भारतीय संविधान की प्रस्तावना: उद्देश्य, शब्द एवं संशोधन
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं का संबंधित आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना: उद्देश्य, शब्द एवं संशोधन
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
⚡ Quick Answer: भारतीय संविधान की प्रस्तावना नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है और “हम, भारत के लोग” से शुरू होकर बताती है कि संविधान की शक्ति जनता से आती है। यह भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य घोषित करती है और चार उद्देश्य रखती है — न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना), समता (प्रतिष्ठा व अवसर) और बंधुता। प्रस्तावना में केवल एक बार संशोधन हुआ — 42वाँ संशोधन (1976) ने ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ व ‘अखंडता’ जोड़े। बेरुबारी (1960) में इसे संविधान का भाग नहीं, पर केशवानंद भारती (1973) में भाग माना गया; यह न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं है।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): 25 नवंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय (डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ) ने प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ व ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की माँग वाली याचिकाएँ खारिज कीं और कहा कि 1976 में जोड़े जाने से संसद की संशोधन-शक्ति प्रभावित नहीं होती (रिपोर्टों के अनुसार)। प्रस्तावना-पाठ अब स्कूलों व सरकारी आयोजनों में संविधान दिवस (26 नवंबर) पर नियमित होता है। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 प्रस्तावना — एक नज़र में
- आधार: नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव (1946)
- स्वरूप: संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य
- उद्देश्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता
- संशोधन: केवल एक बार — 42वाँ, 1976
- जोड़े गए शब्द: समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता
- भाग है या नहीं: भाग है — केशवानंद (1973), LIC (1995)
- प्रवर्तनीयता: न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं
1. प्रस्तावना का पूरा पाठ
“हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
2. प्रस्तावना के चार घटक
| घटक | प्रस्तावना में | अर्थ |
|---|---|---|
| अधिकार का स्रोत | “हम, भारत के लोग” | संविधान की शक्ति जनता से आती है |
| राज्य का स्वरूप | संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य | भारत किस प्रकार का राज्य है |
| उद्देश्य | न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता | संविधान क्या प्राप्त करना चाहता है |
| अंगीकरण तिथि | 26 नवंबर 1949 | संविधान कब अपनाया गया |
3. प्रमुख शब्दों का अर्थ
| शब्द | अर्थ | परीक्षा-बिंदु |
|---|---|---|
| संप्रभु (Sovereign) | भारत आंतरिक व बाह्य रूप से स्वतंत्र; किसी विदेशी सत्ता के अधीन नहीं | राष्ट्रमंडल सदस्यता संप्रभुता में बाधक नहीं |
| समाजवादी (Socialist) | लोकतांत्रिक समाजवाद — मिश्रित अर्थव्यवस्था, असमानता घटाना | 42वें संशोधन से जोड़ा |
| पंथनिरपेक्ष (Secular) | राज्य का कोई धर्म नहीं; सभी धर्मों को समान आदर (सकारात्मक पंथनिरपेक्षता) | 42वें संशोधन से जोड़ा; एस.आर. बोम्मई (1994) — मूल ढाँचा |
| लोकतांत्रिक (Democratic) | जनता द्वारा निर्वाचित सरकार; राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र भी | अप्रत्यक्ष/प्रतिनिधि लोकतंत्र |
| गणराज्य (Republic) | राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित, वंशानुगत नहीं | राष्ट्रपति अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित |
| न्याय | सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक | रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित |
| स्वतंत्रता | विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना | पूर्ण नहीं — युक्तियुक्त प्रतिबंध |
| समता | प्रतिष्ठा और अवसर की | अनु. 14–18 से जुड़ाव |
| बंधुता | व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता-अखंडता | फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित |
🎯 प्रस्तावना — अभ्यास
प्रस्तावना के शब्द, संशोधन व निर्णय हर परीक्षा में — टेस्ट सीरीज़ में परखें:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- REET लेवल-2 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- RPSC द्वितीय श्रेणी वरिष्ठ अध्यापक 2026 टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
4. प्रस्तावना में संशोधन — 42वाँ संशोधन (1976)
अब तक प्रस्तावना में केवल एक बार संशोधन हुआ है — 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 (स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशों पर, आपातकाल के दौरान)। इसमें तीन शब्द जोड़े गए: “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता” (“राष्ट्र की एकता” को “राष्ट्र की एकता और अखंडता” किया गया)। 42वें संशोधन को “लघु संविधान” (Mini Constitution) कहा जाता है। 44वें संशोधन (1978) ने इसके कई प्रावधान पलटे, पर प्रस्तावना के ये शब्द यथावत रहे।
5. प्रस्तावना — संविधान का भाग है या नहीं? (न्यायिक दृष्टि)
| मामला | वर्ष | निर्णय |
|---|---|---|
| बेरुबारी संघ (राष्ट्रपति का संदर्भ) | 1960 | प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं; पर निर्माताओं के विचार समझने की कुंजी |
| केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य | 1973 | प्रस्तावना संविधान का भाग है; संशोधन संभव पर ‘मूल ढाँचा’ नहीं बदल सकते |
| एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ | 1994 | पंथनिरपेक्षता संविधान के मूल ढाँचे का भाग |
| LIC ऑफ़ इंडिया बनाम कंज़्यूमर एजुकेशन सेंटर | 1995 | प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग — पुनः पुष्टि |
| डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ | 2024 | ‘समाजवादी’ व ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की याचिकाएँ खारिज (रिपोर्टों के अनुसार) |
6. विद्वानों के कथन
| विद्वान | प्रस्तावना को कहा |
|---|---|
| के.एम. मुंशी | “राजनीतिक कुंडली” (Political Horoscope) |
| ठाकुरदास भार्गव | “संविधान की आत्मा” |
| एन.ए. पालकीवाला | “संविधान का पहचान-पत्र” (Identity Card) |
| अर्नेस्ट बार्कर | “संविधान का मूल-स्वर” (Key-note) |
| एम. हिदायतुल्ला | “संविधान की आत्मा”, अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा के समान |
| सर अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर | “हमारे दीर्घकालीन सपनों का विचार” |
7. प्रस्तावना की प्रकृति
- प्रवर्तनीय नहीं: इसके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय नहीं जा सकते।
- शक्ति का स्रोत नहीं: विधायिका को शक्ति नहीं देती, न शक्तियों पर रोक लगाती है।
- व्याख्या में सहायक: अस्पष्ट अनुच्छेदों की व्याख्या में न्यायालय प्रस्तावना देखते हैं।
- संशोधनीय: अनु. 368 के तहत, पर मूल ढाँचे को छेड़े बिना।
- अमेरिकी संविधान से प्रेरित: प्रस्तावना का विचार अमेरिका से; भाषा ऑस्ट्रेलिया से प्रभावित मानी जाती है।
संबंधित: भारतीय संविधान का निर्माण: संविधान सभा, समितियाँ एवं तिथियाँ | मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 35 | नीति निदेशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्य | राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियाँ: तुलना
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| शब्द-क्रम | SSSDR | खंड 1 |
| अर्थ | पंथनिरपेक्ष, गणराज्य | खंड 3 |
| संशोधन | 42वाँ, 1976 | खंड 4 |
| निर्णय | बेरुबारी, केशवानंद | खंड 5 |
| कथन | मुंशी, पालकीवाला | खंड 6 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
प्रस्तावना में कितनी बार संशोधन हुआ है?
केवल एक बार — 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा, जिसमें समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए।
क्या प्रस्तावना संविधान का भाग है?
हाँ — केशवानंद भारती (1973) और LIC (1995) मामलों में; बेरुबारी (1960) में इसे भाग नहीं माना गया था।
प्रस्तावना में कौन-से शब्द हैं?
संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य; न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता; एकता और अखंडता।
प्रस्तावना को संविधान की आत्मा किसने कहा?
ठाकुरदास भार्गव ने; के.एम. मुंशी ने ‘राजनीतिक कुंडली’ और पालकीवाला ने ‘पहचान-पत्र’ कहा।
क्या प्रस्तावना न्यायालय में लागू कराई जा सकती है?
नहीं — यह प्रवर्तनीय नहीं है, पर अस्पष्ट प्रावधानों की व्याख्या में सहायक है।
📝 अभ्यास MCQ (12 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
प्रस्तावना में अब तक कितनी बार संशोधन हुआ है?
(A) कभी नहीं (B) तीन बार (C) एक बार (42वाँ संशोधन, 1976) (D) दो बार
✅ उत्तर: (C) एक बार (42वाँ संशोधन, 1976) — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता जोड़े गए।
42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए शब्द —
(A) समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता (B) संप्रभु, लोकतांत्रिक, गणराज्य (C) न्याय, स्वतंत्रता, समता (D) बंधुता, गरिमा, एकता
✅ उत्तर: (A) समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता — ‘एकता’ पहले से था, ‘अखंडता’ जोड़ा गया।
किस निर्णय में कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है?
(A) LIC ऑफ़ इंडिया (1995) (B) मिनर्वा मिल्स (1980) (C) बेरुबारी संघ मामला (1960) (D) केशवानंद भारती (1973)
✅ उत्तर: (C) बेरुबारी संघ मामला (1960) — केशवानंद में यह राय पलटी।
प्रस्तावना को संविधान का भाग मानने वाला निर्णय —
(A) ए.के. गोपालन (1950) (B) केशवानंद भारती (1973) (C) बेरुबारी (1960) (D) गोलकनाथ (1967)
✅ उत्तर: (B) केशवानंद भारती (1973) — 1995 के LIC मामले में पुनः पुष्टि।
प्रस्तावना में ‘न्याय’ के कितने रूप हैं?
(A) पाँच (B) एक (C) तीन — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक (D) दो
✅ उत्तर: (C) तीन — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक — रूसी क्रांति से प्रेरित।
प्रस्तावना में ‘स्वतंत्रता’ किसकी है?
(A) आवागमन, निवास (B) शिक्षा, स्वास्थ्य (C) विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना (D) व्यापार, व्यवसाय, संपत्ति
✅ उत्तर: (C) विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना — पाँच प्रकार।
प्रस्तावना को संविधान की ‘राजनीतिक कुंडली’ किसने कहा?
(A) के.एम. मुंशी (B) एन.ए. पालकीवाला (C) ठाकुरदास भार्गव (D) अर्नेस्ट बार्कर
✅ उत्तर: (A) के.एम. मुंशी — पालकीवाला — ‘पहचान-पत्र’।
प्रस्तावना में उल्लिखित तिथि —
(A) 26 नवंबर 1949 (B) 26 जनवरी 1950 (C) 15 अगस्त 1947 (D) 9 दिसंबर 1946
✅ उत्तर: (A) 26 नवंबर 1949 — अंगीकरण की तिथि।
प्रस्तावना के अनुसार संविधान के अधिकार का स्रोत —
(A) संविधान सभा (B) भारत के लोग (C) संसद (D) राष्ट्रपति
✅ उत्तर: (B) भारत के लोग — “हम, भारत के लोग…”।
नवंबर 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने किस विषय की याचिकाएँ खारिज कीं?
(A) प्रस्तावना में नया शब्द जोड़ना (B) प्रस्तावना को हटाना (C) प्रस्तावना का अनुवाद (D) प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ व ‘पंथनिरपेक्ष’ हटाने की माँग
✅ उत्तर: (D) प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ व ‘पंथनिरपेक्ष’ हटाने की माँग — 42वें संशोधन की वैधता बरकरार।
प्रस्तावना न्यायालय में —
(A) केवल राज्यों पर लागू (B) प्रवर्तनीय नहीं (non-justiciable), पर व्याख्या में सहायक (C) पूर्णतः प्रवर्तनीय (D) मौलिक अधिकार
✅ उत्तर: (B) प्रवर्तनीय नहीं (non-justiciable), पर व्याख्या में सहायक — अस्पष्ट प्रावधानों की व्याख्या में मार्गदर्शक।
प्रस्तावना का आधार —
(A) 1935 का अधिनियम (B) नेहरू रिपोर्ट 1928 (C) क्रिप्स प्रस्ताव (D) नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव
✅ उत्तर: (D) नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव — 13 दिसंबर 1946।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- आधार — उद्देश्य प्रस्ताव
- संशोधन — केवल 42वाँ (1976)
- जोड़े शब्द — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता
- भाग नहीं — बेरुबारी 1960
- भाग है — केशवानंद 1973
- राजनीतिक कुंडली — के.एम. मुंशी
- पहचान-पत्र — पालकीवाला
- प्रस्तावना की तिथि — 26.11.1949
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- शक्ति का स्रोत — भारत के लोग।
- न्याय का विचार रूसी क्रांति से; स्वतंत्रता-समता-बंधुता फ्रांसीसी क्रांति से।
- पंथनिरपेक्षता मूल ढाँचे का भाग (बोम्मई 1994)।
- प्रस्तावना संशोधनीय, पर मूल ढाँचा नहीं।
- प्रवर्तनीय नहीं, व्याख्या में सहायक।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- ‘एकता’ मूल में था — केवल ‘अखंडता’ जोड़ा गया।
- 26 नवंबर 1949 प्रस्तावना में; 26 जनवरी नहीं।
- स्वतंत्रता में ‘व्यवसाय’ नहीं — वह अनु. 19 में।
- समता — ‘प्रतिष्ठा और अवसर की’; ‘आय की’ नहीं।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- स्वरूप — “SSSDR”: Sovereign, Socialist, Secular, Democratic, Republic → “संप्रभु-समाज-पंथ-लोक-गण”।
- उद्देश्य — “JLEF” = “न्या-स्व-स-बं”: Justice, Liberty, Equality, Fraternity।
- न्याय के 3 — “SEP”: Social, Economic, Political।
- स्वतंत्रता के 5 — “वि-अ-वि-ध-उ”: विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना।
- 42वें संशोधन के 3 शब्द — “स-प-अ”: समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता (“सपा” याद रखें + अखंडता)।
- मामले — “बेरु-नहीं, केशव-हाँ, LIC-हाँ”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
प्रस्तावना को रोज़ एक बार ज़ोर से पढ़ें — दस दिन में शब्द-क्रम अपने-आप याद हो जाएगा। परीक्षा में शब्दों का क्रम बदलकर पूछा जाता है (जैसे ‘लोकतांत्रिक पंथनिरपेक्ष’), इसलिए सही क्रम ‘समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक’ पक्का करें।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
भारतीय संविधान की प्रस्तावना पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- REET लेवल-2 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- RPSC द्वितीय श्रेणी वरिष्ठ अध्यापक 2026 टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान सामान्य ज्ञान अभ्यास प्रश्नोत्तरी
पूरी भारतीय राजव्यवस्था इकाई: भारतीय राजव्यवस्था — सभी नोट्स | राजस्थान राजव्यवस्था: राजस्थान राजव्यवस्था — सभी नोट्स | संवैधानिक संशोधन व न्यायिक निर्णयों के अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स | सभी टेस्ट: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़
📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
- भारतीय संविधान का निर्माण: संविधान सभा, समितियाँ एवं तिथियाँ
- मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 35
- नीति निदेशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्य
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियाँ: तुलना
- राजस्थान राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण अनुच्छेद: 100+ MCQ Facts
- राजस्थान की राजव्यवस्था: संपूर्ण परिचय
- राजस्थान राजव्यवस्था के 100 महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान राजव्यवस्था Mock Test — 50 प्रश्न
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- भारत का संविधान — प्रस्तावना (विधि एवं न्याय मंत्रालय)।
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973); बेरुबारी संदर्भ (1960); LIC (1995); एस.आर. बोम्मई (1994)।
- डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ (नवंबर 2024) — समाचार-रिपोर्टें।
- 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976।

🔥 2026 भर्ती परीक्षा: सिर्फ नोट्स पढ़ना काफी नहीं — वास्तविक परीक्षा में 120+ स्कोर के लिए फुल मॉक टेस्ट हल करें!
RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- 100% नवीनतम 2026 परीक्षा पैटर्न व OMR 5th Option आधारित
- All-Rajasthan रैंक और विस्तृत व्याख्या सहित उत्तर
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. प्रस्तावना में अब तक कितनी बार संशोधन हुआ है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए शब्द —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. किस निर्णय में कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. प्रस्तावना को संविधान का भाग मानने वाला निर्णय —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. प्रस्तावना में ‘न्याय’ के कितने रूप हैं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
एक बार — 42वाँ संशोधन 1976।
समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता।
केशवानंद भारती (1973)।
के.एम. मुंशी।
नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: