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राजस्थान के संत एवं सम्प्रदाय: संपूर्ण Master Guide

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के संत एवं सम्प्रदाय: संपूर्ण Master Guide

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के संत-सम्प्रदायों को तीन बड़े वर्गों में बाँटा जाता है — (1) निर्गुण संत सम्प्रदाय: बिश्नोई (जाम्भोजी, मुकाम), जसनाथी (जसनाथ जी, कतरियासर), दादू पंथ (दादूदयाल, नरैना), रामस्नेही (रामचरण जी, शाहपुरा), लालदासी (लालदास जी, अलवर), निरंजनी (हरिदास जी, डीडवाना); (2) सगुण वैष्णव सम्प्रदाय: वल्लभ/पुष्टिमार्ग (नाथद्वारा), निम्बार्क (सलेमाबाद), रामानंदी (गलता), गौड़ीय (गोविंददेवजी, जयपुर), चरणदासी (चरणदास जी — निर्गुण-सगुण समन्वय); (3) अन्य परंपराएँ: नाथ सम्प्रदाय (महामंदिर, जोधपुर), सूफ़ी चिश्ती परंपरा (ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, अजमेर)। प्रमुख व्यक्तिगत संत — मीराबाई, पीपाजी, धन्नाजी, मावजी, गवरी बाई।

1. राजस्थान की संत परंपरा — परिचय

15वीं से 18वीं शताब्दी के बीच राजस्थान में संतों की ऐसी शृंखला उभरी जिसने जाति-भेद, आडंबर, कर्मकांड और हिंसा के विरुद्ध आवाज़ उठाई और सरल भक्ति, सदाचार, जीव-दया और पर्यावरण-रक्षा का संदेश दिया। ये संत प्रायः साधारण परिवारों — किसान, बुनकर, धुनिया, चारण — से आए और लोकभाषा (मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, वागड़ी) में वाणी कहकर जन-जन तक पहुँचे। इसी कारण राजस्थान को ‘संतों की भूमि’ भी कहा जाता है।

तथ्यविवरण
प्रमुख काल15वीं–18वीं शताब्दी (भक्ति आंदोलन का राजस्थानी चरण)
सबसे पुराना निर्गुण पंथ (राजस्थान)बिश्नोई (1485) — लगभग साथ में जसनाथी
भाषामारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, वागड़ी, ब्रज मिश्रित ‘सधुक्कड़ी’
साहित्य-रूपवाणी, सबद, साखी, पद, दूहा, अणभै वाणी
उपासना-स्थलरामद्वारा, दादूद्वारा, साथरी, बाड़ी, हवेली
मुख्य संदेशएकेश्वर, नाम-स्मरण, गुरु-महिमा, जीव-दया, समानता

2. सम्प्रदायों का वर्गीकरण

2.1 निर्गुण संत सम्प्रदाय (निराकार ईश्वर)

सम्प्रदायसंस्थापकप्रमुख पीठएक-पंक्ति पहचान
बिश्नोईजाम्भोजी (1451–1526)मुकाम (नोखा, बीकानेर)29 नियम; समराथल धोरा पर 1485 में स्थापना; पर्यावरण-रक्षा
जसनाथीजसनाथ जी (1482–1506)कतरियासर (बीकानेर)36 नियम; अग्नि नृत्य; गुरु गोरखनाथ
दादू पंथदादूदयाल (1544–1603)नरैना (जयपुर)‘राजस्थान का कबीर’; 1574 सांभर में स्थापना
रामस्नेहीरामचरण जी (1720–1798)शाहपुरा (भीलवाड़ा)रामद्वारा; गुलाबी वस्त्र; फूलडोल मेला
लालदासीलालदास जी (1540–1648)शेरपुर/धोलीदूव (अलवर)मेव समुदाय; श्रम की कमाई
निरंजनीहरिदास जी (हरिपुरुष)गाढ़ा धाम, डीडवानाडाकू से संत; निर्गुण-सगुण समन्वय

2.2 सगुण वैष्णव सम्प्रदाय (साकार ईश्वर)

सम्प्रदायआचार्य/संस्थापकराजस्थान में प्रमुख केंद्रदर्शन
वल्लभ/पुष्टिमार्गवल्लभाचार्यनाथद्वारा, कांकरोली, कोटा, कामांशुद्धाद्वैत; बाल-कृष्ण सेवा
निम्बार्कनिम्बार्काचार्य; राजस्थान पीठ — परशुरामदेवाचार्यसलेमाबाद (किशनगढ़, अजमेर)द्वैताद्वैत; राधा-कृष्ण युगल
रामानंदीरामानंद; राजस्थान में कृष्णदास पयहारीगलता (जयपुर)राम-भक्ति; ‘उत्तर तोताद्रि’
गौड़ीयचैतन्य महाप्रभुगोविंददेवजी (जयपुर), मदनमोहनजी (करौली)अचिंत्य भेदाभेद; कृष्ण-कीर्तन
चरणदासीचरणदास जी (1703–1782)मेवात-अलवर; मुख्य पीठ दिल्लीनिर्गुण-सगुण समन्वय; 42 नियम

2.3 अन्य परंपराएँ

  • नाथ सम्प्रदाय: जोधपुर का महामंदिर (महाराजा मानसिंह, 1805) — ‘माननाथी’ शाखा; पुष्कर के पास राताडूंगा — ‘वैराग पंथ’। जसनाथ जी और गोगाजी पर गोरखनाथ का प्रभाव।
  • सूफ़ी परंपरा: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेर, ‘गरीब नवाज़’; उर्स रजब 1–6), हमीदुद्दीन नागौरी (नागौर, ‘सुल्तान-उत-तारकीन’), नरहड़ दरगाह (झुंझुनूं; जन्माष्टमी पर मेला), पीर फखरुद्दीन (गलियाकोट, डूंगरपुर — दाऊदी बोहरा)।
  • वागड़ की संत परंपरा: संत मावजी (साबला, डूंगरपुर; बेणेश्वर; ‘चोपड़ा’ ग्रंथ), गवरी बाई (‘वागड़ की मीरा’), दुर्लभ जी (‘राजस्थान का नृसिंह’)।

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3. प्रमुख व्यक्तिगत संत (बिना पंथ-स्थापना के भी प्रसिद्ध)

संतक्षेत्रस्मरणीय तथ्य
मीराबाईकुड़की–मेड़ता–चित्तौड़कृष्ण-भक्ति; गुरु रैदास; ‘पदावली’, ‘नरसीजी रो माहेरो’
पीपाजीगागरोन (झालावाड़)खींची शासक प्रतापसिंह; रामानंद शिष्य; दर्जी समाज के आराध्य
धन्नाजीधुवन (टोंक)जाट किसान; रामानंद शिष्य; गुरु ग्रंथ साहिब में पद
संत मावजीसाबला (डूंगरपुर)निष्कलंक सम्प्रदाय; बेणेश्वर धाम; ‘चोपड़ा’
करमा बाईकालवा (नागौर)जगन्नाथ को खीचड़ा खिलाने की कथा
गवरी बाईडूंगरपुर‘वागड़ की मीरा’
राना बाईहरनावां (नागौर)‘राजस्थान की दूसरी मीरा’
सहजोबाई, दयाबाईडेहरा (अलवर)चरणदास जी की शिष्याएँ

संतों की रचनाओं की पूरी सूची: राजस्थान के प्रमुख संत एवं उनकी रचनाएँ | मीराबाई पर विस्तृत लेख: मीराबाई — जीवन एवं भक्ति साहित्य

4. कालक्रम (Timeline) — याद रखने का सबसे आसान तरीका

वर्ष (लगभग)घटना
15वीं सदीपीपाजी, धन्नाजी — रामानंद के शिष्य
1451जाम्भोजी का जन्म (पीपासर, नागौर)
1482जसनाथ जी का जन्म (कतरियासर)
1485समराथल धोरा पर बिश्नोई पंथ की स्थापना
1498मीराबाई का जन्म (कुड़की)
1544दादूदयाल का जन्म (अहमदाबाद)
1574दादू द्वारा सांभर में पंथ की स्थापना
1585दादू-अकबर भेंट (फतेहपुर सीकरी)
1672श्रीनाथजी की मूर्ति सिहाड़ (नाथद्वारा) में प्रतिष्ठित
1703चरणदास जी का जन्म (डेहरा, अलवर)
1720रामचरण जी का जन्म (सोडा, टोंक)
1730खेजड़ली बलिदान — अमृता देवी व 363 बिश्नोई

