राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्ग व एक्सप्रेसवे — पुराने-नए NH नंबर — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: राजस्थान में सड़कें प्रशासनिक रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), राज्य राजमार्ग (SH), मुख्य जिला सड़क (MDR), अन्य जिला सड़क (ODR) और ग्रामीण सड़क (VR) में बँटी हैं। 2010 में केंद्र (MoRTH) ने NH की नई क्रमांकन प्रणाली अपनाई — उत्तर-दक्षिण राजमार्गों को सम (even) और पूर्व-पश्चिम राजमार्गों को विषम (odd) संख्या मिली। इसी कारण पुराना NH-8 (दिल्ली–जयपुर–अजमेर–उदयपुर) अब NH-48, पुराना NH-15 (श्रीगंगानगर–बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर) अब NH-62, और पुराने NH-11/12 के हिस्से अब NH-52 तथा NH-21/NH-11 कहलाते हैं। NH-27 (पोरबंदर–सिलचर, पूर्व-पश्चिम गलियारा) सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां से गुजरता है। परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार NH-62 राजस्थान में सबसे लंबा NH है। भारतमाला परियोजना (2017) के अंतर्गत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे — जिसकी सबसे लंबी लंबाई (लगभग 370+ km) राजस्थान में है और जिसका दिल्ली–दौसा–लालसोट खंड 12 फ़रवरी 2023 को खुला — तथा अमृतसर–जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर (हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर) राज्य की दो सबसे बड़ी नई सड़क परियोजनाएँ हैं। ग्रामीण सड़कों के लिए PMGSY (25 दिसंबर 2000) और राज्य स्तर पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) व RSRDC प्रमुख हैं।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | तथ्य | याद रखने योग्य संकेत |
|---|---|---|
सड़क श्रेणियाँ | NH, SH, MDR, ODR, VR | नागपुर योजना (1943) से चला वर्गीकरण |
NH नई क्रमांकन प्रणाली | 2010 (MoRTH अधिसूचना) | उत्तर-दक्षिण = सम, पूर्व-पश्चिम = विषम |
NH-48 (पुराना NH-8) | दिल्ली–जयपुर–अजमेर/किशनगढ़–उदयपुर–अहमदाबाद–मुंबई–चेन्नई | स्वर्णिम चतुर्भुज की दिल्ली–मुंबई भुजा |
NH-62 (पुराना NH-15) | श्रीगंगानगर–बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर | पुस्तकों के अनुसार राजस्थान का सबसे लंबा NH |
NH-52 (पुराने NH-11/12 के भाग) | सीकर–जयपुर–टोंक–बूंदी–कोटा–झालावाड़ | उत्तर-दक्षिण, इसलिए सम संख्या |
NH-27 | पोरबंदर–सिलचर; राजस्थान में सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां | पूर्व-पश्चिम गलियारा |
NH-21 | जयपुर–दौसा–भरतपुर–आगरा | पुराने NH-11 का जयपुर–आगरा भाग |
NH-44 (पुराना NH-3/7) | श्रीनगर–कन्याकुमारी; राजस्थान में केवल धौलपुर से | भारत का सबसे लंबा NH |
भारतमाला परियोजना | चरण-I की स्वीकृति 2017 | आर्थिक गलियारे, सीमा सड़कें, एक्सप्रेसवे |
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे | पहला खंड दिल्ली–दौसा–लालसोट, 12 फ़रवरी 2023 | सबसे लंबा हिस्सा राजस्थान में |
अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर | हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर | पश्चिमी राजस्थान का आर्थिक गलियारा |
PMGSY | 25 दिसंबर 2000 | बसावटों को बारहमासी सड़क |
राज्य की निर्माण एजेंसियाँ | PWD, RSRDC, RIDCOR | NH के लिए NHAI / PWD (NH खंड) |
राज्य राजमार्ग कानून | राजस्थान राज्य राजमार्ग अधिनियम, 2014 | राज्य राजमार्ग प्राधिकरण का आधार |
2. इस नोट का दायरा और सिलेबस में महत्व
RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा तथा राजस्थान CET के भूगोल खंड में "परिवहन" एक स्थायी उप-विषय है। सामान्य परिवहन-तंत्र (सड़क, रेल, वायु का समग्र परिचय) के लिए राजस्थान का परिवहन तंत्र नोट देखें। यह नोट केवल सड़क परिवहन — विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों के पुराने-नए नंबर, गलियारे (corridors) और एक्सप्रेसवे — पर गहराई से केंद्रित है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆
RAS प्रारंभिक — "निम्न में से कौन-सा NH राजस्थान से नहीं गुजरता?", पुराने-नए नंबर का सुमेलन
RAS मुख्य — भारतमाला/एक्सप्रेसवे का राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (विश्लेषणात्मक)
राजस्थान CET, पटवारी, VDO — "दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे का पहला खंड", "PMGSY कब शुरू हुई"
SI, REET — एक-पंक्ति तथ्य: NH-27 किन जिलों से, NH-62 का पुराना नंबर
प्रश्न कैसे आते हैं?
पुराने व नए NH नंबर का सुमेलन (NH-8 → NH-48, NH-15 → NH-62)।
किसी NH का मार्ग — "NH-27 राजस्थान के किन जिलों से गुजरता है?"
एक्सप्रेसवे — किन जिलों से, पहला खंड कब खुला, किस परियोजना के अंतर्गत।
संस्थाएँ — RSRDC, NHAI, PWD की भूमिका; PMGSY का वर्ष।
कथन-आधारित — "निम्न में से कौन-सा सही नहीं है"।
3. सड़कों का वर्गीकरण और सड़क विकास योजनाएँ
3.1 भारत की सड़क योजनाएँ (पृष्ठभूमि)
योजना | अवधि | महत्व |
|---|---|---|
नागपुर योजना | 1943 (1943–63) | भारत की पहली सड़क विकास योजना; सड़कों का NH, SH, MDR, ODR, VR में वर्गीकरण |
बंबई योजना (दूसरी 20-वर्षीय) | 1961–81 | सड़क लंबाई के लक्ष्य बढ़ाए गए |
लखनऊ योजना (तीसरी 20-वर्षीय) | 1981–2001 | ग्रामीण संपर्क पर बल; एक्सप्रेसवे की अवधारणा |
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) | 1998–99 से | स्वर्णिम चतुर्भुज, उत्तर-दक्षिण व पूर्व-पश्चिम गलियारे |
भारतमाला परियोजना | चरण-I स्वीकृति 2017 | NHDP के आगे की छत्र-योजना; आर्थिक गलियारे, एक्सप्रेसवे |
3.2 सड़कों की श्रेणियाँ — कौन बनाता, कौन जोड़ता
श्रेणी | क्या जोड़ती है | उत्तरदायी संस्था | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) | राज्यों की राजधानियाँ, बड़े नगर, बंदरगाह, सीमा क्षेत्र | केंद्र — MoRTH; निर्माण NHAI / राज्य PWD (NH खंड) / NHIDCL | कुल लंबाई में छोटा हिस्सा, पर यातायात का बड़ा भाग |
राज्य राजमार्ग (SH) | राजधानी जयपुर को जिला मुख्यालयों से; जिलों को NH से | राज्य सरकार — PWD, RSRDC, RIDCOR | राज्य राजमार्ग अधिनियम 2014 के दायरे में |
मुख्य जिला सड़क (MDR) | जिला मुख्यालय को तहसील/उत्पादन-विपणन केंद्रों से | राज्य PWD | मंडी व कस्बों का संपर्क |
अन्य जिला सड़क (ODR) | ग्रामीण उत्पादन क्षेत्रों को बाज़ार/MDR से | PWD / पंचायती राज संस्थाएँ | MDR व ग्रामीण सड़क के बीच की कड़ी |
ग्रामीण सड़क (VR) | गाँवों/बसावटों को निकटतम सड़क से | PMGSY, राज्य योजनाएँ, पंचायत | कुल सड़क लंबाई में सबसे बड़ा हिस्सा |
ध्यान दें: सीमावर्ती क्षेत्रों (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर) में सीमा सड़क संगठन (BRO) और भारतमाला की सीमा सड़कें भी महत्त्वपूर्ण हैं। राजस्थान की पाकिस्तान सीमा के लिए राजस्थान की अंतर्राष्ट्रीय व अंतर्राज्यीय सीमा नोट देखें।
ट्रिक — "NaSa MaO Village": NH → SH → MDR → ODR → VR (ऊपर से नीचे का क्रम)।
4. NH की नई क्रमांकन प्रणाली (2010) — पुराने बनाम नए नंबर
4.1 नियम
पुरानी प्रणाली में NH नंबर लगभग उसी क्रम में दिए गए थे जिस क्रम में राजमार्ग घोषित हुए — इसलिए नंबर से दिशा का पता नहीं चलता था। 2010 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भौगोलिक दिशा पर आधारित तर्कसंगत क्रमांकन (rationalised numbering) अधिसूचित किया:
उत्तर-दक्षिण दिशा के मुख्य राजमार्ग — सम संख्या; संख्या पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ती है (उदा. पूर्वोत्तर में छोटी, पश्चिमी तट की ओर बड़ी)।
पूर्व-पश्चिम दिशा के मुख्य राजमार्ग — विषम संख्या; संख्या उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती है।
मुख्य राजमार्ग 1 या 2 अंकों वाले; उनसे निकलने वाली शाखाएँ 3 अंकों की (पहले के अंक मूल राजमार्ग बताते हैं — जैसे 148, 248, 448 आदि NH-48 से जुड़ी शाखाएँ), और उप-शाखाओं पर A, B, C आदि प्रत्यय।
ट्रिक — "सीधा खड़ा = सम, लेटा = विषम": उत्तर-दक्षिण (खड़ी रेखा) राजमार्ग सम, पूर्व-पश्चिम (लेटी रेखा) विषम। NH-48, 52, 62 सम → उत्तर-दक्षिण; NH-27, 11, 21 विषम → पूर्व-पश्चिम।
4.2 राजस्थान के प्रमुख NH — पुराना बनाम नया नंबर
नया नंबर | पुराना नंबर (मुख्य भाग) | राजस्थान में मुख्य मार्ग | दिशा |
|---|---|---|---|
NH-48 | NH-8 (+ स्वर्णिम चतुर्भुज के जोड़ने वाले खंड) | शाहजहाँपुर (कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र)–जयपुर–किशनगढ़–उदयपुर–रतनपुर (गुजरात सीमा) | उत्तर-दक्षिण |
NH-62 | NH-15 (मुख्य भाग) | श्रीगंगानगर–बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर और आगे दक्षिण | उत्तर-दक्षिण |
NH-52 | NH-11 व NH-12 के भाग (उत्तर में NH-65 का भाग भी) | (हरियाणा सीमा)–सीकर–जयपुर–टोंक–बूंदी–कोटा–झालावाड़ | उत्तर-दक्षिण |
NH-27 | पूर्व-पश्चिम गलियारे के खंड (पुराने NH-14, 76 आदि के भाग) | स्वरूपगंज/पिंडवाड़ा (सिरोही)–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां | पूर्व-पश्चिम |
NH-21 | NH-11 (जयपुर–आगरा भाग) | जयपुर–दौसा–(महुवा)–भरतपुर–आगरा | पूर्व-पश्चिम |
NH-11 | NH-11 व NH-15 के कुछ भाग | शेखावाटी (फतेहपुर क्षेत्र)–बीकानेर–जैसलमेर (सामान्यतः) | पूर्व-पश्चिम |
NH-44 | NH-3 (आगरा–ग्वालियर भाग) व NH-7 | केवल धौलपुर जिले से छोटा खंड | उत्तर-दक्षिण |
सावधानी: 2010 के बाद कई पुराने राजमार्ग टुकड़ों में बँटकर अलग-अलग नए नंबरों में चले गए, और नए NH घोषित भी होते रहे। इसलिए "पुराना X = नया Y" का संबंध प्रायः मुख्य भाग के लिए सही होता है, पूरी लंबाई के लिए नहीं। परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले जोड़े हैं — NH-8 → NH-48, NH-15 → NH-62, NH-11/12 → NH-52 (और NH-21), NH-3/7 → NH-44।
5. राजस्थान से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग — विस्तार से
5.1 NH-48 (पुराना NH-8) — राजस्थान की "आर्थिक धमनी"
पूरा मार्ग: दिल्ली–गुरुग्राम–जयपुर–अजमेर (किशनगढ़)–उदयपुर–अहमदाबाद–वडोदरा–सूरत–मुंबई–पुणे–बेंगलुरु–चेन्नई। यह स्वर्णिम चतुर्भुज की दिल्ली–मुंबई भुजा का वाहक है।
राजस्थान में: हरियाणा से शाहजहाँपुर (कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र) के पास प्रवेश → कोटपूतली → शाहपुरा → जयपुर → किशनगढ़ → दक्षिण में उदयपुर → रतनपुर (डूंगरपुर जिला) के पास गुजरात में प्रवेश।
संरेखण पर नोट: परीक्षा-पुस्तकें मार्ग को प्रायः "दिल्ली–जयपुर–अजमेर–उदयपुर–अहमदाबाद" लिखती हैं (पुराने NH-8 के अनुसार, जो ब्यावर–राजसमंद क्षेत्र होकर उदयपुर जाता था)। स्वर्णिम चतुर्भुज का 4/6-लेन संरेखण किशनगढ़ से भीलवाड़ा–चित्तौड़गढ़ होकर उदयपुर पहुँचता है। प्रश्न में "जयपुर, अजमेर (किशनगढ़), उदयपुर" वाले विकल्प को ही सामान्यतः सही माना जाता है।
महत्व: जयपुर–दिल्ली औद्योगिक पट्टी (नीमराना, भिवाड़ी के निकट क्षेत्र), किशनगढ़ मार्बल मंडी, उदयपुर के खनिज-पर्यटन क्षेत्र को बंदरगाहों (गुजरात/मुंबई) से जोड़ता है। राज्य के उद्योगों के लिए राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र नोट देखें।
जयपुर–किशनगढ़ खंड: इस खंड को निजी-सार्वजनिक भागीदारी से 6-लेन में विकसित किया गया था; कई पुस्तकें इसे "राजस्थान का पहला 6-लेन राजमार्ग खंड" कहती हैं (स्रोतों में भिन्नता संभव)।
5.2 NH-62 (पुराना NH-15) — पश्चिमी सीमांत का राजमार्ग
मार्ग (सामान्य रूप में): पंजाब (अबोहर) की ओर से श्रीगंगानगर → सूरतगढ़ → बीकानेर → जैसलमेर (पोकरण क्षेत्र) → बाड़मेर → आगे दक्षिण की ओर (सांचौर/सिरोही क्षेत्र)।
विशेषता: परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार यह राजस्थान में सबसे अधिक लंबाई वाला राष्ट्रीय राजमार्ग है (पहले यही स्थान पुराने NH-15 को दिया जाता था)। सटीक किलोमीटर स्रोतों में अलग-अलग दिए गए हैं, इसलिए परीक्षा में केवल "सबसे लंबा = NH-62 (पुराना NH-15)" याद रखें।
महत्व: थार मरुस्थल व पाकिस्तान सीमा के समानांतर पश्चिमी जिलों को जोड़ता है — सामरिक (रक्षा), खनिज (बाड़मेर का तेल-गैस, जैसलमेर का चूना पत्थर) और IGNP क्षेत्र की कृषि उपज के लिए अहम।
5.3 NH-52 — उत्तर से हाड़ौती तक
पूरा मार्ग: पंजाब (संगरूर) से कर्नाटक (अंकोला) तक का लंबा उत्तर-दक्षिण राजमार्ग।
राजस्थान में: हरियाणा (हिसार) की ओर से चूरू जिले (राजगढ़/सादुलपुर क्षेत्र) में प्रवेश → शेखावाटी (फतेहपुर–सीकर) → रींगस → जयपुर → टोंक → बूंदी → कोटा → झालावाड़ (अकलेरा क्षेत्र) → मध्य प्रदेश।
पुराना संबंध: जयपुर–कोटा–झालावाड़ भाग पहले NH-12 था, सीकर–जयपुर भाग पहले NH-11 का अंग था। उत्तरी छोर के विवरण पुस्तकों में भिन्न हैं।
5.4 NH-27 — पूर्व-पश्चिम गलियारा (पोरबंदर–सिलचर)
पूरा मार्ग: गुजरात के पोरबंदर से असम के सिलचर तक — देश का पूर्व-पश्चिम गलियारा (East–West Corridor)।
राजस्थान में: गुजरात (पालनपुर) की ओर से सिरोही जिले (आबूरोड–स्वरूपगंज–पिंडवाड़ा) में प्रवेश → उदयपुर → चित्तौड़गढ़ → कोटा → बारां → मध्य प्रदेश (शिवपुरी)।
कोटा का हैंगिंग ब्रिज: कोटा बाईपास पर चंबल नदी के ऊपर बना केबल-स्टेड पुल इसी NH-27 पर है; यह राजस्थान के प्रसिद्ध पुलों में गिना जाता है। चंबल के लिए चंबल नदी नोट देखें।
मिलन क्षेत्र: उदयपुर–चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में पूर्व-पश्चिम गलियारा और स्वर्णिम चतुर्भुज (NH-48 संरेखण) एक-दूसरे के निकट आते हैं — इसलिए यह क्षेत्र राज्य का बड़ा सड़क-जंक्शन है।
5.5 अन्य उल्लेखनीय NH
NH | राजस्थान में मार्ग | परीक्षा-बिंदु |
|---|---|---|
NH-21 | जयपुर–दौसा–भरतपुर–आगरा | "गोल्डन ट्रायंगल" पर्यटन परिपथ (दिल्ली–आगरा–जयपुर) का जयपुर–आगरा भाग |
NH-11 | शेखावाटी–बीकानेर–जैसलमेर (सामान्यतः) | विषम = पूर्व-पश्चिम; मरुस्थलीय जिलों का संपर्क |
NH-44 | धौलपुर (आगरा–ग्वालियर के बीच) | भारत का सबसे लंबा NH; राजस्थान में बहुत छोटा खंड; उत्तर-दक्षिण गलियारा |
तीन-अंकीय शाखाएँ | जैसे NH-48/52/62/27 से निकली अनेक शाखाएँ | पहला अंक जोड़कर मूल राजमार्ग पहचानें |
(राजस्थान में घोषित NH की कुल संख्या और लंबाई समय-समय पर नई घोषणाओं से बदलती रहती है — MoRTH/राज्य सरकार के हालिया आँकड़ों के अनुसार राज्य में NH की लंबाई 10,000 km से अधिक है और NH लंबाई के मामले में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में है। सटीक संख्या के लिए परीक्षा-वर्ष की आर्थिक समीक्षा देखें।)
6. स्वर्णिम चतुर्भुज, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारे
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) के प्रथम-द्वितीय चरणों में देश के चार महानगरों को जोड़ने वाला स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) तथा उसे काटते हुए दो गलियारे बनाए गए। इनका क्रियान्वयन मुख्यतः NHAI ने किया।
परियोजना | छोर | राजस्थान में | वर्तमान NH |
|---|---|---|---|
स्वर्णिम चतुर्भुज | दिल्ली–मुंबई–चेन्नई–कोलकाता | दिल्ली–मुंबई भुजा: कोटपूतली–जयपुर–किशनगढ़–भीलवाड़ा–चित्तौड़गढ़–उदयपुर | NH-48 |
उत्तर-दक्षिण गलियारा | श्रीनगर–कन्याकुमारी | केवल धौलपुर (आगरा–ग्वालियर के बीच) | NH-44 |
पूर्व-पश्चिम गलियारा | पोरबंदर–सिलचर | सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां | NH-27 |
ट्रिक — "चित्तौड़ का चौराहा": स्वर्णिम चतुर्भुज (उत्तर-दक्षिण दिशा में) और पूर्व-पश्चिम गलियारा — दोनों उदयपुर–चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से गुजरते हैं। उत्तर-दक्षिण गलियारा केवल धौलपुर को "छूता" है।
परीक्षा-जाल: "राजस्थान स्वर्णिम चतुर्भुज, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम — तीनों से जुड़ा है" — यह कथन सही है, क्योंकि धौलपुर से उत्तर-दक्षिण गलियारा (NH-44) गुजरता है। कई अभ्यर्थी धौलपुर भूलकर इसे गलत मान लेते हैं।
7. भारतमाला परियोजना और राजस्थान
भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार (MoRTH) की राजमार्ग विकास की छत्र-योजना (umbrella programme) है, जिसके चरण-I को 2017 में स्वीकृति मिली। इसने NHDP के शेष कार्यों को भी अपने में समाहित किया।
7.1 घटक
आर्थिक गलियारे (Economic Corridors) — जैसे अमृतसर–जामनगर
अंतर-गलियारा व फीडर मार्ग — गलियारों को आपस में और जिलों से जोड़ना
राष्ट्रीय गलियारा दक्षता सुधार — भीड़भाड़ वाले बिंदुओं पर बाईपास, रिंग रोड
सीमा व अंतर्राष्ट्रीय संपर्क सड़कें — राजस्थान में पाकिस्तान सीमा के समानांतर सड़कें
तटीय व बंदरगाह संपर्क सड़कें (राजस्थान पर लागू नहीं, पर राज्य के माल को बंदरगाह तक पहुँचाने में सहायक)
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे — जैसे दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे
7.2 राजस्थान के लिए महत्व
राज्य दिल्ली (उत्तर) और गुजरात के बंदरगाहों (कांडला, मुंद्रा, जामनगर क्षेत्र) के बीच स्थित है — इसलिए अधिकांश बड़े गलियारे राजस्थान से होकर ही गुजरते हैं।
पश्चिमी जिलों (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर) में सीमा-सड़कें सामरिक दृष्टि से अहम; साथ ही सौर व पवन ऊर्जा पार्कों तक भारी उपकरण ले जाने में सहायक। ऊर्जा परियोजनाओं के लिए राजस्थान की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ देखें।
लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक नोड और मंडियों के लिए नए अवसर।
8. दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे
8.1 मुख्य तथ्य
बिंदु | तथ्य |
|---|---|
परियोजना | भारतमाला परियोजना के अंतर्गत; निर्माण NHAI द्वारा |
कुल लंबाई | लगभग 1,350–1,390 km (स्रोतों में भिन्न) — देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे |
राज्य | दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र |
राजस्थान का हिस्सा | सभी राज्यों में सबसे अधिक — लगभग 370+ km |
लेन | 8-लेन (भविष्य में विस्तार की गुंजाइश के साथ) |
पहला चालू खंड | दिल्ली (सोहना)–दौसा–लालसोट — प्रधानमंत्री द्वारा 12 फ़रवरी 2023 को दौसा से लोकार्पण |
प्रकृति | ग्रीनफील्ड, पहुँच-नियंत्रित (access-controlled) |
8.2 राजस्थान में मार्ग
एक्सप्रेसवे हरियाणा (नूंह) की ओर से अलवर जिले में प्रवेश करता है, फिर दौसा और लालसोट होकर सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा क्षेत्र से गुजरते हुए मध्य प्रदेश (मंदसौर की ओर) में जाता है। कुछ स्रोत संरेखण में भरतपुर और टोंक जिलों के छोटे हिस्से भी गिनाते हैं; झालावाड़ के बारे में स्रोत एकमत नहीं हैं। परीक्षा के लिए सुरक्षित सूची: अलवर–दौसा–सवाई माधोपुर–बूंदी–कोटा।
जयपुर से जुड़ाव: जयपुर मुख्य एक्सप्रेसवे पर नहीं है; उसे बांदीकुई (दौसा)–जयपुर लिंक मार्ग से जोड़ा गया है (हालिया जानकारी के अनुसार यह लिंक उपयोग में है)।
वन्यजीव संवेदनशीलता: मार्ग रणथंभौर और मुकुंदरा हिल्स के आसपास के वन क्षेत्रों के निकट से गुजरता है; इसलिए यहाँ पशु-मार्ग (animal overpasses/underpasses) और मुकुंदरा पहाड़ियों में सुरंग का प्रावधान किया गया। (सुरंग की लंबाई व पूर्णता-तिथि के आँकड़े स्रोतों में भिन्न हैं; हालिया जानकारी के अनुसार कोटा क्षेत्र के कुछ खंडों पर कार्य चरणबद्ध रूप से पूरा हो रहा है।) इन संरक्षित क्षेत्रों के लिए राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान नोट देखें।
8.3 स्थिति कैसे लिखें
एक्सप्रेसवे के खंड अलग-अलग तिथियों पर खुले हैं और कुछ पर कार्य जारी रहा है। परीक्षा-उत्तर में सुरक्षित भाषा: "दिल्ली–दौसा–लालसोट खंड फ़रवरी 2023 में खुला; हालिया जानकारी के अनुसार राजस्थान का अधिकांश भाग चालू है तथा शेष खंडों पर कार्य चरणबद्ध रूप से पूरा किया जा रहा है।" किसी निश्चित "पूर्णता-तिथि" को रटने से बचें।
8.4 राजस्थान पर प्रभाव
दिल्ली–जयपुर/दौसा और दिल्ली–कोटा यात्रा-समय में बड़ी कमी।
दौसा, लालसोट, सवाई माधोपुर, बूंदी जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, होटल व सड़क-किनारे सुविधाओं का विकास।
रणथंभौर व बूंदी–कोटा पर्यटन को बढ़ावा — देखें राजस्थान के पर्यटन परिपथ।
चुनौतियाँ — भूमि अधिग्रहण, वन्यजीव गलियारों पर दबाव, स्थानीय सड़कों से संपर्क (interchanges) सीमित।
ट्रिक — "अदा सबको" (अ-द-स-ब-को): अलवर–दौसा–सवाई माधोपुर–बूंदी–कोटा = दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के राजस्थानी जिले; "12-02-23 दौसा" = पहले खंड का लोकार्पण।
9. अमृतसर–जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर
परियोजना: भारतमाला के अंतर्गत आर्थिक गलियारा — पंजाब (अमृतसर) से गुजरात (जामनगर) तक; पंजाब, हरियाणा (छोटा भाग), राजस्थान और गुजरात से गुजरता है। कुल लंबाई लगभग 1,250 km के आसपास बताई जाती है (स्रोतों में भिन्न)।
राजस्थान में मार्ग: हनुमानगढ़ (उत्तर में प्रवेश) → बीकानेर → जोधपुर (फलोदी क्षेत्र के निकट होकर) → बाड़मेर → जालौर → गुजरात। कुछ स्रोत श्रीगंगानगर/नागौर का भी उल्लेख करते हैं।
राजस्थान का हिस्सा: इस गलियारे का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में है।
स्थिति: हालिया जानकारी के अनुसार 2023 में राजस्थान खंड के बड़े भाग का लोकार्पण (बीकानेर से) किया गया; शेष भागों/जुड़ावों पर कार्य चरणबद्ध रहा है।
महत्व: पंजाब-हरियाणा-उत्तर राजस्थान की कृषि उपज, बीकानेर-नागौर का खनिज (जिप्सम, लिग्नाइट), बाड़मेर का पेट्रोलियम-रिफाइनरी क्षेत्र (पचपदरा) और गुजरात के जामनगर (रिफाइनरी) व कांडला-मुंद्रा बंदरगाहों के बीच सीधा संपर्क। बाड़मेर बेसिन के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नोट देखें।
ट्रिक — "हबी जोबाजा" (ह-बी-जो-बा-जा): हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर = अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर। उत्तर से दक्षिण-पश्चिम की ओर — पूरा पश्चिमी राजस्थान।
9.1 दोनों बड़ी परियोजनाओं की तुलना
आधार | दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे | अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर |
|---|---|---|
राजस्थान का भाग | पूर्वी राजस्थान | पश्चिमी राजस्थान |
प्रमुख जिले | अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा | हनुमानगढ़, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर |
दिशा (राजस्थान में) | उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व | उत्तर से दक्षिण-पश्चिम |
प्रमुख वर्ष | पहला खंड फ़रवरी 2023 | राजस्थान खंड का बड़ा भाग 2023 |
मुख्य लाभ | दिल्ली–मुंबई औद्योगिक संपर्क, पर्यटन | कृषि, खनिज, पेट्रोलियम, बंदरगाह संपर्क |
परियोजना-छत्र | भारतमाला; सबसे बड़ा राज्य-हिस्सा राजस्थान का | भारतमाला; सबसे बड़ा राज्य-हिस्सा राजस्थान का |
10. अन्य एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और प्रस्तावित परियोजनाएँ
राज्य के प्रस्तावित एक्सप्रेसवे/ग्रीनफील्ड मार्ग: राज्य सरकार ने हाल के बजटों (2024-25 के आसपास) में कई नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे/हाई-स्पीड कॉरिडोर की घोषणा की है। इनके नाम, संरेखण और स्थिति बदलते रहते हैं, इसलिए परीक्षा से पहले नवीनतम राज्य बजट/आर्थिक समीक्षा अवश्य देखें; इन्हें "पूर्ण" परियोजना के रूप में न लिखें।
कोटा–जयपुर, जयपुर–जोधपुर जैसे मार्ग: इन पर उच्च-क्षमता सड़कों के प्रस्ताव समय-समय पर चर्चा में रहे हैं; परीक्षा में इन्हें "प्रस्तावित/विचाराधीन" ही मानें।
रिंग रोड: जयपुर की रिंग रोड (दक्षिणी भाग चालू) शहर के बाहरी यातायात को NH-48, NH-52 और NH-21 के बीच मोड़ने के लिए बनी है; उत्तरी भाग पर कार्य/योजना हालिया जानकारी के अनुसार प्रक्रिया में रही है।
बाईपास: कोटा, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर जैसे नगरों पर NH बाईपास — भारतमाला के "गलियारा दक्षता सुधार" घटक के उदाहरण।
11. सड़क क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएँ
संस्था | स्तर व स्थापना | भूमिका |
|---|---|---|
MoRTH (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) | केंद्र | NH नीति, घोषणा, क्रमांकन (2010), भारतमाला |
NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) | केंद्र; अधिनियम 1988, कार्यरत 1995 से | स्वर्णिम चतुर्भुज, गलियारे, दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे |
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), राजस्थान | राज्य | SH, MDR, ODR, ग्रामीण सड़कें; कुछ NH खंडों का रख-रखाव (NH विंग) |
RSRDC (राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम) | राज्य उपक्रम; मूलतः 1979 में "राजस्थान राज्य पुल एवं निर्माण निगम" के रूप में, बाद में नाम परिवर्तन | सड़क, पुल, ROB (रेल ओवरब्रिज), भवन निर्माण |
RIDCOR (रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी ऑफ़ राजस्थान) | राज्य सरकार की संयुक्त उद्यम कंपनी (2000 के दशक में) | मेगा हाईवे/राज्य राजमार्गों का PPP-आधार पर विकास |
राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण | राजस्थान राज्य राजमार्ग अधिनियम, 2014 के अंतर्गत | राज्य राजमार्गों का नियमन, अतिक्रमण-नियंत्रण, टोल व्यवस्था |
RSRTC (राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम — "रोडवेज") | 1 अक्टूबर 1964 | यात्री बस सेवा (सड़क बनाता नहीं, चलाता है) |
सावधानी: RSRDC और RSRTC के नाम मिलते-जुलते हैं — RSRDC = Development/Construction (निर्माण), RSRTC = Transport (बस सेवा)। RSRDC की स्थापना-वर्ष व नाम-परिवर्तन के वर्ष पुस्तकों में अलग-अलग मिलते हैं; "1979, मूल नाम पुल एवं निर्माण निगम" सबसे प्रचलित उत्तर है।
12. ग्रामीण सड़कें: PMGSY और राज्य योजनाएँ
12.1 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
प्रारंभ: 25 दिसंबर 2000 — केंद्र प्रायोजित योजना (ग्रामीण विकास मंत्रालय)।
उद्देश्य: संपर्क-विहीन बसावटों को बारहमासी (all-weather) सड़क से जोड़ना। मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या-सीमा अधिक और मरुस्थलीय, पहाड़ी व जनजातीय क्षेत्रों में कम रखी गई — राजस्थान के मरु व TSP क्षेत्रों को इसका विशेष लाभ मिला।
आगे के चरण: PMGSY-II (सड़क उन्नयन), RCPLWEA (वामपंथी उग्रवाद क्षेत्र — राजस्थान पर सीधे लागू नहीं), PMGSY-III (ग्रामीण कृषि बाज़ार, स्कूल, अस्पताल तक मार्ग)।
राजस्थान: बड़े क्षेत्रफल और बिखरी "ढाणी" बस्तियों के कारण राजस्थान PMGSY के बड़े लाभार्थी राज्यों में है; राज्य सरकार के आँकड़ों के अनुसार अधिकांश पात्र बसावटें जोड़ी जा चुकी हैं (सटीक प्रतिशत के लिए नवीनतम आर्थिक समीक्षा देखें)।
12.2 राज्य स्तरीय प्रयास
गाँवों के भीतर सीमेंट-कंक्रीट सड़कें और ग्राम-संपर्क के लिए राज्य की अपनी योजनाएँ (जैसे "गौरव पथ" प्रकार की योजनाएँ) समय-समय पर चलाई गईं।
मरुस्थल में बालू के टीलों का खिसकना सड़कों के रख-रखाव की बड़ी समस्या है — इसलिए पश्चिमी जिलों में सड़क-निर्माण लागत अधिक आती है। देखें राजस्थान के बालुका स्तूप।
13. सड़क घनत्व और क्षेत्रीय विषमता
सड़क घनत्व = प्रति 100 वर्ग km क्षेत्रफल पर सड़क की लंबाई (km)। राजस्थान का क्षेत्रफल देश में सबसे बड़ा है और जनसंख्या बिखरी हुई है, इसलिए सड़क घनत्व राष्ट्रीय औसत से कम रहता है — यह परीक्षा-पुस्तकों का स्थायी कथन है। सटीक मान वर्ष-दर-वर्ष बदलता है; उसे "लगभग" के साथ और स्रोत-वर्ष सहित लिखें।
क्षेत्र | सड़क घनत्व (सापेक्ष) | कारण |
|---|---|---|
पूर्वी मैदान (जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा) | अधिक | घनी जनसंख्या, समतल भूमि, दिल्ली से निकटता |
हाड़ौती (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) | मध्यम | कृषि व औद्योगिक केंद्र, पर पठारी-नदी बाधाएँ |
दक्षिणी अरावली (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा) | मध्यम–कम | पहाड़ी भू-भाग, बिखरी जनजातीय बस्तियाँ |
पश्चिमी मरुस्थल (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) | सबसे कम | विशाल क्षेत्रफल, विरल जनसंख्या, रेतीली भूमि |
परीक्षा-पुस्तकों में जैसलमेर को सामान्यतः न्यूनतम सड़क घनत्व वाला जिला बताया जाता है — यह जनसंख्या घनत्व के पैटर्न से मेल खाता है। जिलेवार जनसंख्या घनत्व के लिए राजस्थान में जनसंख्या घनत्व नोट देखें।
14. समयरेखा (Timeline)
वर्ष | घटना |
|---|---|
1943 | नागपुर योजना — सड़कों का पाँच श्रेणियों में वर्गीकरण |
1961–81 | बंबई योजना |
1964 | 1 अक्टूबर — RSRTC (रोडवेज) की स्थापना |
1979 | राज्य पुल एवं निर्माण निगम (आगे RSRDC) — प्रचलित वर्ष |
1981–2001 | लखनऊ योजना |
1988 / 1995 | NHAI अधिनियम / NHAI का कार्यारंभ |
1998–99 से | NHDP — स्वर्णिम चतुर्भुज; आगे उत्तर-दक्षिण व पूर्व-पश्चिम गलियारे |
2000 | 25 दिसंबर — PMGSY |
2010 | NH की नई क्रमांकन प्रणाली (NH-8 → NH-48, NH-15 → NH-62) |
2014 | राजस्थान राज्य राजमार्ग अधिनियम |
2017 | भारतमाला परियोजना चरण-I की स्वीकृति |
2019 | दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे का शिलान्यास (मार्च 2019 — प्रचलित) |
2023 | 12 फ़रवरी — दिल्ली–दौसा–लालसोट खंड का लोकार्पण; अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर के राजस्थान खंड का बड़ा भाग खुला |
2024–26 | शेष खंडों पर चरणबद्ध कार्य; राज्य बजट में नए ग्रीनफील्ड मार्गों की घोषणाएँ (हालिया जानकारी के अनुसार) |
15. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-Liners)
NH की नई क्रमांकन प्रणाली — 2010; उत्तर-दक्षिण सम, पूर्व-पश्चिम विषम।
पुराना NH-8 = नया NH-48 (दिल्ली–जयपुर–अजमेर–उदयपुर–अहमदाबाद–मुंबई–चेन्नई)।
पुराना NH-15 = नया NH-62 — पुस्तकों के अनुसार राजस्थान का सबसे लंबा NH।
NH-52 — जयपुर–टोंक–बूंदी–कोटा–झालावाड़ (पुराने NH-12 का भाग)।
NH-27 — पोरबंदर–सिलचर, पूर्व-पश्चिम गलियारा; सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां।
NH-21 — जयपुर–भरतपुर–आगरा।
NH-44 (भारत का सबसे लंबा NH) — राजस्थान में केवल धौलपुर से।
स्वर्णिम चतुर्भुज की दिल्ली–मुंबई भुजा राजस्थान से गुजरती है।
भारतमाला चरण-I — 2017।
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे — सबसे लंबा हिस्सा राजस्थान में; पहला खंड दिल्ली–दौसा–लालसोट, 12 फ़रवरी 2023।
जयपुर, दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से बांदीकुई लिंक द्वारा जुड़ा।
अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर — हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर।
PMGSY — 25 दिसंबर 2000।
RSRDC — सड़क-पुल निर्माण निगम; RSRTC — 1 अक्टूबर 1964, बस सेवा।
राजस्थान राज्य राजमार्ग अधिनियम — 2014।
नागपुर योजना (1943) — भारत की पहली सड़क योजना।
कोटा का हैंगिंग (केबल-स्टेड) ब्रिज — चंबल नदी पर, NH-27 (कोटा बाईपास)।
न्यूनतम सड़क घनत्व — पश्चिमी मरुस्थलीय जिले, विशेषकर जैसलमेर (पुस्तकों के अनुसार)।
16. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)
Trap 1: NH-48 बनाम पुराना NH-48
2010 से पहले भी एक "NH-48" था (कर्नाटक में बेंगलुरु–मंगलुरु)। आज का NH-48 पुराने NH-8 वाला दिल्ली–मुंबई–चेन्नई मार्ग है। प्रश्न में "नया" या "वर्तमान" शब्द देखें।
Trap 2: सबसे लंबा NH — भारत में बनाम राजस्थान में
भारत में सबसे लंबा — NH-44; राजस्थान में सबसे लंबा (पुस्तकों के अनुसार) — NH-62। NH-44 की राजस्थान में लंबाई बहुत कम है (केवल धौलपुर)।
Trap 3: NH-27 राजस्थान से गुजरता है, जयपुर से नहीं
NH-27 दक्षिणी-दक्षिणपूर्वी राजस्थान (सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां) से जाता है; जयपुर, अजमेर, जोधपुर इस पर नहीं हैं।
Trap 4: सम-विषम उल्टा न करें
उत्तर-दक्षिण = सम (48, 52, 62, 44); पूर्व-पश्चिम = विषम (27, 21, 11)। NH-27 "पूर्व-पश्चिम" गलियारा है — विषम संख्या इसकी पुष्टि करती है।
Trap 5: दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे जयपुर से नहीं गुजरता
मुख्य संरेखण दौसा–लालसोट होकर जाता है; जयपुर लिंक मार्ग (बांदीकुई–जयपुर) से जुड़ा है। साथ ही, यह NH-48 (पुराना NH-8) से अलग नया ग्रीनफील्ड मार्ग है।
Trap 6: पहला खंड "दिल्ली–जयपुर" नहीं
पहला लोकार्पित खंड दिल्ली (सोहना)–दौसा–लालसोट (12 फ़रवरी 2023) है।
Trap 7: अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर बनाम दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे
पहला पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर), दूसरा पूर्वी राजस्थान (अलवर–दौसा–कोटा)। जिलों की अदला-बदली वाले विकल्प आम हैं।
Trap 8: RSRDC बनाम RSRTC
RSRDC सड़कें/पुल बनाता है; RSRTC बसें चलाता है।
17. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. "आठ बना अड़तालीस, पंद्रह बना बासठ": NH-8 → NH-48; NH-15 → NH-62।
2. "27 = पोर-सिल": NH-27 पोरबंदर से सिलचर — राजस्थान में "सि-उ-चि-को-बा" (सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां)।
3. "खड़ा सम, लेटा विषम" — 2010 की प्रणाली।
4. "अदा सबको" — दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे: अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा।
5. "हबी जोबाजा" — अमृतसर–जामनगर: हनुमानगढ़, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर।
6. "धौलपुर ने छुआ सबसे लंबा" — NH-44 (भारत का सबसे लंबा) राजस्थान में केवल धौलपुर।
18. संबंधित नोट्स
19. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
श्रेणियाँ: NH–SH–MDR–ODR–VR; नागपुर योजना 1943
2010 क्रमांकन: उत्तर-दक्षिण सम (पूर्व→पश्चिम बढ़ते), पूर्व-पश्चिम विषम (उत्तर→दक्षिण बढ़ते); शाखाएँ 3 अंक
NH-48 (पुराना 8): शाहजहाँपुर–जयपुर–किशनगढ़–उदयपुर–रतनपुर
NH-62 (पुराना 15): श्रीगंगानगर–बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर; राज्य का सबसे लंबा (पुस्तकें)
NH-52: सीकर–जयपुर–टोंक–बूंदी–कोटा–झालावाड़
NH-27: पोरबंदर–सिलचर; सिरोही–उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कोटा–बारां; कोटा हैंगिंग ब्रिज
NH-21 जयपुर–आगरा; NH-44 केवल धौलपुर
स्वर्णिम चतुर्भुज (दिल्ली–मुंबई भुजा), उत्तर-दक्षिण (धौलपुर), पूर्व-पश्चिम (NH-27) — तीनों राजस्थान में
भारतमाला 2017; दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे: अलवर–दौसा–सवाई माधोपुर–बूंदी–कोटा; 12 फ़रवरी 2023
अमृतसर–जामनगर: हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर
PMGSY 25 दिसंबर 2000; राज्य राजमार्ग अधिनियम 2014
RSRDC (निर्माण) बनाम RSRTC (1964, बसें); NHAI 1988/1995
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 4 (पुराने-नए नंबर), खंड 5 (NH के मार्ग) और खंड 8–9 (एक्सप्रेसवे व कॉरिडोर) दोबारा पढ़ें। मानचित्र पर NH-48, 62, 52 और 27 को अलग रंगों से खींचकर अभ्यास करें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
राजस्थान की सड़क व्यवस्था उसकी भौगोलिक स्थिति का प्रतिबिंब है — विशाल क्षेत्रफल, बिखरी जनसंख्या और दिल्ली तथा गुजरात के बंदरगाहों के बीच का "पुल"। 2010 की नई क्रमांकन प्रणाली ने NH नंबरों को दिशा-आधारित बनाया, इसलिए परीक्षा में पुराने-नए नंबरों का मिलान सबसे अधिक पूछा जाता है। भारतमाला के अंतर्गत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे (पूर्वी राजस्थान) और अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर (पश्चिमी राजस्थान) ने राज्य को देश के लॉजिस्टिक्स मानचित्र के केंद्र में ला दिया है, जबकि PMGSY जैसी योजनाओं ने ढाणियों तक संपर्क पहुँचाया। तीन स्तंभ याद रखें — NH-48/62/52/27 के मार्ग, 2010 का सम-विषम नियम और दो बड़ी भारतमाला परियोजनाओं के जिले; और "स्थिति" वाले तथ्यों को सदैव "हालिया जानकारी के अनुसार" की भाषा में लिखें।
1943 नागपुर · 1964 RSRTC · 1988 NHAI · 2000 PMGSY · 2010 नई NH संख्या · 2014 राज्य राजमार्ग अधिनियम · 2017 भारतमाला · 2023 दिल्ली–दौसा–लालसोट
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
2010 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दिशा-आधारित क्रमांकन अपनाया। उत्तर-दक्षिण राजमार्गों को सम संख्या (पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ती) और पूर्व-पश्चिम राजमार्गों को विषम संख्या (उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती) दी गई; शाखाओं को तीन अंकों की संख्या मिली।
NH-48 पुराना NH-8 है। यह दिल्ली–जयपुर–अजमेर (किशनगढ़)–उदयपुर–अहमदाबाद–मुंबई–चेन्नई मार्ग है और राजस्थान में शाहजहाँपुर के पास प्रवेश कर जयपुर, किशनगढ़, उदयपुर होते हुए रतनपुर के पास गुजरात में जाता है। यह स्वर्णिम चतुर्भुज की दिल्ली–मुंबई भुजा का वाहक है।
परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार NH-62 (पुराना NH-15) राजस्थान का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो श्रीगंगानगर–बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर होकर पश्चिमी राजस्थान से गुजरता है। इसकी सटीक लंबाई स्रोतों में अलग-अलग दी गई है।
पोरबंदर–सिलचर पूर्व-पश्चिम गलियारा NH-27 राजस्थान में सिरोही (आबूरोड–पिंडवाड़ा), उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा और बारां से होकर मध्य प्रदेश में जाता है। कोटा का चंबल पर बना हैंगिंग ब्रिज इसी पर है।
हाँ, भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-44 (श्रीनगर–कन्याकुमारी) आगरा और ग्वालियर के बीच राजस्थान के धौलपुर जिले से एक छोटे खंड में गुजरता है। इसलिए स्वर्णिम चतुर्भुज, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम — तीनों राजस्थान से जुड़े हैं।
दिल्ली (सोहना)–दौसा–लालसोट खंड का लोकार्पण 12 फ़रवरी 2023 को प्रधानमंत्री ने दौसा से किया। यह एक्सप्रेसवे का पहला चालू खंड था; शेष खंड चरणबद्ध रूप से खोले जाते रहे हैं।
मुख्य रूप से अलवर, दौसा (लालसोट), सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा से। कुछ स्रोत भरतपुर व टोंक के छोटे हिस्से भी गिनाते हैं। जयपुर मुख्य संरेखण पर नहीं है, बल्कि बांदीकुई–जयपुर लिंक से जुड़ा है। इस एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा भाग राजस्थान में है।
यह भारतमाला के अंतर्गत आर्थिक गलियारा है, जो राजस्थान में हनुमानगढ़–बीकानेर–जोधपुर–बाड़मेर–जालौर होकर गुजरात जाता है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में है और हालिया जानकारी के अनुसार 2023 में राजस्थान खंड के बड़े भाग का लोकार्पण हुआ।
भारतमाला केंद्र सरकार (MoRTH) की राजमार्ग विकास की छत्र-योजना है, जिसके चरण-I को 2017 में स्वीकृति मिली। इसमें आर्थिक गलियारे, अंतर-गलियारा व फीडर मार्ग, सीमा सड़कें, बाईपास-रिंग रोड और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामिल हैं; दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर इसके अंतर्गत हैं।
RSRDC (राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम) सड़कें, पुल और रेल ओवरब्रिज बनाने वाला राज्य उपक्रम है, जो प्रचलित मत के अनुसार 1979 में राज्य पुल एवं निर्माण निगम के रूप में बना। RSRTC (राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम, 1 अक्टूबर 1964) यात्री बस सेवा चलाता है।
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