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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

प्रदूषण के प्रकार, कारण और नियंत्रण — वायु, जल, मृदा, ध्वनि, AQI, BOD, जैव-आवर्धन, भोपाल — UPSC, RAS

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
24 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व RSSB वनरक्षक पाठ्यक्रम की पर्यावरण इकाई; NCERT जीव विज्ञान (कक्षा 12, पारिस्थितिकी इकाई) व भूगोल पाठ्यपुस्तकें तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आधिकारिक प्रकाशन। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: प्रदूषण वायु, जल या मृदा के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा अवांछित परिवर्तन है जो मनुष्य और अन्य जीवों के लिए हानिकारक हो; हानि पहुँचाने वाले पदार्थ प्रदूषक कहलाते हैं। प्राथमिक प्रदूषक सीधे स्रोत से निकलते हैं (SO₂, NO, CO, कणिकीय पदार्थ), जबकि द्वितीयक प्रदूषक वायुमंडल में रासायनिक क्रिया से बनते हैं (भू-स्तरीय ओज़ोन, PAN, अम्ल वर्षा के अम्ल, प्रकाश-रासायनिक धूम-कोहरा)। NCERT के अनुसार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण (PM2.5) स्वास्थ्य को सबसे अधिक हानि पहुँचाते हैं क्योंकि वे फेफड़ों में गहराई तक जाते हैं। स्थिरवैद्युत अवक्षेपक (ESP) 99% से अधिक कणिकीय पदार्थ हटाता है, स्क्रबर SO₂ जैसी गैसें हटाता है और कैटेलिटिक कन्वर्टर (प्लैटिनम-पैलेडियम-रोडियम) CO, NO और बिना जले हाइड्रोकार्बन को कम हानिकारक गैसों में बदलता है। जल प्रदूषण का प्रमुख सूचक BOD है — BOD जितना अधिक, जल उतना अधिक प्रदूषित; पोषक (N, P) बढ़ने से सुपोषण (eutrophication) और शैवाल प्रस्फुटन होता है। स्थायी, वसा-घुलनशील प्रदूषक (DDT, पारा) खाद्य शृंखला में ऊपर जाते हुए बढ़ते हैं — यह जैव-आवर्धन है; पारे से मिनामाता और कैडमियम से इटाई-इटाई रोग जापान में हुए। भोपाल गैस त्रासदी (2–3 दिसंबर 1984) में मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्यउत्तर
प्राथमिक प्रदूषकSO₂, NO, CO, कणिकीय पदार्थ, हाइड्रोकार्बन
द्वितीयक प्रदूषकभू-स्तरीय O₃, PAN, सल्फ्यूरिक/नाइट्रिक अम्ल, प्रकाश-रासायनिक स्मॉग
सबसे हानिकारक कण (NCERT)PM2.5 (2.5 µm या कम)
कणिकीय पदार्थ हटाने वाला उपकरणस्थिरवैद्युत अवक्षेपक (ESP) — 99% से अधिक
SO₂ जैसी गैसें हटाने वालास्क्रबर (जल या चूने का छिड़काव)
वाहन प्रदूषण नियंत्रणकैटेलिटिक कन्वर्टर (Pt, Pd, Rh)
कैटेलिटिक कन्वर्टर वाले वाहन मेंसीसा-रहित (unleaded) पेट्रोल अनिवार्य
अम्ल वर्षाpH 5.6 से कम; SO₂ व NOₓ से
क्लासिकल (लंदन) स्मॉगधुआँ + कोहरा + SO₂; अपचायक; ठंडा-नम मौसम
प्रकाश-रासायनिक (लॉस एंजिल्स) स्मॉगNOₓ + हाइड्रोकार्बन + धूप; ऑक्सीकारक; O₃, PAN
AQI (भारत) आरंभ2014; 6 श्रेणियाँ, 8 प्रदूषक
जल प्रदूषण सूचकBOD (अधिक BOD = अधिक जैव-अपघटनीय प्रदूषण)
मिनामाता रोगपारा (मिथाइल मर्करी), जापान
इटाई-इटाई रोगकैडमियम, जापान
ब्लू बेबी सिंड्रोमपेयजल में अधिक नाइट्रेट
भोपाल गैस त्रासदी2–3 दिसंबर 1984; मिथाइल आइसोसायनेट (MIC)
फ़्लाई ऐश का स्रोतकोयला-आधारित ताप विद्युत संयंत्र
सूत्र / नियमअर्थ
जैव-आवर्धन गुणांक = उच्च स्तर में सांद्रता ÷ निम्न स्तर में सांद्रताकितने गुना बढ़ा
1 ppm = 1,000 ppbइकाई रूपांतरण
ध्वनि: हर +10 dB = तीव्रता 10 गुनाडेसिबल लघुगणकीय पैमाना है
तीव्रता अनुपात = 10^(dB अंतर ÷ 10)जैसे 20 dB अंतर = 100 गुना
COD ≥ BODCOD जैव-अपघटनीय और अजैव-अपघटनीय दोनों को मापता है

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

प्रदूषण UPSC प्रारंभिक के पर्यावरण खंड का सबसे व्यावहारिक विषय है — PM2.5, AQI, स्मॉग, BOD, जैव-आवर्धन और नियंत्रण उपकरणों पर कथन-आधारित प्रश्न आते हैं, और समसामयिक मुद्दे (पराली दहन, दिल्ली का वायु प्रदूषण, एकल-उपयोग प्लास्टिक) इन्हीं अवधारणाओं से जुड़ते हैं। RAS और राजस्थान CET में फ़्लोराइड, लवणता, खनन और सांभर-जैसे जल-स्रोतों के मुद्दे; RSSB वनरक्षक में मूल परिभाषाएँ व रोग-प्रदूषक युग्म पूछे जाते हैं। जैव-आवर्धन को समझने के लिए खाद्य शृंखला और पोषी स्तर वाला नोट आधार है, और ग्रीनहाउस गैसें व समताप-मंडलीय ओज़ोन जलवायु परिवर्तन और ओज़ोन क्षय वाले नोट में हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — प्रदूषक, स्मॉग, AQI, जैव-आवर्धन, नियंत्रण उपकरण, नियम
  • RPSC RAS — राजस्थान के जल-मृदा प्रदूषण मुद्दे, भोपाल, फ़्लाई ऐश
  • RSSB वनरक्षक / वनपाल — परिभाषाएँ, रोग-प्रदूषक युग्म
  • राजस्थान CET (स्नातक) — सामान्य विज्ञान व पर्यावरण
  • SSC — तथ्यात्मक प्रश्न (गैस, रोग, उपकरण)

