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भारतीय अर्थव्यवस्था

मुद्रास्फीति के प्रकार और मापन — माँगजनित-लागतजनित, Stagflation, WPI-CPI, फिलिप्स वक्र — RAS, UPSC

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
25 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS, UPSC CSE प्रारंभिक, SSC व बैंकिंग पाठ्यक्रम की अर्थव्यवस्था इकाई; NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 9–12) तथा RBI व भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों की मानक परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: मुद्रास्फीति (Inflation) वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर में लगातार होने वाली वृद्धि है, जिससे मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। कारण के आधार पर इसके दो मुख्य रूप हैं — माँगजनित (Demand-pull), जब कुल माँग कुल पूर्ति से अधिक हो ("बहुत अधिक मुद्रा, बहुत कम वस्तुओं के पीछे"), और लागतजनित (Cost-push), जब मज़दूरी, कच्चे माल या ईंधन की लागत बढ़े। गति के आधार पर रेंगती (Creeping) → चलती (Walking) → दौड़ती (Galloping) → अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) का क्रम है। मुद्रास्फीतिजनित मंदी (Stagflation) = ऊँची महँगाई + ठहराव/बेरोज़गारी; अपस्फीति (Deflation) = कीमत स्तर का गिरना; अवस्फीति (Disinflation) = महँगाई की दर का घटना (कीमतें फिर भी बढ़ रही हैं)। भारत में थोक मूल्य सूचकांक WPI को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है, और CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त) को सांख्यिकी मंत्रालय का NSO; CPI-IW और CPI-AL/RL को श्रम ब्यूरो। RBI का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI-संयुक्त (Combined) पर आधारित है। महँगाई में ऋणी (debtor) को लाभ और ऋणदाता (creditor) तथा निश्चित आय वर्ग को हानि होती है। नियंत्रण के लिए मौद्रिक उपाय (रेपो दर, CRR, SLR बढ़ाना, OMO में बॉन्ड बेचना) और राजकोषीय उपाय (सरकारी खर्च घटाना, कर बढ़ाना) अपनाए जाते हैं।


संक्षिप्त उत्तर

अवधारणाएक पंक्ति में
मुद्रास्फीतिसामान्य कीमत स्तर में सतत वृद्धि; मुद्रा का मूल्य (क्रय शक्ति) घटता है
माँगजनित (Demand-pull)कुल माँग > कुल पूर्ति; मुद्रा आपूर्ति, सरकारी खर्च या आय बढ़ने से
लागतजनित (Cost-push)उत्पादन लागत बढ़ने से — मज़दूरी, कच्चा तेल, कच्चा माल, लाभ-वृद्धि
Stagflationऊँची मुद्रास्फीति + आर्थिक ठहराव + ऊँची बेरोज़गारी
Deflation (अपस्फीति)सामान्य कीमत स्तर का गिरना; मुद्रास्फीति दर ऋणात्मक
Disinflation (अवस्फीति)मुद्रास्फीति की दर घटना, पर दर अभी भी धनात्मक
Reflation (पुनःस्फीति)मंदी/अपस्फीति के बाद कीमत स्तर को जानबूझकर सामान्य स्तर तक उठाना
Skewflationकुछ ही वस्तुओं (जैसे खाद्य) में तेज़ कीमत-वृद्धि, बाकी में नहीं
Headline बनाम CoreHeadline = पूरी टोकरी; Core = अस्थिर खाद्य व ईंधन हटाकर
WPI जारीकर्ताआर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)
CPI (R/U/C) जारीकर्ताNSO, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
CPI-IW, CPI-AL, CPI-RLश्रम ब्यूरो (श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय)
RBI का लक्ष्य सूचकांकCPI-संयुक्त (Combined) — हेडलाइन CPI
फिलिप्स वक्रमुद्रास्फीति और बेरोज़गारी में (अल्पकाल में) विपरीत संबंध
किसे लाभऋणी, उत्पादक/व्यापारी, परिवर्ती आय वाले
किसे हानिऋणदाता, निश्चित आय (पेंशन, वेतन), बचतकर्ता
सूत्ररूप
मुद्रास्फीति दर (%)(P1 − P0) / P0 × 100, जहाँ P0 = पिछली अवधि का सूचकांक, P1 = वर्तमान
GDP अपस्फीतिक (Deflator)नाममात्र GDP / वास्तविक GDP × 100
वास्तविक ब्याज दर (लगभग)नाममात्र ब्याज दर − मुद्रास्फीति दर (फिशर समीकरण का सरल रूप)
मुद्रा का मूल्यकीमत स्तर का व्युत्क्रम: मुद्रा का मूल्य ∝ 1 / P
Rule of 70 (अनुमान)कीमतें दुगुनी होने में लगे वर्ष ≈ 70 / वार्षिक मुद्रास्फीति दर
मुद्रा का परिमाण सिद्धांत (फिशर)MV = PT

