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राजस्थान के लोक नृत्यों के प्रमुख कलाकार एवं संबंधित समुदाय

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के लोक नृत्यों के प्रमुख कलाकार एवं संबंधित समुदाय

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के लोकनृत्यों के प्रमुख कलाकार — गुलाबो सपेरा (कालबेलिया; पद्मश्री 2016), मांगी बाई (तेरहताली; पादरला, पाली), रूपसिंह शेखावत, दयाराम, तारा शर्मा (भवाई), फलकू बाई (चरी; किशनगढ़); लोकनृत्यों को प्रकाश में लाने वाले — जयनारायण व्यास (ढोल नृत्य, जालौर), देवीलाल सामर (भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर, 1952), कोमल कोठारी (रूपायन संस्थान, बोरूंदा); शास्त्रीय — भानुजी (जयपुर कथक घराने के संस्थापक)। प्रमुख नर्तक समुदाय — कामड़ (तेरहताली), कालबेलिया, भवाई, गुर्जर (चरी), जसनाथी सिद्ध (अग्नि), सरगड़ा-कुम्हार-ढोली-भांभी-बावरी (कच्छी घोड़ी), भील-गरासिया-सहरिया-कंजर-कथौड़ी (जनजातीय नृत्य)।

1. कलाकार व समुदाय — लोकनृत्य की परंपरा के वाहक

राजस्थान के लोकनृत्य मुख्यतः समुदाय-आधारित हैं — किसी नृत्य को किसी एक व्यक्ति ने ‘बनाया’ नहीं, बल्कि पूरा समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसे सँजोता आया है। फिर भी बीसवीं सदी में कुछ कलाकारों ने इन नृत्यों को गाँव की चौपाल से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया और कुछ विद्वानों-संस्थाओं ने इनका संरक्षण किया। परीक्षा में दोनों — कलाकार और समुदाय — पूछे जाते हैं।

नृत्यों की सम्पूर्ण सूची हेतु राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य देखें। यह नोट केवल ‘नृत्य → कलाकार/समुदाय/संरक्षक’ संबंध पर केंद्रित है।

2. प्रमुख लोकनृत्य कलाकार

कलाकारनृत्यक्षेत्रविशेष तथ्य/सम्मान
गुलाबो सपेराकालबेलियाअजमेर क्षेत्रकालबेलिया को विश्व-मंच पर पहुँचाया; पद्मश्री 2016
मांगी बाईतेरहतालीपादरला (पाली)तेरहताली की सबसे प्रसिद्ध कलाकार; राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ
रूपसिंह शेखावतभवाई—भवाई के प्रसिद्ध कलाकार
दयारामभवाई—भवाई कलाकार
तारा शर्माभवाई—भवाई की प्रसिद्ध महिला कलाकार
फलकू बाईचरीकिशनगढ़ (अजमेर)चरी नृत्य की सबसे प्रसिद्ध नृत्यांगना

नृत्यों के विस्तृत नोट्स: कालबेलिया | तेरहताली | भवाई | चरी

3. लोकनृत्यों के संरक्षक, विद्वान व संस्थाएँ

व्यक्ति/संस्थायोगदान
जयनारायण व्यासजालौर के ढोल नृत्य को प्रकाश में लाए (राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री)
देवीलाल सामरभारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर (1952) के संस्थापक — लोकनृत्य, कठपुतली व लोक कलाओं का संरक्षण
कोमल कोठारीरूपायन संस्थान, बोरूंदा (जोधपुर) — लोक संगीत-नृत्य का दस्तावेज़ीकरण; पद्मभूषण 2004
राजस्थान संगीत नाटक अकादमीजोधपुर (1957) — लोक कलाकारों को सम्मान, प्रशिक्षण
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्रउदयपुर (1986) — शिल्पग्राम उत्सव, लोकनृत्य प्रस्तुतियाँ
जयपुर कथक केंद्रजयपुर (1978) — कथक प्रशिक्षण
जवाहर कला केंद्रजयपुर (1993) — लोक व शास्त्रीय कलाओं का मंच

