बजट, राजकोषीय नीति, कर और GST — घाटे के सूत्र, FRBM, GST परिषद, वित्त आयोग — RAS, UPSC, बैंकिंग
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS, UPSC CSE प्रारंभिक, SSC व बैंकिंग पाठ्यक्रम की अर्थव्यवस्था इकाई; NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 9–12) तथा RBI व भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों की मानक परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: संविधान में "बजट" शब्द नहीं है — अनुच्छेद 112 में इसे "वार्षिक वित्तीय विवरण" (Annual Financial Statement) कहा गया है, जिसे राष्ट्रपति हर वित्त वर्ष के लिए संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं। बजट की प्राप्तियाँ और व्यय दो खातों में बँटते हैं — राजस्व (न देनदारी बनाए, न परिसंपत्ति घटाए) और पूँजीगत (देनदारी या परिसंपत्ति बदले)। सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ), जो सरकार की कुल उधारी की ज़रूरत बताता है; प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान; राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ। राजकोषीय अनुशासन के लिए FRBM अधिनियम, 2003 बना, और 2017 से रेल बजट आम बजट में विलय कर दिया गया। GST 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 से आया और 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ; यह गंतव्य-आधारित (destination-based) कर है, जिसकी सिफ़ारिशें अनुच्छेद 279A की GST परिषद करती है — अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री। मानव उपभोग हेतु शराब GST से बाहर है, और पेट्रोलियम उत्पाद अभी GST में शामिल नहीं हैं। केंद्र और राज्यों के बीच करों के बँटवारे की सिफ़ारिश अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग करता है।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| बजट का संवैधानिक नाम | वार्षिक वित्तीय विवरण — अनुच्छेद 112 ("बजट" शब्द संविधान में नहीं) |
| राज्यों का वार्षिक वित्तीय विवरण | अनुच्छेद 202 |
| भारत का वित्त वर्ष | 1 अप्रैल से 31 मार्च |
| बजट प्रस्तुति की तिथि | 2017 से 1 फरवरी (पहले फरवरी का अंतिम कार्य दिवस) |
| रेल बजट का विलय | 2017-18 से आम बजट में |
| कानून के प्राधिकार बिना कोई कर नहीं | अनुच्छेद 265 |
| भारत की संचित निधि / लोक लेखा | अनुच्छेद 266(1) / 266(2) |
| आकस्मिकता निधि | अनुच्छेद 267 |
| धन विधेयक की परिभाषा | अनुच्छेद 110 |
| FRBM अधिनियम | 2003 (नियम 2004 से प्रभावी) |
| GST संविधान संशोधन | 101वाँ संशोधन अधिनियम, 2016 |
| GST लागू | 1 जुलाई 2017 |
| GST परिषद | अनुच्छेद 279A; अध्यक्ष — केंद्रीय वित्त मंत्री |
| GST पर केंद्र-राज्य की समवर्ती शक्ति | अनुच्छेद 246A |
| अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर कर (IGST) | अनुच्छेद 269A |
| वित्त आयोग | अनुच्छेद 280; राष्ट्रपति हर 5 वर्ष (या पहले) गठित करते हैं |
| पहला वित्त आयोग | 1951, अध्यक्ष के. सी. नियोगी |
| घाटे का सूत्र | रूप |
|---|---|
| राजकोषीय घाटा (FD) | कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) = कुल उधारी |
| राजस्व घाटा (RD) | राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ |
| प्राथमिक घाटा (PD) | राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान |
| प्रभावी राजस्व घाटा (ERD) | राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्तियों के सृजन हेतु अनुदान |
| बजट घाटा (पुराना माप) | कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ |
| GDP के प्रतिशत के रूप में | घाटा / GDP × 100 |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
बजट और कर-व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था और राजव्यवस्था — दोनों के बीच का पुल है। UPSC और RAS प्रारंभिक में घाटे की अवधारणाएँ (कौन-सी प्राप्ति राजस्व है, कौन-सी पूँजीगत), संवैधानिक अनुच्छेद और GST परिषद की संरचना कथन-आधारित प्रश्नों में आती हैं; RAS मुख्य परीक्षा में FRBM, वित्त आयोग और राजकोषीय संघवाद पर व्याख्यात्मक प्रश्न बनते हैं; बैंकिंग व SSC में GST की तिथि, संशोधन संख्या और घाटे के सूत्र सीधे पूछे जाते हैं। सरकारी खर्च का मुद्रास्फीति पर असर मुद्रास्फीति के प्रकार और मापन में, और 1991 के बाद के कर-सुधारों की पृष्ठभूमि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र और 1991 के आर्थिक सुधार में देखें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC प्रारंभिक — राजस्व बनाम पूँजीगत प्राप्ति, घाटे के प्रकार, GST परिषद, वित्त आयोग
