मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026·7 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
13 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: 13 अक्टूबर "अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस" (International Day for Disaster Risk Reduction) — सेंडाई फ्रेमवर्क 2015-2030, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, NDMA, राजस्थान SDMA व "आपदा मित्र" पहल; भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना प्लेटफॉर्म "पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान" (PM GatiShakti National Master Plan) के 5 वर्ष पूर्ण (13 अक्टूबर 2021 शुभारंभ), 7 इंजन, यूलिप (ULIP) व पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) का राजस्थान में 566 किमी नेटवर्क; अर्थशास्त्र का नोबेल मेमोरियल पुरस्कार (Sveriges Riksbank Prize) — संस्थागत अर्थशास्त्र, आर्थिक संवृद्धि पर संस्थानों का प्रभाव, प्रो. अमर्त्य सेन व अभिजीत बनर्जी का योगदान; राजस्थान ऊर्जा परिदृश्य के तहत 24+ GW सौर क्षमता के साथ राजस्थान देश में अव्वल, PM-KUSUM घटक-ए में प्रथम स्थान, भड़ला सोलर पार्क (2,245 MW) व ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC); राजस्थान कला, संस्कृति एवं यूनेस्को धरोहर — वर्ष 2013 में शामिल 6 पहाड़ी दुर्ग (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, गागरौन, जैसलमेर, आमेर, रणथंभौर), विजय स्तंभ, 36 किमी कुंभलगढ़ परकोटा व मारवाड़-पुष्कर महोत्सव तैयारियां; रक्षा एवं सुरक्षा रणनीति — सेना की एकीकृत त्रि-सेवा थिएटर कमान (Theatre Commands) रोडमैप, महाजन व पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज रणनीतिक अभ्यास व स्वदेशी पिनाका रॉकेट प्रणाली; तथा खेल जगत में 38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (उत्तराखंड) की तैयारियां, राष्ट्रीय खेल इतिहास (1924 लाहौर), भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) व राजस्थान के गौरवशाली पदक विजेताओं का संपूर्ण परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।
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पर्यावरण, आपदा प्रबंधन एवं वैश्विक सम्मेलन: "अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस" (13 अक्टूबर 2026) — सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030), आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, NDMA, राजस्थान SDMA व "आपदा मित्र"
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
प्रतिवर्ष 13 अक्टूबर को विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा "अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस" (International Day for Disaster Risk Reduction - IDDRR) मनाया जाता है। 13 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) और भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जलवायु परिवर्तन जनित चरम मौसमी घटनाओं, बाढ़, भूस्खलन और भूकंप से निपटने हेतु पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) के विस्तार की राष्ट्रीय कार्ययोजना जारी की गई। साथ ही राजस्थान राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA, जयपुर) द्वारा राज्य के 50 जिलों में 10,000 नए प्रशिक्षित "आपदा मित्रों" की तैनाती की समीक्षा की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस एवं सेंडाई फ्रेमवर्क (UPSC/RAS Core):
• इतिहास एवं शुरुआत: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 1989 में प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण को बढ़ावा देने हेतु इस दिवस की शुरुआत की गई।
• 2026 का वैश्विक विज़न: "आपदा-सहिष्णु भविष्य हेतु प्रारंभिक चेतावनी एवं सशक्त समुदाय" (Early Warning and Resilient Communities for a Safer Tomorrow)।
• सेंडाई फ्रेमवर्क 2015–2030 (Sendai Framework):
- जापान के सेंडाई (मियागी प्रांत) में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन (मार्च 2015) में अंगीकृत; यह ह्योगो फ्रेमवर्क (Hyogo Framework for Action 2005-2015) का स्थान लेता है।