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

मुद्रास्फीति भारतीय अर्थव्यवस्था का वह अध्याय है जो मौद्रिक नीति, बजट, बैंकिंग और राष्ट्रीय आय — चारों से जुड़ता है। RAS और UPSC प्रारंभिक में इसकी अवधारणाएँ (stagflation, disinflation, core inflation) कथन-आधारित प्रश्नों के रूप में आती हैं; बैंकिंग परीक्षाओं (IBPS/SBI) में WPI-CPI के जारीकर्ता, RBI का लक्ष्य सूचकांक और मौद्रिक उपकरण पूछे जाते हैं; SSC और राजस्थान CET में परिभाषा व "किसे लाभ, किसे हानि" जैसे सीधे प्रश्न बनते हैं। मौद्रिक उपकरणों का विस्तार मुद्रा, बैंकिंग और RBI की मौद्रिक नीति वाले नोट्स में है, और GDP अपस्फीतिक की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय आय (GDP, GNP) की अवधारणा में।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • RAS प्रारंभिक व मुख्य — अवधारणा, प्रभाव और नियंत्रण के उपाय (मुख्य परीक्षा में व्याख्यात्मक)
  • UPSC प्रारंभिक — कथन-आधारित: कौन-सा कदम मुद्रास्फीति घटाएगा, core बनाम headline, फिलिप्स वक्र
  • IBPS PO / SBI PO / Clerk — सूचकांक के जारीकर्ता, RBI का लक्ष्य, CRR-SLR-रेपो का असर
  • SSC CGL / CHSL — परिभाषाएँ, माँगजनित-लागतजनित, ऋणी-ऋणदाता
  • राजस्थान CET (स्नातक) — सरल तथ्य और परिभाषाएँ

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. परिभाषा-आधारित: "महँगाई की दर घटे पर कीमतें बढ़ती रहें, तो यह क्या है?" (Disinflation)
  2. जारीकर्ता-आधारित: "CPI-IW कौन जारी करता है?" (श्रम ब्यूरो)
  3. नीति-आधारित: "निम्न में से कौन-सा कदम मुद्रास्फीति नियंत्रित करेगा?"
  4. प्रभाव-आधारित: "मुद्रास्फीति में किसे हानि होती है?"
  5. सरल गणना: सूचकांक से मुद्रास्फीति दर, वास्तविक ब्याज दर, GDP अपस्फीतिक

3. मुद्रास्फीति: परिभाषा और मूल समझ

परिभाषा: किसी अर्थव्यवस्था में एक अवधि तक वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर (general price level) में होने वाली सतत वृद्धि मुद्रास्फीति है। किसी एक वस्तु (जैसे प्याज़) का महँगा होना अपने-आप में मुद्रास्फीति नहीं है; जब कीमतों का समग्र सूचकांक बढ़ता है, तब मुद्रास्फीति कहते हैं। क्रॉउथर की प्रसिद्ध परिभाषा के अनुसार यह वह अवस्था है जिसमें मुद्रा का मूल्य गिर रहा हो, अर्थात कीमतें बढ़ रही हों।

बिंदुस्पष्टीकरण
मापन किसकाकीमत सूचकांक (WPI, CPI) या GDP अपस्फीतिक में प्रतिशत परिवर्तन का
मुद्रा का मूल्यकीमत स्तर के उलटे अनुपात में; कीमतें बढ़ीं तो एक रुपये से कम वस्तुएँ मिलेंगी
"सतत" का अर्थएक बार की उछाल नहीं, लगातार बढ़ती प्रवृत्ति
साल-दर-साल (YoY)इस माह का सूचकांक बनाम पिछले वर्ष के उसी माह का सूचकांक
आधार प्रभाव (Base effect)पिछले वर्ष का सूचकांक बहुत ऊँचा/नीचा होने से इस वर्ष की दर कम/अधिक दिखना
मध्यम मुद्रास्फीतिहल्की, स्थिर महँगाई को सामान्यतः विकास के लिए सहायक माना जाता है

हल किए गए उदाहरण:

  • पिछले वर्ष CPI = 120, इस वर्ष CPI = 126। मुद्रास्फीति दर = (126 − 120) / 120 × 100 = 6/120 × 100 = 5%।
  • सूचकांक 200 से घटकर 180 हुआ। दर = (180 − 200) / 200 × 100 = −10% — यह अपस्फीति (Deflation) है।
  • कीमत स्तर 25% बढ़ा (P = 1 से 1.25)। मुद्रा का मूल्य = 1/1.25 = 0.8, यानी मुद्रा की क्रय शक्ति 20% घटी — 25% नहीं। यह परीक्षा का प्रिय जाल है।
  • मुद्रास्फीति दर 7% वार्षिक रहे तो Rule of 70 से कीमतें लगभग 70/7 = 10 वर्ष में दुगुनी होंगी (यह अनुमान है, सटीक नहीं)।

4. कारण के आधार पर: माँगजनित बनाम लागतजनित

आधारमाँगजनित (Demand-pull)लागतजनित (Cost-push)
मूल कारणकुल माँग, कुल पूर्ति से अधिकउत्पादन लागत में वृद्धि
प्रचलित वाक्य"Too much money chasing too few goods""लागत बढ़ी, कीमत बढ़ी"
स्रोतमुद्रा आपूर्ति में वृद्धि, सस्ता ऋण, घाटे का वित्त, सरकारी खर्च, आय-वृद्धि, निर्यात माँगमज़दूरी-वृद्धि (wage-push), कच्चा तेल/कच्चा माल महँगा (supply shock), लाभ-वृद्धि (profit-push), अप्रत्यक्ष कर-वृद्धि
उत्पादन पर असरप्रायः उत्पादन व रोज़गार भी बढ़ते हैं (पूर्ण रोज़गार तक)उत्पादन घट सकता है — Stagflation का खतरा
AD-AS चित्र मेंकुल माँग वक्र दाईं ओर खिसकता हैकुल पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसकता है
उपयुक्त उपचारमाँग घटाना — कठोर मौद्रिक नीति, राजकोषीय संकुचनपूर्ति बढ़ाना — आपूर्ति-शृंखला सुधार, भंडार जारी करना, आयात, उत्पादकता
उदाहरणत्योहार/चुनावी खर्च से माँग उछाल, कम ब्याज दर पर ऋण-विस्तारअंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम बढ़ना, सूखे से खाद्यान्न उत्पादन घटना

