मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026·7 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
20 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: 20 अक्टूबर राष्ट्रीय रक्षा एवं एकता विशेषांक — "राष्ट्रीय एकजुटता दिवस" (1962 भारत-चीन युद्ध की स्मृति), सीमा सड़क संगठन (BRO), वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP) व राजस्थान की 1,070 किमी रेडक्लिफ अंतरराष्ट्रीय सीमा (5 सीमावर्ती जिले); कृषि विज्ञान एवं तिलहन क्रांति — "राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय" (ICAR-DRMR, सेवर, भरतपुर) का 33वां स्थापना दिवस (20 अक्टूबर 1993), राजस्थान सरसों में देश में प्रथम स्थान (44%+ उत्पादन), गिरिराज किस्म व पीली क्रांति; डेटा गवर्नेंस एवं आर्थिक नियोजन — संयुक्त राष्ट्र "विश्व सांख्यिकी दिवस" (20 अक्टूबर) बनाम राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (29 जून - पी.सी. महालनोबिस), MoSPI, NSO, राजस्थान DES व WPI सूचकांक; हरित एवं अक्षय ऊर्जा — राजस्थान में पवन ऊर्जा क्षमता (5,200+ MW), "पंखों का शहर" जैसलमेर, अमर सागर (1999) व पवन-सौर हाइब्रिड मॉडल 2019; जल संसाधन एवं नदी जोड़ो क्रांति — संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल एवं ईआरसीपी (Modified PKC-ERCP) के तहत 21 जिलों की जल सुरक्षा, नवनेरा व ईसरदा बैराज (90:10 वित्तीय प्रारूप); खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष भौतिकी — "ओरियनिड्स उल्कापिंड बौछार" (20-21 अक्टूबर), हैली धूमकेतु (1P/Halley), राजस्थान का रामगढ़ क्रेटर (बारां) व उदयपुर सौर वेधशाला; तथा राजस्थान कला, संस्कृति एवं लोक आस्था विशेषांक (20 अक्टूबर विशेष) — लोकदेवता "पाबूजी महाराज", कोलू मंड (फलोदी), ऊंटों के देवता, लक्ष्मण अवतार, केसर कालमी घोड़ी, रावणहत्था पर फड़ वाचन व "पाबू प्रकाश" का संपूर्ण प्रामाणिक परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।
राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा इतिहास एवं सीमांत रणनीति (20 अक्टूबर विशेष): "राष्ट्रीय एकजुटता दिवस" — 1962 भारत-चीन युद्ध की स्मृति, सीमा सड़क संगठन (BRO), वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम व राजस्थान की 1,070 किमी रेडक्लिफ सीमा
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को देश भर में "राष्ट्रीय एकजुटता दिवस" (National Solidarity Day) के रूप में मनाया गया। 20 अक्टूबर 1962 को भारत पर चीनी आक्रमण के साथ 1962 का भारत-चीन युद्ध प्रारंभ हुआ था। देश की संप्रभुता की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के रणबांकुरों के सर्वोच्च बलिदान और सशस्त्र बलों के साथ देशवासियों की अटूट एकजुटता को सम्मानित करने हेतु 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा प्रतिवर्ष 20 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस घोषित किया गया था। इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय, सीमा सड़क संगठन (BRO) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा सामरिक अधोसंरचना, सीमांत गांवों के सशक्तिकरण और सुरक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राष्ट्रीय एकजुटता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं सामरिक तथ्य (UPSC/RPSC Core):
• 20 अक्टूबर 1962: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA - चीन) द्वारा लद्दाख (पश्चिमी सेक्टर) और नेफा (NEFA - नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी, वर्तमान अरुणाचल प्रदेश - पूर्वी सेक्टर) में एक साथ भीषण आक्रमण।
• 1966 में घोषणा: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा देश की अखंडता और रक्षा बलों के समर्थन में 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से 'राष्ट्रीय एकजुटता दिवस' के रूप में घोषित किया गया।
• रेजांग ला का अमर युद्ध (18 नवंबर 1962 - लद्दाख):
- 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 'चार्ली कंपनी' के कमांडर मेजर शैतान सिंह (मूल निवासी: बाणासुर, जोधपुर, राजस्थान) ने 17,000 फीट की बर्फीली ऊंचाई पर अपने 120 वीरों के साथ 1,300 से अधिक चीनी सैनिकों को ढेर किया।
- अदम्य शौर्य हेतु मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'परमवीर चक्र' (PVC) से अलंकृत किया गया।
✓सीमा सड़क संगठन (BRO) एवं आधुनिक सीमांत सामरिक अधोसंरचना:
• स्थापना: 7 मई 1960 (प्रथम अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू; ध्येय वाक्य: "श्रमेश सर्वं साध्यम्")।
• प्रमुख सामरिक सुरंगे व उपलब्धियां:
- सेला सुरंग (Sela Tunnel, अरुणाचल प्रदेश): 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी द्वि-लेन सुरंग (तवांग को हर मौसम में कनेक्टिविटी)।
- उमलिंग ला दर्रा (Umling La Pass, पूर्वी लद्दाख): 19,024 फीट की ऊंचाई पर विश्व की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क (गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड)।
- अटल टनल (रोहतांग, हिमाचल प्रदेश): 9.02 किमी लंबी, मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से वर्ष भर जोड़ने वाली रणनीतिक सुरंग।
✓वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP - Vibrant Villages Programme):
• शुभारंभ: केंद्रीय बजट 2022-23 में घोषित; गृह मंत्रालय द्वारा उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों के 2,967 गांवों के सर्वांगीण विकास हेतु ₹4,800 करोड़ की केंद्रीय योजना।
• उद्देश्य: सीमांत क्षेत्रों से होने वाले पलायन (Migration) को रोकना, स्थानीय आजीविका व पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय ग्रामीणों को राष्ट्र की 'प्रथम रक्षा पंक्ति' (First Line of Defence) बनाना।
✓राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा (रेडक्लिफ रेखा) एवं सुरक्षा तंत्र (RPSC Exam High-Yield):
• कुल सीमा लंबाई: 1,070 किमी (भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा का राजस्थान में हिस्सा)।
• 5 सीमावर्ती जिले (पुनर्गठन के बाद): श्रीगंगानगर (210 किमी), अनूपगढ़ (नया जिला), बीकानेर (168 किमी), जैसलमेर (464 किमी - सर्वाधिक), बाड़मेर (228 किमी)।
• सीमा सुरक्षा बल (BSF): 1 दिसंबर 1965 को स्थापित; पश्चिमी सीमा पर BSF द्वारा चलाए जाने वाले दो प्रमुख नियमित चौकसी अभियान:
1. "ऑपरेशन सर्द हवा" (शीतकाल में घने कोहरे व घुसपैठ की रोकथाम हेतु)।
2. "ऑपरेशन गर्म हवा" (भीषण ग्रीष्मकाल में लू व रेतीले अंधड़ के दौरान)।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• दिवस स्मरण ट्रिक: "20 अक्टूबर = 1962 का युद्ध, देश की राष्ट्रीय एकजुटता! 19 अक्टूबर = डॉ. चंद्रशेखर जयंती (1.44 सौर सीमा)!"
• मेजर शैतान सिंह ट्रिक: "जोधपुर के शैतान सिंह (13 कुमाऊं) = 1962 रेजांग ला में परमवीर चक्र अमर गाथा!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: भारत की आंतरिक एवं सीमा सुरक्षा विस्तृत नोट्स एवं RPSC RAS 2026 टेस्ट सीरीज़।
कृषि विज्ञान, तिलहन क्रांति एवं राष्ट्रीय स्थापना दिवस: "राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय" (ICAR-DRMR, सेवर, भरतपुर) स्थापना दिवस (20 अक्टूबर 1993) — राजस्थान का तिलहन में एकाधिकार (44%+ उत्पादन), गिरिराज किस्म व पीली क्रांति
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान "राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय" (DRMR - Directorate of Rapeseed-Mustard Research, सेवर, भरतपुर) का 33वां स्थापना दिवस गरिमामय रूप से मनाया गया। 20 अक्टूबर 1993 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा सेवर (भरतपुर) में 'राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र' (NRCM) की स्थापना की गई थी, जिसे फरवरी 2009 में प्रोन्नत कर राष्ट्रीय निदेशालय का दर्जा दिया गया। स्थापना दिवस समारोह में कृषि वैज्ञानिकों ने देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने हेतु जलवायु-सहिष्णु (Climate Resilient), पाला-प्रतिरोधी तथा उच्च तेल प्रतिशत वाली सरसों की उन्नत किस्मों के नवीन फील्ड ट्रायल आंकड़े जारी किए।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓ICAR-DRMR सेवर (भरतपुर) का विधिक एवं संस्थागत ढांचा (RPSC Most Repeated Question):
• स्थापना: 20 अक्टूबर 1993 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा स्थापना।
• मुख्यालय: सेवर (जिला भरतपुर, राजस्थान)।
• अधिदेश: भारत में रेपसीड-मस्टर्ड (तोरिया, राई, पीली सरसों, तारामीरा) पर बुनियादी, रणनीतिक और व्यावहारिक अनुसंधान का शीर्ष राष्ट्रीय केंद्र।
• अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP-RM): DRMR सेवर के अधीन देश भर के 22 से अधिक अनुसंधान केंद्रों के विशाल नेटवर्क का संचालन होता है।
✓राजस्थान का देश के सरसों उत्पादन में शीर्ष स्थान (Official Agriculture Data Verified):
• राष्ट्रीय उत्पादन में हिस्सा: देश के कुल सरसों उत्पादन का लगभग 40% से 44% उत्पादन अकेले राजस्थान में होता है (भारत में निर्विवाद प्रथम स्थान)।
• बुवाई क्षेत्रफल: राजस्थान में रबी मौसम में लगभग 38 से 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की जाती है।
• प्रमुख सरसों उत्पादक जिले: अलवर, भरतपुर (सरसों का कटोरा), श्रीगंगानगर, सवाई माधोपुर, करौली, जयपुर, टोंक और हनुमानगढ़।
• राजस्थान की अन्य तिलहन स्थिति: राजस्थान कुल तिलहन (Total Oilseeds) उत्पादन में भी देश में प्रथम स्थान (#1 Rank) पर है।
✓सरसों की प्रमुख उन्नत किस्में एवं वैज्ञानिक विशेषताएं (High-Yield Exam Focus):
• 'गिरिराज' (DRMRIJ-31): DRMR सेवर द्वारा विकसित सर्वाधिक लोकप्रिय किस्म; 40-42% तेल की मात्रा, सिंचित व बारानी दोनों क्षेत्रों हेतु उपयुक्त।
• 'NRCHB-101' एवं 'NRCDR-02': सेवर संस्थान द्वारा विकसित लवणता-सहिष्णु किस्में।
• 'पूसा जय किसान' (Bio-902): भारत की पहली सोमैटिक संकरण (Somatic Hybridization / बायोटेक्नोलॉजी) द्वारा विकसित सरसों किस्म (वैज्ञानिक प्रो. वी.एल. चोपड़ा के निर्देशन में)।
• 'आरएच-30' (RH-30) व 'आरएच-749': पाले (Frost) और अल्टरनेरिया ब्लाइट रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधी किस्में।
• 'कैनोला प्रकार की किस्में' (Canola Quality 00): इरूसिक एसिड (<2%) और ग्लूकोसिनोलेट्स (<30 μmol/g) की कम मात्रा वाली हृदय-अनुकूल किस्में।
✓पीली क्रांति (Yellow Revolution) एवं राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन:
• पीली क्रांति: भारत में 1986-87 में सैम पित्रोदा के नेतृत्व में तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन (TMO) के माध्यम से तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हेतु शुरू की गई।
• राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल पाम (NMEO-OP): खाद्य तेलों के भारी आयात बिल को कम करने हेतु ₹11,040 करोड़ की केंद्रीय योजना।
• सरसों तेल का आर्थिक महत्व: राजस्थान की मंडियों (जैसे भरतपुर, खैरथल, कोटा) में तिलहन व्यापार राज्य के ग्रामीण सकल मूल्य वर्धन (GVA) का मुख्य संबल है।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• स्थापना ट्रिक: "20 अक्टूबर 1993 = सेवर भरतपुर में सरसों अनुसंधान की नींव! 2009 में बना निदेशालय (DRMR)!"
• किस्म ट्रिक: "गिरिराज, पूसा जय किसान और NRCHB-101 = राजस्थान की सरसों, देश में 44% के साथ नंबर-1!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान की कृषि, प्रमुख फसलें एवं अनुसंधान संस्थान नोट्स एवं राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़।
डेटा गवर्नेंस, आर्थिक सांख्यिकी एवं योजना निर्माण: "विश्व सांख्यिकी दिवस" (World Statistics Day - 20 अक्टूबर) — MoSPI डेटा ढांचा, राष्ट्रीय बनाम विश्व दिवस विभेद, राजस्थान DES व WPI सूचकांक
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग (UN Statistical Commission) के तत्वावधान में वैश्विक स्तर पर "विश्व सांख्यिकी दिवस" (World Statistics Day) मनाया गया। प्रामाणिक डेटा, विश्वसनीय सांख्यिकी और वैज्ञानिक सर्वेक्षण किसी भी कल्याणकारी लोकतांत्रिक राष्ट्र में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based Policy Making), गरीबी उन्मूलन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की मॉनिटरिंग का आधार होते हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और राजस्थान आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (Directorate of Economics & Statistics - DES, जयपुर) द्वारा इस अवसर पर राज्य एवं राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली के आधुनिकीकरण की रिपोर्ट जारी की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓विश्व सांख्यिकी दिवस बनाम राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (Confusing Facts Resolved):
• विश्व सांख्यिकी दिवस (World Statistics Day):
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से मनाया जाता है (प्रति 5 वर्ष में एक बार विशेष समारोह, प्रथम बार 20 अक्टूबर 2010 को मनाया गया था)।
• राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (National Statistics Day - India):
- भारत में प्रतिवर्ष 29 जून को 'भारतीय सांख्यिकी के जनक' प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस (P.C. Mahalanobis) की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- महालनोबिस ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI, कोलकाता - 1931) की स्थापना की तथा भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61 - भारी उद्योग मॉडल) का खाका तैयार किया था।
✓भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली (MoSPI & NSO Framework):
• सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI):
- 23 मई 2019 को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) का विलय कर एकल 'राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय' (NSO) का गठन किया गया।
• राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC - National Statistical Commission): रंगराजन आयोग (2001) की सिफारिशों पर 2005 में स्थापित स्वायत्त नियामक संस्था।
• प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण एवं सूचकांक:
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS): देश में रोजगार और बेरोजगारी दर की तिमाही व वार्षिक माप।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI - संयुक्त): खुदरा मुद्रास्फीति मापने का सूचकांक (आधार वर्ष: 2012=100); RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 4% (+/-2%) का मुद्रास्फीति लक्ष्य इसी के आधार पर तय करती है।
- थोक मूल्य सूचकांक (WPI): उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी (आधार वर्ष: 2011-12=100)।
✓राजस्थान आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES, जयपुर) व राज्य सूचकांक (RPSC High-Yield):
• स्थापना एवं भूमिका: योजना विभाग के अधीन 1956 से कार्यरत; राज्य की वार्षिक 'आर्थिक समीक्षा' (Economic Review) और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करने वाली नोडल एजेंसी।
• राजस्थान थोक मूल्य सूचकांक (WPI - Rajasthan):
- आधार वर्ष: 1999-2000 = 100 (छात्र विशेष ध्यान दें: केंद्र का 2011-12 है, जबकि राजस्थान WPI का आधार वर्ष 1999-2000 है)।
- कुल वस्तुएं: 154 वस्तुएं (प्राथमिक वस्तु समूह: 75, विनिर्मित उत्पाद समूह: 69, ईंधन एवं शक्ति समूह: 10)।
• राजस्थान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW औद्योगिक श्रमिक):
- आधार वर्ष 2016=100; राजस्थान के 3 चयनित केंद्र: जयपुर, अलवर और भीलवाड़ा (पूर्व में अजमेर था, जिसे बदलकर अलवर किया गया)।
• राजस्थान जन आधार योजना: परिवार-आधारित एकल डेटाबेस और सांख्यिकीय पहचान, जिसे 18 दिसंबर 2019 को लागू किया गया।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• दिवस विभेद ट्रिक: "20 अक्टूबर = विश्व सांख्यिकी दिवस (UN); 29 जून = राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (महालनोबिस जयंती)!"
• राजस्थान आधार वर्ष ट्रिक: "राजस्थान WPI = 1999-2000 (154 वस्तुएं); भारत WPI = 2011-12!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान की अर्थव्यवस्था एवं सांख्यिकी सूचकांक नोट्स एवं CET स्नातक स्तर टेस्ट सीरीज़।
हरित ऊर्जा एवं पवन-सौर हाइब्रिड मॉडल: राजस्थान में पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता (5,200+ MW) — "पंखों का शहर" जैसलमेर, अमर सागर (1999), हाइब्रिड नीति व ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) द्वारा राज्य के पवन ऊर्जा और सौर-पवन हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स की तिमाही प्रगति समीक्षा जारी की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राजस्थान की संचयी पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 5,200 मेगावाट (5.2 GW) के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर गई है। सौर ऊर्जा में 36 GW के साथ देश में शीर्ष पर काबिज राजस्थान अब अपने पश्चिमी मरुस्थलीय भूभाग में दिन के समय सौर ऊर्जा और शाम-रात के समय तीव्र पवन झोंकों से निर्बाध बिजली उत्पादन करने वाले "हाइब्रिड ऊर्जा मॉडल" में भी राष्ट्रीय रोल मॉडल बनकर उभरा है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान में पवन ऊर्जा का इतिहास एवं मील के पत्थर (RPSC Geography Core):
• राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र: 10 अप्रैल 1999 को जैसलमेर जिले के 'अमर सागर' में 2 मेगावाट क्षमता के साथ स्थापित किया गया था।
• राज्य का दूसरा पवन ऊर्जा संयंत्र: देवगढ़ (जिला प्रतापगढ़, पूर्व में चित्तौड़गढ़)।
• राज्य का तीसरा पवन ऊर्जा संयंत्र: बड़ाबाग (जैसलमेर)।
• भौगोलिक उपनाम: जैसलमेर को राजस्थान में "पंखों का शहर" (City of Windmills) अथवा "विंड सिटी" कहा जाता है।
• अन्य प्रमुख पवन ऊर्जा क्षेत्र: सोडा-बंधन (जैसलमेर), आकल (जैसलमेर), फलोदी, तथा हर्ष पर्वत (सीकर)।
✓राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम (RRECL) एवं संस्थागत विकास:
• गठन: अगस्त 2002 में कंपनी अधिनियम 1956 के तहत निगमित।
• विलय इतिहास (RPSC Favorite):
1. राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA - Rajasthan Energy Development Agency, स्थापित जनवरी 1985)।
2. राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSPCL, स्थापित 1995)।
- इन दोनों संस्थाओं का विलय कर RRECL बनाया गया, जो राज्य में गैर-पारंपरिक ऊर्जा का शीर्ष निकाय है।
✓राजस्थान पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा नीति 2019:
• अधिसूचना: 18 दिसंबर 2019 को लागू।
• हाइब्रिड मॉडल का महत्व:
- सौर ऊर्जा केवल दिन के समय (चमकीले धूप वाले घंटों में) उत्पादित होती है।
- पश्चिमी राजस्थान में मई-जून और मानसून के समय तेज हवाएं और रात के समय निरंतर वायु प्रवाह रहता है।
- एक ही भूमि और ट्रांसमिशन लाइन पर सोलर पैनल और पवन चक्कियां (Wind Turbines) लगाकर 24x7 स्थिर हरित विद्युत ग्रिड को आपूर्ति की जाती है।
✓ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) एवं ट्रांसमिशन अधोसंरचना:
• पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में उत्पादित स्वच्छ ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने हेतु पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) द्वारा 765 kV और 400 kV की अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई गई हैं।
• पर्यावरण संरक्षण (गोडावण सुरक्षा): राष्ट्रीय मरु उद्यान के समीप ट्रांसमिशन लाइनों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशानुसार 'बर्ड डायवर्टर्स' (Bird Diverters) लगाए गए हैं ताकि राज्य पक्षी गोडावण सुरक्षित रह सके।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• पवन ऊर्जा प्रथम स्थल ट्रिक: "10 अप्रैल 1999 = अमर सागर जैसलमेर (पहला पवन संयंत्र)! जैसलमेर = पंखों की नगरी!"
• RRECL गठन ट्रिक: "REDA (1985) + RSPCL (1995) = 2002 में RRECL बना!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान के ऊर्जा संसाधन, सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा नोट्स एवं राजस्थान CET 12th लेवल टेस्ट सीरीज़।
जल संसाधन, अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना एवं सिंचाई क्रांति: संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल एवं ईआरसीपी लिंक (Modified PKC-ERCP) — 21 जिलों की जल सुरक्षा, नवनेरा व ईसरदा बैराज (90:10 वित्तीय प्रारूप)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान जल संसाधन विभाग और राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) की उच्चस्तरीय संयुक्त संचालन समिति (Joint Steering Committee) की बैठक में संशोधित "पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी" (Modified PKC-ERCP) लिंक परियोजना के निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की समीक्षा की गई। त्रिपक्षीय अंतर-राज्यीय समझौते के तहत केंद्र सरकार द्वारा इस राष्ट्रीय प्राथमिकता परियोजना हेतु 90% केंद्रीय वित्तीय सहायता (90:10 Funding Ratio) प्रदान की जा रही है। कोटा के नवनेरा बैराज और सवाई माधोपुर-दौसा सीमा पर ईसरदा बांध के फीडर नेटवर्क को तीव्र गति से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पूर्वी और मध्य राजस्थान के 21 जिलों में पेयजल और 2.8 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓परियोजना का विधिक एवं ऐतिहासिक ढांचा (National & State Core):
• त्रिपक्षीय ऐतिहासिक समझौता: 28 जनवरी 2024 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के बीच संशोधित PKC-ERCP लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
• राष्ट्रीय नदी जोड़ो परिप्रेक्ष्य (NPP 1980): राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) द्वारा देश भर में चिन्हित 30 अंतर-राज्यीय संपर्कों में से यह केन-बेतवा लिंक के बाद देश की दूसरी सर्वोच्च प्राथमिकता वाली लिंक परियोजना (Second Priority National Link) है।
• 90:10 का वित्तीय ढांचा: परियोजना की कुल लागत का 90% वहन केंद्र सरकार द्वारा और मात्र 10% वहन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाएगा।
✓21 लाभार्थी जिले (Revised Post-Reorganization District Coverage):
• हाड़ौती संभाग: झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी।
• पूर्वी एवं ब्रज क्षेत्र: सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, गंगापुर सिटी।
• ढूंढाड़ एवं जयपुर संभाग: जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़।
• मध्य राजस्थान / अजमेर संभाग: अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक।
✓प्रमुख बैराज, बांध एवं अधोसंरचनात्मक घटक (RPSC Favorite Questions):
• नवनेरा बैराज (Navnera Barrage): कोटा जिले की दीगोद तहसील के नवनेरा गांव में कालीसिंध नदी पर निर्मित मुख्य जल संचयन संरचना (कुल जल भंडारण क्षमता: 226.65 मिलियन क्यूबिक मीटर - MCM)।
• ईसरदा बांध (Isarda Dam): बनास नदी पर सवाई माधोपुर और दौसा जिले की सीमा पर निर्माणाधीन; मुख्य रूप से जयपुर, दौसा और सवाई माधोपुर को गंभीर पेयजल संकट से मुक्ति दिलाएगा।
• अन्य घटक: पार्वती नदी पर महलपुर बैराज, कुल नदी पर रामगढ़ बैराज, मेज नदी और चाकन नदी पर डायवर्जन फीडर चैनल तथा कालीसिंध-मेज-बनास लिंक कैनाल।
✓आर्थिक एवं कृषि प्रभाव (Socio-Economic Benefits):
• भूजल पुनर्भरण: वर्षों से डार्क जोन (Dark Zone / Over-exploited) में आ चुके पूर्वी राजस्थान के कुओं और बोरवेल का भूजल स्तर ऊपर उठेगा।
• चंबल बेसिन का अधिशेष जल प्रबंधन: वर्षा ऋतु में चंबल और उसकी सहायक नदियों (कालीसिंध, पार्वती) में आने वाले अतिरिक्त बाढ़ के पानी को संग्रहित कर जल-कमी वाले बनास, बाणगंगा और रूपारेल बेसिन में मोड़ा जाएगा।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• अनुपात व जिले ट्रिक: "PKC-ERCP = 21 जिले, 90:10 केंद्र-राज्य अनुपात (राष्ट्रीय परियोजना)!"
• बैराज ट्रिक: "नवनेरा = कालीसिंध नदी (कोटा), ईसरदा = बनास नदी (सवाई माधोपुर/दौसा सीमा)!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान की नदियां, झीलें एवं सिंचाई परियोजनाएं नोट्स एवं RPSC RAS 2026 टेस्ट सीरीज़।
खगोल भौतिकी एवं अंतरिक्ष विज्ञान: "ओरियनिड्स उल्कापिंड बौछार (Orionids Meteor Shower)" चरम पर (20-21 अक्टूबर) — हैली धूमकेतु (Halley's Comet 1P), उल्कापिंड उत्पत्ति, रामगढ़ क्रेटर (बारां) व वेधशालाएं
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 और 21 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को खगोल विज्ञान की दुर्लभ एवं मनोहारी आकाशीय घटना "ओरियनिड्स उल्कापिंड बौछार" (Orionids Meteor Shower) अपने चरम शिखर (Peak Activity) पर पहुंच रही है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA, बेंगलुरु), उदयपुर सौर वेधशाला (USO) तथा माउंट आबू (गुरुशिखर) स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की अवरक्त वेधशाला सहित देश भर की प्रमुख वेधशालाओं ने छात्रों और शोधार्थियों हेतु इसके लाइव अवलोकन सत्र आयोजित किए हैं। यह वार्षिक उल्का बौछार विख्यात "हैली के धूमकेतु" (Halley's Comet - 1P/Halley) द्वारा अपने सौर परिक्रमा पथ में छोड़े गए धूल कणों और मलबे के पृथ्वी के वायुमंडल में तीव्र गति से प्रवेश के कारण घटित होती है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓ओरियनिड्स उल्का बौछार का वैज्ञानिक आधार (UPSC / RPSC Science Core):
• मातृ पिंड (Parent Body): हैली का धूमकेतु (Halley's Comet - 1P/Halley); यह आवर्ती धूमकेतु प्रति 75 से 76 वर्ष में एक बार सूर्य की परिक्रमा करता है (पिछली बार 1986 में दिखाई दिया था, अब अगली बार वर्ष 2061 में पृथ्वी के निकट से गुजरेगा)।
• विकिरण केंद्र (Radiant Point): यह उल्कापात आकाश में ओरियन (मृगशीर्ष) तारामंडल के चमकीले तारे बेटेलगेउज़ (Betelgeuse) के समीप से आता हुआ प्रतीत होता है, इसलिए इसे 'ओरियनिड्स' कहा जाता है।
• प्रचंड गति: ये उल्कापिंड लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड (लगभग 2,37,600 किमी प्रति घंटा) की अत्यधिक तीव्र गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं।
• वायुमंडलीय चमक: पृथ्वी के मध्यमंडल (Mesosphere) में वायुमंडलीय गैसों के साथ अत्यधिक घर्षण (Friction) और संपीडन के कारण ये कण अत्यधिक गर्म होकर प्रदीप्त हो उठते हैं और प्रकाश की चमकीली लकीर बनाते हैं, जिसे आम बोलचाल में 'टूटता तारा' (Shooting Star) कहा जाता है।
✓उल्काभ, उल्का और उल्कापिंड में वैज्ञानिक विभेद (Conceptual Clarity for Exams):
• उल्काभ (Meteoroid): अंतरिक्ष में स्वतंत्र तैरता हुआ चट्टान, धातु या धूल का छोटा टुकड़ा।
• उल्का (Meteor): जब उल्काभ पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर घर्षण से जलकर रोशनी उत्पन्न करता है (टूटता तारा)।
• उल्कापिंड / उल्काश्म (Meteorite): जब कोई बड़ा उल्कापिंड वायुमंडल में पूरी तरह जले बिना धरातल (पृथ्वी की सतह) से टकरा जाता है।
✓भारत व राजस्थान के प्रसिद्ध क्रेटर (Meteorite Impact Craters - High-Yield):
• रामगढ़ क्रेटर (Ramgarh Crater, जिला बारां, राजस्थान):
- लगभग 165 मिलियन वर्ष पूर्व (जुरासिक काल) एक विशाल उल्कापिंड के टकराने से निर्मित 3.2 किमी व्यास वाला क्रेटर।
- भारत का पहला और विश्व का 200वां अधिसूचित भू-विरासत स्थल (Geo-Heritage Site); क्रेटर के मध्य में 10वीं सदी का ऐतिहासिक 'भंडदेवरा शिव मंदिर' (हाड़ौती का खजुराहो) स्थित है।
• लोनार झील (Lonar Lake, बुलढाणा, महाराष्ट्र): बेसाल्टिक चट्टानों में उल्कापिंड प्रभाव से निर्मित खारे पानी की विश्व प्रसिद्ध क्रेटर झील (रामसर आर्द्रभूमि स्थल)।
• ढाला क्रेटर (Dhala Crater, शिवपुरी, मध्य प्रदेश): एशिया का सबसे बड़ा और प्राचीनतम उल्कापिंड इम्पैक्ट क्रेटर।
✓राजस्थान की प्रमुख खगोलीय एवं अंतरिक्ष वेधशालाएं:
• उदयपुर सौर वेधशाला (USO): फतहसागर झील के टापू पर स्थापित, एशिया की सर्वश्रेष्ठ सौर वेधशाला (इसरो के आदित्य-एल1 डेटा का ग्राउंड वैलिडेशन)।
• माउंट आबू इन्फ्रारेड वेधशाला (गुरुशिखर, सिरोही): 1.2 मीटर और 2.5 मीटर ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड दूरबीन, PRL अहमदाबाद द्वारा संचालित।
• जंतर मंतर (जयपुर): सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 1734 में निर्मित, विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्यघड़ी (सम्राट यंत्र) युक्त यूनेस्को विश्व धरोहर (2010)।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• ओरियनिड्स ट्रिक: "20-21 अक्टूबर = ओरियनिड्स उल्कापात (हैली धूमकेतु का मलबा, 66 किमी/सेकंड गति)!"
• रामगढ़ बारां ट्रिक: "रामगढ़ क्रेटर (बारां) = उल्कापिंड की देन, मध्य में भंडदेवरा (हाड़ौती का खजुराहो)!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: भारत की अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी विस्तृत नोट्स एवं RPSC RAS 2026 टेस्ट सीरीज़।
राजस्थान कला, संस्कृति, लोक आस्था एवं पंचपीर विशेषांक (20 अक्टूबर विशेष): लोकदेवता "पाबूजी महाराज" — ऊंटों के देवता, लक्ष्मण अवतार, कोलू मंड (फलोदी), रावणहत्था पर लोकप्रिय फड़ व पाबू प्रकाश
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
20 अक्टूबर 2026 को पश्चिमी राजस्थान के फलोदी जिले के ऐतिहासिक तीर्थ स्थल 'कोलू मंड' (Kolu Mand) में राजस्थान के जन-जन के आराध्य लोकदेवता और पंचपीरों में प्रथम पूज्य "पाबूजी महाराज" के धाम पर विशेष लोक आराधना एवं रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर रायका/रेबारी और देवासी समाज के लोग कोलू धाम पहुंचे। राजस्थान देवस्थान विभाग और पर्यटन विभाग द्वारा इस अवसर पर पाबूजी की विश्व प्रसिद्ध फड़ चित्रकला, पारंपरिक रावणहत्था वादन तथा कोलू मंड में पैनोरमा और हेरिटेज सुविधाओं के उन्नयन कार्यों की समीक्षा की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓पाबूजी महाराज का जीवन परिचय एवं वंशावली (RPSC Art & Culture Core):
• जन्म: 13वीं शताब्दी (वि.सं. 1313 / 1239 ई.) में कोलू मंड (वर्तमान जिला फलोदी, पूर्व में जोधपुर) में।
• पिता: धांधल जी राठौड़ (मारवाड़ के राव सीहा के वंशज); माता: कमला दे।
• अवतार मान्यता: पाबूजी को भगवान श्रीराम के अनुज 'लक्ष्मण जी का अवतार' माना जाता है।
• विवाह: अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के सोढ़ा राणा सूरजमल की पुत्री फूलमदे (सुप्यार दे) के साथ।
• प्रसिद्ध घोड़ी: 'केसर कालमी' (चारण महिला देवल चारणी द्वारा पाबूजी को भेंट की गई विशिष्ट काली घोड़ी)।
• सर्वोच्च बलिदान (1276 ई. / देचू गांव):
- देवल चारणी की गायों को जींदराव खींची (जायल, नागौर के शासक व पाबूजी के बहनोई) द्वारा घेरे जाने पर, पाबूजी विवाह मंडप से साढ़े तीन फेरे लेकर ही उठ खड़े हुए।
- देचू गांव (फलोदी) में जींदराव खींची से भीषण युद्ध करते हुए गायों की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हुए।
✓पाबूजी के उपनाम एवं लोक मान्यताएं (Exam High-Yield):
• 1. ऊंटों के देवता: राजस्थान में सर्वप्रथम ऊंट (सांड़) लाने का श्रेय पाबूजी को दिया जाता है।
- ऊंट के बीमार होने पर ग्रामीण पाबूजी की मनौती मांगते हैं।
• 2. प्लेग रक्षक देवता और हाड़-फाड़ के देवता।
• 3. गौ-रक्षक देवता एवं वचनों के पक्के (शरणागत वत्सल)।
• 4. थोरी समाज के उद्धारक: पाबूजी ने गुजरात के शासक अन्ना बघेला से सात थोरी भाइयों (चांदा, डेमा, हरमल आदि) को शरण देकर अपना परम सहयोगी व अंगरक्षक बनाया।
• प्रधान उपासक: रायका / रेबारी / देवासी समाज पाबूजी को अपना कुलदेवता / आराध्य देव मानता है।
✓पाबूजी की फड़ एवं लोक गायन परंपरा (Most Repeated Questions in RPSC/RSSB):
• राजस्थान की सबसे लोकप्रिय फड़: पाबूजी की फड़ राजस्थान की सभी लोक फड़ों में सर्वाधिक लोकप्रिय है।
• फड़ वाचन: नायक / भील जाति के भोपों द्वारा रात्रि में 'रावणहत्था' (तत्व वाद्य) वाद्ययंत्र के साथ बांची जाती है।
• पाबूजी के पवाड़े (वीरगाथा गीत): 'माठ' (अवनद्ध / मिट्टी के बर्तन से बना ताल वाद्य) वाद्ययंत्र के साथ गाए जाते हैं।
• पाबूजी का प्रतीक चिन्ह: भाला लिए हुए अश्वारोही (बाईं ओर झुकी हुई विशिष्ट पाग/पगड़ी)।
• प्रामाणिक ऐतिहासिक ग्रंथ:
- 'पाबू प्रकाश': प्रसिद्ध कवि आशिया मोड़जी द्वारा रचित विख्यात ग्रंथ।
- 'पाबूजी रा दोहा': कवि लघराज द्वारा रचित।
- 'पाबूजी रा रूपक': मोतीसर बख्तावर द्वारा रचित।
✓राजस्थान के पंचपीर (Panch Pir of Rajasthan - Memory Hook):
• राजस्थान में पांच लोकदेवताओं को हिंदू और मुस्लिम दोनों समान श्रद्धा से पूजते हैं जिन्हें 'पंचपीर' कहा जाता है:
1. पाबूजी महाराज
2. हड़बूजी सांखला
3. रामदेव जी तंवर
4. मेहाजी मांगलिया
5. गोगाजी चौहान
• ध्यान रहे: लोकदेवता तेजाजी, देवनारायण जी और मल्लीनाथ जी पंचपीरों में शामिल नहीं हैं (RPSC का सर्वाधिक भ्रामक प्रश्न)।
✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook):
• पंचपीर सूत्र: "गोरा पाहा में = गोगाजी, रामदेवजी, पाबूजी, हड़बूजी, मेहाजी!" (तेजाजी पंचपीर नहीं हैं!)
• पाबूजी ट्रिक: "कोलू मंड (फलोदी) में जन्मे लक्ष्मण अवतार, केसर कालमी घोड़ी, रावणहत्था पर फड़, पाबू प्रकाश = आशिया मोड़जी!"
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान के लोकदेवता एवं लोकदेवियां संपूर्ण मास्टर गाइड नोट्स एवं राजस्थान CET 12th लेवल टेस्ट सीरीज़।