नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी — सौर, पवन, जैव-ईंधन, ग्रीन हाइड्रोजन, फ़्यूल सेल, बैटरी व EV — RAS, UPSC
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS (प्रारंभिक व मुख्य) तथा UPSC CSE पाठ्यक्रम की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इकाई; ISRO, DRDO, परमाणु ऊर्जा विभाग व जैव प्रौद्योगिकी विभाग के आधिकारिक प्रकाशन तथा NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: ऊर्जा स्रोत दो प्रकार के हैं — पारंपरिक (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस; सीमित व प्रदूषणकारी) और गैर-पारंपरिक / नवीकरणीय (सौर, पवन, लघु जल, ज्वारीय, भूतापीय, बायोमास; प्रकृति में बार-बार पूरित)। सौर ऊर्जा दो तरीकों से बिजली बनाती है — सौर PV (प्रकाश-विद्युत प्रभाव से सीधे बिजली, मुख्यतः सिलिकॉन सेल) और CSP (दर्पणों से ऊष्मा केंद्रित कर भाप-टरबाइन)। पवन शक्ति हवा की गति के घन (v³) के अनुपात में बढ़ती है; भारत में भूतापीय ऊर्जा का प्रमुख स्थल लद्दाख की पुगा घाटी है। ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनती है, जबकि ग्रे प्राकृतिक गैस से (CO₂ उत्सर्जन सहित) और ब्लू उसी प्रक्रिया में कार्बन कैप्चर जोड़कर; राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को जनवरी 2023 में स्वीकृति मिली। फ़्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से सीधे बिजली बनाता है, उप-उत्पाद केवल पानी। EV चार प्रकार के हैं — BEV, HEV, PHEV, FCEV; इन्हें बढ़ावा देने वाली योजनाएँ FAME (2015 से) और उसकी उत्तराधिकारी PM E-DRIVE (2024) हैं। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की शुरुआत 2015 में पेरिस (COP21) में भारत और फ़्रांस ने की; मुख्यालय गुरुग्राम। राजस्थान का भड़ला सोलर पार्क (फलोदी, पहले जोधपुर ज़िला) देश के सबसे बड़े सौर पार्कों में है।
संक्षिप्त उत्तर
| ऊर्जा स्रोत | सिद्धांत / स्रोत | भारत / राजस्थान से जुड़ा तथ्य |
|---|---|---|
| सौर PV | प्रकाश-विद्युत (photovoltaic) प्रभाव; प्रकाश → सीधे DC बिजली | भड़ला सोलर पार्क (फलोदी, राजस्थान) |
| सौर CSP | दर्पणों से सूर्य-ताप केंद्रित → भाप → टरबाइन | ताप को पिघले लवण में संग्रहित किया जा सकता है |
| पवन | हवा की गतिज ऊर्जा → टरबाइन; P ∝ v³ | जैसलमेर पवन पार्क; राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, चेन्नई |
| लघु जलविद्युत | बहते जल की ऊर्जा; भारत में 25 MW तक "लघु" | पहाड़ी राज्यों में अधिक संभावना |
| ज्वारीय | चंद्रमा-सूर्य के गुरुत्व से ज्वार-भाटा | खंभात व कच्छ की खाड़ी, सुंदरबन |
| भूतापीय | पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा | पुगा घाटी (लद्दाख), मणिकरण (हिमाचल), तातापानी (छत्तीसगढ़) |
| बायोगैस | गोबर / जैव-अपशिष्ट का अवायवीय पाचन | मुख्य घटक मीथेन; GOBARdhan, SATAT |
| ग्रीन हाइड्रोजन | नवीकरणीय बिजली से जल का इलेक्ट्रोलिसिस | राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन — जनवरी 2023 |
| संस्था / योजना | वर्ष | मुख्य बात |
|---|---|---|
| नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) | 2006 (यह नाम) | 1992 में "अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय" (MNES) बना था |
| अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) | 30 नवंबर 2015 | COP21 पेरिस; भारत व फ़्रांस; मुख्यालय गुरुग्राम |
| FAME इंडिया (चरण I) | अप्रैल 2015 | हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वाहनों के तेज़ अंगीकरण हेतु |
| FAME II | अप्रैल 2019 – मार्च 2024 | सार्वजनिक परिवहन व चार्जिंग ढाँचे पर ज़ोर |
| PM E-DRIVE | सितंबर 2024 (स्वीकृति), 1 अक्टूबर 2024 से लागू | FAME II की उत्तराधिकारी; भारी उद्योग मंत्रालय |
| राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन | 4 जनवरी 2023 | नोडल — MNRE |
| राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति | 2018 (2022 में संशोधित) | इथेनॉल मिश्रण, 2G इथेनॉल |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा में "ऊर्जा संसाधन" विज्ञान-प्रौद्योगिकी और राजस्थान भूगोल — दोनों खंडों में आता है; राजस्थान की सौर-पवन क्षमता, भड़ला व जैसलमेर बार-बार प्रासंगिक बनते हैं। UPSC प्रारंभिक में ग्रीन हाइड्रोजन, फ़्यूल सेल, बैटरी तकनीक, जैव-ईंधन की पीढ़ियाँ और ISA जैसे विषयों पर कथन-आधारित अवधारणात्मक प्रश्न बनते हैं। SSC, RRB NTPC और राजस्थान CET में "बायोगैस का मुख्य घटक", "सौर सेल में प्रयुक्त तत्व", "ISA का मुख्यालय" जैसे सीधे तथ्य पूछे जाते हैं। कोयला, पेट्रोलियम व खनिज ऊर्जा का भूगोल भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधन नोट में है — दोनों को साथ पढ़ें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- RPSC RAS प्रारंभिक — विज्ञान-प्रौद्योगिकी व राजस्थान भूगोल
- RPSC RAS मुख्य — ऊर्जा प्रौद्योगिकी, राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा पर लघु उत्तर
- UPSC CSE प्रारंभिक — ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी, जैव-ईंधन, ISA
- SSC CGL, RRB NTPC — सीधे तथ्य व पूर्ण रूप
- राजस्थान CET — राजस्थान के सौर-पवन स्थल, बुनियादी विज्ञान
प्रश्न किस रूप में आते हैं?
- वर्गीकरण — कौन-सा स्रोत नवीकरणीय है / कौन-सा नहीं
- सिद्धांत — सौर सेल किस प्रभाव पर, फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद, बायोगैस का घटक
- हाइड्रोजन के "रंग" — ग्रे, ब्लू, ग्रीन का अंतर
- संस्था व स्थान — ISA, पुगा घाटी, भड़ला
- वाहन प्रकार — HEV बनाम PHEV बनाम FCEV
- सरल संख्यात्मक — सौर संयंत्र की दैनिक ऊर्जा, इथेनॉल मिश्रण, पवन शक्ति पर गति का प्रभाव
3. पारंपरिक बनाम गैर-पारंपरिक ऊर्जा
| बिंदु | पारंपरिक (Conventional) | गैर-पारंपरिक (Non-conventional) |
|---|---|---|
| उदाहरण | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलाऊ लकड़ी; बड़ी जलविद्युत परियोजनाएँ भी पारंपरिक मानी जाती हैं | सौर, पवन, लघु जल, ज्वारीय, तरंग, भूतापीय, बायोमास, हाइड्रोजन |
| उपलब्धता | जीवाश्म ईंधन सीमित, लाखों वर्षों में बने | अधिकांश प्रकृति में निरंतर पूरित (नवीकरणीय) |
| प्रदूषण | CO₂, SO₂, NOx, कणिकीय पदार्थ | संचालन में बहुत कम या शून्य उत्सर्जन |
| लागत संरचना | ईंधन पर निरंतर ख़र्च | प्रारंभिक पूँजी अधिक, ईंधन लगभग मुफ़्त |
| चुनौती | आयात-निर्भरता (तेल, गैस), जलवायु परिवर्तन | अनियमितता (intermittency) — सूर्य रात को नहीं, हवा हमेशा नहीं; भंडारण ज़रूरी |
ध्यान दें: परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय नहीं है (यूरेनियम सीमित है), पर यह गैर-जीवाश्म (non-fossil) स्रोत है और भारत के गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य में गिनी जाती है। भारत के त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के लिए परमाणु ऊर्जा और भारत का तीन-चरण कार्यक्रम नोट देखें।
4. सौर ऊर्जा
4.1 सौर PV बनाम CSP
| बिंदु | सौर फ़ोटोवोल्टिक (PV) | संकेंद्रित सौर ऊर्जा (CSP) |
|---|---|---|
| सिद्धांत | प्रकाश-विद्युत प्रभाव — फ़ोटॉन अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन मुक्त करते हैं | दर्पण / लेंस सूर्य-प्रकाश को एक बिंदु या रेखा पर केंद्रित करते हैं → ऊष्मा → भाप → टरबाइन |
| उत्पादन | सीधे DC बिजली (इन्वर्टर से AC) | ऊष्मा से अप्रत्यक्ष बिजली |
| प्रकाश की आवश्यकता | विसरित (बादल वाले) प्रकाश में भी कुछ उत्पादन | सीधा तेज़ धूप (direct normal irradiance) चाहिए |
| भंडारण | बैटरी से | पिघले लवण (molten salt) में ताप-भंडारण संभव |
| रूप | रूफ़टॉप से लेकर विशाल सोलर पार्क तक | पैराबोलिक ट्रफ़, सोलर टावर, पैराबोलिक डिश |
| भारत में प्रचलन | अत्यधिक — अधिकांश सौर क्षमता | सीमित |
4.2 सौर सेल
सौर सेल मूलतः एक बड़े क्षेत्रफल वाला p-n संधि (junction) डायोड है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photovoltaic effect) की खोज 1839 में फ़्रांसीसी भौतिकशास्त्री एडमंड बेकरेल ने की थी। सबसे अधिक प्रयुक्त पदार्थ सिलिकॉन है।
| सेल का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| मोनोक्रिस्टलाइन सिलिकॉन | एकल क्रिस्टल; अधिक दक्षता, अधिक लागत; गहरा काला रंग |
| पॉलीक्रिस्टलाइन सिलिकॉन | अनेक क्रिस्टल; कुछ कम दक्षता, सस्ता; नीलाभ रंग |
| पतली फ़िल्म (Thin film) | कैडमियम टेल्यूराइड (CdTe), CIGS, अनाकार सिलिकॉन; हल्की, लचीली |
| पेरोव्स्काइट | उभरती तकनीक; सस्ती व उच्च दक्षता की संभावना, पर टिकाऊपन की चुनौती |
| बाइफ़ेशियल पैनल | दोनों सतहों से प्रकाश ग्रहण करता है |
संख्यात्मक उदाहरण 1: 1.6 m² का पैनल, जिस पर 1000 W/m² सौर विकिरण पड़ता है और जिसकी दक्षता 20% है, कितनी शक्ति देगा? — शक्ति = 1.6 × 1000 × 0.20 = 320 W।
4.3 रूफ़टॉप सौर
घर, कार्यालय या कारखाने की छत पर लगे सौर पैनल रूफ़टॉप सौर कहलाते हैं। नेट मीटरिंग में उपभोक्ता की अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाती है और बिल में समायोजित होती है। पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना (फ़रवरी 2024) का उद्देश्य एक करोड़ घरों पर रूफ़टॉप सौर लगाना और हर माह 300 यूनिट तक मुफ़्त बिजली है (as of 2026, योजना जारी)। किसानों के लिए पीएम-कुसुम (2019) सौर पंप और कृषि-भूमि पर छोटे सौर संयंत्रों को बढ़ावा देती है।
संख्यात्मक उदाहरण 2: 3 kW का रूफ़टॉप संयंत्र प्रतिदिन औसतन 5 घंटे पूर्ण क्षमता के बराबर चलता है। दैनिक उत्पादन = 3 × 5 = 15 kWh (यूनिट); 30 दिन में = 15 × 30 = 450 यूनिट।
5. पवन, लघु जल, ज्वारीय और भूतापीय ऊर्जा
5.1 पवन ऊर्जा
पवन टरबाइन हवा की गतिज ऊर्जा को घूर्णन ऊर्जा और फिर जनरेटर से बिजली में बदलता है। पवन शक्ति का सूत्र — P = ½ ρ A v³ (ρ = वायु घनत्व, A = ब्लेड द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल, v = हवा की गति)। इसलिए हवा की गति दोगुनी होने पर शक्ति 2³ = 8 गुना हो जाती है। सैद्धांतिक रूप से टरबाइन हवा की अधिकतम लगभग 59.3% ऊर्जा ही ग्रहण कर सकता है — इसे बेट्ज़ सीमा (Betz limit) कहते हैं।
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| तटवर्ती (onshore) बनाम अपतटीय (offshore) | अपतटीय में हवा तेज़ व स्थिर, पर लागत अधिक; भारत में गुजरात व तमिलनाडु तट संभावित क्षेत्र |
| प्रमुख राज्य | गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान |
| प्रसिद्ध स्थल | मुप्पंडल (तमिलनाडु), जैसलमेर पवन पार्क (राजस्थान) |
| शोध संस्था | राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE), चेन्नई |
| हाइब्रिड | पवन-सौर हाइब्रिड — एक ही भूमि व ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग; दिन में सौर, शाम/रात व मानसून में पवन |
संख्यात्मक उदाहरण 3: हवा की गति 2 m/s से बढ़कर 4 m/s हो जाए (बाकी सब समान), तो शक्ति कितने गुना होगी? — (4/2)³ = 2³ = 8 गुना।
संख्यात्मक उदाहरण 4 (क्षमता कारक): 5 MW का पवन संयंत्र वर्ष भर 20% क्षमता कारक पर चलता है। वार्षिक उत्पादन = 5 × 24 × 365 × 0.20 = 8760 MWh।
5.2 लघु जलविद्युत
| श्रेणी (MNRE वर्गीकरण) | क्षमता |
|---|---|
| सूक्ष्म (Micro) | 100 kW तक |
| लघुतर (Mini) | 101 kW से 2 MW |
| लघु (Small) | 2 MW से 25 MW |
| बड़ी जलविद्युत | 25 MW से अधिक — विद्युत मंत्रालय के अधीन; 2019 से इसे भी "नवीकरणीय" घोषित किया गया |
लघु जल परियोजनाएँ प्रायः run-of-the-river होती हैं — बड़े बाँध और विस्थापन की ज़रूरत नहीं।
5.3 ज्वारीय और तरंग ऊर्जा
ज्वार-भाटा मुख्यतः चंद्रमा (और कुछ हद तक सूर्य) के गुरुत्वाकर्षण से आता है। ज्वार के समय पानी बैराज के पीछे रोका जाता है और भाटे के समय छोड़कर टरबाइन चलाए जाते हैं। ज्वार की अधिक ऊँचाई (tidal range) ज़रूरी है। भारत में संभावित क्षेत्र — खंभात की खाड़ी (सबसे अधिक संभावना), कच्छ की खाड़ी और पश्चिम बंगाल का सुंदरबन। तरंग ऊर्जा समुद्री लहरों की ऊर्जा है, जबकि OTEC (महासागरीय ताप ऊर्जा रूपांतरण) समुद्र की सतह और गहराई के तापांतर से बिजली बनाता है।
5.4 भूतापीय ऊर्जा
पृथ्वी के भीतर रेडियोधर्मी क्षय और मूल ऊष्मा से चट्टानें व भूमिगत जल गर्म रहते हैं; गर्म जल / भाप से टरबाइन चलाना या सीधे ऊष्मा का उपयोग भूतापीय ऊर्जा है। यह सौर-पवन के विपरीत दिन-रात लगातार (base load) उपलब्ध रहती है।
| भारत के प्रमुख भूतापीय क्षेत्र | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश |
|---|---|
| पुगा घाटी | लद्दाख — भारत का सबसे संभावनाशील भूतापीय क्षेत्र; ONGC की पायलट परियोजना |
| चुमाथांग | लद्दाख |
| मणिकरण | हिमाचल प्रदेश (पार्वती घाटी) |
| तातापानी | छत्तीसगढ़ |
| खंभात बेसिन | गुजरात |
6. बायोमास, बायोगैस, जैव-ईंधन और अपशिष्ट से ऊर्जा
6.1 बायोगैस
गोबर, रसोई-अपशिष्ट, फसल-अवशेष जैसे जैव पदार्थों का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति (अवायवीय पाचन, anaerobic digestion) में जीवाणुओं द्वारा अपघटन बायोगैस बनाता है।
| घटक | लगभग अनुपात |
|---|---|
| मीथेन (CH₄) | सबसे अधिक — लगभग 50–75% |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | शेष का अधिकांश भाग |
| हाइड्रोजन सल्फ़ाइड, नमी, अल्प मात्रा में अन्य गैसें | बहुत कम |
बचा हुआ घोल (slurry) उत्तम जैविक खाद है। CO₂ व अन्य गैसें हटाकर शुद्ध व संपीड़ित की गई बायोगैस संपीड़ित बायोगैस (CBG) कहलाती है, जो CNG की तरह वाहन ईंधन बन सकती है। संबंधित पहलें — SATAT (2018, CBG संयंत्र) और गोबरधन (GOBARdhan) (2018, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के अंतर्गत)।
6.2 जैव-ईंधन की पीढ़ियाँ
| पीढ़ी | कच्चा माल | उदाहरण / टिप्पणी |
|---|---|---|
| पहली पीढ़ी (1G) | खाद्य फसलें — गन्ना, मक्का, अनाज, वनस्पति तेल | गन्ने के शीरे से इथेनॉल; "भोजन बनाम ईंधन" विवाद |
| दूसरी पीढ़ी (2G) | अखाद्य लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास — पराली, भूसा, लकड़ी-अवशेष; जट्रोफा जैसी अखाद्य तेल फसलें | पानीपत (हरियाणा) में IOCL का 2G इथेनॉल संयंत्र (2022) — पराली से इथेनॉल |
| तीसरी पीढ़ी (3G) | शैवाल (algae) | कम भूमि, तेज़ वृद्धि; उत्पादन लागत अभी अधिक |
| चौथी पीढ़ी (4G) | आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव / कार्बन-कैप्चर से जुड़ी प्रक्रियाएँ | शोध अवस्था; परिभाषा पुस्तकों में भिन्न हो सकती है |
| जैव-ईंधन | क्या है |
|---|---|
| बायोएथेनॉल | शर्करा/स्टार्च/सेल्यूलोस के किण्वन से बना अल्कोहल; पेट्रोल में मिलाया जाता है |
| बायोडीज़ल | वनस्पति तेल / पशु वसा का ट्रांसएस्टरीफ़िकेशन; डीज़ल में मिलाया जाता है |
| सतत विमानन ईंधन (SAF) | जैव-स्रोत से बना विमान ईंधन |
इथेनॉल मिश्रण (text only): राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति 2018 (2022 में संशोधित) ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) का लक्ष्य 2030 से पहले लाकर 2025-26 कर दिया। As of 2026, भारत ने 2025 में लगभग 20% मिश्रण का स्तर हासिल कर लिया है और आगे के लक्ष्यों पर चर्चा जारी है। E20 का अर्थ — 20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल।
संख्यात्मक उदाहरण 5: 40 लीटर E20 ईंधन में इथेनॉल कितना है? — 40 × 20/100 = 8 लीटर इथेनॉल और 32 लीटर पेट्रोल।
6.3 अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste to Energy)
| प्रक्रिया | अर्थ |
|---|---|
| भस्मीकरण (Incineration) | ठोस अपशिष्ट को जलाकर ऊष्मा → भाप → बिजली; उत्सर्जन नियंत्रण आवश्यक |
| गैसीकरण (Gasification) | सीमित ऑक्सीजन में उच्च ताप पर अपशिष्ट से सिनगैस (CO + H₂) |
| पायरोलिसिस | ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ताप-अपघटन — तेल, गैस, चार |
| जैव-मीथेनीकरण (Biomethanation) | गीले जैव अपशिष्ट से अवायवीय पाचन द्वारा बायोगैस |
| RDF (Refuse Derived Fuel) | सूखे अपशिष्ट से बना ईंधन, सीमेंट भट्ठों में उपयोग |
7. हाइड्रोजन ऊर्जा और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
हाइड्रोजन स्वयं प्राथमिक ऊर्जा स्रोत नहीं, बल्कि ऊर्जा वाहक (energy carrier) है — इसे किसी अन्य ऊर्जा से बनाना पड़ता है। जलने या फ़्यूल सेल में प्रयोग पर यह केवल पानी बनाती है। इसका प्रति किलोग्राम ऊर्जा-घनत्व बहुत अधिक है, पर प्रति आयतन कम, इसलिए भंडारण व परिवहन कठिन है।
7.1 इलेक्ट्रोलिसिस
जल का विद्युत-अपघटन: 2H₂O → 2H₂ + O₂ (बिजली की सहायता से)। हाइड्रोजन कैथोड पर और ऑक्सीजन एनोड पर बनती है; हाइड्रोजन का आयतन ऑक्सीजन से दोगुना होता है। प्रमुख इलेक्ट्रोलाइज़र — क्षारीय (alkaline), PEM (Proton Exchange Membrane) और ठोस ऑक्साइड (SOEC)।
7.2 हाइड्रोजन के "रंग"
| रंग | उत्पादन विधि | उत्सर्जन |
|---|---|---|
| ग्रे (Grey) | प्राकृतिक गैस का भाप-मीथेन पुनर्संरचन (SMR) | CO₂ वातावरण में छोड़ी जाती है — आज की अधिकांश हाइड्रोजन |
| ब्लू (Blue) | SMR + कार्बन कैप्चर व भंडारण (CCS) | CO₂ का बड़ा भाग पकड़ लिया जाता है |
| ग्रीन (Green) | नवीकरणीय बिजली (सौर/पवन) से जल का इलेक्ट्रोलिसिस | लगभग शून्य |
| ब्राउन / ब्लैक | कोयले का गैसीकरण | सबसे अधिक |
| पिंक | परमाणु बिजली से इलेक्ट्रोलिसिस | बहुत कम |
| टर्क़ॉइज़ | मीथेन पायरोलिसिस — ठोस कार्बन बनता है | कम (कार्बन ठोस रूप में) |
नोट: ग्रे, ब्लू, ग्रीन — ये तीन सबसे मानक हैं। अन्य रंगों के नाम स्रोतों में थोड़े भिन्न मिलते हैं; परीक्षा के लिए पहले तीन पक्के करें।
7.3 राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM)
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| कैबिनेट स्वीकृति | 4 जनवरी 2023 |
| नोडल मंत्रालय | MNRE |
| प्रारंभिक परिव्यय | ₹19,744 करोड़; इसमें सबसे बड़ा भाग SIGHT कार्यक्रम (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) का — इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहन |
| 2030 का लक्ष्य (text only) | प्रति वर्ष कम-से-कम 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता; इससे जुड़ी लगभग 125 GW नवीकरणीय क्षमता |
| अन्य घटक | ग्रीन हाइड्रोजन हब, पायलट परियोजनाएँ (इस्पात, परिवहन, शिपिंग), अनुसंधान (SHIP) |
| उपयोग-क्षेत्र | उर्वरक (ग्रीन अमोनिया), तेल-शोधन, इस्पात, भारी परिवहन, शिपिंग |
As of 2026, सरकार ने "ग्रीन हाइड्रोजन मानक" अधिसूचित किया है, जिसमें प्रति किलो हाइड्रोजन पर उत्सर्जन की अधिकतम सीमा तय है; परियोजनाओं की निविदाएँ व उत्पादन क्षमता चरणबद्ध रूप से बढ़ रही हैं।
8. फ़्यूल सेल और बैटरी तकनीक
8.1 फ़्यूल सेल
फ़्यूल सेल एक विद्युत-रासायनिक उपकरण है जो ईंधन (प्रायः हाइड्रोजन) और ऑक्सीडेंट (ऑक्सीजन) की रासायनिक ऊर्जा को बिना दहन के सीधे बिजली में बदलता है। हाइड्रोजन एनोड पर प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन में टूटती है; इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से बहकर धारा बनाते हैं और कैथोड पर ऑक्सीजन से मिलकर पानी बनाते हैं। कुल अभिक्रिया — 2H₂ + O₂ → 2H₂O + विद्युत + ऊष्मा।
| बिंदु | फ़्यूल सेल | बैटरी |
|---|---|---|
| ऊर्जा कहाँ से | बाहर से लगातार दिया जाने वाला ईंधन | भीतर संग्रहित रसायन |
| चलना | जब तक ईंधन मिले, चलता रहता है | ख़त्म होने पर रिचार्ज करना पड़ता है |
| उप-उत्पाद (H₂ फ़्यूल सेल) | पानी और ऊष्मा | — |
| उदाहरण | FCEV, अंतरिक्ष यान, बैकअप बिजली | मोबाइल, लैपटॉप, BEV |
फ़्यूल सेल के प्रकार — PEMFC (वाहनों में), SOFC (ठोस ऑक्साइड, उच्च ताप, स्थिर बिजली), क्षारीय (AFC, अंतरिक्ष कार्यक्रमों में ऐतिहासिक उपयोग)।
8.2 बैटरी तकनीक
| बैटरी | मुख्य बातें | लाभ / सीमा |
|---|---|---|
| लेड-एसिड | सीसा इलेक्ट्रोड, सल्फ़्यूरिक अम्ल | सस्ती, भारी; वाहनों की स्टार्टर बैटरी, इन्वर्टर |
| लिथियम-आयन | लिथियम आयन कैथोड और एनोड (प्रायः ग्रेफ़ाइट) के बीच इलेक्ट्रोलाइट से आते-जाते हैं; कैथोड — NMC, LFP (लिथियम आयरन फ़ॉस्फ़ेट) आदि | उच्च ऊर्जा-घनत्व, हल्की; अधिक ताप पर आग का जोखिम; लिथियम, कोबाल्ट आयात-निर्भरता |
| सोडियम-आयन | लिथियम की जगह प्रचुर व सस्ता सोडियम | सस्ती, ठंड में बेहतर; ऊर्जा-घनत्व कम — स्थिर भंडारण, छोटे वाहनों के लिए |
| सॉलिड-स्टेट | तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस इलेक्ट्रोलाइट | अधिक सुरक्षित, अधिक ऊर्जा-घनत्व की संभावना; बड़े पैमाने पर निर्माण अभी चुनौती |
| फ़्लो बैटरी (जैसे वैनेडियम रेडॉक्स) | ऊर्जा तरल टैंकों में | ग्रिड-स्तरीय लंबी अवधि भंडारण |
लिथियम-आयन बैटरी के विकास के लिए जॉन गुडइनफ़, एम. स्टैनली व्हिटिंगहम और अकीरा योशिनो को 2019 का रसायन नोबेल मिला। भारत ने उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी निर्माण के लिए 2021 में PLI योजना शुरू की। As of 2026, जम्मू-कश्मीर व कर्नाटक में लिथियम भंडार की खोज की सूचनाएँ हैं, पर व्यावसायिक खनन अभी आरंभिक चरण में है।
सेल का भंडारण kWh में मापा जाता है। संख्यात्मक उदाहरण 6: 60 kWh बैटरी वाली कार 15 kWh प्रति 100 km खर्च करती है। अनुमानित रेंज = 60 ÷ 15 × 100 = 400 km।
9. इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सरकारी योजनाएँ
| प्रकार | पूर्ण रूप | कैसे चलता है | प्लग से चार्जिंग? |
|---|---|---|---|
| BEV | Battery Electric Vehicle | केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर; कोई इंजन नहीं | हाँ |
| HEV | Hybrid Electric Vehicle | पेट्रोल/डीज़ल इंजन + मोटर; छोटी बैटरी इंजन व रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से चार्ज | नहीं |
| PHEV | Plug-in Hybrid Electric Vehicle | इंजन + बड़ी बैटरी; कुछ दूरी केवल बिजली पर | हाँ |
| FCEV | Fuel Cell Electric Vehicle | हाइड्रोजन फ़्यूल सेल से बिजली → मोटर; निकास में केवल जल-वाष्प | नहीं (हाइड्रोजन भरी जाती है) |
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ब्रेक लगाते समय मोटर जनरेटर की तरह काम करके वाहन की गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलकर बैटरी में लौटाती है।
9.1 FAME से PM E-DRIVE तक
| योजना | अवधि | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| FAME इंडिया — चरण I | अप्रैल 2015 से (2019 तक बढ़ाई गई) | Faster Adoption and Manufacturing of (Hybrid &) Electric Vehicles; राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना (NEMMP 2020) के अंतर्गत; भारी उद्योग विभाग |
| FAME II | अप्रैल 2019 – मार्च 2024 | ई-बसें, ई-दोपहिया, ई-तिपहिया, चार्जिंग स्टेशन; माँग-पक्ष सब्सिडी |
| EMPS 2024 | अप्रैल – सितंबर 2024 | FAME II और नई योजना के बीच अंतरिम योजना |
| PM E-DRIVE | 1 अक्टूबर 2024 से | PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement; प्रारंभिक परिव्यय ₹10,900 करोड़; ई-दोपहिया, ई-तिपहिया, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बसें, सार्वजनिक चार्जिंग; भारी उद्योग मंत्रालय |
| पीएम-ई-बस सेवा | 2023 | शहरों में ई-बसें (PPP मॉडल) |
| PLI — ACC बैटरी | 2021 | उन्नत रसायन सेल बैटरी का घरेलू निर्माण |
As of 2026: PM E-DRIVE की अवधि मूल रूप से मार्च 2026 तक थी; रिपोर्टों के अनुसार इसे आगे बढ़ाया गया है, पर अलग-अलग वाहन-श्रेणियों की अंतिम तिथि और परिव्यय पर स्रोतों में भिन्नता है — परीक्षा से पहले नवीनतम अधिसूचना देखें।
10. संस्थाएँ, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और भारत के लक्ष्य
10.1 MNRE और संबद्ध संस्थाएँ
| संस्था | स्थान / भूमिका |
|---|---|
| MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय) | 1981 में अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत आयोग (CASE) → 1982 में विभाग (DNES) → 1992 में मंत्रालय (MNES) → 2006 से MNRE |
| राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) | गुरुग्राम (हरियाणा) |
| राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) | चेन्नई |
| सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा संस्थान | कपूरथला (पंजाब) |
| SECI (भारतीय सौर ऊर्जा निगम) | सौर / नवीकरणीय परियोजनाओं की निविदा व क्रियान्वयन |
| IREDA | नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का वित्तपोषण (1987) |
10.2 अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| शुरुआत | 30 नवंबर 2015, पेरिस — UNFCCC के COP21 के दौरान |
| संस्थापक पहल | भारत और फ़्रांस |
| मुख्यालय | गुरुग्राम, हरियाणा (NISE परिसर) — भारत में मुख्यालय वाला पहला संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन |
| फ़्रेमवर्क समझौता लागू | दिसंबर 2017 |
| मूल फ़ोकस | कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित "सूर्य-समृद्ध" देश; 2020 के संशोधन से सभी UN सदस्य देशों के लिए खुला |
| प्रमुख पहल | "One Sun One World One Grid" (OSOWOG) |
10.3 भारत के ऊर्जा लक्ष्य (text only)
- COP26 (ग्लासगो, 2021) के "पंचामृत" के अंतर्गत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य।
- अद्यतन NDC (2022) — 2030 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।
- As of 2026: MNRE के अनुसार जून 2025 में ही गैर-जीवाश्म स्रोतों का हिस्सा कुल स्थापित क्षमता के 50% तक पहुँच गया — 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले। 500 GW की ओर प्रगति जारी है; नवीनतम आँकड़े MNRE की मासिक रिपोर्ट से देखें।
11. राजस्थान: सौर और पवन ऊर्जा
थार मरुस्थल का अधिक सौर विकिरण, साफ़ आसमान के अधिक दिन और बड़ी बंजर भूमि राजस्थान को सौर ऊर्जा का स्वाभाविक केंद्र बनाते हैं। As of 2026, राजस्थान स्थापित सौर क्षमता में देश के अग्रणी राज्यों में (प्रायः पहले स्थान पर) है।
| स्थल | ज़िला | तथ्य (text) |
|---|---|---|
| भड़ला सोलर पार्क | फलोदी (पहले जोधपुर ज़िले में) | लगभग 2,245 MW क्षमता; विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में गिना जाता है |
| जैसलमेर पवन पार्क | जैसलमेर | राजस्थान का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा क्षेत्र; बड़ी संख्या में पवन टरबाइन |
| पवन-सौर हाइब्रिड | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर क्षेत्र | एक ही भूमि पर पवन व सौर |
| अन्य सौर पार्क | बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर | पश्चिमी राजस्थान में सौर पार्कों की शृंखला |
चुनौतियाँ: पैनलों पर धूल जमना (दक्षता घटती है) व सफ़ाई में जल की कमी, ट्रांसमिशन लाइनें — विशेषकर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के आवास क्षेत्र में ऊपरी बिजली लाइनों से पक्षियों की टक्कर का मुद्दा, और ग्रिड में अनियमित बिजली का संतुलन। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना नवीकरणीय बिजली को ग्रिड तक पहुँचाने के लिए है।
ऊर्जा-तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकें अब साथ चलती हैं — स्मार्ट ग्रिड में IoT और AI आधारित माँग-पूर्वानुमान के लिए उभरती प्रौद्योगिकियाँ — AI, क्वांटम, ब्लॉकचेन नोट देखें।
12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय नहीं
परमाणु ऊर्जा "स्वच्छ" और "गैर-जीवाश्म" है, पर नवीकरणीय नहीं। 500 GW लक्ष्य "गैर-जीवाश्म" है, इसलिए उसमें परमाणु और बड़ी जलविद्युत भी गिनी जाती है।
Trap 2: PV ऊष्मा से नहीं, प्रकाश से
सौर PV सेल प्रकाश-विद्युत प्रभाव से सीधे बिजली बनाता है। ऊष्मा से भाप बनाकर बिजली — यह CSP है। सौर जल-तापक (solar water heater) बिजली नहीं, केवल ऊष्मा देता है।
Trap 3: पवन शक्ति ∝ v³, v² नहीं
गतिज ऊर्जा ½mv² है, पर प्रति सेकंड टरबाइन से गुज़रने वाली वायु का द्रव्यमान भी v के अनुपात में बढ़ता है, इसलिए शक्ति ∝ v³। गति दोगुनी → शक्ति 8 गुना, 4 गुना नहीं।
Trap 4: ब्लू हाइड्रोजन "ग्रीन" नहीं
ब्लू हाइड्रोजन भी प्राकृतिक गैस से बनती है; केवल CO₂ पकड़ ली जाती है। ग्रीन = नवीकरणीय बिजली + इलेक्ट्रोलिसिस।
Trap 5: फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद CO₂ नहीं
हाइड्रोजन फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद केवल पानी (और ऊष्मा) है। फ़्यूल सेल ईंधन जलाता नहीं — यह विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया है।
Trap 6: HEV प्लग से चार्ज नहीं होता
साधारण हाइब्रिड (HEV) की बैटरी इंजन और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से चार्ज होती है; प्लग वाला हाइब्रिड PHEV है।
Trap 7: बायोगैस का मुख्य घटक
बायोगैस और प्राकृतिक गैस दोनों का मुख्य घटक मीथेन है। LPG का मुख्य घटक ब्यूटेन (व प्रोपेन) है — इन्हें आपस में न मिलाएँ।
Trap 8: ISA का मुख्यालय पेरिस नहीं
ISA की घोषणा पेरिस (COP21) में हुई, पर मुख्यालय गुरुग्राम में है।
Trap 9: 2G जैव-ईंधन खाद्य फसल से नहीं
गन्ने/मक्के से इथेनॉल = 1G; पराली/भूसे जैसे अखाद्य बायोमास से = 2G; शैवाल = 3G।
Trap 10: भड़ला का ज़िला
पुरानी पुस्तकों में भड़ला "जोधपुर ज़िला" लिखा है; 2023 में नया फलोदी ज़िला बनने के बाद भड़ला क्षेत्र फलोदी ज़िले में है। प्रश्न में "जोधपुर संभाग" या विकल्पों में केवल जोधपुर हो, तो उसे सही मानें।
13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | सौर सेल किस प्रभाव पर कार्य करता है? | प्रकाश-विद्युत (photovoltaic) प्रभाव |
| 2 | सौर सेल का प्रमुख पदार्थ | सिलिकॉन |
| 3 | सौर सेल कैसी धारा देता है? | दिष्ट धारा (DC) |
| 4 | DC को AC में बदलने वाला उपकरण | इन्वर्टर |
| 5 | प्रकाश-विद्युत प्रभाव (PV) की खोज | एडमंड बेकरेल, 1839 |
| 6 | दर्पण से ताप केंद्रित करने वाली तकनीक | CSP |
| 7 | CSP में ताप-भंडारण | पिघला लवण (molten salt) |
| 8 | अतिरिक्त रूफ़टॉप बिजली ग्रिड में देकर बिल में समायोजन | नेट मीटरिंग |
| 9 | पवन शक्ति और गति का संबंध | P ∝ v³ |
| 10 | गति दोगुनी तो पवन शक्ति | 8 गुना |
| 11 | पवन टरबाइन की सैद्धांतिक अधिकतम दक्षता | बेट्ज़ सीमा ≈ 59.3% |
| 12 | राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान | चेन्नई |
| 13 | मुप्पंडल पवन फ़ार्म | तमिलनाडु |
| 14 | राजस्थान का प्रमुख पवन क्षेत्र | जैसलमेर |
| 15 | भारत में "लघु जलविद्युत" सीमा | 25 MW तक |
| 16 | सूक्ष्म जलविद्युत | 100 kW तक |
| 17 | ज्वार का मुख्य कारण | चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण |
| 18 | ज्वारीय ऊर्जा की सबसे अधिक संभावना | खंभात की खाड़ी |
| 19 | समुद्र के तापांतर से बिजली | OTEC |
| 20 | भारत का प्रमुख भूतापीय क्षेत्र | पुगा घाटी (लद्दाख) |
| 21 | मणिकरण भूतापीय क्षेत्र | हिमाचल प्रदेश |
| 22 | तातापानी भूतापीय क्षेत्र | छत्तीसगढ़ |
| 23 | बायोगैस का मुख्य घटक | मीथेन |
| 24 | बायोगैस बनने की प्रक्रिया | अवायवीय पाचन |
| 25 | शुद्ध व संपीड़ित बायोगैस | CBG |
| 26 | CBG संयंत्रों की योजना | SATAT (2018) |
| 27 | गन्ने से इथेनॉल | पहली पीढ़ी (1G) जैव-ईंधन |
| 28 | पराली से इथेनॉल | दूसरी पीढ़ी (2G) |
| 29 | शैवाल से जैव-ईंधन | तीसरी पीढ़ी (3G) |
| 30 | पानीपत 2G इथेनॉल संयंत्र | IOCL, 2022 |
| 31 | E20 का अर्थ | पेट्रोल में 20% इथेनॉल |
| 32 | राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति | 2018 (2022 में संशोधित) |
| 33 | बायोडीज़ल बनाने की अभिक्रिया | ट्रांसएस्टरीफ़िकेशन |
| 34 | जल का इलेक्ट्रोलिसिस | 2H₂O → 2H₂ + O₂ |
| 35 | इलेक्ट्रोलिसिस में हाइड्रोजन कहाँ बनती है? | कैथोड |
| 36 | प्राकृतिक गैस से, CO₂ छोड़कर बनी हाइड्रोजन | ग्रे हाइड्रोजन |
| 37 | SMR + कार्बन कैप्चर | ब्लू हाइड्रोजन |
| 38 | नवीकरणीय बिजली से इलेक्ट्रोलिसिस | ग्रीन हाइड्रोजन |
| 39 | राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन | 4 जनवरी 2023, MNRE |
| 40 | NGHM का सबसे बड़ा घटक | SIGHT कार्यक्रम |
| 41 | हाइड्रोजन फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद | पानी |
| 42 | लिथियम-आयन बैटरी के लिए नोबेल | रसायन 2019 — गुडइनफ़, व्हिटिंगहम, योशिनो |
| 43 | ठोस इलेक्ट्रोलाइट वाली बैटरी | सॉलिड-स्टेट बैटरी |
| 44 | लिथियम के सस्ते विकल्प वाली बैटरी | सोडियम-आयन |
| 45 | केवल बैटरी से चलने वाला वाहन | BEV |
| 46 | प्लग-इन हाइब्रिड | PHEV |
| 47 | हाइड्रोजन से चलने वाला EV | FCEV |
| 48 | FAME का पहला चरण | 2015 |
| 49 | FAME II की उत्तराधिकारी योजना | PM E-DRIVE (2024) |
| 50 | ISA की शुरुआत | 2015, COP21 पेरिस — भारत व फ़्रांस |
| 51 | ISA का मुख्यालय | गुरुग्राम |
| 52 | भड़ला सोलर पार्क | फलोदी (पहले जोधपुर), राजस्थान |
14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
1. सीधा तथ्य (SSC / RRB / CET):
नमूना: "बायोगैस का मुख्य घटक क्या है?" — (a) ब्यूटेन (b) मीथेन (c) प्रोपेन (d) एथिलीन। उत्तर: (b)
2. कथन-आधारित (UPSC / RAS प्रारंभिक):
नमूना: हाइड्रोजन के बारे में — 1. ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनती है। 2. ब्लू हाइड्रोजन कोयले के गैसीकरण से बनती है। 3. हाइड्रोजन फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद पानी है। सही कथन — केवल 1 और 3 (ब्लू = प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर)।
3. मिलान:
नमूना: पुगा घाटी / मणिकरण / भड़ला / मुप्पंडल — भूतापीय (लद्दाख) / भूतापीय (हिमाचल) / सौर (राजस्थान) / पवन (तमिलनाडु)।
4. संख्यात्मक:
नमूना: "हवा की गति तीन गुना हो जाए तो पवन टरबाइन की शक्ति कितने गुना होगी?" — 3³ = 27 गुना।
5. RAS मुख्य (लघु उत्तर):
नमूना: "राजस्थान में सौर ऊर्जा की संभावनाएँ और चुनौतियाँ लिखिए।" — विकिरण, बंजर भूमि, भड़ला; धूल, जल, ट्रांसमिशन, गोडावण आवास — चार-चार बिंदु।
पूरे पाठ्यक्रम पर मॉक के लिए RPSC RAS प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ 2026 और गैर-तकनीकी परीक्षाओं के लिए RRB NTPC CBT-1 टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. "PV = प्रकाश, CSP = सेंक": PV प्रकाश से सीधे बिजली; CSP सूर्य से सेंककर (ऊष्मा) भाप।
2. "हवा दो गुनी, बिजली आठ गुनी": P ∝ v³।
3. हाइड्रोजन के रंग "ग्रे-गैस, ब्लू-बंद, ग्रीन-ग्रिड": ग्रे = गैस से (CO₂ बाहर), ब्लू = CO₂ बंद (कैप्चर), ग्रीन = नवीकरणीय ग्रिड से इलेक्ट्रोलिसिस।
4. जैव-ईंधन "खाना–कचरा–काई": 1G खाद्य फसल, 2G कृषि-कचरा, 3G काई (शैवाल)।
5. भूतापीय "पुगा–मणि–तातापानी": लद्दाख–हिमाचल–छत्तीसगढ़; तीनों नामों में "गर्म पानी" का भाव।
6. EV "B-H-P-F": Battery (केवल बैटरी), Hybrid (बिना प्लग), Plug-in (प्लग वाला हाइब्रिड), Fuel cell (हाइड्रोजन)।
7. ISA "पेरिस में जन्म, गुरुग्राम में घर": 2015, भारत-फ़्रांस।
8. "FAME 15-19-24, E-DRIVE 24": FAME I 2015, FAME II 2019 से मार्च 2024, फिर PM E-DRIVE अक्टूबर 2024।
16. कथन अभ्यास
सौर फ़ोटोवोल्टिक सेल सूर्य की ऊष्मा से भाप बनाकर बिजली उत्पन्न करता है। — गलत (PV प्रकाश-विद्युत प्रभाव से सीधे बिजली देता है; भाप वाली तकनीक CSP है)।
सौर सेल दिष्ट धारा (DC) उत्पन्न करता है। — सही।
पवन टरबाइन की शक्ति हवा की गति के वर्ग के अनुपात में होती है। — गलत (गति के घन के अनुपात में, P ∝ v³)।
पुगा घाटी भूतापीय ऊर्जा के लिए जानी जाती है। — सही।
बायोगैस का मुख्य घटक कार्बन मोनोऑक्साइड है। — गलत (मीथेन)।
पराली से बना इथेनॉल दूसरी पीढ़ी का जैव-ईंधन है। — सही।
ब्लू हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनती है। — गलत (यह ग्रीन हाइड्रोजन है; ब्लू = प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर)।
हाइड्रोजन फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद पानी है। — सही।
साधारण हाइब्रिड वाहन (HEV) को बाहरी प्लग से चार्ज करना आवश्यक है। — गलत (HEV इंजन व रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से चार्ज होता है; प्लग वाला PHEV है)।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय पेरिस में है। — गलत (गुरुग्राम, भारत; शुरुआत पेरिस COP21 में हुई)।
परमाणु ऊर्जा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। — गलत (गैर-जीवाश्म है, पर नवीकरणीय नहीं)।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को जनवरी 2023 में स्वीकृति मिली। — सही।
17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- पारंपरिक — कोयला, तेल, गैस; गैर-पारंपरिक — सौर, पवन, लघु जल, ज्वारीय, भूतापीय, बायोमास
- परमाणु = गैर-जीवाश्म, पर नवीकरणीय नहीं
- सौर PV = प्रकाश-विद्युत प्रभाव, सिलिकॉन, DC बिजली; CSP = दर्पण + ऊष्मा + भाप
- पवन P = ½ρAv³ — गति दोगुनी तो शक्ति 8 गुनी; बेट्ज़ सीमा ≈ 59.3%
- लघु जल ≤ 25 MW; सूक्ष्म ≤ 100 kW
- ज्वारीय — खंभात व कच्छ की खाड़ी, सुंदरबन
- भूतापीय — पुगा घाटी (लद्दाख), मणिकरण, तातापानी
- बायोगैस = अवायवीय पाचन, मुख्य घटक मीथेन; CBG — SATAT
- जैव-ईंधन — 1G खाद्य, 2G अखाद्य बायोमास, 3G शैवाल; E20 = 20% इथेनॉल
- ग्रे = गैस (CO₂ बाहर), ब्लू = गैस + CCS, ग्रीन = नवीकरणीय इलेक्ट्रोलिसिस
- NGHM — 4 जनवरी 2023, MNRE, SIGHT; लक्ष्य 5 MMT/वर्ष 2030 तक
- फ़्यूल सेल — H₂ + O₂ → बिजली + पानी, दहन नहीं
- Li-ion नोबेल रसायन 2019; सोडियम-आयन सस्ती; सॉलिड-स्टेट सुरक्षित
- BEV, HEV (बिना प्लग), PHEV, FCEV; FAME 2015 → FAME II 2019 → PM E-DRIVE 2024
- ISA — 2015, पेरिस COP21, भारत-फ़्रांस, मुख्यालय गुरुग्राम; भड़ला (फलोदी), जैसलमेर पवन
18. अभ्यास
इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों के क्विज़ में सौर, पवन, भूतापीय, जैव-ईंधन, हाइड्रोजन, फ़्यूल सेल, बैटरी, EV और ISA से जुड़े प्रश्न हैं, जिनमें तीन सरल संख्यात्मक भी शामिल हैं। संख्यात्मक प्रश्नों में सूत्र पहले लिखें — पवन के लिए v³, सौर के लिए क्षमता × घंटे, मिश्रण के लिए प्रतिशत — फिर गणना करें। RAS मुख्य के उत्तर-लेखन अभ्यास के लिए RPSC RAS मुख्य टेस्ट सीरीज़ 2026 देखें।
19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
नवीकरणीय ऊर्जा का अध्याय तीन परतों में पढ़ें — पहली, सिद्धांत (PV का प्रकाश-विद्युत प्रभाव, पवन का v³ नियम, बायोगैस का अवायवीय पाचन, फ़्यूल सेल की विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया); दूसरी, वर्गीकरण (1G-2G-3G जैव-ईंधन, ग्रे-ब्लू-ग्रीन हाइड्रोजन, BEV-HEV-PHEV-FCEV); और तीसरी, संस्थाएँ व स्थान (MNRE, ISA-गुरुग्राम, पुगा घाटी, भड़ला, जैसलमेर)। स्थिर तथ्य क्विज़ में आते हैं; 500 GW, 5 MMT, E20 और PM E-DRIVE की अवधि जैसे लक्ष्य व आँकड़े बदलते रहते हैं, इसलिए उन्हें परीक्षा से पहले नवीनतम सरकारी स्रोत से मिला लें।
PV = प्रकाश → DC (सिलिकॉन) | CSP = दर्पण → भाप | पवन ∝ v³ | पुगा = भूतापीय | बायोगैस = मीथेन | ग्रे-ब्लू-ग्रीन H₂ | फ़्यूल सेल → पानी | NGHM जनवरी 2023 | FAME 2015 → PM E-DRIVE 2024 | ISA 2015, गुरुग्राम | भड़ला (फलोदी)
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी — सौर, पवन, जैव-ईंधन, ग्रीन हाइड्रोजन, फ़्यूल सेल, बैटरी व EV — RAS, UPSC” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और EV — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ — AI, क्वांटम, ब्लॉकचेन — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- जैव प्रौद्योगिकी, DNA और आनुवंशिक इंजीनियरी — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- परमाणु ऊर्जा और भारत का त्रि-चरण कार्यक्रम — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
पारंपरिक स्रोत जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सीमित और प्रदूषणकारी हैं। गैर-पारंपरिक स्रोत जैसे सौर, पवन, लघु जल, ज्वारीय, भूतापीय और बायोमास प्रकृति में बार-बार पूरित होते हैं और संचालन में बहुत कम उत्सर्जन करते हैं।
सौर PV सेल प्रकाश-विद्युत प्रभाव से प्रकाश को सीधे DC बिजली में बदलता है और इसमें मुख्यतः सिलिकॉन प्रयुक्त होता है। CSP दर्पणों से सूर्य-ताप केंद्रित करके भाप बनाता है और टरबाइन से बिजली उत्पन्न करता है।
पवन शक्ति P = ½ρAv³ है, अर्थात् शक्ति हवा की गति के घन के अनुपात में होती है। इसलिए हवा की गति दोगुनी होने पर शक्ति आठ गुना हो जाती है।
लद्दाख की पुगा घाटी भारत का सबसे संभावनाशील भूतापीय क्षेत्र है। अन्य प्रमुख क्षेत्र हैं — चुमाथांग (लद्दाख), मणिकरण (हिमाचल प्रदेश), तातापानी (छत्तीसगढ़) और खंभात बेसिन (गुजरात)।
पहली पीढ़ी का जैव-ईंधन गन्ना, मक्का जैसी खाद्य फसलों से बनता है। दूसरी पीढ़ी पराली, भूसा जैसे अखाद्य बायोमास से और तीसरी पीढ़ी शैवाल से बनती है।
ग्रे हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से बनती है और CO₂ वातावरण में छोड़ी जाती है। ब्लू हाइड्रोजन भी प्राकृतिक गैस से बनती है पर CO₂ को कार्बन कैप्चर से पकड़ा जाता है, जबकि ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनती है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को ₹19,744 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ इसे स्वीकृति दी; नोडल मंत्रालय MNRE है। लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम-से-कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का है।
फ़्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक ऊर्जा को बिना दहन के, विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से सीधे बिजली में बदलता है। हाइड्रोजन फ़्यूल सेल का उप-उत्पाद केवल पानी और ऊष्मा है।
BEV केवल बैटरी से चलता है और प्लग से चार्ज होता है। HEV में इंजन और मोटर दोनों होते हैं पर बाहरी प्लग नहीं, PHEV प्लग से चार्ज होने वाला हाइब्रिड है, और FCEV हाइड्रोजन फ़्यूल सेल से बिजली बनाकर चलता है।
ISA की शुरुआत 30 नवंबर 2015 को पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ़्रांस ने की। इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: