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जयपुर चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ एवं प्रमुख चित्रकार

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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जयपुर चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ एवं प्रमुख चित्रकार

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⚡ Quick Answer: जयपुर चित्रकला शैली ढूंढाड़ शैली की सबसे प्रमुख उपशैली है, जिसका विकास 1727 ई. में सवाई जयसिंह द्वारा जयपुर की स्थापना के बाद हुआ। सवाई जयसिंह ने चित्रकारों हेतु ‘सूरतखाना’ स्थापित किया। सवाई ईश्वरीसिंह के समय साहिबराम ने आदमकद व्यक्ति-चित्र की परंपरा शुरू की; सवाई प्रतापसिंह (1778–1803) का काल इस शैली का स्वर्ण युग माना जाता है। लालचंद पशु-युद्ध चित्रों के लिए प्रसिद्ध थे। सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1857 में ‘मदरसा-ए-हुनरी’ (आज का राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट) स्थापित किया। विशेष पहचान — हरे रंग की प्रधानता, मुगल प्रभाव, सोने का प्रयोग, गोल चेहरे, मीनाकृति आँखें, उद्यान व दरबारी दृश्य।

1. जयपुर चित्रकला शैली — परिचय

कछवाहा राजधानी के आमेर से जयपुर स्थानांतरित होने के साथ ही चित्रकला का केंद्र भी जयपुर आ गया। आमेर काल की परंपरा (मुगल प्रभाव) को आगे बढ़ाते हुए जयपुर में चित्रकला ने एक संगठित ‘दरबारी उद्योग’ का रूप लिया, जिसमें दर्जनों चित्रकार राज्य-संरक्षण में कार्य करते थे। ढूंढाड़ शैली की पूर्ण पृष्ठभूमि व अन्य उपशैलियों के लिए ढूंढाड़ चित्रकला शैली पढ़ें; यह नोट जयपुर उपशैली के शासकवार विकास, चित्रकारों, विशेषताओं और आधुनिक कला-संस्थानों पर केंद्रित है।

तथ्यविवरण
मूल शैलीढूंढाड़ शैली
विकास काल1727 के बाद (जयपुर की स्थापना)
संस्थापक संरक्षकसवाई जयसिंह द्वितीय — ‘सूरतखाना’ की स्थापना
स्वर्ण युगसवाई प्रतापसिंह (1778–1803) — उपनाम ‘ब्रजनिधि’
प्रमुख चित्रकारसाहिबराम, लालचंद, रामसेवक, गोपाल, उदय, हुकमा, चिमना, सालिगराम, मोहम्मद शाह
प्रमुख रंगहरा (प्रधान), सुनहरा
विशेष पहचानआदमकद चित्र, पशु-युद्ध, दरबारी वैभव, गणगौर-तीज की सवारी, भित्ति चित्र (आराइश)
संग्रहपोथीखाना व सिटी पैलेस संग्रहालय, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय (जयपुर)

2. शासकवार विकास — जयपुर शैली की समयरेखा

शासक (शासनकाल)योगदान
सवाई जयसिंह द्वितीय (1700–1743)1727 में जयपुर की स्थापना; राज्य के ‘छत्तीस कारखानों’ में चित्रकारों हेतु ‘सूरतखाना’; आमेर से चित्रकारों का जयपुर आगमन
सवाई ईश्वरीसिंह (1743–1750)साहिबराम द्वारा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र — आदमकद परंपरा की शुरुआत; ईसरलाट (सरगासूली) का निर्माण
सवाई माधोसिंह प्रथम (1750–1768)रंगीन व्यक्ति-चित्र; जयपुर के महलों व हवेलियों (जैसे पुंडरीक जी की हवेली) में भित्ति चित्र; गलता के भित्ति चित्र
सवाई पृथ्वीसिंह (1768–1778)परंपरा का निर्वाह
सवाई प्रतापसिंह (1778–1803)स्वर्ण युग — 50 से अधिक चित्रकार; कृष्ण-लीला, रासलीला, भागवत, रागमाला, गीतगोविंद, दुर्गा सप्तशती; स्वयं कवि (‘ब्रजनिधि’); हवा महल (1799) का निर्माण
सवाई जगतसिंह द्वितीय (1803–1818)दरबारी व विलासी विषय; ‘रसकपूर’ प्रसंग
सवाई रामसिंह द्वितीय (1835–1880)1857 में ‘मदरसा-ए-हुनरी’ — आधुनिक कला शिक्षा की शुरुआत; यूरोपीय यथार्थवाद व फ़ोटोग्राफ़ी का प्रभाव (स्वयं फ़ोटोग्राफ़र); अल्बर्ट हॉल का शिलान्यास (1876)

3. जयपुर शैली के प्रमुख चित्रकार

चित्रकारसंरक्षकविशेष योगदान
साहिबरामईश्वरीसिंह से प्रतापसिंह तकआदमकद व्यक्ति-चित्र; ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र; दीर्घ सेवा काल
लालचंदमाधोसिंह प्रथम / प्रतापसिंहपशु-युद्ध (हाथी, शेर, चीता, सूअर आदि की लड़ाई) के चित्र
रामसेवक, गोपाल, उदय, हुकमा, चिमनाप्रतापसिंहकृष्ण-लीला, रागमाला, भागवत चित्रावली
सालिगरामप्रतापसिंह कालधार्मिक व दरबारी चित्र (बाद में अलवर में भी सक्रिय परंपरा)
मोहम्मद शाहप्रतापसिंहमुगल तकनीक से व्यक्ति-चित्र

सभी शैलियों के चित्रकारों की तुलनात्मक सूची के लिए राजस्थान चित्रकला के प्रमुख चित्रकार देखें।

4. जयपुर शैली की प्रमुख विशेषताएँ

  1. आदमकद व्यक्ति-चित्र: राजाओं, रानियों व दरबारियों के जीवन-आकार के चित्र — राजस्थान में इस परंपरा का सबसे बड़ा केंद्र।
  2. हरे रंग की प्रधानता: पृष्ठभूमि व उद्यानों में हरा; साथ में लाल, पीला व सुनहरा।
  3. स्वर्ण व रत्न-सज्जा: आभूषणों, वस्त्रों व मुकुटों में सोने के वर्क तथा मोतियों का प्रयोग।
  4. मानव आकृतियाँ: स्त्रियों के गोल चेहरे, मीनाकृति (मछली जैसी) आँखें, भरे गाल, भारी आभूषण; पुरुष मांसल, लंबी मूँछें, जामा व पगड़ी।
  5. मुगल प्रभाव: छायांकन, वेशभूषा, दरबारी संयोजन, उद्यान-दृश्य (चारबाग, फव्वारे)।
  6. प्रकृति: पीपल व वट वृक्ष, उद्यान, मोर; पशुओं में घोड़ा व हाथी।
  7. उत्सव चित्रण: गणगौर व तीज की सवारी, होली, दीपावली — जयपुर का सांस्कृतिक जीवन।
  8. धार्मिक विषय: कृष्ण-लीला, रासलीला, गोवर्धन, राम-दरबार; प्रतापसिंह की कृष्ण-भक्ति का प्रभाव।
  9. भित्ति चित्र: आला-गीला (आराइश) तकनीक — सिटी पैलेस, गलता, हवेलियाँ।
  10. यूरोपीय प्रभाव (19वीं सदी): रामसिंह द्वितीय के काल में यथार्थवाद, परिप्रेक्ष्य व फ़ोटोग्राफ़ी-आधारित चित्र।

5. जयपुर शैली के प्रमुख विषय व चित्रावलियाँ

विषयविवरण
भागवत पुराण व कृष्ण-लीलाप्रतापसिंह काल की प्रमुख चित्रावलियाँ
रागमालाराग-रागिनियों का मानवीकृत चित्रण
गीतगोविंदजयदेव की कृति पर आधारित राधा-कृष्ण चित्र
दुर्गा सप्तशतीशक्ति-उपासना विषयक चित्र
बारहमासाबारह महीनों के ऋतु-चित्र
व्यक्ति-चित्रशासकों, रानियों, सामंतों के आदमकद व आवक्ष चित्र
पशु-युद्धलालचंद द्वारा पशुओं की लड़ाई के दृश्य
उत्सवगणगौर, तीज, होली की राजकीय सवारी

6. आधुनिक जयपुर — कला शिक्षा व संस्थान

  • मदरसा-ए-हुनरी (1857): सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा स्थापित; बाद में ‘महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स’ और वर्तमान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट — देश के प्राचीनतम कला विद्यालयों में।
  • राजस्थान ललित कला अकादमी (1957, जयपुर): राज्य में दृश्य कलाओं के संवर्धन की प्रमुख संस्था।
  • जवाहर कला केंद्र (1993, जयपुर): चार्ल्स कोरिया द्वारा डिज़ाइन; बहु-कला केंद्र।
  • आधुनिक चित्रकार: रामगोपाल विजयवर्गीय (पद्मश्री 1984) — एकल चित्र-प्रदर्शनी व काव्य-चित्र परंपरा; कृपाल सिंह शेखावत (पद्मश्री 1974) — ब्लू पॉटरी के पुनरुद्धारक व चित्रकार।
  • हस्तकला संबंध: जयपुर की ब्लू पॉटरी, मीनाकारी व सांगानेरी छपाई में भी चित्रकला के अलंकरण-तत्व दिखते हैं — देखें जयपुर ब्लू पॉटरी व सांगानेरी व बगरू प्रिंट।

7. जयपुर शैली के चित्र कहाँ देखें?

संग्रहालयविशेषता
पोथीखाना, सिटी पैलेसरज़्मनामा, भागवत व रागमाला चित्रावलियाँ; दुर्लभ पांडुलिपियाँ
सिटी पैलेस (महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय)आदमकद चित्र, शस्त्र, वस्त्र
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय1887 में खुला; राज्य का प्राचीनतम संग्रहालय — लघु चित्र, मिस्र की ममी
गलता व पुंडरीक जी की हवेलीभित्ति चित्र

8. चित्र देखकर जयपुर शैली कैसे पहचानें? — 6 सूत्र

  1. आकार: यदि व्यक्ति-चित्र जीवन-आकार (आदमकद) या बड़े आकार का है — जयपुर की संभावना सर्वाधिक।
  2. रंग: हरी पृष्ठभूमि/उद्यान और आभूषणों-वस्त्रों पर सुनहरा वर्क।
  3. चेहरा: स्त्रियों का गोल-भरा चेहरा, मीनाकृति आँखें, भारी नथ व मोती।
  4. वास्तु: महल, जाली-झरोखे, चारबाग उद्यान, फव्वारे — मुगल प्रभाव।
  5. विषय: गणगौर/तीज की सवारी, दरबार, पशु-युद्ध, कृष्ण-रासलीला।
  6. वृक्ष व पशु: पीपल-वट और घोड़े की प्रमुखता।

Mains उत्तर-ढाँचा (10 अंक): परिचय (ढूंढाड़ की उपशैली, 1727) → शासकवार विकास (सूरतखाना → स्वर्ण युग → मदरसा-ए-हुनरी) → प्रमुख चित्रकार (साहिबराम, लालचंद) → 6-8 विशेषताएँ → संग्रहालय → निष्कर्ष (परंपरा से आधुनिकता)।

📝 One-Liner Revision — जयपुर शैली (20 प्रश्न)

  1. प्रश्न: जयपुर शैली किस मूल शैली की उपशैली?
    उत्तर: ढूंढाड़
  2. प्रश्न: जयपुर की स्थापना?
    उत्तर: 1727, सवाई जयसिंह द्वितीय
  3. प्रश्न: सवाई जयसिंह द्वारा स्थापित चित्रशाला?
    उत्तर: सूरतखाना
  4. प्रश्न: जयपुर शैली का स्वर्ण युग?
    उत्तर: सवाई प्रतापसिंह (1778–1803)
  5. प्रश्न: सवाई प्रतापसिंह का काव्य उपनाम?
    उत्तर: ब्रजनिधि
  6. प्रश्न: आदमकद चित्रों के लिए प्रसिद्ध चित्रकार?
    उत्तर: साहिबराम
  7. प्रश्न: साहिबराम ने किसका आदमकद चित्र बनाया?
    उत्तर: सवाई ईश्वरीसिंह
  8. प्रश्न: पशु-युद्ध चित्रों के चित्रकार?
    उत्तर: लालचंद
  9. प्रश्न: जयपुर शैली का प्रधान रंग?
    उत्तर: हरा
  10. प्रश्न: जयपुर शैली में आँखों की आकृति?
    उत्तर: मीनाकृति (मछली जैसी)
  11. प्रश्न: जयपुर शैली का प्रमुख वृक्ष?
    उत्तर: पीपल, वट
  12. प्रश्न: जयपुर शैली का प्रमुख पशु?
    उत्तर: घोड़ा
  13. प्रश्न: मदरसा-ए-हुनरी की स्थापना?
    उत्तर: 1857, सवाई रामसिंह द्वितीय
  14. प्रश्न: मदरसा-ए-हुनरी का वर्तमान नाम?
    उत्तर: राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट
  15. प्रश्न: हवा महल का निर्माण?
    उत्तर: 1799, सवाई प्रतापसिंह
  16. प्रश्न: अल्बर्ट हॉल कब खुला?
    उत्तर: 1887
  17. प्रश्न: राजस्थान ललित कला अकादमी?
    उत्तर: 1957, जयपुर
  18. प्रश्न: जवाहर कला केंद्र के वास्तुकार?
    उत्तर: चार्ल्स कोरिया
  19. प्रश्न: रामगोपाल विजयवर्गीय को पद्मश्री?
    उत्तर: 1984
  20. प्रश्न: जयपुर में भित्ति चित्र तकनीक?
    उत्तर: आला-गीला / आराइश

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • जयपुर शैली — ढूंढाड़ की उपशैली; विकास 1727 के बाद।
  • सूरतखाना — सवाई जयसिंह; स्वर्ण युग — सवाई प्रतापसिंह।
  • साहिबराम — आदमकद चित्र; लालचंद — पशु-युद्ध।
  • हरा रंग, मीनाकृति आँखें, पीपल-वट, घोड़ा, स्वर्ण वर्क।
  • मदरसा-ए-हुनरी (1857) — राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट।
  • संग्रह — पोथीखाना, सिटी पैलेस, अल्बर्ट हॉल।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. सूरतखाना को अलवर/उदयपुर से जोड़ना — सूरतखाना जयपुर (सवाई जयसिंह)।
  2. आदमकद चित्र का चित्रकार निहालचंद बताना — निहालचंद किशनगढ़ (बणी-ठणी); आदमकद — साहिबराम।
  3. स्वर्ण युग सवाई जयसिंह का मानना — स्वर्ण युग सवाई प्रतापसिंह का।
  4. मदरसा-ए-हुनरी को मानसिंह द्वितीय से जोड़ना — संस्थापक रामसिंह द्वितीय (1857)।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“जय ने सूरत बनाई, ईश्वर का आदमकद, प्रताप का स्वर्ण युग, राम का मदरसा”।

“साहिब का आदमी, लाल का जानवर” — साहिबराम = आदमकद; लालचंद = पशु-युद्ध।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

जयपुर शैली के प्रश्न सामान्यतः ‘चित्रकार-विशेषता’ (साहिबराम-आदमकद, लालचंद-पशु युद्ध), ‘शासक-योगदान’ (सूरतखाना, स्वर्ण युग, मदरसा-ए-हुनरी) और ‘प्रधान रंग’ (हरा) पर आते हैं। इन तीन श्रेणियों की तालिका बना लें। Mains में जयपुर को ‘परंपरा से आधुनिकता की यात्रा’ के उदाहरण के रूप में लिखें — सूरतखाना (दरबारी कारखाना) से राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट (आधुनिक कला शिक्षा) तक।

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • डॉ. जयसिंह नीरज — ‘राजस्थानी चित्रकला’।
  • सिटी पैलेस संग्रहालय (महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय ट्रस्ट), जयपुर।
  • राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट — संस्थागत इतिहास।
  • राजस्थान ललित कला अकादमी — प्रकाशन।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: जयपुर चित्रकला शैली: इतिहास, विशेषताएँ एवं प्रमुख चित्रकार

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक (कला/इतिहास), Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: चित्रकारों के संरक्षक-शासकों का निर्धारण उपलब्ध हस्ताक्षरित/दिनांकित चित्रों पर आधारित है; कुछ चित्रकार एक से अधिक शासकों के काल में सक्रिय रहे।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. आदमकद व्यक्ति-चित्रों के लिए प्रसिद्ध चित्रकार कौन थे?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. जयपुर शैली का स्वर्ण युग किस शासक का काल है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. पशु-युद्ध के चित्रों के लिए प्रसिद्ध जयपुर के चित्रकार?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. ‘सूरतखाना’ किस शासक ने स्थापित किया?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. जयपुर शैली में किस रंग की प्रधानता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

सवाई प्रतापसिंह (1778–1803) के काल को जयपुर चित्रकला शैली का स्वर्ण युग कहा जाता है।

साहिबराम आदमकद व्यक्ति-चित्रों के लिए प्रसिद्ध थे; उन्होंने सवाई ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र बनाया।

सूरतखाना सवाई जयसिंह द्वारा जयपुर में स्थापित चित्रशाला (चित्रकारों का कारखाना) था।

जयपुर शैली में हरे रंग की प्रधानता है, साथ में सुनहरे रंग का प्रचुर प्रयोग होता है।

सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1857 में मदरसा-ए-हुनरी की स्थापना की, जो आज राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट है।

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