- RAS प्रारंभिक व मुख्य — बजट प्रक्रिया, FRBM, राज्यों का वित्त, GST से राज्यों पर प्रभाव
- IBPS PO / SBI PO — घाटे के सूत्र, GST का ढाँचा, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर
- SSC CGL / CHSL — अनुच्छेद, तिथियाँ, कर के प्रकार
- राजस्थान CET (स्नातक) — एक-पंक्ति तथ्य
सावधानी: बदलने वाले आँकड़े
बजट की कुल राशि, घाटे का वर्तमान लक्ष्य व वास्तविक प्रतिशत, कर की दरें और GST स्लैब हर वर्ष या नीति से बदलते हैं। इस नोट में इन्हें याद करने योग्य तथ्य के रूप में नहीं दिया गया है; परीक्षा से पहले नवीनतम बजट दस्तावेज़ (indiabudget.gov.in) और GST परिषद की आधिकारिक विज्ञप्तियाँ देखें।
3. बजट: संवैधानिक ढाँचा और प्रक्रिया
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 112 | वार्षिक वित्तीय विवरण — केंद्र का बजट |
| 113 | अनुदान की माँगें — संसद में प्राक्कलनों पर प्रक्रिया |
| 114 | विनियोग विधेयक — संचित निधि से धन निकालने हेतु |
| 115 | अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान |
| 116 | लेखानुदान (Vote on Account), प्रत्ययानुदान, अपवादानुदान |
| 117 | वित्त विधेयकों के संबंध में विशेष उपबंध |
| 110 | धन विधेयक की परिभाषा |
| 265 | विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा |
| 266 | संचित निधि (266(1)) और लोक लेखा (266(2)) |
| 267 | आकस्मिकता निधि |
| 202 | राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण |
बजट के मुख्य चरण
- प्रस्तुति — वित्त मंत्री लोकसभा में बजट भाषण देते हैं; वार्षिक वित्तीय विवरण दोनों सदनों के पटल पर।
- सामान्य चर्चा — दोनों सदनों में।
- विभागीय स्थायी समितियों द्वारा अनुदान माँगों की जाँच।
- अनुदान माँगों पर मतदान — केवल लोकसभा में; संचित निधि पर "भारित" व्यय पर मतदान नहीं होता।
- विनियोग विधेयक का पारित होना।
- वित्त विधेयक का पारित होना — कर प्रस्तावों को कानूनी रूप।
भारित (Charged) व्यय के उदाहरण: राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, CAG का वेतन, भारत सरकार के ऋण पर ब्याज — इन पर संसद चर्चा कर सकती है, पर मतदान नहीं।
रेल बजट का विलय
एकवर्थ समिति (1920-21) की सिफ़ारिश पर 1924 से रेल बजट अलग प्रस्तुत होने लगा था। बिबेक देबरॉय समिति की सिफ़ारिश के बाद 2017-18 से रेल बजट आम बजट में विलय कर दिया गया, और उसी वर्ष से बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत होने लगा, ताकि वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पूरी प्रक्रिया हो सके।
4. प्राप्तियाँ और व्यय: राजस्व बनाम पूँजीगत
मूल कसौटी: जो प्राप्ति सरकार की देनदारी (liability) न बढ़ाए और परिसंपत्ति (asset) न घटाए, वह राजस्व प्राप्ति है; जो देनदारी बढ़ाए या परिसंपत्ति घटाए, वह पूँजीगत प्राप्ति है। इसी तरह जो व्यय परिसंपत्ति न बनाए और देनदारी न घटाए, वह राजस्व व्यय है।
| खाता | प्राप्तियाँ | व्यय |
|---|---|---|
| राजस्व | कर राजस्व — आयकर, निगम कर, GST, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क गैर-कर राजस्व — ब्याज प्राप्ति, सार्वजनिक उपक्रमों/RBI से लाभांश व अधिशेष, शुल्क, जुर्माना, अनुदान | वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी, राज्यों को अनुदान, रक्षा का राजस्व व्यय, प्रशासनिक खर्च |
| पूँजीगत | ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ — बाज़ार उधारी, लघु बचत, विदेशी ऋण गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ — दिए गए ऋणों की वसूली, विनिवेश (सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बेचना) | सड़क, बाँध, भवन, मशीनरी जैसी परिसंपत्तियों का निर्माण; राज्यों/उपक्रमों को दिए गए ऋण; पुराने ऋण का मूलधन चुकाना; शेयरों में निवेश |
वर्गीकरण के प्रिय प्रश्न
| मद | वर्गीकरण | कारण |
|---|---|---|
| विनिवेश से प्राप्ति | पूँजीगत (गैर-ऋण) | सरकार की परिसंपत्ति घटती है |
| राज्यों से ऋण की वसूली | पूँजीगत (गैर-ऋण) | सरकार की वित्तीय परिसंपत्ति घटती है |
| बाज़ार से उधारी | पूँजीगत (ऋण) | देनदारी बढ़ती है |
| RBI से लाभांश/अधिशेष | राजस्व (गैर-कर) | न देनदारी बढ़ी, न परिसंपत्ति घटी |
| ब्याज भुगतान | राजस्व व्यय | कोई परिसंपत्ति नहीं बनती |
| ऋण के मूलधन की वापसी | पूँजीगत व्यय | देनदारी घटती है |
| सब्सिडी | राजस्व व्यय | परिसंपत्ति नहीं बनती |
| राज्यों को दिया गया ऋण | पूँजीगत व्यय | वसूली योग्य वित्तीय परिसंपत्ति बनती है |
5. घाटे की अवधारणाएँ — सूत्र और हल किया गया उदाहरण
| घाटा | सूत्र | क्या बताता है |
|---|---|---|
| राजस्व घाटा | राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ | सरकार रोज़मर्रा का खर्च भी अपनी आय से नहीं चला पा रही — उधार उपभोग में जा रहा है |
| प्रभावी राजस्व घाटा | राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्ति सृजन हेतु अनुदान | राजस्व घाटे का वह भाग जो वास्तव में उपभोग पर है (यह अवधारणा 2011-12 के बजट में आई) |
| राजकोषीय घाटा | कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) | सरकार की कुल उधारी की आवश्यकता — सबसे व्यापक व महत्वपूर्ण माप |
| प्राथमिक घाटा | राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान | पिछले ऋणों के ब्याज को छोड़कर वर्तमान नीतियों से उत्पन्न उधारी |
| मौद्रिक घाटा (पुरानी अवधारणा) | सरकार को RBI द्वारा दिए गए शुद्ध ऋण में वृद्धि | घाटे का मुद्रीकरण — मुद्रास्फीति का खतरा |
हल किया गया उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, ₹ हज़ार करोड़ में)
| मद | राशि |
|---|---|
| राजस्व प्राप्तियाँ (RR) | 300 |
| गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ (NDCR) | 20 |
| राजस्व व्यय (RE) | 360 |
| पूँजीगत व्यय (CE) | 100 |
| ब्याज भुगतान (राजस्व व्यय में शामिल) | 90 |
| पूँजीगत परिसंपत्ति सृजन हेतु अनुदान | 25 |
- कुल व्यय = 360 + 100 = 460
- राजकोषीय घाटा = 460 − (300 + 20) = 140 — यही राशि सरकार को उधार लेनी होगी
- राजस्व घाटा = 360 − 300 = 60
- प्राथमिक घाटा = 140 − 90 = 50
- प्रभावी राजस्व घाटा = 60 − 25 = 35
GDP के प्रतिशत के रूप में: यदि राजकोषीय घाटा ₹6 लाख करोड़ और GDP ₹200 लाख करोड़ हो, तो राजकोषीय घाटा = 6/200 × 100 = 3% GDP।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष: यदि प्राथमिक घाटा शून्य हो, तो राजकोषीय घाटा = ब्याज भुगतान — यानी सरकार केवल पुराने ऋणों का ब्याज चुकाने के लिए उधार ले रही है।
6. राजकोषीय नीति और FRBM अधिनियम, 2003
राजकोषीय नीति सरकार की कर, व्यय और उधारी से जुड़ी नीति है (मौद्रिक नीति RBI की है)। मंदी में विस्तारवादी राजकोषीय नीति (व्यय बढ़ाना, कर घटाना) और महँगाई में संकुचनशील नीति (व्यय घटाना, कर बढ़ाना) अपनाई जाती है।
| FRBM बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (Fiscal Responsibility and Budget Management Act) |
| पारित | 2003; नियम जुलाई 2004 से प्रभावी |
| उद्देश्य | राजकोषीय घाटा व राजस्व घाटा कम करना, ऋण को टिकाऊ स्तर पर रखना, बजट में पारदर्शिता |
| संसद के समक्ष रखे जाने वाले विवरण | मध्यम अवधि राजकोषीय नीति विवरण, राजकोषीय नीति रणनीति विवरण, समष्टि आर्थिक ढाँचा विवरण |
| पलायन खंड (Escape clause) | राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध, राष्ट्रीय आपदा, कृषि का गंभीर संकट जैसी स्थिति में लक्ष्यों से विचलन की अनुमति (बाद के संशोधनों में स्पष्ट) |
| समीक्षा समिति | एन. के. सिंह समिति (2016) — ऋण-GDP अनुपात को मुख्य लक्ष्य (anchor) बनाने की सिफ़ारिश |
| राज्य | राज्यों ने अपने-अपने राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम बनाए |
नोट: FRBM के अंतर्गत घाटे और ऋण के संख्यात्मक लक्ष्य (जैसे "राजकोषीय घाटा GDP का 3%") संशोधनों और बजट घोषणाओं से बदलते रहे हैं। इन्हें उदाहरण मानें और वर्तमान लक्ष्य नवीनतम बजट के राजकोषीय नीति विवरण से जाँचें।
7. बजट के प्रकार
| प्रकार | मूल विचार | टिप्पणी |
|---|---|---|
| शून्य-आधारित बजट (Zero-based) | हर वर्ष हर मद को शून्य से शुरू कर पूरी तरह उचित ठहराना; पिछले वर्ष के आवंटन को आधार नहीं माना जाता | अमेरिका में पीटर पायर (Peter Pyhrr) से जुड़ा विचार |
| परिणाम बजट (Outcome) | केवल खर्च (outlay) नहीं, बल्कि उससे मिले परिणाम (outcome) को मापना — "outlays से outcomes तक" | भारत में 2005-06 से |
| निष्पादन बजट (Performance) | कार्य और गतिविधियों के आधार पर लक्ष्य व उपलब्धि | परिणाम बजट का पूर्ववर्ती विचार |
| जेंडर बजट (Gender) | बजट का महिलाओं पर प्रभाव अलग से दिखाना; महिला-केंद्रित योजनाओं का आवंटन | भारत में केंद्रीय बजट में 2005-06 से जेंडर बजट विवरण |
| हरित बजट (Green) | पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर व्यय का आकलन | कुछ राज्यों में प्रयोग |
| संतुलित / अधिशेष / घाटे का बजट | प्राप्ति = व्यय / प्राप्ति > व्यय / प्राप्ति < व्यय | विकासशील देशों में घाटे का बजट सामान्य |
| अंतरिम बजट / लेखानुदान | चुनावी वर्ष में कुछ महीनों के व्यय के लिए अनुमति (अनुच्छेद 116) | पूर्ण बजट नई सरकार प्रस्तुत करती है |
8. कर: प्रत्यक्ष बनाम अप्रत्यक्ष, प्रगतिशील बनाम प्रतिगामी
| आधार | प्रत्यक्ष कर | अप्रत्यक्ष कर |
|---|---|---|
| कराघात (Impact) व करापात (Incidence) | एक ही व्यक्ति पर — भार दूसरे पर नहीं डाला जा सकता | अलग-अलग — विक्रेता चुकाता है, भार उपभोक्ता पर |
| उदाहरण | आयकर, निगम कर, संपत्ति पर कर | GST, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क (जहाँ लागू) |
| स्वभाव | प्रायः प्रगतिशील | प्रभाव में प्रायः प्रतिगामी (गरीब अपनी आय का बड़ा भाग उपभोग पर खर्च करते हैं) |
| केंद्र में प्रशासन | CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) | CBIC (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड) |
| मुद्रास्फीति पर प्रभाव | माँग घटाकर महँगाई कम कर सकता है | कीमतें सीधे बढ़ा सकता है |
| कर का प्रकार | परिभाषा | उदाहरण (काल्पनिक) |
|---|---|---|
| प्रगतिशील (Progressive) | आय बढ़ने पर कर की दर बढ़ती है | ₹1 लाख आय पर 5%, ₹10 लाख पर 20% |
| आनुपातिक (Proportional) | हर आय स्तर पर समान दर | सभी पर 10% |
| प्रतिगामी (Regressive) | आय बढ़ने पर कर की दर (आय के अनुपात में) घटती है | सब पर ₹1,000 का एकमुश्त कर: ₹10,000 आय पर 10%, ₹1,00,000 आय पर केवल 1% |
| अधोगामी (Degressive) | एक सीमा तक प्रगतिशील, फिर दर स्थिर | ऊँची आय पर दर बढ़ना रुक जाए |
कर के अन्य शब्द: उपकर (Cess) विशेष उद्देश्य हेतु लगता है और सामान्यतः राज्यों के साथ बाँटे जाने वाले विभाज्य पूल में नहीं जाता; अधिभार (Surcharge) कर पर कर है; लाफ़र वक्र कर दर और कर राजस्व के संबंध को दिखाता है — बहुत ऊँची दर पर राजस्व घट सकता है।
9. वस्तु एवं सेवा कर (GST)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक आधार | 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 |
| लागू होने की तिथि | 1 जुलाई 2017 |
| समवर्ती कराधान शक्ति | अनुच्छेद 246A — संसद व राज्य विधानमंडल दोनों GST पर कानून बना सकते हैं |
| अंतर-राज्यीय आपूर्ति | अनुच्छेद 269A — IGST केंद्र लगाता है, फिर केंद्र-राज्य में बँटवारा |
| GST परिषद | अनुच्छेद 279A; अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री; सदस्य — केंद्रीय वित्त/राजस्व राज्य मंत्री और सभी राज्यों (व विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों) के वित्त मंत्री या नामित मंत्री |
| परिषद में मतदान | उपस्थित व मतदान करने वालों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई; केंद्र का भार एक-तिहाई, सभी राज्यों का सम्मिलित भार दो-तिहाई |
| कोरम | कुल सदस्यों का आधा |
| स्वभाव | गंतव्य-आधारित (destination-based) उपभोग कर — कर उस राज्य को जहाँ वस्तु/सेवा का उपभोग हो |
| तकनीकी ढाँचा | GSTN (वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क) |
| राज्यों को क्षतिपूर्ति | GST (राज्यों को प्रतिकर) अधिनियम, 2017 — आरंभिक 5 वर्षों के राजस्व नुकसान की भरपाई |
| स्लैब | 2025 में GST दर-स्लैब का सरलीकरण (rationalisation) किया गया; वर्तमान दरें GST परिषद/CBIC की आधिकारिक अधिसूचना से देखें |
| विश्व में पहला | फ्रांस (1954) |
CGST, SGST, IGST और UTGST
| घटक | कब लगता है | कौन वसूलता/रखता है |
|---|---|---|
| CGST | राज्य के भीतर (intra-state) आपूर्ति | केंद्र |
| SGST | राज्य के भीतर आपूर्ति (CGST के साथ बराबर भाग) | संबंधित राज्य |
| UTGST | बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेश के भीतर आपूर्ति | केंद्रशासित प्रदेश |
| IGST | अंतर-राज्यीय आपूर्ति और आयात | केंद्र वसूलता है, गंतव्य राज्य के साथ बँटवारा |
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) — एक काल्पनिक उदाहरण
मान लीजिए गणना के लिए एक काल्पनिक दर 10% (यह वास्तविक स्लैब नहीं है)। निर्माता ₹1,000 की वस्तु बेचता है और ₹100 कर लेता है। व्यापारी उसे ₹1,500 में बेचता है — उसका कर ₹150 बनता है, पर उसे पहले चुकाए ₹100 का क्रेडिट मिलता है, इसलिए वह केवल ₹50 जमा करता है। कुल कर = 100 + 50 = ₹150, जो अंतिम मूल्य ₹1,500 का 10% है। व्यापारी ने केवल अपने मूल्य-वर्धन (₹500) पर कर दिया — इसीलिए GST "कर पर कर" (cascading) समाप्त करता है।
GST में समाहित कर
| केंद्रीय कर (समाहित) | राज्य कर (समाहित) |
|---|---|
| केंद्रीय उत्पाद शुल्क (अधिकांश वस्तुओं पर) | राज्य VAT / बिक्री कर |
| सेवा कर | केंद्रीय बिक्री कर (CST) |
| अतिरिक्त सीमा शुल्क (CVD) | प्रवेश कर, चुंगी (Octroi) |
| विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क (SAD) | विलासिता कर, क्रय कर |
| कुछ उपकर और अधिभार | मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों वाले को छोड़कर), विज्ञापन कर, लॉटरी-सट्टे पर कर |
GST से बाहर या अभी शामिल नहीं
| मद | स्थिति |
|---|---|
| मानव उपभोग हेतु शराब | संविधान द्वारा GST से बाहर — राज्य उत्पाद शुल्क/VAT लगाते हैं |
| पेट्रोलियम उत्पाद (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस, विमान ईंधन) | अभी GST में शामिल नहीं; GST परिषद की सिफ़ारिश की तिथि से ही शामिल होंगे |
| मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) | अलग से जारी |
| स्टांप शुल्क, बिजली शुल्क | GST से बाहर |
10. वित्त आयोग (अनुच्छेद 280)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| गठन | राष्ट्रपति द्वारा हर पाँच वर्ष पर या आवश्यकता होने पर पहले |
| संरचना | एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य |
| योग्यता का कानून | वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1951 |
| स्वरूप | संवैधानिक, अर्ध-न्यायिक; सिफ़ारिशें सलाहकारी |
| पहला वित्त आयोग | 1951, अध्यक्ष के. सी. नियोगी |
| रिपोर्ट | राष्ट्रपति को; राष्ट्रपति इसे व्याख्यात्मक ज्ञापन सहित संसद के दोनों सदनों में रखवाते हैं |
वित्त आयोग के कार्य
- ऊर्ध्वाधर बँटवारा (Vertical devolution): संघ के विभाज्य करों की शुद्ध प्राप्तियों का केंद्र और राज्यों के बीच बँटवारा।
- क्षैतिज बँटवारा (Horizontal): राज्यों के हिस्से का राज्यों के बीच बँटवारा — जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय-अंतर, वन क्षेत्र जैसे मानदंडों पर (मानदंड हर आयोग अलग तय करता है)।
- सहायता अनुदान (अनुच्छेद 275): राज्यों को संचित निधि से अनुदान के सिद्धांत।
- स्थानीय निकाय: राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने हेतु राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय (73वें व 74वें संशोधन के बाद जोड़ा गया)।
- राष्ट्रपति द्वारा सौंपा गया कोई अन्य वित्तीय विषय।
राज्य वित्त आयोग: अनुच्छेद 243-I (पंचायतें) और 243-Y (नगरपालिकाएँ); राज्यपाल हर पाँच वर्ष पर गठित करते हैं। ध्यान दें: करों में राज्यों का वर्तमान हिस्सा (प्रतिशत) हर वित्त आयोग के साथ बदलता है — नवीनतम आयोग की स्वीकृत सिफ़ारिश आधिकारिक स्रोत से देखें।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "बजट" शब्द संविधान में
"अनुच्छेद 112 में बजट की परिभाषा है" — आधा सही। अनुच्छेद 112 में "बजट" शब्द नहीं, "वार्षिक वित्तीय विवरण" शब्द है। राज्यों के लिए यही अनुच्छेद 202 में है।
Trap 2: विनिवेश राजस्व प्राप्ति नहीं
विनिवेश से सरकार की परिसंपत्ति घटती है, इसलिए यह पूँजीगत (गैर-ऋण) प्राप्ति है। इसी तरह ऋण की वसूली भी पूँजीगत प्राप्ति है, जबकि ब्याज की प्राप्ति राजस्व (गैर-कर) प्राप्ति है।
Trap 3: राजकोषीय घाटे में उधारी नहीं जोड़ी जाती
राजकोषीय घाटे के सूत्र में केवल गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ घटाई जाती हैं। उधारी को घटा दें तो घाटा शून्य हो जाएगा — क्योंकि राजकोषीय घाटा स्वयं उधारी ही है।