- 4 प्राथमिकताएं (4 Priorities): 1. आपदा जोखिम को समझना, 2. आपदा जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करना, 3. आपदा सहिष्णुता में निवेश, 4. 'बेहतर पुनर्निर्माण' (Build Back Better) हेतु आपदा पूर्व तैयारी।
- 7 वैश्विक लक्ष्य (Sendai Seven Targets): आपदा से होने वाली वैश्विक मृत्यु दर, प्रभावित जनसंख्या और प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान में 2030 तक उल्लेखनीय कमी लाना।
✓भारत में आपदा प्रबंधन का विधिक एवं संस्थागत ढांचा (High-Yield Facts):
• आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act - DMA, 2005):
- 26 दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद 23 दिसंबर 2005 को पारित।
- धारा 3: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन; अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री (अधिकतम 9 सदस्य)।
- धारा 8: राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC); अध्यक्ष: केंद्रीय गृह सचिव।
- धारा 14: राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA); अध्यक्ष: संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री।
- धारा 25: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA); अध्यक्ष: जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट (सह-अध्यक्ष: जिला परिषद अध्यक्ष)।
• राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF):
- DMA 2005 की धारा 44 के तहत स्थापित एक विशेष बहु-कुशल बल; मुख्यालय: नई दिल्ली; आदर्श वाक्य: 'आपदा सेवा सदैव सर्वत्र'।
✓राजस्थान में आपदा प्रबंधन अवसंरचना एवं कल्याणकारी योजनाएं:
• राजस्थान राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA, जयपुर): अध्यक्ष: मुख्यमंत्री; उपाध्यक्ष: आपदा प्रबंधन एवं सहायता मंत्री।
• राज्य आपदा मोचन बल (SDRF Rajasthan): वर्ष 2013 में गठित; मुख्यालय: जयपुर; प्रदेश के बाढ़, चक्रवात (जैसे बिपरजॉय) और रासायनिक दुर्घटनाओं में त्वरित बचाव अभियान संचालित करता है।
• "आपदा मित्र" योजना (Aapda Mitra Scheme): केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संपोषित; प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय के स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव, प्राथमिक चिकित्सा और संचार का तकनीकी प्रशिक्षण।
• सचेत (SACHET) राष्ट्रीय पोर्टल: सी-डॉट (C-DOT) और NDMA द्वारा विकसित कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP), जो सीधे मोबाइल टॉवरों के जरिए आपदा क्षेत्र के नागरिकों को आपातकालीन एसएमएस चेतावनी प्रेषित करता है।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [राजस्थान भूगोल एवं आपदा प्रबंधन नोट्स](/notes/rajasthan-geography-environment-disaster-management) एवं [RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़](/test-series/rpsc-ras-prelims-2026)।
राष्ट्रीय अवसंरचना एवं आर्थिक नियोजन: "पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान" (13 अक्टूबर 2021 शुभारंभ) के 5 वर्ष — 7 इंजन, यूलिप (ULIP), पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) व राजस्थान में लॉजिस्टिक्स पार्क
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार के बुनियादी ढांचा कायाकल्प के ऐतिहासिक मंच "पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान" (PM GatiShakti National Master Plan) के सफल संचालन के 5 वर्ष पूरे हुए (शुभारंभ: 13 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री द्वारा नई दिल्ली में)। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी 5-वर्षीय समीक्षा के अनुसार, 1,400 से अधिक जीआईएस डेटा परतों (Data Layers) और 44 केंद्रीय मंत्रालयों के समन्वय से अवसंरचना परियोजनाओं की मंजूरी समय में 60% की कमी दर्ज की गई है। साथ ही पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) के 566 किमी राजस्थान खंड के पूर्ण दोहरीकरण से दिल्ली-मुंबई माल ढुलाई का समय 36 घंटे से घटकर मात्र 14 घंटे रह गया है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के प्रमुख आधार स्तंभ (UPSC/RAS Core):
