शनिवार, 3 अक्टूबर 2026·8 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
3 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: राजस्थान में "मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0" (MJSA 2.0) के तहत 20,000 गांवों में जल सुरक्षा एवं पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, प्रदेश में 30 GW सौर ऊर्जा लक्ष्य हेतु 3 नए सोलर पार्क व "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना" में अग्रणी स्थान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत "APAAR आईडी" (One Nation, One Student ID) का शत-प्रतिशत डिजिटल नामांकन अभियान, 72वें वन्यजीव सप्ताह के बीच गांधी सागर अभयारण्य में "प्रोजेक्ट चीता" का दूसरा प्राकृतिक पर्यावास, ISRO गगनयान मिशन की पूर्व संध्या पर "व्योममित्र" ह्यूमनॉइड का अंतिम टेस्ट फ्लाइट चरण, भारतीय नौसेना का पश्चिमी तट पर तटीय सुरक्षा अभ्यास "सागर कवच" व प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट परीक्षण, 4-10 अक्टूबर "विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026" की पूर्व संध्या व बाह्य अंतरिक्ष संधि, तथा ISSF विश्व कप निशानेबाजी 2026 में भारतीय शूटरों का स्वर्णिम प्रदर्शन।
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राजस्थान जल संसाधन: "मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0" (MJSA 2.0) — 20,000 गांवों में जल सुरक्षा व पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
राजस्थान सरकार के जल संसाधन एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रदेश के 20,000 गांवों में भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों को जल आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से "मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0" (MJSA 2.0) के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। अभियान के तहत आगामी वर्षों में 5 लाख से अधिक जल संचयन संरचनाओं (एनिकट, चेकडैम, फार्म पॉन्ड, जोहड़ और टांके) के निर्माण एवं पुनरुद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓अभियान का स्वरूप एवं उद्देश्य: भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge), पारंपरिक जल स्रोतों (जोहड़, बावड़ी, तालाब, नाडी, टांका) का संरक्षण, तथा वर्षा जल की एक-एक बूंद को संचित कर ग्रामीण राजस्थान को सूखे के प्रभाव से सुरक्षित करना।
✓"फोर-वाटर कॉन्सेप्ट" (Four-Water Concept): वर्षा जल (Rainwater), सतही जल (Surface Water), उप-सतही जल (Sub-surface Water) और भूजल (Groundwater) के समेकित व वैज्ञानिक प्रबंधन पर आधारित।
✓जनसहभागिता एवं वित्तपोषण: ग्राम पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा योजना (Water Security Plan) तैयार करना; अभिसरण (Convergence) मॉडल के तहत मनरेगा (MGNREGA), राज्य बजट, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और जनसहयोग से वित्तपोषण।
✓राजस्थान के पारंपरिक जल संरक्षण तंत्र (RPSC/RAS मुख्य परीक्षा विशेष):
• टांका (Tanka): थार मरुस्थल में घरों या खेतों में पक्का भूमिगत जलकुंड जिसमें "पायतान" या "आगोर" (Catchment area) से वर्षा जल संचित होता है।
• नाडी (Nadi): पोखरण/जोधपुर/बाड़मेर में वर्षा जल संग्रहण हेतु बनाया जाने वाला प्राकृतिक या कच्चा तालाब।
• खड़ीन (Khadin): जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा 15वीं सदी में विकसित पारंपरिक कृषि एवं जल संरक्षण तकनीक, जिसमें धोरे के निचले हिस्से में ढलानदार बांध बनाकर नमी में रबी की फसल (गेहूं, चना) ली जाती है।
• बेरी/कुंई (Kuin): पश्चिमी राजस्थान में रेतीली भूमि में 10-12 मीटर गहरी संकरी कुई, जो खड़िया पत्थर पट्टी (Gypsum bed) के ऊपर रिसने वाले मीठे पानी (रेजाणी पानी) को संचित करती है।
✓जल जीवन मिशन (JJM) के साथ अभिसरण: सतही जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण से हर घर नल से जल योजना के अंतर्गत दीर्घकालिक जलापूर्ति सुनिश्चित होगी।
राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा: 30 गीगावाट सौर लक्ष्य की दिशा में 3 नए सोलर पार्क व "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना" में राज्य का अग्रणी स्थान
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) ने बीकानेर, जैसलमेर और फलौदी जिलों में कुल 2,450 मेगावाट क्षमता के नए अल्ट्रा-मेगा सोलर पार्कों के ग्रिड इंटरकनेक्शन को मंजूरी प्रदान की। इसके साथ ही "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" के अंतर्गत घरेलू छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने में राजस्थान देश के शीर्ष अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान की सौर ऊर्जा स्थिति: राष्ट्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार राजस्थान 20 गीगावाट से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के साथ भारत में प्रथम स्थान पर है। राज्य में प्रतिवर्ष 325 से अधिक धूप वाले दिन (Sunny days) और 6-7 kWh/m²/day का सौर विकिरण उपलब्ध है।
✓राजस्थान सौर ऊर्जा नीति (Solar Energy Policy 2019): वर्ष 2024-25 तक 30,000 मेगावाट (30 GW) सौर ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे अब "राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति" के तहत 2030 तक 90 GW तक विस्तारित किया जा रहा है।
✓प्रमुख सोलर पार्क (Exam Facts):
• भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर/फलौदी): 2,245 मेगावाट क्षमता के साथ विश्व के सबसे बड़े परिचालन सोलर पार्कों में से एक (4 चरणों में विकसित)।
• नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): 925 मेगावाट क्षमता।
• पूगल व बीकानेर सोलर पार्क: कोल इंडिया और आरवीयूएनएल के संयुक्त उपक्रम द्वारा विकसित।
✓पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana): 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ; 1 करोड़ घरों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य; 2 kW तक के संयंत्र पर ₹60,000 और 3 kW पर अधिकतम ₹78,000 की केंद्रीय सब्सिडी।
✓ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC): पश्चिमी राजस्थान के दूरदराज सोलर संयंत्रों से उत्पादित हरित बिजली को उत्तरी व पश्चिमी राज्यों (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) तक ट्रांसमिट करने हेतु 765 kV और 400 kV की अंतर-राज्यीय पारेषण लाइनें विकसित की जा रही हैं।
शिक्षा सुधार एवं डिजिटल गवर्नेंस: APAAR आईडी ("वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी") — उच्च व स्कूली शिक्षा में शत-प्रतिशत डिजिटल नामांकन अभियान
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विजन के अनुरूप देश भर के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए "ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री" (APAAR - Automated Permanent Academic Account Registry) आईडी जारी करने के शत-प्रतिशत संतृप्ति अभियान की समीक्षा की। इस अनूठी 12-अंकीय डिजिटल आईडी के माध्यम से देश भर के छात्रों का समग्र शैक्षणिक रिकॉर्ड एक मंच पर सुरक्षित हो रहा है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓APAAR आईडी क्या है?: यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई "एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी" (One Nation, One Student ID) प्रणाली है। यह प्रत्येक छात्र को प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए जारी की जाने वाली आजीवन 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है।
✓एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) से एकीकरण: छात्र द्वारा अर्जित सभी क्रेडिट्स, डिग्री, डिप्लोमा, खेल व सह-शैक्षणिक उपलब्धियां तथा छात्रवृत्तियां स्वचालित रूप से उनके डिजीलॉकर (DigiLocker) और एबीसी खाते में डिजिटल रूप से दर्ज हो जाती हैं।
✓प्रमुख लाभ (Exam Oriented Points):
• स्कूल या कॉलेज ट्रांसफर में आसानी: छात्र के एक संस्थान या राज्य से दूसरे संस्थान में स्थानांतरित होने पर कागजी दस्तावेजों और माइग्रेशन सर्टिफिकेट की परेशानी समाप्त।
• ड्रॉपआउट ट्रैकिंग: बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Out-of-school) बच्चों की रियल-टाइम पहचान और उन्हें पुनः मुख्यधारा शिक्षा से जोड़ना।
• फर्जी डिग्रियों पर पूर्ण विराम: सभी प्रमाण-पत्र सीधे मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों/बोर्डों द्वारा डिजिटल रूप से सत्यापित और जारी होते हैं।
✓सहमति और डेटा सुरक्षा: माता-पिता/अभिभावकों की पूर्व सहमति अनिवार्य है; डेटा को राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला (NDEAR) और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम 2023 के कड़े सुरक्षा मानकों के अनुसार सुरक्षित रखा जाता है।
वन्यजीव एवं पर्यावास संरक्षण: "प्रोजेक्ट चीता" का द्वितीय चरण — गांधी सागर अभयारण्य में चीतों का दूसरा प्राकृतिक पर्यावास तैयार
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
72वें राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह (2-8 अक्टूबर 2026) के दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ऐतिहासिक "प्रोजेक्ट चीता" (Project Cheetah) के द्वितीय चरण की प्रगति की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश के मंदसौर-नीमच जिले में स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary) में चीतों के पुनर्वास हेतु विशेष बाड़ों, जल स्रोतों और शिकार आधार (Prey Base) की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓प्रोजेक्ट चीता की पृष्ठभूमि: 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में लाए गए थे। वर्ष 1952 में भारत से विलुप्त घोषित होने के 7 दशकों बाद यह विश्व का पहला अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी स्थानांतरण (Intercontinental Large Carnivore Translocation) प्रोजेक्ट था।
✓गांधी सागर अभयारण्य की भौगोलिक महत्ता:
• यह मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों में राजस्थान की सीमा (झालावाड़, चित्तौड़गढ़, कोटा) के निकट स्थित है।
• यह चंबल नदी के जलमग्न क्षेत्र के आसपास फैला है। इसका सवाना-घास का मैदान और विरल कंटीले वनों का पारिस्थितिकी तंत्र चीतों की दौड़ और शिकार के लिए आदर्श पर्यावास प्रस्तुत करता है।
• राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स और चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के साथ यह एक विस्तृत वन्यजीव गलियारा (Wildlife Corridor) बनाता है।
✓चीता (Acinonyx jubatus) से जुड़े परीक्षा तथ्य:
• अफ्रीकी चीता (African Cheetah): IUCN स्थिति — "अतिसंवेदनशील" (Vulnerable)।
• एशियाई चीता (Asiatic Cheetah): IUCN स्थिति — "गंभीर रूप से संकटापन्न" (Critically Endangered); अब केवल ईरान में कुछ दर्जन बचे हैं।
• गति: स्थल पर सबसे तेज धावक (लगभग 100-120 किमी/घंटा)।
✓कूनो में ब्रीडिंग सफलता: कूनो में भारतीय जलवायु में जन्मे शावकों (Cubs) के सफल लालन-पालन से यह सिद्ध हुआ है कि भारत का पर्यावरण चीतों के प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूलन के लिए अनुकूल है।
अंतरिक्ष एवं स्वदेशी अनुसंधान: ISRO के गगनयान मिशन की तैयारी — मानवयुक्त मिशन पूर्व "व्योममित्र" (Vyommitra) ह्यूमनॉइड टेस्ट फ्लाइट का अंतिम चरण
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR, श्रीहरिकोटा) से प्रक्षेपित किए जाने वाले प्रथम मानवरहित गगनयान मिशन (Gaganyaan Uncrewed Mission) हेतु महिला रोबोट "व्योममित्र" (Vyommitra) के क्रू मॉड्यूल एकीकरण और एवियोनिक्स परीक्षणों का अंतिम चरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह परीक्षण भारत के प्रथम मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन (H-Mission) का मार्ग प्रशस्त करेगा।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓गगनयान मिशन का लक्ष्य: 3 अंतरिक्ष यात्रियों (Gagan-yatris) के एक दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी की कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए भेजना और उन्हें भारतीय समुद्री सीमा में सुरक्षित वापस लाना।
✓प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle): LVM3 (Launch Vehicle Mark-3), जिसे "ह्यूमन-रेटेड LVM3" (HLVM3) के रूप में प्रमाणित किया गया है। इसमें क्रू एस्केप सिस्टम (CES) और आपातकालीन इजेक्शन क्षमताएं जोड़ी गई हैं।
✓रोबोट "व्योममित्र" (Vyommitra):
• "व्योम" (अंतरिक्ष) और "मित्र" (सखा) — यह इसरो के इनर्शियल सिस्टम्स यूनिट (IISU, तिरुवनंतपुरम) द्वारा विकसित एक अर्ध-मानवरहित महिला रोबोट (Half-humanoid) है।
• क्षमताएं: जीवन रक्षक प्रणालियों (Environmental Control and Life Support Systems - ECLSS) की निगरानी करना, स्विच और पैनल संचालित करना, केबिन के दबाव, तापमान और विकिरण स्तर को मापना, तथा अंतरिक्ष यात्रियों पर भारहीनता (Microgravity) के प्रभावों का सटीक अनुकरण करना।
✓क्रू एस्केप और पैड एबॉर्ट टेस्ट (TV-D1): इसरो ने इन-फ्लाइट एबॉर्ट डिमॉन्स्ट्रेशन का सफल परीक्षण पहले ही कर लिया है, जिससे आपात स्थिति में मॉड्यूल के पैराशूट द्वारा सुरक्षित उतरने की पुष्टि हुई है।
✓भारत के 4 चयनित अंतरिक्ष यात्री (गगनयात्री): ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला (जिन्हें वायुसेना और रूस के यूरी गागारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित किया गया है)।
✓भविष्य की रूपरेखा: 2035 तक "भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन" (BAS - Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना तथा 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का राष्ट्रीय संकल्प।
रक्षा एवं नौवहन सुरक्षा: प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट व भारतीय नौसेना का तटीय सुरक्षा अभ्यास "सागर कवच"
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल (ICG) द्वारा पश्चिमी समुद्र तट पर राज्य पुलिस, सीमा शुल्क और मत्स्य पालन विभागों के समन्वय से दो दिवसीय विस्तृत तटीय सुरक्षा अभ्यास "सागर कवच" (Sagar Kavach 2026) संपन्न किया गया। इसके समानांतर, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित प्रोजेक्ट 17A क्लास के उन्नत गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट के व्यापक समुद्री परीक्षण (Sea Trials) सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓अभ्यास "सागर कवच" का उद्देश्य: 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद स्थापित बहुस्तरीय तटीय सुरक्षा चक्र (Multi-tier Coastal Defence) का परीक्षण करना, तटीय राडार श्रृंखला नेटवर्क, मछली पकड़ने वाली नौकाओं (ट्राउलर्स) के अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन और तटीय खुफिया तंत्र की तत्परता को जांचना।
✓प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरि वर्ग स्टील्थ फ्रिगेट):
• भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 अत्याधुनिक फ्रिगेट का निर्माण: 4 मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (मुंबई) और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE, कोलकाता) में।
• जहाजों के नाम (भारतीय पर्वत श्रृंखलाओं पर आधारित): नीलगिरि, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, विंध्यगिरि और महेंद्रगिरि।
• तकनीकी विशेषताएं: उन्नत रडार क्रॉस-सेक्शन (कम रडार विजिबिलिटी / स्टील्थ फीचर), ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें, बराक-8 (Barak-8 / LRSAM) वायु रक्षा मिसाइलें, और स्वदेशी एमएफ-स्टार (MF-STAR) सर्विलांस रडार।
✓तटीय सुरक्षा वास्तुकला (UPSC/RAS आंतरिक सुरक्षा):
• 12 समुद्री मील (तटीय जल): राज्य समुद्री पुलिस का अधिकार क्षेत्र।
• 12 से 200 समुद्री मील (विशेष आर्थिक क्षेत्र / EEZ): भारतीय तटरक्षक बल (ICG - 1978 में रुस्तमजी समिति की सिफारिश पर स्थापित)।
• खुले महासागर और संपूर्ण रणनीतिक सुरक्षा: भारतीय नौसेना (Indian Navy)।
अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं अंतरिक्ष कानून: 4 से 10 अक्टूबर "विश्व अंतरिक्ष सप्ताह" (World Space Week 2026) की पूर्व संध्या — अंतरिक्ष कूटनीति व बाह्य अंतरिक्ष संधि
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के तत्वावधान में प्रतिवर्ष 4 से 10 अक्टूबर तक मनाए जाने वाले "विश्व अंतरिक्ष सप्ताह" (World Space Week - WSW 2026) की पूर्व संध्या पर 3 अक्टूबर को वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों ने "अंतरिक्ष और सतत विकास" (Space and Sustainability) विषय पर विशेष सत्र आयोजित किए। यह आयोजन मानव कल्याण, जलवायु निगरानी और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में अंतरिक्ष विज्ञान के योगदान को रेखांकित करता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓4 से 10 अक्टूबर की ऐतिहासिक तिथियों का महत्व (Exam Core Fact):
• 4 अक्टूबर 1957: सोवियत संघ (USSR) द्वारा विश्व के प्रथम मानव-निर्मित उपग्रह "स्पुतनिक-1" (Sputnik-1) का सफल प्रक्षेपण, जिससे अंतरिक्ष युग (Space Age) का सूत्रपात हुआ।
• 10 अक्टूबर 1967: "बाह्य अंतरिक्ष संधि" (Outer Space Treaty - OST) का प्रभाव में आना, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून का बुनियादी "मैग्ना कार्टा" मानी जाती है।
✓बाह्य अंतरिक्ष संधि 1967 (Outer Space Treaty):
• चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों सहित बाह्य अंतरिक्ष संपूर्ण मानव जाति की साझी धरोहर (Common Heritage of Mankind / Province of all mankind) हैं।
• अंतरिक्ष में परमाणु हथियार या अन्य सामूहिक विनाश के हथियार (WMDs) तैनात करने पर पूर्ण प्रतिबंध।
• किसी भी राष्ट्र द्वारा संप्रभुता का दावा (No National Appropriation) वर्जित।
✓अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) की चुनौती एवं "केसलर सिंड्रोम" (Kessler Syndrome): पृथ्वी की निचली कक्षा में पुराने रॉकेट और निष्क्रिय उपग्रहों के मलबे की टक्कर से उत्पन्न होने वाली संभावित विनाशकारी श्रृंखला-प्रतिक्रिया।
✓भारत की "प्रोजेक्ट नेत्र" (NETRA - Network for space object Tracking and Analysis): भारतीय उपग्रहों को अंतरिक्ष मलबे और अन्य अंतरिक्ष खतरों से सुरक्षित रखने हेतु इसरो का प्रारंभिक चेतावनी नेटवर्क।
✓अर्टेमिस समझौता (Artemis Accords): भारत 2023 में नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण और चंद्रमा-मंगल अभियानों के सतत व पारदर्शी संचालन हेतु 27वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ था।
खेल जगत: ISSF जूनियर विश्व कप निशानेबाजी 2026 — भारतीय निशानेबाजों का दबदबा, पिस्टल व राइफल स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (ISSF) द्वारा आयोजित जूनियर विश्व कप निशानेबाजी 2026 में भारतीय युवा निशानेबाजों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल (पुरुष व महिला टीम) और 50 मीटर राइफल 3-पोजिशन स्पर्धा में स्वर्ण एवं रजत पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓भारतीय पदक विजेताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन:
• 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा: भारतीय युवा तिकड़ी ने फाइनल में इटली और जर्मनी को पराजित कर स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर कब्जा किया।
• 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल व स्कीट स्पर्धा: भारतीय महिला निशानेबाजों ने व्यक्तिगत और युगल स्पर्धाओं में ऐतिहासिक पदक दर्ज किए।
✓भारत में निशानेबाजी खेल का प्रशासनिक ढांचा:
• भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI - National Rifle Association of India): 1951 में स्थापित (प्रथम अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर थे, जो स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा के अध्यक्ष भी थे)।
• अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (ISSF): स्थापना 1907; मुख्यालय म्यूनिख, जर्मनी।
✓ओलंपिक व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में भारत का गौरवशाली इतिहास (RPSC/CET के प्रमुख खेल प्रश्न):
• अभिनव बिंद्रा: 2008 बीजिंग ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले स्वतंत्र भारत के पहले खिलाड़ी (10 मीटर एयर राइफल)।
• राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (राजस्थान के लाल): 2004 एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप निशानेबाजी में भारत का प्रथम व्यक्तिगत रजत पदक।
• मनु भाकर: 2024 पेरिस ओलंपिक में एक ही ओलंपिक में दो कांस्य पदक (व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल व 10 मीटर मिक्स्ड टीम सरबजोत सिंह के साथ) जीतकर स्वतंत्र भारत की पहली एथलीट बनीं।
✓"खेलो इंडिया" और "टॉप्स" (TOPS) योजना का योगदान: "टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम" (TOPS) और "खेलो इंडिया यूथ गेम्स" के जरिए जमीनी स्तर (Grassroots level) से युवा प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय कोचिंग, उपकरण और विदेशी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।