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भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र और 1991 के आर्थिक सुधार — LPG, औद्योगिक नीति, बैंक राष्ट्रीयकरण — RAS

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
24 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS, UPSC CSE प्रारंभिक, SSC व बैंकिंग पाठ्यक्रम की अर्थव्यवस्था इकाई; NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 9–12) तथा RBI व भारत सरकार के आधिकारिक प्रकाशनों की मानक परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: उत्पादन के साधनों के स्वामित्व और निर्णय की व्यवस्था के आधार पर अर्थव्यवस्थाएँ तीन प्रकार की होती हैं — पूँजीवादी (निजी स्वामित्व, बाज़ार व कीमत-तंत्र), समाजवादी (राज्य स्वामित्व, केंद्रीय नियोजन) और मिश्रित (दोनों का सह-अस्तित्व); भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था है, जिसकी नींव 1948 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने रखी और 1956 के प्रस्ताव ने उद्योगों को तीन अनुसूचियों में बाँटकर सार्वजनिक क्षेत्र को प्रधानता दी। आर्थिक गतिविधियाँ प्राथमिक (कृषि आदि), द्वितीयक (विनिर्माण, निर्माण) और तृतीयक (सेवाएँ) क्षेत्रों में बँटती हैं; भारत की GDP में तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, और ज्ञान-आधारित गतिविधियों को चतुर्थक क्षेत्र कहा जाता है। 1991 से पहले की व्यवस्था लाइसेंस-परमिट राज, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रभुत्व और MRTP अधिनियम 1969 जैसे नियंत्रणों वाली थी। 1991 में भुगतान संतुलन (BoP) संकट के बीच प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नई आर्थिक नीति (LPG — उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) लागू की — रुपये का अवमूल्यन, 18 उद्योगों को छोड़ शेष का लाइसेंस-मुक्तीकरण, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश, और FERA (1973) की जगह FEMA (1999, लागू 2000)। बैंकिंग सुधार नरसिम्हम समिति (1991) की सिफ़ारिशों पर हुए, जबकि इससे पहले 1969 में 14 और 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था।


संक्षिप्त उत्तर

विषयमुख्य तथ्य
भारत की अर्थव्यवस्था का प्रकारमिश्रित अर्थव्यवस्था
पूँजीवाद के प्रवर्तक विचारकएडम स्मिथ — "The Wealth of Nations" (1776), अहस्तक्षेप (Laissez-faire)
समाजवाद के प्रमुख विचारककार्ल मार्क्स
औद्योगिक नीति प्रस्ताव1948 (मिश्रित अर्थव्यवस्था की नींव), 1956 (तीन अनुसूचियाँ, "आर्थिक संविधान")
1956 प्रस्ताव की अनुसूची A / BA — 17 उद्योग (केवल राज्य), B — 12 उद्योग (क्रमशः राज्य, निजी भी)
उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम1951 — औद्योगिक लाइसेंस व्यवस्था का आधार
MRTP अधिनियम1969; स्थान लिया प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 ने
बैंक राष्ट्रीयकरण19 जुलाई 1969 — 14 बैंक; 15 अप्रैल 1980 — 6 बैंक
1991 संकट का स्वरूपभुगतान संतुलन संकट (विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत कम)
1991 के सुधारों के समय प्रधानमंत्री / वित्त मंत्रीपी.वी. नरसिम्हा राव / डॉ. मनमोहन सिंह
नई औद्योगिक नीति24 जुलाई 1991
LPGLiberalisation, Privatisation, Globalisation
लाइसेंस अनिवार्य (1991 में)केवल 18 उद्योग
सार्वजनिक क्षेत्र हेतु आरक्षित (1991 में)17 से घटाकर 8 उद्योग
FERA → FEMAFERA 1973 → FEMA 1999 (1 जून 2000 से लागू)
बैंकिंग सुधार समितिनरसिम्हम समिति — I (1991), II (1998)
GDP में सर्वाधिक हिस्सातृतीयक (सेवा) क्षेत्र

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र और 1991 के सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था की "कहानी" हैं — योजना युग से उदारीकरण तक। RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा में "आर्थिक सुधार और उदारीकरण" स्पष्ट रूप से सिलेबस का भाग है, UPSC प्रारंभिक में औद्योगिक नीतियों, FEMA, विनिवेश और बैंक राष्ट्रीयकरण पर अवधारणात्मक कथन आते हैं, SSC में वर्ष और व्यक्ति वाले तथ्य, और बैंकिंग परीक्षाओं में राष्ट्रीयकरण, नरसिम्हम समिति व FEMA नियमित रूप से पूछे जाते हैं। राजस्थान CET स्नातक स्तर में भी क्षेत्रों का वर्गीकरण और LPG जैसे सरल प्रश्न आते हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • RAS प्रारंभिक व मुख्य (आर्थिक सुधार, औद्योगिक नीति)
  • UPSC प्रारंभिक (औद्योगिक नीति, FEMA, बैंकिंग सुधार पर कथन)
  • SSC CGL / CHSL (वर्ष, व्यक्ति, समितियाँ)
  • IBPS PO / SBI Clerk (बैंक राष्ट्रीयकरण, नरसिम्हम समिति)
  • राजस्थान CET स्नातक, पटवारी, व्याख्याता (अर्थशास्त्र)

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. प्रकार: "भारत किस प्रकार की अर्थव्यवस्था है?" / पूँजीवाद व समाजवाद की विशेषताएँ
  2. क्षेत्र: किसी गतिविधि को प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक में रखना
  3. नीतियाँ: 1948, 1956 और 1991 की औद्योगिक नीतियों की विशेषताओं का मिलान
  4. 1991 संकट: कारण, IMF ऋण, अवमूल्यन, सुधारों के घटक
  5. कानून: MRTP → प्रतिस्पर्धा अधिनियम, FERA → FEMA — वर्ष और प्रकृति (आपराधिक बनाम दीवानी)
  6. बैंकिंग: 1969 व 1980 का राष्ट्रीयकरण, नरसिम्हम समिति की सिफ़ारिशें

3. अर्थव्यवस्था के प्रकार

हर अर्थव्यवस्था को तीन केंद्रीय समस्याएँ हल करनी पड़ती हैं — क्या उत्पादन करें, कैसे करें और किसके लिए करें। इन प्रश्नों का उत्तर कौन देता है — बाज़ार या राज्य — इसी आधार पर अर्थव्यवस्था का प्रकार तय होता है।

आधारपूँजीवादीसमाजवादीमिश्रित
उत्पादन साधनों का स्वामित्वनिजीराज्य / समाजनिजी व सार्वजनिक दोनों
निर्णय कौन लेता हैबाज़ार (माँग-पूर्ति, कीमत-तंत्र)केंद्रीय योजना प्राधिकरणबाज़ार + सरकारी नियोजन / नियमन
प्रेरणालाभसामाजिक कल्याणलाभ व कल्याण दोनों
प्रतिस्पर्धाअधिकबहुत कमनियंत्रित प्रतिस्पर्धा
सरकार की भूमिकान्यूनतम (कानून-व्यवस्था, अनुबंध)अधिकतमसंतुलित
प्रमुख विचारकएडम स्मिथकार्ल मार्क्सजे.एम. कीन्स के विचारों से प्रभावित
गुणदक्षता, नवाचार, उपभोक्ता की स्वतंत्रतासमानता, पूर्ण रोज़गार का लक्ष्यदक्षता और समानता का संतुलन
दोषआय असमानता, व्यापार चक्र, एकाधिकारअदक्षता, नौकरशाही, प्रोत्साहन की कमीदोनों क्षेत्रों में समन्वय की कठिनाई
उदाहरणअमेरिका (पारंपरिक उदाहरण)पूर्व सोवियत संघभारत

एडम स्मिथ की पुस्तक "An Inquiry into the Nature and Causes of the Wealth of Nations" (1776) में बाज़ार के "अदृश्य हाथ" (Invisible Hand) का विचार है — व्यक्ति अपने हित में काम करते हुए भी समाज के हित को आगे बढ़ाता है। व्यवहार में आज लगभग सभी अर्थव्यवस्थाएँ किसी-न-किसी रूप में मिश्रित हैं; "शुद्ध" पूँजीवाद या समाजवाद सैद्धांतिक श्रेणियाँ हैं।

3.1 भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था क्यों बना

  • स्वतंत्रता के समय पूँजी की कमी — भारी उद्योगों में निजी क्षेत्र निवेश करने में सक्षम नहीं था।
  • नेहरू सोवियत नियोजन से प्रभावित थे, पर लोकतंत्र और निजी संपत्ति भी बनाए रखना चाहते थे।
  • संविधान के नीति-निदेशक तत्व (अनुच्छेद 38, 39) — आय की असमानता घटाना, धन का संकेंद्रण रोकना।
  • 1955 के आवडी अधिवेशन में कांग्रेस ने "समाजवादी ढंग का समाज" (Socialistic Pattern of Society) का लक्ष्य स्वीकार किया।
  • 42वें संविधान संशोधन (1976) से प्रस्तावना में "समाजवादी" शब्द जोड़ा गया।

4. अर्थव्यवस्था के क्षेत्र

4.1 गतिविधि के आधार पर

क्षेत्रस्वरूपउदाहरणदूसरा नाम
प्राथमिक (Primary)प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोगकृषि, पशुपालन, मत्स्यपालन, वानिकीकृषि एवं संबद्ध क्षेत्र
द्वितीयक (Secondary)प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण द्वारा दूसरे रूप में बदलनाविनिर्माण, निर्माण (Construction), बिजली-गैस-जल आपूर्तिऔद्योगिक क्षेत्र
तृतीयक (Tertiary)प्राथमिक व द्वितीयक को सहायता देने वाली सेवाएँव्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनसेवा क्षेत्र
चतुर्थक (Quaternary)ज्ञान-आधारित सेवाएँअनुसंधान व विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श, डेटा सेवाएँज्ञान क्षेत्र (प्रायः तृतीयक का उप-भाग)
पंचम (Quinary)उच्चतम स्तर के निर्णय व नीति-निर्माणवरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, शीर्ष प्रबंधक"गोल्ड कॉलर"

टिप्पणी: खनन (Mining) को कुछ पाठ्यपुस्तकें प्राथमिक गतिविधि मानती हैं (प्रकृति से सीधे निष्कर्षण), जबकि राष्ट्रीय लेखों में "उद्योग" वर्ग के अंतर्गत खनन व उत्खनन को द्वितीयक के साथ गिना जाता है। इस अंतर के कारण "खनन किस क्षेत्र में है" जैसा प्रश्न आए तो प्रश्न का संदर्भ देखें।

