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राजस्थान इतिहास

राव चंद्रसेन बनाम महाराणा प्रताप: मुगल विरोध की तुलना | RAS

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
1 सितंबर 2026
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राव चंद्रसेन बनाम महाराणा प्रताप: मुगल विरोध की तुलना | RAS

सुयोग AI गुरु

नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप राजस्थान के इतिहास में मुगल सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध के दो प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। दोनों ने अकबर की विस्तारवादी नीति के सामने अपने राज्यों की स्वतंत्रता बनाए रखने का प्रयास किया। दोनों के संघर्ष का उद्देश्य केवल युद्ध करना नहीं था, बल्कि अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता और स्वाभिमान को बनाए रखना था।

हालाँकि दोनों के सामने परिस्थितियाँ समान नहीं थीं। राव चंद्रसेन मारवाड़ के राठौड़ शासक थे, जबकि महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया शासक थे। दोनों ने मुगल सत्ता का विरोध किया, लेकिन उनकी राजनीतिक परिस्थितियाँ, संघर्ष का स्वरूप, सहयोगी, भौगोलिक आधार और संघर्ष के परिणाम अलग-अलग रहे।

परीक्षा तथ्य: राव चंद्रसेन को राजस्थान में अकबर की सत्ता के विरुद्ध प्रारंभिक और लगातार प्रतिरोध करने वाले प्रमुख राजपूत शासकों में गिना जाता है, जबकि महाराणा प्रताप का प्रतिरोध मेवाड़ की स्वतंत्रता के संघर्ष के रूप में विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ।


राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप कौन थे?

राव चंद्रसेन

राव चंद्रसेन राठौड़ वंश के शासक और मारवाड़ के शासक राव मालदेव के पुत्र थे। राव मालदेव की मृत्यु के बाद मारवाड़ में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष उत्पन्न हुआ। इसी राजनीतिक परिस्थिति में चंद्रसेन का संघर्ष शुरू हुआ।

मुगल सम्राट अकबर ने मारवाड़ पर अपना प्रभाव स्थापित करने का प्रयास किया। राव चंद्रसेन ने मुगल अधीनता स्वीकार करने के बजाय प्रतिरोध का मार्ग चुना।

उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद लंबे समय तक मुगल शक्ति का सामना किया और पहाड़ी तथा दुर्गम क्षेत्रों को अपने संघर्ष का आधार बनाया।

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया वंश के शासक थे। वे महाराणा उदयसिंह द्वितीय के पुत्र थे।

1572 ई. में वे मेवाड़ के शासक बने। अकबर ने मेवाड़ को अपने साम्राज्य में शामिल करने के लिए कई राजनयिक प्रयास किए, लेकिन महाराणा प्रताप ने मुगल अधीनता स्वीकार नहीं की।

1576 ई. का हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच संघर्ष का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग है। इसके बाद भी प्रताप ने संघर्ष जारी रखा और मेवाड़ के कई क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया।


राव चंद्रसेन बनाम महाराणा प्रताप: मुख्य तुलना

आधार

राव चंद्रसेन

महाराणा प्रताप

वंश

राठौड़

सिसोदिया

राज्य

मारवाड़

मेवाड़

पिता

राव मालदेव

महाराणा उदयसिंह द्वितीय

शासनकाल

16वीं शताब्दी

16वीं शताब्दी

प्रमुख विरोधी

अकबर की मुगल सत्ता

अकबर की मुगल सत्ता

संघर्ष का प्रमुख आधार

मारवाड़ के दुर्गम क्षेत्र

अरावली पर्वतमाला और मेवाड़

प्रमुख संघर्ष

मारवाड़ में मुगल विरोध

हल्दीघाटी सहित मेवाड़ का संघर्ष

प्रमुख सहयोग

स्थानीय राठौड़ एवं अन्य समर्थक

हकीम खान सूर, झाला बीदा, भील आदि

युद्ध नीति

छापामार एवं गतिशील प्रतिरोध

छापामार युद्ध एवं पुनर्गठन

प्रमुख उद्देश्य

मारवाड़ की स्वतंत्रता

मेवाड़ की स्वतंत्रता

मृत्यु

1581 ई.

1597 ई.


1. मुगल विरोध का कारण

दोनों शासकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति थी।

अकबर ने राजस्थान के विभिन्न राजपूत राज्यों के साथ अलग-अलग प्रकार की नीति अपनाई। कुछ राजपूत शासकों ने मुगल सत्ता के साथ समझौता किया और साम्राज्य में महत्वपूर्ण पद प्राप्त किए।

लेकिन राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप ने मुगल अधीनता स्वीकार नहीं की।

राव चंद्रसेन का विरोध

राव चंद्रसेन का संघर्ष मारवाड़ की राजनीतिक स्वतंत्रता और राठौड़ सत्ता को बनाए रखने से जुड़ा था।

मारवाड़ पर मुगल नियंत्रण स्थापित होने के बाद भी उन्होंने प्रतिरोध जारी रखा।

महाराणा प्रताप का विरोध

महाराणा प्रताप का संघर्ष मेवाड़ की स्वतंत्रता और सिसोदिया स्वाधीनता की परंपरा से जुड़ा था।

अकबर के दरबार में उपस्थित होकर अधीनता स्वीकार करना उनके लिए स्वीकार्य नहीं था।

Exam Point:
दोनों के संघर्ष में राजनीतिक स्वतंत्रता और मुगल अधीनता का विरोध केंद्रीय तत्व था।


2. भौगोलिक परिस्थितियों की भूमिका

दोनों शासकों के संघर्ष में भूगोल का महत्वपूर्ण योगदान था।

राव चंद्रसेन और मारवाड़

मारवाड़ का बड़ा हिस्सा शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्र था। इसके साथ ही अरावली के कुछ दुर्गम क्षेत्र भी प्रतिरोध के लिए उपयोगी थे।

राव चंद्रसेन ने खुले मैदान में मुगल सेना से लगातार निर्णायक युद्ध करने के बजाय दुर्गम क्षेत्रों और गतिशील युद्ध पद्धति का सहारा लिया।

महाराणा प्रताप और मेवाड़

मेवाड़ की अरावली पर्वतमाला ने महाराणा प्रताप को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान की।

पहाड़ी क्षेत्र, संकरे दर्रे, जंगल और स्थानीय भूगोल मुगल सेना के लिए चुनौतीपूर्ण थे।

इसी कारण महाराणा प्रताप लंबे समय तक मुगल शक्ति के विरुद्ध संघर्ष जारी रख सके।


3. युद्ध रणनीति में समानता

राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप दोनों ने परिस्थितियों के अनुसार छापामार युद्ध और गतिशील प्रतिरोध को महत्व दिया।

मुगल सेना संख्या, संसाधनों और संगठन की दृष्टि से अधिक शक्तिशाली थी। ऐसे में सीधे लंबे समय तक खुले मैदान में युद्ध करना कठिन था।

इसलिए स्थानीय भूगोल का उपयोग, अचानक आक्रमण, तेजी से स्थान बदलना और दुर्गम क्षेत्रों में शरण लेना दोनों के संघर्ष में महत्वपूर्ण रहा।

समान रणनीतिक विशेषताएँ

  • मुगल सेना से सीधे टकराव को सीमित करना

  • स्थानीय भूगोल का लाभ उठाना

  • दुर्गम क्षेत्रों को आधार बनाना

  • अचानक आक्रमण करना

  • छोटी सैन्य टुकड़ियों का उपयोग

  • स्थानीय समर्थन बनाए रखना

  • लंबे समय तक संघर्ष जारी रखना


4. प्रमुख संघर्षों में अंतर

यहाँ दोनों के संघर्ष में महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है।

राव चंद्रसेन

राव चंद्रसेन का संघर्ष किसी एक प्रसिद्ध निर्णायक युद्ध तक सीमित नहीं था। उनका मुगल विरोध लंबे समय तक अलग-अलग स्थानों और परिस्थितियों में चलता रहा।

उन्होंने मारवाड़ में मुगल प्रभाव के विरुद्ध लगातार प्रतिरोध किया।

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप के संघर्ष में हल्दीघाटी का युद्ध, 1576 ई. सबसे प्रसिद्ध घटना है।

इसके बाद संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। महाराणा प्रताप ने पुनर्गठन किया और मेवाड़ के कई क्षेत्रों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने में सफलता प्राप्त की।

Exam Trap:
हल्दीघाटी के युद्ध को महाराणा प्रताप के संघर्ष का अंत नहीं मानना चाहिए।


5. हल्दीघाटी का युद्ध और राव चंद्रसेन का संघर्ष

महाराणा प्रताप और राव चंद्रसेन की तुलना करते समय विद्यार्थियों को एक महत्वपूर्ण अंतर याद रखना चाहिए।

महाराणा प्रताप के संघर्ष का सबसे प्रसिद्ध युद्ध हल्दीघाटी था, जबकि राव चंद्रसेन का मुगल विरोध कई वर्षों तक चलने वाला व्यापक राजनीतिक-सैन्य प्रतिरोध था।

इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि दोनों का संघर्ष बिल्कुल समान प्रकार का था।


6. सहयोगियों की भूमिका

राव चंद्रसेन

राव चंद्रसेन को राठौड़ समर्थकों तथा स्थानीय शक्तियों का सहयोग प्राप्त हुआ। उनके संघर्ष की प्रकृति ऐसी थी जिसमें स्थानीय समर्थन और दुर्गम क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप के संघर्ष में विभिन्न समुदायों और सहयोगियों का योगदान उल्लेखनीय था।

उनके संघर्ष से जुड़े प्रमुख नामों में:

  • हकीम खान सूर

  • झाला बीदा

  • भामाशाह

  • भील समुदाय

  • मेवाड़ के स्थानीय सरदार

विशेष रूप से मेवाड़ के पहाड़ी क्षेत्रों में भील समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण था।


7. आर्थिक स्थिति और संघर्ष

मुगल साम्राज्य की तुलना में दोनों शासकों के पास सीमित आर्थिक संसाधन थे।

लंबे संघर्ष को जारी रखने के लिए स्थानीय संसाधनों, समर्थकों और सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी।

महाराणा प्रताप के संदर्भ में भामाशाह का नाम आर्थिक सहयोग के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

राव चंद्रसेन के संघर्ष में भी सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार प्रतिरोध बनाए रखना उनकी संघर्ष क्षमता को दर्शाता है।


8. क्या दोनों ने अकबर के साथ समझौता किया?

यह परीक्षा में पूछे जाने वाला महत्वपूर्ण अंतर है।

राव चंद्रसेन

राव चंद्रसेन ने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और लगातार विरोध करते रहे।

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।

अकबर ने उन्हें अपने साम्राज्य में शामिल करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन प्रताप स्वतंत्रता की नीति पर कायम रहे।

याद रखें:
दोनों शासकों की पहचान ही मुगल सत्ता के विरुद्ध उनके स्वतंत्रतावादी प्रतिरोध से जुड़ी है।


9. संघर्ष की अवधि

राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप दोनों ने जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से को संघर्ष में बिताया।

राव चंद्रसेन की मृत्यु 1581 ई. में हुई।

महाराणा प्रताप की मृत्यु 1597 ई. में हुई।

इसलिए महाराणा प्रताप को राव चंद्रसेन की तुलना में लगभग 16 वर्ष अधिक समय तक संघर्ष करने का अवसर मिला।


10. मृत्यु के बाद स्थिति

राव चंद्रसेन की मृत्यु के बाद मारवाड़ की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया और राठौड़ सत्ता को आगे चलकर नए राजनीतिक समीकरणों का सामना करना पड़ा।

महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमर सिंह प्रथम ने मेवाड़ का शासन संभाला। बाद में मुगल-मेवाड़ संबंधों में परिवर्तन आया और अंततः 1615 ई. में महाराणा अमर सिंह प्रथम और जहाँगीर के बीच समझौता हुआ।

इस प्रकार दोनों शासकों के संघर्ष का प्रभाव उनकी मृत्यु के बाद भी राजस्थान की राजनीति पर दिखाई देता है।


राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप में प्रमुख समानताएँ

परीक्षा की दृष्टि से निम्न बिंदु महत्वपूर्ण हैं:

  1. दोनों 16वीं शताब्दी के प्रमुख राजपूत शासक थे।

  2. दोनों ने अकबर की विस्तारवादी नीति का विरोध किया।

  3. दोनों ने मुगल अधीनता स्वीकार नहीं की।

  4. दोनों ने अपने राज्य की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी।

  5. दोनों ने स्थानीय भूगोल का उपयोग किया।

  6. दोनों के संघर्ष में छापामार युद्ध की भूमिका रही।

  7. दोनों को स्थानीय शक्तियों का सहयोग मिला।

  8. दोनों का संघर्ष लंबे समय तक चला।

  9. दोनों राजस्थान में मुगल विरोध के प्रमुख प्रतीक बने।

  10. दोनों की ऐतिहासिक छवि स्वतंत्रता और स्वाभिमान से जुड़ी है।


राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप में प्रमुख अंतर

तुलना का आधार

राव चंद्रसेन

महाराणा प्रताप

राज्य

मारवाड़

मेवाड़

वंश

राठौड़

सिसोदिया

पिता

राव मालदेव

उदयसिंह द्वितीय

प्रमुख क्षेत्र

मारवाड़

मेवाड़

प्रसिद्ध युद्ध

अनेक संघर्ष, कोई एक युद्ध सर्वाधिक प्रसिद्ध नहीं

हल्दीघाटी का युद्ध

भौगोलिक आधार

मारवाड़ एवं दुर्गम क्षेत्र

अरावली एवं मेवाड़

प्रसिद्ध सहयोगी

राठौड़ समर्थक

हकीम खान सूर, भामाशाह, झाला बीदा, भील आदि

मृत्यु

1581 ई.

1597 ई.

उत्तराधिकारी

मारवाड़ में उत्तराधिकार संघर्ष जारी रहा

अमर सिंह प्रथम

ऐतिहासिक पहचान

प्रारंभिक मुगल विरोध के प्रमुख राठौड़ शासक

मेवाड़ की स्वतंत्रता के प्रमुख प्रतीक


क्या राव चंद्रसेन को महाराणा प्रताप का पूर्ववर्ती माना जा सकता है?

व्यापक अर्थ में दोनों को अकबर की मुगल विस्तार नीति के विरुद्ध राजस्थान के प्रमुख प्रतिरोधी शासकों के रूप में देखा जा सकता है।

राव चंद्रसेन का संघर्ष महाराणा प्रताप से पहले शुरू हो चुका था। इसलिए राजस्थान के इतिहास में मुगल विरोध की निरंतरता समझने के लिए राव चंद्रसेन का अध्ययन महत्वपूर्ण है।

हालाँकि दोनों की राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग थीं। इसलिए दोनों को बिल्कुल समान परिस्थितियों में संघर्ष करने वाला शासक मानना उचित नहीं है।


राव चंद्रसेन बनाम महाराणा प्रताप: किसका संघर्ष अधिक सफल था?

यह प्रश्न मुख्य रूप से विश्लेषणात्मक है और इसका उत्तर संदर्भ के आधार पर दिया जाना चाहिए।

यदि तत्काल राजनीतिक परिणाम देखें, तो दोनों को भारी मुगल शक्ति का सामना करना पड़ा और दोनों ने अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखने का प्रयास किया।

महाराणा प्रताप ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में मेवाड़ के कई क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया। इसलिए उनके संघर्ष को क्षेत्रीय पुनरुत्थान की दृष्टि से महत्वपूर्ण सफलता मिली।

राव चंद्रसेन भी सीमित संसाधनों के बावजूद लंबे समय तक मुगल सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध बनाए रखने में सफल रहे।

इसलिए परीक्षा में किसी एक को बिना संदर्भ के “अधिक सफल” बताने के बजाय दोनों की परिस्थितियों और परिणामों की तुलना करना बेहतर है।


RAS/RPSC के लिए महत्वपूर्ण Exam Points

Fact 1

राव चंद्रसेन राठौड़ वंश से संबंधित थे।

Fact 2

महाराणा प्रताप सिसोदिया वंश से संबंधित थे।

Fact 3

राव चंद्रसेन का संबंध मारवाड़ से था।

Fact 4

महाराणा प्रताप का संबंध मेवाड़ से था।

Fact 5

दोनों ने अकबर की मुगल सत्ता के सामने स्वतंत्रता की नीति अपनाई।

Fact 6

महाराणा प्रताप के संघर्ष का सबसे प्रसिद्ध युद्ध हल्दीघाटी का युद्ध, 1576 ई. था।

Fact 7

राव चंद्रसेन की मृत्यु 1581 ई. में हुई।

Fact 8

महाराणा प्रताप की मृत्यु 1597 ई. में हुई।

Fact 9

महाराणा प्रताप के बाद उनके पुत्र अमर सिंह प्रथम मेवाड़ के शासक बने।

Fact 10

महाराणा प्रताप के संघर्ष में अरावली का भूगोल अत्यंत महत्वपूर्ण था।


परीक्षा में पूछे जा सकने वाले संभावित प्रश्न

प्रश्न: राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप में क्या समानता थी?
उत्तर: दोनों ने अकबर की मुगल विस्तार नीति का विरोध किया और अपने राज्यों की स्वतंत्रता बनाए रखने का प्रयास किया।

प्रश्न: राव चंद्रसेन किस राजवंश से संबंधित थे?
उत्तर: राठौड़ वंश।

प्रश्न: महाराणा प्रताप किस राज्य के शासक थे?
उत्तर: मेवाड़।

प्रश्न: हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ?
उत्तर: 1576 ई.

प्रश्न: राव चंद्रसेन की मृत्यु कब हुई?
उत्तर: 1581 ई.

प्रश्न: महाराणा प्रताप की मृत्यु कब हुई?
उत्तर: 1597 ई.


निष्कर्ष

राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप राजस्थान के इतिहास में मुगल विरोध की दो महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं। दोनों ने अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति के सामने अपने-अपने राज्यों की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी।

राव चंद्रसेन का संघर्ष मारवाड़ की राजनीतिक स्वतंत्रता और राठौड़ सत्ता की रक्षा से जुड़ा था, जबकि महाराणा प्रताप का संघर्ष मेवाड़ की स्वतंत्रता और सिसोदिया स्वाभिमान का प्रमुख प्रतीक बना।

दोनों की रणनीति में स्थानीय भूगोल, सीमित संसाधनों और गतिशील युद्ध पद्धति का महत्व था। फिर भी उनके संघर्षों की परिस्थितियाँ, प्रमुख घटनाएँ और राजनीतिक परिणाम अलग-अलग थे।

RAS/RPSC के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप को केवल “अकबर के विरोधी” के रूप में याद न करें। दोनों की तुलना राज्य, वंश, संघर्ष की अवधि, युद्ध रणनीति, सहयोगियों, प्रमुख घटनाओं और परिणामों के आधार पर करें।


एक नजर में याद करें

राव चंद्रसेन → राठौड़ → मारवाड़ → अकबर का विरोध → 1581 ई.

महाराणा प्रताप → सिसोदिया → मेवाड़ → अकबर का विरोध → हल्दीघाटी 1576 → 1597 ई.

Exam Formula:
चंद्रसेन = मारवाड़ + राठौड़ + प्रारंभिक मुगल विरोध
प्रताप = मेवाड़ + सिसोदिया + हल्दीघाटी + दीर्घ प्रतिरोध

अंतिम संशोधन (Last Updated): 1 सितंबर 2026
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Sudhir Dhakaइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय

🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राव चंद्रसेन किस राजवंश से संबंधित थे?

RAS/RPSC Practice 2026

Q2. महाराणा प्रताप किस राज्य के शासक थे?

RAS/RPSC Practice 2026

Q3. राव चंद्रसेन और महाराणा प्रताप में मुख्य समानता क्या थी?

RAS/RPSC Practice 2026

Q4. हल्दीघाटी का युद्ध किस वर्ष हुआ था?

RAS/RPSC Practice 2026

Q5. राव चंद्रसेन की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

RAS/RPSC Practice 2026

Q6. महाराणा प्रताप के संघर्ष में किस पर्वतीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही?

RAS/RPSC Practice 2026

Q7. महाराणा प्रताप की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

RAS/RPSC Practice 2026

Q8. महाराणा प्रताप के बाद मेवाड़ का शासक कौन बना?

RAS/RPSC Practice 2026

Q9. निम्न में से कौन महाराणा प्रताप के संघर्ष से संबंधित था?

RAS/RPSC Practice 2026

Q10. राव चंद्रसेन का प्रमुख राजनीतिक संघर्ष किस क्षेत्र की स्वतंत्रता से जुड़ा था?

RAS/RPSC Practice 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

दोनों ने अकबर की मुगल विस्तार नीति का विरोध किया और अपने-अपने राज्यों की स्वतंत्रता बनाए रखने का प्रयास किया।

राव चंद्रसेन राठौड़ वंश से संबंधित थे।

महाराणा प्रताप सिसोदिया वंश से संबंधित थे।

राव चंद्रसेन का संबंध मारवाड़ से था।

महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक थे।

हल्दीघाटी का युद्ध 1576 ई. में महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच हुआ था।

राव चंद्रसेन की मृत्यु 1581 ई. में हुई थी।

महाराणा प्रताप की मृत्यु 1597 ई. में हुई थी।

अरावली पर्वतमाला और मेवाड़ का दुर्गम भूभाग महाराणा प्रताप के संघर्ष में महत्वपूर्ण था।

दोनों ने परिस्थितियों के अनुसार गतिशील प्रतिरोध और छापामार युद्ध जैसी रणनीतियों का उपयोग किया।

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