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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस प्रभाव और ओज़ोन क्षय — GHG, कार्बन सिंक, IPCC, NAPCC — UPSC, RAS

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
26 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व RSSB वनरक्षक पाठ्यक्रम की पर्यावरण इकाई; NCERT जीव विज्ञान (कक्षा 12, पारिस्थितिकी इकाई) व भूगोल पाठ्यपुस्तकें तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आधिकारिक प्रकाशन। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: सूर्य की लघु तरंगदैर्ध्य वाली किरणें वायुमंडल को पार कर पृथ्वी को गर्म करती हैं, और पृथ्वी जो दीर्घ तरंगदैर्ध्य अवरक्त (इन्फ्रारेड) विकिरण वापस छोड़ती है, उसे कुछ गैसें सोखकर फिर से पृथ्वी की ओर लौटा देती हैं — यही ग्रीनहाउस प्रभाव है। प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव न हो तो पृथ्वी का औसत सतही तापमान लगभग −18 °C होता, जबकि वास्तविक औसत लगभग 15 °C है। मानवजनित प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं — CO₂ (जीवाश्म ईंधन, वनोन्मूलन, सीमेंट), मीथेन (धान के खेत, जुगाली करने वाले पशु, लैंडफिल), नाइट्रस ऑक्साइड (नाइट्रोजनी उर्वरक) और फ्लोरीनयुक्त गैसें (HFC, PFC, SF₆); प्राकृतिक प्रभाव में सबसे बड़ा योगदान जलवाष्प का है। ओज़ोन परत समतापमंडल (स्ट्रेटोस्फियर) में है, सूर्य की हानिकारक UV-B किरणों का अधिकांश भाग सोखती है, और इसकी मोटाई डॉब्सन इकाई (DU) में मापी जाती है; अंटार्कटिका के ऊपर वसंत ऋतु (सितंबर–अक्टूबर) में ओज़ोन छिद्र बनता है, जिसके लिए मुख्यतः CFC, हैलोन, CCl₄, मिथाइल ब्रोमाइड से निकले क्लोरीन-ब्रोमीन उत्तरदायी हैं। IPCC की स्थापना 1988 में WMO और UNEP ने की। भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) 2008 में 8 राष्ट्रीय मिशन हैं, और भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य (COP26, ग्लासगो, 2021) घोषित किया है। परीक्षा का सबसे बड़ा जाल: ग्रीनहाउस प्रभाव और ओज़ोन क्षय दो अलग समस्याएँ हैं — एक क्षोभमंडल में ऊष्मा रोकने की, दूसरी समतापमंडल में UV-ढाल के पतला होने की।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्यउत्तर
ग्रीनहाउस प्रभाव में फँसने वाला विकिरणपृथ्वी से निकला दीर्घ तरंग अवरक्त (इन्फ्रारेड) विकिरण
प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में सबसे बड़ा योगदानजलवाष्प
सबसे प्रमुख मानवजनित ग्रीनहाउस गैसकार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
GWP मापने का संदर्भ (GWP = 1)CO₂
धान के खेत व जुगाली करने वाले पशुओं सेमीथेन (CH₄)
नाइट्रोजनी उर्वरकों सेनाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)
क्योटो प्रोटोकॉल की मूल 6 गैसेंCO₂, CH₄, N₂O, HFC, PFC, SF₆
ओज़ोन परत किस मंडल मेंसमतापमंडल (स्ट्रेटोस्फियर)
ओज़ोन की मोटाई की इकाईडॉब्सन इकाई (DU); 1 DU = STP पर 0.01 मिमी शुद्ध ओज़ोन परत
ओज़ोन छिद्र की सामान्य कसौटीकुल ओज़ोन 220 DU से कम
ओज़ोन छिद्र सबसे स्पष्टअंटार्कटिका के ऊपर, दक्षिणी गोलार्ध के वसंत (सितंबर–अक्टूबर) में
ओज़ोन क्षयकारी प्रमुख पदार्थCFC, हैलोन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म, मिथाइल ब्रोमाइड, HCFC
ओज़ोन परत किससे रक्षा करती हैमुख्यतः UV-B (UV-C लगभग पूरी सोख ली जाती है)
विश्व ओज़ोन दिवस16 सितंबर (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की तिथि, 1987)
IPCC की स्थापना1988, WMO + UNEP; मुख्यालय जिनेवा
NAPCC30 जून 2008, 8 राष्ट्रीय मिशन
भारत का नेट ज़ीरो लक्ष्य वर्ष2070 (COP26, ग्लासगो, 2021 में घोषित)
1 कार्बन क्रेडिट1 टन CO₂ या उसके समतुल्य (CO₂e) उत्सर्जन में कमी/निष्कासन
एल नीनोमध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर की सतह का असामान्य रूप से गर्म होना

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

जलवायु परिवर्तन UPSC प्रारंभिक परीक्षा के "पर्यावरण पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के सामान्य मुद्दे" खंड का केंद्रीय विषय है। RAS प्रारंभिक में यह पर्यावरण व सामान्य विज्ञान दोनों में आता है, RSSB वनरक्षक/वनपाल परीक्षा में ग्रीनहाउस गैसें, ओज़ोन और वन-आधारित कार्बन सिंक सीधे पूछे जाते हैं, और राजस्थान CET (स्नातक) में तथ्यात्मक प्रश्न (स्थापना वर्ष, मिशन, गैसें) आते हैं। अंतरराष्ट्रीय समझौतों — UNFCCC, क्योटो, पेरिस, मॉन्ट्रियल — का विस्तृत अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन एवं समझौते वाले नोट में है; यह नोट विज्ञान और भारत की नीति पर केंद्रित है।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — कथन-आधारित प्रश्न, गैस-स्रोत मिलान, IPCC/NAPCC
  • RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — अवधारणा, भारत की नीति, राजस्थान पर प्रभाव
  • RSSB वनरक्षक/वनपाल — ग्रीनहाउस गैसें, ओज़ोन, कार्बन सिंक के रूप में वन
  • राजस्थान CET (स्नातक), SSC — तथ्यात्मक एक-पंक्ति प्रश्न

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. "निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीनहाउस गैस नहीं है?" — विकल्प में नाइट्रोजन/ऑक्सीजन
  2. गैस और उसके प्रमुख स्रोत का मिलान
  3. ओज़ोन परत, डॉब्सन इकाई, ओज़ोन छिद्र के कथन
  4. ग्रीनहाउस प्रभाव बनाम ओज़ोन क्षय का अंतर
  5. NAPCC के मिशन — "कौन-सा मिशन NAPCC का भाग नहीं है?"
  6. IPCC की स्थापना करने वाली संस्थाएँ, कार्बन क्रेडिट/नेट ज़ीरो की परिभाषा

3. ग्रीनहाउस प्रभाव — विज्ञान

'ग्रीनहाउस' (पौधघर) काँच का वह घर है जिसमें धूप तो भीतर आती है, पर गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। वायुमंडल की कुछ गैसें ऐसा ही करती हैं। आने वाला सौर विकिरण मुख्यतः लघु तरंगदैर्ध्य (दृश्य प्रकाश) का होता है, जो वायुमंडल को आसानी से पार कर लेता है। धरती गर्म होकर दीर्घ तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण छोड़ती है; जलवाष्प, CO₂, मीथेन आदि इसी अवरक्त को सोखकर सभी दिशाओं में पुनः उत्सर्जित करती हैं, जिससे निचला वायुमंडल गर्म रहता है।

चरणक्या होता है
1. सौर विकिरण का आगमनलघु तरंगें; कुछ भाग बादल, बर्फ़ आदि से परावर्तित (एल्बिडो), शेष सतह द्वारा अवशोषित
2. पार्थिव विकिरणगर्म सतह दीर्घ तरंग अवरक्त विकिरण छोड़ती है
3. अवशोषणग्रीनहाउस गैसें अवरक्त को सोखती हैं
4. पुनः उत्सर्जनगैसें ऊष्मा का भाग वापस सतह की ओर भेजती हैं
5. परिणामऔसत सतही तापमान लगभग 15 °C (प्रभाव के बिना लगभग −18 °C)

प्राकृतिक बनाम संवर्धित ग्रीनहाउस प्रभाव: प्राकृतिक प्रभाव जीवन के लिए आवश्यक है। समस्या संवर्धित (Enhanced) ग्रीनहाउस प्रभाव की है — औद्योगिक क्रांति के बाद जीवाश्म ईंधन जलाने और वनों की कटाई से गैसों की सांद्रता बढ़ी, जिससे अधिक ऊष्मा रुकने लगी और वैश्विक तापन (Global Warming) हुआ। CO₂ की सांद्रता औद्योगिक-पूर्व काल में लगभग 280 ppm थी, जो अब 420 ppm से ऊपर पहुँच चुकी है (हवाई के मौना लोआ वेधशाला के मापन)।

ध्यान दें: नाइट्रोजन (N₂) और ऑक्सीजन (O₂) वायुमंडल का लगभग 99% भाग हैं, पर ये अवरक्त विकिरण को उल्लेखनीय रूप से नहीं सोखतीं, इसलिए ग्रीनहाउस गैसें नहीं हैं।


4. प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें और उनके स्रोत

गैसप्रमुख मानवजनित स्रोतप्राकृतिक स्रोतविशेष बात
जलवाष्प (H₂O)प्रत्यक्ष मानव योगदान नगण्यसमुद्र, झील, वाष्पोत्सर्जनप्राकृतिक प्रभाव में सबसे बड़ा योगदान; तापमान बढ़ने पर बढ़ती है (फीडबैक)
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)कोयला, पेट्रोलियम, गैस का दहन; वनोन्मूलन; सीमेंट उत्पादनश्वसन, ज्वालामुखी, अपघटनमानवजनित तापन में सबसे बड़ा हिस्सा; GWP का संदर्भ = 1; लंबी आयु
मीथेन (CH₄)धान के जलमग्न खेत, जुगाली करने वाले पशुओं का आंत्र किण्वन, लैंडफिल, कोयला खनन, गैस रिसावआर्द्रभूमि, दलदलप्रति अणु CO₂ से कहीं अधिक प्रभावी; वायुमंडल में आयु CO₂ से कम
नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)नाइट्रोजनी उर्वरक, पशु अपशिष्ट, औद्योगिक प्रक्रियाएँ, दहनमृदा जीवाणु (नाइट्रीकरण/विनाइट्रीकरण)CH₄ से भी अधिक GWP; ओज़ोन क्षय में भी योगदान
HFC (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन)रेफ्रिजरेटर, AC — CFC/HCFC के विकल्पनहींओज़ोन नहीं तोड़ते, पर अत्यधिक GWP; किगाली संशोधन से चरणबद्ध कटौती
PFC (परफ्लोरोकार्बन)एल्युमिनियम प्रगलन, सेमीकंडक्टर उद्योगनहींबहुत लंबी आयु
SF₆ (सल्फर हेक्साफ्लोराइड)विद्युत उपकरणों (स्विचगियर) में इन्सुलेटरनहींक्योटो गैसों में सबसे अधिक GWP
NF₃ (नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड)इलेक्ट्रॉनिक्स/सौर पैनल निर्माणनहींदोहा संशोधन (2012) में क्योटो सूची में जोड़ी गई
क्षोभमंडलीय ओज़ोन (O₃)वाहनों से निकले NOx व VOC पर धूप की क्रिया (द्वितीयक प्रदूषक)—भूस्तर पर प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैस दोनों; समतापमंडलीय ओज़ोन से भिन्न

4.1 वैश्विक तापन क्षमता (GWP) — केवल सापेक्ष क्रम

GWP बताता है कि किसी गैस का 1 किग्रा, एक निश्चित अवधि (प्रायः 100 वर्ष) में, 1 किग्रा CO₂ की तुलना में कितनी ऊष्मा रोकता है। सटीक संख्याएँ IPCC की अलग-अलग रिपोर्टों में बदलती रही हैं, इसलिए परीक्षा के लिए सापेक्ष क्रम याद रखें:

क्रम (कम से अधिक GWP)गैस
1 (संदर्भ)CO₂ — GWP = 1
2CH₄ — CO₂ से कई दस गुना
3N₂O — CH₄ से अधिक, CO₂ से सैकड़ों गुना
4HFC/PFC — सैकड़ों से हज़ारों गुना (गैस के अनुसार)
5SF₆ — क्योटो गैसों में सर्वाधिक (हज़ारों गुना)

याद रखें: GWP अधिक होने का अर्थ यह नहीं कि वह गैस कुल तापन में सबसे अधिक योगदान दे रही है। कुल योगदान मात्रा × प्रभाव पर निर्भर है — इसीलिए कम GWP होते हुए भी CO₂ मानवजनित तापन की सबसे बड़ी कारक है।


5. वैश्विक तापन के प्रभाव

क्षेत्रप्रभाव
समुद्र-स्तरजल का तापीय प्रसार और हिमनद/हिम-चादरों का पिघलना → समुद्र-स्तर वृद्धि; तटीय व द्वीपीय देशों (मालदीव, तुवालु आदि) पर संकट
हिमनद (ग्लेशियर)हिमालयी हिमनदों का पीछे हटना; हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) का खतरा
महासागरअधिक CO₂ घुलने से महासागरीय अम्लीकरण; प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching)
चरम मौसमलू, भारी वर्षा, सूखा, तीव्र चक्रवातों की आवृत्ति/तीव्रता में बदलाव
कृषिफसल चक्र, उत्पादकता, सिंचाई-माँग पर प्रभाव; गेहूँ जैसी रबी फसलें अंतिम अवस्था की गर्मी से संवेदनशील
जैव विविधताप्रजातियों का ऊँचाई/ध्रुवों की ओर खिसकना, आवास-हानि, विलुप्ति का जोखिम
स्वास्थ्यमलेरिया, डेंगू जैसे वाहक-जनित रोगों का विस्तार; ऊष्मा-आघात
ध्रुवीय क्षेत्रआर्कटिक समुद्री बर्फ़ में कमी; पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से मीथेन निकलने का जोखिम (धनात्मक फीडबैक)
राजस्थानलू की तीव्रता, वर्षा की अनिश्चितता, सूखे और जल-संकट का बढ़ता जोखिम

6. कार्बन सिंक, कार्बन क्रेडिट, कार्बन फुटप्रिंट और नेट ज़ीरो

6.1 कार्बन सिंक

कार्बन सिंक वह प्राकृतिक या कृत्रिम भंडार है जो वायुमंडल से जितना कार्बन छोड़ता है उससे अधिक सोखता है। इसके उलट कार्बन स्रोत कार्बन छोड़ता है।

सिंकविवरण
महासागरसबसे बड़ा सक्रिय प्राकृतिक सिंक; CO₂ घुलती है, फाइटोप्लैंकटन प्रकाश-संश्लेषण करते हैं
वनप्रकाश-संश्लेषण द्वारा CO₂ को बायोमास में संचित करते हैं; सबसे बड़ा स्थलीय सिंक
मृदाजैविक कार्बन का बड़ा भंडार; जुताई और कटाव से कार्बन निकलता है
आर्द्रभूमि व पीटलैंडजलभराव के कारण अपघटन धीमा, कार्बन लंबे समय तक संचित
ब्लू कार्बनमैंग्रोव, समुद्री घास (सी-ग्रास), लवणीय दलदल में संचित कार्बन
कृत्रिम (CCS)कार्बन कैप्चर व भंडारण — CO₂ को पकड़कर भूगर्भ में संग्रहित करना

6.2 कार्बन क्रेडिट और कार्बन बाज़ार

  • 1 कार्बन क्रेडिट = 1 टन CO₂ समतुल्य (tCO₂e) उत्सर्जन में कमी या निष्कासन का प्रमाणपत्र।
  • क्योटो प्रोटोकॉल के स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) में विकासशील देशों की परियोजनाएँ CER (Certified Emission Reduction) कमाती थीं, जिन्हें विकसित देश खरीद सकते थे।
  • पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 देशों के बीच सहयोग व कार्बन बाज़ारों से संबंधित है।
  • भारत में ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS), 2023 अधिसूचित हुई — घरेलू कार्बन बाज़ार की रूपरेखा।
  • ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम (2023) — पर्यावरण मंत्रालय की स्वैच्छिक योजना, जिसमें वृक्षारोपण, जल संरक्षण जैसे कार्यों के लिए क्रेडिट मिलते हैं; यह कार्बन क्रेडिट से अलग है।

6.3 कार्बन फुटप्रिंट, कार्बन न्यूट्रल, नेट ज़ीरो

शब्दअर्थ
कार्बन फुटप्रिंटकिसी व्यक्ति, संस्था, उत्पाद या देश द्वारा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उत्सर्जित कुल ग्रीनहाउस गैसें, tCO₂e में
कार्बन न्यूट्रलउत्सर्जित CO₂ के बराबर CO₂ की कमी/निष्कासन/ऑफसेट
नेट ज़ीरोकुल मानवजनित ग्रीनहाउस उत्सर्जन और उनके निष्कासन का संतुलन — शेष उत्सर्जन सिंक द्वारा संतुलित
कार्बन नेगेटिवउत्सर्जन से अधिक निष्कासन (भूटान स्वयं को कार्बन नेगेटिव बताता है)
कार्बन ऑफसेटकहीं और की गई कमी (जैसे वृक्षारोपण) से अपने उत्सर्जन की भरपाई
उत्सर्जन तीव्रताGDP की प्रति इकाई पर उत्सर्जन — भारत का NDC लक्ष्य इसी पर आधारित है

7. ओज़ोन परत और ओज़ोन क्षय

ओज़ोन (O₃) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना अणु है। वायुमंडल की कुल ओज़ोन का अधिकांश भाग समतापमंडल में, लगभग 15 से 35 किमी की ऊँचाई के बीच पाया जाता है — इसे ही ओज़ोन परत कहते हैं। समतापमंडल में सूर्य की UV किरणें O₂ को तोड़ती हैं, मुक्त ऑक्सीजन परमाणु O₂ से जुड़कर O₃ बनाता है, और O₃ भी UV सोखकर टूटता है — इस प्राकृतिक संतुलन से UV का बड़ा भाग धरती तक नहीं पहुँचता।

7.1 UV किरणों के प्रकार

प्रकारतरंगदैर्ध्यओज़ोन परत की भूमिकाप्रभाव
UV-Aसबसे लंबीअधिकांश धरती तक पहुँचती हैत्वचा का बुढ़ापा, अपेक्षाकृत कम हानिकारक
UV-Bमध्यमअधिकांश सोख ली जाती है; ओज़ोन घटने पर धरती तक अधिक पहुँचती हैत्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, प्रतिरक्षा में कमी, फाइटोप्लैंकटन व फसलों को हानि
UV-Cसबसे छोटीलगभग पूरी तरह वायुमंडल (ओज़ोन व O₂) में सोख ली जाती हैसर्वाधिक हानिकारक, पर धरती तक नहीं पहुँचती

7.2 डॉब्सन इकाई

किसी स्थान के ऊपर पूरे वायुमंडलीय स्तंभ की ओज़ोन को यदि मानक ताप और दाब (STP) पर एक परत में दबा दिया जाए, तो 0.01 मिमी मोटाई = 1 डॉब्सन इकाई। विश्व औसत लगभग 300 DU है, यानी STP पर केवल लगभग 3 मिमी मोटी परत (300 × 0.01 मिमी = 3 मिमी)। जहाँ कुल ओज़ोन 220 DU से कम हो जाए, उस क्षेत्र को सामान्यतः "ओज़ोन छिद्र" कहा जाता है। ओज़ोन का मापन ब्रिटिश वैज्ञानिक जी.एम.बी. डॉब्सन के नाम पर बने डॉब्सन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर से शुरू हुआ।

7.3 ओज़ोन छिद्र — अंटार्कटिका ही क्यों?

कारकभूमिका
ध्रुवीय भँवर (Polar Vortex)शीत ऋतु में अंटार्कटिका के ऊपर हवा अलग-थलग होकर अत्यधिक ठंडी हो जाती है
ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल (PSC)अत्यधिक ठंड में बनते हैं; इनकी सतह पर क्लोरीन यौगिक सक्रिय रूप में बदलते हैं
वसंत का सूर्य प्रकाशसितंबर–अक्टूबर में धूप लौटते ही सक्रिय क्लोरीन तेज़ी से ओज़ोन तोड़ता है
आर्कटिक में कमआर्कटिक का भँवर कमज़ोर और कम ठंडा, इसलिए वहाँ क्षय सामान्यतः कम गंभीर

अंटार्कटिक ओज़ोन छिद्र की वैज्ञानिक रिपोर्ट 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों (फ़ार्मन, गार्डिनर, शैंकलिन) ने प्रकाशित की थी।

7.4 ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ (ODS)

पदार्थउपयोगक्षय करने वाला तत्व
CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन)रेफ्रिजरेटर, AC, एरोसोल स्प्रे, फोमक्लोरीन
हैलोनअग्निशामक यंत्रब्रोमीन (क्लोरीन से प्रति परमाणु अधिक विनाशक)
कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl₄)विलायक, रासायनिक कच्चा मालक्लोरीन
मिथाइल क्लोरोफॉर्मऔद्योगिक विलायकक्लोरीन
मिथाइल ब्रोमाइडमृदा व भंडारण धूम्रक (फ्यूमिगेंट), कीटनाशकब्रोमीन
HCFCCFC के अंतरिम विकल्पक्लोरीन (CFC से कम)
HFCCFC/HCFC के विकल्पक्लोरीन नहीं — ओज़ोन नहीं तोड़ते, पर प्रबल ग्रीनहाउस गैसें

क्रिया-विधि (सरल रूप): UV से CFC टूटकर मुक्त क्लोरीन परमाणु (Cl) देता है → Cl + O₃ → ClO + O₂ → ClO + O → Cl + O₂। क्लोरीन फिर से मुक्त हो जाता है, इसलिए यह उत्प्रेरक की तरह बार-बार ओज़ोन तोड़ता है; एक क्लोरीन परमाणु हज़ारों ओज़ोन अणुओं को नष्ट कर सकता है।

7.5 पुनर्प्राप्ति

वियना अभिसमय (1985) और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) के कारण ODS का उत्पादन लगभग समाप्त हुआ है और ओज़ोन परत धीरे-धीरे भर रही है। संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैज्ञानिक आकलन (2023 में जारी) के अनुसार वर्तमान नीतियाँ बनी रहीं तो अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन इस शताब्दी के मध्य के बाद (लगभग 2066 तक) 1980 के स्तर पर लौट सकती है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का किगाली संशोधन (2016) HFC की चरणबद्ध कटौती करता है — यह ओज़ोन संधि होते हुए भी जलवायु के लिए लाभकारी है।

7.6 ग्रीनहाउस प्रभाव बनाम ओज़ोन क्षय

आधारग्रीनहाउस प्रभाव / वैश्विक तापनओज़ोन क्षय
वायुमंडलीय परतमुख्यतः क्षोभमंडलसमतापमंडल
संबंधित विकिरणदीर्घ तरंग अवरक्त (ऊष्मा)पराबैंगनी (UV-B)
मुख्य कारकCO₂, CH₄, N₂O, F-गैसेंCFC, हैलोन, CCl₄, मिथाइल ब्रोमाइड
मुख्य परिणामतापमान वृद्धि, समुद्र-स्तर वृद्धिUV-B वृद्धि, त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद
अंतरराष्ट्रीय संधिUNFCCC, क्योटो, पेरिसवियना अभिसमय, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
साझा कड़ीCFC और HFC — दोनों ग्रीनहाउस गैसें हैंCFC ओज़ोन तोड़ते हैं; HFC नहीं तोड़ते

8. एल नीनो, ला नीना और ENSO (संक्षेप में)

घटनाक्या होता हैभारत पर सामान्य प्रवृत्ति
सामान्य स्थितिपूर्व से पश्चिम चलने वाली व्यापारिक पवनें गर्म जल को पश्चिमी प्रशांत (इंडोनेशिया–ऑस्ट्रेलिया) की ओर धकेलती हैं; पेरू तट पर ठंडे जल का उत्प्रवाह (अपवेलिंग)—
एल नीनोव्यापारिक पवनें कमज़ोर; मध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशांत की सतह असामान्य रूप से गर्म; पेरू तट पर उत्प्रवाह व मत्स्यन घटता हैप्रायः कमज़ोर मानसून/सूखे से जुड़ा (हर बार नहीं)
ला नीनाव्यापारिक पवनें तेज़; मध्य-पूर्वी प्रशांत सामान्य से ठंडाप्रायः सामान्य या अच्छे मानसून से जुड़ा
दक्षिणी दोलनताहिती (पूर्वी प्रशांत) और डार्विन (ऑस्ट्रेलिया) के बीच वायुदाब का झूलाएल नीनो + दक्षिणी दोलन = ENSO
हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD)पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के तापमान का अंतरधनात्मक IOD प्रायः भारतीय मानसून के लिए अनुकूल

'एल नीनो' स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ "छोटा बालक" (बाल-ईसा) है, क्योंकि पेरू तट पर यह गर्म धारा प्रायः क्रिसमस के आसपास देखी जाती थी। व्यापारिक पवनों और वायुदाब पट्टियों की विस्तृत समझ के लिए वायुमंडल, पवन और चक्रवात वाला नोट पढ़ें।


9. IPCC — जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल

बिंदुतथ्य
पूरा नामIntergovernmental Panel on Climate Change
स्थापना1988
स्थापक संस्थाएँविश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP); संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसका समर्थन किया
सचिवालयजिनेवा, स्विट्ज़रलैंड
कार्यस्वयं शोध नहीं करता; प्रकाशित वैज्ञानिक साहित्य का आकलन कर नीति-निर्माताओं के लिए रिपोर्ट देता है
कार्य समूहWG-I (भौतिक विज्ञान आधार), WG-II (प्रभाव, अनुकूलन, संवेदनशीलता), WG-III (शमन) + राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस इन्वेंटरी पर टास्क फोर्स
आकलन रिपोर्टेंपहली रिपोर्ट 1990 (इसी ने UNFCCC की नींव रखी); छठी आकलन रिपोर्ट (AR6) का संश्लेषण 2023 में; सातवाँ चक्र जारी
नोबेल शांति पुरस्कार2007, अल गोर के साथ संयुक्त रूप से
विशेष रिपोर्ट"1.5 °C वैश्विक तापन" विशेष रिपोर्ट (2018) — 1.5 °C और 2 °C के प्रभावों का अंतर

10. भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)

NAPCC को प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन परिषद ने 30 जून 2008 को जारी किया। इसमें 8 राष्ट्रीय मिशन हैं। राज्यों ने भी इसी तर्ज़ पर राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजनाएँ (SAPCC) बनाई हैं — राजस्थान की भी SAPCC है।

क्र.मिशनमुख्य उद्देश्य
1राष्ट्रीय सौर मिशन (जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन)सौर ऊर्जा का विस्तार
2संवर्धित ऊर्जा दक्षता राष्ट्रीय मिशनउद्योगों में ऊर्जा बचत (PAT योजना आदि)
3सतत आवास (Sustainable Habitat) राष्ट्रीय मिशनभवन, शहरी परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन में दक्षता
4राष्ट्रीय जल मिशनजल उपयोग दक्षता बढ़ाना
5हिमालयी पारितंत्र संरक्षण राष्ट्रीय मिशनहिमनद व पर्वतीय पारितंत्र
6हरित भारत राष्ट्रीय मिशन (Green India Mission)वन/वृक्ष आवरण का विस्तार और गुणवत्ता सुधार
7सतत कृषि राष्ट्रीय मिशनजलवायु-अनुकूल कृषि
8जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान राष्ट्रीय मिशनशोध व ज्ञान-आधार

नोट: समय-समय पर नए मिशन (जैसे स्वास्थ्य, पवन ऊर्जा, तटीय क्षेत्र) जोड़ने के प्रस्ताव आए हैं; परीक्षा में "NAPCC के 8 मूल मिशन" ही पूछे जाते हैं।


11. भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ — नेट ज़ीरो और NDC

प्रतिबद्धताविवरण
नेट ज़ीरो2070 तक — प्रधानमंत्री ने COP26 (ग्लासगो, 2021) में "पंचामृत" के भाग के रूप में घोषित किया
अद्यतन NDC (अगस्त 2022, 2030 के लिए)2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी; 2030 तक संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से; वन/वृक्ष आवरण से 2.5–3 अरब टन CO₂e का अतिरिक्त कार्बन सिंक; LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) को जन-आंदोलन बनाना
पहला NDC (2015)उत्सर्जन तीव्रता में 2005 की तुलना में 33–35% कमी (2030 तक); लगभग 40% स्थापित क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से
2035 के लिए नया NDC (2026)समाचार रिपोर्टों के अनुसार मार्च 2026 में मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी और अप्रैल 2026 में UNFCCC को भेजा गया; बताए गए लक्ष्य — 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 2005 की तुलना में 47% कमी और लगभग 60% गैर-जीवाश्म क्षमता। परीक्षा से पहले आधिकारिक दस्तावेज़ से पुष्टि करें।
मिशन LiFE2022 में शुरू; व्यक्तिगत व्यवहार में बदलाव से पर्यावरण संरक्षण
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)2015 में COP21 (पेरिस) के दौरान भारत और फ्रांस की पहल; मुख्यालय गुरुग्राम

महत्वपूर्ण: भारत का NDC निरपेक्ष उत्सर्जन घटाने का नहीं, बल्कि उत्सर्जन तीव्रता (प्रति इकाई GDP उत्सर्जन) घटाने का है — विकासशील देश के रूप में "साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC)" के सिद्धांत पर आधारित। लक्ष्य-संख्याएँ बदलती रहती हैं, इसलिए परीक्षा के समय नवीनतम आधिकारिक आँकड़े देखें।


12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: ओज़ोन छिद्र से वैश्विक तापन होता है?

नहीं। ओज़ोन छिद्र से UV-B अधिक आती है, वैश्विक तापन का मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसें हैं। दोनों समस्याएँ अलग परतों (समतापमंडल बनाम क्षोभमंडल) की हैं। केवल CFC जैसी कुछ गैसें दोनों में योगदान करती हैं।

Trap 2: ओज़ोन हर जगह लाभकारी है?

समतापमंडलीय ओज़ोन रक्षक है, पर भूस्तरीय (क्षोभमंडलीय) ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है — फोटोकेमिकल स्मॉग का भाग, फेफड़ों और फसलों के लिए हानिकारक, और ग्रीनहाउस गैस भी।

Trap 3: N₂ और O₂ ग्रीनहाउस गैसें हैं?

नहीं। वायुमंडल में सबसे अधिक होते हुए भी ये अवरक्त विकिरण को उल्लेखनीय रूप से नहीं सोखतीं।

Trap 4: सबसे अधिक GWP वाली गैस सबसे बड़ा कारण?

गलत। GWP प्रति किग्रा प्रभाव है। मात्रा के कारण CO₂ कुल मानवजनित तापन का सबसे बड़ा कारक है, जबकि GWP में SF₆ और F-गैसें सबसे आगे हैं।

Trap 5: HFC ओज़ोन तोड़ते हैं?

नहीं। HFC में क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं होता, इसलिए ये ओज़ोन नहीं तोड़ते। फिर भी मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के किगाली संशोधन में इन्हें शामिल किया गया, क्योंकि ये प्रबल ग्रीनहाउस गैसें हैं।

Trap 6: ओज़ोन छिद्र उत्तरी ध्रुव पर सबसे बड़ा?

नहीं। सबसे स्पष्ट छिद्र अंटार्कटिका (दक्षिणी ध्रुव) पर, दक्षिणी गोलार्ध के वसंत (सितंबर–अक्टूबर) में बनता है — शीत ऋतु में नहीं।

Trap 7: IPCC की स्थापना UNFCCC ने की?

नहीं। IPCC (1988) UNFCCC (1992) से पहले बना; इसे WMO और UNEP ने स्थापित किया। IPCC की पहली रिपोर्ट (1990) ने ही UNFCCC का आधार तैयार किया।

Trap 8: भारत का नेट ज़ीरो वर्ष 2050?

नहीं, भारत का लक्ष्य 2070 है। 2050 कई विकसित देशों/यूरोपीय संघ का लक्ष्य है, और चीन ने 2060 घोषित किया है।

Trap 9: एल नीनो हमेशा भारत में सूखा लाता है?

नहीं। एल नीनो वर्षों में कमज़ोर मानसून की प्रवृत्ति है, पर हर एल नीनो वर्ष सूखा वर्ष नहीं होता; IOD जैसे अन्य कारक भी मानसून को प्रभावित करते हैं।

Trap 10: डॉब्सन इकाई ओज़ोन की सांद्रता ppm में है?

नहीं। DU पूरे वायुमंडलीय स्तंभ की कुल ओज़ोन मात्रा है, जिसे STP पर परत की मोटाई के रूप में व्यक्त किया जाता है (1 DU = 0.01 मिमी)।


13. Most-Asked रिवीज़न तालिका

क्र.प्रश्नउत्तर
1ग्रीनहाउस गैसें किस विकिरण को रोकती हैं?दीर्घ तरंग अवरक्त
2ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना पृथ्वी का औसत तापमानलगभग −18 °C
3वर्तमान औसत सतही तापमानलगभग 15 °C
4प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में सबसे बड़ा योगदानजलवाष्प
5सबसे प्रमुख मानवजनित ग्रीनहाउस गैसCO₂
6GWP का संदर्भ गैसCO₂ (GWP = 1)
7धान के खेतों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसमीथेन
8जुगाली करने वाले पशुओं सेमीथेन
9लैंडफिल सेमीथेन
10नाइट्रोजनी उर्वरकों सेनाइट्रस ऑक्साइड
11विद्युत स्विचगियर में प्रयुक्त ग्रीनहाउस गैसSF₆
12क्योटो गैसों में सर्वाधिक GWPSF₆
13क्योटो की 6 गैसेंCO₂, CH₄, N₂O, HFC, PFC, SF₆
14दोहा संशोधन में जोड़ी गई गैसNF₃
15CO₂ का औद्योगिक-पूर्व स्तरलगभग 280 ppm
16CO₂ मापन की प्रसिद्ध वेधशालामौना लोआ, हवाई
17महासागर में CO₂ घुलने का परिणाममहासागरीय अम्लीकरण
18समुद्र-स्तर वृद्धि के दो कारणतापीय प्रसार, हिम पिघलना
19सबसे बड़ा सक्रिय प्राकृतिक कार्बन सिंकमहासागर
20सबसे बड़ा स्थलीय कार्बन सिंकवन
21ब्लू कार्बनमैंग्रोव, समुद्री घास, लवणीय दलदल का कार्बन
221 कार्बन क्रेडिट1 tCO₂e
23CDM किस संधि का तंत्रक्योटो प्रोटोकॉल
24CCTS 2023 किस अधिनियम के अंतर्गतऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022
25नेट ज़ीरोउत्सर्जन = निष्कासन
26भारत का नेट ज़ीरो वर्ष2070
272070 का लक्ष्य कहाँ घोषितCOP26, ग्लासगो (2021)
282022 NDC — उत्सर्जन तीव्रता कमी2005 की तुलना में 45% (2030 तक)
292022 NDC — गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमतालगभग 50% (2030 तक)
30ओज़ोन परत किस मंडल मेंसमतापमंडल
31ओज़ोन परत की लगभग ऊँचाई15–35 किमी
32ओज़ोन मापन की इकाईडॉब्सन इकाई
331 DUSTP पर 0.01 मिमी
34ओज़ोन छिद्र की कसौटी220 DU से कम
35ओज़ोन छिद्र कहाँ सबसे स्पष्टअंटार्कटिका
36किस ऋतु मेंदक्षिणी गोलार्ध का वसंत (सितंबर–अक्टूबर)
37ओज़ोन छिद्र में सहायक बादलध्रुवीय समतापमंडलीय बादल (PSC)
38CFC से निकलने वाला क्षयकारी तत्वक्लोरीन
39हैलोन का क्षयकारी तत्वब्रोमीन
40अग्निशामक में प्रयुक्त ODSहैलोन
41धूम्रक (फ्यूमिगेंट) के रूप में ODSमिथाइल ब्रोमाइड
42ओज़ोन न तोड़ने वाला CFC-विकल्पHFC
43ओज़ोन परत मुख्यतः किससे रक्षाUV-B
44UV-B के स्वास्थ्य प्रभावत्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, प्रतिरक्षा ह्रास
45विश्व ओज़ोन दिवस16 सितंबर
46भूस्तरीय ओज़ोनद्वितीयक प्रदूषक
47एल नीनो में प्रशांत का कौन-सा भाग गर्ममध्य व पूर्वी विषुवतीय
48एल नीनो का शाब्दिक अर्थछोटा बालक (स्पेनिश)
49ENSOएल नीनो – दक्षिणी दोलन
50IPCC की स्थापना1988, WMO + UNEP
51IPCC का सचिवालयजिनेवा
52IPCC को नोबेल शांति पुरस्कार2007 (अल गोर के साथ)
53NAPCC कब जारी30 जून 2008
54NAPCC में मिशन8
55वन आवरण से जुड़ा NAPCC मिशनहरित भारत मिशन
56ISA का मुख्यालयगुरुग्राम

14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

पैटर्न 1 — "कौन-सा नहीं है": निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीनहाउस गैस नहीं है? (a) मीथेन (b) नाइट्रस ऑक्साइड (c) नाइट्रोजन (d) सल्फर हेक्साफ्लोराइड — उत्तर: (c) नाइट्रोजन।

पैटर्न 2 — स्रोत-मिलान: सूची-I (धान के खेत, नाइट्रोजनी उर्वरक, स्विचगियर, अग्निशामक) को सूची-II (मीथेन, N₂O, SF₆, हैलोन) से मिलाइए।

पैटर्न 3 — बहु-कथन (UPSC शैली): "ओज़ोन छिद्र के संदर्भ में: 1. यह अंटार्कटिका के ऊपर दक्षिणी गोलार्ध के वसंत में सबसे स्पष्ट होता है। 2. HFC ओज़ोन क्षय के प्रमुख कारक हैं। सही कथन चुनिए।" — केवल 1।

पैटर्न 4 — संस्था/वर्ष: "IPCC की स्थापना किन संस्थाओं ने की?" — WMO और UNEP।

पैटर्न 5 — "NAPCC का मिशन नहीं": विकल्पों में राष्ट्रीय सौर मिशन, हरित भारत मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन और (जैसे) "राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मिशन" — अंतिम NAPCC का भाग नहीं।

पैटर्न 6 — अवधारणा: "उत्सर्जन तीव्रता" का अर्थ, "कार्बन नेगेटिव" का अर्थ, ब्लू कार्बन के उदाहरण।


15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. क्योटो की 6 गैसें — "CMN-HPS": CO₂, Methane, N₂O, HFC, PFC, SF₆ — "Cहाय Mें Nमक, Hलवा Pर Sक्कर"।

2. GWP क्रम — "C-M-N-F-S": CO₂ < मीथेन < N₂O < F-गैसें < SF₆ — "कम-मध्यम-ज़्यादा-बहुत-सबसे"।

3. मीथेन के तीन 'प': पशु (जुगाली), पानी भरे धान के खेत, पड़ा कचरा (लैंडफिल)।

4. ओज़ोन छिद्र — "ठंड, बादल, धूप": ध्रुवीय भँवर की ठंड → PSC बादल → वसंत की धूप → क्लोरीन सक्रिय।

5. "हैलोन = आग, ब्रोमाइड = अनाज": हैलोन अग्निशामक में, मिथाइल ब्रोमाइड अनाज/मृदा धूम्रक में।

6. NAPCC के 8 मिशन — "सौ-ऊ-आ-ज-हि-ह-कृ-ज्ञा": सौर, ऊर्जा दक्षता, आवास, जल, हिमालय, हरित भारत, कृषि, ज्ञान।

7. नेट ज़ीरो वर्ष — "50-60-70": EU 2050, चीन 2060, भारत 2070।

8. तारीख़ें: 16 सितंबर = ओज़ोन दिवस (1987 मॉन्ट्रियल), 1988 = IPCC, 2008 = NAPCC।


16. कथन अभ्यास

जलवाष्प प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में सबसे बड़ा योगदान देती है। — सही।

नाइट्रोजन एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है। — गलत (N₂ अवरक्त को उल्लेखनीय रूप से नहीं सोखती)।

GWP मापने के लिए CO₂ को संदर्भ (GWP = 1) माना जाता है। — सही।

ओज़ोन परत मुख्यतः क्षोभमंडल में पाई जाती है। — गलत (समतापमंडल में)।

ओज़ोन छिद्र अंटार्कटिका पर दक्षिणी गोलार्ध के वसंत में सबसे स्पष्ट होता है। — सही।

HFC ओज़ोन परत को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं। — गलत (HFC ओज़ोन नहीं तोड़ते; वे ग्रीनहाउस गैसें हैं)।

हैलोन में ब्रोमीन होता है और इनका उपयोग अग्निशामकों में होता था। — सही।

IPCC की स्थापना 1988 में WMO और UNEP ने की। — सही।

NAPCC में 10 राष्ट्रीय मिशन हैं। — गलत (8 मिशन)।

भारत का नेट ज़ीरो लक्ष्य वर्ष 2050 है। — गलत (2070)।

एल नीनो में मध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर की सतह असामान्य रूप से गर्म हो जाती है। — सही।

भूस्तरीय ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है। — सही।


17. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ

  1. ग्रीनहाउस प्रभाव = पृथ्वी के अवरक्त विकिरण का गैसों द्वारा अवशोषण व पुनः उत्सर्जन
  2. प्रभाव न हो तो औसत तापमान लगभग −18 °C; अभी लगभग 15 °C
  3. जलवाष्प = प्राकृतिक प्रभाव में सबसे बड़ा; CO₂ = सबसे बड़ा मानवजनित कारक
  4. मीथेन — धान, जुगाली करने वाले पशु, लैंडफिल; N₂O — नाइट्रोजनी उर्वरक
  5. GWP क्रम: CO₂ (1) < CH₄ < N₂O < F-गैसें; क्योटो गैसों में SF₆ सर्वाधिक
  6. N₂, O₂ ग्रीनहाउस गैसें नहीं
  7. सिंक: महासागर (सबसे बड़ा सक्रिय), वन, मृदा, आर्द्रभूमि; ब्लू कार्बन = मैंग्रोव, सी-ग्रास
  8. 1 कार्बन क्रेडिट = 1 tCO₂e; नेट ज़ीरो = उत्सर्जन और निष्कासन का संतुलन
  9. ओज़ोन परत — समतापमंडल, लगभग 15–35 किमी; UV-B से रक्षा
  10. 1 DU = STP पर 0.01 मिमी; 220 DU से कम = ओज़ोन छिद्र
  11. छिद्र — अंटार्कटिका, सितंबर–अक्टूबर; ध्रुवीय भँवर + PSC + वसंत की धूप
  12. ODS: CFC, हैलोन (ब्रोमीन), CCl₄, मिथाइल क्लोरोफॉर्म, मिथाइल ब्रोमाइड; HFC ओज़ोन-सुरक्षित पर ग्रीनहाउस गैस
  13. IPCC — 1988, WMO + UNEP, जिनेवा; NAPCC — 2008, 8 मिशन
  14. भारत — नेट ज़ीरो 2070 (COP26); 2022 NDC: उत्सर्जन तीव्रता 45% कम, लगभग 50% गैर-जीवाश्म क्षमता (2030)

18. अभ्यास

इस पृष्ठ के अंत में 25 प्रश्नों का अभ्यास क्विज़ है। हर गलत उत्तर पर संबंधित तालिका — गैस-स्रोत, ODS या NAPCC — फिर देखें। ग्रीनहाउस प्रभाव और ओज़ोन क्षय के कथनों को अलग-अलग पहचानने का अभ्यास करें। पूरे पर्यावरण खंड के मिश्रित प्रश्नों के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ या RSSB वनरक्षक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें, और प्रदूषण के स्रोतों के लिए प्रदूषण: प्रकार, कारण और नियंत्रण नोट देखें।


19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

जलवायु परिवर्तन के प्रश्न दो स्तंभों पर टिके हैं — विज्ञान और नीति। विज्ञान में ग्रीनहाउस प्रभाव (अवरक्त, क्षोभमंडल, CO₂-मीथेन-N₂O) और ओज़ोन क्षय (UV-B, समतापमंडल, CFC-हैलोन) को कभी आपस में न मिलाएँ; HFC और CFC की दोहरी भूमिका ही अधिकांश जाल बनाती है। नीति में IPCC (1988, WMO + UNEP), NAPCC (2008, 8 मिशन) और भारत का नेट ज़ीरो 2070 स्थायी तथ्य हैं, जबकि NDC की संख्याएँ समय के साथ बदलती हैं — इसलिए उन्हें परीक्षा से पहले अद्यतन कर लें।

ग्रीनहाउस = अवरक्त + क्षोभमंडल + CO₂ | ओज़ोन क्षय = UV-B + समतापमंडल + CFC/हैलोन | DU = 0.01 मिमी | IPCC 1988 | NAPCC 2008, 8 मिशन | भारत नेट ज़ीरो 2070


अंतिम संशोधन (Last Updated):
RPSC / RSSB सिलेबस के अनुसार
भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखकलेखक परिचय

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“जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस प्रभाव और ओज़ोन क्षय — GHG, कार्बन सिंक, IPCC, NAPCC — UPSC, RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

पृथ्वी की सतह से निकलने वाले दीर्घ तरंग अवरक्त विकिरण को जलवाष्प, CO₂, मीथेन जैसी गैसें सोखकर फिर से सतह की ओर लौटा देती हैं, जिससे निचला वायुमंडल गर्म रहता है। इसके बिना पृथ्वी का औसत तापमान लगभग −18 °C होता।

जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और फ्लोरीनयुक्त गैसें (HFC, PFC, SF₆, NF₃) प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं। क्योटो प्रोटोकॉल में मूल रूप से CO₂, CH₄, N₂O, HFC, PFC और SF₆ — ये 6 गैसें शामिल थीं।

धान के जलमग्न खेत, जुगाली करने वाले पशुओं का आंत्र किण्वन, लैंडफिल, कोयला खनन और प्राकृतिक गैस रिसाव मीथेन के प्रमुख मानवजनित स्रोत हैं; आर्द्रभूमि इसका प्राकृतिक स्रोत है।

ओज़ोन परत समतापमंडल में लगभग 15–35 किमी की ऊँचाई पर है। यह सूर्य की हानिकारक UV-B किरणों का अधिकांश भाग सोख लेती है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद आदि से रक्षा होती है।

डॉब्सन इकाई वायुमंडलीय स्तंभ में कुल ओज़ोन की माप है। 1 DU का अर्थ है कि वह ओज़ोन मानक ताप-दाब पर 0.01 मिमी मोटी परत बनाएगी।

शीत ऋतु में ध्रुवीय भँवर के कारण अंटार्कटिका के ऊपर हवा अत्यधिक ठंडी होकर ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल बनाती है, जिन पर क्लोरीन सक्रिय होता है। वसंत (सितंबर–अक्टूबर) की धूप लौटते ही यह क्लोरीन तेज़ी से ओज़ोन तोड़ता है।

ग्रीनहाउस प्रभाव क्षोभमंडल में अवरक्त ऊष्मा के रुकने से तापमान वृद्धि की समस्या है, जबकि ओज़ोन क्षय समतापमंडल में UV-B रोकने वाली परत के पतले होने की समस्या है। पहले के लिए UNFCCC और दूसरे के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल है।

IPCC की स्थापना 1988 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने की। इसका सचिवालय जिनेवा में है और इसे 2007 में अल गोर के साथ नोबेल शांति पुरस्कार मिला।

राष्ट्रीय सौर मिशन, संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन, सतत आवास मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारितंत्र संरक्षण मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन और जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान मिशन। NAPCC 30 जून 2008 को जारी हुई।

भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जिसे प्रधानमंत्री ने 2021 में ग्लासगो (COP26) में 'पंचामृत' के भाग के रूप में घोषित किया।

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