परमाणु ऊर्जा और भारत का त्रि-चरण कार्यक्रम — विखंडन, रिएक्टर, BARC, संयंत्र-राज्य, पोकरण, NPT — RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS (प्रारंभिक व मुख्य) तथा UPSC CSE पाठ्यक्रम की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इकाई; ISRO, DRDO, परमाणु ऊर्जा विभाग व जैव प्रौद्योगिकी विभाग के आधिकारिक प्रकाशन तथा NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: परमाणु ऊर्जा दो प्रक्रियाओं से मिलती है — नाभिकीय विखंडन (भारी नाभिक जैसे U-235 का टूटना; सभी व्यावसायिक रिएक्टर इसी पर) और नाभिकीय संलयन (हल्के नाभिकों का जुड़ना; सूर्य और हाइड्रोजन बम का आधार)। रिएक्टर में मंदक (भारी जल, ग्रेफ़ाइट, साधारण जल) न्यूट्रॉनों को धीमा करता है, नियंत्रक छड़ें (बोरॉन, कैडमियम) अतिरिक्त न्यूट्रॉन सोखकर शृंखला अभिक्रिया नियंत्रित करती हैं और शीतलक ऊष्मा बाहर ले जाता है। डॉ. होमी जहाँगीर भाभा का त्रि-चरण कार्यक्रम भारत के सीमित यूरेनियम और विशाल थोरियम भंडार को ध्यान में रखकर बना — पहला चरण PHWR (प्राकृतिक यूरेनियम, भारी जल), दूसरा फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर (प्लूटोनियम-239), तीसरा थोरियम-232 → यूरेनियम-233 आधारित रिएक्टर। परमाणु ऊर्जा आयोग 1948 में और परमाणु ऊर्जा विभाग 1954 में बना; ट्रॉम्बे का AEET 1967 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) कहलाया। 4 अगस्त 1956 को क्रांतिक हुआ अप्सरा एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर है; तारापुर (महाराष्ट्र, 1969, BWR) भारत का पहला परमाणु बिजलीघर है और राजस्थान का रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) संयंत्र कनाडा के सहयोग से बना। कलपक्कम का 500 MWe PFBR 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रांतिक हुआ — दूसरे चरण की शुरुआत (as of 2026)। भारत ने 1974 (स्माइलिंग बुद्धा) और 1998 (ऑपरेशन शक्ति) में पोकरण में परीक्षण किए; भारत ने NPT और CTBT पर हस्ताक्षर नहीं किए, और 2008 में उसे NSG छूट मिली।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक | डॉ. होमी जहाँगीर भाभा |
| परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) | 1948 (प्रथम अध्यक्ष — भाभा) |
| परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) | 1954 (सीधे प्रधानमंत्री के अधीन) |
| AEET → BARC | AEET 1954 में ट्रॉम्बे (मुंबई) में; 1967 में नाम BARC |
| एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर | अप्सरा, ट्रॉम्बे — 4 अगस्त 1956 |
| भारत का पहला परमाणु बिजलीघर | तारापुर, महाराष्ट्र (1969), BWR, अमेरिकी सहयोग |
| राजस्थान का परमाणु बिजलीघर | रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ ज़िला (चंबल नदी के निकट), PHWR |
| त्रि-चरण कार्यक्रम | PHWR (प्राकृतिक U) → FBR (Pu-239) → थोरियम (U-233) |
| मंदक | भारी जल (D₂O), ग्रेफ़ाइट, साधारण जल (H₂O) |
| नियंत्रक छड़ें | बोरॉन, कैडमियम (न्यूट्रॉन अवशोषक) |
| FBR का शीतलक | द्रव सोडियम |
| प्रति U-235 विखंडन ऊर्जा | लगभग 200 MeV |
| पोकरण-I | 18 मई 1974 — "स्माइलिंग बुद्धा" |
| पोकरण-II | 11 और 13 मई 1998 — "ऑपरेशन शक्ति"; 11 मई = राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस |
| NSG छूट | सितंबर 2008 |
| रेडियोधर्मिता की SI इकाई | बेकरेल (Bq) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
परमाणु ऊर्जा का अध्याय तीन खंडों को जोड़ता है — भौतिकी (विखंडन, संलयन, रेडियोधर्मिता), ऊर्जा-भूगोल (संयंत्र और राज्य) और अंतरराष्ट्रीय संबंध (NPT, CTBT, NSG)। राजस्थान के अभ्यर्थियों के लिए यह विशेष है, क्योंकि रावतभाटा परमाणु बिजलीघर, रावतभाटा भारी जल संयंत्र, प्रस्तावित माही-बाँसवाड़ा परियोजना और पोकरण (जैसलमेर) परीक्षण-स्थल — सभी राजस्थान में हैं। RAS प्रारंभिक में त्रि-चरण कार्यक्रम, संयंत्र-राज्य मिलान और संधियों पर प्रश्न बनते हैं; RAS मुख्य में "भारत की ऊर्जा सुरक्षा में परमाणु ऊर्जा की भूमिका" या "थोरियम-आधारित कार्यक्रम" पर लघु उत्तर अपेक्षित होते हैं। UPSC प्रारंभिक में मंदक, शीतलक, रिएक्टर प्रकार और संधियों पर कथन-आधारित प्रश्न आते हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — विज्ञान-प्रौद्योगिकी, राजस्थान की ऊर्जा
- UPSC CSE प्रारंभिक — रिएक्टर भौतिकी, संधियाँ
- SSC CGL, RRB NTPC — मंदक, नियंत्रक छड़, पहला रिएक्टर
- राजस्थान CET — रावतभाटा, पोकरण
3. नाभिकीय भौतिकी की मूल बातें
3.1 विखंडन बनाम संलयन
| आधार | नाभिकीय विखंडन (Fission) | नाभिकीय संलयन (Fusion) |
|---|---|---|
| परिभाषा | भारी नाभिक का दो मध्यम नाभिकों में टूटना | दो हल्के नाभिकों का जुड़कर भारी नाभिक बनना |
| उदाहरण | U-235 + न्यूट्रॉन → बेरियम + क्रिप्टॉन + 2–3 न्यूट्रॉन + ऊर्जा | ड्यूटेरियम + ट्रिटियम → हीलियम + न्यूट्रॉन + ऊर्जा |
| शर्त | धीमे (तापीय) न्यूट्रॉन से आरंभ; क्रांतिक द्रव्यमान | अत्यधिक ताप (करोड़ों डिग्री) और दाब |
| उपयोग | सभी वर्तमान परमाणु बिजलीघर; परमाणु बम | सूर्य व तारों की ऊर्जा; हाइड्रोजन बम; भविष्य के संलयन रिएक्टर (ITER) |
| अपशिष्ट | दीर्घजीवी रेडियोधर्मी अपशिष्ट | अपेक्षाकृत बहुत कम दीर्घजीवी अपशिष्ट |
| खोज | 1938, ओटो हान और फ़्रिट्ज़ स्ट्रासमैन | तारों की ऊर्जा की व्याख्या — हैंस बेथे |
ITER: फ्रांस में बन रहा अंतरराष्ट्रीय प्रायोगिक संलयन रिएक्टर (टोकामक); भारत 2005 से इसका पूर्ण सदस्य है। भारत में संलयन अनुसंधान प्लाज़्मा अनुसंधान संस्थान (IPR), गांधीनगर करता है (SST-1 टोकामक)।
3.2 द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध
आइंस्टीन का सूत्र E = mc² बताता है कि द्रव्यमान की थोड़ी-सी कमी (द्रव्यमान क्षति) से बहुत अधिक ऊर्जा मिलती है, क्योंकि c (प्रकाश की चाल) = 3 × 10⁸ मी/से बहुत बड़ा है।
उदाहरण 1: यदि 1 ग्राम द्रव्यमान पूरी तरह ऊर्जा में बदल जाए — m = 1 ग्राम = 0.001 किग्रा; E = 0.001 × (3 × 10⁸)² = 0.001 × 9 × 10¹⁶ = 9 × 10¹³ जूल। चूँकि 1 kWh = 3.6 × 10⁶ जूल, यह ऊर्जा = 9 × 10¹³ ÷ 3.6 × 10⁶ = 2.5 × 10⁷ kWh (2.5 करोड़ यूनिट)।
उदाहरण 2: एक U-235 विखंडन से लगभग 200 MeV ऊर्जा मिलती है। 1 MeV = 1.6 × 10⁻¹³ जूल, अतः 200 MeV = 200 × 1.6 × 10⁻¹³ = 3.2 × 10⁻¹¹ जूल। (रासायनिक अभिक्रिया में प्रति अणु केवल कुछ eV मिलते हैं — इसीलिए परमाणु ईंधन इतना सघन ऊर्जा-स्रोत है।)
3.3 शृंखला अभिक्रिया और क्रांतिक द्रव्यमान
हर विखंडन में 2–3 नए न्यूट्रॉन निकलते हैं, जो अन्य नाभिकों को तोड़ सकते हैं — यही शृंखला अभिक्रिया है। क्रांतिक द्रव्यमान विखंडनीय पदार्थ का वह न्यूनतम द्रव्यमान है जिसमें शृंखला अभिक्रिया स्वयं चलती रहे। रिएक्टर का "क्रांतिक" (critical) होना अर्थ है — शृंखला अभिक्रिया स्थिर दर से स्वतः चलने लगी (हर विखंडन से औसतन ठीक एक अगला विखंडन)।
| स्थिति | अर्थ | कहाँ |
|---|---|---|
| नियंत्रित शृंखला अभिक्रिया | न्यूट्रॉन संख्या स्थिर रखी जाती है | परमाणु रिएक्टर |
| अनियंत्रित शृंखला अभिक्रिया | न्यूट्रॉन संख्या तेज़ी से बढ़ती है, क्षण भर में विस्फोट | परमाणु बम |
3.4 विखंडनीय और उर्वर (fertile) पदार्थ
| पदार्थ | प्रकार | टिप्पणी |
|---|---|---|
| U-235 | विखंडनीय (fissile) | प्राकृतिक यूरेनियम में केवल लगभग 0.7% |
| U-238 | उर्वर | प्राकृतिक यूरेनियम का लगभग 99.3%; न्यूट्रॉन सोखकर Pu-239 बनता है |
| Pu-239 | विखंडनीय | प्रकृति में लगभग नहीं; रिएक्टर में U-238 से बनता है |
| Th-232 | उर्वर | न्यूट्रॉन सोखकर U-233 बनता है |
| U-233 | विखंडनीय | थोरियम चक्र का ईंधन |
परमाणु की संरचना, समस्थानिक और रेडियोधर्मिता की मूल बातें पदार्थ, परमाणु संरचना और आवर्त सारणी नोट में दी गई हैं।
4. परमाणु रिएक्टर के घटक
| घटक | कार्य | पदार्थ |
|---|---|---|
| ईंधन | विखंडन से ऊष्मा | प्राकृतिक / संवर्धित यूरेनियम, प्लूटोनियम, MOX |
| मंदक (Moderator) | तीव्र न्यूट्रॉनों को धीमा (तापीय) करना, ताकि U-235 विखंडन की संभावना बढ़े | भारी जल (D₂O), ग्रेफ़ाइट, साधारण जल (H₂O), बेरिलियम |
| नियंत्रक छड़ें (Control rods) | अतिरिक्त न्यूट्रॉन सोखकर अभिक्रिया की दर नियंत्रित करना या बंद करना | बोरॉन, कैडमियम, हैफ़्नियम |
| शीतलक (Coolant) | कोर से ऊष्मा लेकर भाप जनित्र/टरबाइन तक पहुँचाना | भारी जल, साधारण जल, द्रव सोडियम, CO₂ गैस |
| परावर्तक (Reflector) | बाहर जाते न्यूट्रॉनों को कोर में लौटाना | ग्रेफ़ाइट, बेरिलियम |
| परिरक्षण (Shielding) | विकिरण से सुरक्षा | मोटी कंक्रीट, सीसा |
भारी जल ही क्यों? भारी जल न्यूट्रॉनों को बहुत कम सोखता है, इसलिए वह प्राकृतिक (असंवर्धित) यूरेनियम से भी रिएक्टर चलाने देता है। साधारण जल न्यूट्रॉन अधिक सोखता है, इसलिए उसके साथ संवर्धित यूरेनियम चाहिए। भारत के पास संवर्धन की बड़ी क्षमता न होने के कारण पहले चरण के लिए भारी जल रिएक्टर चुने गए। भारत में भारी जल बोर्ड के संयंत्र — कोटा (रावतभाटा), हज़ीरा, थाल और मणुगुरु — भारी जल बनाते हैं।
5. रिएक्टरों के प्रकार
| प्रकार | ईंधन | मंदक | शीतलक | भारत में उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| PHWR (दाबित भारी जल रिएक्टर) | प्राकृतिक यूरेनियम (UO₂) | भारी जल | भारी जल (दाब में) | रावतभाटा, कलपक्कम (MAPS), नरोरा, काकरापार, कैगा, तारापुर 3-4 — भारत के अधिकांश रिएक्टर |
| BWR (उबलते जल रिएक्टर) | संवर्धित यूरेनियम | साधारण जल | साधारण जल (कोर में ही उबलकर भाप) | तारापुर 1 व 2 (1969) |
| PWR (दाबित जल रिएक्टर) | संवर्धित यूरेनियम | साधारण जल | साधारण जल (उच्च दाब में, उबलता नहीं) | कुडनकुलम (रूसी VVER — PWR का एक रूप) |
| FBR (फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर) | प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित (कार्बाइड/ऑक्साइड) | कोई मंदक नहीं (तीव्र न्यूट्रॉन) | द्रव सोडियम | FBTR (1985) और PFBR, कलपक्कम |
| AHWR (उन्नत भारी जल रिएक्टर) | थोरियम + U-233 / Pu | भारी जल | साधारण जल | BARC द्वारा डिज़ाइन, तीसरे चरण के लिए प्रस्तावित |
"ब्रीडर" का अर्थ: FBR जितना विखंडनीय ईंधन जलाता है, उससे अधिक नया विखंडनीय ईंधन बनाता है — कोर के चारों ओर रखे U-238 (या थोरियम) "ब्लैंकेट" में तीव्र न्यूट्रॉन सोखे जाकर Pu-239 (या U-233) बनता है।
BWR बनाम PWR: BWR में भाप सीधे रिएक्टर कोर में बनती है; PWR में प्राथमिक परिपथ का जल उच्च दाब के कारण उबलता नहीं और भाप एक अलग द्वितीयक परिपथ में भाप-जनित्र से बनती है।
6. भाभा का त्रि-चरण परमाणु कार्यक्रम
भारत के पास यूरेनियम सीमित पर थोरियम का बड़ा भंडार है (मुख्यतः केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय मोनाज़ाइट रेत में)। थोरियम स्वयं विखंडनीय नहीं है, इसलिए भाभा ने 1950 के दशक में तीन चरणों की योजना बनाई, जिसमें हर चरण अगले चरण का ईंधन तैयार करता है।
| चरण | रिएक्टर | ईंधन | उत्पाद / उद्देश्य | स्थिति (as of 2026) |
|---|---|---|---|---|
| पहला | PHWR | प्राकृतिक यूरेनियम (U-238 + 0.7% U-235) | बिजली + प्रयुक्त ईंधन से प्लूटोनियम-239 | परिपक्व; 220, 540 और 700 MWe के स्वदेशी PHWR चालू |
| दूसरा | FBR | Pu-239 + U-238 (ब्लैंकेट में U-238 / Th-232) | बिजली + अधिक Pu-239 और थोरियम से U-233 | PFBR (500 MWe, कलपक्कम) 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रांतिक; व्यावसायिक संचालन से पहले चरणबद्ध शक्ति-वृद्धि शेष |
| तीसरा | थोरियम-आधारित (जैसे AHWR) | Th-232 + U-233 | थोरियम से दीर्घकालिक ऊर्जा | डिज़ाइन व अनुसंधान स्तर |
PFBR के तथ्य: क्षमता 500 MWe; निर्माण और संचालन — BHAVINI (भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड, 2003 में गठित); डिज़ाइन — IGCAR (इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम); शीतलक द्रव सोडियम; ईंधन यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX)। परियोजना कई वर्ष विलंबित रही; अप्रैल 2026 में क्रांतिकता इसकी बड़ी उपलब्धि है, पर पूर्ण शक्ति और ग्रिड से व्यावसायिक बिजली अभी आगे के चरण हैं।
KAMINI: कलपक्कम का छोटा अनुसंधान रिएक्टर (1996), जो U-233 ईंधन से चलता है — तीसरे चरण की तकनीक का प्रयोगात्मक आधार।
7. संस्थाएँ और इतिहास
| वर्ष | संस्था / घटना | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1945 | TIFR (टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान), मुंबई | भाभा द्वारा, टाटा ट्रस्ट के सहयोग से |
| 1948 | परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) | परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1948 के बाद; अध्यक्ष भाभा |
| 1954 | परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) | सीधे प्रधानमंत्री के अधीन |
| 1954 | AEET (परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे) | 1966 में भाभा की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद 1967 में नाम BARC |
| 1956 | अप्सरा (4 अगस्त) | एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर; "स्विमिंग पूल" प्रकार; ब्रिटेन के सहयोग से ईंधन |
| 1960 | CIRUS | कनाडा के सहयोग से, अमेरिका से भारी जल |
| 1969 | तारापुर परमाणु बिजलीघर | पहला व्यावसायिक; अमेरिकी कंपनी GE द्वारा BWR |
| 1971 | IGCAR (तब RRC), कलपक्कम | फ़ास्ट ब्रीडर तकनीक का अनुसंधान |
| 1983 | AERB (परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड) | सुरक्षा नियामक |
| 1985 | ध्रुव (BARC) और FBTR (कलपक्कम) | ध्रुव — बड़ा अनुसंधान रिएक्टर; FBTR — फ़ास्ट ब्रीडर परीक्षण रिएक्टर |
| 1987 | NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड) | परमाणु बिजलीघरों का डिज़ाइन, निर्माण, संचालन |
| 2003 | BHAVINI | PFBR का निर्माण व संचालन |
अन्य DAE इकाइयाँ: UCIL (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया, जादूगोड़ा, झारखंड — यूरेनियम खनन), IREL (इंडियन रेयर अर्थ्स — मोनाज़ाइट से थोरियम/दुर्लभ मृदा), NFC (न्यूक्लियर फ़्यूल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद — ईंधन निर्माण), भारी जल बोर्ड, RRCAT इंदौर (लेज़र व त्वरक)।
8. भारत के परमाणु बिजलीघर — संयंत्र और राज्य
| संयंत्र | राज्य | रिएक्टर प्रकार | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| तारापुर (TAPS) | महाराष्ट्र | BWR (इकाई 1-2), PHWR (3-4) | 1969 — भारत का पहला परमाणु बिजलीघर; अमेरिकी सहयोग |
| रावतभाटा (RAPS / RAPP) | राजस्थान (चित्तौड़गढ़ ज़िला) | PHWR | पहली इकाई 1973, कनाडा (CANDU) सहयोग; बाद में स्वदेशी 700 MWe इकाइयाँ (RAPP-7, 8) |
| मद्रास (MAPS), कलपक्कम | तमिलनाडु | PHWR | 1984 — पहला पूर्णतः स्वदेशी परमाणु बिजलीघर; यहीं IGCAR, FBTR, PFBR |
| नरोरा (NAPS) | उत्तर प्रदेश | PHWR | 1991; गंगा के तट पर |
| काकरापार (KAPS) | गुजरात | PHWR | 1993; KAPP-3 पहला स्वदेशी 700 MWe PHWR |
| कैगा (KGS) | कर्नाटक | PHWR | 2000; पश्चिमी घाट क्षेत्र |
| कुडनकुलम (KKNPP) | तमिलनाडु | VVER (PWR प्रकार) | रूस के सहयोग से; 1,000 MWe इकाइयाँ — भारत की सबसे बड़ी इकाइयाँ |
8.1 प्रस्तावित / निर्माणाधीन (as of 2026)
| परियोजना | राज्य | टिप्पणी |
|---|---|---|
| माही-बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना | राजस्थान (बाँसवाड़ा) | 4 × 700 MWe PHWR; NPCIL–NTPC संयुक्त उद्यम "अश्विनी"; 25 सितंबर 2025 को शिलान्यास |
| गोरखपुर (GHAVP) | हरियाणा (फ़तेहाबाद) | स्वदेशी 700 MWe PHWR |
| जैतापुर | महाराष्ट्र | फ्रांस के सहयोग से प्रस्तावित |
| कोव्वाडा | आंध्र प्रदेश | अमेरिका के सहयोग से प्रस्तावित |
रावतभाटा अद्यतन (as of 2026): RAPP-7 (700 MWe) मार्च 2025 में ग्रिड से जुड़ा; RAPP-8 में सितंबर 2026 में प्रारंभिक ईंधन-भराई शुरू हुई। नीतिगत अद्यतन: दिसंबर 2025 में संसद ने SHANTI अधिनियम पारित किया, जो निजी क्षेत्र को परमाणु बिजलीघरों में भागीदारी की अनुमति देता है और परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 व परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम 2010 का स्थान लेता है; सरकार ने 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य घोषित किया है। ये विकासशील विषय हैं — परीक्षा से पहले नवीनतम स्थिति देखें।
स्वच्छ ऊर्जा के अन्य विकल्प — सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन — नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी नोट में देखें।
9. परमाणु परीक्षण और संधियाँ
9.1 पोकरण परीक्षण
| बिंदु | पोकरण-I | पोकरण-II |
|---|---|---|
| तिथि | 18 मई 1974 | 11 और 13 मई 1998 |
| कूट नाम | स्माइलिंग बुद्धा (Smiling Buddha) | ऑपरेशन शक्ति |
| परीक्षण | 1 विस्फोट — "शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट" कहा गया | 5 विस्फोट (11 मई को 3, 13 मई को 2) |
| प्रधानमंत्री | इंदिरा गांधी | अटल बिहारी वाजपेयी |
| प्रमुख वैज्ञानिक | राजा रमन्ना (BARC) | ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (DRDO), आर. चिदंबरम (DAE) |
| परिणाम | परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) का गठन (1974–75) | भारत ने स्वयं को परमाणु हथियार संपन्न राज्य घोषित किया; एकतरफ़ा परीक्षण-स्थगन (moratorium) घोषित; 11 मई — राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस |
पोकरण राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में है।
9.2 संधियाँ और भारत का रुख
| संधि / व्यवस्था | वर्ष | प्रावधान | भारत का रुख |
|---|---|---|---|
| NPT (परमाणु अप्रसार संधि) | 1968 में हस्ताक्षर हेतु खुली, 1970 से लागू | 1 जनवरी 1967 से पहले परीक्षण करने वाले 5 देश ही "परमाणु हथियार राज्य"; बाकी हथियार न बनाएँ | हस्ताक्षर नहीं — भेदभावपूर्ण ("परमाणु संपन्न" और "वंचित" का स्थायी विभाजन) |
| CTBT (व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि) | 1996 | सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध | हस्ताक्षर नहीं — निरस्त्रीकरण की समय-सीमा नहीं, भेदभावपूर्ण; पर परीक्षण पर स्वैच्छिक स्थगन |
| NSG (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) | 1974 के बाद गठित | परमाणु सामग्री व तकनीक के निर्यात पर नियंत्रण | सदस्य नहीं, पर सितंबर 2008 में विशेष छूट — NPT पर हस्ताक्षर बिना असैन्य परमाणु व्यापार की अनुमति |
| भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता ("123 समझौता") | 2008 | असैन्य परमाणु सहयोग | असैन्य और सैन्य सुविधाओं का पृथक्करण; असैन्य पर IAEA सुरक्षा उपाय |
| IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) | 1957, वियना | शांतिपूर्ण उपयोग का प्रोत्साहन, सुरक्षा उपाय | भारत संस्थापक सदस्य |
भारत की परमाणु हथियार नीति (No First Use, परमाणु त्रयी) का विवरण रक्षा प्रौद्योगिकी, DRDO और मिसाइल नोट में है।
10. रेडियोधर्मिता और विकिरण इकाइयाँ
| राशि | SI इकाई | पुरानी इकाई | संबंध |
|---|---|---|---|
| रेडियोधर्मिता (सक्रियता) | बेकरेल (Bq) = 1 विघटन/सेकंड | क्यूरी (Ci) | 1 Ci = 3.7 × 10¹⁰ Bq |
| अवशोषित मात्रा (absorbed dose) | ग्रे (Gy) = 1 जूल/किग्रा | रैड (rad) | 1 Gy = 100 rad |
| तुल्य / प्रभावी मात्रा (जैविक प्रभाव) | सीवर्ट (Sv) | रेम (rem) | 1 Sv = 100 rem |
| X / गामा किरणों से आयनन (exposure) | कूलॉम/किग्रा | रॉन्टजन (R) | — |
तीन विकिरण: अल्फ़ा (हीलियम नाभिक; भेदन क्षमता सबसे कम, कागज़ से रुक जाती है), बीटा (इलेक्ट्रॉन; ऐल्युमिनियम की पतली चादर से रुकती है), गामा (विद्युत-चुंबकीय तरंग; भेदन सबसे अधिक, मोटा सीसा/कंक्रीट चाहिए)। रेडियोधर्मिता की खोज हेनरी बेकरेल (1896) ने की; पोलोनियम व रेडियम की खोज मैरी और पियरे क्यूरी ने की।
10.1 अर्ध-आयु (Half-life)
अर्ध-आयु वह समय है जिसमें किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की आधी मात्रा विघटित हो जाती है। सूत्र: शेष मात्रा = प्रारंभिक मात्रा × (1/2)ⁿ, जहाँ n = कुल समय ÷ अर्ध-आयु।
उदाहरण 3: किसी समस्थानिक की अर्ध-आयु 5 वर्ष है। 80 ग्राम में से 15 वर्ष बाद कितना बचेगा? n = 15 ÷ 5 = 3; शेष = 80 × (1/2)³ = 80 ÷ 8 = 10 ग्राम। (क्रम: 80 → 40 → 20 → 10।)
उपयोग: कोबाल्ट-60 (कैंसर उपचार, खाद्य विकिरणन), आयोडीन-131 (थायरॉयड), कार्बन-14 (कार्बन-काल निर्धारण, अर्ध-आयु लगभग 5,730 वर्ष)। BARC की विकिरण-आधारित खाद्य संरक्षण तकनीक से प्याज़, आलू, मसालों की भंडारण-अवधि बढ़ाई जाती है।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: नियंत्रक छड़ और मंदक का अंतर
मंदक न्यूट्रॉनों को धीमा करता है (भारी जल, ग्रेफ़ाइट); नियंत्रक छड़ न्यूट्रॉनों को सोखती हैं (बोरॉन, कैडमियम)। "कैडमियम मंदक है" — गलत।
Trap 2: भारत का पहला रिएक्टर बनाम पहला बिजलीघर
अप्सरा (1956) — पहला अनुसंधान रिएक्टर (एशिया में भी पहला)। तारापुर (1969) — पहला परमाणु बिजलीघर। MAPS कलपक्कम (1984) — पहला पूर्णतः स्वदेशी बिजलीघर।
Trap 3: तारापुर BWR है, PHWR नहीं
तारापुर की इकाई 1 और 2 BWR (अमेरिकी) हैं; भारत के अधिकांश अन्य रिएक्टर PHWR हैं। कुडनकुलम VVER (PWR प्रकार, रूसी) है।
Trap 4: FBR में मंदक नहीं होता
फ़ास्ट ब्रीडर तीव्र न्यूट्रॉनों पर चलता है, इसलिए उसमें मंदक नहीं; शीतलक द्रव सोडियम है (जल न्यूट्रॉनों को धीमा कर देता)।
Trap 5: त्रि-चरण का क्रम
PHWR → FBR → थोरियम। थोरियम पहले चरण में नहीं है, क्योंकि Th-232 स्वयं विखंडनीय नहीं; उसे पहले U-233 में बदलना पड़ता है।
Trap 6: AEC 1948, DAE 1954, BARC 1967
BARC का मूल संस्थान AEET 1954 में बना और भाभा की मृत्यु (1966) के बाद 1967 में उनके नाम पर BARC कहलाया। "BARC 1954 में इसी नाम से बना" — गलत।
Trap 7: पोकरण-I "ऑपरेशन शक्ति" नहीं था
1974 = स्माइलिंग बुद्धा (इंदिरा गांधी); 1998 = ऑपरेशन शक्ति (वाजपेयी)। "मिशन शक्ति" (2019) ASAT परीक्षण है — तीनों को न मिलाएँ।
Trap 8: NSG सदस्यता और NSG छूट
भारत NSG का सदस्य नहीं है; उसे 2008 में केवल विशेष छूट मिली। भारत ने NPT और CTBT, दोनों पर हस्ताक्षर नहीं किए।
Trap 9: PFBR का "क्रांतिक" होना ≠ व्यावसायिक बिजली उत्पादन
क्रांतिकता का अर्थ है स्वतः-चलने वाली शृंखला अभिक्रिया की शुरुआत; पूर्ण क्षमता और ग्रिड से बिजली बाद के चरण हैं (as of 2026)।
Trap 10: सीवर्ट बनाम ग्रे
ग्रे = अवशोषित ऊर्जा (जूल/किग्रा); सीवर्ट = जैविक प्रभाव को ध्यान में रखकर तुल्य मात्रा। रेडियोधर्मिता की SI इकाई बेकरेल है, क्यूरी नहीं।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक | होमी जहाँगीर भाभा |
| 2 | परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना | 1948 |
| 3 | परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना | 1954 |
| 4 | BARC का पुराना नाम | AEET |
| 5 | AEET का नाम BARC | 1967 |
| 6 | BARC कहाँ | ट्रॉम्बे, मुंबई |
| 7 | एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर | अप्सरा (1956) |
| 8 | अप्सरा किस प्रकार का | स्विमिंग पूल प्रकार |
| 9 | CIRUS किसके सहयोग से | कनाडा |
| 10 | भारत का पहला परमाणु बिजलीघर | तारापुर (1969) |
| 11 | तारापुर किस राज्य में | महाराष्ट्र |
| 12 | तारापुर 1-2 का रिएक्टर प्रकार | BWR |
| 13 | रावतभाटा किस ज़िले में | चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) |
| 14 | रावतभाटा की पहली इकाई किसके सहयोग से | कनाडा |
| 15 | पहला पूर्णतः स्वदेशी बिजलीघर | MAPS, कलपक्कम (1984) |
| 16 | नरोरा | उत्तर प्रदेश |
| 17 | काकरापार | गुजरात |
| 18 | कैगा | कर्नाटक |
| 19 | कुडनकुलम | तमिलनाडु, रूस के सहयोग से |
| 20 | कुडनकुलम का रिएक्टर | VVER (PWR प्रकार) |
| 21 | माही-बाँसवाड़ा परियोजना | राजस्थान, 4 × 700 MWe (प्रस्तावित) |
| 22 | पहला स्वदेशी 700 MWe PHWR | KAPP-3, काकरापार |
| 23 | IGCAR कहाँ | कलपक्कम |
| 24 | PFBR की क्षमता | 500 MWe |
| 25 | PFBR का निर्माता-संचालक | BHAVINI |
| 26 | U-233 से चलने वाला अनुसंधान रिएक्टर | KAMINI |
| 27 | त्रि-चरण का पहला चरण | PHWR, प्राकृतिक यूरेनियम |
| 28 | दूसरा चरण | FBR, प्लूटोनियम-239 |
| 29 | तीसरा चरण | थोरियम-232 → U-233 |
| 30 | थोरियम का प्रमुख खनिज | मोनाज़ाइट |
| 31 | प्राकृतिक यूरेनियम में U-235 | लगभग 0.7% |
| 32 | भारी जल का सूत्र | D₂O |
| 33 | मंदक का कार्य | न्यूट्रॉनों को धीमा करना |
| 34 | नियंत्रक छड़ के पदार्थ | बोरॉन, कैडमियम |
| 35 | FBR का शीतलक | द्रव सोडियम |
| 36 | PWR और BWR का मंदक | साधारण जल |
| 37 | सूर्य की ऊर्जा का स्रोत | नाभिकीय संलयन |
| 38 | परमाणु बिजलीघर का आधार | नियंत्रित विखंडन |
| 39 | विखंडन की खोज | ओटो हान व स्ट्रासमैन (1938) |
| 40 | प्रति U-235 विखंडन ऊर्जा | लगभग 200 MeV |
| 41 | E = mc² में c | 3 × 10⁸ मी/से |
| 42 | ITER कहाँ | फ्रांस |
| 43 | IPR (संलयन अनुसंधान) | गांधीनगर |
| 44 | पोकरण-I | 18 मई 1974, स्माइलिंग बुद्धा |
| 45 | पोकरण-II | 11 व 13 मई 1998, ऑपरेशन शक्ति |
| 46 | राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस | 11 मई |
| 47 | पोकरण किस ज़िले में | जैसलमेर |
| 48 | NPT लागू | 1970 |
| 49 | CTBT | 1996; भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए |
| 50 | NSG छूट | 2008 |
| 51 | NSG का गठन किस घटना के बाद | भारत के 1974 के परीक्षण के बाद |
| 52 | NPCIL की स्थापना | 1987 |
| 53 | परमाणु सुरक्षा नियामक | AERB (1983) |
| 54 | यूरेनियम खनन (जादूगोड़ा) | UCIL, झारखंड |
| 55 | रेडियोधर्मिता की SI इकाई | बेकरेल |
| 56 | 1 क्यूरी | 3.7 × 10¹⁰ Bq |
| 57 | अवशोषित मात्रा की इकाई | ग्रे (Gy) |
| 58 | 1 सीवर्ट | 100 रेम |
| 59 | सबसे अधिक भेदन वाला विकिरण | गामा |
| 60 | रेडियोधर्मिता की खोज | हेनरी बेकरेल (1896) |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
परमाणु ऊर्जा के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं (नमूना प्रश्न अभ्यास हेतु बनाए गए हैं):
- घटक-कार्य: "परमाणु रिएक्टर में कैडमियम छड़ों का कार्य है—" — न्यूट्रॉन सोखकर अभिक्रिया नियंत्रित करना।
- संयंत्र-राज्य मिलान: "कैगा – कर्नाटक, नरोरा – उत्तर प्रदेश, काकरापार – गुजरात, रावतभाटा – मध्य प्रदेश — कौन-सा युग्म गलत है?" — रावतभाटा (राजस्थान है)।
- त्रि-चरण: "भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में कौन-सा रिएक्टर है?" — फ़ास्ट ब्रीडर।
- कथन-आधारित (UPSC शैली): "1. भारी जल रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम पर चल सकता है। 2. FBR में ग्रेफ़ाइट मंदक है। 3. भारत NSG का सदस्य है।" — केवल 1 सही।
- गणना: "अर्ध-आयु 4 दिन; 64 ग्राम में से 12 दिन बाद?" — n = 3, 64 ÷ 8 = 8 ग्राम।
- RAS मुख्य (वर्णनात्मक): "भारत के त्रि-चरण परमाणु कार्यक्रम की व्याख्या कीजिए और थोरियम का महत्व बताइए" — चरण-तालिका + संसाधन तर्क + PFBR स्थिति।
रणनीति: हर रिएक्टर प्रकार के लिए "ईंधन-मंदक-शीतलक" की तीन-खाने वाली पंक्ति याद रखें। संयंत्रों के लिए राज्य के साथ "पहला" वाला तथ्य जोड़ें (तारापुर — पहला, MAPS — पहला स्वदेशी, कुडनकुलम — रूसी)।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. स्थापना "48-54-56-67-69": AEC (48) → DAE (54) → अप्सरा (56) → BARC नाम (67) → तारापुर (69)।
2. त्रि-चरण "प्रा-प्लू-थो": प्राकृतिक यूरेनियम → प्लूटोनियम → थोरियम।
3. "मंद भारी, रोक बो-कै": मंदक भारी जल; रोकने वाली छड़ें बोरॉन-कैडमियम।
4. "तेज़ घोड़ा, सोडियम पानी": फ़ास्ट ब्रीडर — मंदक नहीं, शीतलक सोडियम।
5. संयंत्र-राज्य "तारा महा, रावत राज, कल-कुड तमिल, नरोरा UP, काकरा गुज, कैगा कर्ना"।
6. पोकरण "74 मुस्कान, 98 शक्ति": 1974 स्माइलिंग बुद्धा; 1998 ऑपरेशन शक्ति।
7. विकिरण इकाइयाँ "बे-ग्रे-सी": बेकरेल (सक्रियता), ग्रे (अवशोषण), सीवर्ट (जैविक प्रभाव)।
15. कथन अभ्यास
सूर्य की ऊर्जा नाभिकीय संलयन से प्राप्त होती है। — सही।
परमाणु रिएक्टर में कैडमियम मंदक का कार्य करता है। — गलत (कैडमियम नियंत्रक छड़ है; मंदक भारी जल/ग्रेफ़ाइट)।
भारी जल रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम से चल सकता है। — सही।
फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर में शीतलक के रूप में द्रव सोडियम प्रयुक्त होता है। — सही।
त्रि-चरण कार्यक्रम के पहले चरण में थोरियम का उपयोग होता है। — गलत (पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम; थोरियम तीसरे चरण में)।
अप्सरा एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर है। — सही।
तारापुर परमाणु बिजलीघर राजस्थान में है। — गलत (महाराष्ट्र; राजस्थान में रावतभाटा)।
कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर रूस के सहयोग से बना है। — सही।
पोकरण-I परीक्षण का कूट नाम ऑपरेशन शक्ति था। — गलत (स्माइलिंग बुद्धा; ऑपरेशन शक्ति 1998 का)।
भारत ने NPT पर हस्ताक्षर किए हैं। — गलत (भारत ने NPT और CTBT, दोनों पर हस्ताक्षर नहीं किए)।
रेडियोधर्मिता की SI इकाई बेकरेल है। — सही।
BARC का पुराना नाम AEET था। — सही।
16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- विखंडन = भारी नाभिक टूटे (रिएक्टर, परमाणु बम); संलयन = हल्के जुड़ें (सूर्य, H-बम, ITER)
- U-235 विखंडन ≈ 200 MeV; E = mc², 1 ग्राम ≈ 9 × 10¹³ J
- मंदक — भारी जल, ग्रेफ़ाइट, साधारण जल (धीमा करना)
- नियंत्रक छड़ — बोरॉन, कैडमियम (सोखना); शीतलक — जल, सोडियम, CO₂
- PHWR — प्राकृतिक U + भारी जल; BWR/PWR — संवर्धित U + साधारण जल; FBR — मंदक नहीं, सोडियम
- त्रि-चरण: PHWR → FBR (Pu-239) → थोरियम (U-233); थोरियम = मोनाज़ाइट
- AEC 1948, DAE 1954, AEET 1954 → BARC 1967 (ट्रॉम्बे)
- अप्सरा 4 अगस्त 1956 — एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर
- तारापुर 1969 (महाराष्ट्र, BWR, अमेरिका) — पहला बिजलीघर
- रावतभाटा — चित्तौड़गढ़, राजस्थान, PHWR, कनाडा सहयोग (1973)
- MAPS कलपक्कम 1984 पहला स्वदेशी; कुडनकुलम — रूस, VVER
- PFBR 500 MWe (BHAVINI, IGCAR डिज़ाइन) — अप्रैल 2026 में पहली क्रांतिकता
- पोकरण (जैसलमेर): 1974 स्माइलिंग बुद्धा; 1998 ऑपरेशन शक्ति, 11 मई प्रौद्योगिकी दिवस
- NPT और CTBT पर हस्ताक्षर नहीं; NSG छूट 2008; 123 समझौता 2008
- बेकरेल (सक्रियता), ग्रे (अवशोषण), सीवर्ट (प्रभाव); 1 Ci = 3.7 × 10¹⁰ Bq
17. अभ्यास
इस पृष्ठ के अंत में 25 प्रश्नों का अभ्यास क्विज़ है — इसमें रिएक्टर भौतिकी, त्रि-चरण कार्यक्रम, संयंत्र-राज्य, परीक्षण और संधियाँ तथा दो छोटी गणनाएँ शामिल हैं। गणना वाले प्रश्नों में सूत्र लिखकर हल करें। पूर्ण अभ्यास के लिए RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
भारत का परमाणु कार्यक्रम संसाधनों की वास्तविकता से बना है — कम यूरेनियम, बहुत अधिक थोरियम। इसी कारण भाभा ने PHWR से FBR और फिर थोरियम तक की क्रमबद्ध राह चुनी, जिसका दूसरा चरण 2026 में PFBR की क्रांतिकता से व्यावहारिक रूप लेने लगा है। परीक्षा के लिए रिएक्टर के घटक (मंदक, नियंत्रक छड़, शीतलक), रिएक्टर प्रकार, संयंत्र-राज्य तालिका और संधियों पर भारत का रुख स्थायी अंक दिलाते हैं; PFBR, नई इकाइयाँ और SHANTI अधिनियम जैसे विषयों को समसामयिकी के रूप में अद्यतन रखें।
भाभा · AEC 1948 · DAE 1954 · BARC 1967 · अप्सरा 1956 · तारापुर 1969 BWR · रावतभाटा चित्तौड़गढ़ · PHWR → FBR → थोरियम · मंदक धीमा, कैडमियम सोखे · पोकरण 1974/1998 · NPT-CTBT नहीं, NSG छूट 2008
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“परमाणु ऊर्जा और भारत का त्रि-चरण कार्यक्रम — विखंडन, रिएक्टर, BARC, संयंत्र-राज्य, पोकरण, NPT — RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- परमाणु ऊर्जा और भारत का त्रि-चरण कार्यक्रम — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- जैव प्रौद्योगिकी, DNA और आनुवंशिक इंजीनियरी — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- भारतीय वैज्ञानिक और प्रमुख आविष्कार — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- ISRO और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
होमी भाभा द्वारा बनाया गया यह कार्यक्रम तीन चरणों में है — पहला PHWR (प्राकृतिक यूरेनियम), दूसरा फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर (प्लूटोनियम-239) और तीसरा थोरियम-232 से बने यूरेनियम-233 पर आधारित रिएक्टर। इसका उद्देश्य भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना है।
मंदक विखंडन से निकले तीव्र न्यूट्रॉनों को धीमा (तापीय) करता है, ताकि U-235 के विखंडन की संभावना बढ़े। भारी जल, ग्रेफ़ाइट और साधारण जल प्रमुख मंदक हैं।
नियंत्रक छड़ें प्रायः बोरॉन या कैडमियम की होती हैं, जो न्यूट्रॉनों को सोख लेती हैं। इन्हें अंदर-बाहर करके शृंखला अभिक्रिया की दर नियंत्रित या रिएक्टर बंद किया जाता है।
भारत का और एशिया का पहला अनुसंधान रिएक्टर अप्सरा है, जो 4 अगस्त 1956 को ट्रॉम्बे में क्रांतिक हुआ। पहला परमाणु बिजलीघर तारापुर (महाराष्ट्र) 1969 में शुरू हुआ।
राजस्थान का परमाणु बिजलीघर रावतभाटा (चित्तौड़गढ़ ज़िला) में चंबल नदी के निकट है, जिसकी पहली इकाई कनाडा के सहयोग से 1973 में शुरू हुई। बाँसवाड़ा में माही-बाँसवाड़ा परियोजना प्रस्तावित है, जिसका शिलान्यास सितंबर 2025 में हुआ।
BARC का मूल नाम परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे (AEET) था, जो 1954 में बना। होमी भाभा की 1966 में मृत्यु के बाद 1967 में इसका नाम भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रखा गया।
फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर तीव्र न्यूट्रॉनों पर चलता है, इसलिए उसमें मंदक नहीं होता और शीतलक द्रव सोडियम होता है। यह जितना विखंडनीय ईंधन जलाता है, उससे अधिक नया ईंधन (Pu-239 या U-233) बनाता है।
पहला परीक्षण 18 मई 1974 को 'स्माइलिंग बुद्धा' नाम से और दूसरा 11 व 13 मई 1998 को 'ऑपरेशन शक्ति' नाम से राजस्थान के जैसलमेर ज़िले के पोकरण में हुआ। 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है।
भारत NPT को भेदभावपूर्ण मानता है, क्योंकि यह 1967 से पहले परीक्षण करने वाले पाँच देशों को ही स्थायी रूप से परमाणु हथियार राज्य मानती है। इसी तर्क से भारत ने CTBT पर भी हस्ताक्षर नहीं किए, पर परीक्षण पर स्वैच्छिक स्थगन रखा है।
रेडियोधर्मिता की SI इकाई बेकरेल (Bq) है, जो एक विघटन प्रति सेकंड के बराबर है। पुरानी इकाई क्यूरी है और 1 क्यूरी = 3.7 × 10¹⁰ बेकरेल।
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