सुयोग अकादमी (Suyog Academy)
suyogacademy.com — RPSC & RSMSSB फ्री GK नोट्स
राजस्थान राजव्यवस्था एवं प्रशासन

राजस्थान उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता: अनुच्छेद 226 एवं प्रमुख रिट

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
8 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 8 अक्टूबर 2026
11 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था इकाई। भारत का संविधान एवं संबंधित राज्य अधिनियम।

शेयर करें:
⚖️राजस्थान राजव्यवस्थाSUYOG ACADEMY
⚖️

राजस्थान उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता: अनुच्छेद 226 एवं प्रमुख रिट

सुयोग अकादमी • RPSC & RSMSSB100% नि:शुल्क

सुयोग AI गुरु

नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: अनुच्छेद 226 राजस्थान उच्च न्यायालय सहित हर उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों और “किसी अन्य प्रयोजन” के लिए रिट, आदेश व निर्देश जारी करने की शक्ति देता है — इसलिए यह अनुच्छेद 32 से व्यापक है, पर विवेकाधीन है। इसके खंड हैं: 226(2) वाद-हेतुक के आधार पर क्षेत्राधिकार; 226(3) एकपक्षीय अंतरिम आदेश हटाने के आवेदन का 2 सप्ताह में निपटारा; 226(4) अनु. 32 की शक्ति अप्रभावित। पाँच रिट हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण (निजी व्यक्ति के विरुद्ध भी), परमादेश (लोक कर्तव्य), प्रतिषेध (कार्यवाही के दौरान रोक), उत्प्रेषण (निर्णय रद्द) और अधिकार-पृच्छा (सार्वजनिक पद की वैधता)। साथ में अनुच्छेद 227 अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण देता है।

🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएँ सबसे बड़ी संख्या में दायर होने वाले मामलों में हैं — सेवा, भर्ती परीक्षा, भूमि-अवाप्ति, जनहित व पर्यावरण से जुड़े विषय प्रमुख रहते हैं। 7 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल ने 44वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली; रोस्टर व जनहित याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक निर्देशों से तय होती है। पदधारी व संख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से अवश्य मिलाएँ।

📌 अनुच्छेद 226 — एक नज़र में — एक नज़र में

  1. शक्ति: उच्च न्यायालय द्वारा रिट, निर्देश, आदेश
  2. दायरा: मौलिक अधिकार + ‘किसी अन्य प्रयोजन’
  3. 226(2): वाद-हेतुक के आधार पर क्षेत्राधिकार
  4. 226(3): एकपक्षीय अंतरिम आदेश — 2 सप्ताह नियम
  5. 226(4): अनु. 32 की शक्ति कम नहीं होती
  6. पाँच रिट: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा
  7. साथी अनुच्छेद: 227 — अधीक्षण
  8. प्रकृति: विवेकाधीन उपचार

1. अनुच्छेद 226 — उच्च न्यायालय का सबसे शक्तिशाली हथियार

संविधान का अनुच्छेद 226 प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार में किसी भी व्यक्ति या प्राधिकारी (उपयुक्त मामलों में सरकार सहित) को निर्देश, आदेश या रिट जारी करने की शक्ति देता है — मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए और “किसी अन्य प्रयोजन” के लिए भी। यही “किसी अन्य प्रयोजन” शब्द अनुच्छेद 226 को अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) से व्यापक बनाते हैं — उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकार ही नहीं, किसी भी कानूनी अधिकार के उल्लंघन पर हस्तक्षेप कर सकता है। दूसरी ओर, अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 विवेकाधीन उपचार है — उच्च न्यायालय वैकल्पिक उपचार उपलब्ध होने, अत्यधिक विलंब या तथ्यों के गंभीर विवाद पर याचिका अस्वीकार कर सकता है। राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर व जयपुर) में भर्ती-परीक्षा, सेवा-मामले, भूमि-अवाप्ति, खनन, पर्यावरण और जनहित से जुड़ी रिट याचिकाएँ बड़ी संख्या में आती हैं।

2. अनुच्छेद 226 के खंड

खंडप्रावधान
226(1)मौलिक अधिकारों व किसी अन्य प्रयोजन हेतु रिट/आदेश/निर्देश जारी करने की शक्ति
226(2)वाद-हेतुक (cause of action) पूर्णतः या आंशिक रूप से क्षेत्र में उत्पन्न हो तो क्षेत्राधिकार, भले प्राधिकारी का मुख्यालय बाहर हो
226(3)एकपक्षीय अंतरिम आदेश के विरुद्ध आवेदन का दो सप्ताह में निपटारा; अन्यथा आदेश स्वतः निरस्त
226(4)यह शक्ति अनुच्छेद 32(2) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति को कम नहीं करती

🎯 संविधान व न्यायपालिका — अभ्यास

रिट, अनुच्छेद 32 बनाम 226 और PIL RAS, CET, हाईकोर्ट व शिक्षक परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं:

सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स

3. पाँच रिट — विस्तार से

रिटअर्थकिसके विरुद्धकब नहीं
बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)‘शरीर प्रस्तुत करो’ — अवैध निरुद्धि की जाँचसरकारी व निजी — दोनोंविधिसम्मत निरुद्धि, न्यायालय की अवमानना में निरुद्धि
परमादेश (Mandamus)‘हम आदेश देते हैं’ — सार्वजनिक कर्तव्य निभाओलोक अधिकारी, सरकार, निगम, अधिकरणराष्ट्रपति/राज्यपाल (व्यक्तिगत), निजी व्यक्ति, विवेकाधीन कर्तव्य
प्रतिषेध (Prohibition)निचले न्यायालय/अधिकरण को अधिकार-क्षेत्र से बाहर कार्यवाही से रोकनान्यायिक/अर्ध-न्यायिक निकायकार्यवाही पूर्ण हो जाने के बाद
उत्प्रेषण (Certiorari)‘सूचित किया जाए’ — निर्णय रद्द कर अभिलेख मँगानान्यायिक/अर्ध-न्यायिक व प्रशासनिक प्राधिकारी (न्यायिक व्याख्या अनुसार)विधायी निकाय, निजी व्यक्ति
अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)‘किस अधिकार से?’ — सार्वजनिक पद पर दावे की वैधतासंविधान/कानून से सृजित स्थायी सार्वजनिक पदमंत्री-पद/निजी पद

4. अनुच्छेद 32 बनाम अनुच्छेद 226

बिंदुअनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय)अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय)
प्रयोजनकेवल मौलिक अधिकारमौलिक अधिकार + अन्य कानूनी अधिकार
प्रकृतिस्वयं मौलिक अधिकारसंवैधानिक अधिकार — विवेकाधीन
क्षेत्रसम्पूर्ण भारतराज्य/क्षेत्राधिकार (वाद-हेतुक सहित)
निलंबनआपातकाल में (अनु. 359) मौलिक अधिकार-प्रवर्तन निलंबित हो सकता हैअन्य कानूनी अधिकारों हेतु शक्ति बनी रहती है
डॉ. अंबेडकर‘संविधान का हृदय व आत्मा’—

5. रिट याचिका के प्रमुख सिद्धांत

  • वैकल्पिक उपचार: अपील/अधिकरण उपलब्ध हो तो सामान्यतः पहले वहाँ जाएँ (मौलिक अधिकार उल्लंघन, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन, क्षेत्राधिकार-विहीनता अपवाद)।
  • विलंब (Laches): अनुचित देरी पर याचिका अस्वीकार हो सकती है।
  • लोकस स्टैंडी में शिथिलता: जनहित याचिका (PIL) में प्रभावित न होने पर भी जनहित में याचिका; अधिकार-पृच्छा कोई भी व्यक्ति माँग सकता है।
  • तथ्यों का विवादित प्रश्न: गहन साक्ष्य की आवश्यकता हो तो दीवानी वाद उपयुक्त।
  • अनुच्छेद 227: अधीनस्थ न्यायालयों व अधिकरणों पर अधीक्षण — अधिकार-क्षेत्र की त्रुटि सुधारना।

6. रिट याचिका — प्रक्रिया

राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिका

  1. अधिवक्ता के माध्यम से याचिका, शपथ-पत्र व दस्तावेज़ तैयार (जोधपुर मुख्य पीठ या जयपुर पीठ — क्षेत्राधिकार अनुसार)।
  2. फाइलिंग व स्क्रूटनी; आपत्तियाँ दूर करना।
  3. एकल न्यायाधीश के समक्ष प्रारंभिक सुनवाई; नोटिस/अंतरिम आदेश।
  4. उत्तर-प्रत्युत्तर के बाद अंतिम सुनवाई व निर्णय।
  5. एकल न्यायाधीश के निर्णय के विरुद्ध खंडपीठ में विशेष अपील (नियमानुसार); फिर सर्वोच्च न्यायालय।

7. राजस्थान से जुड़े उल्लेखनीय उदाहरण

मामलामहत्व
निखिल सोनी बनाम भारत संघ (2015)राजस्थान उच्च न्यायालय ने संथारा को अपराध के समान माना; बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय पर रोक लगाई
विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997)सर्वोच्च न्यायालय (अनु. 32) — कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न दिशानिर्देश; भँवरी देवी प्रकरण की पृष्ठभूमि
भर्ती-परीक्षा याचिकाएँRPSC/RSSB परीक्षाओं की उत्तर-कुंजी, आरक्षण व परिणाम पर नियमित रिट

संबंधित: राजस्थान उच्च न्यायालय: इतिहास एवं अधिकार क्षेत्र | राजस्थान की न्यायपालिका: संरचना | राजस्थान के महाधिवक्ता (Advocate General) | राजस्थान में अधीनस्थ न्यायालय | राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
रिट5 रिट — किसके विरुद्धखंड 3
तुलना32 बनाम 226खंड 4
खंड226(2)/(3)खंड 2
सिद्धांतवैकल्पिक उपचार, PILखंड 5
उदाहरणसंथारा, विशाखाखंड 7

🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)

अनुच्छेद 226 क्या है?

उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों व किसी अन्य कानूनी प्रयोजन के लिए रिट, आदेश व निर्देश जारी करने की शक्ति देने वाला अनुच्छेद।

अनुच्छेद 32 और 226 में क्या अंतर है?

अनु. 32 केवल मौलिक अधिकारों हेतु और स्वयं मौलिक अधिकार है; अनु. 226 मौलिक व अन्य कानूनी अधिकारों हेतु है, पर विवेकाधीन है।

कौन-सी रिट निजी व्यक्ति के विरुद्ध जारी हो सकती है?

बंदी प्रत्यक्षीकरण — अवैध निरुद्धि करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध।

प्रतिषेध और उत्प्रेषण में क्या अंतर है?

प्रतिषेध कार्यवाही के दौरान उसे रोकने के लिए, उत्प्रेषण निर्णय के बाद उसे रद्द करने के लिए जारी होता है।

अधिकार-पृच्छा रिट कब जारी होती है?

जब कोई व्यक्ति संविधान/कानून से सृजित सार्वजनिक पद पर बिना वैध अधिकार के आसीन हो।

📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)

  1. अनुच्छेद 226 की रिट अनुच्छेद 32 से व्यापक क्यों?

    (A) मौलिक अधिकारों के साथ ‘किसी अन्य प्रयोजन’ हेतु भी (B) केवल मौलिक अधिकार (C) केवल केंद्र के विरुद्ध (D) केवल निजी व्यक्तियों के विरुद्ध

    ✅ उत्तर: (A) मौलिक अधिकारों के साथ ‘किसी अन्य प्रयोजन’ हेतु भी — कानूनी अधिकारों हेतु भी।

  2. अनुच्छेद 32 स्वयं क्या है?

    (A) मौलिक अधिकार (B) निदेशक तत्व (C) मौलिक कर्तव्य (D) विवेकाधीन उपचार

    ✅ उत्तर: (A) मौलिक अधिकार — 226 संवैधानिक, पर मौलिक अधिकार नहीं।

  3. ‘किस अधिकार से पद पर हो?’ — कौन-सी रिट?

    (A) प्रतिषेध (B) उत्प्रेषण (C) अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) (D) परमादेश

    ✅ उत्तर: (C) अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) — सार्वजनिक पद पर अवैध दावा।

  4. परमादेश (Mandamus) किसके विरुद्ध जारी नहीं होता?

    (A) सरकारी विभाग (B) अधिकरण (C) राष्ट्रपति/राज्यपाल (व्यक्तिगत रूप में) (D) लोक अधिकारी

    ✅ उत्तर: (C) राष्ट्रपति/राज्यपाल (व्यक्तिगत रूप में) — निजी व्यक्ति के विरुद्ध भी सामान्यतः नहीं।

  5. कौन-सी रिट निजी व्यक्ति के विरुद्ध भी जारी हो सकती है?

    (A) प्रतिषेध (B) अधिकार-पृच्छा (C) बंदी प्रत्यक्षीकरण (D) उत्प्रेषण

    ✅ उत्तर: (C) बंदी प्रत्यक्षीकरण — अवैध निरुद्धि किसी के द्वारा भी।

  6. कार्यवाही के दौरान रोकने वाली रिट —

    (A) प्रतिषेध (B) उत्प्रेषण (C) परमादेश (D) बंदी प्रत्यक्षीकरण

    ✅ उत्तर: (A) प्रतिषेध — उत्प्रेषण — निर्णय के बाद रद्द।

  7. अनुच्छेद 226(2) किससे संबंधित है?

    (A) अपील (B) वाद-हेतुक (cause of action) के आधार पर क्षेत्राधिकार (C) अंतरिम आदेश (D) अधीक्षण

    ✅ उत्तर: (B) वाद-हेतुक (cause of action) के आधार पर क्षेत्राधिकार — वाद-हेतुक आंशिक रूप से भी उत्पन्न हो तो।

  8. अनुच्छेद 227 —

    (A) अधीनस्थ न्यायालयों व अधिकरणों पर अधीक्षण (B) रिट (C) महाधिवक्ता (D) जिला न्यायाधीश

    ✅ उत्तर: (A) अधीनस्थ न्यायालयों व अधिकरणों पर अधीक्षण — सैन्य अधिकरण को छोड़कर।

  9. एकपक्षीय अंतरिम आदेश हटाने के आवेदन का निपटारा (अनु. 226(3)) —

    (A) कोई सीमा नहीं (B) दो सप्ताह में, अन्यथा आदेश स्वतः निरस्त (C) 6 माह (D) 1 वर्ष

    ✅ उत्तर: (B) दो सप्ताह में, अन्यथा आदेश स्वतः निरस्त — प्रक्रियात्मक सुरक्षा।

  10. राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2015 में किस प्रथा को अवैध माना (बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई)?

    (A) बाल विवाह (B) संथारा (C) सती (D) डाकन प्रथा

    ✅ उत्तर: (B) संथारा — निखिल सोनी मामला।

⚡ One-Liner Revision (Key Facts)

  1. रिट शक्ति (HC) — अनु. 226
  2. रिट शक्ति (SC) — अनु. 32
  3. अधीक्षण — अनु. 227
  4. वाद-हेतुक — 226(2)
  5. अंतरिम आदेश — 226(3), 2 सप्ताह
  6. निजी व्यक्ति के विरुद्ध — बंदी प्रत्यक्षीकरण
  7. कार्यवाही रोकना — प्रतिषेध
  8. ‘किस अधिकार से’ — अधिकार-पृच्छा

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • 226 व्यापक, 32 मौलिक अधिकार।
  • रिट विवेकाधीन उपचार।
  • PIL ने लोकस स्टैंडी शिथिल किया।
  • 227 अधीक्षण की पूरक शक्ति।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • परमादेश राष्ट्रपति/राज्यपाल के विरुद्ध नहीं।
  • अधिकार-पृच्छा मंत्री-पद पर नहीं।
  • 226 मौलिक अधिकार नहीं — 32 है।

🧠 याद रखने की ट्रिक

“बंदी — शरीर, परमादेश — कर्तव्य, प्रतिषेध — रोको, उत्प्रेषण — रद्द, अधिकार-पृच्छा — किस हक़ से?”

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

रिट-प्रश्नों में ‘किसके विरुद्ध नहीं’ वाला कॉलम सबसे अधिक पूछा जाता है। खंड 3 की तालिका का चौथा कॉलम अलग से याद करें।

✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स

राजस्थान उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता पर अपनी तैयारी परखने के लिए:

पूरी राजव्यवस्था इकाई: राजस्थान राजव्यवस्था — सभी नोट्स | राजस्थान इतिहास: इतिहास नोट्स | राजस्थान भूगोल: भूगोल नोट्स | नई नियुक्तियाँ, चुनाव व सरकारी निर्णय: डेली करेंट अफेयर्स | सभी टेस्ट: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • भारत का संविधान — अनुच्छेद 32, 226, 227, 359।
  • निखिल सोनी बनाम भारत संघ (राजस्थान उच्च न्यायालय, 2015); सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन आदेश।
  • विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) — सर्वोच्च न्यायालय।
  • ETV Bharat — मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल (2026)।
  • एम. लक्ष्मीकांत / डी.डी. बसु — भारतीय संविधान (मानक पाठ्य-पुस्तकें)।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी राजव्यवस्था एवं प्रशासन संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता

स्रोत-आधार: भारत का संविधान (नवीनतम संस्करण), संबंधित राज्य अधिनियम (India Code), संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइटें तथा राजस्थान सरकार के प्रकाशन।

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS प्रारंभिक व मुख्य, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, LDC, पुलिस, शिक्षक भर्ती एवं अन्य RPSC/RSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: रिट की उपलब्धता न्यायिक व्याख्याओं से विकसित होती रहती है; यहाँ सामान्य सिद्धांत दिए गए हैं, विशिष्ट मामलों में विधिक सलाह लें।

अंतिम समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 8 अक्टूबर 2026
✓ 100% सिलेबस सत्यापित (2026 पैटर्न)
Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
तैयारी का स्व-मूल्यांकनफ्री डेमो उपलब्ध
रीजनिंग Mega टेस्ट सीरीज़ 2026
₹99

🔥 2026 भर्ती परीक्षा: सिर्फ नोट्स पढ़ना काफी नहीं — वास्तविक परीक्षा में 120+ स्कोर के लिए फुल मॉक टेस्ट हल करें!

रीजनिंग Mega टेस्ट सीरीज़ 2026

  • 100% नवीनतम 2026 परीक्षा पैटर्न व OMR 5th Option आधारित
  • All-Rajasthan रैंक और विस्तृत व्याख्या सहित उत्तर
  • वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
⚡ PhonePe · Google Pay · Paytm UPI द्वारा तुरंत सुरक्षित सक्रियण
आधिकारिक कम्युनिटी5,200+ अभ्यर्थी सक्रिय

रीजनिंग Mega टेस्ट सीरीज़ 2026 — सुयोग अकादमी WhatsApp ग्रुप

डेली फ्री हस्तलिखित नोट्स, नए मॉक टेस्ट लिंक और टॉपर्स रणनीति सीधे WhatsApp पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करें

🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. अनुच्छेद 226 की रिट अनुच्छेद 32 से व्यापक क्यों?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. अनुच्छेद 32 स्वयं क्या है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ‘किस अधिकार से पद पर हो?’ — कौन-सी रिट?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. परमादेश (Mandamus) किसके विरुद्ध जारी नहीं होता?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. कौन-सी रिट निजी व्यक्ति के विरुद्ध भी जारी हो सकती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

226।

32।

227।

बंदी प्रत्यक्षीकरण।

226(3), 2 सप्ताह।

क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें:

मुफ्त अध्ययन सामग्री और सिलेबस ट्रैकर के लिए विजिट करें: https://suyogacademy.com© 2026 Suyog Academy