अन्य कारण-आधारित नाम

नामअर्थ
मज़दूरी-कीमत चक्र (Wage-price spiral)कीमत बढ़ने पर मज़दूरी की माँग, मज़दूरी बढ़ने पर लागत व कीमत फिर बढ़ना
संरचनात्मक मुद्रास्फीतिविकासशील देशों में कृषि, आधारभूत ढाँचे जैसी पूर्ति-बाधाओं से
आयातित मुद्रास्फीति (Imported)आयातित वस्तुओं (जैसे कच्चा तेल) के महँगे होने या रुपये के कमज़ोर होने से
घाटे के वित्त से मुद्रास्फीतिसरकार द्वारा केंद्रीय बैंक से नई मुद्रा लेकर खर्च करने से (मुद्रीकरण)

5. गति के आधार पर प्रकार

नीचे दी गई प्रतिशत सीमाएँ केवल अनुमानित हैं — अलग-अलग पाठ्यपुस्तकें अलग सीमाएँ देती हैं। परीक्षा में क्रम और स्वभाव पूछा जाता है, सटीक प्रतिशत पर भरोसा न करें।

प्रकारस्वभावसामान्यतः बताई जाने वाली सीमा (अनुमानित)
रेंगती (Creeping)बहुत धीमी, हल्की; विकास के लिए अनुकूल मानी जाती हैलगभग 3% से कम
चलती (Walking / Trotting)मध्यम; चेतावनी का संकेतलगभग 3% से 10% के बीच (पुस्तकों में भिन्नता)
दौड़ती (Running)तेज़; कुछ पुस्तकें इसे अलग चरण मानती हैंलगभग 10% से 20%
सरपट (Galloping)दो या तीन अंकों की दर; अर्थव्यवस्था अस्थिरदो-तीन अंकों में
अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation)नियंत्रण से बाहर, मुद्रा पर विश्वास समाप्त; वस्तु-विनिमय की ओर लौटनाकैगन की परिभाषा: प्रति माह 50% से अधिक

इतिहास के उदाहरण (अवधारणा समझने हेतु): प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी (1920 का दशक) और 2000 के दशक में ज़िम्बाब्वे अति-मुद्रास्फीति के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।


6. विशेष अवधारणाएँ: Stagflation से Skewflation तक

शब्दकीमत स्तरमुद्रास्फीति दरअन्य लक्षण
Inflationबढ़ रहाधनात्मकमुद्रा की क्रय शक्ति घटती
Deflation (अपस्फीति)घट रहाऋणात्मकमाँग में कमी, उत्पादन-रोज़गार घटने का खतरा; उपभोक्ता खरीद टालते हैं
Disinflation (अवस्फीति)बढ़ रहा, पर धीरेधनात्मक, पर घटती (जैसे 8% → 6% → 4%)प्रायः कठोर मौद्रिक नीति का परिणाम
Reflation (पुनःस्फीति)जानबूझकर बढ़ाया जातानीति द्वारा ऊपर लाई जातीमंदी/अपस्फीति से निकलने हेतु विस्तारवादी नीति
Stagflationबढ़ रहाऊँचीसाथ में ठहराव (कम वृद्धि) और ऊँची बेरोज़गारी; 1970 के दशक का तेल संकट क्लासिक उदाहरण
Skewflationकुछ वस्तुओं में तेज़ वृद्धिसमग्र दर सामान्य दिख सकती हैजैसे केवल खाद्य पदार्थ या सब्ज़ियाँ महँगी
Shrinkflationपैकेट का दाम वही—पैकेट की मात्रा घटा दी जाती है (छिपी महँगाई)
Headline inflationपूरी टोकरीसभी वस्तुएँ शामिलRBI का लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त पर
Core inflationखाद्य व ईंधन को छोड़करकम अस्थिरदीर्घकालिक माँगजनित दबाव का संकेतक

Deflation और Disinflation का अंतर — एक संख्या-रेखा से

वर्षमुद्रास्फीति दरस्थिति
वर्ष 1 → 29% → 6%Disinflation (दर घटी, कीमतें फिर भी बढ़ीं)
वर्ष 2 → 36% → 2%Disinflation
वर्ष 3 → 42% → −1%Deflation (कीमत स्तर वास्तव में गिरा)
वर्ष 4 → 5−1% → 3%Reflation (नीति से कीमतें सामान्य स्तर पर लौटीं)

Inflationary gap और Deflationary gap

  • स्फीतिक अंतराल (Inflationary gap): पूर्ण रोज़गार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से अधिक हो — अतिरिक्त माँग (excess demand)।
  • अवस्फीतिक/अपस्फीतिक अंतराल (Deflationary gap): पूर्ण रोज़गार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से कम हो — न्यून माँग (deficient demand)।

7. मुद्रास्फीति का मापन: WPI, CPI और GDP अपस्फीतिक

भारत में महँगाई मापने के लिए कई सूचकांक हैं। परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है — कौन जारी करता है, किसकी कीमत (थोक या खुदरा), और सेवाएँ शामिल हैं या नहीं।

सूचकांकजारीकर्ताकीमतेंसेवाएँमुख्य उपयोग
WPI (थोक मूल्य सूचकांक)आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयथोक (उत्पादक/थोक स्तर)शामिल नहींउत्पादक कीमतें, उद्योग व व्यापार
CPI-ग्रामीण, CPI-शहरी, CPI-संयुक्तNSO, MoSPIखुदराशामिलRBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य (CPI-संयुक्त), हेडलाइन महँगाई
CPI-IW (औद्योगिक श्रमिक)श्रम ब्यूरोखुदराशामिलसरकारी कर्मचारियों के महँगाई भत्ते (DA) का निर्धारण
CPI-AL (कृषि श्रमिक) / CPI-RL (ग्रामीण श्रमिक)श्रम ब्यूरोखुदराशामिलकृषि व ग्रामीण श्रमिकों की न्यूनतम मज़दूरी का संशोधन
GDP अपस्फीतिक (Deflator)NSO (राष्ट्रीय लेखा के साथ)अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुएँ-सेवाएँशामिलसबसे व्यापक कीमत माप; पर मासिक नहीं आता
PPI (उत्पादक मूल्य सूचकांक)आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT (2026 से नई श्रृंखला)उत्पादक स्तर—WPI के स्थान पर अंतरराष्ट्रीय मानक; WPI कुछ वर्ष साथ-साथ जारी रहेगा

