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राजस्थान भूगोल

राजसमंद झील (राजसमुद्र झील): इतिहास, निर्माण, भौगोलिक विशेषताएँ, नौचौकी पाल एवं राज प्रशस्ति

महेंद्र ढाका (भूगोल विशेषज्ञ)
18 अगस्त 2026
7 मिनट पठन
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राजसमंद झील (राजसमुद्र झील): इतिहास, निर्माण, भौगोलिक विशेषताएँ, नौचौकी पाल एवं राज प्रशस्ति

राजस्थान GK | Rajasthan Geography | RPSC | RSSB | CET | REET | राजस्थान की प्रमुख झीलें

Quick Answer Box — एक नजर में

बिंदुजानकारी
झील का नामराजसमंद झील
दूसरा नामराजसमुद्र झील
स्थितिराजसमंद जिला, राजस्थान
उदयपुर से दूरीलगभग 66 किमी उत्तर
निकटवर्ती नगरराजनगर एवं कांकरोली
प्रकारकृत्रिम/मानव निर्मित मीठे पानी की झील
निर्मातामहाराणा राज सिंह प्रथम
निर्माण काल1662–1676 ई.
प्रमुख नदियाँगोमती, केलवा एवं ताली
निर्माण का प्रमुख उद्देश्यअकाल राहत, रोजगार तथा सिंचाई
प्रमुख संरचनानौचौकी की पाल
प्रमुख ऐतिहासिक अभिलेखराज सिंह प्रशस्ति
राज प्रशस्ति के रचयितारणछोड़ भट्ट तेलंग
राज प्रशस्ति25 श्याम/काले पत्थरों पर उत्कीर्ण
झील की लंबाईलगभग 6.4 किमी
चौड़ाईलगभग 2.8 किमी
अधिकतम/बताई गई गहराईलगभग 18 मीटर (60 फीट)
जलग्रहण क्षेत्रलगभग 510–524 वर्ग किमी
ऐतिहासिक महत्वराजस्थान के प्राचीन अकाल राहत कार्यों में प्रमुख
आधुनिक ऐतिहासिक तथ्यद्वितीय विश्व युद्ध के दौरान समुद्री विमान आधार के रूप में उपयोग

परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य:
राजसमंद झील → महाराणा राज सिंह प्रथम → 1662–1676 ई. → गोमती, केलवा एवं ताली → नौचौकी पाल → राज सिंह प्रशस्ति।

1. राजसमंद झील का परिचय

राजसमंद झील राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक एवं कृत्रिम झीलों में से एक है। यह केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि मेवाड़ के इतिहास, जल प्रबंधन, अकाल राहत, स्थापत्य कला और अभिलेखीय परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

यह झील वर्तमान राजसमंद जिले में स्थित है और राजनगर तथा कांकरोली के बीच विस्तृत है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार यह उदयपुर से लगभग 66 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इसका निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम के समय गोमती, केलवा और ताली नदियों पर बाँध बनाकर किया गया था। निर्माण कार्य 1662 से 1676 ई. के बीच हुआ।

राजसमंद झील को राजसमुद्र नाम से भी जाना जाता है। झील के नाम में 'राज' शब्द महाराणा राज सिंह से संबंधित माना जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह झील इसलिए विशेष महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके साथ एक साथ कई विषय जुड़े हुए हैं—

  1. राजस्थान का भूगोल

  2. राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास

  3. मेवाड़ का इतिहास

  4. अकाल राहत कार्य

  5. सिंचाई व्यवस्था

  6. स्थापत्य कला

  7. शिलालेख एवं प्रशस्ति

  8. राज प्रशस्ति

  9. नौचौकी की पाल

  10. महाराणा राज सिंह प्रथम

इसलिए राजसमंद झील से प्रश्न केवल "किसने बनवाई?" तक सीमित नहीं रहते, बल्कि निर्माण काल, नदियाँ, उद्देश्य, प्रशस्ति, नौचौकी पाल और ऐतिहासिक महत्व से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

2. परीक्षा में राजसमंद झील का महत्व

राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में झीलों का अध्ययन सामान्यतः निम्न आधारों पर किया जाता है—

  • प्राकृतिक या कृत्रिम झील

  • निर्माणकर्ता

  • निर्माण वर्ष

  • संबंधित नदी

  • जिला/स्थान

  • सिंचाई एवं जल उपयोग

  • ऐतिहासिक महत्व

  • धार्मिक महत्व

  • प्रमुख स्थापत्य

  • संबंधित अभिलेख/प्रशस्ति

राजसमंद झील इन लगभग सभी श्रेणियों में महत्वपूर्ण है।

परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी

महाराणा राज सिंह प्रथम → अकाल राहत → गोमती + केलवा + ताली → राजसमंद झील → नौचौकी पाल → राज सिंह प्रशस्ति

यदि विद्यार्थी इस पूरी कड़ी को याद रखता है तो राजसमंद झील से जुड़े अधिकांश वस्तुनिष्ठ प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।

