राजस्थान में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस: 4 बेसिन, मंगला, पचपदरा — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: राजस्थान में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस के भंडार मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान की अवसादी (sedimentary) चट्टानों में हैं। राज्य के पेट्रोलियम विभाग के अनुसार राज्य में 4 पेट्रोलियम बेसिन हैं — बाड़मेर-सांचौर बेसिन, जैसलमेर बेसिन, बीकानेर-नागौर बेसिन और विंध्यन बेसिन, जो मिलकर लगभग 1.5 लाख वर्ग किमी में फैले बताए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बाड़मेर-सांचौर बेसिन है, जहाँ केयर्न एनर्जी (Cairn) ने जनवरी 2004 में मंगला तेल क्षेत्र खोजा और 29 अगस्त 2009 को इससे वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ। इसी ब्लॉक (RJ-ON-90/1; Cairn, अब Vedanta 70% : ONGC 30%) में भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती तेल क्षेत्र और रागेश्वरी गैस क्षेत्र हैं। जैसलमेर बेसिन मुख्यतः प्राकृतिक गैस का क्षेत्र है (OIL, ONGC, Focus Energy — शाहगढ़ उप-बेसिन), जिसकी गैस रामगढ़ गैस तापीय बिजलीघर को मिलती है। बीकानेर-नागौर बेसिन में भारी तेल (heavy oil) — बाघेवाला (OIL); विंध्यन बेसिन अभी अन्वेषण अवस्था में है। बाड़मेर का कच्चा तेल गरम (heated) मंगला–भोगत पाइपलाइन से गुजरात तट तक जाता है। पचपदरा (बालोतरा) में HPCL राजस्थान रिफाइनरी (HRRL) — HPCL 74% : राज्य सरकार 26%, क्षमता 9 MMTPA, शिलान्यास 2013, कार्यारंभ 2018। स्थलीय (onshore) कच्चे तेल उत्पादन में राजस्थान को पिछले दशक में प्रायः देश का अग्रणी राज्य बताया गया है।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | तथ्य | परीक्षा-टिप्पणी |
|---|---|---|
पेट्रोलियम बेसिन | 4 — बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर, विंध्यन | "4 बेसिन" सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य |
कुल संभावित क्षेत्र | लगभग 1.5 लाख वर्ग किमी (अनुमानित) | स्रोतों में आँकड़ा थोड़ा भिन्न |
सबसे उत्पादक बेसिन | बाड़मेर-सांचौर बेसिन | राज्य का लगभग पूरा कच्चा तेल यहीं से |
सबसे बड़ा तेल क्षेत्र | मंगला (बाड़मेर) | खोज जनवरी 2004 — Cairn |
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ | 29 अगस्त 2009 | उद्घाटन — प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह |
प्रमुख ब्लॉक | RJ-ON-90/1 | Cairn/Vedanta 70% : ONGC 30% |
अन्य क्षेत्र (बाड़मेर) | भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी (गैस) | रागेश्वरी = गैस/कंडेन्सेट |
जैसलमेर बेसिन | मुख्यतः प्राकृतिक गैस | तनोट, डांडेवाला, मणिहारी टिब्बा क्षेत्र; शाहगढ़ उप-बेसिन |
बीकानेर-नागौर बेसिन | भारी तेल (heavy oil) | बाघेवाला — OIL |
विंध्यन बेसिन | पूर्वी/दक्षिण-पूर्वी राजस्थान | अन्वेषण अवस्था; वाणिज्यिक उत्पादन नहीं |
पाइपलाइन | मंगला–भोगत (गुजरात) | विश्व की लंबी लगातार गरम पाइपलाइनों में गिनी जाती है |
रिफाइनरी | HPCL राजस्थान रिफाइनरी, पचपदरा (बालोतरा) | HPCL 74% : राज्य 26%; 9 MMTPA |
रिफाइनरी शिलान्यास / कार्यारंभ | 2013 / जनवरी 2018 | दो अलग तिथियाँ — भ्रम से बचें |
गैस आधारित बिजली | रामगढ़ (जैसलमेर), धौलपुर, अंता (बारां — NTPC) | रामगढ़ को स्थानीय गैस; धौलपुर व अंता को पाइपलाइन गैस |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के "राजस्थान का भूगोल — खनिज एवं ऊर्जा संसाधन" खंड में पेट्रोलियम एक स्वतंत्र उप-विषय है। राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी, VDO और SI में इससे सीधे एक-पंक्ति प्रश्न आते हैं — "मंगला तेल क्षेत्र किस जिले में है?", "पचपदरा रिफाइनरी में राज्य की हिस्सेदारी?", "बाघेवाला किस प्रकार के तेल के लिए जाना जाता है?"। सामान्य खनिजों (जस्ता, सीसा, तांबा, जिप्सम) का जिलावार विवरण राजस्थान की खनिज संपदा नोट में है और समग्र ऊर्जा परिदृश्य राजस्थान की ऊर्जा परियोजनाएँ में; यह नोट केवल तेल व प्राकृतिक गैस का गहन अध्ययन है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — बेसिन, रिफाइनरी, राज्य की अर्थव्यवस्था में पेट्रोलियम का योगदान, पर्यावरणीय प्रभाव
राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) — तेल क्षेत्र–जिला–कंपनी मिलान, खोज/उत्पादन वर्ष
पटवारी, VDO, SI — एक-पंक्ति तथ्य: मंगला, भाग्यम, बाघेवाला, शाहगढ़, पचपदरा
REET — राजस्थान भूगोल (सामान्य अध्ययन) भाग
RAS मुख्य — "बाड़मेर में तेल खोज का क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव" जैसे विश्लेषणात्मक प्रश्न
प्रश्न कैसे आते हैं?
