महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) — गंगनहर, नरेंद्र मंडल व सुधार — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान इतिहास इकाई। पाठ्यपुस्तक पृष्ठ यहाँ नहीं चिपकाए गए।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: महाराजा गंगा सिंह (जन्म 13 अक्टूबर 1880, मृत्यु 2 फ़रवरी 1943) बीकानेर के सबसे प्रसिद्ध आधुनिक शासक थे। बड़े भाई महाराजा डूंगर सिंह की मृत्यु के बाद वे 1887 में लगभग 7 वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठे; अल्पवयस्कता में रीजेंसी कौंसिल ने शासन चलाया और उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर में शिक्षा पाई; 1898 में पूर्ण शासनाधिकार मिले। तुरंत बाद छप्पनिया अकाल (वि.सं. 1956 / 1899–1900) में राहत कार्य किए। उनकी ऊँट सेना गंगा रिसाला ने चीन (बॉक्सर विद्रोह, 1900), सोमालीलैंड, प्रथम विश्वयुद्ध (मिस्र/स्वेज़) और द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लिया। सबसे बड़ा योगदान गंगनहर — सतलज से फ़िरोज़पुर (हुसैनीवाला) के पास से निकली नहर; शिलान्यास 1921, उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 को वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा — इसीलिए वे "राजपूताना/राजस्थान का भगीरथ" और "आधुनिक बीकानेर के निर्माता" कहलाते हैं। वे इंपीरियल वॉर कैबिनेट/कॉन्फ्रेंस (1917) के सदस्य, पेरिस शांति सम्मेलन 1919 में भारत के प्रतिनिधि और वर्साय संधि के हस्ताक्षरकर्ता, नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes, 1921) के प्रथम चांसलर (1921–26) तथा गोलमेज सम्मेलन के प्रतिभागी रहे। आंतरिक सुधार — प्रतिनिधि सभा (1913), उच्च न्यायालय (1922), नगरपालिका, शिक्षा, अस्पताल, लालगढ़ पैलेस। दूसरी ओर उन्होंने प्रजामंडल व राजनीतिक कार्यकर्ताओं का दमन किया (बीकानेर षड्यंत्र केस 1932, पब्लिक सेफ्टी एक्ट)। 1937 में स्वर्ण जयंती मनी; 1943 में मृत्यु के बाद पुत्र शार्दूल सिंह शासक बने, जिनके समय बीकानेर 1949 में वृहत् राजस्थान में मिला।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | तथ्य | याद रखने योग्य संकेत |
|---|---|---|
जन्म | 13 अक्टूबर 1880 | महाराजा लाल सिंह के पुत्र |
राज्यारोहण | 1887 (लगभग 7 वर्ष की आयु) | बड़े भाई डूंगर सिंह के उत्तराधिकारी |
पूर्ण शासनाधिकार | 1898 | तब तक रीजेंसी कौंसिल |
शिक्षा | मेयो कॉलेज, अजमेर | राजकुमारों का कॉलेज |
शासनकाल | 1887–1943 (लगभग 56 वर्ष) | बीकानेर के सबसे लंबे शासनकालों में |
अकाल राहत | छप्पनिया अकाल 1899–1900 | वि.सं. 1956 — इसलिए "छप्पनिया" |
ऊँट सेना | गंगा रिसाला (Bikaner Camel Corps) | चीन 1900, सोमालीलैंड, मिस्र (WWI) |
प्रमुख नहर | गंगनहर — सतलज, फ़िरोज़पुर/हुसैनीवाला | शिलान्यास 1921; उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 (लॉर्ड इरविन) |
अंतरराष्ट्रीय भूमिका | इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट 1917; पेरिस शांति सम्मेलन 1919 | वर्साय संधि पर हस्ताक्षर |
नरेंद्र मंडल | प्रथम चांसलर 1921–1926 | Chamber of Princes, स्थापना 1921 |
प्रतिनिधि सभा | 1913 | बीकानेर में विधायी/प्रतिनिधि संस्था |
उच्च न्यायालय | 1922 | न्यायिक सुधार |
स्वर्ण जयंती | 1937 | शासन के 50 वर्ष; गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय |
मृत्यु व उत्तराधिकारी | 2 फ़रवरी 1943 — शार्दूल सिंह | बीकानेर का अंतिम शासक; 1949 में वृहत् राजस्थान |
उपाधियाँ (लोकप्रिय) | राजपूताना/राजस्थान का भगीरथ; आधुनिक बीकानेर के निर्माता | भगीरथ = गंगा (नहर) लाने वाला |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS और राजस्थान CET के इतिहास खंड में "आधुनिक राजस्थान" और "प्रमुख व्यक्तित्व" दोनों के अंतर्गत महाराजा गंगा सिंह बार-बार आते हैं। उनसे जुड़े प्रश्न इतिहास (नरेंद्र मंडल, वर्साय संधि, गोलमेज सम्मेलन), भूगोल (गंगनहर, श्रीगंगानगर), कला-संस्कृति (लालगढ़ पैलेस, गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय) और जन-आंदोलन (बीकानेर प्रजामंडल, किसान आंदोलन) — चारों में फैले हैं। इसलिए यह एक "क्रॉस-टॉपिक" व्यक्तित्व है।
बीकानेर राजवंश की पूरी वंशावली (राव बीका से आगे) के लिए बीकानेर राजवंश का इतिहास नोट देखें; यह नोट केवल गंगा सिंह के व्यक्तित्व, नीतियों और विरासत पर केंद्रित है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — गंगनहर, नरेंद्र मंडल, सुधार बनाम दमन (विश्लेषणात्मक प्रश्न)
राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) — "राजस्थान का भगीरथ", गंगा रिसाला, उद्घाटनकर्ता (लॉर्ड इरविन)
पटवारी, VDO — एक-पंक्ति तथ्य: छप्पनिया अकाल, लालगढ़, मेयो कॉलेज
REET, राजस्थान SI — व्यक्तित्व और संस्थाएँ (MGSU, श्रीगंगानगर)
प्रश्न कैसे आते हैं?
