सुयोग अकादमी (Suyog Academy)
suyogacademy.com — RPSC & RSMSSB फ्री GK नोट्स
राजस्थान इतिहास

चौहान वंश की शाखाएँ: शाकंभरी, अजमेर, रणथंभौर, जालौर और नाडोल

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
4 सितंबर 2026
7 मिनट पठन
शेयर करें:
चौहान वंश की शाखाएँ: शाकंभरी, अजमेर, रणथंभौर, जालौर और नाडोल

सुयोग AI गुरु

नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

चौहान या चाहमान वंश को केवल पृथ्वीराज चौहान और अजमेर तक सीमित करके पढ़ना अधूरा है। राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास में इस वंश की कई क्षेत्रीय शाखाएँ विकसित हुईं, जिनमें शाकंभरी, अजमेर, नाडोल, रणथंभौर और जालौर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

इन शाखाओं को अलग-अलग राजवंश मानने के बजाय एक ही चौहान कुल की क्षेत्रीय राजनीतिक शाखाओं के रूप में समझना अधिक उपयोगी है। शाकंभरी से अजमेर की प्रमुख सत्ता विकसित हुई, जबकि नाडोल शाखा से आगे चलकर जालौर की सोनगरा शाखा निकली। रणथंभौर की शाखा शाकंभरी-अजमेर परंपरा से जुड़ी थी। (foundation.rajasthan.gov.in)

महत्वपूर्ण: इस लेख में पृथ्वीराज चौहान, हम्मीर देव, कान्हड़देव या नाडोल के शासकों का विस्तृत जीवन-वृत्तांत दोहराया नहीं गया है। उनके लिए Suyog Academy के अलग-अलग नोट्स देखें। यहां मुख्य उद्देश्य शाखाओं के आपसी संबंध, भौगोलिक विस्तार और परीक्षा में होने वाले भ्रम को समझना है।


Quick Answer Box

शाखा

प्रमुख केंद्र

शाखा-संबंध

परीक्षा में पहचान

शाकंभरी

शाकंभरी/सांभर

मूल प्रमुख चौहान सत्ता

चौहानों का प्रारंभिक केंद्र

अजमेर

अजमेर

शाकंभरी से विकसित प्रमुख राजनीतिक केंद्र

पृथ्वीराज, तराइन

नाडोल

नाडोल

शाकंभरी की शाखा

लक्ष्मण/लाखण

रणथंभौर

रणथंभौर

शाकंभरी-अजमेर परंपरा से शाखा

हम्मीर देव

जालौर

जालौर/सुवर्णगिरि

नाडोल से विकसित

सोनगरा चौहान, कान्हड़देव

सबसे जरूरी संबंध:

शाकंभरी → अजमेर
शाकंभरी → रणथंभौर
शाकंभरी → नाडोल → जालौर

यह पूरा संबंध राजस्थान की चौहान शाखाओं को समझने की सबसे उपयोगी कुंजी है। (foundation.rajasthan.gov.in)


1. चौहान शाखाओं का विकास कैसे हुआ?

चौहान वंश का प्राचीन राजनीतिक आधार शाकंभरी यानी सांभर क्षेत्र में था। समय के साथ चौहान शक्ति का विस्तार हुआ और अलग-अलग क्षेत्रों में परिवार की शाखाएँ स्थापित होती गईं।

यह प्रक्रिया केवल सत्ता के टूटने का परिणाम नहीं थी। राजवंश के अलग-अलग सदस्यों को विभिन्न क्षेत्रों में अधिकार मिलने, स्थानीय शक्तियों से संघर्ष और नए राजनीतिक केंद्रों के निर्माण से भी क्षेत्रीय शाखाएँ विकसित हुईं।

इसी प्रक्रिया में राजस्थान में प्रमुख चौहान केंद्र बने:

शाकंभरी → अजमेर

और दूसरी ओर:

शाकंभरी → नाडोल → जालौर

जबकि:

शाकंभरी → रणथंभौर

रणथंभौर शाखा को गोविंदराज से जोड़ा जाता है, जबकि नाडोल शाखा के प्रारंभिक संस्थापक के रूप में लक्ष्मण का उल्लेख मिलता है। अभिलेखीय प्रमाण नाडोल शाखा के शाकंभरी संबंध को स्पष्ट करने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। (Jain Literature)


