मारवाड़ राजवंश — राव उदयसिंह "मोटा राजा": मुगल-राजपूत गठबंधन के शिल्पकार (RPSC विशेष)

यह लेख श्रृंखला की चौथी कड़ी है। इससे पहले राव जोधा (जोधपुर की स्थापना), राव मालदेव (मारवाड़ का स्वर्णकाल) और राव चंद्रसेन (मुगल-प्रतिरोध, "मारवाड़ का प्रताप") पर प्रकाशित लेख पढ़ना अत्यंत उपयोगी रहेगा, क्योंकि राव उदयसिंह उन्हीं की एक समानांतर किंतु विपरीत दिशा वाली कहानी प्रस्तुत करते हैं।
प्रस्तावना: वह राठौड़ जिसने तलवार की जगह कूटनीति चुनी
पिछले लेख में हमने पढ़ा कि राव चंद्रसेन ने मुगल अधीनता अस्वीकार कर वर्षों तक जंगलों में संघर्ष किया। किंतु उसी परिवार में, उसी पीढ़ी में, एक और राठौड़ राजकुमार था जिसने बिल्कुल विपरीत मार्ग चुना — राव उदयसिंह, जिन्हें इतिहास में "मोटा राजा" के नाम से जाना जाता है।
राव उदयसिंह की कहानी राव चंद्रसेन की कहानी की "काउंटर-नैरेटिव" (प्रति-कथा) है। जहाँ चंद्रसेन ने स्वाभिमान के लिए सिंहासन त्याग दिया, वहीं उदयसिंह ने कूटनीतिक समझौते के माध्यम से न केवल जोधपुर की गद्दी पुनः प्राप्त की, बल्कि मारवाड़ को मुगल साम्राज्य के भीतर सर्वाधिक सम्मानित राजपूत रियासतों में से एक बना दिया। उनकी पुत्री का विवाह मुगल राजकुमार सलीम (जहाँगीर) से हुआ, और उनकी नातिन की संतान आगे चलकर मुगल सिंहासन पर बैठी — यह तथ्य राव उदयसिंह को मुगल-राजपूत संबंधों के इतिहास का एक केंद्रीय पात्र बना देता है।
RPSC, RAS, RSMSSB, पटवारी और REET परीक्षाओं में राव उदयसिंह, मुगल-राठौड़ वैवाहिक गठबंधन, और जगत गोसाईं (जोधाबाई) से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में हम राव उदयसिंह के प्रारंभिक जीवन, अकबर से समझौते, वैवाहिक कूटनीति, प्रशासनिक योगदान, और परीक्षा-दृष्टि से महत्वपूर्ण हर बिंदु को विस्तार से समझेंगे।
1. राव उदयसिंह: जन्म, वंश-परंपरा और "मोटा राजा" उपाधि
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | राव उदयसिंह राठौड़ |
| उपाधि | "मोटा राजा" |
| वंश | राठौड़ वंश (मारवाड़), राव मालदेव के पुत्र |
| पिता | राव मालदेव |
| सौतेला भाई | राव चंद्रसेन |
| शासनकाल | लगभग 1583 ई. – 1595 ई. |
| प्रमुख उपलब्धि | मुगल अधीनता स्वीकार कर जोधपुर की गद्दी पुनः प्राप्त करना, मुगल-राठौड़ वैवाहिक गठबंधन |
| पुत्री | जगत गोसाईं (जोधाबाई/जोधबाई) — मुगल राजकुमार सलीम (जहाँगीर) की पत्नी |
| उत्तराधिकारी | राव सूरसिंह |
राव उदयसिंह को "मोटा राजा" की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके संदर्भ में इतिहासकारों में दो मत प्रचलित हैं — एक मत के अनुसार यह उनके शारीरिक स्वरूप (स्थूल काया) के कारण दिया गया उपनाम था, जबकि दूसरा मत इसे उनकी "बड़प्पन" अथवा उदार व्यक्तित्व से जोड़ता है। दोनों ही व्याख्याएँ RPSC अध्ययन सामग्री में मिलती हैं, अतः परीक्षा में दोनों दृष्टिकोणों का उल्लेख करना सुरक्षित रहता है।
शिक्षक टिप्पणी: "मोटा राजा" उपनाम को हल्के में न लें — यह वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में सीधे पूछा जाता है: "राव उदयसिंह को किस उपनाम से जाना जाता है?" इसका सटीक उत्तर याद रखें, साथ ही इसके दोनों संभावित अर्थ भी नोट कर लें।
2. राव चंद्रसेन बनाम राव उदयसिंह: प्रारंभिक पारिवारिक संघर्ष
राव मालदेव की मृत्यु (1562 ई.) के पश्चात मारवाड़ में उत्तराधिकार को लेकर जो आंतरिक कलह उत्पन्न हुई थी, उसका केंद्र यही दोनों सौतेले भाई थे। प्रारंभ में राव चंद्रसेन को गद्दी प्राप्त हुई, किंतु राव उदयसिंह और परिवार की अन्य शाखाओं के साथ संबंध सामान्य नहीं रहे।
जब अकबर ने मारवाड़ पर सैन्य दबाव बनाया और 1565 ई. में जोधपुर पर अधिकार कर लिया, तब यही राजनीतिक शून्यता राव उदयसिंह के लिए एक अवसर बनी। उन्होंने प्रत्यक्ष सैन्य प्रतिरोध की बजाय मुगल दरबार से निकटता बनाने की रणनीति अपनाई — यह निर्णय आगे चलकर उनके और उनके पूरे वंश के भविष्य के लिए निर्णायक सिद्ध हुआ।
एग्जाम ट्रैप: कई विद्यार्थी यह समझ बैठते हैं कि राव उदयसिंह ने राव चंद्रसेन से गद्दी "छीनी" थी। वास्तविकता अधिक जटिल है — जोधपुर पहले ही (1565 ई. में) मुगल नियंत्रण में जा चुका था; राव उदयसिंह ने गद्दी चंद्रसेन से नहीं, बल्कि मुगल दरबार के माध्यम से, मुगल-अनुमोदन से प्राप्त की। यह भेद परीक्षा में सटीक उत्तर हेतु आवश्यक है।
3. अकबर से समझौता: मारवाड़ की मुगल-अधीनता
राव उदयसिंह ने लगभग 1583 ई. के आसपास औपचारिक रूप से मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार की। इस समझौते के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान सम्मिलित थे:
- जोधपुर की गद्दी की पुनर्स्थापना — राव उदयसिंह को मुगल-समर्थन से जोधपुर पर शासन करने का अधिकार प्राप्त हुआ, यद्यपि यह अधिकार मुगल अधीनता की शर्त पर आधारित था।
- मनसबदारी प्रणाली में सम्मिलन — राव उदयसिंह को मुगल दरबार की मनसबदारी व्यवस्था में उच्च पद प्रदान किया गया, जिससे वे मुगल सैन्य-प्रशासनिक ढाँचे का औपचारिक हिस्सा बन गए।
- वैवाहिक गठबंधन — सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान था राव उदयसिंह की पुत्री का विवाह मुगल राजकुमार सलीम (आगे चलकर सम्राट जहाँगीर) से करना।
| समझौते का पहलू | परिणाम |
|---|---|
| राजनीतिक | जोधपुर पर पुनः राठौड़ शासन, किंतु मुगल अधीनता में |
| सैन्य | मुगल सेना में उच्च पद, विभिन्न मुगल अभियानों में सहभागिता |
| वैवाहिक | पुत्री जगत गोसाईं का विवाह सलीम (जहाँगीर) से |
| आर्थिक | जागीर व्यवस्था के अंतर्गत स्थिर राजस्व-स्रोत |
4. जगत गोसाईं (जोधाबाई): मुगल-राठौड़ संबंधों की केंद्रीय कड़ी
राव उदयसिंह की पुत्री, जिन्हें इतिहास में जगत गोसाईं, जोधाबाई अथवा जोधबाई के नामों से जाना जाता है, का विवाह मुगल राजकुमार सलीम (जहाँगीर) से हुआ। यह वैवाहिक संबंध मुगल-राजपूत राजनीति के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।
परीक्षा-प्रासंगिक तथ्य
- जगत गोसाईं के गर्भ से राजकुमार खुर्रम का जन्म हुआ, जो आगे चलकर मुगल सम्राट शाहजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
