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कैलेंडर और घड़ी रीजनिंग — विषम दिन, लीप वर्ष, तिथि का वार, कैलेंडर दोहराव, सुइयों का कोण व दर्पण समय

योगेश जांगिड़ (संस्थापक; राजव्यवस्था, रीजनिंग, English Grammar व कंप्यूटर परीक्षा नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
25 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, RSSB CET व राजस्थान पुलिस पाठ्यक्रम की तार्किक व मानसिक योग्यता इकाई। सभी उदाहरण व प्रश्न सुयोग अकादमी द्वारा तैयार; शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: कैलेंडर के प्रश्न विषम दिन (odd days) पर टिके हैं: कुल दिनों को 7 से भाग देने पर बचा शेष। साधारण वर्ष (365 दिन) में 1 और लीप वर्ष (366 दिन) में 2 विषम दिन होते हैं; 100 वर्षों में 5, 200 में 3, 300 में 1 और 400 वर्षों में 0 विषम दिन। लीप वर्ष वह है जो 4 से विभाज्य हो, पर शताब्दी वर्ष (1900, 2000) तभी लीप है जब वह 400 से विभाज्य हो, इसलिए 2000 लीप था और 1900 नहीं। विषम दिन 0 = रविवार, 1 = सोमवार … 6 = शनिवार। घड़ी में दोनों सुइयों के बीच कोण = |30H − 5.5M| (180° से अधिक आए तो 360 से घटाएँ)। सुइयाँ 12 घंटे में 11 बार मिलती हैं, 11 बार विपरीत होती हैं और 22 बार समकोण बनाती हैं; 24 घंटे में क्रमशः 22, 22 और 44 बार। दर्पण प्रतिबिंब का समय = 11:60 − दिया गया समय।


संक्षिप्त उत्तर

कैलेंडर तथ्यमान
साधारण वर्ष365 दिन = 52 सप्ताह + 1 दिन → 1 विषम दिन
लीप वर्ष366 दिन = 52 सप्ताह + 2 दिन → 2 विषम दिन
100 वर्ष5 विषम दिन
200 वर्ष3 विषम दिन
300 वर्ष1 विषम दिन
400 वर्ष0 विषम दिन
लीप वर्ष का नियम4 से विभाज्य; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य
विषम दिन → वार0 रवि, 1 सोम, 2 मंगल, 3 बुध, 4 गुरु, 5 शुक्र, 6 शनि
शताब्दी का अंतिम दिन कभी नहींमंगलवार, गुरुवार, शनिवार
घड़ी तथ्यमान
घंटे की सुई की चाल0.5° प्रति मिनट (30° प्रति घंटा)
मिनट की सुई की चाल6° प्रति मिनट
सापेक्ष चाल5.5° प्रति मिनट (= 11/2)
कोण का सूत्रθ = |30H − 5.5M|; 180 से अधिक हो तो 360 − θ
सुइयाँ मिलती हैं (संपाती)12 घंटे में 11 बार, 24 घंटे में 22 बार
सुइयाँ विपरीत (180°)12 घंटे में 11 बार, 24 घंटे में 22 बार
समकोण (90°)12 घंटे में 22 बार, 24 घंटे में 44 बार
एक सीधी रेखा में (0° या 180°)12 घंटे में 22 बार, 24 घंटे में 44 बार
दर्पण प्रतिबिंब11:60 − समय (11:00 से 12:59 के लिए 23:60 − समय)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

कैलेंडर और घड़ी तार्किक योग्यता के विश्लेषणात्मक तर्क खंड के गणना-आधारित अध्याय हैं। इनमें सूत्र कम हैं और प्रश्न सीधे बनते हैं, इसलिए सूत्र याद हों तो उत्तर निश्चित होता है। SSC और रेलवे में किसी तिथि का वार, किसी वर्ष का कैलेंडर कब दोहराएगा, घड़ी की सुइयों के बीच कोण और दर्पण प्रतिबिंब बार-बार पूछे जाते हैं। घड़ी की सुइयों से दिशा वाले प्रश्न दिशा एवं दूरी के अध्याय से जुड़ते हैं, और संख्याओं के पैटर्न संख्या व अक्षर शृंखला जैसे ही हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆

  • SSC CGL / CHSL / MTS / GD: किसी तिथि का वार, लीप वर्ष, सुइयों के बीच कोण, दर्पण प्रतिबिंब
  • RRB NTPC: "आज सोमवार है तो 61 दिन बाद?", कैलेंडर का दोहराव, सुइयों का मिलना
  • राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी, राजस्थान पुलिस: सीधे वार वाले प्रश्न, घड़ी का कोण, आगे-पीछे चलने वाली घड़ी