• शुभारंभ: 13 अक्टूबर 2021 को; कुल बजट परिकल्पना: ₹100 लाख करोड़।
• उद्देश्य: विभिन्न मंत्रालयों (सड़क, रेल, बंदरगाह, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम, बिजली आदि) के बीच 'साइलो' (विभागीय अलगाव) को समाप्त करना और एकीकृत योजना बनाना।
• 7 प्रमुख इंजन (Seven Engines): 1. सड़कें (Roads), 2. रेलवे (Railways), 3. हवाई अड्डे (Airports), 4. बंदरगाह (Ports), 5. सार्वजनिक परिवहन (Mass Transport), 6. जलमार्ग (Waterways), 7. लॉजिस्टिक्स अवसंरचना (Logistics Infrastructure)।
• तकनीकी विकासकर्ता: भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N, गांधीनगर, गुजरात) द्वारा स्वदेशी उपग्रह इमेजरी आधारित विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म।
• नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG): सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी व लॉजिस्टिक परीक्षण करने वाली सर्वोच्च समिति।
✓राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy - NLP 2022):
• शुभारंभ: 17 सितंबर 2022 को; लक्ष्य: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 14% से घटाकर वैश्विक मानकों के अनुरूप 8-9% तक लाना।
• यूलिप (ULIP - Unified Logistics Interface Platform): 7 मंत्रालयों के 34 डिजिटल सिस्टमों और 100+ एपीआई को एकीकृत कर माल ढुलाई का पारदर्शी डिजिटल ट्रैकिंग समाधान।
• ई-लॉग्स (e-Logs): उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स संबंधी शिकायतों और बाधाओं के त्वरित निवारण हेतु डिजिटल पोर्टल।
✓राजस्थान में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एवं WDFC का प्रभाव (Exam Favorite Facts):
• पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC): कुल लंबाई 1,504 किमी (दादरी, उप्र से जेएनपीटी मुंबई); इसका 37% से अधिक भाग (लगभग 566 किमी) राजस्थान से गुजरता है।
• राजस्थान के प्रमुख मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP):
- फुलेरा (जयपुर ग्रामीण): सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन व गति शक्ति कार्गो टर्मिनल।
- भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा): ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक हब हेतु इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD)।
- मारवाड़ जंक्शन (पाली) व किशनगढ़ (अजमेर): संगमरमर व ग्रेनाइट निर्यात हेतु आधुनिक कंटेनर डिपो।
• दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC): WDFC के समानांतर 150 किमी प्रभाव क्षेत्र; राजस्थान का 58% क्षेत्रफल प्रभावित; खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना (KBNIR) प्रथम निवेश नोड।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [राजस्थान अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक समीक्षा नोट्स](/notes/rajasthan-economy-economic-survey-notes) एवं [राजस्थान CET स्नातक लेवल टेस्ट सीरीज़](/test-series/rajasthan-cet-graduation-2026)।
वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं बौद्धिक उपलब्धियां: "अर्थशास्त्र का नोबेल मेमोरियल पुरस्कार" (Sveriges Riksbank Prize) — संस्थागत अर्थशास्त्र, आर्थिक संवृद्धि में संस्थानों की भूमिका, प्रो. अमर्त्य सेन व अभिजीत बनर्जी
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
अक्टूबर 2026 के मध्य में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (स्टॉकहोम, स्वीडन) द्वारा अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित "स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार" (Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel) के विमर्शों और ऐतिहासिक योगदानों की वैश्विक समीक्षा की गई। संस्थागत अर्थशास्त्र (Institutional Economics), समावेशी संस्थाओं बनाम शोषक संस्थाओं (Inclusive vs. Extractive Institutions) और विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन की प्रयोगात्मक तकनीकों पर किए गए ऐतिहासिक अनुसंधानों ने भारत सहित विकासशील देशों की सार्वजनिक नीति निर्माण पर गहरा प्रभाव डाला है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की पृष्ठभूमि एवं विधिक स्वरूप (UPSC Core):
