शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026·8 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
2 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती व अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती एवं "जय जवान, जय किसान" प्रेरणा, स्वच्छ भारत मिशन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय "स्वच्छ भारत दिवस 2026", राजस्थान में 2 अक्टूबर 1959 नागौर पंचायती राज शुभारंभ की 67वीं वर्षगांठ व प्रदेशव्यापी विशेष ग्राम सभाएं, राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग प्रोत्साहन अभियान व विशेष छूट, 72वां राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह (2-8 अक्टूबर) एवं राजस्थान के 5 बाघ अभयारण्य, DRDO का स्वदेशी "वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम" (VSHORADS) सफल परीक्षण, तथा RBI की मौद्रिक नीति बैठक एवं डिजिटल रुपया (CBDC) ऑफलाइन भुगतान विस्तार।
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2 अक्टूबर: महात्मा गांधी की 157वीं जयंती एवं अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस (International Day of Non-Violence 2026)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती (जन्म: 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर, गुजरात) पूरे देश और विश्व में श्रद्धापूर्वक मनाई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 15 जून 2007 को संकल्प A/RES/61/271 पारित कर प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस" के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य शिक्षा और जन-जागरूकता के माध्यम से अहिंसा, सहिष्णुता और शांति के सार्वभौमिक संदेश को प्रसारित करना है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓गांधीवादी दर्शन के मूल स्तंभ (RPSC/UPSC मुख्य परीक्षा): सत्य (Satya) और अहिंसा (Ahimsa) गांधीजी के जीवन और विचारों का मूल आधार रहे। साधन और साध्य की पवित्रता (Purity of Means and Ends) का प्रतिपादन करते हुए उन्होंने कहा कि अवांछित साधनों से कभी न्यायपूर्ण साध्य हासिल नहीं किया जा सकता।
✓प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकल्पनाएं: "सर्वोदय" (सबका उदय व उत्थान — जॉन रस्किन की पुस्तक "Unto This Last" से प्रेरित), "ट्रस्टीशिप" (न्यासधारिता — पूंजीपति अपने धन को समाज की धरोहर समझें), "ग्राम स्वराज्य" (स्वावलंबी, विकेंद्रीकृत ग्रामीण गणराज्य) तथा बुनियादी शिक्षा (वर्धा योजना 1937 / नई तालीम)।
✓ऐतिहासिक आंदोलन एवं कालक्रम: चंपारण सत्याग्रह (1917 - भारत में प्रथम सविनय अवज्ञा, तिनकठिया प्रथा का विरोध), अहमदाबाद मिल मजदूर हड़ताल (1918 - प्रथम भूख हड़ताल), खेड़ा सत्याग्रह (1918 - प्रथम असहयोग), असहयोग आंदोलन (1920-22), सविनय अवज्ञा आंदोलन व दांडी यात्रा (12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 - नमक कानून का उल्लंघन), तथा भारत छोड़ो आंदोलन (8 अगस्त 1942 - "करो या मरो" का ऐतिहासिक मंत्र)।
✓प्रमुख कृतियां व समाचार पत्र: प्रसिद्ध पुस्तकें — "हिंद स्वराज" (1909, गुजराती में लिखित), "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" (The Story of My Experiments with Truth - आत्मकथा)। संपादित समाचार पत्र — इंडियन ओपिनियन (दक्षिण अफ्रीका), यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन।
✓संवैधानिक दर्शन (DPSP): भारतीय संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन), अनुच्छेद 43 (कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन), अनुच्छेद 46 (कमजोर वर्गों के हितों की अभिवृद्धि), अनुच्छेद 47 (मादक द्रव्यों का निषेध) और अनुच्छेद 48 (दुधारू पशुओं के वध पर रोक) गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित हैं।
2 अक्टूबर: पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती — "जय जवान, जय किसान" और श्वेत-हरित क्रांति की नींव
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
2 अक्टूबर 2026 को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, सादगी और शुचिता के प्रतीक भारतरत्न लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती (जन्म: 2 अक्टूबर 1904, मुगलसराय, उत्तर प्रदेश) मनाई जा रही है। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और देशव्यापी गंभीर अन्न संकट के समय उन्होंने "जय जवान, जय किसान" का अमर उद्घोष देकर देश के सैनिकों और अन्नदाता किसानों में अभूतपूर्व आत्मविश्वास का संचार किया था।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓ऐतिहासिक प्रधानमंत्री कार्यकाल: शास्त्री जी जून 1964 से जनवरी 1966 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने गृहमंत्री, रेलमंत्री व वाणिज्य मंत्री के रूप में भी सेवा दी। 1956 में अरियालूर रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने रेलमंत्री पद से त्यागपत्र देकर भारतीय राजनीति में उच्च आदर्श स्थापित किया।
✓श्वेत क्रांति (White Revolution) का सूत्रपात: शास्त्री जी ने आनंद (गुजरात) में अमूल मॉडल का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद वर्ष 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना की तथा डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में देशव्यापी दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया।
✓हरित क्रांति की प्रेरणा: गंभीर खाद्यान्न संकट से निपटने हेतु उन्होंने कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन और सी. सुब्रमण्यम के साथ उच्च उपज वाली गेहूं किस्मों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया तथा कृषि मूल्य आयोग (Agricultural Prices Commission - वर्तमान CACP) की स्थापना कराई।
✓संथानम समिति व CVC का गठन: उनके कार्यकाल में प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए गठित के. संथानम समिति की अनुशंसा पर वर्ष 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission - CVC) का गठन किया गया।
✓ताशकंद समझौता एवं समाधि: 10 जनवरी 1966 को भारत-पाकिस्तान के मध्य सोवियत संघ की मध्यस्थता से ऐतिहासिक ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका असामयिक निधन हुआ। उनका समाधि स्थल "विजय घाट" (नई दिल्ली) है। वे वर्ष 1966 में मरणोपरांत भारत रत्न से विभूषित होने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
राष्ट्रीय स्वच्छता: स्वच्छ भारत मिशन के 12 वर्ष पूर्ण — राष्ट्रीय "स्वच्छ भारत दिवस 2026" व ODF+ से ODF++ लक्ष्य
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
2 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली के राजघाट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी "स्वच्छ भारत मिशन" (Swachh Bharat Mission - SBM) के आज ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को देश भर में "स्वच्छ भारत दिवस" के रूप में मनाया जा रहा है। जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों, जिलों और ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓SBM-ग्रामीण चरण-II (2020-21 से 2026-27): खुले में शौच से मुक्ति (ODF) के स्थायित्व को बनाए रखते हुए देश के 100% गांवों को "ODF Plus Model" में परिवर्तित करना। ओडीएफ प्लस मॉडल गांव में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM), प्लास्टिक कचरा प्रबंधन तथा दृश्य स्वच्छता (Visual Cleanliness) पूर्णतः सुनिश्चित होती है।
✓गोबरधन (GOBARdhan) पहल: Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan योजना के तहत गांवों में पशु अपशिष्ट, गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद का उत्पादन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा को सशक्त किया जा रहा है।
✓SBM-शहरी 2.0 लक्ष्य: देश के सभी शहरों को "कचरा मुक्त शहर" (Garbage Free Cities) का दर्जा दिलाना, शत-प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा संग्रहण व पृथक्करण, और ऐतिहासिक कचरा डंपसाइट्स (Legacy Waste Dumpsites) का बायो-माइनिंग द्वारा शत-प्रतिशत उपचार व भूमि पुनर्ग्रहण।
✓सफाई मित्र सुरक्षा एवं यंत्रीकरण: सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मानवीय सफाई (Manual Scavenging) को पूरी तरह समाप्त कर 100% यंत्रीकृत सफाई (Mechanized Sanitation) सुनिश्चित करने हेतु "नमस्ते" (NAMASTE - National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) योजना का क्रियान्वयन।
✓सतत विकास लक्ष्य (SDG) उपलब्धि: यह मिशन संयुक्त राष्ट्र के SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) तथा SDG 11 (संवहनीय शहर और समुदाय) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राजस्थान पंचायती राज: 2 अक्टूबर 1959 नागौर शुभारंभ की 67वीं वर्षगांठ — त्रिस्तरीय व्यवस्था व राज्यव्यापी विशेष ग्राम सभाएं
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत में पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का ऐतिहासिक उद्घाटन किया था। आज 2 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज की शुरुआत की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजस्थान की सभी 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में अनिवार्य विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) 2027-28 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓ऐतिहासिक व संवैधानिक पृष्ठभूमि (RPSC/CET का अति-महत्वपूर्ण प्रश्न): बलवंत राय मेहता समिति (1957) की सिफारिशों पर लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को अपनाने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य था (दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश था, जहां 11 अक्टूबर 1959 को शुरुआत हुई)।
✓73वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। संविधान में भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243-O) और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को सौंपे गए 29 विषय शामिल हैं। यह अधिनियम 24 अप्रैल 1993 को संपूर्ण देश में लागू हुआ (24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है)।
✓राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994: राजस्थान में 23 अप्रैल 1994 को लागू हुआ। राजस्थान में महिलाओं को पंचायती राज संस्थाओं में 50% आरक्षण प्रदान किया गया है (वर्ष 2008 में संशोधन द्वारा लागू)।
✓राजस्थान में अनिवार्य ग्राम सभाएं: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्ष में कम से कम 4 अनिवार्य ग्राम सभाएं आयोजित करना आवश्यक है — 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 1 मई (मजदूर दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती)।
✓GPDP 2027-28 और सोशल ऑडिट: आज की विशेष ग्राम सभाओं में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), मनरेगा कार्यों के सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit), जल जीवन मिशन की निरंतरता तथा गांव को "स्वच्छ और हरित गांव" बनाने के प्रस्ताव ग्रामवासियों की प्रत्यक्ष भागीदारी से पारित किए गए।
राजस्थान विशेष: गांधी जयंती पर राज्यव्यापी "खादी एवं ग्रामोद्योग प्रोत्साहन अभियान" प्रारंभ — खादी उत्पादों पर विशेष छूट
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
गांधी जयंती के पावन अवसर पर राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग तथा राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा 2 अक्टूबर 2026 से प्रदेश भर में विशेष "खादी प्रोत्साहन पखवाड़ा" प्रारंभ किया गया। राज्य सरकार द्वारा खादी वस्त्रों व ग्रामोद्योगी उत्पादों पर राज्य स्तरीय विशेष छूट (Rebate) उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बुनकरों, कत्तिनों और हस्तशिल्पियों की आजीविका को सुदृढ़ करना है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड: इसकी स्थापना "राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1955" के तहत की गई थी। बोर्ड का मुख्य कार्यालय जयपुर में स्थित है और यह राज्य में कुटीर व ग्रामोद्योगों के विकास हेतु नोडल एजेंसी है।
✓राजस्थान के प्रमुख खादी व हथकरघा केंद्र (कला, संस्कृति व भूगोल):
✓• बीकानेर: ऊनी खादी, पट्टू, कंबल और मेरिनो ऊनी लोई का देश का प्रमुख केंद्र।
✓• जैसलमेर: पारंपरिक बरडी और पट्टू बुनाई का विश्वविख्यात केंद्र।
✓• कैथून (कोटा): खादी धागों और सिल्क के सम्मिश्रण से तैयार होने वाली कोटा डोरिया साड़ियां (भौगोलिक उपदर्शन / GI टैग प्राप्त)।
✓• बाड़मेर व बालोतरा: अजरक और मलीर प्रिंट खादी परिधान।
✓कारीगर कल्याण योजनाएं: स्पिनर्स और वीवर्स को सोलर चरखा (Solar Charkha) उपलब्ध कराने, कताई मानदेय में वृद्धि तथा खादी संस्थाओं को ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) योजना के अंतर्गत वित्तीय संबल प्रदान किया जा रहा है।
✓डिजिटल विपणन व आधुनिकीकरण: "खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन" की तर्ज पर युवा वर्ग को आकर्षित करने हेतु खादी प्लाजा, आधुनिक डिजाइनिंग केंद्र और राज्य के ई-मार्केटप्लेस "राजसखी" के माध्यम से उत्पादों का ऑनलाइन विक्रय सुनिश्चित किया जा रहा है।
पर्यावरण एवं जैव विविधता: 2 से 8 अक्टूबर — 72वां राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह 2026 प्रारंभ (राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व व संरक्षण तथ्य)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
भारत में वन्यजीवों, दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक पर्यावासों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने हेतु 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक देश भर में "72वां राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह" (National Wildlife Week) आयोजित किया जा रहा है। भारतीय वन्यजीव बोर्ड (IBWL) की अनुशंसा पर वर्ष 1957 से प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में यह आयोजन किया जाता है। राजस्थान वन विभाग द्वारा सभी संरक्षित क्षेत्रों व चिड़ियाघरों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓कानूनी व नीतिगत ढांचा (RPSC/UPSC कोर तथ्य): वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) — इसके अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण रिजर्व (Conservation Reserves) और सामुदायिक रिजर्व घोषित किए जाते हैं। 2022 के संशोधन द्वारा अनुसूचियों की संख्या 6 से घटाकर 4 कर दी गई तथा CITES के प्रावधानों को कठोरता से लागू किया गया।
✓राजस्थान के 5 बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves) — परीक्षा विशेष अद्यतन सूची:
✓1. रणथंभौर टाइगर रिजर्व (सवाई माधोपुर) — 1973-74 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल राजस्थान का पहला बाघ अभयारण्य।
✓2. सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर) — 1978-79 में घोषित; बाघों के विलोपन के बाद सफल पुनर्वास (Relocation) का उदाहरण।
✓4. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (बूंदी) — वर्ष 2022 में अधिसूचित (भारत का 52वां और राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व)।
✓5. धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व — वर्ष 2023 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा अनुमोदित (राजस्थान का 5वां और देश का 54वां टाइगर रिजर्व)।
✓राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard): IUCN रेड लिस्ट में "गंभीर रूप से संकटग्रस्त" (Critically Endangered)। राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर) के सम में स्थापित ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम गर्भाधान और कैप्टिव ब्रीडिंग से गोडावण चूजों के जन्म की ऐतिहासिक सफलता हासिल की गई है।
✓संवैधानिक दायित्व: संविधान के अनुच्छेद 48A (DPSP) में राज्यों को पर्यावरण की रक्षा और वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश है, तथा अनुच्छेद 51A(g) में प्रत्येक नागरिक का यह मूल कर्तव्य (Fundamental Duty) निर्धारित किया गया है।
रक्षा एवं स्वदेशी तकनीक: DRDO व थलसेना द्वारा "वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम" (VSHORADS) का सफल परीक्षण
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय थलसेना के साथ मिलकर स्वदेशी रूप से विकसित चौथी पीढ़ी के "वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम" (VSHORADS - Very Short Range Air Defence System) मिसाइल के कई सफल उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए। यह पोर्टेबल मिसाइल प्रणाली भारतीय सीमाओं पर दुश्मन के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन्स, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही नष्ट करने की क्षमता रखती है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓मिसाइल प्रणाली का स्वरूप: VSHORADS एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है, जिसे सैनिकों द्वारा आसानी से ले जाया जा सकता है और तिपाई (Tripod) या विशेष वाहनों से तुरंत दागा जा सकता है। यह ऊंचाई वाले पहाड़ी युद्ध क्षेत्रों (जैसे लद्दाख और पूर्वोत्तर LAC) में अग्रिम मोर्चों की सुरक्षा हेतु अत्यंत प्रभावी है।
✓उन्नत मार्गदर्शन तकनीक: मिसाइल में अत्याधुनिक अनकूल्ड इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर का उपयोग किया गया है। यह तकनीक लक्ष्य के थर्मल सिग्नेचर को पहचान कर अचूक प्रहार करती है और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स (जैसे फ्लेयर्स या जैमिंग) द्वारा इसे चकमा देना असंभव होता है।
✓प्रणोदन और गति: इसमें स्वदेशी डुअल-थ्रस्ट सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर (Dual-thrust Solid Motor) का उपयोग किया गया है, जो मिसाइल को अत्यधिक गति (Supersonic speed) और तेज गतिशीलता (High Maneuverability) प्रदान करता है।
✓विकास एवं विनिर्माण: इस प्रणाली को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला "रिसर्च सेंटर इमारत" (RCI) द्वारा डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं (ARDE, DRDL) और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से विकसित किया गया है।
✓आत्मनिर्भर भारत का मील का पत्थर: इसके सफल परीक्षणों के बाद भारतीय सेना की विदेशी वायु रक्षा मिसाइलों (जैसे रूसी इगला-एस) पर निर्भरता समाप्त होगी और स्वदेशी रक्षा निर्माण को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग: RBI मौद्रिक नीति बैठक — डिजिटल रुपया (CBDC) ऑफलाइन भुगतान व वित्तीय समावेशन का विस्तार
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के दौरान गवर्नर की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (Central Bank Digital Currency - CBDC / e₹) के ऑफलाइन लेनदेन और फीचर फोन कनेक्टिविटी के राष्ट्रव्यापी विस्तार की रूपरेखा की समीक्षा की गई। इसका प्राथमिक उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण इलाकों, पर्वतीय क्षेत्रों और कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले स्थानों में निर्बाध और सुरक्षित डिजिटल भुगतान उपलब्ध कराना है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC / डिजिटल रुपया क्या है?): डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई कानूनी निविदा (Legal Tender) है। यह कागजी नोटों और सिक्कों का संप्रभु डिजिटल विकल्प है, जो सीधे आरबीआई की देनदारी (Sovereign Liability) होता है।
✓CBDC के दो मुख्य प्रारूप (Exam Facts):
✓1. CBDC-थोक (e₹-W / Wholesale): 1 नवंबर 2022 को लॉन्च किया गया; इसका उपयोग वित्तीय संस्थानों द्वारा अंतर-बैंक बाजार और सरकारी प्रतिभूतियों के द्वितीयक बाजार निपटान हेतु किया जाता है।
✓2. CBDC-खुदरा (e₹-R / Retail): 1 दिसंबर 2022 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया; इसका उपयोग आम नागरिक, उपभोक्ता और व्यापारी रोजमर्रा के लेनदेन हेतु करते हैं।
✓ऑफलाइन लेनदेन प्रणाली: इंटरनेट के अभाव में निकट-क्षेत्र संचार (NFC - Near Field Communication), ब्लूटूथ और सुरक्षित एन्क्रिप्टेड साउंड-वेव तकनीक के माध्यम से बिना मोबाइल नेटवर्क के भी टोकन आधारित लेनदेन संभव बनाया गया है।
✓UPI के साथ इंटरऑपरेबिलिटी: आरबीआई ने डिजिटल रुपया वॉलेट को राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के UPI QR कोड तंत्र से पूरी तरह जोड़ दिया है, जिससे व्यापारी बिना किसी अतिरिक्त हार्डवेयर के एक ही क्यूआर कोड से यूपीआई और डिजिटल रुपया दोनों स्वीकार कर सकते हैं।
✓वित्तीय समावेशन लाभ: यह पहल बिना स्मार्टफोन या बैंक खाते वाले नागरिकों को भी सुरक्षित डिजिटल मुद्रा पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करती है।