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. दिए गए वार से कुछ दिन, महीने या वर्ष बाद का वार।
  2. किसी ऐतिहासिक तिथि का वार (विषम दिन विधि)।
  3. कौन-सा वर्ष लीप है; किस वर्ष का कैलेंडर दोहराएगा।
  4. किसी समय पर सुइयों के बीच कोण।
  5. दो घंटों के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी, विपरीत होंगी या समकोण बनाएँगी।
  6. दर्पण प्रतिबिंब और तेज़/सुस्त घड़ी।

3. विषम दिन (Odd Days)

3.1 परिभाषा

किसी अवधि के कुल दिनों में पूरे सप्ताह निकालने के बाद जो दिन बचें, वे विषम दिन हैं, यानी कुल दिन ÷ 7 का शेष। पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते; केवल विषम दिन वार को आगे खिसकाते हैं।

3.2 महीनों के विषम दिन

महीनादिनविषम दिन
जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर313
अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबर302
फरवरी (साधारण वर्ष)280
फरवरी (लीप वर्ष)291

3.3 शताब्दियों के विषम दिन कैसे बनते हैं

अवधिलीप वर्षसाधारण वर्षविषम दिन की गणनाविषम दिन
100 वर्ष247624 × 2 + 76 × 1 = 124; 124 ÷ 7 का शेष5
200 वर्ष481525 × 2 = 10; 10 ÷ 7 का शेष3
300 वर्ष722285 × 3 = 15; 15 ÷ 7 का शेष1
400 वर्ष973035 × 4 + 1 = 21 (400वाँ वर्ष लीप है); 21 ÷ 7 का शेष0

इसलिए 400 के किसी भी गुणज (400, 800, 1200, 1600, 2000) वर्षों में विषम दिन 0 होते हैं।

3.4 शताब्दी का अंतिम दिन

अवधिविषम दिनअंतिम दिन का वारउदाहरण
पहली 100 वर्ष5शुक्रवार31 दिसंबर 1700 (1600 के बाद 100 वर्ष) = शुक्रवार
200 वर्ष3बुधवार31 दिसंबर 1800 = बुधवार
300 वर्ष1सोमवार31 दिसंबर 1900 = सोमवार
400 वर्ष0रविवार31 दिसंबर 2000 = रविवार

शताब्दी का अंतिम दिन केवल शुक्र, बुध, सोम या रवि हो सकता है; मंगलवार, गुरुवार और शनिवार कभी नहीं।


4. लीप वर्ष के नियम

वर्ष का प्रकारनियमलीपलीप नहीं
सामान्य (शताब्दी नहीं)4 से विभाज्य2024, 2028, 19962026, 2023, 1998
शताब्दी वर्ष (00 से अंत)400 से विभाज्य1600, 2000, 24001700, 1800, 1900, 2100

जाल: 1900 को 4 से भाग जाता है, फिर भी वह लीप वर्ष नहीं है, क्योंकि शताब्दी वर्ष को 400 से भाग जाना चाहिए। 100 वर्षों में इसीलिए 25 नहीं, 24 लीप वर्ष होते हैं।


5. किसी तिथि का वार निकालना

5.1 विषम दिन विधि

  1. दिए गए वर्ष से पहले के पूरे वर्ष लें (जैसे 15 अगस्त 1947 के लिए 1946 तक)।
  2. उन्हें 400 के गुणज + शताब्दियाँ + शेष वर्षों में तोड़ें और हर भाग के विषम दिन लिखें।
  3. शेष वर्षों में लीप वर्ष गिनें: विषम दिन = 2 × लीप + 1 × साधारण।
  4. दिए गए वर्ष में तिथि तक के दिन जोड़ें।
  5. कुल विषम दिनों को 7 से भाग दें; शेष से वार पढ़ें (0 = रविवार)।

उदाहरण 1: 15 अगस्त 1947 को कौन-सा वार था?

भागगणनाविषम दिन
1600 वर्ष400 का गुणज0
1601–1900 (300 वर्ष)तालिका से1
1901–1946 (46 वर्ष)11 लीप × 2 + 35 साधारण × 1 = 57; 57 ÷ 7 का शेष1
1947: जनवरी–जुलाई + 15 अगस्त31 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 15 = 227; 227 ÷ 7 का शेष3
कुल0 + 1 + 1 + 35 → शुक्रवार

उदाहरण 2: 26 जनवरी 1950 को कौन-सा वार था?

हल: 1600 → 0; 1601–1900 → 1; 1901–1949 (49 वर्ष): 12 लीप, 37 साधारण → 24 + 37 = 61 → 61 ÷ 7 का शेष 5; जनवरी के 26 दिन → 5। कुल = 0 + 1 + 5 + 5 = 11 → 11 ÷ 7 का शेष 4 → गुरुवार।

उदाहरण 3: 1 जनवरी 2000 को कौन-सा वार था?