5. क्षेत्र-वार संत-मानचित्र

अंचलसंत/सम्प्रदाय
बीकानेर-नागौर (उत्तर-पश्चिम)जाम्भोजी (बिश्नोई), जसनाथ जी, हरिदास जी (डीडवाना), रैण-सिंहथल-खेड़ापा (रामस्नेही शाखाएँ), करमा बाई, हमीदुद्दीन नागौरी
ढूंढाड़ (जयपुर-टोंक)दादूदयाल (नरैना), गलता (रामानंदी), गोविंददेवजी (गौड़ीय), धन्नाजी (टोंक), रामचरण जी का जन्म (सोडा)
मेवात (अलवर)लालदास जी, चरणदास जी, सहजोबाई-दयाबाई
मेवाड़-भीलवाड़ानाथद्वारा, कांकरोली (वल्लभ), शाहपुरा (रामस्नेही), मीराबाई (चित्तौड़)
अजमेरसलेमाबाद (निम्बार्क), ख्वाजा साहब की दरगाह
हाड़ौतीपीपाजी (गागरोन), मथुरेशजी (कोटा)
वागड़मावजी, गवरी बाई, दुर्लभ जी, गलियाकोट

6. राजस्थानी संत परंपरा की सामान्य विशेषताएँ

  1. गुरु-महिमा: गुरु को ईश्वर-प्राप्ति का द्वार माना।
  2. नाम-स्मरण: राम/हरि नाम का जप — मूर्ति-पूजा का विरोध (निर्गुण पंथों में)।
  3. जाति-विरोध: अनुयायियों में सभी जातियाँ — किसान, मेव, मेघवाल, जाट।
  4. आचार-संहिता: नियमों की निश्चित सूची — बिश्नोई 29, जसनाथी 36, चरणदासी 42।
  5. पर्यावरण-चेतना: हरे वृक्ष व जीव-रक्षा (बिश्नोई, जसनाथी)।
  6. लोकभाषा साहित्य: वाणी-साहित्य ने राजस्थानी भाषा को समृद्ध किया।
  7. सामाजिक संस्थाएँ: रामद्वारा, दादूद्वारा जैसे केंद्रों से शिक्षा व सेवा।

भक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि व प्रभाव: राजस्थान में भक्ति आंदोलन | सभी सम्प्रदायों की बहु-आयामी तालिका: संत–सम्प्रदाय–स्थान–सिद्धांत तुलनात्मक तालिका

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. बिश्नोई पंथ के संस्थापक — जाम्भोजी; नियम — 29
  2. जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ — कतरियासर (बीकानेर)
  3. ‘राजस्थान का कबीर’ — दादूदयाल
  4. दादू पंथ की प्रधान पीठ — नरैना
  5. रामस्नेही सम्प्रदाय (शाहपुरा शाखा) के संस्थापक — रामचरण जी
  6. रामस्नेहियों का उपासना-स्थल — रामद्वारा
  7. निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक — हरिदास जी (डीडवाना)
  8. मेव समुदाय से जुड़ा पंथ — लालदासी
  9. निम्बार्क पीठ — सलेमाबाद (अजमेर)
  10. रामानंदी पीठ — गलता (जयपुर)
  11. श्रीनाथजी मंदिर — नाथद्वारा (राजसमंद)
  12. चरणदासी सम्प्रदाय के नियम — 42
  13. महामंदिर (नाथ) — जोधपुर, मानसिंह
  14. ‘वागड़ की मीरा’ — गवरी बाई
  15. ‘गरीब नवाज़’ — ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • निर्गुण: बिश्नोई, जसनाथी, दादू, रामस्नेही, लालदासी, निरंजनी।
  • सगुण: वल्लभ, निम्बार्क, रामानंदी, गौड़ीय; समन्वयवादी: चरणदासी, निरंजनी।
  • नियम: 29 (बिश्नोई), 36 (जसनाथी), 42 (चरणदासी)।
  • उपासना-स्थल: रामद्वारा (रामस्नेही), दादूद्वारा (दादू), साथरी (बिश्नोई), बाड़ी (जसनाथी), हवेली (पुष्टिमार्ग)।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • दादूदयाल का जन्म अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ, पर कर्मभूमि राजस्थान — ‘जन्मस्थान राजस्थान’ वाला विकल्प गलत।
  • रामस्नेही की चार शाखाएँ — केवल शाहपुरा नहीं; रैण, सिंहथल, खेड़ापा भी।
  • चरणदासी की मुख्य पीठ दिल्ली है, जन्मस्थान अलवर।
  • निम्बार्क — सलेमाबाद, रामानंदी — गलता; दोनों वैष्णव, उल्टा न करें।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“29 का बिश्नोई, 36 का जसनाथी, 42 का चरणदासी” — संख्या बढ़ती है, काल भी आगे बढ़ता है (1485 → 1500 के आसपास → 1750 के आसपास)।

“नरैना में दादू, शाहपुरा में राम, मुकाम में जाम्भो, कतरियासर में जसनाथ”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

संत-सम्प्रदाय खंड RAS व स्कूल व्याख्याता (इतिहास/हिंदी) परीक्षा का ‘हाई-स्कोरिंग’ हिस्सा है। प्रश्न चार प्रकार के होते हैं — संस्थापक-पीठ, रचना-रचनाकार, नियम-संख्या और सामाजिक योगदान। पहले यह Master Guide पढ़ें, फिर तुलनात्मक तालिका से रिवीजन करें। मुख्य परीक्षा में ‘राजस्थान के संतों का सामाजिक योगदान’ पर भाग 6 के सात बिंदु उत्तर का ढाँचा बनाते हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (संत एवं सम्प्रदाय)।
  • डॉ. गोपीनाथ शर्मा — ‘राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा’।
  • डॉ. पेमाराम — ‘मध्यकालीन राजस्थान में धार्मिक आंदोलन’।
  • देवस्थान विभाग, राजस्थान — प्रमुख धार्मिक पीठ एवं मेले।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के संत एवं सम्प्रदाय: संपूर्ण Master Guide

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: संतों के जन्म-वर्ष परंपरागत स्रोतों पर आधारित हैं और विभिन्न पुस्तकों में 1–2 वर्ष का अंतर मिलता है; परीक्षा में सर्वाधिक प्रचलित वर्ष दिए गए हैं। जिलों के नाम वर्तमान प्रशासनिक स्थिति के अनुसार हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. चरणदासी सम्प्रदाय में कितने नियम हैं?

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Q3. निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. मेव समुदाय में लोकप्रिय निर्गुण पंथ है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. ‘वागड़ की मीरा’ किसे कहा जाता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

बिश्नोई (जाम्भोजी), जसनाथी (जसनाथ जी), दादू पंथ (दादूदयाल), रामस्नेही (रामचरण जी), लालदासी (लालदास जी) और निरंजनी (हरिदास जी) राजस्थान के प्रमुख निर्गुण सम्प्रदाय हैं।

निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ सलेमाबाद (किशनगढ़, अजमेर) में और रामानंदी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ गलता (जयपुर) में है।

बिश्नोई सम्प्रदाय में 29, जसनाथी सम्प्रदाय में 36 और चरणदासी सम्प्रदाय में 42 नियम हैं।

दादूदयाल को ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है। उन्होंने 1574 में सांभर में पंथ की स्थापना की और उनकी प्रधान पीठ नरैना (जयपुर) में है।

रामस्नेहियों का रामद्वारा, दादूपंथियों का दादूद्वारा, बिश्नोइयों का साथरी, जसनाथियों का बाड़ी और पुष्टिमार्ग का मंदिर ‘हवेली’ कहलाता है।

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