- इस प्रकार राव उदयसिंह, मुगल सम्राट शाहजहाँ के नाना (मातृ-पक्ष के दादा) थे — यह वंशावली-संबंध परीक्षा में अत्यंत बार-बार पूछा जाता है।
- जगत गोसाईं को मरणोपरांत उपाधि "बिलकिस मकानी" प्रदान की गई थी (स्रोत-भिन्नता सहित)।
एग्जाम ट्रैप — अत्यंत महत्वपूर्ण: "जोधाबाई" नाम को लेकर परीक्षा में सबसे बड़ी भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, क्योंकि यह नाम कभी-कभी अकबर की पत्नी (आमेर/जयपुर की कछवाहा राजकुमारी, जिन्हें मरियम-उज़-ज़मानी भी कहा जाता है) से जोड़ दिया जाता है। ध्यान रखें — मारवाड़ की जोधाबाई (जगत गोसाईं), राव उदयसिंह की पुत्री थीं और उनका विवाह सलीम/जहाँगीर से हुआ था, न कि अकबर से। यह दोनों अलग-अलग राजकुमारियाँ हैं, अलग-अलग वंश (राठौड़ बनाम कछवाहा) से, और अलग-अलग मुगल सम्राटों से विवाहित थीं। यह भेद स्पष्ट रूप से याद रखें, क्योंकि यह राजस्थान इतिहास की सबसे आम परीक्षा-त्रुटियों में से एक है।
मेमोरी ट्रिक: "राठौड़ की जोधा ब्याही सलीम को, कछवाहा की ब्याही अकबर को" — यह सरल पंक्ति दोनों वैवाहिक संबंधों को वंश और मुगल सम्राट के आधार पर स्पष्ट रूप से अलग रखने में सहायक है।
5. राव उदयसिंह की मुगल सेवा और सैन्य भूमिका
मुगल दरबार में सम्मिलित होने के पश्चात राव उदयसिंह ने विभिन्न मुगल सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत उन्हें उच्च सैन्य पद प्राप्त हुआ, और वे अकबर के दरबार के प्रभावशाली राजपूत सरदारों में गिने जाने लगे — उसी श्रेणी में जिसमें आमेर के राजा मानसिंह जैसे व्यक्तित्व शामिल थे।
यह स्थिति राव चंद्रसेन के जीवन से पूर्णतः विपरीत थी — जहाँ चंद्रसेन को शरणार्थी जीवन व्यतीत करना पड़ा, वहीं उदयसिंह मुगल साम्राज्य के भीतर सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि का जीवन जी रहे थे।
शिक्षक की एग्जाम रणनीति: यदि प्रश्न-पत्र में "मुगल-राजपूत सहयोग नीति के लाभ एवं हानि" जैसा वर्णनात्मक प्रश्न आए, तो राव उदयसिंह के उदाहरण को "लाभ" पक्ष में और राव चंद्रसेन के उदाहरण को "स्वाभिमान बनाम राजनीतिक हानि" के पक्ष में प्रस्तुत करना एक प्रभावी उत्तर-रणनीति है।
6. राव उदयसिंह बनाम राव चंद्रसेन — विस्तृत तुलनात्मक तालिका
RPSC परीक्षाओं में यह तुलना सर्वाधिक लोकप्रिय प्रश्न-प्रकारों में से एक है, इसलिए इसे तालिका रूप में विस्तार से समझें:
| बिंदु | राव चंद्रसेन | राव उदयसिंह (मोटा राजा) |
|---|---|---|
| मुगल नीति | अधीनता अस्वीकार, आजीवन संघर्ष | अधीनता स्वीकार, कूटनीतिक गठबंधन |
| सिंहासन की स्थिति | जोधपुर से बेदखल, शरणार्थी जीवन | मुगल-समर्थन से जोधपुर पुनः प्राप्त |
| वैवाहिक नीति | ज्ञात मुगल-वैवाहिक गठबंधन नहीं | पुत्री का विवाह सलीम (जहाँगीर) से |
| आर्थिक स्थिति | घोर आर्थिक तंगी | जागीर व मनसब से स्थिर राजस्व |
| मृत्यु | 1581 ई., संघर्षरत अवस्था में | 1595 ई. (अनुमानित), सम्मानजनक स्थिति में |
| ऐतिहासिक उपाधि | "मारवाड़ का प्रताप" | "मोटा राजा" |
| वंश-निरंतरता | उत्तराधिकार सीमित प्रभाव वाला | पुत्र राव सूरसिंह के माध्यम से सुदृढ़ वंश-निरंतरता, तथा नाती शाहजहाँ मुगल सम्राट बने |
मेमोरी ट्रिक: "चंद्रसेन ने खोया राज, उदयसिंह ने पाया ताज (मुगल-समर्थित)" — यह तुकबंदी दोनों भाइयों के विपरीत भाग्य को स्मरण रखने में सहायक है।
7. राव उदयसिंह के प्रशासनिक व सांस्कृतिक योगदान
राव उदयसिंह के शासनकाल में मारवाड़ को मुगल अधीनता के अंतर्गत एक प्रकार की स्थिरता प्राप्त हुई, जिसके फलस्वरूप निम्नलिखित सकारात्मक परिवर्तन देखे गए:
- राजस्व-व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: मुगल प्रशासनिक ढाँचे से जुड़ाव के कारण मारवाड़ में भी अपेक्षाकृत संगठित राजस्व-संग्रहण प्रणाली विकसित हुई।
- व्यापारिक सुरक्षा: मुगल साम्राज्य के अंतर्गत होने से मारवाड़ के व्यापारिक मार्गों को अधिक सुरक्षा प्राप्त हुई, जिससे स्थानीय व्यापार को बल मिला।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: मुगल दरबार से निकटता के कारण मारवाड़ की स्थापत्य, वस्त्र व सांस्कृतिक परंपराओं में मुगल प्रभाव के मिश्रित तत्व दिखाई देने लगे — यह परिवर्तन आगे चलकर राजस्थानी-मुगल मिश्रित स्थापत्य शैली (जैसा आगामी शताब्दियों की हवेलियों व महलों में स्पष्ट दिखता है) की नींव बना।
8. राव उदयसिंह का उत्तराधिकार
राव उदयसिंह के पश्चात मारवाड़ की गद्दी पर उनके पुत्र राव सूरसिंह आसीन हुए, जिन्होंने भी मुगल-सहयोग की नीति को जारी रखा। इस प्रकार राव उदयसिंह द्वारा स्थापित मुगल-राठौड़ गठबंधन की परंपरा आगामी दशकों तक मारवाड़ की राजनीतिक दिशा निर्धारित करती रही, जब तक कि औरंगजेब के काल में महाराजा जसवंत सिंह प्रथम व अजीत सिंह के समय पुनः तनावपूर्ण संबंधों का दौर नहीं आया — यह विषय श्रृंखला की आगामी कड़ियों में विस्तार से पढ़ा जाएगा।
9. मारवाड़ राठौड़ वंश की वंशावली — अद्यतन झलक
| क्रम | शासक | कार्यकाल (अनुमानित) | विशेष योगदान |
|---|---|---|---|
| 1 | राव जोधा | 1438–1489 ई. | जोधपुर व मेहरानगढ़ की स्थापना |
| 2 | राव मालदेव | 1532–1562 ई. | मारवाड़ का अधिकतम विस्तार, गिरी सुमेल युद्ध |
| 3 | राव चंद्रसेन | 1562–1581 ई. | मुगल-प्रतिरोध, "मारवाड़ का प्रताप" |
| 4 | राव उदयसिंह (मोटा राजा) | 1583–1595 ई. | मुगल-राठौड़ गठबंधन, जोधाबाई विवाह |
| 5 | राव सूरसिंह | उदयसिंह के पश्चात | मुगल-सहयोग नीति की निरंतरता |
सलाह: उपरोक्त तिथियाँ सामान्य संदर्भ हेतु हैं। सटीक वर्षों की पुष्टि हेतु कृपया RPSC सिलेबस से संबद्ध राजस्थान इतिहास की मानक पुस्तकों से क्रॉस-वेरिफाई अवश्य करें।
10. PYQ अभ्यास खंड (15+ प्रश्न, उत्तर व व्याख्या सहित)
प्रश्न 1. राव उदयसिंह के पिता कौन थे? (अ) राव जोधा (ब) राव मालदेव (स) राव चंद्रसेन (द) राव सातल उत्तर: (ब) राव मालदेव
प्रश्न 2. राव उदयसिंह को किस उपनाम से जाना जाता है? (अ) मारवाड़ का प्रताप (ब) मोटा राजा (स) मारवाड़ का अकबर (द) कोई नहीं उत्तर: (ब) मोटा राजा
प्रश्न 3. राव उदयसिंह ने अकबर की अधीनता किस वर्ष के आसपास स्वीकार की? (अ) 1565 ई. (ब) 1576 ई. (स) 1583 ई. (द) 1597 ई. उत्तर: (स) 1583 ई.