हल: 1999 तक: 1600 → 0; 300 वर्ष → 1; 1901–1999 (99 वर्ष): 24 लीप, 75 साधारण → 48 + 75 = 123 → शेष 4; 1 जनवरी → 1। कुल = 0 + 1 + 4 + 1 = 6 → शनिवार।

उदाहरण 4: 2 अक्टूबर 1869 को कौन-सा वार था?

हल: 1600 → 0; 1601–1800 (200 वर्ष) → 3; 1801–1868 (68 वर्ष): 17 लीप, 51 साधारण → 34 + 51 = 85 → शेष 1; 1869 में जनवरी–सितंबर (31 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 31 + 30 = 273) + 2 = 275 → शेष 2। कुल = 0 + 3 + 1 + 2 = 6 → शनिवार।

उदाहरण 5: 26 जनवरी 2026 को कौन-सा वार है?

हल: 2000 वर्ष → 0; 2001–2025 (25 वर्ष): 6 लीप, 19 साधारण → 12 + 19 = 31 → शेष 3; 26 जनवरी → 5। कुल = 0 + 3 + 5 = 8 → शेष 1 → सोमवार।

5.2 ज्ञात वार से आगे-पीछे गिनना

दिया गयापूछागणनाउत्तर
आज सोमवार61 दिन बाद61 ÷ 7 का शेष 5; सोम + 5शनिवार
आज बुधवार100 दिन बाद100 ÷ 7 का शेष 2; बुध + 2शुक्रवार
आज शुक्रवार45 दिन बाद45 ÷ 7 का शेष 3; शुक्र + 3सोमवार
1 जनवरी 2026 गुरुवार1 जनवरी 20272026 साधारण वर्ष → +1शुक्रवार
15 मार्च 2026 रविवार15 मार्च 2027बीच में 29 फरवरी नहीं → +1सोमवार
1 जनवरी 2028 का वार x1 जनवरी 20292028 लीप वर्ष → +2x + 2

ध्यान दें: एक तिथि से अगले वर्ष की उसी तिथि तक बीच में 29 फरवरी आए तो +2, न आए तो +1। जैसे 1 मार्च 2027 से 1 मार्च 2028 तक 29 फरवरी 2028 बीच में है, इसलिए +2।

5.3 ज्ञात तिथि से वार: और हल उदाहरण

जब किसी नज़दीकी तिथि का वार पता हो, तो पूरी विषम दिन विधि की ज़रूरत नहीं। बीच के दिन गिनें (पहली तिथि छोड़कर, अंतिम तिथि तक) और 7 से भाग दें। आधार: 1 जनवरी 2026 = गुरुवार, 1 जनवरी 2000 = शनिवार।

तिथिआधार से बीते दिन7 का शेषवार
15 अगस्त 202631 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 14 = 2262गुरु + 2 = शनिवार
28 अक्टूबर 2026जनवरी–सितंबर 273 + 27 = 3006गुरु + 6 = बुधवार
14 नवंबर 2026जनवरी–अक्टूबर 304 + 13 = 3172गुरु + 2 = शनिवार
31 दिसंबर 20263640गुरुवार
1 मार्च 200031 + 29 = 60 (2000 लीप)4शनि + 4 = बुधवार
31 दिसंबर 19991 जनवरी 2000 से 1 दिन पहले−1शुक्रवार
1 जनवरी 20012000 लीप वर्ष → +22शनि + 2 = सोमवार

पीछे गिनना: किसी तिथि से पहले का वार चाहिए तो शेष घटाएँ। जैसे गुरुवार से 10 दिन पहले: 10 ÷ 7 का शेष 3 → गुरु − 3 = सोमवार।

5.4 वर्ष के पहले और अंतिम दिन से जुड़े तथ्य

तथ्यकारणउदाहरण
साधारण वर्ष में 1 जनवरी और 31 दिसंबर एक ही वारबीच में 364 दिन = ठीक 52 सप्ताह2026: दोनों गुरुवार
लीप वर्ष में 31 दिसंबर = 1 जनवरी का अगला वारबीच में 365 दिन → शेष 12024: 1 जनवरी सोमवार, 31 दिसंबर मंगलवार
साधारण वर्ष में किसी वार की संख्या 53केवल उस वार की, जिस वार 1 जनवरी पड़े2026 में 53 गुरुवार
लीप वर्ष में 53 बार आने वाले वार1 जनवरी और 2 जनवरी वाले दो वार2024 में 53 सोमवार और 53 मंगलवार
महीने की 1 तारीख X वार होहर 7 दिन बाद वही वार1, 8, 15, 22, 29 तारीख X वार

6. कैलेंडर का दोहराव

दो वर्षों का कैलेंडर तभी एक जैसा होता है जब (1) दोनों का 1 जनवरी एक ही वार को हो और (2) दोनों लीप हों या दोनों साधारण। इसके लिए बीच के वर्षों के विषम दिनों का योग 7 का गुणज होना चाहिए।

वर्ष का प्रकारकितने वर्ष बाद दोहराएगाउदाहरण
लीप वर्ष28 वर्ष बाद2024 → 2052
लीप वर्ष के ठीक बाद वाला वर्ष (लीप + 1)6 वर्ष बाद2025 → 2031, 2021 → 2027
लीप + 211 वर्ष बाद2026 → 2037
लीप + 311 वर्ष बाद2027 → 2038, 2023 → 2034

यह तालिका तभी लागू होती है जब बीच में कोई ऐसा शताब्दी वर्ष न आए जो लीप नहीं है (जैसे 2100)। ऐसा वर्ष बीच में आए तो विषम दिन जोड़कर सीधे गिनें।

उदाहरण 6: 2026 का कैलेंडर किस वर्ष दोहराएगा?

वर्षविषम दिनसंचयी योग
202611
202712
2028 (लीप)24
202915
203016
203117 ✔ (पर 2032 लीप है, 2026 नहीं)
2032 (लीप)29
2033–20351 + 1 + 112
2036 (लीप)214 ✔ और 2037 साधारण

उत्तर: 2037। संचयी योग 7 पर 2032 का 1 जनवरी 2026 जैसा वार होता है, पर 2032 लीप वर्ष है, इसलिए पूरा कैलेंडर नहीं मिलता। योग 14 पर अगला वर्ष 2037 साधारण है, इसलिए वहीं पूरा कैलेंडर दोहराता है।

6.1 एक ही वर्ष में समान कैलेंडर वाले महीने

साधारण वर्षलीप वर्ष
जनवरी = अक्टूबरजनवरी = अप्रैल = जुलाई
फरवरी = मार्च = नवंबरफरवरी = अगस्त
अप्रैल = जुलाईमार्च = नवंबर
सितंबर = दिसंबरसितंबर = दिसंबर

"समान कैलेंडर" का अर्थ है कि दोनों महीनों की 1 तारीख एक ही वार को पड़ती है। फरवरी और मार्च के दिन अलग होने से उनके महीने के अंत अलग होते हैं, पर तिथि-वार का मेल वही रहता है।


7. घड़ी: सुइयों के बीच कोण

7.1 सूत्र कहाँ से आता है

घंटे की सुई 12 घंटे में 360° घूमती है, यानी 30° प्रति घंटा और 0.5° प्रति मिनट। मिनट की सुई 60 मिनट में 360°, यानी 6° प्रति मिनट। H बजकर M मिनट पर घंटे की सुई 12 से (30H + 0.5M)° और मिनट की सुई 6M° पर है। अंतर = |30H + 0.5M − 6M| = |30H − 5.5M|।

समयगणनाकोण
3:00|90 − 0|90°
3:40|90 − 220|130°
7:20|210 − 110|100°
4:30|120 − 165|45°
2:20|60 − 110|50°
5:15|150 − 82.5|67.5°
9:15|270 − 82.5|187.5° → 360 − 187.5 = 172.5°
10:10|300 − 55|245° → 115°
8:24|240 − 132|108°
11:20|330 − 110|220° → 140°
12:30H = 12 को 0 लें: |0 − 165|165°
6:00|180 − 0|180°

सूत्र से प्रायः छोटा (180° तक का) कोण पूछा जाता है। प्रश्न "बड़ा कोण" या "प्रतिवर्ती कोण" पूछे तो 360 − θ दें।

7.2 सुइयाँ कब मिलती हैं, विपरीत होती हैं, समकोण बनाती हैं

H और (H + 1) बजे के बीच, H बजकर M मिनट पर कोण θ हो, तो 30H − 5.5M = ±θ, यानी M = (60H ∓ 2θ)/11।

स्थितिH और H + 1 के बीच समय (H बजकर … मिनट)
सुइयाँ मिलती हैं (0°)M = 60H/11
विपरीत (180°)M = (60H ± 360)/11, जो 0 से 60 के बीच हो
समकोण (90°)M = (60H ± 180)/11, दोनों में से जो 0 से 60 के बीच हों

उदाहरण 7: 4 और 5 बजे के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?

हल: M = 60 × 4/11 = 240/11 = 21 9/11 मिनट, यानी 4 बजकर 21 9/11 मिनट।

उदाहरण 8: 7 और 8 के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?

हल: M = 420/11 = 38 2/11 मिनट।

उदाहरण 9: 2 और 3 के बीच सुइयाँ कब विपरीत होंगी?

हल: M = (120 + 360)/11 = 480/11 = 43 7/11 मिनट (दूसरा मान (120 − 360)/11 ऋणात्मक है, अस्वीकार)।

उदाहरण 10: 8 और 9 के बीच सुइयाँ कब विपरीत होंगी?

हल: M = (480 − 360)/11 = 120/11 = 10 10/11 मिनट (दूसरा मान 840/11 = 76.4 है, जो 60 से अधिक है)।

उदाहरण 11: 3 और 4 के बीच सुइयाँ कब समकोण पर होंगी?

हल: M = (180 − 180)/11 = 0 (ठीक 3:00) और M = (180 + 180)/11 = 360/11 = 32 8/11 मिनट। ठीक 3:00 को प्रायः "3 और 4 के बीच" नहीं गिना जाता, इसलिए उत्तर 3 बजकर 32 8/11 मिनट।

उदाहरण 11 (क): 5 और 6 के बीच सुइयाँ किन दो समयों पर समकोण बनाएँगी?

हल: M = (300 − 180)/11 = 120/11 = 10 10/11 मिनट और M = (300 + 180)/11 = 480/11 = 43 7/11 मिनट। जाँच: 5 बजकर 120/11 मिनट पर |150 − 5.5 × 120/11| = |150 − 60| = 90° ✔।

7.3 12 और 24 घंटे में कितनी बार

स्थिति12 घंटे में24 घंटे मेंकारण
संपाती (मिलना)112211 से 1 के बीच केवल एक बार (12:00 पर) मिलती हैं
विपरीत11225 से 7 के बीच केवल एक बार (6:00 पर)
समकोण22442 से 4 और 8 से 10 के बीच 3:00 और 9:00 साझा होते हैं
सीधी रेखा (0° + 180°)224411 + 11

सुइयाँ हर 720/11 = 65 5/11 मिनट में एक बार मिलती हैं। इसलिए किसी घड़ी में सुइयाँ हर 65 मिनट में मिलें, तो वह घड़ी तेज़ है (सही घड़ी में यह अंतराल 65 5/11 मिनट है)।


8. दर्पण प्रतिबिंब और जल प्रतिबिंब

घड़ी को दर्पण में देखने पर (दर्पण घड़ी के बगल में खड़ा हो) दिखने वाला समय = 11:60 − वास्तविक समय। यदि समय 11:00 से 12:59 के बीच हो तो 23:60 − समय लें। यही नियम उलटा भी चलता है: दर्पण में दिखे समय से वास्तविक समय भी इसी से निकलता है।

वास्तविक समयगणनादर्पण में
3:2511:60 − 3:258:35
10:5011:60 − 10:501:10
8:1511:60 − 8:153:45
2:4011:60 − 2:409:20
6:1011:60 − 6:105:50
4:3511:60 − 4:357:25
12:2023:60 − 12:2011:40
11:4523:60 − 11:4512:15

जाँच: वास्तविक समय + दर्पण का समय = 12:00 (या 24:00)। जैसे 3:25 + 8:35 = 12:00।

जल प्रतिबिंब (घड़ी के नीचे पानी) में घड़ी ऊपर-नीचे उलटती है, बाएँ-दाएँ नहीं। इसके शॉर्टकट पुस्तकों में अलग-अलग ढंग से दिए जाते हैं, इसलिए यह नोट और क्विज़ केवल दर्पण प्रतिबिंब पर हैं, जो परीक्षा में अधिक आता है।


9. तेज़ और सुस्त घड़ी (Gaining / Losing clock)

तेज़ घड़ी सही समय से आगे भागती है, सुस्त घड़ी पीछे रहती है। एकसमान गति मानकर अनुपात लगाएँ।

उदाहरण 12: एक घड़ी हर घंटे 5 मिनट तेज़ चलती है। उसे सुबह 6 बजे सही मिलाया गया। सही समय शाम 6 बजे वह क्या दिखाएगी?

हल: 12 घंटे × 5 मिनट = 60 मिनट आगे → घड़ी शाम 7:00 दिखाएगी।

उदाहरण 13: एक घड़ी हर घंटे 2 मिनट सुस्त चलती है। सुबह 8 बजे सही मिलाई गई। सही समय शाम 6 बजे वह क्या दिखाएगी?

हल: 10 घंटे × 2 मिनट = 20 मिनट पीछे → शाम 5:40।

उदाहरण 14: एकसमान रूप से तेज़ चलने वाली एक घड़ी सोमवार दोपहर 12 बजे 2 मिनट पीछे थी और अगले सोमवार दोपहर 2 बजे 4 मिनट 48 सेकंड आगे थी। वह सही समय कब दिखा रही थी?

चरणगणना
कुल समयसोमवार 12 बजे से अगले सोमवार 2 बजे = 7 दिन 2 घंटे = 170 घंटे
कुल बढ़त2 मिनट + 4.8 मिनट = 6.8 मिनट
सही होने के लिए बढ़त2 मिनट (पीछे से शून्य तक)
लगा समय170 × 2/6.8 = 50 घंटे
सही समयसोमवार 12 बजे + 50 घंटे = बुधवार दोपहर 2 बजे

10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: हर 4 से विभाज्य वर्ष को लीप मान लेना

1700, 1800, 1900 और 2100 लीप वर्ष नहीं हैं। शताब्दी वर्ष के लिए 400 से विभाज्यता देखें। 2000 और 2400 लीप हैं।

Trap 2: अगले वर्ष की उसी तिथि पर हमेशा +1

बीच में 29 फरवरी आए तो +2। 10 जनवरी 2028 से 10 जनवरी 2029 तक 29 फरवरी 2028 बीच में है, इसलिए +2; पर 10 मार्च 2028 से 10 मार्च 2029 तक नहीं, इसलिए +1।

Trap 3: "n दिन बाद" में आज को गिनना

"आज सोमवार है, 7 दिन बाद?" का उत्तर सोमवार है। "n दिन बाद" में n का शेष सीधे जोड़ें; आज को अलग से न गिनें।

Trap 4: कैलेंडर दोहराव में लीप-स्थिति न जाँचना

केवल 1 जनवरी का वार मिलना पर्याप्त नहीं; दोनों वर्ष एक ही प्रकार (लीप/साधारण) के होने चाहिए। 2026 के लिए 2032 का 1 जनवरी मेल खाता है, पर 2032 लीप है, इसलिए उत्तर 2037 है।

Trap 5: घड़ी के कोण में घंटे की सुई की चाल भूलना

3:40 पर घंटे की सुई ठीक 3 पर नहीं, 3 और 4 के बीच है। "40 मिनट = 8 खाने = 240° − 90° = 150°" गलत है; सही उत्तर |90 − 220| = 130° है।

Trap 6: 12 घंटे में सुइयाँ 12 बार मिलती हैं

गलत। 11 से 1 बजे के बीच वे केवल एक बार (12:00 पर) मिलती हैं, इसलिए 12 घंटे में 11 बार और 24 घंटे में 22 बार।

Trap 7: समकोण 24 घंटे में 48 बार

गलत। 12 घंटे में 22 बार (24 नहीं), क्योंकि 3:00 और 9:00 के समकोण दो अंतरालों में साझा होते हैं। 24 घंटे में 44 बार।

Trap 8: 11 और 12 बजे के बीच दर्पण समय

11:45 का दर्पण समय 11:60 − 11:45 = 0:15 लिखना गलत है; 23:60 − 11:45 = 12:15 लें।


11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)

क्रमप्रश्न / स्थितिउत्तर
1साधारण वर्ष के विषम दिन1
2लीप वर्ष के विषम दिन2
3100 वर्ष के विषम दिन5
4200 वर्ष3
5300 वर्ष1
6400 वर्ष0
7100 वर्ष में लीप वर्ष24
8400 वर्ष में लीप वर्ष97
931 दिन वाले महीने के विषम दिन3
1030 दिन वाले महीने के विषम दिन2
11फरवरी (लीप) के विषम दिन1
12फरवरी (साधारण) के विषम दिन0
131900 लीप?नहीं
142000 लीप?हाँ
152100 लीप?नहीं
16शताब्दी का अंतिम दिन कभी नहींमंगल, गुरु, शनि
1731 दिसंबर 2000रविवार
1831 दिसंबर 1900सोमवार
1915 अगस्त 1947शुक्रवार
2026 जनवरी 1950गुरुवार
211 जनवरी 2000शनिवार
222 अक्टूबर 1869शनिवार
231 जनवरी 2026गुरुवार
2426 जनवरी 2026सोमवार
25सोमवार + 61 दिनशनिवार
26बुधवार + 100 दिनशुक्रवार
27लीप वर्ष का कैलेंडर दोहराव28 वर्ष बाद
28लीप + 1 वर्ष6 वर्ष बाद
29लीप + 2 या + 3 वर्ष11 वर्ष बाद
302026 का कैलेंडर2037
312024 का कैलेंडर2052
322025 का कैलेंडर2031
33साधारण वर्ष में जनवरी के समानअक्टूबर
34साधारण वर्ष में फरवरी के समानमार्च, नवंबर
35लीप वर्ष में जनवरी के समानअप्रैल, जुलाई
36दोनों प्रकार में सितंबर के समानदिसंबर
37घंटे की सुई प्रति मिनट0.5°
38मिनट की सुई प्रति मिनट6°
39कोण सूत्र|30H − 5.5M|
403:40 पर कोण130°
417:20 पर कोण100°
424:30 पर कोण45°
439:15 पर कोण172.5°
444 और 5 के बीच सुइयाँ मिलती हैं4 बजकर 21 9/11 मिनट
452 और 3 के बीच विपरीत2 बजकर 43 7/11 मिनट
463 और 4 के बीच समकोण3 बजकर 32 8/11 मिनट
4724 घंटे में संपाती22 बार
4824 घंटे में समकोण44 बार
49सही घड़ी में दो मिलानों के बीच अंतर65 5/11 मिनट
50दर्पण नियम11:60 − समय
513:25 का दर्पण8:35
5210:50 का दर्पण1:10

12. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

नीचे हर ढाँचे का एक नमूना प्रश्न (स्वयं बनाया गया) है:

  1. दिनों की गिनती: "आज शुक्रवार है; 45 दिन बाद कौन-सा वार?" (45 ÷ 7 का शेष 3 → सोमवार)
  2. ऐतिहासिक तिथि: "15 अगस्त 1947 को कौन-सा वार था?" (विषम दिन 5 → शुक्रवार)
  3. लीप वर्ष: "इनमें से कौन-सा लीप वर्ष नहीं है: 2000, 2024, 1900, 2400?" (1900)
  4. कैलेंडर दोहराव: "2025 का कैलेंडर किस वर्ष दोहराएगा?" (लीप + 1 → 6 वर्ष → 2031)
  5. कोण: "8:24 पर सुइयों के बीच कोण?" (|240 − 132| = 108°)
  6. मिलना/विपरीत/समकोण: "7 और 8 के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?" (420/11 = 38 2/11 मिनट)
  7. दर्पण: "दर्पण में घड़ी 4:35 दिखाती है; वास्तविक समय?" (11:60 − 4:35 = 7:25)

रणनीति: वार वाले प्रश्नों में हर संख्या को तुरंत 7 से भाग देकर केवल शेष लिखें। घड़ी के प्रश्नों में सूत्र |30H − 5.5M| सीधे लगाएँ; "खाने गिनने" की विधि घंटे की सुई की चाल भूल जाती है।


13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. "5-3-1-0": 100, 200, 300, 400 वर्षों के विषम दिन।

2. "शुक्र-बुध-सोम-रवि": 5-3-1-0 के वार, यानी शताब्दी का अंतिम दिन। बाकी तीन (मंगल, गुरु, शनि) कभी नहीं।

3. "28-6-11-11": लीप वर्ष 28 बाद, लीप + 1 छह बाद, लीप + 2 और लीप + 3 ग्यारह बाद।

4. "तीस-साढ़े पाँच": कोण = 30 × घंटा − 5.5 × मिनट।

5. "11-11-22": 12 घंटे में मिलना 11, विपरीत 11, समकोण 22; 24 घंटे में दोगुना।

6. "ग्यारह साठ": दर्पण समय = 11:60 − समय; जाँच: दोनों का योग 12:00।

7. महीनों का मेल (साधारण वर्ष): "जन-अक्टू, फर-मार-नव, अप्रै-जुला, सित-दिस"।


14. कथन अभ्यास

साधारण वर्ष में 1 विषम दिन होता है। — सही

1900 एक लीप वर्ष था। — गलत (शताब्दी वर्ष को 400 से विभाज्य होना चाहिए; 1900 नहीं है)

400 वर्षों में विषम दिनों की संख्या 0 होती है। — सही

किसी शताब्दी का अंतिम दिन गुरुवार हो सकता है। — गलत (मंगल, गुरु और शनि कभी नहीं)

15 अगस्त 1947 को शुक्रवार था। — सही

लीप वर्ष का कैलेंडर 28 वर्ष बाद दोहराता है (बीच में अपवाद-शताब्दी न हो तो)। — सही

साधारण वर्ष में जनवरी और अक्टूबर का कैलेंडर एक जैसा होता है। — सही

12 घंटे में घड़ी की सुइयाँ 12 बार मिलती हैं। — गलत (11 बार)

24 घंटे में सुइयाँ 44 बार समकोण बनाती हैं। — सही

3:40 पर दोनों सुइयों के बीच कोण 150° होता है। — गलत (|90 − 220| = 130°)

घंटे की सुई हर मिनट में 0.5° घूमती है। — सही

दर्पण में 3:25 का प्रतिबिंब 9:35 दिखता है। — गलत (11:60 − 3:25 = 8:35)


15. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. विषम दिन = कुल दिन ÷ 7 का शेष।
  2. साधारण वर्ष 1, लीप वर्ष 2 विषम दिन।
  3. 100, 200, 300, 400 वर्ष → 5, 3, 1, 0 विषम दिन।
  4. लीप: 4 से विभाज्य; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य (2000 हाँ, 1900 नहीं)।
  5. 0 = रविवार, 1 = सोमवार … 6 = शनिवार।
  6. शताब्दी का अंतिम दिन मंगल, गुरु, शनि कभी नहीं।
  7. अगले वर्ष की वही तिथि: बीच में 29 फरवरी हो तो +2, वरना +1।
  8. कैलेंडर दोहराव: लीप 28, लीप + 1 छह, लीप + 2/+3 ग्यारह वर्ष बाद।
  9. दोहराव के लिए वार भी मिले और लीप-स्थिति भी।
  10. कोण = |30H − 5.5M|; 180 से अधिक हो तो 360 − θ।
  11. सुइयाँ मिलती हैं: H बजकर 60H/11 मिनट।
  12. 12 घंटे: मिलना 11, विपरीत 11, समकोण 22; 24 घंटे में 22, 22, 44।
  13. सही घड़ी में सुइयाँ हर 65 5/11 मिनट में मिलती हैं।
  14. दर्पण = 11:60 − समय; 11 से 12:59 के लिए 23:60 − समय।
  15. तेज़/सुस्त घड़ी: बढ़त समय के अनुपात में (एकसमान दर)।

16. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। वार वाले प्रश्नों में हर चरण पर 7 का शेष लिखें, और घड़ी वाले प्रश्नों में सूत्र लगाकर ही उत्तर चुनें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 5 (तिथि का वार), खंड 6 (कैलेंडर दोहराव) और खंड 7 (कोण) दोबारा पढ़ें। परीक्षा-स्तर के अभ्यास के लिए रीज़निंग मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 या राजस्थान CET (12वीं) मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।


17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

कैलेंडर का पूरा अध्याय एक विचार पर चलता है: पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते, केवल विषम दिन बदलते हैं। 1 और 2 (वर्ष), 5-3-1-0 (शताब्दियाँ) और लीप वर्ष का 400 वाला नियम याद हो तो किसी भी तिथि का वार निकल आता है। घड़ी का अध्याय सापेक्ष चाल 5.5° प्रति मिनट पर टिका है; कोण, मिलना, विपरीत और समकोण सब इसी से निकलते हैं। दर्पण के लिए 11:60 का नियम और तेज़-सुस्त घड़ी के लिए सीधा अनुपात पर्याप्त है।

साधारण 1, लीप 2 | 5-3-1-0 | शताब्दी 400 से भाग तो लीप | 0 = रविवार | कोण = |30H − 5.5M| | 12 घंटे: 11-11-22 | दर्पण = 11:60 − समय


अंतिम संशोधन (Last Updated):
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

किसी अवधि के कुल दिनों को 7 से भाग देने पर जो शेष बचे, उसे विषम दिन कहते हैं। पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते, केवल विषम दिन वार को आगे खिसकाते हैं।

100 वर्षों में 5, 200 में 3, 300 में 1 और 400 वर्षों में 0 विषम दिन होते हैं। इसे '5-3-1-0' के रूप में याद रखें।

जो वर्ष 4 से विभाज्य हो वह लीप वर्ष है, पर शताब्दी वर्ष (00 पर समाप्त) तभी लीप है जब वह 400 से विभाज्य हो। इसलिए 2000 लीप था, पर 1900 और 2100 नहीं।

15 अगस्त 1947 को शुक्रवार था। विषम दिन: 1600 वर्ष में 0, 1601–1900 में 1, 1901–1946 में 1 और 1947 में 15 अगस्त तक 3, कुल 5 = शुक्रवार।

लीप वर्ष का कैलेंडर 28 वर्ष बाद, लीप वर्ष के ठीक बाद वाले वर्ष का 6 वर्ष बाद, और लीप + 2 या लीप + 3 वर्ष का 11 वर्ष बाद दोहराता है। बीच में 2100 जैसा गैर-लीप शताब्दी वर्ष हो तो सीधे गिनें।

H बजकर M मिनट पर कोण = |30H − 5.5M|। उत्तर 180° से अधिक आए तो छोटा कोण पाने के लिए 360 से घटाएँ।

12 घंटे में सुइयाँ 11 बार मिलती हैं, इसलिए 24 घंटे में 22 बार। विपरीत भी 22 बार होती हैं और समकोण 44 बार बनाती हैं।

दर्पण में दिखने वाला समय = 11:60 − वास्तविक समय। यदि समय 11:00 से 12:59 के बीच हो तो 23:60 − समय लें; जैसे 3:25 का प्रतिबिंब 8:35 है।

शताब्दी का अंतिम दिन केवल शुक्रवार, बुधवार, सोमवार या रविवार हो सकता है। मंगलवार, गुरुवार और शनिवार कभी नहीं।

साधारण वर्ष में जनवरी-अक्टूबर, फरवरी-मार्च-नवंबर, अप्रैल-जुलाई और सितंबर-दिसंबर का कैलेंडर एक जैसा होता है। लीप वर्ष में जनवरी-अप्रैल-जुलाई, फरवरी-अगस्त, मार्च-नवंबर और सितंबर-दिसंबर।

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