• औपचारिक नाम: 'अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार' (Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel)।
• स्थापना: यह मूल 1895 की अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत का हिस्सा नहीं था; इसे 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक 'स्वेरिगेस रिक्सबैंक' (विश्व का सबसे पुराना केंद्रीय बैंक - स्थापना 1668) द्वारा अपनी 300वीं वर्षगांठ पर स्थापित किया गया।
• प्रथम पुरस्कार: वर्ष 1969 में राग्नार फ्रिश (Ragnar Frisch, नॉर्वे) और जान टिनबर्गेन (Jan Tinbergen, नीदरलैंड) को आर्थिक प्रक्रियाओं के विश्लेषण हेतु गतिशील मॉडल विकसित करने के लिए दिया गया।
• चयन संस्था: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, स्टॉकहोम (Royal Swedish Academy of Sciences)।
✓संस्थागत अर्थशास्त्र एवं विकास के प्रमुख सिद्धांत (Exam High-Yield):
• समावेशी संस्थान (Inclusive Institutions): कानून का शासन, संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा, स्वतंत्र न्यायपालिका और नागरिकों को नवाचार व निवेश के समान अवसर प्रदान करने वाली संस्थाएं जो सतत आर्थिक समृद्धि लाती हैं।
• शोषक संस्थान (Extractive Institutions): सत्ता और संसाधनों को मुट्ठी भर अभिजात वर्ग (Elites) के हाथों में केंद्रित करने वाली संस्थाएं जो नवाचार को दबाती हैं और दीर्घकालिक दरिद्रता का कारण बनती हैं।
• ऐतिहासिक संदर्भ: दारोन ऐसेमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स रॉबिन्सन की विख्यात पुस्तक 'व्हाई नेशंस फेल' (Why Nations Fail) ने उपनिवेशवाद के संस्थागत प्रभावों को उजागर किया।
✓भारत से जुड़े अर्थशास्त्री एवं ऐतिहासिक नोबेल सम्मान:
• प्रो. अमर्त्य सेन (Amartya Sen): 1998 में कल्याणकारी अर्थशास्त्र (Welfare Economics) और सामाजिक विकल्प सिद्धांत (Social Choice Theory) हेतु नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम एशियाई अर्थशास्त्री; इन्होंने 1990 में महबूब उल हक के साथ संयुक्त राष्ट्र का 'मानव विकास सूचकांक' (HDI) विकसित किया था; 1999 में भारत रत्न से सम्मानित।
• प्रो. अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee): 2019 में अपनी पत्नी एस्थर डुफ्लो (Esther Duflo) और माइकल क्रेमर (Michael Kremer) के साथ 'वैश्विक गरीबी उन्मूलन हेतु प्रयोगात्मक दृष्टिकोण' (Randomized Controlled Trials - RCTs) के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [भारतीय अर्थव्यवस्था एवं राजव्यवस्था नोट्स](/notes/indian-economy-polity-governance) एवं [UPSC CSE 2027 प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज़](/test-series/upsc-cse-2027-prelims-free)।
राजस्थान ऊर्जा, पर्यावरण एवं हरित क्रांति: राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य — 24+ GW सौर ऊर्जा के साथ देश में शीर्ष, PM-KUSUM घटक-ए में प्रथम, भड़ला सोलर पार्क (2,245 MW) व ग्रीन कॉरिडोर
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) द्वारा जारी नवीनतम ऊर्जा उत्पादन आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान 24,000 मेगावाट (24 GW) से अधिक स्थापित ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा क्षमता के साथ पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर अपनी बढ़त बनाए हुए है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की 'पीएम-कुसुम योजना' (PM-KUSUM) के घटक-ए (विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र) के तहत देश में सर्वाधिक किसानों को ऊर्जा उत्पादक ('ऊर्जादाता') बनाने में राजस्थान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। साथ ही पश्चिमी राजस्थान से 20 GW हरित विद्युत के राष्ट्रीय ग्रिड में पारेषण हेतु 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-II' (GEC-II) के सब-स्टेशनों का निर्माण कार्य तेज किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान का सौर व नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य (RPSC Exam Favorite):
