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भारत का इतिहास

दिल्ली सल्तनत (1206–1526) — पाँच वंश, प्रमुख शासक, प्रशासन, स्थापत्य व पानीपत — UPSC/RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
23 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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संक्षिप्त उत्तर: दिल्ली सल्तनत (1206–1526 ई.) में पाँच वंशों ने शासन किया — गुलाम/मामलूक (1206–1290), खिलजी (1290–1320), तुगलक (1320–1414), सैयद (1414–1451) और लोदी (1451–1526)। इसकी नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने रखी, पर इसका वास्तविक संगठक इल्तुतमिश था, जिसने राजधानी दिल्ली बनाई, इक्ता व्यवस्था और तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा) को संगठित किया तथा चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल चलाया। रज़िया सल्तनत की एकमात्र महिला शासक थी; बलबन ने सिजदा-पैबोस और लौह-रक्त (खून और लोहा) की नीति अपनाई। अलाउद्दीन खिलजी ने बाज़ार नियंत्रण, दाग-हुलिया और मलिक काफूर के दक्षिण अभियान चलाए; मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी परिवर्तन (दिल्ली → दौलताबाद) और सांकेतिक मुद्रा के प्रयोग किए, जिनके समय मोरक्को का यात्री इब्न बतूता आया। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने नहरें बनवाईं और ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। 1398 में तैमूर ने दिल्ली लूटी और 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर सल्तनत का अंत किया।


संक्षिप्त उत्तर

वंशकालसंस्थापकअंतिम शासकसबसे प्रसिद्ध शासक
गुलाम / मामलूक1206–1290कुतुबुद्दीन ऐबककैकुबाद / क्यूमर्सइल्तुतमिश, बलबन
खिलजी1290–1320जलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजीकुतुबुद्दीन मुबारक शाह (अंतिम खिलजी); फिर खुसरो ख़ाँ (सत्ता हड़पने वाला)अलाउद्दीन खिलजी
तुगलक1320–1414गयासुद्दीन तुगलक (ग़ाज़ी मलिक)नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलकमुहम्मद बिन तुगलक, फ़िरोज़ शाह
सैयद1414–1451ख़िज्र खाँअलाउद्दीन आलम शाहख़िज्र खाँ
लोदी1451–1526बहलोल लोदीइब्राहिम लोदीसिकंदर लोदी
तथ्यउत्तर
तराइन का द्वितीय युद्ध (सल्तनत की पृष्ठभूमि)1192 — मुहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया
सल्तनत का संस्थापककुतुबुद्दीन ऐबक (1206)
वास्तविक संस्थापक / संगठकइल्तुतमिश
एकमात्र महिला शासकरज़िया सुल्तान (1236–1240)
पहला अफ़गान वंशलोदी वंश
सबसे लंबा शासन करने वाला वंशतुगलक वंश (1320–1414)
तैमूर का आक्रमण1398
सल्तनत का अंतपानीपत का प्रथम युद्ध, 21 अप्रैल 1526

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

दिल्ली सल्तनत मध्यकालीन भारत का पहला बड़ा अध्याय है। इसमें शासकों की नीतियाँ (बाज़ार नियंत्रण, सांकेतिक मुद्रा), प्रशासनिक शब्दावली (इक्ता, दीवान, खराज, जज़िया), स्थापत्य (कुतुब मीनार, अलाई दरवाज़ा) और फ़ारसी स्रोत (बरनी, अमीर खुसरो, इब्न बतूता) — चारों से प्रश्न बनते हैं। राजस्थान की परीक्षाओं में अलाउद्दीन के रणथंभौर, चित्तौड़ और जालौर अभियान तथा अजमेर का अढ़ाई दिन का झोंपड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — प्रशासनिक शब्द, स्थापत्य, कथन-आधारित नीतियाँ
  • RPSC RAS — अलाउद्दीन के राजस्थान अभियान, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा, प्रशासन
  • SSC CGL / CHSL — वंश-संस्थापक, स्मारक-निर्माता, ग्रंथ-लेखक
  • राजस्थान CET (स्नातक) — कालक्रम और एक-पंक्ति तथ्य
  • RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक — नीतियों का विश्लेषण

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. शासक–सुधार का मिलान (दाग-हुलिया, सिजदा-पैबोस, दीवान-ए-कोही, दीवान-ए-ख़ैरात)
  2. वंशों और शासकों का कालक्रम
  3. स्मारक–निर्माता (अलाई दरवाज़ा, तुगलकाबाद, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा)
  4. ग्रंथ–लेखक (तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही, तबकात-ए-नासिरी, ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह, रेहला)
  5. कथन-आधारित — मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग, फ़िरोज़ की धार्मिक नीति
  6. अभिकथन-कारण — अलाउद्दीन के बाज़ार सुधारों का उद्देश्य

3. पृष्ठभूमि — तुर्कों का आगमन

घटनावर्षपरिणाम
तराइन का प्रथम युद्ध1191पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) ने मुहम्मद ग़ोरी को हराया
तराइन का द्वितीय युद्ध1192ग़ोरी विजयी; उत्तर भारत में तुर्की सत्ता की नींव
चंदावर का युद्ध1194ग़ोरी ने कन्नौज के जयचंद (गहड़वाल) को हराया
ग़ोरी की मृत्यु1206उसके भारतीय प्रदेशों पर ऐबक का स्वतंत्र शासन — सल्तनत का आरंभ

4. गुलाम / मामलूक वंश (1206–1290)

नाम पर टिप्पणी: इस वंश को "गुलाम वंश" कहा जाता है क्योंकि ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन — तीनों आरंभ में दास (गुलाम) थे। पर वास्तव में ये तीन अलग-अलग परिवार थे — कुत्बी (ऐबक), शम्सी (इल्तुतमिश) और बलबनी (बलबन)। इसलिए कई इतिहासकार इसे "मामलूक वंश" या "आरंभिक तुर्क शासक" कहना अधिक उचित मानते हैं।

4.1 कुतुबुद्दीन ऐबक (1206–1210)

  • मुहम्मद ग़ोरी का दास और सेनापति; ग़ोरी की मृत्यु के बाद स्वतंत्र शासक।
  • राजधानी लाहौर।
  • उदार दान के कारण "लाख बख़्श" कहलाया।
  • दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया।
  • कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ किया।
  • 1210 में लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरकर मृत्यु।

4.2 इल्तुतमिश (1210–1236)

उपलब्धिविवरण
राजधानीलाहौर से दिल्ली स्थानांतरित
प्रतिद्वंद्वियों का दमनयल्दौज़ और कुबाचा जैसे प्रतिद्वंद्वियों को हराया
मंगोल संकटलगभग 1221 में चंगेज़ ख़ाँ ख़्वारिज़्म के राजकुमार जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु तक आया; इल्तुतमिश ने मंगबरनी को शरण न देकर सल्तनत को मंगोलों से बचाया
ख़लीफ़ा से मान्यता1229 में बग़दाद के अब्बासी ख़लीफ़ा से अधिकार-पत्र (मंशूर)
इक्ता व्यवस्थासैनिक-अधिकारियों को वेतन के बदले भूमि-राजस्व वसूलने के क्षेत्र (इक्ता) देना — व्यवस्थित रूप दिया
चालीसातुर्कान-ए-चहलगानी — 40 तुर्क सरदारों का दल
मुद्राचाँदी का टंका और ताँबे का जीतल — अरबी सिक्कों को मानक रूप दिया
स्थापत्यकुतुब मीनार पूरी की; सुल्तान ग़ारी का मक़बरा (पुत्र नासिरुद्दीन महमूद के लिए) बनवाया; अपना मक़बरा कुतुब परिसर में
उत्तराधिकारपुत्री रज़िया को उत्तराधिकारी नामित किया

4.3 रज़िया सुल्तान (1236–1240)

  • दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला शासक।
  • पर्दा त्यागकर पुरुषों जैसा वस्त्र (क़बा, कुलाह) पहनकर दरबार में बैठी।
  • अबीसीनियाई (हब्शी) जलालुद्दीन याक़ूत को अमीर-ए-आख़ूर (अश्वशाला का प्रमुख) बनाया — तुर्क सरदार नाराज़।
  • भटिंडा के इक्तादार अल्तूनिया ने विद्रोह किया; रज़िया ने उससे विवाह किया।
  • 1240 में सरदारों के विरोध के बीच उसकी हत्या हुई।

4.4 नासिरुद्दीन महमूद (1246–1266)

इल्तुतमिश का पुत्र (या पौत्र — स्रोतों में मत-भेद); वास्तविक सत्ता उसके नायब बलबन (उलुग ख़ाँ) के हाथ में थी। इतिहासकार मिन्हाज-उस-सिराज ने अपना ग्रंथ तबकात-ए-नासिरी इसी को समर्पित किया।

4.5 ग़यासुद्दीन बलबन (1266–1287)

नीति / सुधारविवरण
राजत्व सिद्धांतसुल्तान "ज़िल्ल-ए-इलाही" (ईश्वर की छाया) और "नियाबत-ए-ख़ुदाई" (पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि)
दरबारी शिष्टाचारसिजदा (भूमि पर झुककर प्रणाम) और पैबोस (सुल्तान के पैर चूमना) — ईरानी परंपरा; ईरानी त्योहार नौरोज़ मनाना
लौह-रक्त नीति"खून और लोहा" — विद्रोहियों और डाकुओं (मेवाती) का कठोर दमन
चालीसा का अंततुर्कान-ए-चहलगानी की शक्ति तोड़ी
सैन्य विभागदीवान-ए-अर्ज़ की स्थापना (प्रमुख: आरिज़-ए-मुमालिक)
गुप्तचरबरीद (सूचना-अधिकारी) की व्यवस्था सुदृढ़
विद्रोह-दमनबंगाल में तुग़रिल ख़ाँ का विद्रोह कुचला
व्यक्तिगत आघातबड़ा पुत्र मुहम्मद मंगोलों से लड़ते हुए मारा गया (1285); अमीर खुसरो उसी की सेवा में था

बलबन के बाद कैकुबाद और क्यूमर्स कमज़ोर शासक रहे और 1290 में जलालुद्दीन खिलजी ने सत्ता ले ली।


5. खिलजी वंश (1290–1320)

खिलजियों के सत्ता में आने को "खिलजी क्रांति" कहा जाता है, क्योंकि इससे तुर्क अभिजात वर्ग का एकाधिकार टूटा और सत्ता में व्यापक वर्गों की भागीदारी बढ़ी।

5.1 जलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजी (1290–1296)

नरम और उदार नीति के लिए जाना गया। 1296 में उसके भतीजे और दामाद अलाउद्दीन ने कड़ा (कड़ा-मानिकपुर) में उसकी हत्या कर सत्ता हथिया ली। इससे पहले अलाउद्दीन ने देवगिरि (रामचंद्र देव) पर धावा बोलकर भारी धन प्राप्त किया था।

5.2 अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316)

(क) विजय-अभियान

अभियानवर्षशासक / टिप्पणी
गुजरात1299बघेल शासक कर्ण; इसी अभियान में मलिक काफूर प्राप्त हुआ
रणथंभौर1301हम्मीर देव चौहान
चित्तौड़1303रावल रतन सिंह; चित्तौड़ का नाम पुत्र ख़िज्र ख़ाँ के नाम पर "ख़िज्राबाद"
मालवा1305—
सिवाना1308शीतलदेव
जालौर1311कान्हड़देव

पद्मिनी कथा पर टिप्पणी: रानी पद्मिनी की कथा मुख्यतः मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत (1540) से लोकप्रिय हुई, जो घटना के दो शताब्दी से अधिक बाद की साहित्यिक रचना है। इसकी ऐतिहासिकता पर इतिहासकारों में मत-भेद है।

(ख) दक्षिण अभियान — मलिक काफूर

राज्यराजधानीशासकवर्ष (लगभग)
यादवदेवगिरिरामचंद्र देव1307–08
काकतीयवारंगलप्रतापरुद्र देव1309–10
होयसलद्वारसमुद्रवीर बल्लाल तृतीय1310–11
पांड्यमदुरै— (उत्तराधिकार-संघर्ष के बीच)1311

दक्षिण के राज्यों को प्रायः सीधे साम्राज्य में नहीं मिलाया गया; उनसे भारी धन और वार्षिक कर लेकर अधीनता स्वीकार कराई गई।

(ग) बाज़ार नियंत्रण (मूल्य नियंत्रण)

मुख्य स्रोत ज़ियाउद्दीन बरनी है। उद्देश्य — बड़ी स्थायी सेना को कम वेतन पर बनाए रखना, ताकि मंगोल आक्रमणों का सामना हो सके।

व्यवस्थाविवरण
अलग-अलग बाज़ारअनाज मंडी; कपड़े और महँगी वस्तुओं के लिए सराय-ए-अद्ल; घोड़े, दास और पशुओं के बाज़ार
शहना-ए-मंडीबाज़ार का अधीक्षक
दीवान-ए-रियासतबाज़ार-व्यवस्था देखने वाला विभाग
मुनहियान / बरीदगुप्तचर — बाज़ार की गुप्त सूचना
भंडारणसरकारी गोदामों में अनाज का संग्रह; अकाल में राशन
दंडकम तौलने या अधिक मूल्य लेने पर कठोर दंड

(घ) सैन्य और राजस्व सुधार

सुधारविवरण
स्थायी सेनानक़द वेतन पाने वाली बड़ी स्थायी सेना
दागघोड़ों को दागना — ताकि घटिया घोड़े न बदले जा सकें
हुलिया (चेहरा)सैनिकों का विवरण-पत्र (रूप-रंग का लेखा)
भू-राजस्वउपज का आधा (50%); भूमि की पैमाइश (मसाहत) के आधार पर
नए करचराई (दुधारू पशुओं पर) और घरी (घरों पर)
दीवान-ए-मुस्तख़राजबकाया राजस्व की वसूली का विभाग
बिचौलियों पर अंकुशखुत, मुक़द्दम, चौधरी जैसे ग्रामीण मध्यस्थों के विशेषाधिकार घटाए

(ङ) अन्य तथ्य

  • सिक्कों पर "सिकंदर-ए-सानी" (दूसरा सिकंदर) की उपाधि।
  • मंगोल आक्रमणों को सफलतापूर्वक रोका।
  • स्थापत्य: अलाई दरवाज़ा (1311), सीरी का क़िला-नगर, हौज़-ए-अलाई (हौज़ ख़ास); अलाई मीनार अधूरी।
  • दरबारी कवि अमीर खुसरो — ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह में अलाउद्दीन की विजयों का वर्णन।

अलाउद्दीन के बाद मुबारक शाह और फिर खुसरो ख़ाँ ने शासन किया; 1320 में ग़ाज़ी मलिक ने खुसरो ख़ाँ को हटाकर तुगलक वंश स्थापित किया।


6. तुगलक वंश (1320–1414)

6.1 ग़यासुद्दीन तुगलक (1320–1325)

  • मूल नाम ग़ाज़ी मलिक; तुगलक वंश का संस्थापक।
  • तुगलकाबाद का क़िला-नगर बनवाया; उसका मक़बरा ढलवाँ (तिरछी) दीवारों के लिए प्रसिद्ध।
  • किसानों के प्रति अपेक्षाकृत नरम राजस्व नीति।
  • उसके पुत्र जौना ख़ाँ (बाद में मुहम्मद बिन तुगलक) ने वारंगल को सल्तनत में मिलाया।
  • 1325 में अफ़गानपुर में एक लकड़ी के मंडप के गिरने से मृत्यु — इस घटना की परिस्थितियों पर इतिहासकारों को संदेह रहा है।

6.2 मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351)

मूल नाम जौना ख़ाँ (उलुग ख़ाँ)। विद्वान, बहुभाषी और नवाचारी, पर उसकी योजनाएँ क्रियान्वयन में विफल रहीं। उसकी योजनाओं को परीक्षा में "पाँच प्रयोग" के रूप में पूछा जाता है:

योजनावर्ष (लगभग)उद्देश्यपरिणाम
दोआब में कर-वृद्धिशासन के आरंभिक वर्षराजस्व बढ़ानाउसी समय अकाल पड़ा; किसानों का विद्रोह और पलायन
राजधानी परिवर्तन1327दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) — दक्षिण पर बेहतर नियंत्रण, केंद्रीय स्थितिजनता को भारी कष्ट; कुछ वर्षों बाद लोग दिल्ली लौटे
सांकेतिक मुद्रा1329–30चाँदी की कमी; ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर चलानाबड़े पैमाने पर जाली सिक्के; योजना वापस, सरकारी कोष से सिक्के बदले गए
ख़ुरासान अभियान—मध्य एशिया पर विजय की योजनाविशाल सेना भर्ती की गई, पर अभियान नहीं हुआ; सेना भंग — भारी व्यय
क़राचिल अभियान—कुमाऊँ-गढ़वाल (हिमालयी) क्षेत्रसेना को भारी हानि
  • कृषि के लिए दीवान-ए-कोही (दीवान-ए-अमीर-ए-कोही) विभाग बनाया और किसानों को ऋण (सोंधर/तक़ावी) दिया।
  • मोरक्को का यात्री इब्न बतूता 1333 में आया; सुल्तान ने उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया और 1342 में राजदूत बनाकर चीन भेजा। उसका यात्रा-वृत्तांत रेहला (अरबी) है।
  • उसके शासन के अंत में दक्षिण में विजयनगर (1336, हरिहर-बुक्का) और बहमनी (1347, हसन गंगू / अलाउद्दीन बहमन शाह) राज्य स्थापित हुए।
  • 1351 में सिंध के थट्टा में विद्रोही तग़ी का पीछा करते समय मृत्यु।

