राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय: अल्बर्ट हॉल से लोक कला मंडल तक — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: राजस्थान का पहला संग्रहालय जयपुर का अल्बर्ट हॉल (केंद्रीय संग्रहालय) है — इसकी नींव 6 फ़रवरी 1876 को प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड (बाद में सम्राट एडवर्ड सप्तम) ने सवाई रामसिंह द्वितीय के समय रखी, भवन का डिज़ाइन सैमुअल स्विंटन जैकब ने इंडो-सारसेनिक शैली में बनाया और संग्रहालय के रूप में यह 1887 (सवाई माधोसिंह द्वितीय का काल) में खुला; इसकी मिस्र की ममी सबसे प्रसिद्ध आकर्षण है। स्वतंत्रता के बाद राज्य के संग्रहालय पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग (पुस्तकों के अनुसार 1950) के अधीन आए। प्रमुख राजकीय संग्रहालय: अजमेर (अकबर का किला/मैगज़ीन, 1908), जोधपुर का सरदार संग्रहालय (1909), झालावाड़ (1915, प्राचीनतम में गिना जाता है), बीकानेर का गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय (1937), अलवर (सिटी पैलेस), भरतपुर (लोहागढ़), कोटा (बृजविलास) व चित्तौड़ (फतह प्रकाश महल)। निजी/ट्रस्ट संग्रहालयों में महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय (सिटी पैलेस जयपुर, 1959), मेहरानगढ़ (जोधपुर), राव माधोसिंह (कोटा) प्रमुख हैं। लोक कला के लिए भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर (देवीलाल सामर, 1952 — कठपुतली) और बागोर की हवेली (उदयपुर) याद रखें।
संक्षिप्त उत्तर
संग्रहालय | स्थान (जिला) | स्थापना (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार) | एक-पंक्ति पहचान |
|---|---|---|---|
अल्बर्ट हॉल (केंद्रीय संग्रहालय) | रामनिवास बाग, जयपुर | नींव 1876; संग्रहालय 1887 | राज्य का पहला संग्रहालय; मिस्र की ममी |
महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय | सिटी पैलेस, जयपुर | 1959 | चाँदी के विशाल गंगाजली पात्र; वस्त्र व शस्त्र |
राजकीय संग्रहालय अजमेर | अकबर का किला (मैगज़ीन), अजमेर | 1908 | चौहानकालीन प्रतिमाएँ व शिलालेख |
सरदार राजकीय संग्रहालय | उम्मेद उद्यान, जोधपुर | 1909 | महाराजा सरदार सिंह के नाम पर |
राजकीय संग्रहालय झालावाड़ | झालावाड़ | 1915 | प्राचीनतम राजकीय संग्रहालयों में; प्रतिमाएँ व पांडुलिपियाँ |
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय | बीकानेर | 1937 | गंगासिंह के शासन की स्वर्ण जयंती; पल्लू की सरस्वती |
भारतीय लोक कला मंडल | उदयपुर | 1952 (देवीलाल सामर) | कठपुतली व लोक कला |
मेहरानगढ़ संग्रहालय | मेहरानगढ़ दुर्ग, जोधपुर | ट्रस्ट 1972 | पालकियाँ, हौदे, फूल महल |
बागोर की हवेली | गणगौर घाट, उदयपुर | — | पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र; विशाल पगड़ी |
आहड़ संग्रहालय | आहड़, उदयपुर | — | आहड़ (ताम्रयुगीन) सभ्यता की खुदाई की वस्तुएँ |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS, राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी, VDO, REET और SI के "राजस्थान की कला एवं संस्कृति" खंड में संग्रहालय एक छोटा परंतु बार-बार दोहराया जाने वाला टॉपिक है। प्रश्न प्रायः संग्रहालय → शहर, संग्रहालय → स्थापना वर्ष, संग्रहालय → किस भवन में स्थित और "राज्य का पहला/प्राचीनतम संग्रहालय" पर बनते हैं। यह नोट दुर्ग, महल और हवेलियों के स्थापत्य पर नहीं, बल्कि उनमें स्थित संग्रहालयों और उनके संग्रह पर केंद्रित है — स्थापत्य के लिए खंड 19 के संबंधित नोट देखें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★☆☆
RPSC RAS प्रारंभिक — मिलान प्रश्न (संग्रहालय–शहर–भवन), अल्बर्ट हॉल के तथ्य
राजस्थान CET — एक-पंक्ति तथ्य: "राज्य का पहला संग्रहालय", "भारतीय लोक कला मंडल कहाँ है"
पटवारी, VDO, कांस्टेबल — स्थान आधारित प्रश्न: अकबर का किला, लोहागढ़, फतह प्रकाश महल
REET — राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर: कठपुतली, लोक कला संग्रहालय
प्रश्न कैसे आते हैं?
चार रूप प्रमुख हैं — (1) तथ्य: "अल्बर्ट हॉल का डिज़ाइन किसने बनाया?"; (2) मिलान: सूची-I (संग्रहालय) और सूची-II (शहर/भवन); (3) कालक्रम: अजमेर (1908), सरदार (1909), झालावाड़ (1915), गंगा (1937) को क्रम में लगाइए; (4) भ्रम-आधारित: "निम्न में से कौन सा सुमेलित नहीं है" — जैसे "भारतीय लोक कला मंडल — जयपुर" (गलत, सही है उदयपुर)।
3. पृष्ठभूमि: राजस्थान में संग्रहालयों का विकास
आधुनिक अर्थ में संग्रहालय (Museum) — जहाँ पुरावस्तुएँ, कलाकृतियाँ, पांडुलिपियाँ और शस्त्र जनता के देखने के लिए वैज्ञानिक ढंग से रखे जाएँ — राजस्थान में 19वीं सदी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश प्रभाव के साथ आए। रियासतों के शासकों ने अपने राजकीय संग्रह (तोशाखाना, सिलहखाना, पोथीखाना) के साथ-साथ जनता के लिए भी संग्रहालय बनवाए। इसी क्रम में जयपुर का अल्बर्ट हॉल (1887) पहला संग्रहालय बना।
तीन चरण
चरण | काल | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
रियासती चरण | 1876–1947 | शासकों द्वारा किसी अवसर/व्यक्ति की स्मृति में संग्रहालय | अल्बर्ट हॉल, अजमेर, सरदार (जोधपुर), झालावाड़, गंगा गोल्डन जुबली |
राजकीय चरण | 1950 के बाद | पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन जिलों में राजकीय संग्रहालय | अलवर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़ आदि राजकीय संग्रहालय |
ट्रस्ट/निजी चरण | मुख्यतः 1950 के दशक के बाद | पूर्व राजपरिवारों के ट्रस्ट व सांस्कृतिक संस्थाएँ | सिटी पैलेस जयपुर (1959), मेहरानगढ़ (1972), भारतीय लोक कला मंडल (1952) |
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग
राजस्थान के एकीकरण के बाद रियासतों के संग्रहालय राज्य सरकार के अधीन आए। परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग (Department of Archaeology & Museums) की स्थापना 1950 में हुई और इसका मुख्यालय जयपुर है। यह विभाग राज्य-संरक्षित स्मारकों और जिलों के राजकीय संग्रहालयों की देखरेख करता है। ध्यान दें — कालीबंगा जैसे केंद्रीय-संरक्षित स्थलों के स्थल-संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन होते हैं, राज्य विभाग के नहीं। (विभाग की स्थापना-तिथि को कुछ स्रोत अलग ढंग से बताते हैं; परीक्षा में प्रायः 1950 ही स्वीकृत उत्तर है।)
संग्रहालयों के प्रकार
राजकीय संग्रहालय — राज्य सरकार के: अल्बर्ट हॉल, अजमेर, झालावाड़, गंगा गोल्डन जुबली, सरदार, अलवर, भरतपुर, कोटा आदि।
महल/दुर्ग संग्रहालय (ट्रस्ट) — पूर्व राजपरिवारों के: सिटी पैलेस जयपुर, मेहरानगढ़, उम्मेद भवन, राव माधोसिंह (कोटा), सिटी पैलेस उदयपुर, जूनागढ़ व लालगढ़ (बीकानेर)।
लोक कला/सांस्कृतिक संग्रहालय — भारतीय लोक कला मंडल, बागोर की हवेली, जैसलमेर का लोक सांस्कृतिक संग्रहालय।
स्थल संग्रहालय (Site Museum) — उत्खनन-स्थल पर ही: कालीबंगा (ASI), आहड़।
थीम/विशेष संग्रहालय — गुड़िया घर (जयपुर), अनोखी हाथ छपाई संग्रहालय (आमेर), मोम संग्रहालय (नाहरगढ़)।
4. अल्बर्ट हॉल — केंद्रीय संग्रहालय, जयपुर
अल्बर्ट हॉल जयपुर के रामनिवास बाग में स्थित है और इसे केंद्रीय संग्रहालय (Central Museum) भी कहते हैं। यह राजस्थान का पहला (सबसे पुराना) संग्रहालय है।
निर्माण की कहानी
नींव: 6 फ़रवरी 1876 — ब्रिटिश युवराज प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड (बाद में सम्राट एडवर्ड सप्तम) की जयपुर यात्रा के समय। तब जयपुर के शासक सवाई रामसिंह द्वितीय थे।
नामकरण — प्रिंस अल्बर्ट एडवर्ड के नाम पर; यह लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूज़ियम से प्रेरित माना जाता है।
वास्तुकार — सैमुअल स्विंटन जैकब (Col. Samuel Swinton Jacob), जयपुर राज्य के लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता।
शैली — इंडो-सारसेनिक (भारतीय, मुगल-इस्लामी और यूरोपीय तत्वों का मिश्रण): छतरियाँ, जालियाँ, मेहराबें और गलियारे।
उद्घाटन (संग्रहालय के रूप में): 1887 — सवाई माधोसिंह द्वितीय के शासन में। मूल रूप से इसे टाउन हॉल के रूप में सोचा गया था, बाद में संग्रहालय बनाया गया।
याद रखें: नींव 1876 (रामसिंह द्वितीय, प्रिंस ऑफ़ वेल्स) ≠ उद्घाटन 1887 (माधोसिंह द्वितीय)। "स्थापना" पूछे तो प्रायः 1887 अपेक्षित है।
प्रमुख संग्रह
मिस्र की ममी — संग्रहालय का सबसे प्रसिद्ध आकर्षण; प्राचीन मिस्र से लाई गई।
फ़ारसी गलीचा (Persian Garden Carpet) — विश्व-प्रसिद्ध कालीनों में गिना जाता है।
धातु-शिल्प, हाथीदाँत, मीनाकारी, मृद्भांड (पॉटरी), आभूषण, अस्त्र-शस्त्र, लघु चित्र, मूर्तियाँ और सिक्के।
विभिन्न देशों की कला-वस्तुएँ — इसलिए इसे राज्य का सबसे बड़ा/केंद्रीय संग्रहालय भी कहा जाता है (पुस्तकों के अनुसार)।
सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा जयपुर नगर की स्थापना और कच्छवाहा शासकों का क्रम जयपुर शहर की स्थापना और जयपुर रियासत के प्रमुख शासक नोट्स में देखें।
5. जयपुर के अन्य संग्रहालय व कला-केंद्र
संग्रहालय/केंद्र | स्थान | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय | सिटी पैलेस | 1959 में स्थापित; मुबारक महल में वस्त्र-संग्रह, सिलहखाना (शस्त्रागार), चित्र व पांडुलिपियाँ |
गंगाजली (चाँदी के पात्र) | सिटी पैलेस — दीवान-ए-ख़ास | सवाई माधोसिंह द्वितीय की 1902 की इंग्लैंड यात्रा हेतु गंगाजल ले जाने के लिए बने विश्व के सबसे बड़े चाँदी के पात्र |
हवा महल संग्रहालय | हवा महल परिसर | पुरातत्व विभाग द्वारा संचालित; पुरावस्तुएँ व प्रतिमाएँ |
गुड़िया घर (Doll Museum) | जयपुर | विभिन्न देशों व भारतीय राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा वाली गुड़ियाँ |
अनोखी हाथ छपाई संग्रहालय (Anokhi Museum of Hand Printing) | आमेर (पुनर्निर्मित पुरानी हवेली) | ठप्पा (ब्लॉक) छपाई की परंपरा व तकनीक |
जवाहर कला केंद्र | जवाहरलाल नेहरू मार्ग, जयपुर | बहु-कला केंद्र (संग्रहालय नहीं); वास्तुकार चार्ल्स कोरिया; नवग्रह मंडल की अवधारणा |
जयपुर मोम संग्रहालय (Wax Museum) | नाहरगढ़ दुर्ग | प्रसिद्ध व्यक्तियों की मोम प्रतिमाएँ |
सिटी पैलेस संग्रहालय की परीक्षा-उपयोगी बातें
संग्रहालय का नाम अंतिम शासक सवाई मानसिंह द्वितीय के नाम पर है; स्थापना 1959।
मुबारक महल — सवाई माधोसिंह द्वितीय द्वारा बनवाया; इसमें शाही पोशाकें व वस्त्र प्रदर्शित।
सिलहखाना — शस्त्रागार (Armoury)। ध्यान दें: "सिलहखाना" का अर्थ शस्त्रागार, "पोथीखाना" का अर्थ पांडुलिपि-संग्रह।
दीवान-ए-ख़ास (सर्वतोभद्र) में रखे दो विशाल चाँदी के गंगाजली पात्र।
जवाहर कला केंद्र को अक्सर "संग्रहालय" समझ लिया जाता है, पर यह कला-प्रदर्शन, नाटक, संगीत व प्रदर्शनी का बहु-कला केंद्र है। इसकी योजना जयपुर की नौ-खंड (नवग्रह) नगर योजना से प्रेरित है।
6. मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद) के संग्रहालय
6.1 भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर
स्थापना 1952 में पद्मश्री देवीलाल सामर ने की।
लोक कलाओं — विशेषकर कठपुतली (Puppetry), लोक नृत्य, लोक नाट्य, लोक वाद्य, मुखौटे, लोक वेशभूषा — का संग्रहालय व शोध-संस्थान।
यहाँ नियमित कठपुतली प्रदर्शन होते हैं; कठपुतली कला के संरक्षण-प्रसार में इसकी प्रमुख भूमिका।
प्रायः पूछा जाता है: "भारतीय लोक कला मंडल कहाँ है?" — उदयपुर (जयपुर नहीं)।
कठपुतली कला की परंपरा, भाट समुदाय और अमर सिंह राठौड़ के खेल के लिए कठपुतली कला: इतिहास व भाट परंपरा देखें।
6.2 बागोर की हवेली, उदयपुर
पिछोला झील के किनारे गणगौर घाट पर स्थित; 18वीं सदी में मेवाड़ के प्रधान अमरचंद बड़वा द्वारा निर्मित (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)।
वर्तमान में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (West Zone Cultural Centre) द्वारा संचालित संग्रहालय।
विशेषता — विश्व की सबसे बड़ी पगड़ियों में गिनी जाने वाली पगड़ी, मेवाड़ी वेशभूषा, आभूषण, शाही कक्ष; शाम को "धरोहर" लोक नृत्य कार्यक्रम।
6.3 सिटी पैलेस संग्रहालय / प्रताप संग्रहालय, उदयपुर
उदयपुर के सिटी पैलेस में महाराणाओं के शस्त्र, चित्र और राजचिह्न प्रदर्शित हैं; इसमें महाराणा प्रताप से जुड़ी वस्तुएँ (शस्त्र, कवच) भी हैं, इसलिए कई पुस्तकें इसे प्रताप संग्रहालय भी कहती हैं। उदयपुर का राजकीय संग्रहालय मूलतः विक्टोरिया हॉल संग्रहालय के रूप में शुरू हुआ था (पुस्तकों के अनुसार 1890), जो बाद में सिटी पैलेस परिसर (कर्ण विलास) में स्थानांतरित हुआ। सिटी पैलेस के फतह प्रकाश महल में क्रिस्टल गैलरी है — इसे चित्तौड़ के फतह प्रकाश महल से न मिलाएँ।
6.4 आहड़ संग्रहालय, उदयपुर
उदयपुर के निकट आहड़ (प्राचीन ताम्रवती/धूलकोट) में महासतियों (मेवाड़ के महाराणाओं की छतरियाँ) के पास स्थित संग्रहालय। इसमें आहड़ सभ्यता की खुदाई में मिली वस्तुएँ — काले-लाल मृद्भांड, ताँबे की वस्तुएँ, मनके, मुहरें — और आसपास के क्षेत्र की मध्यकालीन प्रतिमाएँ प्रदर्शित हैं। आहड़ सभ्यता का विस्तृत अध्ययन आहड़ सभ्यता नोट में करें।
आहड़ संग्रहालय (उदयपुर, संग्रह-स्थल) ≠ आहड़ सभ्यता (ताम्रयुगीन संस्कृति, आहड़/बेड़च नदी)। प्रश्न में "संग्रहालय" है या "सभ्यता" — ध्यान से पढ़ें।
6.5 फतह प्रकाश महल संग्रहालय, चित्तौड़गढ़
चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर महाराणा फतह सिंह द्वारा बनवाया गया फतह प्रकाश महल अब राजकीय संग्रहालय है। इसमें दुर्ग और आसपास से प्राप्त मध्यकालीन प्रतिमाएँ, अस्त्र-शस्त्र और लोक कला-वस्तुएँ हैं। दुर्ग के स्थापत्य के लिए राजस्थान के प्रमुख किले देखें।
6.6 हल्दीघाटी संग्रहालय (बलीचा), राजसमंद
हल्दीघाटी के पास बलीचा गाँव में महाराणा प्रताप की स्मृति में बना निजी संग्रहालय, जिसमें प्रताप के जीवन, हल्दीघाटी युद्ध और चेतक से जुड़े दृश्य/मॉडल हैं। युद्ध के लिए हल्दीघाटी युद्ध नोट देखें।
7. हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, झालावाड़)
संग्रहालय | स्थान/भवन | विशेषता |
|---|---|---|
राव माधोसिंह संग्रहालय | कोटा गढ़ (सिटी पैलेस), कोटा | कोटा राज्य के संस्थापक राव माधोसिंह के नाम पर; कोटा शैली के चित्र, शस्त्र, शाही वस्तुएँ — ट्रस्ट द्वारा संचालित |
राजकीय संग्रहालय कोटा | बृजविलास महल, कोटा | हाड़ौती क्षेत्र (बाड़ौली आदि) की प्रतिमाएँ, सिक्के, पांडुलिपियाँ |
राजकीय संग्रहालय बूंदी | बूंदी | स्थानीय पुरावस्तुएँ व बूंदी शैली के चित्र |
राजकीय संग्रहालय झालावाड़ | झालावाड़ (गढ़ परिसर) | 1915; महाराज राणा भवानी सिंह के समय; प्राचीन प्रतिमाएँ, शिलालेख, सिक्के, हस्तलिखित ग्रंथ |
झालावाड़ संग्रहालय (1915) को कई पुस्तकें "राज्य के सबसे पुराने (प्राचीनतम) राजकीय संग्रहालयों में से एक" लिखती हैं; कुछ पुस्तकें इसे सीधे "प्राचीनतम संग्रहालय" भी कह देती हैं। परीक्षा में यदि विकल्पों में अल्बर्ट हॉल हो और प्रश्न "पहला/सबसे पुराना संग्रहालय" पूछे, तो उत्तर अल्बर्ट हॉल (1887) ही दें — कालक्रम से अजमेर (1908) और सरदार (1909) भी झालावाड़ से पहले के हैं। कोटा शैली के चित्रों के लिए कोटा चित्रकला शैली देखें।
8. अजमेर, भरतपुर व अलवर के संग्रहालय
8.1 राजकीय संग्रहालय अजमेर (1908)
अकबर का किला (अकबर का दौलतखाना, जिसे अंग्रेज़ों के समय शस्त्रागार बनने से मैगज़ीन कहा गया) में स्थित।
स्थापना 1908 — राजपूताना म्यूज़ियम के रूप में (पुस्तकों के अनुसार)।
इसी किले में 1616 में जहाँगीर ने अंग्रेज़ राजदूत सर टॉमस रो से भेंट की थी — यह ऐतिहासिक तथ्य भी पूछा जाता है।
संग्रह — चौहान व प्रतिहारकालीन प्रतिमाएँ, शिलालेख, सिक्के, अस्त्र-शस्त्र; पुस्तकों के अनुसार अढ़ाई दिन के झोंपड़े से प्राप्त विग्रहराज चतुर्थ के हरिकेलि नाटक के शिलाखंड भी यहीं।
8.2 राजकीय संग्रहालय भरतपुर
लोहागढ़ दुर्ग (महाराजा सूरजमल द्वारा निर्मित) के भीतर कचहरी कलाँ भवन में स्थित; पुस्तकों के अनुसार स्थापना 1944। इसमें भरतपुर क्षेत्र (नोह, बयाना आदि) की प्रतिमाएँ, जाट शासकों के अस्त्र-शस्त्र और शिलालेख हैं।
8.3 राजकीय संग्रहालय अलवर
अलवर के सिटी पैलेस (विनय विलास महल) में स्थित; पुस्तकों के अनुसार स्थापना 1940। यह अलवर शैली के चित्रों, फ़ारसी-अरबी-संस्कृत हस्तलिखित ग्रंथों, अस्त्र-शस्त्र और हाथीदाँत की वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है।
9. बीकानेर के संग्रहालय
9.1 गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय (1937)
महाराजा गंगासिंह (शासन 1887 से) के शासन के 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने पर 1937 में स्थापित — इसलिए नाम "गोल्डन जुबली"।
संग्रह — पल्लू (हनुमानगढ़) से प्राप्त जैन सरस्वती की प्रसिद्ध संगमरमर प्रतिमा, रंगमहल आदि स्थलों की टेराकोटा, बीकानेर शैली के चित्र, अस्त्र-शस्त्र, सिक्के।
यह बीकानेर में है — जोधपुर या जयपुर नहीं।
गंगासिंह के प्रशासनिक सुधार, गंग नहर और विश्व-युद्धों में भूमिका के लिए महाराजा गंगासिंह (बीकानेर) नोट पढ़ें।
9.2 सादुल संग्रहालय, लालगढ़ महल
लालगढ़ महल (गंगासिंह द्वारा अपने पिता लालसिंह की स्मृति में; डिज़ाइन — सैमुअल स्विंटन जैकब) में स्थित सादुल संग्रहालय, जो महाराजा सादुलसिंह के नाम पर है। इसमें बीकानेर राजपरिवार के छायाचित्र, शिकार-ट्रॉफ़ी और निजी वस्तुएँ हैं।
9.3 जूनागढ़ दुर्ग संग्रहालय
जूनागढ़ (राव/राजा रायसिंह, मंत्री कर्मचंद) के महलों — अनूप महल, फूल महल, बादल महल — में संग्रहालय है। इसमें प्रथम विश्वयुद्ध का एक विमान, शाही पालकियाँ, अस्त्र-शस्त्र और उस्ता कला के उदाहरण देखे जा सकते हैं। बीकानेर के शासकों के लिए बीकानेर का इतिहास और उस्ता कला देखें।
9.4 संबद्ध संस्थान: राजस्थान राज्य अभिलेखागार
यह संग्रहालय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज़ों (बहियाँ, फ़रमान, निशान, पट्टे) का अभिलेखागार (Archives) है — स्थापना 1955 (जयपुर में), बाद में बीकानेर स्थानांतरित। "संग्रहालय" और "अभिलेखागार" के अंतर पर प्रश्न आ सकता है।
10. मारवाड़ (जोधपुर, पाली) व जैसलमेर
10.1 जोधपुर
संग्रहालय | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
मेहरानगढ़ संग्रहालय | मेहरानगढ़ दुर्ग | मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट (1972, महाराजा गजसिंह द्वितीय); हाथी के हौदे, पालकियाँ, शस्त्र, मारवाड़ शैली के चित्र, फूल महल, मोती महल, शीश महल |
उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय | छीतर पहाड़ी | महाराजा उम्मेदसिंह द्वारा 1929–1943 में निर्मित महल (छीतर पैलेस) का एक भाग; घड़ियाँ, विंटेज कारें, राजपरिवार की वस्तुएँ |
सरदार राजकीय संग्रहालय | उम्मेद उद्यान (पब्लिक पार्क) | 1909; महाराजा सरदार सिंह के नाम पर; प्रतिमाएँ, शिलालेख, अस्त्र-शस्त्र, पांडुलिपियाँ |
उम्मेद भवन के वास्तुकार हेनरी वॉन लैंकेस्टर थे; इसे बलुआ पत्थर (छीतर पत्थर) से बनाया गया, इसलिए "छीतर पैलेस" भी कहते हैं। आज इसके एक भाग में होटल, एक भाग में राजपरिवार का निवास और एक भाग में संग्रहालय है। मारवाड़ शैली के लिए मारवाड़ चित्रकला शैली देखें।
10.2 पाली — बांगड़ संग्रहालय
पाली का राजकीय संग्रहालय बांगड़ संग्रहालय नाम से जाना जाता है; इसमें स्थानीय प्रतिमाएँ, सिक्के और लोक वस्तुएँ प्रदर्शित हैं।
10.3 जैसलमेर
डेजर्ट कल्चर सेंटर एवं संग्रहालय — मरु संस्कृति, लोक वाद्य, पारंपरिक वस्तुएँ; यहाँ कठपुतली प्रदर्शन भी होता है। (संस्थापक के रूप में पुस्तकें लोकसंस्कृति-विद नंदकिशोर शर्मा का नाम देती हैं।)
जैसलमेर लोक सांस्कृतिक संग्रहालय (Folklore Museum) — गड़ीसर झील के पास; लोक जीवन की वस्तुएँ।
राजकीय संग्रहालय जैसलमेर — क्षेत्र की पुरावस्तुएँ व जीवाश्म।
आकल वुड फॉसिल पार्क — जैसलमेर-बाड़मेर मार्ग पर आकल गाँव में; जुरासिक काल के (लगभग 18 करोड़ वर्ष पुराने बताए जाने वाले) काष्ठ जीवाश्म। यह संग्रहालय नहीं, जीवाश्म उद्यान (Fossil Park) है।
11. अन्य जिलों के संग्रहालय व स्थल-संग्रहालय
संग्रहालय | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
राजकीय संग्रहालय माउंट आबू | सिरोही | आबू क्षेत्र की प्रतिमाएँ, जनजातीय (गरासिया/भील) जीवन से जुड़ी वस्तुएँ |
राजकीय संग्रहालय सीकर | सीकर | शेखावाटी क्षेत्र की प्रतिमाएँ (पुस्तकों के अनुसार हर्षनाथ मंदिर की प्रतिमाएँ भी) |
राजमाता देवेंद्र कुंवर राजकीय संग्रहालय | डूंगरपुर | वागड़ क्षेत्र की प्रतिमाएँ व पुरावस्तुएँ |
कालीबंगा स्थल संग्रहालय | हनुमानगढ़ | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा; हड़प्पाकालीन मृद्भांड, मुहरें, चूड़ियाँ, ईंटें |
आहड़ संग्रहालय | उदयपुर | आहड़ सभ्यता की उत्खनित वस्तुएँ |
कालीबंगा (हनुमानगढ़, घग्घर/प्राचीन सरस्वती तट) के स्थल-संग्रहालय में हड़प्पा व प्राक्-हड़प्पा काल की वस्तुएँ हैं — विस्तार कालीबंगा सभ्यता में। गणेश्वर (सीकर; ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी) की ताँबे की वस्तुएँ विभिन्न संग्रहालयों में मिलती हैं — सभ्यता का विवरण गणेश्वर सभ्यता नोट में है। गणेश्वर पर अलग स्थल-संग्रहालय की स्थापना-तिथि मानक पुस्तकों में एक-सी नहीं मिलती, इसलिए इस पर तथ्य-आधारित प्रश्न की अपेक्षा कम है।
12. क्षेत्रवार मास्टर सूची
संभाग/क्षेत्र | संग्रहालय (शहर) |
|---|---|
जयपुर | अल्बर्ट हॉल, सिटी पैलेस (सवाई मानसिंह द्वितीय), हवा महल, गुड़िया घर, अनोखी (आमेर), मोम संग्रहालय (नाहरगढ़); अलवर; सीकर |
अजमेर | राजकीय संग्रहालय (अकबर का किला) |
उदयपुर | भारतीय लोक कला मंडल, बागोर की हवेली, सिटी पैलेस/प्रताप संग्रहालय, आहड़; फतह प्रकाश (चित्तौड़); हल्दीघाटी (बलीचा, राजसमंद); डूंगरपुर |
कोटा | राव माधोसिंह, राजकीय (बृजविलास); बूंदी; झालावाड़ (1915) |
भरतपुर | राजकीय संग्रहालय (लोहागढ़ — कचहरी कलाँ) |
बीकानेर | गंगा गोल्डन जुबली (1937), सादुल (लालगढ़), जूनागढ़; कालीबंगा स्थल संग्रहालय (हनुमानगढ़) |
जोधपुर | मेहरानगढ़, उम्मेद भवन, सरदार (1909); बांगड़ (पाली); जैसलमेर के संग्रहालय व आकल फॉसिल पार्क; माउंट आबू (सिरोही) |
13. "प्रथम / प्राचीनतम / सबसे बड़ा" तथ्य तालिका
तथ्य | उत्तर | टिप्पणी |
|---|---|---|
राजस्थान का पहला संग्रहालय | अल्बर्ट हॉल, जयपुर | नींव 1876, संग्रहालय 1887 |
राज्य का केंद्रीय/सबसे बड़ा संग्रहालय | अल्बर्ट हॉल | पुस्तकों के अनुसार |
प्राचीनतम राजकीय संग्रहालयों में गिना जाने वाला | झालावाड़ (1915) | कुछ पुस्तकें "प्राचीनतम" लिखती हैं — सावधानी (खंड 16) |
किले में स्थित संग्रहालय — मुगल बादशाह से जुड़ा | अजमेर (अकबर का किला) | 1908 |
किसी शासक की स्वर्ण जयंती पर बना संग्रहालय | गंगा गोल्डन जुबली, बीकानेर | 1937 |
लोक कलाओं व कठपुतली का प्रमुख संग्रहालय | भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर | 1952, देवीलाल सामर |
विश्व के सबसे बड़े चाँदी के पात्र | सिटी पैलेस जयपुर (गंगाजली) | सवाई माधोसिंह द्वितीय, 1902 |
मिस्र की ममी | अल्बर्ट हॉल, जयपुर | सबसे प्रसिद्ध प्रदर्श |
विशाल पगड़ी | बागोर की हवेली, उदयपुर | पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र |
जुरासिक काष्ठ जीवाश्म | आकल (जैसलमेर) | फॉसिल पार्क |
14. कालक्रम (Timeline)
वर्ष | घटना |
|---|---|
1876 | प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड द्वारा अल्बर्ट हॉल की नींव (सवाई रामसिंह द्वितीय) |
1887 | अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के रूप में खुला (सवाई माधोसिंह द्वितीय); इसी वर्ष गंगासिंह बीकानेर की गद्दी पर |
1890 | उदयपुर का विक्टोरिया हॉल संग्रहालय (पुस्तकों के अनुसार) |
1908 | राजकीय संग्रहालय अजमेर (अकबर का किला) |
1909 | सरदार संग्रहालय, जोधपुर |
1915 | राजकीय संग्रहालय झालावाड़ |
1937 | गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय, बीकानेर |
1940 | राजकीय संग्रहालय अलवर (पुस्तकों के अनुसार) |
1944 | राजकीय संग्रहालय भरतपुर (पुस्तकों के अनुसार) |
1950 | पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग (पुस्तकों के अनुसार) |
1952 | भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर (देवीलाल सामर) |
1955 | राजस्थान राज्य अभिलेखागार (बाद में बीकानेर) |
1959 | महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय, सिटी पैलेस जयपुर |
1972 | मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट, जोधपुर |
क्रम-सूत्र: "अ-स-झा-गं" = अजमेर 1908 → सरदार 1909 → झालावाड़ 1915 → गंगा 1937
15. संग्रहालय → शहर → विशेषता मिलान तालिका
संग्रहालय | शहर | भवन/परिसर | पहचान-शब्द |
|---|---|---|---|
अल्बर्ट हॉल | जयपुर | रामनिवास बाग | ममी, फ़ारसी गलीचा, जैकब, इंडो-सारसेनिक |
सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय | जयपुर | सिटी पैलेस | मुबारक महल, सिलहखाना, गंगाजली |
अनोखी संग्रहालय | आमेर (जयपुर) | पुरानी हवेली | हाथ से ठप्पा छपाई |
मोम संग्रहालय | जयपुर | नाहरगढ़ दुर्ग | मोम की प्रतिमाएँ |
राजकीय संग्रहालय | अजमेर | अकबर का किला/मैगज़ीन | 1908, सर टॉमस रो |
भारतीय लोक कला मंडल | उदयपुर | — | देवीलाल सामर, कठपुतली |
बागोर की हवेली | उदयपुर | गणगौर घाट | WZCC, पगड़ी, धरोहर नृत्य |
आहड़ संग्रहालय | उदयपुर | महासतियाँ के पास | ताम्रयुगीन वस्तुएँ |
फतह प्रकाश महल संग्रहालय | चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़ दुर्ग | मध्यकालीन प्रतिमाएँ |
राव माधोसिंह संग्रहालय | कोटा | कोटा गढ़ | कोटा शैली, ट्रस्ट |
राजकीय संग्रहालय | कोटा | बृजविलास महल | हाड़ौती प्रतिमाएँ |
राजकीय संग्रहालय | झालावाड़ | गढ़ परिसर | 1915, भवानी सिंह |
राजकीय संग्रहालय | भरतपुर | लोहागढ़ — कचहरी कलाँ | जाट शासकों के शस्त्र |
राजकीय संग्रहालय | अलवर | सिटी पैलेस (विनय विलास) | पांडुलिपियाँ, अलवर शैली |
गंगा गोल्डन जुबली | बीकानेर | — | 1937, पल्लू सरस्वती |
सादुल संग्रहालय | बीकानेर | लालगढ़ महल | सादुलसिंह |
मेहरानगढ़ संग्रहालय | जोधपुर | मेहरानगढ़ दुर्ग | हौदे, पालकियाँ, 1972 ट्रस्ट |
सरदार संग्रहालय | जोधपुर | उम्मेद उद्यान | 1909 |
बांगड़ संग्रहालय | पाली | — | राजकीय संग्रहालय |
आकल वुड फॉसिल पार्क | जैसलमेर | आकल गाँव | जुरासिक काष्ठ जीवाश्म |
16. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Trap Section)
Trap 1: अल्बर्ट हॉल — नींव बनाम उद्घाटन
नींव 1876 (सवाई रामसिंह द्वितीय, प्रिंस ऑफ़ वेल्स), संग्रहालय 1887 (सवाई माधोसिंह द्वितीय)। "किस शासक के समय नींव रखी गई" का उत्तर रामसिंह द्वितीय; "किस वर्ष संग्रहालय खुला" का उत्तर 1887।
Trap 2: नामकरण — प्रिंस अल्बर्ट या अल्बर्ट एडवर्ड?
भवन का नाम नींव रखने वाले प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड (बाद में एडवर्ड सप्तम) के नाम पर है — महारानी विक्टोरिया के पति प्रिंस अल्बर्ट (जिनकी 1861 में मृत्यु हो चुकी थी) ने जयपुर की यात्रा नहीं की।
Trap 3: भारतीय लोक कला मंडल — उदयपुर, जयपुर नहीं
"लोक कला" सुनकर जयपुर (जवाहर कला केंद्र) याद आता है, पर भारतीय लोक कला मंडल उदयपुर में है। जवाहर कला केंद्र जयपुर में है, पर वह संग्रहालय नहीं, बहु-कला केंद्र है।
Trap 4: गंगा गोल्डन जुबली — बीकानेर
गंगासिंह बीकानेर के शासक थे; उनके शासन की स्वर्ण जयंती (1887 + 50 = 1937) पर संग्रहालय बीकानेर में बना। "गंगा" नाम देखकर गंगानगर न चुनें।
Trap 5: आहड़ संग्रहालय बनाम आहड़ सभ्यता
आहड़ सभ्यता ताम्रयुगीन संस्कृति है (बनास संस्कृति); आहड़ संग्रहालय उदयपुर में उसकी वस्तुओं का संग्रह-स्थल है। "आहड़ संग्रहालय किस जिले में" — उदयपुर।
Trap 6: दो "फतह प्रकाश महल"
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का फतह प्रकाश महल = राजकीय संग्रहालय; उदयपुर सिटी पैलेस का फतह प्रकाश = क्रिस्टल गैलरी। दोनों महाराणा फतह सिंह से जुड़े हैं।
Trap 7: "प्राचीनतम" — झालावाड़ या अल्बर्ट हॉल?
झालावाड़ (1915) को कुछ पुस्तकें प्राचीनतम लिखती हैं, पर कालक्रम से अल्बर्ट हॉल (1887), अजमेर (1908) और सरदार (1909) पहले के हैं। "राज्य का पहला संग्रहालय" = अल्बर्ट हॉल। यदि विकल्पों में अल्बर्ट हॉल न हो और प्रश्न "प्राचीनतम राजकीय संग्रहालयों में" पूछे, तब झालावाड़ उपयुक्त है।
Trap 8: अजमेर संग्रहालय — कौन-सा किला?
अजमेर संग्रहालय अकबर के किले (मैगज़ीन) में है, तारागढ़ में नहीं। तारागढ़ (गढ़ बीठली) अजमेर का पहाड़ी दुर्ग है।
Trap 9: आकल — संग्रहालय नहीं, फॉसिल पार्क
आकल (जैसलमेर) में वुड फॉसिल पार्क है। "जीवाश्म संग्रहालय" जैसा विकल्प हो तो प्रश्न की भाषा ध्यान से पढ़ें।
Trap 10: अभिलेखागार ≠ संग्रहालय
राजस्थान राज्य अभिलेखागार (1955; अब बीकानेर) दस्तावेज़ों का संग्रह है। इसी प्रकार मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फ़ारसी शोध संस्थान टोंक में है — ये संग्रहालय की श्रेणी में नहीं आते।
17. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-liners)
राजस्थान का पहला संग्रहालय — अल्बर्ट हॉल (केंद्रीय संग्रहालय), जयपुर।
अल्बर्ट हॉल की नींव — 6 फ़रवरी 1876, प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड।
अल्बर्ट हॉल के वास्तुकार — सैमुअल स्विंटन जैकब; शैली — इंडो-सारसेनिक।
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का उद्घाटन — 1887 (सवाई माधोसिंह द्वितीय)।
अल्बर्ट हॉल किस उद्यान में — रामनिवास बाग।
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग — 1950 (पुस्तकों के अनुसार), मुख्यालय जयपुर।
राजकीय संग्रहालय अजमेर — 1908, अकबर का किला (मैगज़ीन)।
सरदार संग्रहालय — 1909, उम्मेद उद्यान, जोधपुर।
झालावाड़ राजकीय संग्रहालय — 1915।
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय — 1937, बीकानेर।
भारतीय लोक कला मंडल — उदयपुर, 1952, देवीलाल सामर।
सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय — सिटी पैलेस जयपुर, 1959।
मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट — 1972, महाराजा गजसिंह द्वितीय।
बागोर की हवेली — गणगौर घाट, उदयपुर; पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र।
भरतपुर संग्रहालय — लोहागढ़ दुर्ग की कचहरी कलाँ।
अलवर संग्रहालय — सिटी पैलेस (विनय विलास महल)।
कोटा राजकीय संग्रहालय — बृजविलास महल; राव माधोसिंह संग्रहालय — कोटा गढ़।
फतह प्रकाश महल संग्रहालय — चित्तौड़गढ़ दुर्ग।
सादुल संग्रहालय — लालगढ़ महल, बीकानेर।
जवाहर कला केंद्र के वास्तुकार — चार्ल्स कोरिया।
अनोखी हाथ छपाई संग्रहालय — आमेर।
मोम संग्रहालय — नाहरगढ़ दुर्ग, जयपुर।
आकल वुड फॉसिल पार्क — जैसलमेर; जुरासिक काष्ठ जीवाश्म।
कालीबंगा स्थल संग्रहालय — हनुमानगढ़; ASI द्वारा।
18. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
"अल्बर्ट की नींव 76, दरवाज़ा 87" — नींव 1876, उद्घाटन 1887।
"जैकब ने बनाया, ममी ने सजाया" — अल्बर्ट हॉल: वास्तुकार जैकब, आकर्षण ममी।
"देवी की कठपुतली उदयपुर में नाचे" — देवीलाल सामर, भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर।
"अकबर का किला = अजमेर का म्यूज़ियम (08)" — 1908।
"गंगा की जुबली, पचास की खुशी (37)" — गंगासिंह 1887 + 50 = 1937।
"फतह दो — चित्तौड़ में म्यूज़ियम, उदयपुर में क्रिस्टल"
19. संबंधित नोट्स
20. एक दिन पहले — रिवीज़न सूची
अल्बर्ट हॉल — रामनिवास बाग; नींव 1876 (प्रिंस ऑफ़ वेल्स, रामसिंह II); खुला 1887 (माधोसिंह II); जैकब; इंडो-सारसेनिक; ममी।
विभाग — पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, 1950 (पुस्तकें), जयपुर।
कालक्रम — अजमेर 1908 → सरदार 1909 → झालावाड़ 1915 → गंगा 1937 → लोक कला मंडल 1952 → सिटी पैलेस 1959 → मेहरानगढ़ ट्रस्ट 1972।
भवन — अजमेर: अकबर का किला; भरतपुर: लोहागढ़; अलवर: विनय विलास; कोटा: बृजविलास; चित्तौड़: फतह प्रकाश; बीकानेर: लालगढ़ (सादुल)।
उदयपुर — लोक कला मंडल (कठपुतली), बागोर की हवेली (WZCC, पगड़ी), आहड़, सिटी पैलेस (क्रिस्टल गैलरी)।
जैसलमेर — डेजर्ट कल्चर सेंटर, लोक सांस्कृतिक संग्रहालय (गड़ीसर), आकल फॉसिल पार्क।
जयपुर थीम — गुड़िया घर, अनोखी (आमेर), मोम (नाहरगढ़), जवाहर कला केंद्र (कोरिया)।
21. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 14 (कालक्रम), खंड 15 (मिलान तालिका) और खंड 16 (भ्रम व सावधानियाँ) दोहराएँ। स्थापना-वर्ष केवल वे याद करें जो इस नोट में दिए हैं — शेष संग्रहालयों पर प्रश्न प्रायः शहर और भवन पर आते हैं।
22. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
राजस्थान के संग्रहालय रियासतकालीन संग्रहों से विकसित होकर आज राज्य की इतिहास, कला और लोक-संस्कृति के जीवंत भंडार हैं — अल्बर्ट हॉल से शुरू हुई परंपरा अजमेर, जोधपुर, झालावाड़ और बीकानेर से होती हुई भारतीय लोक कला मंडल, बागोर की हवेली और मेहरानगढ़ जैसे संस्थानों तक पहुँची। परीक्षा के लिए तीन चीज़ें सबसे महत्वपूर्ण हैं — संग्रहालय-शहर-भवन मिलान, स्थापना-वर्षों का क्रम और नींव बनाम उद्घाटन, उदयपुर बनाम जयपुर जैसे भ्रम।
अल्बर्ट–जयपुर–1887–ममी | अजमेर–अकबर का किला–1908 | सरदार–जोधपुर–1909 | झालावाड़–1915 | गंगा–बीकानेर–1937 | लोक कला मंडल–उदयपुर–1952 | सिटी पैलेस–1959 | मेहरानगढ़–1972
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय: अल्बर्ट हॉल से लोक कला मंडल तक — RAS/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- हवेली, महल, दुर्ग एवं मंदिर स्थापत्य में अंतर — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- राजस्थान की UNESCO विश्व धरोहर — अभ्यास क्विज़20 प्रश्नों का क्विज़ दें
- मंदिर स्थापत्य: नागर शैली एवं प्रमुख उदाहरण — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राजस्थान का पहला संग्रहालय जयपुर का अल्बर्ट हॉल (केंद्रीय संग्रहालय) है, जो रामनिवास बाग में स्थित है। इसकी नींव 1876 में रखी गई और यह 1887 में संग्रहालय के रूप में खुला।
अल्बर्ट हॉल की नींव 6 फ़रवरी 1876 को ब्रिटिश युवराज प्रिंस ऑफ़ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड (बाद में सम्राट एडवर्ड सप्तम) ने रखी। उस समय जयपुर के शासक सवाई रामसिंह द्वितीय थे; संग्रहालय 1887 में सवाई माधोसिंह द्वितीय के समय खुला।
अल्बर्ट हॉल का डिज़ाइन सैमुअल स्विंटन जैकब ने बनाया। यह इंडो-सारसेनिक शैली में है, जिसमें भारतीय, मुगल-इस्लामी और यूरोपीय स्थापत्य तत्वों का मिश्रण है। इसकी मिस्र की ममी सबसे प्रसिद्ध आकर्षण है।
भारतीय लोक कला मंडल उदयपुर में है। इसकी स्थापना 1952 में पद्मश्री देवीलाल सामर ने की। यह कठपुतली कला, लोक नृत्य, लोक वाद्य व मुखौटों के संग्रह और कठपुतली प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध है।
अजमेर का राजकीय संग्रहालय अकबर के किले (मैगज़ीन) में स्थित है और इसकी स्थापना 1908 में हुई। इसी किले में 1616 में जहाँगीर ने सर टॉमस रो से भेंट की थी।
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय बीकानेर में है। महाराजा गंगासिंह के शासन (1887 से) के 50 वर्ष पूरे होने पर 1937 में इसकी स्थापना हुई, इसलिए इसे गोल्डन जुबली (स्वर्ण जयंती) संग्रहालय कहा गया। पल्लू की जैन सरस्वती प्रतिमा इसका प्रसिद्ध प्रदर्श है।
झालावाड़ का राजकीय संग्रहालय 1915 में स्थापित हुआ और कई पुस्तकें इसे राज्य के प्राचीनतम राजकीय संग्रहालयों में गिनती हैं। परंतु कालक्रम से अल्बर्ट हॉल (1887), अजमेर (1908) और सरदार संग्रहालय (1909) इससे पहले के हैं, इसलिए 'पहला संग्रहालय' का उत्तर अल्बर्ट हॉल ही है।
जोधपुर में मेहरानगढ़ संग्रहालय (मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट, 1972), उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय और उम्मेद उद्यान में स्थित सरदार राजकीय संग्रहालय (1909, महाराजा सरदार सिंह के नाम पर) प्रमुख हैं।
बागोर की हवेली उदयपुर में पिछोला झील के गणगौर घाट पर स्थित है। अब यह पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा संचालित संग्रहालय है, जो विशाल पगड़ी, मेवाड़ी वेशभूषा और शाम के 'धरोहर' लोक नृत्य कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है।
परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार राजस्थान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की स्थापना 1950 में हुई और इसका मुख्यालय जयपुर है। यह राज्य-संरक्षित स्मारकों और जिलों के राजकीय संग्रहालयों की देखरेख करता है।
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