• कुल स्थापित सौर क्षमता: 24,000+ मेगावाट (भारत में प्रथम स्थान; गुजरात दूसरे स्थान पर)।
• कुल नवीकरणीय ऊर्जा (पवन + सौर + बायोमास): 30,000+ मेगावाट पार।
• सौर ऊर्जा नीति 2019 एवं आगामी लक्ष्य: वर्ष 2030 तक 90 GW सौर ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।
• अनुकूल भौगोलिक कारक: राजस्थान में प्रतिवर्ष 325 से अधिक धूप वाले दिन (Sunny Days), थार मरुस्थल में उच्च सौर विकिरण (6-7 kWh/वर्ग मीटर/दिन) और विपुल बंजर भूमि की उपलब्धता।
✓PM-KUSUM योजना (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan):
• शुभारंभ: मार्च 2019 (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय - MNRE द्वारा); उद्देश्य: किसानों को ऊर्जा सुरक्षा और अतिरिक्त आय प्रदान करना।
• तीन प्रमुख घटक (Three Components):
- घटक-ए (Component-A): बंजर/कृषि भूमि पर 500 किलोवाट (0.5 MW) से 2 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना।
* उपलब्धि: राजस्थान पूरे देश में घटक-ए की स्थापना में प्रथम स्थान पर है।
* ऐतिहासिक तथ्य: देश का पहला PM-KUSUM घटक-ए सौर ऊर्जा संयंत्र भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़) में स्थापित किया गया था (क्षमता: 1 MW)।
- घटक-बी (Component-B): ग्रिड-विहीन क्षेत्रों में किसानों को स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप स्थापित करने हेतु 60% तक सरकारी अनुदान।
- घटक-सी (Component-C): मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सोलराइजेशन करना (फीडर लेवल सोलराइजेशन)।
✓राजस्थान के प्रमुख सौर एवं अल्ट्रा-मेगा सोलर पार्क:
• भड़ला सोलर पार्क (Bhadla Solar Park, फलोदी/जोधपुर ग्रामीण): 2,245 मेगावाट क्षमता; 4 चरणों में विकसित; विश्व के सबसे बड़े एकल-स्थान सौर पार्कों में शुमार।
• फतेहगढ़ सोलर पार्क (जैसलमेर): 1,500 मेगावाट।
• नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): 925 मेगावाट (एनटीपीसी रिन्यूएबल्स द्वारा विकसित)।
• पूगल सोलर पार्क (बीकानेर): 1,450 मेगावाट (RRECL व कोल इंडिया लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम द्वारा)।
• ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor - GEC): पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर से उत्पादित सौर व पवन ऊर्जा को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाने वाली समर्पित अंतर-राज्यीय पारेषण लाइनें।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [राजस्थान ऊर्जा संसाधन एवं भूगोल नोट्स](/notes/rajasthan-geography-energy-resources) एवं [राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़](/test-series/rajasthan-patwari-2026)।
राजस्थान कला, संस्कृति, स्थापत्य एवं यूनेस्को धरोहर: राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्ग (UNESCO World Heritage) — कुंभलगढ़ की 36 किमी दीवार, चित्तौड़गढ़ विजय स्तंभ, जल दुर्ग गागरौन व आगामी मारवाड़ महोत्सव 2026
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को राजस्थान पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग द्वारा यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल राजस्थान के 6 ऐतिहासिक पहाड़ी दुर्गों (Hill Forts of Rajasthan) के संरक्षण और संवर्द्धन हेतु ₹120 करोड़ की 'विरासत संरक्षण परियोजना 2026' की घोषणा की गई। इसके तहत चित्तौड़गढ़ दुर्ग के विजय स्तंभ, कुंभलगढ़ दुर्ग की 36 किमी लंबी सुरक्षा दीवार और गागरौन जल दुर्ग के परकोटों के वैज्ञानिक संरक्षण (Chemical Treatment & Stone Restoration) का निर्णय लिया गया। साथ ही आगामी शरद ऋतु के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों 'मारवाड़ महोत्सव' (जोधपुर) और 'पुष्कर अंतरराष्ट्रीय पशु मेला 2026' (अजमेर) की तैयारियों का जायजा लिया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्ग — यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Sites 2013):