4.2 GDP और रोज़गार में क्षेत्रों का योगदान

NCERT कक्षा 10 की पुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" बताती है कि समय के साथ भारत में तृतीयक क्षेत्र GDP में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र बन गया, जबकि रोज़गार में सबसे बड़ा हिस्सा अब भी प्राथमिक क्षेत्र का रहा है — यानी कृषि में प्रच्छन्न (छिपी) बेरोज़गारी है। हर क्षेत्र का सटीक प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष बदलता है; नवीनतम आँकड़ों के लिए आर्थिक सर्वेक्षण और NSO / PLFS की रिपोर्ट देखें।

प्रवृत्तिविवरण
GDP में सबसे बड़ा क्षेत्रतृतीयक (सेवा)
GDP में घटती हिस्सेदारीप्राथमिक (कृषि)
रोज़गार में सबसे बड़ा क्षेत्र (NCERT)प्राथमिक
तृतीयक क्षेत्र बढ़ने के कारण (NCERT)मूलभूत सेवाओं की ज़रूरत, कृषि-उद्योग के विकास से परिवहन-व्यापार की माँग, आय बढ़ने पर सेवाओं की माँग, सूचना प्रौद्योगिकी

4.3 संगठित बनाम असंगठित क्षेत्र

आधारसंगठित क्षेत्रअसंगठित क्षेत्र
पंजीकरणसरकार द्वारा पंजीकृतप्रायः अपंजीकृत, छोटी व बिखरी इकाइयाँ
नियम-कानूनकारख़ाना अधिनियम, न्यूनतम मज़दूरी, ग्रेच्युटी आदि का पालनसरकारी नियंत्रण से प्रायः बाहर
रोज़गार की शर्तेंनियमित, सुनिश्चित कामअनियमित, कम वेतन, असुरक्षित
सुविधाएँसवेतन अवकाश, भविष्य निधि, चिकित्सा लाभप्रायः नहीं
उदाहरणसरकारी कार्यालय, बड़ी कंपनियाँ, बैंकदिहाड़ी मज़दूर, छोटे दुकानदार, घरेलू कामगार

4.4 स्वामित्व के आधार पर

क्षेत्रस्वामित्वउद्देश्यउदाहरण
सार्वजनिक क्षेत्रसरकारजनकल्याण, आधारभूत ढाँचाभारतीय रेल, ONGC, BHEL
निजी क्षेत्रनिजी व्यक्ति / कंपनियाँलाभनिजी कंपनियाँ

5. 1991 से पहले: नियंत्रित अर्थव्यवस्था

5.1 औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1948

  • स्वतंत्र भारत की पहली औद्योगिक नीति (उद्योग मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समय)।
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था की नींव — सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भूमिका।
  • उद्योगों को चार श्रेणियों में बाँटा — राज्य का एकाधिकार (जैसे हथियार, परमाणु ऊर्जा, रेल), मूल उद्योग जिनमें नई इकाइयाँ राज्य लगाएगा, सरकारी नियंत्रण वाले उद्योग, और शेष निजी क्षेत्र।
  • कुटीर और लघु उद्योगों के महत्व को स्वीकार किया।

5.2 उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1951

इस अधिनियम ने औद्योगिक लाइसेंस व्यवस्था लागू की: नई इकाई लगाने, क्षमता बढ़ाने, स्थान बदलने या नई वस्तु बनाने के लिए सरकार की अनुमति ज़रूरी हो गई। यही आगे चलकर "लाइसेंस-परमिट राज" कहलाया।

5.3 औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956

अनुसूचीउद्योगों की संख्यास्थिति
अनुसूची A17पूर्णतः राज्य का उत्तरदायित्व (नई इकाइयाँ केवल राज्य लगाएगा)
अनुसूची B12क्रमशः राज्य स्वामित्व; निजी क्षेत्र राज्य का पूरक
अनुसूची Cशेष सभीसामान्यतः निजी क्षेत्र (लाइसेंस के अधीन)

1956 का प्रस्ताव "समाजवादी ढंग के समाज" के लक्ष्य पर आधारित था, दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल) के भारी-उद्योग ज़ोर से जुड़ा था, और इसे भारत का "आर्थिक संविधान" कहा जाता है। योजनाओं का विस्तृत क्रम भारत में योजना और नीति आयोग वाले नोट में देखें।

5.4 MRTP अधिनियम 1969

बिंदुविवरण
पूरा नामएकाधिकार तथा अवरोधक व्यापार व्यवहार अधिनियम (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act)
उद्देश्यआर्थिक शक्ति के संकेंद्रण और एकाधिकारवादी व्यवहार पर रोक
पृष्ठभूमिमहालनोबिस (आय वितरण) समिति और एकाधिकार जाँच आयोग की रिपोर्टें
1991 में बदलावबड़ी कंपनियों के लिए परिसंपत्ति-सीमा की बाध्यता समाप्त
उत्तराधिकारी कानूनप्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002; भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)

5.5 1991 से पहले की अन्य विशेषताएँ

विशेषताप्रभाव
सार्वजनिक क्षेत्र का प्रभुत्व ("Commanding Heights")भारी उद्योग, आधारभूत ढाँचा राज्य के हाथ; कई उपक्रम घाटे में
आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)ऊँचे सीमा शुल्क व कोटा से घरेलू उद्योग को संरक्षण; प्रतिस्पर्धा कम
लघु उद्योगों के लिए आरक्षणकई वस्तुएँ केवल लघु क्षेत्र में बन सकती थीं
विदेशी निवेश पर कड़ा नियंत्रणFERA 1973
प्रशासित कीमतें व ब्याज दरेंबाज़ार संकेत कमज़ोर
धीमी वृद्धिप्रो. राज कृष्ण ने इसे "हिंदू वृद्धि दर" (Hindu Rate of Growth) कहा

"लाइसेंस-परमिट राज" शब्द प्रायः सी. राजगोपालाचारी से जोड़ा जाता है, जो इस व्यवस्था के प्रखर आलोचक थे।


6. बैंकों का राष्ट्रीयकरण

वर्ष / तिथिघटनामानदंड / टिप्पणी
1921तीन प्रेसीडेंसी बैंकों (बंगाल, बॉम्बे, मद्रास) के विलय से इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया—
1949भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण; बैंकिंग विनियमन अधिनियमRBI 1 जनवरी 1949 से सरकारी
1 जुलाई 1955इंपीरियल बैंक → भारतीय स्टेट बैंक (SBI)अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण समिति (ए.डी. गोरवाला) की सिफ़ारिश
19 जुलाई 196914 वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण₹50 करोड़ से अधिक जमा वाले बैंक; प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
15 अप्रैल 19806 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण₹200 करोड़ से अधिक जमा वाले बैंक
1993न्यू बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलयराष्ट्रीयकृत बैंकों का पहला विलय

राष्ट्रीयकरण के उद्देश्य: बैंकिंग को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना, कृषि व लघु उद्योग जैसे प्राथमिकता क्षेत्रों को ऋण, ऋण पर कुछ बड़े औद्योगिक घरानों के नियंत्रण को समाप्त करना और बचत को योजना-प्राथमिकताओं की ओर मोड़ना। इसी दौर में अग्रणी बैंक योजना (Lead Bank Scheme, 1969) शुरू हुई। RBI, मौद्रिक नीति और बैंकों की संरचना का विस्तार मुद्रा, बैंकिंग और RBI की मौद्रिक नीति वाले नोट में है।


7. 1991 का आर्थिक संकट

1991 का संकट मूलतः भुगतान संतुलन (Balance of Payments) संकट था: भारत के पास आयात का भुगतान करने और विदेशी ऋण चुकाने लायक विदेशी मुद्रा नहीं बची थी। NCERT के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार इतना घट गया था कि वह लगभग दो सप्ताह के आयात के लिए भी पर्याप्त नहीं था।

कारणविवरण
भारी राजकोषीय घाटासरकारी व्यय राजस्व से बहुत अधिक; उधार पर निर्भरता
खाड़ी युद्ध (1990-91)तेल की कीमतों में उछाल; खाड़ी से प्रवासी आय घटी
चालू खाते का घाटाआयात निर्यात से बहुत अधिक
विदेशी ऋण का बोझअल्पकालिक ऋण बढ़े, क्रेडिट रेटिंग गिरी
NRI जमा की निकासीविश्वास घटने से विदेशी मुद्रा बाहर गई
राजनीतिक अस्थिरता1989-91 के बीच कई सरकारें
मुद्रास्फीतिऊँची कीमतें, विशेषकर आवश्यक वस्तुओं की

तात्कालिक कदम: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से ऋण लिया और भंडार के लिए सोना गिरवी रखा। IMF ऋण के साथ सुधारों की शर्तें जुड़ी थीं। NCERT सुधारों को दो भागों में बाँटता है:

प्रकारअवधिउद्देश्य
स्थिरीकरण उपाय (Stabilisation Measures)अल्पकालिकभुगतान संतुलन सुधारना, मुद्रास्फीति नियंत्रित करना, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार
संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms)दीर्घकालिकअर्थव्यवस्था की दक्षता व अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, कठोरताएँ हटाना

8. नई आर्थिक नीति 1991: LPG

जून 1991 में पी.वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने और डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री। 24 जुलाई 1991 को नई औद्योगिक नीति घोषित हुई और उसी दिन केंद्रीय बजट भी प्रस्तुत हुआ। सुधारों को तीन शब्दों — उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), वैश्वीकरण (Globalisation) — में समेटा जाता है।

8.1 उदारीकरण (Liberalisation)

क्षेत्रसुधार
औद्योगिक लाइसेंस18 उद्योगों को छोड़ शेष के लिए लाइसेंस समाप्त (बाद में यह सूची और छोटी हुई)
सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षण17 उद्योगों से घटाकर 8 (बाद में और घटा)
MRTPपरिसंपत्ति-सीमा हटी; विस्तार / विलय के लिए पूर्व अनुमति की बाध्यता समाप्त
विदेशी निवेश34 उच्च-प्राथमिकता उद्योगों में 51% तक FDI को स्वतः अनुमोदन
वित्तीय क्षेत्रब्याज दरों का विनियमन-मुक्तीकरण, निजी बैंकों को प्रवेश, CRR-SLR में कमी (नरसिम्हम समिति)
कर सुधारराजा चेलैया समिति (1991); प्रत्यक्ष कर दरों में कमी, अप्रत्यक्ष करों का सरलीकरण
पूँजी बाज़ारSEBI को वैधानिक दर्जा (1992); पूँजी निर्गम नियंत्रक का पद समाप्त

आज कितने उद्योग लाइसेंस या सार्वजनिक क्षेत्र के आरक्षण में हैं, यह संख्या बाद के संशोधनों से बदल चुकी है; वर्तमान सूची DPIIT की नवीनतम अधिसूचना से जाँचें। परीक्षा में मुख्यतः 1991 की स्थिति (18 और 8) पूछी जाती है।

8.2 निजीकरण (Privatisation) और विनिवेश

बिंदुविवरण
निजीकरणसार्वजनिक उपक्रमों का स्वामित्व या प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपना; निजी क्षेत्र को पहले आरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश
विनिवेश (Disinvestment)सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों का एक भाग बेचना; 1991-92 से शुरू
रंगराजन समिति1993 — सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश पर
विनिवेश विभाग1999 में गठित; 2016 से निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
रणनीतिक बिक्रीनियंत्रण सहित बड़े हिस्से की बिक्री (विनिवेश का एक रूप)
नवरत्न / महारत्नअच्छा प्रदर्शन करने वाले उपक्रमों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता

विनिवेश के वार्षिक लक्ष्य हर बजट में बदलते हैं; इन्हें तथ्य के रूप में याद न करें।

8.3 वैश्वीकरण (Globalisation)

सुधारविवरण
रुपये का अवमूल्यनजुलाई 1991 में दो चरणों में — निर्यात सस्ता, आयात महँगा
विनिमय दर1992 में LERMS (उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली), 1993 से बाज़ार-निर्धारित विनिमय दर
चालू खाते पर परिवर्तनीयता1994 से रुपया चालू खाते पर पूर्ण परिवर्तनीय
व्यापार उदारीकरणसीमा शुल्क व आयात कोटा में कमी, आयात लाइसेंस का बड़ा हिस्सा समाप्त
WTO1 जनवरी 1995 को स्थापना; भारत संस्थापक सदस्य
FERA → FEMAनियंत्रण की जगह प्रबंधन — नीचे तालिका

8.4 FERA बनाम FEMA

आधारFERAFEMA
पूरा नामForeign Exchange Regulation ActForeign Exchange Management Act
वर्ष1973 (1974 से लागू)1999 (1 जून 2000 से लागू)
दृष्टिकोणविदेशी मुद्रा का नियंत्रण / विनियमन — विदेशी मुद्रा की कमी मानकरविदेशी मुद्रा का प्रबंधन — व्यापार व भुगतान को सुगम बनाना
उल्लंघन की प्रकृतिआपराधिक (Criminal) अपराधदीवानी (Civil) अपराध
प्रवर्तनप्रवर्तन निदेशालयप्रवर्तन निदेशालय (दीवानी प्रक्रिया)

9. नरसिम्हम समिति: बैंकिंग सुधार

समितिवर्षविषयप्रमुख सिफ़ारिशें
नरसिम्हम समिति-I1991वित्तीय प्रणाली (Committee on the Financial System)CRR व SLR में चरणबद्ध कमी; ब्याज दरों का विनियमन-मुक्तीकरण; पूँजी पर्याप्तता व आय-पहचान के विवेकपूर्ण मानदंड; निजी व विदेशी बैंकों को प्रवेश; निर्देशित ऋण (प्राथमिकता क्षेत्र) का पुनरीक्षण; ऋण वसूली न्यायाधिकरण
नरसिम्हम समिति-II1998बैंकिंग क्षेत्र सुधार (Committee on Banking Sector Reforms)बैंकों का विलय कर बड़े मज़बूत बैंक; पूँजी पर्याप्तता बढ़ाना; NPA में कमी; बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाना; प्रबंधन की स्वायत्तता

समिति के अध्यक्ष एम. नरसिम्हम RBI के पूर्व गवर्नर थे। ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) 1993 के अधिनियम से बने; बाद में SARFAESI अधिनियम 2002 और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) 2016 आए।


10. सुधारों का मूल्यांकन (संक्षेप में)

सकारात्मक पक्षआलोचनाएँ
विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, BoP संकट से उबरनाकृषि की उपेक्षा का आरोप; कृषि में सार्वजनिक निवेश घटा
सेवा क्षेत्र (विशेषकर IT) का तेज़ विकासरोज़गार-विहीन वृद्धि (Jobless Growth) की चिंता
FDI और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में वृद्धिक्षेत्रीय और आय असमानता बढ़ने का आरोप
उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, प्रतिस्पर्धालघु उद्योगों पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का दबाव
दूरसंचार, विमानन जैसे क्षेत्रों का विस्तारविनिवेश से प्राप्त राशि का उपयोग घाटा पूरा करने में

NCERT कक्षा 11 का अध्याय "उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण: एक समीक्षा" दोनों पक्ष प्रस्तुत करता है; मुख्य परीक्षा के उत्तरों में संतुलित दृष्टिकोण रखें।


11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: 1991 का संकट "राजकोषीय संकट" या "बैंकिंग संकट"

राजकोषीय घाटा कारण था, पर संकट का स्वरूप भुगतान संतुलन (BoP) संकट था — विदेशी मुद्रा भंडार की कमी।

Trap 2: 1991 में वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को उलटना

प्रधानमंत्री — पी.वी. नरसिम्हा राव; वित्त मंत्री — डॉ. मनमोहन सिंह। मनमोहन सिंह 2004 में प्रधानमंत्री बने।

Trap 3: राष्ट्रीयकरण की संख्याएँ

1969 — 14 बैंक (₹50 करोड़ से अधिक जमा), 1980 — 6 बैंक (₹200 करोड़ से अधिक जमा)। कुल 20; 1969 और 1980 की संख्याएँ आपस में न बदलें।

Trap 4: FEMA का वर्ष

FEMA 1999 में पारित हुआ, पर 1 जून 2000 से लागू हुआ। FERA 1973 का था। "FEMA 1991 में आया" — गलत।

Trap 5: FEMA उल्लंघन आपराधिक

FERA में उल्लंघन आपराधिक था; FEMA में दीवानी। यही दोनों का मूल अंतर है।

Trap 6: 1956 की अनुसूचियाँ

अनुसूची A में 17, अनुसूची B में 12 उद्योग। 1991 में सार्वजनिक क्षेत्र का आरक्षण 17 से घटकर 8 हुआ — दोनों "17" को अलग संदर्भ में याद रखें।

Trap 7: मिश्रित अर्थव्यवस्था की नींव

नींव 1948 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने रखी; 1956 को "आर्थिक संविधान" कहा गया। "1956 ने पहली बार मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई" — सटीक नहीं।

Trap 8: नरसिम्हम समिति-I का विषय

1991 की समिति वित्तीय प्रणाली पर थी, 1998 की बैंकिंग क्षेत्र सुधार पर। दोनों के अध्यक्ष एम. नरसिम्हम।

Trap 9: MRTP का उत्तराधिकारी

MRTP की जगह प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 आया, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम नहीं।

Trap 10: GDP और रोज़गार में सबसे बड़ा क्षेत्र एक ही मानना

GDP में सबसे बड़ा — तृतीयक; रोज़गार में सबसे बड़ा (NCERT) — प्राथमिक।


12. Most-Asked रिवीज़न तालिका

#प्रश्न / बिंदुउत्तर
1भारत की अर्थव्यवस्था का प्रकारमिश्रित
2"The Wealth of Nations" के लेखकएडम स्मिथ (1776)
3"अदृश्य हाथ" का विचारएडम स्मिथ
4अहस्तक्षेप (Laissez-faire) किस व्यवस्था से जुड़ापूँजीवाद
5केंद्रीय नियोजन किस व्यवस्था की विशेषतासमाजवाद
6"समाजवादी ढंग का समाज" का लक्ष्यआवडी अधिवेशन, 1955
7प्रस्तावना में "समाजवादी" शब्द42वाँ संशोधन, 1976
8प्राथमिक क्षेत्रकृषि, पशुपालन, मत्स्य, वानिकी
9द्वितीयक क्षेत्रविनिर्माण, निर्माण, बिजली-गैस-जल
10तृतीयक क्षेत्रसेवाएँ — व्यापार, परिवहन, बैंकिंग आदि
11चतुर्थक क्षेत्रज्ञान-आधारित — R&D, IT, परामर्श
12"गोल्ड कॉलर"पंचम क्षेत्र
13GDP में सबसे बड़ा क्षेत्रतृतीयक
14रोज़गार में सबसे बड़ा क्षेत्र (NCERT)प्राथमिक
15संगठित क्षेत्र की पहचानपंजीकृत, नियमों का पालन, नियमित रोज़गार
16पहला औद्योगिक नीति प्रस्ताव1948
17उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम1951
18"आर्थिक संविधान"औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956
191956 — अनुसूची A17 उद्योग, केवल राज्य
201956 — अनुसूची B12 उद्योग
21MRTP अधिनियम1969
22MRTP का उत्तराधिकारीप्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (CCI)
23"हिंदू वृद्धि दर" शब्दप्रो. राज कृष्ण
24इंपीरियल बैंक की स्थापना1921
25SBI की स्थापना1 जुलाई 1955
26SBI — किस समिति की सिफ़ारिशअखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण समिति (गोरवाला)
27प्रथम बैंक राष्ट्रीयकरण19 जुलाई 1969 — 14 बैंक
28द्वितीय बैंक राष्ट्रीयकरण15 अप्रैल 1980 — 6 बैंक
291969 राष्ट्रीयकरण का जमा मानदंड₹50 करोड़ से अधिक
301980 राष्ट्रीयकरण का जमा मानदंड₹200 करोड़ से अधिक
311969 में प्रधानमंत्रीइंदिरा गांधी
32अग्रणी बैंक योजना1969
331991 संकट का स्वरूपभुगतान संतुलन संकट
341991 में प्रधानमंत्रीपी.वी. नरसिम्हा राव
351991 में वित्त मंत्रीडॉ. मनमोहन सिंह
36नई औद्योगिक नीति की तिथि24 जुलाई 1991
37LPGउदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण
38स्थिरीकरण बनाम संरचनात्मक उपायअल्पकालिक बनाम दीर्घकालिक
391991 में लाइसेंस अनिवार्य18 उद्योग
401991 में सार्वजनिक क्षेत्र आरक्षण17 → 8
411991 में FDI स्वतः अनुमोदन34 उद्योगों में 51% तक
42रुपये का अवमूल्यनजुलाई 1991, दो चरण
43बाज़ार-निर्धारित विनिमय दर1993
44चालू खाते पर परिवर्तनीयता1994
45FERA1973 — नियंत्रण, आपराधिक
46FEMA1999, लागू 1 जून 2000 — प्रबंधन, दीवानी
47नरसिम्हम समिति-I1991, वित्तीय प्रणाली
48नरसिम्हम समिति-II1998, बैंकिंग क्षेत्र सुधार
49कर सुधार समिति (1991)राजा चेलैया
50विनिवेश समिति (1993)सी. रंगराजन
51DIPAM2016 से (पूर्व में विनिवेश विभाग, 1999)
52SEBI को वैधानिक दर्जा1992
53WTO की स्थापना1 जनवरी 1995; भारत संस्थापक सदस्य
54SARFAESI / IBC2002 / 2016

13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस अध्याय के प्रश्न प्रायः तथ्य-मिलान और कथन-विश्लेषण के रूप में आते हैं। नीचे स्वयं तैयार किए गए नमूना-प्रश्न हैं:

  1. प्रत्यक्ष तथ्य: "1969 में कितने बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ?" — 14।
  2. सुमेलन: "सुमेलित करें — (a) FERA (b) FEMA (c) MRTP (d) प्रतिस्पर्धा अधिनियम ↔ 1969, 1973, 1999, 2002" — FERA-1973, FEMA-1999, MRTP-1969, प्रतिस्पर्धा-2002।
  3. कथन (UPSC शैली): "कथन 1: FEMA के उल्लंघन दीवानी अपराध हैं। कथन 2: FEMA 1991 के बजट के साथ लागू हुआ।" — केवल 1 सही।
  4. क्षेत्र वर्गीकरण: "मछली पकड़ना, बैंकिंग, कपड़ा मिल — क्रमशः किस क्षेत्र में?" — प्राथमिक, तृतीयक, द्वितीयक।
  5. कारण-प्रभाव: "1991 के भुगतान संतुलन संकट का तात्कालिक कारण क्या नहीं था?" — विकल्पों में खाड़ी युद्ध, NRI जमा निकासी, राजकोषीय घाटा और (गलत) "WTO की सदस्यता"।
  6. कालक्रम: "सही क्रम: IPR 1956, MRTP, FERA, नई औद्योगिक नीति" — 1956 → 1969 → 1973 → 1991।

रणनीति: वर्षों को एक कालरेखा में याद करें — 1948, 1951, 1955, 1956, 1969, 1973, 1980, 1991, 1999/2000, 2002। बैंकिंग परीक्षाओं के लिए IBPS PO / SBI Clerk प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ 2026 और राज्य स्तर के लिए RPSC RAS प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ 2026 में ऐसे प्रश्नों का अभ्यास करें।


14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. राष्ट्रीयकरण — "69 में 14, 80 में 6": पहले बड़ा झुंड (14), फिर छोटा (6); जमा-सीमा भी 50 से बढ़कर 200 करोड़। कुल 14 + 6 = 20।

2. FERA → FEMA — "R से M": Regulation (नियंत्रण, अपराध) से Management (प्रबंधन, दीवानी); "73 से 99"।

3. 1956 — "17-12-शेष": A-17, B-12, C-बाकी।

4. 1991 — "18 लाइसेंस, 8 आरक्षण, 34 में 51": 18 उद्योगों में लाइसेंस, 8 सार्वजनिक क्षेत्र में, 34 उद्योगों में 51% FDI स्वतः।

5. 1991 की जोड़ी — "राव-राज, सिंह-ख़ज़ाना": नरसिम्हा राव (प्रधानमंत्री), मनमोहन सिंह (वित्त)।

6. नरसिम्हम — "91 वित्त, 98 बैंक": पहली समिति वित्तीय प्रणाली, दूसरी बैंकिंग क्षेत्र सुधार।

7. क्षेत्र — "प्रकृति, फैक्ट्री, फ़ाइल, फ़ॉर्मूला": प्राथमिक (प्रकृति), द्वितीयक (फैक्ट्री), तृतीयक (फ़ाइल-सेवा), चतुर्थक (ज्ञान-फ़ॉर्मूला)।


15. कथन अभ्यास

भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है। — सही।

"The Wealth of Nations" के लेखक कार्ल मार्क्स हैं। — गलत (एडम स्मिथ, 1776)।

1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव की अनुसूची A में 17 उद्योग थे। — सही।

MRTP अधिनियम 1973 में पारित हुआ। — गलत (1969; 1973 FERA का वर्ष है)।

19 जुलाई 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। — सही।

1980 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। — गलत (1980 में 6 बैंक)।

1991 का संकट मूलतः भुगतान संतुलन संकट था। — सही।

1991 के आर्थिक सुधारों के समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। — गलत (प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव; मनमोहन सिंह वित्त मंत्री)।

नई औद्योगिक नीति 1991 में 18 उद्योगों को छोड़ शेष के लिए लाइसेंस समाप्त किया गया। — सही।

FEMA के अंतर्गत उल्लंघन आपराधिक अपराध माने जाते हैं। — गलत (दीवानी; FERA में आपराधिक थे)।

नरसिम्हम समिति-I (1991) वित्तीय प्रणाली से संबंधित थी। — सही।

MRTP अधिनियम का स्थान उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ने लिया। — गलत (प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002)।


16. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ

  1. पूँजीवाद — निजी स्वामित्व, बाज़ार; एडम स्मिथ, "Wealth of Nations" 1776
  2. समाजवाद — राज्य स्वामित्व, केंद्रीय नियोजन; कार्ल मार्क्स
  3. भारत — मिश्रित; नींव IPR 1948; "आर्थिक संविधान" IPR 1956
  4. IPR 1956: अनुसूची A — 17, B — 12, C — शेष
  5. IDR अधिनियम 1951 → लाइसेंस-परमिट राज
  6. MRTP 1969 → प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (CCI)
  7. क्षेत्र: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक (ज्ञान); GDP में सबसे बड़ा तृतीयक
  8. SBI 1955; राष्ट्रीयकरण 1969 (14, ₹50 करोड़) व 1980 (6, ₹200 करोड़)
  9. 1991 — भुगतान संतुलन संकट; IMF ऋण, सोना गिरवी
  10. प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव, वित्त मंत्री मनमोहन सिंह; नई औद्योगिक नीति 24 जुलाई 1991
  11. 1991: लाइसेंस केवल 18 उद्योग; सार्वजनिक क्षेत्र आरक्षण 17 → 8; 34 उद्योगों में 51% FDI
  12. अवमूल्यन जुलाई 1991; बाज़ार विनिमय दर 1993; चालू खाता परिवर्तनीयता 1994
  13. FERA 1973 (आपराधिक) → FEMA 1999, लागू 2000 (दीवानी)
  14. नरसिम्हम-I 1991 (वित्तीय प्रणाली), II 1998 (बैंकिंग सुधार); विनिवेश — रंगराजन 1993

