जैव विविधता — स्तर, हॉटस्पॉट, Evil Quartet, IUCN रेड लिस्ट और in-situ/ex-situ संरक्षण — UPSC, RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व RSSB वनरक्षक पाठ्यक्रम की पर्यावरण इकाई; NCERT जीव विज्ञान (कक्षा 12, पारिस्थितिकी इकाई) व भूगोल पाठ्यपुस्तकें तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आधिकारिक प्रकाशन। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: जैव विविधता जीवन की विविधता है, जो तीन स्तरों पर देखी जाती है — आनुवंशिक (एक प्रजाति के भीतर), प्रजातीय (प्रजातियों की संख्या व विविधता) और पारितंत्रीय (आवासों और समुदायों की विविधता); यह शब्द समाजजीवविज्ञानी एडवर्ड विल्सन ने लोकप्रिय बनाया। क्षेत्र के आधार पर विविधता अल्फा (एक समुदाय के भीतर), बीटा (समुदायों के बीच) और गामा (पूरे भू-क्षेत्र की) होती है। नॉर्मन मायर्स के हॉटस्पॉट मानदंड हैं — कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे और मूल आवास का कम से कम 70% नष्ट; भारत में चार हॉटस्पॉट आते हैं — हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, और सुंडालैंड (निकोबार द्वीप)। जैव विविधता ह्रास के चार कारण "Evil Quartet" कहलाते हैं — आवास क्षति व विखंडन, अति-दोहन, विदेशी (आक्रामक) प्रजातियाँ और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट का क्रम है — EX → EW → CR → EN → VU → NT → LC (साथ में DD और NE); CR, EN और VU मिलकर "संकटग्रस्त (Threatened)" कहलाते हैं। संरक्षण दो प्रकार का है — स्व-स्थाने (in-situ): राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, बायोस्फीयर रिज़र्व, पवित्र उपवन; और बहि-स्थाने (ex-situ): चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक और −196 °C (द्रव नाइट्रोजन) पर क्रायोप्रिज़र्वेशन।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| Biodiversity शब्द को लोकप्रिय बनाया | एडवर्ड विल्सन (समाजजीवविज्ञानी) |
| जैव विविधता के तीन स्तर | आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय |
| अल्फा / बीटा / गामा विविधता | समुदाय के भीतर / समुदायों के बीच / पूरे क्षेत्र की |
| हॉटस्पॉट अवधारणा | नॉर्मन मायर्स (1988) |
| हॉटस्पॉट मानदंड | ≥ 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे + ≥ 70% मूल आवास नष्ट |
| भारत के हॉटस्पॉट | हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, सुंडालैंड (निकोबार) |
| Evil Quartet | आवास क्षति व विखंडन, अति-दोहन, विदेशी प्रजाति आक्रमण, सह-विलुप्ति |
| सबसे बड़ा कारण (NCERT) | आवास क्षति और विखंडन |
| IUCN मुख्यालय | ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड |
| IUCN "Threatened" श्रेणियाँ | CR, EN, VU |
| क्रायोप्रिज़र्वेशन ताप | −196 °C (द्रव नाइट्रोजन) |
| जाति-क्षेत्र संबंध | अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट; log S = log C + Z log A |
| Rivet popper परिकल्पना | पॉल एर्लिच |
| भारत में पवित्र उपवन (राजस्थान) | अरावली क्षेत्र; स्थानीय नाम "ओरण" |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
जैव विविधता UPSC प्रारंभिक के पर्यावरण खंड का सबसे स्थायी विषय है — हॉटस्पॉट, IUCN श्रेणियाँ, आक्रामक प्रजातियाँ और संरक्षण विधियाँ कथनों और युग्मों के रूप में बार-बार आती हैं। RAS और RSSB वनरक्षक/वनपाल परीक्षाओं में राजस्थान की संकटग्रस्त प्रजातियाँ (गोडावण), ओरण, बिश्नोई परंपरा और विलायती बबूल जैसी आक्रामक प्रजातियाँ विशेष रूप से जुड़ती हैं। यह नोट पारितंत्र और ऊर्जा प्रवाह के बाद पढ़ें, और संरक्षित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण भारत के राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिज़र्व वाले नोट में देखें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — हॉटस्पॉट, IUCN, in-situ/ex-situ, आक्रामक प्रजातियाँ
- RPSC RAS प्रारंभिक — पर्यावरण, राजस्थान की जैव विविधता
- RSSB वनरक्षक / वनपाल — संरक्षण विधियाँ, पवित्र उपवन, संकटग्रस्त प्रजातियाँ
- राजस्थान CET (स्नातक) — जीवविज्ञान व पर्यावरण
- SSC — परिभाषाएँ और तथ्य
प्रश्न कैसे आते हैं?