• ऐतिहासिक घोषणा: 21 जून 2013 को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में 37वें यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के सत्र में राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्गों को एक साथ विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया।
• लोकप्रिय याद रखने की ट्रिक: "चीकू गाजर आम" (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, गागरौन, जैसलमेर, रणथंभौर, आमेर)।
1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittorgarh Fort):
- गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर मेसा के पठार पर स्थित; राजस्थान का गौरव, 'दुर्गों का सिरमौर'।
- प्रमुख स्मारक: विजय स्तंभ (9 मंजिला, 122 फीट ऊंचा, महाराणा कुंभा द्वारा मालवा विजय के उपलक्ष्य में निर्मित, शिल्पी जेता, नापा, पोमा, पूंजा), कीर्ति स्तंभ, पद्मिनी महल, कुंभश्याम मंदिर।
- तीन प्रसिद्ध साके: 1303 (रानी पद्मिनी - अलाउद्दीन खिलजी), 1534 (रानी कर्मावती - बहादुर शाह), 1567-68 (जयमल-पत्ता - अकबर)।
2. कुंभलगढ़ दुर्ग (Kumbhalgarh Fort, राजसमंद):
- जरगा पहाड़ी पर महाराणा कुंभा द्वारा अपनी पत्नी कुंभलदेवी की स्मृति में शिल्पी मंडन के निर्देशन में निर्मित।
- 36 किलोमीटर लंबी विशाल सुरक्षा दीवार (चीन की महान दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार, जिस पर 4 घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं)।
- कटारगढ़ दुर्ग (अंतःदुर्ग): 'मेवाड़ की आंख' कहलाता है; महाराणा प्रताप की जन्मस्थली (बादल महल - 9 मई 1540)।
3. गागरौन दुर्ग (Gagron Fort, झालावाड़):
- आहु और कालीसिंध नदियों के संगम पर स्थित; बिना किसी नींव के सीधी चट्टान पर खड़ा राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ 'जल दुर्ग' (औदक दुर्ग)।
- अचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण द्वारा रचित) में 1423 के साके का वर्णन; सूफी संत हमीदुद्दीन (मीठे शाह) की दरगाह स्थित।
4. जैसलमेर दुर्ग (Sonar Qila):
- त्रिकूट पहाड़ी पर पीले बलुआ पत्थरों से बिना चूने के केवल पत्थरों की जोड़ाई से निर्मित; ढाई साके के लिए प्रसिद्ध।
5. आमेर दुर्ग (Amer Fort, जयपुर):
- मानसिंह प्रथम द्वारा निर्मित; मावठा झील के तट पर; शीश महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास व शिला देवी मंदिर स्थित।
6. रणथंभौर दुर्ग (Ranthambore Fort, सवाई माधोपुर):
- सात पहाड़ियों से घिरा 'बख्तरबंद दुर्ग' (अबुल फजल के अनुसार); त्रिनेत्र गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर व हम्मीर महल स्थित।
✓राजस्थान के अन्य यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (RPSC High-Yield Chronology):
• केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर): 1985 (प्राकृतिक विश्व धरोहर; साइबेरियन क्रेन हेतु प्रसिद्ध)।
• जंतर मंतर (जयपुर): 2010 (सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित खगोलीय वेधशाला; सम्राट यंत्र विश्व की सबसे बड़ी धूपघड़ी)।
• कालबेलिया लोकनृत्य: 2010 (यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत - Intangible Cultural Heritage)।
• जयपुर परकोटा शहर (Walled City of Jaipur): 2019 (यूनेस्को सांस्कृतिक विश्व धरोहर)।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [राजस्थान इतिहास, कला एवं संस्कृति विस्तृत नोट्स](/notes/rajasthan-history-art-culture-forts) एवं [राजस्थान CET 12th लेवल टेस्ट सीरीज़](/test-series/rajasthan-cet-12th-level-2026)।
रक्षा, सामरिक सुरक्षा एवं सैन्य प्रौद्योगिकी: भारतीय सशस्त्र बलों का त्रि-सेवा थिएटर कमान (Theatre Commands) रोडमैप — महाजन व पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज रणनीतिक अभ्यास व स्वदेशी पिनाका रॉकेट
