मुद्रास्फीति के प्रकार और मापन — माँगजनित-लागतजनित, Stagflation, WPI-CPI, फिलिप्स वक्र — RAS, UPSC
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS, UPSC CSE प्रारंभिक, SSC व बैंकिंग पाठ्यक्रम की अर्थव्यवस्था इकाई; NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 9–12) तथा RBI व भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों की मानक परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: मुद्रास्फीति (Inflation) वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर में लगातार होने वाली वृद्धि है, जिससे मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। कारण के आधार पर इसके दो मुख्य रूप हैं — माँगजनित (Demand-pull), जब कुल माँग कुल पूर्ति से अधिक हो ("बहुत अधिक मुद्रा, बहुत कम वस्तुओं के पीछे"), और लागतजनित (Cost-push), जब मज़दूरी, कच्चे माल या ईंधन की लागत बढ़े। गति के आधार पर रेंगती (Creeping) → चलती (Walking) → दौड़ती (Galloping) → अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) का क्रम है। मुद्रास्फीतिजनित मंदी (Stagflation) = ऊँची महँगाई + ठहराव/बेरोज़गारी; अपस्फीति (Deflation) = कीमत स्तर का गिरना; अवस्फीति (Disinflation) = महँगाई की दर का घटना (कीमतें फिर भी बढ़ रही हैं)। भारत में थोक मूल्य सूचकांक WPI को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है, और CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त) को सांख्यिकी मंत्रालय का NSO; CPI-IW और CPI-AL/RL को श्रम ब्यूरो। RBI का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI-संयुक्त (Combined) पर आधारित है। महँगाई में ऋणी (debtor) को लाभ और ऋणदाता (creditor) तथा निश्चित आय वर्ग को हानि होती है। नियंत्रण के लिए मौद्रिक उपाय (रेपो दर, CRR, SLR बढ़ाना, OMO में बॉन्ड बेचना) और राजकोषीय उपाय (सरकारी खर्च घटाना, कर बढ़ाना) अपनाए जाते हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| अवधारणा | एक पंक्ति में |
|---|---|
| मुद्रास्फीति | सामान्य कीमत स्तर में सतत वृद्धि; मुद्रा का मूल्य (क्रय शक्ति) घटता है |
| माँगजनित (Demand-pull) | कुल माँग > कुल पूर्ति; मुद्रा आपूर्ति, सरकारी खर्च या आय बढ़ने से |
| लागतजनित (Cost-push) | उत्पादन लागत बढ़ने से — मज़दूरी, कच्चा तेल, कच्चा माल, लाभ-वृद्धि |
| Stagflation | ऊँची मुद्रास्फीति + आर्थिक ठहराव + ऊँची बेरोज़गारी |
| Deflation (अपस्फीति) | सामान्य कीमत स्तर का गिरना; मुद्रास्फीति दर ऋणात्मक |
| Disinflation (अवस्फीति) | मुद्रास्फीति की दर घटना, पर दर अभी भी धनात्मक |
| Reflation (पुनःस्फीति) | मंदी/अपस्फीति के बाद कीमत स्तर को जानबूझकर सामान्य स्तर तक उठाना |
| Skewflation | कुछ ही वस्तुओं (जैसे खाद्य) में तेज़ कीमत-वृद्धि, बाकी में नहीं |
| Headline बनाम Core | Headline = पूरी टोकरी; Core = अस्थिर खाद्य व ईंधन हटाकर |
| WPI जारीकर्ता | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) |
| CPI (R/U/C) जारीकर्ता | NSO, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) |
| CPI-IW, CPI-AL, CPI-RL | श्रम ब्यूरो (श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय) |
| RBI का लक्ष्य सूचकांक | CPI-संयुक्त (Combined) — हेडलाइन CPI |
| फिलिप्स वक्र | मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी में (अल्पकाल में) विपरीत संबंध |
| किसे लाभ | ऋणी, उत्पादक/व्यापारी, परिवर्ती आय वाले |
| किसे हानि | ऋणदाता, निश्चित आय (पेंशन, वेतन), बचतकर्ता |
| सूत्र | रूप |
|---|---|
| मुद्रास्फीति दर (%) | (P1 − P0) / P0 × 100, जहाँ P0 = पिछली अवधि का सूचकांक, P1 = वर्तमान |
| GDP अपस्फीतिक (Deflator) | नाममात्र GDP / वास्तविक GDP × 100 |
| वास्तविक ब्याज दर (लगभग) | नाममात्र ब्याज दर − मुद्रास्फीति दर (फिशर समीकरण का सरल रूप) |
| मुद्रा का मूल्य | कीमत स्तर का व्युत्क्रम: मुद्रा का मूल्य ∝ 1 / P |
| Rule of 70 (अनुमान) | कीमतें दुगुनी होने में लगे वर्ष ≈ 70 / वार्षिक मुद्रास्फीति दर |
| मुद्रा का परिमाण सिद्धांत (फिशर) | MV = PT |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
मुद्रास्फीति भारतीय अर्थव्यवस्था का वह अध्याय है जो मौद्रिक नीति, बजट, बैंकिंग और राष्ट्रीय आय — चारों से जुड़ता है। RAS और UPSC प्रारंभिक में इसकी अवधारणाएँ (stagflation, disinflation, core inflation) कथन-आधारित प्रश्नों के रूप में आती हैं; बैंकिंग परीक्षाओं (IBPS/SBI) में WPI-CPI के जारीकर्ता, RBI का लक्ष्य सूचकांक और मौद्रिक उपकरण पूछे जाते हैं; SSC और राजस्थान CET में परिभाषा व "किसे लाभ, किसे हानि" जैसे सीधे प्रश्न बनते हैं। मौद्रिक उपकरणों का विस्तार मुद्रा, बैंकिंग और RBI की मौद्रिक नीति वाले नोट्स में है, और GDP अपस्फीतिक की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय आय (GDP, GNP) की अवधारणा में।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- RAS प्रारंभिक व मुख्य — अवधारणा, प्रभाव और नियंत्रण के उपाय (मुख्य परीक्षा में व्याख्यात्मक)
- UPSC प्रारंभिक — कथन-आधारित: कौन-सा कदम मुद्रास्फीति घटाएगा, core बनाम headline, फिलिप्स वक्र
- IBPS PO / SBI PO / Clerk — सूचकांक के जारीकर्ता, RBI का लक्ष्य, CRR-SLR-रेपो का असर
- SSC CGL / CHSL — परिभाषाएँ, माँगजनित-लागतजनित, ऋणी-ऋणदाता
- राजस्थान CET (स्नातक) — सरल तथ्य और परिभाषाएँ
प्रश्न कैसे आते हैं?