4. नर्तक समुदाय — नृत्य की पहचान

समुदायनृत्यक्षेत्रविशेष
कामड़तेरहतालीपाली (पादरला), पोकरण क्षेत्ररामदेवजी के भक्त; स्त्रियाँ मंजीरे, पुरुष तंदूरा-गायन
कालबेलिया (सपेरा)कालबेलिया, इंडोणी, शंकरिया, पणिहारी, बागड़ियाअजमेर, पाली, जोधपुर आदिनाथ परंपरा से संबद्ध; पूंगी-खंजरी
भवाई जातिभवाईमेवाड़करतब-प्रधान व्यावसायिक नृत्य
गुर्जरचरीकिशनगढ़स्त्रियाँ सिर पर चरी रखकर
जसनाथी सिद्ध (जाट)अग्निकतरियासर (बीकानेर)अंगारों पर नृत्य
सरगड़ा, कुम्हार, ढोली, भांभी, बावरीकच्छी घोड़ीशेखावाटीव्यावसायिक दल
माली, ढोली, सरगड़ा, भीलढोल नृत्यजालौरविवाह; थाकना शैली
बंजारामछलीबाड़मेरचाँदनी रात में युवतियाँ

5. जनजातीय नर्तक समुदाय

जनजातिनृत्यक्षेत्र
भीलगवरी, गैर, युद्ध, द्विचकी, हाथीमना, घूमरा, नेजामेवाड़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर
गरासियावालर, लूर, कूद, मांदल, मोरिया, गौर, जवारा, रायणसिरोही, उदयपुर, पाली
सहरियाशिकारी, लहंगीबारां (शाहबाद, किशनगंज)
कथौड़ीमावलिया, होली नृत्यउदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल)
कंजरचकरी, धाकड़बारां, कोटा, झालावाड़
मेवरणबाजा, रतवईअलवर, भरतपुर (मेवात)

जनजातीय नृत्यों के लिए वालर नृत्य व गवरी; जनजातियों के भूगोल हेतु राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ देखें।

6. शास्त्रीय नृत्य — जयपुर कथक घराना

  • संस्थापक: भानुजी — परंपरा के अनुसार शिव-तांडव के उपासक; उनके वंशजों (लालूजी, कान्हूजी आदि) से घराना आगे बढ़ा।
  • विशेषता: तेज़ और जटिल तत्कार, पखावज के बोल, लयकारी, वीर व भक्ति रस की प्रधानता।
  • अन्य घराने: लखनऊ (भाव-प्रधान, नवाबी दरबार) और बनारस — जयपुर घराना ‘लय व पदचाल’ के लिए प्रसिद्ध।
  • संस्था: जयपुर कथक केंद्र (1978)।

7. लोकनृत्य से जुड़ी अन्य प्रदर्शनकारी परंपराएँ

  • कठपुतली: भाट समुदाय; अमरसिंह राठौड़ के खेल — भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर) द्वारा संरक्षण।
  • लोकनाट्य: ख्याल, रम्मत, तमाशा, स्वांग, गवरी — देखें राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य।
  • फड़-वाचन: भोपा-भोपी का गायन-नृत्य-प्रदर्शन — देखें फड़ चित्रकला।

8. लोक नर्तक समुदायों की चुनौतियाँ व संरक्षण के प्रयास

चुनौतीविवरणसंभावित/वर्तमान प्रयास
आजीविका संकटयजमानी व्यवस्था का कमजोर होना; मौसमी आयपर्यटन उत्सवों, होटलों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नियमित मंच
सामाजिक कलंककालबेलिया जैसे समुदायों का ऐतिहासिक हाशियाकरण; सर्प-प्रदर्शन पर कानूनी प्रतिबंधनृत्य-गायन को मुख्य आजीविका बनाना; UNESCO मान्यता से सम्मान
युवा पीढ़ी का पलायनशहरी रोज़गार की ओर रुझानगुरु-शिष्य परंपरा योजनाएँ, फ़ेलोशिप
व्यावसायीकरणमंचीय रूप में मूल स्वरूप का बदलनादस्तावेज़ीकरण (रूपायन, संगीत नाटक अकादमी), मूल रूप की रिकॉर्डिंग
जोखिमपूर्ण नृत्यभवाई, अग्नि जैसे नृत्यों में शारीरिक जोखिमप्रशिक्षण व सुरक्षा मानक

सकारात्मक उदाहरण: कालबेलिया नृत्य को 2010 में UNESCO मान्यता मिलने के बाद इस समुदाय की युवा पीढ़ी में नृत्य को सम्मानजनक पेशे के रूप में अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है — यह दिखाता है कि मान्यता और मंच, दोनों मिलकर लोक परंपराओं को जीवित रख सकते हैं।

9. Mains उत्तर-ढाँचा: ‘राजस्थान के लोकनृत्यों के संरक्षण में व्यक्तियों व संस्थाओं की भूमिका’

  1. परिचय: लोकनृत्य — सामुदायिक परंपरा; आधुनिक काल में संरक्षण की आवश्यकता।
  2. कलाकार: गुलाबो (कालबेलिया को UNESCO तक), मांगी बाई, फलकू बाई — एक-एक पंक्ति।
  3. संरक्षक: जयनारायण व्यास, देवीलाल सामर, कोमल कोठारी।
  4. संस्थाएँ: संगीत नाटक अकादमी, लोक कला मंडल, WZCC, जवाहर कला केंद्र।
  5. चुनौतियाँ व सुझाव: ऊपर की तालिका से 2-3 बिंदु।

📝 One-Liner Revision — कलाकार व समुदाय (24 प्रश्न)

  1. प्रश्न: कालबेलिया की प्रसिद्ध नृत्यांगना?
    उत्तर: गुलाबो सपेरा
  2. प्रश्न: गुलाबो सपेरा को पद्मश्री?
    उत्तर: 2016
  3. प्रश्न: तेरहताली की प्रसिद्ध कलाकार?
    उत्तर: मांगी बाई
  4. प्रश्न: मांगी बाई का गाँव?
    उत्तर: पादरला (पाली)
  5. प्रश्न: चरी की प्रसिद्ध नृत्यांगना?
    उत्तर: फलकू बाई
  6. प्रश्न: भवाई के प्रसिद्ध कलाकार?
    उत्तर: रूपसिंह शेखावत, दयाराम, तारा शर्मा
  7. प्रश्न: ढोल नृत्य को प्रकाश में लाने वाले?
    उत्तर: जयनारायण व्यास
  8. प्रश्न: भारतीय लोक कला मंडल के संस्थापक?
    उत्तर: देवीलाल सामर
  9. प्रश्न: भारतीय लोक कला मंडल की स्थापना?
    उत्तर: 1952, उदयपुर
  10. प्रश्न: रूपायन संस्थान कहाँ?
    उत्तर: बोरूंदा (जोधपुर)
  11. प्रश्न: जयपुर कथक घराने के संस्थापक?
    उत्तर: भानुजी
  12. प्रश्न: जयपुर कथक केंद्र?
    उत्तर: 1978
  13. प्रश्न: तेरहताली किस समुदाय का?
    उत्तर: कामड़
  14. प्रश्न: चरी किस समुदाय का?
    उत्तर: गुर्जर
  15. प्रश्न: अग्नि नृत्य के नर्तक?
    उत्तर: जसनाथी सिद्ध
  16. प्रश्न: कच्छी घोड़ी के कलाकार समुदाय?
    उत्तर: सरगड़ा, कुम्हार, ढोली, भांभी, बावरी
  17. प्रश्न: ढोल नृत्य के कलाकार समुदाय?
    उत्तर: माली, ढोली, सरगड़ा, भील
  18. प्रश्न: मछली नृत्य किस समुदाय का?
    उत्तर: बंजारा
  19. प्रश्न: शिकारी नृत्य किस जनजाति का?
    उत्तर: सहरिया
  20. प्रश्न: चकरी किस समुदाय का?
    उत्तर: कंजर
  21. प्रश्न: मावलिया किस जनजाति का?
    उत्तर: कथौड़ी
  22. प्रश्न: रणबाजा किस समुदाय का?
    उत्तर: मेव
  23. प्रश्न: कठपुतली कला से जुड़ा समुदाय?
    उत्तर: भाट
  24. प्रश्न: पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र?
    उत्तर: उदयपुर, 1986
  25. प्रश्न: कालबेलिया UNESCO सूची में?
    उत्तर: 2010
  26. प्रश्न: कालबेलिया के उप-नृत्य?
    उत्तर: इंडोणी, शंकरिया, पणिहारी, बागड़िया
  27. प्रश्न: राजस्थान संगीत नाटक अकादमी?
    उत्तर: जोधपुर, 1957
  28. प्रश्न: जवाहर कला केंद्र?
    उत्तर: जयपुर, 1993
  29. प्रश्न: कोमल कोठारी को पद्मभूषण?
    उत्तर: 2004
  30. प्रश्न: जयपुर कथक घराने की विशेषता?
    उत्तर: तेज़ तत्कार व लयकारी
  31. प्रश्न: कथक के तीन प्रमुख घराने?
    उत्तर: जयपुर, लखनऊ, बनारस
  32. प्रश्न: गवरी किस जनजाति का?
    उत्तर: भील
  33. प्रश्न: वालर किस जनजाति का?
    उत्तर: गरासिया
  34. प्रश्न: भील स्त्रियों का नृत्य (वागड़)?
    उत्तर: घूमरा

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • कलाकार — गुलाबो (कालबेलिया), मांगी बाई (तेरहताली), फलकू बाई (चरी), रूपसिंह शेखावत-दयाराम-तारा शर्मा (भवाई)।
  • संरक्षक — जयनारायण व्यास (ढोल), देवीलाल सामर (लोक कला मंडल), कोमल कोठारी (रूपायन)।
  • समुदाय — कामड़-तेरहताली, गुर्जर-चरी, जसनाथी-अग्नि, कंजर-चकरी, सहरिया-शिकारी, कथौड़ी-मावलिया, मेव-रणबाजा।
  • कथक — जयपुर घराना (भानुजी)।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. दो मांगी बाई में भ्रम — तेरहताली की मांगी बाई (पादरला) बनाम मांड गायिका मांगी बाई आर्य (उदयपुर)।
  2. फलकू बाई को तेरहताली से जोड़ना — फलकू बाई = चरी।
  3. ढोल नृत्य को प्रकाश में लाने का श्रेय कोमल कोठारी को देना — श्रेय जयनारायण व्यास को।
  4. भारतीय लोक कला मंडल को जोधपुर में रखना — यह उदयपुर में है।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“गुलाबो कालबेलिया, मांगी तेरहताली, फलकू चरी, रूपसिंह भवाई”।

“व्यास का ढोल, सामर का मंडल, कोठारी का रूपायन”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

कलाकारों के प्रश्न प्रायः ‘नृत्य–कलाकार’ सुमेलन होते हैं, जिनमें गुलाबो, मांगी बाई और फलकू बाई सबसे अधिक आती हैं। ‘प्रकाश में लाने वाले’ प्रश्न (जयनारायण व्यास — ढोल) भी नियमित हैं। समुदाय वाले प्रश्नों के लिए ऊपर की दो तालिकाएँ (जातीय व जनजातीय) पर्याप्त हैं। हर वर्ष की पद्म सूची में राजस्थान के लोक कलाकारों के नाम अवश्य देखें — ये करेंट अफेयर्स में भी पूछे जाते हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

कलाकारों व समुदायों पर आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें:

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • पद्म पुरस्कार सूची — गृह मंत्रालय, भारत सरकार।
  • भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर; रूपायन संस्थान, बोरूंदा।
  • राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर — कलाकार परिचय।
  • RBSE — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के लोक नृत्यों के प्रमुख कलाकार एवं संबंधित समुदाय

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक (कला/इतिहास), Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: लोकनृत्य मूलतः सामुदायिक परंपराएँ हैं; व्यक्तिगत कलाकारों के नाम वे हैं जिन्होंने इन्हें व्यापक पहचान दिलाई। सम्मान-वर्ष आधिकारिक सूचियों पर आधारित हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. चरी नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. गुलाबो सपेरा किस नृत्य से संबंधित हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ढोल नृत्य को प्रकाश में लाने का श्रेय —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. भारतीय लोक कला मंडल कहाँ स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. जयपुर कथक घराने के संस्थापक —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

गुलाबो सपेरा कालबेलिया नृत्य की प्रसिद्ध कलाकार हैं, जिन्हें 2016 में पद्मश्री मिला।

किशनगढ़ की फलकू बाई चरी नृत्य की सबसे प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।

पाली जिले के पादरला गाँव की मांगी बाई तेरहताली की प्रसिद्ध कलाकार हैं।

जालौर के ढोल नृत्य को जयनारायण व्यास ने प्रकाश में लाया।

देवीलाल सामर ने 1952 में उदयपुर में भारतीय लोक कला मंडल की स्थापना की।

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