बुधवार, 21 अक्टूबर 2026·7 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
21 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
21 अक्टूबर 2026 का विशेष दैनिक समसामयिकी संकलन: राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस (हॉट स्प्रिंग्स 1959 व राजस्थान पुलिस प्रशासन), आज़ाद हिंद सरकार की 83वीं स्थापना वर्षगांठ (नेताजी सुभाष चंद्र बोस, INA व शहीद-स्वराज द्वीप), विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस (थायरॉइड ग्रंथि, थायरोक्सिन व NIDDCP मानक), राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 एवं दाबू/सांगानेरी/बगरू प्रिंट जीआई टैग, सवाई जयसिंह की 5 खगोलीय वेधशालाएं व जंतर मंतर (जयपुर), भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (MPC व 4% मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण), तथा प्रोजेक्ट टाइगर एवं राजस्थान के 5 बाघ अभयारण्य (रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा, रामगढ़ विषधारी व धौलपुर-करौली)। RPSC RAS, CET, पटवारी, REET, पुलिस भर्ती व UPSC हेतु प्रामाणिक परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।
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राष्ट्रीय सुरक्षा, पुलिस प्रशासन एवं शौर्य दिवस (21 अक्टूबर विशेष): "राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस" (National Police Commemoration Day) — 1959 हॉट स्प्रिंग्स (लद्दाख) शौर्य गाथा, राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (नई दिल्ली) व राजस्थान पुलिस (ध्येय: आमजन में विश्वास, अपराधियों में डर)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में 67वां "राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस" (National Police Commemoration Day) श्रद्धापूर्वक मनाया गया। 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के बर्फीले हॉट स्प्रिंग्स (Hot Springs) क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 10 वीर जवानों ने मातृभूमि की अखंडता की रक्षा करते हुए चीनी आक्रमणकारियों का अदम्य साहस से मुकाबला कर सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस अवसर पर नई दिल्ली (चाणक्यपुरी) स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA, नेहरू नगर) में कर्तव्य पथ पर प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓हॉट स्प्रिंग्स (लद्दाख) ऐतिहासिक घटनाक्रम एवं पृष्ठभूमि (Origin of Commemoration Day):
• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के अक्साई चिन सीमांत पर समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित 'हॉट स्प्रिंग्स' (Hot Springs) पोस्ट पर गश्त कर रही सीआरपीएफ (CRPF) की टुकड़ी पर चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर भारी हमला किया गया।
• सर्वोच्च बलिदान: सीआरपीएफ के 10 वीर जवानों ने अंतिम सांस तक लड़ते हुए मातृभूमि की रक्षा में शहादत दी।
• राष्ट्रीय संकल्प: जनवरी 1960 में आयोजित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों (IGP) के वार्षिक सम्मेलन में इन वीर अमर शहीदों की स्मृति में प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
• राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (चाणक्यपुरी, नई दिल्ली): प्रधानमंत्री द्वारा 21 अक्टूबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित; इसमें 30 फीट ऊंचा एकल काले ग्रेनाइट का केंद्रीय पाषाण (Central Sculpture - 238 टन) स्थापित है, तथा 'शौर्य दीवार' (Wall of Valour) पर देश की स्वतंत्रता के बाद से अब तक कर्तव्य निर्वहन में शहीद हुए 36,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं।
✓राजस्थान पुलिस संगठन, प्रशासनिक ढांचा एवं ऐतिहासिक तथ्य (RPSC/RSSB High-Yield Facts):
• राजस्थान पुलिस का गठन: 16 अप्रैल 1949 को 'राजस्थान पुलिस अध्यादेश 1949' (Rajasthan Police Ordinance) जारी होने के साथ हुआ (विभिन्न रियासती पुलिस बलों का एकीकरण)।
• ध्येय वाक्य (Motto): "आमजन में विश्वास, अपराधियों में डर" (Trust in the public, fear in the criminals)।
• आधिकारिक प्रतीक चिन्ह (Insignia): विजय स्तंभ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नौ मंजिला कीर्ति स्तंभ)।
• प्रथम पुलिस प्रमुख:
- प्रथम पुलिस महानिरीक्षक (IGP): आर. बनर्जी (1949)।
- प्रथम पुलिस महानिदेशक (DGP): 1983 में पदनाम परिवर्तन के पश्चात प्रथम डीजीपी रघुनाथ सिंह बने।
• प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान:
- राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA): नेहरू नगर, जयपुर (गृह मंत्रालय द्वारा देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस अकादमियों में पुरस्कृत)।
- राजस्थान पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (RPTC): मंडोर, जोधपुर।
- मेवाड़ भील कोर (MBC): स्थापना 1841 (मुख्यालय: खेरवाड़ा, उदयपुर)।
✓भारतीय संविधान में पुलिस एवं लोक व्यवस्था का स्थान (Polity Exam Traps):
• 7वीं अनुसूची (Seventh Schedule): संविधान की 7वीं अनुसूची के अंतर्गत 'लोक व्यवस्था' (Public Order - प्रविष्टि 1) और 'पुलिस' (Police - प्रविष्टि 2) पूर्णतः **राज्य सूची (State List)** के विषय हैं।
• केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF): सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) तथा असम राइफल्स — ये सभी केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं।
• मॉडल पुलिस अधिनियम: पुलिस सुधारों हेतु 2006 में 'सोली सोराबजी समिति' द्वारा मॉडल पुलिस एक्ट का मसौदा तैयार किया गया था तथा सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006)' वाद में पुलिस सुधारों के 7 अनिवार्य निर्देश जारी किए गए।
आधुनिक भारतीय इतिहास एवं स्वतंत्रता संग्राम (21 अक्टूबर ऐतिहासिक वर्षगांठ): "आज़ाद हिंद सरकार" की 83वीं स्थापना वर्षगांठ (21 अक्टूबर 1943 - सिंगापुर) — नेताजी सुभाष चंद्र बोस, INA, रानी झांसी रेजिमेंट, अंडमान-निकोबार (शहीद व स्वराज द्वीप)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को भारत की पहली स्वतंत्र अंतरिम सरकार "आरज़ी हुकूमते आज़ाद हिंद" (Provisional Government of Free India) की 83वीं स्थापना वर्षगांठ पूरे देश में गौरवपूर्वक मनाई जा रही है। 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर के ऐतिहासिक कैथे सिनेमा हॉल (Cathay Building) में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की औपचारिक घोषणा की थी। इस सरकार को जापान, जर्मनी, इटली सहित 9 संप्रभु राष्ट्रों ने आधिकारिक राजनयिक मान्यता प्रदान की थी। संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा नेताजी के जीवन, पराक्रम और आज़ाद हिंद फौज (INA) के अदम्य योगदान पर विशेष डिजिटल अभिलेख प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना एवं स्वरूप (Core Modern History Facts):
• उद्घोषणा तिथि एवं स्थल: 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर के कैथे थिएटर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा।
• सरकार का स्वरूप: यह एक 'निर्वासित अंतरिम सरकार' (Government in Exile) थी, जिसके पास अपनी सेना (INA), बैंक, मुद्रा, डाक टिकट, राष्ट्रगान ("शुभ सुख चैन की बरखा बरसे") और नागरिक संहिता थी।
• नेताजी का पदभार: नेताजी सुभाष चंद्र बोस इस अंतरिम सरकार के राज्य प्रमुख (Head of State), प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और युद्ध मंत्री (सर्वोच्च सेनापति) थे।
• 9 देशों द्वारा मान्यता: जापानी साम्राज्य ने इसे तुरंत मान्यता दी; इसके बाद जर्मनी, इटली, क्रोएशिया, बर्मा, थाईलैंड, नानकिंग (चीन), फिलीपींस और मंचूरिया सहित 9 स्वतंत्र राष्ट्रों ने इसे भारत की संप्रभु सरकार स्वीकार किया।
• आज़ाद हिंद बैंक: अप्रैल 1944 में बर्मा (रंगून) में स्थापित किया गया, जिसकी अपनी मुद्रा थी।
✓आज़ाद हिंद फौज (INA) का गठन एवं ब्रिगेड संरचना (Exam High-Yield):
• प्रारंभिक विचार: कैप्टन मोहन सिंह द्वारा मलाया अभियान में जापानी सेना के मेजर फुजीवारा के सहयोग से भारतीय युद्धबंदियों को लेकर (मार्च 1942 में टोक्यो सम्मेलन)।