- परिभाषा-आधारित: "महँगाई की दर घटे पर कीमतें बढ़ती रहें, तो यह क्या है?" (Disinflation)
- जारीकर्ता-आधारित: "CPI-IW कौन जारी करता है?" (श्रम ब्यूरो)
- नीति-आधारित: "निम्न में से कौन-सा कदम मुद्रास्फीति नियंत्रित करेगा?"
- प्रभाव-आधारित: "मुद्रास्फीति में किसे हानि होती है?"
- सरल गणना: सूचकांक से मुद्रास्फीति दर, वास्तविक ब्याज दर, GDP अपस्फीतिक
3. मुद्रास्फीति: परिभाषा और मूल समझ
परिभाषा: किसी अर्थव्यवस्था में एक अवधि तक वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर (general price level) में होने वाली सतत वृद्धि मुद्रास्फीति है। किसी एक वस्तु (जैसे प्याज़) का महँगा होना अपने-आप में मुद्रास्फीति नहीं है; जब कीमतों का समग्र सूचकांक बढ़ता है, तब मुद्रास्फीति कहते हैं। क्रॉउथर की प्रसिद्ध परिभाषा के अनुसार यह वह अवस्था है जिसमें मुद्रा का मूल्य गिर रहा हो, अर्थात कीमतें बढ़ रही हों।
| बिंदु | स्पष्टीकरण |
|---|---|
| मापन किसका | कीमत सूचकांक (WPI, CPI) या GDP अपस्फीतिक में प्रतिशत परिवर्तन का |
| मुद्रा का मूल्य | कीमत स्तर के उलटे अनुपात में; कीमतें बढ़ीं तो एक रुपये से कम वस्तुएँ मिलेंगी |
| "सतत" का अर्थ | एक बार की उछाल नहीं, लगातार बढ़ती प्रवृत्ति |
| साल-दर-साल (YoY) | इस माह का सूचकांक बनाम पिछले वर्ष के उसी माह का सूचकांक |
| आधार प्रभाव (Base effect) | पिछले वर्ष का सूचकांक बहुत ऊँचा/नीचा होने से इस वर्ष की दर कम/अधिक दिखना |
| मध्यम मुद्रास्फीति | हल्की, स्थिर महँगाई को सामान्यतः विकास के लिए सहायक माना जाता है |
हल किए गए उदाहरण:
- पिछले वर्ष CPI = 120, इस वर्ष CPI = 126। मुद्रास्फीति दर = (126 − 120) / 120 × 100 = 6/120 × 100 = 5%।
- सूचकांक 200 से घटकर 180 हुआ। दर = (180 − 200) / 200 × 100 = −10% — यह अपस्फीति (Deflation) है।
- कीमत स्तर 25% बढ़ा (P = 1 से 1.25)। मुद्रा का मूल्य = 1/1.25 = 0.8, यानी मुद्रा की क्रय शक्ति 20% घटी — 25% नहीं। यह परीक्षा का प्रिय जाल है।
- मुद्रास्फीति दर 7% वार्षिक रहे तो Rule of 70 से कीमतें लगभग 70/7 = 10 वर्ष में दुगुनी होंगी (यह अनुमान है, सटीक नहीं)।
4. कारण के आधार पर: माँगजनित बनाम लागतजनित
| आधार | माँगजनित (Demand-pull) | लागतजनित (Cost-push) |
|---|---|---|
| मूल कारण | कुल माँग, कुल पूर्ति से अधिक | उत्पादन लागत में वृद्धि |
| प्रचलित वाक्य | "Too much money chasing too few goods" | "लागत बढ़ी, कीमत बढ़ी" |
| स्रोत | मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि, सस्ता ऋण, घाटे का वित्त, सरकारी खर्च, आय-वृद्धि, निर्यात माँग | मज़दूरी-वृद्धि (wage-push), कच्चा तेल/कच्चा माल महँगा (supply shock), लाभ-वृद्धि (profit-push), अप्रत्यक्ष कर-वृद्धि |
| उत्पादन पर असर | प्रायः उत्पादन व रोज़गार भी बढ़ते हैं (पूर्ण रोज़गार तक) | उत्पादन घट सकता है — Stagflation का खतरा |
| AD-AS चित्र में | कुल माँग वक्र दाईं ओर खिसकता है | कुल पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसकता है |
| उपयुक्त उपचार | माँग घटाना — कठोर मौद्रिक नीति, राजकोषीय संकुचन | पूर्ति बढ़ाना — आपूर्ति-शृंखला सुधार, भंडार जारी करना, आयात, उत्पादकता |
| उदाहरण | त्योहार/चुनावी खर्च से माँग उछाल, कम ब्याज दर पर ऋण-विस्तार | अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम बढ़ना, सूखे से खाद्यान्न उत्पादन घटना |
अन्य कारण-आधारित नाम
| नाम | अर्थ |
|---|---|
| मज़दूरी-कीमत चक्र (Wage-price spiral) | कीमत बढ़ने पर मज़दूरी की माँग, मज़दूरी बढ़ने पर लागत व कीमत फिर बढ़ना |
| संरचनात्मक मुद्रास्फीति | विकासशील देशों में कृषि, आधारभूत ढाँचे जैसी पूर्ति-बाधाओं से |
| आयातित मुद्रास्फीति (Imported) | आयातित वस्तुओं (जैसे कच्चा तेल) के महँगे होने या रुपये के कमज़ोर होने से |
| घाटे के वित्त से मुद्रास्फीति | सरकार द्वारा केंद्रीय बैंक से नई मुद्रा लेकर खर्च करने से (मुद्रीकरण) |
5. गति के आधार पर प्रकार
नीचे दी गई प्रतिशत सीमाएँ केवल अनुमानित हैं — अलग-अलग पाठ्यपुस्तकें अलग सीमाएँ देती हैं। परीक्षा में क्रम और स्वभाव पूछा जाता है, सटीक प्रतिशत पर भरोसा न करें।
| प्रकार | स्वभाव | सामान्यतः बताई जाने वाली सीमा (अनुमानित) |
|---|---|---|
| रेंगती (Creeping) | बहुत धीमी, हल्की; विकास के लिए अनुकूल मानी जाती है | लगभग 3% से कम |
| चलती (Walking / Trotting) | मध्यम; चेतावनी का संकेत | लगभग 3% से 10% के बीच (पुस्तकों में भिन्नता) |
| दौड़ती (Running) | तेज़; कुछ पुस्तकें इसे अलग चरण मानती हैं | लगभग 10% से 20% |
| सरपट (Galloping) | दो या तीन अंकों की दर; अर्थव्यवस्था अस्थिर | दो-तीन अंकों में |
| अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) | नियंत्रण से बाहर, मुद्रा पर विश्वास समाप्त; वस्तु-विनिमय की ओर लौटना | कैगन की परिभाषा: प्रति माह 50% से अधिक |
इतिहास के उदाहरण (अवधारणा समझने हेतु): प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी (1920 का दशक) और 2000 के दशक में ज़िम्बाब्वे अति-मुद्रास्फीति के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
6. विशेष अवधारणाएँ: Stagflation से Skewflation तक
| शब्द | कीमत स्तर | मुद्रास्फीति दर | अन्य लक्षण |
|---|---|---|---|
| Inflation | बढ़ रहा | धनात्मक | मुद्रा की क्रय शक्ति घटती |
| Deflation (अपस्फीति) | घट रहा | ऋणात्मक | माँग में कमी, उत्पादन-रोज़गार घटने का खतरा; उपभोक्ता खरीद टालते हैं |
| Disinflation (अवस्फीति) | बढ़ रहा, पर धीरे | धनात्मक, पर घटती (जैसे 8% → 6% → 4%) | प्रायः कठोर मौद्रिक नीति का परिणाम |
| Reflation (पुनःस्फीति) | जानबूझकर बढ़ाया जाता | नीति द्वारा ऊपर लाई जाती | मंदी/अपस्फीति से निकलने हेतु विस्तारवादी नीति |
| Stagflation | बढ़ रहा | ऊँची | साथ में ठहराव (कम वृद्धि) और ऊँची बेरोज़गारी; 1970 के दशक का तेल संकट क्लासिक उदाहरण |
| Skewflation | कुछ वस्तुओं में तेज़ वृद्धि | समग्र दर सामान्य दिख सकती है | जैसे केवल खाद्य पदार्थ या सब्ज़ियाँ महँगी |
| Shrinkflation | पैकेट का दाम वही | — | पैकेट की मात्रा घटा दी जाती है (छिपी महँगाई) |
| Headline inflation | पूरी टोकरी | सभी वस्तुएँ शामिल | RBI का लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त पर |
| Core inflation | खाद्य व ईंधन को छोड़कर | कम अस्थिर | दीर्घकालिक माँगजनित दबाव का संकेतक |
Deflation और Disinflation का अंतर — एक संख्या-रेखा से
| वर्ष | मुद्रास्फीति दर | स्थिति |
|---|---|---|
| वर्ष 1 → 2 | 9% → 6% | Disinflation (दर घटी, कीमतें फिर भी बढ़ीं) |
| वर्ष 2 → 3 | 6% → 2% | Disinflation |
| वर्ष 3 → 4 | 2% → −1% | Deflation (कीमत स्तर वास्तव में गिरा) |
| वर्ष 4 → 5 | −1% → 3% | Reflation (नीति से कीमतें सामान्य स्तर पर लौटीं) |
Inflationary gap और Deflationary gap
- स्फीतिक अंतराल (Inflationary gap): पूर्ण रोज़गार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से अधिक हो — अतिरिक्त माँग (excess demand)।
- अवस्फीतिक/अपस्फीतिक अंतराल (Deflationary gap): पूर्ण रोज़गार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से कम हो — न्यून माँग (deficient demand)।
7. मुद्रास्फीति का मापन: WPI, CPI और GDP अपस्फीतिक
भारत में महँगाई मापने के लिए कई सूचकांक हैं। परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है — कौन जारी करता है, किसकी कीमत (थोक या खुदरा), और सेवाएँ शामिल हैं या नहीं।
| सूचकांक | जारीकर्ता | कीमतें | सेवाएँ | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|---|
| WPI (थोक मूल्य सूचकांक) | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय | थोक (उत्पादक/थोक स्तर) | शामिल नहीं | उत्पादक कीमतें, उद्योग व व्यापार |
| CPI-ग्रामीण, CPI-शहरी, CPI-संयुक्त | NSO, MoSPI | खुदरा | शामिल | RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य (CPI-संयुक्त), हेडलाइन महँगाई |
| CPI-IW (औद्योगिक श्रमिक) | श्रम ब्यूरो | खुदरा | शामिल | सरकारी कर्मचारियों के महँगाई भत्ते (DA) का निर्धारण |
| CPI-AL (कृषि श्रमिक) / CPI-RL (ग्रामीण श्रमिक) | श्रम ब्यूरो | खुदरा | शामिल | कृषि व ग्रामीण श्रमिकों की न्यूनतम मज़दूरी का संशोधन |
| GDP अपस्फीतिक (Deflator) | NSO (राष्ट्रीय लेखा के साथ) | अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुएँ-सेवाएँ | शामिल | सबसे व्यापक कीमत माप; पर मासिक नहीं आता |