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्रालय और एकीकृत रक्षा स्टाफ (Integrated Defence Staff - IDS) द्वारा भारत की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) को एकीकृत परिचालन संरचना में ढालने वाले "थिएटर कमान सुधार 2026" (Theaterisation of Armed Forces) के संगठनात्मक मसौदे की समीक्षा संपन्न हुई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के नेतृत्व में पश्चिमी सीमाओं की रक्षा हेतु जयपुर स्थित दक्षिण-पश्चिमी कमान को पश्चिमी/रेगिस्तानी थिएटर कमान के प्रमुख समन्वय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (बीकानेर) और पोकरण रेंज (जैसलमेर) में स्वदेशी 'पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम' और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का सफल संयुक्त युद्धाभ्यास आयोजित हुआ।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓त्रि-सेवा थिएटर कमान पुनर्गठन (Joint Theatre Commands - UPSC/RAS Core):
• थिएटर कमान की अवधारणा: एक विशिष्ट भौगोलिक युद्ध क्षेत्र (Theater) में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी संसाधनों को एक ही त्रि-सेवा कमांडर (Theater Commander) के अधीन लाना।
• वर्तमान ढांचा: वर्तमान में भारत में 17 एकल-सेवा कमान हैं (थल सेना की 7, वायु सेना की 7, नौसेना की 3) तथा 2 मौजूदा त्रि-सेवा कमान हैं:
1. अंडमान और निकोबार कमान (ANC - वर्ष 2001 में स्थापित प्रथम भौगोलिक त्रि-सेवा कमान)।
2. सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command - SFC, वर्ष 2003 में स्थापित - भारत के परमाणु शस्त्रागार का प्रबंधन)।
• प्रस्तावित 3 संयुक्त थिएटर कमान:
1. पश्चिमी/रेगिस्तानी थिएटर कमान (जयपुर): पाकिस्तान सीमा व पश्चिमी मरुस्थलीय मोर्चे की निगरानी।
2. उत्तरी थिएटर कमान (लखनऊ): वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) व चीन सीमा की निगरानी।
3. समुद्री थिएटर कमान (कारवार/कोच्चि): संपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) व तटीय सुरक्षा की जिम्मेदारी।
✓राजस्थान का सामरिक महत्व एवं प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान (Exam Favorite Facts):
• महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (Mahajan Field Firing Range, बीकानेर):
- क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत व एशिया की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज; यहाँ मित्र देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन) के साथ नियमित रूप से 'युद्धाभ्यास', 'इंद्र', 'शक्ति' जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित होते हैं।
• पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज (जैसलमेर):
- ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण स्थल: पोकरण-I (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा - 18 मई 1974, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) व पोकरण-II (ऑपरेशन शक्ति - 11 एवं 13 मई 1998, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी)।
• स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म (Indigenous Platforms):
- पिनाका MBRLS: DRDO द्वारा विकसित मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर; 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागने में सक्षम (मारक दूरी: 40 से 75 किमी तक विस्तारित)।
- हेलीना (Helina) व ध्रुवास्त्र: स्वदेशी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM)।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [भारत की रक्षा प्रणाली, मिसाइल एवं आंतरिक सुरक्षा नोट्स](/notes/defence-security-systems-drdo) एवं [राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2026 टेस्ट सीरीज़](/test-series/rajasthan-police-constable-2026)।
खेल जगत, राष्ट्रीय आयोजन एवं युवा कल्याण: 38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (उत्तराखंड) की तैयारियां — राष्ट्रीय खेल इतिहास (1924 लाहौर), भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) व राजस्थान खेल पुरस्कार एवं पदक विजेता
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को भारतीय ओलंपिक संघ (Indian Olympic Association - IOA) द्वारा आगामी 38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (38th National Games - उत्तराखंड) के आयोजन स्थलों (देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश व हल्द्वानी) और 38 खेल स्पर्धाओं की अंतिम तालिका की घोषणा की गई। इसके साथ ही राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद (RSSC, सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर) द्वारा राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान दल के चयन हेतु राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविरों की शुरुआत की गई। राज्य खेल विभाग द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले राजस्थान के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को 'आउट ऑफ टर्न' राजकीय सेवा नियुक्ति और नकद पुरस्कार नीति 2026 के तहत स्वीकृति पत्र सौंपे गए।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राष्ट्रीय खेलों का ऐतिहासिक विकास एवं संस्थागत ढांचा (RPSC/CET Core):
• प्रथम आयोजन: वर्ष 1924 में लाहौर (अविभाजित भारत) में 'अखिल भारतीय ओलंपिक खेल' (All India Olympic Games) के नाम से पहली बार आयोजित किए गए।
• नाम परिवर्तन: वर्ष 1940 में बॉम्बे (मुंबई) के 9वें संस्करण के दौरान इसका नाम बदलकर औपचारिक रूप से 'राष्ट्रीय खेल' (National Games) किया गया।
• स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रीय खेल: वर्ष 1948 में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में आयोजित हुए।
• भारतीय ओलंपिक संघ (IOA):
- स्थापना: वर्ष 1927 में।
- प्रथम अध्यक्ष: सर दोराबजी टाटा (Sir Dorabji Tata); प्रथम मानद सचिव: डॉ. ए.जी. नोहरन।
- मुख्यालय: ओलंपिक भवन, नई दिल्ली।
✓राजस्थान के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता एवं प्रेरणास्रोत एथलीट:
• दिव्यकृति सिंह (नागौर / जयपुर):
- घुड़सवारी (Equestrian - Dressage); 19वें हांगझू एशियाई खेलों (2023) में घुड़सवारी में 41 वर्षों बाद भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम की सदस्य।
- जनवरी 2024 में घुड़सवारी विधा में अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) पाने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बनीं।
• अवनी लेखरा (जयपुर):
- पैरा-निशानेबाजी (Shooting - SH1 श्रेणी); टोक्यो पैरालंपिक 2020 और पेरिस पैरालंपिक 2024 दोनों में 10 मीटर एयर राइफल में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारत की पहली महिला एथलीट; खेल रत्न व पद्मश्री से सम्मानित।
• कृष्णा नागर (जयपुर):
- टोक्यो पैरालंपिक 2020 में पैरा-बैडमिंटन (SH6 श्रेणी) में स्वर्ण पदक विजेता; मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित।
• रवि बिश्नोई (जोधपुर):
- भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के युवा लेग-स्पिनर गेंदबाज।
• भावना जाट (राजसमंद) व सोनल सुखवाल:
- 20 किमी पैदल चाल (Race Walking) की अंतरराष्ट्रीय एथलीट।
✓राजस्थान खेल प्रोत्साहन नीति के प्रमुख वित्तीय प्रावधान (High-Yield RPSC GK):
• ओलंपिक खेल पदक विजेता:
- स्वर्ण पदक: ₹3 करोड़ | रजत पदक: ₹2 करोड़ | कांस्य पदक: ₹1 करोड़।
• एशियाई खेल एवं राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता:
- स्वर्ण पदक: ₹1 करोड़ | रजत पदक: ₹60 लाख | कांस्य पदक: ₹30 लाख।
• राज्य खेल पुरस्कार (पुरस्कार राशि बढ़ाकर ₹5-5 लाख की गई):
1. महाराणा प्रताप पुरस्कार: राजस्थान के उत्कृष्ट पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च राज्य खेल पुरस्कार।
2. गुरु वशिष्ठ पुरस्कार: उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षकों (Coaches) को प्रदान किया जाने वाला राज्य का सर्वोच्च खेल पुरस्कार।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: [राजस्थान खेल परिदृश्य व प्रमुख पुरस्कार नोट्स](/notes/rajasthan-current-affairs-sports-awards) एवं [राजस्थान REET एवं पुलिस भर्ती 2026 मॉक टेस्ट](/test-series/rajasthan-police-constable-2026)।