"राजस्थान के पेट्रोलियम बेसिनों की संख्या/नाम" — सीधा प्रश्न
तेल/गैस क्षेत्र — जिला — कंपनी का सुमेलन
"मंगला से वाणिज्यिक उत्पादन कब शुरू हुआ?" — वर्ष आधारित
HPCL रिफाइनरी — स्थान, हिस्सेदारी, क्षमता
कथन-आधारित — "विंध्यन बेसिन से वाणिज्यिक उत्पादन हो रहा है" (गलत)
गैस आधारित बिजलीघर — गैस का स्रोत
3. पृष्ठभूमि: राजस्थान में तेल-गैस क्यों मिलता है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं, जो करोड़ों वर्ष पहले समुद्री व झीलीय वातावरण में जमा सूक्ष्म जीवों और वनस्पतियों के अवशेषों से, ऊँचे ताप व दाब में बने। ये केवल अवसादी चट्टानों में मिलते हैं — आग्नेय या कायांतरित चट्टानों में नहीं। राजस्थान का पश्चिमी भाग (थार) भूगर्भीय अतीत में बार-बार समुद्र व अवसादी द्रोणियों (basins) से ढका रहा। इसलिए अरावली के पश्चिम में मोटी अवसादी परतें मिलती हैं, जिनमें तेल-गैस, लिग्नाइट, जिप्सम और चूना पत्थर जैसे अवसादी खनिज साथ-साथ पाए जाते हैं। थार की भू-आकृति और उसकी उत्पत्ति थार मरुस्थल नोट में विस्तार से है।
आवश्यक तत्व | अर्थ | राजस्थान में उदाहरण |
|---|---|---|
स्रोत शैल (Source rock) | जैविक पदार्थ से भरपूर परत जहाँ हाइड्रोकार्बन बनते हैं | बाड़मेर बेसिन की शेल परतें |
भंडार शैल (Reservoir rock) | छिद्रयुक्त बलुआ पत्थर/चूना पत्थर जिसमें तेल जमा होता है | मंगला क्षेत्र की बलुआ पत्थर परतें |
आवरण शैल (Cap/Seal rock) | अपारगम्य परत जो तेल को ऊपर निकलने से रोकती है | शेल/मृत्तिका परतें |
जाल (Trap) | संरचना जिसमें तेल फँसकर एकत्र होता है | भ्रंश (fault) आधारित जाल — बाड़मेर रिफ़्ट |
बाड़मेर-सांचौर बेसिन को भूवैज्ञानिक एक रिफ़्ट बेसिन (भ्रंश-घाटी द्रोणी) मानते हैं — यहाँ भ्रंशों से बनी गहरी द्रोणी में तृतीयक (Tertiary) काल के अवसाद जमा हुए। जैसलमेर बेसिन में समुद्री (मेसोज़ोइक) अवसादी परतें हैं, जो इसे गैस के लिए अनुकूल बनाती हैं; जैसलमेर के जीवाश्म-काष्ठ उद्यान (आकल) भी इसी समुद्री-अवसादी अतीत के प्रमाण हैं। यह विवरण परीक्षा में "क्यों" वाले प्रश्नों (RAS मुख्य) के लिए उपयोगी है; प्रारंभिक परीक्षा में मुख्यतः नाम-स्थान पूछे जाते हैं।
4. राजस्थान के 4 पेट्रोलियम बेसिन
राज्य सरकार का पेट्रोलियम विभाग राजस्थान के तेल-गैस संभावित क्षेत्र को चार बेसिनों में बाँटता है। परीक्षा-पुस्तकों में इनका कुल क्षेत्र लगभग 1,50,000 वर्ग किमी और विस्तार पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी जिलों के साथ पूर्व के विंध्यन क्षेत्र तक बताया जाता है। सटीक क्षेत्रफल और जिलों की संख्या स्रोत व जिला-पुनर्गठन के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए परीक्षा में केवल बेसिनों के नाम, प्रकृति और प्रमुख क्षेत्र पर ध्यान दें।
बेसिन | मुख्य जिले (मोटे तौर पर) | मुख्य हाइड्रोकार्बन | प्रमुख क्षेत्र / कंपनी | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|---|
बाड़मेर-सांचौर | बाड़मेर, बालोतरा, जालोर (सांचौर क्षेत्र) | हल्का-मध्यम मोमी (waxy) कच्चा तेल, गैस | मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी — Cairn/Vedanta + ONGC | राज्य का प्रमुख उत्पादक बेसिन |
जैसलमेर | जैसलमेर (बाड़मेर का कुछ भाग) | मुख्यतः प्राकृतिक गैस | तनोट, डांडेवाला, मणिहारी टिब्बा क्षेत्र — OIL, ONGC; शाहगढ़ उप-बेसिन — Focus Energy | गैस उत्पादन (सीमित मात्रा) |
बीकानेर-नागौर | बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ की ओर | भारी (गाढ़ा) तेल | बाघेवाला — OIL | सीमित/प्रायोगिक उत्पादन |
विंध्यन | कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बारां-झालावाड़ क्षेत्र | गैस की संभावना | ONGC आदि द्वारा अन्वेषण | अन्वेषण अवस्था |
याद रखें: तीन बेसिन पश्चिम में (बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर) और एक पूर्व में (विंध्यन) — अरावली के पूर्व में केवल विंध्यन।
नाम पर ध्यान: दिसंबर 2024 में सांचौर ज़िला निरस्त होकर पुनः जालोर में मिल गया, पर बेसिन का भूवैज्ञानिक नाम "बाड़मेर-सांचौर बेसिन" ही रहता है। इसी प्रकार पचपदरा 2023 में बने बालोतरा ज़िले में है (यह ज़िला दिसंबर 2024 के बाद भी बना हुआ है); पुरानी पुस्तकों में इसे बाड़मेर ज़िले में लिखा मिलेगा। राज्य में वर्तमान में 41 ज़िले और 7 संभाग हैं — विवरण राजस्थान के 41 जिले व 7 संभाग नोट में।
5. बाड़मेर-सांचौर बेसिन — राजस्थान का "तेल हृदय"
यह राज्य का सबसे महत्वपूर्ण बेसिन है। इसका प्रमुख अनुबंध क्षेत्र RJ-ON-90/1 ब्लॉक है, जिसमें Cairn (वर्तमान Vedanta Ltd का Cairn Oil & Gas प्रभाग) संचालक (operator) है और साझेदारी Cairn 70% : ONGC 30% है। यह ब्लॉक 1990 के दशक में उत्पादन-साझेदारी अनुबंध (PSC) के अंतर्गत दिया गया था; प्रारंभ में इसमें Shell की भागीदारी थी और 2000 के दशक की शुरुआत में Cairn ने इसका पूर्ण संचालन सँभाला। 2011 में Vedanta समूह ने Cairn India में बहुमत हिस्सेदारी ली और बाद में (2017) Cairn India का Vedanta Ltd में विलय हुआ — इसलिए नए स्रोतों में "Vedanta (Cairn Oil & Gas)" लिखा मिलता है।
5.1 प्रमुख तेल-गैस क्षेत्र
क्षेत्र | प्रकार | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
मंगला (Mangla) | कच्चा तेल | जनवरी 2004 में खोज; ब्लॉक का सबसे बड़ा क्षेत्र; 29 अगस्त 2009 से वाणिज्यिक उत्पादन; पॉलिमर-फ्लडिंग (EOR) के लिए प्रसिद्ध |
भाग्यम (Bhagyam) | कच्चा तेल | मंगला के बाद का दूसरा बड़ा क्षेत्र; मंगला के उत्तर में; उत्पादन मंगला के कुछ वर्ष बाद |
ऐश्वर्या (Aishwariya) | कच्चा तेल | MBA समूह (Mangla-Bhagyam-Aishwariya) का तीसरा प्रमुख क्षेत्र |
सरस्वती (Saraswati) | कच्चा तेल | मंगला से पहले की प्रारंभिक खोजों में; छोटा क्षेत्र |
रागेश्वरी (Raageshwari) | प्राकृतिक गैस (व कंडेन्सेट) | रागेश्वरी डीप गैस (RDG) — गहरी, सघन (tight) परतों से गैस; ब्लॉक की गैस का मुख्य स्रोत |
MBA = Mangla, Bhagyam, Aishwariya — बाड़मेर के तीन बड़े तेल क्षेत्र; रागेश्वरी = गैस।
5.2 बाड़मेर के कच्चे तेल की विशेषताएँ
मोमी (waxy) तेल — इसमें पैराफ़िन मोम अधिक है, इसलिए सामान्य तापमान पर यह जमने लगता है। इसी कारण इसे गर्म रखकर पाइपलाइन से ले जाना पड़ता है।
उन्नत तेल पुनर्प्राप्ति (EOR) — मंगला में पानी में पॉलिमर मिलाकर भंडार में डाला जाता है (polymer flooding), जिससे अधिक तेल निकलता है। इसे विश्व की बड़ी पॉलिमर-फ्लड परियोजनाओं में गिना जाता है।
मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (MPT) — बाड़मेर में स्थित केंद्रीय प्रसंस्करण सुविधा, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों का तेल एकत्र कर पाइपलाइन में भेजा जाता है।
जल-इंजेक्शन के लिए मीठे भूजल के स्थान पर खारे भूजल के उपयोग की बात कंपनी द्वारा कही जाती है, ताकि स्थानीय पेयजल पर दबाव कम रहे (विवरण स्रोतानुसार भिन्न)।
6. मंगला: खोज से उत्पादन तक
मंगला की खोज को उस समय भारत में लगभग दो दशकों की सबसे बड़ी स्थलीय (onshore) तेल खोज कहा गया था। इससे पहले देश की बड़ी खोजें मुख्यतः असम, गुजरात और अपतटीय मुंबई हाई में थीं। मंगला ने राजस्थान को भारत के तेल-मानचित्र पर ला दिया और बाड़मेर का आर्थिक स्वरूप बदल दिया।
पूरा कालक्रम खंड 18 में दिया गया है; यहाँ मुख्य बात — खोज (2004) और उत्पादन (2009) के बीच लगभग पाँच वर्ष विकास-कार्य (कुएँ, प्रसंस्करण टर्मिनल, परिवहन व्यवस्था) में लगे।
उत्पादन के आँकड़े: ब्लॉक का उत्पादन 2010 के दशक के मध्य में चरम पर था, जब इसे देश के घरेलू कच्चे तेल उत्पादन का लगभग एक-चौथाई तक बताया गया। इसके बाद पुराने क्षेत्रों में प्राकृतिक गिरावट आई। ऐसे आँकड़े वर्ष-दर-वर्ष बदलते हैं, इसलिए परीक्षा में प्रतिशत की बजाय "राजस्थान स्थलीय उत्पादन में अग्रणी" जैसे गुणात्मक कथन अधिक सुरक्षित हैं।
7. जैसलमेर बेसिन — गैस का भंडार
जैसलमेर बेसिन राज्य का सबसे पुराना अन्वेषित क्षेत्र है। यहाँ ONGC ने 1960 के दशक से और बाद में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अन्वेषण किया। यह बेसिन मुख्यतः प्राकृतिक गैस के लिए जाना जाता है। प्रमुख गैस क्षेत्रों के रूप में तनोट, डांडेवाला, मणिहारी टिब्बा (कुछ पुस्तकों में "मनहेरा टिब्बा") तथा घोटारू, सादेवाला आदि क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है। कौन-सा क्षेत्र OIL का है और कौन-सा ONGC का, इसमें परीक्षा-पुस्तकें पूरी तरह एकमत नहीं हैं; परीक्षा के लिए इतना पर्याप्त है कि जैसलमेर = गैस, कंपनियाँ = OIL व ONGC।
7.1 शाहगढ़ उप-बेसिन
जैसलमेर ज़िले के पश्चिम में, भारत-पाक सीमा के निकट शाहगढ़ उप-बेसिन (Shahgarh sub-basin) है। यहाँ निजी कंपनी फ़ोकस एनर्जी (Focus Energy) ने गैस की खोज की। सीमा-निकटता, दूरस्थता और आधारभूत ढाँचे की कमी के कारण यहाँ विकास धीमा रहा है। सीमा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति राजस्थान की अंतर्राष्ट्रीय व अंतर्राज्यीय सीमा नोट में देखें।
7.2 जैसलमेर गैस का उपयोग
मुख्य उपभोक्ता — रामगढ़ गैस तापीय विद्युत परियोजना (जैसलमेर), जो राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUNL) की है; यह स्थानीय गैस पर आधारित राज्य का प्रमुख गैस बिजलीघर है।
गैस की मात्रा सीमित होने से बड़े उद्योग यहाँ विकसित नहीं हुए; दूरस्थ स्थान और पाइपलाइन जाल की कमी भी बाधा रही।
इसी क्षेत्र के पास डेज़र्ट नेशनल पार्क और गोडावण का आवास है — अन्वेषण/बिजली लाइनों पर पर्यावरणीय सावधानी आवश्यक (खंड 15)।
8. बीकानेर-नागौर बेसिन — भारी तेल
उत्तर-पश्चिमी राजस्थान का यह बेसिन भारी (heavy) और गाढ़े (viscous) तेल के लिए जाना जाता है। सबसे प्रसिद्ध क्षेत्र बाघेवाला (बीकानेर) है, जहाँ OIL ने 1990 के दशक में भारी तेल की खोज की। भारी तेल सामान्य दबाव से आसानी से नहीं बहता; इसे निकालने के लिए भाप-इंजेक्शन (steam/thermal recovery) जैसी महँगी तकनीकें चाहिए, इसलिए यहाँ उत्पादन सीमित और प्रायोगिक स्तर का रहा है।
तुलना बिंदु | बाड़मेर का तेल | बीकानेर (बाघेवाला) का तेल |
|---|---|---|
प्रकृति | मोमी (waxy), अपेक्षाकृत हल्का | भारी, गाढ़ा (viscous) |
मुख्य समस्या | ठंडा होने पर जमना — गरम पाइपलाइन | बहाव कम — भाप/ताप तकनीक |
मुख्य कंपनी | Cairn/Vedanta (ONGC साझेदार) | OIL |
उत्पादन स्तर | बड़ा, वाणिज्यिक | सीमित |
इसी बेसिन में लिग्नाइट (पलाना, बरसिंगसर — बीकानेर; कसनाऊ-मातासुख — नागौर) भी मिलता है, जो बताता है कि अवसादी द्रोणियों में कई ईंधन-खनिज साथ मिलते हैं।
9. विंध्यन बेसिन — पूर्व का अन्वेषण क्षेत्र
अरावली के पूर्व में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (हाड़ौती व उससे लगा क्षेत्र) विंध्यन शैल-समूह की प्राचीन अवसादी चट्टानों से बना है — ये वही परतें हैं जिनसे कोटा स्टोन, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर निकलते हैं (देखें हाड़ौती पठार व पूर्वी मैदान)। विंध्यन बेसिन मध्य प्रदेश तक फैला है। यहाँ ONGC आदि द्वारा गैस की संभावना के लिए अन्वेषण हुआ है, पर अब तक राजस्थान भाग से वाणिज्यिक उत्पादन नहीं हुआ है। परीक्षा में "विंध्यन बेसिन से उत्पादन हो रहा है" जैसा कथन प्रायः गलत विकल्प के रूप में रखा जाता है।
10. प्रमुख कंपनियाँ (Operators)
कंपनी | प्रकार | राजस्थान में भूमिका |
|---|---|---|
Cairn Oil & Gas (Vedanta Ltd) | निजी | बाड़मेर-सांचौर बेसिन, RJ-ON-90/1 ब्लॉक का संचालक; मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, रागेश्वरी |
ONGC (तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम) | केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम | RJ-ON-90/1 में 30% साझेदार; जैसलमेर व विंध्यन बेसिन में अन्वेषण |
OIL (ऑयल इंडिया लिमिटेड) | केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम | जैसलमेर गैस क्षेत्र; बीकानेर-नागौर बेसिन का बाघेवाला भारी तेल |
Focus Energy | निजी | जैसलमेर का शाहगढ़ उप-बेसिन — गैस |
HPCL | केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम | पचपदरा रिफाइनरी (HRRL) में 74% हिस्सेदारी |
GAIL | केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम | गैस पाइपलाइन (HBJ) — धौलपुर, अंता आदि तक गैस आपूर्ति |
11. पाइपलाइन व परिवहन
11.1 मंगला–भोगत पाइपलाइन
बाड़मेर का कच्चा तेल मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल से गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित भोगत टर्मिनल तक पाइपलाइन द्वारा जाता है; मार्ग में सलाया आदि बिंदुओं से रिफाइनरियों को आपूर्ति होती है। इसकी लंबाई लगभग 650–700 किमी बताई जाती है (स्रोतों में आँकड़ा थोड़ा भिन्न)। मोमी तेल को जमने से बचाने के लिए पूरी पाइपलाइन को इन्सुलेट कर विद्युत-ताप (heat tracing) से गर्म रखा जाता है — इसलिए इसे विश्व की सबसे लंबी लगातार गरम (continuously heated) कच्चा-तेल पाइपलाइनों में गिना जाता है। पाइपलाइन बनने से पहले शुरुआती वर्षों में तेल टैंकरों से भी भेजा गया।
11.2 गैस पाइपलाइन
HBJ पाइपलाइन (हजीरा–बीजापुर–जगदीशपुर, GAIL) राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग से गुजरती है; इसी जाल से अंता (बारां) का NTPC गैस बिजलीघर, धौलपुर गैस बिजलीघर और कोटा क्षेत्र के उर्वरक उद्योगों को गैस मिलती है।
रागेश्वरी गैस को पाइपलाइन द्वारा गुजरात के गैस ग्रिड तक भेजने की व्यवस्था की गई।
राज्य के सड़क-रेल परिवहन का विस्तृत विवरण राजस्थान का परिवहन नोट में है।
12. HPCL राजस्थान रिफाइनरी, पचपदरा (बालोतरा)
राजस्थान में कच्चा तेल निकलने के बावजूद लंबे समय तक राज्य में कोई रिफाइनरी नहीं थी — तेल गुजरात भेजा जाता था। इस कमी को दूर करने के लिए पचपदरा में HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) स्थापित की जा रही है। यह राज्य की पहली रिफाइनरी है और इसे एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर के रूप में बनाया जा रहा है। पचपदरा अपनी खारी झील व नमक उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है — देखें पचपदरा झील।
बिंदु | विवरण |
|---|---|
संयुक्त उपक्रम | HPCL 74% : राजस्थान सरकार 26% |
स्थान | पचपदरा — वर्तमान बालोतरा ज़िला (पहले बाड़मेर ज़िला) |
क्षमता | 9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) |
शिलान्यास | 22 सितंबर 2013 — सोनिया गांधी द्वारा (तत्कालीन राज्य सरकार के समय) |
कार्यारंभ | 16 जनवरी 2018 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा, संशोधित समझौते के बाद |
प्रकृति | रिफाइनरी + पेट्रोकेमिकल परिसर; BS-VI मानक ईंधन |
कच्चे तेल का स्रोत | आंशिक रूप से बाड़मेर का स्थानीय तेल, शेष आयातित तेल (गुजरात तट से पाइपलाइन द्वारा) |
स्थिति | निर्माणाधीन/चरणबद्ध रूप से चालू होने वाली परियोजना — लागत व समय-सीमा कई बार संशोधित |
सावधानी: रिफाइनरी की लागत और पूर्ण वाणिज्यिक संचालन की तिथि कई बार संशोधित हुई है। परीक्षा से पहले नवीनतम आधिकारिक घोषणा अवश्य देखें; इस नोट में कोई निश्चित "चालू होने की तिथि" नहीं दी गई है, क्योंकि यह परियोजना-स्थिति के साथ बदलती है।
रिफाइनरी का महत्व
स्थानीय कच्चे तेल का राज्य में ही मूल्य-संवर्धन (value addition)
पेट्रोकेमिकल उत्पादों (पॉलिमर आदि) पर आधारित सहायक उद्योगों की संभावना — बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र में पेट्रोलियम-आधारित औद्योगिक क्षेत्र
रोज़गार, राजस्व और पश्चिमी राजस्थान के अधोसंरचना-विकास में योगदान
राज्य की औद्योगिक नीतियों का विवरण — राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र व नीतियाँ
13. गैस-आधारित विद्युत उत्पादन
बिजलीघर | ज़िला | स्वामित्व | गैस का स्रोत |
|---|---|---|---|
रामगढ़ गैस तापीय विद्युत परियोजना | जैसलमेर | RVUNL (राज्य) | जैसलमेर बेसिन की स्थानीय गैस (मुख्यतः OIL के क्षेत्र) |
धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर स्टेशन | धौलपुर | RVUNL (राज्य) | पाइपलाइन गैस (GAIL) |
अंता गैस विद्युत केंद्र | बारां | NTPC (केंद्र) | HBJ पाइपलाइन गैस |
रामगढ़ ही ऐसा प्रमुख बिजलीघर है जो राज्य में निकली गैस पर चलता है; धौलपुर और अंता बाहर से आने वाली पाइपलाइन गैस पर निर्भर हैं। गैस की कीमत व उपलब्धता के कारण इन बिजलीघरों का उपयोग-स्तर (PLF) प्रायः कम रहता है। कोयला-लिग्नाइट आधारित ताप बिजलीघरों के लिए राजस्थान के प्रमुख ताप विद्युत केंद्र और सौर ऊर्जा के लिए राजस्थान की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ देखें।
14. लिग्नाइट, कोल-बेड मीथेन (CBM) व अन्य हाइड्रोकार्बन
तेल-गैस वाली अवसादी द्रोणियों में ही राजस्थान का लिग्नाइट (भूरा कोयला) भी मिलता है — बाड़मेर (गिरल, कपूरडी-जालिपा), बीकानेर (पलाना, बरसिंगसर) और नागौर (कसनाऊ-मातासुख)। इन लिग्नाइट परतों में फँसी मीथेन गैस को कोल-बेड मीथेन (CBM) कहते हैं। बाड़मेर-सांचौर और बीकानेर-नागौर क्षेत्रों में CBM की संभावना के लिए अन्वेषण ब्लॉक दिए गए हैं, पर राजस्थान में CBM का उत्पादन अभी उल्लेखनीय स्तर पर नहीं पहुँचा है। लिग्नाइट खदानों का जिलावार विवरण राजस्थान की खनिज संपदा में है।
हाइड्रोकार्बन | राजस्थान में स्थिति |
|---|---|
कच्चा तेल | बाड़मेर-सांचौर बेसिन — बड़ा वाणिज्यिक उत्पादन |
प्राकृतिक गैस | जैसलमेर बेसिन, रागेश्वरी (बाड़मेर) — सीमित उत्पादन |
भारी तेल | बीकानेर-नागौर (बाघेवाला) — सीमित |
लिग्नाइट | बाड़मेर, बीकानेर, नागौर — खनन व बिजली उत्पादन |
कोल-बेड मीथेन (CBM) | अन्वेषण/संभावना स्तर |
सघन (tight) गैस/तेल | रागेश्वरी डीप गैस जैसी परियोजनाएँ |
15. नीति, राजस्व और प्रशासन
केंद्र की भूमिका: तेल-गैस अन्वेषण ब्लॉकों का आवंटन केंद्र सरकार (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय — DGH) की नीतियों (पहले PSC/NELP, अब HELP/OALP) के अंतर्गत होता है।
राज्य की भूमिका: स्थलीय (onshore) क्षेत्रों के लिए पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस (PEL) और खनन पट्टा (ML) राज्य सरकार केंद्र की स्वीकृति से जारी करती है। राज्य में यह कार्य पेट्रोलियम विभाग/पेट्रोलियम निदेशालय (खान एवं पेट्रोलियम विभाग के अंतर्गत) देखता है।
रॉयल्टी: स्थलीय कच्चे तेल व गैस पर रॉयल्टी राज्य सरकार को मिलती है (अपतटीय पर केंद्र को)। बाड़मेर के तेल से मिलने वाली रॉयल्टी पिछले डेढ़ दशक में राज्य के गैर-कर राजस्व का बड़ा स्रोत रही है; इसकी मात्रा कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत और उत्पादन के साथ घटती-बढ़ती है।
रिफाइनरी में हिस्सेदारी: HRRL में राज्य की 26% इक्विटी — राज्य की प्रत्यक्ष भागीदारी का उदाहरण।
किसी विशिष्ट "राजस्थान पेट्रोलियम नीति" के वर्ष या प्रावधानों पर प्रश्न आने की स्थिति में नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना देखें; परीक्षा-पुस्तकों में इस पर एकरूप जानकारी नहीं मिलती, इसलिए यहाँ उसका विवरण नहीं दिया गया है।
16. पर्यावरणीय एवं सामाजिक मुद्दे
मुद्दा | विवरण |
|---|---|
भूमि अधिग्रहण | कुएँ, पाइपलाइन, टर्मिनल व रिफाइनरी के लिए भूमि — मुआवज़े और विस्थापन के प्रश्न |
जल-उपयोग | जल-इंजेक्शन व रिफाइनरी के लिए पानी; शुष्क क्षेत्र में भूजल पर दबाव — देखें राजस्थान भूजल — Dark, Grey व White जोन |
उत्पादित जल (Produced water) | तेल के साथ निकलने वाला खारा/दूषित पानी — उपचार व सुरक्षित निपटान आवश्यक |
गैस फ्लेयरिंग व वायु प्रदूषण | अतिरिक्त गैस जलाने से उत्सर्जन; रिफाइनरी से भी उत्सर्जन नियंत्रण की आवश्यकता |
तेल रिसाव | पाइपलाइन/कुओं से रिसाव पर मिट्टी व भूजल प्रदूषण का जोखिम |
मरुस्थलीय पारिस्थितिकी | रेत-टिब्बों, ओरण-गोचर और वन्यजीव आवास में व्यवधान; जैसलमेर में गोडावण आवास के पास संवेदनशीलता — देखें गोडावण (Great Indian Bustard) |
सामाजिक-आर्थिक बदलाव | बाड़मेर में रोज़गार, सड़कें, होटल-परिवहन व्यवसाय बढ़े; साथ ही महँगाई, बाहरी श्रमिक, स्थानीय भागीदारी के प्रश्न |
RAS मुख्य परीक्षा में इसी आधार पर "बाड़मेर में तेल-अन्वेषण के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव" जैसे प्रश्न लिखे जा सकते हैं — उत्तर में आर्थिक लाभ (रॉयल्टी, रोज़गार, रिफाइनरी, अधोसंरचना) और पर्यावरणीय लागत (जल, भूमि, प्रदूषण, जैव-विविधता) दोनों का संतुलित उल्लेख करें।
17. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में राजस्थान
भारत में कच्चे तेल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र — मुंबई हाई (अपतटीय), राजस्थान, गुजरात, असम। कुल उत्पादन में अपतटीय मुंबई हाई सबसे आगे रहता है।
स्थलीय (onshore) उत्पादन में राजस्थान को 2010 के दशक से प्रायः देश का सबसे बड़ा राज्य बताया जाता रहा है — यह स्थिति वार्षिक आँकड़ों के अनुसार बदल सकती है, इसलिए उत्तर लिखते समय "हाल के वर्षों में/पिछले दशक में" जैसे शब्द जोड़ें।
भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का बड़ा भाग आयात करता है; ऐसे में बाड़मेर जैसे घरेलू स्रोत ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
18. कालक्रम एक नज़र में
समय | घटना |
|---|---|
1960 का दशक से | ONGC द्वारा जैसलमेर बेसिन में अन्वेषण; गैस की प्रारंभिक खोजें |
1990 का दशक | बाघेवाला (बीकानेर) में OIL को भारी तेल; RJ-ON-90/1 ब्लॉक का PSC |
जनवरी 2004 | मंगला तेल क्षेत्र की खोज — Cairn |
29 अगस्त 2009 | मंगला से वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ |
2011 | Vedanta ने Cairn India में बहुमत हिस्सेदारी ली |
सितंबर 2013 | पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास |
2017 | Cairn India का Vedanta Ltd में विलय |
16 जनवरी 2018 | पचपदरा रिफाइनरी का कार्यारंभ |
2023 | बालोतरा ज़िला बना — पचपदरा अब बालोतरा ज़िले में |
दिसंबर 2024 | सांचौर ज़िला निरस्त (जालोर में पुनः) — बेसिन का नाम अप्रभावित |
19. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)
Trap 1: खोज 2004, उत्पादन 2009
मंगला की खोज जनवरी 2004 में और वाणिज्यिक उत्पादन 29 अगस्त 2009 से। विकल्पों में दोनों वर्ष उलटकर दिए जाते हैं।
Trap 2: रिफाइनरी — शिलान्यास 2013, कार्यारंभ 2018
पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास 2013 में हुआ था, पर समझौता संशोधित होने के बाद निर्माण-कार्य जनवरी 2018 में शुरू हुआ। "2018 में शिलान्यास" लिखा विकल्प भ्रामक है — 2018 को "कार्यारंभ" कहा जाता है।
Trap 3: 74 : 26 — किसका कितना?
HPCL 74%, राज्य सरकार 26%। उलटा विकल्प (राज्य 74%) सामान्य जाल है।
Trap 4: रागेश्वरी तेल नहीं, गैस
मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती — तेल; रागेश्वरी — गैस (रागेश्वरी डीप गैस)।
Trap 5: बाघेवाला — बीकानेर, जैसलमेर नहीं
बाघेवाला भारी तेल क्षेत्र बीकानेर-नागौर बेसिन में (बीकानेर) है और इसकी कंपनी OIL है, Cairn नहीं।
Trap 6: विंध्यन बेसिन से उत्पादन नहीं
चार बेसिनों में विंध्यन एकमात्र पूर्वी बेसिन है और अभी अन्वेषण अवस्था में है।
Trap 7: शाहगढ़ — Focus Energy
शाहगढ़ उप-बेसिन जैसलमेर में है; यहाँ गैस खोज निजी कंपनी Focus Energy से जुड़ी है, ONGC/Cairn से नहीं।
Trap 8: पचपदरा — बालोतरा ज़िला
नई ज़िला-व्यवस्था में पचपदरा बालोतरा ज़िले में है। पुरानी पुस्तकों में "बाड़मेर" लिखा मिलेगा — प्रश्न में यदि दोनों विकल्प हों तो प्रश्न के संदर्भ-वर्ष पर ध्यान दें; वर्तमान उत्तर बालोतरा।
Trap 9: रामगढ़ बनाम अंता/धौलपुर
रामगढ़ (जैसलमेर) स्थानीय गैस पर; अंता (बारां, NTPC) और धौलपुर (RVUNL) पाइपलाइन गैस पर। "अंता को जैसलमेर की गैस" गलत।
Trap 10: Cairn — "भारतीय PSU" नहीं
Cairn मूलतः ब्रिटिश (स्कॉटलैंड) की कंपनी Cairn Energy से जुड़ी थी और अब Vedanta Ltd (निजी) का प्रभाग है; ONGC इसमें 30% साझेदार है, संचालक नहीं।
20. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-Liners)
क्र. | प्रश्न-बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
1 | राजस्थान में पेट्रोलियम बेसिनों की संख्या | 4 |
2 | सबसे उत्पादक बेसिन | बाड़मेर-सांचौर |
3 | मंगला तेल क्षेत्र — ज़िला | बाड़मेर |
4 | मंगला की खोज | जनवरी 2004, Cairn |
5 | मंगला से वाणिज्यिक उत्पादन | 29 अगस्त 2009 |
6 | उत्पादन का उद्घाटन | प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह |
7 | प्रमुख ब्लॉक | RJ-ON-90/1 |
8 | RJ-ON-90/1 में साझेदारी | Cairn/Vedanta 70% : ONGC 30% |
9 | MBA क्षेत्र | मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या |
10 | बाड़मेर का गैस क्षेत्र | रागेश्वरी |
11 | मुख्यतः गैस वाला बेसिन | जैसलमेर |
12 | शाहगढ़ उप-बेसिन — ज़िला व कंपनी | जैसलमेर, Focus Energy |
13 | भारी तेल क्षेत्र | बाघेवाला (बीकानेर), OIL |
14 | अन्वेषण अवस्था वाला पूर्वी बेसिन | विंध्यन |
15 | बाड़मेर के तेल की विशेषता | मोमी (waxy) |
16 | कच्चे तेल की पाइपलाइन | मंगला–भोगत (गुजरात), गरम पाइपलाइन |
17 | मंगला में EOR तकनीक | पॉलिमर फ्लडिंग |
18 | राज्य की पहली रिफाइनरी | पचपदरा (बालोतरा) — HRRL |
19 | HRRL में हिस्सेदारी | HPCL 74% : राज्य 26% |
20 | HRRL क्षमता | 9 MMTPA |
21 | रिफाइनरी शिलान्यास / कार्यारंभ | 2013 / 16 जनवरी 2018 |
22 | स्थानीय गैस पर बिजलीघर | रामगढ़ (जैसलमेर) |
23 | NTPC का गैस बिजलीघर | अंता (बारां) |
24 | स्थलीय तेल पर रॉयल्टी किसे | राज्य सरकार |
25 | Cairn India का Vedanta में विलय | 2017 |
21. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. चार बेसिन — "बा-जै-बी-वि": बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर, विंध्यन। पहला तेल, दूसरा गैस, तीसरा भारी तेल, चौथा केवल खोज।
2. "04 में मिला, 09 में चला": मंगला — खोज 2004, उत्पादन 2009।
3. "MBA पास, रागेश्वरी गैस": मंगला-भाग्यम-ऐश्वर्या तेल; रागेश्वरी गैस।
4. "13 में पत्थर, 18 में काम": रिफाइनरी — 2013 शिलान्यास, 2018 कार्यारंभ।
5. "74 HP, 26 राजस्थान" — 9 MMTPA: "9 का पचपदरा"।
6. "बाघ भारी": बाघेवाला = भारी तेल (बीकानेर, OIL)।
7. "शाह का फ़ोकस": शाहगढ़ = Focus Energy।
मंगला 2004 → उत्पादन 29 अगस्त 2009 → Vedanta 2011/2017 | पचपदरा: 2013 शिलान्यास · 2018 कार्यारंभ · 74:26 · 9 MMTPA
22. संबंधित नोट्स
राजस्थान की खनिज संपदा — जिला-वार खदानें — धात्विक/अधात्विक खनिज, लिग्नाइट
राजस्थान के प्रमुख खनिज: Map Based Questions — मानचित्र अभ्यास
राजस्थान की ऊर्जा परियोजनाएँ — समग्र ऊर्जा परिदृश्य
राजस्थान के प्रमुख ताप विद्युत केंद्र — कोयला, लिग्नाइट, गैस बिजलीघर
राजस्थान की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ — नवीकरणीय ऊर्जा
राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र व नीतियाँ — रिफाइनरी-आधारित उद्योग
पचपदरा झील — रिफाइनरी स्थल का भूगोल
थार मरुस्थल — अवसादी पश्चिमी राजस्थान
23. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
राजस्थान में 4 पेट्रोलियम बेसिन — बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर, विंध्यन; कुल लगभग 1.5 लाख वर्ग किमी (अनुमानित)
तेल-गैस केवल अवसादी चट्टानों में; बाड़मेर बेसिन = रिफ़्ट बेसिन
मंगला (बाड़मेर) — खोज जनवरी 2004, Cairn; उत्पादन 29 अगस्त 2009 (डॉ. मनमोहन सिंह)
ब्लॉक RJ-ON-90/1 — Cairn/Vedanta 70% : ONGC 30%
MBA — मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या; सरस्वती (तेल); रागेश्वरी (गैस)
बाड़मेर का तेल मोमी — गरम मंगला–भोगत पाइपलाइन (लगभग 650–700 किमी) से गुजरात तट
मंगला में पॉलिमर फ्लडिंग (EOR); मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल बाड़मेर में
