दिल्ली सल्तनत (1206–1526) — पाँच वंश, प्रमुख शासक, प्रशासन, स्थापत्य व पानीपत — UPSC/RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: दिल्ली सल्तनत (1206–1526 ई.) में पाँच वंशों ने शासन किया — गुलाम/मामलूक (1206–1290), खिलजी (1290–1320), तुगलक (1320–1414), सैयद (1414–1451) और लोदी (1451–1526)। इसकी नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने रखी, पर इसका वास्तविक संगठक इल्तुतमिश था, जिसने राजधानी दिल्ली बनाई, इक्ता व्यवस्था और तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा) को संगठित किया तथा चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल चलाया। रज़िया सल्तनत की एकमात्र महिला शासक थी; बलबन ने सिजदा-पैबोस और लौह-रक्त (खून और लोहा) की नीति अपनाई। अलाउद्दीन खिलजी ने बाज़ार नियंत्रण, दाग-हुलिया और मलिक काफूर के दक्षिण अभियान चलाए; मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी परिवर्तन (दिल्ली → दौलताबाद) और सांकेतिक मुद्रा के प्रयोग किए, जिनके समय मोरक्को का यात्री इब्न बतूता आया। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने नहरें बनवाईं और ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। 1398 में तैमूर ने दिल्ली लूटी और 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर सल्तनत का अंत किया।
संक्षिप्त उत्तर
| वंश | काल | संस्थापक | अंतिम शासक | सबसे प्रसिद्ध शासक |
|---|---|---|---|---|
| गुलाम / मामलूक | 1206–1290 | कुतुबुद्दीन ऐबक | कैकुबाद / क्यूमर्स | इल्तुतमिश, बलबन |
| खिलजी | 1290–1320 | जलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजी | कुतुबुद्दीन मुबारक शाह (अंतिम खिलजी); फिर खुसरो ख़ाँ (सत्ता हड़पने वाला) | अलाउद्दीन खिलजी |
| तुगलक | 1320–1414 | गयासुद्दीन तुगलक (ग़ाज़ी मलिक) | नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक | मुहम्मद बिन तुगलक, फ़िरोज़ शाह |
| सैयद | 1414–1451 | ख़िज्र खाँ | अलाउद्दीन आलम शाह | ख़िज्र खाँ |
| लोदी | 1451–1526 | बहलोल लोदी | इब्राहिम लोदी | सिकंदर लोदी |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| तराइन का द्वितीय युद्ध (सल्तनत की पृष्ठभूमि) | 1192 — मुहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया |
| सल्तनत का संस्थापक | कुतुबुद्दीन ऐबक (1206) |
| वास्तविक संस्थापक / संगठक | इल्तुतमिश |
| एकमात्र महिला शासक | रज़िया सुल्तान (1236–1240) |
| पहला अफ़गान वंश | लोदी वंश |
| सबसे लंबा शासन करने वाला वंश | तुगलक वंश (1320–1414) |
| तैमूर का आक्रमण | 1398 |
| सल्तनत का अंत | पानीपत का प्रथम युद्ध, 21 अप्रैल 1526 |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
दिल्ली सल्तनत मध्यकालीन भारत का पहला बड़ा अध्याय है। इसमें शासकों की नीतियाँ (बाज़ार नियंत्रण, सांकेतिक मुद्रा), प्रशासनिक शब्दावली (इक्ता, दीवान, खराज, जज़िया), स्थापत्य (कुतुब मीनार, अलाई दरवाज़ा) और फ़ारसी स्रोत (बरनी, अमीर खुसरो, इब्न बतूता) — चारों से प्रश्न बनते हैं। राजस्थान की परीक्षाओं में अलाउद्दीन के रणथंभौर, चित्तौड़ और जालौर अभियान तथा अजमेर का अढ़ाई दिन का झोंपड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — प्रशासनिक शब्द, स्थापत्य, कथन-आधारित नीतियाँ
- RPSC RAS — अलाउद्दीन के राजस्थान अभियान, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा, प्रशासन
- SSC CGL / CHSL — वंश-संस्थापक, स्मारक-निर्माता, ग्रंथ-लेखक
- राजस्थान CET (स्नातक) — कालक्रम और एक-पंक्ति तथ्य
- RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक — नीतियों का विश्लेषण
प्रश्न कैसे आते हैं?
- शासक–सुधार का मिलान (दाग-हुलिया, सिजदा-पैबोस, दीवान-ए-कोही, दीवान-ए-ख़ैरात)
- वंशों और शासकों का कालक्रम
- स्मारक–निर्माता (अलाई दरवाज़ा, तुगलकाबाद, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा)
- ग्रंथ–लेखक (तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही, तबकात-ए-नासिरी, ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह, रेहला)
- कथन-आधारित — मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग, फ़िरोज़ की धार्मिक नीति
- अभिकथन-कारण — अलाउद्दीन के बाज़ार सुधारों का उद्देश्य
3. पृष्ठभूमि — तुर्कों का आगमन
| घटना | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| तराइन का प्रथम युद्ध | 1191 | पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) ने मुहम्मद ग़ोरी को हराया |
| तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192 | ग़ोरी विजयी; उत्तर भारत में तुर्की सत्ता की नींव |
| चंदावर का युद्ध | 1194 | ग़ोरी ने कन्नौज के जयचंद (गहड़वाल) को हराया |
| ग़ोरी की मृत्यु | 1206 | उसके भारतीय प्रदेशों पर ऐबक का स्वतंत्र शासन — सल्तनत का आरंभ |
4. गुलाम / मामलूक वंश (1206–1290)
नाम पर टिप्पणी: इस वंश को "गुलाम वंश" कहा जाता है क्योंकि ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन — तीनों आरंभ में दास (गुलाम) थे। पर वास्तव में ये तीन अलग-अलग परिवार थे — कुत्बी (ऐबक), शम्सी (इल्तुतमिश) और बलबनी (बलबन)। इसलिए कई इतिहासकार इसे "मामलूक वंश" या "आरंभिक तुर्क शासक" कहना अधिक उचित मानते हैं।
4.1 कुतुबुद्दीन ऐबक (1206–1210)
- मुहम्मद ग़ोरी का दास और सेनापति; ग़ोरी की मृत्यु के बाद स्वतंत्र शासक।
- राजधानी लाहौर।
- उदार दान के कारण "लाख बख़्श" कहलाया।
- दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया।
- कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ किया।
- 1210 में लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरकर मृत्यु।
4.2 इल्तुतमिश (1210–1236)
| उपलब्धि | विवरण |
|---|---|
| राजधानी | लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित |
| प्रतिद्वंद्वियों का दमन | यल्दौज़ और कुबाचा जैसे प्रतिद्वंद्वियों को हराया |
| मंगोल संकट | लगभग 1221 में चंगेज़ ख़ाँ ख़्वारिज़्म के राजकुमार जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु तक आया; इल्तुतमिश ने मंगबरनी को शरण न देकर सल्तनत को मंगोलों से बचाया |
| ख़लीफ़ा से मान्यता | 1229 में बग़दाद के अब्बासी ख़लीफ़ा से अधिकार-पत्र (मंशूर) |
| इक्ता व्यवस्था | सैनिक-अधिकारियों को वेतन के बदले भूमि-राजस्व वसूलने के क्षेत्र (इक्ता) देना — व्यवस्थित रूप दिया |
| चालीसा | तुर्कान-ए-चहलगानी — 40 तुर्क सरदारों का दल |
| मुद्रा | चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल — अरबी सिक्कों को मानक रूप दिया |
| स्थापत्य | कुतुब मीनार पूरी की; सुल्तान ग़ारी का मक़बरा (पुत्र नासिरुद्दीन महमूद के लिए) बनवाया; अपना मक़बरा कुतुब परिसर में |
| उत्तराधिकार | पुत्री रज़िया को उत्तराधिकारी नामित किया |
4.3 रज़िया सुल्तान (1236–1240)
- दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला शासक।
- पर्दा त्यागकर पुरुषों जैसा वस्त्र (क़बा, कुलाह) पहनकर दरबार में बैठी।
- अबीसीनियाई (हब्शी) जलालुद्दीन याक़ूत को अमीर-ए-आख़ूर (अश्वशाला का प्रमुख) बनाया — तुर्क सरदार नाराज़।
- भटिंडा के इक्तादार अल्तूनिया ने विद्रोह किया; रज़िया ने उससे विवाह किया।
- 1240 में सरदारों के विरोध के बीच उसकी हत्या हुई।
4.4 नासिरुद्दीन महमूद (1246–1266)
इल्तुतमिश का पुत्र (या पौत्र — स्रोतों में मत-भेद); वास्तविक सत्ता उसके नायब बलबन (उलुग ख़ाँ) के हाथ में थी। इतिहासकार मिन्हाज-उस-सिराज ने अपना ग्रंथ तबकात-ए-नासिरी इसी को समर्पित किया।
4.5 ग़यासुद्दीन बलबन (1266–1287)
| नीति / सुधार | विवरण |
|---|---|
| राजत्व सिद्धांत | सुल्तान "ज़िल्ल-ए-इलाही" (ईश्वर की छाया) और "नियाबत-ए-ख़ुदाई" (पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि) |
| दरबारी शिष्टाचार | सिजदा (भूमि पर झुककर प्रणाम) और पैबोस (सुल्तान के पैर चूमना) — ईरानी परंपरा; ईरानी त्योहार नौरोज़ मनाना |
| लौह-रक्त नीति | "खून और लोहा" — विद्रोहियों और डाकुओं (मेवाती) का कठोर दमन |
| चालीसा का अंत | तुर्कान-ए-चहलगानी की शक्ति तोड़ी |
| सैन्य विभाग | दीवान-ए-अर्ज़ की स्थापना (प्रमुख: आरिज़-ए-मुमालिक) |
| गुप्तचर | बरीद (सूचना-अधिकारी) की व्यवस्था सुदृढ़ |
| विद्रोह-दमन | बंगाल में तुग़रिल ख़ाँ का विद्रोह कुचला |
| व्यक्तिगत आघात | बड़ा पुत्र मुहम्मद मंगोलों से लड़ते हुए मारा गया (1285); अमीर खुसरो उसी की सेवा में था |
बलबन के बाद कैकुबाद और क्यूमर्स कमज़ोर शासक रहे और 1290 में जलालुद्दीन खिलजी ने सत्ता ले ली।
5. खिलजी वंश (1290–1320)
खिलजियों के सत्ता में आने को "खिलजी क्रांति" कहा जाता है, क्योंकि इससे तुर्क अभिजात वर्ग का एकाधिकार टूटा और सत्ता में व्यापक वर्गों की भागीदारी बढ़ी।
5.1 जलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजी (1290–1296)
नरम और उदार नीति के लिए जाना गया। 1296 में उसके भतीजे और दामाद अलाउद्दीन ने कड़ा (कड़ा-मानिकपुर) में उसकी हत्या कर सत्ता हथिया ली। इससे पहले अलाउद्दीन ने देवगिरि (रामचंद्र देव) पर धावा बोलकर भारी धन प्राप्त किया था।
5.2 अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316)
(क) विजय-अभियान
| अभियान | वर्ष | शासक / टिप्पणी |
|---|---|---|
| गुजरात | 1299 | बघेल शासक कर्ण; इसी अभियान में मलिक काफूर प्राप्त हुआ |
| रणथंभौर | 1301 | हम्मीर देव चौहान |
| चित्तौड़ | 1303 | रावल रतन सिंह; चित्तौड़ का नाम पुत्र ख़िज्र ख़ाँ के नाम पर "ख़िज्राबाद" |
| मालवा | 1305 | — |
| सिवाना | 1308 | शीतलदेव |
| जालौर | 1311 | कान्हड़देव |
पद्मिनी कथा पर टिप्पणी: रानी पद्मिनी की कथा मुख्यतः मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत (1540) से लोकप्रिय हुई, जो घटना के दो शताब्दी से अधिक बाद की साहित्यिक रचना है। इसकी ऐतिहासिकता पर इतिहासकारों में मत-भेद है।
(ख) दक्षिण अभियान — मलिक काफूर
| राज्य | राजधानी | शासक | वर्ष (लगभग) |
|---|---|---|---|
| यादव | देवगिरि | रामचंद्र देव | 1307–08 |
| काकतीय | वारंगल | प्रतापरुद्र देव | 1309–10 |
| होयसल | द्वारसमुद्र | वीर बल्लाल तृतीय | 1310–11 |
| पांड्य | मदुरै | — (उत्तराधिकार-संघर्ष के बीच) | 1311 |
दक्षिण के राज्यों को प्रायः सीधे साम्राज्य में नहीं मिलाया गया; उनसे भारी धन और वार्षिक कर लेकर अधीनता स्वीकार कराई गई।
(ग) बाज़ार नियंत्रण (मूल्य नियंत्रण)
मुख्य स्रोत ज़ियाउद्दीन बरनी है। उद्देश्य — बड़ी स्थायी सेना को कम वेतन पर बनाए रखना, ताकि मंगोल आक्रमणों का सामना हो सके।
| व्यवस्था | विवरण |
|---|---|
| अलग-अलग बाज़ार | अनाज मंडी; कपड़े और महँगी वस्तुओं के लिए सराय-ए-अद्ल; घोड़े, दास और पशुओं के बाज़ार |
| शहना-ए-मंडी | बाज़ार का अधीक्षक |
| दीवान-ए-रियासत | बाज़ार-व्यवस्था देखने वाला विभाग |
| मुनहियान / बरीद | गुप्तचर — बाज़ार की गुप्त सूचना |
| भंडारण | सरकारी गोदामों में अनाज का संग्रह; अकाल में राशन |
| दंड | कम तौलने या अधिक मूल्य लेने पर कठोर दंड |
(घ) सैन्य और राजस्व सुधार
| सुधार | विवरण |
|---|---|
| स्थायी सेना | नक़द वेतन पाने वाली बड़ी स्थायी सेना |
| दाग | घोड़ों को दागना — ताकि घटिया घोड़े न बदले जा सकें |
| हुलिया (चेहरा) | सैनिकों का विवरण-पत्र (रूप-रंग का लेखा) |
| भू-राजस्व | उपज का आधा (50%); भूमि की पैमाइश (मसाहत) के आधार पर |
| नए कर | चराई (दुधारू पशुओं पर) और घरी (घरों पर) |
| दीवान-ए-मुस्तख़राज | बकाया राजस्व की वसूली का विभाग |
| बिचौलियों पर अंकुश | खुत, मुक़द्दम, चौधरी जैसे ग्रामीण मध्यस्थों के विशेषाधिकार घटाए |
(ङ) अन्य तथ्य
- सिक्कों पर "सिकंदर-ए-सानी" (दूसरा सिकंदर) की उपाधि।
- मंगोल आक्रमणों को सफलतापूर्वक रोका।
- स्थापत्य: अलाई दरवाज़ा (1311), सीरी का क़िला-नगर, हौज़-ए-अलाई (हौज़ ख़ास); अलाई मीनार अधूरी।
- दरबारी कवि अमीर खुसरो — ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह में अलाउद्दीन की विजयों का वर्णन।
अलाउद्दीन के बाद मुबारक शाह और फिर खुसरो ख़ाँ ने शासन किया; 1320 में ग़ाज़ी मलिक ने खुसरो ख़ाँ को हटाकर तुगलक वंश स्थापित किया।
6. तुगलक वंश (1320–1414)
6.1 ग़यासुद्दीन तुगलक (1320–1325)
- मूल नाम ग़ाज़ी मलिक; तुगलक वंश का संस्थापक।
- तुगलकाबाद का क़िला-नगर बनवाया; उसका मक़बरा ढलवाँ (तिरछी) दीवारों के लिए प्रसिद्ध।
- किसानों के प्रति अपेक्षाकृत नरम राजस्व नीति।
- उसके पुत्र जौना ख़ाँ (बाद में मुहम्मद बिन तुगलक) ने वारंगल को सल्तनत में मिलाया।
- 1325 में अफ़गानपुर में एक लकड़ी के मंडप के गिरने से मृत्यु — इस घटना की परिस्थितियों पर इतिहासकारों को संदेह रहा है।
6.2 मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351)
मूल नाम जौना ख़ाँ (उलुग ख़ाँ)। विद्वान, बहुभाषी और नवाचारी, पर उसकी योजनाएँ क्रियान्वयन में विफल रहीं। उसकी योजनाओं को परीक्षा में "पाँच प्रयोग" के रूप में पूछा जाता है:
| योजना | वर्ष (लगभग) | उद्देश्य | परिणाम |
|---|---|---|---|
| दोआब में कर-वृद्धि | शासन के आरंभिक वर्ष | राजस्व बढ़ाना | उसी समय अकाल पड़ा; किसानों का विद्रोह और पलायन |
| राजधानी परिवर्तन | 1327 | दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) — दक्षिण पर बेहतर नियंत्रण, केंद्रीय स्थिति | जनता को भारी कष्ट; कुछ वर्षों बाद लोग दिल्ली लौटे |
| सांकेतिक मुद्रा | 1329–30 | चाँदी की कमी; ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर चलाना | बड़े पैमाने पर जाली सिक्के; योजना वापस, सरकारी कोष से सिक्के बदले गए |
| ख़ुरासान अभियान | — | मध्य एशिया पर विजय की योजना | विशाल सेना भर्ती की गई, पर अभियान नहीं हुआ; सेना भंग — भारी व्यय |
| क़राचिल अभियान | — | कुमाऊँ-गढ़वाल (हिमालयी) क्षेत्र | सेना को भारी हानि |
- कृषि के लिए दीवान-ए-कोही (दीवान-ए-अमीर-ए-कोही) विभाग बनाया और किसानों को ऋण (सोंधर/तक़ावी) दिया।
- मोरक्को का यात्री इब्न बतूता 1333 में आया; सुल्तान ने उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया और 1342 में राजदूत बनाकर चीन भेजा। उसका यात्रा-वृत्तांत रेहला (अरबी) है।
- उसके शासन के अंत में दक्षिण में विजयनगर (1336, हरिहर-बुक्का) और बहमनी (1347, हसन गंगू / अलाउद्दीन बहमन शाह) राज्य स्थापित हुए।
- 1351 में सिंध के थट्टा में विद्रोही तग़ी का पीछा करते समय मृत्यु।
6.3 फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351–1388)
| क्षेत्र | नीति / कार्य |
|---|---|
| कर-नीति | शरीयत के अनुसार चार कर — ख़राज (भूमि-कर), ख़म्स (युद्ध-लूट का 1/5), जज़िया, ज़कात; सिंचाई कर (हक़-ए-शर्ब) भी लिया |
| जज़िया | ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया, जो पहले इससे मुक्त थे |
| सिंचाई | अनेक नहरें — यमुना और सतलज से; इनमें पश्चिमी यमुना नहर से जुड़ी नहर (हिसार की ओर) प्रसिद्ध |
| कल्याण विभाग | दीवान-ए-ख़ैरात (दान, निर्धन कन्याओं के विवाह हेतु सहायता); दार-उल-शफ़ा (अस्पताल); बेरोज़गारों के लिए रोज़गार की व्यवस्था |
| दास विभाग | दीवान-ए-बंदगान — बड़ी संख्या में दास |
| नगर | फ़िरोज़ाबाद (दिल्ली — फ़िरोज़ शाह कोटला), हिसार, फ़तेहाबाद, जौनपुर |
| अशोक स्तंभ | टोपरा और मेरठ से अशोक के दो स्तंभ दिल्ली मँगवाए |
| अनुवाद | संस्कृत ग्रंथों का फ़ारसी में अनुवाद कराया |
| प्रशासनिक दोष | पद और इक्ता वंशानुगत किए; सेना की कार्यक्षमता घटी |
| आत्मकथा | फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही |
| कुतुब मीनार | बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त मीनार की मरम्मत कराई |
6.4 तैमूर का आक्रमण (1398)
फ़िरोज़ के बाद कमज़ोर उत्तराधिकारियों के समय मध्य एशिया के शासक तैमूर ने 1398 में आक्रमण किया। उस समय दिल्ली का सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक था। तैमूर ने दिल्ली को लूटा और भारी नरसंहार किया; लौटते समय ख़िज्र ख़ाँ को मुल्तान (पंजाब क्षेत्र) का अधिकारी नियुक्त किया। इसके बाद सल्तनत एक क्षेत्रीय राज्य भर रह गई।
7. सैयद वंश (1414–1451) और लोदी वंश (1451–1526)
7.1 सैयद वंश
- संस्थापक ख़िज्र ख़ाँ — उसने "सुल्तान" की उपाधि नहीं ली, "रैयत-ए-आला" कहलाया और स्वयं को तैमूर के उत्तराधिकारी (शाहरुख़) का प्रतिनिधि माना।
- मुबारक शाह — उसके समय याह्या बिन अहमद सरहिंदी ने तारीख़-ए-मुबारकशाही लिखी।
- अंतिम शासक अलाउद्दीन आलम शाह ने 1451 में दिल्ली बहलोल लोदी को सौंप दी और बदायूँ चला गया।
7.2 लोदी वंश — पहला अफ़गान वंश
| शासक | काल | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| बहलोल लोदी | 1451–1489 | संस्थापक; अफ़गान सरदारों के साथ बराबरी का व्यवहार; जौनपुर की शर्की सल्तनत को जीता; "बहलोली" सिक्के |
| सिकंदर लोदी | 1489–1517 | लोदियों में सबसे योग्य; आगरा नगर की स्थापना (लगभग 1504) और उसे राजधानी बनाया; भूमि-माप के लिए गज़-ए-सिकंदरी; "गुलरुख़ी" उपनाम से फ़ारसी कविता |
| इब्राहिम लोदी | 1517–1526 | अफ़गान सरदारों से संघर्ष; मेवाड़ के राणा सांगा से संघर्ष; पंजाब के सूबेदार दौलत ख़ाँ लोदी और चाचा आलम ख़ाँ ने बाबर को आमंत्रित किया |
7.3 पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रैल 1526)
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| पक्ष | बाबर बनाम इब्राहिम लोदी |
| परिणाम | बाबर विजयी; इब्राहिम लोदी युद्धभूमि में मारा गया — युद्ध में मरने वाला दिल्ली का एकमात्र सुल्तान |
| बाबर की रणनीति | तुलुग़मा (सेना को घेरने की पद्धति) और तोपख़ाना — तोपची उस्ताद अली और मुस्तफ़ा |
| महत्व | दिल्ली सल्तनत का अंत; मुग़ल साम्राज्य का आरंभ |
आगे का इतिहास — बाबर से औरंगज़ेब तक — मुग़ल साम्राज्य वाले नोट में पढ़ें।
8. सल्तनतकालीन प्रशासन
सुल्तान सर्वोच्च था — सेना, न्याय और प्रशासन का प्रमुख। सैद्धांतिक रूप से कई सुल्तान ख़लीफ़ा की सर्वोच्चता मानते थे, पर व्यवहार में सल्तनत स्वतंत्र थी।
8.1 केंद्रीय विभाग (दीवान)
| विभाग | प्रमुख अधिकारी | कार्य |
|---|---|---|
| दीवान-ए-विज़ारत | वज़ीर | वित्त और राजस्व — सबसे महत्वपूर्ण विभाग |
| दीवान-ए-अर्ज़ | आरिज़-ए-मुमालिक | सैन्य विभाग — भर्ती, निरीक्षण, वेतन; स्थापना बलबन ने |
| दीवान-ए-इंशा | दबीर-ए-ख़ास / दबीर-ए-मुमालिक | शाही पत्र-व्यवहार |
| दीवान-ए-रिसालत | सद्र-उस-सुदूर (प्रायः) | धार्मिक मामले और धार्मिक अनुदान (कुछ इतिहासकार इसके कार्य अलग बताते हैं) |
| दीवान-ए-क़ज़ा | क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात | न्याय |
| बरीद-ए-मुमालिक | बरीद | गुप्तचर और सूचना |
8.2 किस सुल्तान ने कौन-सा विभाग बनाया
| विभाग | सुल्तान | कार्य |
|---|---|---|
| दीवान-ए-अर्ज़ | बलबन | सेना |
| दीवान-ए-मुस्तख़राज | अलाउद्दीन खिलजी | बकाया राजस्व वसूली |
| दीवान-ए-रियासत | अलाउद्दीन खिलजी | बाज़ार नियंत्रण |
| दीवान-ए-कोही | मुहम्मद बिन तुगलक | कृषि |
| दीवान-ए-ख़ैरात | फ़िरोज़ शाह तुगलक | दान / कल्याण |
| दीवान-ए-बंदगान | फ़िरोज़ शाह तुगलक | दास |
8.3 प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन
| इकाई | अधिकारी |
|---|---|
| इक्ता (प्रांत) | मुक़्ती / वली |
| शिक़ | शिक़दार |
| परगना | आमिल |
| ग्राम | खुत, मुक़द्दम, चौधरी (ग्रामीण मध्यस्थ); पटवारी (लेखा) |
8.4 प्रमुख कर
| कर | किस पर |
|---|---|
| ख़राज | भूमि-कर (गैर-मुसलमानों की भूमि पर — प्रमुख राजस्व स्रोत) |
| उश्र | मुसलमानों की भूमि पर कर |
| जज़िया | गैर-मुसलमानों पर व्यक्तिगत कर |
| ज़कात | संपन्न मुसलमानों पर धार्मिक कर |
| ख़म्स | युद्ध की लूट का हिस्सा — शरीयत के अनुसार 1/5 राज्य का |
9. स्थापत्य
सल्तनत काल में भारत में मेहराब (आर्च) और गुंबद की इस्लामी निर्माण-पद्धति आई, जिसमें चूने के गारे का व्यापक प्रयोग हुआ। आरंभिक भवनों में मंदिरों की सामग्री का पुनः प्रयोग भी दिखता है।
| स्मारक | निर्माता | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद | कुतुबुद्दीन ऐबक | दिल्ली | दिल्ली की आरंभिक मस्जिद; इल्तुतमिश और अलाउद्दीन ने विस्तार किया |
| अढ़ाई दिन का झोंपड़ा | कुतुबुद्दीन ऐबक | अजमेर (राजस्थान) | पूर्व में विग्रहराज चतुर्थ के संस्कृत विद्यालय के स्थान पर बनी मस्जिद; इल्तुतमिश ने मेहराबदार पर्दा-दीवार जोड़ी |
| कुतुब मीनार | ऐबक ने आरंभ, इल्तुतमिश ने पूरी; फ़िरोज़ ने मरम्मत | दिल्ली (महरौली) | सूफ़ी संत ख़्वाजा कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी के नाम से जोड़ी जाती है; यूनेस्को विश्व धरोहर |
| सुल्तान ग़ारी | इल्तुतमिश | दिल्ली | पुत्र नासिरुद्दीन महमूद का मक़बरा; भारत का आरंभिक इस्लामी मक़बरा माना जाता है |
| बलबन का मक़बरा | बलबन | दिल्ली | भारत में "वास्तविक मेहराब" के आरंभिक उदाहरणों में गिना जाता है |
| अलाई दरवाज़ा | अलाउद्दीन खिलजी (1311) | कुतुब परिसर, दिल्ली | लाल बलुआ पत्थर और सफ़ेद संगमरमर; वास्तविक मेहराब और गुंबद का प्रारंभिक उत्कृष्ट उदाहरण |
| सीरी, हौज़-ए-अलाई | अलाउद्दीन खिलजी | दिल्ली | नया क़िला-नगर और जलाशय |
| तुगलकाबाद | ग़यासुद्दीन तुगलक | दिल्ली | ढलवाँ दीवारों वाला विशाल क़िला |
| फ़िरोज़ शाह कोटला | फ़िरोज़ शाह तुगलक | दिल्ली | फ़िरोज़ाबाद नगर का क़िला; टोपरा का अशोक स्तंभ यहीं |
| लोदी मक़बरे | लोदी शासक / अमीर | दिल्ली (लोदी उद्यान) | अष्टकोणीय और वर्गाकार मक़बरे |
10. स्रोत, साहित्य और विदेशी यात्री
| लेखक | ग्रंथ | विषय / संरक्षक |
|---|---|---|
| मिन्हाज-उस-सिराज | तबकात-ए-नासिरी | नासिरुद्दीन महमूद को समर्पित; आरंभिक सल्तनत |
| अमीर खुसरो | ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह, क़िरान-उस-सादैन, नूह सिपिहर, तुगलकनामा | अनेक सुल्तानों के दरबार में; निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य; "तूती-ए-हिंद" |
| ज़ियाउद्दीन बरनी | तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही, फ़तवा-ए-जहाँदारी | बलबन से फ़िरोज़ के आरंभ तक; अलाउद्दीन के बाज़ार सुधारों का मुख्य स्रोत |
| शम्स-ए-सिराज अफ़ीफ़ | तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही | फ़िरोज़ शाह तुगलक का शासन |
| फ़िरोज़ शाह तुगलक | फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही | आत्मकथा |
| इसामी | फ़ुतूह-उस-सलातीन | बहमनी दरबार में लिखा |
| याह्या बिन अहमद सरहिंदी | तारीख़-ए-मुबारकशाही | सैयद वंश |
| इब्न बतूता (मोरक्को) | रेहला | मुहम्मद बिन तुगलक का शासन; 1333 में आगमन |
सल्तनत काल में ही सूफ़ी सिलसिलों (चिश्ती, सुहरावर्दी) और भक्ति संतों का प्रभाव बढ़ा — विस्तार भक्ति और सूफ़ी आंदोलन वाले नोट में।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "गुलाम वंश" एक वंश नहीं
ऐबक (कुत्बी), इल्तुतमिश (शम्सी), बलबन (बलबनी) — तीन अलग परिवार। "मामलूक" या "आरंभिक तुर्क" नाम अधिक उपयुक्त माना जाता है।
Trap 2: संस्थापक बनाम वास्तविक संस्थापक
सल्तनत का संस्थापक — कुतुबुद्दीन ऐबक; वास्तविक संस्थापक / संगठक — इल्तुतमिश (दिल्ली राजधानी, ख़लीफ़ा से मान्यता, इक्ता, सिक्के)।
Trap 3: चालीसा बनाया किसने, तोड़ा किसने?
इल्तुतमिश ने चालीसा (तुर्कान-ए-चहलगानी) को संगठित किया; बलबन ने उसकी शक्ति तोड़ी।
Trap 4: दो "तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही"
एक बरनी की, एक अफ़ीफ़ की। फ़िरोज़ की अपनी आत्मकथा अलग है — फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही।
Trap 5: दाग-हुलिया बनाम सिजदा-पैबोस
दाग-हुलिया = अलाउद्दीन (सैन्य सुधार)। सिजदा-पैबोस = बलबन (दरबारी शिष्टाचार)। दोनों को आपस में न बदलें।
Trap 6: सांकेतिक मुद्रा का अर्थ
मुहम्मद बिन तुगलक ने ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर मूल्य पर चलाया — यह "काग़ज़ी मुद्रा" नहीं थी। जाली सिक्कों के कारण योजना विफल हुई।
Trap 7: इब्न बतूता किसके समय?
मुहम्मद बिन तुगलक के समय (1333); उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया गया। इसे अलाउद्दीन या फ़िरोज़ से न जोड़ें।
Trap 8: जज़िया — फ़िरोज़ की "नई" बात क्या थी?
जज़िया पहले से था; फ़िरोज़ की विशेषता यह थी कि उसने ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया।
Trap 9: अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कहाँ?
अजमेर (राजस्थान) — दिल्ली में नहीं। निर्माता ऐबक। कुव्वत-उल-इस्लाम दिल्ली में है।
Trap 10: आगरा की स्थापना
आगरा नगर सिकंदर लोदी ने बसाया — अकबर ने नहीं (अकबर ने आगरा का क़िला बनवाया)।
Trap 11: तैमूर के समय सुल्तान
1398 में सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक था — फ़िरोज़ शाह नहीं (फ़िरोज़ की मृत्यु 1388 में हो चुकी थी)।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका (58 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न / विषय | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | तराइन का प्रथम युद्ध | 1191 — पृथ्वीराज विजयी |
| 2 | तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192 — ग़ोरी विजयी |
| 3 | चंदावर का युद्ध | 1194 — ग़ोरी बनाम जयचंद |
| 4 | दिल्ली सल्तनत की अवधि | 1206–1526 |
| 5 | सल्तनत का संस्थापक | कुतुबुद्दीन ऐबक |
| 6 | ऐबक की राजधानी | लाहौर |
| 7 | "लाख बख़्श" | कुतुबुद्दीन ऐबक |
| 8 | ऐबक की मृत्यु | 1210, चौगान खेलते समय |
| 9 | अढ़ाई दिन का झोंपड़ा | ऐबक, अजमेर |
| 10 | कुतुब मीनार पूरी की | इल्तुतमिश |
| 11 | राजधानी दिल्ली बनाई | इल्तुतमिश |
| 12 | ख़लीफ़ा से मान्यता | इल्तुतमिश (1229) |
| 13 | टंका और जीतल | इल्तुतमिश |
| 14 | तुर्कान-ए-चहलगानी | इल्तुतमिश ने संगठित किया |
| 15 | इक्ता व्यवस्था को व्यवस्थित रूप | इल्तुतमिश |
| 16 | एकमात्र महिला सुल्तान | रज़िया |
| 17 | रज़िया का विश्वस्त अमीर-ए-आख़ूर | जलालुद्दीन याक़ूत |
| 18 | रज़िया का पति | अल्तूनिया (भटिंडा) |
| 19 | तबकात-ए-नासिरी | मिन्हाज-उस-सिराज |
| 20 | सिजदा और पैबोस | बलबन |
| 21 | लौह-रक्त नीति | बलबन |
| 22 | दीवान-ए-अर्ज़ की स्थापना | बलबन |
| 23 | चालीसा की शक्ति तोड़ी | बलबन |
| 24 | "ज़िल्ल-ए-इलाही" | बलबन का राजत्व सिद्धांत |
| 25 | खिलजी वंश का संस्थापक | जलालुद्दीन फ़िरोज़ खिलजी |
| 26 | बाज़ार नियंत्रण | अलाउद्दीन खिलजी |
| 27 | शहना-ए-मंडी | बाज़ार अधीक्षक (अलाउद्दीन) |
| 28 | दाग और हुलिया | अलाउद्दीन खिलजी |
| 29 | अलाउद्दीन का भू-राजस्व | उपज का आधा |
| 30 | चराई और घरी कर | अलाउद्दीन खिलजी |
| 31 | दीवान-ए-मुस्तख़राज | अलाउद्दीन — बकाया वसूली |
| 32 | "सिकंदर-ए-सानी" | अलाउद्दीन खिलजी |
| 33 | रणथंभौर विजय | 1301 — हम्मीर देव |
| 34 | चित्तौड़ विजय | 1303 — रतन सिंह; नाम ख़िज्राबाद |
| 35 | जालौर विजय | 1311 — कान्हड़देव |
| 36 | दक्षिण अभियानों का सेनापति | मलिक काफूर |
| 37 | वारंगल के काकतीय शासक | प्रतापरुद्र देव |
| 38 | अलाई दरवाज़ा | अलाउद्दीन, 1311 |
| 39 | ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह | अमीर खुसरो |
| 40 | तुगलक वंश का संस्थापक | ग़यासुद्दीन तुगलक (ग़ाज़ी मलिक) |
| 41 | तुगलकाबाद | ग़यासुद्दीन तुगलक |
| 42 | राजधानी दिल्ली से दौलताबाद | मुहम्मद बिन तुगलक, 1327 |
| 43 | सांकेतिक मुद्रा | मुहम्मद बिन तुगलक, 1329–30 |
| 44 | दीवान-ए-कोही | मुहम्मद बिन तुगलक — कृषि |
| 45 | इब्न बतूता का आगमन | 1333 — मुहम्मद बिन तुगलक |
| 46 | इब्न बतूता का ग्रंथ | रेहला |
| 47 | विजयनगर की स्थापना | 1336 — हरिहर और बुक्का |
| 48 | बहमनी राज्य की स्थापना | 1347 — हसन गंगू |
| 49 | ब्राह्मणों पर जज़िया | फ़िरोज़ शाह तुगलक |
| 50 | दीवान-ए-ख़ैरात, दीवान-ए-बंदगान | फ़िरोज़ शाह तुगलक |
| 51 | फ़ुतूहात-ए-फ़िरोज़शाही | फ़िरोज़ शाह तुगलक (आत्मकथा) |
| 52 | अशोक स्तंभ दिल्ली लाया | फ़िरोज़ शाह तुगलक |
| 53 | तैमूर का आक्रमण | 1398 — नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक |
| 54 | सैयद वंश का संस्थापक | ख़िज्र ख़ाँ ("रैयत-ए-आला") |
| 55 | पहला अफ़गान वंश | लोदी |
| 56 | आगरा नगर की स्थापना | सिकंदर लोदी |
| 57 | गज़-ए-सिकंदरी | सिकंदर लोदी — भूमि-माप |
| 58 | पानीपत का प्रथम युद्ध | 21 अप्रैल 1526 — बाबर बनाम इब्राहिम लोदी |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
नीचे हर ढाँचे का एक स्वयं बनाया गया नमूना प्रश्न है:
- मिलान: "सूची-I (सुल्तान) — सूची-II (विभाग): बलबन — दीवान-ए-अर्ज़; अलाउद्दीन — दीवान-ए-मुस्तख़राज; मुहम्मद बिन तुगलक — दीवान-ए-कोही; फ़िरोज़ — दीवान-ए-ख़ैरात।"
- कालक्रम: "सही क्रम: तैमूर का आक्रमण, राजधानी परिवर्तन, अलाई दरवाज़ा, पानीपत का प्रथम युद्ध।" (उत्तर: अलाई दरवाज़ा 1311 → राजधानी परिवर्तन 1327 → तैमूर 1398 → पानीपत 1526)
- कथन-आधारित: "1. अलाउद्दीन ने दाग प्रथा शुरू की। 2. इब्न बतूता फ़िरोज़ शाह के समय आया। सही कथन?" (उत्तर: केवल 1)
- अभिकथन-कारण: "A: अलाउद्दीन ने वस्तुओं के मूल्य नियंत्रित किए। R: वह कम वेतन पर बड़ी स्थायी सेना रखना चाहता था।" (दोनों सही, R सही व्याख्या)
- स्मारक: "अढ़ाई दिन का झोंपड़ा किसने और कहाँ बनवाया?" (ऐबक, अजमेर)
- ग्रंथ: "तबकात-ए-नासिरी किसकी रचना है?" (मिन्हाज-उस-सिराज)
रणनीति: हर सुल्तान के साथ तीन चीज़ें जोड़कर याद करें — एक सुधार, एक स्मारक और एक स्रोत/लेखक। अधिकांश मिलान-प्रश्न इन्हीं तीनों से बनते हैं।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. पाँच वंश: "गुलाब खिला तुरंत, सैर करो लोधी गार्डन" — गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी।
2. वर्ष-सीढ़ी: "06-90-20-14-51-26" — 1206, 1290, 1320, 1414, 1451, 1526।
3. इल्तुतमिश के पाँच "इ": इक्ता, इक़रार (ख़लीफ़ा की मान्यता), इमारत (कुतुब मीनार पूरी), इकाई मुद्रा (टंका-जीतल), इंतज़ाम (चालीसा)।
4. बलबन = "सि-पै-लौ": सिजदा, पैबोस, लौह-रक्त।
5. अलाउद्दीन = "दा-हु-बा-आधा": दाग, हुलिया, बाज़ार नियंत्रण, आधा भू-राजस्व।
6. मुहम्मद बिन तुगलक के 5 प्रयोग — "दो-रा-सि-ख़ु-क़": दोआब कर, राजधानी, सिक्का (सांकेतिक), ख़ुरासान, क़राचिल।
7. फ़िरोज़ = "न-ज-ख़ै-बं": नहरें, जज़िया (ब्राह्मणों पर भी), ख़ैरात, बंदगान।
8. राजस्थान अभियान (अलाउद्दीन): "रण-चित-सिव-जाल = 01-03-08-11" — रणथंभौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311।
15. कथन अभ्यास
दिल्ली सल्तनत का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। — सही।
इल्तुतमिश ने चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल चलाया। — सही।
तुर्कान-ए-चहलगानी की स्थापना बलबन ने की। — गलत (इल्तुतमिश ने संगठित किया; बलबन ने उसकी शक्ति तोड़ी)।
सिजदा और पैबोस की प्रथा बलबन ने शुरू की। — सही।
दाग और हुलिया प्रथा मुहम्मद बिन तुगलक ने शुरू की। — गलत (अलाउद्दीन खिलजी ने)।
अलाउद्दीन खिलजी के बाज़ार सुधारों का मुख्य स्रोत ज़ियाउद्दीन बरनी है। — सही।
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की। — सही।
इब्न बतूता फ़िरोज़ शाह तुगलक के समय भारत आया। — गलत (मुहम्मद बिन तुगलक के समय, 1333)।
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। — सही।
तैमूर ने फ़िरोज़ शाह तुगलक के शासनकाल में आक्रमण किया। — गलत (1398 में, नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक के समय)।
आगरा नगर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की। — सही।
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा दिल्ली में स्थित है। — गलत (अजमेर, राजस्थान)।
16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- तराइन I (1191) पृथ्वीराज जीता; तराइन II (1192) ग़ोरी जीता
- पाँच वंश: गुलाम 1206 → खिलजी 1290 → तुगलक 1320 → सैयद 1414 → लोदी 1451–1526
- ऐबक: लाहौर, लाख बख़्श, कुव्वत-उल-इस्लाम, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर), चौगान से मृत्यु
- इल्तुतमिश: दिल्ली राजधानी, ख़लीफ़ा मान्यता 1229, इक्ता, चालीसा, टंका-जीतल, कुतुब मीनार पूरी
- रज़िया: एकमात्र महिला सुल्तान; याक़ूत; अल्तूनिया
- बलबन: ज़िल्ल-ए-इलाही, सिजदा-पैबोस, नौरोज़, लौह-रक्त, दीवान-ए-अर्ज़, चालीसा का अंत
- अलाउद्दीन: बाज़ार नियंत्रण (शहना-ए-मंडी, दीवान-ए-रियासत), दाग-हुलिया, आधा राजस्व, चराई-घरी
- राजस्थान: रणथंभौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311
- मलिक काफूर: देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र, मदुरै
- अलाई दरवाज़ा 1311; अमीर खुसरो — ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह
- मुहम्मद बिन तुगलक: दोआब कर, दौलताबाद 1327, सांकेतिक मुद्रा, ख़ुरासान, क़राचिल, दीवान-ए-कोही
- इब्न बतूता (मोरक्को) 1333 — दिल्ली का क़ाज़ी — रेहला
- फ़िरोज़: नहरें, ब्राह्मणों पर जज़िया, ख़ैरात, बंदगान, दार-उल-शफ़ा, अशोक स्तंभ, फ़ुतूहात
- तैमूर 1398; ख़िज्र ख़ाँ — सैयद; बहलोल — पहला अफ़गान; सिकंदर — आगरा, गज़-ए-सिकंदरी
- पानीपत I — 21 अप्रैल 1526 — बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया; तुलुग़मा और तोपख़ाना
17. अभ्यास
इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में सुल्तान और सुधार आपस में उलझें, उनके लिए खंड 8.2 (विभाग तालिका) और खंड 11 (Exam Traps) दोबारा देखें। मध्यकालीन भारत के पूर्ण अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ और UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ हल करें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
दिल्ली सल्तनत के तीन सौ से अधिक वर्षों में भारत में एक नई प्रशासनिक संरचना (इक्ता, दीवान, मुद्रा), नई स्थापत्य-शैली (मेहराब और गुंबद) और फ़ारसी इतिहास-लेखन की परंपरा स्थापित हुई। इल्तुतमिश ने इसे संगठित किया, बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाई, अलाउद्दीन ने इसे सबसे बड़ा विस्तार और कठोर आर्थिक नियंत्रण दिया, मुहम्मद बिन तुगलक ने साहसी पर असफल प्रयोग किए और फ़िरोज़ ने कल्याणकारी पर कमज़ोर करने वाली नीतियाँ अपनाईं। तैमूर के आक्रमण के बाद सल्तनत सिमटती गई और पानीपत (1526) में समाप्त हुई। परीक्षा के लिए हर सुल्तान का सुधार, स्मारक और स्रोत एक साथ याद रखें।
ऐबक (शुरुआत) → इल्तुतमिश (इक्ता, चालीसा, टंका) → रज़िया → बलबन (सिजदा, लौह-रक्त) → अलाउद्दीन (बाज़ार, दाग-हुलिया, काफूर) → मु. बिन तुगलक (दौलताबाद, सांकेतिक मुद्रा, इब्न बतूता) → फ़िरोज़ (नहरें, जज़िया) → तैमूर 1398 → सैयद → लोदी → पानीपत 1526
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“दिल्ली सल्तनत (1206–1526) — पाँच वंश, प्रमुख शासक, प्रशासन, स्थापत्य व पानीपत — UPSC/RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- दिल्ली सल्तनत — वंश, शासक और प्रशासन — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- मुगल साम्राज्य: बाबर से औरंगज़ेब — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- भक्ति एवं सूफी आंदोलन — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
दिल्ली सल्तनत के पाँच वंश हैं — गुलाम/मामलूक (1206–1290), खिलजी (1290–1320), तुगलक (1320–1414), सैयद (1414–1451) और लोदी (1451–1526)।
संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था, पर इल्तुतमिश को वास्तविक संस्थापक या संगठक माना जाता है। उसने दिल्ली को राजधानी बनाया, ख़लीफ़ा से मान्यता ली, इक्ता व्यवस्था और चालीसा को संगठित किया तथा टंका-जीतल सिक्के चलाए।
ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन आरंभ में दास थे, इसलिए इसे गुलाम वंश कहा गया। पर ये तीन अलग परिवार (कुत्बी, शम्सी, बलबनी) थे, इसलिए इतिहासकार 'मामलूक' या 'आरंभिक तुर्क शासक' नाम अधिक उचित मानते हैं।
सिजदा में सुल्तान के सामने भूमि पर झुककर प्रणाम किया जाता था और पैबोस में सुल्तान के पैर चूमे जाते थे। बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए ये ईरानी दरबारी परंपराएँ अपनाईं।
अलाउद्दीन मंगोल आक्रमणों का सामना करने के लिए बड़ी स्थायी सेना कम वेतन पर रखना चाहता था, इसलिए उसने वस्तुओं के मूल्य तय किए। बाज़ार की देखरेख शहना-ए-मंडी और दीवान-ए-रियासत करते थे।
दाग (घोड़ों को दागना) और हुलिया (सैनिकों का विवरण-पत्र) प्रथा अलाउद्दीन खिलजी ने सेना में धोखाधड़ी रोकने के लिए शुरू की।
उसने ताँबे/कांसे के सिक्कों को चाँदी के टंके के बराबर मूल्य पर चलाया, पर इन्हें आसानी से जाली बनाया जा सका। बड़े पैमाने पर जाली सिक्कों के कारण योजना वापस लेनी पड़ी।
मोरक्को का यात्री इब्न बतूता 1333 में मुहम्मद बिन तुगलक के समय भारत आया। सुल्तान ने उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया और बाद में राजदूत बनाकर चीन भेजा; उसका वृत्तांत रेहला है।
फ़िरोज़ ने नहरें बनवाईं, दीवान-ए-ख़ैरात और दीवान-ए-बंदगान बनाए, दार-उल-शफ़ा (अस्पताल) खोला और ब्राह्मणों पर भी जज़िया लगाया। उसने पद और इक्ता वंशानुगत किए, जिससे प्रशासन कमज़ोर हुआ।
21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया। इब्राहिम युद्ध में मारा गया और दिल्ली सल्तनत का अंत होकर मुग़ल साम्राज्य की नींव पड़ी।
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