2. शाकंभरी चौहान: मूल राजनीतिक आधार

शाकंभरी चौहानों की प्रारंभिक प्रमुख सत्ता का केंद्र था। शाकंभरी का संबंध वर्तमान सांभर क्षेत्र से माना जाता है।

चौहान इतिहास को समझने के लिए इसे मूल आधार-बिंदु की तरह देखना चाहिए। आगे चलकर इसी राजनीतिक परंपरा से अजमेर की शक्ति मजबूत हुई और अन्य क्षेत्रीय शाखाएँ भी विकसित हुईं।

राजस्थान फाउंडेशन शाकंभरी के चौहानों को चौहान वंश की प्रमुख शाखा के रूप में सूचीबद्ध करता है और वासुदेव को शाकंभरी चौहानों की स्थापना से जोड़ता है। (foundation.rajasthan.gov.in)

शाकंभरी शाखा की भूमिका

शाकंभरी को केवल एक राजधानी के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है। यह वह आधार था जिससे चौहान राजनीतिक शक्ति ने राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में विस्तार किया।

Exam Connection:

शाकंभरी = चौहानों की प्रारंभिक प्रमुख सत्ता
शाकंभरी → अजमेर
शाकंभरी → नाडोल
शाकंभरी → रणथंभौर


3. अजमेर चौहान: शाकंभरी से विकसित प्रमुख सत्ता

अजमेर को चौहान इतिहास में विशेष महत्व इसलिए मिला क्योंकि यहां चौहान शक्ति ने एक प्रभावशाली राजनीतिक केंद्र का रूप लिया।

अजमेर शाखा को अलग और पूरी तरह स्वतंत्र वंश की तरह समझने के बजाय शाकंभरी चौहान सत्ता के विकसित राजनीतिक केंद्र के रूप में समझना अधिक सही है।

अजमेर के विकास के बाद चौहान शक्ति का प्रभाव राजस्थान से बाहर उत्तर भारत की राजनीति तक पहुंचा।

इसी शाखा के सबसे प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज III थे। उनके शासनकाल से जुड़े तराइन के युद्ध भारतीय मध्यकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय हैं।

लेकिन इस लेख के संदर्भ में महत्वपूर्ण बात यह है:

पृथ्वीराज चौहान = अजमेर शाखा
अजमेर शाखा = शाकंभरी चौहान परंपरा का प्रमुख राजनीतिक विकास

राजस्थान फाउंडेशन भी शाकंभरी चौहानों के अंतर्गत अजमेर और पृथ्वीराज से संबंधित राजनीतिक विस्तार का उल्लेख करता है। (foundation.rajasthan.gov.in)


4. नाडोल चौहान: दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान की शाखा

नाडोल वर्तमान पाली जिले में स्थित है। मध्यकाल में यह चौहान शक्ति का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र बना।

नाडोल के चौहान शाकंभरी चौहान परिवार की शाखा थे। अभिलेखीय स्रोतों में नाडोल के संस्थापक के रूप में लक्ष्मण का उल्लेख मिलता है, जिन्हें शाकंभरी के वाक्पतिराज से जोड़ा गया है। (Jain Literature)

नाडोल शाखा को कैसे याद करें?

नाडोल शाखा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे केवल एक अलग स्थानीय राजवंश के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

इसका महत्व तीन कारणों से है:

  1. यह शाकंभरी चौहान परंपरा से जुड़ी थी।

  2. इसने दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में चौहान शक्ति का विस्तार किया।

  3. इसी शाखा से आगे चलकर जालौर के सोनगरा चौहान विकसित हुए।

इसलिए:

शाकंभरी → नाडोल → जालौर

यह संबंध परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। (Kiwix Server)


5. रणथंभौर चौहान: पूर्वी राजस्थान में चौहान शाखा

रणथंभौर चौहान इतिहास का एक अलग क्षेत्रीय केंद्र था। रणथंभौर शाखा को शाकंभरी-अजमेर चौहान परंपरा से निकली शाखा माना जाता है।

राजस्थान फाउंडेशन के अनुसार रणथंभौर की चौहान शाखा की स्थापना गोविंदराज IV से जुड़ी है। 1192 ई. के बाद राजनीतिक परिस्थितियों में गोविंदराज ने रणथंभौर में सत्ता स्थापित की। (foundation.rajasthan.gov.in)

इस शाखा की सबसे प्रसिद्ध पहचान बाद के शासक हम्मीर देव और रणथंभौर के संघर्षों से बनती है।

रणथंभौर दुर्ग का सामरिक महत्व भी इस शाखा को समझने में मदद करता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार दुर्ग चौहान शासकों से जुड़ा था और 1301 ई. का अलाउद्दीन खिलजी के साथ संघर्ष इसका सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग है। (Rajasthan Tourism)

परीक्षा में संबंध

रणथंभौर → हम्मीर देव → अलाउद्दीन खिलजी

लेकिन शाखागत संबंध याद रखें:

रणथंभौर → शाकंभरी-अजमेर चौहान परंपरा


6. जालौर के सोनगरा चौहान: नाडोल से विकसित शाखा

जालौर की शाखा को समझने के लिए सबसे पहले नाडोल से उसका संबंध याद रखना चाहिए।

जालौर के सोनगरा चौहान, नाडोल चौहान शाखा से विकसित हुए।

नाडोल के शासक अल्हण के पुत्र कीर्तिपाल को जालौर शाखा की स्थापना से जोड़ा जाता है। जालौर का प्रमुख दुर्ग सुवर्णगिरि या सोनगिरि पहाड़ी पर स्थित था। इसी से इस शाखा के लिए सोनगरा नाम प्रचलित हुआ। (Jain Literature)

इसलिए जालौर को सीधे शाकंभरी से जोड़कर रुक जाना अधूरा उत्तर होगा।

सही क्रम है:

शाकंभरी → नाडोल → जालौर

जालौर शाखा की खास पहचान

तथ्य

जानकारी

मूल शाखा

नाडोल चौहान

प्रमुख संस्थापक

कीर्तिपाल

प्रमुख केंद्र

जालौर

दुर्ग

सुवर्णगिरि

शाखा का नाम

सोनगरा

प्रसिद्ध बाद का शासक

कान्हड़देव

यहां ध्यान रखें कि जालौर चौहान और नाडोल चौहान एक ही राजनीतिक शाखा नहीं थे, बल्कि जालौर शाखा नाडोल से विकसित हुई थी। (Jain Literature)


7. पांचों शाखाओं को एक साथ समझें

अब पूरी संरचना को एक साथ देखें:

                 चौहान / चाहमान वंश
                         │
                  शाकंभरी चौहान
                  (सांभर क्षेत्र)
                         │
          ┌──────────────┼──────────────┐
          │              │              │
       अजमेर          नाडोल         रणथंभौर
          │              │
      पृथ्वीराज       जालौर
                        │
                     सोनगरा

यह एक सरल परीक्षा-अनुकूल शाखा-चित्र है। इसे पूर्ण वंशावली न समझें, क्योंकि चौहान वंश की इससे भी अधिक क्षेत्रीय शाखाएँ थीं।


8. अजमेर और रणथंभौर में अंतर

विद्यार्थियों को इन दोनों शाखाओं में अक्सर भ्रम होता है।

आधार

अजमेर

रणथंभौर

मूल संबंध

शाकंभरी

शाकंभरी-अजमेर परंपरा

प्रमुख केंद्र

अजमेर

रणथंभौर

प्रसिद्ध शासक

पृथ्वीराज III

हम्मीर देव

प्रमुख संघर्ष

तराइन

रणथंभौर का खिलजी संघर्ष

प्रमुख काल-संदर्भ

12वीं शताब्दी

13वीं–14वीं शताब्दी

याद रखने की ट्रिक:

अजमेर = पृथ्वीराज = गौरी
रणथंभौर = हम्मीर = खिलजी


9. नाडोल और जालौर में अंतर

यह सबसे महत्वपूर्ण confusion points में से एक है।

आधार

नाडोल

जालौर

संबंध

शाकंभरी की शाखा

नाडोल की शाखा

प्रमुख केंद्र

नाडोल

जालौर

प्रारंभिक संस्थापक

लक्ष्मण/लाखण

कीर्तिपाल

क्षेत्र

दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान

जालौर क्षेत्र

विशेष पहचान

क्षेत्रीय चौहान सत्ता

सोनगरा चौहान

इसलिए अगर प्रश्न पूछा जाए:

“जालौर के सोनगरा चौहान किस चौहान शाखा से संबंधित थे?”

उत्तर होगा:

नाडोल के चौहान।


10. शाखाओं का कालक्रम कैसे याद करें?

सटीक वर्षों की लंबी सूची याद करने की बजाय परीक्षा के लिए राजनीतिक विकास का क्रम समझना अधिक उपयोगी है।

चरण 1: शाकंभरी

चौहान सत्ता का प्रारंभिक प्रमुख आधार।

चरण 2: अजमेर

शाकंभरी परंपरा का प्रमुख राजनीतिक विस्तार।

चरण 3: नाडोल

लगभग 10वीं शताब्दी में शाकंभरी परिवार की एक अलग क्षेत्रीय शाखा के रूप में नाडोल का विकास हुआ। (Kiwix Server)

चरण 4: रणथंभौर

1192 ई. के बाद शाकंभरी-अजमेर परंपरा से जुड़ी रणथंभौर शाखा का राजनीतिक महत्व बढ़ा। (foundation.rajasthan.gov.in)

चरण 5: जालौर

नाडोल शाखा से जालौर की सोनगरा शाखा विकसित हुई और यह शाखा 13वीं-14वीं शताब्दी तक महत्वपूर्ण रही। (Jain Literature)


11. 1192 ई. के बाद चौहान शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई

यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा-भ्रम है।

1192 ई. में द्वितीय तराइन युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि चौहान वंश की सभी राजनीतिक शाखाएँ उसी समय समाप्त हो गईं।

इसके बाद भी रणथंभौर और जालौर जैसे क्षेत्रीय चौहान केंद्र महत्वपूर्ण बने रहे। यही कारण है कि राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास में चौहान शक्ति को केवल 1192 ई. तक सीमित करके नहीं पढ़ना चाहिए। (Kiwix Server)

इसे ऐसे समझें:

1192 = अजमेर की प्रमुख चौहान सत्ता को बड़ा राजनीतिक झटका
1192 के बाद = क्षेत्रीय चौहान शाखाओं का अस्तित्व जारी


12. शाखाओं की भौगोलिक स्थिति

राजस्थान के मानचित्र को ध्यान में रखकर इन शाखाओं को याद करना आसान है।

  • शाकंभरी/सांभर → मध्य-पूर्वी राजस्थान की ओर

  • अजमेर → मध्य राजस्थान

  • नाडोल → वर्तमान पाली क्षेत्र

  • जालौर → दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान

  • रणथंभौर → वर्तमान सवाई माधोपुर क्षेत्र

इस भौगोलिक अंतर से यह भी स्पष्ट होता है कि चौहान शक्ति एक ही स्थान तक सीमित नहीं थी।

Image

Image

Image

13. परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले शाखा-संबंध

1. शाकंभरी → अजमेर

अजमेर की चौहान सत्ता का मूल संबंध शाकंभरी से है।

2. शाकंभरी → नाडोल

नाडोल चौहान शाकंभरी चौहान परंपरा की शाखा थे।

3. शाकंभरी → रणथंभौर

रणथंभौर की चौहान शाखा शाकंभरी-अजमेर परंपरा से जुड़ी थी।

4. नाडोल → जालौर

जालौर के सोनगरा चौहान नाडोल शाखा से विकसित हुए।

सबसे महत्वपूर्ण लाइन:

जालौर सीधे अजमेर की शाखा नहीं है। जालौर की सोनगरा शाखा का निकट संबंध नाडोल चौहानों से है।


14. Common Confusion: परीक्षा में होने वाली गलतियाँ

भ्रम 1: चौहान वंश का मतलब केवल पृथ्वीराज चौहान

गलत।

पृथ्वीराज अजमेर-शाकंभरी परंपरा के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक हैं, लेकिन चौहान वंश की कई क्षेत्रीय शाखाएँ थीं।


भ्रम 2: नाडोल और जालौर एक ही शाखा हैं

गलत।

नाडोल मूल क्षेत्रीय शाखा थी, जबकि जालौर की सोनगरा शाखा नाडोल से विकसित हुई।


भ्रम 3: रणथंभौर चौहान, नाडोल से निकले थे

गलत।

रणथंभौर शाखा का संबंध शाकंभरी-अजमेर परंपरा से है।


भ्रम 4: जालौर के चौहान = अजमेर के चौहान

अधूरा।

दोनों व्यापक चौहान परंपरा से जुड़े थे, लेकिन जालौर के सोनगरा चौहानों का निकट शाखागत संबंध नाडोल से था।


भ्रम 5: 1192 के बाद चौहान सत्ता खत्म हो गई

गलत।

अजमेर की प्रमुख सत्ता के पतन के बाद भी रणथंभौर और जालौर जैसी क्षेत्रीय चौहान शक्तियाँ आगे मौजूद रहीं। (Kiwix Server)


15. एक नजर में पूरी चौहान शाखा-व्यवस्था

शाखा

किससे संबंधित

मुख्य केंद्र

सबसे उपयोगी पहचान

शाकंभरी

प्रारंभिक प्रमुख चौहान सत्ता

सांभर

मूल आधार

अजमेर

शाकंभरी

अजमेर

पृथ्वीराज

नाडोल

शाकंभरी

नाडोल

लक्ष्मण/लाखण

रणथंभौर

शाकंभरी-अजमेर परंपरा

रणथंभौर

हम्मीर

जालौर

नाडोल

जालौर

सोनगरा, कान्हड़देव


16. Memory Trick

पूरी व्यवस्था को केवल चार शब्दों में याद करें:

अजमेर → पृथ्वीराज

रणथंभौर → हम्मीर

नाडोल → लक्ष्मण

जालौर → सोनगरा

और शाखा संबंध:

शाकंभरी → अजमेर
शाकंभरी → रणथंभौर
शाकंभरी → नाडोल → जालौर

यही इस टॉपिक का सबसे महत्वपूर्ण revision point है।


17. परीक्षा के लिए 10 One-Liner Facts

  1. चौहान वंश की प्रारंभिक प्रमुख राजनीतिक सत्ता का केंद्र शाकंभरी था।

  2. शाकंभरी का संबंध वर्तमान सांभर क्षेत्र से है।

  3. अजमेर की चौहान सत्ता का संबंध शाकंभरी परंपरा से था।

  4. पृथ्वीराज III अजमेर चौहान शाखा के सबसे प्रसिद्ध शासक हैं।

  5. नाडोल चौहान शाखा का प्रारंभिक संस्थापक लक्ष्मण/लाखण माना जाता है।

  6. नाडोल वर्तमान पाली जिले में स्थित है।

  7. रणथंभौर शाखा को गोविंदराज IV से जोड़ा जाता है। (foundation.rajasthan.gov.in)

  8. रणथंभौर शाखा का सबसे प्रसिद्ध शासक हम्मीर देव था।

  9. जालौर के सोनगरा चौहान, नाडोल शाखा से विकसित हुए।

  10. जालौर शाखा के संस्थापक के रूप में कीर्तिपाल का नाम महत्वपूर्ण है। (Jain Literature)


18. अंतिम Revision Chart

चौहान / चाहमान
       │
       ▼
  शाकंभरी
   /     \
  ▼       ▼
अजमेर   नाडोल
  │        │
  │        ▼
  │      जालौर
  │     सोनगरा
  │
  ▼
पृथ्वीराज

शाकंभरी-अजमेर
       │
       ▼
  रणथंभौर
       │
       ▼
    हम्मीर

सबसे जरूरी चार संबंध

शाकंभरी → अजमेर

शाकंभरी → रणथंभौर

शाकंभरी → नाडोल

नाडोल → जालौर


संबंधित अध्ययन

Suyog Academy पर इन शाखाओं के विस्तृत शासक-विशेष अध्याय अलग रखे जा सकते हैं, इसलिए इस लेख को branch-map/reference article की तरह इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।

निष्कर्ष: इस लेख का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग शासकों की कहानियां दोहराना नहीं, बल्कि यह साफ करना है कि शाकंभरी चौहान परंपरा से अजमेर, रणथंभौर और नाडोल जैसी शाखाएँ कैसे जुड़ीं तथा नाडोल से जालौर की सोनगरा शाखा कैसे विकसित हुई। यही संबंध RPSC, RAS, CET और अन्य राजस्थान-आधारित परीक्षाओं में सबसे उपयोगी है। (foundation.rajasthan.gov.in)

अंतिम संशोधन (Last Updated): 4 सितंबर 2026
✓ 100% सिलेबस सत्यापित (2026 पैटर्न)
Sudhir Dhakaइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
अनुशंसित संदर्भ पुस्तक (Recommended Study Book)Amazon Verified
44Rajasthan GK Abhikathan-Karan (कथन-कारण प्रश्न) 1000+ MCQs | RPSC & RSMSSB New Exam Pattern

Rajasthan GK Abhikathan-Karan (कथन-कारण प्रश्न) 1000+ MCQs | RPSC & RSMSSB New Exam Pattern

लेखक / पब्लिकेशन: Gauri Publication

1000+ अभिकथन-कारण प्रश्न: RPSC और RSMSSB के latest exam pattern और recent papers पर आधारित - बिल्कुल वैसे जैसे अब exam में आते हैं।

4.5(120+ विद्यार्थी समीक्षाएं)

🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. चौहान वंश की प्रारंभिक प्रमुख राजनीतिक सत्ता का केंद्र किसे माना जाता है?

REET 2022

Q2. अजमेर की चौहान शाखा का मूल संबंध किस चौहान केंद्र से था?

RPSC 2021

Q3. जालौर के सोनगरा चौहानों का निकट शाखागत संबंध किससे था?

CET Graduation Level 2024

Q4. नाडोल चौहान शाखा के प्रारंभिक संस्थापक के रूप में किसका नाम प्रमुखता से मिलता है?

Rajasthan Police 2020

Q5. जालौर की चौहान शाखा के संस्थापक के रूप में किस शासक का नाम प्रमुख है?

RPSC 2023

Q6. रणथंभौर की चौहान शाखा की स्थापना किससे संबंधित मानी जाती है?

CET 12th Level 2024

Q7. निम्न में से कौन-सा शाखा संबंध सही है?

REET 2021

Q8. हम्मीर देव का संबंध राजस्थान की किस चौहान शाखा से था?

Rajasthan Police 2022

Q9. कौन-सा क्रम चौहान शाखाओं के विकास संबंध को सही दर्शाता है?

RPSC 2020

Q10. 1192 ई. के बाद चौहान शक्ति के बारे में कौन-सा कथन सही है?

CET Graduation Level 2023

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

राजस्थान के इतिहास में प्रमुख चौहान शाखाओं में शाकंभरी, अजमेर, रणथंभौर, नाडोल और जालौर की शाखाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

शाकंभरी चौहानों का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र शाकंभरी या सांभर क्षेत्र था।

अजमेर की चौहान सत्ता का मूल संबंध शाकंभरी चौहान परंपरा से था।

नाडोल चौहान शाखा शाकंभरी चौहान परंपरा से संबंधित थी।

जालौर के सोनगरा चौहान नाडोल चौहान शाखा से विकसित हुए थे।

नाडोल शाखा के प्रारंभिक संस्थापक के रूप में लक्ष्मण या लाखण का नाम प्रमुखता से मिलता है।

कीर्तिपाल को जालौर चौहान शाखा की स्थापना से जोड़ा जाता है।

रणथंभौर चौहान शाखा शाकंभरी-अजमेर चौहान राजनीतिक परंपरा से संबंधित थी और इसकी स्थापना गोविंदराज IV से जोड़ी जाती है।

मुख्य संबंध इस प्रकार याद रखें: शाकंभरी → अजमेर, शाकंभरी → रणथंभौर, शाकंभरी → नाडोल → जालौर।

नहीं। 1192 ई. के बाद अजमेर की प्रमुख चौहान सत्ता को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, लेकिन रणथंभौर और जालौर जैसी क्षेत्रीय चौहान शाखाएँ बाद में भी महत्वपूर्ण रहीं।

क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें:

मुफ्त अध्ययन सामग्री और सिलेबस ट्रैकर के लिए विजिट करें: https://suyogacademy.com© 2026 Suyog Academy