मुद्रा, बैंकिंग, RBI और मौद्रिक नीति — M0 से M4, CRR-SLR-रेपो, MPC, NPA, बेसल — RAS, UPSC, बैंकिंग
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS, UPSC CSE प्रारंभिक, SSC व बैंकिंग पाठ्यक्रम की अर्थव्यवस्था इकाई; NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 9–12) तथा RBI व भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों की मानक परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: मुद्रा वह वस्तु है जो विनिमय के माध्यम के रूप में सर्वमान्य हो; इसके प्राथमिक कार्य विनिमय का माध्यम और मूल्य का मापक हैं, तथा गौण कार्य मूल्य का संचय और स्थगित भुगतानों का मान। RBI मुद्रा पूर्ति को M0 से M4 तक मापता है — M1 संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money) और M3 व्यापक मुद्रा (Broad Money) है। भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश पर RBI अधिनियम 1934 के अंतर्गत 1 अप्रैल 1935 को हुई, 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ; पहले गवर्नर सर ऑस्बोर्न स्मिथ और पहले भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख थे, और मुख्यालय मुंबई है। मौद्रिक नीति के मात्रात्मक उपकरण हैं — CRR, SLR, रेपो, रिवर्स रेपो, MSF, बैंक दर और खुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO); गुणात्मक उपकरण हैं — मार्जिन आवश्यकता, ऋण राशनिंग, नैतिक दबाव, प्रत्यक्ष कार्रवाई। नीतिगत रेपो दर तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) में 6 सदस्य होते हैं, और लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे में केंद्र सरकार RBI के परामर्श से हर 5 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करती है — 2016 में अधिसूचित लक्ष्य CPI मुद्रास्फीति 4% ± 2% था। ग्रामीण व विशेष वित्त के लिए RRB (1975), NABARD (1982), EXIM बैंक (1982) और SIDBI (1990) बने, तथा वित्तीय समावेशन के लिए पेमेंट्स बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक। जिस ऋण की किस्त या ब्याज 90 दिन से अधिक बकाया रहे, वह NPA है; बैंकों की पूँजी पर्याप्तता के अंतरराष्ट्रीय मानदंड बेसल मानदंड कहलाते हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| RBI की स्थापना | 1 अप्रैल 1935 |
| किस अधिनियम के अंतर्गत | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 |
| किसकी सिफ़ारिश पर | हिल्टन यंग आयोग (भारतीय मुद्रा एवं वित्त पर रॉयल कमीशन, 1926) |
| राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 |
| प्रथम गवर्नर | सर ऑस्बोर्न स्मिथ |
| प्रथम भारतीय गवर्नर | सी.डी. देशमुख |
| मुख्यालय | मुंबई (प्रारंभ में कोलकाता; 1937 में मुंबई) |
| प्रतीक-चिह्न | बाघ और ताड़ का पेड़ |
| संकीर्ण मुद्रा / व्यापक मुद्रा | M1 / M3 |
| MPC के सदस्य | 6 (अध्यक्ष — RBI गवर्नर) |
| मुद्रास्फीति लक्ष्य (2016 में अधिसूचित) | CPI 4%, ऊपरी सीमा 6%, निचली सीमा 2% |
| लक्ष्य की अवधि | हर 5 वर्ष के लिए केंद्र सरकार तय करती है (RBI के परामर्श से) |
| CRR / SLR का कानूनी आधार | RBI अधिनियम की धारा 42 / बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 |
| NPA | 90 दिन से अधिक बकाया |
| RRB / NABARD / EXIM / SIDBI | 1975 / 1982 / 1982 / 1990 |
ध्यान दें: रेपो दर, CRR, SLR आदि का वर्तमान प्रतिशत हर मौद्रिक नीति समीक्षा में बदल सकता है। इस नोट में जहाँ भी संख्याएँ हैं, वे केवल उदाहरण हैं — परीक्षा से पहले RBI की नवीनतम मौद्रिक नीति घोषणा अवश्य देखें।
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
मुद्रा, बैंकिंग और मौद्रिक नीति बैंकिंग परीक्षाओं (IBPS PO, SBI Clerk) का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक अध्याय है और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में मौद्रिक उपकरणों के प्रभाव (रेपो बढ़ने से क्या होगा, OMO में बॉन्ड ख़रीदने से तरलता पर असर) पर अवधारणात्मक प्रश्न नियमित रूप से आते हैं। RAS प्रारंभिक व मुख्य में "मौद्रिक नीति और बैंकिंग" सिलेबस का भाग है, SSC में RBI के स्थापना-तथ्य और संस्थाओं के वर्ष पूछे जाते हैं, और राजस्थान CET में मुद्रा के कार्य जैसे सरल प्रश्न आते हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- IBPS PO / SBI Clerk (बैंकिंग जागरूकता — सर्वाधिक महत्व)
- UPSC प्रारंभिक (उपकरणों के प्रभाव, MPC, मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण)
- RAS प्रारंभिक व मुख्य (मौद्रिक नीति, बैंकिंग संरचना)
- SSC CGL / CHSL (RBI, संस्थाएँ, मुद्रा पूर्ति)
- राजस्थान CET स्नातक, व्याख्याता (अर्थशास्त्र)
प्रश्न कैसे आते हैं?
