बुधवार, 7 अक्टूबर 2026·7 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
7 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: 7 अक्टूबर "विश्व कपास दिवस 2026" (World Cotton Day) पर कस्तूरी कॉटन भारत ट्रैसेबिलिटी व राजस्थान के नहरी संभाग (हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर) में "सफेद सोना" उत्पादकता संवर्धन, भौतिकी में "नोबेल पुरस्कार 2026" की घोषणा व क्वांटम सूचना विज्ञान में सुपरकंडक्टिंग क्वैबिट्स और टोपोलॉजिकल अवस्थाओं का अन्वेषण, 72वें वन्यजीव सप्ताह के तहत चूरू के "ताल छापर अभयारण्य" में मोथिया घास पुनरुद्धार व खीचन (फलोदी) में शीतकालीन प्रवासी पक्षी "कुरजां" संरक्षण केंद्र की सक्रियता, "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" में राजस्थान का शीर्ष 3 राज्यों में उत्कृष्ट स्थान व 5 लाख रूफटॉप सोलर स्थापना, 94वें भारतीय वायुसेना दिवस पूर्व संध्या पर पश्चिमी सीमा पोकरण में स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर "प्रचण्ड" (LCH) व "आकाश प्राइम" वायु रक्षा प्रणाली का सघन युद्धाभ्यास, NPCI डिजिटल भुगतान बुलेटिन में UPI का 16.2 अरब मासिक लेनदेन का नया कीर्तिमान व "UPI 123PAY" सीमा विस्तार, तथा राज्य खेल सम्मेलन में राजस्थान के अर्जुन पुरस्कार विजेता अंतरराष्ट्रीय पैरा-तीरंदाज श्याम सुंदर स्वामी का विशिष्ट सम्मान व जनजातीय तीरंदाजी उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ।
#1
राजस्थानRASCETPATWARIREETAGRICULTUREUPSC
कृषि एवं वस्त्र उद्योग: "विश्व कपास दिवस" (7 अक्टूबर 2026) — "कस्तूरी कॉटन भारत" ट्रैसेबिलिटी व राजस्थान में "सफेद सोना" उत्पादन संवर्धन
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
प्रतिवर्ष 7 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (WTO), एफएओ (FAO) और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC) द्वारा वैश्विक स्तर पर "विश्व कपास दिवस" (World Cotton Day) मनाया जाता है। 2026 की थीम "कपास: सभी के लिए उत्तम वस्त्र और संधारणीय आजीविका" पर केंद्रित रही। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा भारतीय प्रीमियम कपास ब्रांड "कस्तूरी कॉटन भारत" (Kasturi Cotton Bharat) के ब्लॉकचेन ट्रैसेबिलिटी नेटवर्क का विस्तार किया गया। साथ ही राजस्थान कृषि विभाग द्वारा हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर संभाग में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) प्रतिरोधी उन्नत देसी संकर बीजों, ड्रिप सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन हेतु विशेष तकनीकी पैकेज जारी किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓विश्व कपास दिवस का परिप्रेक्ष्य एवं इतिहास:
• स्थापना: वर्ष 2019 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा अफ्रीका के चार प्रमुख कपास उत्पादक देशों — बेनिन, बुर्किना फासो, चाड और माली (Cotton Four / C-4 देश) की संयुक्त पहल पर प्रतिवर्ष 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
• संयुक्त राष्ट्र मान्यता: वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा इसे आधिकारिक रूप से वैश्विक कैलेंडर में अंगीकार किया गया।
• वैश्विक महत्व: कपास एक प्रमुख प्राकृतिक रेशा और नकदी फसल (Cash Crop / खरीफ फसल) है, जो 75 से अधिक देशों में उगाई जाती है और करोड़ों छोटे किसानों तथा कपड़ा कामगारों की आजीविका की रीढ़ है।
✓राजस्थान में कपास ("सफेद सोना" / "बणिया") की कृषि एवं भौगोलिक दशाएं (RPSC Core):
• स्थानीय नाम: राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में कपास को पारंपरिक रूप से "बणिया" (Baniya) अथवा "सफेद सोना" (White Gold) कहा जाता है।
• प्रमुख उत्पादक जिले: हनुमानगढ़ (राजस्थान का शीर्ष कपास उत्पादक जिला), श्रीगंगानगर, बीकानेर (उत्तर-पश्चिमी नहरी सिंचित क्षेत्र) तथा भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा (दक्षिणी राजस्थान)।
• उपयुक्त मृदा: मध्यम से भारी काली रेगुर मृदा (Black Soil / Vertisols) एवं गहरी जलोढ़ दोमट मृदा (Alluvial Loam), जिसमें नमी धारण करने की उच्च क्षमता हो।
• जलवायु आवश्यकता: 20°C से 30°C तापमान, 50 से 100 सेमी वर्षा तथा कम से कम 200 पाला-मुक्त दिन (Frost-free days) अनिवार्य होते हैं। पकते समय स्वच्छ खिली धूप की आवश्यकता होती है।
• प्रमुख उन्नत किस्में: बीकानेरी नरमा, गंगानगर अगेती (Ganganagar Ageti), आर.एस.-810 (RS-810), आर.एस.-875।
✓भारतीय वस्त्र उद्योग एवं वैधानिक संस्थाएं:
• भारतीय कपास निगम (Cotton Corporation of India - CCI): स्थापना 31 जुलाई 1970 को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में; मुख्य कार्य: कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूल्य समर्थन संचालन (Price Support Operations) प्रदान करना।
• कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton Bharat): भारत सरकार और वस्त्र उद्योग द्वारा भारतीय प्रीमियम कपास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100% ट्रेसेबिलिटी, शुद्धता और फाइबर मानक प्रदान करने हेतु शुरू किया गया वैश्विक ब्रांड।
• राजस्थान की "वस्त्र नगरी": भीलवाड़ा को राजस्थान का "मैनचेस्टर" और "टेक्सटाइल सिटी" कहा जाता है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा "टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस" (Town of Export Excellence) का आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: "नोबेल पुरस्कार 2026" (भौतिकी) — क्वांटम सूचना विज्ञान, सुपरकंडक्टिंग क्वैबिट्स और टोपोलॉजिकल क्वांटम गणना के मौलिक सिद्धांतों की खोज
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
7 अक्टूबर 2026 को स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (Royal Swedish Academy of Sciences, Stockholm) द्वारा भौतिकी में वर्ष 2026 के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Physics 2026) की घोषणा की गई। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार क्वांटम कंप्यूटरों की त्रुटि-सहिष्णुता (Fault-tolerant Quantum Computing), सुपरकंडक्टिंग क्वैबिट्स के सुसंगत नियंत्रण और पदार्थ की टोपोलॉजिकल अवस्थाओं (Topological States of Matter) में क्वांटम सूचना प्रक्रमण के क्रांतिकारी विकास हेतु प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक खोज से सुरक्षित क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, जटिल आणविक सिमुलेशन और सुपरकंप्यूटिंग की गति में अभूतपूर्व प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓क्वांटम भौतिकी एवं क्वैबिट्स के मौलिक सिद्धांत (UPSC/RAS Science & Tech Core):
• मौलिक अंतर: पारंपरिक कंप्यूटर द्विआधारी बिट्स (0 या 1) पर कार्य करते हैं, जबकि क्वांटम कंप्यूटर "क्वैबिट्स" (Quantum Bits - Qubits) का उपयोग करते हैं।
• सुपरपोजिशन (Superposition): एक क्वैबिट एक ही समय में 0 और 1 दोनों अवस्थाओं के रैखिक संयोजन (Linear Combination) में रह सकता है, जिससे समानांतर गणना क्षमता में घातांकीय (Exponential) वृद्धि होती है।
• क्वांटम उलझाव (Quantum Entanglement): जब दो या अधिक कण इस प्रकार परस्पर संबद्ध हो जाते हैं कि एक कण की अवस्था का मापन तुरंत दूसरे कण की अवस्था निर्धारित कर देता है, भले ही वे अंतरिक्ष में कितनी भी दूरी पर हों (अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे "Spooky action at a distance" कहा था)।
• टोपोलॉजिकल क्वैबिट: पदार्थ के टोपोलॉजिकल गुणों का उपयोग करके बाहरी शोर और पर्यावरणीय विक्षोभ (Decoherence) से अप्रभावित स्थिर क्वांटम गणना संभव होती है।
✓भारत का "राष्ट्रीय क्वांटम मिशन" (National Quantum Mission - NQM):
• अनुमोदन: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2023 में ₹6,003 करोड़ के कुल बजट परिव्यय के साथ 2023 से 2031 तक की अवधि हेतु अनुमोदित।
• नोडल मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology - DST)।
• प्रमुख लक्ष्य: 8 वर्षों में 50 से 1000 भौतिक क्वैबिट क्षमता वाले मध्यवर्ती-स्तरीय सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, 2000 किमी दूरी तक सुरक्षित उपग्रह-आधारित क्वांटम कुंजी वितरण (QKD), और उच्च-परिशुद्धता क्वांटम सेंसर का स्वदेशी निर्माण।
✓भौतिकी नोबेल का ऐतिहासिक व भारतीय परिप्रेक्ष्य:
• प्रथम भौतिकी नोबेल (1901): जर्मन भौतिकविद् विल्हेम कोनराड रॉन्टगन (Wilhelm Röntgen) को "एक्स-किरणों" (X-Rays) की अभूतपूर्व खोज हेतु प्रदान किया गया।
• सर सी.वी. रमन (1930): "रमन प्रभाव" (प्रकाश का प्रकीर्णन - Raman Effect) की खोज हेतु भौतिकी का नोबेल प्राप्त करने वाले पहले भारतीय व पहले एशियाई वैज्ञानिक। (28 फरवरी को रमन प्रभाव की खोज के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष "राष्ट्रीय विज्ञान दिवस" मनाया जाता है)।
• सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (1983): तारों की संरचना और विकास के भौतिक प्रक्रमों (चंद्रशेखर सीमा - 1.44 सौर द्रव्यमान / Chandrasekhar Limit) के गणितीय सिद्धांत हेतु भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
राजस्थान पर्यावरण व वन्यजीव: 72वें वन्यजीव सप्ताह में "ताल छापर अभयारण्य" (चूरू) का इको-सेंसिटिव जोन प्रबंधन व खीचन (फलोदी) में "कुरजां" पक्षी संरक्षण गलियारा
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
2 से 8 अक्टूबर तक संचालित 72वें "राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह" के अंतर्गत 7 अक्टूबर 2026 को राजस्थान वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) द्वारा चूरू स्थित ताल छापर कृष्णमृग अभयारण्य में विदेशी खरपतवार "प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा" (विलायती बबूल) के संपूर्ण उन्मूलन और स्थानीय पौष्टिक "मोथिया घास" (Cyperus rotundus) के प्राकृतिक बीजारोपण अभियान की प्रगति रिपोर्ट जारी की गई। साथ ही नवगठित फलोदी जिले के "खीचन" (Kheechan) में साइबेरिया और मंगोलिया से आने वाली शीतकालीन प्रवासी पक्षी "कुरजां" (Demoiselle Crane) के पर्यावास संरक्षण हेतु देश के पहले समर्पित कुरजां कंजर्वेशन सेंटर के आधुनिक बर्ड-रिंगिंग स्टेशन को सक्रिय किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓ताल छापर वन्यजीव अभयारण्य (चूरू) के विशिष्ट भौगोलिक तथ्य (RPSC High-Yield):
• अवस्थिति व अधिसूचना: चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील में अवस्थित; इसे वर्ष 1962 में आखेट निषिद्ध क्षेत्र तथा वर्ष 1971 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया।
• मुख्य आकर्षण: काले हिरण (Blackbuck - कृष्णमृग) का संसार का सबसे सघन और संरक्षित प्राकृतिक पर्यावास।
• विशेष घास "मोथिया" (Mothiya Grass): यहां पाई जाने वाली 'साइप्रस रोटंडस' नामक सुगंधित व कंदयुक्त मीठी घास कृष्णमृगों का अत्यंत प्रिय भोजन है।
• महाभारत कालीन संदर्भ: ताल छापर क्षेत्र को महाभारत काल में कौरव-पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य की तपोभूमि माना जाता है (सुजानगढ़ के निकट गोपालपुरा)।
• शिकारी पक्षी स्वर्ग: इसे हैरियर (Harriers), शाही बाज (Imperial Eagle) और प्रवासी गिद्धों का प्रमुख शीतकालीन पड़ाव माना जाता है।
✓कुरजां (Demoiselle Crane) एवं खीचन कंजर्वेशन रिजर्व:
• वैज्ञानिक नाम: ग्रस विर्गो (Anthropoides virgo)।
• प्रवासी मार्ग: मध्य एशिया, मंगोलिया और तिब्बत के पठार से हिमालय की 20,000 फीट से अधिक ऊंची चोटियों को पार कर प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में राजस्थान पहुंचते हैं।
• खीचन गांव (फलोदी): स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पक्षियों को अनाज (चुग्गा) खिलाने की अनूठी परंपरा के कारण विश्व प्रसिद्ध; खीचन को राजस्थान का पहला समर्पित कुरजां संरक्षण रिजर्व (Conservation Reserve) अधिसूचित किया गया है।
• सांस्कृतिक महत्व: राजस्थानी लोकगीतों में कुरजां को प्रियतम के लिए संदेशवाहक (विरह-गीत) के रूप में गाया जाता है ("कुरजां ए म्हारो भंवर मिला द्यो ए...")।
✓राजस्थान के राज्य प्रतीक चिन्ह (State Symbols Quick Revision):
• राज्य पशु (वन्यजीव श्रेणी): चिंकारा (Chinkara - Gazella bennettii); 1981 में घोषित; छोटा हिरण, एंटेलोप प्रजाति।
• राज्य पशु (पशुधन श्रेणी): ऊंट (Camel - Camelus dromedarius); 30 जून 2014 को घोषित, 19 सितंबर 2014 को अधिसूचना जारी।
• राज्य पक्षी: गोडावण (Great Indian Bustard - Ardeotis nigriceps); 1981 में घोषित; स्थानीय नाम: सोहन चिड़िया, हुकना, गुधनमेर।
• राज्य वृक्ष: खेजड़ी (Prosopis cineraria); 31 अक्टूबर 1983 को घोषित; "थार का कल्पवृक्ष" / "जांटी" / "समी"।
• राज्य पुष्प: रोहिड़ा (Tecomella undulata); 1983 में घोषित; "मरुशोभा" / "रेगिस्तान का सागवान"।
राजस्थान ऊर्जा व पर्यावरण: "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" में राजस्थान का उत्कृष्ट प्रदर्शन — 5 लाख रूफटॉप सोलर स्थापना, भादला व नोख सौर पार्क का योगदान
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
7 अक्टूबर 2026 को राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RREC) और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की संयुक्त समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) के अंतर्गत आवासीय छतों पर रूफटॉप सोलर प्रणाली स्थापित करने में देश के शीर्ष 3 राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में 5 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक प्रतिमाह मुफ्त बिजली और प्रत्यक्ष बैंक अंतरण (DBT) सब्सिडी का लाभ मिला है। इसके साथ ही राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) द्वारा वर्चुअल नेट-मीटरिंग के नियमों को और अधिक उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की अधिसूचना जारी की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Scheme) के प्रमुख घटक:
• शुभारंभ: 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित (कुल बजट ₹75,021 करोड़)।
• राष्ट्रीय लक्ष्य: देश भर में 1 करोड़ घरों की छतों पर रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित कर पात्र परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना।
• केंद्रीय वित्तीय सहायता (सब्सिडी संरचना):
- 1 kW प्रणाली हेतु: ₹30,000 की सब्सिडी।
- 2 kW प्रणाली हेतु: ₹60,000 की सब्सिडी।
- 3 kW या उससे अधिक प्रणाली हेतु: अधिकतम ₹78,000 की केंद्रीय सब्सिडी।
• मॉडल सौर ग्राम (Model Solar Village): देश के प्रत्येक जिले में एक गांव को 100% सौर-ऊर्जा संचालित मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने हेतु ₹1 करोड़ का वित्तीय अनुदान।
✓राजस्थान में सौर ऊर्जा की भौगोलिक अनुकूलता व प्रमुख सोलर पार्क (RPSC Exam Repeat):
• विकिरण क्षमता: राजस्थान में वर्ष में 325 से अधिक धूप वाले दिन (Sunny days) और 5.72 kWh/m²/day की उच्चतम सौर विकिरण तीव्रता उपलब्ध है।
• भादला सोलर पार्क (फलोदी/जोधपुर): कुल क्षमता 2,245 मेगावाट (विश्व के सबसे बड़े एकल-स्थान सौर पार्कों में से एक, 4 चरणों में विकसित)।
• नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): क्षमता 925 मेगावाट (NTPC द्वारा विकसित)।
• फतेहगढ़ सोलर पार्क (जैसलमेर - 1500 MW) व पूगल सोलर पार्क (बीकानेर - 1450 MW)।
✓राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RRECL) एवं नीतियां:
• स्थापना: अगस्त 2002 में राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA, 1985) और राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSPCL, 1995) के विलय से।
• राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2023: राज्य में 2030 तक 90,000 मेगावाट (90 GW) सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।
• स्थापित सौर क्षमता: राजस्थान भारत में कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता (Installed Solar Capacity) के मामले में निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं वैमानिकी: 94वें भारतीय वायुसेना दिवस की पूर्व संध्या — पश्चिमी सीमा पर स्वदेशी "प्रचण्ड" (LCH) अटैक हेलीकॉप्टर व "आकाश प्राइम" वायु रक्षा प्रणाली का संयुक्त युद्धाभ्यास
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
8 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस (Indian Air Force Day) की पूर्व संध्या पर 7 अक्टूबर को पश्चिमी वायु कमान और दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान (SWAC) द्वारा राजस्थान के पोकरण और थार रेगिस्तान के अग्रिम क्षेत्रों में तीनों सेनाओं के संयुक्त वायु-रक्षा अभ्यास का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर "प्रचण्ड" (LCH Prachand), सतह-से-हवा में मार करने वाली "आकाश प्राइम" (Akash Prime SAM) मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी रडार नेटवर्क की मारक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स (ECM) का सघन सत्यापन किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) "प्रचण्ड" की विशेषताएं:
• निर्माता: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)।
• विशिष्टता: विश्व का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की अत्यधिक ऊंचाई पर हथियारों और ईंधन के भारी भार के साथ उड़ान भरने और उतरने में सक्षम है (सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख के ऊंचे युद्धक्षेत्रों हेतु विशेष रूप से अनुकूलित)।
• आयुध: 20 मिमी नोज गन, 70 मिमी रॉकेट पॉड और हवा-से-हवा में मार करने वाली 'मिस्ट्रल' (Mistral) मिसाइलों से सुसज्जित; स्टील्थ फीचर्स और रडार अवशोषक सामग्री से निर्मित।
✓आकाश प्राइम (Akash Prime) मिसाइल प्रणाली (Defence Tech Core):
• विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL)।
• प्रकार: मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल प्रणाली (Surface-to-Air Missile - SAM)।
• सुधार/उन्नयन: मूल आकाश मिसाइल की तुलना में बेहतर सटीकता के लिए इसमें स्वदेशी सक्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर और उच्च तुंगता (High Altitude) पर कम तापमान में विश्वसनीय प्रचालन क्षमता जोड़ी गई है।
• मारक रेंज: लगभग 25 से 30 किमी की दूरी पर दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही ध्वस्त करने में सक्षम।
✓भारतीय वायुसेना का गौरवशाली इतिहास एवं वायुसेना दिवस (8 अक्टूबर):
• स्थापना: 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल में रॉयल एयर फोर्स के सहायक बल के रूप में।
• प्रथम भारतीय वायुसेना प्रमुख (Chief of Air Staff): एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी (1954 में पदभार ग्रहण किया)।
• एकमात्र 'मार्शल ऑफ द इंडियन एयर फोर्स': अर्जन सिंह (2002 में 5-स्टार रैंक 'मार्शल' प्रदान की गई, 1965 भारत-पाक युद्ध में अदम्य नेतृत्व हेतु)।
• पश्चिमी राजस्थान के सामरिक एयरबेस: उत्तरलाई (बाड़मेर - भारत का पहला भूमिगत एयरबेस), जोधपुर एयरबेस, नाल (बीकानेर), और जैसलमेर एयरबेस।
अर्थव्यवस्था एवं डिजिटल बैंकिंग: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) — UPI मासिक लेनदेन 16.2 अरब के ऐतिहासिक स्तर पर, "UPI 123PAY" व डिजिटल रुपया (CBDC) का विस्तार
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
7 अक्टूबर 2026 को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा जारी सितंबर 2026 के अंतिम डिजिटल भुगतान बुलेटिन के अनुसार, भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक कैलेंडर माह में 16.2 अरब (16.2 Billion) से अधिक वित्तीय लेनदेन दर्ज कर ₹23.8 लाख करोड़ का सर्वकालिक रिकॉर्ड मूल्य पार किया। इस उपलब्धि के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों और फीचर फोन उपभोक्ताओं के वित्तीय समावेशन को गति देने हेतु बिना इंटरनेट चलने वाली "UPI 123PAY" की प्रति लेनदेन सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 करने तथा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC - Digital Rupee) के साथ UPI क्यूआर कोड के पूर्ण इंटरऑपरेबिलिटी ढांचे को सुदृढ़ किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का तकनीकी एवं नियामक स्वरूप (UPSC/RAS Core):
• शुभारंभ: 11 अप्रैल 2016 को RBI के तत्कालीन गवर्नर डॉ. रघुराम राजन द्वारा औपचारिक रूप से लॉन्च।
• संचालन संस्था: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) — भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ (IBA) द्वारा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत स्थापित गैर-लाभकारी (धारा 8) कंपनी।
• प्रोटोकॉल: आईएमपीएस (IMPS) के ढांचे पर आधारित; सिंगल मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से 24x7 तत्काल अंतर-बैंक धनराशि अंतरण और वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) के जरिए बिना खाता संख्या साझा किए सुरक्षित लेनदेन।
✓ग्रामीण समावेशन पहल: UPI 123PAY एवं UPI लाइट:
• UPI 123PAY (लॉन्च 2022): देश के 40 करोड़ से अधिक फीचर फोन (बिना इंटरनेट वाले साधारण फोन) उपयोगकर्ताओं के लिए IVR वॉयस कॉल, मिस्ड कॉल आधारित या साउंड-बेस्ड प्रॉक्सिमिटी तकनीक से भुगतान की सुविधा।
• UPI Lite: छोटे मूल्यों (₹500 तक) के त्वरित और बिना पिन (On-device Wallet) लेनदेन हेतु, जिससे बैंकों के कोर बैंकिंग सर्वर पर लोड कम होता है और लेनदेन विफलता की दर शून्य के करीब रहती है।
✓केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC / e-Rupee) एवं अंतर-संचालनीयता:
• प्रकृति: RBI द्वारा जारी भारत की संप्रभु डिजिटल मुद्रा, जो केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट पर एक प्रत्यक्ष देनदारी (Direct Liability) है और भौतिक मुद्रा नोटों के समान कानूनी निविदा (Legal Tender) है।
• प्रकार: दो श्रेणियों में संचालित — थोक सीबीडीसी (CBDC-W, अंतर-बैंक प्रतिभूति निपटान हेतु) और खुदरा सीबीडीसी (CBDC-R, आम जनता व व्यापारियों हेतु)।
• इंटरऑपरेबिलिटी: वर्तमान में एक ही UPI क्यूआर कोड का उपयोग कर उपभोक्ता सीधे बैंक खाते (UPI) अथवा ई-रुपया वॉलेट (e-Rupee) दोनों से भुगतान कर सकते हैं।
खेल एवं व्यक्तित्व: अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी व राष्ट्रीय खेल तैयारी — राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय पैरा-तीरंदाज "श्याम सुंदर स्वामी" को विशेष सम्मान व राज्य खेल प्रतिभा खोज अभियान
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
7 अक्टूबर 2026 को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय तथा राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद द्वारा सवाई मानसिंह स्टेडियम (जयपुर) में आयोजित राज्य खेल सम्मेलन में विश्व तीरंदाजी सर्किट और आगामी राष्ट्रीय खेलों हेतु राजस्थान के 35 शीर्ष तीरंदाजों और एथलीटों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बीकानेर के अर्जुन पुरस्कार विजेता अंतरराष्ट्रीय पैरा-तीरंदाज श्याम सुंदर स्वामी के विशिष्ट योगदान को रेखांकित करते हुए राज्य के जनजातीय बाहुल्य जिलों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर) में पारंपरिक धनुर्विद्या को ओलंपिक स्तर तक तराशने हेतु "महाराणा प्रताप तीरंदाजी उत्कृष्टता केंद्र" (Archery Center of Excellence) के आधुनिक सिंथेटिक रेंज का शिलान्यास किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान के प्रमुख तीरंदाज एवं खेल विभूतियां (RPSC Exam Repeat Focus):
• श्याम सुंदर स्वामी (बीकानेर): विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पदक विजेता; टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व; अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।
• लिम्बा राम (उदयपुर): राजस्थान के महानतम तीरंदाज; 1989 और 1992 में एशियाई तीरंदाजी में स्वर्ण पदक; 3 बार ओलंपिक (1988, 1992, 1996) में भारत का प्रतिनिधित्व; अर्जुन पुरस्कार (1991) और पद्मश्री (2012) से सम्मानित।
• रजत चौहान (जयपुर): एशियाई खेल (2014 इंचियोन) में कंपाउंड तीरंदाजी टीम स्वर्ण पदक तथा विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक; अर्जुन पुरस्कार विजेता।
• स्वाति दूधवाल (चूरू): अंतरराष्ट्रीय कंपाउंड तीरंदाज; विश्व कप में भारत हेतु पदक विजेता।
✓राजस्थान में खेल अकादमियां व आधारभूत संरचना:
• तीरंदाजी अकादमी: उदयपुर व डूंगरपुर में संचालित; राज्य सरकार द्वारा जनजातीय युवाओं की नैसर्गिक धनुर्विद्या प्रतिभा को प्रोत्साहन।
• कबड्डी अकादमी: डीडवाना (डीडवाना-कुचामन)।
• एथलेटिक्स अकादमी: श्रीगंगानगर।
• बास्केटबॉल अकादमी: जैसलमेर (राजस्थान का राज्य खेल 'बास्केटबॉल' है, जिसे 1948 में घोषित किया गया था)।
• वॉलीबॉल अकादमी: झुंझुनूं।
✓राजस्थान राज्य के खेल सम्मान एवं पुरस्कार राशि:
• महाराणा प्रताप पुरस्कार: राज्य का सर्वोच्च खेल पुरस्कार (पुरस्कार राशि: ₹5 लाख)।
• गुरु वशिष्ठ पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ खेल प्रशिक्षक सम्मान (पुरस्कार राशि: ₹5 लाख)।
• राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार (राजस्थान): राज्य स्तर पर ₹7.50 लाख की राशि।
• पेंशन योजना: 40 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके अर्जुन/द्रोणाचार्य/पैरा पदक विजेता खिलाड़ियों को ₹20,000 प्रतिमाह आजीवन सम्मान पेंशन।