आधार वर्ष के बारे में ज़रूरी सावधानी

WPI और विभिन्न CPI सूचकांकों के वर्तमान आधार वर्ष समय-समय पर संशोधित होते हैं, और 2026 में CPI तथा WPI दोनों की नई आधार-वर्ष श्रृंखलाएँ जारी की गई हैं। इसी कारण इस नोट में आधार वर्ष को याद करने योग्य तथ्य के रूप में नहीं दिया गया है। परीक्षा से पहले वर्तमान आधार वर्ष और वस्तु-भार (weights) आर्थिक सलाहकार कार्यालय (WPI), MoSPI (CPI) तथा श्रम ब्यूरो (CPI-IW) की आधिकारिक वेबसाइट से अवश्य जाँचें।

WPI बनाम CPI — मुख्य अंतर

आधारWPICPI
किस स्तर की कीमतथोक (पहले बड़े सौदे का स्तर)खुदरा (उपभोक्ता जो चुकाता है)
सेवाएँनहींहाँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, आवास आदि)
मुख्य समूहप्राथमिक वस्तुएँ; ईंधन व बिजली; विनिर्मित उत्पादखाद्य व पेय, आवास, ईंधन, कपड़े, विविध (सेवाएँ) आदि
किसके अनुभव का मापउत्पादक व व्यापारीपरिवार/उपभोक्ता
खाद्य पदार्थों का भारअपेक्षाकृत कमअपेक्षाकृत अधिक — इसलिए खाद्य महँगाई का CPI पर बड़ा असर
नीति में भूमिकापहले हेडलाइन माप थाअब RBI का लक्ष्य (CPI-संयुक्त)

RBI ने CPI को क्यों चुना?

रिज़र्व बैंक की उर्जित पटेल समिति (2014) ने सिफ़ारिश की कि मौद्रिक नीति का नाममात्र लंगर (nominal anchor) CPI-संयुक्त हो, क्योंकि यह उपभोक्ता की वास्तविक महँगाई और सेवाओं को दर्शाता है। इसके बाद RBI अधिनियम, 1934 में 2016 में संशोधन करके लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting) को वैधानिक आधार दिया गया और छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) बनाई गई। लक्ष्य केंद्र सरकार RBI के परामर्श से तय करती है; वर्तमान लक्ष्य और सहनशीलता सीमा (जैसे 4% ± 2%) केवल उदाहरण के रूप में देखें और परीक्षा से पहले RBI/वित्त मंत्रालय की नवीनतम अधिसूचना जाँचें।

GDP अपस्फीतिक — हल किया गया उदाहरण

किसी वर्ष नाममात्र GDP = ₹250 लाख करोड़ और वास्तविक GDP (स्थिर कीमतों पर) = ₹200 लाख करोड़। GDP अपस्फीतिक = 250 / 200 × 100 = 125। अर्थ: आधार वर्ष की तुलना में कीमत स्तर 25% ऊँचा है। GDP अपस्फीतिक में आयातित वस्तुएँ शामिल नहीं होतीं, जबकि CPI में उपभोक्ता द्वारा खरीदी आयातित वस्तुएँ भी आती हैं।


8. फिलिप्स वक्र (Phillips Curve)

न्यूज़ीलैंड में जन्मे अर्थशास्त्री ए. डब्ल्यू. फिलिप्स ने ब्रिटेन के आँकड़ों से दिखाया (1958) कि मज़दूरी-वृद्धि की दर और बेरोज़गारी दर में विपरीत संबंध है। बाद में इसे मुद्रास्फीति बनाम बेरोज़गारी के रूप में पढ़ा जाने लगा।

बिंदुव्याख्या (गुणात्मक)
आकारनीचे की ओर ढलान वाला वक्र — अधिक मुद्रास्फीति, कम बेरोज़गारी (और उल्टा)
नीति-निहितार्थअल्पकाल में सरकार कुछ अधिक महँगाई स्वीकार कर बेरोज़गारी घटा सकती है — "trade-off"
दीर्घकालफ्रीडमैन और फेल्प्स के अनुसार दीर्घकाल में वक्र लगभग ऊर्ध्वाधर — बेरोज़गारी अपनी "प्राकृतिक दर" पर लौट आती है
चुनौती1970 के दशक की Stagflation में महँगाई और बेरोज़गारी दोनों ऊँची रहीं — सरल फिलिप्स वक्र के विपरीत
परीक्षा-सारफिलिप्स वक्र = मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी का (अल्पकालीन) विपरीत संबंध

9. मुद्रास्फीति के प्रभाव

ऋणी बनाम ऋणदाता

मान लीजिए किसी ने 1 वर्ष के लिए 9% ब्याज पर ऋण लिया और उस वर्ष मुद्रास्फीति 6% रही। वास्तविक ब्याज दर ≈ 9 − 6 = 3% (सटीक फिशर सूत्र से (1.09 / 1.06 − 1) × 100 ≈ 2.83%)। ऋणदाता को जो रुपये लौटेंगे उनकी क्रय शक्ति कम होगी, इसलिए अप्रत्याशित मुद्रास्फीति में ऋणी को लाभ और ऋणदाता को हानि होती है। यदि मुद्रास्फीति नाममात्र ब्याज दर से अधिक हो जाए, तो वास्तविक ब्याज दर ऋणात्मक हो जाती है।

वर्गप्रभावकारण
ऋणी (Debtor)लाभकम क्रय शक्ति वाले रुपयों में ऋण चुकाता है
ऋणदाता (Creditor)हानिलौटे धन की वास्तविक कीमत घट जाती है
निश्चित आय वर्ग (पेंशनभोगी, स्थिर वेतन, किराया-आय)हानिआय वही, कीमतें बढ़ीं — वास्तविक आय घटी
उत्पादक व व्यापारीप्रायः लाभबिक्री मूल्य लागत से पहले बढ़ता है; पुराने स्टॉक पर लाभ
किसान (शुद्ध विक्रेता)प्रायः लाभउपज की कीमत बढ़ती है (यदि लागत कम बढ़े)
मज़दूरप्रायः हानिमज़दूरी कीमतों से पीछे रहती है
बचतकर्ताहानिबचत की वास्तविक कीमत घटती; बचत की प्रवृत्ति कम होती
सरकार (बड़ा ऋणी)सापेक्ष लाभसार्वजनिक ऋण का वास्तविक बोझ घटता; नाममात्र कर-संग्रह बढ़ता
शेयर/वास्तविक परिसंपत्ति धारकप्रायः लाभभूमि, सोना जैसी परिसंपत्तियों के दाम बढ़ते हैं

अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव

क्षेत्रप्रभाव
आय-वितरणगरीब और निश्चित आय वाले अधिक प्रभावित — असमानता बढ़ती है; इसे "सबसे क्रूर कर" भी कहा जाता है
निर्यातघरेलू वस्तुएँ महँगी होने से निर्यात प्रतिस्पर्धा घटती, आयात बढ़ता — व्यापार घाटा
निवेशहल्की महँगाई निवेश को प्रोत्साहित करती है; ऊँची व अनिश्चित महँगाई निवेश घटाती है
सट्टा व जमाखोरीऊँची महँगाई में बढ़ती है
बचत व पूँजी निर्माणवास्तविक ब्याज दर गिरने से बचत हतोत्साहित

10. मुद्रास्फीति नियंत्रण के उपाय

श्रेणीउपायमहँगाई घटाने के लिए दिशातंत्र
मौद्रिक (RBI)रेपो दरबढ़ानाबैंकों के लिए ऋण महँगा → ऋण व माँग घटती
मौद्रिकरिवर्स रेपो / SDF दरबढ़ानाबैंकों को RBI के पास पैसा रखना आकर्षक → बाज़ार में तरलता घटती
मौद्रिकCRR (नकद आरक्षित अनुपात)बढ़ानाबैंकों की ऋण देने योग्य राशि घटती
मौद्रिकSLR (वैधानिक तरलता अनुपात)बढ़ानाबैंकों को अधिक सरकारी प्रतिभूतियाँ रखनी पड़तीं
मौद्रिकखुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO)सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचनाबाज़ार से मुद्रा RBI के पास आती है
मौद्रिक (गुणात्मक)मार्जिन आवश्यकता, ऋण की राशनिंग, नैतिक दबावकड़ा करनासट्टे वाले क्षेत्रों में ऋण पर रोक
राजकोषीय (सरकार)सरकारी व्ययघटानाकुल माँग सीधे घटती
राजकोषीयप्रत्यक्ष करबढ़ानाप्रयोज्य आय व उपभोग घटता
राजकोषीयबजटअधिशेष/घाटा कम करनाघाटे के वित्त से नई मुद्रा का सृजन रुकता
राजकोषीयसार्वजनिक उधारजनता से उधार लेनाजनता की क्रय शक्ति सरकार के पास
पूर्ति-पक्ष / प्रशासनिकबफर स्टॉक जारी करना, आयात, निर्यात पर रोक, जमाखोरी पर कार्रवाई, PDSपूर्ति बढ़ानालागतजनित व खाद्य महँगाई पर अधिक प्रभावी

स्मरण रखें: मुद्रास्फीति घटाने के लिए अपनाई जाने वाली मौद्रिक नीति को कठोर/संकुचनशील (tight / contractionary / hawkish) और मंदी से निकलने के लिए अपनाई जाने वाली नीति को सस्ती/विस्तारवादी (easy / expansionary / dovish) कहते हैं। मौद्रिक उपकरणों का विस्तार RBI की मौद्रिक नीति वाले नोट में है, और राजकोषीय उपायों का आधार बजट, राजकोषीय नीति और GST वाले नोट में।


11. मुद्रा का परिमाण सिद्धांत (संक्षेप में)

इरविंग फिशर के समीकरण MV = PT में M = मुद्रा की मात्रा, V = मुद्रा का चलन-वेग, P = कीमत स्तर, T = लेन-देन की मात्रा। यदि V और T स्थिर मान लें तो M बढ़ने पर P उसी अनुपात में बढ़ता है — यही मुद्रावादी (monetarist) विचार का आधार है। मिल्टन फ्रीडमैन का प्रसिद्ध कथन है कि मुद्रास्फीति "हमेशा और हर जगह एक मौद्रिक घटना" है।

उदाहरण: यदि V और T स्थिर हों और M दुगुना हो जाए, तो P भी दुगुना होगा।


12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: Deflation बनाम Disinflation

"मुद्रास्फीति दर 7% से घटकर 4% हो गई — यह अपस्फीति है" — गलत। दर घटी है पर अभी भी धनात्मक है; कीमतें बढ़ ही रही हैं। यह अवस्फीति (Disinflation) है। अपस्फीति तभी जब दर शून्य से नीचे जाए।

Trap 2: WPI और CPI के जारीकर्ता

WPI को RBI या NSO नहीं, बल्कि DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है। CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त) NSO जारी करता है, पर CPI-IW, CPI-AL, CPI-RL श्रम ब्यूरो जारी करता है। "सभी CPI श्रम ब्यूरो जारी करता है" — गलत।

Trap 3: RBI किस सूचकांक को लक्ष्य करता है?

RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त (हेडलाइन) है — WPI नहीं, CPI-IW नहीं, और core inflation भी नहीं। Core inflation पर RBI नज़र रखता है, पर वैधानिक लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त है।

Trap 4: क्रय शक्ति में गिरावट का प्रतिशत

कीमतें 25% बढ़ें तो मुद्रा की क्रय शक्ति 25% नहीं, 20% घटती है (1/1.25 = 0.8)। कीमतें 100% बढ़ें (दुगुनी) तो क्रय शक्ति 50% घटती है।

Trap 5: WPI में सेवाएँ

WPI में सेवाएँ शामिल नहीं हैं; CPI में हैं। यही एक बड़ा कारण है कि नीति-लक्ष्य के लिए CPI को चुना गया।

Trap 6: रेपो दर घटाना ≠ महँगाई नियंत्रण

महँगाई रोकने के लिए रेपो दर, CRR, SLR बढ़ाए जाते हैं और OMO में प्रतिभूतियाँ बेची जाती हैं। प्रतिभूतियाँ खरीदने से बाज़ार में मुद्रा आती है — यह विस्तारवादी कदम है।

Trap 7: Stagflation में फिलिप्स वक्र

Stagflation में महँगाई और बेरोज़गारी दोनों ऊँची होती हैं — यह सरल फिलिप्स वक्र के विपरीत है, उसका उदाहरण नहीं।

Trap 8: Core inflation में क्या नहीं

Core inflation से खाद्य और ईंधन हटाए जाते हैं, क्योंकि ये सबसे अस्थिर होते हैं। "Core में केवल खाद्य और ईंधन" — उल्टा और गलत।

Trap 9: आधार वर्ष याद करने का जाल

WPI/CPI के आधार वर्ष संशोधन के अधीन हैं। पुरानी पुस्तकों का आधार वर्ष आँख मूँदकर न लिखें — परीक्षा के समय का वर्तमान आधार वर्ष आधिकारिक स्रोत से जाँचें।


13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)

#प्रश्न / बिंदुउत्तर
1मुद्रास्फीति किसमें वृद्धि हैसामान्य कीमत स्तर
2मुद्रास्फीति में मुद्रा का मूल्यघटता है
3"Too much money chasing too few goods"माँगजनित मुद्रास्फीति
4कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महँगाईलागतजनित (पूर्ति आघात)
5मज़दूरी बढ़ने से महँगाईWage-push (लागतजनित)
6AD दाईं ओर खिसकेमाँगजनित
7AS बाईं ओर खिसकेलागतजनित
8सबसे धीमी मुद्रास्फीतिरेंगती (Creeping)
9नियंत्रण से बाहर मुद्रास्फीतिअति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation)
10गति का सही क्रमCreeping → Walking → Galloping → Hyperinflation
11ऊँची महँगाई + ठहराव + बेरोज़गारीStagflation
12कीमत स्तर का गिरनाDeflation (अपस्फीति)
13महँगाई दर का घटना (धनात्मक रहते)Disinflation (अवस्फीति)
14मंदी के बाद कीमतें जानबूझकर उठानाReflation
15कुछ वस्तुओं में ही तेज़ महँगाईSkewflation
16मात्रा घटाकर वही दामShrinkflation
17Core inflation से हटाए जातेखाद्य और ईंधन
18Headline inflationपूरी टोकरी की महँगाई
19WPI जारीकर्ताआर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT
20DPIIT किस मंत्रालय मेंवाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
21CPI-संयुक्त जारीकर्ताNSO (MoSPI)
22CPI-IW जारीकर्ताश्रम ब्यूरो
23CPI-AL व CPI-RL जारीकर्ताश्रम ब्यूरो
24श्रम ब्यूरो किस मंत्रालय मेंश्रम एवं रोज़गार मंत्रालय
25सरकारी कर्मचारियों का DA किससे जुड़ाCPI-IW
26RBI का लक्ष्य सूचकांकCPI-संयुक्त
27CPI को नाममात्र लंगर बनाने की सिफ़ारिशउर्जित पटेल समिति (2014)
28मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का वैधानिक आधारRBI अधिनियम, 1934 (2016 का संशोधन)
29MPC के सदस्य6
30WPI में सेवाएँशामिल नहीं
31WPI के तीन प्रमुख समूहप्राथमिक वस्तुएँ; ईंधन व बिजली; विनिर्मित उत्पाद
32सबसे व्यापक कीमत मापGDP अपस्फीतिक
33GDP अपस्फीतिक सूत्रनाममात्र GDP / वास्तविक GDP × 100
34मुद्रास्फीति दर सूत्र(P1 − P0) / P0 × 100
35वास्तविक ब्याज दर (लगभग)नाममात्र दर − मुद्रास्फीति दर
36फिलिप्स वक्रमुद्रास्फीति व बेरोज़गारी में विपरीत संबंध
37फिलिप्स वक्र का दीर्घकालीन रूप (फ्रीडमैन)लगभग ऊर्ध्वाधर
38मुद्रास्फीति में लाभऋणी
39मुद्रास्फीति में हानिऋणदाता, निश्चित आय वर्ग, बचतकर्ता
40महँगाई घटाने के लिए रेपो दरबढ़ाई जाती है
41महँगाई घटाने के लिए CRR/SLRबढ़ाए जाते हैं
42महँगाई घटाने के लिए OMOसरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना
43राजकोषीय नियंत्रणव्यय घटाना, कर बढ़ाना, घाटा कम करना
44फिशर का समीकरणMV = PT
45पूर्ण रोज़गार पर अतिरिक्त माँगस्फीतिक अंतराल
46पूर्ण रोज़गार पर न्यून माँगअवस्फीतिक अंतराल
47महँगाई को "गरीबों पर कर" क्योंनिश्चित व कम आय वालों की वास्तविक आय सबसे अधिक घटती
48कीमतें दुगुनी होने पर क्रय शक्तिआधी (50% घटी)
49मुद्रास्फीति में निर्यातप्रतिस्पर्धा घटती, निर्यात हतोत्साहित
50Stagflation का क्लासिक उदाहरण1970 के दशक का तेल संकट

14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस अध्याय के प्रश्न प्रायः पाँच ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे के लिए एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:

  1. परिभाषा: "जब मुद्रास्फीति की दर 6% से घटकर 3% हो जाए, तो इसे क्या कहते हैं?" (Disinflation)
  2. जारीकर्ता मिलान: "सूची-I: WPI, CPI-संयुक्त, CPI-IW — सूची-II: NSO, श्रम ब्यूरो, आर्थिक सलाहकार कार्यालय।" (WPI–आर्थिक सलाहकार कार्यालय, CPI-संयुक्त–NSO, CPI-IW–श्रम ब्यूरो)
  3. नीति-चयन: "निम्न में से कौन-सा कदम मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है? (a) रेपो दर बढ़ाना (b) CRR घटाना (c) सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना (d) प्रत्यक्ष कर बढ़ाना" (b — CRR घटाने से तरलता बढ़ती है)
  4. कथन-आधारित: "1. मुद्रास्फीति में ऋणदाता को लाभ होता है। 2. Core inflation में खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते। कौन-सा सही है?" (केवल 2)
  5. सरल गणना: "सूचकांक 150 से 159 हुआ; मुद्रास्फीति दर?" (9/150 × 100 = 6%)

रणनीति: हर नीति-प्रश्न में "मुद्रा की मात्रा बढ़ेगी या घटेगी?" पूछें — बढ़े तो महँगाई बढ़ाने वाला कदम, घटे तो नियंत्रक कदम। गणना में हमेशा पिछली अवधि के सूचकांक से भाग दें।


15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

  • "माँग खींचे, लागत धकेले" — Demand-pull (खींचना), Cost-push (धकेलना)।
  • "रेंग → चल → सरपट → अति" — गति का क्रम: Creeping, Walking, Galloping, Hyper।
  • "DE = नीचे, DIS = धीमे" — Deflation में कीमतें नीचे जाती हैं; Disinflation में महँगाई धीमी होती है।
  • "Stag = ठहरा हुआ" — Stagnation + Inflation = Stagflation।
  • "थोक DPIIT, खुदरा NSO, मज़दूर श्रम ब्यूरो" — WPI, CPI (R/U/C), CPI-IW/AL/RL।
  • "Core में खाना-तेल नहीं" — Core = खाद्य व ईंधन रहित।
  • "उधार लेने वाला मुस्कुराए, उधार देने वाला पछताए" — मुद्रास्फीति में ऋणी को लाभ।
  • "महँगाई रोको = सब बढ़ाओ, सिर्फ़ बॉन्ड बेचो" — रेपो, CRR, SLR बढ़ाओ; OMO में बेचो।
  • "फिलिप्स = फिसलता वक्र" — नीचे की ओर ढलान: महँगाई ऊपर, बेरोज़गारी नीचे।

16. कथन अभ्यास

मुद्रास्फीति में मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। — सही।

मुद्रास्फीति दर का 8% से घटकर 5% होना अपस्फीति कहलाता है। — गलत (यह अवस्फीति/Disinflation है)।

Stagflation में ऊँची मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक ठहराव और बेरोज़गारी होती है। — सही।

WPI को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) जारी करता है। — गलत (DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है)।

CPI-IW को श्रम ब्यूरो जारी करता है। — सही।

RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य WPI पर आधारित है। — गलत (CPI-संयुक्त पर आधारित है)।

थोक मूल्य सूचकांक में सेवाएँ शामिल होती हैं। — गलत (WPI में सेवाएँ शामिल नहीं होतीं)।

अप्रत्याशित मुद्रास्फीति से ऋणी को लाभ और ऋणदाता को हानि होती है। — सही।

Core inflation में खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता। — सही।

मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए RBI खुले बाज़ार में सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है। — गलत (प्रतिभूतियाँ बेचता है, ताकि मुद्रा बाज़ार से वापस आए)।

फिलिप्स वक्र मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी के बीच विपरीत संबंध दिखाता है। — सही।

कीमतें 25% बढ़ने पर मुद्रा की क्रय शक्ति 25% घटती है। — गलत (क्रय शक्ति 20% घटती है, क्योंकि 1/1.25 = 0.8)।


17. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ

  1. मुद्रास्फीति = सामान्य कीमत स्तर में सतत वृद्धि; मुद्रा का मूल्य घटता है।
  2. माँगजनित = AD > AS; लागतजनित = मज़दूरी, तेल, कच्चा माल महँगा।
  3. गति: Creeping → Walking → Galloping → Hyperinflation (प्रतिशत सीमाएँ पुस्तकों में भिन्न)।
  4. Stagflation = महँगाई + ठहराव + बेरोज़गारी।
  5. Deflation = कीमतें गिरें; Disinflation = महँगाई दर घटे पर धनात्मक रहे।
  6. Reflation = मंदी के बाद नीति से कीमतें उठाना; Skewflation = कुछ वस्तुओं में महँगाई।
  7. Core = खाद्य व ईंधन हटाकर; Headline = पूरी टोकरी।
  8. WPI — आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT; सेवाएँ नहीं।
  9. CPI (R/U/C) — NSO; CPI-IW, CPI-AL/RL — श्रम ब्यूरो।
  10. RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त; 2016 के संशोधन से लचीला लक्ष्यीकरण, 6 सदस्यीय MPC।
  11. आधार वर्ष और लक्ष्य-संख्या संशोधन के अधीन — आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
  12. GDP अपस्फीतिक = नाममात्र / वास्तविक × 100; मुद्रास्फीति दर = (P1 − P0)/P0 × 100।
  13. ऋणी को लाभ; ऋणदाता, निश्चित आय वर्ग, बचतकर्ता को हानि।
  14. नियंत्रण: रेपो, CRR, SLR बढ़ाओ, OMO में बेचो; व्यय घटाओ, कर बढ़ाओ।

18. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 6 (विशेष अवधारणाएँ), खंड 7 (मापन) और खंड 12 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। परीक्षा-स्तर के पूर्ण अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ या IBPS PO / SBI Clerk प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।


19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

मुद्रास्फीति का अध्याय परिभाषाओं, सूचकांकों और नीति-दिशा — इन तीन बातों पर टिका है। पहले Deflation, Disinflation, Reflation और Stagflation के अंतर पक्के करें, फिर याद रखें कि WPI, CPI और CPI-IW को अलग-अलग संस्थाएँ जारी करती हैं और RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त है। नीति-प्रश्नों में केवल यह देखें कि कदम से बाज़ार में मुद्रा बढ़ेगी या घटेगी। आधार वर्ष, वस्तु-भार और लक्ष्य की संख्याएँ बदल सकती हैं, इसलिए उन्हें परीक्षा से ठीक पहले आधिकारिक स्रोत से मिला लें।

माँग खींचे, लागत धकेले | DE = कीमतें नीचे, DIS = दर धीमी | WPI–DPIIT, CPI–NSO, CPI-IW–श्रम ब्यूरो | RBI लक्ष्य = CPI-संयुक्त | ऋणी लाभ, ऋणदाता हानि | रोकने हेतु रेपो-CRR-SLR ↑, OMO बिक्री


अंतिम संशोधन (Last Updated):
RPSC / RSSB सिलेबस के अनुसार
भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखकलेखक परिचय

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“मुद्रास्फीति के प्रकार और मापन — माँगजनित-लागतजनित, Stagflation, WPI-CPI, फिलिप्स वक्र — RAS, UPSC” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

किसी अवधि में वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर में होने वाली सतत वृद्धि को मुद्रास्फीति कहते हैं। इससे मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, यानी एक रुपये से पहले से कम वस्तुएँ मिलती हैं।

माँगजनित मुद्रास्फीति तब होती है जब कुल माँग कुल पूर्ति से अधिक हो, जैसे मुद्रा आपूर्ति या सरकारी खर्च बढ़ने पर। लागतजनित मुद्रास्फीति मज़दूरी, कच्चे तेल या कच्चे माल जैसी उत्पादन लागत बढ़ने से होती है।

Deflation (अपस्फीति) में सामान्य कीमत स्तर वास्तव में गिरता है और मुद्रास्फीति दर ऋणात्मक होती है। Disinflation (अवस्फीति) में मुद्रास्फीति की दर घटती है, पर धनात्मक रहती है, यानी कीमतें धीमी गति से बढ़ती रहती हैं।

Stagflation वह स्थिति है जिसमें ऊँची मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक ठहराव (कम वृद्धि) और ऊँची बेरोज़गारी एक साथ हों। 1970 के दशक का तेल संकट इसका क्लासिक उदाहरण माना जाता है।

WPI को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है। CPI-ग्रामीण, शहरी और संयुक्त को MoSPI का NSO जारी करता है, जबकि CPI-IW, CPI-AL और CPI-RL को श्रम ब्यूरो जारी करता है।

RBI का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त (Combined) पर आधारित है। लक्ष्य की वर्तमान संख्या और सहनशीलता सीमा सरकार अधिसूचित करती है, इसलिए नवीनतम अधिसूचना आधिकारिक स्रोत से जाँचें।

Headline inflation पूरी उपभोग टोकरी की महँगाई है। Core inflation में अस्थिर खाद्य और ईंधन को हटा दिया जाता है, ताकि महँगाई की मूल प्रवृत्ति दिखे।

अप्रत्याशित मुद्रास्फीति से ऋणी, उत्पादक और व्यापारियों को प्रायः लाभ होता है। ऋणदाता, पेंशनभोगी जैसे निश्चित आय वर्ग और बचतकर्ताओं को हानि होती है, क्योंकि उनकी आय या धन की वास्तविक कीमत घट जाती है।

ए. डब्ल्यू. फिलिप्स के नाम पर बना यह वक्र अल्पकाल में मुद्रास्फीति (मूलतः मज़दूरी-वृद्धि) और बेरोज़गारी के बीच विपरीत संबंध दिखाता है। फ्रीडमैन के अनुसार दीर्घकाल में यह वक्र लगभग ऊर्ध्वाधर हो जाता है।

मौद्रिक उपायों में RBI रेपो दर, CRR और SLR बढ़ाता है तथा खुले बाज़ार में सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है। राजकोषीय उपायों में सरकार अपना व्यय घटाती है, कर बढ़ाती है और बजट घाटा कम करती है।

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