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मंदिर स्थापत्य शैलियाँ: नागर शैली एवं प्रमुख उदाहरण

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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मंदिर स्थापत्य शैलियाँ: नागर शैली एवं प्रमुख उदाहरण

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⚡ Quick Answer: भारतीय मंदिर-स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं — नागर (उत्तर भारत), द्रविड़ (दक्षिण भारत) और वेसर (मिश्रित, दक्कन)। राजस्थान के मंदिर मुख्यतः नागर शैली के हैं, जिसकी पहचान वक्ररेखीय (curvilinear) शिखर, आमलक, कलश, गर्भगृह, मंडप और ऊँची जगती है। राजस्थान-गुजरात में नागर की क्षेत्रीय उप-शैली मारू-गुर्जर (सोलंकी) शैली विकसित हुई; इससे पूर्व प्रतिहारकालीन महामारू शैली के मंदिर बने। प्रमुख उदाहरण: ओसियाँ (जोधपुर), आभानेरी का हर्षत माता मंदिर (दौसा), किराडू (बाड़मेर), बाड़ोली (चित्तौड़गढ़), जगत का अंबिका मंदिर (उदयपुर), दिलवाड़ा (माउंट आबू) और रणकपुर (पाली)।

1. भारतीय मंदिर-स्थापत्य — तीन शैलियाँ

आधारनागरद्रविड़वेसर
क्षेत्रउत्तर भारत (हिमालय से विंध्य)दक्षिण भारत (कृष्णा से कन्याकुमारी)दक्कन (विंध्य-कृष्णा के बीच)
शिखरवक्ररेखीय, ऊपर पतला होता — ‘शिखर’पिरामिडनुमा सीढ़ीदार — ‘विमान’दोनों का मिश्रण
शीर्षआमलक + कलशस्तूपिका/गुंबदनुमा शिखरमिश्रित
प्रवेश-द्वारसामान्य द्वारविशाल ‘गोपुरम्’—
चारदीवारीप्रायः नहींऊँची प्राकार-दीवार—
राजस्थान में✅ प्रमुख शैलीदुर्लभदुर्लभ

राजस्थान के प्रमुख मंदिरों की सूची: राजस्थान के प्रमुख मंदिर | स्थापत्य मास्टर: राजस्थान की स्थापत्य कला

2. नागर मंदिर के प्रमुख अंग

अंगअर्थ/स्थान
जगतीऊँचा चबूतरा जिस पर मंदिर खड़ा होता है
अधिष्ठान/पीठमंदिर का आधार-भाग, सजावटी पट्टियाँ
गर्भगृहमुख्य देव-प्रतिमा का अंधेरा, छोटा कक्ष
अंतरालगर्भगृह और मंडप को जोड़ने वाला भाग
मंडप / सभामंडपभक्तों के एकत्र होने का स्तंभयुक्त कक्ष
अर्धमंडप / मुखमंडपप्रवेश के पास का छोटा मंडप
शिखरगर्भगृह के ऊपर वक्ररेखीय ऊँचा भाग
उरुशृंगमुख्य शिखर से सटे छोटे शिखर — मारू-गुर्जर की पहचान
आमलकशिखर के ऊपर आँवले जैसा गोल पत्थर
कलश व ध्वजसबसे ऊपर कलश व ध्वज-दंड
प्रदक्षिणा पथगर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा मार्ग
तोरणप्रवेश पर अलंकृत मेहराबी द्वार

3. राजस्थान में नागर की उप-शैलियाँ

  • महामारू शैली (लगभग 8वीं–10वीं सदी): गुर्जर-प्रतिहार काल; मारवाड़ क्षेत्र में विकसित; उदाहरण — ओसियाँ के प्रारंभिक मंदिर, आभानेरी (हर्षत माता)।
  • मारू-गुर्जर / सोलंकी शैली (लगभग 10वीं–13वीं सदी): राजस्थान व गुजरात का साझा विकास; अत्यंत बारीक नक्काशी, उरुशृंगों से भरा शिखर, अलंकृत स्तंभ व छतें; उदाहरण — किराडू, दिलवाड़ा, जगत (अंबिका मंदिर), बाद में रणकपुर।
  • पंचायतन योजना: मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार उप-मंदिर — ओसियाँ के हरिहर मंदिर इसके उदाहरण।
  • आधुनिक प्रचलन: आज विश्व-भर के अनेक जैन व हिंदू मंदिर मारू-गुर्जर शैली में राजस्थानी शिल्पियों (सोमपुरा परिवार, पिंडवाड़ा के कारीगर) द्वारा बनाए जाते हैं।

🎯 मंदिर स्थापत्य: RAS-स्तर का अभ्यास

नागर-द्रविड़-वेसर अंतर, मारू-गुर्जर शैली, ओसियाँ-किराडू-आभानेरी — RAS प्रीलिम्स-मेन्स, शिक्षक भर्ती व CET में प्रश्न आते हैं। मॉक टेस्ट दें:

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4. राजस्थान के प्रमुख नागर-शैली मंदिर

मंदिरस्थानकाल/निर्माताविशेषता
ओसियाँ मंदिर-समूहओसियाँ (जोधपुर)8वीं–9वीं सदी, प्रतिहार काल (प्रारंभिक); सच्चियाय माता मंदिर बाद काहरिहर, सूर्य, विष्णु व जैन (महावीर) मंदिर; परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार ‘राजस्थान का भुवनेश्वर’
हर्षत माता मंदिरआभानेरी (दौसा)8वीं–9वीं सदी, प्रतिहार काल (राजा चाँद से संबद्ध परंपरा)महामारू शैली; पास में चाँद बावड़ी
किराडू मंदिर-समूहबाड़मेर11वीं–12वीं सदीसोमेश्वर मंदिर प्रमुख; परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार ‘राजस्थान का खजुराहो’
बाड़ोली मंदिर-समूहरावतभाटा (चित्तौड़गढ़)लगभग 10वीं सदीघटेश्वर शिव मंदिर; प्रतिहार-कालीन मूर्तिकला
जगत का अंबिका मंदिरजगत (उदयपुर)10वीं सदी (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार 961 ई.)‘मेवाड़ का खजुराहो’ (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)
भंडदेवरारामगढ़ (बारां)लगभग 10वीं सदी‘हाड़ौती का खजुराहो’ (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)
दिलवाड़ा जैन मंदिरमाउंट आबू (सिरोही)विमल वसही — 1031 ई. (विमलशाह); लूण वसही — 1230 ई. (वस्तुपाल-तेजपाल) — परीक्षा-पुस्तकों के अनुसारसंगमरमर पर अद्वितीय नक्काशी; मारू-गुर्जर
रणकपुर जैन मंदिररणकपुर (पाली)1439 ई. — धरणाशाह; शिल्पी देपा (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)चतुर्मुख; परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार 1444 स्तंभ

आभानेरी की चाँद बावड़ी: राजस्थान की बावड़ियाँ एवं जल-स्थापत्य

5. वास्तु-ग्रंथ और शिल्पी परंपरा

  • मंडन — महाराणा कुंभा के प्रमुख शिल्पी; ग्रंथ — प्रासाद मंडन, रूप मंडन, वास्तु मंडन, देवतामूर्ति प्रकरण आदि (मंदिर व मूर्ति-निर्माण के नियम)।
  • समरांगण सूत्रधार — परमार राजा भोज (11वीं सदी) का वास्तु-ग्रंथ; नागर शैली के सिद्धांत।
  • सोमपुरा शिल्पी — गुजरात-राजस्थान की पारंपरिक मंदिर-निर्माता परंपरा; आधुनिक मंदिरों (जैसे अयोध्या राम मंदिर का नागर-मारू-गुर्जर अभिकल्प) से जुड़ी।

पत्थर-शिल्प और पिंडवाड़ा: पत्थर एवं संगमरमर शिल्प

6. मंदिरों की मूर्तिकला — पहचान के सूत्र

  • देव-मूर्तियाँ: विष्णु के अवतार, शिव के रूप, सूर्य (बूट पहने — उत्तर भारतीय पहचान), देवी के रूप।
  • सुर-सुंदरियाँ/अप्सराएँ: जगत, किराडू, भंडदेवरा की प्रसिद्ध नारी-मूर्तियाँ — ‘खजुराहो’ उपनाम का कारण।
  • दिक्पाल: आठ दिशाओं के रक्षक देव, मंदिर की बाहरी दीवारों पर।
  • मिथुन व सामाजिक दृश्य: दैनिक जीवन, युद्ध, शिकार, नृत्य-संगीत।
  • जैन मंदिर: तीर्थंकर मूर्तियाँ, विद्यादेवियाँ, छतों पर बारीक कमल-आकृतियाँ।

✍️ RAS Mains मॉडल उत्तर — मारू-गुर्जर शैली (100 शब्द)

मारू-गुर्जर (सोलंकी) शैली नागर मंदिर-स्थापत्य की वह क्षेत्रीय उप-शैली है जो लगभग 10वीं से 13वीं सदी में राजस्थान (मरु) और गुजरात (गुर्जर) में विकसित हुई। इसकी पहचान ऊँची जगती, उरुशृंगों से भरा वक्ररेखीय शिखर, अत्यंत अलंकृत स्तंभ, गुंबदाकार मंडप-छतें और देव-अप्सरा मूर्तियों की बारीक नक्काशी है। इससे पूर्व प्रतिहारकालीन महामारू शैली (ओसियाँ, आभानेरी) प्रचलित थी। किराडू, जगत का अंबिका मंदिर, दिलवाड़ा और बाद में रणकपुर इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं। आज भी अनेक आधुनिक मंदिर इसी शैली में बनते हैं।

हिंदू व जैन मंदिरों में स्थापत्य-अंतर (राजस्थान संदर्भ)

  • योजना: जैन मंदिरों में प्रायः देवकुलिकाओं (छोटे कक्षों) की पंक्ति से घिरा आँगन — दिलवाड़ा; हिंदू मंदिरों में पंचायतन या एकल गर्भगृह योजना।
  • चतुर्मुख योजना: रणकपुर जैसे जैन मंदिरों में चारों दिशाओं में मुख वाली प्रतिमा व चार प्रवेश।
  • अलंकरण: दोनों में मारू-गुर्जर नक्काशी, पर जैन मंदिरों में संगमरमर की छतों पर कमल-आकृतियाँ विशेष।

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — यह विषय परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
शैलीराजस्थान के मंदिर किस शैली के?नागर (मारू-गुर्जर उप-शैली)
अंतरगोपुरम् किस शैली की पहचान?द्रविड़
उपनामराजस्थान का खजुराहो?किराडू (बाड़मेर)
उपनामराजस्थान का भुवनेश्वर?ओसियाँ (जोधपुर)
ग्रंथप्रासाद मंडन के रचयिता?मंडन (कुंभा के शिल्पी)

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नागर शैली की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

नागर शैली की प्रमुख विशेषताएँ वक्ररेखीय शिखर, शिखर पर आमलक व कलश, ऊँची जगती, गर्भगृह-अंतराल-मंडप योजना और प्रायः चारदीवारी व गोपुरम् का अभाव हैं।

मारू-गुर्जर शैली क्या है?

मारू-गुर्जर नागर शैली की वह उप-शैली है जो 10वीं–13वीं सदी में राजस्थान व गुजरात में विकसित हुई; इसमें उरुशृंगयुक्त शिखर और बारीक नक्काशी प्रमुख है।

राजस्थान का खजुराहो किसे कहते हैं?

परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार बाड़मेर के किराडू मंदिरों को राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है।

ओसियाँ के मंदिर किस काल के हैं?

ओसियाँ के प्रारंभिक मंदिर लगभग 8वीं–9वीं सदी के गुर्जर-प्रतिहार काल के हैं।

नागर और द्रविड़ शैली में क्या अंतर है?

नागर शैली में वक्ररेखीय शिखर और आमलक होता है, जबकि द्रविड़ शैली में पिरामिडनुमा विमान, विशाल गोपुरम् और ऊँची चारदीवारी होती है।

📝 One-Liner Revision (12 प्रश्न)

  1. राजस्थान की प्रमुख मंदिर-शैली — नागर
  2. नागर शिखर — वक्ररेखीय
  3. शिखर पर गोल पत्थर — आमलक
  4. गोपुरम् — द्रविड़ शैली
  5. मिश्रित शैली — वेसर
  6. प्रतिहारकालीन शैली — महामारू
  7. राजस्थान-गुजरात की उप-शैली — मारू-गुर्जर
  8. ओसियाँ — जोधपुर
  9. किराडू — बाड़मेर
  10. हर्षत माता — आभानेरी (दौसा)
  11. जगत का अंबिका मंदिर — उदयपुर
  12. प्रासाद मंडन — मंडन

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • राजस्थान = नागर शैली; उप-शैलियाँ — महामारू (प्रतिहार), मारू-गुर्जर (सोलंकी)।
  • अंग — जगती, गर्भगृह, अंतराल, मंडप, शिखर, आमलक, कलश।
  • उदाहरण — ओसियाँ, आभानेरी, किराडू, बाड़ोली, जगत, दिलवाड़ा, रणकपुर।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • गोपुरम् नागर में नहीं — द्रविड़ की पहचान।
  • तीन ‘खजुराहो’ — किराडू (राजस्थान), जगत (मेवाड़), भंडदेवरा (हाड़ौती)।
  • बाड़ोली (चित्तौड़गढ़) ≠ बाड़ोली/बांडोली (उदयपुर, प्रताप की छतरी) — नाम-भ्रम से बचें।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“उत्तर का नागर — शिखर पर आमलक; दक्षिण का द्रविड़ — द्वार पर गोपुरम्; बीच का वेसर — दोनों का मेल”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

मंदिर-प्रश्नों में दो परतें हैं — शैली (नागर/द्रविड़ अंतर) और उदाहरण (स्थान-काल-उपनाम)। ‘खजुराहो’ व ‘भुवनेश्वर’ जैसे उपनाम परीक्षा-पुस्तकों से आते हैं — उन्हें तालिका में अलग रंग से चिह्नित करके याद करें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

मंदिर स्थापत्य शैलियाँ व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • NCERT — An Introduction to Indian Art (Class XI), अध्याय: Temple Architecture (नागर, द्रविड़, वेसर)।
  • M.A. Dhaky — The Genesis and Development of Maru-Gurjara Temple Architecture (महामारू व मारू-गुर्जर वर्गीकरण)।
  • Archaeological Survey of India — Osian, Abhaneri, Kiradu, Baroli संरक्षित स्मारक।
  • सुयोग अकादमी — राजस्थान के प्रमुख मंदिर।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: मंदिर स्थापत्य शैलियाँ: नागर शैली एवं प्रमुख उदाहरण

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: मंदिरों की सटीक तिथियाँ, निर्माता, उपनाम (खजुराहो, भुवनेश्वर) व रणकपुर के स्तंभ-संख्या परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार दिए गए हैं; विद्वानों में तिथियों पर मतभेद संभव है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राजस्थान के अधिकांश मंदिर किस शैली के हैं?

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Q2. ‘गोपुरम्’ किस मंदिर-शैली की विशेषता है?

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Q3. ‘राजस्थान का खजुराहो’ कहलाते हैं —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. हर्षत माता मंदिर कहाँ स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. मंदिर-निर्माण पर ‘प्रासाद मंडन’ ग्रंथ किसने लिखा?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

वक्ररेखीय, ऊपर की ओर पतला होता हुआ।

नागर शिखर के शीर्ष पर आँवले जैसा गोल पत्थर।

राजस्थान और गुजरात में।

बाड़मेर।

मंडन (महाराणा कुंभा के शिल्पी)।

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