- हॉटस्पॉट के मानदंड पर कथन
- भारत में कौन-सा क्षेत्र किस हॉटस्पॉट में आता है (निकोबार → सुंडालैंड)
- IUCN श्रेणियों का सही क्रम
- in-situ और ex-situ विधियों का वर्गीकरण
- Evil Quartet और उसके उदाहरण (नाइल पर्च, पार्थेनियम)
- Keystone, Flagship, Umbrella, Indicator प्रजातियों के अंतर
- अल्फा, बीटा, गामा विविधता की परिभाषा
3. जैव विविधता के स्तर
| स्तर | अर्थ | उदाहरण (NCERT) |
|---|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | एक ही प्रजाति के भीतर जीनों में भिन्नता | हिमालय क्षेत्र में सर्पगंधा (Rauwolfia vomitoria) के पौधों में रेसरपीन की सांद्रता और शक्ति में भिन्नता; भारत में धान और आम की हज़ारों किस्में |
| प्रजातीय विविधता | किसी क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या व समानता (richness + evenness) | पश्चिमी घाट में उभयचरों की प्रजातीय विविधता पूर्वी घाट से अधिक |
| पारितंत्रीय विविधता | आवासों, समुदायों और पारितंत्रों की विविधता | भारत के मरुस्थल, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, आर्द्रभूमि, ज्वारनदमुख और अल्पाइन घास के मैदान — नॉर्वे जैसे स्कैंडिनेवियाई देश से कहीं अधिक पारितंत्रीय विविधता |
3.1 अल्फा, बीटा और गामा विविधता
| प्रकार | स्तर | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अल्फा (α) | स्थानीय / समुदाय के भीतर | एक समुदाय या आवास में प्रजातियों की विविधता | एक तालाब में कितनी प्रजातियाँ |
| बीटा (β) | समुदायों के बीच | पर्यावरणीय प्रवणता के साथ एक समुदाय से दूसरे में प्रजातियों का बदलाव (प्रजाति-प्रतिस्थापन) | पहाड़ की तलहटी से शिखर तक बदलती प्रजातियाँ |
| गामा (γ) | क्षेत्रीय / भू-दृश्य | किसी बड़े भू-क्षेत्र के सभी आवासों की कुल विविधता | पूरे पश्चिमी घाट की विविधता |
यह वर्गीकरण पारिस्थितिकीविद् आर. एच. व्हिटेकर से जुड़ा है। सरल याद: α = अंदर, β = बीच, γ = ग्लोबल/क्षेत्रीय कुल।
3.2 जैव विविधता के प्रतिरूप (Patterns)
| प्रतिरूप | विवरण |
|---|---|
| अक्षांशीय प्रवणता | सामान्यतः विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर विविधता घटती है; उष्णकटिबंध में सर्वाधिक। अमेज़न वर्षावन पृथ्वी पर सर्वाधिक जैव विविधता वाले क्षेत्रों में है |
| उष्णकटिबंध में अधिक विविधता क्यों (NCERT) | (1) लाखों वर्षों से अपेक्षाकृत अबाधित — विविधीकरण के लिए लंबा समय; (2) कम मौसमी और अधिक स्थिर पर्यावरण — निके विशिष्टीकरण; (3) अधिक सौर ऊर्जा — अधिक उत्पादकता |
| जाति-क्षेत्र संबंध | हम्बोल्ट: क्षेत्र बढ़ने पर प्रजातियाँ एक सीमा तक बढ़ती हैं; लघुगणकीय रूप log S = log C + Z log A सीधी रेखा देता है |
| Z का मान | सामान्यतः 0.1 से 0.2; पूरे महाद्वीप जैसे बहुत बड़े क्षेत्रों के लिए ढलान अधिक तीव्र (लगभग 0.6 से 1.2) |
| स्थिरता और विविधता | डेविड टिलमैन के प्रयोग: अधिक प्रजातियों वाले भूखंडों में कुल जैवभार में वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तन कम |
| Rivet popper परिकल्पना | पॉल एर्लिच: पारितंत्र एक विमान है और प्रजातियाँ उसकी कीलें; कुछ कीलें निकलने से तुरंत खतरा नहीं, पर अधिक कीलें या मुख्य कीलें निकलें तो विमान गिर सकता है |
4. भारत: महाविविधता वाला देश
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| महाविविधता देश (Megadiverse) | भारत विश्व के महाविविधता वाले देशों में शामिल है। NCERT भारत को "12 महाविविधता देशों में से एक" बताती है, जबकि कंज़र्वेशन इंटरनेशनल की सूची में 17 महाविविधता (Megadiverse) देश हैं — सूची स्रोत के अनुसार अलग है |
| भूमि क्षेत्र | विश्व के भूमि क्षेत्र का लगभग 2.4% |
| वैश्विक प्रजाति विविधता में हिस्सा (NCERT) | लगभग 8.1% |
| चार हॉटस्पॉट | हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, सुंडालैंड |
| जैव-भौगोलिक विविधता | ट्रांस-हिमालय से थार मरुस्थल, दक्कन पठार, तटीय क्षेत्र और द्वीपों तक |
महाविविधता देशों की संख्या पर स्रोत भिन्न हैं, इसलिए परीक्षा में यह संख्या न रटें — केवल यह पक्का रखें कि भारत इस समूह में है।
5. जैव विविधता हॉटस्पॉट
हॉटस्पॉट की अवधारणा नॉर्मन मायर्स ने 1988 में दी; बाद में कंज़र्वेशन इंटरनेशनल ने इसे मानक मानदंडों के रूप में अपनाया। हॉटस्पॉट वे क्षेत्र हैं जहाँ प्रजातीय समृद्धि और स्थानिकता (endemism) बहुत अधिक है और साथ ही आवास पर भारी खतरा है। NCERT के अनुसार ये सभी हॉटस्पॉट मिलकर पृथ्वी के भूमि क्षेत्र का 2% से भी कम घेरते हैं, फिर भी इनमें अत्यधिक प्रजातियाँ रहती हैं। (हॉटस्पॉट की कुल संख्या समय के साथ और स्रोत अनुसार बदली है, इसलिए इसे न रटें।)