Trap 4: प्राथमिक घाटा — ब्याज घटाएँ, जोड़ें नहीं
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। यदि ब्याज भुगतान राजकोषीय घाटे से अधिक हो, तो प्राथमिक घाटा ऋणात्मक (प्राथमिक अधिशेष) होगा।
Trap 5: GST परिषद का अध्यक्ष
अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री हैं — प्रधानमंत्री, राजस्व सचिव या RBI गवर्नर नहीं। परिषद का अनुच्छेद 279A है, 280 नहीं (280 वित्त आयोग है)।
Trap 6: पेट्रोलियम बनाम शराब
मानव उपभोग हेतु शराब संविधान द्वारा GST से बाहर है। पेट्रोलियम उत्पाद संवैधानिक रूप से GST के दायरे में रखे गए हैं, पर GST परिषद की सिफ़ारिश तक अभी शामिल नहीं किए गए हैं। "दोनों संविधान से हमेशा के लिए बाहर" — गलत।
Trap 7: GST उत्पत्ति-आधारित नहीं
GST गंतव्य-आधारित उपभोग कर है — राजस्व उपभोग वाले राज्य को जाता है। इसलिए विनिर्माण-प्रधान राज्यों को आरंभिक नुकसान की आशंका थी और क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया।
Trap 8: 101वाँ बनाम 122वाँ
GST विधेयक लोकसभा में 122वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में आया था, पर पारित होने के बाद यह 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 बना। परीक्षा में "अधिनियम" पूछा जाए तो 101वाँ।
Trap 9: प्रतिगामी कर की पहचान
प्रतिगामी कर में कर की राशि नहीं, बल्कि आय के अनुपात में दर घटती है। एकसमान राशि वाला कर (जैसे सब पर ₹1,000) प्रतिगामी है, क्योंकि गरीब पर उसका भार अनुपात में अधिक है।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | बजट का संवैधानिक नाम | वार्षिक वित्तीय विवरण |
| 2 | केंद्र का वार्षिक वित्तीय विवरण | अनुच्छेद 112 |
| 3 | राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण | अनुच्छेद 202 |
| 4 | अनुदान की माँगें | अनुच्छेद 113 |
| 5 | विनियोग विधेयक | अनुच्छेद 114 |
| 6 | लेखानुदान | अनुच्छेद 116 |
| 7 | धन विधेयक की परिभाषा | अनुच्छेद 110 |
| 8 | विधि के बिना कर नहीं | अनुच्छेद 265 |
| 9 | संचित निधि | अनुच्छेद 266(1) |
| 10 | आकस्मिकता निधि | अनुच्छेद 267 |
| 11 | अनुदान माँगों पर मतदान | केवल लोकसभा |
| 12 | रेल बजट का विलय | 2017-18 से |
| 13 | विलय की सिफ़ारिश | बिबेक देबरॉय समिति |
| 14 | रेल बजट अलग करने की सिफ़ारिश | एकवर्थ समिति (अलग रेल बजट 1924 से) |
| 15 | बजट 1 फरवरी को | 2017 से |
| 16 | भारत का वित्त वर्ष | 1 अप्रैल – 31 मार्च |
| 17 | विनिवेश प्राप्ति | पूँजीगत (गैर-ऋण) |
| 18 | ऋण की वसूली | पूँजीगत (गैर-ऋण) |
| 19 | RBI का लाभांश/अधिशेष | राजस्व (गैर-कर) |
| 20 | ब्याज भुगतान | राजस्व व्यय |
| 21 | ऋण के मूलधन की वापसी | पूँजीगत व्यय |
| 22 | सब्सिडी | राजस्व व्यय |
| 23 | राजकोषीय घाटा | कुल व्यय − (राजस्व प्राप्ति + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति) |
| 24 | राजकोषीय घाटा किसके बराबर | सरकार की कुल उधारी |
| 25 | राजस्व घाटा | राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्ति |
| 26 | प्राथमिक घाटा | राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान |
| 27 | प्रभावी राजस्व घाटा | राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्ति हेतु अनुदान |
| 28 | प्राथमिक घाटा शून्य हो तो | राजकोषीय घाटा = ब्याज भुगतान |
| 29 | FRBM अधिनियम | 2003 |
| 30 | FRBM समीक्षा समिति | एन. के. सिंह समिति (2016) |
| 31 | परिणाम बजट (भारत) | 2005-06 से |
| 32 | शून्य-आधारित बजट | हर मद शून्य से उचित ठहराना |
| 33 | प्रत्यक्ष कर | कराघात और करापात एक ही व्यक्ति पर |
| 34 | प्रत्यक्ष कर के उदाहरण | आयकर, निगम कर |
| 35 | अप्रत्यक्ष कर के उदाहरण | GST, सीमा शुल्क |
| 36 | प्रगतिशील कर | आय बढ़ने पर कर-दर बढ़े |
| 37 | प्रतिगामी कर | आय बढ़ने पर (आय के अनुपात में) कर-दर घटे |
| 38 | कर दर और राजस्व का वक्र | लाफ़र वक्र |
| 39 | GST संशोधन अधिनियम | 101वाँ, 2016 |
| 40 | GST लागू | 1 जुलाई 2017 |
| 41 | GST परिषद का अनुच्छेद | 279A |
| 42 | GST परिषद के अध्यक्ष | केंद्रीय वित्त मंत्री |
| 43 | परिषद में केंद्र का मत-भार | एक-तिहाई |
| 44 | परिषद में निर्णय | भारित मतों का तीन-चौथाई बहुमत |
| 45 | अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर | IGST (अनुच्छेद 269A) |
| 46 | GST का स्वभाव | गंतव्य-आधारित उपभोग कर |
| 47 | GST से संवैधानिक रूप से बाहर | मानव उपभोग हेतु शराब |
| 48 | GST में अभी शामिल नहीं | पेट्रोलियम उत्पाद |
| 49 | वित्त आयोग | अनुच्छेद 280; अध्यक्ष + 4 सदस्य |
| 50 | पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष | के. सी. नियोगी (1951) |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
इस अध्याय के प्रश्न प्रायः पाँच ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे के लिए एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:
- वर्गीकरण: "निम्न में से कौन-सी पूँजीगत प्राप्ति है? (a) ब्याज प्राप्ति (b) लाभांश (c) विनिवेश (d) GST" (c)
- सूत्र-आधारित गणना: "राजकोषीय घाटा ₹500 करोड़, ब्याज भुगतान ₹200 करोड़; प्राथमिक घाटा?" (500 − 200 = ₹300 करोड़)
- अनुच्छेद मिलान: "सूची-I: वार्षिक वित्तीय विवरण, GST परिषद, वित्त आयोग, आकस्मिकता निधि — सूची-II: 279A, 280, 267, 112।" (112, 279A, 280, 267)
- कथन-आधारित: "1. GST परिषद के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं। 2. GST गंतव्य-आधारित कर है। कौन-सा सही है?" (केवल 2)
- अवधारणा: "राजस्व घाटा अधिक होने का क्या अर्थ है?" (सरकार उधार का उपयोग उपभोग/चालू खर्च के लिए कर रही है)
रणनीति: हर प्राप्ति/व्यय पर पूछें — "देनदारी बदली या परिसंपत्ति?" बदली तो पूँजीगत, नहीं तो राजस्व। घाटे के प्रश्नों में पहले कुल व्यय निकालें, फिर केवल गैर-ऋण प्राप्तियाँ घटाएँ।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
- "112 = बजट का घर, 202 = राज्य का" — 112 के दोगुने के आसपास 202।
- "दे-प: देनदारी या परिसंपत्ति बदले तो पूँजीगत" — वर्गीकरण की एक-पंक्ति कसौटी।
- "FD = उधारी, PD = उधारी − ब्याज" — राजकोषीय घाटा सरकार का कुल उधार।
- "R-E-P: Revenue → Effective → Primary" — R से R घटाओ (RE − RR); E में अनुदान घटाओ; P में ब्याज घटाओ।
- "101 से एक देश, एक कर" — 101वाँ संशोधन, 1 जुलाई 2017।
- "279A — A for Adhyaksh वित्त मंत्री" — GST परिषद।
- "280 — बाँटने वाला आयोग" — वित्त आयोग कर बाँटता है।
- "1/3 केंद्र, 2/3 राज्य, 3/4 से पास" — GST परिषद का मतदान।
- "शराब बाहर, पेट्रोल प्रतीक्षा में" — शराब संविधान से बाहर, पेट्रोलियम अभी शामिल नहीं।
15. कथन अभ्यास
भारतीय संविधान में "बजट" शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। — सही।
वार्षिक वित्तीय विवरण का उल्लेख अनुच्छेद 280 में है। — गलत (अनुच्छेद 112 में; 280 वित्त आयोग है)।
विनिवेश से प्राप्त राशि राजस्व प्राप्ति है। — गलत (यह गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति है)।
प्राथमिक घाटा, राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर निकाला जाता है। — सही।
राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधारी की आवश्यकता को दर्शाता है। — सही।
2017-18 से रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया। — सही।
GST परिषद के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। — गलत (अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं)।
GST एक उत्पत्ति-आधारित (origin-based) कर है। — गलत (यह गंतव्य-आधारित कर है)।
GST 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से लाया गया। — सही।
मानव उपभोग हेतु शराब GST के दायरे से बाहर है। — सही।
प्रगतिशील कर में आय बढ़ने पर कर की दर घटती है। — गलत (प्रगतिशील कर में दर बढ़ती है; दर घटना प्रतिगामी कर है)।
वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति करते हैं और इसमें एक अध्यक्ष व चार अन्य सदस्य होते हैं। — सही।
16. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
- बजट = वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुच्छेद 112 (राज्य — 202); "बजट" शब्द संविधान में नहीं।
- 113 अनुदान माँगें, 114 विनियोग, 116 लेखानुदान, 110 धन विधेयक, 265 कर विधि से ही।
- 2017 से बजट 1 फरवरी को और रेल बजट आम बजट में विलय।
- देनदारी या परिसंपत्ति बदले तो पूँजीगत; न बदले तो राजस्व।
- विनिवेश व ऋण-वसूली = गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति; RBI लाभांश = गैर-कर राजस्व।
- FD = कुल व्यय − (RR + NDCR) = कुल उधारी।
- RD = RE − RR; PD = FD − ब्याज; ERD = RD − पूँजीगत परिसंपत्ति हेतु अनुदान।
- FRBM अधिनियम 2003; समीक्षा — एन. के. सिंह समिति 2016; संख्यात्मक लक्ष्य बजट से जाँचें।
- प्रत्यक्ष कर में कराघात = करापात; अप्रत्यक्ष में भार आगे खिसकता है।
- प्रगतिशील — दर बढ़े; प्रतिगामी — दर घटे; आनुपातिक — दर समान।
- GST: 101वाँ संशोधन 2016, लागू 1 जुलाई 2017, गंतव्य-आधारित।
- GST परिषद 279A, अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री; केंद्र 1/3, राज्य 2/3, निर्णय 3/4 से।
- शराब (मानव उपभोग) GST से बाहर; पेट्रोलियम अभी शामिल नहीं; स्लैब 2025 में सरलीकृत।
- वित्त आयोग — अनुच्छेद 280, अध्यक्ष + 4 सदस्य, पहला 1951 (के. सी. नियोगी)।
17. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 4 (वर्गीकरण), खंड 5 (घाटे के सूत्र) और खंड 9 (GST) दोबारा पढ़ें। परीक्षा-स्तर के पूर्ण अभ्यास के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक कंप्लीट टेस्ट सीरीज़ या RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
बजट का अध्याय वर्गीकरण, सूत्र और संवैधानिक अनुच्छेदों का मेल है। पहले राजस्व और पूँजीगत का अंतर एक कसौटी से पक्का करें, फिर घाटे के चार सूत्र हल किए गए उदाहरण से दोहराएँ। GST में संशोधन संख्या, तिथि, अनुच्छेद 279A और परिषद की संरचना स्थिर तथ्य हैं, जबकि दरें और स्लैब बदलते रहते हैं — इन्हें हमेशा आधिकारिक स्रोत से जाँचें। वित्त आयोग और GST परिषद को भारत के राजकोषीय संघवाद के दो स्तंभ मानकर पढ़ें।
बजट = अनु. 112 का वार्षिक वित्तीय विवरण | FD = कुल व्यय − (RR + NDCR) | PD = FD − ब्याज | FRBM 2003 | रेल बजट विलय 2017 | GST: 101वाँ संशोधन, 1 जुलाई 2017, 279A, अध्यक्ष वित्त मंत्री | वित्त आयोग अनु. 280
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“बजट, राजकोषीय नीति, कर और GST — घाटे के सूत्र, FRBM, GST परिषद, वित्त आयोग — RAS, UPSC, बैंकिंग” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
नहीं। संविधान के अनुच्छेद 112 में बजट को 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (Annual Financial Statement) कहा गया है। राज्यों के लिए यही प्रावधान अनुच्छेद 202 में है।
राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)। यह सरकार की कुल उधारी की आवश्यकता बताता है।
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। यह पिछले ऋणों के ब्याज को छोड़कर वर्तमान नीतियों के कारण होने वाली उधारी को दर्शाता है।
जो प्राप्ति सरकार की देनदारी न बढ़ाए और परिसंपत्ति न घटाए, वह राजस्व प्राप्ति है, जैसे कर, ब्याज और लाभांश। उधारी, ऋण की वसूली और विनिवेश पूँजीगत प्राप्तियाँ हैं।
FRBM अधिनियम 2003 में बना और इसके नियम 2004 से प्रभावी हुए। इसका उद्देश्य राजकोषीय और राजस्व घाटे को घटाना, सार्वजनिक ऋण को टिकाऊ रखना और बजट में पारदर्शिता लाना है।
बिबेक देबरॉय समिति की सिफ़ारिश पर 2017-18 से रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया। उसी वर्ष से केंद्रीय बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत होने लगा।
GST 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से लाया गया और 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ। यह गंतव्य-आधारित उपभोग कर है।
अनुच्छेद 279A के अंतर्गत गठित GST परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं। राज्यों के वित्त मंत्री या नामित मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
मानव उपभोग हेतु शराब संविधान द्वारा GST से बाहर है। पेट्रोलियम उत्पाद (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस, विमान ईंधन) अभी GST में शामिल नहीं हैं, जब तक GST परिषद इसकी सिफ़ारिश न करे।
अनुच्छेद 280 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा हर पाँच वर्ष पर गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बँटवारे, राज्यों के बीच हिस्से के वितरण और सहायता अनुदान के सिद्धांतों की सिफ़ारिश करता है। इसमें एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं।
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