3. राजसमंद झील का भौगोलिक स्थान

राजसमंद झील राजस्थान के दक्षिणी-मध्य भाग में स्थित है। यह वर्तमान राजसमंद जिले की महत्वपूर्ण भौगोलिक पहचान है।

यह झील राजनगर और कांकरोली के बीच स्थित है तथा उदयपुर के उत्तर में लगभग 66 किलोमीटर की दूरी पर है। राजस्थान पर्यटन विभाग भी इसकी स्थिति को उदयपुर से लगभग 66 किमी उत्तर तथा राजनगर और कांकरोली के मध्य बताता है।

स्थान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्यजानकारी
जिलाराजसमंद
क्षेत्रमेवाड़
निकट प्रमुख शहरउदयपुर
उदयपुर से स्थितिलगभग 66 किमी उत्तर
प्रमुख नगरराजनगर, कांकरोली
झील का ऐतिहासिक क्षेत्रमेवाड़

राजसमंद जिले का नाम भी इसी झील से जुड़ा हुआ है। इसलिए राजस्थान के मानचित्र आधारित प्रश्नों में राजसमंद झील की स्थिति को समझना उपयोगी है।

4. राजसमंद झील का निर्माण

राजसमंद झील का निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम के शासनकाल में कराया गया।

निर्माण कार्य लगभग 1662 ई. से प्रारंभ होकर 1676 ई. तक चला। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार झील का निर्माण गोमती, केलवा और ताली नदियों पर बाँध बनाकर किया गया था।

याद रखने योग्य तथ्य

राजसमंद झील — महाराणा राज सिंह प्रथम — 1662 से 1676 ई.

यही तथ्य विभिन्न राजस्थान GK परीक्षाओं में बार-बार उपयोगी होता है।

5. राजसमंद झील बनाने का उद्देश्य

राजसमंद झील का निर्माण केवल सौंदर्य या राजसी मनोरंजन के लिए नहीं किया गया था।

इसके पीछे महत्वपूर्ण सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्य थे।

17वीं शताब्दी में मेवाड़ क्षेत्र को गंभीर सूखे और अकाल का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में जल संरक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े सार्वजनिक निर्माण कार्य किए गए।

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार बाँध और झील निर्माण का प्रमुख उद्देश्य अकाल से प्रभावित लोगों को रोजगार देना तथा स्थानीय किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था।

प्रमुख उद्देश्य

1. अकाल राहत
अकाल प्रभावित जनता को रोजगार उपलब्ध कराना।

2. जल संरक्षण
वर्षा एवं नदी जल को संग्रहित करना।

3. कृषि सिंचाई
स्थानीय कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना।

4. क्षेत्रीय आर्थिक सहायता
बड़े निर्माण कार्य के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सक्रिय रखना।

इस दृष्टि से राजसमंद झील को जल प्रबंधन और अकाल राहत नीति का ऐतिहासिक उदाहरण माना जा सकता है।

6. 1661 का अकाल और राजसमंद झील

राजसमंद झील के निर्माण को समझने के लिए 1661 के आसपास के अकाल की पृष्ठभूमि महत्वपूर्ण है।

राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अकाल की स्थिति केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित नहीं करती थी, बल्कि पशुधन, रोजगार, खाद्य उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव डालती थी।

ऐसी स्थिति में महाराणा राज सिंह के शासन में बड़े जल निर्माण कार्य को राहत कार्य के रूप में आगे बढ़ाया गया।

इसलिए राजसमंद झील का निर्माण एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि राजस्थान में ऐतिहासिक शासकों ने जल संकट से निपटने के लिए बड़े जलाशयों और बाँधों का निर्माण कराया।

7. राजसमंद झील से संबंधित नदियाँ

राजसमंद झील के निर्माण में तीन नदियों का विशेष महत्व है—

गोमती

केलवा

ताली

राजस्थान पर्यटन विभाग स्पष्ट रूप से बताता है कि झील का निर्माण इन नदियों पर बाँध बनाकर किया गया था।

परीक्षा ट्रिक

गो-के-ता = गोमती + केलवा + ताली

इसे याद रखने के लिए:

"गो-के-ता से राजसमंद बना"

ध्यान रखें कि कई पुराने GK प्रश्नों में केवल गोमती नदी को उत्तर के रूप में पूछा गया है। उदाहरण के लिए राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक परीक्षा के एक पूर्व प्रश्न में राजसमंद झील के निर्माण से संबंधित नदी पूछी गई थी और उत्तर गोमती दिया गया था।

इसलिए परीक्षा में प्रश्न की भाषा को ध्यान से पढ़ें—

  • यदि पूछा जाए "राजसमंद झील किस नदी पर बनी है?" → गोमती को विकल्पों में प्राथमिक उत्तर के रूप में देखें।

  • यदि पूछा जाए "राजसमंद झील के निर्माण में किन नदियों का योगदान है?" → गोमती, केलवा और ताली।

8. राजसमंद झील की भौतिक विशेषताएँ

राजसमंद झील काफी विस्तृत कृत्रिम जलाशय है।

उपलब्ध विवरणों में इसकी लंबाई लगभग 6.4 किमी, चौड़ाई लगभग 2.8 किमी तथा गहराई लगभग 18 मीटर/60 फीट बताई जाती है। जलग्रहण क्षेत्र लगभग 510–524 वर्ग किलोमीटर बताया गया है।

भौतिक आँकड़े

भौतिक विशेषतालगभग मान
लंबाई6.4 किमी
चौड़ाई2.8 किमी
गहराई18 मीटर / 60 फीट
जलग्रहण क्षेत्र510–524 वर्ग किमी
परिधिलगभग 22.5 किमी

परीक्षा नोट: विभिन्न स्रोतों में कुछ आँकड़ों में मामूली अंतर मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षा के लिए राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा दिए गए आँकड़ों को प्राथमिकता देना उचित है।

9. राजसमंद झील और अकाल राहत की परंपरा

राजसमंद झील की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका अकाल राहत कार्य से संबंध है।

राजस्थान में ऐतिहासिक काल से जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं था, बल्कि सामाजिक जीवन का आधार था। तालाब, बावड़ियाँ, बाँध और झीलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के महत्वपूर्ण साधन थे।

राजसमंद झील का निर्माण इसी परंपरा को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करता है।

राजस्थान पर्यटन विभाग इसे राजस्थान के सबसे पुराने ज्ञात राहत कार्यों में से एक बताता है।

इसका अर्थ यह है कि झील का निर्माण—

जल संरक्षण + रोजगार + सिंचाई + अकाल राहत

इन चारों उद्देश्यों को एक साथ पूरा करने वाला कार्य था।

10. नौचौकी की पाल

राजसमंद झील का सबसे प्रसिद्ध स्थापत्य स्थल नौचौकी की पाल है।

यह झील के कांकरोली वाले दक्षिणी छोर पर स्थित है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार यहाँ सफेद पत्थर की विशाल पाल/बंध संरचना है, जिसकी लंबाई लगभग 183 मीटर और ऊँचाई लगभग 12 मीटर बताई गई है। इसके साथ संगमरमर एवं पत्थर के घाट भी बने हुए हैं।

नौचौकी क्यों कहा जाता है?

"नौचौकी" नाम संख्या नौ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता से जुड़ा है।

राजस्थान पर्यटन के विवरण में नौ ग्रहों की अवधारणा तथा निर्माण में नौ संख्या के विभिन्न उपयोगों का उल्लेख मिलता है।

परीक्षा में याद रखें

राजसमंद झील → नौचौकी की पाल

यह संबंध राजस्थान GK का बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है।

11. नौचौकी पाल की स्थापत्य विशेषताएँ

नौचौकी की पाल केवल बाँध का तकनीकी हिस्सा नहीं है। यह स्थापत्य एवं कलात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

यहाँ—

  • पत्थर के घाट

  • संगमरमर की संरचनाएँ

  • छतरियाँ

  • तोरण

  • शिलालेख

  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थापत्य

देखने को मिलता है।

इस कारण राजसमंद झील का अध्ययन राजस्थान की स्थापत्य कला एवं इतिहास से भी जुड़ जाता है।

12. राज सिंह प्रशस्ति

राजसमंद झील की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहचान राज सिंह प्रशस्ति है।

यह प्रशस्ति राजसमंद की नौचौकी पाल पर उत्कीर्ण है।

राजस्थान के इतिहास में प्रशस्तियों का विशेष महत्व है क्योंकि इनके माध्यम से तत्कालीन राजवंश, युद्ध, निर्माण कार्य, धार्मिक गतिविधियाँ, दान और प्रशासनिक घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

राज सिंह प्रशस्ति के संबंध में उपलब्ध स्रोत इसे 25 श्याम/काले पत्थरों पर उत्कीर्ण अभिलेख बताते हैं। इसके रचयिता रणछोड़ भट्ट तेलंग थे।

13. राज प्रशस्ति के रचयिता

राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता थे—

रणछोड़ भट्ट तेलंग

यह नाम परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

One-Liner

राज सिंह प्रशस्ति — रचयिता — रणछोड़ भट्ट तेलंग

इसे किसी दूसरी प्रशस्ति से न मिलाएँ।

14. राज सिंह प्रशस्ति का महत्व

राज सिंह प्रशस्ति में मेवाड़ के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री मिलती है।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार इसमें मेवाड़ के शासकों की वंशावली तथा उनके कार्यों का विवरण मिलता है। इसमें बापा रावल से लेकर मेवाड़ के विभिन्न शासकों का वर्णन तथा राजसमंद झील के निर्माण से संबंधित जानकारी भी मिलती है।

इस कारण राज सिंह प्रशस्ति केवल एक शिलालेख नहीं है, बल्कि मेवाड़ के ऐतिहासिक स्रोत के रूप में भी महत्वपूर्ण है।

परीक्षा में संभावित प्रश्न

प्रश्न: राज सिंह प्रशस्ति कहाँ स्थित है?
उत्तर: राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर।

प्रश्न: राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता कौन थे?
उत्तर: रणछोड़ भट्ट तेलंग।

प्रश्न: राज सिंह प्रशस्ति कितने श्याम पत्थरों पर उत्कीर्ण है?
उत्तर: 25।

15. राजसमंद झील और मेवाड़ का इतिहास

राजसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है।

महाराणा राज सिंह प्रथम मेवाड़ के प्रमुख शासकों में से एक थे। उनके समय में राजसमंद झील का निर्माण एक बड़े सार्वजनिक निर्माण कार्य के रूप में हुआ।

यह निर्माण उस समय की जल प्रबंधन क्षमता को प्रदर्शित करता है।

इसके साथ ही राजसमंद झील से संबंधित प्रशस्ति मेवाड़ के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत बनती है।

इस प्रकार राजसमंद झील को तीन स्तरों पर समझना चाहिए—

भूगोल

जलाशय एवं नदी तंत्र

इतिहास

महाराणा राज सिंह प्रथम और मेवाड़

संस्कृति

नौचौकी पाल, राज प्रशस्ति और स्थापत्य

16. राजसमंद झील और सिंचाई

झील निर्माण का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था।

राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई जल का संग्रहण कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

राजसमंद झील का निर्माण इसलिए आधुनिक जल संसाधन प्रबंधन के संदर्भ में भी ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

यहाँ जलाशय बनाकर जल को नियंत्रित किया गया तथा नहरों के माध्यम से कृषि उपयोग को बढ़ावा दिया गया। राजस्थान पर्यटन विभाग भी स्थानीय किसानों के लिए नहर सिंचाई को निर्माण के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल करता है।

17. गंभीर सूखे में राजसमंद झील

राजसमंद झील का एक महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य यह है कि अत्यधिक सूखे के समय इसका जलस्तर बहुत कम हो सकता है।

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2000 के गंभीर सूखे के दौरान झील लगभग सूख गई थी और उसका तल सूखी तथा दरारों वाली मिट्टी के रूप में दिखाई देने लगा था।

यह तथ्य राजस्थान की जलवायु और जल संसाधन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Exam Point

राजसमंद झील जैसी बड़ी ऐतिहासिक झील भी लंबे और गंभीर सूखे के प्रभाव से अछूती नहीं रही है।

18. द्वितीय विश्व युद्ध और राजसमंद झील

राजसमंद झील से संबंधित एक रोचक ऐतिहासिक तथ्य यह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसका उपयोग समुद्री विमानों के आधार के रूप में किया गया था।

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार Imperial Airways ने लगभग छह वर्षों तक राजसमंद झील का उपयोग समुद्री विमान आधार के रूप में किया।

यह तथ्य सामान्य भूगोल की अपेक्षा इतिहास एवं सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में अधिक उपयोगी हो सकता है।

19. राजसमंद झील का आर्थिक महत्व

राजसमंद झील का आर्थिक महत्व कई स्तरों पर समझा जा सकता है।

कृषि

सिंचाई के लिए जल उपलब्धता।

रोजगार

ऐतिहासिक रूप से निर्माण कार्य ने अकाल प्रभावित लोगों को रोजगार दिया।

पर्यटन

नौचौकी पाल, घाट, स्थापत्य और झील का दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था

झील और उससे जुड़ी धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियाँ स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देती हैं।

20. राजसमंद झील का सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व

राजसमंद झील के आसपास कई महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल हैं।

इनमें कांकरोली का द्वारिकाधीश मंदिर विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार कांकरोली में द्वारिकाधीश जी का मंदिर स्थित है और यह पुष्टिमार्गीय परंपरा से संबंधित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

इस प्रकार राजसमंद झील क्षेत्र केवल प्राकृतिक दृश्य के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

21. राजसमंद झील और द्वारिकाधीश मंदिर

कांकरोली राजसमंद झील के निकट स्थित महत्वपूर्ण नगर है।

यहाँ स्थित द्वारिकाधीश मंदिर वैष्णव एवं पुष्टिमार्गीय परंपरा से संबंधित है।

राजसमंद झील के साथ इस मंदिर की निकटता क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।

परीक्षा कड़ी

राजसमंद झील → कांकरोली → द्वारिकाधीश मंदिर

22. राजसमंद झील और स्थापत्य कला

राजसमंद झील की पाल पर निर्मित स्थापत्य में मेवाड़ की कला परंपरा की झलक दिखाई देती है।

विशेष रूप से—

  • सफेद पत्थर

  • संगमरमर

  • घाट

  • छतरियाँ

  • तोरण

  • शिलालेख

इसके ऐतिहासिक और सौंदर्यात्मक महत्व को बढ़ाते हैं।

नौचौकी पाल का स्थापत्य राजसमंद झील को सामान्य जलाशयों से अलग पहचान प्रदान करता है।

23. राजसमंद झील के प्रमुख तथ्य — सारणी
क्रमतथ्यउत्तर
1राजसमंद झील का दूसरा नामराजसमुद्र
2निर्मातामहाराणा राज सिंह प्रथम
3निर्माण काल1662–1676 ई.
4प्रमुख नदीगोमती
5अन्य संबंधित नदियाँकेलवा एवं ताली
6निर्माण का प्रमुख कारणअकाल राहत एवं सिंचाई
7प्रसिद्ध पालनौचौकी की पाल
8प्रसिद्ध प्रशस्तिराज सिंह प्रशस्ति
9प्रशस्ति के रचयितारणछोड़ भट्ट तेलंग
10प्रशस्ति के पत्थर25 श्याम/काले पत्थर
11प्रमुख निकटवर्ती नगरराजनगर एवं कांकरोली
12उदयपुर से दूरीलगभग 66 किमी
13लंबाईलगभग 6.4 किमी
14चौड़ाईलगभग 2.8 किमी
15गहराईलगभग 18 मीटर/60 फीट
16जलग्रहण क्षेत्रलगभग 510–524 वर्ग किमी
17WW-II में उपयोगसमुद्री विमान आधार
18संबंधित धार्मिक स्थलद्वारिकाधीश मंदिर, कांकरोली
24. राजसमंद झील — कालक्रम
वर्ष/कालघटना
1661 के आसपासक्षेत्र में गंभीर सूखे/अकाल की पृष्ठभूमि
1662 ई.राजसमंद जल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ
1662–1676 ई.झील एवं बाँध निर्माण की प्रमुख अवधि
1676 ई.निर्माण कार्य पूर्ण होने का काल
1676 ई.राजसमंद से संबंधित राज प्रशस्ति/ऐतिहासिक परंपरा का संबंध
द्वितीय विश्व युद्धImperial Airways द्वारा समुद्री विमान आधार के रूप में उपयोग
2000 ई.गंभीर सूखे के दौरान झील के लगभग सूख जाने का उदाहरण

निर्माण काल और ऐतिहासिक विवरण राजस्थान पर्यटन के आधिकारिक विवरण से समर्थित हैं।

25. राजसमंद झील बनाम अन्य प्रमुख राजस्थान झीलें

प्रतियोगी परीक्षाओं में झीलों की तुलना करके प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

झीलप्रमुख विशेषता
सांभरराजस्थान की प्रसिद्ध खारे पानी की झील
पचपदराखारे पानी की झील/नमक उत्पादन
जयसमंदकृत्रिम मीठे पानी की विशाल झील
राजसमंदमहाराणा राज सिंह प्रथम द्वारा निर्मित; राज प्रशस्ति
उदयसागरमहाराणा उदय सिंह से संबंधित
फतेहसागरउदयपुर की प्रमुख कृत्रिम झील
पिछोलाउदयपुर की प्रसिद्ध ऐतिहासिक झील
डीडवानाखारे पानी की झील

सबसे महत्वपूर्ण अंतर

राजसमंद → राज सिंह

जयसमंद → महाराणा जय सिंह

उदयसागर → महाराणा उदय सिंह

फतेहसागर → फतेह सिंह से संबंधित

यह नाम-निर्माता संबंध परीक्षा में बहुत उपयोगी है।

26. Exam Trap — परीक्षार्थी कहाँ गलती करते हैं?

Trap 1: राजसमंद और जयसमंद को एक समझना

दोनों कृत्रिम झीलें हैं, लेकिन दोनों के निर्माणकर्ता अलग हैं।

  • राजसमंद → महाराणा राज सिंह प्रथम

  • जयसमंद → महाराणा जय सिंह

Trap 2: राजसमंद की नदी

केवल "गोमती" याद करके रुक जाना पर्याप्त नहीं है।

विस्तृत रूप से झील के निर्माण से गोमती, केलवा और ताली नदियाँ संबंधित हैं।

Trap 3: राज सिंह प्रशस्ति और राणा कुंभा की प्रशस्तियाँ

राज सिंह प्रशस्ति को अन्य ऐतिहासिक प्रशस्तियों से न मिलाएँ।

राज सिंह प्रशस्ति → राजसमंद → रणछोड़ भट्ट तेलंग

Trap 4: नौचौकी कहाँ है?

नौचौकी को किसी अन्य झील से संबंधित न करें।

नौचौकी की पाल → राजसमंद झील

Trap 5: झील का उद्देश्य

राजसमंद झील केवल राजसी मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई थी।

मुख्य उद्देश्यों में—

  • अकाल राहत

  • रोजगार

  • सिंचाई

  • जल संरक्षण

शामिल थे।

27. One-Liner Revision
  1. राजसमंद झील का दूसरा नाम राजसमुद्र है।

  2. राजसमंद झील का निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम ने कराया।

  3. इसका निर्माण काल 1662–1676 ई. माना जाता है।

  4. राजसमंद झील के निर्माण में गोमती, केलवा और ताली नदियों का संबंध है।

  5. राजसमंद झील का निर्माण अकाल राहत और सिंचाई के उद्देश्य से किया गया।

  6. राजसमंद झील की प्रसिद्ध संरचना नौचौकी की पाल है।

  7. राज सिंह प्रशस्ति राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर स्थित है।

  8. राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता रणछोड़ भट्ट तेलंग हैं।

  9. राज सिंह प्रशस्ति 25 श्याम पत्थरों पर उत्कीर्ण बताई जाती है।

  10. राजसमंद झील राजनगर और कांकरोली के बीच स्थित है।

  11. राजसमंद झील उदयपुर से लगभग 66 किमी उत्तर में है।

  12. राजसमंद झील की लंबाई लगभग 6.4 किमी है।

  13. इसकी चौड़ाई लगभग 2.8 किमी है।

  14. इसकी गहराई लगभग 18 मीटर/60 फीट बताई जाती है।

  15. इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 510–524 वर्ग किमी है।

  16. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसका उपयोग समुद्री विमान आधार के रूप में किया गया था।

  17. वर्ष 2000 के गंभीर सूखे में राजसमंद झील लगभग सूख गई थी।

  18. कांकरोली राजसमंद झील के निकट स्थित प्रमुख नगर है।

  19. कांकरोली का द्वारिकाधीश मंदिर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल है।

  20. राजसमंद झील राजस्थान के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जल प्रबंधन कार्यों में से एक है।

28. RPSC/RSSB के लिए संभावित तथ्यात्मक प्रश्न क्षेत्र

राजसमंद झील से निम्न प्रकार के प्रश्न बनाए जा सकते हैं:

Geography

  • झील कहाँ स्थित है?

  • किस जिले में है?

  • कौन-कौन सी नदियाँ संबंधित हैं?

  • जलग्रहण क्षेत्र कितना है?

  • झील की लंबाई/चौड़ाई कितनी है?

History

  • किस शासक ने बनवाई?

  • कब बनवाई?

  • निर्माण का उद्देश्य क्या था?

  • किस अकाल से इसका संबंध था?

Culture

  • नौचौकी पाल क्या है?

  • राज सिंह प्रशस्ति कहाँ है?

  • प्रशस्ति के रचयिता कौन हैं?

  • कितने पत्थरों पर उत्कीर्ण है?

Current/General Knowledge

  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान झील का उपयोग किस रूप में हुआ?

  • 2000 के सूखे में झील की स्थिति कैसी हुई?

29. राजसमंद झील को याद करने की आसान ट्रिक

"राज-गो-के-ता-नौ-रन"

इस ट्रिक को पाँच भागों में समझें—

राज → राज सिंह
गो → गोमती
के → केलवा
ता → ताली
नौ → नौचौकी
रन → रणछोड़ भट्ट

अर्थात:

राज सिंह ने गोमती-केलवा-ताली से राजसमंद बनाया, नौचौकी पर रणछोड़ की प्रशस्ति।

यह एक ही वाक्य राजसमंद झील के कई महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्यों को जोड़ देता है।

30. राजस्थान के जल प्रबंधन में राजसमंद झील का महत्व

राजस्थान का प्राकृतिक वातावरण जल की सीमित उपलब्धता से प्रभावित रहा है। इसी कारण यहाँ प्राचीन और मध्यकालीन समाजों ने जल संरक्षण के अनेक स्थानीय तरीके विकसित किए।

राजसमंद झील इसी परंपरा का बड़े पैमाने का उदाहरण है।

यह झील यह दर्शाती है कि ऐतिहासिक राजस्थान में जल प्रबंधन को—

  • कृषि,

  • रोजगार,

  • अकाल राहत,

  • सामाजिक कल्याण,

  • धार्मिक गतिविधि

से जोड़ा गया था।

इस दृष्टि से राजसमंद झील केवल "राजस्थान की एक झील" नहीं है, बल्कि राजस्थान की ऐतिहासिक जल-संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

31. आधुनिक राजस्थान में राजसमंद झील

आज राजसमंद झील राजसमंद जिले की महत्वपूर्ण भौगोलिक और पर्यटन पहचान है।

झील का शांत जल, नौचौकी पाल, घाट और आसपास के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल इसे पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

इसके साथ ही इसका ऐतिहासिक महत्व राजस्थान के विद्यार्थियों के लिए इसे विशेष अध्ययन विषय बनाता है।

राजस्थान पर्यटन विभाग भी राजसमंद झील को राज्य के प्रमुख झील पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।

32. निष्कर्ष

राजसमंद झील राजस्थान के इतिहास, भूगोल और संस्कृति के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम ने 1662 से 1676 ई. के बीच गोमती, केलवा और ताली नदियों पर बाँध बनाकर कराया। इसका मूल उद्देश्य अकाल प्रभावित जनता को रोजगार देना तथा स्थानीय कृषि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था।

झील की नौचौकी की पाल स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जबकि राज सिंह प्रशस्ति इसे राजस्थान के इतिहास और अभिलेखीय परंपरा में विशेष स्थान प्रदान करती है। राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता रणछोड़ भट्ट तेलंग थे और यह 25 श्याम पत्थरों पर उत्कीर्ण होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत मानी जाती है।

प्रतियोगी परीक्षा के लिए राजसमंद झील को याद रखने का सबसे प्रभावी तरीका है:

राजसमंद = राज सिंह + 1662–1676 + गोमती-केलवा-ताली + अकाल राहत + नौचौकी पाल + राज सिंह प्रशस्ति + रणछोड़ भट्ट।

यही इसके सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु हैं।

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Quick Revision

राजसमंद झील → राजसमंद जिला → महाराणा राज सिंह प्रथम → 1662–1676 → गोमती + केलवा + ताली → अकाल राहत → सिंचाई → नौचौकी पाल → राज सिंह प्रशस्ति → रणछोड़ भट्ट तेलंग।

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लेखक: Suyog Academy Team
Rajasthan GK | Rajasthan Geography | Competitive Exam Preparation

अंतिम अपडेट: अगस्त 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 18 अगस्त 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राजसमंद झील का निर्माण किस मेवाड़ शासक के शासनकाल में कराया गया था?

राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक 2022

Q2. राजसमंद झील के निर्माण से प्रमुख रूप से कौन-सी नदी संबंधित है?

राजस्थान सामान्य ज्ञान परीक्षा 2018

Q3. राजसमंद झील के निर्माण का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

Rajasthan CET 2022

Q4. राजसमंद झील के निर्माण की अवधि किसके बीच मानी जाती है?

RPSC परीक्षा 2016

Q5. राजसमंद झील राजस्थान के किस जिले में स्थित है?

राजस्थान पुलिस परीक्षा 2020

Q6. राजसमंद झील की प्रसिद्ध पाल को किस नाम से जाना जाता है?

राजस्थान CET 2022

Q7. राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर कौन-सी प्रसिद्ध प्रशस्ति उत्कीर्ण है?

RPSC RAS 2018

Q8. राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता कौन माने जाते हैं?

राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा 2017

Q9. राज सिंह प्रशस्ति कितने श्याम या काले पत्थरों पर उत्कीर्ण मानी जाती है?

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2019

Q10. राजसमंद झील के निर्माण से संबंधित नदियों का सही समूह कौन-सा है?

Rajasthan CET 2022

Q11. राजसमंद झील किन प्रमुख नगरों के बीच स्थित है?

राजस्थान पटवारी परीक्षा 2021

Q12. राजसमंद झील का प्राचीन/वैकल्पिक नाम क्या है?

राजस्थान सामान्य ज्ञान परीक्षा 2018

Q13. राजसमंद झील की लगभग लंबाई कितनी है?

राजस्थान CET 2022

Q14. राजसमंद झील की लगभग चौड़ाई कितनी बताई जाती है?

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2019

Q15. राजसमंद झील की अधिकतम गहराई लगभग कितनी बताई जाती है?

राजस्थान शिक्षक परीक्षा 2020

Q16. राजसमंद झील उदयपुर के किस दिशा में स्थित है?

राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2020

Q17. महाराणा राज सिंह प्रथम द्वारा राजसमंद झील के निर्माण का संबंध किस समस्या से था?

RPSC परीक्षा 2017

Q18. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान राजसमंद झील का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया था?

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2021

Q19. राजसमंद झील का निर्माण राजस्थान के किस पारंपरिक प्रयास का उदाहरण माना जा सकता है?

Rajasthan CET 2022

Q20. राजसमंद झील के निकट कांकरोली में कौन-सा प्रसिद्ध मंदिर स्थित है?

राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा 2021

Q21. राजसमंद झील के निर्माण में अकाल राहत की भूमिका किस रूप में थी?

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2019

Q22. राजसमंद झील किस प्रकार की झील है?

Rajasthan CET 2022

Q23. राज सिंह प्रशस्ति का प्रमुख ऐतिहासिक महत्व क्या है?

RPSC RAS 2018

Q24. निम्न में से किस झील का निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम से संबंधित है?

राजस्थान CET 2022

Q25. वर्ष 2000 के गंभीर सूखे के दौरान राजसमंद झील की क्या स्थिति हुई थी?

राजस्थान सामान्य ज्ञान 2020

Q26. राजसमंद झील के निर्माण से किस मेवाड़ी शासक का नाम सीधे जुड़ा है?

राजस्थान पुलिस परीक्षा 2021

Q27. नौचौकी की पाल राजसमंद झील के किस पक्ष से विशेष रूप से जुड़ी है?

राजस्थान शिक्षक परीक्षा 2019

Q28. राजसमंद झील से संबंधित सही युग्म कौन-सा है?

Rajasthan CET 2022

Q29. राजसमंद झील की नौचौकी पाल का सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक आकर्षण क्या है?

RPSC परीक्षा 2019

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

राजसमंद झील राजस्थान के राजसमंद जिले में राजनगर और कांकरोली के बीच स्थित है। यह उदयपुर से लगभग 66 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।

राजसमंद झील को राजसमुद्र झील के नाम से भी जाना जाता है।

राजसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के शासक महाराणा राज सिंह प्रथम ने करवाया था।

राजसमंद झील का निर्माण कार्य लगभग 1662 ई. से 1676 ई. के बीच महाराणा राज सिंह प्रथम के शासनकाल में हुआ था।

इसका निर्माण अकाल राहत, प्रभावित लोगों को रोजगार देने, जल संरक्षण और कृषि के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था।

राजसमंद झील के निर्माण में गोमती, केलवा और ताली नदियों का प्रमुख योगदान रहा है।

राजसमंद झील के निर्माण से प्रमुख रूप से गोमती नदी संबंधित है। विस्तृत रूप से गोमती के साथ केलवा और ताली नदियाँ भी इससे जुड़ी हैं।

राजसमंद झील एक कृत्रिम या मानव निर्मित मीठे पानी की झील है।

राजसमंद झील की प्रसिद्ध पाल को नौचौकी की पाल कहा जाता है।

नौचौकी की पाल राजसमंद झील के कांकरोली वाले दक्षिणी छोर पर स्थित ऐतिहासिक संरचना है।

राज सिंह प्रशस्ति राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर उत्कीर्ण है।

राज सिंह प्रशस्ति के रचयिता रणछोड़ भट्ट तेलंग थे।

राज सिंह प्रशस्ति 25 श्याम या काले पत्थरों पर उत्कीर्ण बताई जाती है।

राज सिंह प्रशस्ति मेवाड़ के इतिहास, शासकों की वंशावली तथा राजसमंद झील के निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करती है।

राजसमंद क्षेत्र में अकाल की स्थिति के दौरान झील निर्माण को राहत कार्य के रूप में आगे बढ़ाया गया, जिससे प्रभावित लोगों को रोजगार मिला और जल संरक्षण तथा सिंचाई की व्यवस्था मजबूत हुई।

राजसमंद झील की लंबाई लगभग 6.4 किलोमीटर बताई जाती है।

राजसमंद झील की चौड़ाई लगभग 2.8 किलोमीटर बताई जाती है।

राजसमंद झील की गहराई लगभग 18 मीटर या 60 फीट बताई जाती है।

राजसमंद झील का जलग्रहण क्षेत्र विभिन्न स्रोतों में लगभग 510 से 524 वर्ग किलोमीटर के आसपास बताया जाता है।

राजसमंद झील मेवाड़ के इतिहास, महाराणा राज सिंह प्रथम, अकाल राहत कार्य, जल प्रबंधन, नौचौकी पाल और राज सिंह प्रशस्ति के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह ऐतिहासिक राजस्थान में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण, सिंचाई और अकाल राहत के लिए किए गए सार्वजनिक निर्माण कार्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

राजसमंद झील के निकट कांकरोली में प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर स्थित है।

कांकरोली राजसमंद झील के निकट स्थित प्रमुख नगर है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान राजसमंद झील का उपयोग समुद्री विमानों के आधार के रूप में किया गया था।

वर्ष 2000 के गंभीर सूखे के दौरान राजसमंद झील का जलस्तर बहुत कम हो गया था और झील लगभग सूख गई थी।

राजसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के शासक महाराणा राज सिंह प्रथम से संबंधित है।

राजसमंद झील का ऐतिहासिक नाम राजसमुद्र है और इसी नाम से इसे कई ऐतिहासिक एवं सामान्य ज्ञान संदर्भों में जाना जाता है।

गोमती नदी राजसमंद झील के निर्माण से प्रमुख रूप से संबंधित नदी है। गोमती के जल को रोककर जलाशय के निर्माण में सहायता मिली।

नौचौकी पाल अपनी स्थापत्य कला, घाटों, पत्थर की संरचनाओं और विशेष रूप से राज सिंह प्रशस्ति के कारण प्रसिद्ध है।

इससे महाराणा राज सिंह प्रथम, निर्माण काल, गोमती-केलवा-ताली नदियाँ, नौचौकी पाल, राज सिंह प्रशस्ति, रणछोड़ भट्ट तेलंग और अकाल राहत जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

राजसमंद झील का निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम से संबंधित है, जबकि जयसमंद झील का निर्माण महाराणा जय सिंह के समय हुआ था।

राजसमंद झील का निर्माण मेवाड़ क्षेत्र के इतिहास से जुड़ा है और यह मेवाड़ की जल प्रबंधन एवं स्थापत्य परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

इसे 'राज सिंह + 1662–1676 + गोमती-केलवा-ताली + नौचौकी + राज सिंह प्रशस्ति + रणछोड़ भट्ट' के रूप में याद किया जा सकता है।

झील के निर्माण से स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने में सहायता मिली और कृषि गतिविधियों को समर्थन मिला।

झील और बाँध का निर्माण अकाल प्रभावित लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने वाले राहत कार्य के रूप में भी किया गया था।

यह जल संरक्षण, सिंचाई और अकाल राहत के उद्देश्य से किए गए बड़े ऐतिहासिक सार्वजनिक निर्माण का उदाहरण है।

राजसमंद झील के साथ राज सिंह प्रशस्ति सबसे अधिक संबंधित है।

राज सिंह प्रशस्ति मेवाड़ के महाराणा राज सिंह प्रथम से संबंधित है।

राजसमंद जिले में स्थित एक विशाल कृत्रिम मीठे पानी का ऐतिहासिक जलाशय इसकी प्रमुख भौगोलिक पहचान है।

नौचौकी पाल, ऐतिहासिक प्रशस्ति, घाट, स्थापत्य संरचनाएँ और आसपास के धार्मिक स्थल इसे राजस्थान के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।

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