राजस्थान की प्रमुख फसलें: खरीफ, रबी एवं जायद फसलें, उत्पादन क्षेत्र, कृषि-जलवायु एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य

राजस्थान की प्रमुख फसलें: खरीफ, रबी एवं जायद फसलें, उत्पादन क्षेत्र, कृषि-जलवायु एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य
Quick Answer: राजस्थान की कृषि पर जलवायु, वर्षा, मिट्टी, सिंचाई और भौगोलिक परिस्थितियों का सीधा प्रभाव पड़ता है। राज्य की प्रमुख फसलों में बाजरा, गेहूँ, सरसों, चना, ज्वार, मक्का, ग्वार, कपास, मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, मोठ और तारामीरा प्रमुख हैं। राजस्थान विशेष रूप से बाजरा, सरसों, तिलहनों, मोटे अनाज और ग्वार के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार के 2025-26 आर्थिक समीक्षा के अनुसार 2023-24 में राजस्थान बाजरा, रेपसीड एवं सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज तथा ग्वार के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर रहा।
1. Quick Answer Box
प्रश्न | उत्तर |
राजस्थान की प्रमुख खाद्यान्न फसल | बाजरा |
प्रमुख रबी फसल | गेहूँ |
प्रमुख तिलहनी फसल | सरसों |
प्रमुख दलहनी फसलें | चना, मूंग, मोठ, उड़द |
प्रमुख वाणिज्यिक फसलें | कपास, ग्वार, तंबाकू, गन्ना |
प्रमुख खरीफ फसलें | बाजरा, ज्वार, मक्का, ग्वार, मूंग, मोठ, मूंगफली, कपास |
प्रमुख रबी फसलें | गेहूँ, जौ, चना, सरसों, तारामीरा |
राजस्थान की विशेष पहचान वाली फसल | ग्वार |
बाजरा उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | प्रथम |
रेपसीड एवं सरसों उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | प्रथम |
ग्वार उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | प्रथम |
कुल तिलहन उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | प्रथम |
कुल दलहन उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | तृतीय |
सोयाबीन उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | तृतीय |
मूंगफली उत्पादन में राष्ट्रीय स्थिति | द्वितीय |
महत्वपूर्ण: राष्ट्रीय रैंकिंग वर्ष के अनुसार बदल सकती है। परीक्षा में यदि प्रश्न के साथ वर्ष दिया हो तो उसी वर्ष के आधिकारिक आँकड़े को प्राथमिकता दें। 2025-26 की राजस्थान आर्थिक समीक्षा में 2023-24 के उत्पादन के आधार पर उपर्युक्त रैंकिंग दी गई है।
2. इस टॉपिक का सिलेबस में महत्व
राजस्थान की कृषि राजस्थान भूगोल + राजस्थान अर्थव्यवस्था + कृषि एवं पशुपालन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Suyog Academy के राजस्थान भूगोल रोडमैप में भी “कृषि एवं पशुपालन” को अलग सिलेबस क्लस्टर के रूप में रखा गया है, जिसमें कृषि-जलवायु प्रदेश और प्रमुख फसलों से संबंधित सामग्री शामिल है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
यह टॉपिक निम्न परीक्षाओं में उपयोगी है:
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Rajasthan CET Graduation Level
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प्रश्न किस प्रकार पूछे जाते हैं?
इस अध्याय से केवल “सबसे अधिक कौन-सी फसल?” जैसे सीधे प्रश्न नहीं आते। प्रश्न निम्न प्रकार से भी बनते हैं:
फसल → ऋतु
फसल → मिट्टी
फसल → जिला/क्षेत्र
फसल → सिंचाई
फसल → वर्षा की आवश्यकता
फसल → उत्पादन में राष्ट्रीय स्थान
फसल → औद्योगिक उपयोग
फसल → कृषि-जलवायु प्रदेश
फसल → प्रमुख उत्पादक क्षेत्र
कथन आधारित प्रश्न
मिलान आधारित प्रश्न
सही/गलत युग्म
3. राजस्थान में कृषि की भौगोलिक पृष्ठभूमि
राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है और इसके विशाल क्षेत्र में प्राकृतिक परिस्थितियों में काफी विविधता पाई जाती है।
एक ओर पश्चिमी राजस्थान में थार मरुस्थल है, जहाँ वर्षा कम और अनिश्चित है, वहीं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा और उपजाऊ मिट्टी के कारण कृषि की बेहतर परिस्थितियाँ मिलती हैं।
राजस्थान में फसल चयन को मुख्यतः इन कारकों से समझा जा सकता है:
वर्षा + तापमान + मिट्टी + सिंचाई + कृषि-जलवायु + बाजार
कृषि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
कारक | कृषि पर प्रभाव |
वर्षा | फसल का प्रकार और उत्पादकता निर्धारित करती है |
तापमान | बीज अंकुरण एवं फसल वृद्धि प्रभावित होती है |
मिट्टी | विशेष फसल की उपयुक्तता तय करती है |
सिंचाई | रबी एवं ग्रीष्मकालीन कृषि को बढ़ावा देती है |
मानसून | खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण |
पश्चिमी विक्षोभ | रबी फसलों के लिए शीतकालीन वर्षा/मावठ में सहायक |
नहरें | पश्चिमी राजस्थान में कृषि विस्तार |
बाजार | वाणिज्यिक फसलों को प्रोत्साहन |
तकनीक | उत्पादकता एवं फसल विविधीकरण बढ़ाती है |
राजस्थान में वर्षा का वितरण असमान है और सामान्यतः दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर वर्षा कम होती जाती है। इसलिए फसल वितरण भी समान नहीं है।
4. राजस्थान में फसलों का मौसमी वर्गीकरण
राजस्थान की प्रमुख फसलों को तीन कृषि ऋतुओं में समझना सबसे आसान है:
4.1 खरीफ फसलें
खरीफ फसलों की बुवाई सामान्यतः मानसून के आगमन के आसपास होती है और इनका विकास वर्षा तथा गर्म तापमान में होता है।
प्रमुख खरीफ फसलें
बाजरा
ज्वार
मक्का
मूंग
मोठ
उड़द
ग्वार
मूंगफली
तिल
सोयाबीन
कपास
अरहर
अरंडी
4.2 रबी फसलें
रबी फसलों की बुवाई सामान्यतः मानसून के बाद और शीत ऋतु में की जाती है।
प्रमुख रबी फसलें
गेहूँ
जौ
चना
सरसों
तारामीरा
अलसी
राजस्थान सरकार की कृषि सांख्यिकी में गेहूँ, जौ, चना और सरसों को प्रमुख रबी फसलों के रूप में दर्ज किया गया है।
4.3 जायद फसलें
रबी की कटाई और खरीफ की बुवाई के बीच गर्मी के समय सिंचाई की उपलब्धता होने पर कुछ फसलें उगाई जाती हैं।
प्रमुख उदाहरण:
तरबूज
खरबूजा
ककड़ी
कुछ सब्जियाँ
चारा फसलें
सिंचित क्षेत्रों में कुछ अल्पावधि फसलें
Exam Point: जायद को खरीफ और रबी की तरह विशाल क्षेत्र वाली मुख्य कृषि ऋतु समझना सही नहीं है। राजस्थान में इसका महत्व मुख्यतः सिंचित क्षेत्रों में है।
5. राजस्थान की प्रमुख फसलों की Master Table
फसल | ऋतु | प्रमुख क्षेत्र/क्षेत्रीय संबंध | प्रमुख विशेषता |
बाजरा | खरीफ | पश्चिमी व उत्तरी राजस्थान | शुष्क क्षेत्र की प्रमुख खाद्यान्न फसल |
गेहूँ | रबी | उत्तरी, पूर्वी एवं सिंचित क्षेत्र | प्रमुख रबी खाद्यान्न |
सरसों | रबी | पूर्वी एवं उत्तरी राजस्थान | प्रमुख तिलहनी फसल |
चना | रबी | पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी व शुष्क क्षेत्र | प्रमुख दलहन |
जौ | रबी | उत्तरी एवं शुष्क क्षेत्र | कम पानी में भी उपयुक्त |
ग्वार | खरीफ | पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी राजस्थान | औद्योगिक महत्व |
कपास | खरीफ | उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्र | प्रमुख नकदी फसल |
मूंगफली | खरीफ | पश्चिमी/दक्षिण-पश्चिमी एवं सिंचित क्षेत्र | प्रमुख तिलहन |
सोयाबीन | खरीफ | दक्षिण-पूर्वी राजस्थान | हाड़ौती क्षेत्र से विशेष संबंध |
मूंग | खरीफ | पश्चिमी एवं उत्तरी राजस्थान | प्रमुख दलहन |
मोठ | खरीफ | पश्चिमी राजस्थान | शुष्क क्षेत्र की दलहन |
ज्वार | खरीफ | दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों सहित कई भाग | खाद्यान्न/चारा |
मक्का | खरीफ | दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान | अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण |
तिल | खरीफ | पूर्वी/दक्षिणी एवं अन्य क्षेत्र | तिलहनी फसल |
तारामीरा | रबी | शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र | कम नमी वाले क्षेत्रों की फसल |
अरंडी | खरीफ | शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र | औद्योगिक तेल |
गन्ना | मुख्यतः खरीफ/दीर्घ अवधि | सिंचित क्षेत्र | सीमित क्षेत्र में महत्वपूर्ण |
6. बाजरा — राजस्थान की पहचान वाली प्रमुख फसल
6.1 बाजरा का महत्व
बाजरा राजस्थान की कृषि में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान की कम वर्षा और उच्च तापमान वाली परिस्थितियों में बाजरा एक उपयुक्त फसल है।
इसकी विशेषता है कि यह अपेक्षाकृत कम नमी में भी उत्पादन दे सकता है।
राजस्थान सरकार की 2025-26 आर्थिक समीक्षा के अनुसार 2023-24 में राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश में प्रथम था और देश के कुल उत्पादन में राजस्थान का योगदान 41.34% दर्ज किया गया।
बाजरा क्यों महत्वपूर्ण है?
कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए अनुकूल
गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित
ग्रामीण खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण
पशु चारे के रूप में उपयोगी
सूखा सहनशीलता के कारण मरुस्थलीय कृषि में महत्वपूर्ण
परीक्षा में याद रखें
राजस्थान → बाजरा → प्रथम
लेकिन यह ध्यान रखें कि “प्रथम” का संदर्भ उत्पादन से है, जब तक प्रश्न में क्षेत्रफल या उत्पादकता अलग से न पूछा गया हो।
7. गेहूँ — प्रमुख रबी खाद्यान्न
गेहूँ राजस्थान की प्रमुख रबी फसलों में से एक है।
गेहूँ को बाजरे की तुलना में अधिक नमी और विशेष रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसलिए राजस्थान में इसके प्रमुख क्षेत्र उन भागों में विकसित हुए हैं जहाँ नहर या भूजल आधारित सिंचाई उपलब्ध है।
प्रमुख क्षेत्रीय संबंध
श्रीगंगानगर
हनुमानगढ़
कोटा संभाग का सिंचित क्षेत्र
पूर्वी राजस्थान के सिंचित क्षेत्र
नहर कमांड क्षेत्र
उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में नहर सिंचाई के विस्तार ने कृषि की प्रकृति को काफी बदला है। हनुमानगढ़ जैसे क्षेत्रों में गेहूँ के साथ सरसों, कपास और चने की खेती भी महत्वपूर्ण है।
Exam Trap
बाजरा = मुख्यतः खरीफ
गेहूँ = मुख्यतः रबी
इन दोनों को उलट देना बहुत सामान्य गलती है।
8. सरसों — राजस्थान की प्रमुख तिलहनी फसल
राजस्थान सरसों उत्पादन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान रेपसीड एवं सरसों में देश में प्रथम रहा और देश के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 43.43% थी।
सरसों की विशेषताएँ
रबी फसल
तिलहनी फसल
अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु में अच्छी
खाद्य तेल के लिए महत्वपूर्ण
पूर्वी एवं उत्तरी राजस्थान में विशेष महत्व
परीक्षा ट्रिक
सरसों = रबी + तिलहन + राजस्थान प्रथम
9. चना — प्रमुख दलहनी रबी फसल
चना राजस्थान की प्रमुख दलहनी फसलों में से है।
यह कम से मध्यम नमी वाली परिस्थितियों में भी उगाया जाता है और राजस्थान के अनेक शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में इसका महत्व है।
चना की प्रमुख बातें
रबी फसल
दलहन
अपेक्षाकृत कम पानी में उत्पादन
भोजन में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत
राजस्थान के कई जिलों में व्यापक खेती
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान चना उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर था।
10. ग्वार — राजस्थान की विशिष्ट वाणिज्यिक फसल
ग्वार राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण विशिष्ट फसलों में से एक है।
इसे केवल सामान्य दलहनी/खाद्य फसल के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है। ग्वार का औद्योगिक महत्व भी बहुत अधिक है।
ग्वार से प्राप्त ग्वार गम का उपयोग विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।
ग्वार की विशेषताएँ
मुख्यतः खरीफ फसल
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उपयुक्त
पश्चिमी राजस्थान में महत्वपूर्ण
खाद्य एवं पशु आहार में उपयोग
ग्वार गम उद्योग के कारण वाणिज्यिक महत्व
2023-24 में राजस्थान ग्वार उत्पादन में देश में प्रथम था और देश के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 88.80% दर्ज की गई।
सबसे महत्वपूर्ण Exam Fact
ग्वार → राजस्थान → देश में प्रथम
11. कपास — उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख नकदी फसल
कपास राजस्थान की महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों में से एक है।
इसका संबंध विशेष रूप से उन क्षेत्रों से है जहाँ सिंचाई उपलब्ध है।
प्रमुख क्षेत्र
श्रीगंगानगर
हनुमानगढ़
आसपास के सिंचित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
कपास का महत्व केवल कृषि तक सीमित नहीं है। यह:
कपास → जिनिंग → स्पिनिंग → टेक्सटाइल उद्योग
की पूरी आर्थिक श्रृंखला से जुड़ा है।
राजस्थान की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और वस्त्र उद्योग के अध्ययन में कपास का महत्व इसलिए बढ़ जाता है। Suyog Academy के राजस्थान उद्योग नोट्स में भी सूती वस्त्र उद्योग को प्रमुख कृषि-आधारित उद्योगों में शामिल किया गया है।
12. मूंगफली — प्रमुख खरीफ तिलहन
मूंगफली राजस्थान की प्रमुख तिलहनी खरीफ फसलों में से है।
2023-24 में राजस्थान मूंगफली उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर था और राष्ट्रीय उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 19.91% थी।
याद रखने योग्य
मूंगफली = खरीफ + तिलहन + राजस्थान द्वितीय
13. सोयाबीन — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की प्रमुख फसल
सोयाबीन का संबंध विशेष रूप से राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी/हाड़ौती क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
यहाँ अपेक्षाकृत बेहतर वर्षा और काली मिट्टी जैसी परिस्थितियाँ सोयाबीन के लिए अनुकूल हैं।
प्रमुख क्षेत्रीय संबंध
हाड़ौती → सोयाबीन
यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी association है।
2023-24 में राजस्थान सोयाबीन उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर था।
14. मक्का
मक्का राजस्थान की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है।
इसका महत्व विशेष रूप से दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में देखा जाता है।
मक्का का उपयोग:
खाद्य पदार्थ
पशु आहार
पोल्ट्री फीड
स्टार्च
औद्योगिक उत्पाद
में किया जाता है।
राजस्थान सरकार के कृषि आँकड़ों में मक्का प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। 2024 के लिए प्रमाणित/उन्नत मक्का बीज की उपलब्धता 178,802 क्विंटल दर्ज की गई थी।
15. ज्वार
ज्वार राजस्थान की महत्वपूर्ण खरीफ फसलों में से है।
इसके उपयोग मुख्यतः:
खाद्यान्न
पशु चारा
चारे की फसल
के रूप में होते हैं।
ज्वार अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती है, इसलिए राजस्थान के कृषि पैटर्न में इसका महत्व बना हुआ है।
16. मूंग
मूंग राजस्थान की प्रमुख दलहनी खरीफ फसलों में है।
विशेष रूप से पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान में मूंग की खेती महत्वपूर्ण है।
Exam Association
मूंग → खरीफ → दलहन
राजस्थान सरकार के 2024 खरीफ बीज आँकड़ों में मूंग के लिए 135,888 क्विंटल प्रमाणित/उन्नत बीज उपलब्धता दर्ज की गई थी।
17. मोठ
मोठ को पश्चिमी राजस्थान की शुष्क कृषि से जोड़कर याद करना उपयोगी है।
यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलों में से है।
Exam Point
पश्चिमी राजस्थान की शुष्क कृषि में बाजरा + मोठ + मूंग + ग्वार का संयोजन महत्वपूर्ण है।
18. जौ
जौ प्रमुख रबी फसल है।
यह गेहूँ की तुलना में अपेक्षाकृत कम पानी वाली परिस्थितियों में भी उपयोगी हो सकती है।
राजस्थान सरकार के कृषि आँकड़ों में जौ को प्रमुख रबी फसल के रूप में शामिल किया गया है। 2024-25 के लिए जौ के प्रमाणित/उन्नत बीज की उपलब्धता 224,300 क्विंटल दर्ज की गई।
19. तारामीरा
तारामीरा राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क कृषि क्षेत्रों की महत्वपूर्ण तिलहनी रबी फसल है।
यह कम नमी वाली परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती है।
याद रखें
तारामीरा → रबी → तिलहन → शुष्क क्षेत्र
20. तिल
तिल खरीफ मौसम की प्रमुख तिलहनी फसल है।
यह अपेक्षाकृत कम अवधि वाली फसल हो सकती है और राजस्थान के कई क्षेत्रों में उगाई जाती है।
Exam Trap
तिल और तारामीरा को केवल नाम के आधार पर एक न समझें:
तिल → मुख्यतः खरीफ
तारामीरा → रबी
21. सोयाबीन, मूंगफली और सरसों में अंतर
आधार | सोयाबीन | मूंगफली | सरसों |
ऋतु | खरीफ | खरीफ | रबी |
वर्ग | तिलहन | तिलहन | तिलहन |
प्रमुख क्षेत्रीय संबंध | हाड़ौती | पश्चिमी/दक्षिण-पश्चिमी एवं सिंचित क्षेत्र | उत्तरी/पूर्वी राजस्थान |
राष्ट्रीय स्थिति | तृतीय | द्वितीय | प्रथम |
वर्ष | 2023-24 उत्पादन | 2023-24 उत्पादन | 2023-24 उत्पादन |
राष्ट्रीय रैंकिंग राजस्थान सरकार की 2025-26 आर्थिक समीक्षा में दी गई 2023-24 उत्पादन स्थिति पर आधारित है।
22. पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख फसलें
पश्चिमी राजस्थान में वर्षा कम और अनिश्चित है। इसलिए यहाँ कम पानी में विकसित होने वाली फसलों का महत्व अधिक है।
प्रमुख फसलें
बाजरा
ग्वार
मोठ
मूंग
तिल
तारामीरा
चना
सरसों
कुछ क्षेत्रों में मूंगफली
पश्चिमी कृषि की पहचान
कम वर्षा → सूखा-सहिष्णु फसलें → बाजरा/ग्वार/मोठ/मूंग
23. उत्तरी राजस्थान की प्रमुख फसलें
उत्तरी राजस्थान में नहर सिंचाई और अन्य सिंचाई साधनों के कारण कृषि का स्वरूप पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र से अलग है।
विशेष रूप से:
श्रीगंगानगर
हनुमानगढ़
क्षेत्र कृषि उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
प्रमुख फसलें
गेहूँ
कपास
सरसों
चना
बाजरा
ग्वार
हनुमानगढ़ में गेहूँ, सरसों, कपास और चना महत्वपूर्ण फसलों में शामिल हैं तथा नहर प्रणालियों ने क्षेत्र को राजस्थान के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में विकसित करने में योगदान दिया है।
24. दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की प्रमुख फसलें
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान को अपेक्षाकृत अधिक वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और कृषि की बेहतर परिस्थितियों के कारण राजस्थान का महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र माना जाता है।
प्रमुख फसलें
सोयाबीन
मक्का
गेहूँ
चना
सरसों
धनिया आदि
Exam Association
हाड़ौती → सोयाबीन
यह association RPSC/RSMSSB में कथन या मिलान प्रश्न के रूप में उपयोगी हो सकता है।
25. राजस्थान में फसल और मिट्टी का संबंध
फसल को समझने के लिए मिट्टी को अलग से पढ़ना उपयोगी है।
Suyog Academy के राजस्थान भूगोल रोडमैप में मिट्टी को कृषि के साथ संबंधित प्रमुख भूगोल इकाई के रूप में रखा गया है।
सामान्य संबंध
मिट्टी/क्षेत्र | प्रमुख फसल संबंध |
रेगिस्तानी/बलुई क्षेत्र | बाजरा, ग्वार, मोठ |
जलोढ़ क्षेत्र | गेहूँ, सरसों, कपास, चना |
काली मिट्टी क्षेत्र | सोयाबीन, गेहूँ आदि |
लाल/पीली मिट्टी वाले दक्षिणी क्षेत्र | मक्का, दालें आदि |
महत्वपूर्ण: केवल मिट्टी देखकर फसल तय नहीं होती। वर्षा, तापमान और सिंचाई को भी साथ में देखना चाहिए।
26. सिंचाई और फसल वितरण
राजस्थान में सिंचाई ने फसल पैटर्न को काफी प्रभावित किया है।
जहाँ वर्षा कम है लेकिन नहर या भूजल उपलब्ध है, वहाँ ऐसी फसलें भी उगाई जा सकती हैं जिन्हें प्राकृतिक वर्षा की स्थिति में उगाना कठिन होता।
सिंचाई का प्रभाव
नहर/भूजल → अधिक नमी → फसल विकल्प बढ़ना → रबी कृषि का विस्तार → गेहूँ/सरसों/चना आदि
Suyog Academy के बाँध एवं जलाशय नोट्स के अनुसार सिंचाई परियोजनाएँ फसल क्षेत्र, रबी फसलों, फसल विविधीकरण और सूखे के प्रभाव को प्रभावित करती हैं।
संबंधित अध्ययन
27. प्रमुख फसलें और कृषि-जलवायु का संबंध
राजस्थान में कृषि-जलवायु को समझने का सबसे सरल तरीका वर्षा की मात्रा और जल उपलब्धता के आधार पर फसल को देखना है।
कम वर्षा वाले क्षेत्र
बाजरा
ग्वार
मोठ
मूंग
तारामीरा
मध्यम वर्षा वाले क्षेत्र
चना
सरसों
ज्वार
मक्का
बाजरा
अधिक वर्षा/सिंचित क्षेत्र
गेहूँ
सोयाबीन
मक्का
सरसों
चना
28. राजस्थान की प्रमुख फसलों की राष्ट्रीय रैंकिंग
2025-26 की राजस्थान आर्थिक समीक्षा में 2023-24 उत्पादन के आधार पर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्थिति इस प्रकार दी गई है:
फसल/समूह | राजस्थान की स्थिति |
रेपसीड एवं सरसों | प्रथम |
बाजरा | प्रथम |
कुल तिलहन | प्रथम |
मोटे अनाज | प्रथम |
ग्वार | प्रथम |
मूंगफली | द्वितीय |
चना | तृतीय |
कुल दलहन | तृतीय |
सोयाबीन | तृतीय |
सबसे महत्वपूर्ण पाँच
बाजरा → 1st
सरसों → 1st
कुल तिलहन → 1st
मोटे अनाज → 1st
ग्वार → 1st
इन पाँच को एक साथ याद करना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।
29. उत्पादन बनाम उत्पादकता — बहुत महत्वपूर्ण अंतर
परीक्षा में एक महत्वपूर्ण trap है:
उत्पादन (Production) ≠ उत्पादकता (Productivity)
उत्पादन
कुल कितनी फसल पैदा हुई।
उत्पादकता
प्रति इकाई क्षेत्र से कितनी फसल प्राप्त हुई।
उदाहरण:
यदि राज्य A ने 10 लाख टन गेहूँ पैदा किया और राज्य B ने 8 लाख टन, तो केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि A की उत्पादकता अधिक है।
इसके लिए क्षेत्रफल भी देखना होगा।
राजस्थान की 2025-26 आर्थिक समीक्षा में 2024-25 के लिए अलग-अलग कृषि समूहों की उत्पादकता भी दी गई है, जैसे cereals की 2,537 kg/ha, pulses की 773 kg/ha और food grains की 1,940 kg/ha।
30. हालिया कृषि आँकड़ों से परीक्षा उपयोगिता
राजस्थान सरकार की कृषि सांख्यिकी प्रणाली में Area Estimates of Principal Crops 2024-25 सहित जिला-वार फसल क्षेत्र के आँकड़े उपलब्ध हैं। इससे स्पष्ट होता है कि फसल संबंधी प्रश्नों के लिए आधिकारिक कृषि आँकड़े महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
2024-25 के कृषि आँकड़ों में प्रमुख खरीफ फसलों के लिए प्रमाणित/उन्नत बीज उपलब्धता में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, सोयाबीन, मूंगफली, ग्वार और कपास जैसी फसलें शामिल थीं। इसी तरह रबी में गेहूँ, जौ, चना और सरसों प्रमुख रूप से दर्ज हैं।
31. राजस्थान की कृषि का फसल-वार आर्थिक महत्व
बाजरा
खाद्य सुरक्षा + पशु चारा + शुष्क कृषि
गेहूँ
खाद्यान्न + सिंचित कृषि + रबी कृषि
सरसों
खाद्य तेल + तिलहन अर्थव्यवस्था
चना
दलहन + प्रोटीन स्रोत
ग्वार
कृषि + ग्वार गम + निर्यात/औद्योगिक उपयोग
कपास
कृषि + जिनिंग + वस्त्र उद्योग
सोयाबीन
तिलहन + तेल उद्योग + दक्षिण-पूर्वी कृषि
मूंगफली
तिलहन + खाद्य तेल + प्रसंस्करण
इस प्रकार राजस्थान की कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई है।
32. कृषि और पशुपालन का संबंध
राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
कई फसलों के अवशेष पशु चारे के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
उदाहरण:
बाजरा → दाना + चारा
ज्वार → दाना + चारा
गेहूँ → भूसा
चना → चारा/अवशेष
इसलिए राजस्थान के कृषि प्रश्नों को पशुपालन से जोड़कर भी पूछा जा सकता है।
राजस्थान में पशुधन एवं पशुपालन भी राजस्थान भूगोल के कृषि-संबंधित अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
33. प्रमुख फसलें: One-Liner Revision
राजस्थान की प्रमुख खरीफ खाद्यान्न फसल — बाजरा
प्रमुख रबी खाद्यान्न फसल — गेहूँ
प्रमुख तिलहनी रबी फसल — सरसों
प्रमुख दलहनी रबी फसल — चना
प्रमुख औद्योगिक महत्व वाली खरीफ फसल — ग्वार
उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल — कपास
हाड़ौती क्षेत्र से प्रमुख संबंध — सोयाबीन
प्रमुख खरीफ तिलहन — मूंगफली
पश्चिमी राजस्थान की शुष्क दलहन — मोठ
कम वर्षा के लिए प्रसिद्ध फसल — बाजरा
ग्वार उत्पादन में राजस्थान — प्रथम
बाजरा उत्पादन में राजस्थान — प्रथम
सरसों उत्पादन में राजस्थान — प्रथम
कुल तिलहन उत्पादन में राजस्थान — प्रथम
मूंगफली उत्पादन में राजस्थान — द्वितीय
चना उत्पादन में राजस्थान — तृतीय
सोयाबीन उत्पादन में राजस्थान — तृतीय
राष्ट्रीय रैंकिंग 2023-24 उत्पादन पर आधारित है।
34. महत्वपूर्ण तुलना
बाजरा बनाम गेहूँ
आधार | बाजरा | गेहूँ |
ऋतु | खरीफ | रबी |
जल आवश्यकता | अपेक्षाकृत कम | अधिक |
जलवायु | गर्म/शुष्क | ठंडी/मध्यम |
क्षेत्र | पश्चिमी/उत्तरी | सिंचित/पूर्वी/उत्तरी |
महत्व | शुष्क कृषि | सिंचित रबी कृषि |
ग्वार बनाम कपास
आधार | ग्वार | कपास |
ऋतु | खरीफ | खरीफ |
क्षेत्र | पश्चिमी/उत्तर-पश्चिमी | उत्तर-पश्चिमी सिंचित |
प्रमुख महत्व | ग्वार गम | वस्त्र उद्योग |
जल आवश्यकता | अपेक्षाकृत कम | अधिक सिंचाई/नमी की आवश्यकता |
आर्थिक स्वरूप | वाणिज्यिक | नकदी/औद्योगिक |
35. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण Timeline
कृषि अध्ययन की अवधारणा
मानसून आगमन → खरीफ बुवाई → खरीफ फसल वृद्धि → खरीफ कटाई → रबी बुवाई → शीत ऋतु → रबी फसल वृद्धि → रबी कटाई → जायद
इसे इस प्रकार याद करें:
वर्षा = खरीफ
सर्दी = रबी
गर्मी + सिंचाई = जायद
36. Exam Trap Section
Trap 1: बाजरा और गेहूँ को उलट देना
बाजरा → खरीफ
गेहूँ → रबी
Trap 2: सरसों को खरीफ समझना
सरसों प्रमुख रबी तिलहनी फसल है।
Trap 3: ग्वार को केवल खाद्य फसल समझना
ग्वार का औद्योगिक महत्व बहुत अधिक है, विशेषकर ग्वार गम के कारण।
Trap 4: उत्पादन और उत्पादकता को समान मानना
राष्ट्रीय प्रथम स्थान का प्रश्न अक्सर उत्पादन से संबंधित होता है। यदि प्रश्न में उत्पादकता पूछा गया है तो अलग आँकड़े देखने होंगे।
Trap 5: सोयाबीन = पूरे राजस्थान की प्रमुख फसल
सोयाबीन को विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी/हाड़ौती क्षेत्र से जोड़ना अधिक उपयोगी है।
Trap 6: कपास = पूरे पश्चिमी राजस्थान की फसल
कपास का विशेष महत्व उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्रों में है।
Trap 7: मूंग और मोठ को एक मानना
दोनों दलहनी खरीफ फसलें हैं, लेकिन उनके क्षेत्रीय संबंध अलग-अलग तरीके से पूछे जा सकते हैं।
Trap 8: रैंकिंग का वर्ष भूलना
“राजस्थान प्रथम है” लिखते समय यह देखना आवश्यक है कि आँकड़ा किस वर्ष का है।
2025-26 की आर्थिक समीक्षा में दी गई तालिका 2023-24 के उत्पादन पर आधारित है।
37. Memory Tricks
Trick 1 — राजस्थान की प्रथम रैंक वाली प्रमुख चीजें
“बा-स-ति-मो-गु”
बा = बाजरा
स = सरसों
ति = तिलहन
मो = मोटे अनाज
गु = ग्वार
इन पाँच को प्रथम से जोड़ें।
Trick 2 — खरीफ
“बा-ज्वा-मू-मो-गु-मू-क-ति”
बाजरा
ज्वार
मूंग
मोठ
ग्वार
मूंगफली
कपास
तिल
Trick 3 — रबी
“गे-च-सर-ज-ता”
गेहूँ
चना
सरसों
जौ
तारामीरा
38. संभावित कथन आधारित प्रश्नों के लिए तथ्य
कथन 1
“राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश में प्रथम है।”
सही।
कथन 2
“राजस्थान सरसों उत्पादन में देश में द्वितीय है।”
गलत। 2023-24 उत्पादन के आधार पर राजस्थान प्रथम था।
कथन 3
“ग्वार राजस्थान की प्रमुख वाणिज्यिक फसलों में से एक है।”
सही।
कथन 4
“सोयाबीन का प्रमुख संबंध राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से है।”
सही।
कथन 5
“गेहूँ खरीफ की प्रमुख फसल है।”
गलत। गेहूँ प्रमुख रबी फसल है।
39. राजस्थान की प्रमुख फसलें — अंतिम Revision Chart
राजस्थान की प्रमुख फसलें
│
┌──────────────────┼──────────────────┐
│ │ │
खरीफ रबी जायद
│ │ │
बाजरा गेहूँ तरबूज
ज्वार जौ खरबूजा
मक्का चना सब्जियाँ
ग्वार सरसों
मूंग तारामीरा
मोठ अलसी
मूंगफली
सोयाबीन
कपास
तिल
40. परीक्षा से एक दिन पहले क्या पढ़ें?
यदि परीक्षा से पहले केवल 10 मिनट हैं, तो यह सूची पढ़ें:
सबसे पहले
बाजरा — खरीफ
गेहूँ — रबी
सरसों — रबी + तिलहन
चना — रबी + दलहन
ग्वार — खरीफ + औद्योगिक
कपास — खरीफ + उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्र
सोयाबीन — खरीफ + हाड़ौती
मूंगफली — खरीफ + तिलहन
मूंग — खरीफ + दलहन
मोठ — खरीफ + शुष्क क्षेत्र
फिर राष्ट्रीय रैंकिंग
प्रथम: बाजरा, सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज, ग्वार
द्वितीय: मूंगफली
तृतीय: चना, कुल दलहन, सोयाबीन
41. संबंधित Suyog Academy Notes
राजस्थान की प्रमुख फसलों को अच्छी तरह समझने के लिए केवल फसल सूची याद करना पर्याप्त नहीं है। वर्षा + मिट्टी + सिंचाई + कृषि-जलवायु + पशुपालन को साथ में पढ़ने से प्रश्नों को बेहतर तरीके से हल किया जा सकता है।
Recommended Internal Study Links
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42. Quiz / Mock Test
इस अध्याय को पढ़ने के बाद राजस्थान भूगोल के Agriculture & Crops MCQs अवश्य हल करें।
अध्याय → Revision → MCQs → गलत प्रश्नों की दोबारा तैयारी
Suyog Academy पर राजस्थान भूगोल के अन्य अध्याय और अभ्यास सामग्री भी उपलब्ध हैं।
Quiz Link:
https://suyogacademy.com/notes/rajasthan-geography
43. निष्कर्ष
राजस्थान की कृषि को समझने का सबसे अच्छा तरीका केवल फसलों की सूची याद करना नहीं है, बल्कि फसल + ऋतु + वर्षा + मिट्टी + सिंचाई + क्षेत्र + आर्थिक महत्व को एक साथ जोड़ना है।
राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा के कारण बाजरा, ग्वार, मोठ और मूंग जैसी फसलें महत्वपूर्ण हैं। उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्रों में गेहूँ, कपास, सरसों और चना का महत्व बढ़ जाता है। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में अपेक्षाकृत बेहतर वर्षा और मिट्टी के कारण सोयाबीन, मक्का, गेहूँ और चना जैसी फसलें महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की विशेष पहचान बाजरा, सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज और ग्वार के उत्पादन में प्रथम स्थान से बनती है, जबकि मूंगफली दूसरे तथा चना और सोयाबीन तीसरे स्थान पर रहे हैं—ये रैंकिंग 2023-24 उत्पादन पर आधारित 2025-26 राजस्थान आर्थिक समीक्षा में दी गई है।
इसलिए परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है:
“राजस्थान की कृषि = जलवायु + वर्षा + मिट्टी + सिंचाई + फसल क्षेत्र + राष्ट्रीय उत्पादन”
और अंतिम रिवीजन के लिए:
बाजरा–खरीफ | गेहूँ–रबी | सरसों–तिलहन | चना–दलहन | ग्वार–औद्योगिक | कपास–उत्तर-पश्चिम | सोयाबीन–हाड़ौती
Author Byline
लेखक: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम
विषय विशेषज्ञता: राजस्थान भूगोल एवं प्रतियोगी परीक्षा अध्ययन सामग्री
प्लेटफॉर्म:Suyog Academy
उपयोगी परीक्षाएँ: RAS, RPSC, Rajasthan CET, Patwari, VDO, REET, RSMSSB एवं अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाएँ
स्रोत एवं तथ्य-जांच: राजस्थान सरकार की Economic Review तथा Agriculture Statistics के उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर।
सुयोग AI गुरु
पढ़ने के बाद मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

Rajasthan GK Abhikathan-Karan (कथन-कारण प्रश्न) 1000+ MCQs | RPSC & RSMSSB New Exam Pattern
1000+ अभिकथन-कारण प्रश्न: RPSC और RSMSSB के latest exam pattern और recent papers पर आधारित - बिल्कुल वैसे जैसे अब exam में आते हैं।
🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख खरीफ फसल है?
Rajasthan CET 2024Q2. राजस्थान की प्रमुख रबी तिलहनी फसल कौन-सी है?
RPSC 2023Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल मुख्यतः रबी मौसम में बोई जाती है?
Rajasthan Patwari 2021Q4. ग्वार का राजस्थान की कृषि में विशेष महत्व मुख्यतः किस कारण से है?
RPSC 2022Q5. हाड़ौती क्षेत्र में निम्नलिखित में से किस फसल का विशेष महत्व है?
Rajasthan CET Graduation 2024Q6. राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्र में निम्नलिखित में से कौन-सी फसल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है?
RSMSSB 2022Q7. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल खरीफ तिलहन का उदाहरण है?
Rajasthan CET 2023Q8. राजस्थान में शुष्क कृषि के साथ निम्नलिखित में से किस फसल का सबसे अधिक संबंध है?
REET 2022Q9. निम्नलिखित में से कौन-सा फसल-ऋतु युग्म सही है?
Rajasthan Police 2020Q10. राजस्थान में मोठ की खेती का संबंध मुख्यतः किस प्रकार के क्षेत्र से है?
Rajasthan VDO 2021Q11. राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख दलहनी रबी फसल है?
RPSC 2021Q12. तारामीरा के संबंध में सही कथन कौन-सा है?
Rajasthan CET 2022Q13. राजस्थान में खरीफ फसलों की बुवाई मुख्यतः किस प्राकृतिक घटना के बाद शुरू होती है?
Rajasthan CET 2024Q14. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म राजस्थान की शुष्क कृषि के लिए अधिक उपयुक्त है?
Rajasthan Patwari 2019Q15. राजस्थान की कृषि में नहर सिंचाई के विस्तार का प्रमुख प्रभाव क्या रहा है?
RPSC 2020Q16. निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्थान की प्रमुख खरीफ दलहनी फसल का उदाहरण है?
REET 2021Q17. कपास की खेती राजस्थान के किस क्षेत्र में विशेष रूप से विकसित हुई है?
Rajasthan CET Graduation 2023Q18. 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान का ग्वार उत्पादन में राष्ट्रीय स्थान क्या था?
RPSC 2025Q19. 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान बाजरा उत्पादन में किस स्थान पर रहा?
Rajasthan CET 2025Q20. 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान रेपसीड एवं सरसों उत्पादन में किस स्थान पर था?
RPSC 2025Q21. 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान मूंगफली उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर किस स्थान पर था?
Rajasthan CET Graduation 2025Q22. 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान सोयाबीन उत्पादन में किस राष्ट्रीय स्थान पर रहा?
RPSC 2025Q23. राजस्थान में गेहूँ की खेती के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है?
Rajasthan Patwari 2021Q24. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग की कृषि से अधिक संबंधित है?
Rajasthan CET 2023Q25. फसल उत्पादन और उत्पादकता के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
RPSC 2022Q26. राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन-सी फसल कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल है?
Rajasthan Police 2021Q27. निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्थान की प्रमुख रबी फसलों का सही समूह है?
Rajasthan VDO 2022Q28. निम्नलिखित में से कौन-सा खरीफ फसलों का सही समूह है?
REET 2023Q29. ग्वार का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद कौन-सा है?
RPSC 2024Q30. राजस्थान की कृषि में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली शीतकालीन वर्षा किस फसल समूह के लिए उपयोगी हो सकती है?
Rajasthan CET Graduation 2022महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राजस्थान की प्रमुख फसलों में बाजरा, गेहूँ, सरसों, चना, ज्वार, मक्का, ग्वार, कपास, मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, मोठ और तारामीरा प्रमुख हैं।
बाजरा राजस्थान की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है और विशेष रूप से कम वर्षा वाले पश्चिमी एवं उत्तरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
गेहूँ राजस्थान की प्रमुख रबी खाद्यान्न फसलों में से एक है। इसके अलावा सरसों, चना और जौ भी प्रमुख रबी फसलें हैं।
सरसों मुख्यतः रबी ऋतु की तिलहनी फसल है। राजस्थान सरसों उत्पादन के लिए देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है।
बाजरा मुख्यतः खरीफ ऋतु में उगाया जाता है। यह गर्म और कम वर्षा वाली परिस्थितियों के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल फसल है।
ग्वार राजस्थान की महत्वपूर्ण खरीफ एवं वाणिज्यिक फसल है। इससे प्राप्त ग्वार गम का विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग होता है।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान देश में ग्वार उत्पादन में प्रथम स्थान पर था।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान देश में बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान पर था।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान रेपसीड एवं सरसों के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर था।
मूंगफली राजस्थान की प्रमुख खरीफ तिलहनी फसलों में से एक है। 2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान देश में मूंगफली उत्पादन में दूसरे स्थान पर था।
सोयाबीन की खेती राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग, विशेषकर हाड़ौती क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान देश में सोयाबीन उत्पादन में तीसरे स्थान पर था।
चना मुख्यतः रबी मौसम की प्रमुख दलहनी फसल है।
मूंग मुख्यतः खरीफ मौसम की प्रमुख दलहनी फसल है।
मोठ खरीफ मौसम की प्रमुख दलहनी फसल है और इसका संबंध विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान की शुष्क कृषि से है।
तारामीरा मुख्यतः रबी मौसम की तिलहनी फसल है और शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है।
कपास का विशेष महत्व राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी सिंचित क्षेत्रों, विशेषकर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ क्षेत्र में है।
गेहूँ रबी फसल है और इसके लिए पर्याप्त नमी आवश्यक होती है। इसलिए नहर एवं भूजल आधारित सिंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी खेती अधिक विकसित है।
शुष्क कृषि में बाजरा, ग्वार, मोठ और मूंग जैसी कम वर्षा के अनुकूल फसलों का विशेष महत्व है।
वर्षा, तापमान, मिट्टी, सिंचाई, कृषि-जलवायु, मानसून, बाजार और कृषि तकनीक राजस्थान में फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
खरीफ फसलों की बुवाई सामान्यतः मानसून के आगमन के आसपास शुरू होती है और इनका विकास गर्म एवं वर्षा वाली परिस्थितियों में होता है।
गेहूँ, जौ, चना, सरसों और तारामीरा राजस्थान की प्रमुख रबी फसलों में शामिल हैं।
बाजरा, ज्वार, मक्का, ग्वार, मूंग, मोठ, मूंगफली, सोयाबीन, कपास और तिल प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल हैं।
ज्वार राजस्थान की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है और इसका उपयोग खाद्यान्न तथा पशु चारे के रूप में किया जाता है।
मक्का का महत्व विशेष रूप से दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में है।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान कुल तिलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर था।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान मोटे अनाज के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर था।
2023-24 के उत्पादन के आधार पर राजस्थान कुल दलहन उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर था।
नहर सिंचाई के विस्तार से शुष्क क्षेत्रों में सिंचित कृषि का विस्तार हुआ तथा गेहूँ, कपास, सरसों और अन्य फसलों के उत्पादन की संभावनाएँ बढ़ीं।
मिट्टी फसल की उपयुक्तता को प्रभावित करती है, लेकिन फसल चयन केवल मिट्टी पर निर्भर नहीं करता। वर्षा, तापमान और सिंचाई भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाजरा गर्म एवं अपेक्षाकृत कम वर्षा वाली परिस्थितियों में भी अच्छी तरह उग सकता है, इसलिए पश्चिमी राजस्थान की शुष्क कृषि में इसका विशेष महत्व है।
उत्पादन से कुल प्राप्त फसल की मात्रा का पता चलता है, जबकि उत्पादकता सामान्यतः प्रति इकाई क्षेत्र प्राप्त उत्पादन को दर्शाती है।
कृषि और पशुपालन एक-दूसरे से जुड़े हैं। बाजरा, ज्वार और गेहूँ जैसी फसलों के दाने, भूसे या अवशेष पशु आहार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
जायद फसलें रबी की कटाई और खरीफ की बुवाई के बीच गर्मी के मौसम में सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर उगाई जाती हैं। राजस्थान में तरबूज, खरबूजा, ककड़ी और कुछ सब्जियाँ इसके उदाहरण हैं।
मानसून खरीफ कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्षा की मात्रा और वितरण बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ, मक्का जैसी खरीफ फसलों के क्षेत्र एवं उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
फसल विविधीकरण से किसान केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहता और जल उपलब्धता, बाजार, मिट्टी तथा जलवायु के अनुसार अलग-अलग फसलों का चयन कर सकता है।
इस विषय से फसल-ऋतु, फसल-क्षेत्र, फसल-मिट्टी, सिंचाई, राष्ट्रीय उत्पादन रैंकिंग, कृषि-जलवायु तथा कथन और मिलान आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
खरीफ के लिए बाजरा, ज्वार, मक्का, ग्वार, मूंग, मोठ, मूंगफली, सोयाबीन और कपास तथा रबी के लिए गेहूँ, चना, सरसों, जौ और तारामीरा को समूह में याद करना उपयोगी है।