लूनी नदी — पश्चिमी राजस्थान की मरुगंगा (Luni River Rajasthan)

संक्षिप्त उत्तर (Quick Answer Box)
लूनी नदी पश्चिमी राजस्थान की सबसे प्रमुख नदी है, जिसका उद्गम अजमेर जिले में आनासागर झील के निकट नाग पहाड़ी से होता है। यह भारत की एकमात्र प्रमुख अंतःप्रवाही (inland-draining) नदी मानी जाती है, क्योंकि यह समुद्र में सीधे नहीं गिरती बल्कि राजस्थान में लगभग 330 किमी बहने के बाद गुजरात में कच्छ के रन के दलदली, खारे क्षेत्र में जाकर विलुप्त हो जाती है। इसे "राजस्थान की मरुगंगा" कहा जाता है, क्योंकि यह पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र (नागौर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर) की जीवन-रेखा है। इसका पानी उद्गम पर मीठा होता है, परंतु बालोतरा के बाद यह खारा हो जाता है — यही इसकी सबसे विशिष्ट पहचान है।
1. परिचय — नाम, प्राचीन नाम और पहचान
लूनी नदी का नाम संस्कृत शब्द "लवण" (नमक) से बना है, जिसका अर्थ है "खारी नदी", क्योंकि बालोतरा क्षेत्र के बाद इसका जल अत्यधिक लवणीय (नमकीन) हो जाता है। इसका प्राचीन नाम लवणवती (या लवणाद्रि) था। उद्गम स्थल पर इसे पहले सागरमती और फिर सरस्वती नाम से भी जाना जाता है — अर्थात एक ही नदी का नामकरण उसके प्रवाह-चरण के अनुसार बदलता है। महाकवि कालिदास ने इसे "अंतःसलिला" कहा था, जो इसके अंतःप्रवाही (भूमि में ही विलुप्त होने वाली) स्वभाव को दर्शाता है।
अन्य प्रचलित नाम: साक्री, खारी-मीठी नदी।
⚠️ सत्यापन सलाह: लूनी की कुल लंबाई को लेकर स्रोतों में भिन्नता है — कुछ स्रोत 320 किमी तो कुछ 330 किमी दर्ज करते हैं। परीक्षा उत्तर देने से पहले RPSC आधिकारिक सिलेबस व राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल से अंतिम आँकड़ा अवश्य सत्यापित करें।
2. उद्गम स्थल
लूनी नदी का उद्गम अजमेर जिले में अरावली पर्वतमाला की नाग पहाड़ी से होता है, जो प्रसिद्ध आनासागर झील के निकट स्थित है। यह अरावली की पश्चिमी-दक्षिणी ढलानों से जल एकत्र करती हुई आगे बढ़ती है।
उद्गम बिंदु के प्रमुख तथ्य:
- पर्वत श्रृंखला: अरावली (पश्चिमी ढलान)
- स्थान: नाग पहाड़ी, आनासागर झील के निकट
- जिला: अजमेर
- उद्गम पर नाम: सागरमती / सरस्वती
3. प्रवाह मार्ग (जिलेवार)
लूनी नदी अपने उद्गम से गुजरात सीमा तक निम्न क्रम में जिलों से होकर बहती है:
अजमेर → नागौर → ब्यावर/पाली → जोधपुर (ग्रामीण) → बालोतरा → बाड़मेर → जालौर → (गुजरात के कच्छ जिले में प्रवेश)
लूनी अपने प्रवाह में बालोतरा और गुड़ामालानी जैसे शहरों को स्पर्श करती है, जो इसके तट पर बसे प्रमुख कस्बे हैं। नदी की सबसे विशिष्ट भौगोलिक घटना यह है कि बालोतरा (जोधपुर-बाड़मेर सीमा क्षेत्र) से पहले तक इसका जल मीठा रहता है, परंतु बालोतरा के बाद रेगिस्तानी भूभाग व लवणीय मृदा के संपर्क से यह खारा हो जाता है।
नदी अंततः राजस्थान की सीमा पार कर गुजरात के कच्छ जिले में प्रवेश करती है और वहाँ के दलदली रन क्षेत्र (कच्छ का रन) में जाकर विलुप्त (लुप्त) हो जाती है — यह अरब सागर से सीधे नहीं जुड़ती, इसलिए इसे अंतःप्रवाही नदी (inland/endorheic drainage) कहा जाता है।
📝 महत्वपूर्ण तथ्य: लूनी नदी का बाढ़ क्षेत्र (Flood Plain) जालौर जिले में "रेल" या "नेड़ा" कहलाता है।
4. अपवाह तंत्र में स्थान
यद्यपि परंपरागत रूप से लूनी को "अरब सागर अपवाह तंत्र" की नदी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है (क्योंकि इसकी दिशा अरब सागर की ओर है और कच्छ का रन अरब सागर से जुड़ा खारा दलदली क्षेत्र है), किंतु व्यावहारिक रूप से यह किसी भी सागर में सीधे विलीन नहीं होती — यह रेत व दलदल में सोखकर लुप्त हो जाती है। इसी विशेषता के कारण भूगोल की दृष्टि से इसे भारत की एकमात्र प्रमुख अंतःप्रवाही नदी का दर्जा दिया जाता है।
जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area): लगभग 34,250 वर्ग किमी, जो राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय भाग का एक बड़ा हिस्सा कवर करता है।
5. सहायक नदियाँ (Tributaries)
लूनी नदी तंत्र में कई छोटी-बड़ी मौसमी सहायक नदियाँ मिलती हैं, जो मुख्यतः अरावली की दक्षिण-पश्चिमी ढलानों से निकलती हैं।
उद्गम से संगम तक क्रम (अवरोही क्रम)
जोजड़ी → गुहिया → बांडी → लीलड़ी → मीठड़ी → सुकड़ी → जवाई → खारी → सागी
| सहायक नदी | उद्गम स्थान | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| जोजड़ी | नागौर (एकमात्र सहायक नदी जो दायें/उत्तर दिशा से मिलती है) | अरावली से नहीं, बल्कि नागौर के मैदानी भाग से निकलती है |
| लीलड़ी | जवाजा के निकट, अजमेर | पाली जिले में लूनी से संगम |
| मीठड़ी | अरावली (पाली तहसील) | पवाला गाँव के निकट लूनी में मिलती है |
| जवाई | गोरिया गाँव, पाली तहसील | लूनी की सबसे प्रमुख सहायक नदी; जवाई बांध इसी पर स्थित |
| सुकड़ी | सेर गाँव, सिरोही | जालौर के सायला गाँव में जवाई से मिलकर आगे "सुकड़ी-2" कहलाती है |
| बांडी | अरावली श्रेणी | हेमावास बांध इसी नदी पर स्थित |
| खारी | — | जवाई व सुकड़ी के बाद बिराना गाँव में जवाई से संगम |
| सागी | सिरोही की अरावली पहाड़ियाँ | जालौर होते हुए बाड़मेर में लूनी से मिलती है |
| गुहिया | — | जोजड़ी के बाद क्रम में आने वाली सहायक नदी |
📝 परीक्षा टिप: सबसे अधिक पूछी जाने वाली सहायक नदी जवाई है, क्योंकि इसी पर पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध (जवाई बांध) स्थित है। इसके अतिरिक्त "जोजड़ी अरावली से नहीं बल्कि नागौर से निकलती है" — यह एक बार-बार पूछा जाने वाला अपवाद-तथ्य है।
6. जवाई बांध — लूनी तंत्र की सबसे बड़ी परियोजना
लूनी की सहायक नदी जवाई पर बना जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजना है।
प्रमुख तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | सुमेरपुर कस्बा, पाली जिला |
| नदी | जवाई नदी (लूनी की सहायक) |
| दर्जा | पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध |
| उपनाम | "मारवाड़ का अमृत सरोवर" |
| सहायक जलापूर्ति | सेई जल सुरंग (उदयपुर-पाली के मध्य), जल की कमी होने पर पूर्ति हेतु |
अन्य संबंधित बांध
- हेमावास बांध — बांडी नदी (लूनी की सहायक) पर स्थित
- बांकली बांध — सुकड़ी नदी (लूनी की सहायक) पर, जालौर जिले में स्थित
- जसवंत सागर बांध (पिचियाक बांध) — जोधपुर में स्थित, जिसकी जलापूर्ति आंशिक रूप से लूनी नदी से होती है
7. भौगोलिक व आर्थिक महत्व
- पश्चिमी राजस्थान की एकमात्र प्रमुख नदी: नागौर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर जैसे शुष्क जिलों के लिए यह जल का प्रमुख स्रोत है।
- मौसमी प्रकृति: लूनी विशुद्ध रूप से वर्षा-आधारित मौसमी नदी है, जो केवल मानसून काल में सक्रिय रूप से प्रवाहित होती है और शेष वर्ष प्रायः शुष्क रहती है।
- लवणता का आर्थिक उपयोग: बालोतरा के बाद के क्षेत्र में नदी की खारी मिट्टी व जल का उपयोग परंपरागत रूप से नमक उत्पादन व टेक्सटाइल डाइंग उद्योग (बालोतरा वस्त्र रंगाई उद्योग) में होता आया है।
- बाढ़ क्षेत्र "रेल/नेड़ा": जालौर जिले में लूनी के बाढ़-मैदान की उपजाऊ भूमि परंपरागत कृषि के लिए महत्वपूर्ण रही है।
- भारत की अनूठी भौगोलिक पहचान: भारत की एकमात्र प्रमुख अंतःप्रवाही नदी होने के कारण यह भारतीय भूगोल की परीक्षाओं (UPSC सहित) में भी एक चर्चित टॉपिक है।
8. लूनी नदी का पर्यावरणीय संकट — प्रदूषण व अतिक्रमण
लूनी नदी, जो कभी वर्ष में लगभग आठ महीने प्रवाहित रहती थी और जोधपुर, पाली व बाड़मेर के गाँवों की खेती व पेयजल आवश्यकता पूरी करती थी, आज गंभीर पर्यावरणीय संकट से गुजर रही है। इसका मुख्य कारण बालोतरा, जसोल, बिठूजा व पाली क्षेत्र में स्थापित टेक्सटाइल (वस्त्र रंगाई-छपाई) उद्योग से निकलने वाला अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट है।
संकट के प्रमुख कारण:
- टेक्सटाइल फैक्ट्रियों का रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी व सहायक नदियों (जोजड़ी, बांडी) में छोड़ा जाना
- भूमिगत मीठे जल स्रोतों का रासायनिक प्रदूषण से जहरीला होना
- नदी तल व किनारों पर अतिक्रमण
- वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण घटता प्राकृतिक प्रवाह
सुधार के प्रयास: राज्य सरकार द्वारा बालोतरा में जल उपचार संयंत्र (Water Treatment Plant) स्थापित किए गए हैं, तथा प्रदूषित रासायनिक जल को एक अलग ड्रेन सिस्टम के माध्यम से सीधे कच्छ की खाड़ी तक पहुँचाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, ताकि यह कृषि भूमि व भूजल को दूषित न करे। इसके बावजूद मानसून के दौरान फैक्ट्रियों का दूषित जल अब भी नदी में बहाए जाने की घटनाएँ सामने आती रही हैं, और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्तर पर भी इस पर निगरानी व कार्रवाई जारी है।
📝 करेंट अफेयर्स कनेक्ट: लूनी, जोजड़ी व बांडी नदी प्रदूषण मामले में राज्य स्तरीय SIT (विशेष जाँच दल) द्वारा बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों में जाँच की कार्यवाही समय-समय पर होती रही है — यह विषय साक्षात्कार व मुख्य परीक्षा के लिए उपयोगी समसामयिक (current affairs) एंगल है।
9. बाढ़ का इतिहास — जब मरुस्थल की नदी उफान पर आई
