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घूमर लोकनृत्य राजस्थान - इतिहास, प्रकार, वेशभूषा | RPSC/RAS नोट्स

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
7 जुलाई 2026
7 मिनट पठन
घूमर लोकनृत्य राजस्थान - इतिहास, प्रकार, वेशभूषा | RPSC/RAS नोट्स

परिचय

राजस्थान की धरती अपनी वीरता, त्याग और शौर्य की गाथाओं के साथ-साथ अपने समृद्ध लोक-सांस्कृतिक वैभव के लिए भी संपूर्ण विश्व में जानी जाती है। इसी सांस्कृतिक वैभव का सबसे प्रतिनिधि और सर्वाधिक लोकप्रिय स्वरूप है घूमर लोकनृत्य। घूमर केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि राजस्थानी स्त्री जीवन की सामाजिक संरचना, पारिवारिक मूल्यों, धार्मिक आस्था और सामुदायिक भावना का सजीव प्रतीक है। यही कारण है कि घूमर को राजस्थान का राजकीय लोकनृत्य (State Folk Dance) का दर्जा प्राप्त है और यह प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण टॉपिक्स में गिना जाता है।

यह लेख RPSC, RAS, RSMSSB, Patwari, Gram Sevak, REET, SI तथा राजस्थान उच्च न्यायालय प्रणाली सहायक परीक्षाओं की दृष्टि से घूमर नृत्य के प्रत्येक पहलू को विस्तार से कवर करता है।


घूमर शब्द की व्युत्पत्ति और अर्थ

"घूमर" शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के "घूर्णन" शब्द से मानी जाती है, जिसका अर्थ है घूमना या चक्राकार गति करना। नृत्य के दौरान महिलाएं अपने घाघरे (लहंगे) को गोलाकार रूप में फैलाते हुए, एक निश्चित लय में गोल-गोल घूमती हैं — यही घूर्णन गति इस नृत्य को "घूमर" नाम देती है। घाघरे का घेर (गोलाई) जितना अधिक होता है, नृत्य की दृश्यात्मक सुंदरता उतनी ही अधिक निखर कर सामने आती है।

कुछ विद्वान इसे भवाई और अन्य घूर्णन-प्रधान नृत्यों की मूल शैली भी मानते हैं, क्योंकि राजस्थान के अधिकांश घूर्णन आधारित नृत्यों (जैसे भवाई) की मूल संरचना घूमर से ही प्रेरित प्रतीत होती है।


उत्पत्ति एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

घूमर नृत्य की उत्पत्ति के संबंध में इतिहासकारों में एकमत नहीं है, परंतु सर्वाधिक स्वीकृत मत के अनुसार इसकी शुरुआत भील जनजाति से हुई मानी जाती है। भील समुदाय की स्त्रियां प्राचीन काल से प्रकृति पूजा, फसल उत्सव और सामुदायिक अवसरों पर सामूहिक रूप से गोलाकार नृत्य करती थीं।

समय के साथ यह नृत्य भील समाज की सीमाओं से बाहर निकलकर राजपूत समाज में लोकप्रिय हुआ, और धीरे-धीरे यह संपूर्ण राजस्थान के लगभग सभी समुदायों — राजपूत, गुर्जर, जाट, मीणा, चारण आदि — में अपनाया जाने लगा। राजपूत रियासतों के राजदरबारों में घूमर को राजसी संरक्षण प्राप्त हुआ, जिससे इसकी वेशभूषा और प्रस्तुतीकरण में भव्यता जुड़ती गई।

आज घूमर केवल एक जनजातीय या सामुदायिक नृत्य न रहकर संपूर्ण राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) का प्रतीक बन चुका है, और इसे राज्य के राजकीय समारोहों, पर्यटन प्रचार तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया जाता है।

बॉलीवुड और लोकप्रिय संस्कृति में स्थान: वर्ष 2018 में प्रदर्शित फिल्म "पद्मावत" के गीत "घूमर" ने इस लोकनृत्य को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक लोकप्रियता दिलाई, हालांकि परीक्षा की दृष्टि से यह केवल एक समकालीन संदर्भ है, ऐतिहासिक तथ्य नहीं।


घूमर के अवसर एवं सामाजिक महत्व

घूमर नृत्य विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है:

  1. विवाह समारोह – दुल्हन के घर विवाह के अवसर पर महिलाओं द्वारा
  2. तीज और गणगौर उत्सव – यह घूमर का सर्वाधिक प्रतिनिधि अवसर है
  3. होली उत्सव
  4. जन्मोत्सव व नामकरण संस्कार
  5. धार्मिक मेले एवं पर्व
  6. राजकीय व सामाजिक समारोह

गणगौर से विशेष संबंध: गणगौर पर्व (जो शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है) पर घूमर नृत्य की प्रस्तुति सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान महिलाएं समूह में गोल घेरा बनाकर, हाथों की विशिष्ट मुद्राओं के साथ घंटों नृत्य करती हैं।

परंपरागत रूप से घूमर विशुद्ध रूप से स्त्रियों का सामूहिक नृत्य है, जिसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित माना जाता था, यद्यपि आधुनिक मंचीय प्रस्तुतियों में यह नियम शिथिल हो चुका है।


नृत्य मुद्रा एवं तकनीकी विशेषताएं

घूमर की नृत्य-प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • गोलाकार संरचना: महिलाएं एक बड़ा गोल घेरा (वृत्त) बनाकर खड़ी होती हैं और लयबद्ध गति से घूमती हैं।
  • घाघरे का घूर्णन: घाघरे की गोलाई (कली संख्या अधिक होने पर) नृत्य के समय एक फैले हुए फूल के समान दृश्य निर्मित करती है।
  • हाथों की मुद्राएं: हाथों को ऊपर उठाकर, ताली बजाते हुए तथा कमर व गर्दन के लचीले संचालन के साथ नृत्य किया जाता है।
  • गति क्रम: प्रारंभ में धीमी गति, फिर क्रमशः गति में वृद्धि होकर नृत्य अपने चरम पर पहुंचता है।
  • सामूहिकता: यह पूर्णतः सामूहिक नृत्य है, एकल प्रस्तुति की परंपरा नहीं है।

वेशभूषा (Costume)

घूमर की वेशभूषा राजस्थानी स्त्री पहनावे की समृद्धि को प्रदर्शित करती है:

वस्त्र/आभूषणविवरण
घाघराअत्यधिक घेरदार (कभी-कभी 40-50 गज तक कपड़े से निर्मित), जरी व गोटा कार्य युक्त
कांचली/कुर्तीऊपरी वस्त्र, आमतौर पर चोली शैली में
ओढ़नीसिर व शरीर को ढकने हेतु, बंधेज व लहरिया प्रिंट प्रधान
आभूषणरखड़ी, बोरला, तिमणिया, कंठी, बाजूबंद, कड़ा, पायल आदि परंपरागत चांदी/सोने के आभूषण
मेहंदीहाथों में विशेष अवसरों पर

रंगों में लाल, गुलाबी, पीला, हरा और नारंगी रंगों की प्रधानता रहती है, जो उत्सवधर्मिता का प्रतीक मानी जाती है।


वाद्य यंत्र (Musical Instruments)

घूमर नृत्य के साथ प्रयुक्त होने वाले प्रमुख वाद्य यंत्र निम्नलिखित हैं:

  • ढोल – प्रमुख लय वाद्य
  • मांदल
  • सारंगी
  • बांकिया
  • नगाड़ा
  • झांझ/मंजीरा

इनके साथ महिलाएं परंपरागत लोकगीत गाती हुई नृत्य करती हैं, जिनमें "घूमर घूमर घूमर घूमे" जैसे लोकप्रिय बोल-टेक (refrain) प्रचलित हैं।


घूमर के क्षेत्रीय प्रकार (Regional Variations) — अत्यंत महत्वपूर्ण

परीक्षा की दृष्टि से यह भाग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि विभिन्न परीक्षाओं में क्षेत्र-विशेष घूमर शैलियों के नाम पूछे जाते रहे हैं:

प्रकारप्रमुख क्षेत्रविशेषता
राजपूती घूमरसंपूर्ण राजस्थानराजपूत परिवारों में प्रचलित पारंपरिक शैली
भीली घूमरदक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर)मूल जनजातीय स्वरूप, सरल वेशभूषा
जोधपुरी घूमरजोधपुर संभाग (मारवाड़)तीव्र गति, विशिष्ट लोकगीत
शेखावाटी घूमरशेखावाटी क्षेत्रस्थानीय बोल व धुनों की प्रधानता
कालबेलिया प्रभावित घूमरकुछ क्षेत्रों में मिश्रित प्रस्तुतिघूमर व कालबेलिया तत्वों का सम्मिश्रण (यह एक सामान्यीकरण है, अलग-अलग स्रोतों में विवरण भिन्न मिलता है)

नोट: क्षेत्रीय प्रकारों के नामकरण व वर्गीकरण को लेकर विभिन्न स्रोतों (RPSC संदर्भ सामग्री बनाम अन्य लोक-सांस्कृतिक ग्रंथ) में भिन्नता पाई जाती है। अध्ययनार्थियों को इस भाग की पुष्टि नवीनतम RPSC पाठ्यक्रम व राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से अवश्य करनी चाहिए।


⚠️ परीक्षा में होने वाली सामान्य त्रुटियां (Exam Trap Section)

यह भाग प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों द्वारा की जाने वाली सामान्य भ्रांतियों को स्पष्ट करता है:

  1. घूमर ≠ कालबेलिया: कालबेलिया कालबेलिया (सपेरा) जनजाति की महिलाओं का एकल/युगल नृत्य है, जबकि घूमर सामूहिक स्त्री नृत्य है। कालबेलिया को UNESCO द्वारा 2010 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) में सम्मिलित किया गया, घूमर को यह दर्जा प्राप्त नहीं है — यह सबसे सामान्य भ्रम है।
  2. घूमर ≠ भवाई: भवाई नृत्य में सिर पर मटकों को संतुलित करते हुए नृत्य किया जाता है (जांगिड़/कालबेलिया समुदाय से संबंधित), जबकि घूमर में ऐसा संतुलन-प्रधान तत्व नहीं होता।
  3. घूमर ≠ चरी नृत्य: चरी नृत्य किशनगढ़ (अजमेर) क्षेत्र की साकर खां/गुर्जर समुदाय की स्त्रियों द्वारा सिर पर धातु के चरी (मटकी) रखकर किया जाने वाला नृत्य है।
  4. मूल उत्पत्ति भ्रम: कई अभ्यर्थी घूमर को मूलतः राजपूत नृत्य मान लेते हैं, जबकि अधिकांश शोध इसकी उत्पत्ति भील जनजाति से मानते हैं, बाद में यह राजपूत समाज में लोकप्रिय हुआ।
  5. राजकीय दर्जा: घूमर राजस्थान का राजकीय लोकनृत्य है — यह तथ्य प्रायः प्रश्नों में सीधे पूछा जाता है।

घूमर बनाम अन्य प्रमुख राजस्थानी लोकनृत्य — तुलनात्मक तालिका

नृत्यसमुदायप्रकारविशेष क्षेत्र
घूमरसर्वसमाज (मूलतः भील)सामूहिक स्त्री नृत्यसंपूर्ण राजस्थान
कालबेलियाकालबेलिया जनजातिएकल/युगलजोधपुर, पाली, अजमेर
भवाईभील, जांगिड़, कालबेलियासंतुलन नृत्य (मटका)उदयपुर, बीकानेर
चरीसाकर खां, गुर्जरसंतुलन नृत्य (चरी)किशनगढ़, अजमेर
तेरहतालीकामड़ जातिमंजीरा नृत्य (बैठकर)पाली (जसनाथी संप्रदाय)
गैरभील व अन्यपुरुष प्रधान वृत्ताकार नृत्यमेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा

स्मरण तकनीक (Memory Trick)

"घू-सा-गो" ट्रिक: घूमर = घूघरा + सामूहिक + गोलाकार — यह तीन शब्द याद रखने से घूमर की पहचान संबंधी अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।

अवसर याद रखने हेतु: "तीज-गणगौर-विवाह-होली" — इन चार अवसरों का क्रम याद रखें, अधिकांश प्रश्न इन्हीं पर आधारित होते हैं।


शिक्षक की परीक्षा-उपयोगी टिप्पणी

घूमर से संबंधित प्रश्न सामान्यतः तीन स्तरों पर पूछे जाते हैं — (1) परिभाषा/उत्पत्ति संबंधी, (2) अन्य नृत्यों से तुलना संबंधी भ्रामक (trap-based) प्रश्न, और (3) करेंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्न (जैसे किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में घूमर प्रस्तुति)। अभ्यर्थियों को विशेष रूप से "घूमर बनाम कालबेलिया" के अंतर पर पकड़ मजबूत रखनी चाहिए, क्योंकि यह सर्वाधिक बार दोहराया जाने वाला ट्रैप है।


📝 PYQ / अभ्यास प्रश्न ब्लॉक (20 प्रश्न)

प्रश्न 1. घूमर किस राज्य का राजकीय (State) लोकनृत्य है? (अ) गुजरात (ब) राजस्थान (स) मध्य प्रदेश (द) हरियाणा 

उत्तर: (ब) राजस्थान व्याख्या: घूमर को राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के राजकीय लोकनृत्य का दर्जा प्राप्त है और यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

प्रश्न 2. घूमर नृत्य की उत्पत्ति मूलतः किस समुदाय से मानी जाती है? (अ) राजपूत (ब) गुर्जर (स) भील (द) कालबेलिया 

उत्तर: (स) भील व्याख्या: अधिकांश इतिहासकार व लोक-संस्कृति विशेषज्ञ घूमर की उत्पत्ति भील जनजाति से मानते हैं, बाद में यह राजपूत व अन्य समुदायों में लोकप्रिय हुआ।

प्रश्न 3. घूमर नृत्य मुख्यतः किसके द्वारा प्रस्तुत किया जाता है? (अ) पुरुष (ब) बालक (स) स्त्रियां (द) वृद्धजन 

उत्तर: (स) स्त्रियां व्याख्या: घूमर परंपरागत रूप से महिलाओं का सामूहिक नृत्य है।

प्रश्न 4. "घूमर" शब्द किस मूल शब्द से बना है? (अ) घूर्णन (ब) घुमक्कड़ (स) घुमाव (द) घूंघट

  उत्तर: (अ) घूर्णन व्याख्या: घूमर शब्द संस्कृत के "घूर्णन" (गोल घूमना) से व्युत्पन्न माना जाता है।

प्रश्न 5. घूमर नृत्य किस पर्व से सर्वाधिक जुड़ा हुआ माना जाता है? (अ) दीपावली (ब) गणगौर (स) रक्षाबंधन (द) मकर संक्रांति 

उत्तर: (ब) गणगौर व्याख्या: गणगौर पर्व पर महिलाओं द्वारा घूमर की प्रस्तुति परंपरा का सर्वाधिक प्रतिनिधि अवसर माना जाता है।

प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है, न कि घूमर? (अ) कालबेलिया (ब) घूमर (स) गैर (द) चरी 

उत्तर: (अ) कालबेलिया व्याख्या: राजस्थान का कालबेलिया नृत्य वर्ष 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में सम्मिलित हुआ, घूमर को यह दर्जा प्राप्त नहीं है — यह एक सामान्य परीक्षा ट्रैप है।

प्रश्न 7. चरी नृत्य मुख्यतः किस क्षेत्र से संबंधित है? (अ) जैसलमेर (ब) किशनगढ़ (अजमेर) (स) जोधपुर (द) बीकानेर 

उत्तर: (ब) किशनगढ़ (अजमेर) व्याख्या: चरी नृत्य किशनगढ़ क्षेत्र की साकर खां/गुर्जर समुदाय की महिलाओं द्वारा सिर पर चरी (मटकी) रखकर किया जाता है, इसे घूमर से भिन्न समझना आवश्यक है।

प्रश्न 8. घूमर नृत्य में मुख्य रूप से किस वाद्य यंत्र का प्रयोग होता है? (अ) शहनाई (ब) ढोल (स) बांसुरी (द) वीणा 

उत्तर: (ब) ढोल व्याख्या: ढोल, मांदल, नगाड़ा व सारंगी घूमर के प्रमुख वाद्य यंत्र हैं जिनमें ढोल की लय प्रधान भूमिका निभाती है।

प्रश्न 9. घूमर नृत्य में महिलाओं की वेशभूषा में सबसे प्रमुख वस्त्र कौन-सा होता है? (अ) साड़ी (ब) घाघरा (स) सलवार (द) धोती 

उत्तर: (ब) घाघरा व्याख्या: अत्यधिक घेरदार घाघरा घूमर की पहचान है, जो नृत्य के दौरान गोलाकार घूमते हुए फूल के समान दृश्य निर्मित करता है।

प्रश्न 10. निम्न में से कौन-सा नृत्य पुरुष प्रधान वृत्ताकार नृत्य है, घूमर के विपरीत? (अ) गैर (ब) कालबेलिया (स) घूमर (द) तेरहताली 

उत्तर: (अ) गैर व्याख्या: गैर नृत्य मुख्यतः मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा) में भील पुरुषों द्वारा किया जाने वाला वृत्ताकार नृत्य है, जबकि घूमर स्त्री प्रधान है।

प्रश्न 11. तेरहताली नृत्य किस जाति/संप्रदाय से संबंधित है? (अ) भील (ब) कामड़ जाति (जसनाथी संप्रदाय) (स) गुर्जर (द) राजपूत

  उत्तर: (ब) कामड़ जाति (जसनाथी संप्रदाय) व्याख्या: तेरहताली पाली क्षेत्र की कामड़ जाति द्वारा बैठकर मंजीरों के साथ प्रस्तुत किया जाने वाला नृत्य है, यह घूमर से पूर्णतः भिन्न प्रकार का नृत्य है।

प्रश्न 12. घूमर नृत्य की गति संरचना के संबंध में सही कथन चुनें: (अ) प्रारंभ से अंत तक एक समान गति (ब) प्रारंभ में धीमी, बाद में तीव्र गति (स) प्रारंभ में तीव्र, बाद में धीमी (द) कोई निश्चित क्रम नहीं 

उत्तर: (ब) प्रारंभ में धीमी, बाद में तीव्र गति व्याख्या: घूमर की प्रस्तुति धीमी लय से शुरू होकर क्रमशः तीव्र गति में परिवर्तित होती है।

प्रश्न 13. भवाई नृत्य की मुख्य विशेषता क्या है? (अ) सिर पर मटकों को संतुलित करना (ब) घाघरे का घूर्णन (स) मंजीरा वादन (द) तलवारबाजी

  उत्तर: (अ) सिर पर मटकों को संतुलित करना व्याख्या: भवाई में नर्तकी सिर पर कई मटके संतुलित करते हुए नृत्य करती है, जो घूमर से मौलिक रूप से भिन्न तकनीक है।

प्रश्न 14. घूमर नृत्य के साथ गाया जाने वाला लोकप्रिय गीत-बोल किस पर आधारित है? (अ) युद्ध गाथा (ब) घूमर की गोलाकार गति (स) कृषि कार्य (द) पशुपालन 

उत्तर: (ब) घूमर की गोलाकार गति व्याख्या: घूमर के लोकगीतों में सामान्यतः नृत्य की गोलाकार गति व उत्सव भावना को दर्शाने वाले बोल प्रचलित हैं।

प्रश्न 15. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है? (अ) घूमर – सामूहिक स्त्री नृत्य (ब) कालबेलिया – एकल/युगल नृत्य (स) चरी – पुरुष प्रधान नृत्य (द) तेरहताली – बैठकर प्रस्तुत नृत्य 

उत्तर: (स) चरी – पुरुष प्रधान नृत्य व्याख्या: चरी नृत्य महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, न कि पुरुषों द्वारा — यह असुमेलित युग्म है।

प्रश्न 16. राजस्थान में घूमर नृत्य को सर्वाधिक संरक्षण किस काल में प्राप्त हुआ माना जाता है? (अ) मुगल काल (ब) राजपूत रियासतकाल (स) ब्रिटिश काल (द) स्वतंत्रता पश्चात काल

  उत्तर: (ब) राजपूत रियासतकाल व्याख्या: राजपूत रियासतों के राजदरबारों में घूमर को राजसी संरक्षण प्राप्त होने से इसकी वेशभूषा व प्रस्तुतीकरण में भव्यता जुड़ी।

प्रश्न 17. घूमर नृत्य में प्रयुक्त ओढ़नी पर सामान्यतः कौन-सी प्रिंट तकनीक देखी जाती है? (अ) बाटिक (ब) बंधेज व लहरिया (स) कलमकारी (द) ब्लॉक प्रिंट केवल 

उत्तर: (ब) बंधेज व लहरिया व्याख्या: राजस्थानी ओढ़नी में बंधेज (टाई-डाई) व लहरिया प्रिंट तकनीक प्रमुखता से प्रयुक्त होती है।

प्रश्न 18. दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा-डूंगरपुर) में प्रचलित घूमर की शैली को क्या कहा जाता है? (अ) राजपूती घूमर (ब) भीली घूमर (स) जोधपुरी घूमर (द) शेखावाटी घूमर

  उत्तर: (ब) भीली घूमर व्याख्या: दक्षिणी राजस्थान के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में घूमर का मूल भील स्वरूप प्रचलित है, जिसे भीली घूमर कहा जाता है। (नोट: क्षेत्रीय नामकरण में स्रोत-भेद संभव है, RPSC पाठ्यक्रम से पुष्टि करें)

प्रश्न 19. घूमर नृत्य के दौरान महिलाओं के हाथों की गति की मुख्य विशेषता क्या है? (अ) स्थिर रहना (ब) ऊपर उठाकर व ताली के साथ लयबद्ध संचालन (स) पीठ पीछे बांधना (द) तलवार पकड़ना 

उत्तर: (ब) ऊपर उठाकर व ताली के साथ लयबद्ध संचालन व्याख्या: घूमर में हाथों का लयबद्ध ऊर्ध्व संचालन व ताली नृत्य की एक प्रमुख तकनीकी विशेषता है।

प्रश्न 20. निम्नलिखित में से किस फिल्म के गीत ने घूमर नृत्य को अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता दिलाई? (अ) बाजीराव मस्तानी (ब) पद्मावत (स) जोधा अकबर (द) गोलियों की रासलीला

  उत्तर: (ब) पद्मावत व्याख्या: वर्ष 2018 में प्रदर्शित फिल्म "पद्मावत" के "घूमर" गीत ने इस लोकनृत्य को व्यापक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। यह एक समकालीन सांस्कृतिक संदर्भ है, ऐतिहासिक तथ्य नहीं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

ढोल, मांदल, नगाड़ा, सारंगी, बांकिया तथा झांझ/मंजीरा घूमर के प्रमुख वाद्य यंत्र हैं।

परंपरागत रूप से घूमर विशुद्ध स्त्री नृत्य है। पुरुष प्रधान समान वृत्ताकार नृत्य के लिए "गैर" नृत्य देखा जाता है, जो भील समुदाय में प्रचलित है।

घूमर की वेशभूषा में अत्यधिक घेरदार घाघरा, कांचली, बंधेज-लहरिया ओढ़नी तथा परंपरागत चांदी-सोने के आभूषण (रखड़ी, बोरला, तिमणिया आदि) प्रमुख होते हैं।

घूमर मुख्यतः विवाह, तीज, गणगौर, होली तथा अन्य पारिवारिक व धार्मिक उत्सवों पर प्रस्तुत किया जाता है, जिनमें गणगौर पर्व सर्वाधिक प्रतिनिधि अवसर माना जाता है।

नहीं, दोनों पूर्णतः भिन्न नृत्य हैं। घूमर सामूहिक स्त्री नृत्य है जो मूलतः भील समुदाय से संबंधित है, जबकि कालबेलिया कालबेलिया (सपेरा) जनजाति की महिलाओं का एकल/युगल नृत्य है, जिसे UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है।

घूमर को राजस्थान का राजकीय लोकनृत्य घोषित किए जाने की सटीक तिथि विभिन्न स्रोतों में भिन्न-भिन्न दी गई है। अभ्यर्थियों को इसकी पुष्टि नवीनतम RPSC/राजस्थान सरकार की आधिकारिक सूचना से करनी चाहिए, इसे लेख में अनुमानित तिथि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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