राजस्थान में गरीबी
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स्रोत आधार: राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26, राजस्थान बजट 2026-27, NITI आयोग एवं MoSPI आधिकारिक आँकड़े। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
राजस्थान में गरीबी
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⚡ Quick Answer: राजस्थान में गरीबी तेज़ी से घटी है। NITI आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI, 2023) के अनुसार राज्य में बहुआयामी गरीबों का अनुपात 2015-16 के 28.86% से घटकर 2019-21 में 15.31% रह गया (भारत: 24.85% → 14.96%)। NITI चर्चा-पत्र (2024) के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच राज्य के ≈1.87 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। तेंदुलकर पद्धति से 2011-12 में राजस्थान की गरीबी ≈14.7% थी। MPI के तीन आयाम हैं — स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-स्तर (12 संकेतक)।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): NITI आयोग राष्ट्रीय MPI (2023): राजस्थान में बहुआयामी गरीबी 28.86% (2015-16) → 15.31% (2019-21); भारत 24.85% → 14.96%। NITI चर्चा-पत्र (जनवरी 2024): 2013-14 से 2022-23 में राजस्थान के लगभग 1.87 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। नवीनतम राज्य-स्तरीय MPI जारी होने पर करेंट अफेयर्स से अद्यतन करें। आर्थिक आँकड़े हर वर्ष संशोधित होते हैं — परीक्षा से पहले नवीनतम आर्थिक समीक्षा व करेंट अफेयर्स से अवश्य मिलाएँ।
1. गरीबी — आय-आधारित बनाम बहुआयामी
गरीबी मापने के दो प्रमुख तरीके हैं। आय/उपभोग-आधारित गरीबी रेखा देखती है कि कोई व्यक्ति न्यूनतम उपभोग-व्यय कर पा रहा है या नहीं। इस पद्धति पर लकड़ावाला (1993), तेंदुलकर (2009) और रंगराजन (2014) समितियों ने काम किया। बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) केवल आय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर में एक साथ होने वाले अभावों को मापता है। भारत में राष्ट्रीय MPI NITI आयोग तैयार करता है, जो OPHI-UNDP की एल्किरे-फ़ोस्टर पद्धति पर आधारित है। इसका डेटा NFHS से लिया जाता है।
| पद्धति/रिपोर्ट | वर्ष | राजस्थान | भारत |
|---|---|---|---|
| तेंदुलकर पद्धति (योजना आयोग) | 2011-12 | ≈14.7% | ≈21.9% |
| राष्ट्रीय MPI (NFHS-4) | 2015-16 | 28.86% | 24.85% |
| राष्ट्रीय MPI (NFHS-5) | 2019-21 | 15.31% | 14.96% |
ध्यान दें: अलग-अलग पद्धतियों के आँकड़े आपस में तुलनीय नहीं हैं। तेंदुलकर (आय-आधारित) में राजस्थान राष्ट्रीय औसत से नीचे था, जबकि MPI (बहुआयामी) में राष्ट्रीय औसत से ऊपर। इसका अर्थ है कि राज्य में शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और ईंधन जैसे गैर-आय अभाव अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं।
2. राष्ट्रीय MPI — 3 आयाम, 12 संकेतक
| आयाम (भार) | संकेतक |
|---|---|
| स्वास्थ्य (1/3) | पोषण; बाल व किशोर मृत्यु दर; मातृ स्वास्थ्य |
| शिक्षा (1/3) | स्कूली शिक्षा के वर्ष; स्कूल उपस्थिति |
| जीवन-स्तर (1/3) | खाना पकाने का ईंधन; स्वच्छता; पेयजल; बिजली; आवास; परिसंपत्तियाँ; बैंक खाता |
कोई व्यक्ति “बहुआयामी गरीब” तब माना जाता है जब उसका भारित अभाव-अंक 1/3 (33.33%) या अधिक हो। राष्ट्रीय MPI में मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता भारत-विशिष्ट अतिरिक्त संकेतक हैं (वैश्विक MPI के 10 संकेतकों के अतिरिक्त)।
🎯 गरीबी व MPI — आँकड़ों का अभ्यास
MPI आयाम, NITI रिपोर्ट और गरीबी समितियाँ RAS व शिक्षक भर्ती में पूछी जाती हैं:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
- RPSC द्वितीय श्रेणी वरिष्ठ अध्यापक 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
3. राजस्थान में गरीबी के कारण
- वर्षा-आधारित कृषि व सूखा — आय की अस्थिरता।
- भौगोलिक कठिनाई — मरुस्थल व दूरस्थ बस्तियाँ, सेवाओं तक पहुँच कठिन।
- जनजातीय क्षेत्रों का पिछड़ापन — दक्षिणी जिलों में शिक्षा-स्वास्थ्य संकेतक कमज़ोर।
- बड़ा परिवार व कम साक्षरता — विशेषकर महिला साक्षरता (जनगणना 2011 में राज्य ≈66.1%, महिला ≈52.1%)।
- कुपोषण व एनीमिया — स्वास्थ्य आयाम का अभाव।
- ऋणग्रस्तता — अनौपचारिक साहूकारी।
4. गरीबी घटने के कारण (2015-16 से 2019-21)
- उज्ज्वला (LPG) — खाना पकाने के ईंधन संकेतक में सुधार।
- स्वच्छ भारत मिशन — शौचालय।
- जन धन — बैंक खाता।
- सौभाग्य — बिजली कनेक्शन।
- PMAY — पक्का आवास।
- जल जीवन मिशन — नल से जल (आंशिक प्रभाव)।
5. गरीबी उन्मूलन — प्रमुख योजनाएँ (राजस्थान)
| योजना | प्रावधान | स्तर |
|---|---|---|
| NFSA 2013 / PMGKAY | पात्र परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न | केंद्र-राज्य |
| VB-G RAM G अधिनियम 2025 (पूर्व MGNREGA) | 125 दिन ग्रामीण रोजगार | केंद्र-राज्य |
| मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना | ₹25 लाख तक वार्षिक उपचार कवर; ≈1.36 करोड़ परिवार | राज्य |
| सामाजिक सुरक्षा पेंशन | वृद्ध, विधवा, विशेष योग्यजन | राज्य |
| पालनहार योजना | अनाथ/निराश्रित बच्चों की परवरिश हेतु सहायता | राज्य |
| राजीविका — लखपति दीदी | SHG महिलाओं की आय ₹1 लाख+ करना; ऋण-सीमा ₹1.5 लाख (बजट 2026-27) | केंद्र-राज्य |
| श्री अन्नपूर्णा रसोई (पूर्व इंदिरा रसोई) | रियायती भोजन (रिपोर्टों के अनुसार) | राज्य |
योजनाओं का विस्तार: राजस्थान की प्रमुख आर्थिक योजनाएँ | रोजगार: राजस्थान में रोजगार एवं बेरोजगारी
6. आगे की चुनौतियाँ
- जनजातीय व मरुस्थलीय जिलों में पोषण व शिक्षा।
- भूजल-संकट से ग्रामीण आजीविका पर दबाव।
- शहरी गरीबी व झुग्गियाँ।
- जलवायु परिवर्तन व सूखे की आवृत्ति।
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| आँकड़ा | राजस्थान MPI 2015-16/2019-21 | तुलना तालिका |
| अवधारणा | MPI आयाम/संकेतक | 12-संकेतक तालिका |
| पद्धति | एल्किरे-फ़ोस्टर, तेंदुलकर | पद्धति तालिका |
| योजना | गरीबी-उन्मूलन योजनाएँ | योजना तालिका |
| विश्लेषण | कारण व उपाय | RAS Mains |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
राजस्थान में कितनी गरीबी है?
NITI आयोग MPI 2023 के अनुसार 2019-21 में राजस्थान में 15.31% लोग बहुआयामी गरीब थे, जो 2015-16 में 28.86% थे।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक क्या है?
यह स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर के 12 संकेतकों में एक साथ अभाव को मापता है; भारत में NITI आयोग इसे एल्किरे-फ़ोस्टर पद्धति से तैयार करता है।
राजस्थान में कितने लोग गरीबी से बाहर आए?
NITI आयोग के जनवरी 2024 के चर्चा-पत्र के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 1.87 करोड़ लोग।
तेंदुलकर पद्धति से राजस्थान में गरीबी कितनी थी?
2011-12 में लगभग 14.7%, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 21.9% था।
राजस्थान में गरीबी के मुख्य कारण क्या हैं?
वर्षा-आधारित कृषि, सूखा, भौगोलिक कठिनाई, जनजातीय क्षेत्रों का पिछड़ापन, कम महिला साक्षरता और कुपोषण।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
NITI आयोग राष्ट्रीय MPI (2023) के अनुसार राजस्थान में बहुआयामी गरीबों का अनुपात 2019-21 में —
(A) 15.31% (B) 28.86% (C) 4.5% (D) 35.2%
✅ उत्तर: (A) 15.31% — 2015-16 में 28.86% था।
राष्ट्रीय MPI (2023) के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबी 2015-16 से 2019-21 के बीच —
(A) 24.85% से 14.96% (B) 37% से 21% (C) 50% से 25% (D) 14% से 5%
✅ उत्तर: (A) 24.85% से 14.96% — NFHS-4 से NFHS-5 के आधार पर।
NITI आयोग चर्चा-पत्र (2024) के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच राजस्थान में कितने लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले?
(A) ≈5.9 करोड़ (B) ≈60 लाख (C) ≈1.87 करोड़ (D) ≈25 लाख
✅ उत्तर: (C) ≈1.87 करोड़ — देश में ≈24.82 करोड़; सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के तीन आयाम —
(A) आय, व्यय, बचत (B) भूमि, पशु, मकान (C) रोजगार, आय, कर (D) स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-स्तर
✅ उत्तर: (D) स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-स्तर — राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक (पोषण, मातृ स्वास्थ्य, बैंक खाता आदि सहित)।
MPI किस पद्धति पर आधारित है?