| PPI (उत्पादक मूल्य सूचकांक) | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT (2026 से नई श्रृंखला) | उत्पादक स्तर | — | WPI के स्थान पर अंतरराष्ट्रीय मानक; WPI कुछ वर्ष साथ-साथ जारी रहेगा |
आधार वर्ष के बारे में ज़रूरी सावधानी
WPI और विभिन्न CPI सूचकांकों के वर्तमान आधार वर्ष समय-समय पर संशोधित होते हैं, और 2026 में CPI तथा WPI दोनों की नई आधार-वर्ष श्रृंखलाएँ जारी की गई हैं। इसी कारण इस नोट में आधार वर्ष को याद करने योग्य तथ्य के रूप में नहीं दिया गया है। परीक्षा से पहले वर्तमान आधार वर्ष और वस्तु-भार (weights) आर्थिक सलाहकार कार्यालय (WPI), MoSPI (CPI) तथा श्रम ब्यूरो (CPI-IW) की आधिकारिक वेबसाइट से अवश्य जाँचें।
WPI बनाम CPI — मुख्य अंतर
| आधार | WPI | CPI |
|---|---|---|
| किस स्तर की कीमत | थोक (पहले बड़े सौदे का स्तर) | खुदरा (उपभोक्ता जो चुकाता है) |
| सेवाएँ | नहीं | हाँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, आवास आदि) |
| मुख्य समूह | प्राथमिक वस्तुएँ; ईंधन व बिजली; विनिर्मित उत्पाद | खाद्य व पेय, आवास, ईंधन, कपड़े, विविध (सेवाएँ) आदि |
| किसके अनुभव का माप | उत्पादक व व्यापारी | परिवार/उपभोक्ता |
| खाद्य पदार्थों का भार | अपेक्षाकृत कम | अपेक्षाकृत अधिक — इसलिए खाद्य महँगाई का CPI पर बड़ा असर |
| नीति में भूमिका | पहले हेडलाइन माप था | अब RBI का लक्ष्य (CPI-संयुक्त) |
RBI ने CPI को क्यों चुना?
रिज़र्व बैंक की उर्जित पटेल समिति (2014) ने सिफ़ारिश की कि मौद्रिक नीति का नाममात्र लंगर (nominal anchor) CPI-संयुक्त हो, क्योंकि यह उपभोक्ता की वास्तविक महँगाई और सेवाओं को दर्शाता है। इसके बाद RBI अधिनियम, 1934 में 2016 में संशोधन करके लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting) को वैधानिक आधार दिया गया और छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) बनाई गई। लक्ष्य केंद्र सरकार RBI के परामर्श से तय करती है; वर्तमान लक्ष्य और सहनशीलता सीमा (जैसे 4% ± 2%) केवल उदाहरण के रूप में देखें और परीक्षा से पहले RBI/वित्त मंत्रालय की नवीनतम अधिसूचना जाँचें।
GDP अपस्फीतिक — हल किया गया उदाहरण
किसी वर्ष नाममात्र GDP = ₹250 लाख करोड़ और वास्तविक GDP (स्थिर कीमतों पर) = ₹200 लाख करोड़। GDP अपस्फीतिक = 250 / 200 × 100 = 125। अर्थ: आधार वर्ष की तुलना में कीमत स्तर 25% ऊँचा है। GDP अपस्फीतिक में आयातित वस्तुएँ शामिल नहीं होतीं, जबकि CPI में उपभोक्ता द्वारा खरीदी आयातित वस्तुएँ भी आती हैं।
8. फिलिप्स वक्र (Phillips Curve)
न्यूज़ीलैंड में जन्मे अर्थशास्त्री ए. डब्ल्यू. फिलिप्स ने ब्रिटेन के आँकड़ों से दिखाया (1958) कि मज़दूरी-वृद्धि की दर और बेरोज़गारी दर में विपरीत संबंध है। बाद में इसे मुद्रास्फीति बनाम बेरोज़गारी के रूप में पढ़ा जाने लगा।
| बिंदु | व्याख्या (गुणात्मक) |
|---|---|
| आकार | नीचे की ओर ढलान वाला वक्र — अधिक मुद्रास्फीति, कम बेरोज़गारी (और उल्टा) |
| नीति-निहितार्थ | अल्पकाल में सरकार कुछ अधिक महँगाई स्वीकार कर बेरोज़गारी घटा सकती है — "trade-off" |
| दीर्घकाल | फ्रीडमैन और फेल्प्स के अनुसार दीर्घकाल में वक्र लगभग ऊर्ध्वाधर — बेरोज़गारी अपनी "प्राकृतिक दर" पर लौट आती है |
| चुनौती | 1970 के दशक की Stagflation में महँगाई और बेरोज़गारी दोनों ऊँची रहीं — सरल फिलिप्स वक्र के विपरीत |
| परीक्षा-सार | फिलिप्स वक्र = मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी का (अल्पकालीन) विपरीत संबंध |
9. मुद्रास्फीति के प्रभाव
ऋणी बनाम ऋणदाता
मान लीजिए किसी ने 1 वर्ष के लिए 9% ब्याज पर ऋण लिया और उस वर्ष मुद्रास्फीति 6% रही। वास्तविक ब्याज दर ≈ 9 − 6 = 3% (सटीक फिशर सूत्र से (1.09 / 1.06 − 1) × 100 ≈ 2.83%)। ऋणदाता को जो रुपये लौटेंगे उनकी क्रय शक्ति कम होगी, इसलिए अप्रत्याशित मुद्रास्फीति में ऋणी को लाभ और ऋणदाता को हानि होती है। यदि मुद्रास्फीति नाममात्र ब्याज दर से अधिक हो जाए, तो वास्तविक ब्याज दर ऋणात्मक हो जाती है।
| वर्ग | प्रभाव | कारण |
|---|---|---|
| ऋणी (Debtor) | लाभ | कम क्रय शक्ति वाले रुपयों में ऋण चुकाता है |
| ऋणदाता (Creditor) | हानि | लौटे धन की वास्तविक कीमत घट जाती है |
| निश्चित आय वर्ग (पेंशनभोगी, स्थिर वेतन, किराया-आय) | हानि | आय वही, कीमतें बढ़ीं — वास्तविक आय घटी |
| उत्पादक व व्यापारी | प्रायः लाभ | बिक्री मूल्य लागत से पहले बढ़ता है; पुराने स्टॉक पर लाभ |
| किसान (शुद्ध विक्रेता) | प्रायः लाभ | उपज की कीमत बढ़ती है (यदि लागत कम बढ़े) |
| मज़दूर | प्रायः हानि | मज़दूरी कीमतों से पीछे रहती है |
| बचतकर्ता | हानि | बचत की वास्तविक कीमत घटती; बचत की प्रवृत्ति कम होती |
| सरकार (बड़ा ऋणी) | सापेक्ष लाभ | सार्वजनिक ऋण का वास्तविक बोझ घटता; नाममात्र कर-संग्रह बढ़ता |
| शेयर/वास्तविक परिसंपत्ति धारक | प्रायः लाभ | भूमि, सोना जैसी परिसंपत्तियों के दाम बढ़ते हैं |
अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
| क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|
| आय-वितरण | गरीब और निश्चित आय वाले अधिक प्रभावित — असमानता बढ़ती है; इसे "सबसे क्रूर कर" भी कहा जाता है |
| निर्यात | घरेलू वस्तुएँ महँगी होने से निर्यात प्रतिस्पर्धा घटती, आयात बढ़ता — व्यापार घाटा |
| निवेश | हल्की महँगाई निवेश को प्रोत्साहित करती है; ऊँची व अनिश्चित महँगाई निवेश घटाती है |
| सट्टा व जमाखोरी | ऊँची महँगाई में बढ़ती है |
| बचत व पूँजी निर्माण | वास्तविक ब्याज दर गिरने से बचत हतोत्साहित |
10. मुद्रास्फीति नियंत्रण के उपाय
| श्रेणी | उपाय | महँगाई घटाने के लिए दिशा | तंत्र |
|---|---|---|---|
| मौद्रिक (RBI) | रेपो दर | बढ़ाना | बैंकों के लिए ऋण महँगा → ऋण व माँग घटती |
| मौद्रिक | रिवर्स रेपो / SDF दर | बढ़ाना | बैंकों को RBI के पास पैसा रखना आकर्षक → बाज़ार में तरलता घटती |
| मौद्रिक | CRR (नकद आरक्षित अनुपात) | बढ़ाना | बैंकों की ऋण देने योग्य राशि घटती |
| मौद्रिक | SLR (वैधानिक तरलता अनुपात) | बढ़ाना | बैंकों को अधिक सरकारी प्रतिभूतियाँ रखनी पड़तीं |
| मौद्रिक | खुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO) | सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना | बाज़ार से मुद्रा RBI के पास आती है |
| मौद्रिक (गुणात्मक) | मार्जिन आवश्यकता, ऋण की राशनिंग, नैतिक दबाव | कड़ा करना | सट्टे वाले क्षेत्रों में ऋण पर रोक |
| राजकोषीय (सरकार) | सरकारी व्यय | घटाना | कुल माँग सीधे घटती |
| राजकोषीय | प्रत्यक्ष कर | बढ़ाना | प्रयोज्य आय व उपभोग घटता |
| राजकोषीय | बजट | अधिशेष/घाटा कम करना | घाटे के वित्त से नई मुद्रा का सृजन रुकता |
| राजकोषीय | सार्वजनिक उधार | जनता से उधार लेना | जनता की क्रय शक्ति सरकार के पास |
| पूर्ति-पक्ष / प्रशासनिक | बफर स्टॉक जारी करना, आयात, निर्यात पर रोक, जमाखोरी पर कार्रवाई, PDS | पूर्ति बढ़ाना | लागतजनित व खाद्य महँगाई पर अधिक प्रभावी |
स्मरण रखें: मुद्रास्फीति घटाने के लिए अपनाई जाने वाली मौद्रिक नीति को कठोर/संकुचनशील (tight / contractionary / hawkish) और मंदी से निकलने के लिए अपनाई जाने वाली नीति को सस्ती/विस्तारवादी (easy / expansionary / dovish) कहते हैं। मौद्रिक उपकरणों का विस्तार RBI की मौद्रिक नीति वाले नोट में है, और राजकोषीय उपायों का आधार बजट, राजकोषीय नीति और GST वाले नोट में।
11. मुद्रा का परिमाण सिद्धांत (संक्षेप में)
इरविंग फिशर के समीकरण MV = PT में M = मुद्रा की मात्रा, V = मुद्रा का चलन-वेग, P = कीमत स्तर, T = लेन-देन की मात्रा। यदि V और T स्थिर मान लें तो M बढ़ने पर P उसी अनुपात में बढ़ता है — यही मुद्रावादी (monetarist) विचार का आधार है। मिल्टन फ्रीडमैन का प्रसिद्ध कथन है कि मुद्रास्फीति "हमेशा और हर जगह एक मौद्रिक घटना" है।
उदाहरण: यदि V और T स्थिर हों और M दुगुना हो जाए, तो P भी दुगुना होगा।
12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: Deflation बनाम Disinflation
"मुद्रास्फीति दर 7% से घटकर 4% हो गई — यह अपस्फीति है" — गलत। दर घटी है पर अभी भी धनात्मक है; कीमतें बढ़ ही रही हैं। यह अवस्फीति (Disinflation) है। अपस्फीति तभी जब दर शून्य से नीचे जाए।
Trap 2: WPI और CPI के जारीकर्ता
WPI को RBI या NSO नहीं, बल्कि DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है। CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त) NSO जारी करता है, पर CPI-IW, CPI-AL, CPI-RL श्रम ब्यूरो जारी करता है। "सभी CPI श्रम ब्यूरो जारी करता है" — गलत।
Trap 3: RBI किस सूचकांक को लक्ष्य करता है?
RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त (हेडलाइन) है — WPI नहीं, CPI-IW नहीं, और core inflation भी नहीं। Core inflation पर RBI नज़र रखता है, पर वैधानिक लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त है।
Trap 4: क्रय शक्ति में गिरावट का प्रतिशत
कीमतें 25% बढ़ें तो मुद्रा की क्रय शक्ति 25% नहीं, 20% घटती है (1/1.25 = 0.8)। कीमतें 100% बढ़ें (दुगुनी) तो क्रय शक्ति 50% घटती है।
Trap 5: WPI में सेवाएँ
WPI में सेवाएँ शामिल नहीं हैं; CPI में हैं। यही एक बड़ा कारण है कि नीति-लक्ष्य के लिए CPI को चुना गया।
Trap 6: रेपो दर घटाना ≠ महँगाई नियंत्रण
महँगाई रोकने के लिए रेपो दर, CRR, SLR बढ़ाए जाते हैं और OMO में प्रतिभूतियाँ बेची जाती हैं। प्रतिभूतियाँ खरीदने से बाज़ार में मुद्रा आती है — यह विस्तारवादी कदम है।
Trap 7: Stagflation में फिलिप्स वक्र
Stagflation में महँगाई और बेरोज़गारी दोनों ऊँची होती हैं — यह सरल फिलिप्स वक्र के विपरीत है, उसका उदाहरण नहीं।
Trap 8: Core inflation में क्या नहीं
Core inflation से खाद्य और ईंधन हटाए जाते हैं, क्योंकि ये सबसे अस्थिर होते हैं। "Core में केवल खाद्य और ईंधन" — उल्टा और गलत।
Trap 9: आधार वर्ष याद करने का जाल
WPI/CPI के आधार वर्ष संशोधन के अधीन हैं। पुरानी पुस्तकों का आधार वर्ष आँख मूँदकर न लिखें — परीक्षा के समय का वर्तमान आधार वर्ष आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | मुद्रास्फीति किसमें वृद्धि है | सामान्य कीमत स्तर |
| 2 | मुद्रास्फीति में मुद्रा का मूल्य | घटता है |
| 3 | "Too much money chasing too few goods" | माँगजनित मुद्रास्फीति |
| 4 | कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महँगाई | लागतजनित (पूर्ति आघात) |
| 5 | मज़दूरी बढ़ने से महँगाई | Wage-push (लागतजनित) |
| 6 | AD दाईं ओर खिसके | माँगजनित |
| 7 | AS बाईं ओर खिसके | लागतजनित |
| 8 | सबसे धीमी मुद्रास्फीति | रेंगती (Creeping) |
| 9 | नियंत्रण से बाहर मुद्रास्फीति | अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) |
| 10 | गति का सही क्रम | Creeping → Walking → Galloping → Hyperinflation |
| 11 | ऊँची महँगाई + ठहराव + बेरोज़गारी | Stagflation |
| 12 | कीमत स्तर का गिरना | Deflation (अपस्फीति) |
| 13 | महँगाई दर का घटना (धनात्मक रहते) | Disinflation (अवस्फीति) |
| 14 | मंदी के बाद कीमतें जानबूझकर उठाना | Reflation |
| 15 | कुछ वस्तुओं में ही तेज़ महँगाई | Skewflation |
| 16 | मात्रा घटाकर वही दाम | Shrinkflation |
| 17 | Core inflation से हटाए जाते | खाद्य और ईंधन |
| 18 | Headline inflation | पूरी टोकरी की महँगाई |
| 19 | WPI जारीकर्ता | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT |
| 20 | DPIIT किस मंत्रालय में | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय |
| 21 | CPI-संयुक्त जारीकर्ता | NSO (MoSPI) |
| 22 | CPI-IW जारीकर्ता | श्रम ब्यूरो |
| 23 | CPI-AL व CPI-RL जारीकर्ता | श्रम ब्यूरो |
| 24 | श्रम ब्यूरो किस मंत्रालय में | श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय |
| 25 | सरकारी कर्मचारियों का DA किससे जुड़ा | CPI-IW |
| 26 | RBI का लक्ष्य सूचकांक | CPI-संयुक्त |
| 27 | CPI को नाममात्र लंगर बनाने की सिफ़ारिश | उर्जित पटेल समिति (2014) |
| 28 | मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का वैधानिक आधार | RBI अधिनियम, 1934 (2016 का संशोधन) |
| 29 | MPC के सदस्य | 6 |
| 30 | WPI में सेवाएँ | शामिल नहीं |
| 31 | WPI के तीन प्रमुख समूह | प्राथमिक वस्तुएँ; ईंधन व बिजली; विनिर्मित उत्पाद |
| 32 | सबसे व्यापक कीमत माप | GDP अपस्फीतिक |
| 33 | GDP अपस्फीतिक सूत्र | नाममात्र GDP / वास्तविक GDP × 100 |
| 34 | मुद्रास्फीति दर सूत्र | (P1 − P0) / P0 × 100 |
| 35 | वास्तविक ब्याज दर (लगभग) | नाममात्र दर − मुद्रास्फीति दर |
| 36 | फिलिप्स वक्र | मुद्रास्फीति व बेरोज़गारी में विपरीत संबंध |
| 37 | फिलिप्स वक्र का दीर्घकालीन रूप (फ्रीडमैन) | लगभग ऊर्ध्वाधर |
| 38 | मुद्रास्फीति में लाभ | ऋणी |
| 39 | मुद्रास्फीति में हानि | ऋणदाता, निश्चित आय वर्ग, बचतकर्ता |
| 40 | महँगाई घटाने के लिए रेपो दर | बढ़ाई जाती है |
| 41 | महँगाई घटाने के लिए CRR/SLR | बढ़ाए जाते हैं |
| 42 | महँगाई घटाने के लिए OMO | सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना |
| 43 | राजकोषीय नियंत्रण | व्यय घटाना, कर बढ़ाना, घाटा कम करना |
| 44 | फिशर का समीकरण | MV = PT |
| 45 | पूर्ण रोज़गार पर अतिरिक्त माँग | स्फीतिक अंतराल |
| 46 | पूर्ण रोज़गार पर न्यून माँग | अवस्फीतिक अंतराल |
| 47 | महँगाई को "गरीबों पर कर" क्यों | निश्चित व कम आय वालों की वास्तविक आय सबसे अधिक घटती |
| 48 | कीमतें दुगुनी होने पर क्रय शक्ति | आधी (50% घटी) |
| 49 | मुद्रास्फीति में निर्यात | प्रतिस्पर्धा घटती, निर्यात हतोत्साहित |
| 50 | Stagflation का क्लासिक उदाहरण | 1970 के दशक का तेल संकट |
14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
इस अध्याय के प्रश्न प्रायः पाँच ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे के लिए एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:
- परिभाषा: "जब मुद्रास्फीति की दर 6% से घटकर 3% हो जाए, तो इसे क्या कहते हैं?" (Disinflation)
- जारीकर्ता मिलान: "सूची-I: WPI, CPI-संयुक्त, CPI-IW — सूची-II: NSO, श्रम ब्यूरो, आर्थिक सलाहकार कार्यालय।" (WPI–आर्थिक सलाहकार कार्यालय, CPI-संयुक्त–NSO, CPI-IW–श्रम ब्यूरो)
- नीति-चयन: "निम्न में से कौन-सा कदम मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है? (a) रेपो दर बढ़ाना (b) CRR घटाना (c) सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना (d) प्रत्यक्ष कर बढ़ाना" (b — CRR घटाने से तरलता बढ़ती है)
- कथन-आधारित: "1. मुद्रास्फीति में ऋणदाता को लाभ होता है। 2. Core inflation में खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते। कौन-सा सही है?" (केवल 2)
- सरल गणना: "सूचकांक 150 से 159 हुआ; मुद्रास्फीति दर?" (9/150 × 100 = 6%)
रणनीति: हर नीति-प्रश्न में "मुद्रा की मात्रा बढ़ेगी या घटेगी?" पूछें — बढ़े तो महँगाई बढ़ाने वाला कदम, घटे तो नियंत्रक कदम। गणना में हमेशा पिछली अवधि के सूचकांक से भाग दें।
15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
- "माँग खींचे, लागत धकेले" — Demand-pull (खींचना), Cost-push (धकेलना)।
- "रेंग → चल → सरपट → अति" — गति का क्रम: Creeping, Walking, Galloping, Hyper।
- "DE = नीचे, DIS = धीमे" — Deflation में कीमतें नीचे जाती हैं; Disinflation में महँगाई धीमी होती है।
- "Stag = ठहरा हुआ" — Stagnation + Inflation = Stagflation।
- "थोक DPIIT, खुदरा NSO, मज़दूर श्रम ब्यूरो" — WPI, CPI (R/U/C), CPI-IW/AL/RL।
- "Core में खाना-तेल नहीं" — Core = खाद्य व ईंधन रहित।
- "उधार लेने वाला मुस्कुराए, उधार देने वाला पछताए" — मुद्रास्फीति में ऋणी को लाभ।
- "महँगाई रोको = सब बढ़ाओ, सिर्फ़ बॉन्ड बेचो" — रेपो, CRR, SLR बढ़ाओ; OMO में बेचो।
- "फिलिप्स = फिसलता वक्र" — नीचे की ओर ढलान: महँगाई ऊपर, बेरोज़गारी नीचे।
16. कथन अभ्यास
मुद्रास्फीति में मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। — सही।
मुद्रास्फीति दर का 8% से घटकर 5% होना अपस्फीति कहलाता है। — गलत (यह अवस्फीति/Disinflation है)।
Stagflation में ऊँची मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक ठहराव और बेरोज़गारी होती है। — सही।
WPI को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) जारी करता है। — गलत (DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है)।
CPI-IW को श्रम ब्यूरो जारी करता है। — सही।
RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य WPI पर आधारित है। — गलत (CPI-संयुक्त पर आधारित है)।
थोक मूल्य सूचकांक में सेवाएँ शामिल होती हैं। — गलत (WPI में सेवाएँ शामिल नहीं होतीं)।
अप्रत्याशित मुद्रास्फीति से ऋणी को लाभ और ऋणदाता को हानि होती है। — सही।
Core inflation में खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता। — सही।
मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए RBI खुले बाज़ार में सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है। — गलत (प्रतिभूतियाँ बेचता है, ताकि मुद्रा बाज़ार से वापस आए)।
फिलिप्स वक्र मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी के बीच विपरीत संबंध दिखाता है। — सही।
कीमतें 25% बढ़ने पर मुद्रा की क्रय शक्ति 25% घटती है। — गलत (क्रय शक्ति 20% घटती है, क्योंकि 1/1.25 = 0.8)।
17. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
- मुद्रास्फीति = सामान्य कीमत स्तर में सतत वृद्धि; मुद्रा का मूल्य घटता है।
- माँगजनित = AD > AS; लागतजनित = मज़दूरी, तेल, कच्चा माल महँगा।
- गति: Creeping → Walking → Galloping → Hyperinflation (प्रतिशत सीमाएँ पुस्तकों में भिन्न)।
- Stagflation = महँगाई + ठहराव + बेरोज़गारी।
- Deflation = कीमतें गिरें; Disinflation = महँगाई दर घटे पर धनात्मक रहे।
- Reflation = मंदी के बाद नीति से कीमतें उठाना; Skewflation = कुछ वस्तुओं में महँगाई।
- Core = खाद्य व ईंधन हटाकर; Headline = पूरी टोकरी।
- WPI — आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT; सेवाएँ नहीं।
- CPI (R/U/C) — NSO; CPI-IW, CPI-AL/RL — श्रम ब्यूरो।
- RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त; 2016 के संशोधन से लचीला लक्ष्यीकरण, 6 सदस्यीय MPC।
- आधार वर्ष और लक्ष्य-संख्या संशोधन के अधीन — आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
- GDP अपस्फीतिक = नाममात्र / वास्तविक × 100; मुद्रास्फीति दर = (P1 − P0)/P0 × 100।
- ऋणी को लाभ; ऋणदाता, निश्चित आय वर्ग, बचतकर्ता को हानि।
- नियंत्रण: रेपो, CRR, SLR बढ़ाओ, OMO में बेचो; व्यय घटाओ, कर बढ़ाओ।
18. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 6 (विशेष अवधारणाएँ), खंड 7 (मापन) और खंड 12 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। परीक्षा-स्तर के पूर्ण अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ या IBPS PO / SBI Clerk प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
मुद्रास्फीति का अध्याय परिभाषाओं, सूचकांकों और नीति-दिशा — इन तीन बातों पर टिका है। पहले Deflation, Disinflation, Reflation और Stagflation के अंतर पक्के करें, फिर याद रखें कि WPI, CPI और CPI-IW को अलग-अलग संस्थाएँ जारी करती हैं और RBI का लक्ष्य CPI-संयुक्त है। नीति-प्रश्नों में केवल यह देखें कि कदम से बाज़ार में मुद्रा बढ़ेगी या घटेगी। आधार वर्ष, वस्तु-भार और लक्ष्य की संख्याएँ बदल सकती हैं, इसलिए उन्हें परीक्षा से ठीक पहले आधिकारिक स्रोत से मिला लें।
माँग खींचे, लागत धकेले | DE = कीमतें नीचे, DIS = दर धीमी | WPI–DPIIT, CPI–NSO, CPI-IW–श्रम ब्यूरो | RBI लक्ष्य = CPI-संयुक्त | ऋणी लाभ, ऋणदाता हानि | रोकने हेतु रेपो-CRR-SLR ↑, OMO बिक्री
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“मुद्रास्फीति के प्रकार और मापन — माँगजनित-लागतजनित, Stagflation, WPI-CPI, फिलिप्स वक्र — RAS, UPSC” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- मुद्रास्फीति: प्रकार, मापन और नियंत्रण — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र और 1991 के सुधार — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- राष्ट्रीय आय: GDP, GNP, NDP, NNP — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- भारत में योजना और नीति आयोग — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
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- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
किसी अवधि में वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य कीमत स्तर में होने वाली सतत वृद्धि को मुद्रास्फीति कहते हैं। इससे मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, यानी एक रुपये से पहले से कम वस्तुएँ मिलती हैं।
माँगजनित मुद्रास्फीति तब होती है जब कुल माँग कुल पूर्ति से अधिक हो, जैसे मुद्रा आपूर्ति या सरकारी खर्च बढ़ने पर। लागतजनित मुद्रास्फीति मज़दूरी, कच्चे तेल या कच्चे माल जैसी उत्पादन लागत बढ़ने से होती है।
Deflation (अपस्फीति) में सामान्य कीमत स्तर वास्तव में गिरता है और मुद्रास्फीति दर ऋणात्मक होती है। Disinflation (अवस्फीति) में मुद्रास्फीति की दर घटती है, पर धनात्मक रहती है, यानी कीमतें धीमी गति से बढ़ती रहती हैं।
Stagflation वह स्थिति है जिसमें ऊँची मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक ठहराव (कम वृद्धि) और ऊँची बेरोज़गारी एक साथ हों। 1970 के दशक का तेल संकट इसका क्लासिक उदाहरण माना जाता है।
WPI को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है। CPI-ग्रामीण, शहरी और संयुक्त को MoSPI का NSO जारी करता है, जबकि CPI-IW, CPI-AL और CPI-RL को श्रम ब्यूरो जारी करता है।
RBI का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य हेडलाइन CPI-संयुक्त (Combined) पर आधारित है। लक्ष्य की वर्तमान संख्या और सहनशीलता सीमा सरकार अधिसूचित करती है, इसलिए नवीनतम अधिसूचना आधिकारिक स्रोत से जाँचें।
Headline inflation पूरी उपभोग टोकरी की महँगाई है। Core inflation में अस्थिर खाद्य और ईंधन को हटा दिया जाता है, ताकि महँगाई की मूल प्रवृत्ति दिखे।
अप्रत्याशित मुद्रास्फीति से ऋणी, उत्पादक और व्यापारियों को प्रायः लाभ होता है। ऋणदाता, पेंशनभोगी जैसे निश्चित आय वर्ग और बचतकर्ताओं को हानि होती है, क्योंकि उनकी आय या धन की वास्तविक कीमत घट जाती है।
ए. डब्ल्यू. फिलिप्स के नाम पर बना यह वक्र अल्पकाल में मुद्रास्फीति (मूलतः मज़दूरी-वृद्धि) और बेरोज़गारी के बीच विपरीत संबंध दिखाता है। फ्रीडमैन के अनुसार दीर्घकाल में यह वक्र लगभग ऊर्ध्वाधर हो जाता है।
मौद्रिक उपायों में RBI रेपो दर, CRR और SLR बढ़ाता है तथा खुले बाज़ार में सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है। राजकोषीय उपायों में सरकार अपना व्यय घटाती है, कर बढ़ाती है और बजट घाटा कम करती है।
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