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राजस्थान भूगोल

राजस्थान में मानसून: आगमन, वापसी एवं वर्षा वितरण

महेंद्र सरमहेंद्र सर (भूगोल विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
11 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।

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राजस्थान में मानसून: आगमन, वापसी एवं वर्षा वितरण

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान में सामान्यतः जून के तीसरे-चौथे सप्ताह में दक्षिण-पूर्व (बाँसवाड़ा, झालावाड़, प्रतापगढ़) से प्रवेश करता है और IMD की संशोधित सामान्य तिथि के अनुसार 8 जुलाई तक पूरे राज्य को ढक लेता है। मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से लगभग 17 सितंबर (सामान्य तिथि) से शुरू होती है — यानी राजस्थान वह राज्य है जहाँ से मानसून सबसे बाद में पहुँचता और सबसे पहले लौटता है। राज्य की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 90% भाग इसी मानसून से मिलता है।

1. मानसून क्या है और राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

मानसून शब्द अरबी भाषा के ‘मौसिम’ से बना है, जिसका अर्थ है — ऋतु के अनुसार दिशा बदलने वाली पवनें। ग्रीष्म ऋतु में पवनें समुद्र से स्थल की ओर (दक्षिण-पश्चिम से) और शीत ऋतु में स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्व से) चलती हैं।

राजस्थान एक शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क राज्य है जहाँ कृषि का बड़ा भाग वर्षा-आधारित (बारानी) है। इसलिए खरीफ फसलों (बाजरा, मूँग, मोठ, ग्वार, मक्का, सोयाबीन) का उत्पादन, भूजल पुनर्भरण, पेयजल और पशुपालन — सब कुछ मानसून के समय पर आगमन और पर्याप्त वितरण पर निर्भर करता है। इसी कारण कहा जाता है — “राजस्थान की कृषि मानसून का जुआ है।”

यह नोट विशेष रूप से मानसून के आगमन, शाखाओं, वापसी और अनिश्चितता पर केंद्रित है। जिलेवार वर्षा के आँकड़ों, समवर्षा रेखाओं और सर्वाधिक/न्यूनतम वर्षा वाले स्थानों के लिए राजस्थान में वर्षा का क्षेत्रीय वितरण तथा ऋतुओं व जलवायु वर्गीकरण के लिए राजस्थान की जलवायु नोट पढ़ें।

2. मानसून की उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत (संक्षेप में)

सिद्धांतप्रतिपादक / आधारमुख्य विचार
तापीय सिद्धांतएडमंड हैली (1686)स्थल व जल के असमान गर्म होने से वायुदाब में अंतर; ग्रीष्म में भारत के उत्तर-पश्चिम (थार सहित) में निम्न वायुदाब बनता है
गतिक (ITCZ) सिद्धांतफ्लॉन (Flohn)अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ग्रीष्म में उत्तर की ओर खिसकना; दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें विषुवत रेखा पार कर दक्षिण-पश्चिमी बन जाती हैं
जेट स्ट्रीम सिद्धांततिब्बत पठार का तापनग्रीष्म में उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम हिमालय के उत्तर खिसकती है और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम सक्रिय होती है, जिससे मानसून का ‘प्रस्फोट’ (burst) होता है
एल-नीनो / ENSO व IODआधुनिक संकल्पनाएल-नीनो वर्षों में प्रायः कमजोर मानसून; सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) मानसून को सहायता देता है

राजस्थान से संबंध: मई-जून में थार मरुस्थल अत्यधिक गर्म होकर तीव्र निम्न वायुदाब केंद्र बनाता है। यही निम्न दाब समुद्री आर्द्र पवनों को भारत की ओर खींचता है — अर्थात मानसून को ‘खींचने’ में राजस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण है, भले ही उसे स्वयं सबसे कम वर्षा मिलती है।

3. राजस्थान में मानसून का आगमन (Onset) कब और कहाँ से होता है?

भारत में मानसून सामान्यतः 1 जून को केरल तट पर पहुँचता है। इसके बाद अरब सागर और बंगाल की खाड़ी — दोनों शाखाएँ आगे बढ़ती हैं। राजस्थान भारत का सबसे उत्तर-पश्चिमी भाग होने के कारण यहाँ मानसून सबसे अंत में पहुँचता है।

चरणसामान्य समय (IMD संशोधित सामान्य तिथियाँ, 2020 से)क्षेत्र
प्रवेशलगभग 20–25 जूनदक्षिण-पूर्वी राजस्थान — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़
विस्तारजून का अंतिम सप्ताह – जुलाई का प्रथम सप्ताहहाड़ौती, मेवाड़, पूर्वी मैदान (जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर)
पूरे राज्य परलगभग 8 जुलाई (पहले 15 जुलाई मानी जाती थी)पश्चिमी राजस्थान — जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर

ध्यान दें: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2020 में मानसून के आगमन और वापसी की सामान्य तिथियाँ संशोधित कीं। पुराने पाठ्यपुस्तकों में ‘पूरे देश पर 15 जुलाई’ लिखा मिलता है, जबकि नई सामान्य तिथि 8 जुलाई है। परीक्षा में यदि ‘IMD की नवीन सामान्य तिथि’ पूछी जाए तो 8 जुलाई चुनें। राजस्थान में मानसून की घोषणा मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर करता है।

4. राजस्थान में मानसून की शाखाएँ — किस शाखा से कितनी वर्षा?

(A) अरब सागर शाखा

  • गुजरात (कच्छ-काठियावाड़) होते हुए दक्षिण-पश्चिम से राजस्थान में प्रवेश करती है।
  • यह शाखा अरावली पर्वतमाला के समानांतर (दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व) चलती है, इसलिए अरावली इसे रोककर वर्षा नहीं करा पाती। परिणामस्वरूप पश्चिमी राजस्थान को इस शाखा से बहुत कम वर्षा मिलती है।
  • मार्ग में अवरोध न होने से यह आगे बढ़कर हिमाचल-पंजाब में हिमालय से टकराकर वर्षा करती है।
  • अपवाद — माउंट आबू (सिरोही): यहाँ अरावली का ऊँचा भाग पवनों के मार्ग में आता है, अतः अरब सागरीय शाखा से पर्वतीय (orographic) वर्षा होती है। इसी कारण माउंट आबू राज्य का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।

(B) बंगाल की खाड़ी शाखा

  • गंगा के मैदान से होकर पूर्व/दक्षिण-पूर्व दिशा से राजस्थान में प्रवेश करती है।
  • राजस्थान को सर्वाधिक वर्षा इसी शाखा से प्राप्त होती है — विशेषकर हाड़ौती, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी जिलों में।
  • पूर्व दिशा से आने के कारण इन पवनों को स्थानीय भाषा में ‘पुरवाई’ / ‘पुरवइया’ कहा जाता है।
  • पश्चिम की ओर बढ़ते-बढ़ते पवनों की नमी समाप्त होती जाती है, इसलिए वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती है।
आधारअरब सागर शाखाबंगाल की खाड़ी शाखा
प्रवेश दिशादक्षिण-पश्चिमपूर्व / दक्षिण-पूर्व
अरावली से संबंधसमानांतर — वर्षा कमलंबवत् प्रभाव — पूर्वी ढाल पर अधिक वर्षा
राजस्थान में योगदानकम (माउंट आबू अपवाद)सर्वाधिक
स्थानीय नाम—पुरवाई / पुरवइया

5. राजस्थान में मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताएँ

  1. मौसमी संकेंद्रण: वार्षिक वर्षा का लगभग 90% भाग जून के अंत से सितंबर के बीच प्राप्त होता है; जुलाई-अगस्त सर्वाधिक वर्षा वाले महीने हैं।
  2. दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर कमी: झालावाड़-बाँसवाड़ा में लगभग 90–100 सेमी, जबकि जैसलमेर में 10–15 सेमी के आसपास।
  3. 50 सेमी समवर्षा रेखा: यह रेखा मोटे तौर पर अरावली के साथ-साथ चलती है और राज्य को शुष्क पश्चिमी तथा आर्द्र पूर्वी भाग में बाँटती है।
  4. अनिश्चितता एवं परिवर्तनशीलता: वर्षा की परिवर्तनशीलता (Coefficient of Variation) पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक है — यहाँ एक वर्ष बाढ़ और अगले वर्ष अकाल संभव है।
  5. मूसलाधार व अल्पकालिक वर्षा: कम दिनों में तेज वर्षा होने से अपवाह अधिक और भूमि में रिसाव कम होता है।
  6. मानसून विच्छेद (Break in Monsoon): जुलाई-अगस्त में कई दिनों तक वर्षा रुक जाना, जिससे खरीफ फसलों को नमी-तनाव होता है।
  7. वर्षा के दिनों की संख्या: दक्षिण-पूर्व में सर्वाधिक तथा पश्चिम (जैसलमेर) में न्यूनतम।

6. पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा के 6 कारण

कारणव्याख्या
अरावली की दिशाअरब सागरीय पवनों के समानांतर — कोई अवरोध नहीं
समुद्र से दूरीबंगाल की खाड़ी शाखा पहुँचते-पहुँचते नमी खो देती है
उच्च तापमानगर्म भूमि से पवनों की सापेक्ष आर्द्रता घटती है, संघनन कठिन
धूल कणों की परतऊपरी वायुमंडल में धूल व शुष्क वायु वर्षा को बाधित करती है
वनस्पति का अभावस्थानीय संवहनीय वर्षा कम
अवरोधक पर्वत का अभावपश्चिमी भाग समतल रेतीला मैदान है

7. मानसून की वापसी (Withdrawal) कब और कैसे होती है?

मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से प्रारंभ होती है — यह पूरे भारत के लिए मानसून वापसी का प्रारंभ-बिंदु है। IMD की संशोधित सामान्य तिथि के अनुसार पश्चिमी राजस्थान से वापसी लगभग 17 सितंबर से शुरू होती है (पुरानी सामान्य तिथि 1 सितंबर थी)। सितंबर के अंत से अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े तक मानसून पूरे राजस्थान से लौट जाता है।

  • लौटता मानसून (Retreating Monsoon): उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीष्मकालीन निम्न दाब कमजोर होकर उच्च दाब में बदलता है, पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलने लगती हैं।
  • अक्टूबर की उमस (October Heat / क्वार की गर्मी): वापसी के समय आकाश साफ, तापमान ऊँचा और आर्द्रता अधिक होने से उमस भरी गर्मी।
  • वापसी के बाद राजस्थान में शीत ऋतु का आरंभ और रबी फसलों की बुवाई।
तथ्यआगमनवापसी
राजस्थान में दिशादक्षिण-पूर्व → उत्तर-पश्चिमउत्तर-पश्चिम (पश्चिमी राजस्थान) → दक्षिण-पूर्व
भारत के संदर्भ मेंसबसे अंत में पहुँचता हैसबसे पहले लौटता है
सामान्य तिथि (IMD 2020)पूरे राज्य/देश पर ~8 जुलाईपश्चिमी राजस्थान से ~17 सितंबर
परिणामखरीफ बुवाईरबी की तैयारी, अक्टूबर की उमस

8. मावठ — शीतकालीन वर्षा (मानसून से अलग)

शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी) में भूमध्यसागरीय पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) से उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में होने वाली हल्की वर्षा को ‘मावठ’ कहते हैं। यह रबी फसलों (गेहूँ, जौ, चना, सरसों) के लिए अत्यंत लाभदायक है, इसलिए इसे ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ (सुनहरी बूँदें) कहा जाता है। परीक्षा में ध्यान रखें — मावठ मानसूनी वर्षा नहीं है।

9. मानसून का राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • कृषि: राज्य के कुल बोए गए क्षेत्र का बड़ा भाग असिंचित है; मानसून की देरी से बाजरा-ग्वार की बुवाई प्रभावित होती है। देखें — राजस्थान की खरीफ, रबी व जायद फसलें।
  • सूखा व अकाल: पश्चिमी जिलों में बार-बार अकाल — मारवाड़ी लोकोक्ति ‘पग पूगल, धड़ कोटड़ै, बाहू बाड़मेर…’ में अकाल का स्थायी ठिकाना पश्चिमी राजस्थान (विशेषकर जैसलमेर) बताया गया है, जो इसी मानसूनी अनिश्चितता को दर्शाता है।
  • जल संसाधन: बाँधों का भराव और भूजल पुनर्भरण — देखें राजस्थान भूजल — Dark, Grey व White जोन।
  • पारंपरिक जल संरक्षण: टांका, कुंड, खड़ीन, जोहड़ — मानसूनी जल को संचित करने की प्रणालियाँ। देखें राजस्थान की जल संरक्षण प्रणालियाँ।
  • पशुपालन: चारागाहों की हरियाली मानसून पर निर्भर।

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • राजस्थान में मानसून दक्षिण-पश्चिमी मानसून है, जो जून के तीसरे-चौथे सप्ताह में दक्षिण-पूर्व से प्रवेश करता है।
  • IMD (2020) की नवीन सामान्य तिथि: पूरे देश पर मानसून 8 जुलाई; वापसी पश्चिमी राजस्थान से 17 सितंबर।
  • राजस्थान को सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से; स्थानीय नाम पुरवाई।
  • अरब सागर शाखा अरावली के समानांतर होने से पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा; अपवाद — माउंट आबू।
  • वार्षिक वर्षा का लगभग 90% मानसून काल (जून-सितंबर) में; जुलाई-अगस्त सबसे वर्षा वाले महीने।
  • 50 सेमी समवर्षा रेखा अरावली के लगभग साथ-साथ — शुष्क पश्चिम व आर्द्र पूर्व की विभाजक।
  • मानसून की वापसी सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान से — पूरे भारत का प्रारंभ-बिंदु।
  • मावठ = शीतकालीन वर्षा (पश्चिमी विक्षोभ) — ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ — मानसूनी नहीं।
  • वर्षा की परिवर्तनशीलता पश्चिम में सर्वाधिक, वर्षा की मात्रा पश्चिम में न्यूनतम।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. ‘राजस्थान को सर्वाधिक वर्षा अरब सागर शाखा से’ — गलत। सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से। केवल माउंट आबू में अरब सागरीय शाखा प्रभावी।
  2. मावठ को मानसून मानना — मावठ पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली शीतकालीन वर्षा है।
  3. पुरानी व नई तिथियों में भ्रम — 15 जुलाई (पुरानी) बनाम 8 जुलाई (IMD 2020); वापसी 1 सितंबर (पुरानी) बनाम 17 सितंबर (नई)।
  4. वापसी पूर्व से शुरू मानना — वापसी सदैव पश्चिमी राजस्थान से शुरू होती है।
  5. ‘अरावली के कारण पश्चिम में वर्षा नहीं’ को ‘अरावली पवनों को रोकती है’ समझ लेना — वास्तव में अरावली समानांतर होने से रोक नहीं पाती।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“देर से आए, जल्दी जाए — पश्चिम सूखा, पूरब नहाए” — मानसून राजस्थान में सबसे देर से आता है, सबसे पहले (पश्चिम से) लौटता है, और वर्षा पूर्व में अधिक, पश्चिम में कम।

“बंगाल बरसे, अरब तरसे (आबू छोड़)” — बंगाल की खाड़ी शाखा से अधिक वर्षा; अरब सागर शाखा से कम, केवल आबू अपवाद।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

मानसून के प्रश्न RAS Pre और CET दोनों में ‘कारण-आधारित’ पूछे जाते हैं — जैसे ‘पश्चिमी राजस्थान में अरब सागरीय शाखा से वर्षा कम क्यों?’ उत्तर की कुंजी एक शब्द है: समानांतर। दूसरा प्रिय प्रश्न है ‘राजस्थान को सर्वाधिक वर्षा किस शाखा से?’ — बंगाल की खाड़ी। तीसरा, IMD की संशोधित तिथियाँ नए पैटर्न में पूछी जा रही हैं, इसलिए 8 जुलाई और 17 सितंबर को एक कार्ड पर लिखकर रखें। Mains में उत्तर लिखते समय अरावली, समुद्र से दूरी और उच्च तापमान — तीनों कारण एक साथ लिखें, अंक पूरे मिलेंगे।

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) — मानसून आगमन/वापसी की संशोधित सामान्य तिथियाँ (2020) एवं मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर की बुलेटिन।
  • डॉ. हरिमोहन सक्सेना — ‘राजस्थान का भूगोल’, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी।
  • NCERT कक्षा 11 — ‘भारत: भौतिक पर्यावरण’, अध्याय ‘जलवायु’।
  • RPSC RAS एवं RSMSSB की विगत परीक्षाओं के भूगोल खंड का विश्लेषण।

Author Byline

लेखक: महेंद्र ढाका (भूगोल विशेषज्ञ), सुयोग अकादमी

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd)

विषय: राजस्थान में मानसून: आगमन, वापसी एवं वर्षा वितरण

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC प्राध्यापक/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET (स्नातक/12वीं), पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: मानसून की तिथियाँ प्रत्येक वर्ष बदलती हैं; यहाँ IMD की ‘सामान्य तिथियाँ’ दी गई हैं। किसी विशेष वर्ष का प्रश्न हो तो उस वर्ष की IMD प्रेस विज्ञप्ति को प्राथमिकता दें।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026 — जिलों के नाम दिसंबर 2024 के पुनर्गठन (41 जिले) के अनुसार।

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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महेंद्र सरभूगोल विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राजस्थान को सर्वाधिक वर्षा किस मानसूनी शाखा से प्राप्त होती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. अरब सागरीय मानसून से पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा का मुख्य कारण क्या है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. राजस्थान में मानसून की वापसी सबसे पहले किस भाग से होती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. ‘मावठ’ का संबंध है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. राजस्थान में मानसूनी पवनों को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान में सबसे पहले दक्षिण-पूर्वी जिलों — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ व झालावाड़ — में सामान्यतः जून के तीसरे-चौथे सप्ताह में प्रवेश करता है।

बंगाल की खाड़ी शाखा से। पूर्व दिशा से आने के कारण इन पवनों को स्थानीय भाषा में ‘पुरवाई’ कहा जाता है।

क्योंकि अरब सागरीय पवनें अरावली पर्वतमाला के समानांतर चलती हैं, अरावली इन्हें रोककर ऊपर नहीं उठा पाती, इसलिए संघनन और वर्षा कम होती है। केवल माउंट आबू में पर्वतीय वर्षा होती है।

IMD की संशोधित (2020) सामान्य तिथि के अनुसार मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से लगभग 17 सितंबर से शुरू होती है।

शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभों से उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में होने वाली हल्की वर्षा को मावठ कहते हैं। रबी फसलों के लिए लाभदायक होने से इसे ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ कहा जाता है। यह मानसूनी वर्षा नहीं है।

राजस्थान की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 90% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून काल (जून के अंत से सितंबर) में प्राप्त होता है।

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