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लाख कला एवं लाख की चूड़ियाँ: प्रमुख केंद्र एवं महत्त्व

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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लाख कला एवं लाख की चूड़ियाँ: प्रमुख केंद्र एवं महत्त्व

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: लाख (Lac) एक प्राकृतिक राल (resin) है, जो लाख-कीट (Kerria lacca) द्वारा कुसुम, पलाश, बेर जैसे पेड़ों की टहनियों पर स्रावित की जाती है। राजस्थान में लाख से चूड़ियाँ, कड़े, खिलौने, डिब्बियाँ बनाने की प्राचीन कला है। जयपुर का ‘मनिहारों का रास्ता’ लाख की चूड़ियों का सबसे प्रसिद्ध बाज़ार है; जोधपुर, उदयपुर भी प्रमुख केंद्र हैं। लाख का काम करने वाले कारीगर मनिहार / लखेरा कहलाते हैं। परीक्षा-पुस्तकों में लाख की चूड़ी को ‘मोकड़ी’ भी कहा गया है। लाख की चूड़ियाँ सुहाग और तीज-त्योहार का प्रतीक हैं। लाख कला राजस्थान की 16 GI उत्पादों की सूची में शामिल नहीं है।

1. लाख — क्या है और कहाँ से आती है?

लाख कोई पौधा या खनिज नहीं, बल्कि एक कीट-जनित प्राकृतिक राल है। सूक्ष्म लाख-कीट पेड़ की टहनियों का रस चूसकर अपने शरीर से एक गोंद-जैसा पदार्थ स्रावित करते हैं, जो टहनियों पर परत के रूप में जम जाता है। इन टहनियों को काटकर कच्ची लाख (Stick lac) प्राप्त होती है, जिसे साफ़ कर दाना लाख (Seed lac) और फिर चपड़ा (Shellac) बनाया जाता है। भारत विश्व का प्रमुख लाख-उत्पादक देश है और देश में झारखंड सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है; राजस्थान के कारीगर मुख्यतः बाहर से आई लाख पर शिल्प करते हैं।

तथ्यविवरण
स्रोतलाख-कीट (Kerria lacca) का स्राव
पोषक पेड़कुसुम, पलाश (ढाक), बेर, खैर
प्रमुख उत्पादचूड़ियाँ, कड़े, बाजूबंद, खिलौने, डिब्बियाँ, सजावटी वस्तुएँ
प्रमुख केंद्रजयपुर (मनिहारों का रास्ता), जोधपुर, उदयपुर, हिंडौन-करौली क्षेत्र
कारीगर समुदायमनिहार / लखेरा
लाख की चूड़ी‘मोकड़ी’ (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)
सजावटकाँच के नग, मोती, कुंदन, सोने-चाँदी के वर्क
GI स्थिति16 GI उत्पादों की सूची में शामिल नहीं

महिलाओं के आभूषण: महिलाओं के प्रमुख आभूषण — नाम एवं उपयोग | हस्तशिल्प मास्टर: राजस्थान के प्रमुख हस्तशिल्प

2. लाख की चूड़ी बनाने की प्रक्रिया

  1. लाख गलाना: चपड़ा/लाख को अंगीठी पर गर्म कर नरम किया जाता है; उसमें मिट्टी/चॉक पाउडर मिलाकर ‘मसाला’ बनता है।
  2. रंग मिलाना: नरम लाख में रंग मिलाकर अलग-अलग रंग की बत्तियाँ (sticks) बनाई जाती हैं।
  3. भीतरी कोर: सस्ती लाख/मसाले से चूड़ी का भीतरी आधार बनता है, ऊपर रंगीन लाख की परत चढ़ाई जाती है।
  4. गोलाई देना: लाख की बत्ती को लकड़ी के बेलननुमा साँचे (कलबूत) पर लपेटकर, गर्म करते हुए चूड़ी का आकार दिया जाता है।
  5. आकार मिलाना: हाथ के नाप के अनुसार साँचे पर ऊपर-नीचे सरकाकर आकार तय।
  6. सजावट: गर्म रहते ही चिमटी से काँच के नग, मोती, कुंदन, शीशे जड़े जाते हैं।
  7. फिनिशिंग: ठंडा कर चमक हेतु पॉलिश।

🎯 जयपुर के बाज़ार और हस्तशिल्प: मॉक टेस्ट

‘मनिहारों का रास्ता — लाख’, ‘जौहरी बाज़ार — आभूषण’, ‘त्रिपोलिया — बर्तन’ जैसे प्रश्न पटवारी, LDC, CET और पुलिस परीक्षा में आते हैं। अभ्यास करें:

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3. प्रमुख केंद्र एवं उत्पाद

केंद्रपहचान
जयपुर — मनिहारों का रास्तालाख की चूड़ियों का सबसे प्रसिद्ध बाज़ार; त्रिपोलिया बाज़ार के निकट
जोधपुरलाख की चूड़ियाँ व कड़े; मारवाड़ी डिज़ाइन
उदयपुरपरीक्षा-पुस्तकों के अनुसार लाख के खिलौने व चूड़ियाँ
हिंडौन-करौली क्षेत्रलाख व काँच की चूड़ियाँ (स्थानीय उद्योग)

4. लाख की चूड़ियों के प्रकार

प्रकारपहचान/अवसर
सादी लाख चूड़ीएक रंग — दैनिक पहनावा
नगीनेदार चूड़ीकाँच के रंगीन नग जड़े — विवाह, उत्सव
कुंदन लाख कड़ाकुंदन-मोती सहित भारी कड़ा
लहरिया/धारीदार चूड़ीबहुरंगी धारियाँ — सावन-तीज
दुल्हन सेटलाल-हरे रंग के पूरे हाथ के सेट

5. सांस्कृतिक महत्त्व — सुहाग का प्रतीक

  • सुहाग-चिह्न: राजस्थान में विवाहित स्त्रियों के लिए चूड़ियाँ सौभाग्य का प्रतीक; लाख की चूड़ी शुभ मानी जाती है।
  • विवाह: दुल्हन को लाख/हाथीदाँत (अब प्लास्टिक/हड्डी विकल्प) का चूड़ा पहनाने की परंपरा।
  • तीज-गणगौर: इन पर्वों पर नई लाख की चूड़ियाँ पहनना शुभ। देखें — गणगौर पर्व।
  • जनजातीय आभूषण: भील-गरासिया महिलाओं में भी लाख व पीतल के कड़े लोकप्रिय।
  • मनिहारिन: गाँवों में घर-घर चूड़ी पहनाने वाली मनिहारिन लोकगीतों की पात्र रही है।

जनजातीय आभूषण: जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण

6. लाख के खिलौने एवं अन्य वस्तुएँ

  • लकड़ी के खिलौनों पर लाख की परत (lacquer) — खरादी (lathe) पर घुमाते हुए लाख की बत्ती दबाने से रंगीन चमकदार परत।
  • डिब्बियाँ, सिंदूरदान, कलमदान, फोटो-फ्रेम, शतरंज के मोहरे।
  • आधुनिक उत्पाद — पेन, की-चेन, इयर-रिंग, सजावटी गेंदें।

7. लाख के वैज्ञानिक व औद्योगिक उपयोग

शिल्प के अलावा लाख के अनेक औद्योगिक उपयोग हैं — चपड़ा (शेलैक) से फर्नीचर पॉलिश/वार्निश, विद्युत-रोधी (insulating) सामग्री, दवाइयों व टॉफ़ियों की चमकदार कोटिंग, फलों की कोटिंग, पुरानी ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड, और लाल रंग (lac dye)। ऐतिहासिक रूप से सरकारी दस्तावेज़ों पर मुहर लगाने वाली लाख (sealing wax) का उपयोग होता था। महाभारत का प्रसिद्ध ‘लाक्षागृह’ प्रसंग भी लाख की ज्वलनशीलता से जुड़ा है — यह तथ्य लाख की प्राचीनता को दर्शाता है।

✍️ RAS Mains मॉडल उत्तर — लाख शिल्प पर टिप्पणी (50 शब्द)

लाख लाख-कीट द्वारा कुसुम, पलाश, बेर आदि पेड़ों पर स्रावित प्राकृतिक राल है। राजस्थान में मनिहार/लखेरा कारीगर इससे चूड़ियाँ, कड़े और खिलौने बनाते हैं। जयपुर का मनिहारों का रास्ता इसका प्रसिद्ध बाज़ार है। लाख की चूड़ियाँ सुहाग व तीज-गणगौर से जुड़ी हैं; परीक्षा-पुस्तकों में इन्हें मोकड़ी कहा गया है।

जयपुर के पारंपरिक बाज़ार और उनके शिल्प

बाज़ार/रास्तापहचान
मनिहारों का रास्तालाख की चूड़ियाँ
जौहरी बाज़ारआभूषण, कुंदन-मीना, रत्न
बापू बाज़ारवस्त्र, मोजड़ी, रजाई, हस्तशिल्प
त्रिपोलिया बाज़ारबर्तन, लोहे-पीतल का सामान, लाख
किशनपोल बाज़ारकाष्ठ-शिल्प, वस्त्र (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)

सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर को चौपड़-पद्धति पर बसाते समय अलग-अलग व्यवसायों के लिए अलग बाज़ार और ‘रास्ते’ निर्धारित किए — इसीलिए आज भी जयपुर के कई रास्तों के नाम वहाँ के शिल्प/समुदाय पर हैं। यह नगर-नियोजन जयपुर को UNESCO विश्व धरोहर (2019) दिलाने वाले कारणों में से एक है। देखें — राजस्थान की UNESCO विश्व धरोहर।

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — यह विषय परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
बाज़ारमनिहारों का रास्ता किसके लिए?लाख की चूड़ियाँ (जयपुर)
समुदायलाख कारीगर?मनिहार/लखेरा
स्रोतलाख कहाँ से प्राप्त?लाख-कीट का स्राव
नामलाख की चूड़ी का स्थानीय नाम?मोकड़ी

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लाख की चूड़ियाँ कहाँ प्रसिद्ध हैं?

राजस्थान में लाख की चूड़ियाँ जयपुर के मनिहारों का रास्ता के लिए सबसे प्रसिद्ध हैं; जोधपुर और उदयपुर भी प्रमुख केंद्र हैं।

लाख किससे प्राप्त होती है?

लाख, लाख-कीट (Kerria lacca) द्वारा कुसुम, पलाश, बेर जैसे पेड़ों पर स्रावित प्राकृतिक राल है।

लाख का काम करने वाले को क्या कहते हैं?

लाख का काम करने वाले कारीगर मनिहार या लखेरा कहलाते हैं।

लाख की चूड़ी को क्या कहते हैं?

परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार राजस्थान में लाख की चूड़ी को ‘मोकड़ी’ कहा जाता है।

भारत में सर्वाधिक लाख उत्पादन किस राज्य में होता है?

भारत में सर्वाधिक लाख उत्पादन झारखंड में होता है।

📝 One-Liner Revision (10 प्रश्न)

  1. लाख — कीट-जनित राल
  2. लाख-कीट — Kerria lacca
  3. पोषक पेड़ — कुसुम, पलाश, बेर
  4. जयपुर का लाख बाज़ार — मनिहारों का रास्ता
  5. लाख कारीगर — मनिहार/लखेरा
  6. लाख की चूड़ी — मोकड़ी
  7. शोधित लाख — चपड़ा (शेलैक)
  8. भारत का सबसे बड़ा उत्पादक — झारखंड
  9. महाभारत प्रसंग — लाक्षागृह
  10. GI स्थिति — सूची में नहीं

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • लाख = कीट-स्राव; राजस्थान में चूड़ी-खिलौना शिल्प।
  • मनिहारों का रास्ता (जयपुर) — प्रमुख बाज़ार।
  • सुहाग व तीज-गणगौर से जुड़ाव।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • लाख वनस्पति-गोंद नहीं — कीट-स्राव है।
  • मनिहारों का रास्ता जयपुर में है, जोधपुर में नहीं।
  • लाख उत्पादन में राजस्थान अग्रणी नहीं — झारखंड है; राजस्थान शिल्प में प्रसिद्ध।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“कीड़ा बनाए लाख, मनिहार बनाए चूड़ी, जयपुर के रास्ते में बिके — मोकड़ी पूरी”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

लाख प्रश्न दो कोणों से आते हैं — कला-संस्कृति (मनिहारों का रास्ता, मोकड़ी) और विज्ञान/भूगोल (लाख-कीट, झारखंड)। दोनों पहलू साथ पढ़ें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • ICAR — Indian Institute of Natural Resins and Gums (IINRG), रांची: लाख-कीट, पोषक पेड़, उत्पादन।
  • Development Commissioner (Handicrafts) — Lac craft, Jaipur।
  • राजस्थान अध्ययन (कला-संस्कृति) — मनिहारों का रास्ता, मोकड़ी।
  • सुयोग अकादमी — महिलाओं के प्रमुख आभूषण।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: लाख कला एवं लाख की चूड़ियाँ: प्रमुख केंद्र एवं महत्त्व

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: ‘मोकड़ी’ नाम व उदयपुर के लाख-खिलौने परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार हैं; लाख-विज्ञान संबंधी तथ्य ICAR-IINRG स्रोतों पर आधारित हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. जयपुर का ‘मनिहारों का रास्ता’ किसके लिए प्रसिद्ध है?

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Q2. लाख किससे प्राप्त होती है?

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Q3. लाख का कार्य करने वाले कारीगर कहलाते हैं —

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Q4. राजस्थान में लाख की चूड़ी को कहा जाता है —

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Q5. भारत में सर्वाधिक लाख उत्पादक राज्य है —

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

लाख-कीट द्वारा स्रावित प्राकृतिक राल।

मनिहारों का रास्ता।

मनिहार/लखेरा।

शोधित लाख (शेलैक)।

नहीं।

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