- तथ्य: RBI की स्थापना, राष्ट्रीयकरण, गवर्नर, आयोग
- अवधारणा: M1 / M3 में क्या शामिल; सबसे तरल माप कौन
- प्रभाव: "रेपो दर बढ़ाने पर ऋण और तरलता पर असर"
- उपकरणों का वर्गीकरण: मात्रात्मक बनाम गुणात्मक
- MPC: सदस्य संख्या, निर्णायक मत, लक्ष्य-ढाँचा
- संस्थाएँ: RRB, NABARD, SIDBI, EXIM — वर्ष, मुख्यालय, उद्देश्य
- NPA की परिभाषा और श्रेणियाँ; बेसल के तीन स्तंभ
3. मुद्रा: अर्थ, विकास और कार्य
मुद्रा से पहले वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) थी, जिसकी सबसे बड़ी समस्या आवश्यकताओं का दोहरा संयोग (Double Coincidence of Wants) था — जिसके पास गेहूँ है और जिसे कपड़ा चाहिए, उसे ऐसा व्यक्ति ढूँढना होगा जिसके पास कपड़ा हो और जिसे गेहूँ चाहिए। इसके अलावा मूल्य का सामान्य मापक न होना, वस्तुओं का विभाज्य न होना और संचय की कठिनाई भी थी। मुद्रा ने इन सबको हल किया।
3.1 मुद्रा के कार्य
| श्रेणी | कार्य | अर्थ |
|---|---|---|
| प्राथमिक | विनिमय का माध्यम | वस्तुएँ-सेवाएँ मुद्रा के बदले ख़रीदी-बेची जाती हैं; दोहरे संयोग की समस्या समाप्त |
| प्राथमिक | मूल्य का मापक / लेखा इकाई | हर वस्तु की कीमत एक सामान्य इकाई (रुपये) में |
| गौण | मूल्य का संचय | आज की आय को भविष्य के लिए बचाया जा सकता है |
| गौण | स्थगित भुगतानों का मान | ऋण और भविष्य के भुगतान मुद्रा में तय होते हैं |
| गौण | मूल्य का हस्तांतरण | क्रय-शक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना |
| आकस्मिक | साख का आधार, आय का वितरण, तरलता | बैंक जमा व साख मुद्रा पर आधारित |
3.2 मुद्रा के प्रकार
| प्रकार | अर्थ / उदाहरण |
|---|---|
| वस्तु मुद्रा | अनाज, पशु, सीपियाँ — प्राचीन काल |
| धातु मुद्रा | सोने-चाँदी-ताँबे के सिक्के |
| पत्र मुद्रा (कागज़ी) | करेंसी नोट |
| फ़िएट मुद्रा (Fiat Money) | सरकार के आदेश से मुद्रा; आंतरिक मूल्य नहीं, विश्वास पर आधारित |
| विधिग्राह्य मुद्रा (Legal Tender) | जिसे स्वीकार करना कानूनन अनिवार्य — नोट व सिक्के |
| साख / प्रत्ययी मुद्रा (Fiduciary) | चेक, ड्राफ़्ट — स्वीकार करना अनिवार्य नहीं |
| प्लास्टिक व डिजिटल मुद्रा | डेबिट/क्रेडिट कार्ड, UPI, वॉलेट |
| केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) | RBI का डिजिटल रुपया (e₹) — 2022 से पायलट |
ग्रेशम का नियम: "बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है" — यदि दो प्रकार के सिक्के साथ चलें तो लोग अच्छे (अधिक धातु-मूल्य वाले) सिक्के जमा कर लेते हैं और बुरे सिक्के ही चलन में रहते हैं।
4. मुद्रा पूर्ति के माप: M0 से M4
RBI ने 1977 में मुद्रा पूर्ति के चार माप (M1–M4) अपनाए; आरक्षित मुद्रा को M0 कहा जाता है।
| माप | घटक | नाम / विशेषता |
|---|---|---|
| M0 | प्रचलन में मुद्रा + बैंकों की RBI के पास जमा + RBI के पास अन्य जमा | आरक्षित मुद्रा / उच्च शक्ति मुद्रा (Reserve / High-Powered Money) |
| M1 | जनता के पास करेंसी (नोट + सिक्के) + बैंकों में माँग जमा + RBI के पास अन्य जमा | संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money); सबसे अधिक तरल |
| M2 | M1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा | — |
| M3 | M1 + बैंकों की निवल सावधि जमा (Time Deposits) | व्यापक मुद्रा (Broad Money); समग्र मौद्रिक संसाधन |
| M4 | M3 + डाकघर बचत संगठन की कुल जमा (राष्ट्रीय बचत पत्र छोड़कर) | सबसे कम तरल |
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| तरलता का क्रम | M1 > M2 > M3 > M4 |
| माँग जमा (Demand Deposits) | चालू खाता व बचत खाते की वह जमा जो माँगने पर तुरंत देय हो |
| सावधि जमा (Time Deposits) | निश्चित अवधि के बाद देय — FD, RD |
| मुद्रा गुणक (Money Multiplier) | M3 ÷ M0 |
| नए मौद्रिक समुच्चय | 1998 में वाई.वी. रेड्डी कार्य समूह ने NM0–NM3 व तरलता माप L1–L3 सुझाए |
4.1 हल किए गए उदाहरण
| प्रश्न | गणना | उत्तर |
|---|---|---|
| M3 = ₹600 लाख करोड़ और M0 = ₹150 लाख करोड़ (काल्पनिक); मुद्रा गुणक? | 600 ÷ 150 | 4 |
| नकद आरक्षित अनुपात (काल्पनिक) 20% हो, तो साख गुणक (सरल मॉडल)? | 1 ÷ 0.20 | 5 |
| प्रारंभिक जमा ₹1000, आरक्षित अनुपात 20% — कुल जमा व सृजित साख? | 1000 × 5 = 5000; 5000 − 1000 | कुल जमा ₹5000, नई साख ₹4000 |
| बैंक की शुद्ध माँग व सावधि देयताएँ (NDTL) ₹1000 करोड़; CRR 5%, SLR 20% (काल्पनिक) — ऋण हेतु उपलब्ध? | 1000 − 50 − 200 | ₹750 करोड़ |
| नाममात्र ब्याज दर 8%, मुद्रास्फीति 5% — वास्तविक ब्याज दर (सन्निकट)? | 8 − 5 | 3% |
NCERT "समष्टि अर्थशास्त्र" में साख सृजन का सरल सूत्र मुद्रा गुणक = 1 ÷ आरक्षित अनुपात दिया गया है; वास्तविक अर्थव्यवस्था में जनता के नकद रखने आदि के कारण गुणक इससे कम रहता है।
5. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
5.1 स्थापना और इतिहास
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सिफ़ारिश | हिल्टन यंग आयोग (Royal Commission on Indian Currency and Finance, 1926) |
| अधिनियम | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 |
| कार्य प्रारंभ | 1 अप्रैल 1935 |
| प्रारंभिक स्वरूप | निजी अंशधारकों का बैंक; प्रारंभिक पूँजी ₹5 करोड़ |
| मुख्यालय | प्रारंभ में कोलकाता, 1937 से स्थायी रूप से मुंबई |
| राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 (RBI (सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण) अधिनियम, 1948) |
| प्रथम गवर्नर | सर ऑस्बोर्न स्मिथ (1935–37) |
| प्रथम भारतीय गवर्नर | सी.डी. देशमुख (1943–49); बाद में वित्त मंत्री भी बने |
| प्रतीक-चिह्न | बाघ और ताड़ का पेड़ |
| केंद्रीय बोर्ड | गवर्नर, अधिकतम 4 डिप्टी गवर्नर, सरकार द्वारा नामित निदेशक |
RBI के वर्तमान गवर्नर और डिप्टी गवर्नर समय-समय पर बदलते हैं; उनके नाम RBI की आधिकारिक वेबसाइट से जाँचें।
5.2 RBI के कार्य
| कार्य | विवरण |
|---|---|
| नोट निर्गमन (Bank of Issue) | RBI अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत ₹1 के नोट को छोड़ सभी करेंसी नोट जारी करना; ₹1 का नोट और सिक्के भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) जारी करती है, RBI उनका वितरण करता है |
| न्यूनतम आरक्षित प्रणाली | 1956 में शुरू (तब ₹515 करोड़); 1957 से नोट निर्गमन के लिए ₹200 करोड़ का न्यूनतम भंडार, जिसमें कम-से-कम ₹115 करोड़ का सोना |
| सरकार का बैंकर | केंद्र व राज्य सरकारों के खाते, ऋण प्रबंधन, अर्थोपाय अग्रिम (WMA) |
| बैंकों का बैंक | बैंकों के खाते रखना, उन्हें ऋण देना, समाशोधन गृह |
| अंतिम ऋणदाता (Lender of Last Resort) | संकट में बैंकों को तरलता देना |
| विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक | FEMA के अंतर्गत विदेशी मुद्रा का प्रबंधन, विनिमय दर में अस्थिरता घटाना |
| बैंकिंग नियामक व पर्यवेक्षक | बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के अंतर्गत लाइसेंस, निरीक्षण |
| साख नियंत्रण / मौद्रिक नीति | कीमत स्थिरता के साथ संवृद्धि |
| भुगतान प्रणाली नियामक | भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 |
| विकासात्मक कार्य | वित्तीय समावेशन, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, संस्थाओं का निर्माण |
6. मौद्रिक नीति के उपकरण
मौद्रिक नीति वह नीति है जिससे केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति, साख की उपलब्धता और ब्याज दरों को नियंत्रित करता है। भारत में इसका मुख्य उद्देश्य संवृद्धि को ध्यान में रखते हुए कीमत स्थिरता है।
6.1 मात्रात्मक (सामान्य) उपकरण
| उपकरण | अर्थ | बढ़ाने का प्रभाव |
|---|---|---|
| नकद आरक्षित अनुपात (CRR) | बैंकों की NDTL का वह भाग जो नकद रूप में RBI के पास रखना अनिवार्य; इस पर ब्याज नहीं मिलता (RBI अधिनियम धारा 42) | बैंकों के पास ऋण योग्य धन घटता — तरलता कम |
| सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) | NDTL का वह भाग जो बैंक स्वयं नकद, सोना या स्वीकृत सरकारी प्रतिभूतियों में रखते हैं (बैंकिंग विनियमन अधिनियम धारा 24) | ऋण क्षमता घटती; सरकारी प्रतिभूतियों की माँग बढ़ती |
| रेपो दर (Repo Rate) | वह दर जिस पर RBI बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक (प्रायः एक दिन) ऋण देता है — नीतिगत दर | बैंकों का उधार महँगा, ऋण-दरें बढ़ती, माँग व मुद्रास्फीति घटती |
| रिवर्स रेपो दर | वह दर जिस पर RBI बैंकों से अतिरिक्त धन उधार लेता है (बैंक RBI के पास धन रखते हैं) | बैंक RBI के पास अधिक धन रखते — तरलता घटती |
| स्थायी जमा सुविधा (SDF) | 2022 में शुरू; बैंक बिना प्रतिभूति दिए RBI के पास धन रख सकते हैं; तरलता समायोजन सुविधा (LAF) गलियारे का निचला छोर | तरलता अवशोषण |
| सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) | 2011 में शुरू; आपात स्थिति में बैंक अपने SLR भंडार में से प्रतिभूतियाँ देकर रात भर के लिए रेपो से ऊँची दर पर उधार ले सकते हैं; LAF गलियारे का ऊपरी छोर | आपात उधार महँगा |
| बैंक दर (Bank Rate) | वह दर जिस पर RBI बैंकों को दीर्घकालिक ऋण देता है / बिलों की पुनर्कटौती करता है (RBI अधिनियम धारा 49) | दीर्घकालिक साख महँगी; दंडात्मक दरों का आधार |
| खुले बाज़ार की क्रियाएँ (OMO) | RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की ख़रीद-बिक्री | RBI बेचे तो तरलता घटती; ख़रीदे तो तरलता बढ़ती |
| तरलता समायोजन सुविधा (LAF) | 2000 से; रेपो व रिवर्स रेपो के माध्यम से दैनिक तरलता प्रबंधन | — |