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. प्राथमिक बनाम द्वितीयक प्रदूषक की पहचान
  2. रोग — प्रदूषक युग्म (मिनामाता, इटाई-इटाई, ब्लू बेबी, फ़्लोरोसिस)
  3. प्रदूषण नियंत्रण उपकरण — क्या हटाता है
  4. BOD, COD, DO के बीच संबंध
  5. जैव-आवर्धन का संख्यात्मक या अवधारणात्मक प्रश्न
  6. AQI श्रेणियाँ और उनमें शामिल प्रदूषक
  7. क्लासिकल बनाम प्रकाश-रासायनिक स्मॉग

3. वायु प्रदूषण

3.1 प्राथमिक बनाम द्वितीयक प्रदूषक

आधारप्राथमिक प्रदूषकद्वितीयक प्रदूषक
उत्पत्तिस्रोत से सीधे उत्सर्जितप्राथमिक प्रदूषकों की वायुमंडल में (प्रायः धूप में) क्रिया से बनते हैं
उदाहरणSO₂, NO, CO, CO₂, कणिकीय पदार्थ (धूल, कालिख), हाइड्रोकार्बन, सीसाभू-स्तरीय ओज़ोन (O₃), PAN (पेरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट), H₂SO₄ व HNO₃ (अम्ल वर्षा), प्रकाश-रासायनिक स्मॉग, कुछ द्वितीयक कण (सल्फ़ेट, नाइट्रेट)
नियंत्रणस्रोत पर उत्सर्जन कम करनापूर्ववर्ती (precursor) गैसों — NOₓ, VOC — को कम करना

3.2 प्रमुख वायु प्रदूषक

प्रदूषकमुख्य स्रोतप्रभाव
PM10 (10 µm या कम)सड़क धूल, निर्माण, उद्योगश्वसन मार्ग में जलन, अस्थमा
PM2.5 (2.5 µm या कम)वाहन, कोयला, बायोमास व पराली दहन, द्वितीयक कणफेफड़ों में गहराई तक; श्वसन व हृदय रोग; NCERT के अनुसार सबसे अधिक हानिकारक
SO₂ (सल्फर डाइऑक्साइड)कोयला व तेल दहन, ताप विद्युत संयंत्र, प्रगलनश्वसन रोग, अम्ल वर्षा; लाइकेन इसके प्रति संवेदनशील (सूचक)
NOₓ (नाइट्रोजन ऑक्साइड)वाहन, उच्च ताप दहनअम्ल वर्षा, प्रकाश-रासायनिक स्मॉग, भू-स्तरीय ओज़ोन का पूर्ववर्ती
CO (कार्बन मोनोऑक्साइड)अपूर्ण दहन, वाहन, बंद कमरे में अँगीठीहीमोग्लोबिन से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है — रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता घटती है; रंगहीन-गंधहीन, बंद स्थान में घातक
भू-स्तरीय O₃NOₓ + VOC + धूप (द्वितीयक)आँखों व फेफड़ों में जलन, फसलों को हानि (समताप-मंडल का O₃ लाभकारी है)
सीसा (Pb)पुराना सीसायुक्त पेट्रोल, बैटरी उद्योगतंत्रिका तंत्र पर प्रभाव, बच्चों में बौद्धिक विकास पर असर
अमोनिया (NH₃)कृषि उर्वरक, पशुधनद्वितीयक कणों का निर्माण

3.3 स्मॉग (धूम-कोहरा) के प्रकार

आधारक्लासिकल (लंदन) स्मॉगप्रकाश-रासायनिक (लॉस एंजिल्स) स्मॉग
घटकधुआँ, कोहरा, SO₂NOₓ, हाइड्रोकार्बन, O₃, PAN, एल्डिहाइड
मौसमठंडा, नमगर्म, शुष्क, तेज़ धूप
रासायनिक प्रकृतिअपचायक (reducing)ऑक्सीकारक (oxidising)
स्रोतकोयला दहनवाहन उत्सर्जन
प्रसिद्ध घटनालंदन, 1952लॉस एंजिल्स (बार-बार)
प्रभावश्वसन रोगआँखों में जलन, अस्थमा, रबर में दरारें, पौधों को हानि

उत्तर भारत में सर्दियों का धुंध-स्मॉग दोनों का मिश्रण है — पराली व बायोमास दहन, वाहन, धूल और ताप-व्युत्क्रमण (temperature inversion) व धीमी हवा मिलकर प्रदूषकों को सतह के पास रोक देते हैं।

3.4 अम्ल वर्षा (Acid Rain)

बिंदुविवरण
सामान्य वर्षा का pHलगभग 5.6 (वायुमंडलीय CO₂ से बना कमज़ोर कार्बोनिक अम्ल)
अम्ल वर्षाpH 5.6 से कम
कारणSO₂ → H₂SO₄; NOₓ → HNO₃
प्रभावझीलों का अम्लीकरण, मछलियों की मृत्यु, वनों की क्षति, मृदा से पोषकों का निक्षालन, भवनों व स्मारकों का क्षरण
ताजमहलसंगमरमर (CaCO₃) का क्षरण — "मार्बल कैंसर"; संरक्षण हेतु ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) में उद्योगों पर नियंत्रण
शुष्क निक्षेपणअम्लीय कण और गैसें बिना वर्षा के भी सतह पर जमती हैं