• रासबिहारी बोस का योगदान: इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के अध्यक्ष रासबिहारी बोस ने जून 1942 (बैंकॉक सम्मेलन) में INA के गठन को औपचारिक रूप दिया और जुलाई 1943 में सिंगापुर में इसका सर्वोच्च नेतृत्व नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया।
• सैन्य ब्रिगेड एवं कमान:
- 1. सुभाष ब्रिगेड (कमांडर: शाहनवाज़ खान)
- 2. गांधी ब्रिगेड (कमांडर: इनायत कियानी)
- 3. नेहरू ब्रिगेड (कमांडर: अजीज अहमद खान)
- 4. **रानी झांसी रेजिमेंट** (विश्व की प्रथम पूर्णतः महिला सैन्य लड़ाकू वाहिनी — कमांडर: **कैप्टन लक्ष्मी सहगल / स्वामीनाथन**)।
✓अंडमान-निकोबार द्वीप समूह एवं ऐतिहासिक नामकरण (Historical Milestones):
• प्रथम मुक्त भारतीय भूभाग: जापान ने नवंबर 1943 में ग्रेटर ईस्ट एशिया कॉन्फ्रेंस में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आज़ाद हिंद सरकार को सौंपे।
• ऐतिहासिक तिरंगा फहराना: 30 दिसंबर 1943 को नेताजी ने पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना ग्राउंड में पहली बार स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज फहराया।
• द्वीपों का नामकरण: नेताजी ने अंडमान द्वीप का नाम **'शहीद द्वीप' (Shaheed Island)** और निकोबार द्वीप का नाम **'स्वराज द्वीप' (Swaraj Island)** रखा।
• लाल किला मुकदमा (Red Fort Trials - 1945): कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों और मेजर शाहनवाज़ खान पर चले मुकदमे में भूलाभाई देसाई, जवाहरलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू ने वकीलों के दल का नेतृत्व किया।
• नेताजी के ऐतिहासिक नारे: "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा", "दिल्ली चलो", तथा "जय हिंद" (आज़ाद हिंद फौज का आधिकारिक नारा)।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• सूत्र: "21 अक्टूबर 1943 सिंगापुर = आज़ाद हिंद सरकार | 9 देशों की मान्यता | कैप्टन लक्ष्मी सहगल = रानी झांसी रेजिमेंट | अंडमान = शहीद द्वीप, निकोबार = स्वराज द्वीप!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: मेवाड़ एवं राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन नोट्स एवं RPSC RAS Prelims संपूर्ण टेस्ट सीरीज़।
लोक स्वास्थ्य, पोषण एवं अनुप्रयुक्त जीव विज्ञान (21 अक्टूबर विशेष दिवस): "विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस" (Global Iodine Deficiency Disorders Prevention Day) — थायरॉइड ग्रंथि, थायरोक्सिन हार्मोन, NIDDCP कार्यक्रम, घेंघा (Goitre) व नमक का आयोडनीकरण (FSSAI मानक)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तथा यूनिसेफ (UNICEF) के संयुक्त तत्वावधान में "विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस" (Global Iodine Deficiency Disorders Prevention Day) का आयोजन किया गया। इस वर्ष का मुख्य ध्येय समाज में 100% आयोडीन युक्त नमक के निरंतर उपभोग और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी से होने वाले तंत्रिका संबंधी विकारों की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। राजस्थान स्वास्थ्य विभाग द्वारा पश्चिमी मरुस्थलीय एवं जनजातीय क्षेत्रों में नमक आयोडनीकरण निगरानी अभियान चलाया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓आयोडीन का शारीरिक महत्व एवं अंतःस्रावी जैव-रसायन (Endocrine Biochemistry - Core Science):
• थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland): मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्रावी (Endocrine) ग्रंथि है, जो श्वासनली (Trachea) के दोनों ओर H-आकार (द्विपालिक/Bilobed) में स्थित होती है।
• उत्सर्जित हार्मोन:
- थायरोक्सिन / टेट्रा-आयोडोथायरोनिन (T4 - लगभग 80%)
- ट्राई-आयोडोथायरोनिन (T3 - लगभग 20%, अधिक सक्रिय रूप)।
• जैव-संश्लेषण: इन हार्मोनों के निर्माण हेतु 'टायरोसिन' (Tyrosine) अमीनो अम्ल तथा अकार्बनिक 'आयोडीन' अनिवार्य घटक हैं। थायरोक्सिन अणु में लगभग 65% द्रव्यमान आयोडीन का होता है।
• प्रमुख कार्य: आधारीय उपापचय दर (Basal Metabolic Rate - BMR) का नियंत्रण, शारीरिक व मानसिक विकास, तंत्रिका तंत्र का परिपक्वन तथा कार्बोहाइड्रेट-वसा का उपापचय।
• दैनिक अनुशंसित मात्रा (RDA): एक सामान्य वयस्क हेतु प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम (μg), तथा गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं हेतु 220–250 माइक्रोग्राम।
✓आयोडीन की कमी से होने वाले प्रमुख विकार एवं लक्षण (High-Yield Biology Questions):
• 1. घेंघा या गलगंड (Simple Goitre): आयोडीन की कमी होने पर थायरोक्सिन संश्लेषण घट जाता है, जिससे TSH (थायरॉइड प्रेरक हार्मोन) के प्रभाव में थायरॉइड ग्रंथि असामान्य रूप से फूलकर बड़ी हो जाती है।
• 2. क्रेटिनिज़्म (Cretinism / जड़वामनता): बाल्यावस्था या भ्रूणावस्था में आयोडीन/थायरोक्सिन की गंभीर कमी से बच्चों में शारीरिक बौनापन, मानसिक मंदता (कम आईक्यू), जीभ का बाहर निकलना और मूक-बधिरता (Deaf-mutism) हो जाती है।
• 3. मिक्सोएडिमा (Myxoedema / गुल्मशोफ): वयस्कों में थायरोक्सिन की कमी से उपापचय दर (BMR) में भारी गिरावट, त्वचा का रूखा व पीला होना, सुस्ती, वजन बढ़ना और चेहरे पर सूजन।
• 4. हाशिमोटो का रोग (Hashimoto's Thyroiditis): इसे 'थायरॉइड की आत्महत्या' (Suicide of Thyroid) कहा जाता है; यह एक स्व-प्रतिरक्षी (Autoimmune) रोग है जिसमें शरीर के एंटीबॉडीज स्वयं थायरॉइड ग्रंथि को नष्ट कर देते हैं।
✓राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं विनियामक मानक (NIDDCP & FSSAI Standards):
• कार्यक्रम का इतिहास: भारत सरकार द्वारा 1962 में 'राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम' (NGCP) शुरू किया गया था, जिसे 1992 में व्यापक स्वरूप देते हुए **'राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम' (NIDDCP)** नाम दिया गया।
• आयोडनीकरण रसायन: साधारण नमक में आयोडीन का संवर्धन **'पोटेशियम आयोडेट' (KIO3)** के रूप में किया जाता है (क्योंकि यह ऊष्णकटिबंधीय नमी व ताप में पोटेशियम आयोडाइड की तुलना में रासायनिक रूप से अधिक स्थिर रहता है)।
• FSSAI के वैधानिक मानक:
- उत्पादन (फैक्ट्री) स्तर पर न्यूनतम आयोडीन: **30 PPM** (पार्ट्स प्रति मिलियन)।
- उपभोग (खुदरा/उपभोक्ता) स्तर पर न्यूनतम आयोडीन: **15 PPM**।
राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 एवं पारंपरिक वस्त्र उद्योग: "दाबू प्रिंट" (अकोला, चित्तौड़गढ़), सांगानेरी व बगरू छपाई, कोटा डोरिया — जीआई टैग (GI Tag), प्राकृतिक रंग व क्राफ्ट क्लस्टर
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को राजस्थान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग तथा राजस्थान हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा "राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022" के क्रियान्वयन और राज्य के पारंपरिक वस्त्र जीआई क्लस्टरों (सांगानेर, बगरू, अकोला चित्तौड़गढ़, कैथून कोटा) के आधुनिकीकरण की उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। राज्य सरकार द्वारा हस्तशिल्पियों को ₹3 लाख तक 100% ब्याज-मुक्त ऋण, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी अनुदान तथा पारंपरिक दाबू प्रिंटिंग व प्राकृतिक रंगाई पद्धतियों को संरक्षित करने हेतु आधुनिक सामान्य सुविधा केंद्रों (CFCs) की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 (Rajasthan Handicraft Policy 2022 - Exam Core):
• अधिसूचना तिथि: 17 सितंबर 2022 को राजस्थान एमएसएमई नीति 2022 के साथ जारी (राजस्थान की पहली स्वतंत्र हस्तशिल्प नीति)।
• नोडल विभाग: उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरकार।
• मुख्य प्रावधान:
- प्रतिवर्ष दिसंबर माह में जयपुर में राष्ट्रीय स्तर के 'राजस्थान हस्तशिल्प सप्ताह' (Handicrafts Week) का आयोजन।
- हस्तशिल्पियों को डिजिटल क्राफ्ट कार्ड जारी करना और ₹3 लाख तक के ऋण पर 100% ब्याज अनुदान।
- विलुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं के पुनरुद्धार हेतु ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता।
✓राजस्थान के प्रमुख पारंपरिक वस्त्र प्रिंट एवं दाबू कला (Repeated Questions in RSMSSB/RPSC):
• 1. दाबू प्रिंट (अकोला, चित्तौड़गढ़):
- बेड़च नदी के किनारे स्थित 'छीपों का अकोला' दाबू छपाई का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है।
- 'दाबू' का अर्थ: कपड़े के जिस भाग पर रंग नहीं चढ़ाना हो, उसे विशेष लेई/लुगदी से दबाकर सुरक्षित करना।
- **विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट दाबू (Most Confusing Exam Match)**:
- *मिट्टी का दाबू*: बालोतरा (बाड़मेर/बालोतरा)।
- *गोंद का दाबू*: चौहटन (बाड़मेर) और सवाई माधोपुर।
- *मोम का दाबू*: सवाई माधोपुर और जोधपुर।
- *गेंहू के बींधन (आटे) का दाबू*: बगरू व सांगानेर (जयपुर)।
• 2. सांगानेरी प्रिंट (सांगानेर, जयपुर - GI Tag 2010):
- सफेद या हल्के बादामी पृष्ठभूमि पर बारीक लाल, पीले व काले रंग के प्राकृतिक बेल-बूटे। नामदेवी छीपे इसके सिद्धहस्त कारीगर हैं।
• 3. बगरू प्रिंट (बगरू, जयपुर - GI Tag 2011):
- मटमैली (Off-White) पृष्ठभूमि पर मुख्य रूप से काले (स्याही) और लाल (बेगर) रंगों की लकड़ी के ठप्पों (Wooden Blocks) से छपाई। इसमें हरड़, फिटकरी, लोहे की जंग जैसे 100% प्राकृतिक वनस्पति रंगों का प्रयोग होता है।
• 4. अजरक व मलीर प्रिंट (बाड़मेर/बालोतरा):
- *अजरक प्रिंट*: लाल और नीले रंग का प्रधान प्रयोग, दोनों तरफ (Double-sided) ज्यामितीय छपाई, खत्री जाति के कारीगर।
- *मलीर प्रिंट*: कत्थई (Brown) और काले रंग की एकतरफा छपाई।
• 5. कोटा डोरिया (कैथून, कोटा - GI Tag 2005):
- 'मसूरिया साड़ी' के नाम से विख्यात। कोटा के राव किशोर सिंह द्वारा 17वीं सदी में मैसूर से उस्ताद मंसूर खान को कोटा लाकर इसे संरक्षण दिया गया था। चौकोर जालियों (Khats - 300 से अधिक खट) से युक्त महीन बुनाई।
✓राजस्थान के प्रमुख वस्त्र एवं शिल्प जीआई टैग (GI Tags in Rajasthan):
• कोटा डोरिया (2005), सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंट (2010), बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट (2011), पोकरण पॉटरी (2018), बीकानेरी भुजिया, थेवा कला (प्रतापगढ़), ब्लू पॉटरी (जयपुर), नाथद्वारा की पिछवाई कला (2023), कशीदाकारी शिल्प (बीकानेर - 2023), उस्ता कला (बीकानेर - 2023)।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• सूत्र: "दाबू अकोला चित्तौड़गढ़ (बेड़च नदी) | मिट्टी दाबू = बालोतरा | गोंद दाबू = चौहटन व सवाई माधोपुर | मोम दाबू = सवाई माधोपुर | बगरू = काला-लाल (स्याही-बेगर) | कोटा डोरिया = कैथून (राव किशोर सिंह)!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान के प्रमुख उद्योग एवं नीतियाँ नोट्स एवं राजस्थान पटवारी 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़।
खगोल विज्ञान, मध्यकालीन वैज्ञानिक विरासत एवं यूनेस्को धरोहर: सवाई जयसिंह द्वितीय की खगोलीय वेधशालाएं एवं "जंतर मंतर" (जयपुर) — यूनेस्को विश्व धरोहर (2010), विश्व की सबसे बड़ी धूपघड़ी "सम्राट यंत्र" (27 मीटर), 5 वेधशालाएं, जिज मुहम्मदशाही व राम यंत्र
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान तथा खगोल विज्ञान शोधकर्ताओं द्वारा जयपुर स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल "जंतर मंतर" (Jantar Mantar) में शीतकालीन अयनांत (Winter Solstice) पूर्व खगोलीय गणनाओं और प्राचीन पाषाण यंत्रों (Stone Instruments) की पाठ्यांक सटीकता की वार्षिक जांच कार्यशाला आयोजित की गई। आमेर/जयपुर के खगोलविद् महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 18वीं शताब्दी में निर्मित इस वैज्ञानिक स्मारक के सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र और राम यंत्र आज भी 2 सेकंड तक की सूक्ष्मता से स्थानीय समय और सौर-ग्रह स्थितियों की सटीक गणना करने में पूर्णतः सक्षम हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓सवाई जयसिंह द्वितीय (1688–1743 ई.) का खगोलीय योगदान (RPSC Core History):
• उपाधि: मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने इनकी बुद्धिमत्ता और प्रत्युत्पन्नमतित्व से प्रभावित होकर इन्हें 'सवाई' (एक से सवा गुना) की उपाधि दी थी।
• खगोलीय अध्ययन: उन्होंने हिंदू सिद्धांत ग्रंथों, टॉलेमी की अल्मागेस्ट (Almagest), उलूग बेग की खगोलीय सारणियों तथा यूरोपीय (पुर्तगाली व फ्रेंच) खगोल ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने जेवियर डी सिल्वा और फादर मैनुअल फिगुएरेडो जैसे यूरोपीय विद्वानों को जयपुर आमंत्रित किया था।
• प्रामाणिक खगोलीय रचनाएं:
- **'जिज मुहम्मदशाही' (1733 ई.)**: मुग़ल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला को समर्पित शुद्ध खगोलीय सारणियों (Astronomical Tables) का संग्रह।
- **'जयसिंह कारिका'**: संस्कृत भाषा में खगोलीय गणनाओं और यंत्रों के उपयोग पर रचित ग्रंथ।
- जगन्नाथ सम्राट द्वारा टॉलेमी के ग्रंथ का संस्कृत में 'सिद्धांत सम्राट' व यूक्लिड के ग्रंथ का 'रेखागणित' नाम से अनुवाद।
✓सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित 5 खगोलीय वेधशालाएं (Chronology & Location Trap):
• 1. **दिल्ली वेधशाला (1724 ई.)**: सबसे पहली (प्राचीनतम) निर्मित वेधशाला (कनॉट प्लेस के पास)।
• 2. **जयपुर वेधशाला (1728–1734 ई.)**: सबसे बड़ी, सबसे सुरक्षित और सर्वाधिक यंत्रों वाली वेधशाला।
• 3. **उज्जैन वेधशाला (मध्य प्रदेश)**: कर्क रेखा और प्राचीन भारतीय मानक समय (शून्य देशांतर) पर स्थित।
• 4. **मथुरा वेधशाला (उत्तर प्रदेश)**: कंस टीले पर निर्मित (वर्तमान में नष्टप्राय)।
• 5. **वाराणसी / बनारस वेधशाला (उत्तर प्रदेश)**: गंगा किनारे मान मंदिर घाट पर स्थित।
• *RPSC Exam Trap Alert*: सवाई जयसिंह ने आगरा, लखनऊ, लाहौर या अजमेर में कोई वेधशाला नहीं बनाई थी!
✓जयपुर जंतर मंतर के प्रमुख अद्वितीय पाषाण यंत्र (Key Astronomical Instruments):
• **बृहत् सम्राट यंत्र**: विश्व की सबसे बड़ी पाषाण धूपघड़ी (Sundial)। इसकी ऊंचाई 27 मीटर (90 फीट) है और इसका कोण जयपुर के अक्षांश (लगभग 27° उत्तर) के बराबर है। यह स्थानीय समय (Local Sun Time) 2 सेकंड की सटीकता तक मापता है।
• **जयप्रकाश यंत्र**: सवाई जयसिंह का सर्वाधिक मौलिक एवं जटिल आविष्कार। यह कटोरीनुमा (अर्धगोलाकार) अवतल यंत्र है, जिससे सूर्य और तारों की आकाशीय स्थिति (Coordinates) सीधे पढ़ी जा सकती है।
• **राम यंत्र**: बेलनाकार (Cylindrical) पाषाण यंत्र, जो खगोलीय पिंडों की ऊंचाई (Altitude) और दिगंश (Azimuth) मापने हेतु प्रयुक्त होता है।
• **नाड़ीवलय यंत्र**: उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में सूर्य के प्रवेश और विषुव (Equinox) का निर्धारण करने वाला दो-तरफा यंत्र।
• **दिगंश यंत्र**: ग्रहों व तारों का दिगंश कोण मापने का यंत्र।
✓यूनेस्को विश्व धरोहर मान्यता (UNESCO World Heritage):
• 31 जुलाई 2010 को ब्राजील (ब्रासीलिया) में आयोजित 34वें सत्र में यूनेस्को द्वारा जंतर मंतर, जयपुर को **विश्व धरोहर सूची (Cultural Heritage)** में शामिल किया गया था।
मौद्रिक नीति, केंद्रीय बैंकिंग एवं समष्टि अर्थशास्त्र: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति ढांचा एवं मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting) — MPC संरचना (6 सदस्य), रेपो रेट संचरण, तरलता प्रबंधन (SDF, MSF, CRR) व उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI 4% +/- 2%)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वित्तीय प्रणाली में चलनिधि (Liquidity Conditions) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति के नवीनतम रुझानों पर मौद्रिक समीक्षा बुलेटिन जारी किया गया। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सांविधिक अधिदेश (Statutory Mandate) के अनुरूप देश में मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य (+/- 2% सहनशीलता बैंड) के दायरे में बनाए रखते हुए टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने पर बल दिया गया। बैंकिंग प्रणाली में नकदी प्रवाह को संतुलित करने हेतु स्थायी जमा सुविधा (SDF) और तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के सक्रिय उपयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓मौद्रिक नीति समिति (MPC - Monetary Policy Committee) की सांविधिक संरचना (UPSC/RAS Core):
• वैधानिक आधार: भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (RBI Act, 1934) की धारा **45ZB** (2016 के वित्त अधिनियम द्वारा संशोधित एवं लागू)।
• कुल सदस्य: **6 सदस्य** होते हैं:
- 3 सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से: आरबीआई गवर्नर (पदेन अध्यक्ष), डिप्टी गवर्नर (मौद्रिक नीति प्रभारी), और एक केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित आरबीआई अधिकारी।
- 3 स्वतंत्र बाह्य सदस्य: केंद्र सरकार द्वारा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली खोज-सह-चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्त (कार्यकाल 4 वर्ष, पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं)।
• निर्णय प्रक्रिया: प्रत्येक सदस्य का एक मत होता है; बहुमत से निर्णय लिया जाता है। मत बराबर होने (Tie) की दशा में आरबीआई गवर्नर को **कास्टिंग वोट (निर्णायक मत)** देने का अधिकार होता है (धारा 45ZL)।
• बैठकें: वर्ष में कम से कम 4 बार बैठक आयोजित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
✓लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचा (Flexible Inflation Targeting - FIT):
• सांविधिक लक्ष्य: केंद्र सरकार द्वारा आरबीआई के परामर्श से प्रति 5 वर्ष में मुद्रास्फीति का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।
• वर्तमान लक्ष्य: 4% उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) — CPI (Combined) मुद्रास्फीति, जिसमें ऊपरी सीमा **6%** तथा निचली सीमा **2%** (+/- 2% बैंड) तय है।
• विफलता की परिभाषा: यदि मुद्रास्फीति लगातार 3 तिमाहियों (Three Consecutive Quarters) तक इस 2% से 6% के दायरे से बाहर रहती है, तो आरबीआई को केंद्र सरकार को विफलता के कारणों और सुधारात्मक कदमों पर लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है।
✓प्रमुख नीतिगत दरें एवं तरलता उपकरण (Monetary Policy Instruments):
• रेपो दर (Repo Rate): वह अल्पकालिक ब्याज दर जिस पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर आरबीआई से तात्कालिक तरलता उधार लेते हैं।
• स्थायी जमा सुविधा (SDF - Standing Deposit Facility): बिना किसी सरकारी प्रतिभूति को गिरवी रखे बैंकों से अतिरिक्त अधिशेष तरलता को आरबीआई में जमा करने की सुविधा (अप्रैल 2022 में LAF कॉरिडोर के निचले छोर के रूप में लागू)।
• सीमांत स्थायी सुविधा (MSF - Marginal Standing Facility): अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा एसएलआर कोटे की प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर एक रात (Overnight) हेतु आपातकालीन ऋण लेने की सुविधा।
• नकद आरक्षित अनुपात (CRR - Cash Reserve Ratio): बैंकों द्वारा अपनी शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) का वह निश्चित प्रतिशत जो अनिवार्य रूप से आरबीआई के पास नकद रूप में रखना होता है (इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता)।
• सांविधिक तरलता अनुपात (SLR - Statutory Liquidity Ratio): बैंकों द्वारा अपनी NDTL का वह अंश जो तरल संपत्तियों (स्वर्ण, अनुमोदित सरकारी प्रतिभूतियां, नकदी) के रूप में स्वयं के पास रखना होता है।
पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं वन्यजीव संरक्षण: "प्रोजेक्ट टाइगर" (1973) एवं राजस्थान के 5 बाघ अभयारण्य — रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी व धौलपुर-करौली, "टाइगर मैन ऑफ इंडिया" कैलाश सांखला, NTCA व बाघ संरक्षण नीति
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और राजस्थान वन विभाग द्वारा "राज्य बाघ संरक्षण कार्ययोजना 2026-2030" की प्रगति और पांचों बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) में बाघों की अंतर-रिज़र्व ट्रांसलोकेशन (Translocation) व गलियारा (Ecological Corridor) कनेक्टिविटी की समीक्षा रिपोर्ट जारी की गई। रणथंभौर से अतिरिक्त बाघों को मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी में पुनर्वासित करने तथा चंबल-कुनो-माधव कॉरिडोर के माध्यम से आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बढ़ाने पर सहमति बनी। राजस्थान में बाघों की संख्या 130+ के नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓प्रोजेक्ट टाइगर एवं वैधानिक ढांचा (Project Tiger & Statutory Framework):
• प्रारंभ: 1 अप्रैल 1973 को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (उत्तराखंड) से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में।
• वैधानिक संस्था: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA - National Tiger Conservation Authority) का गठन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) में 2006 के संशोधन द्वारा सांविधिक निकाय के रूप में किया गया।
• 'टाइगर मैन ऑफ इंडिया' (Tiger Man of India): राजस्थान के **कैलाश सांखला** (जोधपुर निवासी)।
- वे प्रोजेक्ट टाइगर के प्रथम निदेशक (1973) थे।
- 1992 में पद्मश्री से सम्मानित; उनकी विख्यात पुस्तकें: *'द टाइगर'* (The Tiger), *'टाइगर लैंड'* (Tigerland), तथा *'रिटर्न ऑफ द टाइगर'* (Return of the Tiger)।
✓राजस्थान के 5 बाघ अभयारण्य (Five Tiger Reserves of Rajasthan - Chronological Facts):
• 1. **रणथंभौर टाइगर रिजर्व (सवाई माधोपुर)**:
- प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल: **1973–74** (राजस्थान का प्रथम व देश के मूल 9 टाइगर रिजर्वों में से एक)।
- 1980 में राष्ट्रीय उद्यान (National Park) का दर्जा। 'बाघों का घर' व 'मछली' (T-16) बाघिन की विश्व प्रसिद्ध जन्मस्थली।
• 2. **सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर)**:
- प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल: **1978–79** (राजस्थान का दूसरा टाइगर रिजर्व)।
- हरे कबूतरों (Green Pigeons) व 'पांडुपोल' हनुमान मंदिर, भर्तृहरि धाम हेतु प्रसिद्ध। भारत में बाघों के पूर्णतः विलुप्त होने के बाद विश्व में सर्वप्रथम हेलीकॉप्टर द्वारा बाघों का सफल पुनर्वास (2008) यहीं किया गया था।
• 3. **मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा, झालावाड़, बूंदी, चित्तौड़गढ़)**:
- प्रोजेक्ट टाइगर में अधिसूचित: **9 अप्रैल 2013** (राजस्थान का तीसरा टाइगर रिजर्व)।
- दर्रा अभयारण्य, राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल व जवाहर सागर का संयुक्त क्षेत्र; विख्यात 'गागरोनी तोते' (हीरामन) व अबली मीणी का महल यहीं स्थित हैं।
• 4. **रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (बूंदी)**:
- प्रोजेक्ट टाइगर में अधिसूचित: **16 मई 2022** (राजस्थान का चौथा, भारत का **52वां** टाइगर रिजर्व)।
- यह रणथंभौर और मुकुंदरा हिल्स के बीच एक प्राकृतिक बफर/गलियारा (Corridor) प्रदान करता है। इसे 'बाघों का जच्चा घर' (Cradle of Tigers) कहा जाता है।
• 5. **धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (धौलपुर-करौली)**:
- प्रोजेक्ट टाइगर में अधिसूचित: **अगस्त 2023** (राजस्थान का पांचवां, भारत का **54वां** टाइगर रिजर्व)।
- चंबल बीहड़ एवं विंध्यन कगार पट्टी में स्थित सामरिक वन्यजीव आवास।
• *प्रस्तावित छठा रिज़र्व*: कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (राजसमंद-पाली-उदयपुर) को टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्धांतिक सहमति प्रक्रियाधीन है।
✓बाघ अभयारण्य का द्वि-स्तरीय संरचनात्मक वर्गीकरण (Core vs Buffer):
• वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38V के अनुसार प्रत्येक टाइगर रिजर्व दो भागों में विभाजित होता है:
1. **कोर या क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (Core Area)**: मानवीय हस्तक्षेप रहित अनुल्लंघनीय (Inviolate) क्षेत्र, जिसे वन्यजीव संरक्षण हेतु विशिष्ट रूप से आरक्षित रखा जाता है।
2. **बफर या परिधीय क्षेत्र (Buffer Area)**: कोर के चारों ओर स्थित कम प्रतिबंध वाला क्षेत्र, जहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आजीविका और पारिस्थितिकी-विकास गतिविधियों का सह-अस्तित्व होता है।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• सूत्र: "राजस्थान 5 टाइगर रिज़र्व क्रम: रणथंभौर (1973) ➔ सरिस्का (1978) ➔ मुकुंदरा (2013) ➔ रामगढ़ विषधारी (2022, 52वां) ➔ धौलपुर-करौली (2023, 54वां)! | कैलाश सांखला (जोधपुर) = टाइगर मैन ऑफ इंडिया!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: हम्मीर देव चौहान व रणथंभौर का इतिहास नोट्स एवं RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़।