SUYOG ACADEMY दैनिक करंट अफेयर्स 2026

7 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण करंट अफेयर्स

राजस्थान व राष्ट्रीय परीक्षा विशेष समसामयिकी के मुख्य बिंदु

  • RPSC, RSMSSB, CET, पटवारी व पुलिस परीक्षा हेतु
  • महत्वपूर्ण योजनाएं, पुरस्कार व समसामयिक घटनाएं
  • विस्तृत व्याख्या व दैनिक अभ्यास क्विज़ उपलब्ध
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कृषि एवं वस्त्र उद्योग: "विश्व कपास दिवस" (7 अक्टूबर 2026) — "कस्तूरी कॉटन भारत" ट्रैसेबिलिटी व राजस्थान में "सफेद सोना" उत्पादन संवर्धन

प्रतिवर्ष 7 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (WTO), एफएओ (FAO) और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC)

  • विश्व कपास दिवस का परिप्रेक्ष्य एवं इतिहास: • स्थापना: वर्ष 2019 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा अफ्रीका के चार प्रमुख कपास उत्पादक देशों — बेनिन, बुर्किना फासो, चाड और माली (Cotton Four / C-4 देश) की संयुक्त पहल पर प्रतिवर्ष 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस मनाने की शुरुआत हुई। • संयुक्त राष्ट्र मान्यता: वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा इसे आधिकारिक रूप से वैश्विक कैलेंडर में अंगीकार किया गया। • वैश्विक महत्व: कपास एक प्रमुख प्राकृतिक रेशा और नकदी फसल (Cash Crop / खरीफ फसल) है, जो 75 से अधिक देशों में उगाई जाती है और करोड़ों छोटे किसानों तथा कपड़ा कामगारों की आजीविका की रीढ़ है।
  • राजस्थान में कपास ("सफेद सोना" / "बणिया") की कृषि एवं भौगोलिक दशाएं (RPSC Core): • स्थानीय नाम: राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में कपास को पारंपरिक रूप से "बणिया" (Baniya) अथवा "सफेद सोना" (White Gold) कहा जाता है। • प्रमुख उत्पादक जिले: हनुमानगढ़ (राजस्थान का शीर्ष कपास उत्पादक जिला), श्रीगंगानगर, बीकानेर (उत्तर-पश्चिमी नहरी सिंचित क्षेत्र) तथा भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा (दक्षिणी राजस्थान)। • उपयुक्त मृदा: मध्यम से भारी काली रेगुर मृदा (Black Soil / Vertisols) एवं गहरी जलोढ़ दोमट मृदा (Alluvial Loam), जिसमें नमी धारण करने की उच्च क्षमता हो। • जलवायु आवश्यकता: 20°C से 30°C तापमान, 50 से 100 सेमी वर्षा तथा कम से कम 200 पाला-मुक्त दिन (Frost-free days) अनिवार्य होते हैं। पकते समय स्वच्छ खिली धूप की आवश्यकता होती है। • प्रमुख उन्नत किस्में: बीकानेरी नरमा, गंगानगर अगेती (Ganganagar Ageti), आर.एस.-810 (RS-810), आर.एस.-875।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: "नोबेल पुरस्कार 2026" (भौतिकी) — क्वांटम सूचना विज्ञान, सुपरकंडक्टिंग क्वैबिट्स और टोपोलॉजिकल क्वांटम गणना के मौलिक सिद्धांतों की खोज

7 अक्टूबर 2026 को स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (Royal Swedish Academy of Sciences, Stockholm) द्वारा भौतिकी

  • क्वांटम भौतिकी एवं क्वैबिट्स के मौलिक सिद्धांत (UPSC/RAS Science & Tech Core): • मौलिक अंतर: पारंपरिक कंप्यूटर द्विआधारी बिट्स (0 या 1) पर कार्य करते हैं, जबकि क्वांटम कंप्यूटर "क्वैबिट्स" (Quantum Bits - Qubits) का उपयोग करते हैं। • सुपरपोजिशन (Superposition): एक क्वैबिट एक ही समय में 0 और 1 दोनों अवस्थाओं के रैखिक संयोजन (Linear Combination) में रह सकता है, जिससे समानांतर गणना क्षमता में घातांकीय (Exponential) वृद्धि होती है। • क्वांटम उलझाव (Quantum Entanglement): जब दो या अधिक कण इस प्रकार परस्पर संबद्ध हो जाते हैं कि एक कण की अवस्था का मापन तुरंत दूसरे कण की अवस्था निर्धारित कर देता है, भले ही वे अंतरिक्ष में कितनी भी दूरी पर हों (अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे "Spooky action at a distance" कहा था)। • टोपोलॉजिकल क्वैबिट: पदार्थ के टोपोलॉजिकल गुणों का उपयोग करके बाहरी शोर और पर्यावरणीय विक्षोभ (Decoherence) से अप्रभावित स्थिर क्वांटम गणना संभव होती है।
  • भारत का "राष्ट्रीय क्वांटम मिशन" (National Quantum Mission - NQM): • अनुमोदन: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2023 में ₹6,003 करोड़ के कुल बजट परिव्यय के साथ 2023 से 2031 तक की अवधि हेतु अनुमोदित। • नोडल मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology - DST)। • प्रमुख लक्ष्य: 8 वर्षों में 50 से 1000 भौतिक क्वैबिट क्षमता वाले मध्यवर्ती-स्तरीय सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, 2000 किमी दूरी तक सुरक्षित उपग्रह-आधारित क्वांटम कुंजी वितरण (QKD), और उच्च-परिशुद्धता क्वांटम सेंसर का स्वदेशी निर्माण।
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राजस्थान पर्यावरण व वन्यजीव: 72वें वन्यजीव सप्ताह में "ताल छापर अभयारण्य" (चूरू) का इको-सेंसिटिव जोन प्रबंधन व खीचन (फलोदी) में "कुरजां" पक्षी संरक्षण गलियारा

2 से 8 अक्टूबर तक संचालित 72वें "राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह" के अंतर्गत 7 अक्टूबर 2026 को राजस्थान वन विभाग और बॉम्बे नेचु

  • ताल छापर वन्यजीव अभयारण्य (चूरू) के विशिष्ट भौगोलिक तथ्य (RPSC High-Yield): • अवस्थिति व अधिसूचना: चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील में अवस्थित; इसे वर्ष 1962 में आखेट निषिद्ध क्षेत्र तथा वर्ष 1971 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया। • मुख्य आकर्षण: काले हिरण (Blackbuck - कृष्णमृग) का संसार का सबसे सघन और संरक्षित प्राकृतिक पर्यावास। • विशेष घास "मोथिया" (Mothiya Grass): यहां पाई जाने वाली 'साइप्रस रोटंडस' नामक सुगंधित व कंदयुक्त मीठी घास कृष्णमृगों का अत्यंत प्रिय भोजन है। • महाभारत कालीन संदर्भ: ताल छापर क्षेत्र को महाभारत काल में कौरव-पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य की तपोभूमि माना जाता है (सुजानगढ़ के निकट गोपालपुरा)। • शिकारी पक्षी स्वर्ग: इसे हैरियर (Harriers), शाही बाज (Imperial Eagle) और प्रवासी गिद्धों का प्रमुख शीतकालीन पड़ाव माना जाता है।
  • कुरजां (Demoiselle Crane) एवं खीचन कंजर्वेशन रिजर्व: • वैज्ञानिक नाम: ग्रस विर्गो (Anthropoides virgo)। • प्रवासी मार्ग: मध्य एशिया, मंगोलिया और तिब्बत के पठार से हिमालय की 20,000 फीट से अधिक ऊंची चोटियों को पार कर प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में राजस्थान पहुंचते हैं। • खीचन गांव (फलोदी): स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पक्षियों को अनाज (चुग्गा) खिलाने की अनूठी परंपरा के कारण विश्व प्रसिद्ध; खीचन को राजस्थान का पहला समर्पित कुरजां संरक्षण रिजर्व (Conservation Reserve) अधिसूचित किया गया है। • सांस्कृतिक महत्व: राजस्थानी लोकगीतों में कुरजां को प्रियतम के लिए संदेशवाहक (विरह-गीत) के रूप में गाया जाता है ("कुरजां ए म्हारो भंवर मिला द्यो ए...")।
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राजस्थान ऊर्जा व पर्यावरण: "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" में राजस्थान का उत्कृष्ट प्रदर्शन — 5 लाख रूफटॉप सोलर स्थापना, भादला व नोख सौर पार्क का योगदान

7 अक्टूबर 2026 को राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RREC) और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की संयुक्त समीक्ष

  • पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Scheme) के प्रमुख घटक: • शुभारंभ: 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित (कुल बजट ₹75,021 करोड़)। • राष्ट्रीय लक्ष्य: देश भर में 1 करोड़ घरों की छतों पर रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित कर पात्र परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना। • केंद्रीय वित्तीय सहायता (सब्सिडी संरचना): - 1 kW प्रणाली हेतु: ₹30,000 की सब्सिडी। - 2 kW प्रणाली हेतु: ₹60,000 की सब्सिडी। - 3 kW या उससे अधिक प्रणाली हेतु: अधिकतम ₹78,000 की केंद्रीय सब्सिडी। • मॉडल सौर ग्राम (Model Solar Village): देश के प्रत्येक जिले में एक गांव को 100% सौर-ऊर्जा संचालित मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने हेतु ₹1 करोड़ का वित्तीय अनुदान।
  • राजस्थान में सौर ऊर्जा की भौगोलिक अनुकूलता व प्रमुख सोलर पार्क (RPSC Exam Repeat): • विकिरण क्षमता: राजस्थान में वर्ष में 325 से अधिक धूप वाले दिन (Sunny days) और 5.72 kWh/m²/day की उच्चतम सौर विकिरण तीव्रता उपलब्ध है। • भादला सोलर पार्क (फलोदी/जोधपुर): कुल क्षमता 2,245 मेगावाट (विश्व के सबसे बड़े एकल-स्थान सौर पार्कों में से एक, 4 चरणों में विकसित)। • नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): क्षमता 925 मेगावाट (NTPC द्वारा विकसित)। • फतेहगढ़ सोलर पार्क (जैसलमेर - 1500 MW) व पूगल सोलर पार्क (बीकानेर - 1450 MW)।
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