जैसलमेर बेसिन — गैस; OIL व ONGC; तनोट, डांडेवाला, मणिहारी टिब्बा क्षेत्र
शाहगढ़ उप-बेसिन (जैसलमेर) — Focus Energy
बीकानेर-नागौर — भारी तेल, बाघेवाला (OIL); विंध्यन — केवल अन्वेषण
HRRL पचपदरा (बालोतरा) — HPCL 74 : राज्य 26; 9 MMTPA; शिलान्यास 2013, कार्यारंभ 16 जनवरी 2018; राज्य की पहली रिफाइनरी
गैस बिजलीघर — रामगढ़ (स्थानीय गैस), धौलपुर (RVUNL), अंता (बारां, NTPC) — पाइपलाइन गैस
स्थलीय तेल पर रॉयल्टी राज्य को; ब्लॉक आवंटन केंद्र (DGH; HELP/OALP)
Vedanta — 2011 में Cairn India में बहुमत, 2017 में विलय
24. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 4 (चार बेसिन), खंड 5–6 (बाड़मेर व मंगला) और खंड 12 (पचपदरा रिफाइनरी) दोहराएँ। उत्पादन-प्रतिशत जैसे बदलते आँकड़ों को रटने की बजाय वर्ष, स्थान, कंपनी और हिस्सेदारी पक्की करें — यही प्रश्नों का मुख्य आधार हैं। मानचित्र पर बेसिनों की स्थिति के अभ्यास के लिए राजस्थान Geography Map Based Questions भी हल करें।
25. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
पेट्रोलियम ने पिछले दो दशकों में पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर बाड़मेर-बालोतरा क्षेत्र, की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। 2004 में मंगला की खोज और 2009 से उत्पादन के बाद राजस्थान देश के प्रमुख स्थलीय तेल-उत्पादक राज्यों में आ गया; रॉयल्टी राज्य के राजस्व का बड़ा स्रोत बनी और पचपदरा रिफाइनरी से अब स्थानीय मूल्य-संवर्धन की राह खुल रही है। जैसलमेर की गैस, बीकानेर का भारी तेल और विंध्यन की संभावनाएँ भविष्य की दिशा बताती हैं, जबकि जल, भूमि और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी से जुड़े प्रश्न संतुलित विकास की आवश्यकता दर्शाते हैं। परीक्षा के लिए तीन चीज़ें सबसे महत्वपूर्ण हैं — चार बेसिन और उनकी प्रकृति, मंगला के वर्ष व कंपनी, तथा पचपदरा रिफाइनरी की हिस्सेदारी-क्षमता-तिथियाँ।
4 बेसिन: बाड़मेर-सांचौर (तेल) · जैसलमेर (गैस) · बीकानेर-नागौर (भारी तेल) · विंध्यन (अन्वेषण) | मंगला 2004 → 2009 | RJ-ON-90/1: 70:30 | HRRL पचपदरा: 74:26, 9 MMTPA, 2013/2018
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“राजस्थान में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस: 4 बेसिन, मंगला, पचपदरा — RAS/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- राजस्थान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- राजस्थान में जस्ता एवं सीसा खनन — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- राजस्थान की खनिज संपदा — अभ्यास क्विज़20 प्रश्नों का क्विज़ दें
- पचपदरा झील — खारे पानी व नमक — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ (All-in-One Mega Pack) — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राज्य के पेट्रोलियम विभाग के अनुसार राजस्थान में 4 पेट्रोलियम बेसिन हैं — बाड़मेर-सांचौर बेसिन, जैसलमेर बेसिन, बीकानेर-नागौर बेसिन और विंध्यन बेसिन। इनका कुल संभावित क्षेत्र लगभग 1.5 लाख वर्ग किमी बताया जाता है (अनुमानित)।
बाड़मेर ज़िले के मंगला तेल क्षेत्र की खोज जनवरी 2004 में Cairn ने की। यह RJ-ON-90/1 ब्लॉक में है, जिसमें Cairn (अब Vedanta Ltd) 70% और ONGC 30% साझेदार हैं।
मंगला से वाणिज्यिक तेल उत्पादन 29 अगस्त 2009 को शुरू हुआ, जिसका शुभारंभ तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया।
प्रमुख तेल क्षेत्र मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या (MBA) तथा सरस्वती हैं; रागेश्वरी मुख्यतः गैस क्षेत्र है (रागेश्वरी डीप गैस)।
जैसलमेर बेसिन मुख्यतः प्राकृतिक गैस के लिए जाना जाता है। यहाँ OIL और ONGC ने तनोट, डांडेवाला, मणिहारी टिब्बा जैसे क्षेत्रों में गैस खोजी; शाहगढ़ उप-बेसिन में Focus Energy ने गैस खोजी। इस गैस का प्रमुख उपयोग रामगढ़ गैस तापीय बिजलीघर में होता है।
बाघेवाला (बीकानेर) बीकानेर-नागौर बेसिन का भारी (heavy, गाढ़ा) तेल क्षेत्र है, जिसे OIL ने खोजा। भारी तेल निकालने के लिए भाप/ताप जैसी विशेष तकनीकें चाहिए, इसलिए उत्पादन सीमित है।
HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। इसकी क्षमता 9 MMTPA है और यह पचपदरा (वर्तमान बालोतरा ज़िला) में है।
रिफाइनरी का शिलान्यास सितंबर 2013 में हुआ था; संशोधित समझौते के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका कार्यारंभ किया। पूर्ण संचालन की तिथि कई बार संशोधित हुई है, इसलिए नवीनतम आधिकारिक स्थिति देखें।
बाड़मेर का कच्चा तेल मोमी (waxy) है, जो सामान्य तापमान पर जमने लगता है। इसलिए मंगला से गुजरात तट (भोगत) तक की पाइपलाइन को इन्सुलेट कर लगातार गर्म रखा जाता है।
भारत में स्थलीय (onshore) कच्चे तेल व गैस पर रॉयल्टी संबंधित राज्य सरकार को मिलती है, जबकि अपतटीय उत्पादन की रॉयल्टी केंद्र को। बाड़मेर का उत्पादन स्थलीय है, इसलिए इसकी रॉयल्टी राजस्थान को मिलती है और यह राज्य के गैर-कर राजस्व का बड़ा स्रोत रही है।
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