3.5 वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) — भारत

राष्ट्रीय AQI 2014 में शुरू हुआ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड — CPCB)। इसमें 8 प्रदूषक शामिल हैं — PM10, PM2.5, NO₂, SO₂, CO, O₃, NH₃ और Pb — और कुल AQI उस प्रदूषक से तय होता है जिसका उप-सूचकांक सबसे अधिक हो।

AQI मानश्रेणीसंभावित स्वास्थ्य प्रभाव
0–50अच्छा (Good)न्यूनतम प्रभाव
51–100संतोषजनक (Satisfactory)संवेदनशील लोगों को हल्की असुविधा
101–200मध्यम (Moderately Polluted)फेफड़े, हृदय रोगियों, बच्चों व बुज़ुर्गों को साँस में असुविधा
201–300खराब (Poor)लंबे संपर्क पर अधिकांश लोगों को साँस में असुविधा
301–400बहुत खराब (Very Poor)लंबे संपर्क पर श्वसन रोग
401–500गंभीर (Severe)स्वस्थ लोगों पर भी प्रभाव; रोगियों पर गंभीर
मानकPM2.5 (µg/m³)PM10 (µg/m³)
भारत NAAQS — 24 घंटे60100
भारत NAAQS — वार्षिक4060
WHO दिशानिर्देश 2021 — 24 घंटे1545
WHO दिशानिर्देश 2021 — वार्षिक515

नीतिगत पहलें: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP, 2019); दिल्ली-NCR के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM); वाहनों के लिए BS-VI मानक (1 अप्रैल 2020 से देशभर में, BS-IV से सीधे BS-VI)। NCERT में दिल्ली का उदाहरण है जहाँ सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर 2002 तक सार्वजनिक परिवहन को CNG में बदला गया।

3.6 वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण

उपकरणक्या हटाता हैकार्य-सिद्धांत
स्थिरवैद्युत अवक्षेपक (ESP)कणिकीय पदार्थ (राख, धूल) — 99% से अधिकहज़ारों वोल्ट पर इलेक्ट्रोड से इलेक्ट्रॉन मुक्त; कण आवेशित होकर संग्राहक प्लेटों पर आकर्षित होकर जमा होते हैं; ताप विद्युत संयंत्र, सीमेंट उद्योग
स्क्रबर (Scrubber)SO₂ जैसी गैसें (और कुछ कण)निकास गैस को जल या चूने के छिड़काव से गुज़ारना
कैटेलिटिक कन्वर्टरCO, NO, बिना जले हाइड्रोकार्बनप्लैटिनम-पैलेडियम और रोडियम उत्प्रेरक: हाइड्रोकार्बन → CO₂ + जल; CO → CO₂; NO → N₂। सीसा उत्प्रेरक को निष्क्रिय करता है, इसलिए सीसा-रहित पेट्रोल आवश्यक
साइक्लोन सेपरेटरबड़े कणअपकेंद्री बल से कण अलग
बैग फ़िल्टरमहीन कणकपड़े के थैलों से छानना
FGD (फ़्लू गैस डीसल्फ़्यूराइज़ेशन)SO₂चूना-पत्थर आधारित; ताप विद्युत संयंत्रों में

4. जल प्रदूषण

4.1 BOD, COD और DO

मापदंडपूरा नामअर्थप्रदूषण से संबंध
DODissolved Oxygen (घुलित ऑक्सीजन)जल में घुली ऑक्सीजन की मात्राDO कम = प्रदूषित जल; मछलियाँ मरती हैं। ताप बढ़ने पर DO घटता है
BODBiochemical Oxygen Demand (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग)जल के जैव-अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ को सूक्ष्मजीवों द्वारा तोड़ने में लगी ऑक्सीजन (प्रायः 20 °C पर 5 दिन में मापी जाती है)BOD अधिक = अधिक जैव-अपघटनीय (मुख्यतः सीवेज) प्रदूषण
CODChemical Oxygen Demand (रासायनिक ऑक्सीजन माँग)प्रबल रासायनिक ऑक्सीकारक से सभी ऑक्सीकरणीय पदार्थों के ऑक्सीकरण में लगी ऑक्सीजनजैव-अपघटनीय + अजैव-अपघटनीय दोनों; इसलिए COD ≥ BOD; जल्दी मापा जाता है

संबंध याद रखें: सीवेज मिलने पर सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थ खाते हुए ऑक्सीजन खर्च करते हैं — इसलिए BOD ↑ होने पर DO ↓। NCERT के अनुसार सीवेज मिलने वाले बिंदु के नीचे की ओर DO में तेज़ गिरावट और BOD में वृद्धि होती है, और आगे जाकर जल धीरे-धीरे स्वयं शुद्ध होता है।

4.2 सुपोषण (Eutrophication) और शैवाल प्रस्फुटन

चरणक्या होता है
1. पोषक वृद्धिसीवेज, उर्वरक अपवाह और डिटर्जेंट से नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जल में
2. शैवाल प्रस्फुटन (Algal bloom)प्लवकीय शैवाल की अत्यधिक वृद्धि; जल का रंग हरा, दुर्गंध; कुछ शैवाल विषैले
3. प्रकाश अवरोधनीचे के जलमग्न पौधे मरते हैं
4. अपघटनमृत शैवाल के अपघटन में बहुत ऑक्सीजन खर्च → DO में भारी गिरावट
5. परिणाममछलियों की मृत्यु, जैव विविधता ह्रास, झील का "बूढ़ा" होकर अंततः भूमि में बदलना

प्राकृतिक सुपोषण झील की धीमी प्राकृतिक आयु-वृद्धि है (हज़ारों वर्ष); मानवीय गतिविधियों से तेज़ हुए सुपोषण को सांस्कृतिक या त्वरित सुपोषण कहते हैं। आक्रामक जलकुंभी भी पोषक-समृद्ध जल में तेज़ी से फैलती है।

4.3 प्रमुख जल प्रदूषक और रोग

प्रदूषकरोग / प्रभावक्षेत्र / टिप्पणी
पारा (मिथाइल मर्करी)मिनामाता रोग — तंत्रिका तंत्र क्षतिमिनामाता खाड़ी, जापान (1950 का दशक); मछली-भोजन से जैव-आवर्धन
कैडमियमइटाई-इटाई रोग — हड्डियों और जोड़ों में तीव्र दर्द, गुर्दा क्षतिजिंत्सू नदी बेसिन, तोयामा, जापान
नाइट्रेटब्लू बेबी सिंड्रोम (मेथीमोग्लोबिनीमिया)उर्वरक-प्रभावित भूजल; शिशुओं में
फ़्लोराइड (अधिक)दंत व अस्थि फ़्लोरोसिसराजस्थान सहित कई राज्यों का भूजल
आर्सेनिकत्वचा घाव, ब्लैक फ़ुट रोग, कैंसरगंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान (पश्चिम बंगाल आदि) का भूजल
सीसाप्लंबिज़्म — तंत्रिका व रक्त विकारपुराने पाइप, बैटरी उद्योग
रोगजनक (सीवेज)हैजा, टायफ़ॉइड, पीलिया, पेचिशअशुद्ध पेयजल

4.4 सीवेज उपचार (संक्षेप)

चरणप्रक्रिया
प्राथमिक उपचारभौतिक — छानना, अवसादन; बड़े ठोस और ग्रिट हटते हैं
द्वितीयक (जैविक) उपचारवायवीय जीवाणु (फ़्लॉक) कार्बनिक पदार्थ खाते हैं, BOD घटता है; फिर अवायवीय पाचक में बायोगैस (मीथेन) बनती है
तृतीयक उपचारपोषक (N, P), रोगाणु और विशेष रसायन हटाना

5. जैव-आवर्धन (Biomagnification)

जैव-आवर्धन का अर्थ है खाद्य शृंखला में पोषी स्तर बढ़ने के साथ किसी विषैले पदार्थ की सांद्रता का बढ़ते जाना। यह तभी होता है जब पदार्थ स्थायी (persistent) हो, वसा में घुलनशील हो और जीव उसे उपापचयित या उत्सर्जित न कर सके — जैसे DDT, पारा, PCB। इसके विपरीत जैव-संचयन (bioaccumulation) एक ही जीव के शरीर में समय के साथ पदार्थ का जमा होना है।

पोषी स्तर (NCERT उदाहरण)DDT सांद्रता
जल0.003 ppb
प्राणी-प्लवक (Zooplankton)0.04 ppm
छोटी मछली0.5 ppm
बड़ी मछली2 ppm
मछली खाने वाले पक्षी25 ppm

पक्षियों में DDT की उच्च सांद्रता कैल्शियम उपापचय में बाधा डालती है, जिससे अंडों के छिलके पतले होकर समय से पहले टूट जाते हैं और पक्षियों की आबादी घटती है (NCERT)।

5.1 हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्नहलउत्तर
छोटी मछली में DDT 0.5 ppm, बड़ी मछली में 2 ppm। आवर्धन गुणांक?2 ÷ 0.54 गुना
बड़ी मछली (2 ppm) से पक्षी (25 ppm) तक?25 ÷ 212.5 गुना
प्राणी-प्लवक (0.04 ppm) से पक्षी (25 ppm) तक?25 ÷ 0.04625 गुना
जल (0.003 ppb) से पक्षी (25 ppm) तक?0.003 ppb = 0.000003 ppm; 25 ÷ 0.000003लगभग 83 लाख (≈ 8.3 × 10⁶) गुना
किसी जल में पारा 0.002 ppm है और हर पोषी स्तर पर 10 गुना आवर्धन होता है। तीन स्तर ऊपर सांद्रता?0.002 × 10 × 10 × 102 ppm

ध्यान दें: ऊर्जा हर स्तर पर घटती है (10% नियम), जबकि स्थायी विष हर स्तर पर बढ़ता है — इसलिए शीर्ष परभक्षी (बाज, गिद्ध, बड़ी मछली, मनुष्य) सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।


6. मृदा प्रदूषण

स्रोतप्रभावउपाय
रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोगमृदा अम्लीयता/क्षारीयता, सूक्ष्मजीव ह्रास, नाइट्रेट निक्षालनसंतुलित उर्वरक (मृदा स्वास्थ्य कार्ड), जैव उर्वरक
कीटनाशक (DDT, BHC आदि)स्थायी अवशेष, खाद्य शृंखला में जैव-आवर्धनसमन्वित कीट प्रबंधन (IPM), जैविक नियंत्रण
औद्योगिक अपशिष्ट व भारी धातुएँPb, Cd, Hg, Cr का संचयअपशिष्ट उपचार, पादप-उपचार (phytoremediation)
अति-सिंचाई / जल-भरावलवणीकरण (salinisation) — सतह पर नमक की परतउचित जल निकासी, ड्रिप सिंचाई
खनन (राजस्थान में संगमरमर, पत्थर)मृदा की ऊपरी परत का ह्रास, धूल, अपशिष्ट ढेरखनन क्षेत्र का पुनर्वनीकरण
प्लास्टिक व ठोस अपशिष्टमृदा में जल-वायु संचरण बाधितपृथक्करण, पुनर्चक्रण

7. ध्वनि, तापीय और रेडियोधर्मी प्रदूषण

7.1 ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि की तीव्रता डेसिबल (dB) में मापी जाती है, जो लघुगणकीय पैमाना है — हर 10 dB की वृद्धि पर तीव्रता 10 गुना होती है। NCERT के अनुसार जेट विमान जैसी 150 dB या उससे अधिक ध्वनि कान के पर्दे को स्थायी क्षति पहुँचा सकती है; लगातार अधिक शोर से नींद में बाधा, तनाव, उच्च रक्तचाप और सुनने की क्षमता में कमी होती है। भारत में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 परिवेशी ध्वनि मानक तय करते हैं:

क्षेत्रदिन (6 बजे सुबह – 10 बजे रात) dB(A)रात dB(A)
औद्योगिक7570
वाणिज्यिक6555
आवासीय5545
शांत क्षेत्र (अस्पताल, विद्यालय, न्यायालय के 100 मीटर तक)5040
ध्वनि संख्यात्मकहलउत्तर
80 dB ध्वनि, 60 dB ध्वनि से कितनी गुना तीव्र?अंतर 20 dB → 10^(20/10)100 गुना
90 dB बनाम 60 dB?अंतर 30 dB → 10^31,000 गुना

7.2 तापीय प्रदूषण

ताप/परमाणु विद्युत संयंत्रों और उद्योगों का गर्म शीतलन जल नदियों-झीलों में छोड़ने से जल का ताप बढ़ता है। गर्म जल में ऑक्सीजन की घुलनशीलता घटती है, जबकि जीवों की उपापचय दर और ऑक्सीजन माँग बढ़ती है — परिणाम: मछलियों की मृत्यु, ताप-संवेदी प्रजातियों का विलोप और शैवाल वृद्धि। उपाय: कूलिंग टावर, कूलिंग तालाब, गर्म जल का पुनः उपयोग।

7.3 रेडियोधर्मी प्रदूषण

बिंदुविवरण
स्रोतपरमाणु संयंत्र दुर्घटनाएँ, परमाणु अपशिष्ट, परमाणु परीक्षण, खनन (यूरेनियम), चिकित्सा स्रोत; प्राकृतिक — रेडॉन गैस, कॉस्मिक किरणें
प्रभावआयनकारी विकिरण से DNA क्षति, उत्परिवर्तन, कैंसर (विशेषकर ल्यूकेमिया), आनुवंशिक विकार
प्रसिद्ध दुर्घटनाएँचेरनोबिल (1986, तत्कालीन USSR, अब यूक्रेन), फ़ुकुशिमा (2011, जापान — भूकंप-सुनामी के बाद)
नियंत्रणपरमाणु अपशिष्ट का गहरे भू-गर्भीय भंडारों में सुरक्षित निपटान; NCERT के अनुसार अपशिष्ट को पूर्व-उपचार के बाद उपयुक्त परिरक्षित पात्रों में चट्टानों के नीचे लगभग 500 मीटर गहराई पर दबाने की सलाह

8. प्लास्टिक, ई-कचरा और फ़्लाई ऐश

8.1 प्लास्टिक प्रदूषण

बिंदुविवरण
समस्याजैव-अनिम्नीकरणीय; नालियाँ बंद, पशुओं द्वारा निगलना, समुद्री जीवों की मृत्यु, जलाने पर डाइऑक्सिन जैसी विषैली गैसें
माइक्रोप्लास्टिक5 मिमी से छोटे कण; जल, मृदा, समुद्री भोजन और मानव शरीर तक
नियमप्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (संशोधनों सहित); विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)
एकल-उपयोग प्लास्टिक1 जुलाई 2022 से चिन्हित एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध
कैरी बैग मोटाई30 सितंबर 2021 से न्यूनतम 75 माइक्रोन; 31 दिसंबर 2022 से न्यूनतम 120 माइक्रोन
नवाचार (NCERT)बेंगलुरु के अहमद ख़ान का "पॉलीब्लेंड" — पुनर्चक्रित प्लास्टिक का बारीक चूर्ण, जिसे बिटुमेन के साथ मिलाकर सड़क बनाई गई

8.2 ई-कचरा (E-waste)

खराब कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ई-कचरा हैं। इनमें सीसा, पारा, कैडमियम, क्रोमियम और ब्रोमीनयुक्त ज्वाला-मंदक जैसे विषैले पदार्थ होते हैं, साथ ही ताँबा, सोना जैसी मूल्यवान धातुएँ भी। NCERT के अनुसार विकासशील देशों में इनका पुनर्चक्रण प्रायः हाथ से, बिना सुरक्षा के होता है, जिससे श्रमिक विषैले पदार्थों के संपर्क में आते हैं। भारत में ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 के बाद ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जिनमें उत्पादकों पर EPR दायित्व है।

8.3 फ़्लाई ऐश (Fly Ash)

बिंदुविवरण
स्रोतकोयला-आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला जलने से बनी महीन राख, जो निकास गैसों के साथ उड़ती है (ESP से पकड़ी जाती है)
घटकमुख्यतः सिलिका, एल्यूमिना, आयरन ऑक्साइड; कुछ भारी धातुओं के अंश
समस्याराख तालाबों से वायु व जल प्रदूषण, भूमि घेराव, श्वसन रोग
उपयोगफ़्लाई ऐश ईंटें, सीमेंट (पोज़ोलाना) व कंक्रीट, सड़क व तटबंध निर्माण, खदानों का भराव
नियमनMoEFCC की फ़्लाई ऐश अधिसूचना (1999, बाद में संशोधित) — ताप संयंत्रों के आसपास निर्माण में फ़्लाई ऐश उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा

9. भोपाल गैस त्रासदी (1984)

बिंदुविवरण
तिथि2–3 दिसंबर 1984 की रात
स्थानयूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड का कीटनाशक संयंत्र, भोपाल (मध्य प्रदेश)
गैसमिथाइल आइसोसायनेट (MIC)
प्रभावहज़ारों लोगों की मृत्यु, लाखों प्रभावित; आँख, फेफड़े व दीर्घकालिक स्वास्थ्य क्षति — विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में
नीतिगत परिणामपर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 और सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम 1991 जैसे कानूनों की पृष्ठभूमि; खतरनाक उद्योगों के लिए कड़े सुरक्षा नियम

मृतकों की संख्या पर आधिकारिक और अन्य अनुमानों में बड़ा अंतर है, इसलिए परीक्षा में केवल तिथि, स्थान, कंपनी और गैस (MIC) पक्के रखें। आपदा प्रबंधन से जुड़े पहलू आपदा प्रबंधन वाले नोट में देखें।


10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: ओज़ोन — प्राथमिक या द्वितीयक?

भू-स्तरीय ओज़ोन द्वितीयक प्रदूषक है — यह सीधे उत्सर्जित नहीं होती, बल्कि NOₓ और VOC की धूप में क्रिया से बनती है। समताप-मंडल की ओज़ोन परत लाभकारी है (UV-B रोकती है); क्षोभमंडल की ओज़ोन हानिकारक।

Trap 2: क्लासिकल स्मॉग ऑक्सीकारक है?

नहीं। क्लासिकल (लंदन) स्मॉग अपचायक है (SO₂ के कारण), प्रकाश-रासायनिक स्मॉग ऑक्सीकारक (O₃, PAN)। मौसम भी उल्टा है — क्लासिकल ठंडा-नम, प्रकाश-रासायनिक गर्म-धूप वाला।

Trap 3: उच्च BOD = अच्छा जल?

गलत। अधिक BOD का अर्थ है अधिक कार्बनिक प्रदूषण। स्वच्छ जल में BOD कम और DO अधिक होता है। COD हमेशा BOD के बराबर या उससे अधिक होता है।

Trap 4: ESP बनाम स्क्रबर

ESP कणिकीय पदार्थ हटाता है, गैसें नहीं; स्क्रबर SO₂ जैसी गैसें हटाता है। "ESP से SO₂ हटती है" — गलत।

Trap 5: कैटेलिटिक कन्वर्टर और सीसा

सीसा उत्प्रेरक को निष्क्रिय कर देता है, इसलिए कैटेलिटिक कन्वर्टर वाले वाहन में सीसा-रहित पेट्रोल चाहिए। उत्प्रेरक धातुएँ प्लैटिनम, पैलेडियम और रोडियम हैं — लोहा या ताँबा नहीं।

Trap 6: मिनामाता बनाम इटाई-इटाई

मिनामाता = पारा; इटाई-इटाई = कैडमियम। दोनों जापान में। "इटाई-इटाई" का अर्थ जापानी में "दर्द-दर्द" — हड्डियों का दर्द, कैडमियम से। ब्लू बेबी = नाइट्रेट, सीसा नहीं।

Trap 7: जैव-आवर्धन बनाम जैव-संचयन

जैव-संचयन — एक जीव के भीतर समय के साथ जमाव; जैव-आवर्धन — खाद्य शृंखला के स्तरों के साथ सांद्रता वृद्धि। जल-घुलनशील, शीघ्र उत्सर्जित पदार्थ जैव-आवर्धित नहीं होते।

Trap 8: अम्ल वर्षा का pH

सामान्य वर्षा भी थोड़ी अम्लीय (pH लगभग 5.6) होती है। अम्ल वर्षा का अर्थ pH 5.6 से कम। "pH 7 से कम हर वर्षा अम्ल वर्षा है" — गलत।

Trap 9: भोपाल गैस

भोपाल में मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) का रिसाव हुआ था — फ़ॉस्जीन या क्लोरीन नहीं। (MIC फ़ॉस्जीन से बनाई जाती थी, इसलिए विकल्पों में यह जाल रहता है।)

Trap 10: AQI में CO₂

भारत के AQI के 8 प्रदूषकों में CO₂ नहीं है — CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) है। CO₂ ग्रीनहाउस गैस है, AQI प्रदूषक नहीं।


11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (55 तथ्य)

#प्रश्न / बिंदुउत्तर
1स्रोत से सीधे निकलने वाले प्रदूषकप्राथमिक
2वायुमंडल में क्रिया से बनने वालेद्वितीयक
3भू-स्तरीय ओज़ोनद्वितीयक प्रदूषक
4PANपेरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट (द्वितीयक)
5सबसे हानिकारक कण (NCERT)PM2.5
6कणिकीय पदार्थ हटाने वालाESP (99% से अधिक)
7SO₂ हटाने वालास्क्रबर / FGD
8कैटेलिटिक कन्वर्टर की धातुएँPt, Pd, Rh
9कैटेलिटिक कन्वर्टर: CO →CO₂
10कैटेलिटिक कन्वर्टर: NO →N₂
11कन्वर्टर को निष्क्रिय करने वालासीसा
12BS-VI देशभर में1 अप्रैल 2020
13क्लासिकल स्मॉग की प्रकृतिअपचायक
14प्रकाश-रासायनिक स्मॉग की प्रकृतिऑक्सीकारक
15प्रकाश-रासायनिक स्मॉग का मौसमगर्म, धूप वाला
16लंदन स्मॉग1952
17अम्ल वर्षा pH5.6 से कम
18अम्ल वर्षा की गैसेंSO₂, NOₓ
19"मार्बल कैंसर"ताजमहल, अम्ल वर्षा
20ताजमहल संरक्षण क्षेत्रताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन
21राष्ट्रीय AQI आरंभ2014
22AQI प्रदूषकों की संख्या8
23AQI 0–50अच्छा
24AQI 201–300खराब
25AQI 401–500गंभीर
26NAAQS PM2.5 वार्षिक40 µg/m³
27NCAP2019
28CO का प्रभावकार्बोक्सीहीमोग्लोबिन
29SO₂ प्रदूषण का सूचकलाइकेन
30अधिक BODअधिक जैव-अपघटनीय प्रदूषण
31BOD और COD में बड़ाCOD
32BOD बढ़ने पर DOघटता है
33ताप बढ़ने पर DOघटता है
34सुपोषण के पोषकनाइट्रोजन, फॉस्फोरस
35मानव-जनित तेज़ सुपोषणसांस्कृतिक / त्वरित सुपोषण
36मिनामातापारा, जापान
37इटाई-इटाईकैडमियम, जापान
38ब्लू बेबी सिंड्रोमनाइट्रेट
39फ़्लोरोसिसअधिक फ़्लोराइड
40ब्लैक फ़ुट रोगआर्सेनिक
41प्लंबिज़्मसीसा
42जैव-आवर्धन का NCERT उदाहरणDDT (0.003 ppb → 25 ppm)
43पक्षियों में DDT का प्रभावकैल्शियम उपापचय बाधित, पतले अंडे-छिलके
44जैव-आवर्धन की शर्तेंस्थायी, वसा-घुलनशील, अनुत्सर्जित
45अति-सिंचाई से मृदा समस्यालवणीकरण
46ध्वनि का मात्रकडेसिबल (dB)
47+10 dBतीव्रता 10 गुना
48आवासीय क्षेत्र दिन / रात मानक55 / 45 dB(A)
49शांत क्षेत्र दिन / रात मानक50 / 40 dB(A)
50तापीय प्रदूषण का मुख्य प्रभावDO में कमी
51चेरनोबिल / फ़ुकुशिमा1986 / 2011
52एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध1 जुलाई 2022
53कैरी बैग न्यूनतम मोटाई (31 दिसंबर 2022 से)120 माइक्रोन
54भोपाल गैसमिथाइल आइसोसायनेट (MIC)
55फ़्लाई ऐश का स्रोतकोयला ताप विद्युत संयंत्र

12. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

Pattern 1: कथन आधारित (UPSC)

नमूना प्रश्न: (1) भू-स्तरीय ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है। (2) प्रकाश-रासायनिक स्मॉग अपचायक प्रकृति का होता है। (3) भारत के राष्ट्रीय AQI में अमोनिया शामिल है।
उत्तर: केवल 1 और 3 सही।

Pattern 2: युग्म मिलान

नमूना प्रश्न: (a) मिनामाता (b) इटाई-इटाई (c) ब्लू बेबी (d) ब्लैक फ़ुट — (i) नाइट्रेट (ii) आर्सेनिक (iii) पारा (iv) कैडमियम।
उत्तर: a-iii, b-iv, c-i, d-ii।

Pattern 3: संख्यात्मक

नमूना प्रश्न: 85 dB की ध्वनि 65 dB की ध्वनि से कितनी गुना अधिक तीव्र है?
हल: अंतर 20 dB → 10² = 100 गुना।

Pattern 4: उपकरण-कार्य

नमूना प्रश्न: ताप विद्युत संयंत्र की चिमनी से निकलने वाली फ़्लाई ऐश को रोकने के लिए कौन-सा उपकरण सबसे उपयुक्त है?
उत्तर: स्थिरवैद्युत अवक्षेपक (ESP)।

Pattern 5: कारण-प्रभाव

नमूना प्रश्न: किसी झील में उर्वरक अपवाह के बाद मछलियाँ मरने लगीं। सबसे संभावित कारण?
उत्तर: सुपोषण → शैवाल प्रस्फुटन → अपघटन में ऑक्सीजन की खपत → DO में भारी कमी।


13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

  • "पारा-मिनामाता, कैडमियम-इटाई" — "Mi-Mercury" (दोनों में M), "Cd-इटाई = दर्द-दर्द"।
  • "नीला बच्चा नाइट्रेट" — ब्लू बेबी = Nitrate (N-N)।
  • "आर्सेनिक के काले पैर" — ब्लैक फ़ुट।
  • "E-S-C" — ESP = कण, Scrubber = SO₂ (S-S), Catalytic = Car (C-C)।
  • "लंदन ठंडा-घटा (अपचायक), LA गर्म-चढ़ा (ऑक्सीकारक)"।
  • "BOD बढ़ा, DO घटा" — सी-सॉ जैसा संबंध।
  • "COD सबको पकड़ता है" — इसलिए COD ≥ BOD।
  • "हर 10 dB पर एक शून्य जुड़ता है" — 10, 100, 1000 गुना।
  • AQI श्रेणियाँ: "50-100-200-300-400-500 = अच्छा, संतोष, मध्यम, खराब, बहुत खराब, गंभीर"।
  • "भोपाल = MIC" — "Madhya pradesh In Chaos"।
  • "ऊर्जा घटे, विष बढ़े" — खाद्य शृंखला में ऊपर जाने पर।

14. कथन अभ्यास

भू-स्तरीय ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है। — सही।

स्थिरवैद्युत अवक्षेपक मुख्य रूप से SO₂ गैस हटाता है। — गलत (ESP कणिकीय पदार्थ हटाता है; SO₂ के लिए स्क्रबर)।

कैटेलिटिक कन्वर्टर वाले वाहनों में सीसा-रहित पेट्रोल का उपयोग आवश्यक है। — सही।

प्रकाश-रासायनिक स्मॉग ठंडे और नम मौसम में बनता है। — गलत (यह गर्म, शुष्क, धूप वाले मौसम में बनता है; ठंडा-नम मौसम क्लासिकल स्मॉग का है)।

उच्च BOD वाला जल अधिक प्रदूषित होता है। — सही।

किसी जल नमूने का BOD उसके COD से अधिक होता है। — गलत (COD सामान्यतः BOD के बराबर या अधिक होता है)।

मिनामाता रोग कैडमियम विषाक्तता से होता है। — गलत (मिनामाता पारे से; कैडमियम से इटाई-इटाई)।

ब्लू बेबी सिंड्रोम पेयजल में अधिक नाइट्रेट से होता है। — सही।

जैव-आवर्धन में पोषी स्तर बढ़ने के साथ विषैले पदार्थ की सांद्रता घटती है। — गलत (सांद्रता बढ़ती है)।

भोपाल गैस त्रासदी में मिथाइल आइसोसायनेट गैस का रिसाव हुआ। — सही।

अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम होता है। — सही।

भारत के राष्ट्रीय AQI में कार्बन डाइऑक्साइड शामिल है। — गलत (CO शामिल है, CO₂ नहीं)।


15. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. प्राथमिक: SO₂, NO, CO, कण; द्वितीयक: भू-स्तरीय O₃, PAN, अम्ल, प्रकाश-रासायनिक स्मॉग
  2. PM2.5 सबसे हानिकारक (NCERT)
  3. ESP = कण (99% से अधिक); स्क्रबर = SO₂; कैटेलिटिक कन्वर्टर = Pt-Pd-Rh, सीसा-रहित पेट्रोल
  4. क्लासिकल स्मॉग: धुआँ+कोहरा+SO₂, ठंडा-नम, अपचायक; प्रकाश-रासायनिक: NOₓ+HC+धूप, ऑक्सीकारक
  5. अम्ल वर्षा pH 5.6 से कम; ताजमहल "मार्बल कैंसर"
  6. AQI 2014, 8 प्रदूषक, 6 श्रेणियाँ (0–50 अच्छा … 401–500 गंभीर); CO₂ शामिल नहीं
  7. NAAQS PM2.5: 60 (24 घंटे), 40 (वार्षिक); PM10: 100, 60
  8. BOD ↑ = प्रदूषण ↑, DO ↓; COD ≥ BOD
  9. सुपोषण: N, P → शैवाल प्रस्फुटन → DO ↓ → मछलियाँ मरती हैं
  10. मिनामाता-पारा, इटाई-इटाई-कैडमियम, ब्लू बेबी-नाइट्रेट, ब्लैक फ़ुट-आर्सेनिक, फ़्लोरोसिस-फ़्लोराइड
  11. जैव-आवर्धन: DDT 0.003 ppb (जल) → 25 ppm (पक्षी); पतले अंडे-छिलके
  12. +10 dB = 10 गुना तीव्रता; आवासीय 55/45, शांत क्षेत्र 50/40 dB(A)
  13. तापीय प्रदूषण → DO घटता है; चेरनोबिल 1986, फ़ुकुशिमा 2011
  14. एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध 1 जुलाई 2022; कैरी बैग 120 माइक्रोन; ई-अपशिष्ट नियम 2022
  15. भोपाल 2–3 दिसंबर 1984, यूनियन कार्बाइड, MIC; फ़्लाई ऐश — कोयला ताप संयंत्र

16. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें — इसमें प्रदूषक, स्मॉग, AQI, नियंत्रण उपकरण, BOD-DO, रोग-प्रदूषक युग्म और जैव-आवर्धन व डेसिबल के संख्यात्मक प्रश्न हैं। पूरे पर्यावरण खंड के अभ्यास के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ या राजस्थान CET (स्नातक) मेगा टेस्ट सीरीज़ हल करें।


17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

प्रदूषण का अध्याय चार प्रश्नों में बँटता है — प्रदूषक कौन-सा है और कैसे बना (प्राथमिक/द्वितीयक), उसका प्रभाव क्या है (स्मॉग, अम्ल वर्षा, सुपोषण, रोग), वह कैसे मापा जाता है (AQI, BOD, COD, DO, dB) और उसे कैसे रोका जाता है (ESP, स्क्रबर, कैटेलिटिक कन्वर्टर, नियम)। जैव-आवर्धन इस अध्याय को पारिस्थितिकी से जोड़ता है — ऊर्जा ऊपर जाते हुए घटती है, पर स्थायी विष बढ़ता है। राजस्थान के संदर्भ में फ़्लोराइड, लवणता, खनन धूल और ताप विद्युत संयंत्रों की फ़्लाई ऐश विशेष महत्व के हैं।

O₃-PAN द्वितीयक | PM2.5 सबसे घातक | ESP-कण, स्क्रबर-SO₂, कन्वर्टर-कार | लंदन अपचायक, LA ऑक्सीकारक | pH < 5.6 | BOD ↑ DO ↓, COD ≥ BOD | Hg-मिनामाता, Cd-इटाई | DDT 0.003 ppb → 25 ppm | भोपाल 1984 MIC


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

प्राथमिक प्रदूषक सीधे स्रोत से उत्सर्जित होते हैं, जैसे SO₂, NO, CO और कणिकीय पदार्थ। द्वितीयक प्रदूषक वायुमंडल में प्राथमिक प्रदूषकों की क्रिया से बनते हैं, जैसे भू-स्तरीय ओज़ोन, PAN और अम्ल वर्षा के अम्ल।

2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण श्वसन मार्ग के अवरोधों को पार कर फेफड़ों में गहराई तक पहुँचते हैं। NCERT के अनुसार ये मानव स्वास्थ्य को सबसे अधिक हानि पहुँचाते हैं — श्वसन रोग, सूजन और फेफड़ों की क्षति।

0–50 अच्छा, 51–100 संतोषजनक, 101–200 मध्यम, 201–300 खराब, 301–400 बहुत खराब और 401–500 गंभीर। AQI में 8 प्रदूषक — PM10, PM2.5, NO₂, SO₂, CO, O₃, NH₃ और Pb — शामिल हैं।

BOD (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग) वह ऑक्सीजन है जो सूक्ष्मजीव जल के जैव-अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ को तोड़ने में खर्च करते हैं। BOD जितना अधिक, जल उतना अधिक कार्बनिक रूप से प्रदूषित।

जल में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक बढ़ने से शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होती है; उनके अपघटन में ऑक्सीजन खर्च होने से DO घटता है और मछलियाँ मरती हैं। मानवीय गतिविधियों से तेज़ हुई प्रक्रिया को सांस्कृतिक सुपोषण कहते हैं।

खाद्य शृंखला में पोषी स्तर बढ़ने के साथ स्थायी, वसा-घुलनशील विषैले पदार्थों (जैसे DDT, पारा) की सांद्रता का बढ़ना। NCERT के उदाहरण में DDT जल में 0.003 ppb से मछली खाने वाले पक्षियों में 25 ppm तक पहुँचता है।

मिनामाता रोग पारे (मिथाइल मर्करी) से और इटाई-इटाई रोग कैडमियम से होता है। दोनों के प्रसिद्ध मामले जापान में दर्ज हुए।

इसमें प्लैटिनम, पैलेडियम और रोडियम उत्प्रेरक होते हैं जो बिना जले हाइड्रोकार्बन को CO₂ और जल में, CO को CO₂ में और NO को N₂ में बदलते हैं। सीसा उत्प्रेरक को निष्क्रिय करता है, इसलिए सीसा-रहित पेट्रोल आवश्यक है।

2–3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल के यूनियन कार्बाइड कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था, जो विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में है।

कोयला-आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला जलने से बनी महीन राख फ़्लाई ऐश है। इसका उपयोग फ़्लाई ऐश ईंटों, सीमेंट व कंक्रीट, सड़क-तटबंध निर्माण और खदानों के भराव में होता है।

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