कैलेंडर और घड़ी रीजनिंग — विषम दिन, लीप वर्ष, तिथि का वार, कैलेंडर दोहराव, सुइयों का कोण व दर्पण समय
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: SSC, RRB NTPC, RSSB CET व राजस्थान पुलिस पाठ्यक्रम की तार्किक व मानसिक योग्यता इकाई। सभी उदाहरण व प्रश्न सुयोग अकादमी द्वारा तैयार; शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: कैलेंडर के प्रश्न विषम दिन (odd days) पर टिके हैं: कुल दिनों को 7 से भाग देने पर बचा शेष। साधारण वर्ष (365 दिन) में 1 और लीप वर्ष (366 दिन) में 2 विषम दिन होते हैं; 100 वर्षों में 5, 200 में 3, 300 में 1 और 400 वर्षों में 0 विषम दिन। लीप वर्ष वह है जो 4 से विभाज्य हो, पर शताब्दी वर्ष (1900, 2000) तभी लीप है जब वह 400 से विभाज्य हो, इसलिए 2000 लीप था और 1900 नहीं। विषम दिन 0 = रविवार, 1 = सोमवार … 6 = शनिवार। घड़ी में दोनों सुइयों के बीच कोण = |30H − 5.5M| (180° से अधिक आए तो 360 से घटाएँ)। सुइयाँ 12 घंटे में 11 बार मिलती हैं, 11 बार विपरीत होती हैं और 22 बार समकोण बनाती हैं; 24 घंटे में क्रमशः 22, 22 और 44 बार। दर्पण प्रतिबिंब का समय = 11:60 − दिया गया समय।
संक्षिप्त उत्तर
| कैलेंडर तथ्य | मान |
|---|---|
| साधारण वर्ष | 365 दिन = 52 सप्ताह + 1 दिन → 1 विषम दिन |
| लीप वर्ष | 366 दिन = 52 सप्ताह + 2 दिन → 2 विषम दिन |
| 100 वर्ष | 5 विषम दिन |
| 200 वर्ष | 3 विषम दिन |
| 300 वर्ष | 1 विषम दिन |
| 400 वर्ष | 0 विषम दिन |
| लीप वर्ष का नियम | 4 से विभाज्य; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य |
| विषम दिन → वार | 0 रवि, 1 सोम, 2 मंगल, 3 बुध, 4 गुरु, 5 शुक्र, 6 शनि |
| शताब्दी का अंतिम दिन कभी नहीं | मंगलवार, गुरुवार, शनिवार |
| घड़ी तथ्य | मान |
|---|---|
| घंटे की सुई की चाल | 0.5° प्रति मिनट (30° प्रति घंटा) |
| मिनट की सुई की चाल | 6° प्रति मिनट |
| सापेक्ष चाल | 5.5° प्रति मिनट (= 11/2) |
| कोण का सूत्र | θ = |30H − 5.5M|; 180 से अधिक हो तो 360 − θ |
| सुइयाँ मिलती हैं (संपाती) | 12 घंटे में 11 बार, 24 घंटे में 22 बार |
| सुइयाँ विपरीत (180°) | 12 घंटे में 11 बार, 24 घंटे में 22 बार |
| समकोण (90°) | 12 घंटे में 22 बार, 24 घंटे में 44 बार |
| एक सीधी रेखा में (0° या 180°) | 12 घंटे में 22 बार, 24 घंटे में 44 बार |
| दर्पण प्रतिबिंब | 11:60 − समय (11:00 से 12:59 के लिए 23:60 − समय) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
कैलेंडर और घड़ी तार्किक योग्यता के विश्लेषणात्मक तर्क खंड के गणना-आधारित अध्याय हैं। इनमें सूत्र कम हैं और प्रश्न सीधे बनते हैं, इसलिए सूत्र याद हों तो उत्तर निश्चित होता है। SSC और रेलवे में किसी तिथि का वार, किसी वर्ष का कैलेंडर कब दोहराएगा, घड़ी की सुइयों के बीच कोण और दर्पण प्रतिबिंब बार-बार पूछे जाते हैं। घड़ी की सुइयों से दिशा वाले प्रश्न दिशा एवं दूरी के अध्याय से जुड़ते हैं, और संख्याओं के पैटर्न संख्या व अक्षर शृंखला जैसे ही हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆
- SSC CGL / CHSL / MTS / GD: किसी तिथि का वार, लीप वर्ष, सुइयों के बीच कोण, दर्पण प्रतिबिंब
- RRB NTPC: "आज सोमवार है तो 61 दिन बाद?", कैलेंडर का दोहराव, सुइयों का मिलना
- राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी, राजस्थान पुलिस: सीधे वार वाले प्रश्न, घड़ी का कोण, आगे-पीछे चलने वाली घड़ी
प्रश्न कैसे आते हैं?
- दिए गए वार से कुछ दिन, महीने या वर्ष बाद का वार।
- किसी ऐतिहासिक तिथि का वार (विषम दिन विधि)।
- कौन-सा वर्ष लीप है; किस वर्ष का कैलेंडर दोहराएगा।
- किसी समय पर सुइयों के बीच कोण।
- दो घंटों के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी, विपरीत होंगी या समकोण बनाएँगी।
- दर्पण प्रतिबिंब और तेज़/सुस्त घड़ी।
3. विषम दिन (Odd Days)
3.1 परिभाषा
किसी अवधि के कुल दिनों में पूरे सप्ताह निकालने के बाद जो दिन बचें, वे विषम दिन हैं, यानी कुल दिन ÷ 7 का शेष। पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते; केवल विषम दिन वार को आगे खिसकाते हैं।
3.2 महीनों के विषम दिन
| महीना | दिन | विषम दिन |
|---|---|---|
| जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर | 31 | 3 |
| अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबर | 30 | 2 |
| फरवरी (साधारण वर्ष) | 28 | 0 |
| फरवरी (लीप वर्ष) | 29 | 1 |
3.3 शताब्दियों के विषम दिन कैसे बनते हैं
| अवधि | लीप वर्ष | साधारण वर्ष | विषम दिन की गणना | विषम दिन |
|---|---|---|---|---|
| 100 वर्ष | 24 | 76 | 24 × 2 + 76 × 1 = 124; 124 ÷ 7 का शेष | 5 |
| 200 वर्ष | 48 | 152 | 5 × 2 = 10; 10 ÷ 7 का शेष | 3 |
| 300 वर्ष | 72 | 228 | 5 × 3 = 15; 15 ÷ 7 का शेष | 1 |
| 400 वर्ष | 97 | 303 | 5 × 4 + 1 = 21 (400वाँ वर्ष लीप है); 21 ÷ 7 का शेष | 0 |
इसलिए 400 के किसी भी गुणज (400, 800, 1200, 1600, 2000) वर्षों में विषम दिन 0 होते हैं।
3.4 शताब्दी का अंतिम दिन
| अवधि | विषम दिन | अंतिम दिन का वार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| पहली 100 वर्ष | 5 | शुक्रवार | 31 दिसंबर 1700 (1600 के बाद 100 वर्ष) = शुक्रवार |
| 200 वर्ष | 3 | बुधवार | 31 दिसंबर 1800 = बुधवार |
| 300 वर्ष | 1 | सोमवार | 31 दिसंबर 1900 = सोमवार |
| 400 वर्ष | 0 | रविवार | 31 दिसंबर 2000 = रविवार |
शताब्दी का अंतिम दिन केवल शुक्र, बुध, सोम या रवि हो सकता है; मंगलवार, गुरुवार और शनिवार कभी नहीं।
4. लीप वर्ष के नियम
| वर्ष का प्रकार | नियम | लीप | लीप नहीं |
|---|---|---|---|
| सामान्य (शताब्दी नहीं) | 4 से विभाज्य | 2024, 2028, 1996 | 2026, 2023, 1998 |
| शताब्दी वर्ष (00 से अंत) | 400 से विभाज्य | 1600, 2000, 2400 | 1700, 1800, 1900, 2100 |
जाल: 1900 को 4 से भाग जाता है, फिर भी वह लीप वर्ष नहीं है, क्योंकि शताब्दी वर्ष को 400 से भाग जाना चाहिए। 100 वर्षों में इसीलिए 25 नहीं, 24 लीप वर्ष होते हैं।
5. किसी तिथि का वार निकालना
5.1 विषम दिन विधि
- दिए गए वर्ष से पहले के पूरे वर्ष लें (जैसे 15 अगस्त 1947 के लिए 1946 तक)।
- उन्हें 400 के गुणज + शताब्दियाँ + शेष वर्षों में तोड़ें और हर भाग के विषम दिन लिखें।
- शेष वर्षों में लीप वर्ष गिनें: विषम दिन = 2 × लीप + 1 × साधारण।
- दिए गए वर्ष में तिथि तक के दिन जोड़ें।
- कुल विषम दिनों को 7 से भाग दें; शेष से वार पढ़ें (0 = रविवार)।
उदाहरण 1: 15 अगस्त 1947 को कौन-सा वार था?
| भाग | गणना | विषम दिन |
|---|---|---|
| 1600 वर्ष | 400 का गुणज | 0 |
| 1601–1900 (300 वर्ष) | तालिका से | 1 |
| 1901–1946 (46 वर्ष) | 11 लीप × 2 + 35 साधारण × 1 = 57; 57 ÷ 7 का शेष | 1 |
| 1947: जनवरी–जुलाई + 15 अगस्त | 31 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 15 = 227; 227 ÷ 7 का शेष | 3 |
| कुल | 0 + 1 + 1 + 3 | 5 → शुक्रवार |
उदाहरण 2: 26 जनवरी 1950 को कौन-सा वार था?
हल: 1600 → 0; 1601–1900 → 1; 1901–1949 (49 वर्ष): 12 लीप, 37 साधारण → 24 + 37 = 61 → 61 ÷ 7 का शेष 5; जनवरी के 26 दिन → 5। कुल = 0 + 1 + 5 + 5 = 11 → 11 ÷ 7 का शेष 4 → गुरुवार।
उदाहरण 3: 1 जनवरी 2000 को कौन-सा वार था?
हल: 1999 तक: 1600 → 0; 300 वर्ष → 1; 1901–1999 (99 वर्ष): 24 लीप, 75 साधारण → 48 + 75 = 123 → शेष 4; 1 जनवरी → 1। कुल = 0 + 1 + 4 + 1 = 6 → शनिवार।
उदाहरण 4: 2 अक्टूबर 1869 को कौन-सा वार था?
हल: 1600 → 0; 1601–1800 (200 वर्ष) → 3; 1801–1868 (68 वर्ष): 17 लीप, 51 साधारण → 34 + 51 = 85 → शेष 1; 1869 में जनवरी–सितंबर (31 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 31 + 30 = 273) + 2 = 275 → शेष 2। कुल = 0 + 3 + 1 + 2 = 6 → शनिवार।
उदाहरण 5: 26 जनवरी 2026 को कौन-सा वार है?
हल: 2000 वर्ष → 0; 2001–2025 (25 वर्ष): 6 लीप, 19 साधारण → 12 + 19 = 31 → शेष 3; 26 जनवरी → 5। कुल = 0 + 3 + 5 = 8 → शेष 1 → सोमवार।
5.2 ज्ञात वार से आगे-पीछे गिनना
| दिया गया | पूछा | गणना | उत्तर |
|---|---|---|---|
| आज सोमवार | 61 दिन बाद | 61 ÷ 7 का शेष 5; सोम + 5 | शनिवार |
| आज बुधवार | 100 दिन बाद | 100 ÷ 7 का शेष 2; बुध + 2 | शुक्रवार |
| आज शुक्रवार | 45 दिन बाद | 45 ÷ 7 का शेष 3; शुक्र + 3 | सोमवार |
| 1 जनवरी 2026 गुरुवार | 1 जनवरी 2027 | 2026 साधारण वर्ष → +1 | शुक्रवार |
| 15 मार्च 2026 रविवार | 15 मार्च 2027 | बीच में 29 फरवरी नहीं → +1 | सोमवार |
| 1 जनवरी 2028 का वार x | 1 जनवरी 2029 | 2028 लीप वर्ष → +2 | x + 2 |
ध्यान दें: एक तिथि से अगले वर्ष की उसी तिथि तक बीच में 29 फरवरी आए तो +2, न आए तो +1। जैसे 1 मार्च 2027 से 1 मार्च 2028 तक 29 फरवरी 2028 बीच में है, इसलिए +2।
5.3 ज्ञात तिथि से वार: और हल उदाहरण
जब किसी नज़दीकी तिथि का वार पता हो, तो पूरी विषम दिन विधि की ज़रूरत नहीं। बीच के दिन गिनें (पहली तिथि छोड़कर, अंतिम तिथि तक) और 7 से भाग दें। आधार: 1 जनवरी 2026 = गुरुवार, 1 जनवरी 2000 = शनिवार।
| तिथि | आधार से बीते दिन | 7 का शेष | वार |
|---|---|---|---|
| 15 अगस्त 2026 | 31 + 28 + 31 + 30 + 31 + 30 + 31 + 14 = 226 | 2 | गुरु + 2 = शनिवार |
| 28 अक्टूबर 2026 | जनवरी–सितंबर 273 + 27 = 300 | 6 | गुरु + 6 = बुधवार |
| 14 नवंबर 2026 | जनवरी–अक्टूबर 304 + 13 = 317 | 2 | गुरु + 2 = शनिवार |
| 31 दिसंबर 2026 | 364 | 0 | गुरुवार |
| 1 मार्च 2000 | 31 + 29 = 60 (2000 लीप) | 4 | शनि + 4 = बुधवार |
| 31 दिसंबर 1999 | 1 जनवरी 2000 से 1 दिन पहले | −1 | शुक्रवार |
| 1 जनवरी 2001 | 2000 लीप वर्ष → +2 | 2 | शनि + 2 = सोमवार |
पीछे गिनना: किसी तिथि से पहले का वार चाहिए तो शेष घटाएँ। जैसे गुरुवार से 10 दिन पहले: 10 ÷ 7 का शेष 3 → गुरु − 3 = सोमवार।
5.4 वर्ष के पहले और अंतिम दिन से जुड़े तथ्य
| तथ्य | कारण | उदाहरण |
|---|---|---|
| साधारण वर्ष में 1 जनवरी और 31 दिसंबर एक ही वार | बीच में 364 दिन = ठीक 52 सप्ताह | 2026: दोनों गुरुवार |
| लीप वर्ष में 31 दिसंबर = 1 जनवरी का अगला वार | बीच में 365 दिन → शेष 1 | 2024: 1 जनवरी सोमवार, 31 दिसंबर मंगलवार |
| साधारण वर्ष में किसी वार की संख्या 53 | केवल उस वार की, जिस वार 1 जनवरी पड़े | 2026 में 53 गुरुवार |
| लीप वर्ष में 53 बार आने वाले वार | 1 जनवरी और 2 जनवरी वाले दो वार | 2024 में 53 सोमवार और 53 मंगलवार |
| महीने की 1 तारीख X वार हो | हर 7 दिन बाद वही वार | 1, 8, 15, 22, 29 तारीख X वार |
6. कैलेंडर का दोहराव
दो वर्षों का कैलेंडर तभी एक जैसा होता है जब (1) दोनों का 1 जनवरी एक ही वार को हो और (2) दोनों लीप हों या दोनों साधारण। इसके लिए बीच के वर्षों के विषम दिनों का योग 7 का गुणज होना चाहिए।
| वर्ष का प्रकार | कितने वर्ष बाद दोहराएगा | उदाहरण |
|---|---|---|
| लीप वर्ष | 28 वर्ष बाद | 2024 → 2052 |
| लीप वर्ष के ठीक बाद वाला वर्ष (लीप + 1) | 6 वर्ष बाद | 2025 → 2031, 2021 → 2027 |
| लीप + 2 | 11 वर्ष बाद | 2026 → 2037 |
| लीप + 3 | 11 वर्ष बाद | 2027 → 2038, 2023 → 2034 |
यह तालिका तभी लागू होती है जब बीच में कोई ऐसा शताब्दी वर्ष न आए जो लीप नहीं है (जैसे 2100)। ऐसा वर्ष बीच में आए तो विषम दिन जोड़कर सीधे गिनें।
उदाहरण 6: 2026 का कैलेंडर किस वर्ष दोहराएगा?
| वर्ष | विषम दिन | संचयी योग |
|---|---|---|
| 2026 | 1 | 1 |
| 2027 | 1 | 2 |
| 2028 (लीप) | 2 | 4 |
| 2029 | 1 | 5 |
| 2030 | 1 | 6 |
| 2031 | 1 | 7 ✔ (पर 2032 लीप है, 2026 नहीं) |
| 2032 (लीप) | 2 | 9 |
| 2033–2035 | 1 + 1 + 1 | 12 |
| 2036 (लीप) | 2 | 14 ✔ और 2037 साधारण |
उत्तर: 2037। संचयी योग 7 पर 2032 का 1 जनवरी 2026 जैसा वार होता है, पर 2032 लीप वर्ष है, इसलिए पूरा कैलेंडर नहीं मिलता। योग 14 पर अगला वर्ष 2037 साधारण है, इसलिए वहीं पूरा कैलेंडर दोहराता है।
6.1 एक ही वर्ष में समान कैलेंडर वाले महीने
| साधारण वर्ष | लीप वर्ष |
|---|---|
| जनवरी = अक्टूबर | जनवरी = अप्रैल = जुलाई |
| फरवरी = मार्च = नवंबर | फरवरी = अगस्त |
| अप्रैल = जुलाई | मार्च = नवंबर |
| सितंबर = दिसंबर | सितंबर = दिसंबर |
"समान कैलेंडर" का अर्थ है कि दोनों महीनों की 1 तारीख एक ही वार को पड़ती है। फरवरी और मार्च के दिन अलग होने से उनके महीने के अंत अलग होते हैं, पर तिथि-वार का मेल वही रहता है।
7. घड़ी: सुइयों के बीच कोण
7.1 सूत्र कहाँ से आता है
घंटे की सुई 12 घंटे में 360° घूमती है, यानी 30° प्रति घंटा और 0.5° प्रति मिनट। मिनट की सुई 60 मिनट में 360°, यानी 6° प्रति मिनट। H बजकर M मिनट पर घंटे की सुई 12 से (30H + 0.5M)° और मिनट की सुई 6M° पर है। अंतर = |30H + 0.5M − 6M| = |30H − 5.5M|।
| समय | गणना | कोण |
|---|---|---|
| 3:00 | |90 − 0| | 90° |
| 3:40 | |90 − 220| | 130° |
| 7:20 | |210 − 110| | 100° |
| 4:30 | |120 − 165| | 45° |
| 2:20 | |60 − 110| | 50° |
| 5:15 | |150 − 82.5| | 67.5° |
| 9:15 | |270 − 82.5| | 187.5° → 360 − 187.5 = 172.5° |
| 10:10 | |300 − 55| | 245° → 115° |
| 8:24 | |240 − 132| | 108° |
| 11:20 | |330 − 110| | 220° → 140° |
| 12:30 | H = 12 को 0 लें: |0 − 165| | 165° |
| 6:00 | |180 − 0| | 180° |
सूत्र से प्रायः छोटा (180° तक का) कोण पूछा जाता है। प्रश्न "बड़ा कोण" या "प्रतिवर्ती कोण" पूछे तो 360 − θ दें।
7.2 सुइयाँ कब मिलती हैं, विपरीत होती हैं, समकोण बनाती हैं
H और (H + 1) बजे के बीच, H बजकर M मिनट पर कोण θ हो, तो 30H − 5.5M = ±θ, यानी M = (60H ∓ 2θ)/11।
| स्थिति | H और H + 1 के बीच समय (H बजकर … मिनट) |
|---|---|
| सुइयाँ मिलती हैं (0°) | M = 60H/11 |
| विपरीत (180°) | M = (60H ± 360)/11, जो 0 से 60 के बीच हो |
| समकोण (90°) | M = (60H ± 180)/11, दोनों में से जो 0 से 60 के बीच हों |
उदाहरण 7: 4 और 5 बजे के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?
हल: M = 60 × 4/11 = 240/11 = 21 9/11 मिनट, यानी 4 बजकर 21 9/11 मिनट।
उदाहरण 8: 7 और 8 के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?
हल: M = 420/11 = 38 2/11 मिनट।
उदाहरण 9: 2 और 3 के बीच सुइयाँ कब विपरीत होंगी?
हल: M = (120 + 360)/11 = 480/11 = 43 7/11 मिनट (दूसरा मान (120 − 360)/11 ऋणात्मक है, अस्वीकार)।
उदाहरण 10: 8 और 9 के बीच सुइयाँ कब विपरीत होंगी?
हल: M = (480 − 360)/11 = 120/11 = 10 10/11 मिनट (दूसरा मान 840/11 = 76.4 है, जो 60 से अधिक है)।
उदाहरण 11: 3 और 4 के बीच सुइयाँ कब समकोण पर होंगी?
हल: M = (180 − 180)/11 = 0 (ठीक 3:00) और M = (180 + 180)/11 = 360/11 = 32 8/11 मिनट। ठीक 3:00 को प्रायः "3 और 4 के बीच" नहीं गिना जाता, इसलिए उत्तर 3 बजकर 32 8/11 मिनट।
उदाहरण 11 (क): 5 और 6 के बीच सुइयाँ किन दो समयों पर समकोण बनाएँगी?
हल: M = (300 − 180)/11 = 120/11 = 10 10/11 मिनट और M = (300 + 180)/11 = 480/11 = 43 7/11 मिनट। जाँच: 5 बजकर 120/11 मिनट पर |150 − 5.5 × 120/11| = |150 − 60| = 90° ✔।
7.3 12 और 24 घंटे में कितनी बार
| स्थिति | 12 घंटे में | 24 घंटे में | कारण |
|---|---|---|---|
| संपाती (मिलना) | 11 | 22 | 11 से 1 के बीच केवल एक बार (12:00 पर) मिलती हैं |
| विपरीत | 11 | 22 | 5 से 7 के बीच केवल एक बार (6:00 पर) |
| समकोण | 22 | 44 | 2 से 4 और 8 से 10 के बीच 3:00 और 9:00 साझा होते हैं |
| सीधी रेखा (0° + 180°) | 22 | 44 | 11 + 11 |
सुइयाँ हर 720/11 = 65 5/11 मिनट में एक बार मिलती हैं। इसलिए किसी घड़ी में सुइयाँ हर 65 मिनट में मिलें, तो वह घड़ी तेज़ है (सही घड़ी में यह अंतराल 65 5/11 मिनट है)।
8. दर्पण प्रतिबिंब और जल प्रतिबिंब
घड़ी को दर्पण में देखने पर (दर्पण घड़ी के बगल में खड़ा हो) दिखने वाला समय = 11:60 − वास्तविक समय। यदि समय 11:00 से 12:59 के बीच हो तो 23:60 − समय लें। यही नियम उलटा भी चलता है: दर्पण में दिखे समय से वास्तविक समय भी इसी से निकलता है।
| वास्तविक समय | गणना | दर्पण में |
|---|---|---|
| 3:25 | 11:60 − 3:25 | 8:35 |
| 10:50 | 11:60 − 10:50 | 1:10 |
| 8:15 | 11:60 − 8:15 | 3:45 |
| 2:40 | 11:60 − 2:40 | 9:20 |
| 6:10 | 11:60 − 6:10 | 5:50 |
| 4:35 | 11:60 − 4:35 | 7:25 |
| 12:20 | 23:60 − 12:20 | 11:40 |
| 11:45 | 23:60 − 11:45 | 12:15 |
जाँच: वास्तविक समय + दर्पण का समय = 12:00 (या 24:00)। जैसे 3:25 + 8:35 = 12:00।
जल प्रतिबिंब (घड़ी के नीचे पानी) में घड़ी ऊपर-नीचे उलटती है, बाएँ-दाएँ नहीं। इसके शॉर्टकट पुस्तकों में अलग-अलग ढंग से दिए जाते हैं, इसलिए यह नोट और क्विज़ केवल दर्पण प्रतिबिंब पर हैं, जो परीक्षा में अधिक आता है।
9. तेज़ और सुस्त घड़ी (Gaining / Losing clock)
तेज़ घड़ी सही समय से आगे भागती है, सुस्त घड़ी पीछे रहती है। एकसमान गति मानकर अनुपात लगाएँ।
उदाहरण 12: एक घड़ी हर घंटे 5 मिनट तेज़ चलती है। उसे सुबह 6 बजे सही मिलाया गया। सही समय शाम 6 बजे वह क्या दिखाएगी?
हल: 12 घंटे × 5 मिनट = 60 मिनट आगे → घड़ी शाम 7:00 दिखाएगी।
उदाहरण 13: एक घड़ी हर घंटे 2 मिनट सुस्त चलती है। सुबह 8 बजे सही मिलाई गई। सही समय शाम 6 बजे वह क्या दिखाएगी?
हल: 10 घंटे × 2 मिनट = 20 मिनट पीछे → शाम 5:40।
उदाहरण 14: एकसमान रूप से तेज़ चलने वाली एक घड़ी सोमवार दोपहर 12 बजे 2 मिनट पीछे थी और अगले सोमवार दोपहर 2 बजे 4 मिनट 48 सेकंड आगे थी। वह सही समय कब दिखा रही थी?
| चरण | गणना |
|---|---|
| कुल समय | सोमवार 12 बजे से अगले सोमवार 2 बजे = 7 दिन 2 घंटे = 170 घंटे |
| कुल बढ़त | 2 मिनट + 4.8 मिनट = 6.8 मिनट |
| सही होने के लिए बढ़त | 2 मिनट (पीछे से शून्य तक) |
| लगा समय | 170 × 2/6.8 = 50 घंटे |
| सही समय | सोमवार 12 बजे + 50 घंटे = बुधवार दोपहर 2 बजे |
10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: हर 4 से विभाज्य वर्ष को लीप मान लेना
1700, 1800, 1900 और 2100 लीप वर्ष नहीं हैं। शताब्दी वर्ष के लिए 400 से विभाज्यता देखें। 2000 और 2400 लीप हैं।
Trap 2: अगले वर्ष की उसी तिथि पर हमेशा +1
बीच में 29 फरवरी आए तो +2। 10 जनवरी 2028 से 10 जनवरी 2029 तक 29 फरवरी 2028 बीच में है, इसलिए +2; पर 10 मार्च 2028 से 10 मार्च 2029 तक नहीं, इसलिए +1।
Trap 3: "n दिन बाद" में आज को गिनना
"आज सोमवार है, 7 दिन बाद?" का उत्तर सोमवार है। "n दिन बाद" में n का शेष सीधे जोड़ें; आज को अलग से न गिनें।
Trap 4: कैलेंडर दोहराव में लीप-स्थिति न जाँचना
केवल 1 जनवरी का वार मिलना पर्याप्त नहीं; दोनों वर्ष एक ही प्रकार (लीप/साधारण) के होने चाहिए। 2026 के लिए 2032 का 1 जनवरी मेल खाता है, पर 2032 लीप है, इसलिए उत्तर 2037 है।
Trap 5: घड़ी के कोण में घंटे की सुई की चाल भूलना
3:40 पर घंटे की सुई ठीक 3 पर नहीं, 3 और 4 के बीच है। "40 मिनट = 8 खाने = 240° − 90° = 150°" गलत है; सही उत्तर |90 − 220| = 130° है।
Trap 6: 12 घंटे में सुइयाँ 12 बार मिलती हैं
गलत। 11 से 1 बजे के बीच वे केवल एक बार (12:00 पर) मिलती हैं, इसलिए 12 घंटे में 11 बार और 24 घंटे में 22 बार।
Trap 7: समकोण 24 घंटे में 48 बार
गलत। 12 घंटे में 22 बार (24 नहीं), क्योंकि 3:00 और 9:00 के समकोण दो अंतरालों में साझा होते हैं। 24 घंटे में 44 बार।
Trap 8: 11 और 12 बजे के बीच दर्पण समय
11:45 का दर्पण समय 11:60 − 11:45 = 0:15 लिखना गलत है; 23:60 − 11:45 = 12:15 लें।
11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| क्रम | प्रश्न / स्थिति | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | साधारण वर्ष के विषम दिन | 1 |
| 2 | लीप वर्ष के विषम दिन | 2 |
| 3 | 100 वर्ष के विषम दिन | 5 |
| 4 | 200 वर्ष | 3 |
| 5 | 300 वर्ष | 1 |
| 6 | 400 वर्ष | 0 |
| 7 | 100 वर्ष में लीप वर्ष | 24 |
| 8 | 400 वर्ष में लीप वर्ष | 97 |
| 9 | 31 दिन वाले महीने के विषम दिन | 3 |
| 10 | 30 दिन वाले महीने के विषम दिन | 2 |
| 11 | फरवरी (लीप) के विषम दिन | 1 |
| 12 | फरवरी (साधारण) के विषम दिन | 0 |
| 13 | 1900 लीप? | नहीं |
| 14 | 2000 लीप? | हाँ |
| 15 | 2100 लीप? | नहीं |
| 16 | शताब्दी का अंतिम दिन कभी नहीं | मंगल, गुरु, शनि |
| 17 | 31 दिसंबर 2000 | रविवार |
| 18 | 31 दिसंबर 1900 | सोमवार |
| 19 | 15 अगस्त 1947 | शुक्रवार |
| 20 | 26 जनवरी 1950 | गुरुवार |
| 21 | 1 जनवरी 2000 | शनिवार |
| 22 | 2 अक्टूबर 1869 | शनिवार |
| 23 | 1 जनवरी 2026 | गुरुवार |
| 24 | 26 जनवरी 2026 | सोमवार |
| 25 | सोमवार + 61 दिन | शनिवार |
| 26 | बुधवार + 100 दिन | शुक्रवार |
| 27 | लीप वर्ष का कैलेंडर दोहराव | 28 वर्ष बाद |
| 28 | लीप + 1 वर्ष | 6 वर्ष बाद |
| 29 | लीप + 2 या + 3 वर्ष | 11 वर्ष बाद |
| 30 | 2026 का कैलेंडर | 2037 |
| 31 | 2024 का कैलेंडर | 2052 |
| 32 | 2025 का कैलेंडर | 2031 |
| 33 | साधारण वर्ष में जनवरी के समान | अक्टूबर |
| 34 | साधारण वर्ष में फरवरी के समान | मार्च, नवंबर |
| 35 | लीप वर्ष में जनवरी के समान | अप्रैल, जुलाई |
| 36 | दोनों प्रकार में सितंबर के समान | दिसंबर |
| 37 | घंटे की सुई प्रति मिनट | 0.5° |
| 38 | मिनट की सुई प्रति मिनट | 6° |
| 39 | कोण सूत्र | |30H − 5.5M| |
| 40 | 3:40 पर कोण | 130° |
| 41 | 7:20 पर कोण | 100° |
| 42 | 4:30 पर कोण | 45° |
| 43 | 9:15 पर कोण | 172.5° |
| 44 | 4 और 5 के बीच सुइयाँ मिलती हैं | 4 बजकर 21 9/11 मिनट |
| 45 | 2 और 3 के बीच विपरीत | 2 बजकर 43 7/11 मिनट |
| 46 | 3 और 4 के बीच समकोण | 3 बजकर 32 8/11 मिनट |
| 47 | 24 घंटे में संपाती | 22 बार |
| 48 | 24 घंटे में समकोण | 44 बार |
| 49 | सही घड़ी में दो मिलानों के बीच अंतर | 65 5/11 मिनट |
| 50 | दर्पण नियम | 11:60 − समय |
| 51 | 3:25 का दर्पण | 8:35 |
| 52 | 10:50 का दर्पण | 1:10 |
12. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
नीचे हर ढाँचे का एक नमूना प्रश्न (स्वयं बनाया गया) है:
- दिनों की गिनती: "आज शुक्रवार है; 45 दिन बाद कौन-सा वार?" (45 ÷ 7 का शेष 3 → सोमवार)
- ऐतिहासिक तिथि: "15 अगस्त 1947 को कौन-सा वार था?" (विषम दिन 5 → शुक्रवार)
- लीप वर्ष: "इनमें से कौन-सा लीप वर्ष नहीं है: 2000, 2024, 1900, 2400?" (1900)
- कैलेंडर दोहराव: "2025 का कैलेंडर किस वर्ष दोहराएगा?" (लीप + 1 → 6 वर्ष → 2031)
- कोण: "8:24 पर सुइयों के बीच कोण?" (|240 − 132| = 108°)
- मिलना/विपरीत/समकोण: "7 और 8 के बीच सुइयाँ कब मिलेंगी?" (420/11 = 38 2/11 मिनट)
- दर्पण: "दर्पण में घड़ी 4:35 दिखाती है; वास्तविक समय?" (11:60 − 4:35 = 7:25)
रणनीति: वार वाले प्रश्नों में हर संख्या को तुरंत 7 से भाग देकर केवल शेष लिखें। घड़ी के प्रश्नों में सूत्र |30H − 5.5M| सीधे लगाएँ; "खाने गिनने" की विधि घंटे की सुई की चाल भूल जाती है।
13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. "5-3-1-0": 100, 200, 300, 400 वर्षों के विषम दिन।
2. "शुक्र-बुध-सोम-रवि": 5-3-1-0 के वार, यानी शताब्दी का अंतिम दिन। बाकी तीन (मंगल, गुरु, शनि) कभी नहीं।
3. "28-6-11-11": लीप वर्ष 28 बाद, लीप + 1 छह बाद, लीप + 2 और लीप + 3 ग्यारह बाद।
4. "तीस-साढ़े पाँच": कोण = 30 × घंटा − 5.5 × मिनट।
5. "11-11-22": 12 घंटे में मिलना 11, विपरीत 11, समकोण 22; 24 घंटे में दोगुना।
6. "ग्यारह साठ": दर्पण समय = 11:60 − समय; जाँच: दोनों का योग 12:00।
7. महीनों का मेल (साधारण वर्ष): "जन-अक्टू, फर-मार-नव, अप्रै-जुला, सित-दिस"।
14. कथन अभ्यास
साधारण वर्ष में 1 विषम दिन होता है। — सही
1900 एक लीप वर्ष था। — गलत (शताब्दी वर्ष को 400 से विभाज्य होना चाहिए; 1900 नहीं है)
400 वर्षों में विषम दिनों की संख्या 0 होती है। — सही
किसी शताब्दी का अंतिम दिन गुरुवार हो सकता है। — गलत (मंगल, गुरु और शनि कभी नहीं)
15 अगस्त 1947 को शुक्रवार था। — सही
लीप वर्ष का कैलेंडर 28 वर्ष बाद दोहराता है (बीच में अपवाद-शताब्दी न हो तो)। — सही
साधारण वर्ष में जनवरी और अक्टूबर का कैलेंडर एक जैसा होता है। — सही
12 घंटे में घड़ी की सुइयाँ 12 बार मिलती हैं। — गलत (11 बार)
24 घंटे में सुइयाँ 44 बार समकोण बनाती हैं। — सही
3:40 पर दोनों सुइयों के बीच कोण 150° होता है। — गलत (|90 − 220| = 130°)
घंटे की सुई हर मिनट में 0.5° घूमती है। — सही
दर्पण में 3:25 का प्रतिबिंब 9:35 दिखता है। — गलत (11:60 − 3:25 = 8:35)
15. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- विषम दिन = कुल दिन ÷ 7 का शेष।
- साधारण वर्ष 1, लीप वर्ष 2 विषम दिन।
- 100, 200, 300, 400 वर्ष → 5, 3, 1, 0 विषम दिन।
- लीप: 4 से विभाज्य; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य (2000 हाँ, 1900 नहीं)।
- 0 = रविवार, 1 = सोमवार … 6 = शनिवार।
- शताब्दी का अंतिम दिन मंगल, गुरु, शनि कभी नहीं।
- अगले वर्ष की वही तिथि: बीच में 29 फरवरी हो तो +2, वरना +1।
- कैलेंडर दोहराव: लीप 28, लीप + 1 छह, लीप + 2/+3 ग्यारह वर्ष बाद।
- दोहराव के लिए वार भी मिले और लीप-स्थिति भी।
- कोण = |30H − 5.5M|; 180 से अधिक हो तो 360 − θ।
- सुइयाँ मिलती हैं: H बजकर 60H/11 मिनट।
- 12 घंटे: मिलना 11, विपरीत 11, समकोण 22; 24 घंटे में 22, 22, 44।
- सही घड़ी में सुइयाँ हर 65 5/11 मिनट में मिलती हैं।
- दर्पण = 11:60 − समय; 11 से 12:59 के लिए 23:60 − समय।
- तेज़/सुस्त घड़ी: बढ़त समय के अनुपात में (एकसमान दर)।
16. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। वार वाले प्रश्नों में हर चरण पर 7 का शेष लिखें, और घड़ी वाले प्रश्नों में सूत्र लगाकर ही उत्तर चुनें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 5 (तिथि का वार), खंड 6 (कैलेंडर दोहराव) और खंड 7 (कोण) दोबारा पढ़ें। परीक्षा-स्तर के अभ्यास के लिए रीज़निंग मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 या राजस्थान CET (12वीं) मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।
17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
कैलेंडर का पूरा अध्याय एक विचार पर चलता है: पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते, केवल विषम दिन बदलते हैं। 1 और 2 (वर्ष), 5-3-1-0 (शताब्दियाँ) और लीप वर्ष का 400 वाला नियम याद हो तो किसी भी तिथि का वार निकल आता है। घड़ी का अध्याय सापेक्ष चाल 5.5° प्रति मिनट पर टिका है; कोण, मिलना, विपरीत और समकोण सब इसी से निकलते हैं। दर्पण के लिए 11:60 का नियम और तेज़-सुस्त घड़ी के लिए सीधा अनुपात पर्याप्त है।
साधारण 1, लीप 2 | 5-3-1-0 | शताब्दी 400 से भाग तो लीप | 0 = रविवार | कोण = |30H − 5.5M| | 12 घंटे: 11-11-22 | दर्पण = 11:60 − समय

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
किसी अवधि के कुल दिनों को 7 से भाग देने पर जो शेष बचे, उसे विषम दिन कहते हैं। पूरे सप्ताह वार नहीं बदलते, केवल विषम दिन वार को आगे खिसकाते हैं।
100 वर्षों में 5, 200 में 3, 300 में 1 और 400 वर्षों में 0 विषम दिन होते हैं। इसे '5-3-1-0' के रूप में याद रखें।
जो वर्ष 4 से विभाज्य हो वह लीप वर्ष है, पर शताब्दी वर्ष (00 पर समाप्त) तभी लीप है जब वह 400 से विभाज्य हो। इसलिए 2000 लीप था, पर 1900 और 2100 नहीं।
15 अगस्त 1947 को शुक्रवार था। विषम दिन: 1600 वर्ष में 0, 1601–1900 में 1, 1901–1946 में 1 और 1947 में 15 अगस्त तक 3, कुल 5 = शुक्रवार।
लीप वर्ष का कैलेंडर 28 वर्ष बाद, लीप वर्ष के ठीक बाद वाले वर्ष का 6 वर्ष बाद, और लीप + 2 या लीप + 3 वर्ष का 11 वर्ष बाद दोहराता है। बीच में 2100 जैसा गैर-लीप शताब्दी वर्ष हो तो सीधे गिनें।
H बजकर M मिनट पर कोण = |30H − 5.5M|। उत्तर 180° से अधिक आए तो छोटा कोण पाने के लिए 360 से घटाएँ।
12 घंटे में सुइयाँ 11 बार मिलती हैं, इसलिए 24 घंटे में 22 बार। विपरीत भी 22 बार होती हैं और समकोण 44 बार बनाती हैं।
दर्पण में दिखने वाला समय = 11:60 − वास्तविक समय। यदि समय 11:00 से 12:59 के बीच हो तो 23:60 − समय लें; जैसे 3:25 का प्रतिबिंब 8:35 है।
शताब्दी का अंतिम दिन केवल शुक्रवार, बुधवार, सोमवार या रविवार हो सकता है। मंगलवार, गुरुवार और शनिवार कभी नहीं।
साधारण वर्ष में जनवरी-अक्टूबर, फरवरी-मार्च-नवंबर, अप्रैल-जुलाई और सितंबर-दिसंबर का कैलेंडर एक जैसा होता है। लीप वर्ष में जनवरी-अप्रैल-जुलाई, फरवरी-अगस्त, मार्च-नवंबर और सितंबर-दिसंबर।
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