| मानदंड | शर्त |
|---|---|
| 1. स्थानिकता | कम से कम 1,500 स्थानिक (endemic) संवहनी पौधों की प्रजातियाँ — अर्थात् जो पृथ्वी पर और कहीं नहीं मिलतीं |
| 2. खतरा | अपने मूल प्राकृतिक आवास का कम से कम 70% खो चुका हो (अर्थात् अधिकतम 30% बचा हो) |
दोनों शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए। केवल अधिक प्रजातियाँ होना हॉटस्पॉट बनने के लिए पर्याप्त नहीं।
5.1 भारत के चार हॉटस्पॉट
| हॉटस्पॉट | भारत का भाग | विशेष प्रजातियाँ / विशेषता |
|---|---|---|
| हिमालय | पूरी हिमालय शृंखला (भारत, नेपाल, भूटान आदि सहित) | हिम तेंदुआ, लाल पांडा, कस्तूरी मृग; अल्पाइन से उपोष्ण वन |
| इंडो-बर्मा | पूर्वोत्तर भारत के भाग, अंडमान द्वीप समूह; म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम आदि | हूलॉक गिब्बन; मीठे जल की मछलियों व कछुओं की विविधता |
| पश्चिमी घाट व श्रीलंका | पश्चिमी घाट (गुजरात से केरल/तमिलनाडु तक) + श्रीलंका | सिंहपुच्छी मकाक (lion-tailed macaque), नीलगिरि तहर; उभयचरों की उच्च स्थानिकता |
| सुंडालैंड | निकोबार द्वीप समूह; इंडोनेशिया, मलेशिया आदि | द्वीपीय स्थानिक प्रजातियाँ |
याद रखें: अंडमान → इंडो-बर्मा; निकोबार → सुंडालैंड। दोनों द्वीप समूह भारत के हैं, पर हॉटस्पॉट अलग-अलग हैं।
6. जैव विविधता ह्रास — "Evil Quartet"
NCERT के अनुसार वर्तमान में प्रजातियों के विलुप्त होने की दर मानव से पहले की दर की तुलना में 100 से 1,000 गुना तेज़ आँकी गई है, और इसे "छठा सामूहिक विलोपन" कहा जा रहा है — जो पिछले पाँच से इस अर्थ में अलग है कि इसका कारण मानव गतिविधियाँ हैं। ह्रास के चार प्रमुख कारणों को "Evil Quartet" (दुष्ट चौकड़ी) कहते हैं।
| कारण | विवरण | उदाहरण (NCERT व भारत) |
|---|---|---|
| 1. आवास क्षति व विखंडन | सबसे प्रमुख कारण; बड़े आवास टुकड़ों में बँटने से बड़े क्षेत्र वाले स्तनधारी और प्रवासी पक्षी सर्वाधिक प्रभावित | उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की कटाई; अमेज़न वर्षावन ("पृथ्वी के फेफड़े") सोयाबीन और मवेशी चरागाह के लिए काटा जा रहा है |
| 2. अति-दोहन | प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता से अधिक दोहन, लालच | स्टेलर समुद्री गाय और पैसेंजर कबूतर — अति-दोहन से विलुप्त; कई समुद्री मछलियाँ अति-मत्स्यन से संकट में |
| 3. विदेशी प्रजातियों का आक्रमण | बाहर से लाई गई प्रजातियाँ आक्रामक होकर स्थानीय प्रजातियों को हटाती हैं | पूर्वी अफ्रीका की विक्टोरिया झील में नाइल पर्च लाने से सिक्लिड मछलियों की 200 से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त; भारत में गाजर घास (पार्थेनियम), लैंटाना, जलकुंभी (आइकॉर्निया); अफ्रीकी कैटफ़िश (Clarias gariepinus) से देशी कैटफ़िश को खतरा |
| 4. सह-विलुप्ति | एक प्रजाति के विलुप्त होने पर उस पर अनिवार्य रूप से निर्भर प्रजाति भी विलुप्त | पोषक मछली के साथ उसके विशिष्ट परजीवी; पौधा और उसका विशिष्ट परागणकर्ता (जैसे अंजीर और ततैया) |
6.1 हाल में विलुप्त प्रजातियाँ (NCERT)
| प्रजाति | क्षेत्र |
|---|---|
| डोडो | मॉरीशस |
| क्वागा | अफ्रीका |
| थायलेसीन (तस्मानियाई भेड़िया) | ऑस्ट्रेलिया |
| स्टेलर समुद्री गाय | रूस (बेरिंग सागर क्षेत्र) |
| बाघ की तीन उप-प्रजातियाँ | बाली, जावा, कैस्पियन |
6.2 भारत की प्रमुख आक्रामक प्रजातियाँ
| प्रजाति | प्रकार | प्रभाव |
|---|---|---|
| गाजर घास / कांग्रेस घास (Parthenium hysterophorus) | खरपतवार | फसलों व चरागाहों में फैलाव, त्वचा व श्वसन एलर्जी |
| लैंटाना (Lantana camara) | झाड़ी | वनों में देशी पौधों और वन्यजीवों के भोजन को हटाना |
| जलकुंभी (Eichhornia crassipes) | जलीय पौधा | तालाबों को ढककर ऑक्सीजन घटाना; "बंगाल का आतंक" (Terror of Bengal) |
| विलायती बबूल (Prosopis juliflora) | वृक्ष/झाड़ी | राजस्थान व गुजरात के शुष्क क्षेत्रों, घास के मैदानों और देशी खेजड़ी-आधारित तंत्र पर दबाव |
| अफ्रीकी कैटफ़िश (Clarias gariepinus) | मछली | देशी कैटफ़िश प्रजातियों के लिए खतरा |
7. जैव विविधता का संरक्षण क्यों? (NCERT)
| तर्क | अर्थ |
|---|---|
| संकीर्ण उपयोगितावादी (Narrowly utilitarian) | भोजन, औषधि, रेशा, लकड़ी, औद्योगिक उत्पाद; "जैव-पूर्वेक्षण" (bioprospecting) — आर्थिक महत्व के उत्पादों के लिए जैव विविधता की खोज |
| व्यापक उपयोगितावादी (Broadly utilitarian) | पारितंत्र सेवाएँ — ऑक्सीजन उत्पादन, परागण, बाढ़ व अपरदन नियंत्रण, सौंदर्य व आध्यात्मिक मूल्य |
| नैतिक (Ethical) | हर प्रजाति का अपना आंतरिक मूल्य है; आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विरासत सौंपना हमारा नैतिक दायित्व |
8. IUCN और रेड लिस्ट
IUCN (International Union for Conservation of Nature) की स्थापना 1948 में हुई; मुख्यालय ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड। यह रेड लिस्ट प्रकाशित करता है, जो प्रजातियों के विलुप्ति-जोखिम का विश्व का प्रमुख आकलन है। ध्यान रखें: रेड लिस्ट कोई कानून नहीं, एक वैज्ञानिक आकलन है; भारत में कानूनी सुरक्षा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूचियों से मिलती है।
| क्रम | श्रेणी (अंग्रेज़ी) | संक्षेप | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | Extinct | EX | विलुप्त — अंतिम सदस्य की मृत्यु में संदेह नहीं |
| 2 | Extinct in the Wild | EW | वन में विलुप्त — केवल कैद/खेती में जीवित |
| 3 | Critically Endangered | CR | गंभीर रूप से संकटग्रस्त — वन में विलुप्ति का अत्यधिक जोखिम |
| 4 | Endangered | EN | संकटग्रस्त — बहुत अधिक जोखिम |
| 5 | Vulnerable | VU | सुभेद्य — उच्च जोखिम |
| 6 | Near Threatened | NT | निकट संकटग्रस्त — निकट भविष्य में संकट की संभावना |
| 7 | Least Concern | LC | कम चिंताजनक — व्यापक और प्रचुर |
| — | Data Deficient | DD | आँकड़े अपर्याप्त |
| — | Not Evaluated | NE | मूल्यांकन नहीं हुआ |
"Threatened" (संकटापन्न) समूह = CR + EN + VU। NT और LC इसमें शामिल नहीं हैं। DD का अर्थ "सुरक्षित" नहीं, बल्कि "जानकारी नहीं" है।
8.1 भारत/राजस्थान की कुछ प्रमुख संकटग्रस्त प्रजातियाँ
| प्रजाति | टिप्पणी |
|---|---|
| गोडावण (Great Indian Bustard) | राजस्थान का राज्य पक्षी; मुख्य आवास जैसलमेर-बाड़मेर का मरु राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र; IUCN की उच्चतम खतरे वाली श्रेणियों में; बिजली की लाइनों से टकराव बड़ा खतरा |
| एशियाई शेर | केवल गुजरात के गिर क्षेत्र में प्राकृतिक आबादी |
| सिंहपुच्छी मकाक | पश्चिमी घाट का स्थानिक |
| घड़ियाल | चंबल नदी (राजस्थान-मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश) प्रमुख आवास |
IUCN श्रेणियाँ समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन से बदलती हैं, इसलिए किसी प्रजाति की वर्तमान श्रेणी IUCN की वेबसाइट से जाँचें।
9. स्व-स्थाने (In-situ) बनाम बहि-स्थाने (Ex-situ) संरक्षण
| आधार | स्व-स्थाने (In-situ) | बहि-स्थाने (Ex-situ) |
|---|---|---|
| अर्थ | प्रजाति का उसके प्राकृतिक आवास में संरक्षण | प्रजाति को प्राकृतिक आवास से बाहर विशेष स्थान पर संरक्षित करना |
| किसके लिए | पूरे पारितंत्र और अधिकांश प्रजातियों के लिए | गंभीर संकट में पड़ी प्रजातियाँ, जिन्हें तुरंत सुरक्षा चाहिए |
| उदाहरण | राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिज़र्व, संरक्षण व सामुदायिक रिज़र्व, पवित्र उपवन, हॉटस्पॉट संरक्षण | चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, वन्यजीव सफ़ारी पार्क, बीज बैंक, जीन बैंक, क्रायोप्रिज़र्वेशन, ऊतक संवर्धन, इन-विट्रो निषेचन |
| लाभ | विकासीय प्रक्रियाएँ और पारस्परिक संबंध बने रहते हैं; कम खर्च | अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों को बचाना; प्रजनन कार्यक्रम |
| सीमा | आवास पर बाहरी दबाव से सुरक्षा कठिन | प्राकृतिक व्यवहार और आनुवंशिक विविधता का कुछ ह्रास; महँगा |
9.1 बहि-स्थाने संरक्षण की प्रमुख विधियाँ
| विधि | विवरण |
|---|---|
| क्रायोप्रिज़र्वेशन | युग्मक, भ्रूण, बीज या ऊतक को द्रव नाइट्रोजन में −196 °C पर लंबे समय तक जीवित और उर्वर रखना |
| बीज बैंक / जीन बैंक | व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों की किस्मों के बीज लंबे समय तक सुरक्षित। भारत में राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR), नई दिल्ली; विश्व स्तर पर नॉर्वे का स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट |
| वनस्पति उद्यान | पौधों का जीवित संग्रह; जैसे हावड़ा (कोलकाता) का आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान, लंदन का क्यू गार्डन |
| चिड़ियाघर व कैद में प्रजनन | संकटग्रस्त जंतुओं का प्रजनन और फिर वन में पुनर्स्थापन |
| ऊतक संवर्धन (Tissue culture) | कम सामग्री से बड़ी संख्या में पौधे तैयार करना |
9.2 पवित्र उपवन (Sacred Groves)
भारत में अनेक समुदायों ने धार्मिक-सांस्कृतिक कारणों से वन के कुछ भागों को अलग रखा है, जहाँ पेड़ काटना या शिकार वर्जित है। NCERT के अनुसार ऐसे पवित्र उपवन मेघालय की खासी व जयंतिया पहाड़ियों, राजस्थान की अरावली पहाड़ियों, कर्नाटक व महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्र, और मध्य प्रदेश के सरगुजा, चंदा व बस्तर क्षेत्रों में मिलते हैं। मेघालय के पवित्र उपवनों को कई दुर्लभ और संकटग्रस्त पौधों का अंतिम आश्रय माना जाता है।
| राज्य / क्षेत्र | स्थानीय नाम |
|---|---|
| राजस्थान | ओरण (देव-वन, देवबनी) |
| महाराष्ट्र | देवराई |
| कर्नाटक | देवरकाडु |
| केरल | कावु |
| मेघालय | लॉ क्यंतांग (Law Kyntang) |
राजस्थान में बिश्नोई समुदाय की खेजड़ी और काले हिरण की रक्षा की परंपरा प्रसिद्ध है — खेजड़ली में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में पेड़ों की रक्षा हेतु बलिदान की घटना इसी परंपरा का प्रतीक है।
10. प्रजातियों के विशेष वर्ग
| वर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| कीस्टोन प्रजाति (Keystone) | संख्या/जैवभार की तुलना में पारितंत्र पर असमान रूप से बड़ा प्रभाव; हटने पर पूरा पारितंत्र बदल जाता है | समुद्री ऊदबिलाव (केल्प वन में समुद्री अर्चिन नियंत्रित), हाथी (सवाना/वन संरचना), अंजीर के वृक्ष (अनेक जीवों का भोजन), बीवर |
| फ्लैगशिप प्रजाति (Flagship) | जनता का ध्यान व समर्थन खींचने वाली करिश्माई प्रजाति — संरक्षण अभियान का "चेहरा" | बाघ, विशाल पांडा (WWF प्रतीक), एक-सींग वाला गैंडा, एशियाई हाथी |
| अम्ब्रेला प्रजाति (Umbrella) | बड़े क्षेत्र की आवश्यकता वाली प्रजाति; उसकी रक्षा से उसी क्षेत्र की अनेक प्रजातियाँ भी बचती हैं | बाघ, हिम तेंदुआ, हाथी |
| सूचक प्रजाति (Indicator) | पर्यावरणीय स्थिति/प्रदूषण का संकेत | लाइकेन (SO₂ वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील), मेंढक (जल व आवास गुणवत्ता) |
| स्थानिक प्रजाति (Endemic) | केवल एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाने वाली | नीलगिरि तहर, सिंहपुच्छी मकाक (पश्चिमी घाट) |
| आक्रामक विदेशी प्रजाति (Invasive alien) | बाहर से आकर तेज़ी से फैलने और स्थानीय प्रजातियों को हानि पहुँचाने वाली | पार्थेनियम, लैंटाना, जलकुंभी, विलायती बबूल |
एक ही प्रजाति कई वर्गों में आ सकती है — बाघ फ्लैगशिप भी है और अम्ब्रेला भी। इसलिए परीक्षा में परिभाषा पढ़कर उत्तर चुनें, केवल नाम देखकर नहीं।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: हॉटस्पॉट की दोनों शर्तें
"किसी क्षेत्र में 1,500 से अधिक स्थानिक पौधे हों तो वह हॉटस्पॉट है" — अधूरा, अतः गलत। साथ में मूल आवास का कम से कम 70% नष्ट होना भी आवश्यक है। साथ ही मानदंड स्थानिक संवहनी पौधों पर है, जंतुओं पर नहीं।
Trap 2: अंडमान बनाम निकोबार
अंडमान द्वीप समूह इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में और निकोबार द्वीप समूह सुंडालैंड हॉटस्पॉट में आते हैं। "सुंडालैंड में अंडमान" — गलत।
Trap 3: IUCN क्रम में VU और EN
खतरे का घटता क्रम: CR > EN > VU > NT > LC। Endangered, Vulnerable से अधिक गंभीर है। EW, CR से भी अधिक गंभीर है क्योंकि प्रजाति वन में बची ही नहीं।
Trap 4: "Threatened" में NT
Near Threatened, नाम के बावजूद, IUCN के "Threatened" समूह में नहीं आता। Threatened = CR + EN + VU।
Trap 5: बायोस्फीयर रिज़र्व in-situ है
बायोस्फीयर रिज़र्व, राष्ट्रीय उद्यान और पवित्र उपवन — तीनों स्व-स्थाने हैं। बीज बैंक, चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान और क्रायोप्रिज़र्वेशन बहि-स्थाने हैं। "वनस्पति उद्यान in-situ संरक्षण है" — गलत।
Trap 6: Keystone बनाम Flagship
Keystone का अर्थ पारिस्थितिक भूमिका से है, लोकप्रियता से नहीं। Flagship का अर्थ जन-जागरूकता से है। विशाल पांडा का उदाहरण फ्लैगशिप का है।
Trap 7: Evil Quartet में "प्रदूषण"
NCERT का Evil Quartet चार कारण गिनाता है — आवास क्षति व विखंडन, अति-दोहन, विदेशी प्रजातियाँ, सह-विलुप्ति। प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भी ह्रास के कारण हैं, पर "Evil Quartet" के चारों नामों में वे नहीं हैं।
Trap 8: अल्फा बनाम बीटा