"राजस्थान का भगीरथ किसे कहा जाता है?" / "गंगनहर का उद्घाटन किसने किया?"
"नरेंद्र मंडल के प्रथम चांसलर कौन थे?"
"वर्साय संधि पर हस्ताक्षर करने वाले भारतीय नरेश" — गंगा सिंह
गंगा रिसाला ने किन अभियानों में भाग लिया — सुमेलन/कथन प्रश्न
गंगा सिंह के सुधारों का कालक्रम (प्रतिनिधि सभा 1913 → नरेंद्र मंडल 1921 → उच्च न्यायालय 1922 → गंगनहर 1927 → स्वर्ण जयंती 1937)
बीकानेर षड्यंत्र केस, प्रजामंडल व दूधवाखारा — "किसके शासनकाल में?" वाले प्रश्न
3. पृष्ठभूमि: राज्यारोहण, रीजेंसी और शिक्षा
3.1 डूंगर सिंह से गंगा सिंह तक
बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंह (शासन 1872–1887) निःसंतान थे। 1887 में उनकी मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई गंगा सिंह — जो महाराजा लाल सिंह के पुत्र थे — उत्तराधिकारी बने। उस समय गंगा सिंह की आयु लगभग 7 वर्ष थी। ब्रिटिश सर्वोच्चता के दौर में अल्पवयस्क शासक के लिए राज्य का प्रशासन रीजेंसी कौंसिल (संरक्षक परिषद) चलाती थी, जिस पर ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट का प्रभाव रहता था। डूंगर सिंह के समय के बीकानेर (डूंगर कॉलेज इन्हीं के नाम पर है) के संदर्भ के लिए बीकानेर राजवंश नोट देखें।
3.2 मेयो कॉलेज और प्रशासनिक प्रशिक्षण
गंगा सिंह ने मेयो कॉलेज, अजमेर में शिक्षा पाई — यह राजपूताना के राजकुमारों के लिए स्थापित कॉलेज था।
कॉलेज के बाद उन्हें एक ब्रिटिश अधिकारी के निर्देशन में प्रशासनिक प्रशिक्षण दिया गया और सैन्य प्रशिक्षण भी मिला (देवली में ब्रिटिश सैन्य इकाई के साथ प्रशिक्षण का उल्लेख कई पुस्तकों में है)।
1898 में उन्हें पूर्ण शासनाधिकार (full ruling powers) मिले।
क्रम याद रखें: 1880 जन्म → 1887 गद्दी (रीजेंसी) → मेयो कॉलेज → 1898 पूर्ण अधिकार → 1899–1900 छप्पनिया अकाल
3.3 तत्कालीन परिस्थितियाँ
परिस्थिति | प्रभाव |
|---|---|
थार मरुस्थल, न्यून वर्षा | खेती वर्षा पर निर्भर; बार-बार अकाल |
ब्रिटिश सर्वोच्चता (1818 की संधि के बाद) | विदेश व रक्षा नीति अंग्रेज़ों के अधीन; नरेशों के लिए ब्रिटिश निष्ठा ही प्रभाव का माध्यम |
जागीरदारी व्यवस्था | किसानों पर लाग-बाग का बोझ; आगे किसान असंतोष |
रेल व आधुनिक संचार का आरंभिक दौर | आधुनिकीकरण की संभावना |
4. छप्पनिया अकाल (1899–1900) और राहत कार्य
विक्रम संवत 1956 (ईस्वी 1899–1900) में पड़ा अकाल राजस्थान में "छप्पनिया अकाल" कहलाता है। यह राजस्थान के इतिहास के सबसे भीषण अकालों में गिना जाता है — मनुष्यों और पशुओं की भारी हानि हुई और लोकगीतों/कहावतों में आज भी इसका उल्लेख मिलता है।
पूर्ण शासनाधिकार मिलने के कुछ ही समय बाद गंगा सिंह को यह संकट झेलना पड़ा। उन्होंने:
राहत कार्य (relief works) — काम के बदले अनाज/मज़दूरी, ताकि लोग पलायन न करें;
सार्वजनिक निर्माण — कुएँ, तालाब, सड़कें और भवन-निर्माण को राहत रोज़गार से जोड़ा;
अनाज वितरण व राजकोष से सहायता की व्यवस्था की।
महत्व: इस अकाल ने गंगा सिंह को यह सिखाया कि बीकानेर की स्थायी समृद्धि केवल नहरी सिंचाई से संभव है। यही सोच आगे गंगनहर परियोजना की नींव बनी — इसलिए परीक्षा में "छप्पनिया अकाल → गंगनहर" का कारण-परिणाम संबंध पूछा जाता है।
ट्रिक: "छप्पन (1956 वि.सं.) का अकाल, सत्ताईस (1927) की नहर"
5. गंगा रिसाला (Bikaner Camel Corps) और सैन्य सेवाएँ
गंगा रिसाला बीकानेर राज्य की प्रसिद्ध ऊँट सेना (Camel Corps) थी, जिसे गंगा सिंह के नाम पर यह नाम मिला। यह इंपीरियल सर्विस ट्रूप्स (रियासतों द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को उपलब्ध सेनाएँ) का हिस्सा थी। गंगा सिंह स्वयं भी कई अभियानों में साथ गए, जिससे ब्रिटिश सरकार में उनकी प्रतिष्ठा बहुत बढ़ी।
अभियान | वर्ष | टिप्पणी |
|---|---|---|
चीन — बॉक्सर विद्रोह | 1900–01 | गंगा सिंह स्वयं चीन गए; पहला बड़ा विदेशी अभियान |
सोमालीलैंड (अफ्रीका) | लगभग 1902–04 | सोमालीलैंड अभियान में ऊँट सेना की सेवा |
प्रथम विश्वयुद्ध — मिस्र | 1914–18 | स्वेज़ नहर क्षेत्र की रक्षा; गंगा सिंह फ्रांस व मिस्र मोर्चे पर गए |
द्वितीय विश्वयुद्ध | 1939–45 | बीकानेर की सेनाओं ने ब्रिटिश पक्ष में सेवा दी; गंगा सिंह की मृत्यु 1943 में युद्ध के दौरान ही हुई |
5.1 सैन्य सेवाओं का राजनीतिक लाभ
ब्रिटिश सरकार से उच्च सम्मान और मानद सैन्य पद मिले — वे ब्रिटिश सेना में मानद जनरल पद तक पहुँचे।
इसी निष्ठा और सैन्य सहयोग के कारण उन्हें इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट और पेरिस शांति सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व मिला।
नहर-परियोजना के लिए पंजाब और भारत सरकार से वार्ता में भी यह प्रतिष्ठा काम आई।
ट्रिक — "चीन, सोमा, मिस्र": गंगा रिसाला ने चीन (1900) → सोमालीलैंड → मिस्र (WWI) — पूर्व से पश्चिम की ओर क्रम।
6. गंगनहर — "राजस्थान का भगीरथ" उपाधि का आधार
6.1 परियोजना की पृष्ठभूमि
बीकानेर का उत्तरी भाग सतलज नदी के अपेक्षाकृत निकट था, पर पानी लाने के लिए पंजाब और बहावलपुर रियासत से समझौता आवश्यक था। लंबी वार्ता के बाद सतलज घाटी परियोजना (Sutlej Valley Project) के अंतर्गत पंजाब, बहावलपुर और बीकानेर के बीच 1920 में समझौता हुआ और बीकानेर को सतलज का जल मिलना तय हुआ।
6.2 प्रमुख तथ्य
बिंदु | तथ्य |
|---|---|
जल स्रोत | सतलज नदी |
उद्गम स्थल | फ़िरोज़पुर (पंजाब) के पास हुसैनीवाला |
त्रिपक्षीय समझौता | 1920 — पंजाब, बहावलपुर, बीकानेर (सतलज घाटी परियोजना) |
शिलान्यास | 1921 (महाराजा गंगा सिंह के समय) |
उद्घाटन | 26 अक्टूबर 1927 — वायसराय लॉर्ड इरविन |
लाभान्वित क्षेत्र | वर्तमान श्रीगंगानगर जिला (तत्कालीन बीकानेर रियासत का उत्तरी भाग) |
विशेषता | पक्की (lined) नहर; अपने समय की सबसे लंबी पक्की नहरों में गिनी जाती थी |
महत्व | राजस्थान में आधुनिक नहरी सिंचाई की शुरुआत; मरुभूमि में नहरी कृषि का पहला बड़ा सफल प्रयोग |
"पहली पक्की नहर" वाले दावे पर सावधानी: अनेक पुस्तकों में गंगनहर को "विश्व की सबसे लंबी पक्की नहर (अपने समय में)" कहा गया है। परीक्षा के लिए सुरक्षित कथन यह है कि गंगनहर राजस्थान की पहली प्रमुख आधुनिक नहर और अपने समय की सबसे लंबी पक्की (lined) नहरों में से एक थी। यदि विकल्प में "राजस्थान की प्राचीनतम/पहली नहर परियोजना" हो, तो सामान्यतः गंगनहर ही अपेक्षित उत्तर होता है।
6.3 परिणाम
बीकानेर के उत्तरी भाग में गेहूँ, कपास, सरसों, गन्ने जैसी फसलें संभव हुईं — क्षेत्र "राजस्थान का अन्न भंडार" बनने की दिशा में बढ़ा।
पंजाब व अन्य क्षेत्रों से किसानों को बसाया गया; नई मंडियाँ और बस्तियाँ बसीं।
रामनगर नाम की बस्ती आगे गंगानगर (बाद में श्रीगंगानगर) कहलाई — नगर व जिला दोनों का नाम महाराजा गंगा सिंह पर है।
भूमि-आवंटन, नहरी लगान और पानी के बँटवारे से नए विवाद भी उठे, जो आगे गंगनहर क्षेत्र के किसान आंदोलन का कारण बने (खंड 10 देखें)।
6.4 गंगनहर से भाखड़ा और इंदिरा गांधी नहर तक
गंगनहर ने सिद्ध किया कि मरुस्थल में नहर से खेती संभव है। स्वतंत्रता के बाद भाखड़ा-नांगल परियोजना और फिर इंदिरा गांधी नहर परियोजना (पहले "राजस्थान नहर") इसी सोच का विस्तार थीं। इसलिए गंगनहर को राजस्थान की बड़ी नहर-परियोजनाओं की अग्रदूत (predecessor) कहा जाता है। IGNP का पूरा विवरण इंदिरा गांधी नहर परियोजना नोट में है।
ट्रिक — "21 में नींव, 27 में इरविन": गंगनहर शिलान्यास 1921, उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 लॉर्ड इरविन द्वारा। गंगा (नदी) लाए भगीरथ, गंगनहर लाए गंगा सिंह — इसलिए "राजस्थान का भगीरथ"।
7. अंतरराष्ट्रीय और अखिल भारतीय भूमिका
7.1 इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट (1917)
प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1917 में लंदन में हुई इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस और इंपीरियल वॉर कैबिनेट की बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वालों में गंगा सिंह शामिल थे। यह पहली बार था जब भारतीय नरेश को साम्राज्य की इस स्तर की युद्ध-परिषद में स्थान मिला। उनके साथ भारत की ओर से सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (एस.पी. सिन्हा) भी थे।
7.2 पेरिस शांति सम्मेलन (1919) और वर्साय संधि
1919 के पेरिस शांति सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधिमंडल में भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू, एस.पी. सिन्हा और महाराजा गंगा सिंह थे।
भारत की ओर से वर्साय की संधि (Treaty of Versailles, 1919) पर हस्ताक्षर करने वालों में गंगा सिंह थे — इसलिए वे वर्साय संधि पर हस्ताक्षर करने वाले एकमात्र भारतीय नरेश के रूप में प्रसिद्ध हैं।
7.3 राष्ट्र संघ (League of Nations)
वर्साय संधि के माध्यम से भारत राष्ट्र संघ का संस्थापक सदस्य बना। 1920 के दशक में गंगा सिंह ने राष्ट्र संघ की सभा (जेनेवा) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में भाग लिया। (सटीक वर्ष पुस्तकों में भिन्न रूप से दिया गया है; परीक्षा के लिए "राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व" का तथ्य पर्याप्त है।)
7.4 नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes) — प्रथम चांसलर
बिंदु | तथ्य |
|---|---|
स्थापना | फ़रवरी 1921 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधार/भारत शासन अधिनियम 1919 की पृष्ठभूमि में) |
उद्घाटन | ड्यूक ऑफ़ कनॉट द्वारा, दिल्ली |
अध्यक्ष (President) | वायसराय |
प्रथम चांसलर | महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर), 1921–1926 |
प्रकृति | परामर्शदात्री संस्था — नरेशों के साझा हितों पर वायसराय को सलाह; कोई बाध्यकारी शक्ति नहीं |
अगले चांसलर | पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह (1926 से) |
सावधानी: नरेंद्र मंडल का अध्यक्ष वायसराय होता था; नरेशों में से चुना जाने वाला सर्वोच्च पद चांसलर था। "नरेंद्र मंडल के प्रथम अध्यक्ष गंगा सिंह" जैसा विकल्प तकनीकी रूप से गलत है — सही है "प्रथम चांसलर"।
7.5 गोलमेज सम्मेलन (1930–32)
गंगा सिंह लंदन के गोलमेज सम्मेलन में देशी रियासतों के प्रतिनिधियों में शामिल थे — प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930–31) में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
प्रथम सम्मेलन में नरेशों ने अखिल भारतीय संघ (All-India Federation) में शामिल होने की सैद्धांतिक सहमति दी; गंगा सिंह इस सहमति के प्रमुख प्रवक्ताओं में थे। बाद में नरेशों की शर्तों और आपसी मतभेदों के कारण भारत शासन अधिनियम 1935 का संघीय भाग लागू नहीं हो सका।
इसी समय (1932) बीकानेर में "बीकानेर षड्यंत्र केस" हुआ (खंड 10)।
8. आंतरिक प्रशासनिक सुधार
गंगा सिंह को "आधुनिक बीकानेर का निर्माता" कहने का दूसरा आधार उनके प्रशासनिक सुधार हैं। ध्यान रहे कि ये सुधार ऊपर से दिए गए (paternalistic) थे — अंतिम सत्ता महाराजा के पास ही रही।
क्षेत्र | सुधार | वर्ष/टिप्पणी |
|---|---|---|
विधायी | बीकानेर प्रतिनिधि सभा (Representative Assembly) | 1913 — राजपूताना की रियासतों में आरंभिक प्रतिनिधि संस्थाओं में; सलाहकारी स्वरूप |
न्यायिक | उच्च न्यायालय (Chief Court) की स्थापना | 1922 — न्यायपालिका को प्रशासन से अलग करने की दिशा में कदम |
स्थानीय स्वशासन | नगरपालिकाओं का पुनर्गठन, ग्राम पंचायत संबंधी प्रावधान | बीकानेर नगर व अन्य कस्बों में नगरपालिका सुधार |
मंत्रिमंडल | विभागीय मंत्री/मंत्रि-परिषद व्यवस्था | प्रशासन का आधुनिक विभागीकरण |
शिक्षा | स्कूलों व कॉलेज का विस्तार, बालिका शिक्षा | डूंगर कॉलेज का विकास; छात्रवृत्तियाँ |
स्वास्थ्य | अस्पताल व औषधालय | बीकानेर का बड़ा अस्पताल — PBM (प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल) — उनके पुत्र की स्मृति में |
संचार | रेल लाइनों का विस्तार, सड़कें, बिजली | बीकानेर रियासत की रेल व्यवस्था का विकास |
सिंचाई | गंगनहर | 1927 (खंड 6) |
सामाजिक | बाल-विवाह व फ़िज़ूलख़र्ची पर नियंत्रण संबंधी प्रयास | सामाजिक सुधार के प्रयास सीमित और ऊपर से निर्देशित रहे |
8.1 प्रतिनिधि सभा (1913) — सीमाएँ
सदस्यों में बड़ी संख्या मनोनीत सदस्यों की थी; निर्वाचित तत्व सीमित था।
सभा केवल सलाह दे सकती थी — बजट, कानून और नीति पर अंतिम निर्णय महाराजा का था।
फिर भी, उस समय की अधिकांश रियासतों में ऐसी संस्था ही नहीं थी, इसलिए इसे प्रगतिशील कदम माना जाता है।
8.2 कथन-शैली में सुधारों का सार
RAS मुख्य परीक्षा में "गंगा सिंह के प्रशासनिक सुधारों का मूल्यांकन कीजिए" जैसे प्रश्न में तीन बिंदु लिखें: (1) आर्थिक — गंगनहर, रेल, मंडियाँ; (2) संस्थागत — प्रतिनिधि सभा 1913, उच्च न्यायालय 1922, नगरपालिका; (3) सामाजिक — शिक्षा, स्वास्थ्य। अंत में सीमा लिखें — लोकतांत्रिक माँगों का दमन।
9. स्थापत्य, संस्थाएँ और विरासत
स्मारक/संस्था | स्थान | तथ्य |
|---|---|---|
लालगढ़ पैलेस | बीकानेर | पिता लाल सिंह की स्मृति में; लाल बलुआ पत्थर; इंडो-सारसेनिक शैली; वास्तुकार सर सैमुअल स्विंटन जैकब; निर्माण 1902 से आरंभ होकर कई चरणों में |
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय (गंगा राजकीय संग्रहालय) | बीकानेर | 1937 में शासन की स्वर्ण जयंती पर स्थापित |
श्रीगंगानगर (नगर व जिला) | उत्तरी राजस्थान | पुराना नाम रामनगर; गंगनहर क्षेत्र का मुख्य नगर |
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) | बीकानेर | 2003 में "बीकानेर विश्वविद्यालय" के रूप में स्थापित, बाद में महाराजा गंगा सिंह के नाम पर नामकरण |
गंगनहर | फ़िरोज़पुर (हुसैनीवाला) → श्रीगंगानगर | उद्घाटन 1927 |
PBM अस्पताल | बीकानेर | पुत्र प्रिंस बिजय सिंह की स्मृति में |
लालगढ़ पैलेस का एक भाग आज होटल और संग्रहालय के रूप में उपयोग होता है। बीकानेर की कला परंपरा — बीकानेर चित्रकला शैली और उस्ता कला — को भी राजकीय संरक्षण मिलता रहा।
ट्रिक: "लाल का गढ़, गंगा का नगर" — लालगढ़ पिता लाल सिंह के नाम पर, गंगानगर स्वयं गंगा सिंह के नाम पर।
10. विवाद और दमन: प्रजामंडल, षड्यंत्र केस और किसान असंतोष
गंगा सिंह का मूल्यांकन संतुलित होना चाहिए। वे आधुनिकीकरण के समर्थक थे, पर राजनीतिक स्वतंत्रता और उत्तरदायी शासन की माँग के कड़े विरोधी भी। बीकानेर को राजपूताना की उन रियासतों में गिना जाता है जहाँ राजनीतिक गतिविधियों पर सबसे कड़ा नियंत्रण था।
10.1 बीकानेर षड्यंत्र केस (1932)
जब गंगा सिंह गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन में थे, तब बीकानेर के कुछ कार्यकर्ताओं ने राज्य के कुशासन का वर्णन करने वाली पुस्तिका "बीकानेर दिग्दर्शन" तैयार कर वहाँ के प्रतिनिधियों तक पहुँचाई।
लौटकर राज्य ने इन कार्यकर्ताओं (जैसे स्वामी गोपालदास, चंदनमल बहड़ आदि) पर राजद्रोह/षड्यंत्र का मुकदमा चलाया — यही "बीकानेर षड्यंत्र केस" कहलाता है।
इसी दौर में बीकानेर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (1932) जैसे कठोर कानून से सभाओं व प्रकाशन पर रोक लगाई गई।
(अभियुक्तों के नामों की सूची पुस्तकों में भिन्न है; परीक्षा में मुख्यतः वर्ष 1932, गोलमेज सम्मेलन का संदर्भ और "बीकानेर दिग्दर्शन" पूछे जाते हैं।)
10.2 बीकानेर प्रजामंडल (1936) और प्रजा परिषद (1942)
बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना 4 अक्टूबर 1936 को कलकत्ता में मघाराम वैद्य ने की — राज्य के भीतर गतिविधि असंभव थी, इसलिए स्थापना बाहर हुई। मघाराम वैद्य व साथियों को राज्य से निष्कासित किया गया।
बीकानेर राज्य प्रजा परिषद की स्थापना 22 जुलाई 1942 को रघुवरदयाल गोयल ने की; उन्हें भी राज्य से निर्वासित किया गया।
ये दोनों घटनाएँ गंगा सिंह के शासनकाल में हुईं।
विस्तार के लिए बीकानेर प्रजामंडल व रायसिंहनगर गोलीकांड नोट देखें।
10.3 गंगनहर क्षेत्र का किसान असंतोष
गंगनहर क्षेत्र में बसाए गए किसानों ने ऊँचे नहरी लगान, भूमि-मूल्य और सुविधाओं की कमी को लेकर आवाज़ उठाई। 1929 के आसपास किसानों ने संगठन बनाकर ज्ञापन दिए — इसे गंगनहर किसान आंदोलन कहा जाता है। विडंबना यह कि जिस नहर ने गंगा सिंह को "भगीरथ" बनाया, वही क्षेत्र किसान असंतोष का केंद्र भी बना।
10.4 दूधवाखारा और रायसिंहनगर — किसके समय?
घटना | वर्ष | शासक |
|---|---|---|
बीकानेर षड्यंत्र केस | 1932 | गंगा सिंह |
बीकानेर प्रजामंडल (कलकत्ता) | 1936 | गंगा सिंह |
बीकानेर राज्य प्रजा परिषद | 1942 | गंगा सिंह |
दूधवाखारा किसान आंदोलन (चूरू क्षेत्र; हनुमान सिंह आर्य) | 1944–46 के आसपास | शार्दूल सिंह |
रायसिंहनगर गोलीकांड (बीरबल सिंह शहीद) | 1 जुलाई 1946 | शार्दूल सिंह |
दूधवाखारा व गंगनहर किसान आंदोलन का विस्तृत विवरण बीकानेर किसान आंदोलन — गंगनहर से दूधवाखारा नोट में है।
10.5 संतुलित मूल्यांकन
सकारात्मक पक्ष | आलोचनात्मक पक्ष |
|---|---|
गंगनहर से मरुस्थल में कृषि क्रांति | नहरी क्षेत्र में ऊँचा लगान, किसान असंतोष |
प्रतिनिधि सभा (1913), उच्च न्यायालय (1922) | सभा सलाहकारी; उत्तरदायी शासन नहीं दिया |
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत/रियासतों का प्रतिनिधित्व | ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति पूर्ण निष्ठा; राष्ट्रीय आंदोलन से दूरी |
शिक्षा, अस्पताल, रेल, बिजली | प्रजामंडल कार्यकर्ताओं का निष्कासन, षड्यंत्र केस, पब्लिक सेफ्टी एक्ट |
अकाल राहत | जागीरदारी शोषण पर सीमित अंकुश |
निष्कर्षतः, गंगा सिंह को "प्रबुद्ध निरंकुश शासक" (enlightened autocrat) की श्रेणी में रखा जा सकता है — विकास के प्रति प्रतिबद्ध, पर सत्ता में भागीदारी के विरोधी।
11. स्वर्ण जयंती (1937), मृत्यु (1943) और उत्तराधिकार
1937 — शासन के 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee) समारोह; इसी अवसर पर गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय की स्थापना।
2 फ़रवरी 1943 — बंबई (मुंबई) में मृत्यु।
उत्तराधिकारी — पुत्र महाराजा शार्दूल सिंह (1943–1949 तक शासक), जो बीकानेर के अंतिम शासक रहे।
11.1 शार्दूल सिंह और एकीकरण
शार्दूल सिंह ने स्वतंत्रता के समय भारत में विलय (Instrument of Accession) पर शीघ्र हस्ताक्षर किए — बीकानेर भारत में मिलने वाली आरंभिक रियासतों में थी।
30 मार्च 1949 को बीकानेर, जयपुर, जोधपुर व जैसलमेर के साथ वृहत् राजस्थान में शामिल हुआ (एकीकरण का चौथा चरण)।
देखें — वृहद राजस्थान का निर्माण (30 मार्च 1949) और राजस्थान एकीकरण के 7 चरण।
12. विस्तृत समयरेखा (Timeline)
वर्ष | घटना |
|---|---|
1880 | 13 अक्टूबर — गंगा सिंह का जन्म |
1887 | डूंगर सिंह की मृत्यु; गंगा सिंह गद्दी पर; रीजेंसी कौंसिल |
1889–1894 (लगभग) | मेयो कॉलेज, अजमेर में शिक्षा |
1898 | पूर्ण शासनाधिकार |
1899–1900 | छप्पनिया अकाल (वि.सं. 1956); राहत कार्य |
1900–01 | गंगा रिसाला के साथ चीन (बॉक्सर विद्रोह) |
1902 से | लालगढ़ पैलेस का निर्माण आरंभ |
लगभग 1902–04 | सोमालीलैंड अभियान में गंगा रिसाला |
1913 | बीकानेर प्रतिनिधि सभा |
1914–18 | प्रथम विश्वयुद्ध — मिस्र (स्वेज़) व फ्रांस मोर्चा |
1917 | इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट, लंदन |
1919 | पेरिस शांति सम्मेलन; वर्साय संधि पर हस्ताक्षर |
1920 | सतलज घाटी परियोजना समझौता (पंजाब-बहावलपुर-बीकानेर) |
1921 | नरेंद्र मंडल की स्थापना — प्रथम चांसलर (1921–26); गंगनहर का शिलान्यास |
1922 | उच्च न्यायालय की स्थापना |
1927 | 26 अक्टूबर — गंगनहर का उद्घाटन (लॉर्ड इरविन) |
1929 (लगभग) | गंगनहर क्षेत्र में किसान असंतोष |
1930–32 | गोलमेज सम्मेलन, लंदन |
1932 | बीकानेर षड्यंत्र केस; पब्लिक सेफ्टी एक्ट |
1936 | 4 अक्टूबर — बीकानेर प्रजामंडल (कलकत्ता, मघाराम वैद्य) |
1937 | स्वर्ण जयंती; गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय |
1942 | 22 जुलाई — बीकानेर राज्य प्रजा परिषद (रघुवरदयाल गोयल) |
1943 | 2 फ़रवरी — मृत्यु (बंबई); शार्दूल सिंह उत्तराधिकारी |
1949 | 30 मार्च — बीकानेर वृहत् राजस्थान में (शार्दूल सिंह के समय) |
13. योगदान सारणी — एक नज़र में
क्षेत्र | योगदान | परीक्षा संकेत |
|---|---|---|
सिंचाई | गंगनहर (1927) | राजस्थान का भगीरथ |
अकाल प्रबंधन | छप्पनिया अकाल राहत | वि.सं. 1956 |
सैन्य | गंगा रिसाला | चीन, सोमालीलैंड, मिस्र |
अंतरराष्ट्रीय | वॉर कैबिनेट 1917, वर्साय 1919, राष्ट्र संघ | एकमात्र भारतीय नरेश हस्ताक्षरकर्ता |
रियासती राजनीति | नरेंद्र मंडल प्रथम चांसलर | 1921–26 |
संवैधानिक | गोलमेज सम्मेलन; संघ योजना का समर्थन | 1930–32 |
प्रशासन | प्रतिनिधि सभा, उच्च न्यायालय, नगरपालिका | 1913, 1922 |
स्थापत्य | लालगढ़ पैलेस | पिता लाल सिंह; स्विंटन जैकब |
संस्कृति | गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय | 1937 |
14. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-liners)
"राजस्थान/राजपूताना का भगीरथ" — महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर)।
गंगा सिंह के पिता — महाराजा लाल सिंह; पूर्ववर्ती शासक — बड़े भाई डूंगर सिंह।
राज्यारोहण — 1887; पूर्ण अधिकार — 1898; शिक्षा — मेयो कॉलेज, अजमेर।
छप्पनिया अकाल — वि.सं. 1956 (1899–1900)।
गंगा रिसाला — बीकानेर की ऊँट सेना; चीन के बॉक्सर विद्रोह (1900) में भाग।
गंगनहर — सतलज से, फ़िरोज़पुर के हुसैनीवाला के पास से।
गंगनहर उद्घाटन — 26 अक्टूबर 1927, लॉर्ड इरविन।
सतलज घाटी समझौता — 1920 (पंजाब, बहावलपुर, बीकानेर)।
श्रीगंगानगर का पुराना नाम — रामनगर।
इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट — 1917, लंदन।
पेरिस शांति सम्मेलन 1919 — भारत की ओर से वर्साय संधि पर हस्ताक्षर।
नरेंद्र मंडल (1921) — प्रथम चांसलर गंगा सिंह (1921–26); अध्यक्ष वायसराय।
बीकानेर प्रतिनिधि सभा — 1913; उच्च न्यायालय — 1922।
लालगढ़ पैलेस — पिता लाल सिंह की स्मृति में; वास्तुकार स्विंटन जैकब।
स्वर्ण जयंती — 1937; गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय।
बीकानेर षड्यंत्र केस — 1932 ("बीकानेर दिग्दर्शन" पुस्तिका)।
बीकानेर प्रजामंडल — 4 अक्टूबर 1936, कलकत्ता, मघाराम वैद्य।
मृत्यु — 2 फ़रवरी 1943, बंबई; उत्तराधिकारी शार्दूल सिंह।
MGSU — महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर।
बीकानेर का वृहत् राजस्थान में विलय — 30 मार्च 1949 (शार्दूल सिंह के समय)।
15. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)
Trap 1: गंगनहर का उद्घाटन — इरविन, न कि चेम्सफ़ोर्ड/रीडिंग
1921 में शिलान्यास के समय वायसराय लॉर्ड रीडिंग का काल आरंभ हुआ था, पर उद्घाटन 1927 में लॉर्ड इरविन ने किया। उद्घाटनकर्ता के रूप में "इरविन" ही याद रखें।
Trap 2: नरेंद्र मंडल — "चांसलर", "अध्यक्ष" नहीं
अध्यक्ष वायसराय होता था; गंगा सिंह प्रथम चांसलर थे। दूसरे चांसलर पटियाला के भूपिंदर सिंह।
Trap 3: गंगा सिंह बनाम राव गांगा
राव गांगा 16वीं सदी के मारवाड़ (जोधपुर) शासक थे — राव गांगा — मारवाड़ विस्तार। गंगा सिंह 20वीं सदी के बीकानेर नरेश। नाम-साम्य पर विकल्प बनाए जाते हैं।
Trap 4: गंगनहर बनाम इंदिरा गांधी नहर
गंगनहर — सतलज, हुसैनीवाला (फ़िरोज़पुर), 1927। इंदिरा गांधी नहर — हरिके बैराज (सतलज-ब्यास संगम), स्वतंत्रता के बाद। दोनों के उद्गम स्थल अलग हैं।
Trap 5: दूधवाखारा और रायसिंहनगर गंगा सिंह के समय नहीं
ये दोनों घटनाएँ (1944–46) शार्दूल सिंह के शासन में हुईं। गंगा सिंह के समय — षड्यंत्र केस 1932, प्रजामंडल 1936, प्रजा परिषद 1942।
Trap 6: लालगढ़ — "लाल पत्थर" के कारण नहीं, "लाल सिंह" के कारण
महल लाल बलुआ पत्थर का है, पर नाम पिता लाल सिंह की स्मृति में है।
Trap 7: छप्पनिया = वि.सं. 1956, ईस्वी 1956 नहीं
"छप्पन" विक्रम संवत 1956 से है; ईस्वी सन् 1899–1900।
Trap 8: बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना बीकानेर में नहीं
दमन के कारण स्थापना कलकत्ता में हुई।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. "गंगा के 3 G": Ganga Risala (सेना) — Gang Canal (नहर) — Golden Jubilee (1937)।
2. "13-21-22-27-37": प्रतिनिधि सभा 1913 → नरेंद्र मंडल 1921 → उच्च न्यायालय 1922 → गंगनहर 1927 → स्वर्ण जयंती 1937।
3. "17 कैबिनेट, 19 वर्साय, 21 चांसलर" — गंगा सिंह की अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय सीढ़ी।
4. "ची-सो-मि": चीन → सोमालीलैंड → मिस्र (गंगा रिसाला)।
5. "32-36-42 गंगा के, 44-46 शार्दूल के": षड्यंत्र केस, प्रजामंडल, प्रजा परिषद बनाम दूधवाखारा, रायसिंहनगर।
17. कथन अभ्यास
गंगा सिंह, महाराजा डूंगर सिंह के छोटे भाई थे। — सही।
गंगनहर का उद्घाटन लॉर्ड कर्ज़न ने किया। — गलत (लॉर्ड इरविन, 1927)।
गंगनहर का जल ब्यास नदी से आता है। — गलत (सतलज, हुसैनीवाला)।
गंगा सिंह नरेंद्र मंडल के प्रथम चांसलर थे। — सही।
गंगा सिंह ने वर्साय संधि पर भारत की ओर से हस्ताक्षर किए। — सही।
रायसिंहनगर गोलीकांड गंगा सिंह के शासनकाल में हुआ। — गलत (1946, शार्दूल सिंह)।
लालगढ़ पैलेस गंगा सिंह ने अपने पिता लाल सिंह की स्मृति में बनवाया। — सही।
बीकानेर प्रतिनिधि सभा की स्थापना 1913 में हुई। — सही।
बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना बीकानेर नगर में हुई। — गलत (कलकत्ता, 1936)।
श्रीगंगानगर का पुराना नाम रामनगर था। — सही।
18. संबंधित नोट्स
19. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
जन्म 13 अक्टूबर 1880; पिता लाल सिंह; पूर्ववर्ती भाई डूंगर सिंह
1887 गद्दी (लगभग 7 वर्ष), रीजेंसी; मेयो कॉलेज; 1898 पूर्ण अधिकार
छप्पनिया अकाल वि.सं. 1956 (1899–1900) — राहत कार्य
गंगा रिसाला — चीन 1900, सोमालीलैंड, मिस्र (WWI), WWII
गंगनहर — सतलज, हुसैनीवाला; 1920 समझौता, 1921 शिलान्यास, 26 अक्टूबर 1927 इरविन
रामनगर → श्रीगंगानगर; "राजस्थान का भगीरथ"
1917 इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट; 1919 पेरिस, वर्साय संधि
नरेंद्र मंडल 1921 — प्रथम चांसलर 1921–26
गोलमेज सम्मेलन 1930–32; अखिल भारतीय संघ का समर्थन
प्रतिनिधि सभा 1913; उच्च न्यायालय 1922; लालगढ़ (स्विंटन जैकब)
दमन — षड्यंत्र केस 1932, प्रजामंडल 1936 (कलकत्ता), प्रजा परिषद 1942
स्वर्ण जयंती 1937; मृत्यु 2 फ़रवरी 1943 बंबई; शार्दूल सिंह; 30 मार्च 1949 वृहत् राजस्थान
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 6 (गंगनहर), खंड 7 (अंतरराष्ट्रीय भूमिका) और खंड 10.4 ("किसके शासनकाल में?" तालिका) दोबारा पढ़ें। वर्ष-आधारित प्रश्नों के लिए खंड 12 की समयरेखा को कम से कम दो बार लिखकर दोहराएँ।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
महाराजा गंगा सिंह आधुनिक राजस्थान के उन विरले शासकों में हैं जिनका प्रभाव रियासत की सीमा से बाहर — लंदन, पेरिस और जेनेवा तक — पहुँचा। छप्पनिया अकाल के अनुभव से जन्मी गंगनहर ने बीकानेर के मरुस्थल को उपजाऊ खेतों में बदला और उन्हें "राजस्थान का भगीरथ" बनाया; प्रतिनिधि सभा, उच्च न्यायालय, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधारों ने उन्हें "आधुनिक बीकानेर का निर्माता" बनाया। पर इसी शासन ने प्रजामंडल कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया और उत्तरदायी शासन की माँग को दबाया। परीक्षा के लिए तीन स्तंभ याद रखें — गंगनहर (1927, इरविन), अंतरराष्ट्रीय भूमिका (1917, 1919, नरेंद्र मंडल 1921) और सुधार बनाम दमन (1913/1922 बनाम 1932/1936)।
1880 जन्म · 1887 गद्दी · 1898 अधिकार · 1899–1900 छप्पनिया · 1900 चीन · 1913 प्रतिनिधि सभा · 1917 वॉर कैबिनेट · 1919 वर्साय · 1921 नरेंद्र मंडल · 1922 उच्च न्यायालय · 1927 गंगनहर · 1932 षड्यंत्र केस · 1937 स्वर्ण जयंती · 1943 मृत्यु
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) — गंगनहर, नरेंद्र मंडल व सुधार — RAS/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- बीकानेर के मुगलकालीन शासक — लूणकरण से अनूपसिंह — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- राव बीका और करणी माता — अभ्यास क्विज़20 प्रश्नों का क्विज़ दें
- राव शेखा व शेखावाटी का इतिहास — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ (All-in-One Mega Pack) — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ (All-in-One Mega Pack)
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह को 'राजस्थान/राजपूताना का भगीरथ' कहा जाता है, क्योंकि जैसे भगीरथ गंगा को धरती पर लाए, वैसे ही गंगा सिंह सतलज का पानी गंगनहर के माध्यम से बीकानेर के मरुस्थल तक लाए। गंगनहर का उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 को लॉर्ड इरविन ने किया।
बड़े भाई डूंगर सिंह की मृत्यु के बाद गंगा सिंह 1887 में लगभग 7 वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठे। अल्पवयस्कता में रीजेंसी कौंसिल ने शासन चलाया; मेयो कॉलेज, अजमेर में शिक्षा के बाद उन्हें 1898 में पूर्ण शासनाधिकार मिले।
विक्रम संवत 1956 (ईस्वी 1899–1900) का भीषण अकाल छप्पनिया अकाल कहलाता है। पूर्ण अधिकार मिलने के तुरंत बाद गंगा सिंह ने इसमें राहत कार्य चलाए, और इसी अनुभव से स्थायी नहरी सिंचाई (गंगनहर) का विचार मज़बूत हुआ।
गंगा रिसाला बीकानेर की प्रसिद्ध ऊँट सेना (Bikaner Camel Corps) थी। इसने चीन के बॉक्सर विद्रोह (1900), सोमालीलैंड अभियान, प्रथम विश्वयुद्ध में मिस्र (स्वेज़ क्षेत्र) और द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश पक्ष में सेवा दी।
गंगनहर सतलज नदी से फ़िरोज़पुर (पंजाब) के पास हुसैनीवाला से निकलती है। 1920 के सतलज घाटी समझौते के बाद 1921 में शिलान्यास हुआ और 26 अक्टूबर 1927 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया।
1921 में स्थापित नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes) के प्रथम चांसलर महाराजा गंगा सिंह थे (1921–26)। मंडल का अध्यक्ष वायसराय होता था, इसलिए गंगा सिंह को 'प्रथम चांसलर' कहना सही है, 'अध्यक्ष' नहीं।
वे 1917 की इंपीरियल वॉर कॉन्फ्रेंस/कैबिनेट में भारत के प्रतिनिधियों में थे, 1919 के पेरिस शांति सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रहे और भारत की ओर से वर्साय संधि पर हस्ताक्षर किए। 1920 के दशक में उन्होंने राष्ट्र संघ की सभा में भी भाग लिया।
प्रमुख सुधार थे — बीकानेर प्रतिनिधि सभा (1913), उच्च न्यायालय (1922), नगरपालिका सुधार, शिक्षा व अस्पतालों का विस्तार, रेल व बिजली। ये सुधार ऊपर से दिए गए थे; प्रतिनिधि सभा सलाहकारी थी और अंतिम सत्ता महाराजा के पास रही।
1932 में जब गंगा सिंह गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन में थे, तब बीकानेर के कार्यकर्ताओं ने राज्य के कुशासन पर 'बीकानेर दिग्दर्शन' पुस्तिका प्रसारित की। इसके बाद उन पर षड्यंत्र/राजद्रोह का मुकदमा चला — इसे बीकानेर षड्यंत्र केस कहते हैं। इसी दौर में पब्लिक सेफ्टी एक्ट भी लागू किया गया।
गंगा सिंह की मृत्यु 2 फ़रवरी 1943 को बंबई में हुई। उनके पुत्र शार्दूल सिंह बीकानेर के अंतिम शासक बने, जिनके समय 30 मार्च 1949 को बीकानेर वृहत् राजस्थान में शामिल हुआ।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: