पारितंत्र, खाद्य शृंखला और ऊर्जा प्रवाह — 10% नियम, पिरामिड, जैव-भू-रासायनिक चक्र, अनुक्रमण — UPSC
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व RSSB वनरक्षक पाठ्यक्रम की पर्यावरण इकाई; NCERT जीव विज्ञान (कक्षा 12, पारिस्थितिकी इकाई) व भूगोल पाठ्यपुस्तकें तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आधिकारिक प्रकाशन। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: पारिस्थितिकी (Ecology) जीवों और उनके पर्यावरण के आपसी संबंधों का अध्ययन है; यह शब्द अर्न्स्ट हेकेल ने दिया और पारितंत्र (Ecosystem) शब्द ए. जी. टैन्सले ने। हर पारितंत्र के दो घटक हैं — जैविक (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और अजैविक (प्रकाश, ताप, जल, मृदा, पोषक)। ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (सूर्य → उत्पादक → उपभोक्ता) होता है, जबकि पोषक तत्व चक्रीय रूप में घूमते हैं। लिंडेमान के 10% नियम के अनुसार एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक औसतन लगभग 10% ऊर्जा ही पहुँचती है, इसलिए खाद्य शृंखला प्रायः 4–5 स्तरों से लंबी नहीं होती। ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है; संख्या का पिरामिड (एक बड़ा पेड़) और जैवभार का पिरामिड (समुद्र) उल्टा हो सकता है। NPP = GPP − R (श्वसन हानि)। फॉस्फोरस चक्र अवसादी है (वायुमंडलीय/गैसीय अवस्था नगण्य), जबकि कार्बन और नाइट्रोजन चक्र गैसीय हैं। अनुक्रमण में नग्न चट्टान पर लाइकेन और जल में पादप-प्लवक अग्रणी (pioneer) होते हैं; अंतिम स्थिर समुदाय चरम (climax) कहलाता है। सहोपकारिता (+/+), सहभोजिता (+/0), परजीविता व परभक्षण (+/−), स्पर्धा (−/−) और असहभोजिता (−/0) — ये छह पारस्परिक क्रियाएँ सबसे अधिक पूछी जाती हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| Ecology शब्द | अर्न्स्ट हेकेल (Ernst Haeckel) |
| Ecosystem शब्द | ए. जी. टैन्सले (A. G. Tansley, 1935) |
| 10% ऊर्जा नियम | रेमंड लिंडेमान (Raymond Lindeman, 1942) |
| ऊर्जा का मूल स्रोत | सूर्य |
| ऊर्जा प्रवाह | एकदिशीय (Unidirectional) |
| पोषक तत्व | चक्रीय (Biogeochemical cycles) |
| सदैव सीधा पिरामिड | ऊर्जा का पिरामिड |
| उल्टा हो सकता है | संख्या (एक वृक्ष/परजीवी) और जैवभार (समुद्री पारितंत्र) |
| शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता | NPP = GPP − R |
| अवसादी चक्र | फॉस्फोरस (गैसीय चरण नगण्य) |
| नाइट्रीकरण | नाइट्रोसोमोनास (NH₄⁺ → NO₂⁻), नाइट्रोबैक्टर (NO₂⁻ → NO₃⁻) |
| शुष्कक्रमक (xerarch) अग्रणी | लाइकेन |
| जलक्रमक (hydrarch) अग्रणी | पादप-प्लवक (phytoplankton) |
| प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत | गॉस (G. F. Gause) |
| सूत्र / नियम | अर्थ |
|---|---|
| अगले स्तर की ऊर्जा ≈ पिछले स्तर × 10/100 | लिंडेमान का 10% नियम |
| n वें उपभोक्ता की ऊर्जा = E × (0.1)ⁿ | E = उत्पादक की ऊर्जा |
| NPP = GPP − R | R = उत्पादकों की श्वसन हानि |
| पारिस्थितिक दक्षता = (स्तर n+1 की ऊर्जा / स्तर n की ऊर्जा) × 100 | प्रतिशत में |
| dN/dt = rN | घातांकी (J-आकार) वृद्धि |
| dN/dt = rN × (K − N)/K | लॉजिस्टिक (S-आकार) वृद्धि, K = वहन क्षमता |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
पारितंत्र, खाद्य शृंखला और ऊर्जा प्रवाह पर्यावरण अध्ययन की नींव है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा के पर्यावरण खंड में यह अवधारणात्मक कथनों (statement-based) के रूप में आता है; RAS प्रारंभिक में सामान्य विज्ञान और पर्यावरण दोनों भागों से जुड़ता है; RSSB वनरक्षक/वनपाल परीक्षा में पारिस्थितिकी की परिभाषाएँ, पिरामिड और अनुक्रमण सीधे पूछे जाते हैं; राजस्थान CET (स्नातक) में यह सामान्य विज्ञान के जीवविज्ञान भाग के रूप में आता है। आगे के सभी विषय — जैव विविधता और संरक्षण, प्रदूषण और जैव-आवर्धन — इसी समझ पर टिके हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (कथन आधारित, युग्म आधारित)
- RPSC RAS प्रारंभिक — सामान्य विज्ञान व पर्यावरण
- RSSB वनरक्षक / वनपाल — पारिस्थितिकी की मूल अवधारणाएँ
- राजस्थान CET (स्नातक) — जीवविज्ञान व पर्यावरण
- SSC व अन्य एकदिवसीय परीक्षाएँ — परिभाषा व तथ्य
प्रश्न कैसे आते हैं?
- कौन-सा पिरामिड कभी उल्टा नहीं होता? / किस पारितंत्र में जैवभार पिरामिड उल्टा होता है?
- 10% नियम पर आधारित ऊर्जा का सरल संख्यात्मक प्रश्न
- पारस्परिक क्रिया का उदाहरण से मिलान (लाइकेन, कोयल, ऑर्किड, अमरबेल)
- नाइट्रोजन चक्र में जीवाणु और उनकी भूमिका का युग्म
- अनुक्रमण में अग्रणी समुदाय और चरम समुदाय
- GPP, NPP और द्वितीयक उत्पादकता की परिभाषा
- Habitat बनाम Niche, Ecotone और Edge effect जैसे शब्दों पर कथन
3. पारिस्थितिकी की मूल शब्दावली
NCERT जीवविज्ञान कक्षा 12 पारिस्थितिकी को चार स्तरों पर पढ़ाती है — जीव, समष्टि, समुदाय और जीवोम (biome)। परीक्षा में इन शब्दों के बीच का अंतर ही सबसे अधिक पूछा जाता है।
| शब्द | अर्थ | उदाहरण / टिप्पणी |
|---|---|---|
| आवास (Habitat) | वह भौतिक स्थान जहाँ जीव रहता है — उसका "पता" | मछली का आवास तालाब |
| निके (Niche) | पारितंत्र में जीव की कार्यात्मक भूमिका — उसका "पेशा"; वह क्या खाता है, कब सक्रिय है, किन संसाधनों का कैसे उपयोग करता है | दो प्रजातियों का निके पूरी तरह समान हो तो स्पर्धा में एक हटती है |
| समष्टि (Population) | एक ही प्रजाति के जीवों का समूह जो एक क्षेत्र में रहते और प्रजनन करते हैं | एक तालाब के सभी मेंढक |
| समुदाय (Community) | एक क्षेत्र की विभिन्न प्रजातियों की सभी समष्टियाँ | तालाब के मेंढक, मछली, शैवाल, कीट |
| पारितंत्र (Ecosystem) | समुदाय + उसका अजैविक पर्यावरण, एक कार्यात्मक इकाई के रूप में | तालाब, वन, घास का मैदान |
| जीवोम (Biome) | जलवायु (ताप व वर्षा) से निर्धारित बड़ा क्षेत्रीय समुदाय | उष्णकटिबंधीय वर्षावन, मरुस्थल, टुंड्रा, टैगा, सवाना |
| जीवमंडल (Biosphere) | पृथ्वी का वह भाग जहाँ जीवन है | स्थलमंडल + जलमंडल + वायुमंडल का जीवित भाग |
| पारिस्थितिक संक्रमिका (Ecotone) | दो पारितंत्रों के बीच का संक्रमण क्षेत्र | वन और घास के मैदान की सीमा, मैंग्रोव (स्थल-समुद्र) |
| कोर-प्रभाव (Edge effect) | इकोटोन में प्रजातियों की संख्या और घनत्व प्रायः अधिक होना | दोनों ओर की प्रजातियाँ + कुछ इकोटोन-विशिष्ट |
| वहन क्षमता (Carrying capacity, K) | किसी आवास द्वारा सहारा दी जा सकने वाली अधिकतम समष्टि | लॉजिस्टिक वक्र का ऊपरी स्तर |
3.1 समष्टि के गुण
| गुण | अर्थ |
|---|---|
| जन्म दर (Natality) | प्रति इकाई समय में जुड़ने वाले नए सदस्य |
| मृत्यु दर (Mortality) | प्रति इकाई समय में होने वाली मृत्यु |
| आप्रवासन (Immigration) | बाहर से आकर जुड़ना — समष्टि बढ़ाता है |
| उत्प्रवासन (Emigration) | समष्टि छोड़कर जाना — समष्टि घटाता है |
| लिंग अनुपात | नर-मादा अनुपात |
| आयु पिरामिड | चौड़ा आधार = बढ़ती, घंटी-आकार = स्थिर, संकरा आधार = घटती समष्टि |
| घातांकी वृद्धि | संसाधन असीमित, J-आकार वक्र |
| लॉजिस्टिक वृद्धि | संसाधन सीमित, S-आकार (सिग्मॉइड) वक्र, K पर स्थिर |
4. पारितंत्र के घटक
| घटक | प्रकार | भूमिका / उदाहरण |
|---|---|---|
| अजैविक (Abiotic) | भौतिक व रासायनिक कारक | सूर्य-प्रकाश, ताप, जल, वायु, मृदा, अकार्बनिक पोषक (C, N, P), कार्बनिक पदार्थ (ह्यूमस) |
| उत्पादक (Producers) | स्वपोषी | हरे पौधे, शैवाल, पादप-प्लवक, सायनोबैक्टीरिया — प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं |
| प्राथमिक उपभोक्ता | शाकाहारी | टिड्डा, हिरण, गाय, प्राणी-प्लवक |
| द्वितीयक उपभोक्ता | मांसाहारी (शाकाहारी को खाने वाले) | मेंढक, लोमड़ी, छोटी मछली |
| तृतीयक उपभोक्ता | उच्च मांसाहारी | साँप, बड़ी मछली, बाज |
| शीर्ष उपभोक्ता | जिसे कोई नहीं खाता | बाघ, शेर, चील |
| अपघटक (Decomposers) | मृतपोषी (saprotrophs) | कवक, जीवाणु — मृत पदार्थ तोड़कर पोषक मुक्त करते हैं |
| अपरदाहारी (Detritivores) | मृत कार्बनिक पदार्थ खाने वाले | केंचुआ, दीमक — अपरद को टुकड़ों में तोड़ते हैं |
ध्यान दें: रासायनिक-संश्लेषी (chemosynthetic) जीवाणु भी उत्पादक हैं — वे प्रकाश के बिना अकार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण से ऊर्जा लेते हैं।
4.1 अपघटन (Decomposition) के चरण — NCERT
| चरण | क्या होता है |
|---|---|
| खंडन (Fragmentation) | अपरदाहारी (जैसे केंचुआ) अपरद को छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं |
| निक्षालन (Leaching) | जल-घुलनशील अकार्बनिक पोषक मृदा में नीचे जाकर अवक्षेपित होते हैं |
| अपचय (Catabolism) | जीवाणु व कवक के एंजाइम अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं |
| ह्यूमीकरण (Humification) | गहरे रंग का, अपघटन-प्रतिरोधी ह्यूमस बनता है — बहुत धीरे अपघटित, पोषकों का भंडार |
| खनिजीकरण (Mineralisation) | ह्यूमस का सूक्ष्मजीवों द्वारा आगे अपघटन, अकार्बनिक पोषक मुक्त |
अपघटन गर्म और नम वातावरण में तेज़ होता है; कम ताप और अवायवीय स्थिति में धीमा। अपरद में लिग्निन व काइटिन अधिक हो तो अपघटन धीमा, नाइट्रोजन व जल-घुलनशील शर्करा अधिक हो तो तेज़।
5. खाद्य शृंखला और खाद्य जाल
| आधार | खाद्य शृंखला (Food chain) | खाद्य जाल (Food web) |
|---|---|---|
| संरचना | एक सीधी रेखीय क्रम | कई परस्पर जुड़ी खाद्य शृंखलाएँ |
| भोजन के विकल्प | प्रत्येक जीव का एक ही भोजन स्रोत माना जाता है | एक जीव कई स्तरों पर कई प्रकार का भोजन लेता है |
| स्थिरता | कम — एक कड़ी टूटे तो शृंखला टूट जाती है | अधिक — वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध |
| वास्तविकता | सरलीकृत मॉडल | प्रकृति का वास्तविक चित्र |
5.1 खाद्य शृंखला के प्रकार
| प्रकार | आरंभ | उदाहरण |
|---|---|---|
| चराई खाद्य शृंखला (GFC) | जीवित हरे पौधे (उत्पादक) | घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज |
| अपरद खाद्य शृंखला (DFC) | मृत कार्बनिक पदार्थ (अपरद) | सूखी पत्तियाँ → केंचुआ → मुर्गी/पक्षी |
| जलीय उदाहरण | पादप-प्लवक | पादप-प्लवक → प्राणी-प्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली |
NCERT के अनुसार जलीय पारितंत्र में चराई शृंखला ऊर्जा प्रवाह का मुख्य मार्ग है, जबकि स्थलीय पारितंत्र (जैसे वन) में ऊर्जा का कहीं बड़ा भाग अपरद खाद्य शृंखला से होकर बहता है।
5.2 पोषी स्तर (Trophic levels)
| पोषी स्तर | जीव | घास के मैदान में उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रथम (T1) | उत्पादक | घास |
| द्वितीय (T2) | प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) | टिड्डा, खरगोश |
| तृतीय (T3) | द्वितीयक उपभोक्ता | मेंढक, लोमड़ी |
| चतुर्थ (T4) | तृतीयक उपभोक्ता | साँप |
| पंचम (T5) | शीर्ष मांसाहारी | बाज, चील |
एक ही जीव अलग-अलग शृंखलाओं में अलग पोषी स्तर पर हो सकता है — मनुष्य अनाज खाए तो प्राथमिक उपभोक्ता, मछली खाए तो द्वितीयक या तृतीयक। पोषी स्तर जीव की प्रजाति नहीं, उसकी भोजन-भूमिका बताता है।
6. ऊर्जा प्रवाह और लिंडेमान का 10% नियम
सूर्य से आने वाले विकिरण का केवल लगभग आधा भाग प्रकाश-संश्लेषी सक्रिय विकिरण (PAR) होता है, और पौधे PAR का भी केवल लगभग 2–10% ही पकड़ पाते हैं (NCERT)। यही थोड़ी-सी ऊर्जा पूरे जीव-जगत को चलाती है। ऊर्जा उष्मागतिकी के नियमों का पालन करती है — हर स्थानांतरण में ऊर्जा का बड़ा भाग श्वसन और ऊष्मा के रूप में नष्ट होता है, इसलिए वह लौटकर सूर्य या उत्पादक तक नहीं जाती — प्रवाह एकदिशीय है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नियम | एक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का औसतन लगभग 10% ही अगले स्तर तक पहुँचता है |
| प्रस्तावक | रेमंड लिंडेमान (1942), सीडर बॉग झील के अध्ययन पर आधारित |
| शेष 90% कहाँ | श्वसन, ऊष्मा, उत्सर्जन, अपचित भाग, अपघटकों को |
| परिणाम 1 | खाद्य शृंखला प्रायः 4–5 पोषी स्तरों तक सीमित |
| परिणाम 2 | ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा |
| परिणाम 3 | शाकाहारी आहार ऊर्जा की दृष्टि से अधिक दक्ष (कम स्तर = कम हानि) |
| सावधानी | 10% एक औसत/सामान्यीकरण है; वास्तविक दक्षता पारितंत्र अनुसार बदलती है |
6.1 हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण
| प्रश्न | हल | उत्तर |
|---|---|---|
| उत्पादकों में 10,000 J ऊर्जा है। 10% नियम से तृतीयक उपभोक्ता को कितनी ऊर्जा मिलेगी? | 10,000 → 1,000 (प्राथमिक) → 100 (द्वितीयक) → 10 (तृतीयक); 10,000 × (0.1)³ | 10 J |
| द्वितीयक उपभोक्ता को 50 J मिले। उत्पादक स्तर पर कितनी ऊर्जा थी? | 50 × 10 × 10 (दो स्तर पीछे) | 5,000 J |
| पौधों पर 20,00,000 J सौर ऊर्जा पड़ी और उन्होंने उसका 1% संचित किया। शाकाहारी को कितनी मिलेगी? | 2,000,000 × 1/100 = 20,000 J (उत्पादक); 20,000 × 10% = 2,000 J | 2,000 J |
| GPP = 2,500 kcal/m²/वर्ष, श्वसन हानि R = 900। NPP? | NPP = GPP − R = 2,500 − 900 | 1,600 kcal/m²/वर्ष |
| किसी स्तर पर 150 J थी, अगले स्तर को 15 J मिली। पारिस्थितिक दक्षता? | (15/150) × 100 | 10% |
| शृंखला: घास → हिरण → बाघ। घास में 50,000 J। बाघ को? | बाघ दूसरा उपभोक्ता: 50,000 × 0.1 × 0.1 | 500 J |
| NPP = 3,000 और श्वसन हानि GPP की 40% है। GPP? | NPP = 0.6 × GPP → GPP = 3,000/0.6 | 5,000 |
शॉर्टकट: उत्पादक से n स्तर आगे की ऊर्जा = मूल ऊर्जा ÷ 10ⁿ। उल्टा पूछें तो × 10ⁿ। पहले गिन लें कि प्रश्न में जीव उत्पादक से कितने कदम दूर है।
7. पारिस्थितिक पिरामिड
पारिस्थितिक पिरामिड की अवधारणा चार्ल्स एल्टन से जुड़ी है, इसलिए इन्हें एल्टोनियन पिरामिड भी कहते हैं। आधार पर उत्पादक और शीर्ष पर शीर्ष उपभोक्ता होते हैं।
| पिरामिड | क्या मापता है | सामान्य आकार | उल्टा कब? |
|---|---|---|---|
| संख्या का पिरामिड | प्रत्येक स्तर पर जीवों की संख्या | घास का मैदान, तालाब — सीधा | एक बड़ा वृक्ष (1 पेड़ → हज़ारों कीट → पक्षी); परजीवी शृंखला — उल्टा या तकुआकार |
| जैवभार का पिरामिड | प्रत्येक स्तर का शुष्क भार | स्थलीय पारितंत्र — सीधा | समुद्र/जलीय पारितंत्र — पादप-प्लवक का कुल जैवभार प्राणी-प्लवक व मछलियों से कम (तेज़ी से बढ़ते-खपते हैं) — उल्टा |
| ऊर्जा का पिरामिड | प्रत्येक स्तर से प्रति इकाई समय गुज़रने वाली ऊर्जा | सदैव सीधा | कभी नहीं — हर स्थानांतरण में ऊर्जा घटती है |
7.1 पिरामिड की सीमाएँ (NCERT)
- एक ही प्रजाति के एक से अधिक पोषी स्तर पर होने को ध्यान में नहीं रखते।
- सरल खाद्य शृंखला मानते हैं, खाद्य जाल नहीं — जो प्रकृति में कभी नहीं होती।
- मृतपोषियों (अपघटकों) को स्थान नहीं देते, यद्यपि वे पारितंत्र में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
8. उत्पादकता (Productivity)
| शब्द | परिभाषा | मात्रक / टिप्पणी |
|---|---|---|
| प्राथमिक उत्पादन | एक समय-अवधि में प्रति इकाई क्षेत्र पौधों द्वारा उत्पन्न जैवभार/कार्बनिक पदार्थ | g/m² या kcal/m² |
| उत्पादकता | जैवभार उत्पादन की दर | g/m²/वर्ष या kcal/m²/वर्ष |
| सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) | प्रकाश-संश्लेषण के दौरान कार्बनिक पदार्थ बनने की कुल दर | कुल उत्पादन |
| शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP) | GPP में से श्वसन हानि घटाकर — शाकाहारियों और अपघटकों के लिए उपलब्ध जैवभार | NPP = GPP − R |
| द्वितीयक उत्पादकता | उपभोक्ताओं द्वारा नए कार्बनिक पदार्थ बनने की दर | उपभोक्ता स्तर पर |
प्राथमिक उत्पादकता प्रजाति, ताप, प्रकाश, जल, पोषक तत्वों और पौधों की प्रकाश-संश्लेषण क्षमता पर निर्भर करती है, इसलिए यह विभिन्न पारितंत्रों में अलग-अलग होती है। NCERT के अनुसार महासागर पृथ्वी की सतह का लगभग 70% भाग घेरते हैं, फिर भी उनकी कुल उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है।
9. जैव-भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycles)
| चक्र | प्रकार | मुख्य भंडार | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|
| कार्बन | गैसीय | महासागर (घुलित कार्बन) व वायुमंडल (CO₂), जीवाश्म ईंधन | प्रकाश-संश्लेषण से स्थिरीकरण; श्वसन, अपघटन, दहन, ज्वालामुखी से वापसी। NCERT: जीवों के शुष्क भार का लगभग 49% कार्बन, लगभग 71% कार्बन महासागरों में घुला हुआ |
| नाइट्रोजन | गैसीय | वायुमंडल (लगभग 78% N₂) | स्थिरीकरण, अमोनीकरण, नाइट्रीकरण, स्वांगीकरण, विनाइट्रीकरण |
| फॉस्फोरस | अवसादी | चट्टानें (फॉस्फेट) | अपक्षय से मुक्त; वायुमंडल में गैसीय रूप नगण्य; DNA, ATP, हड्डियों व दाँतों में |
| जल | जलीय चक्र | महासागर | वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, संघनन, वर्षण, अपवाह, अंतःस्यंदन; सौर ऊर्जा से संचालित |
9.1 नाइट्रोजन चक्र — जीवाणु और चरण
| चरण | परिवर्तन | जीव / माध्यम |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण (जैविक) | N₂ → NH₃ | राइज़ोबियम (दलहनी पौधों की जड़-ग्रंथिकाओं में, सहजीवी), एज़ोटोबैक्टर (स्वतंत्र), एनाबीना व नॉस्टॉक (सायनोबैक्टीरिया) |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण (अजैविक) | N₂ → नाइट्रोजन ऑक्साइड (तड़ित) / NH₃ (हैबर विधि) | तड़ित (बिजली), औद्योगिक (हैबर विधि से उर्वरक) |
| अमोनीकरण | कार्बनिक N → NH₃/NH₄⁺ | अपघटक जीवाणु व कवक |
| नाइट्रीकरण (चरण 1) | NH₄⁺ → NO₂⁻ (नाइट्राइट) | नाइट्रोसोमोनास |
| नाइट्रीकरण (चरण 2) | NO₂⁻ → NO₃⁻ (नाइट्रेट) | नाइट्रोबैक्टर |
| स्वांगीकरण | पौधों द्वारा NO₃⁻ / NH₄⁺ का अवशोषण | पौधे |
| विनाइट्रीकरण | NO₃⁻ → N₂ | स्यूडोमोनास, थायोबैसिलस |
दलहनी फसलें (चना, मूँग, मसूर) मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, इसलिए फसल-चक्र में शामिल की जाती हैं। जड़-ग्रंथिकाओं का गुलाबी रंग लेगहीमोग्लोबिन के कारण होता है, जो नाइट्रोजिनेज़ एंजाइम को ऑक्सीजन से बचाता है।
9.2 गैसीय बनाम अवसादी चक्र
| आधार | गैसीय चक्र | अवसादी चक्र |
|---|---|---|
| भंडार | वायुमंडल / महासागर | पृथ्वी की पर्पटी (चट्टानें) |
| गति | अपेक्षाकृत तेज़ | बहुत धीमा |
| उदाहरण | कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन | फॉस्फोरस, सल्फर, कैल्शियम |
टिप्पणी: सल्फर का कुछ भाग SO₂ और H₂S के रूप में वायुमंडल में भी जाता है, इसलिए कुछ पुस्तकें इसे मिश्रित मानती हैं; परीक्षा में "पूरी तरह अवसादी, गैसीय चरण नगण्य" का मानक उदाहरण फॉस्फोरस ही है।
10. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession)
किसी क्षेत्र में समुदायों की संरचना में समय के साथ होने वाला क्रमिक और कुछ हद तक पूर्वानुमेय परिवर्तन अनुक्रमण है। प्रत्येक अस्थायी समुदाय को क्रमक-अवस्था (seral stage) और पूरे क्रम को सेरे (sere) कहते हैं। अंतिम अपेक्षाकृत स्थिर समुदाय, जो उस क्षेत्र की जलवायु के साथ संतुलन में होता है, चरम समुदाय (climax community) कहलाता है।
| आधार | प्राथमिक अनुक्रमण | द्वितीयक अनुक्रमण |
|---|---|---|
| आरंभ | जहाँ पहले कभी जीवन/मृदा नहीं थी | जहाँ समुदाय नष्ट हुआ पर मृदा बची है |
| उदाहरण | नग्न चट्टान, ठंडा लावा, नया बना तालाब, नई रेत | जला हुआ वन, बाढ़ के बाद की भूमि, छोड़ा गया खेत |
| गति | बहुत धीमा (मृदा बनने में बहुत समय) | अपेक्षाकृत तेज़ |
| प्रकार | आरंभ | अग्रणी (Pioneer) | क्रम (संक्षेप) |
|---|---|---|---|
| जलक्रमक (Hydrarch) | जल / जलीय क्षेत्र (आर्द्र) | पादप-प्लवक | पादप-प्लवक → जड़युक्त जलमग्न पौधे → प्लवमान पौधे → नरकुल दलदल → झाड़ियाँ → वन; जल से मध्यमोद्भिद (mesic) की ओर |
| शुष्कक्रमक (Xerarch) | शुष्क क्षेत्र, नग्न चट्टान | लाइकेन | लाइकेन (अम्ल स्रावित कर चट्टान घोलते, मृदा बनाते) → मॉस → घास/शाक → झाड़ियाँ → वन; शुष्क से मध्यमोद्भिद की ओर |
मुख्य बिंदु: जलक्रमक और शुष्कक्रमक — दोनों का अंत मध्यमोद्भिद (mesic) परिस्थितियों में होता है, न अधिक शुष्क न अधिक आर्द्र। अनुक्रमण के साथ प्रजाति विविधता, कुल जैवभार और कार्बनिक पदार्थ सामान्यतः बढ़ते हैं।
11. समष्टि पारस्परिक क्रियाएँ (Population Interactions)
| क्रिया | प्रजाति A | प्रजाति B | उदाहरण (NCERT) |
|---|---|---|---|
| सहोपकारिता (Mutualism) | + | + | लाइकेन (कवक + शैवाल/सायनोबैक्टीरिया), माइकोराइज़ा (कवक + पौधे की जड़), अंजीर और ततैया, ऑर्किड और मधुमक्खी (परागण) |
| सहभोजिता (Commensalism) | + | 0 | आम की शाखा पर उगता ऑर्किड (अधिपादप), व्हेल की पीठ पर बार्नेकल, मवेशी के साथ चरता बगुला (cattle egret), समुद्री एनीमोन और क्लाउन मछली |
| परजीविता (Parasitism) | + (परजीवी) | − (पोषक) | अमरबेल (कस्कुटा), जूँ, फीताकृमि, कोयल का नीड़-परजीविता (कौए के घोंसले में अंडे) |
| परभक्षण (Predation) | + (परभक्षी) | − (शिकार) | बाघ-हिरण; शाकाहारी भी पौधों के "परभक्षी" माने जाते हैं |
| स्पर्धा (Competition) | − | − | गैलापागोस में बकरियों के आने से एबिंगडन कछुए का विलोप; बैलेनस द्वारा चैथेमेलस बार्नेकल को हटाना |
| असहभोजिता (Amensalism) | − | 0 | पेनिसिलियम द्वारा जीवाणु वृद्धि का निरोध |
11.1 कुछ विशेष अवधारणाएँ
| अवधारणा | अर्थ |
|---|---|
| गॉस का प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत | समान संसाधनों के लिए स्पर्धा करने वाली दो निकट-संबंधी प्रजातियाँ अनिश्चित काल तक साथ नहीं रह सकतीं; कमज़ोर अंततः हटती है |
| संसाधन विभाजन (Resource partitioning) | स्पर्धा से बचने हेतु भोजन/समय/स्थान बाँटना — मैकआर्थर ने एक ही पेड़ पर भोजन करने वाली वार्बलर चिड़ियों की पाँच प्रजातियों में दिखाया |
| नीड़ परजीविता (Brood parasitism) | कोयल अपने अंडे कौए के घोंसले में देती है; अंडों का रंग-आकार मेज़बान जैसा विकसित हुआ |
| जैविक नियंत्रण | परभक्षी द्वारा कीट नियंत्रण; ऑस्ट्रेलिया में नागफनी (Opuntia) को कैक्टस-भक्षी कीट (मॉथ) से नियंत्रित किया गया |
| छद्मावरण / अनुहरण | शिकार से बचाव — कीटों का छलावरण; मोनार्क तितली विषैले रसायन के कारण पक्षियों के लिए अरुचिकर |
| पौधों की रक्षा | काँटे (बबूल, कैक्टस), विषैले रसायन (Calotropis — आक में हृदय-विषाक्त ग्लाइकोसाइड) |
12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "10% ऊर्जा अगले स्तर पर जाती है, बाकी 90% अगले-अगले स्तर पर"
गलत। शेष लगभग 90% ऊर्जा उसी स्तर पर श्वसन व ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है या अपघटकों को जाती है; वह किसी उच्च स्तर तक नहीं पहुँचती। ऊर्जा का पुनर्चक्रण नहीं होता।
Trap 2: कौन-सा पिरामिड उल्टा?
समुद्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है, ऊर्जा का नहीं। एक बड़े वृक्ष पर संख्या का पिरामिड उल्टा/तकुआकार होता है, पर वहाँ भी ऊर्जा पिरामिड सीधा रहता है। "ऊर्जा पिरामिड कभी-कभी उल्टा होता है" — हमेशा गलत।
Trap 3: Habitat बनाम Niche
Habitat स्थान है ("पता"), Niche भूमिका है ("पेशा")। एक ही आवास (तालाब) में कई प्रजातियाँ अलग-अलग निके के साथ रह सकती हैं। "निके = आवास का भौतिक क्षेत्र" — गलत।
Trap 4: नाइट्रोसोमोनास और नाइट्रोबैक्टर का क्रम
अमोनिया → नाइट्राइट = नाइट्रोसोमोनास (S पहले), नाइट्राइट → नाइट्रेट = नाइट्रोबैक्टर। विनाइट्रीकरण (नाइट्रेट → N₂) स्यूडोमोनास करता है, राइज़ोबियम नहीं। राइज़ोबियम स्थिरीकरण करता है।
Trap 5: सहभोजिता बनाम सहोपकारिता
आम के पेड़ पर ऑर्किड = सहभोजिता (ऑर्किड को लाभ, पेड़ पर कोई प्रभाव नहीं); यह परजीविता नहीं, क्योंकि ऑर्किड पेड़ से भोजन नहीं लेता। जबकि ऑर्किड और उसके परागणकर्ता मधुमक्खी का संबंध सहोपकारिता है। अमरबेल (कस्कुटा) परजीवी है।
Trap 6: अग्रणी प्रजातियाँ
नग्न चट्टान (शुष्कक्रमक) पर अग्रणी लाइकेन है, मॉस नहीं — मॉस दूसरी अवस्था है। जल (जलक्रमक) में अग्रणी पादप-प्लवक है। दोनों का चरम मध्यमोद्भिद वन/समुदाय है।
Trap 7: GPP और NPP
शाकाहारियों के लिए उपलब्ध ऊर्जा NPP है, GPP नहीं। NPP हमेशा GPP से कम होती है, क्योंकि उत्पादक अपनी श्वसन में कुछ ऊर्जा खर्च करते हैं।
Trap 8: फॉस्फोरस चक्र
"फॉस्फोरस चक्र में वायुमंडल मुख्य भंडार है" — गलत। मुख्य भंडार चट्टानें हैं; वायुमंडलीय आदान-प्रदान नगण्य है। कार्बन चक्र के विपरीत यहाँ गैसीय आदान-प्रदान नहीं होता।
Trap 9: अपघटक बनाम अपरदाहारी
केंचुआ अपरदाहारी है — वह अपरद का खंडन करता है। वास्तविक रासायनिक अपघटन (अपचय) जीवाणु और कवक करते हैं। "केंचुआ प्रमुख अपघटक जीवाणु है" जैसे कथन से सावधान।
Trap 10: ऊर्जा बनाम पोषक
पोषक तत्व (C, N, P) पारितंत्र में चक्रण करते हैं; ऊर्जा प्रवाहित होती है। "ऊर्जा चक्र" शब्द प्रश्न में आए तो प्रायः यह जाल होता है।
13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | Ecology शब्द किसने दिया? | अर्न्स्ट हेकेल |
| 2 | Ecosystem शब्द किसने दिया? | ए. जी. टैन्सले (1935) |
| 3 | 10% नियम | लिंडेमान (1942) |
| 4 | पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत | सूर्य |
| 5 | ऊर्जा प्रवाह की दिशा | एकदिशीय |
| 6 | पौधे PAR का कितना भाग पकड़ते हैं | लगभग 2–10% |
| 7 | प्रथम पोषी स्तर | उत्पादक |
| 8 | शाकाहारी किस पोषी स्तर पर | द्वितीय (प्राथमिक उपभोक्ता) |
| 9 | मृत पदार्थ से आरंभ होने वाली शृंखला | अपरद खाद्य शृंखला |
| 10 | जीवित पौधों से आरंभ होने वाली शृंखला | चराई खाद्य शृंखला |
| 11 | स्थलीय वन में ऊर्जा का बड़ा भाग किस शृंखला से | अपरद खाद्य शृंखला |
| 12 | खाद्य जाल का लाभ | पारितंत्र की स्थिरता |
| 13 | सदैव सीधा पिरामिड | ऊर्जा |
| 14 | समुद्र में उल्टा पिरामिड | जैवभार |
| 15 | एक वृक्ष पारितंत्र में उल्टा | संख्या का पिरामिड |
| 16 | पिरामिड अवधारणा | चार्ल्स एल्टन |
| 17 | NPP का सूत्र | GPP − R |
| 18 | शाकाहारी के लिए उपलब्ध जैवभार | NPP |
| 19 | उपभोक्ताओं द्वारा नए जैवभार की दर | द्वितीयक उत्पादकता |
| 20 | अवसादी चक्र का मानक उदाहरण | फॉस्फोरस |
| 21 | वायुमंडल में N₂ का अंश | लगभग 78% |
| 22 | दलहन की जड़-ग्रंथिका में जीवाणु | राइज़ोबियम |
| 23 | स्वतंत्र N-स्थिरीकारी जीवाणु | एज़ोटोबैक्टर |
| 24 | N-स्थिरीकारी सायनोबैक्टीरिया | एनाबीना, नॉस्टॉक |
| 25 | NH₄⁺ → NO₂⁻ | नाइट्रोसोमोनास |
| 26 | NO₂⁻ → NO₃⁻ | नाइट्रोबैक्टर |
| 27 | विनाइट्रीकरण | स्यूडोमोनास, थायोबैसिलस |
| 28 | जड़-ग्रंथिका का गुलाबी रंग | लेगहीमोग्लोबिन |
| 29 | महासागरों में घुला कार्बन (NCERT) | लगभग 71% |
| 30 | अपघटन का अपघटन-प्रतिरोधी उत्पाद | ह्यूमस |
| 31 | अपघटन तेज़ कब | गर्म व नम परिस्थिति |
| 32 | शुष्कक्रमक अग्रणी | लाइकेन |
| 33 | जलक्रमक अग्रणी | पादप-प्लवक |
| 34 | अनुक्रमण का अंतिम स्थिर समुदाय | चरम (climax) |
| 35 | जले हुए वन में अनुक्रमण | द्वितीयक |
| 36 | नग्न चट्टान/ठंडे लावा पर अनुक्रमण | प्राथमिक |
| 37 | दोनों अनुक्रमण किस ओर | मध्यमोद्भिद (mesic) |
| 38 | लाइकेन | सहोपकारिता (+/+) |
| 39 | माइकोराइज़ा | सहोपकारिता (कवक + जड़) |
| 40 | आम पर ऑर्किड | सहभोजिता (+/0) |
| 41 | व्हेल पर बार्नेकल | सहभोजिता |
| 42 | अमरबेल (कस्कुटा) | परजीविता |
| 43 | कोयल–कौआ | नीड़ परजीविता |
| 44 | पेनिसिलियम–जीवाणु | असहभोजिता (−/0) |
| 45 | दोनों को हानि | स्पर्धा (−/−) |
| 46 | प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत | गॉस |
| 47 | वार्बलर में संसाधन विभाजन | मैकआर्थर |
| 48 | लॉजिस्टिक वक्र का आकार | S (सिग्मॉइड) |
| 49 | घातांकी वक्र का आकार | J |
| 50 | दो पारितंत्रों का संक्रमण क्षेत्र | इकोटोन (कोर-प्रभाव) |
| 51 | जलवायु से निर्धारित बड़ा समुदाय | जीवोम (Biome) |
| 52 | प्रकाश के बिना उत्पादक | रासायनिक-संश्लेषी जीवाणु |
14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
Pattern 1: कथन आधारित (UPSC शैली)
नमूना प्रश्न: पारिस्थितिक पिरामिड के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार करें — (1) ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है। (2) समुद्री पारितंत्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा हो सकता है। (3) पिरामिड अपघटकों को पोषी स्तर के रूप में दर्शाते हैं।
उत्तर: केवल 1 और 2 सही। (कथन 3 गलत — पिरामिड मृतपोषियों को स्थान नहीं देते।)
Pattern 2: संख्यात्मक (RAS / CET / वनरक्षक)
नमूना प्रश्न: एक खाद्य शृंखला में उत्पादक 40,000 J ऊर्जा संचित करते हैं। 10% नियम से द्वितीयक उपभोक्ता को कितनी ऊर्जा मिलेगी?
हल: 40,000 → 4,000 → 400। उत्तर: 400 J।
Pattern 3: युग्म / मिलान
नमूना प्रश्न: सुमेलित कीजिए — (a) लाइकेन (b) कोयल (c) आम पर ऑर्किड (d) पेनिसिलियम; (i) असहभोजिता (ii) सहभोजिता (iii) नीड़ परजीविता (iv) सहोपकारिता।
उत्तर: a-iv, b-iii, c-ii, d-i।
Pattern 4: क्रम आधारित
नमूना प्रश्न: नग्न चट्टान पर अनुक्रमण का सही क्रम?
उत्तर: लाइकेन → मॉस → घास/शाक → झाड़ियाँ → वन।
Pattern 5: "कौन-सा सही नहीं है"
नमूना प्रश्न: कौन-सा युग्म सही नहीं है? (A) नाइट्रोसोमोनास — नाइट्रीकरण (B) राइज़ोबियम — विनाइट्रीकरण (C) एज़ोटोबैक्टर — स्वतंत्र N-स्थिरीकरण (D) स्यूडोमोनास — विनाइट्रीकरण।
उत्तर: (B) — राइज़ोबियम सहजीवी N-स्थिरीकरण करता है।
15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
- "हेकेल ने Eco-लॉजी, टैन्सले ने Eco-सिस्टम" — "ह" पहले (Haeckel → Ecology), "ट" बाद में (Tansley → Ecosystem)।
- "लिंडेमान = Ten-डेमान" — 10% नियम।
- पिरामिड: "ऊर्जा कभी उल्टी नहीं चलती" — ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा; "समुद्र में Bio उल्टा, पेड़ पर Number उल्टा"।
- नाइट्रीकरण: "सो-बा" (Soma → Bacter) — पहले नाइट्रोसोमोनास (अमोनिया → नाइट्राइट), फिर नाइट्रोबैक्टर (नाइट्राइट → नाइट्रेट)।
- "विनाश = स्यूडो" — विनाइट्रीकरण स्यूडोमोनास।
- "फॉस्फोरस पत्थर में सोता है" — अवसादी चक्र, चट्टानें भंडार।
- "सूखी चट्टान पर Lichen, गीले तालाब में Plankton" — अग्रणी प्रजातियाँ।
- पारस्परिक क्रियाएँ (+/+, +/0, +/−, −/−, −/0): "सहो-सब खुश, सहभो-एक खुश, परजीवी-एक चूसे, स्पर्धा-दोनों रोएँ, असह-एक रोए"।
- NPP = GPP − R: "Net = Gross − Respiration" — जैसे शुद्ध वेतन = सकल वेतन − कटौती।
- ऊर्जा शॉर्टकट: "हर सीढ़ी पर एक शून्य कटता है" — 10,000 → 1,000 → 100 → 10।
16. कथन अभ्यास
पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है। — सही।
ऊर्जा का पिरामिड कुछ जलीय पारितंत्रों में उल्टा होता है। — गलत (ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है; जलीय पारितंत्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है)।
10% नियम रेमंड लिंडेमान से संबंधित है। — सही।
फॉस्फोरस चक्र का मुख्य भंडार वायुमंडल है। — गलत (मुख्य भंडार चट्टानें हैं; यह अवसादी चक्र है)।
नाइट्रोबैक्टर अमोनिया को नाइट्राइट में बदलता है। — गलत (यह कार्य नाइट्रोसोमोनास करता है; नाइट्रोबैक्टर नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है)।
शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता सकल प्राथमिक उत्पादकता से श्वसन हानि घटाकर प्राप्त होती है। — सही।
नग्न चट्टान पर अनुक्रमण की अग्रणी प्रजाति मॉस है। — गलत (अग्रणी लाइकेन है; मॉस अगली अवस्था है)।
आम के वृक्ष पर उगने वाला ऑर्किड परजीविता का उदाहरण है। — गलत (यह सहभोजिता है)।
लाइकेन कवक और शैवाल के बीच सहोपकारिता का उदाहरण है। — सही।
निके किसी जीव के रहने का भौतिक स्थान है। — गलत (भौतिक स्थान आवास है; निके जीव की कार्यात्मक भूमिका है)।
जले हुए वन में होने वाला अनुक्रमण द्वितीयक अनुक्रमण है। — सही।
केंचुआ अपरद का खंडन करने वाला अपरदाहारी है। — सही।
17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- Ecology — हेकेल; Ecosystem — टैन्सले (1935)
- Habitat = पता, Niche = पेशा (कार्यात्मक भूमिका)
- समष्टि = एक प्रजाति; समुदाय = अनेक प्रजातियाँ; जीवोम = जलवायु-आधारित बड़ा क्षेत्र
- उत्पादक → प्राथमिक → द्वितीयक → तृतीयक उपभोक्ता; अपघटक = जीवाणु, कवक
- ऊर्जा एकदिशीय, पोषक चक्रीय
- लिंडेमान (1942): हर स्तर पर लगभग 10% ऊर्जा आगे
- n स्तर आगे ऊर्जा = E ÷ 10ⁿ
- ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा; समुद्र में जैवभार उल्टा; एक पेड़ पर संख्या उल्टी
- NPP = GPP − R; शाकाहारी के लिए उपलब्ध = NPP
- फॉस्फोरस = अवसादी चक्र; कार्बन, नाइट्रोजन = गैसीय
- राइज़ोबियम (सहजीवी), एज़ोटोबैक्टर (स्वतंत्र), नाइट्रोसोमोनास → नाइट्रोबैक्टर, स्यूडोमोनास (विनाइट्रीकरण)
- अपघटन: खंडन → निक्षालन → अपचय → ह्यूमीकरण → खनिजीकरण
- शुष्कक्रमक अग्रणी = लाइकेन; जलक्रमक अग्रणी = पादप-प्लवक; अंत = मध्यमोद्भिद चरम
- लाइकेन/माइकोराइज़ा +/+; ऑर्किड-आम +/0; अमरबेल, कोयल +/−; पेनिसिलियम −/0
- गॉस = प्रतिस्पर्धी अपवर्जन; मैकआर्थर = वार्बलर संसाधन विभाजन
18. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें — इसमें 10% नियम और NPP के संख्यात्मक, पिरामिड, नाइट्रोजन चक्र और पारस्परिक क्रियाओं के प्रश्न हैं। गलती हो तो खंड 6, 7 और 12 दोबारा पढ़ें। पूरे पर्यावरण खंड के परीक्षा-स्तरीय अभ्यास के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ या RSSB वनरक्षक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
पारितंत्र को समझने का सबसे सरल तरीका है — ऊर्जा का रास्ता और पोषक तत्वों का चक्र अलग-अलग देखना। ऊर्जा सूर्य से उत्पादक और फिर उपभोक्ताओं तक जाती है, हर सीढ़ी पर लगभग 90% घटती है और कभी लौटती नहीं; इसी से ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा रहता है और खाद्य शृंखलाएँ छोटी होती हैं। पोषक तत्व — कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, जल — अपघटकों की सहायता से बार-बार उपयोग होते हैं। अनुक्रमण बताता है कि समुदाय समय के साथ कैसे बदलकर चरम अवस्था तक पहुँचते हैं, और पारस्परिक क्रियाएँ बताती हैं कि प्रजातियाँ एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं। यही नींव आगे भारत के संरक्षित क्षेत्रों की समझ में भी काम आती है।
ऊर्जा एकदिशीय, पोषक चक्रीय | लिंडेमान 10% | ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा | NPP = GPP − R | P = अवसादी | सो→बा नाइट्रीकरण | लाइकेन व प्लवक अग्रणी | +/+ +/0 +/− −/− −/0
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“पारितंत्र, खाद्य शृंखला और ऊर्जा प्रवाह — 10% नियम, पिरामिड, जैव-भू-रासायनिक चक्र, अनुक्रमण — UPSC” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- पारितंत्र, खाद्य शृंखला और ऊर्जा प्रवाह — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- जैव विविधता, हॉटस्पॉट और IUCN — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- भारत के संरक्षित क्षेत्र और बायोस्फीयर रिज़र्व — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- प्रदूषण के प्रकार, कारण और नियंत्रण — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
किसी क्षेत्र का जैविक समुदाय और उसका अजैविक पर्यावरण मिलकर एक कार्यात्मक इकाई बनाते हैं, जिसे पारितंत्र कहते हैं। यह शब्द ए. जी. टैन्सले ने 1935 में दिया।
रेमंड लिंडेमान (1942) के अनुसार एक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का औसतन लगभग 10% ही अगले पोषी स्तर तक पहुँचता है। शेष ऊर्जा श्वसन और ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है, क्योंकि हर पोषी स्तर पर ऊर्जा घटती है। संख्या का पिरामिड (एक वृक्ष) और जैवभार का पिरामिड (समुद्र) उल्टे हो सकते हैं।
खाद्य शृंखला भोजन का एक सीधा रेखीय क्रम है, जबकि खाद्य जाल कई परस्पर जुड़ी शृंखलाओं का नेटवर्क है। खाद्य जाल पारितंत्र को अधिक स्थिरता देता है।
GPP प्रकाश-संश्लेषण से कार्बनिक पदार्थ बनने की कुल दर है। उसमें से उत्पादकों की श्वसन हानि घटाने पर NPP मिलती है (NPP = GPP − R), जो शाकाहारियों के लिए उपलब्ध होती है।
ऊर्जा सूर्य से उत्पादकों और फिर उपभोक्ताओं तक जाती है और हर स्तर पर ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है। नष्ट ऊर्जा वापस सूर्य या उत्पादकों तक नहीं लौटती, इसलिए प्रवाह एकदिशीय है।
दोनों नाइट्रीकरण करते हैं। नाइट्रोसोमोनास अमोनियम को नाइट्राइट में और नाइट्रोबैक्टर नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलता है।
फॉस्फोरस का मुख्य भंडार चट्टानें हैं और अपक्षय से ही यह मुक्त होता है। वायुमंडल में इसका गैसीय आदान-प्रदान नगण्य है, इसलिए इसे अवसादी चक्र कहते हैं।
प्राथमिक अनुक्रमण उस स्थान पर होता है जहाँ पहले कभी जीवन या मृदा नहीं थी, जैसे नग्न चट्टान। द्वितीयक अनुक्रमण वहाँ होता है जहाँ समुदाय नष्ट हुआ पर मृदा बची रही, जैसे जला हुआ वन; यह तेज़ होता है।
सहोपकारिता (+/+) में दोनों को लाभ होता है, जैसे लाइकेन और माइकोराइज़ा। सहभोजिता (+/0) में एक को लाभ और दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं, जैसे आम के पेड़ पर उगता ऑर्किड या व्हेल पर बार्नेकल।
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