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चंबल घाटी परियोजना: बाँध, नदियाँ, जिले एवं महत्वपूर्ण तथ्य

महेंद्र सरमहेंद्र सर (भूगोल विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।

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चंबल घाटी परियोजना: बाँध, नदियाँ, जिले एवं महत्वपूर्ण तथ्य

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⚡ Quick Answer: चंबल घाटी परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 साझेदारी वाली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है, जो 1953-54 में प्रारंभ होकर तीन चरणों में पूरी हुई। इसके अंतर्गत चंबल नदी पर क्रमशः गांधी सागर (मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़), जवाहर सागर (कोटा) बाँध तथा कोटा बैराज बनाए गए। पहले तीन बाँधों पर जल-विद्युत गृह हैं (कुल लगभग 386 मेगावाट), जबकि कोटा बैराज केवल सिंचाई हेतु है। यह परियोजना मुख्यतः कोटा, बूंदी और बारां जिलों को सिंचाई प्रदान करती है।

1. चंबल घाटी परियोजना क्या है?

स्वतंत्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत बनी इस परियोजना का उद्देश्य था — चंबल नदी के जल का उपयोग सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और मृदा संरक्षण के लिए करना। चंबल राजस्थान की एकमात्र बारहमासी (वर्ष भर बहने वाली) नदी मानी जाती है, इसलिए इस पर बनी परियोजना को हाड़ौती क्षेत्र की ‘जीवनरेखा’ कहा जाता है।

यह नोट परियोजना के बाँध, चरण, नहरें, लाभ व समस्याओं पर केंद्रित है। चंबल नदी के उद्गम, प्रवाह मार्ग, सहायक नदियों और घड़ियाल अभयारण्य का विवरण चंबल नदी — राजस्थान की बारहमासी नदी नोट में देखें।

तथ्यविवरण
साझेदार राज्यराजस्थान व मध्य प्रदेश — लागत व लाभ (जल व विद्युत) दोनों में 50:50
प्रारंभ1953-54 (प्रथम पंचवर्षीय योजना काल)
प्रकृतिबहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना
कुल बाँध/संरचनाएँ3 बाँध + 1 बैराज
कुल स्थापित जल-विद्युत क्षमतालगभग 386 MW (115 + 172 + 99)
राजस्थान में लाभान्वित जिलेकोटा, बूंदी, बारां (मुख्य कमान क्षेत्र)
नदीचंबल (प्राचीन नाम — चर्मण्वती)

2. चंबल घाटी परियोजना के तीन चरण

चरणनिर्माणस्थानमुख्य उद्देश्य
प्रथम चरणगांधी सागर बाँध व कोटा बैराजभानपुरा-मंदसौर (म.प्र.) व कोटाजल भंडारण, विद्युत, सिंचाई
द्वितीय चरणराणा प्रताप सागर बाँधरावतभाटा (चित्तौड़गढ़)जल भंडारण व विद्युत
तृतीय चरणजवाहर सागर बाँधबोराबास (कोटा)विद्युत (पिकअप बाँध)

3. चंबल पर चार प्रमुख संरचनाएँ — ऊपर से नीचे के क्रम में

(1) गांधी सागर बाँध (मध्य प्रदेश)

  • स्थान: भानपुरा तहसील, मंदसौर जिला (म.प्र.) — चौरासीगढ़ (राजस्थान सीमा) से कुछ ऊपर।
  • परियोजना का पहला और सबसे ऊपरी बाँध; प्रथम चरण में निर्मित (1960 में पूर्ण)।
  • जल-विद्युत क्षमता: 115 MW (5 × 23 MW)।
  • नीचे के सभी बाँधों को नियमित जल उपलब्ध कराने वाला मुख्य जलाशय।

(2) राणा प्रताप सागर बाँध (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़)

  • स्थान: रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ — चूलिया जलप्रपात के निकट।
  • द्वितीय चरण में निर्मित (1970 के आसपास पूर्ण)।
  • जल-विद्युत क्षमता: 172 MW (4 × 43 MW) — परियोजना का सबसे बड़ा विद्युत गृह।
  • राजस्थान में सर्वाधिक जल भराव क्षमता वाला बाँध।
  • इसके तट पर रावतभाटा परमाणु विद्युत संयंत्र (RAPP) — कनाडा के सहयोग से बना; पहली इकाई 1973 में प्रारंभ। परमाणु संयंत्र को शीतलन हेतु जल इसी जलाशय से मिलता है।

(3) जवाहर सागर बाँध (बोराबास, कोटा)

  • स्थान: बोराबास, कोटा; तृतीय चरण (1972 के आसपास पूर्ण)।
  • यह एक पिकअप बाँध है — ऊपर के बाँध से छोड़े गए जल से विद्युत बनाकर आगे भेजता है।
  • जल-विद्युत क्षमता: 99 MW (3 × 33 MW)।

(4) कोटा बैराज (कोटा शहर)

  • प्रथम चरण में निर्मित (1960)।
  • विद्युत उत्पादन नहीं — केवल सिंचाई हेतु जल को नहरों में मोड़ना (diversion)।
  • यहाँ से दाईं मुख्य नहर और बाईं मुख्य नहर निकलती हैं।
बाँध/बैराजस्थानचरणविद्युत क्षमताविशेष
गांधी सागरमंदसौर (म.प्र.)प्रथम115 MWसबसे ऊपरी, मुख्य भंडारण
राणा प्रताप सागररावतभाटा (चित्तौड़गढ़)द्वितीय172 MWराजस्थान में सर्वाधिक भराव क्षमता; RAPP
जवाहर सागरबोराबास (कोटा)तृतीय99 MWपिकअप बाँध
कोटा बैराजकोटाप्रथम—केवल सिंचाई; नहरें

4. चंबल नहर प्रणाली — कौन-सी नहर कहाँ सिंचाई करती है?

नहरउद्गमलाभान्वित क्षेत्र
दाईं मुख्य नहर (Right Main Canal)कोटा बैराजकोटा व बारां जिले; आगे पार्वती नदी पार कर मध्य प्रदेश (मुरैना-श्योपुर क्षेत्र) तक
बाईं मुख्य नहर (Left Main Canal)कोटा बैराजकोटा व बूंदी जिले (बूंदी, कापरेन, लाखेरी क्षेत्र)

दाईं मुख्य नहर लंबी है और राजस्थान व मध्य प्रदेश दोनों को जल देती है, जबकि बाईं मुख्य नहर अपेक्षाकृत छोटी है और मुख्यतः बूंदी क्षेत्र को सींचती है। चंबल कमान क्षेत्र राजस्थान का प्रमुख धान, सोयाबीन, गेहूँ, सरसों व धनिया उत्पादक क्षेत्र बना। फसल-पेटियों के लिए देखें राजस्थान की फसलवार बेल्ट व जिले।

5. चंबल घाटी परियोजना के लाभ

  1. सिंचाई: हाड़ौती पठार (कोटा, बूंदी, बारां) में नहरी सिंचाई; राजस्थान में लगभग 2.29 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र (पाठ्यपुस्तकीय आँकड़ा)।
  2. जल-विद्युत: लगभग 386 MW स्थापित क्षमता — राजस्थान व मध्य प्रदेश में आधी-आधी।
  3. परमाणु ऊर्जा को सहयोग: रावतभाटा परमाणु संयंत्र के लिए शीतलन जल।
  4. औद्योगिक विकास: कोटा का औद्योगिक नगर के रूप में विकास — उर्वरक, रसायन, इंस्ट्रूमेंटेशन उद्योग। देखें राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र।
  5. पेयजल: कोटा, बूंदी तथा चंबल-आधारित पेयजल योजनाओं (जैसे चंबल-भीलवाड़ा पेयजल परियोजना) को जल।
  6. बाढ़ नियंत्रण एवं मत्स्य पालन।

6. परियोजना की समस्याएँ एवं समाधान

समस्याकारणसमाधान/प्रयास
जलभराव (Waterlogging)अत्यधिक नहरी सिंचाई व अपर्याप्त जल निकासीकमान क्षेत्र विकास (CAD) कार्यक्रम, 1974 से
लवणता व क्षारीयताजल निकासी अवरुद्ध होने से लवण सतह परRAJAD परियोजना — कनाडा (CIDA) के सहयोग से जल निकासी (sub-surface drainage)
नहरों में रिसावकच्ची नहरेंनहरों का पक्कीकरण (lining)
अंतर्राज्यीय जल-बँटवारादो राज्यों की साझेदारीचंबल नियंत्रण मंडल द्वारा समन्वय

जलभराव और लवणता भूजल पर भी असर डालते हैं — विस्तार हेतु देखें राजस्थान की मिट्टी के प्रकार।

7. नवीन संदर्भ: PKC-ERCP (पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना)

चंबल बेसिन से जुड़ी सबसे बड़ी नई योजना संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (Modified PKC-ERCP) है। इसके लिए जनवरी 2024 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच समझौता (MoU) हुआ तथा दिसंबर 2024 में जयपुर में इसका शिलान्यास हुआ। राज्य सरकार ने इसे ‘राम जल सेतु लिंक परियोजना’ नाम दिया है। इसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के जिलों को पेयजल व सिंचाई जल उपलब्ध कराना है। ध्यान दें — यह पुरानी चंबल घाटी परियोजना से अलग परियोजना है।

अन्य परियोजनाओं की तुलना हेतु देखें राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ, माही बजाज सागर परियोजना और इंदिरा गांधी नहर परियोजना।

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • चंबल घाटी परियोजना — राजस्थान : मध्य प्रदेश = 50 : 50 साझेदारी; प्रारंभ 1953-54।
  • बाँधों का क्रम (ऊपर से नीचे): गांधी सागर → राणा प्रताप सागर → जवाहर सागर → कोटा बैराज।
  • प्रथम चरण: गांधी सागर + कोटा बैराज; द्वितीय: राणा प्रताप सागर; तृतीय: जवाहर सागर।
  • विद्युत: गांधी सागर 115 MW, राणा प्रताप सागर 172 MW, जवाहर सागर 99 MW; कोटा बैराज पर विद्युत नहीं।
  • राणा प्रताप सागर — राजस्थान में सर्वाधिक भराव क्षमता; तट पर रावतभाटा परमाणु संयंत्र।
  • जवाहर सागर — पिकअप बाँध, बोराबास (कोटा)।
  • कोटा बैराज से दाईं मुख्य नहर (कोटा-बारां व म.प्र.) व बाईं मुख्य नहर (बूंदी)।
  • समस्या — जलभराव व लवणता; समाधान — CAD (1974) व RAJAD (कनाडा सहयोग)।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. गांधी सागर को राजस्थान में मानना — यह मध्य प्रदेश (मंदसौर) में है।
  2. कोटा बैराज पर विद्युत गृह मानना — कोटा बैराज केवल सिंचाई हेतु है।
  3. जवाहर सागर को चित्तौड़गढ़ में रखना — जवाहर सागर कोटा (बोराबास) में; राणा प्रताप सागर चित्तौड़गढ़ (रावतभाटा) में।
  4. सर्वाधिक विद्युत क्षमता गांधी सागर की मानना — सर्वाधिक राणा प्रताप सागर (172 MW)।
  5. PKC-ERCP को चंबल घाटी परियोजना का चौथा चरण समझना — यह अलग, नई अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना है।

🧠 मेमोरी ट्रिक

क्रम: “गा-रा-ज-को” — गांधी सागर → राणा प्रताप सागर → जवाहर सागर → कोटा बैराज।

विद्युत: “115-172-99, बैराज में शून्य” — ऊपर से नीचे के क्रम में।

स्थान: “मंदसौर-रावतभाटा-बोराबास-कोटा”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

चंबल घाटी परियोजना में परीक्षक का पसंदीदा प्रश्न ‘सही क्रम’ और ‘गलत युग्म’ (Match the following) होता है — बाँध, स्थान और विद्युत क्षमता का मिलान। ‘गा-रा-ज-को’ क्रम याद कर लिया तो आधे प्रश्न तुरंत हल होंगे। दूसरा, ‘कोटा बैराज पर विद्युत उत्पादन नहीं होता’ — यह कथन-आधारित प्रश्नों में बार-बार आता है। Mains में ‘चंबल कमान क्षेत्र की समस्याएँ’ लिखते समय जलभराव, लवणता, CAD और RAJAD — चारों शब्द अवश्य लिखें; यही उत्तर की रीढ़ है।

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • जल संसाधन विभाग, राजस्थान सरकार — चंबल परियोजना एवं CAD (कोटा) संबंधी विवरण।
  • राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUNL) — जल-विद्युत गृहों की स्थापित क्षमता।
  • आर्थिक समीक्षा, राजस्थान सरकार (नवीनतम संस्करण) — सिंचाई व ऊर्जा अध्याय।
  • डॉ. हरिमोहन सक्सेना — ‘राजस्थान का भूगोल’, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी।
  • जल शक्ति मंत्रालय — Modified PKC-ERCP MoU (जनवरी 2024) संबंधी प्रेस विज्ञप्ति।

Author Byline

लेखक: महेंद्र ढाका (भूगोल विशेषज्ञ), सुयोग अकादमी

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd)

विषय: चंबल घाटी परियोजना: बाँध, नदियाँ, जिले एवं महत्वपूर्ण तथ्य

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC प्राध्यापक/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET (स्नातक/12वीं), पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: विद्युत क्षमता के आँकड़े मूल स्थापित क्षमता (Installed Capacity) के अनुसार हैं। सिंचित क्षेत्र के आँकड़े स्रोतों में भिन्न मिलते हैं; परीक्षा में विकल्पों में सबसे निकटतम आँकड़ा चुनें।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026 — जिलों के नाम दिसंबर 2024 के पुनर्गठन (41 जिले) के अनुसार।

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. चंबल नदी पर निर्मित बाँधों का ऊपर से नीचे सही क्रम है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. चंबल घाटी परियोजना की किस संरचना पर जल-विद्युत गृह नहीं है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. रावतभाटा परमाणु विद्युत संयंत्र किस जलाशय के निकट स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. जवाहर सागर बाँध किस जिले में स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. चंबल कमान क्षेत्र में जलभराव व लवणता की समस्या के समाधान हेतु किस देश के सहयोग से RAJAD परियोजना चलाई गई?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

चंबल घाटी परियोजना में ऊपर से नीचे के क्रम में गांधी सागर (मंदसौर, म.प्र.), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़), जवाहर सागर (बोराबास, कोटा) बाँध तथा कोटा बैराज शामिल हैं।

दोनों राज्यों की 50:50 साझेदारी है — लागत, जल और विद्युत तीनों में बराबर भागीदारी।

कोटा बैराज पर विद्युत उत्पादन नहीं होता। यह केवल सिंचाई के लिए जल को दाईं व बाईं मुख्य नहरों में मोड़ता है।

चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में चंबल नदी पर बना राणा प्रताप सागर बाँध राजस्थान में सर्वाधिक जल भराव क्षमता वाला बाँध है।

मुख्य रूप से हाड़ौती क्षेत्र के कोटा, बूंदी और बारां जिले चंबल नहरों से सिंचाई प्राप्त करते हैं।

क्योंकि यह ऊपर स्थित राणा प्रताप सागर से छोड़े गए जल को रोककर विद्युत उत्पादन करता है और जल आगे कोटा बैराज की ओर भेजता है; इसका मुख्य कार्य बड़ा भंडारण नहीं है।

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