रेपो, रिवर्स रेपो, SDF, MSF और बैंक दर के बीच का अंतर (जैसे MSF दर = रेपो + कुछ आधार अंक) RBI समय-समय पर बदलता है; वर्तमान दरें और अंतर RBI की नवीनतम मौद्रिक नीति घोषणा से लें। आधार अंक (Basis Point): 1 आधार अंक = 0.01%; 25 आधार अंक = 0.25%।
6.2 विस्तारवादी बनाम संकुचनकारी नीति
| आधार | विस्तारवादी (सस्ती मुद्रा नीति) | संकुचनकारी (महँगी मुद्रा नीति) |
|---|---|---|
| कब | मंदी, कम माँग | ऊँची मुद्रास्फीति |
| रेपो / CRR / SLR | घटाना | बढ़ाना |
| OMO | RBI प्रतिभूतियाँ ख़रीदता है | RBI प्रतिभूतियाँ बेचता है |
| परिणाम | तरलता व ऋण बढ़ते, ब्याज घटते | तरलता व ऋण घटते, ब्याज बढ़ते |
6.3 गुणात्मक (चयनात्मक) उपकरण
| उपकरण | अर्थ |
|---|---|
| मार्जिन आवश्यकता (Margin Requirement) | प्रतिभूति के मूल्य और दिए गए ऋण का अंतर; मार्जिन बढ़ाने से उस वस्तु पर ऋण घटता |
| ऋण राशनिंग (Credit Rationing) | किसी क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण की सीमा तय करना |
| नैतिक दबाव (Moral Suasion) | बैंकों को अनुरोध, परामर्श, बैठकों से प्रभावित करना |
| प्रत्यक्ष कार्रवाई (Direct Action) | निर्देश न मानने वाले बैंकों पर दंड या प्रतिबंध |
| उपभोक्ता साख का नियमन | उपभोक्ता वस्तुओं के लिए किस्त, अवधि, डाउन-पेमेंट की शर्तें |
| प्रचार (Publicity) | रिपोर्ट व बयान से बाज़ार को संकेत |
मात्रात्मक उपकरण पूरी अर्थव्यवस्था में साख की मात्रा को प्रभावित करते हैं, जबकि गुणात्मक उपकरण किसी विशेष क्षेत्र की साख की दिशा को।
7. मौद्रिक नीति समिति (MPC) और मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पृष्ठभूमि | उर्जित पटेल समिति (2014) ने लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की सिफ़ारिश की; 2015 में सरकार-RBI के बीच मौद्रिक नीति ढाँचा समझौता |
| कानूनी आधार | वित्त अधिनियम 2016 द्वारा RBI अधिनियम 1934 में संशोधन (धारा 45ZA — लक्ष्य, 45ZB — MPC) |
| सदस्य संख्या | 6 |
| RBI से (3) | गवर्नर (अध्यक्ष), मौद्रिक नीति के प्रभारी डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित एक RBI अधिकारी |
| बाहरी (3) | केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ; कार्यकाल 4 वर्ष, पुनर्नियुक्ति नहीं |
| गणपूर्ति (Quorum) | 4 सदस्य (गवर्नर या उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी गवर्नर सहित) |
| निर्णय | बहुमत से; बराबरी पर गवर्नर का निर्णायक (दूसरा) मत |
| बैठकें | वर्ष में कम-से-कम 4 |
| मुख्य कार्य | नीतिगत रेपो दर तय करना |
| लक्ष्य कौन तय करता है | केंद्र सरकार, RBI के परामर्श से, हर 5 वर्ष के लिए |
| 2016 में अधिसूचित लक्ष्य | CPI (संयुक्त) मुद्रास्फीति 4%, सहनशीलता सीमा ± 2% (2% से 6%) |
| विफलता की स्थिति | लगातार तीन तिमाहियों तक औसत मुद्रास्फीति सीमा से बाहर रहे तो RBI सरकार को कारण व उपचार की रिपोर्ट देता है |
पहला लक्ष्य अगस्त 2016 से मार्च 2021 तक के लिए अधिसूचित हुआ और 2021 में इसे अगली पाँच वर्ष की अवधि (अप्रैल 2021 – मार्च 2026) के लिए बनाए रखा गया। मार्च 2026 की अधिसूचना से यही लक्ष्य (4% ± 2%) अप्रैल 2026 – मार्च 2031 के लिए फिर बनाए रखा गया। लक्ष्य हर 5 वर्ष पर पुनः अधिसूचित होता है, इसलिए वर्तमान अवधि का लक्ष्य वित्त मंत्रालय / RBI की नवीनतम अधिसूचना से अवश्य जाँचें। मुद्रास्फीति के प्रकार और CPI-WPI के अंतर के लिए राष्ट्रीय आय वाले नोट में GDP अपस्फीतिक बनाम CPI की तालिका भी देखें।
8. भारत की बैंकिंग संरचना
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| अनुसूचित बैंक (Scheduled Banks) | RBI अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल बैंक; इन्हें RBI से ऋण / सुविधाएँ मिलती हैं और CRR बनाए रखना होता है |
| गैर-अनुसूचित बैंक | दूसरी अनुसूची में शामिल नहीं |
| वाणिज्यिक बैंक | सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक |
| सहकारी बैंक | शहरी व ग्रामीण सहकारी बैंक; राज्य सहकारी कानून व बैंकिंग विनियमन अधिनियम दोनों के अधीन |
| विकास वित्तीय संस्थाएँ | NABARD, SIDBI, EXIM बैंक, NHB आदि |
बैंकों के राष्ट्रीयकरण (1969 — 14 बैंक, 1980 — 6 बैंक) और नरसिम्हम समिति के सुधारों का विवरण अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र और 1991 के आर्थिक सुधार वाले नोट में है।
8.1 विशेष बैंक और संस्थाएँ
| संस्था | स्थापना | मुख्यालय | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) | 2 अक्टूबर 1975 (अध्यादेश); RRB अधिनियम 1976 | — | नरसिम्हम कार्य समूह (1975) की सिफ़ारिश; शेयर पूँजी — केंद्र 50%, प्रायोजक बैंक 35%, राज्य 15%; पहला RRB — प्रथमा बैंक (मुरादाबाद) |
| NABARD | 12 जुलाई 1982 | मुंबई | शिवरामन समिति (CRAFICARD) की सिफ़ारिश; कृषि व ग्रामीण विकास का शीर्ष बैंक; RRB व सहकारी बैंकों का पर्यवेक्षण |
| भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM) | 1 जनवरी 1982 | मुंबई | विदेशी व्यापार का वित्तपोषण |
| भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) | 2 अप्रैल 1990 | लखनऊ | सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSME) का शीर्ष वित्तीय संस्थान; प्रारंभ में IDBI की सहायक |
| राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) | 1988 | नई दिल्ली | आवास वित्त |
| निक्षेप बीमा एवं प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) | 1978 | मुंबई | RBI की सहायक; बैंक जमा का बीमा (बीमा-सीमा समय-समय पर बदलती है) |
8.2 पेमेंट्स बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक
| आधार | पेमेंट्स बैंक | स्मॉल फाइनेंस बैंक |
|---|---|---|
| सिफ़ारिश | नचिकेत मोर समिति (2013) | नचिकेत मोर समिति (2013) |
| RBI दिशानिर्देश | 2014 | 2014 |
| जमा स्वीकार | हाँ, प्रति ग्राहक सीमा के साथ (सीमा RBI समय-समय पर बदलता है) | हाँ, बिना ऐसी सीमा के |
| ऋण देना | नहीं | हाँ — मुख्यतः छोटे उधारकर्ता, किसान, MSME |
| क्रेडिट कार्ड | नहीं (डेबिट कार्ड, ATM कार्ड हाँ) | हाँ |
| उद्देश्य | प्रवासी मज़दूरों, निम्न आय परिवारों को भुगतान व प्रेषण सेवाएँ | बैंक-रहित वर्गों को ऋण व बचत |
9. NPA (अनर्जक परिसंपत्ति)
जब किसी ऋण का मूलधन या ब्याज 90 दिन से अधिक समय तक बकाया रहे, तो वह ऋण बैंक के लिए आय नहीं देता और अनर्जक परिसंपत्ति (Non-Performing Asset, NPA) बन जाता है। यह 90-दिन मानदंड आय-पहचान के विवेकपूर्ण मानदंडों के अंतर्गत लागू है।
| श्रेणी | अर्थ |
|---|---|
| मानक परिसंपत्ति (Standard) | सामान्य रूप से चल रहा ऋण |
| विशेष उल्लेख खाते (SMA-0, 1, 2) | NPA बनने से पहले की चेतावनी श्रेणियाँ (बकाया 1–30, 31–60, 61–90 दिन) |
| अवमानक (Sub-standard) | 12 महीने या उससे कम समय से NPA |
| संदिग्ध (Doubtful) | 12 महीने से अधिक समय तक अवमानक श्रेणी में |
| हानि (Loss) | वसूली की संभावना लगभग समाप्त, बैंक/लेखा-परीक्षक/RBI द्वारा पहचानी गई |
| NPA समाधान के उपाय | वर्ष |
|---|---|
| ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) | 1993 का अधिनियम |
| SARFAESI अधिनियम | 2002 |
| दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) | 2016 |
| लोक अदालत, एकमुश्त निपटान, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियाँ (ARC) | — |
सकल NPA कुल NPA है; शुद्ध NPA = सकल NPA − प्रावधान (Provisions)। बैंकिंग क्षेत्र का वर्तमान NPA अनुपात हर वर्ष बदलता है; इसके लिए RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट देखें।
10. बेसल मानदंड (संक्षेप में)
बेसल बैंकिंग पर्यवेक्षण समिति (BCBS) स्विट्ज़रलैंड के बेसल नगर में अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (BIS) से जुड़ी है। यह बैंकों के लिए न्यूनतम पूँजी और जोखिम प्रबंधन के मानदंड सुझाती है, जिन्हें देश अपने नियामकों के माध्यम से लागू करते हैं।
| मानदंड | वर्ष | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| बेसल-I | 1988 | मुख्यतः साख (Credit) जोखिम; जोखिम-भारित परिसंपत्तियों पर न्यूनतम 8% पूँजी |
| बेसल-II | 2004 | तीन स्तंभ — (1) न्यूनतम पूँजी आवश्यकता, (2) पर्यवेक्षी समीक्षा, (3) बाज़ार अनुशासन (प्रकटीकरण); परिचालन जोखिम भी शामिल |
| बेसल-III | 2010 | 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद; बेहतर गुणवत्ता की पूँजी, पूँजी संरक्षण बफ़र, उत्तोलन अनुपात, तरलता मानक (LCR, NSFR) |
पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR / CAR) = पूँजी ÷ जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ × 100। RBI भारतीय बैंकों के लिए बेसल के न्यूनतम से अधिक कठोर अनुपात निर्धारित करता रहा है; वर्तमान प्रतिशत RBI के नवीनतम मास्टर सर्कुलर से जाँचें।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: RBI की स्थापना और राष्ट्रीयकरण के वर्ष
RBI अधिनियम 1934 में बना, बैंक ने कार्य 1 अप्रैल 1935 से शुरू किया, और राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ। "RBI की स्थापना 1934 में हुई" — अधिनियम का वर्ष है, कार्य-प्रारंभ का नहीं।
Trap 2: प्रथम गवर्नर बनाम प्रथम भारतीय गवर्नर
प्रथम गवर्नर — ऑस्बोर्न स्मिथ; प्रथम भारतीय गवर्नर — सी.डी. देशमुख।
Trap 3: रेपो बनाम रिवर्स रेपो की दिशा
रेपो में RBI देता है, बैंक लेते हैं; रिवर्स रेपो में बैंक RBI को देते हैं। रेपो बढ़े तो ऋण महँगा होता है — मुद्रास्फीति घटाने का उपाय।
Trap 4: CRR और SLR का अंतर
CRR RBI के पास नकद रखा जाता है और उस पर ब्याज नहीं मिलता; SLR बैंक स्वयं नकद, सोना या सरकारी प्रतिभूतियों में रखते हैं और प्रतिभूतियों पर ब्याज मिलता है।
Trap 5: OMO की दिशा
RBI प्रतिभूतियाँ ख़रीदे → बैंकों को धन मिलता है → तरलता बढ़ती। RBI बेचे → तरलता घटती।
Trap 6: M1 और M3 के नाम उलटना
M1 — संकीर्ण मुद्रा (सबसे तरल); M3 — व्यापक मुद्रा। M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमा; डाकघर जमा M2 व M4 में आती है।
Trap 7: MPC का लक्ष्य MPC तय करती है
गलत। मुद्रास्फीति लक्ष्य केंद्र सरकार RBI के परामर्श से तय करती है; MPC का काम उस लक्ष्य के लिए नीतिगत रेपो दर तय करना है।
Trap 8: MPC में सभी सदस्य RBI के
6 में से 3 RBI से और 3 बाहरी (केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त) होते हैं; बराबरी पर गवर्नर का निर्णायक मत।
Trap 9: ₹1 का नोट RBI जारी करता है
₹1 का नोट और सिक्के भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) जारी करती है; ₹1 के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। अन्य नोट RBI जारी करता है, जिन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
Trap 10: पेमेंट्स बैंक ऋण दे सकते हैं
गलत। पेमेंट्स बैंक जमा ले सकते हैं पर ऋण नहीं दे सकते और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते; स्मॉल फाइनेंस बैंक ऋण दे सकते हैं।
Trap 11: NABARD और SIDBI के मुख्यालय
NABARD — मुंबई; SIDBI — लखनऊ; EXIM — मुंबई।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | वस्तु-विनिमय की मुख्य समस्या | आवश्यकताओं का दोहरा संयोग |
| 2 | मुद्रा के प्राथमिक कार्य | विनिमय का माध्यम, मूल्य का मापक |
| 3 | मुद्रा के गौण कार्य | मूल्य संचय, स्थगित भुगतान का मान, मूल्य हस्तांतरण |
| 4 | फ़िएट मुद्रा | सरकारी आदेश से मुद्रा, आंतरिक मूल्य नहीं |
| 5 | चेक किस प्रकार की मुद्रा | साख / प्रत्ययी मुद्रा |
| 6 | ग्रेशम का नियम | बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर करती है |
| 7 | M0 | आरक्षित / उच्च शक्ति मुद्रा |
| 8 | M1 | संकीर्ण मुद्रा — करेंसी + माँग जमा + RBI के पास अन्य जमा |
| 9 | M3 | व्यापक मुद्रा — M1 + बैंकों की सावधि जमा |
| 10 | सबसे तरल माप | M1 |
| 11 | सबसे कम तरल माप | M4 |
| 12 | मुद्रा गुणक | M3 ÷ M0 |
| 13 | सरल साख गुणक | 1 ÷ आरक्षित अनुपात |
| 14 | RBI की सिफ़ारिश करने वाला आयोग | हिल्टन यंग आयोग (1926) |
| 15 | RBI अधिनियम | 1934 |
| 16 | RBI का कार्य-प्रारंभ | 1 अप्रैल 1935 |
| 17 | RBI का राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 |
| 18 | RBI के प्रथम गवर्नर | सर ऑस्बोर्न स्मिथ |
| 19 | प्रथम भारतीय गवर्नर | सी.डी. देशमुख |
| 20 | RBI का मुख्यालय | मुंबई (1937 से) |
| 21 | RBI का प्रतीक-चिह्न | बाघ और ताड़ का पेड़ |
| 22 | नोट निर्गमन की धारा | RBI अधिनियम धारा 22 |
| 23 | ₹1 का नोट कौन जारी करता है | भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) |
| 24 | न्यूनतम आरक्षित प्रणाली | 1956; 1957 से ₹200 करोड़ (कम-से-कम ₹115 करोड़ सोना) |
| 25 | अंतिम ऋणदाता | RBI |
| 26 | CRR का आधार | RBI अधिनियम धारा 42 |
| 27 | SLR का आधार | बैंकिंग विनियमन अधिनियम धारा 24 |
| 28 | बैंक दर का आधार | RBI अधिनियम धारा 49 |
| 29 | रेपो दर | RBI द्वारा बैंकों को अल्पकालिक ऋण की दर |
| 30 | रिवर्स रेपो दर | बैंकों से RBI द्वारा उधार की दर |
| 31 | MSF की शुरुआत | 2011 |
| 32 | LAF की शुरुआत | 2000 |
| 33 | SDF की शुरुआत | 2022 |
| 34 | OMO में RBI प्रतिभूति ख़रीदे | तरलता बढ़ती |
| 35 | मुद्रास्फीति रोकने हेतु | रेपो / CRR बढ़ाना, OMO में बिक्री |
| 36 | 1 आधार अंक | 0.01% |
| 37 | नैतिक दबाव किस प्रकार का उपकरण | गुणात्मक |
| 38 | मार्जिन आवश्यकता | गुणात्मक उपकरण |
| 39 | MPC की सिफ़ारिश | उर्जित पटेल समिति (2014) |
| 40 | MPC की धारा | RBI अधिनियम धारा 45ZB |
| 41 | MPC के सदस्य | 6 (3 RBI + 3 बाहरी) |
| 42 | MPC के अध्यक्ष | RBI गवर्नर (निर्णायक मत) |
| 43 | MPC की गणपूर्ति | 4 |
| 44 | बाहरी सदस्यों का कार्यकाल | 4 वर्ष |
| 45 | मुद्रास्फीति लक्ष्य कौन तय करता है | केंद्र सरकार (RBI के परामर्श से), हर 5 वर्ष |
| 46 | 2016 का लक्ष्य | CPI 4% ± 2% |
| 47 | अनुसूचित बैंक | RBI अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल |
| 48 | RRB की स्थापना | 2 अक्टूबर 1975 |
| 49 | RRB की शेयर पूँजी | केंद्र 50 : प्रायोजक बैंक 35 : राज्य 15 |
| 50 | NABARD | 12 जुलाई 1982, मुंबई, शिवरामन समिति |
| 51 | EXIM बैंक | 1 जनवरी 1982, मुंबई |
| 52 | SIDBI | 2 अप्रैल 1990, लखनऊ |
| 53 | पेमेंट्स / स्मॉल फाइनेंस बैंक की सिफ़ारिश | नचिकेत मोर समिति |
| 54 | पेमेंट्स बैंक ऋण दे सकते हैं? | नहीं |
| 55 | NPA | 90 दिन से अधिक बकाया |
| 56 | अवमानक परिसंपत्ति | 12 महीने या कम समय से NPA |
| 57 | बेसल समिति कहाँ | बेसल, स्विट्ज़रलैंड (BIS) |
| 58 | बेसल-II के तीन स्तंभ | न्यूनतम पूँजी, पर्यवेक्षी समीक्षा, बाज़ार अनुशासन |
| 59 | बेसल-III | 2010, 2008 संकट के बाद; LCR, NSFR |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
बैंकिंग और UPSC दोनों में इस अध्याय के प्रश्न प्रायः प्रभाव-आधारित होते हैं। स्वयं तैयार किए गए नमूना-प्रश्न:
- प्रभाव: "यदि RBI रेपो दर बढ़ाता है, तो संभावित प्रभाव क्या होगा?" — बैंक ऋण महँगे, माँग में कमी, मुद्रास्फीति पर अंकुश।
- दिशा: "खुले बाज़ार की क्रियाओं में RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचने से?" — तरलता घटती है।
- कथन (UPSC शैली): "कथन 1: CRR के रूप में रखी राशि पर बैंकों को RBI ब्याज देता है। कथन 2: SLR में सरकारी प्रतिभूतियाँ शामिल हो सकती हैं।" — केवल 2 सही।
- वर्गीकरण: "निम्न में से कौन-सा गुणात्मक उपकरण है? (a) CRR (b) बैंक दर (c) नैतिक दबाव (d) OMO" — (c)।
- संस्था-तथ्य: "SIDBI का मुख्यालय कहाँ है?" — लखनऊ।
- संख्यात्मक: "प्रारंभिक जमा ₹500 और आरक्षित अनुपात 25% हो तो कुल जमा (सरल मॉडल)?" — 500 × (1 ÷ 0.25) = ₹2000।
रणनीति: हर उपकरण के लिए एक ही प्रश्न पूछें — "इससे बैंकों के पास ऋण देने योग्य धन बढ़ेगा या घटेगा?" उत्तर से ब्याज, माँग और मुद्रास्फीति की दिशा अपने-आप निकल आती है। बैंकिंग जागरूकता के गहन अभ्यास के लिए IBPS PO / SBI Clerk प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ 2026 और अवधारणात्मक कथनों के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ हल करें।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. RBI की तिथियाँ — "34 में कानून, 35 में काम, 49 में सरकार": अधिनियम 1934, कार्य 1 अप्रैल 1935, राष्ट्रीयकरण 1949।
2. गवर्नर — "स्मिथ से शुरू, देशमुख से देशी": पहले ऑस्बोर्न स्मिथ, पहले भारतीय सी.डी. देशमुख।
3. रेपो — "Re-Purchase: RBI देता, बैंक लौटाकर वापस ख़रीदता": रेपो = RBI → बैंक; रिवर्स = बैंक → RBI।
4. CRR-SLR — "C = Central bank के पास Cash; S = Self के पास Securities": CRR RBI के पास नकद, SLR बैंक के पास प्रतिभूति।
5. M1-M3 — "एक संकरा, तीन चौड़ा": M1 संकीर्ण, M3 व्यापक।
6. MPC — "6-3-3-4-4": 6 सदस्य, 3 RBI, 3 बाहरी, 4 वर्ष कार्यकाल, 4 की गणपूर्ति; लक्ष्य "4 ± 2", हर 5 वर्ष।
7. संस्थाएँ — "75 गाँव, 82 खेत-विदेश, 90 लघु": RRB 1975, NABARD व EXIM 1982, SIDBI 1990 (लखनऊ)।
8. NPA — "90 दिन, फिर 12 महीने": 90 दिन बकाया = NPA; 12 महीने तक अवमानक, उसके बाद संदिग्ध।
15. कथन अभ्यास
RBI की स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश पर हुई। — सही।
RBI ने 1 अप्रैल 1935 से कार्य प्रारंभ किया और 1949 में उसका राष्ट्रीयकरण हुआ। — सही।
RBI के प्रथम भारतीय गवर्नर ऑस्बोर्न स्मिथ थे। — गलत (ऑस्बोर्न स्मिथ प्रथम गवर्नर; प्रथम भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख)।
M3 को संकीर्ण मुद्रा कहा जाता है। — गलत (M3 व्यापक मुद्रा; M1 संकीर्ण)।
रेपो दर बढ़ाने से बैंकों के लिए RBI से उधार लेना महँगा हो जाता है। — सही।
खुले बाज़ार की क्रियाओं में RBI द्वारा प्रतिभूतियाँ ख़रीदने से तरलता घटती है। — गलत (तरलता बढ़ती है)।
नैतिक दबाव मौद्रिक नीति का एक गुणात्मक उपकरण है। — सही।
मौद्रिक नीति समिति में 6 सदस्य होते हैं और बराबरी की स्थिति में गवर्नर का निर्णायक मत होता है। — सही।
मुद्रास्फीति का लक्ष्य मौद्रिक नीति समिति स्वयं तय करती है। — गलत (केंद्र सरकार RBI के परामर्श से हर 5 वर्ष के लिए तय करती है)।
SIDBI का मुख्यालय मुंबई में है। — गलत (लखनऊ)।
पेमेंट्स बैंक ग्राहकों को ऋण दे सकते हैं। — गलत (ऋण नहीं दे सकते)।
जिस ऋण का ब्याज या किस्त 90 दिन से अधिक बकाया हो, वह NPA माना जाता है। — सही।
16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- मुद्रा के प्राथमिक कार्य — विनिमय माध्यम, मूल्य मापक; गौण — संचय, स्थगित भुगतान
- M0 आरक्षित मुद्रा; M1 संकीर्ण (सबसे तरल); M3 व्यापक; M4 सबसे कम तरल
- M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमा; मुद्रा गुणक = M3 ÷ M0
- RBI — हिल्टन यंग आयोग; अधिनियम 1934; कार्य 1 अप्रैल 1935; राष्ट्रीयकरण 1949
- प्रथम गवर्नर ऑस्बोर्न स्मिथ; प्रथम भारतीय सी.डी. देशमुख; मुख्यालय मुंबई
- ₹1 का नोट व सिक्के — भारत सरकार; शेष नोट — RBI (धारा 22)
- CRR — RBI के पास नकद (धारा 42); SLR — बैंक के पास प्रतिभूति (BR अधिनियम धारा 24)
- रेपो — RBI बैंकों को देता; रिवर्स रेपो — बैंक RBI को देते
- MSF 2011, LAF 2000, SDF 2022; बैंक दर — दीर्घकालिक (धारा 49)
- OMO ख़रीद = तरलता बढ़े; बिक्री = तरलता घटे
- गुणात्मक: मार्जिन, ऋण राशनिंग, नैतिक दबाव, प्रत्यक्ष कार्रवाई
- MPC — 6 सदस्य (3 + 3), गवर्नर अध्यक्ष, निर्णायक मत; उर्जित पटेल समिति 2014
- लक्ष्य — केंद्र सरकार, हर 5 वर्ष; 2016 का लक्ष्य CPI 4% ± 2%; 2021 और 2026 में भी यही बनाए रखा गया (अवधि 2026–31)
- RRB 1975, NABARD 1982 (मुंबई), EXIM 1982 (मुंबई), SIDBI 1990 (लखनऊ)
- NPA — 90 दिन; बेसल-II के 3 स्तंभ; बेसल-III 2010
17. अभ्यास
इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों के क्विज़ में मुद्रा के कार्य, मुद्रा पूर्ति के माप, RBI के तथ्य, मौद्रिक उपकरणों के प्रभाव, MPC, विशेष बैंक, NPA और बेसल मानदंड शामिल हैं। प्रभाव-आधारित हर प्रश्न में पहले यह तय करें कि उपकरण तरलता बढ़ाता है या घटाता है। योजना काल में बनी संस्थाओं का संदर्भ भारत में योजना और नीति आयोग वाले नोट में देखें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
मुद्रा ने वस्तु-विनिमय की कठिनाइयों को दूर किया, और आधुनिक अर्थव्यवस्था में उसकी पूर्ति व साख को नियंत्रित करने का दायित्व केंद्रीय बैंक का है। भारत में यह भूमिका 1935 से RBI निभा रहा है — नोट निर्गमन, सरकार और बैंकों का बैंकर, विदेशी मुद्रा का संरक्षक और मौद्रिक नीति का संचालक। मात्रात्मक उपकरण (CRR, SLR, रेपो, OMO आदि) पूरी अर्थव्यवस्था की तरलता बदलते हैं, जबकि गुणात्मक उपकरण विशेष क्षेत्रों की साख को दिशा देते हैं। 2016 से लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण और छह-सदस्यीय MPC ने नीतिगत दर तय करने की प्रक्रिया को नियम-आधारित बनाया है। परीक्षा के लिए स्थापना-तथ्य, उपकरणों की परिभाषा और प्रभाव, MPC की संरचना और संस्थाओं के वर्ष पक्के करें; रेपो दर, CRR, SLR के वर्तमान प्रतिशत और वर्तमान अवधि का मुद्रास्फीति लक्ष्य हमेशा RBI की नवीनतम घोषणा से जाँचें।
M1 संकीर्ण, M3 व्यापक | RBI: हिल्टन यंग, 1934 अधिनियम, 1 अप्रैल 1935, 1949 राष्ट्रीयकरण | रेपो बढ़े = ऋण महँगा | OMO ख़रीद = तरलता बढ़े | MPC 6 सदस्य, लक्ष्य हर 5 वर्ष (2016: 4% ± 2%) | NPA 90 दिन
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“मुद्रा, बैंकिंग, RBI और मौद्रिक नीति — M0 से M4, CRR-SLR-रेपो, MPC, NPA, बेसल — RAS, UPSC, बैंकिंग” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- मुद्रा, बैंकिंग, RBI और मौद्रिक नीति — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- बजट, राजकोषीय नीति, कर और GST — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- वित्तीय बाज़ार, SEBI और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- भारत में योजना और नीति आयोग — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
मुद्रा के प्राथमिक कार्य विनिमय का माध्यम और मूल्य का मापक हैं। गौण कार्यों में मूल्य का संचय, स्थगित भुगतानों का मान और मूल्य का हस्तांतरण शामिल हैं।
M1 को संकीर्ण मुद्रा कहते हैं, जिसमें जनता के पास करेंसी, बैंकों की माँग जमा और RBI के पास अन्य जमा आती हैं। M3 व्यापक मुद्रा है, जिसमें M1 के साथ बैंकों की सावधि जमा भी शामिल होती है।
RBI की स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश पर RBI अधिनियम 1934 के अंतर्गत हुई और इसने 1 अप्रैल 1935 से कार्य शुरू किया। 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हुआ।
RBI के पहले गवर्नर सर ऑस्बोर्न स्मिथ थे। पहले भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख थे।
रेपो दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक ऋण देता है। रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक अपना अतिरिक्त धन RBI के पास रखते हैं।
CRR के तहत बैंक अपनी जमा का एक भाग नकद रूप में RBI के पास रखते हैं, जिस पर ब्याज नहीं मिलता। SLR के तहत बैंक स्वयं नकद, सोना या स्वीकृत सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में एक भाग रखते हैं।
MPC में 6 सदस्य होते हैं — 3 RBI से (गवर्नर अध्यक्ष सहित) और 3 बाहरी सदस्य जिन्हें केंद्र सरकार नियुक्त करती है। बराबरी की स्थिति में गवर्नर का निर्णायक मत होता है।
केंद्र सरकार RBI के परामर्श से हर 5 वर्ष के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य तय करती है। 2016 में अधिसूचित लक्ष्य CPI मुद्रास्फीति 4% (± 2%) था; मार्च 2026 की अधिसूचना से यही लक्ष्य अप्रैल 2026 – मार्च 2031 के लिए बनाए रखा गया है।
जिस ऋण का मूलधन या ब्याज 90 दिन से अधिक बकाया रहे, उसे अनर्जक परिसंपत्ति (NPA) कहते हैं। NPA को अवमानक, संदिग्ध और हानि परिसंपत्तियों में बाँटा जाता है।
NABARD की स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई और इसका मुख्यालय मुंबई है। SIDBI की स्थापना 2 अप्रैल 1990 को हुई और इसका मुख्यालय लखनऊ है।
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