अल्फा = एक समुदाय के भीतर; बीटा = समुदायों के बीच परिवर्तन; गामा = पूरे क्षेत्र का कुल। "बीटा विविधता एक ही तालाब के भीतर प्रजातियों की संख्या है" — गलत।
Trap 9: पैसेंजर कबूतर और नाइल पर्च
पैसेंजर कबूतर और स्टेलर समुद्री गाय → अति-दोहन; नाइल पर्च (विक्टोरिया झील) → विदेशी प्रजाति; डोडो → मॉरीशस। कारण और उदाहरण का मिलान उल्टा कराया जाता है।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | Biodiversity शब्द लोकप्रिय किया | एडवर्ड विल्सन |
| 2 | जैव विविधता के स्तर | आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय |
| 3 | सर्पगंधा में रेसरपीन भिन्नता | आनुवंशिक विविधता |
| 4 | पश्चिमी घाट में उभयचर अधिक (पूर्वी से) | प्रजातीय विविधता |
| 5 | भारत में मरुस्थल से प्रवाल भित्ति तक | पारितंत्रीय विविधता |
| 6 | समुदाय के भीतर विविधता | अल्फा |
| 7 | समुदायों के बीच परिवर्तन | बीटा |
| 8 | पूरे भू-क्षेत्र की विविधता | गामा |
| 9 | α-β-γ वर्गीकरण | व्हिटेकर |
| 10 | हॉटस्पॉट अवधारणा | नॉर्मन मायर्स (1988) |
| 11 | हॉटस्पॉट स्थानिक पौधे शर्त | ≥ 1,500 संवहनी पौधे |
| 12 | हॉटस्पॉट आवास क्षति शर्त | ≥ 70% नष्ट |
| 13 | हॉटस्पॉट मानदंड अपनाने वाली संस्था | कंज़र्वेशन इंटरनेशनल |
| 14 | निकोबार किस हॉटस्पॉट में | सुंडालैंड |
| 15 | अंडमान किस हॉटस्पॉट में | इंडो-बर्मा |
| 16 | पूर्वोत्तर भारत किस हॉटस्पॉट में | इंडो-बर्मा (और हिमालय) |
| 17 | सिंहपुच्छी मकाक का क्षेत्र | पश्चिमी घाट |
| 18 | भारत का विश्व भूमि में हिस्सा | लगभग 2.4% |
| 19 | उष्णकटिबंध में विविधता अधिक | स्थिर पर्यावरण, अधिक समय, अधिक सौर ऊर्जा |
| 20 | जाति-क्षेत्र संबंध | हम्बोल्ट |
| 21 | Z का सामान्य मान | 0.1–0.2 |
| 22 | Rivet popper | पॉल एर्लिच |
| 23 | विविधता और स्थिरता के प्रयोग | डेविड टिलमैन |
| 24 | Evil Quartet का प्रमुख कारण | आवास क्षति व विखंडन |
| 25 | स्टेलर समुद्री गाय विलुप्ति | अति-दोहन |
| 26 | विक्टोरिया झील में सिक्लिड विलुप्ति | नाइल पर्च (विदेशी प्रजाति) |
| 27 | पोषक के साथ परजीवी का विलोप | सह-विलुप्ति |
| 28 | डोडो | मॉरीशस |
| 29 | थायलेसीन | ऑस्ट्रेलिया |
| 30 | क्वागा | अफ्रीका |
| 31 | विलुप्त बाघ उप-प्रजातियाँ | बाली, जावा, कैस्पियन |
| 32 | "पृथ्वी के फेफड़े" | अमेज़न वर्षावन |
| 33 | गाजर घास | पार्थेनियम |
| 34 | "बंगाल का आतंक" | जलकुंभी (आइकॉर्निया) |
| 35 | राजस्थान की आक्रामक वृक्ष प्रजाति | विलायती बबूल (Prosopis juliflora) |
| 36 | IUCN स्थापना / मुख्यालय | 1948 / ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड |
| 37 | IUCN Threatened श्रेणियाँ | CR, EN, VU |
| 38 | केवल कैद में जीवित | EW (Extinct in the Wild) |
| 39 | CR का पूरा नाम | Critically Endangered |
| 40 | DD का अर्थ | आँकड़े अपर्याप्त |
| 41 | क्रायोप्रिज़र्वेशन | −196 °C, द्रव नाइट्रोजन |
| 42 | भारत का राष्ट्रीय जीन बैंक | NBPGR, नई दिल्ली |
| 43 | स्वालबार्ड सीड वॉल्ट | नॉर्वे |
| 44 | चिड़ियाघर, बीज बैंक | बहि-स्थाने (ex-situ) |
| 45 | राष्ट्रीय उद्यान, बायोस्फीयर रिज़र्व | स्व-स्थाने (in-situ) |
| 46 | राजस्थान में पवित्र उपवन | ओरण |
| 47 | मेघालय के पवित्र उपवन | खासी व जयंतिया पहाड़ियाँ |
| 48 | WWF का प्रतीक / फ्लैगशिप | विशाल पांडा |
| 49 | केल्प वन की कीस्टोन प्रजाति | समुद्री ऊदबिलाव |
| 50 | SO₂ प्रदूषण की सूचक | लाइकेन |
| 51 | राजस्थान का राज्य पक्षी (संकटग्रस्त) | गोडावण |
| 52 | जैव विविधता से आर्थिक उत्पादों की खोज | जैव-पूर्वेक्षण (bioprospecting) |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
Pattern 1: कथन आधारित
नमूना प्रश्न: जैव विविधता हॉटस्पॉट के संदर्भ में — (1) क्षेत्र में कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे होने चाहिए। (2) क्षेत्र अपने मूल आवास का कम से कम 70% खो चुका हो। (3) हॉटस्पॉट का निर्धारण केवल स्तनधारियों की स्थानिकता पर होता है।
उत्तर: केवल 1 और 2 सही।
Pattern 2: युग्म मिलान
नमूना प्रश्न: (a) निकोबार (b) अंडमान (c) अगस्त्यमलई क्षेत्र (d) सिक्किम — (i) पश्चिमी घाट (ii) हिमालय (iii) सुंडालैंड (iv) इंडो-बर्मा।
उत्तर: a-iii, b-iv, c-i, d-ii।
Pattern 3: वर्गीकरण
नमूना प्रश्न: निम्न में से कौन-सी विधि in-situ संरक्षण की नहीं है? (A) पवित्र उपवन (B) बायोस्फीयर रिज़र्व (C) बीज बैंक (D) राष्ट्रीय उद्यान।
उत्तर: (C)।
Pattern 4: क्रम
नमूना प्रश्न: खतरे के घटते क्रम में IUCN श्रेणियाँ?
उत्तर: CR → EN → VU → NT → LC।
Pattern 5: उदाहरण से कारण
नमूना प्रश्न: विक्टोरिया झील में सिक्लिड मछलियों की विलुप्ति का कारण Evil Quartet का कौन-सा घटक है?
उत्तर: विदेशी प्रजाति का आक्रमण (नाइल पर्च)।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
- हॉटस्पॉट = "1500 और 70" — "पंद्रह सौ पौधे, सत्तर प्रतिशत घाव"।
- भारत के 4 हॉटस्पॉट: "HI-WS" — Himalaya, Indo-Burma, Western Ghats, Sundaland।
- "अंडमान-इंडो, निकोबार-सुंडा" — दोनों में "ड/ड" ध्वनि नहीं मिलाएँ: "A-I, N-S"।
- Evil Quartet: "HOAC" — Habitat loss, Over-exploitation, Alien species, Co-extinction।
- IUCN क्रम: "EX-EW, CR-EN-VU, NT-LC" — "एक्स-वाइफ़ ने क्राय किया, एनर्जी वू, नॉट लेट"। बीच के तीन (CR-EN-VU) = Threatened।
- α-β-γ: "अंदर-बीच-ग्लोबल"।
- "−196 = नाइट्रोजन की ठंड" — क्रायोप्रिज़र्वेशन।
- Keystone = "मेहराब का पत्थर" — निकालो तो पूरा ढाँचा गिरे; Flagship = "झंडा" — प्रचार का चेहरा; Umbrella = "छाता" — नीचे सब बचें।
- पवित्र उपवन: "ओरण-देवराई-कावु" — राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल।
15. कथन अभ्यास
हॉटस्पॉट घोषित होने के लिए किसी क्षेत्र में कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे होने चाहिए। — सही।
निकोबार द्वीप समूह इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट का भाग है। — गलत (निकोबार सुंडालैंड में है; अंडमान इंडो-बर्मा में)।
IUCN की "Threatened" श्रेणी में Near Threatened भी शामिल है। — गलत (Threatened = CR, EN, VU)।
बीज बैंक बहि-स्थाने संरक्षण का उदाहरण है। — सही।
बायोस्फीयर रिज़र्व बहि-स्थाने संरक्षण का उदाहरण है। — गलत (यह स्व-स्थाने संरक्षण है)।
NCERT के अनुसार जैव विविधता ह्रास का सबसे प्रमुख कारण आवास क्षति और विखंडन है। — सही।
विक्टोरिया झील में सिक्लिड मछलियों की विलुप्ति का कारण अति-दोहन था। — गलत (कारण विदेशी प्रजाति नाइल पर्च का आगमन था)।
बीटा विविधता एक ही समुदाय के भीतर प्रजातियों की विविधता है। — गलत (यह अल्फा विविधता है; बीटा समुदायों के बीच परिवर्तन है)।
क्रायोप्रिज़र्वेशन में द्रव नाइट्रोजन का उपयोग −196 °C पर होता है। — सही।
राजस्थान में पवित्र उपवनों को "ओरण" कहा जाता है। — सही।
Rivet popper परिकल्पना डेविड टिलमैन ने दी। — गलत (यह पॉल एर्लिच ने दी; टिलमैन ने विविधता-स्थिरता प्रयोग किए)।
स्टेलर समुद्री गाय अति-दोहन के कारण विलुप्त हुई। — सही।
16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- जैव विविधता के 3 स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारितंत्रीय; शब्द लोकप्रिय — एडवर्ड विल्सन
- α = समुदाय के भीतर, β = समुदायों के बीच, γ = पूरे क्षेत्र का कुल
- उष्णकटिबंध में विविधता अधिक; अक्षांश बढ़ने पर घटती है
- हम्बोल्ट: log S = log C + Z log A; Z ≈ 0.1–0.2
- मायर्स (1988) हॉटस्पॉट: ≥ 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे + ≥ 70% आवास नष्ट
- भारत के 4 हॉटस्पॉट: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, सुंडालैंड
- अंडमान → इंडो-बर्मा; निकोबार → सुंडालैंड
- Evil Quartet: आवास क्षति, अति-दोहन, विदेशी प्रजाति, सह-विलुप्ति
- नाइल पर्च → सिक्लिड विलुप्ति; स्टेलर समुद्री गाय, पैसेंजर कबूतर → अति-दोहन
- IUCN (1948, ग्लैंड): EX, EW, CR, EN, VU, NT, LC (+ DD, NE)
- Threatened = CR + EN + VU
- In-situ: NP, अभयारण्य, BR, पवित्र उपवन; Ex-situ: चिड़ियाघर, बीज बैंक, वनस्पति उद्यान
- क्रायोप्रिज़र्वेशन −196 °C; NBPGR नई दिल्ली; स्वालबार्ड (नॉर्वे)
- पवित्र उपवन: ओरण (राजस्थान), देवराई (महाराष्ट्र), कावु (केरल), खासी-जयंतिया (मेघालय)
- Keystone = पारिस्थितिक भूमिका; Flagship = जन-आकर्षण; Umbrella = बड़ा क्षेत्र
17. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें — इसमें हॉटस्पॉट, IUCN श्रेणियाँ, Evil Quartet, in-situ/ex-situ और विशेष प्रजातियों के प्रश्न हैं। राजस्थान की वनस्पति और मृदा की पृष्ठभूमि के लिए भारत की मृदा और प्राकृतिक वनस्पति नोट भी देखें। परीक्षा-स्तरीय अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ या RSSB वनरक्षक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
जैव विविधता का अध्याय तीन प्रश्नों में सिमटता है — विविधता कहाँ और कितनी है (स्तर, प्रतिरूप, हॉटस्पॉट), वह क्यों घट रही है (Evil Quartet), और उसे कैसे बचाएँ (in-situ, ex-situ, समुदाय-आधारित संरक्षण)। हॉटस्पॉट की दोनों शर्तें, भारत के चार हॉटस्पॉट और अंडमान-निकोबार का अंतर, IUCN श्रेणियों का क्रम और Threatened समूह, तथा संरक्षण विधियों का वर्गीकरण — ये परीक्षा के स्थायी बिंदु हैं। गिनतियाँ (हॉटस्पॉट या प्रजातियों की संख्या) स्रोत और वर्ष के अनुसार बदलती हैं, इसलिए अवधारणाओं पर अधिक ध्यान दें।
आनुवंशिक-प्रजातीय-पारितंत्रीय | α अंदर, β बीच, γ कुल | मायर्स: 1500 + 70% | HI-WS हॉटस्पॉट, निकोबार = सुंडा | HOAC Evil Quartet | CR-EN-VU = Threatened | −196 °C | ओरण
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“जैव विविधता — स्तर, हॉटस्पॉट, Evil Quartet, IUCN रेड लिस्ट और in-situ/ex-situ संरक्षण — UPSC, RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- जैव विविधता, हॉटस्पॉट और IUCN — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- भारत के संरक्षित क्षेत्र और बायोस्फीयर रिज़र्व — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- पारितंत्र, खाद्य शृंखला और ऊर्जा प्रवाह — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- प्रदूषण के प्रकार, कारण और नियंत्रण — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
जैव विविधता आनुवंशिक (एक प्रजाति के भीतर जीनों की भिन्नता), प्रजातीय (प्रजातियों की संख्या और विविधता) और पारितंत्रीय (आवासों व समुदायों की विविधता) — इन तीन स्तरों पर देखी जाती है।
नॉर्मन मायर्स की अवधारणा के अनुसार किसी क्षेत्र में कम से कम 1,500 स्थानिक संवहनी पौधे हों और वह अपने मूल आवास का कम से कम 70% खो चुका हो। दोनों शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए।
भारत में चार हॉटस्पॉट के भाग आते हैं — हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, और सुंडालैंड। निकोबार द्वीप सुंडालैंड में और अंडमान द्वीप इंडो-बर्मा में आते हैं।
NCERT में जैव विविधता ह्रास के चार प्रमुख कारणों को Evil Quartet कहा गया है — आवास क्षति व विखंडन, अति-दोहन, विदेशी प्रजातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। इनमें आवास क्षति सबसे प्रमुख है।
खतरे के घटते क्रम में — Extinct (EX), Extinct in the Wild (EW), Critically Endangered (CR), Endangered (EN), Vulnerable (VU), Near Threatened (NT), Least Concern (LC); इनके अलावा Data Deficient (DD) और Not Evaluated (NE)।
Critically Endangered, Endangered और Vulnerable — ये तीन मिलकर Threatened समूह बनाती हैं। Near Threatened इसमें शामिल नहीं है।
in-situ संरक्षण प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास में बचाता है, जैसे राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिज़र्व। ex-situ संरक्षण आवास के बाहर होता है, जैसे चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक और क्रायोप्रिज़र्वेशन।
धार्मिक-सांस्कृतिक कारणों से समुदायों द्वारा सुरक्षित वन खंड, जहाँ पेड़ काटना या शिकार वर्जित है। NCERT के अनुसार ये खासी-जयंतिया पहाड़ियों, अरावली, पश्चिमी घाट और बस्तर-सरगुजा क्षेत्रों में मिलते हैं; राजस्थान में इन्हें ओरण कहते हैं।
कीस्टोन प्रजाति का पारितंत्र पर उसकी संख्या की तुलना में बहुत बड़ा प्रभाव होता है, फ्लैगशिप प्रजाति जन-समर्थन जुटाने वाली करिश्माई प्रजाति है, और अम्ब्रेला प्रजाति के बड़े आवास की रक्षा से अनेक अन्य प्रजातियाँ भी बचती हैं।
अल्फा विविधता एक समुदाय के भीतर, बीटा विविधता समुदायों के बीच प्रजातियों का परिवर्तन और गामा विविधता किसी बड़े भू-क्षेत्र की कुल विविधता है।
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