6.3 फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351–1388)

क्षेत्रनीति / कार्य
कर-नीतिशरीयत के अनुसार चार कर — ख़राज (भूमि-कर), ख़म्स (युद्ध-लूट का 1/5), जज़िया, ज़कात; सिंचाई कर (हक़-ए-शर्ब) भी लिया
जज़ियाब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया, जो पहले इससे मुक्त थे
सिंचाईअनेक नहरें — यमुना और सतलज से; इनमें पश्चिमी यमुना नहर से जुड़ी नहर (हिसार की ओर) प्रसिद्ध
कल्याण विभागदीवान-ए-ख़ैरात (दान, निर्धन कन्याओं के विवाह हेतु सहायता); दार-उल-शफ़ा (अस्पताल); बेरोज़गारों के लिए रोज़गार की व्यवस्था
दास विभागदीवान-ए-बंदगान — बड़ी संख्या में दास
नगरफ़िरोज़ाबाद (दिल्ली — फ़िरोज़ शाह कोटला), हिसार, फ़तेहाबाद, जौनपुर
अशोक स्तंभटोपरा और मेरठ से अशोक के दो स्तंभ दिल्ली मँगवाए
अनुवादसंस्कृत ग्रंथों का फ़ारसी में अनुवाद कराया
प्रशासनिक दोषपद और इक्ता वंशानुगत किए; सेना की कार्यक्षमता घटी
आत्मकथाफ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही
कुतुब मीनारबिजली गिरने से क्षतिग्रस्त मीनार की मरम्मत कराई

6.4 तैमूर का आक्रमण (1398)

फ़िरोज़ के बाद कमज़ोर उत्तराधिकारियों के समय मध्य एशिया के शासक तैमूर ने 1398 में आक्रमण किया। उस समय दिल्ली का सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक था। तैमूर ने दिल्ली को लूटा और भारी नरसंहार किया; लौटते समय ख़िज्र ख़ाँ को मुल्तान (पंजाब क्षेत्र) का अधिकारी नियुक्त किया। इसके बाद सल्तनत एक क्षेत्रीय राज्य भर रह गई।


7. सैयद वंश (1414–1451) और लोदी वंश (1451–1526)

7.1 सैयद वंश

  • संस्थापक ख़िज्र ख़ाँ — उसने "सुल्तान" की उपाधि नहीं ली, "रैयत-ए-आला" कहलाया और स्वयं को तैमूर के उत्तराधिकारी (शाहरुख़) का प्रतिनिधि माना।
  • मुबारक शाह — उसके समय याह्या बिन अहमद सरहिंदी ने तारीख़-ए-मुबारकशाही लिखी।
  • अंतिम शासक अलाउद्दीन आलम शाह ने 1451 में दिल्ली बहलोल लोदी को सौंप दी और बदायूँ चला गया।

7.2 लोदी वंश — पहला अफ़गान वंश

शासककालमुख्य तथ्य
बहलोल लोदी1451–1489संस्थापक; अफ़गान सरदारों के साथ बराबरी का व्यवहार; जौनपुर की शर्की सल्तनत को जीता; "बहलोली" सिक्के
सिकंदर लोदी1489–1517लोदियों में सबसे योग्य; आगरा नगर की स्थापना (लगभग 1504) और उसे राजधानी बनाया; भूमि-माप के लिए गज़-ए-सिकंदरी; "गुलरुख़ी" उपनाम से फ़ारसी कविता
इब्राहिम लोदी1517–1526अफ़गान सरदारों से संघर्ष; मेवाड़ के राणा सांगा से संघर्ष; पंजाब के सूबेदार दौलत ख़ाँ लोदी और चाचा आलम ख़ाँ ने बाबर को आमंत्रित किया

7.3 पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रैल 1526)

बिंदुतथ्य
पक्षबाबर बनाम इब्राहिम लोदी
परिणामबाबर विजयी; इब्राहिम लोदी युद्धभूमि में मारा गया — युद्ध में मरने वाला दिल्ली का एकमात्र सुल्तान
बाबर की रणनीतितुलुग़मा (सेना को घेरने की पद्धति) और तोपख़ाना — तोपची उस्ताद अली और मुस्तफ़ा
महत्वदिल्ली सल्तनत का अंत; मुग़ल साम्राज्य का आरंभ

आगे का इतिहास — बाबर से औरंगज़ेब तक — मुग़ल साम्राज्य वाले नोट में पढ़ें।


8. सल्तनतकालीन प्रशासन

सुल्तान सर्वोच्च था — सेना, न्याय और प्रशासन का प्रमुख। सैद्धांतिक रूप से कई सुल्तान ख़लीफ़ा की सर्वोच्चता मानते थे, पर व्यवहार में सल्तनत स्वतंत्र थी।

8.1 केंद्रीय विभाग (दीवान)

विभागप्रमुख अधिकारीकार्य
दीवान-ए-विज़ारतवज़ीरवित्त और राजस्व — सबसे महत्वपूर्ण विभाग
दीवान-ए-अर्ज़आरिज़-ए-मुमालिकसैन्य विभाग — भर्ती, निरीक्षण, वेतन; स्थापना बलबन ने
दीवान-ए-इंशादबीर-ए-ख़ास / दबीर-ए-मुमालिकशाही पत्र-व्यवहार
दीवान-ए-रिसालतसद्र-उस-सुदूर (प्रायः)धार्मिक मामले और धार्मिक अनुदान (कुछ इतिहासकार इसके कार्य अलग बताते हैं)
दीवान-ए-क़ज़ाक़ाज़ी-उल-क़ुज़ातन्याय
बरीद-ए-मुमालिकबरीदगुप्तचर और सूचना

8.2 किस सुल्तान ने कौन-सा विभाग बनाया

विभागसुल्तानकार्य
दीवान-ए-अर्ज़बलबनसेना
दीवान-ए-मुस्तख़राजअलाउद्दीन खिलजीबकाया राजस्व वसूली
दीवान-ए-रियासतअलाउद्दीन खिलजीबाज़ार नियंत्रण
दीवान-ए-कोहीमुहम्मद बिन तुगलककृषि
दीवान-ए-ख़ैरातफ़िरोज़ शाह तुगलकदान / कल्याण
दीवान-ए-बंदगानफ़िरोज़ शाह तुगलकदास

8.3 प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन

इकाईअधिकारी
इक्ता (प्रांत)मुक़्ती / वली
शिक़शिक़दार
परगनाआमिल
ग्रामखुत, मुक़द्दम, चौधरी (ग्रामीण मध्यस्थ); पटवारी (लेखा)

8.4 प्रमुख कर

करकिस पर
ख़राजभूमि-कर (गैर-मुसलमानों की भूमि पर — प्रमुख राजस्व स्रोत)
उश्रमुसलमानों की भूमि पर कर
जज़ियागैर-मुसलमानों पर व्यक्तिगत कर
ज़कातसंपन्न मुसलमानों पर धार्मिक कर
ख़म्सयुद्ध की लूट का हिस्सा — शरीयत के अनुसार 1/5 राज्य का

9. स्थापत्य

सल्तनत काल में भारत में मेहराब (आर्च) और गुंबद की इस्लामी निर्माण-पद्धति आई, जिसमें चूने के गारे का व्यापक प्रयोग हुआ। आरंभिक भवनों में मंदिरों की सामग्री का पुनः प्रयोग भी दिखता है।

स्मारकनिर्मातास्थानविशेषता
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिदकुतुबुद्दीन ऐबकदिल्लीदिल्ली की आरंभिक मस्जिद; इल्तुतमिश और अलाउद्दीन ने विस्तार किया
अढ़ाई दिन का झोंपड़ाकुतुबुद्दीन ऐबकअजमेर (राजस्थान)पूर्व में विग्रहराज चतुर्थ के संस्कृत विद्यालय के स्थान पर बनी मस्जिद; इल्तुतमिश ने मेहराबदार पर्दा-दीवार जोड़ी
कुतुब मीनारऐबक ने आरंभ, इल्तुतमिश ने पूरी; फ़िरोज़ ने मरम्मतदिल्ली (महरौली)सूफ़ी संत ख़्वाजा कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी के नाम से जोड़ी जाती है; यूनेस्को विश्व धरोहर
सुल्तान ग़ारीइल्तुतमिशदिल्लीपुत्र नासिरुद्दीन महमूद का मक़बरा; भारत का आरंभिक इस्लामी मक़बरा माना जाता है
बलबन का मक़बराबलबनदिल्लीभारत में "वास्तविक मेहराब" के आरंभिक उदाहरणों में गिना जाता है
अलाई दरवाज़ाअलाउद्दीन खिलजी (1311)कुतुब परिसर, दिल्लीलाल बलुआ पत्थर और सफ़ेद संगमरमर; वास्तविक मेहराब और गुंबद का प्रारंभिक उत्कृष्ट उदाहरण
सीरी, हौज़-ए-अलाईअलाउद्दीन खिलजीदिल्लीनया क़िला-नगर और जलाशय
तुगलकाबादग़यासुद्दीन तुगलकदिल्लीढलवाँ दीवारों वाला विशाल क़िला
फ़िरोज़ शाह कोटलाफ़िरोज़ शाह तुगलकदिल्लीफ़िरोज़ाबाद नगर का क़िला; टोपरा का अशोक स्तंभ यहीं
लोदी मक़बरेलोदी शासक / अमीरदिल्ली (लोदी उद्यान)अष्टकोणीय और वर्गाकार मक़बरे

10. स्रोत, साहित्य और विदेशी यात्री

लेखकग्रंथविषय / संरक्षक
मिन्हाज-उस-सिराजतबकात-ए-नासिरीनासिरुद्दीन महमूद को समर्पित; आरंभिक सल्तनत
अमीर खुसरोख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह, क़िरान-उस-सादैन, नूह सिपिहर, तुगलकनामाअनेक सुल्तानों के दरबार में; निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य; "तूती-ए-हिंद"
ज़ियाउद्दीन बरनीतारीख़-ए-फ़िरोज़शाही, फ़तवा-ए-जहाँदारीबलबन से फ़िरोज़ के आरंभ तक; अलाउद्दीन के बाज़ार सुधारों का मुख्य स्रोत
शम्स-ए-सिराज अफ़ीफ़तारीख़-ए-फ़िरोज़शाहीफ़िरोज़ शाह तुगलक का शासन
फ़िरोज़ शाह तुगलकफ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाहीआत्मकथा
इसामीफ़ुतूह-उस-सलातीनबहमनी दरबार में लिखा
याह्या बिन अहमद सरहिंदीतारीख़-ए-मुबारकशाहीसैयद वंश
इब्न बतूता (मोरक्को)रेहलामुहम्मद बिन तुगलक का शासन; 1333 में आगमन

सल्तनत काल में ही सूफ़ी सिलसिलों (चिश्ती, सुहरावर्दी) और भक्ति संतों का प्रभाव बढ़ा — विस्तार भक्ति और सूफ़ी आंदोलन वाले नोट में।


11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: "गुलाम वंश" एक वंश नहीं

ऐबक (कुत्बी), इल्तुतमिश (शम्सी), बलबन (बलबनी) — तीन अलग परिवार। "मामलूक" या "आरंभिक तुर्क" नाम अधिक उपयुक्त माना जाता है।

Trap 2: संस्थापक बनाम वास्तविक संस्थापक

सल्तनत का संस्थापक — कुतुबुद्दीन ऐबक; वास्तविक संस्थापक / संगठक — इल्तुतमिश (दिल्ली राजधानी, ख़लीफ़ा से मान्यता, इक्ता, सिक्के)।

Trap 3: चालीसा बनाया किसने, तोड़ा किसने?

इल्तुतमिश ने चालीसा (तुर्कान-ए-चहलगानी) को संगठित किया; बलबन ने उसकी शक्ति तोड़ी।

Trap 4: दो "तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही"

एक बरनी की, एक अफ़ीफ़ की। फ़िरोज़ की अपनी आत्मकथा अलग है — फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही।

Trap 5: दाग-हुलिया बनाम सिजदा-पैबोस

दाग-हुलिया = अलाउद्दीन (सैन्य सुधार)। सिजदा-पैबोस = बलबन (दरबारी शिष्टाचार)। दोनों को आपस में न बदलें।

Trap 6: सांकेतिक मुद्रा का अर्थ

मुहम्मद बिन तुगलक ने ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर मूल्य पर चलाया — यह "काग़ज़ी मुद्रा" नहीं थी। जाली सिक्कों के कारण योजना विफल हुई।

Trap 7: इब्न बतूता किसके समय?

मुहम्मद बिन तुगलक के समय (1333); उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया गया। इसे अलाउद्दीन या फ़िरोज़ से न जोड़ें।

Trap 8: जज़िया — फ़िरोज़ की "नई" बात क्या थी?

जज़िया पहले से था; फ़िरोज़ की विशेषता यह थी कि उसने ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया।

Trap 9: अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कहाँ?

अजमेर (राजस्थान) — दिल्ली में नहीं। निर्माता ऐबक। कुव्वत-उल-इस्लाम दिल्ली में है।

Trap 10: आगरा की स्थापना

आगरा नगर सिकंदर लोदी ने बसाया — अकबर ने नहीं (अकबर ने आगरा का क़िला बनवाया)।

Trap 11: तैमूर के समय सुल्तान

1398 में सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक था — फ़िरोज़ शाह नहीं (फ़िरोज़ की मृत्यु 1388 में हो चुकी थी)।


12. Most-Asked रिवीज़न तालिका (58 तथ्य)

क्र.प्रश्न / विषयउत्तर
1तराइन का प्रथम युद्ध1191 — पृथ्वीराज विजयी
2तराइन का द्वितीय युद्ध1192 — ग़ोरी विजयी
3चंदावर का युद्ध1194 — ग़ोरी बनाम जयचंद
4दिल्ली सल्तनत की अवधि1206–1526
5सल्तनत का संस्थापककुतुबुद्दीन ऐबक
6ऐबक की राजधानीलाहौर
7"लाख बख़्श"कुतुबुद्दीन ऐबक
8ऐबक की मृत्यु1210, चौगान खेलते समय
9अढ़ाई दिन का झोंपड़ाऐबक, अजमेर
10कुतुब मीनार पूरी कीइल्तुतमिश
11राजधानी दिल्ली बनाईइल्तुतमिश
12ख़लीफ़ा से मान्यताइल्तुतमिश (1229)
13टंका और जीतलइल्तुतमिश
14तुर्कान-ए-चहलगानीइल्तुतमिश ने संगठित किया
15इक्ता व्यवस्था को व्यवस्थित रूपइल्तुतमिश
16एकमात्र महिला सुल्तानरज़िया
17रज़िया का विश्वस्त अमीर-ए-आख़ूरजलालुद्दीन याक़ूत
18रज़िया का पतिअल्तूनिया (भटिंडा)
19तबकात-ए-नासिरीमिन्हाज-उस-सिराज
20सिजदा और पैबोसबलबन
21लौह-रक्त नीतिबलबन
22दीवान-ए-अर्ज़ की स्थापनाबलबन
23चालीसा की शक्ति तोड़ीबलबन
24"ज़िल्ल-ए-इलाही"बलबन का राजत्व सिद्धांत
25खिलजी वंश का संस्थापकजलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजी
26बाज़ार नियंत्रणअलाउद्दीन खिलजी
27शहना-ए-मंडीबाज़ार अधीक्षक (अलाउद्दीन)
28दाग और हुलियाअलाउद्दीन खिलजी
29अलाउद्दीन का भू-राजस्वउपज का आधा
30चराई और घरी करअलाउद्दीन खिलजी
31दीवान-ए-मुस्तख़राजअलाउद्दीन — बकाया वसूली
32"सिकंदर-ए-सानी"अलाउद्दीन खिलजी
33रणथंभौर विजय1301 — हम्मीर देव
34चित्तौड़ विजय1303 — रतन सिंह; नाम ख़िज्राबाद
35जालौर विजय1311 — कान्हड़देव
36दक्षिण अभियानों का सेनापतिमलिक काफूर
37वारंगल के काकतीय शासकप्रतापरुद्र देव
38अलाई दरवाज़ाअलाउद्दीन, 1311
39ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूहअमीर खुसरो
40तुगलक वंश का संस्थापकग़यासुद्दीन तुगलक (ग़ाज़ी मलिक)
41तुगलकाबादग़यासुद्दीन तुगलक
42राजधानी दिल्ली से दौलताबादमुहम्मद बिन तुगलक, 1327
43सांकेतिक मुद्रामुहम्मद बिन तुगलक, 1329–30
44दीवान-ए-कोहीमुहम्मद बिन तुगलक — कृषि
45इब्न बतूता का आगमन1333 — मुहम्मद बिन तुगलक
46इब्न बतूता का ग्रंथरेहला
47विजयनगर की स्थापना1336 — हरिहर और बुक्का
48बहमनी राज्य की स्थापना1347 — हसन गंगू
49ब्राह्मणों पर जज़ियाफ़िरोज़ शाह तुगलक
50दीवान-ए-ख़ैरात, दीवान-ए-बंदगानफ़िरोज़ शाह तुगलक
51फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाहीफ़िरोज़ शाह तुगलक (आत्मकथा)
52अशोक स्तंभ दिल्ली लायाफ़िरोज़ शाह तुगलक
53तैमूर का आक्रमण1398 — नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक
54सैयद वंश का संस्थापकख़िज्र ख़ाँ ("रैयत-ए-आला")
55पहला अफ़गान वंशलोदी
56आगरा नगर की स्थापनासिकंदर लोदी
57गज़-ए-सिकंदरीसिकंदर लोदी — भूमि-माप
58पानीपत का प्रथम युद्ध21 अप्रैल 1526 — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी

13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

नीचे हर ढाँचे का एक स्वयं बनाया गया नमूना प्रश्न है:

  1. मिलान: "सूची-I (सुल्तान) — सूची-II (विभाग): बलबन — दीवान-ए-अर्ज़; अलाउद्दीन — दीवान-ए-मुस्तख़राज; मुहम्मद बिन तुगलक — दीवान-ए-कोही; फ़िरोज़ — दीवान-ए-ख़ैरात।"
  2. कालक्रम: "सही क्रम: तैमूर का आक्रमण, राजधानी परिवर्तन, अलाई दरवाज़ा, पानीपत का प्रथम युद्ध।" (उत्तर: अलाई दरवाज़ा 1311 → राजधानी परिवर्तन 1327 → तैमूर 1398 → पानीपत 1526)
  3. कथन-आधारित: "1. अलाउद्दीन ने दाग प्रथा शुरू की। 2. इब्न बतूता फ़िरोज़ शाह के समय आया। सही कथन?" (उत्तर: केवल 1)
  4. अभिकथन-कारण: "A: अलाउद्दीन ने वस्तुओं के मूल्य नियंत्रित किए। R: वह कम वेतन पर बड़ी स्थायी सेना रखना चाहता था।" (दोनों सही, R सही व्याख्या)
  5. स्मारक: "अढ़ाई दिन का झोंपड़ा किसने और कहाँ बनवाया?" (ऐबक, अजमेर)
  6. ग्रंथ: "तबकात-ए-नासिरी किसकी रचना है?" (मिन्हाज-उस-सिराज)

रणनीति: हर सुल्तान के साथ तीन चीज़ें जोड़कर याद करें — एक सुधार, एक स्मारक और एक स्रोत/लेखक। अधिकांश मिलान-प्रश्न इन्हीं तीनों से बनते हैं।


14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. पाँच वंश: "गुलाब खिला तुरंत, सैर करो लोधी गार्डन" — गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी।

2. वर्ष-सीढ़ी: "06-90-20-14-51-26" — 1206, 1290, 1320, 1414, 1451, 1526।

3. इल्तुतमिश के पाँच "इ": इक्ता, इक़रार (ख़लीफ़ा की मान्यता), इमारत (कुतुब मीनार पूरी), इकाई मुद्रा (टंका-जीतल), इंतज़ाम (चालीसा)।

4. बलबन = "सि-पै-लौ": सिजदा, पैबोस, लौह-रक्त।

5. अलाउद्दीन = "दा-हु-बा-आधा": दाग, हुलिया, बाज़ार नियंत्रण, आधा भू-राजस्व।

6. मुहम्मद बिन तुगलक के 5 प्रयोग — "दो-रा-सि-ख़ु-क़": दोआब कर, राजधानी, सिक्का (सांकेतिक), ख़ुरासान, क़राचिल।

7. फ़िरोज़ = "न-ज-ख़ै-बं": नहरें, जज़िया (ब्राह्मणों पर भी), ख़ैरात, बंदगान।

8. राजस्थान अभियान (अलाउद्दीन): "रण-चित-सिव-जाल = 01-03-08-11" — रणथंभौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311।


15. कथन अभ्यास

दिल्ली सल्तनत का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। — सही।

इल्तुतमिश ने चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल चलाया। — सही।

तुर्कान-ए-चहलगानी की स्थापना बलबन ने की। — गलत (इल्तुतमिश ने संगठित किया; बलबन ने उसकी शक्ति तोड़ी)।

सिजदा और पैबोस की प्रथा बलबन ने शुरू की। — सही।

दाग और हुलिया प्रथा मुहम्मद बिन तुगलक ने शुरू की। — गलत (अलाउद्दीन खिलजी ने)।

अलाउद्दीन खिलजी के बाज़ार सुधारों का मुख्य स्रोत ज़ियाउद्दीन बरनी है। — सही।

मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की। — सही।

इब्न बतूता फ़िरोज़ शाह तुगलक के समय भारत आया। — गलत (मुहम्मद बिन तुगलक के समय, 1333)।

फ़िरोज़ शाह तुगलक ने ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। — सही।

तैमूर ने फ़िरोज़ शाह तुगलक के शासनकाल में आक्रमण किया। — गलत (1398 में, नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक के समय)।

आगरा नगर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की। — सही।

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा दिल्ली में स्थित है। — गलत (अजमेर, राजस्थान)।


16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. तराइन I (1191) पृथ्वीराज जीता; तराइन II (1192) ग़ोरी जीता
  2. पाँच वंश: गुलाम 1206 → खिलजी 1290 → तुगलक 1320 → सैयद 1414 → लोदी 1451–1526
  3. ऐबक: लाहौर, लाख बख़्श, कुव्वत-उल-इस्लाम, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर), चौगान से मृत्यु
  4. इल्तुतमिश: दिल्ली राजधानी, ख़लीफ़ा मान्यता 1229, इक्ता, चालीसा, टंका-जीतल, कुतुब मीनार पूरी
  5. रज़िया: एकमात्र महिला सुल्तान; याक़ूत; अल्तूनिया
  6. बलबन: ज़िल्ल-ए-इलाही, सिजदा-पैबोस, नौरोज़, लौह-रक्त, दीवान-ए-अर्ज़, चालीसा का अंत
  7. अलाउद्दीन: बाज़ार नियंत्रण (शहना-ए-मंडी, दीवान-ए-रियासत), दाग-हुलिया, आधा राजस्व, चराई-घरी
  8. राजस्थान: रणथंभौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311
  9. मलिक काफूर: देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र, मदुरै
  10. अलाई दरवाज़ा 1311; अमीर खुसरो — ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह
  11. मुहम्मद बिन तुगलक: दोआब कर, दौलताबाद 1327, सांकेतिक मुद्रा, ख़ुरासान, क़राचिल, दीवान-ए-कोही
  12. इब्न बतूता (मोरक्को) 1333 — दिल्ली का क़ाज़ी — रेहला
  13. फ़िरोज़: नहरें, ब्राह्मणों पर जज़िया, ख़ैरात, बंदगान, दार-उल-शफ़ा, अशोक स्तंभ, फ़ुतूहात
  14. तैमूर 1398; ख़िज्र ख़ाँ — सैयद; बहलोल — पहला अफ़गान; सिकंदर — आगरा, गज़-ए-सिकंदरी
  15. पानीपत I — 21 अप्रैल 1526 — बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया; तुलुग़मा और तोपख़ाना

17. अभ्यास

इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में सुल्तान और सुधार आपस में उलझें, उनके लिए खंड 8.2 (विभाग तालिका) और खंड 11 (Exam Traps) दोबारा देखें। मध्यकालीन भारत के पूर्ण अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ और UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ हल करें।


18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

दिल्ली सल्तनत के तीन सौ से अधिक वर्षों में भारत में एक नई प्रशासनिक संरचना (इक्ता, दीवान, मुद्रा), नई स्थापत्य-शैली (मेहराब और गुंबद) और फ़ारसी इतिहास-लेखन की परंपरा स्थापित हुई। इल्तुतमिश ने इसे संगठित किया, बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाई, अलाउद्दीन ने इसे सबसे बड़ा विस्तार और कठोर आर्थिक नियंत्रण दिया, मुहम्मद बिन तुगलक ने साहसी पर असफल प्रयोग किए और फ़िरोज़ ने कल्याणकारी पर कमज़ोर करने वाली नीतियाँ अपनाईं। तैमूर के आक्रमण के बाद सल्तनत सिमटती गई और पानीपत (1526) में समाप्त हुई। परीक्षा के लिए हर सुल्तान का सुधार, स्मारक और स्रोत एक साथ याद रखें।

ऐबक (शुरुआत) → इल्तुतमिश (इक्ता, चालीसा, टंका) → रज़िया → बलबन (सिजदा, लौह-रक्त) → अलाउद्दीन (बाज़ार, दाग-हुलिया, काफूर) → मु. बिन तुगलक (दौलताबाद, सांकेतिक मुद्रा, इब्न बतूता) → फ़िरोज़ (नहरें, जज़िया) → तैमूर 1398 → सैयद → लोदी → पानीपत 1526


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश हैं — गुलाम/मामलूक (1206–1290), खिलजी (1290–1320), तुगलक (1320–1414), सैयद (1414–1451) और लोदी (1451–1526)।

संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था, पर इल्तुतमिश को वास्तविक संस्थापक या संगठक माना जाता है। उसने दिल्ली को राजधानी बनाया, ख़लीफ़ा से मान्यता ली, इक्ता व्यवस्था और चालीसा को संगठित किया तथा टंका-जीतल सिक्के चलाए।

ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन आरंभ में दास थे, इसलिए इसे गुलाम वंश कहा गया। पर ये तीन अलग परिवार (कुत्बी, शम्सी, बलबनी) थे, इसलिए इतिहासकार 'मामलूक' या 'आरंभिक तुर्क शासक' नाम अधिक उचित मानते हैं।

सिजदा में सुल्तान के सामने भूमि पर झुककर प्रणाम किया जाता था और पैबोस में सुल्तान के पैर चूमे जाते थे। बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए ये ईरानी दरबारी परंपराएँ अपनाईं।

अलाउद्दीन मंगोल आक्रमणों का सामना करने के लिए बड़ी स्थायी सेना कम वेतन पर रखना चाहता था, इसलिए उसने वस्तुओं के मूल्य तय किए। बाज़ार की देखरेख शहना-ए-मंडी और दीवान-ए-रियासत करते थे।

दाग (घोड़ों को दागना) और हुलिया (सैनिकों का विवरण-पत्र) प्रथा अलाउद्दीन खिलजी ने सेना में धोखाधड़ी रोकने के लिए शुरू की।

उसने ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर मूल्य पर चलाया, पर इन्हें आसानी से जाली बनाया जा सका। बड़े पैमाने पर जाली सिक्कों के कारण योजना वापस लेनी पड़ी।

मोरक्को का यात्री इब्न बतूता 1333 में मुहम्मद बिन तुगलक के समय भारत आया। सुल्तान ने उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया और बाद में राजदूत बनाकर चीन भेजा; उसका वृत्तांत रेहला है।

फ़िरोज़ ने नहरें बनवाईं, दीवान-ए-ख़ैरात और दीवान-ए-बंदगान बनाए, दार-उल-शफ़ा (अस्पताल) खोला और ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। उसने पद और इक्ता वंशानुगत किए, जिससे प्रशासन कमज़ोर हुआ।

21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया। इब्राहिम युद्ध में मारा गया और दिल्ली सल्तनत का अंत होकर मुग़ल साम्राज्य की नींव पड़ी।

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