(A) एल्किरे-फ़ोस्टर पद्धति (B) तेंदुलकर पद्धति (C) लकड़ावाला पद्धति (D) रंगराजन पद्धति
✅ उत्तर: (A) एल्किरे-फ़ोस्टर पद्धति — OPHI-UNDP की वैश्विक MPI पद्धति।
तेंदुलकर पद्धति के अनुसार 2011-12 में राजस्थान का गरीबी अनुपात लगभग —
(A) 5% (B) 14.7% (C) 29.5% (D) 45%
✅ उत्तर: (B) 14.7% — भारत ≈21.9% (योजना आयोग, 2013)।
राष्ट्रीय MPI में ‘जीवन-स्तर’ आयाम का संकेतक नहीं है —
(A) बैंक खाता (B) शिशु मृत्यु दर (C) खाना पकाने का ईंधन (D) स्वच्छता
✅ उत्तर: (B) शिशु मृत्यु दर — बाल व किशोर मृत्यु दर स्वास्थ्य आयाम में है।
NFSA (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) किस वर्ष का है?
(A) 2009 (B) 2019 (C) 2013 (D) 2005
✅ उत्तर: (C) 2013 — PMGKAY के तहत लाभार्थियों को निःशुल्क अनाज।
राष्ट्रीय MPI-2023 का डेटा-आधार —
(A) NFHS-5 (2019-21) (B) जनगणना 2011 (C) PLFS 2022-23 (D) SECC 2011
✅ उत्तर: (A) NFHS-5 (2019-21) — तुलना NFHS-4 (2015-16) से।
राजस्थान में बहुआयामी गरीबी सर्वाधिक किन क्षेत्रों में पाई जाती है (MPI जिलेवार आँकड़ों के अनुसार)?
(A) जयपुर शहर (B) कोटा शहर (C) अजमेर शहर (D) दक्षिणी जनजातीय जिले (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि)
✅ उत्तर: (D) दक्षिणी जनजातीय जिले (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि) — जनजातीय व मरुस्थलीय जिलों में अधिक।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- MPI राजस्थान 2015-16 — 28.86%
- MPI राजस्थान 2019-21 — 15.31%
- MPI भारत — 24.85% → 14.96%
- गरीबी से बाहर (2013-14 से 2022-23) — ≈1.87 करोड़
- MPI आयाम — स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन-स्तर
- संकेतक — 12
- पद्धति — एल्किरे-फ़ोस्टर
- तेंदुलकर (2011-12) — ≈14.7%
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- MPI में राजस्थान राष्ट्रीय औसत से थोड़ा ऊपर।
- आय-आधारित व बहुआयामी आँकड़े तुलनीय नहीं।
- जनजातीय दक्षिणी जिले सर्वाधिक प्रभावित।
- बुनियादी सुविधाओं की योजनाओं से तेज़ सुधार।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- 28.86% पुराना (2015-16), 15.31% नया (2019-21)।
- शिशु/बाल मृत्यु दर स्वास्थ्य आयाम में है, जीवन-स्तर में नहीं।
- 1.87 करोड़ — 2013-14 से 2022-23 की अवधि के लिए है।
🧠 याद रखने की ट्रिक
MPI राजस्थान — “28 से 15, आधा रह गया”। आयाम — “स्वा-शि-जी” (स्वास्थ्य-शिक्षा-जीवनस्तर), हर एक का भार एक-तिहाई।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
गरीबी के प्रश्नों में अक्सर दो रिपोर्टों के आँकड़े मिलाए जाते हैं। तालिका में हर आँकड़े के साथ पद्धति (तेंदुलकर/MPI) और वर्ष लिखकर याद करें। मुख्य परीक्षा में ‘आय-गरीबी बनाम बहुआयामी गरीबी’ की तुलना पूछी जा सकती है।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
राजस्थान में गरीबी पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- NITI आयोग — National Multidimensional Poverty Index: A Progress Review 2023।
- NITI आयोग — Multidimensional Poverty in India since 2005-06 (चर्चा-पत्र, जनवरी 2024)।
- योजना आयोग — Press Note on Poverty Estimates 2011-12 (2013)।
- भारत की जनगणना 2011 — राजस्थान साक्षरता।
- आर्थिक समीक्षा 2025-26 (राजस्थान, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय); राजस्थान बजट 2026-27 — MAA योजना व लखपति दीदी।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. NITI आयोग राष्ट्रीय MPI (2023) के अनुसार राजस्थान में बहुआयामी गरीबों का अनुपात 2019-21 में —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. राष्ट्रीय MPI (2023) के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबी 2015-16 से 2019-21 के बीच —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. NITI आयोग चर्चा-पत्र (2024) के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच राजस्थान में कितने लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के तीन आयाम —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. MPI किस पद्धति पर आधारित है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
15.31%।
28.86%।
NITI आयोग (भारत में)।
12।
लगभग 1.87 करोड़ (2013-14 से 2022-23)।
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