यान, फव्वारे, मोर; घोड़ा प्रमुख पशु।
  8. भित्ति चित्र परंपरा: आला-गीला (आराइश/फ्रेस्को) तकनीक — गीले चूने के पलस्तर पर चित्रण।

5. भित्ति चित्र — आला-गीला (आराइश) तकनीक और शेखावाटी

ढूंढाड़ क्षेत्र की सबसे विशिष्ट देन भित्ति चित्र (Mural/Fresco) है। इसकी तकनीक को ‘आला-गीला’ या ‘आराइश’ (कुछ क्षेत्रों में ‘मोराकशी’) कहा जाता है — इसमें दीवार पर चूने का बारीक पलस्तर चढ़ाकर उसके गीले रहते ही प्राकृतिक रंग भरे जाते हैं, जिससे रंग पलस्तर में घुलकर सदियों तक टिकते हैं। (इतालवी ‘बुओन फ्रेस्को’ के समान)।

शेखावाटी — राजस्थान की ‘ओपन एयर आर्ट गैलरी’

  • कस्बे: नवलगढ़, मंडावा, फतेहपुर, रामगढ़ शेखावाटी, बिसाऊ, मुकुंदगढ़, डूंडलोद, महनसर, लक्ष्मणगढ़, झुंझुनूं, चूरू।
  • संरक्षक: 18वीं से 20वीं सदी के आरंभ तक कोलकाता-मुंबई में व्यापार कर धनी बने मारवाड़ी सेठ, जिन्होंने अपने पैतृक कस्बों में भव्य हवेलियाँ बनवाईं।
  • विषय: कृष्ण-लीला, रामायण, लोककथाएँ (ढोला-मारू), देवी-देवता, शिकार; बाद के काल में रेलगाड़ी, मोटरकार, हवाई जहाज़, अंग्रेज़ अफ़सर, ग्रामोफ़ोन जैसे आधुनिक विषय — यह शेखावाटी की अनूठी पहचान है।
  • प्रसिद्ध स्थल: पोद्दार हवेली (नवलगढ़), महनसर की सोने-चाँदी की हवेली, मंडावा की हवेलियाँ, बिसाऊ व रामगढ़ की छतरियाँ।

शेखावाटी की हवेली-स्थापत्य के लिए राजस्थान की स्थापत्य कला देखें।

6. ढूंढाड़ शैली के प्रमुख विषय

विषय श्रेणीउदाहरण
धार्मिककृष्ण-लीला, रासलीला, गोवर्धन धारण, राम-कथा, दुर्गा, शिव
साहित्यिकगीतगोविंद, रसिकप्रिया, बिहारी सतसई, बारहमासा, रागमाला
दरबारीराजसभा, आदमकद व्यक्ति-चित्र, जुलूस, गणगौर-तीज की सवारी
पशु-पक्षीहाथी-युद्ध, पशु-युद्ध (लालचंद), घोड़े, मोर
लोक व आधुनिकढोला-मारू, शेखावाटी में रेल-मोटर व अंग्रेज़ आकृतियाँ

7. ढूंढाड़ बनाम मेवाड़ बनाम मारवाड़ — त्वरित तुलना

आधारढूंढाड़मेवाड़मारवाड़
मुगल प्रभावसर्वाधिकअपेक्षाकृत कम (स्वदेशी)मध्यम
विशेष विषयआदमकद चित्र, दरबार, भित्ति चित्ररागमाला (1605), रामायण, भागवतढोला-मारू, रागमाला (1623, पाली)
प्रमुख पशुघोड़ाहाथीऊँट, घोड़ा
प्रमुख वृक्षपीपल, वटकदंबआम
प्रमुख चित्रकारसाहिबराम, लालचंदनासिरुद्दीन, साहिबदीनवीरजी, नारायणदास

विस्तृत अंतर के लिए राजस्थान की चित्रकला शैलियों में अंतर तथा मेवाड़ शैली व मारवाड़ शैली नोट पढ़ें।

📝 One-Liner Revision — ढूंढाड़ शैली (20 प्रश्न)

  1. प्रश्न: ढूंढाड़ नाम किस नदी से?
    उत्तर: ढूँढ नदी
  2. प्रश्न: ढूंढाड़ शैली किस राजवंश के क्षेत्र में?
    उत्तर: कछवाहा
  3. प्रश्न: ढूंढाड़ शैली पर सर्वाधिक प्रभाव?
    उत्तर: मुगल शैली
  4. प्रश्न: ढूंढाड़ की पाँच उपशैलियाँ?
    उत्तर: आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी
  5. प्रश्न: ढूंढाड़ शैली का प्रारंभिक रूप?
    उत्तर: आमेर शैली
  6. प्रश्न: कछवाहा-मुगल संबंध कब से?
    उत्तर: 1562 (राजा भारमल)
  7. प्रश्न: बैराठ के भित्ति चित्र किसके काल के?
    उत्तर: राजा मानसिंह
  8. प्रश्न: ‘यशोधर चरित’ (1591) किस शैली से संबंधित?
    उत्तर: आमेर शैली
  9. प्रश्न: रज़्मनामा की सचित्र प्रति कहाँ संरक्षित?
    उत्तर: पोथीखाना, सिटी पैलेस, जयपुर
  10. प्रश्न: जयपुर की स्थापना?
    उत्तर: 1727, सवाई जयसिंह
  11. प्रश्न: जयपुर में चित्रशाला का नाम?
    उत्तर: सूरतखाना
  12. प्रश्न: जयपुर उपशैली का स्वर्ण युग?
    उत्तर: सवाई प्रतापसिंह (1778–1803)
  13. प्रश्न: आदमकद चित्रों के लिए प्रसिद्ध चित्रकार?
    उत्तर: साहिबराम
  14. प्रश्न: पशु-युद्ध चित्रों के लिए प्रसिद्ध?
    उत्तर: लालचंद
  15. प्रश्न: उनियारा किस जिले में?
    उत्तर: टोंक
  16. प्रश्न: उनियारा उपशैली के प्रमुख चित्रकार?
    उत्तर: धीमा, मीरबक्श, काशी, रामलखन, भीम
  17. प्रश्न: ‘राजस्थान की ओपन एयर आर्ट गैलरी’?
    उत्तर: शेखावाटी
  18. प्रश्न: भित्ति चित्र तकनीक का स्थानीय नाम?
    उत्तर: आला-गीला / आराइश
  19. प्रश्न: शेखावाटी भित्ति चित्रों के संरक्षक?
    उत्तर: मारवाड़ी सेठ
  20. प्रश्न: राजपूत चित्रकला नाम किसने दिया?
    उत्तर: आनंद कुमारस्वामी (1916)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • ढूंढाड़ — कछवाहा क्षेत्र (आमेर-जयपुर) की शैली; नाम ढूँढ नदी से।
  • मुगल प्रभाव सर्वाधिक — भारमल (1562) व मानसिंह के संबंध।
  • उपशैलियाँ — आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी।
  • विशेषता — आदमकद चित्र, दरबारी वैभव, हरा रंग, स्वर्ण वर्क।
  • भित्ति चित्र — आला-गीला/आराइश; शेखावाटी — ‘खुली कला दीर्घा’।
  • रज़्मनामा — पोथीखाना, जयपुर।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. ढूंढाड़ और जयपुर शैली को पूर्णतः एक मानना — जयपुर ढूंढाड़ की उपशैली है; ढूंढाड़ बड़ा समूह है।
  2. उनियारा को मेवाड़ की उपशैली मानना — उनियारा ढूंढाड़ की उपशैली है।
  3. शेखावाटी को मारवाड़ शैली में रखना — शेखावाटी भित्ति चित्र ढूंढाड़ शैली के अंतर्गत पढ़े जाते हैं।
  4. सबसे कम मुगल प्रभाव वाली शैली ढूंढाड़ बताना — उल्टा: ढूंढाड़ में सर्वाधिक; मेवाड़ अपेक्षाकृत स्वदेशी।

🧠 मेमोरी ट्रिक

उपशैलियाँ: “आ-ज-अ-उ-शे” — आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी।

“ढूंढाड़ = दरबार + मुगल + दीवार” — दरबारी वैभव, मुगल प्रभाव, भित्ति चित्र।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

ढूंढाड़ शैली पर प्रश्न प्रायः ‘उपशैली किस मूल शैली की है’ और ‘सर्वाधिक मुगल प्रभाव’ पर आते हैं। RAS Mains में ‘राजस्थानी चित्रकला पर मुगल प्रभाव’ का उत्तर लिखते समय ढूंढाड़ को केंद्रीय उदाहरण बनाएँ — भारमल-मानसिंह के संबंध, रज़्मनामा, आदमकद चित्र और दरबारी विषय। शेखावाटी के भित्ति चित्रों में रेल-मोटर जैसे आधुनिक विषय ‘परंपरा में परिवर्तन’ का सुंदर उदाहरण हैं — यह बिंदु उत्तर को विशिष्ट बनाता है।

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • डॉ. जयसिंह नीरज — ‘राजस्थानी चित्रकला’ (राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी)।
  • आनंद कुमारस्वामी — ‘Rajput Painting’ (1916)।
  • सिटी पैलेस संग्रहालय व पोथीखाना, जयपुर — संग्रह विवरण।
  • RBSE — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’; राजस्थान ललित कला अकादमी प्रकाशन।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: ढूंढाड़ चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ, प्रमुख चित्रकार एवं केंद्र

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक (कला/इतिहास), Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: उपशैलियों की संख्या व मिश्रित प्रभाव (जैसे उनियारा) को लेकर पुस्तकों में भिन्नता है; यहाँ सर्वाधिक प्रचलित वर्गीकरण दिया गया है और भिन्न मत को नोट में स्पष्ट किया गया है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
✓ 100% सिलेबस सत्यापित (2026 पैटर्न)
Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
तैयारी का स्व-मूल्यांकनफ्री डेमो उपलब्ध
राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 – Final Mega Test Series
₹99

🔥 2026 भर्ती परीक्षा: सिर्फ नोट्स पढ़ना काफी नहीं — वास्तविक परीक्षा में 120+ स्कोर के लिए फुल मॉक टेस्ट हल करें!

राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 – Final Mega Test Series

  • 100% नवीनतम 2026 परीक्षा पैटर्न व OMR 5th Option आधारित
  • All-Rajasthan रैंक और विस्तृत व्याख्या सहित उत्तर
  • वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
⚡ PhonePe · Google Pay · Paytm UPI द्वारा तुरंत सुरक्षित सक्रियण

🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. उनियारा उपशैली किस मूल चित्रकला शैली से संबंधित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. राजस्थान की किस चित्रकला शैली पर मुगल प्रभाव सर्वाधिक है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ‘राजस्थान की ओपन एयर आर्ट गैलरी’ किसे कहा जाता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. भित्ति चित्रण की ‘आराइश’ तकनीक किससे संबंधित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. अकबर कालीन ‘रज़्मनामा’ की सचित्र प्रति कहाँ संरक्षित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

ढूंढाड़ शैली की प्रमुख उपशैलियाँ आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा और शेखावाटी हैं।

कछवाहा-मुगल वैवाहिक व राजनीतिक संबंधों के कारण ढूंढाड़ शैली पर मुगल शैली का प्रभाव सर्वाधिक है।

आला-गीला (आराइश) भित्ति चित्रण की तकनीक है, जिसमें गीले चूने के पलस्तर पर प्राकृतिक रंगों से चित्र बनाए जाते हैं, जिससे वे लंबे समय तक टिकते हैं।

शेखावाटी के कस्बों (नवलगढ़, मंडावा, फतेहपुर आदि) की हवेलियों की दीवारों पर बने असंख्य भित्ति चित्रों के कारण इसे राजस्थान की ओपन एयर आर्ट गैलरी कहा जाता है।

उनियारा (टोंक) उपशैली के प्रमुख चित्रकार धीमा, मीरबक्श, काशी, रामलखन और भीम थे।

क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें:

मुफ्त अध्ययन सामग्री और सिलेबस ट्रैकर के लिए विजिट करें: https://suyogacademy.com© 2026 Suyog Academy