प्रश्न 4. राव उदयसिंह की पुत्री का विवाह किससे हुआ? (अ) अकबर (ब) सलीम (जहाँगीर) (स) हुमायूँ (द) औरंगजेब उत्तर: (ब) सलीम (जहाँगीर)
प्रश्न 5. राव उदयसिंह की पुत्री का प्रचलित नाम क्या था? (अ) मरियम-उज़-ज़मानी (ब) जगत गोसाईं (जोधाबाई) (स) नूरजहाँ (द) मुमताज महल उत्तर: (ब) जगत गोसाईं (जोधाबाई)
प्रश्न 6. जगत गोसाईं (जोधाबाई) के पुत्र आगे चलकर किस मुगल सम्राट के नाम से प्रसिद्ध हुए? (अ) जहाँगीर (ब) शाहजहाँ (स) औरंगजेब (द) अकबर उत्तर: (ब) शाहजहाँ
प्रश्न 7. राव उदयसिंह, मुगल सम्राट शाहजहाँ के किस संबंधी थे? (अ) पिता (ब) नाना (मातृ-पक्ष के दादा) (स) चाचा (द) कोई संबंध नहीं उत्तर: (ब) नाना (मातृ-पक्ष के दादा)
प्रश्न 8. अकबर की पत्नी, जिन्हें कभी-कभी गलती से "जोधाबाई" कहा जाता है, वास्तव में किस वंश की राजकुमारी थीं? (अ) राठौड़ (ब) कछवाहा (आमेर) (स) सिसोदिया (द) भाटी उत्तर: (ब) कछवाहा (आमेर)
प्रश्न 9. राव उदयसिंह के पश्चात मारवाड़ की गद्दी पर कौन बैठा? (अ) राव चंद्रसेन (ब) राव सूरसिंह (स) राव मालदेव (द) राव जोधा उत्तर: (ब) राव सूरसिंह
प्रश्न 10. राव उदयसिंह ने जोधपुर की गद्दी किस प्रकार पुनः प्राप्त की? (अ) युद्ध जीतकर (ब) मुगल-समर्थन व अधीनता स्वीकार कर (स) चंद्रसेन से छीनकर सीधे युद्ध द्वारा (द) कोई नहीं उत्तर: (ब) मुगल-समर्थन व अधीनता स्वीकार कर
प्रश्न 11. राव उदयसिंह को मुगल दरबार की किस व्यवस्था में उच्च पद प्राप्त हुआ? (अ) मनसबदारी व्यवस्था (ब) जागीरदारी (केवल) (स) सूबेदारी (द) कोई नहीं उत्तर: (अ) मनसबदारी व्यवस्था
प्रश्न 12. राव चंद्रसेन और राव उदयसिंह में क्या संबंध था? (अ) पिता-पुत्र (ब) सौतेले भाई (स) चाचा-भतीजा (द) कोई संबंध नहीं उत्तर: (ब) सौतेले भाई
प्रश्न 13. राव उदयसिंह की मृत्यु लगभग किस वर्ष हुई? (अ) 1581 ई. (ब) 1583 ई. (स) 1595 ई. (द) 1605 ई. उत्तर: (स) 1595 ई. (अनुमानित)
प्रश्न 14. मुगल-राजपूत वैवाहिक गठबंधन नीति को सबसे पहले किस राजपूत वंश ने अपनाया, जिसका अनुसरण आगे चलकर राव उदयसिंह ने भी किया? (अ) सिसोदिया (मेवाड़) (ब) कछवाहा (आमेर) (स) भाटी (जैसलमेर) (द) चौहान उत्तर: (ब) कछवाहा (आमेर)
प्रश्न 15. राव उदयसिंह किस वंश से संबंधित थे? (अ) कछवाहा (ब) राठौड़ (स) सिसोदिया (द) भाटी उत्तर: (ब) राठौड़
प्रश्न 16. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है? (अ) राव चंद्रसेन ने मुगल अधीनता स्वीकार की, राव उदयसिंह ने नहीं (ब) राव उदयसिंह ने मुगल अधीनता स्वीकार की, राव चंद्रसेन ने नहीं (स) दोनों ने मुगल अधीनता स्वीकार की (द) दोनों ने मुगल अधीनता अस्वीकार की उत्तर: (ब) राव उदयसिंह ने मुगल अधीनता स्वीकार की, राव चंद्रसेन ने नहीं
प्रश्न 17. राव उदयसिंह के समय मारवाड़ की गद्दी किस नगर में स्थित थी? (अ) मंडोर (ब) जोधपुर (स) नागौर (द) मेड़ता उत्तर: (ब) जोधपुर
निष्कर्ष
राव उदयसिंह "मोटा राजा" की कहानी हमें राजस्थान के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण किंतु प्रायः कम चर्चित पहलू दिखाती है — यह प्रश्न कि क्या प्रतिरोध ही एकमात्र सम्मानजनक मार्ग था, या कूटनीतिक सहयोग भी राज्य व प्रजा के दीर्घकालिक हित में उतना ही मूल्यवान हो सकता था। राव उदयसिंह ने अपनी वंश-परंपरा को न केवल जीवित रखा, बल्कि अपनी पुत्री के माध्यम से मुगल सिंहासन तक राठौड़ रक्त की पहुँच सुनिश्चित की — शाहजहाँ जैसे शक्तिशाली मुगल सम्राट के नाना होने का गौरव राजस्थान के किसी अन्य राजपूत शासक को कम ही प्राप्त हुआ।
राव चंद्रसेन और राव उदयसिंह — दोनों भाइयों की कहानियाँ मिलकर मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सबसे समृद्ध तुलनात्मक अध्ययनों में से एक प्रस्तुत करती हैं, जो RPSC परीक्षाओं में वर्णनात्मक व विश्लेषणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों के लिए अत्यंत उपयोगी विषय-वस्तु है।
अगला अध्ययन सुझाव: इस श्रृंखला की अगली स्वाभाविक कड़ी "महाराजा जसवंत सिंह प्रथम — औरंगजेब काल में मारवाड़" अथवा "बीकानेर का इतिहास — राव बीका" हो सकती है, जिससे राठौड़ वंश की संपूर्ण कहानी (जोधा → मालदेव → चंद्रसेन/उदयसिंह → आगामी पीढ़ियाँ) पाठक के लिए पूर्ण हो जाएगी।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
इतिहासकारों में इस उपनाम को लेकर दो मत हैं — एक मत इसे उनके स्थूल शारीरिक स्वरूप से जोड़ता है, जबकि दूसरा मत इसे उनके उदार व्यक्तित्व से जोड़ता है।
राव उदयसिंह और राव चंद्रसेन दोनों राव मालदेव की संतान थे और सौतेले भाई थे, किंतु दोनों की मुगलों के प्रति नीति पूर्णतः विपरीत थी।
राव उदयसिंह की पुत्री जगत गोसाईं (जोधाबाई) का विवाह मुगल राजकुमार सलीम (जहाँगीर) से हुआ, और उनके पुत्र आगे चलकर मुगल सम्राट शाहजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
नहीं, यह दो अलग-अलग राजकुमारियाँ थीं — राव उदयसिंह की पुत्री (राठौड़ वंश) का विवाह सलीम/जहाँगीर से हुआ था, जबकि अकबर की पत्नी आमेर के कछवाहा वंश की राजकुमारी थीं।
राव उदयसिंह के पश्चात उनके पुत्र राव सूरसिंह मारवाड़ की गद्दी पर बैठे, जिन्होंने मुगल-सहयोग की नीति को जारी रखा।