17. अभ्यास

इस पृष्ठ के अंत में 25 प्रश्नों का क्विज़ दिया गया है — अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र, औद्योगिक नीतियाँ, बैंक राष्ट्रीयकरण और 1991 के सुधार। गलत उत्तर वाले प्रश्नों के वर्ष ऊपर की कालरेखा में दोबारा देखें। राष्ट्रीय आय की शब्दावली (GDP, GVA) पर पकड़ के लिए राष्ट्रीय आय: GDP, GNP, NDP, NNP वाला नोट साथ में पढ़ें, और पूर्ण मॉक के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ हल करें।


18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

भारत ने स्वतंत्रता के बाद मिश्रित अर्थव्यवस्था का रास्ता चुना, जिसमें 1948 और 1956 की औद्योगिक नीतियों, लाइसेंस व्यवस्था, MRTP और बैंक राष्ट्रीयकरण के माध्यम से राज्य को अर्थव्यवस्था की "ऊँचाइयों" पर रखा गया। इस मॉडल ने आधारभूत उद्योग खड़े किए, पर धीमी वृद्धि, अदक्षता और राजकोषीय दबाव भी पैदा किए, जो 1991 के भुगतान संतुलन संकट में चरम पर पहुँचे। नरसिम्हा राव-मनमोहन सिंह की नई आर्थिक नीति ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के माध्यम से नियंत्रण की जगह प्रतिस्पर्धा और प्रबंधन को रखा — FERA से FEMA का बदलाव इसका प्रतीक है। परीक्षा के लिए वर्षों की कालरेखा, 1956 व 1991 की संख्याएँ (17-12, 18-8) और राष्ट्रीयकरण (14-6) सबसे महत्वपूर्ण हैं; वर्तमान लाइसेंस सूची या विनिवेश लक्ष्य जैसे बदलते आँकड़े आधिकारिक स्रोत से ही लें।

मिश्रित अर्थव्यवस्था (1948, 1956) | MRTP 1969 | राष्ट्रीयकरण 1969 (14) व 1980 (6) | 1991 BoP संकट → LPG (राव-मनमोहन) | लाइसेंस 18, आरक्षण 8 | FERA 1973 → FEMA 1999/2000 | नरसिम्हम 1991


अंतिम संशोधन (Last Updated):
RPSC / RSSB सिलेबस के अनुसार
भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखकलेखक परिचय

इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?

“अर्थव्यवस्था के प्रकार, क्षेत्र और 1991 के आर्थिक सुधार — LPG, औद्योगिक नीति, बैंक राष्ट्रीयकरण — RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र साथ काम करते हैं। इसकी नींव 1948 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने रखी।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधन निजी हाथों में होते हैं और निर्णय बाज़ार करता है, जबकि समाजवादी अर्थव्यवस्था में साधनों पर राज्य का स्वामित्व होता है और निर्णय केंद्रीय नियोजन से होते हैं।

प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, मत्स्य व वानिकी, द्वितीयक में विनिर्माण व निर्माण, और तृतीयक में व्यापार, परिवहन, बैंकिंग जैसी सेवाएँ आती हैं। ज्ञान-आधारित सेवाओं को चतुर्थक क्षेत्र कहा जाता है।

1991 का संकट भुगतान संतुलन संकट था, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार इतना घट गया कि आयात का भुगतान कठिन हो गया। इसके कारणों में राजकोषीय घाटा, खाड़ी युद्ध से तेल कीमतों में वृद्धि और NRI जमा की निकासी शामिल थे।

LPG का अर्थ है Liberalisation (उदारीकरण), Privatisation (निजीकरण) और Globalisation (वैश्वीकरण)। ये 1991 की नई आर्थिक नीति के तीन स्तंभ हैं।

प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। नई औद्योगिक नीति 24 जुलाई 1991 को घोषित हुई।

19 जुलाई 1969 को ₹50 करोड़ से अधिक जमा वाले 14 बैंकों का और 15 अप्रैल 1980 को ₹200 करोड़ से अधिक जमा वाले 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।

FERA (1973) विदेशी मुद्रा पर नियंत्रण का कानून था जिसमें उल्लंघन आपराधिक थे, जबकि FEMA (1999, लागू 1 जून 2000) विदेशी मुद्रा के प्रबंधन का कानून है जिसमें उल्लंघन दीवानी माने जाते हैं।

नरसिम्हम समिति-I (1991) वित्तीय प्रणाली पर और समिति-II (1998) बैंकिंग क्षेत्र सुधार पर थी। इनकी सिफ़ारिशों पर CRR-SLR में कमी, ब्याज दरों का विनियमन-मुक्तीकरण और निजी बैंकों को प्रवेश मिला।

क्योंकि इसने उद्योगों को तीन अनुसूचियों (A में 17, B में 12, C में शेष) में बाँटकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भूमिका दशकों के लिए तय कर दी। यह समाजवादी ढंग के समाज के लक्ष्य पर आधारित था।

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