सामान्यतः शुष्क रहने वाली लूनी नदी असाधारण वर्षा की स्थिति में भी विनाशकारी बाढ़ ला चुकी है, क्योंकि इसका तल उथला (shallow) है और किनारों की मिट्टी रेतीली व कटाव-प्रवण है, जिससे जल स्तर बहुत तेज़ी से बढ़ता है।
- 2006 की बाढ़: पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में हुई असाधारण भारी वर्षा के कारण लूनी में जल स्तर 15 से 25 फीट (लगभग 5-8 मीटर) तक बढ़ गया, जिससे बाड़मेर जिले के कई हिस्से जलमग्न हो गए और बड़ी संख्या में जन-धन की हानि हुई। यह लूनी नदी के इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ मानी जाती है।
- 2010 की बाढ़: एक और बड़ी बाढ़ आई, हालाँकि जनहानि 2006 की तुलना में कम रही।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मौसमी व शुष्क नदी होने के बावजूद लूनी अचानक बाढ़ (flash flood) की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है — यह तथ्य आपदा प्रबंधन (Disaster Management) से जुड़े प्रश्नों में भी संदर्भित किया जाता है।
10. सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व
लूनी नदी बेसिन पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़ क्षेत्र) की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा है:
- मारवाड़ की जीवनरेखा: जोधपुर, पाली व बाड़मेर क्षेत्र की परंपरागत कृषि, पशुपालन व ग्रामीण अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से लूनी व इसकी सहायक नदियों के मौसमी जल पर निर्भर रही है।
- ओसियाँ व परिक्षेत्र: लूनी बेसिन के निकटवर्ती क्षेत्रों में प्राचीन मंदिर स्थापत्य (जैसे ओसियाँ के मंदिर समूह) पाए जाते हैं, जो दर्शाता है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही बसाव योग्य व समृद्ध रहा है।
- लोक-स्मृति में स्थान: लूनी को स्थानीय लोकगीतों व कहावतों में मरुस्थल के बीच "जीवन की आस" के प्रतीक रूप में वर्णित किया जाता रहा है, जो इसके नाम "मरुगंगा" की सार्थकता को और पुष्ट करता है।
तुलनात्मक तालिका — लूनी बनाम राजस्थान की अन्य प्रमुख नदियाँ
| नदी | उद्गम | अपवाह तंत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|
| लूनी | नाग पहाड़ी, अजमेर (आनासागर के निकट) | अंतःप्रवाही (कच्छ का रन) | भारत की एकमात्र प्रमुख अंतःप्रवाही नदी, जल खारा |
| बनास | खमनोर पहाड़ी, राजसमंद | बंगाल की खाड़ी (चंबल-यमुना-गंगा) | पूर्णतः राजस्थान में प्रवाहित, मीठे जल की नदी |
| साबरमती | कोटड़ा की पहाड़ियाँ, उदयपुर | अरब सागर (सीधे) | गुजरात होकर सीधे अरब सागर में गिरती है |
| माही | धार जिला, मध्य प्रदेश | अरब सागर (खंभात की खाड़ी) | गुजरात से होकर सागर में मिलती है |
Exam Trap — विद्यार्थी अक्सर यहाँ भ्रमित होते हैं
- लूनी बनाम बनास: "पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली नदी" पूछे जाने पर छात्र प्रायः लूनी को चुन बैठते हैं — जबकि लूनी राज्य से बाहर गुजरात के कच्छ के रन में जाकर विलुप्त होती है, जबकि बनास का संगम भी राज्य के भीतर ही (सवाई माधोपुर में) होता है। "पूर्ण चक्र राजस्थान में" वाला उत्तर सदैव बनास है, लूनी नहीं।
- अंतःप्रवाही होने का अर्थ: कई छात्र मान लेते हैं कि लूनी अरब सागर में मिलती है — वास्तव में यह सीधे किसी सागर में नहीं गिरती, बल्कि कच्छ के रन के दलदली-खारे क्षेत्र में समाप्त (विलुप्त) हो जाती है, इसीलिए इसे अंतःप्रवाही (endorheic) नदी कहा जाता है।
- जल की प्रकृति में बदलाव: प्रश्न प्रायः पूछते हैं "लूनी का पानी कहाँ से खारा होना शुरू होता है" — सही उत्तर बालोतरा है, न कि जोधपुर या पाली।
- उद्गम स्थल के नाम बदलना: शुरुआती चरण में इसे सागरमती/सरस्वती कहा जाता है — छात्र इसे भ्रमवश किसी अन्य नदी का नाम समझ लेते हैं।
- जोजड़ी नदी का अपवाद: लूनी की सभी सहायक नदियाँ अरावली से निकलती हैं, परंतु जोजड़ी नागौर के मैदानी क्षेत्र से निकलती है — यह एक सामान्य ट्रैप प्रश्न है।
- जवाई बांध का जिला: जवाई बांध को अक्सर छात्र जोधपुर जिले में स्थित मान लेते हैं, जबकि यह वास्तव में पाली जिले के सुमेरपुर में स्थित है।
- प्रदूषण का स्रोत: लूनी प्रदूषण के लिए अक्सर छात्र "सीवेज" को मुख्य कारण मान लेते हैं, जबकि प्रश्नपत्रों में मान्य उत्तर बालोतरा-पाली क्षेत्र का टेक्सटाइल (रंगाई-छपाई) उद्योग अपशिष्ट है।
- सबसे विनाशकारी बाढ़ का वर्ष: लूनी नदी में आई बाढ़ों में 2006 व 2010 दोनों को छात्र अक्सर मिला देते हैं — सर्वाधिक विनाशकारी बाढ़ (सबसे अधिक जनहानि) 2006 में आई थी।
स्मरण तकनीक (Memory Trick)
"नाग पहाड़ी से कच्छ के रन तक, लूनी बहे मरुभूमि में अविरत" उद्गम (नाग पहाड़ी, अजमेर) से अंत (कच्छ का रन) तक याद रखने हेतु यह पंक्ति उपयोगी है।
सहायक नदियाँ याद रखने हेतु (उद्गम से संगम क्रम): "जोजड़ी-गुहिया-बांडी आई, लीलड़ी-मीठड़ी संग सुकड़ी-जवाई-खारी-सागी लाई"
शिक्षक की टिप्पणी (Teacher's Commentary)
लूनी नदी RPSC RAS, RSMSSB, पटवारी व REET परीक्षाओं में भूगोल खंड का एक अत्यंत लोकप्रिय प्रश्न-स्रोत है, विशेष रूप से "भारत की एकमात्र अंतःप्रवाही नदी" के रूप में। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि लूनी और बनास — दोनों ही परीक्षा में एक-दूसरे के "काउंटर-उदाहरण" के रूप में पूछी जाती हैं, इसलिए दोनों के अंतर को स्पष्ट रूप से रटने के बजाय मानचित्र पर तुलनात्मक ढंग से समझना अधिक प्रभावी रहता है। लूनी की खारे जल की विशेषता, जवाई बांध और बालोतरा का संबंध — इन तीनों को एक साथ जोड़कर पढ़ने से याद रखना आसान हो जाता है।
पूर्व वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1. लूनी नदी का उद्गम स्थल कहाँ है? (अ) खमनोर पहाड़ी (ब) नाग पहाड़ी, अजमेर (स) कोटड़ा की पहाड़ियाँ (द) सिंगार चौरी उत्तर: (ब) नाग पहाड़ी, अजमेर
प्रश्न 2. भारत की एकमात्र प्रमुख अंतःप्रवाही नदी कौन-सी है? (अ) बनास (ब) लूनी (स) चंबल (द) माही उत्तर: (ब) लूनी
प्रश्न 3. लूनी नदी का पानी किस स्थान के बाद खारा हो जाता है? (अ) जोधपुर (ब) पाली (स) बालोतरा (द) नागौर उत्तर: (स) बालोतरा
प्रश्न 4. जवाई बांध किस जिले में स्थित है? (अ) जोधपुर (ब) पाली (स) सिरोही (द) बाड़मेर उत्तर: (ब) पाली (सुमेरपुर कस्बा)
प्रश्न 5. लूनी नदी अंततः कहाँ जाकर विलुप्त हो जाती है? (अ) अरब सागर (ब) कच्छ का रन (स) बंगाल की खाड़ी (द) खंभात की खाड़ी उत्तर: (ब) कच्छ का रन
प्रश्न 6. लूनी नदी में जल-प्रदूषण का मुख्य स्रोत कौन-सा उद्योग है? (अ) चीनी उद्योग (ब) टेक्सटाइल (रंगाई-छपाई) उद्योग (स) सीमेंट उद्योग (द) चमड़ा उद्योग उत्तर: (ब) टेक्सटाइल (रंगाई-छपाई) उद्योग — बालोतरा, जसोल, बिठूजा व पाली क्षेत्र में केंद्रित
प्रश्न 7. लूनी नदी के इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ किस वर्ष आई थी? (अ) 1990 (ब) 2006 (स) 2010 (द) 2015 उत्तर: (ब) 2006 — बाड़मेर जिले में जल स्तर 15-25 फीट तक बढ़ गया था
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) — विस्तृत व्याख्या सहित
- लूनी नदी को राजस्थान में किस नाम से जाना जाता है? (अ) राजस्थान की यमुना (ब) राजस्थान की मरुगंगा (स) राजस्थान की गंगा (द) मेवाड़ की जीवनरेखा उत्तर: (ब) राजस्थान की मरुगंगा — पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र की जीवन-रेखा होने के कारण।
- लूनी नाम किस संस्कृत शब्द से बना है? (अ) लवण (ब) लता (स) लय (द) लक्ष उत्तर: (अ) लवण — अर्थात नमक/खारा।
- लूनी नदी का प्राचीन नाम क्या था? (अ) सरस्वती (ब) लवणवती (स) वर्णाशा (द) साक्री उत्तर: (ब) लवणवती (लवणाद्रि)
- लूनी नदी को उद्गम स्थल पर किस नाम से जाना जाता है? (अ) सागरमती (ब) कालीसिल (स) मासी (द) गंभीरी उत्तर: (अ) सागरमती (बाद में सरस्वती भी कहलाती है)
- महाकवि कालिदास ने लूनी नदी को किस नाम से संबोधित किया? (अ) अंतःसलिला (ब) वनवासिनी (स) मरुनंदिनी (द) रेतगामिनी उत्तर: (अ) अंतःसलिला
- लूनी नदी किस पर्वत श्रृंखला से निकलती है? (अ) विंध्याचल (ब) अरावली (स) सतपुड़ा (द) हिमालय उत्तर: (ब) अरावली
- लूनी नदी का उद्गम किस झील के निकट होता है? (अ) पिछोला झील (ब) आनासागर झील (स) जयसमंद झील (द) फतेहसागर झील उत्तर: (ब) आनासागर झील, अजमेर
- राजस्थान में लूनी नदी की लंबाई लगभग कितनी है? (अ) 480 किमी (ब) 330 किमी (स) 250 किमी (द) 600 किमी उत्तर: (ब) लगभग 330 किमी (कुछ स्रोतों में 320 किमी)
- लूनी नदी किस अपवाह तंत्र से संबंधित मानी जाती है? (अ) बंगाल की खाड़ी तंत्र (ब) अरब सागर तंत्र / अंतःप्रवाही तंत्र (स) आंतरिक हिमालयी तंत्र (द) गंगा तंत्र उत्तर: (ब) अरब सागर तंत्र (व्यावहारिक रूप से अंतःप्रवाही)
- लूनी नदी अंततः किस क्षेत्र में विलुप्त हो जाती है? (अ) थार मरुस्थल (ब) कच्छ का रन (स) डांग क्षेत्र (द) शेखावाटी क्षेत्र उत्तर: (ब) कच्छ का रन, गुजरात
- लूनी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी कौन-सी है, जिस पर बांध बना है? (अ) सुकड़ी (ब) जवाई (स) बांडी (द) खारी उत्तर: (ब) जवाई नदी
- जवाई नदी का उद्गम स्थान कौन-सा है? (अ) गोरिया गाँव, पाली (ब) सेर गाँव, सिरोही (स) जवाजा, अजमेर (द) दिवेर, राजसमंद उत्तर: (अ) गोरिया गाँव, पाली तहसील
- लूनी की कौन-सी सहायक नदी अरावली से न निकलकर नागौर के मैदानी भाग से निकलती है? (अ) बांडी (ब) जोजड़ी (स) लीलड़ी (द) सागी उत्तर: (ब) जोजड़ी
- हेमावास बांध किस नदी पर स्थित है? (अ) बांडी नदी (ब) खारी नदी (स) सुकड़ी नदी (द) जोजड़ी नदी उत्तर: (अ) बांडी नदी
- बांकली बांध किस नदी पर तथा किस जिले में स्थित है? (अ) जवाई नदी, पाली (ब) सुकड़ी नदी, जालौर (स) बांडी नदी, सिरोही (द) खारी नदी, बाड़मेर उत्तर: (ब) सुकड़ी नदी, जालौर जिला
- जवाई बांध में जल की कमी होने पर किस सुरंग से जलापूर्ति की जाती है? (अ) सेई जल सुरंग (ब) बीसलपुर सुरंग (स) चंबल सुरंग (द) माही सुरंग उत्तर: (अ) सेई जल सुरंग (उदयपुर-पाली के मध्य)
- जवाई बांध को किस उपनाम से जाना जाता है? (अ) राजस्थान का ताजमहल (ब) मारवाड़ का अमृत सरोवर (स) मेवाड़ की झील (द) थार का कुंड उत्तर: (ब) मारवाड़ का अमृत सरोवर
सुयोग AI गुरु
पढ़ने के बाद मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. लूनी नदी की प्रकृति के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
Q2. लूनी नदी के तट पर स्थित प्रमुख शहर कौन-से हैं?
Q3. लूनी नदी के बाढ़ क्षेत्र को जालौर जिले में क्या कहा जाता है?
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
लूनी नदी के इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ वर्ष 2006 में आई थी, जब बाड़मेर जिले में जल स्तर 15 से 25 फीट तक बढ़ गया और बड़ी संख्या में जन-धन की हानि हुई।
बालोतरा, जसोल, बिठूजा व पाली क्षेत्र में स्थापित टेक्सटाइल रंगाई-छपाई उद्योगों से निकलने वाला अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में बहाए जाने के कारण लूनी व इसकी सहायक नदियों (जोजड़ी, बांडी) में गंभीर जल-प्रदूषण की समस्या है।
लूनी नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 34,250 वर्ग किमी है, जो पश्चिमी राजस्थान के बड़े भूभाग को कवर करता है।
बनास का संगम राज्य के भीतर ही (सवाई माधोपुर में चंबल से) होता है, जबकि लूनी राज्य से बाहर निकलकर गुजरात के कच्छ के रन में विलुप्त हो जाती है, इसलिए "पूर्ण प्रवाह चक्र राजस्थान में पूरा करने वाली नदी" का उत्तर बनास है, लूनी नहीं।
जवाई बांध पाली जिले के सुमेरपुर कस्बे में स्थित है और इसे "मारवाड़ का अमृत सरोवर" कहा जाता है; यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है।
जवाई नदी लूनी की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जिस पर पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध — जवाई बांध — स्थित है।
क्योंकि यह पश्चिमी राजस्थान के शुष्क व मरुस्थलीय जिलों (नागौर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर) के लिए जल की प्रमुख जीवन-रेखा है।
बालोतरा क्षेत्र के बाद लवणीय मृदा व रेगिस्तानी भूभाग के संपर्क में आने से इसका जल खारा हो जाता है, जबकि उद्गम स्थल पर यह मीठे पानी की नदी होती है।
क्योंकि यह किसी सागर में सीधे नहीं गिरती, बल्कि राजस्थान में लगभग 330 किमी बहने के बाद गुजरात के कच्छ के रन के खारे-दलदली क्षेत्र में जाकर विलुप्त हो जाती है।
लूनी नदी का उद्गम अजमेर जिले में आनासागर झील के निकट अरावली की नाग पहाड़ी से होता है।